
अपनी नयी किताब पर जरनैल सिंह का कहना है कि दरअसल अन्याय पर ये उसका दूसरा जूता है. यह बात उसने एक मीडिया इंटरवीयू में कही है. उसने यह भी बताया कि कैसे इस किताब को लिखने के लिए उसे सखत मेहनत और खोज करनी पड़ी. हालांकि उसने माना कि इसमें उसका अपना 11 बरसों का कटु अनुभव भी शामिल है पर फिर भी यह एक हकीक़त है इतने बरसों के बाद घटनायों के पीड़ितों को खोज निकालना कोई आसान नहीं था. वो भी वहां जहाँ घटना के वक्त ही इतने बड़े सामूहिक हत्याकांड को सरकारी मीडिया ने पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया था. इस किताब को लिखने की पूरी कहानी आप अंग्रेजी में भी पढ़ सकते हैं बस नीचे दिए गए लिंक को दबा कर जहाँ आपको जरनैल सिंह की किताब और उसके बारे में कई और लोगों के विचार भी मिलेंगे. इसके साथ ही और भी बहुत कुछ.देख और सुन सकते हैं आप दूसरे लिंक पर क्लिक कर के यह कहानी है कुछ उन लोगों की जिन्हों ने इस देश का इतिहास भी कलंकित कर दिया. पर कमज़ोर दिल के लोग इसे न देखें तो अच्छा होगा.
यह अन्याय पर मेरा दूसरा जूता है-जरनैल सिंह
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