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Saturday, June 03, 2023

रॉ के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने किए सनसनीखेज़ खुलासे

अतीत की गलतियों पर कुकी गिल ने भी कहीं खरी खरी बातें


चंडीगढ़: 3 जून 2023: (कार्तिका सिंह//रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन टीम)::

केन्द्रीय श्री गुरु सिंह सभा द्वारा 'साका जून 1984 की राजनीतिक पृष्ठभूमि' विषय पर आयोजित स्मृति समारोह में प्रो. शाम सिंह (अध्यक्ष) ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात में सिख पंथ को संवाद बनाने की जरूरत है और फेडरल ढांचे को मजबूत करने के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष पर भरोसा करना चाहिए।

यहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन में आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए, जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह ने कहा कि पंजाब के लोगों, विशेष रूप से सिखों को, गुरुओं द्वारा दिखाए गए "किछ सुनिए, किच्छ कहिए" के संकल्प पर पहरा देना चाहिए। सभी जम्हूरियत पसंद लोगों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1978 के निरंकारी कांड के बाद शुरू हुई पंजाब की समस्या ने जिस तरह से हिंसक रूप धारण किया और राज्य के दमन ने राज्य के नौजवानों को तबाह कर दिया, उससे आज भी सबक लेने की जरूरत है।

सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (रॉ) के पूर्व अधिकारी जीबीएस सिद्धू ने अपने विचार साझा करते हुए, कहा कि जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार भारत सरकार की सोची समझी साजिश थी, जिसके लिए पृष्टभूमि पहले से ही तैयार कर ली गई थी। सिद्धू ने अपनी किताब 'द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' का हवाला देते हुए कहा कि अमृतसर में हुई हर कार्रवाई की योजना दिल्ली में बनाई गई थी, भले ही कार्रवाई किसी पार्टी की ओर से हुई हो।

जाने-माने अधिवक्ता व मानवाधिकार अधिवक्ता राजविंदर सिंह बैंस ने कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने 1985 के चुनाव में 1984 की घटनाओं के जरिए सिखों को निशाना बनाकर भारी बहुमत हासिल किया था, उसी तरह वर्तमान सरकार अब मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के अल्पसंख्यकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

प्रख्यात विश्लेषक और टिप्पणीकार मलविंदर सिंह माली ने कहा कि पंजाब की समस्या वास्तव में 1849 से शुरू होती है जब ब्रिटिश शासकों ने पंजाब देश को भारत में शामिल कर लिया था। उन्होंने कहा कि सिखों और पंजाबियों की समस्या का समाधान गुरु नानक साहिब और गुरबाणी की आशा के अनुरूप ही हो सकता है, जिसमें संवाद बहुत जरूरी है।

रणजीत सिंह कूकी गिल ने कहा कि सिख बुद्धिजीवियों को साका जून 1984 और दिल्ली में हुए सिख नरसंहार के बारे में सही शब्दावली का चयन करना चाहिए, ताकि आम लोगों के सामने सही परिप्रेक्ष्य पेश किया जा सके।

राजविंदर सिंह राही ने साका जून 1984 के दौरान फ़ौजी हमले में खत्म हुई सिख रेफरेंस लाइब्रेरी पर अपने शोध का जिक्र करते हुए कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, लाइब्रेरी की सामग्री और पवित्र ग्रंथों के गायब होने के लिए जिम्मेदार है।

अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते डाक्टर प्यारे लाल गर्ग भी इस मौके पर हर वक्ता को ध्यान से सुनते रहे। उन्होंने इस पुस्तक "द खालिस्तान कॉन्सपिरेसी' के लेखक पर भी सवाल किया कि वह इस सारे घटनाक्रम के एक विशेष पहलू पर चुप क्यूं रहा? इस खामोशी के पीछे क्या राज़ है? गौरतलब है कि इस पुस्तक के लेखक जी बी एस सिद्धू केंद्रीय खुफिया एजेंसी रॉ के उच्च अधिकारी रहे हैं। उनकी बातों में भी दम लगता है। जहां तक कुछ मुद्दों पर खामोशी की बात है तो उनकी bho कई मजबूरियां रही हो सकती हैं।

डॉ खुशहाल सिंह ने मंच संचालन की कमान संभाली। ज्ञानी केवल सिंह जी, ने पधारे लोगों का धन्यवाद किया। इस मौके पर कौमी सिंह सभा पत्रिका का नया संस्करण (जून-84 सिख रेफरेंस लाइब्रेरी कहां चला गया?) और जीबीएस सिद्धू की किताब "दा खालिस्तान कांस्पिरेसी' का प्रकाशन व्हाइट क्रो पब्लिशर्स ने किया।

इस कार्यक्रम में गुरप्रीत सिंह (ग्लोबल सिख काउंसिल), गुरबीर सिंह मचाकी, डॉ. प्यारा लाल गर्ग, हमीर सिंह, अशोक सिंह बागड़ी, प्रो. मनजीत सिंह, हरजोत सिंह, नारायण सिंह चौडा, महेंद्र सिंह मोरिंडा, सुरिंदर सिंह किशनपुरा, हरदीप सिंह दिबिबा, डॉ. भगवान सिंह और सभी विद्वानों ने अपने विचार रखे।

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Wednesday, June 06, 2018

अगस्त में शहीदों की यादगार शुरू करेंगे : वरुण मेहता

Wed, Jun 6, 2018 at 4:29 PM
श्री हिन्दू तख्त व शिवराज सेना ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की
लुधियाना: 6 जून 2018:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

श्री हिन्दू तख्त व शिवराज सेना द्वारा सँयुक्त तौर पर आप्रेशन ब्लू स्टार के दौरान आंतकियो से मुकाबला करते हुए शहीद हुए आर्मी व पुलिस फोर्स के शहीदों को तख्त के प्रमुख प्रदेश प्रचारक वरुण मेहता व रमेश भगत के नेतृत्व में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्होंने कहा की अगस्त महीने में शहीदों की याद शुरू करेंगे। 
भारी संख्या में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए वरुण मेहता ने कहा कि विदेशी ताकतों के इशारे पर आंतकी संगठनों ने जरनैल भिंडरावाला के नेतृत्व में पंजाब को अमृतसर की पावन नगरी सहित भारत से तोड़ने की साज़िश रची थी लेकिन भारतीय सेना व पंजाब पुलिस ने तत्कालीन सेना प्रमुख अमर शहीद जनरल अरुण श्रीधर वैद्य जी के नेतृत्व में मोर्चेबन्दी कर आंतकियो को मार गिराया व पावन धार्मिक स्थानों को उनके कब्जे से मुक्त करवाया व हज़ारो श्रदालुयो को भी उनकी गिरफ्त से बचाया व इस दौरान आंतकियो से मुठभेड़ के दौरान हमारे बहादुर जवानों की शहादत हुई आज हम इस आप्रेशन के दौरान शहीद होने वाले शहीदों को शत शत नमन कर रहे है ।
मेहता ने कहा कि अगर आर्मी इस आप्रेशन को न सफल करती तो जिस प्रकार हमे ननकाना साहिब व कटासराज जाने के लिए वीजा लेना पड़ता है उसी तरह अमृतसर जाने के लिए भी वीज़ा लेना पड़ता। उंन्होने कहा कि पंजाब सहित समस्त देशवासी तत्कालीन प्रधानमंत्री शहीद इंदिरा गांधी जी व जनरल वैद्य सहितं अन्य प्रमुख अधिकारियों को नमन करते है जिन्होंने देश हित मे अपनी जान की परवाह न करते हुए पंजाब को बचाने के लिए कठोर निर्णय लिया। इस आप्रेशन के परिणाम में अंतकियो ने इंदिरा गांधी व जनरल वैद्य को शहीद कर दिया। हम प्रण करते है कि उनकी शहादत को व्यर्थ नही जाने देंगे व युवा वर्ग को उनके इतिहास से अवगत करवायेगे । 
शिवराज सेना प्रमुख रमेश भगत ने कहा कि आंतकवाद के काले दौर में पंजाब के हज़ारों बेगुनाहों को शहादत देनी पड़ी व प्रदेश विकास की पटरी से भी पिछड़ गया था । इस अवसर पर तख्त के प्रमुख प्रचारको राजू डेनियल , जिला प्रचारक शिवम वर्मा , सेना नेता रवि भगत , पवन कंग , सौरव वर्मा , अश्वनी काका , राकेश , लोकेश सैनी , धरिन्दर शर्मा , संग्राम राणा , जगदीश तांगड़ी , कर्ण , किरण, राजू थापर, विक्रम, शिवम, मन्नू, कृष्णलाल भाटिया, अनील कुमार, नीरज, निन्दर, संतोक वर्मा, राकेश  कपूर, वरुण गांधी,   राजन शर्मा, मोहित, मणि व अन्य भी उपस्थित थे। 

Wednesday, January 15, 2014

आपरेशन ब्लू स्टार और ब्रिटिश सरकार

Update:15 Jan 2014 at 6:15 AM 
भारत सरकार की मदद करने के दस्तावेज हुए जग जाहिर
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
जून 1984 में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब पर किए गए आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान इंग्लैंड की तत्कालीन सरकार की ओर से भारत सरकार की मदद किए जाने संबंधी दस्तावेज के जगजाहिर होने के बाद यह मामला फिर से तूल पकड़ गया है। आज दल खालसा की ओर से इंग्लैंड के मौजूदा प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को पत्र लिख कर मांग की गई है कि वह इस मामले में इंग्लैंड की स्थिति को स्पष्ट करें और यह भी बताएं कि इंग्लैंड की तत्कालीन सरकार ने किस हद तक भारत सरकार की मदद की थी। इस संबंध में दल खालसा के प्रवक्ता  कंवरपाल सिंह ने बताया कि उक्त दस्तावेज दल खालसा को इंग्लैंड की लाइब्रेरी में से हासिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज के मिलने के बाद पूरी सिख कौम एक दम से स्तब्ध रह गई है। क्योंकि अब तक यही समझा जा रहा था कि उस समय सिर्फ रूस की तत्कालीन सरकार ने ही भारत की मदद की थी।
पंजाबी दैनिक अजीत में प्रकाशित पूरा पृष्ठ 

Sunday, August 18, 2013

ब्लू-स्टार आपरेशन: तीन दशकों के बाद भी सरकार नहीं बताना चाहती सच

कम से कम पंजाब के 37 गुरुधामों पर एक साथ हुआ था एक्शन 
अमृतसर में स्थित सिख धर्म के केन्द्रिय धर्म स्थल श्री हरिमंदिर साहिब और अकाल तख्त पर की गई नीला तार कारवाई के तथ्य सरकार अभी भी सार्वजनिक नहीं करना चाहती। इस साडी हकीकत को सबके सामने लाने के लिए लखनऊ के संजय शर्मा लगातार प्रयासशील हैं।  हर विभाग उन्हें देर सवेर यह सच बताने से जवाब दे रहा है। गौरतलब है की इस कारवाई को जायज़ ठहरने के लिए अक्सर कहा जाता है की यह एक्शन सिख जगत या श्री हरिमन्दिर साहिब के खिलाफ नहीं बल्कि संत जरनैल सिंह ---के खिलाफ की गई थी पर इस बात का जवाब कभी नहीं दिया गया कि संत जरनैल सिंह और उनके थोड़े से समर्थक तो केवल अकाल तख्त साहिब पर थे फिर कारवाई पंजाब के 37 जाने माने गुरुद्वारों पर क्यूं की गई? इस आपरेशन के लिए पांचवें सिख गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी पर्व का दिन ही क्यूं चुन गया? आत्म समर्पण करने वाली सिख संगत को हाथ बाँध कर गोली से क्यूं उदा दिया गया? बंदी बनाये गए आम सिख श्र्द्धालूयों को कड़कती धुप के उस गर्म मौसम में पानी की एक बूँद तक भी क्यूं नहीं  दी गयी? दरबार साहिब के पावन सरोवर में जहर मिलाने के आरोप कहाँ तक सही हैं? अभी हाल ही में फिर से उठी इस मामले में के जी बी के दखल की बात कहाँ तक सही है?  इस मुद्दे पर डाक्टर सुब्रामनियम स्वामी की और से सामने लाये गए तथ्यों पर सरकार क्या कहना चाहती है ? ऐसे कई मुद्दे हैं जो सवाल खड़े कर रहे हैं--- इसलिए संजय शर्मा की बात को गंभीरता से लेते हुए सारा सत्य सामने लाना चाहिए--- संजय भाई ने कुछ विवरण बारी बारी से अपने ब्लॉग पर पोस्ट किये हैं।  उनकी नई पोस्ट का शीर्षक है "ऑपरेशन ब्लू-स्टार की सूचना सार्वजनिक करना राष्ट्रीय हित में नहीं"
तस्वीर पल पल इंडिया से साभार 
लखनऊ 16 अगस्त:न्यूज़ आज: रक्षा मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' से संबंधित जानकारी देने से यह कहते हुए मना किया है कि सूचना सार्वजनिक होने से राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंच सकता है। लखनऊ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की 'मानवाधिकार उल्लंघन' के संदर्भ में समीक्षा करने के उद्देश्य से बीते 23 फरवरी 2013 को भारत सरकार के गृह विभाग से सूचना के अधिकार के तहत पत्रावली के अभिलेखों की नोट शीट्स की सत्यापित प्रतियां मांगी थी। कोई सूचना न मिलने पर संजय ने 13 मई 2013 को भारत सरकार के गृह विभाग में अपील की। भारत सरकार के गृह विभाग के संयुक्त सचिव तथा अपीलीय अधिकारी भगवान शंकर ने 27 जून 2013 को संजय के सूचना अधिकार आवेदन को रक्षा मंत्रालय को भेज दिया। रक्षा मंत्रालय के अनु सचिव आर. के. झा ने 31 जुलाई 2013 को पत्र के माध्यम से बताया कि भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का मानना है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार की सूचना प्राप्ति के अधिकार कानून के प्रावधान के तहत प्रकट करने से छूट प्राप्त है और इस सूचना का सार्वजनिक होना राष्ट्रीय हितों के लिए हानिकारक है। संजय के अनुसार सभी लोक प्राधिकारी अपने 'प्रशासनिक या न्यायिककल्प निर्णयों' को देश की जनता को बताने के लिए बाध्य हैं। ऐसे में देश की जनता को स्वर्ण मंदिर परिसर में चलाये गए ऑपरेशन ब्लू स्टार को चलाने के फैसले के कारणों को जानने का भी पूरा हक है। संजय अब रक्षा मंत्रालय के इस निर्णय के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर करने जा रहे हैं।
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ऑपरेशन ब्लू-स्टार की सूचना सार्वजनिक करना राष्ट्रीय हित में नहीं

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ਬਲਿਊ ਸਟਾਰ ਆਪ੍ਰੇਸ਼ਨ ਦੀ ਸੱਚਾਈ ਲਭ ਰਹੇ ਸੰਜੇ ਸ਼ਰਮਾ