उप राष्ट्रपति सचिवालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 July 2026 at 6:58 PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति नेआरएसएस पर विशेष पुस्तक का विमोचन किया
RSS ने पिछली एक सदी में सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को मजबूत किया:उपराष्ट्रपति
संघ पवित्र गंगा की तरह है, जो दूसरों के कल्याण के लिए बहती है: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली: 17 जुलाई 2026: (PIB Delhi//साहित्य स्क्रीन )
*स्वयंसेवक से प्रधान सेवक तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन के केंद्र में 'सेवा' और 'राष्ट्र प्रथम' को रखा है: उपराष्ट्रपति
*संघ ने निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है: उपराष्ट्रपति
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में श्री श्याम जाजू और श्री अनुपम त्रिवेदी द्वारा लिखित पुस्तक “आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस”का विमोचन किया।
When the COVID-19 pandemic struck, India was not a nation seeking help... it was a nation extending help to the world. pic.twitter.com/RT7zRMQ4zb
इस यादगारी सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शताब्दी वर्षगांठ पर प्रकाशित पुस्तक के विमोचन समारोह में भाग लेना उनके लिए व्यक्तिगत सम्मान की बात है, जिसके साथ उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है। संघ पर लिखी एक तमिल कविता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कविता संगठन की तुलना पवित्र गंगा नदी से करती है, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों के कल्याण के लिए बहती है, और यह सेवा भावना का प्रतीक है जिसने संघ को उसकी शताब्दी यात्रा में मार्गदर्शन दिया है।
श्री राधाकृष्णन ने आरएसएस की भावना को बखूबी दर्शाने के लिए लेखकों की सराहना करते हुए कहा कि संघ की यात्रा भारत की सांस्कृतिक जड़ों, विरासत और परंपराओं को पुनर्जीवित करने, सुदृढ़ करने और पुनर्निर्माण करने की रही है। पुस्तक के शीर्षक: “आरएसएस @100: ए सेंचुरी ऑफ सर्विस, यूनिटी एंड सैक्रिफाइस” का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन आदर्शों ने स्वयंसेवकों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि सेवा समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण को दर्शाती है; एकता उन बंधनों को मजबूत करती है जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से परे हैं; और त्याग हमें याद दिलाता है कि स्थायी संस्थान समर्पण, दृढ़ता और निस्वार्थ प्रयासों से ही बनते हैं।
उपराष्ट्रपति ने आरएसएस द्वारा अपनी दैनिक शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास पर दिए जाने वाले जोर को भी रेखांकित किया। पुस्तक से उद्धृत करते हुए उन्होंने शाखा को "आत्मा की कार्यशाला" बताया, जहाँ युवाओं की कच्ची ऊर्जा को राष्ट्रीय चरित्र में ढाला जाता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वयंसेवक का सार प्रत्येक व्यक्ति को सौंपी गई जिम्मेदारी की गरिमा को समर्पण और उत्कृष्टता के साथ निभाकर उसे बढ़ाना है।
श्री सीपी राधाकृष्णन ने आगे कहा कि आरएसएस ने भारत की सभ्यतागत विरासत, विविध परंपराओं, भाषाओं और आध्यात्मिक विचारों में गौरव की भावना को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय चेतना को निरंतर प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा कि शताब्दी समारोह लाखों स्वयंसेवकों के समर्पण को स्वीकार करने का अवसर है, और यह भी कहा कि संस्थाएं तभी कायम रहती हैं जब उनमें दृढ़ विश्वास, प्रतिबद्धता और आम लोगों की अपने से बड़े उद्देश्यों के लिए काम करने की इच्छाशक्ति हो।
"एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री: मोदी युग" नामक अध्याय का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वयंसेवक से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने निरंतर सेवा और " राष्ट्र प्रथम" के सिद्धांत को शासन के केंद्र में रखा है, जो आरएसएस के निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण पर अटूट जोर को प्रतिबिंबित करता है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ हुई अपनी बातचीत को याद करते हुए श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि दोनों ने ही अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के रूप में की थी, जो जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति से प्रेरित आंदोलन से जुड़े थे। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए, जो एक छोटी धारा से शुरू होकर एक विशाल नदी बन जाती है, उन्होंने कहा कि आरएसएस भी एक छोटे से संगठन के रूप में शुरुआत करके दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन गया है।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, आरएसएस क्षेत्र संघचालक श्री पवन जिंदल, सह-लेखक श्री श्याम जाजू और श्री अनुपम त्रिवेदी तथा प्रभात प्रकाशन के प्रबंध निदेशक श्री प्रभात कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 5:48 PM by PIB Delhi
अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्द्र तथा अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्द्र का उद्घाटन किया
*प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने पीजीआईएमईआर में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला रखी
*बारह वर्ष पहले हमने संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कष्ट न उठाना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम : प्रधानमंत्री
*“देश भर में 2014 के बाद 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ किया गया”
*“देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में टीबी के मामलों में 21 प्रतिशत कमी आई”
*राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी : श्री जे. पी. नड्डा
*“आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्द्र बनकर उभरे और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं”
* “आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में तेज गति से उभर रहा है, जो डिजिटल नवाचार के जरिये स्वास्थ्य सेवाएं देने में परिवर्तन ला रहा है”
चंडीगढ़: 17 जुलाई 2026: (PIBDelhi//पंजाब स्क्रीन)::
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्द्र तथा अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंसेज़) केन्द्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला भी रखी। इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद श्री मनीष तिवारी भी उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीजीआईएमईआर में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन और नई परियोजनाओं की आधारशिला लाखों लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने वर्ष 2015 में पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में अपनी यात्रा को याद करते हुए पिछले एक दशक में संस्थान की क्षमता में हुए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पीजीआईएमईआर के प्रबंधन, विभाग के सदस्यों तथा युवा चिकित्सकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए बधाई दी।
स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के बीच घनिष्ठ संबंध पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वच्छता को जन अभियान बनाने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों शौचालयों के निर्माण, खुले में शौच से मुक्ति, देशव्यापी स्वच्छता अभियानों तथा स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयासों से जनस्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की रैंकिंग ने चंडीगढ़ सहित अनेक शहरों को अपने स्वच्छता मानकों में निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित किया है।
प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री इंदरजीत सिंह सिद्धू की ‘ब्रूम वॉरियर’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि स्वच्छता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार ने इस वर्ष उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।
जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “स्वच्छता एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।” उन्होंने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल के अंतर्गत आयोजित विशेष स्वच्छता अभियान की सराहना की तथा चंडीगढ़ के नागरिकों को उनके उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-अभियान बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक और परिवर्तनकारी बदलाव आए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया में उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत सहायता मांगने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों की सहायता करने वाला राष्ट्र बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि आज भारत चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) के प्रमुख वैश्विक केन्द्रों में से एक बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “बारह वर्ष पहले हमने यह संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम हैं।”
स्वास्थ्य अवसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “वर्ष 2014 के बाद देश में 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ बनाया गया है।” उन्होंने वर्ष 2022 में शुरू हुए चंडीगढ़ स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान आज हजारों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने को भी समान प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों सहित पूरे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाले 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं, जिनमें 12 प्रकार के स्वास्थ्य देखभल सेवा पैकेज शामिल हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से करोड़ों नागरिकों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच की जा चुकी है।
स्वास्थ्य सेवाओं में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श तक लोगों की पहुँच को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अब तक इस मंच के माध्यम से 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सलाह आसानी से उपलब्ध हो रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि देश में अब 90 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी संस्थागत स्तर पर हो रही हैं। साथ ही, मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है तथा शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के विशेष बल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग, एचपीवी टीकाकरण तथा यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी पहलें समय पर निवारक हस्तक्षेप सुनिश्चित कर करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही हैं।
क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को जनभागीदारी के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि जागरूकता बढ़े, समय पर जांच हो तथा मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में टीबी की घटनाओं में पिछले एक दशक में 21 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सबसे अधिक लाभ गरीबों, मध्यम वर्ग तथा महिलाओं को मिला है, जो अक्सर अपने परिवार की देखभाल में स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देती हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवा अब कोई विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि यह प्रत्येक सामान्य नागरिक का अधिकार बनती जा रही है।”
चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय सीमित मेडिकल कॉलेजों और सीटों के कारण अनेक प्रतिभाशाली युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाता था। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है तथा एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा की सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में एमबीबीएस कॉलेज की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और शीघ्र ही इसमें प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा तथा भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कार्यबल और अधिक सशक्त होंगे।
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक (पैलिएटिव) देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी है।”
उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्द्र बनकर उभरे हैं और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक समेकित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की है, जिससे प्रत्येक नागरिक को उपचार की निरंतर और समन्वित सुविधा सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि देशभर में 23 एम्स स्वीकृत किए जा चुके हैं और वे विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा शिक्षा तक लोगों की पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार हो रहा है।
चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए श्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो आज बढ़कर 818 हो गई है। इसी प्रकार स्नातक (एमबीबीएस) चिकित्सा सीटों की संख्या बढ़कर 1.38 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने 75,000 अतिरिक्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिनमें से 25,000 सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं।
श्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) तेज़ी से विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित हो रहा है, जो डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 90 करोड़ आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकार्डों को सुरक्षित तरीके से रख सकें।
राष्ट्र को समर्पित की जा रही नई स्वास्थ्य सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि 300 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्द्र भारत की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 से लगभग पाँच दशकों तक पीजीआईएमईआर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए केवल 25 बिस्तर उपलब्ध थे, जबकि यह नया केन्द्र संस्थान की स्वास्थ्य सेवा क्षमता में परिवर्तनकारी वृद्धि करेगा। लगभग 440 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह केन्द्र न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी तथा न्यूरो-क्रिटिकल केयर की समग्र सेवाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा, जिससे तंत्रिका संबंधी अत्याधुनिक उपचार तक लोगों की पहुँच और अधिक सुलभ होगी। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्द्र देश में महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध सबसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक है, जहाँ एक ही जगह व्यापक एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।
पृष्ठभूमि:
अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्द्र को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं तथा विशेष उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों को व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 300 बिस्तरों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह केन्द्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा तथा क्षेत्र के हजारों परिवारों को लाभान्वित करेगा।
अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्द्र में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर तथा अत्याधुनिक नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सुविधाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी। यह केन्द्र जटिल तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को समयबद्ध एवं विश्वस्तरीय उपचार सुनिश्चित करेगा, साथ ही तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को भी सशक्त बनाएगा।
पीजीआईएमईआर में स्थापित किया जाने वाला क्रिटिकल केयर ब्लॉक आपातकालीन तैयारी, गहन चिकित्सा (आईसीयू) सेवाओं तथा आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाएगा। साथ ही यह क्षेत्र की समग्र स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाएगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 at 4:51 PM by PIB Delhi
विकास के इस नए अध्याय के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
चंडीगढ़//नई दिल्लीः17 जुलाई 2026:(पंजाब स्क्रीन//PIB Delhi)::
पंजाब और चंडीगढ़ में आज चहल पहल थी। एक उत्सव सा माहौल था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब और चंडीगढ़ के लिए विकास की उपलब्धियों का एक नया इतिहास लिखने आ रहे थे। इनके आने से 17 जुलाई का दिन एक ऐतिहासिक दिन बन गया। इस सुअवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विस्तार से इस नई स्वर्णिम रेखा का विवरण भी बताया।
सर्वप्रथम उन्होंने वहां मौजूद विशेष अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा,
श्रीमान गुलाब चंद कटारिया जी, केंद्र में मेरे सहयोगी जे. पी. नड्डा जी, अश्विनी वैष्णव जी, संसद में मेरे साथी मनीष तिवारी जी, यहां सभागार में भी कई विधायक, मंत्री, सांसद बैठे हुए हैं। अन्य सभी महानुभाव भी, आज कईयों के दर्शन हो रहे, पुराने-पुराने लोगों के।
भाइयों-बहनों,
आज आप सबके बीच आकर मन में खुशी का एक भाव है, अलग ही भाव है।
साथियों,
चंडीगढ़ केवल एक शहर नहीं है, ये भारत के लिए development का एक मॉडल रहा है। चंडीगढ़ जाना जाता है, व्यवस्थित विकास के लिए, चंडीगढ़ की पहचान है, बेहतर लाइफस्टाइल के लिए, ease of living के लिए। चंडीगढ़ की पहचान है, चिकित्सा की बेहतर सुविधाओं के संबंध में और इस सबके साथ-साथ चंडीगढ़ की पहचान है, माँ चंडी का आशीर्वाद। और इसलिए, चंडीगढ़ का विकास हमेशा से NDA सरकार की प्राथमिकता रहा है। आपको ध्यान होगा, डेढ़ साल पहले देश ने न्याय व्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार किया है। हम दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता लेकर आए हैं। भारतीय न्याय संहिता यानी, दंड आधारित क़ानूनों की जगह न्याय आधारित कानूनी व्यवस्था। और तब भारतीय न्याय संहिता लागू करने की शुरुआत चंडीगढ़ से ही हुई थी।
साथियों,
बीते वर्षों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग और डिजिटल गवर्नेंस, चंडीगढ़ को हाइटेक बनाने के लिए ऐसे कितने ही प्रोजेक्ट्स पर काम हुआ है। ढाई हजार करोड़ से ज्यादा रुपए इस मिशन में खर्च हुये हैं। आज भी यहाँ हेल्थ, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास के कई काम शुरू हो रहे हैं। मैं इनके लिए सभी चंडीगढ़ वासियों को बधाई देता हूं।
साथियों,
यहाँ आने से पहले मैं हरियाणा के जींद में था और यहां से इसके बाद मुझे पंजाब के विकास कार्यों के लिए जालंधर जाना है। इन दोनों कार्यक्रमों के बीच आज ये चंडीगढ़ का कार्यक्रम हो रहा है। क्योंकि हमारा चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, इस पूरे क्षेत्र को जोड़ता है। चंडीगढ़ के विकास से चंडीगढ़ के लोगों का जीवन तो बदलता ही है, साथ ही हरियाणा, हिमाचल, पंजाब और जम्मू कश्मीर के लोगों को भी इससे बहुत लाभ होता है। चिकित्सा सेवाओं के लिए तो चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हब है।
साथियों,
जब मैं चंडीगढ़ रहता था, तो मुझे कई बार PGI जाना होता था और कारण क्या? तो कोई ना कोई हमारे साथी या उनका परिवार चाहे जम्मू कश्मीर का हो, पंजाब का हो, हिमाचल का हो, हरियाणा का हो, कोई ना कोई बीमार यहां आते थे, तो मेरा मिलने जाना बड़ा स्वाभाविक रहता था। और इसलिए मुझे पता है कि इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए ये आरोग्य की दृष्टि से एक बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
साथियों,
आज यहाँ चंडीगढ़ PGI में एडवांस्ड हेल्थकेयर फैसिलिटीज़ का विस्तार हो रहा है। यहाँ एडवांस न्यूरो-साइन्स सेंटर, एडवांस मदर एंड चाइल्ड सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक, ये प्रोजेक्ट्स लाखों लोगों को इलाज की और बेहतर सुविधा देंगे। मुझे याद है, 2015 में, मैं चंडीगढ़ PGI के दीक्षांत समारोह में आया था। और मुझे खुशी है कि आज मुझे वर्चुअली भी वहां के सब पुराने साथियों से मिलने का अवसर मिल रहा है। तब से अब तक इस दशक में PGI की क्षमताओं में बड़ा विस्तार हुआ है। मैं PGI चंडीगढ़ के मैनेजमेंट की, यहाँ के प्रोफेसर्स और युवा डॉक्टर्स की सराहना करता हूं, उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
साथियों,
जब हम स्वास्थ्य की बात करते हैं, तो हम सब जानते हैं कि इसमें स्वच्छता की कितनी बड़ी भूमिका है और इसलिए जब हमारी सरकार बनी थी, तब हमने देश के लिए ‘स्वच्छ भारत मिशन’ लॉन्च किया था। देश में करोड़ों शौचालय बनाए गए, भारत को खुले में शौच से मुक्त कराया गया, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के लिए अभियान चलाये गए, सफाई हमारी जीवनशैली का हिस्सा बने, इसके लिए अलग-अलग initiatives शुरू किए गए। हमारे शहरों की स्वच्छ भारत रैंकिंग इसी प्रयास का हिस्सा है और चंडीगढ़ इसमें बेहतर प्रदर्शन का प्रयास भी करता रहता है।
साथियों,
मैं आज चंडीगढ़ के रिटायर्ड IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की भी सराहना करना चाहूँगा। उनकी पहचान ‘ब्रूम वारीयर’ की बनी हुई है। उन्होंने चंडीगढ़ में स्वच्छता को लेकर एक नई अलख जगाई है, लोगों को प्रेरित किया है। इसके लिए हमारी सरकार ने उन्हें इस साल पद्म सम्मान से भी सम्मानित किया है।
साथियों,
स्वच्छता कोई एक दिन का काम नहीं है, स्वच्छता तो जीवन जीने का तरीका है। और मुझे खुशी है कि स्वच्छता को आज के इस कार्यक्रम से भी जोड़ा गया। आज यहां स्वच्छता से स्वागत, इस पहल के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में सारे लीडर लोग भी और जनता जनार्दन भी सफाई के काम में लगी थी। देश के अंदर एक खुशी का माहौल था, इन सारी चीजों को देखकर के। चंडीगढ़ के सभी भाई-बहनों को मैं इसके, इस पहल के लिए व्यक्तिगत रूप से बड़े गर्व के साथ आप सबको बधाई देता हूं।
साथियों,
स्वच्छता के ऐसे अभियान देश में अनेक रोगों की रोकथाम में बहुत मददगार साबित हुए हैं।
साथियों,
एक समय था, भारत के हेल्थ सेक्टर पर पूरी दुनिया चिंता जताती थी। किसी बड़ी आपदा का अंदेशा होता था, तो लोग सवाल उठाने लगते थे कि भारत में क्या होगा? कोरोना के समय में हमने देखा है कि कैसे भारत ही विश्व की चिंताओं का केंद्र था। लेकिन हमारी सरकार ने भारत का सामर्थ्य भी बदला और विश्व का नजरिया भी बदला। जब कोरोना महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं था, बल्कि भारत दुनिया को मदद भेज रहा था। आज कितने ही देशों से लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारत आते हैं। भारत मेडिकल टूरिज़्म का बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है।
साथियों,
ये बदलाव पिछले 12 वर्षों की ईमानदार कोशिशों और नीतियों का परिणाम है। 12 साल पहले हमने संकल्प लिया था, हमारे देश के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में नहीं जियेंगे, हमारे देश के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलेगी और कम कीमत में मिलेंगी। पिछले 12 वर्षों की देश की सफलता इसी संकल्प का परिणाम है। बीते वर्षों में भारत ने अपने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार किया है। 2014 के बाद देश में 15 नए AIIMS को मंजूरी दी गई है। आज देश के अलग-अलग हिस्सों में नए AIIMS काम कर रहे हैं। देशभर में सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए speciality hospitals की संख्या भी बढ़ी है। यहाँ चंडीगढ़ में भी, होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बना है, यहां से थोड़ी दूरी पर। 2022 में मुझे इसके लोकार्पण का अवसर मिला था। आज ये हॉस्पिटल हजारों मरीजों की सेवा कर रहा है।
साथियों,
गाँव-गाँव में प्राइमरी हेल्थकेयर सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हर स्तर पर हेल्थ सिस्टम मजबूत हो, इसके लिए आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन शुरू किया गया है। इसके तहत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स और पब्लिक हेल्थ यूनिट्स जैसी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार हुआ है। आज शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर जनजातीय क्षेत्रों तक देश में करीब पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी काम कर रहे हैं। आरोग्य मंदिरों में प्राइमरी इलाज की सुविधाएं तो हैं ही, साथ ही,12 अलग-अलग हेल्थ पैकेज सर्विस भी यहाँ मिल रही हैं। इनमें करोड़ों लोगों की ब्लड प्रेशर और ड़ायबिटीज़ जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग हुई है।
साथियों,
हमारी सरकार तकनीक के जरिए भी इलाज को सुगम बना रही है। हमने ई-संजीवनी मिशन के जरिए telemedicine की सुविधा शुरू की। इसके तहत आज देश में 48 करोड़ से ज्यादा telemedicine consultations हो चुके हैं। दूर-सुदूर इलाकों से भी लोग बड़े अस्पतालों से, डॉक्टर्स से परामर्श कर रहे हैं।
साथियों,
स्वास्थ्य सेवाओं के इस विस्तार की वजह से आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक institutional डिलीवरी हो रही हैं। हमारे यहाँ माता मृत्यु दर में 86 percent की कमी आई है। और शिशु मृत्यु दर में भी बड़ी गिरावट आई है।
साथियों,
बीमारियों के इलाज के साथ ही आज उतना ही फोकस Preventive Healthcare पर भी है। पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योगा, H.P.V. Vaccination, U-WIN प्लेटफॉर्म, ऐसे कई अहम प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन सुरक्षित हो रहा है।
साथियों,
हमने देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प भी लिया है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए, जन-जन को जागरूक किया जा रहा है। समय से टीबी की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसी का परिणाम है, आज देश में टीबी का ट्रीटमेंट कवरेज 90 percent से ज्यादा हो गया है। पिछले साल आई WHO की रिपोर्ट के मुताबिक 10 वर्षो के भीतर-भीतर टीबी संक्रमण भी इक्कीस प्रतिशत कम हुआ है। इन प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीब को हो रहा है, इसका लाभ हमारे मिडिल क्लास को हो रहा है और ज्यादा लाभ हमारी माताओं-बहनों को हो रहा है। क्योंकि माताएं-बहनें परिवार के काम को प्राथमिकता देती हैं। बीमारी को सहन करना ये माताओं-बहनों ने जैसे अपना एक संस्कार बना दिया है। लेकिन यह प्रोएक्टिव प्रयासों के कारण माताओं-बहनों का स्क्रीनिंग हुआ, उनकी देखभाल की गई और आज टीबी मुक्त होने में हमारी माताओं-बहनों की संख्या बड़ी है। भारत में हेल्थ सर्विसेस अब प्रिविलेज नहीं, आज हेल्थ सर्विसेस देश के सामान्य नागरिक का अधिकार बन रही हैं।
साथियों,
हेल्थ सेक्टर पर सरकार के फोकस का बहुत बड़ा लाभ भारत के युवाओं को भी हुआ है। हमारे युवा डॉक्टर्स इस बात से परिचित होंगे, पहले डॉक्टर बनने का सपना कितना मुश्किल होता था, युवाओं को डॉक्टर बनने के पर्याप्त मौके ही नहीं मिलते थे, क्योंकि मेडिकल सीटों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या बेहद कम थी। हमने इस परिस्थिति को भी बदला है। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। MBBS और Post Graduate सीटों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। और, अब तो चंडीगढ़ PGI में भी MBBS कॉलेज को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही यहां भी एडमिशन शुरू हो जाएंगे। इससे देश के कितने प्रतिभाशाली युवाओं को ऐसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने का मौका मिलेगा। देश को बड़ी संख्या में बेस्ट डॉक्टर्स मिलेंगे।
साथियों,
चंडीगढ़ एक ऐसा शहर है, जहां एजुकेशन, इंजीनियरिंग, मेडिकल साइंस और रिसर्च से जुड़े बड़े संस्थान एक साथ मौजूद हैं। बहुत कम शहरों के पास ऐसा सामर्थ्य होता है। आने वाले समय में यही संस्थान नई टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, स्टार्टअप्स और इनोवेशन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। आज एजुकेशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इस यात्रा को नई गति दे रही हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल एंड मेस का उद्घाटन हुआ है। सेक्टर-46 के गवर्नमेंट कॉलेज के लिए नया हॉस्टल भी तैयार हुआ है। रिसर्च स्कॉलर्स हॉस्टल की नींव भी रखी गई है। हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को रिसर्च के लिए बेहतर लैब्स, बेहतर फैकल्टी मिले। जब रिसर्च का माहौल मजबूत होगा, तब इनोवेशन भी तेज होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डीप-टेक, ऐसी सभी टेक्नोलॉजी में हमें भारत को आगे लेकर जाना है। मुझे पूरा विश्वास है कि चंडीगढ़ के एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स, यहां के शिक्षक और यहां के युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
साथियों,
इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप होता है। इसलिए, पहली बार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को holistic approach के साथ विकसित किया जा रहा है। आज चंडीगढ़ में कनेक्टिविटी को लेकर भी कई शुभारंभ हुए हैं। आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले ग्रीनफील्ड हाईवे का उद्घाटन हुआ है। इससे एयरपोर्ट रोड पर दबाव कम होगा, मोहाली और खरड़ के लोगों को जाम से राहत मिलेगी। अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाईवे से ‘पी.आर. सेवन स्पर’ इसकी आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे सभी विकास कार्यों से उद्योग और कारोबार को गति मिलेगी। हमारे चंडीगढ़ में Ease of Living और बेहतर होगी।
साथियों,
रीजनल कनेक्टिविटी पर फोकस बढ़ाते हुए, आज जालंधर में रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का भी लोकार्पण होने वाला है। इसका लाभ पंजाब के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को होगा। साथ ही, आज हरियाणा के जींद से, जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू हुई है। क्लीन फ्यूल पर चलने वाली ये ट्रेन एक बहुत बड़ी शुरुआत है। मैं इसके लिए भी आप सभी को और देशवासियों को बधाई देता हूँ।
साथियों,
विकसित भारत की यात्रा में हमें फ्यूचर की टेक्नोलॉजी पर, फ्यूचर के ट्रांसपोर्टेशन पर और फ्यूचर की हेल्थ सर्विसेस पर, इसी आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना है। हमें ऐसे फैसले लेने हैं, जिनका लाभ वर्तमान पीढ़ी को तो मिले ही मिले, आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता रहे। हमें ऐसे संस्थान बनाने हैं, जो समय के साथ और मजबूत हो जाएं। बीजेपी-एनडीए सरकार, इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और इस पूरे क्षेत्र के लोगों को इन नई परियोजनाओं के लिए फिर से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
कुल मिला कर यह एक यादगारी आयोजन रहा। स्थानीय लोगों ने भी बहुत बढ़चढ़ कर और उत्साह से इस में भाग लिया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उमंग और उल्लास से भरे अवसरों पर राष्ट्र उन मेहनती किसान भाइयों और बहनों के प्रति कृतज्ञ है, जो पूरे देश का भरण-पोषण करते हैं।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।
पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”
इस सुभाषितम् का अर्थ है कि जिस प्रकार किसान द्वारा बोया गया एक छोटा सा बीज, यदि उचित समय पर जल से सींचा जाए तो समय के साथ भरपूर फसल देता है, उसी प्रकार शुद्ध संकल्पों के साथ किया गया छोटा सा प्रयास भी मनुष्य को महान सफलता प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स(X) पर लिखा;
“देश के अलग-अलग हिस्सों में अभी कई पर्व-त्योहार मनाए गए हैं। उमंग और उल्लास से भरे इन अवसरों के लिए हम अपने परिश्रमी किसान भाई-बहनों के कृतज्ञ हैं, जो पूरे देश का पोषण करते हैं।
इत्थं फलति शुद्धेन सिक्तं सङ्कल्पवारिणा।
पुण्यबीजमपि स्वल्पं पुंसां कृषिकृतामिव॥”
देश के अलग-अलग हिस्सों में अभी कई पर्व-त्योहार मनाए गए हैं। उमंग और उल्लास से भरे इन अवसरों के लिए हम अपने परिश्रमी किसान भाई-बहनों के कृतज्ञ हैं, जो पूरे देश का पोषण करते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 21 MAR 2026 at 4:26 PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री ने ईद और नवरोज़ की शुभकामनाएँ दीं; क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर ज़ोर दिया
नई दिल्ली: 21 मार्च 2026:(PIB Delhi//पंजाब स्क्रीनडैस्क)::
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इस्लामिक गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति महामहिम डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन को ईद और नवरोज़ के शुभ अवसरों पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। चर्चा के दौरान, दोनों नेताओं ने उम्मीद व्यक्त की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशियाई क्षेत्र के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि का दौर लेकर आएगा। श्री मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर हाल ही में हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। प्रधानमंत्री ने नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के अत्यधिक महत्व को दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग खुले और सुरक्षित रहें। इसके अलावा, श्री मोदी ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने में ईरान के निरंतर समर्थन के लिए हार्दिक सराहना व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने X पर लिखा:
"राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से बात की और ईद तथा नवरोज़ की शुभकामनाएँ दीं। हमने उम्मीद ज़ाहिर की कि यह त्योहारी मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाएगा।
क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं।
नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि शिपिंग मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।
ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की सराहना की।"
Spoke with President Dr. Masoud Pezeshkian and conveyed Eid and Nowruz greetings. We expressed hope that this festive season brings peace, stability and prosperity to West Asia.
Condemned attacks on critical infrastructure in the region, which threaten regional stability and…
प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 January 2026 at 9:35AM by PIB Delhi
नई दिल्ली: 28 जनवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली/ /पंजाब स्क्रीनडेस्क)::
आज देश के साथ साथ पूरा पंजाब भी लाला लाजपत राय जी को याद कर रहा है। आज उनकी जयंती है। इस पावन और यादगारी अवसर पर राष्ट्रवाद को समर्पित सभी लोग लाला जी की कुर्बानियों को याद कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नेपंजाब केसरी लाला लाजपत राय की जयंती पर आज उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा, "उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।"
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:
"मातृभूमि की अमर संतान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।"
मातृभूमि की अमर संतान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। pic.twitter.com/QGua6VZB1t
यूं तो, इकोनॉमिक्स की बारीकियां समझने वाले लोग वैसे भी बहुत कम हैं, लेकिन लोगों का एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिन्हें यह भी याद नहीं रहता कि उनके घर में कितने पैसे हैं और घर के बाहर बैंक या पोस्ट ऑफिस में कितने रखे पड़े हैं? कुछ को पैसे कमाने की होड़ में यह सब याद नहीं रहता और कुछ मुसीबतों में ऐसे घिरे रहते हैं कि उनका दिमाग चकरा जाता है। वे भूल जाते हैं कि मेहनत की कमाई कहां रखी थी। बहुत से लोग विदेश चले जाते हैं और किसी के साथ कोई और अनहोनी हो जाती है। कुछ लोगों को बैंकिंग का काम थोड़ा मुश्किल लगता है और कुछ लोग मौत या बीमारी की वजह से बैंकों से दूर हो जाते हैं।
इस तरह, बैंकों में बहुत सारा पैसा जमा हो जाता है, जिसका वारिस कौन है, यह कंप्यूटर पर देखने पर भी तुरंत पता नहीं चलता। बैंक वाले ऐसी रकम को बड़ी ज़िम्मेदारी से संभालते हैं और उसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को सौंप देते हैं।
इसके बाद भी आगे की प्रक्रिया चलती रहती है। अगर ऐसी रकम का वारिस अचानक मदद के लिए आ जाए, तो उसे भी निराश होने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन फिर भी आप इसे किस्मत का खेल कह सकते हैं। अगर पैसा आपके हाथ में आए और फिर अनजान लोगों के हाथ में चला जाए, तो इसे भी माया का मायाजाल ही कहा जा सकता है।
इन बातों के बावजूद, बैंक नहीं चाहते कि आप अपनी मेहनत की कमाई को किस्मत का मारा समझें। वे हमेशा यह पक्का करने की कोशिश में रहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई किसी न किसी तरह आप तक पहुँच ही जाए। इसके लिए वे लगातार मेहनत भी कर रहे हैं।
इस बारे में केंद्रीय वित्त मंत्रालय और स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी SLBC के निर्देश भी बिल्कुल साफ़ हैं। इन्हीं निर्देशों के मुताबिक, बठिंडा के लीड बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया बठिंडा की तरफ से टीचर्स होम बठिंडा में एक अवेयरनेस कैंप लगाया गया।
इस कैंप के दौरान ऐसी रकमों पर डिटेल में बात की गई,जिन पर कोई दावा नहीं कर रहा है। इस अवेयरनेस कैंप की अध्यक्षता डिप्टी जनरल मैनेजर अभिषेक शर्मा ने की। मौजूद लोगों को उद्गम पोर्टल के ज़रिए ऐसी रकम के बारे में भी अवेयर किया गया।
इस मौके पर, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया यानी LIC और दूसरे सरकारी और प्राइवेट बैंकों के रिप्रेजेंटेटिव ने भी इस कैंप में हिस्सा लिया। इस मौके पर रीजनल मैनेजर मिस्टर रोहित कक्कड़, चीफ डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मिस्टर कुलभूषण बंसल और चीफ मैनेजर मिस्टर जिमी मेहता, चीफ मैनेजर मिस्टर गुरजीत सिंह भी मौजूद थे।
इस कैंप से कई लोगों को फाइनेंशियली और मनी मैनेजमेंट से जुड़े नियमों के ज़रिए फ़ायदा हुआ।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के पंजाब आने से पंजाब को एक बार फिर से नई आशाएं बंधीं हैं। इस बार की चौपाल चर्चा में केंद्र सर्कार और किसानों की आपसी दूरियां कम हुई हैं और नज़दीकियां बढ़ने की उम्मीदें जगी हैं। दोराहा और नूरपुर बेदी इलाकों के लोगों में काफी उत्साह पाया गया।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पंजाब प्रवास के दौरान ग्राम नूरपुर बेट, लुधियाना में किसानों से चौपाल पर चर्चा की, कृषि यंत्रों का प्रदर्शन देखा और दोराहा गांव में "समन्यु हनी" मधुमक्खी पालन केंद्र का अवलोकन किया। गौरतलब है कि मधुमक्खी पालन में किसान वर्ग का आकर्षण काफी बढ़ा है। किसान परिवारों की महिलाएं भी इस क्षेत्र में बहुत काम कर रही हैं।
इस अवसर पर कृषि मंत्री ने धान की कटाई के लिए एसएसएमएस फिटेड कंबाइन हार्वेस्टर और गेहूं की बुआई के लिए हैप्पी स्मार्ट सीडर मशीन का लाइव डेमो देखा। इस मशीनी विकास से पंजाब की खुशहाली भी तेज़ी से बढ़ेगी ही। तकनीक हमेशां ही महत्वपूर भूमिका अदा करती है।
इस मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए श्री चौहान ने कहा कि नूरपुर ऐसा गांव है जहां साल 2017 से पराली नहीं जलाई जाती। किसानों ने यहां पराली के उचित प्रबंधन का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कंबाइन को चलाने के बाद पराली का बड़ा हिस्सा खेत में ही फैल कर बिखर जाता है, इकट्ठा नहीं होता। इसी तरह स्मार्ट सीडर से सीधे सीडिंग भी उत्कृष्ट तकनीक है। यह एक तरफ पराली ढकता है और दूसरी ओर इसका सिस्टम मिट्टी और दाने को कॉम्पेक्ट कर लेता है। श्री चौहान ने कहा कि मशीनों के इस्तेमाल से किसानों के श्रम, धन और समय की अत्यधिक बचत होती है।
कृषि और भूमि के मामलों में गहरी समझ रखने अले केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि उचित पराली प्रबंधन के साथ बुआई करने से दो साल के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ेगी जिससे यूरिया के कम इस्तेमाल की आवश्यकता होगी। साथ ही एक एकड़ में 2 क्विंटल अधिक उत्पादन भी होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसान भाइयों-बहनों से पराली ना जलाने और पराली का उचित प्रबंधन करने की अपील भी की।
इसके बाद कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दोराहा गांव में "समन्यु हनी" मधुमक्खी पालन केंद्र का भी अवलोकन किया। यहां किसानों से संवाद कर कृषि मंत्री ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय के नए मॉडल और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की और कृषि मंत्रालय की संबंधित योजनाओं के बारे में भी चर्चा की।
Thursday: CGST News 31st July 2025 at 12:08 PM PIB Ludhiana
सीजीएसटी लुधियाना ने किया; अब तक दो गिरफ्तारियां
लुधियाना: 31 जुलाई 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीनडेस्क)::
विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर, केंद्रीय जीएसटी लुधियाना द्वारा ऑडियो-वीडियो प्रोडक्शन क्षेत्र की कई फर्मों के विरुद्ध जांच की गई, जिसमें 62 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन फर्मों ने 342 करोड़ रुपये मूल्य की सेवाएं विदेशी संस्थाओं से आयात की थीं और उस पर जीएसटी का भुगतान नहीं किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन फर्मों ने जीएसटी कानूनों के अंतर्गत निर्धारित कोई भी दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कर चोरी सुनियोजित और जानबूझकर की गई।
इन फर्मों को संचालित करने और बनवाने में शामिल दो व्यक्तियों को को कल, अर्थात् 30 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया।
अब तक की गई इन दो गिरफ्तारियों के साथ, जांच अभी जारी है ताकि इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला और चोरी की कुल राशि का पता लगाया जा सके।
सीजीएसटी लुधियाना आयुक्तालय ईमानदार करदाताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और कर धोखाधड़ी की पहचान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
PMO office On Monday 12th May 2025 at 08:00 PM Updated 12th May 2015 at 08:16 PM
हमने पाकिस्तान में चल रहे आतंकी अड्डों को तबाह किया
Prime Minister Narendra Modi addresses the Nation
प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi ka Amrit Mahotsav//Posted On: 12 MAY 2025 8:27PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन का मूल पाठ
प्रिय देशवासियों,
नमस्कार!
हम सभी ने बीते दिनों में देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा है। मैं सबसे पहले भारत की पराक्रमी सेनाओं को, सशस्त्र बलों को, हमारी खुफिया एजेंसियों को, हमारे वैज्ञानिकों को, हर भारतवासी की तरफ से सैल्यूट करता हूं। हमारे वीर सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया। मैं उनकी वीरता को, उनके साहस को, उनके पराक्रम को, आज समर्पित करता हूं- हमारे देश की हर माता को, देश की हर बहन को, और देश की हर बेटी को, ये पराक्रम समर्पित करता हूं।
साथियों,
22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादियों ने जो बर्बरता दिखाई थी, उसने देश और दुनिया को झकझोर दिया था। छुट्टियां मना रहे निर्दोष-मासूम नागरिकों को धर्म पूछकर, उनके परिवार के सामने, उनके बच्चों के सामने, बेरहमी से मार डालना, ये आतंक का बहुत विभत्स चेहरा था, क्रूरता थी। ये देश के सद्भाव को तोड़ने की घिनौनी कोशिश भी थी। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से ये पीड़ा बहुत बड़ी थी। इस आतंकी हमले के बाद सारा राष्ट्र, हर नागरिक, हर समाज, हर वर्ग, हर राजनीतिक दल, एक स्वर में, आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उठ खड़ा हुआ। हमने आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारत की सेनाओं को पूरी छूट दे दी। और आज हर आतंकी, आतंक का हर संगठन जान चुका है कि हमारी बहनों-बेटियों के माथे से सिंदूर हटाने का अंजाम क्या होता है।
साथियों,
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ये सिर्फ नाम नहीं है, ये देश के कोटि-कोटि लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है। 6 मई की देर रात, 7 मई की सुबह, पूरी दुनिया ने इस प्रतिज्ञा को परिणाम में बदलते देखा है। भारत की सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर, उनके ट्रेनिंग सेंटर्स पर सटीक प्रहार किया। आतंकियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारत इतना बड़ा फैसला ले सकता है। लेकिन जब देश एकजुट होता है, Nation First की भावना से भरा होता है, राष्ट्र सर्वोपरि होता है, तो फौलादी फैसले लिए जाते हैं, परिणाम लाकर दिखाए जाते हैं।
जब पाकिस्तान में आतंक के अड्डों पर भारत की मिसाइलों ने हमला बोला, भारत के ड्रोन्स ने हमला बोला, तो आतंकी संगठनों की इमारतें ही नहीं, बल्कि उनका हौसला भी थर्रा गया। बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने, एक प्रकार से ग्लोबल टैररिज्म की यूनिवर्सटीज रही हैं। दुनिया में कहीं पर भी जो बड़े आतंकी हमले हुए हैं, चाहे नाइन इलेवन हो, चाहे लंदन ट्यूब बॉम्बिंग्स हो, या फिर भारत में दशकों में जो बड़े-बड़े आतंकी हमले हुए हैं, उनके तार कहीं ना कहीं आतंक के इन्हीं ठिकानों से जुड़ते रहे हैं। आतंकियों ने हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा था, इसलिए भारत ने आतंक के ये हेडक्वार्ट्स उजाड़ दिए। भारत के इन हमलों में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा गया है। आतंक के बहुत सारे आका, बीते ढाई-तीन दशकों से खुलेआम पाकिस्तान में घूम रहे थे, जो भारत के खिलाफ साजिशें करते थे, उन्हें भारत ने एक झटके में खत्म कर दिया।
साथियों,
भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान घोर निराशा में घिर गया था, हताशा में घिर गया था, बौखला गया था, और इसी बौखलाहट में उसने एक और दुस्साहस किया। आतंक पर भारत की कार्रवाई का साथ देने के बजाय पाकिस्तान ने भारत पर ही हमला करना शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने हमारे स्कूलों-कॉलेजों को, गुरुद्वारों को, मंदिरों को, सामान्य नागरिकों के घरों को निशाना बनाया, पाकिस्तान ने हमारे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन इसमें भी पाकिस्तान खुद बेनकाब हो गया।
दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान के ड्रोन्स और पाकिस्तान की मिसाइलें, भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। भारत के सशक्त एयर डिफेंस सिस्टम ने, उन्हें आसमान में ही नष्ट कर दिया। पाकिस्तान की तैयारी सीमा पर वार की थी, लेकिन भारत ने पाकिस्तान के सीने पर वार कर दिया। भारत के ड्रोन्स, भारत की मिसाइलों ने सटीकता के साथ हमला किया। पाकिस्तानी वायुसेना के उन एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिस पर पाकिस्तान को बहुत घमंड था। भारत ने पहले तीन दिनों में ही पाकिस्तान को इतना तबाह कर दिया, जिसका उसे अंदाजा भी नहीं था।
इसलिए, भारत की आक्रामक कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान बचने के रास्ते खोजने लगा। पाकिस्तान, दुनिया भर में तनाव कम करने की गुहार लगा रहा था। और बुरी तरह पिटने के बाद इसी मजबूरी में 10 मई की दोपहर को पाकिस्तानी सेना ने हमारे DGMO को संपर्क किया। तब तक हम आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े पैमाने पर तबाह कर चुके थे, आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया था, पाकिस्तान के सीने में बसाए गए आतंक के अड्डों को हमने खंडहर बना दिया था, इसलिए, जब पाकिस्तान की तरफ से गुहार लगाई गई, पाकिस्तान की तरफ से जब ये कहा गया, कि उसकी ओर से आगे कोई आतंकी गतिविधि और सैन्य दुस्साहस नहीं दिखाया जाएगा। तो भारत ने भी उस पर विचार किया। और मैं फिर दोहरा रहा हूं, हमने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई को अभी सिर्फ स्थगित किया है। आने वाले दिनों में, हम पाकिस्तान के हर कदम को इस कसौटी पर मापेंगे, कि वो क्या रवैया अपनाता है।
साथियों,
भारत की तीनों सेनाएं, हमारी एयरफोर्स, हमारी आर्मी, और हमारी नेवी, हमारी बॉर्डर सेक्योरिटी फोर्स- BSF, भारत के अर्धसैनिक बल, लगातार अलर्ट पर हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद, अब ऑपरेशन सिंदूर आतंक के खिलाफ भारत की नीति है। ऑपरेशन सिंदूर ने आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक नई लकीर खींच दी है, एक नया पैमाना, न्यू नॉर्मल तय कर दिया है।
पहला-भारत पर आतंकी हमला हुआ तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। हम अपने तरीके से, अपनी शर्तों पर जवाब देकर रहेंगे। हर उस जगह जाकर कठोर कार्यवाही करेंगे, जहां से आतंक की जड़ें निकलती हैं। दूसरा- कोई भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत नहीं सहेगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल की आड़ में पनप रहे आतंकी ठिकानों पर भारत सटीक और निर्णायक प्रहार करेगा।
तीसरा-हम आतंक की सरपरस्त सरकार और आतंक के आकाओं को अलग-अलग नहीं देखेंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, दुनिया ने, पाकिस्तान का वो घिनौना सच फिर देखा है, जब मारे गए आतंकियों को विदाई देने, पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े अफसर उमड़ पड़े। स्टेट स्पॉन्सरड टेरेरिज्म का ये बहुत बड़ा सबूत है। हम भारत और अपने नागरिकों को किसी भी खतरे से बचाने के लिए लगातार निर्णायक कदम उठाते रहेंगे।
साथियों,
युद्ध के मैदान पर हमने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है। और इस बार ऑपरेशन सिंदूर ने नया आयाम जोड़ा है। हमने रेगिस्तानों और पहाड़ों में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, और साथ ही, न्यू एज वॉरफेयर में भी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे मेड इन इंडिया हथियारों की प्रमाणिकता सिद्ध हुई। आज दुनिया देख रही है, 21वीं सदी के वॉरफेयर में मेड इन इंडिया डिफेंस इक्विपमेंट्स, इसका समय आ चुका है।
साथियों,
हर प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ हम सभी का एकजुट रहना, हमारी एकता, हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। निश्चित तौर पर ये युग युद्ध का नहीं है, लेकिन ये युग आतंकवाद का भी नहीं है। टैररिज्म के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, ये एक बेहतर दुनिया की गारंटी है।
साथियों,
पाकिस्तानी फौज, पाकिस्तान की सरकार, जिस तरह आतंकवाद को खाद-पानी दे रहे हैं, वो एक दिन पाकिस्तान को ही समाप्त कर देगा। पाकिस्तान को अगर बचना है तो उसे अपने टैरर इंफ्रास्ट्रक्चर का सफाया करना ही होगा। इसके अलावा शांति का कोई रास्ता नहीं है। भारत का मत एकदम स्पष्ट है, टैरर और टॉक, एक साथ नहीं हो सकते, टैरर और ट्रेड, एक साथ नहीं चल सकते। और, पानी और खून भी एक साथ नहीं बह सकता।
मैं आज विश्व समुदाय को भी कहूंगा, हमारी घोषित नीति रही है, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो टेरेरिज्म पर ही होगी, अगर पाकिस्तान से बात होगी, तो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, PoK उस पर ही होगी।
प्रिय देशवासियों,
आज बुद्ध पूर्णिमा है। भगवान बुद्ध ने हमें शांति का रास्ता दिखाया है। शांति का मार्ग भी शक्ति से होकर जाता है। मानवता, शांति और समृद्धि की तरफ बढ़े, हर भारतीय शांति से जी सके, विकसित भारत के सपने को पूरा कर सके, इसके लिए भारत का शक्तिशाली होना बहुत जरूरी है, और आवश्यकता पड़ने पर इस शक्ति का इस्तेमाल भी जरूरी है। और पिछले कुछ दिनों में, भारत ने यही किया है।
मैं एक बार फिर भारत की सेना और सशस्त्र बलों को सैल्यूट करता हूं। हम भारतवासी के हौसले, हर भारतवासी की एकजुटता का शपथ, संकल्प, मैं उसे नमन करता हूं।
श्री गिरिराज सिंह और श्री पबित्र मार्घेरिटा ने किया अवलोकन
नई दिल्ली: 12th अगस्त 2024: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीनडेस्क)::
केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह और वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्र मार्घेरिटा ने आज नई दिल्ली के जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित “विरासत” प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी का आयोजन 10वें राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में किया गया है। प्रदर्शनी 3 अगस्त से 16 अगस्त, 2024 एक पखवाड़े तक चलेगी।
श्री गिरिराज सिंह ने हथकरघा बुनकरों और कारीगरों से बातचीत की और इस बात पर बल दिया कि सरकार बुनकरों और उनके परिवारों के लिए बेहतर आय के अवसरों के लिए वस्त्र मूल्य श्रृंखला में सुधार करने का प्रयत्न कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में दुनिया का सबसे बड़ा हथकरघा समुदाय है जो स्थिरता और ऊर्जा दक्षता पर ध्यान केंद्रित करता है। दुनिया टिकाऊ उत्पादों के उपयोग की ओर बढ़ रही है और हथकरघा शून्य-कार्बन रहित उद्योग है और किसी भी ऊर्जा की खपत नहीं करता है तथा हथकरघा उद्योग शून्य-जल रहित फुटप्रिंट वाला क्षेत्र है।
श्री पबित्र मार्घेरिटा ने हथकरघा क्षेत्र में प्राकृतिक रंगों के अनुप्रयोग के लाइव प्रदर्शन को देखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में फैशन उद्योग में प्राकृतिक रंगों वाले हथकरघा कपड़ों की भारी मांग बाजार में देखी जाने लगी है। हथकरघा बुनकरों द्वारा प्राकृतिक रंगों के उपयोग से न केवल मूल्यवर्धन होता है बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होती है।
मंत्रियों ने हथकरघा हाट में पौधारोपण कर “एक पेड़ मां के नाम”अभियान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को तिरंगा झंडे भी वितरित किए।
यह प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक जनता के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे गए हैं। इनमें कोसा, चंदेरी, मधुबनी, मंगलगिरी, मेखला चादर, मोइरांग फी, इकत आदि शामिल हैं।
हैंडलूम हाट में कई गतिविधियाँ भी आयोजित की जा रही हैं, जैसे कि हथकरघा बुनकरों और कारीगरों के लिए 75 स्टॉल, जहाँ वे सीधे उत्पादों की खुदरा बिक्री कर सकेंगे और शीर्ष समितियों, बोर्डों आदि द्वारा 07 स्टॉल, भारत के उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों का क्यूरेटेड थीम प्रदर्शन और हथकरघा हाट में प्राकृतिक रंगों, कस्तूरी कपास, डिजाइन और निर्यात पर कार्यशालाएँ, 12 अगस्त 2024 को बुनकरों और कारीगरों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर, लोई लूम और फ्रेम लूम का लाइव प्रदर्शन, भारत के लोक नृत्य और स्वादिष्ट क्षेत्रीय व्यंजन आदि।
भारत का हथकरघा क्षेत्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 35 लाख लोगों को रोजगार देता है, जो देश में कृषि क्षेत्र के बाद दूसरे स्थान पर है। भारत सरकार ने हथकरघा के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें पर्यावरण पर शून्य प्रभाव वाले उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की ब्रांडिंग की जाती है, ताकि उत्पादों की विशिष्टता को उजागर करने के अलावा उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा सके और उन्हें एक अलग पहचान दी जा सके। यह खरीदार के लिए एक गारंटी भी है कि खरीदा जा रहा उत्पाद वास्तव में हस्तनिर्मित है। प्रदर्शनी में सभी प्रदर्शकों को अपने उत्कृष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इस प्रकार हथकरघा उत्पादों के लिए बाजार और हथकरघा समुदाय की आय में सुधार करने का लक्ष्य रखा गया है। “विरासत” श्रृंखला-“विशेष हथकरघा एक्सपो” हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित की जाने वाली प्रमुख प्रदर्शनी है।
इस वर्ष 10वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को मनाया गया। यह आयोजन हथकरघा और हस्तशिल्प की गौरवशाली परंपरा पर केंद्रित है और हथकरघा बुनकरों और कारीगरों को बाजार से भी जोड़ता है।
संस्कृति मंत्रालय करेगा इस भव्य और यादगारी मार्च का आयोजन
उपराष्ट्रपति, श्री जगदीप धनखड़, रैली को हरी झंडी दिखाएंगे
नई दिल्ली: 10 अगस्त 2023: (पी आई बी//पंजाब स्क्रीनडेस्क)::
तिरंगे से इश्क करने वाले के बार फिर खुश हैं। उनके मन की मुरादें पूरी होने जा रही हैं। इस बार फिर लहराना है देश का प्यारा ध्वज तिरंगे। साम्प्रदायिक और सियासी विवादों से ऊंचे उठते हुए है--झंडा ऊंचा रहे हमारा-- विजयी तिरंगा प्यारा! इसे गाते हुए स्वयं भी लहराना है और दूसरों को भी इसकी प्रेरणा देनी है। इस बार हर गली, हर मोहल्ले में होगा तिरंगे का जलवा, तिरंगे जोश। तिरंगे की शान से बनेगी एक अलगी सी छवि। जो साम्प्रदायिक हमलों से लोगों को आपस में लड़ने लगे हैं उनके मुँह पर होगा तिरंगे के चाहने वालों का ज़ोरदार तमाचा।
आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) के तत्वावधान में 13 अगस्त 2023 से 15 अगस्त 2023 तक पूरे देश में "हर घर तिरंगा" अभियान चलाकर, लोगों को अपने घरों में झंडा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अभियान से पहुंचेगा हर घर तक, हर दिल तक तिरंगा।
हर घर तिरंगा अभियान की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने और अधिक से अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, 11 अगस्त 2023 को सुबह 08.00 बजे प्रगति मैदान, नई दिल्ली में सांसदों और मंत्रियों के साथ एक तिरंगा बाइक रैली का आयोजन किया गया है। बाइक रैली को उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री, श्री जी किशन रेड्डी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद, बाइक रैली इंडिया गेट सर्कल पहुंचेगी। रैली इंडिया गेट के एक चक्कर को पूरा कर, कर्तव्य पथ को पार करेगी और मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में समाप्त होगी।
'आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम)' प्रगतिशील स्वतंत्र भारत के 75 गौरवशाली वर्षों का स्मरण करने वाला एक सतत उत्सव है। भारत सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र की उपलब्धियों को प्रकाश में लाना है। 'आजादी का अमृत महोत्सवभारत के लोगों को समर्पित है जिन्होंने देश के विकास और इसकी विकासवादी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नागरिकों को अपने घरों में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 13 से 15 अगस्त 2022 तक 'हर घर तिरंगा' अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के पीछे का विचार लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना पैदा करना और उन्हें भारत की यात्रा और इस महान राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वालों की याद दिलाना है। पिछले वर्ष, यह अभियान बेहद सफल रहा था जिसमें करोड़ों परिवारों ने अपने घरों में तिरंगा फहराया और छह करोड़ लोगों ने हर घर तिरंगा वेबसाइट पर तिरंगा फहराते हुए सेल्फी अपलोड की।
इस अवसर पर आप इस वेबसाइट - https://harghartiranga.com पर देख सकते हैं तिरंगे का प्रेम और लोगों द्वारा डाली गई सेल्फियां। इसी तरह एक और वेबसाईट https://amritmahotsav.nic.in पर भी नज़र आएगा तिरंगे का रंग। इस तरह इन सभी मंचों को शायद पहली बार इतने ज़ोरदार ढंग से तिरंगे का प्रचार करने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
सीबीआई ने एक बड़े ऑपरेशन 'कनक' में लगभग 39 स्थानों पर बहुत बड़ा एक्शन लिया है। आगे की तलाशी सहित अब तक 1.03 करोड़ रु.(लगभग) बरामद किया एवं एफसीआई के प्रबंधक को भी गिरफ्तार किया। अब तक लगभग 99 स्थानों पर तलाशी ली गई है।
सीबीआई ने आगे की तलाशी सहित अब तक 1.03 करोड़ रु.(लगभग) बरामद किया है, इस दौरान आगे रूप नगर, संगरूर, मोरिंडा, बस्सी पठाना फतेहगढ़ साहिब, मोहाली, गुरदासपुर, बरनाला, मनसा, बठिंडा, सुनाम, बुदलाडा, मोहाली (सभी पंजाब में); अंबाला, गुरुग्राम (हरियाणा में); कोलार, चिक्काबलापुर (कर्नाटक में); चेन्नई (तमिलनाडु), नई दिल्ली व चंडीगढ़ स्थित आरोपियों के परिसरों सहित 39 स्थानों पर तलाशी ली।
इसके अलावा, आरोपियों के परिसरों में तीन दिनों की तलाशी के दौरान तीन करोड़ रु. (लगभग) से अधिक की एफडीआर(FDRs) तथा विभिन्न संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए। एफसीआई के कर्मियों, निजी चावल मिल मालिकों एवं अनाज व्यापारियों द्वारा अपनाए गए चैनलाइज्ड/ प्रणालीकृत भ्रष्टाचार के अवैध सांठगांठ के विरुद्ध 'ऑपरेशन कनक' नाम के एक बड़े ऑपरेशन में कुल मिलाकर 99 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिसमें अनुचित लाभ आदि प्राप्त करने के लिए एफसीआई के कुछ कर्मियों को अनुचित रिश्वत दी गई थी।
जांच के दौरान, सीबीआई ने एक प्रबंधक (प्रयोगशाला), एफसीआई, डीओ, चंडीगढ़ को भी गिरफ्तार किया। आरोपी को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया एवं दिनांक 16.01.2023 तक सीबीआई हिरासत में भेज गया। इससे पहले, डीजीएम (गुणवत्ता नियंत्रण/कार्मिक) आरओ, चंडीगढ़ तथा खरार (पंजाब) स्थित फर्म के एक मालिक को गिरफ्तार किया गया था एवं वर्तमान में दोनों सीबीआई हिरासत में हैं
एफसीआई के सेवारत (34) एवं सेवानिवृत्त कर्मियों (3), निजी व्यक्तियों (17) और अन्य संस्थाओं आदि सहित 74 आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया। ऐसा आरोप है कि पश्चपात प्राप्त करने के लिए निजी गिरोह संचालको ने एफसीआई कर्मियों को भारी रिश्वत दी। आगे यह आरोप है कि निजी चावल मिल मालिक और अनाज व्यापारी निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्नों की खरीद को समायोजित करने, खाद्यान्नों को उतारने में दिन-प्रतिदिन के कार्यों में कदाचार, विभिन्न कदाचारों के विरुद्ध जांच को प्रभावित( manage) करने आदि में लाभ प्राप्त करने के लिए एफसीआई कर्मियों को रिश्वत दे रहे थे। यह भी आरोप है कि कर्मियों ने राइस मिल मालिकों के साथ षड्यंत्र में स्टॉक में कमी को कवर किया एवं कम गुणवत्ता वाले खाद्यान्न को स्वीकार किया, जो देश के अन्य हिस्सों में ले जाया गया। बदले में राइस मिल मालिकों ने तकनीकी सहायकों, डीजीएम, एजीएम, और यहां तक कि कार्यकारी निदेशक सहित एफसीआई के कर्मियों को कथित रूप से चैनलाइज्ड/ प्रणालीकृत भ्रष्टाचार के रूप में भारी मात्रा में रिश्वत देते हैं।
वेस्टर्न फास्ट फूड कल्चर से आगाह किया एडीजी राजेंद्र चौधरी ने
*कहा कि बाजरा ग्लूटेन मुक्त, प्रोटीन में उच्च और स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है
चंडीगढ़//लुधियाना:11 जनवरी 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज खेती विरासत मिशन के सहयोग से लुधियाना क्लब में मीडिया से इंटरेक्शन और मिलेट लंच का आयोजन किया। आज के दौर में हमारा समाज अनाज और कृषि से सबंधित जिन संकटों का सामना कर रहा है उनके समाधान तलाशने में यह एक ऐतिहासिक आयोजन था जिसमें बहुत ही पते की और गहरी बातें चर्चा का विषय बनीं।
भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष (आईवाईएम) 2023 के प्रस्ताव को प्रायोजित किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा अनुमोदित किया गया था। भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी आईवाईएम 2023 को "जन आंदोलन" और भारत के लिए "बाजरा के लिए वैश्विक केंद्र" बनने की इच्छा व्यक्त की है। पीआईबी चंडीगढ़ द्वारा इस क्षेत्र में इस आंदोलन (मूवमेंट) की अगुवाई की जा रही है। उन्होंने स्थानीय मीडिया के लिए तरनतारन और चंडीगढ़ में भी मिलेट लंच का आयोजन किया है, ताकि मीडिया को बाजरा और इसके प्रचार के लिए अधिक मीडिया स्थान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
मौजूदा दौर में पैदा हुईं स्वास्थ्य समस्यायों की चर्चा करते हुए बहुत ही पते की बातों का खुलासा किया पीआईबी चंडीगढ़ के एडीजी श्री राजेंद्र चौधरी ने। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि “वेस्टर्न फास्ट फूड कल्चर अपनाने के कारण आज की युवा पीढ़ी कम उम्र से ही स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही है। बाजरा विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के खिलाफ लड़ाई में सहायता कर सकता है। बाजरा लस (ग्लूटेन) मुक्त, प्रोटीन में उच्च, और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होता है।इस प्रकार, वे वजन घटाने में भी मदद कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, "बाजरा उपभोक्ताओं और किसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।" उन्होंने अपनी बात को जारी रखा “बाजरा को उगाने के लिए कम पानी और बिजली की आवश्यकता होती है। बाजरा मोटापे, मधुमेह, एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि जैसी कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है, जिससे उपभोक्ता स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। फलस्वरूप, यह संतुलित पोषक तत्वों का एक उत्कृष्ट स्रोत है।”आज के आयोजन का उद्देश्य मीडिया को बाजरा के बारे में जागरूक करना है। नतीजतन, खपत भी बढ़ेगी, जिससे मांग बढ़ेगी।”
कार्यक्रम के विशेष वक्ता, खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक, श्री उमेंद्र दत्त ने कहा: "बाजरा को अब फ्रिंज फसल नहीं माना जाता है। वे चावल और गेहूं की चक्रीय कृषि के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं। इसके अतिरिक्त, वे हमारे कार्बन फुटप्रिंट को कम कर सकते हैं।" उन्होंने पराली जलाने पर चर्चा करते हुए कहा "बाजरे का डंठल मवेशियों के लिए बहुत अच्छा भोजन है।” उन्होंने कहा “पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किए जाने के कारण किसान बाजरे के डंठल को नहीं जलाते हैं। यह पंजाब में पराली जलाने के मुद्दे का भी जवाब हो सकता है।”
जगराओं के बाजरा उगाने वाले किसान श्री रसिंदर सिंह ने भी इस अवसर पर अपने अनुभवों की बात की और कहा कि बाजरा भी जी-20 बैठकों का एक अभिन्न हिस्सा है और प्रतिनिधियों को इसे चखने, किसानों से मिलने और बाजरा से जुड़े हुए स्टार्ट-अप के साथ इंटरैक्टिव सत्र के माध्यम से बाजरा का सच्चा अनुभव दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष 2023 के उपलक्ष्य में, बाजरा पर उचित ध्यान देने के लिए सरकार के प्रयासों को सही मायने में देखा जा रहा है, और वर्तमान बैठक का भी ऐसा ही करने का इरादा है।"
राज्यों के गृह मंत्रियों के 'चिंतन शिविर' में वीडियो के ज़रिए प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
नई दिल्ली: 28 अक्टूबर 2022: (पी आई बी//पंजाब स्क्रीनब्यूरो)
नमस्कार!
केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री अमित शाह, अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रिगण, गृह मंत्री जी, राज्यों के पुलिस महानिदेशक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों ! आजकल देश में उत्सव का माहौल है। ओणम, ईद, दशहरा, दुर्गा पूजा, दीपावली सहित अनेक उत्सव शांति और सौहार्द के साथ देशवासियों ने मनाए हैं। अभी छठ पूजा समेत कई अन्य त्यौहार भी हैं। विभिन्न चुनौतियों के बीच, इन त्यौहारों में देश की एकता का सशक्त होना, आपकी तैयारियों का भी प्रतिबिंब हैं। संविधान में भले कानून और व्यवस्था राज्यों का दायित्व है, लेकिन ये देश की एकता-अखंडता के साथ भी उतने ही जुड़े हुए हैं। सूरजकुंड में हो रहा गृह मंत्रियों का ये चिंतन शिविर, कॉपरेटिव फेडरेलिज्म का भी एक उत्तम उदाहरण है। हर एक राज्य एक दूसरे से सीखे, एक दूसरे से प्रेरणा लें, देश की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर के काम करे, ये संविधान की भी भावना है और देशवासियों के प्रति हमारा दायित्व भी है।
साथियों,
आज़ादी का अमृतकाल हमारे सामने है। आने वाले 25 साल देश में एक अमृत पीढ़ी के निर्माण के हैं। ये अमृत पीढ़ी, पंच प्रणों के संकल्पों को धारण करके निर्मित होगी। विकसित भारत का निर्माण, गुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता और सबसे प्रमुख बात नागरिक कर्तव्य, इन पंच प्रणों का महत्व आप सभी भली-भांति जानते हैं, समझते हैं। ये एक विराट संकल्प है, जिसको सिर्फ और सिर्फ सबका प्रयास से ही सिद्ध किया जा सकता है। तरीके अपने-अपने हो सकते हैं, रास्ते, priority अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन ये पंच प्रण देश के हर राज्य में हमारी गवर्नेंस की प्रेरणा होने चाहिए। जब ये सुशासन के मूल में होंगे, तो भारत के सामर्थ्य का विराट विस्तार होगा। जब देश का सामर्थ्य बढ़ेगा तो देश के हर नागरिक, हर परिवार का सामर्थ्य बढ़ेगा। यही तो सुशासन है, जिसका लाभ देश के हर राज्य को समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसमें आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है।
साथियों,
यहां आप में से अधिकतर या तो राज्य को नेतृत्व दे रहे हैं, या फिर सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कानून व्यवस्था का सीधा संबंध, राज्य के विकास से है। इसलिए राज्यों में विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में आप सभी के निर्णय और नीतियां और आपकी रीति ये बहुत अहम हैं।
साथियों,
कानून-व्यवस्था के पूरे तंत्र का विश्वसनीय होना, जनता के बीच उनका Perception क्या है, ये भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आपने देखा है कि जब भी कोई natural calamity होती है, प्राकृतिक आपदा हाती है, तो इन दिनों NDRF की, SDRF की एक पहचान बनी हुई है। उनको यूनिफार्म, वो संकट के समय पहले पहुंच जाना और उसके कारण देशवासियों के मन में इनके प्रति एक विश्वास बना है कि भाई, ये आए हैं चलिए संभल जाएगा, ये जो कह रहे हैं मानना चाहिए। इनकी बातें अगर स्वीकार करेंगे तो हमारा नुकसान कम होगा। और आप देखिए NDRF में है कौन भाई? SDRF में है कौन? आप ही के सब साथी हैं। सुरक्षाबल के जवान ही हैं। लेकिन समाज में उनके प्रति बड़ी श्रद्धा बन गई है। आपदा के समय में जैसे ही NDRF-SDRF की टीम पहुंचती है, वैसे ही लोगों को संतोष होने लगता है कि अब एक्सपर्ट टीम पहुंच गई है, अब ये अपना काम कर लेंगे।
साथियों,
अपराध वाली किसी भी जगह पर जैसे ही पुलिस पहुंचती है, लोगों में ये भाव आता है कि सरकार पहुंच गई। कोरोना काल में भी हमने देखा है कि किस तरह पुलिस की साख बेहतर हुई थी। पुलिस के लोग जरूरतमंदों की मदद कर रहे थे, जरूरी संसाधान जुटा रहे थे, अपनी ही जिंदगी को दांव पर लगा रह थे। यानि कर्तव्य परायणता में कोई कमी नहीं है, जरूरत अच्छा Perception बनाए रखने की भी है, इसके लिए पुलिस बल को प्रेरित करना, उसके लिए प्लान करना, हर छोटी-मोटी चीजों पर लगातार मार्गदर्शन करते रहना, कुछ गलत होता है तो रोकना, ये हमारी एक जीवंत प्रक्रिया होनी चाहिए, ऊपर से नीचे तक हर पल होनी चाहिए।
साथियों,
हमें एक बात और समझनी होगी। अब कानून व्यवस्था किसी एक राज्य के दायरे में सिमटी रहने वाली व्यवस्था नहीं रह गई है। अब अपराध Inter-state और Inter-national हो रहे हैं। यानि टेक्नोलॉजी की मदद से एक राज्य में बैठे अपराधी, दूसरे राज्य में भयंकर अपराध करने की ताकत रखते हैं। देश की सीमा से बाहर बैठे अपराधी भी टेक्नोलॉजी का जमकर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हर राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेल, केंद्र और राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेल ये बहुत जरूरी है। और इसीलिए आपको मालूम होगा मैंने डीजीपी कांफ्रेंस में कहा था कि दो adjoining state होते हैं उसके जो adjourning district होते हैं उन्होंने periodically बैठकर के दोनों राज्यों की दोनों जिलों की समस्याओं का संकलन करना चाहिए, साथ मिलकर काम करना चाहिए। उसी में से ताकत बनेगी। कई बार केंद्रीय एजेंसियों को कई राज्यों में एक साथ जांच करनी पड़ती है। दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। इसलिए हर राज्य का दायित्व है कि चाहे राज्य की एजेंसी हो, चाहे केंद्र की एजेंसी हो या संबंधित कहीं किसी और राज्य से संपर्क आता है। सभी एजेंसियों को एक दूसरे को पूरा सहयोग देना चाहिए। कोई बड़ा है, कोई छोटा है, किसका अधिकार है उसी में कभी-कभी तो हम देखते हैं एक आधी एफआईआर रजिस्टर नहीं हुई, क्यों नहीं हुई तो बोले ये तय नहीं हो रहा है कि वो जो जगह है वो इस थाने में पड़ती है कि उस थाने में पड़ती है। ये जो चीजें हैं वो सिर्फ पुलिस-थाने तक नहीं हैं। राज्यों के बीच भी हो जाती हैं। केंद्र और राज्यों के बीच में हो जाती हैं। भारत और विदेश की व्यवस्थाओं के साथ हो जाती हैं। इसलिए हमारी efficiency के लिए, हमारे outcome के लिए सामान्य नागरिक को सुरक्षा देने के लिए हमारे बीच में तालमेल, संकलन, सहयोग बहुत अनिवार्य है। और इसके लिए जितना संकलन बढ़ेगा, आपके राज्य की भी ताकत बढ़ने वाली है।
साथियों,
साइबर क्राइम हो या फिर ड्रोन टेक्नॉलॉजी का हथियारों और ड्रग्स तस्करी में उपयोग, इनके लिए हमें नई टेक्नॉलॉजी पर काम करते रहना होगा। अब देखिए हम 5G के युग में घुस गए हैं, तेजी से 5G पहुंचने वाला है। अब 5G के जितने लाभ हैं, इतनी ही जागरुकता भी जरूरी रहेगी। 5G से facial recognition technology, automatic number-plate recognition technology, drones और CCTV जैसी टेक्नॉलॉजी की परफॉर्मेंस में कई गुणा सुधार होने वाला है। लेकिन हम जितनी तेजी से आगे बढ़ेंगे, जो क्राइम करने वाला वर्ल्ड है, उसका भी ग्लोबलाइजेशन हो चुका है। वो भी interested हो चुका है। वो भी टेक्नोलॉजी में forward हो चुके हैं। मतलब हमें उनसे दस कदम आगे जाना होगा। हमें हमारी कानून व्यवस्था को भी स्मार्ट बनाना इसके लिए बहुत ही आग्रह से काम करना पड़ेगा।
साथियों,
मेरा आग्रह ये भी है कि टेक्नोलॉजी को कृपा करके बजट के तराजू से ना तौलें। और मेरा सभी आदरणीय मुख्यमंत्रियों से, सभी आदरणीय गृहमंत्रियों से इस विषय में एक टीम बनाकर के दुनिया में criminal world की किस टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है, उपलब्ध टेक्नोलॉजी हमारे लोगों को कैसे सुरक्षा दे सकती है, इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए और इसमें जो बजट जाएगा वो बाकी सैकड़ों खर्चों को बचाने का कारण बन जाएगा। और इसलिए टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल पूरे पुलिस तंत्र को तो मजबूत करता ही करता है, सामान्य मानवी को सुरक्षा देना का एक विश्वास नीचे तक हम पहुंचा सकते हैं। टेक्नोलॉजी, Crime Prevention में भी मदद करती है और Crime detection में भी, Crime Investigation में भी बहुत काम आती है। आज देखिए, कितने ही अपराधी, CCTV की वजह से पकड़े जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी अभियान के तहत शहरों में बनाए गए आधुनिक कमांड और कंट्रोल सिस्टम से भी बहुत मदद मिल रही है।
साथियों,
इस प्रकार की नई टेक्नॉलॉजी के विकास के लिए केंद्र सरकार ने पुलिस टेक्नॉलॉजी मिशन भी शुरु किया है। अनेक राज्य भी इसमें अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन ये अनुभव आ रहा है कि हमारे अलग-अलग प्रयोग होने के कारण हमारी टेक्नोलॉजी एक दूसरे के साथ बात नहीं करती है, और इसलिए हमारी एनर्जी waste होती है। वो जो भी मेटरियल है, वो उस राज्य तक सीमित रहता है। हमें कॉमन प्लेटफार्म के विषय में बड़ा मन रखकर के सोचना ही पड़ेगा। किसी एक के पास बहुत उत्तम चीज है तो ये मानकर के न बैठें कि मेरे पास है, मैं तो किसी को दूंगा नहीं, मैं अपनी ताकत बनाए रखूँगा, एक समय आएगा कि इतनी उत्तम टेक्नोलॉजी होगी और लोगों के सहयोग में नहीं होगी तो stand alone निकम्मी हो जाएगी। और इसलिए टेक्नोलॉजी में भारत के संदर्भ में सोचना हमारी सभी best practices, best innovation कॉमन लिंक वाले ही होने चाहिए, Inter operable होने चाहिए, एक दूसरे के साथ लगातार सरलता से बात कर सके ये व्यवस्थाएं अनिवार्य है।
साथियों,
आज फॉरेंसिक साइंस का महात्मय बढ़ रहा है, और वो सिर्फ पुलिस महकमे तक सीमित नहीं है जी! Legal fraternity को फॉरेंसिक साइंस को समझना पड़ेगा, Judiciary को फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा, Even हॉस्पिटल को भी फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा। इन सबके प्रयत्न से ही फॉरेंसिक साइंस का उपयोग क्राइम और क्रिमिनल को सजा दिलाने में बहुत काम आ सकता है। अकेले पुलिस के पास फॉरेंसिक साइंस की कुछ व्यवस्था हैं, ये enough नहीं होगा। और इसलिए हर राज्य में हमें संकलित और संतुलित व्यवस्था हर राज्य को गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की और उसकी क्षमता आज दुनिया के 60-70 देश फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का लाभ ले रहे हैं। हमारे राज्यों को भी बढ़-चढ़कर लाभ लेना चाहिए। ये पूरी तरह futuristic technology driven व्यवस्था है। Human Resource Development का भी वहां काम है, नए-नए टेक्नोलॉजी टूल बनाने का भी काम है। और बड़े कठिन केसेस को सुलझाने में भी वो लैब काम आ रही है। मैं समझता हूं कि इस व्यवस्था का उपयोग सभी राज्य सक्रियता से कैसे करें?
साथियों,
कानून व्यवस्था को बनाए रखना, एक 24x7 वाला काम है। लेकिन किसी भी काम में ये भी आवश्यक है कि हम निरंतर प्रकियाओं में सुधार करते चलें, उन्हें आधुनिक बनाते चलें। बीते वर्षों में भारत सरकार के स्तर पर कानून व्यवस्था से जुड़े जो Reforms हुए हैं, उन्होंने पूरे देश में शांति का वातावरण बनाने में मदद की है। आप भी जानते हैं कि भारत की विविधता, भारत की विशालता की वजह से हमारे law enforcement system पर कितना दबाव होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारा ये सिस्टम सही दिशा में ऊर्जा लगाए। वर्ना हमने देखा है कि कितने ही अनावश्यक केसों में, छोटी-छोटी गलतियों की जांच में ही पुलिस डिपार्टमेंट की ऊर्जा चली जाती है। इसलिए हमने व्यापार-कारोबार से जुड़े अनेकों प्रावधानों को अब decriminalize कर दिया है, उन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर निकाल दिया है। डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों को समाप्त करके भविष्य का बहुत बड़ा बोझ कम किया गया है। मैं तो राज्यों से भी आग्रह करता हूं आप भी अपने यहां कानूनों को evaluate कीजिए। आजादी के पहले के जितने कानून हैं, उनको वर्तमान तरीकों के साथ बदलिए। हर कानून में क्रिमिनल एंगल और निर्दोष नागरिकों को परेशानी वो वक्त चला गया है जी।
साथियों,
सरकार को अब जैसे स्वामित्व योजना, ये स्वामित्व योजना के तहत देश के गांवों में ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रॉपर्टी कार्ड वितरित कर रहे हैं, वो भी जमीन से जुड़े विवादों को कम करेंगे, झगड़े खत्म होंगे गांव के। वरना गांव की समस्या ज्यादातर एक फुट जमीन जिसने ले ली उसी में से बड़े-बड़े झगड़े हो जाते थे।
साथियों,
परोक्ष और अपरोक्ष रूप से किए गए ऐसे अनेक प्रयासों से law enforcement एजेंसियों को भी अपनी प्राथमिकता तय करने में बहुत मदद मिली है। लेकिन हम जब पूरे कैनवास पर चीजों को रखकर के अपनी स्ट्रेटजी में बदलाव नहीं करेंगे, 20-30-50 साल पुरानी पद्धतियों से चलेंगे तो शायद इन चीजों का फायदा नहीं मिलेगा। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों ने भी कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है। आतंकवाद हो, हवाला नेटवर्क हो, भ्रष्टाचार हो, इस पर आज देश में अभूतपूर्व सख्ती दिखाई जा रही है। लोगों में विश्वास पनपने लगा है। UAPA जैसे कानूनों ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई में व्यवस्थाओं को ताकत दी है। यानि एक तरफ हम देश के law enforcement system का, उसकी क्षमता बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ उन पर अनावश्यक बोझ को भी हटा सकें।
साथियों,
एक और विषय हमारे देश की पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे आज देश में One Nation, One Ration Card की व्यवस्था बनी है, One Nation-One Mobility Card की व्यवस्था हो रही है, One Nation-One Grid बना है, One Nation-One Sign Language बनी है, वैसे ही पुलिस की वर्दी को भी लेकर भी ऐसी ही कोई अप्रोच अपनाई जा सकती है। क्या हमारे राज्य मिल बैठकर के, इससे बहुत लाभ होंगे, एक तो Quality material product होगा, क्योंकि mass scale पर होगा। कैप होगी तो करोड़ों कैपेज की जरूरत पड़ेगी। बेल्ट चाहिए तो करोड़ों में चाहिएगा। और देश को कोई भी नागरिक कहीं पर भी जाएगा देखते ही उसको पता चलेगा हां ये पुलिस वाला है। अब जैसे पोस्ट ऑफिस का डिब्बा। हिन्दुस्तान में कोई पढ़ा-लिखा, अनपढ़ आदमी को मालूम है ये पोस्ट का डिब्बा है। यानि कागज डाला वहां पहुंचता है। एक पहचान होती है। हमारे लिए भी आवश्यक है कि हमारे देश के पुलिस बेड़े में, हम सोंचे, साथ मिलकर के सोंचे, कोई किसी पर थोपने की जरूरत नहीं है, एक evolve करें। आप देखिए बहुत बड़ा लाभ होगा और एक दूसरे की ताकत में इजाफा होगा। One Nation- One Police Uniform, हां उस राज्य का एक टैग हो सकता है, उस राज्य का एक नंबर हो सकता है, लेकिन पहचान कॉमन बने, इस पर सोचें, मैं एक विचार के रूप में रख रहा हूं। ना मैं कोई आपसे आग्रह भी करता हूं। मैं सिर्फ एक विचार रखता हूं। और इस विचार पर चर्चा कीजिए। कभी ठीक लगे 5 साल 50 साल 100 साल के बाद भी उपयोगी लगेगा, तो जरूर देखिए। उसी प्रकार से अलग-अलग प्रकार की पुलिस के नए-नए विभाग शुरू हुए हैं। Expertise आई है।
अब हम देखिए दुनिया में दूरिज्म का बहुत बड़ा मार्केट है। भारत में टूरिज्म की संभावनाएं बहुत बढ़ रही हैं। विश्व से बहुत बड़ी मात्रा में टूरिस्टों का भारत में आने का प्रवाह बढ़ना ही बढ़ना है। आज दुनिया में कई देश जो टूरिज्म के क्षेत्र में बहुत आगे हैं। वहां टूरिज्म के लिए काम करने वाली पुलिस बनाई जाती है। उनकी ट्रेनिंग अलग होती है। उनको languages भी सिखाई जाती है। उनके behaviour पूरी तरह चेंज होता है। और यात्रियों को भी विदेश के टूरिस्टों को भी पता होता है कि भाई ये मदद करने के लिए पुलिस की व्यवस्था है और वो पुलिस होने के कारण वो Police Enforcement जो Institutes है उससे भी बड़ी आसानी से संकलन कर पाता है। कभी न कभी हमे हमारे देश में इस सुविधा की expertise को डेवलप करना ही पड़ेगा। ताकि भारत में टूरिज्म के लिए विश्वभर से आने वाले आदमी और एक पूंजी निवेश के लिए आने वाले में बहुत फर्क है। टूरिस्ट तुरंत आपका एंबेसडर बन जाता है। अच्छी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगा, बुरी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगा। पूंजी निवेश जो करता है उसको इस काम में काफी समय लग जाता है अगर गलत हो गया तो। लेकिन टूरिस्ट तो दो दिन में ही खबर पहुंचा देता है अरे यार भाई यहां तो ये हाल है। और इसलिए आज भारत में भी मिडिल क्लास का बल्क इतना बढ़ रहा है टूरिज्म को लेकर के बहुत बदलाव आ रहा है। अब टूरिज्म और ट्रैफिक नई समस्या आ रही है। अब हम एडवांस में नहीं सोचेंगे, alternate नहीं सोचेंगे तो वहीं टूरिज्म के हमारे सेंटर्स तो कोई बदलने वाले नहीं है। हम कहें कि भाई आप शिमला नहीं वहाँ जाइये तो ये तो होने से शिमला जिसको जाना है शिमला ही जाएगा। नैनीताल जाना है वो नैनीताल ही जाएगा, श्रीनगर जाना है वो श्रीनगर ही जाएगा, गुलमर्ग जाना है वो गुलमर्ग ही जाएगा। हमें व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा।
साथियों,
हमने देखा है, कोरोना के समय में जब पुलिस के लोग अपने क्षेत्रों के लोगों को फोन करके पूछते थे और खासकर के मैंने देखा है कुछ शहरों में senior citizen के लिए पुलिस में जो बड़ी आयु के लोग हैं, जिनसे अब ज्यादा मजदूरी करवाना उनके साथ भी अत्याचार है। उन्होंने स्वेच्छा से ऐसे काम लिए हैं। और वे Senior Citizens को लगातार पूछते हैं ठीक हो ना, कहीं बाहर तो जाने वाले नहीं हो ना, घर बंद करके जाने वाले नहीं हो ना, इसके कारण नागरिकों का जो confidence बढ़ता है। वो एक प्रकार से आपकी ताकत बन जाता है। इस चीज को हम जितना ज्यादा उपयोग कर सकते हैं, professional way में कर सकते हैं और पूरी तरह जीवंतता हो, संवेदनशीलता हो, आप देखिए समाज जीवन में ये फोन आपका सप्ताह में अगर किसी सीनियर सिटिजन को जाता है वो महीने भर दुनिया को कहता रहता है कि भई पुलिस थाने से बिलकुल फोन आ जाता है, हर बुधवार को पूछ लेते हैं मेरी कोई दिक्कत है नहीं, इन चीजों बहुत बड़ी ताकत होती है। जो perception की लड़ाई है ना, ये आपके सारे perception बनाने वाले लोग हैं। हमें एक और काम की तरफ बहुत सजग होने की जरूरत है जी, Technological Intelligence इसकी अपनी ही एक ताकत है, उसका उपयोग है लेकिन हम Human Intelligence को नकार नहीं सकते हैं। उस विधा को पुलिस डिपार्टमेंट ने आज से सौ साल, कितनी ही टेक्नोलॉजी बदल जाए, 100 साल के बाद उसकी जरूरत पड़ने वाली है। उस institute को जितना ताकतवर बना सकते हैं बनाइये। उसमें जो सामर्थ है, उसकी जो नजरें हैं वो उसकी जो बातचीत में से जो पकड़ के ले आता है, ये आपकी बहुत बड़ी ताकत होती है। और अगर दोनों क्षेत्रों में ताकत है फिर तो आप चीजों को बहुत आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि भई ये संभावना है, दस दिन के बाद ये संभावना दिखती है, ये चल रहा है, चलो हम देखते हैं, यहां कुछ लोग आते हैं जाते हैं, कुछ हो रहा है, तुरंत पता चलेगा। और मैं समझता हूं, इसके कारण हमारी व्यवस्थाएं बहुत चुस्त हो जाएगी। जो 50 बार क्राइम करने वालो को सोचने के लिए मजबूर करेगी।
साथियों,
हमें एक और बात भी समझनी है। आज वैश्विक स्तर पर भारत जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से भारत की चुनौतियां भी बढ़ने वाली हैं। पहले वो उपेक्षा की वृत्ति होती है, फिर उसका जरा मजाक उड़ाने की वृत्ति बनती है, फिर भी आप आगे बढ़ते हैं। तो फिर थोड़ी competition का भाव आ जाता है, प्रतिस्पर्धा आ जाती है। फिर भी आगे बढ़ते हैं, तो दुश्मनी का रुप ले लेती है। विश्व की बहुत सारी ताकतें होंगी जो नहीं चाहेंगी की उनके देश के संदर्भ में भारत कुछ सामर्थ्यवान बने। फलाने विषय में उनकी expertise है उसमें भारत न घुसे। फलानी प्रोडक्ट उनकी बपौती है, अगर उसमें भारत प्रोडक्शन में चला गया तो मार्केट पर भारत कब्जा कर लेगा। भारत बहुत बड़ा बाजार है, भारत खुद बनाने लग जाएगा तो फिर तो हमारा माल कहां जाएगा। कई प्रकार की चुनौती आने वाली है और वो चुनौतियों दुश्मनी का रूप लेते देर नहीं करती। और इसलिए हमें हमारे इन सारे challenges को हमें समझना है और ये सहज है किसी को हमसे कोई हमारा बुरा करना नहीं है। मनुष्य का स्वभाव है आपके यहां भी दो अफसर होंगे तो लगता है कि हां यार आगे चलकर इसका प्रमोशन हो जाएगा, मैं तो रह जाऊंगा। तो उनका फिर 10 साल पहले ही तू-तू शुरू हो जाता है। वैसा हर जगह पर होता है भई। और इसलिए मैं कहता हूं कि हम थोड़ा दूर का सोचकर के हमारे सामर्थ्य को protected environment, proper massaging इसके लिए आवश्यक बारीकियों को जो पहले की Law & Order और आज की चुनौतियों में बहुत बड़ा फर्क आने वाला है। पहले का तो बरकरार रखना ही पड़ेगा, नए के लिए भी हमें अपने आप को तैयार करना पड़ेगा। हमें देश के विरोध में जो ताकतें खड़ी हो रही हैं। जिस प्रकार हर चीज का उपयोग किया जा रहा है। सामान्य नागरिकी सुरक्षा के लिए, Law abiding cities के अधिकारों के लिए ऐसी किसी भी नकारात्मक शक्तियों के खिलाफ कठोर से कठोर बर्ताव ही हमारी जिम्मेदारी है। कोई उदारता नहीं चल सकती है जी। क्योंकि आखिरकार जो Law abiding citizen हैं, जो कानून को मानने वाला व्यक्ति है, वो कहां जाएगा भई। हमारा काम है और ऐसे 99 पर्सेंट सिटिजन वही होते हैं जी, 1 पर्सेंट का ही प्रोब्लम होता है। हमें उन 99 को विश्वास दिलाने के लिए उन 1 पर्सेंट के प्रति जरा भी उदारता बरतने की जरूरत नहीं है।
साथियों,
सोशल मीडिया की शक्ति को हमें कम करके नहीं आंकना चाहिए, इतने मात्र से उसको आंकना नहीं चाहिए। एक छोटी सी Fake News, पूरे देश में बड़ा बवाल खड़ा कर सकती है। हमें मालूम है एक आरक्षण की ऐसी अफवाह फैल गई, fake news चल गया, जिसके चलते क्या कुछ नुकसान झेलना पड़ा था देश को। 6-8 घंटे के बाद जब पता चला तो सब शांत हो गए, लेकिन तब तक तो नुकसान बहुत हो चुका था। और इसलिए लोगों को हमें एजुकेट करते रहना पड़ेगा कि कोई भी चीज आती है उसको फारवर्ड करने से पहले 10 बार सोचों भई। कोई भी चीज आती है उसको मानने से पहले जरा वेरिफाई करो और सारे प्लेटफार्म पर वेरिफिकेशन की व्यवस्था होती है। आप एक-दो-दस जगह पर आकर चक्कर लगाओगे तो कुछ न कुछ नया वर्जन मिल जाएगा। ये हमें लोगों को एजुकेट करना होगा। हमें ऐसी Fake World से Driven Society, उसी से डरी हुई सोसायटी, उसी से ड्राईव होने वाली सोसाइयटी इसके बीच में एक बहुत बड़ी शक्ति हमें खड़ी करनी होगी। टेक्नोलॉजिकल शक्ति खड़ी करनी होगी।
साथियों,
सिविल डिफेंस की आवश्यकता और जैसे अभी अमित भाई बता रहे थे भई, कुछ चीज हैं जिस पर हमारा ध्यान अभी हट रहा है। अमित भाई ने सही चीजों को पकड़ा है। आप लोग भी ये जो अनेक दशकों से चली हुई चीजें हैं, इसका बहुत उपयोग है स्कूल कॉलेज में भी इसको हमने सिविल डिफेंस से विषय हो, प्राइमरी हेल्थ वाले विषय हो, जो चीजें होती हैं, पहले भी करते थे हम लोग। Fire fighting की व्यवस्था हम पहले भी करते थे। इसको हमने सहज स्वभाव बनाना चाहिए और मैंने तो कहा है हर नगर पालिका, महानगर पालिका में सप्ताह में एक दिन किसी स्कूल में जाकर के Fire Fighting के क्षेत्र के लोग और पुलिस ने जाकर के ड्रिल करनी चाहिए। तो स्कूल के बच्चे देखेंगे तो उनका भी एजुकेशन हो जाएगा, जो सिस्टम है वो भी उनकी ड्रीम और प्रेक्टिस होती जाएगी। अगले हफ्ते दूसरे स्कूल, फिर एक स्कूल का दस साल में एक बार बारी आएगी बड़े शहर में तो। लेकिन हर पीढ़ी को पता चलेगा वे सिविल डिफेंस के संबंध में, Fire Fighting के संबंध में ये सारी ड्रिल नागरिक को करनी होती है। आपको भी एक बहुत बड़ी ताकत मिलेगी जी। ये सहज रूप से करने वाला काम है।
साथियों,
बीते वर्षों में आतंक के ग्राउंड नेटवर्क को ध्वस्त करने में सभी सरकारों ने बहुत जिम्मेदारी के साथ उसकी गंभीरता को समझकर के कुछ न कुछ करने का प्रयास किया है। कहीं पर शायद सफलता पहले मिली हो, कहीं पर देर से मिली हो, लेकिन हर एक को इसकी गंभीरता को आज समझाना पड़े ऐसा नहीं है। अब हमें इसमें ताकत को जोड़कर के इसको handle करना है जी। इसी प्रकार नक्सलवाद के हर फार्म को हमें पराजित करना पड़ेगा जी। बंदुक वाला भी है और कलम वाला भी नक्सलवाद है। हमें इन सबका काट निकालना पड़ेगा जी। हमारी युवा पीढ़ियों को भ्रमित करने के लिए ऐसी बचकाना बातें कर करके चल पड़ते हैं लोग और इतना नुकसान देश को हो रहा है, और आने वाले दिनों में कोई संभाल नहीं पाएगा जी। और इसलिए हमने जैसे नक्सल प्रभावित जिलों पर फोकस किया है, उसी प्रकार से उन्होंने अब अपना Intellectual दायरा उन जगह पर पहुंचाने का प्रयास किया है, जो आने वाली पीढ़ियों में विकृत मानसिकता पैदा कर सकते हैं। एक दूसरे के प्रति द्वेष पैदा कर सकते हैं। इमोशनल चीजों को out of proportion उछाल कर के समाज के अनेक टुकड़ों में खाई पैदा कर सकते हैं, बिखराव पैदा कर सकते हैं। देश की एकता और अखंडता सरदार वल्लभ भाई पटेल हमारी प्रेरणा हो, हमें ऐसी किसी चीजों को देश में चलने नहीं देना है जी। लेकिन बुद्धिपूर्वक करना पड़ेगा, समझदारी से करना पड़ेगा। हमारे Fight forces में भी ऐसी expertise तैयार करनी पड़ेगी। किसी राज्य में कोई घटना घटी है, तो हमारे टॉप एक्सपर्ट को वहां स्टडी के लिए भेजना चाहिए, कि विश्वविद्यालय जाओ तीन दिन वहां रहकर आओ, वहां पर हुआ है तो उन्होंने कैसे हैन्डल किया था, मामला कैसे पनपा था, उससे हम सीखते हैं। सीखने के लिए हमें लगातार कोशिश करनी चाहिए। और जो इस प्रकार की दुनिया वाले लोग हैं, उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी बहुत मदद मिल जाती है और वो इसमें चतुर होते हैं, और उनका चेहरा मोहरा इतना बड़ा सात्विक दिखता है। इतना बड़ा संविधान और कानून की भाषा में भी बोलते हैं प्रवृत्ति कुछ और करती है। इन सारी चीजों को दूध का दूध और पानी का पानी ये समझने की ताकत हमारे सिक्यूरिटी सामर्थ्य में होनी चाहिए जी। हमें स्थायी शांति के लिए तेजी से आगे बढ़ना बहुत जरूरी है।
साथियों,
जम्मू-कश्मीर हो या नॉर्थ ईस्ट हो आज हम विश्वास gain कर रहे हैं। Destructive ताकतों को भी मुख्य धारा में आने का मन करने लगा है। और जब हम विकास उनको नजर आता है, Infrastructure दिखता है, उनकी अपेक्षाएं पूरी हो रही हैं। तो वे भी अब शस्त्रों को छोड़कर के साथ चलने के लिए तैयार हो रहे हैं। उसी प्रकार से बॉर्डर और कोस्टल एरिया में हमें विकास की ओर देखना होगा। बजट में भी बाइब्रेंट विलेज की बात कही गई है। आपको इस पर सोचना चाहिए। आपके टॉप अफसर उनको बॉर्डर विलेज में नाइट स्टे करके आना चाहिए। आग्रह कीजिए मैं तो मंत्रियों से भी कहुंगा कि कम से कम एक साल में पांच या सात बॉर्डर विलेज में जाकर के दो-तीन घंटे बिताकर आइए। चाहे वो किसी स्टेट का बॉर्डर विलेज हो, चाहे इंटरनेशनल बॉर्डर विलेज हो, आपको बहुत कुछ बारीकियों को पता चलेगा।
साथियों,
हथियार ड्रग ये सारी जो तस्करी चल रही है। ड्रोन उसमें एक नया संकट घुसा हुआ है। हमें हमारे बॉर्डर और कोस्टल उनके लिए संकलन बहुत जरूरी है। हम कहेंगे भई नहीं ये करेगी, कोसटगार्ड ये करेगा इतने से बात बनेगी नहीं यहां, हमें ये संकलन बहुत अच्छे से बढ़ाना पड़ेगा। मुझे विश्वास है कि अगर हम मिलकर एक राष्ट्रीय परिपेक्ष के साथ आगे बढ़ेंगे तो हर चुनौती हमारे सामने बौनी सिद्ध हो जाएगी। और चीजों को हैंडल करने की हमारी ताकत भी बढ़ जाएगी। मुझे विश्वास है कि इस शिविर में जो चर्चा होगी, उसमें से कोई न कोई actionable point निकलेंगे। एक कलेक्टिव रोडमैप बनेगा, हर राज्य को साथ मिलकर के काम करना पड़ेगा। ये तेरा क्षेत्र है, ये मेरा क्षेत्र है, ये तेरा अधिकार है, ये मेरा अधिकार है, अगर हम उसमें उलझे रहेंगे तो उसका सबसे ज्यादा फायदा समाज विरोधी ताकतें जो कानून को मानते नहीं हैं वो इस अव्यवस्था का भरपूर फायदा उठा सकते हैं। इसलिए हमारे बीच समझदारी, संकलन, विश्वास और ये सब बड़ा प्रोफेशनल होना चाहिए जी। और ये जिम्मेदारी हमारे कैडर्स की है, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। और मुझे विश्वास है हम साथ मिलकर के करेंगे तो हम जो चाहते हैं वैसा परिणाम प्राप्त कर सकेंगे, और देश के लिए जो अवसर आया है, उस अवसर को पहली नजर में ताकत यूनिफार्म फोर्सेस से आती है जी। विश्वास का एक कारण यूनिफार्म फोर्सेस बन जाता है। हम उसको जितना ज्यादा ताकतवर बनाएंगे, जितना ज्यादा बहुत विजन के साथ काम करने वाला बनाएंगे, जितना ज्यादा नागरिकों के प्रति संवेदनशील बनाएंगे, बहुत लाभ होगा।
कुछ सुझाव मैंने डीजीपी कांफ्रेंस में कहें हैं। मैं सभी मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से आग्रह करुंगा कि डीजीपी कांफ्रेंस एक बहुत ही अच्छी Institutional के रूप में विकसित हुई है। खुलकर के चर्चा होती है और उसमें political element जीरो होता है। उसमें से जो बातें निकलती हैं, मैं सभी गृहविभाग के मेरे सचिव जो रहते हैं वो आईएएस कैडर के होते हैं और हमारे जो political field के लोग जो चुनकर के आकर के सरकार चलाते हैं। डीजीपी कांफ्रेस में जो बातें हुई उनसे पूरा briefing लेना चाहिए। उसमें actionalble point को हमें अपने राज्य में तुरंत लागू करना चाहिए। तब जाकर के फायदा होगा। हमें डीजीपी कांफ्रेंस से तो एक मीटिंग हो गई थी हमारे साहब होकर के आ गए हैं ये नहीं है जी। ये एक देश की सिक्यूरिटी को लेकर के काम करने के लिए है। अब जैसे एक सुझाव आया था कि भई हमारी पुलिस के लिए रहने के घर। अब मैंने एक सुझाव दिया था कि खासकर के बड़े शहरों में जो पुलिस थाने हैं या पुलिस स्टेशन हैं। आप जरा सोचिये कि उसमें से कुछ multistorey बन सकता है क्या? नीचे थाना चला रहेगा, लेकिन अगर ऊपर-ऊपर 20 मंजिला मकान बना दिया और र्क्वाटर बना दिये रहने के लिए तो उस इलाके के जितने पुलिस वाले हैं, उनके लिए घर वहीं मिल जाएगा। ट्रांसफर हो जाएगा, तो वो खाली करके चला जाएगा तो जो आएगा उसको वो ही मकान मिल जाएगा। तो पुलिस को आज शहर के बाहर 25 मिलोमीटर दूर घर मिलता है। उसको आने-जाने में दो-दो घंटे लगते हैं। हम जमीन का भी ज्यादा उस राज्य से बात कर सकते हैं, उस कार्पोरेशन से बात कर सकते हैं, जरा उसको highrise के लिए बना सकते हैं, जिससे फायदा होगा और ऊपर भी हम सिक्योरिटी के लिए व्यवस्थाएं आर्गेनाइज कर सकते हैं। हम चीजों को देखने के लिए व्यवस्थाएं आर्गेनाइज कर सकते हैं। यानि stand alone एक छोटा पुलिस थाना है, उसके बजाय आधुनिक पुलिस थाना भी बन जाएगा और उसी के ऊपर 20-25 मंजिला मकान बनकर के रहने के लिए घरों की व्यवस्था हो जाएगी।
और मैं जरूर मानता हूं बड़े शहर में 25-50 थाने तो ऐसे जरूर मिल सकते हैं कि जहां इस प्रकार के डेवलपमेंट की संभावना है। क्योंकि बड़े शहरों में 20 किलोमीटर 25 किलोमीटर बाहर जाना पड़ रहा है पुलिस के र्क्वाटर बनाने के लिए, और उसमें देखा होगा अब जैसे अमित भाई बता रहे थे कि भई बजट जो देते हैं, वो उपयोग नहीं हो रहा है। जितनी मात्रा में खर्च होना चाहिए, नहीं हो रहा है। भारत सरकार में एक ऐसी स्थिति शुरू हुई है कि मुझे बार-बार आग्रह करना पड़ता है कि जिस काम के लिए तय किया है उस बजट को उस काम के लिए उपयोग करो और समय सीमा में करो, पैसे खर्च नहीं कर पा रहे हम लोग। हमारे देश में ये स्थिति हमें नहीं चाहिए, हमें अपनी ताकत बढ़ानी होगी जी, हमारा सामर्थ्य बढ़ाना होगा, निर्णय शक्ति को बढ़ाना पड़ेगा। तब जाकर के इस धन का सही उपयोग समय सीमा में कर पाएंगे और जब समय सीमा में धन का उपयोग होता है तो वेस्टेज तो बचता ही बचता है, हमें लाभ बहुत होता है।
मैं एक और विषय के प्रति आपका ध्यान चाहता हूँ सभी राज्य की पुलिस और भारत सरकार की पुलिस जो हम स्क्रेपिंग पॉलिसी लाए हैं, उसकी स्टडी कीजिए और आपके जितने पुराने व्हीकल हैं। एक बार उनको स्क्रेप करने की दिशा में आप आगे बढ़िये। पुलिस के पास व्हीकल पुराना नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसकी efficiency से जुड़ा हुआ विषय है। उसके कारण दो फायदे होंगे। जो स्क्रेपिंग की बिजनेस में आने वाले लोग हैं, उनको assurance मिल जाएगा कि भई फलाने राज्य में 2 हजार व्हीकल्स स्क्रेपिंग के लिए already उन्होंने identify कर दिए। चलों मैं एक यूनिट लगा देता हूं। रिसाइकल का circular economy का काम हो जाएगा और हम अगर 2 हजार व्हीकल वहां जो नई व्हीकल बनाने वाली कंपनियां भी आ जाएगी कि भई अगर आप 2 हजार व्हीकल हमारे साथ लेते हो तो हम रेट इतना कम करेंगे, हम क्वालिटी में आपको जो चाहिए करके देंगे, इतना बढ़िया पैकेज बन सकता है जी। सभी हमारे पुलिस के पास आधुनिक से आधुनिक व्हीकल आ सकते हैं। हम उस पर सोचें और मैं चाहता हूं कि मिनिस्टर खुद बुलाए ऐसे जो स्क्रेपिंग की दुनिया में अच्छा काम कर सकते हैं उनको। और कहें हम चलो जमीन देते हैं आपको, आप स्क्रेपिंग के लिए recycle के unit लगा दीजिए। हम पहले पुलिस वाले व्हीकल दे देंगे आपको। हम पुलिस के लिए नए व्हीकल लेंगे। ये बहुत जरूरी है जी। भारत सरकार के भिन्न-भिन्न यूनिट भी अपने पुराने सारे कूड़ा-कचरा निकाल देते हैं। और नए तो हमारी environment efficiency सब पर फर्क आएगा। तो ऐसी छोटी-छोटी चीजों पर भी अगर आप कुछ निर्णय करके निकलेंगे और उसको समय सीमा में लागू करेंगे, आप देखिए आप लोगों को तो सुरक्षा देंगे, आप देश के विकास में भी बहुत बड़े भागीदार बन जाएंगे। और मुझे पूरा विश्वास है कि जिस गंभीरता से इस मीटिंग को आप लोगों ने लिया है और विशेषकर के इतनी बड़ी संख्या में मुख्यमंत्रियों का आकर के इस मीटिंग में बैठना सचमुच में तो जब मैंने आपको देखा तो मेरा मन करता है कि मुझे वहां आपके बीच में होना चाहिए था। लेकिन पहले से ही कुछ कार्यक्रमों का इतना प्रेशर रहा है कि मैं नहीं आ पाया। लेकिन जब इतने सारे माननीय मुख्यमंत्री जी आते हों तो एक प्रधानमंत्री का स्वाभाविक मन कर जाता है कि जरा आपके बीच बैठूं, मैं भी आपके साथ चाय पान करते करते काफी बातें करुं, लेकिन मैं नहीं कर पाया इस बार। गृहमंत्री जी आपके साथ बात कर रहे हैं वो जो भी विषय आपसे चर्चा करेंगे, मुझ तक जरूर पहुंचेगा और मेरे हिस्से में जो जिम्मेदारी होगी मैं सभी मुख्यमंत्रियों को, सभी गृहमंत्रियों को विश्वास दिलाता हूं कि आपकी आशा अपेक्षा पर खरा उतरने के लिए भारत सरकार भी उतना ही प्रयास करेगी। मेरा आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत बहुत शुभकामनाएं।