Sun, Jan 27, 2013 at 5:12 PM
जोश और होश दोनों का संदेश देती-पूनम माटिया की कलम
पूनम माटिया यूं तो काफी लम्बे समय से लेखन में हैं पर इस मामले में उनके छुपे रुस्तम होने का पता करीब दो वर्ष पूर्व ही चला। इसे आप यूं भी कह सकते हैं कि उनकी कला का यह पक्ष अभी अभी सामने आया। इस लिए पुस्तकों के मामले में वह नवोदित ही गिनी जाती हैं। बहुत पुरानी पर फिर भी नवोदित--है न कमाल ! जैसे जोश और होश का मिलन होने पर जवानी का एक नया ही रंग सामने आता है बिलकुल उसी तरह सामने आई हैं पूनम की रचनायें। हर रचना में एक गहरा अनुभव, एक पैनी दृष्टि, बहुत ही पते का कोई संदेश पर साथ ही किसी पहाड़ी नदी जैसा जोश भी। जब शीत लहर के अंत में सर्दी जा चुकी होती है लेकिन मौसम पूरी तरह गर्म भी नहीं हुआ लगता उस समय तन मन को अहसास होता है और खुद-ब-खुद होठों लगता से निकलने है--लो फिर वसंत आई। पूनम भी हमारे इस मानव समाज में और कलम की दुनिया में किसी वसंत की तरह आई है। पूनम की रचनायें और जिंदगी का अंदाज़ दोनों मिलकर समाज को स्वस्थ और नैतिक जीवन जीने के सलीके भी सिखाते हैं। पूनम की रचना और पूनम का अंदाज़ स्वस्थ समाज की नींव के निर्माण में भी योगदान डाल रहा है।
साहित्यिक क्षेत्रों और नवोदित रचनाकारों की श्रेणी में दिलशाद गार्डन, दिल्ली की पूनम माटिया (रुस्तगी) भले ही एक नया नाम है परन्तु उनके सम्पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला जाय तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं है जब यह रचनाकार भी अपने मजबूत विचारों के माध्यम से लेखन क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर लेगीं । उनकी रचनाओं में सुख-दुख, दूरदृष्टि, समर्पण की भावना, स्नेह और रचनात्मक एवं सकारात्मक सोच की झलक हर जगह देखने मिलती है ।
इन सारी गतिविधियों और लेखन में नई दिशा देने का सारा श्रेय वह अपने पति नरेश माटिया को देती है । जो पेशे से इंजीनियर है । इतना ही नहीं एक चर्चा में उन्होने ने बताया कि वह हरियाणा की रेवाड़ी की रहने वाली है । शहर की चकाचौंध के साथ गांव की मिट्टी की सौंधी महक, ताजी हवा ,रहन सहन आदि का भी पूनम की जिदंगी में काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा इसलिए उनकी रचनाओं में स्वतः ही इन सब की झलक भी मिलती है |
"पूनम मटिया" जी , जो विज्ञान और गणित की अध्यपिका हैं पर जिन्हें पढ़ने का शौक था वो धीरे-धीरे, बढते-बढते लेखन की ओर मुड़ा | उन्होंने अपनी कलम से लिखना शुरू किया और ये देख कर आश्चर्य ज्यादा हुआ कि उनकी रचनायो में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम है जबकि उर्दू तो कभी पढ़ी ही नहीं थी वही हिंदी भी सिर्फ माध्यमिक स्कूल तक पढ़ी थी और आज इतनी सुंदर-सुंदर रचनाओ से ‘स्वप्न श्रृंगार’ और "अरमान" उन्होंने लिख डाली | पूनम माटिया की कविताओ का यथार्थ हम एक बार छू ले, तो उसके बाद इन रचनाओ के नए अर्थ उदघाटित होते हैं |
सीधे-सहज शब्दों में जटिल अनुभूतियो की गांठे खुलने का एक अनोखा अनुभव होता है | उनकी कविता में एक नाद है , गीतात्मक संवेदना है , अपनी एक लयात्मक सरंचना है | इन कविताओ में संगीत की एक सूक्ष्म धारा बहती है , रगों में थरथराते लहू जैसी , जिसका सिर्फ अहसास किया जा सकता है |
२.मेहर टाइम्स समूह द्वारा प्रायोजित, श्रीमती अनु टंडन (सांसद) के हाथों से भारत गौरव अवार्ड ,२०१२
३.हम साथ साथ समूह द्वारा प्रायोजित, पंडित सुरेश नीरव जी ,साहित्यकार के हाथों से सरस्वती सम्मान
अबला पे अत्याचार हुआ है
सियासतदारों की नाक के नीचे
रक्षा के लिए प्रतिबद्ध
संविधानी तौर पे कटिबद्ध
पुलिसकर्मियों की खुली आँखों के सामने
जन सुविधाओं के चालकों ने
देश की अस्मत पर कुठाराघात किया है
ऐसे में हम कैसे रहे शांत
कैसे न उठाये आवाज़
क़ानून को ललकारना होगा
घ्रणित ,विक्षिप्त मानसिकता को
जड़ से उखाड़ना होगा
एक आवाज़ उठेगी तो
सौ संग में जुड़ जाएँगी
शायद सरकार के कान पे
जूँ कोई रेंग जायेगी
एक आवाज़ उठेगी तो
सौ संग में जुड़ जाएँगी
शायद सरकार के कान पे
जूँ कोई रेंग जायेगी .................................पूनम
जोश और होश दोनों का संदेश देती-पूनम माटिया की कलम
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| एक सम्मान समारोह में पूनम |
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| पूनम और नरेश माटिया |
साहित्यिक क्षेत्रों और नवोदित रचनाकारों की श्रेणी में दिलशाद गार्डन, दिल्ली की पूनम माटिया (रुस्तगी) भले ही एक नया नाम है परन्तु उनके सम्पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला जाय तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं है जब यह रचनाकार भी अपने मजबूत विचारों के माध्यम से लेखन क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर लेगीं । उनकी रचनाओं में सुख-दुख, दूरदृष्टि, समर्पण की भावना, स्नेह और रचनात्मक एवं सकारात्मक सोच की झलक हर जगह देखने मिलती है ।
इन सारी गतिविधियों और लेखन में नई दिशा देने का सारा श्रेय वह अपने पति नरेश माटिया को देती है । जो पेशे से इंजीनियर है । इतना ही नहीं एक चर्चा में उन्होने ने बताया कि वह हरियाणा की रेवाड़ी की रहने वाली है । शहर की चकाचौंध के साथ गांव की मिट्टी की सौंधी महक, ताजी हवा ,रहन सहन आदि का भी पूनम की जिदंगी में काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा इसलिए उनकी रचनाओं में स्वतः ही इन सब की झलक भी मिलती है |
"पूनम मटिया" जी , जो विज्ञान और गणित की अध्यपिका हैं पर जिन्हें पढ़ने का शौक था वो धीरे-धीरे, बढते-बढते लेखन की ओर मुड़ा | उन्होंने अपनी कलम से लिखना शुरू किया और ये देख कर आश्चर्य ज्यादा हुआ कि उनकी रचनायो में गंगा जमुनी संस्कृति का संगम है जबकि उर्दू तो कभी पढ़ी ही नहीं थी वही हिंदी भी सिर्फ माध्यमिक स्कूल तक पढ़ी थी और आज इतनी सुंदर-सुंदर रचनाओ से ‘स्वप्न श्रृंगार’ और "अरमान" उन्होंने लिख डाली | पूनम माटिया की कविताओ का यथार्थ हम एक बार छू ले, तो उसके बाद इन रचनाओ के नए अर्थ उदघाटित होते हैं |
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| राजीव गाँधी अवार्ड प्राप्त करते हुए पूनम का एक अंदाज़ |
ख़ुशी होती है यह जानकर कि उन्हे इतने अल्प काल में ही विभिन्न समूहों की तरफ से सम्मानित भी किया जा चूका है।
१.सीमापुरी टाइम्स समूह द्वारा प्रायोजित, श्रीप्रकाश जायसवाल (कोयला मंत्री ) के हाथों से राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड ,२०१२२.मेहर टाइम्स समूह द्वारा प्रायोजित, श्रीमती अनु टंडन (सांसद) के हाथों से भारत गौरव अवार्ड ,२०१२
३.हम साथ साथ समूह द्वारा प्रायोजित, पंडित सुरेश नीरव जी ,साहित्यकार के हाथों से सरस्वती सम्मान
दिल्ली में एक दामिनी का मामला सामने आया तो दर्द के उस तुफान में पूनम भी शामिल रही। उसके दिल से भी एक तड़प निकली--कहने लगी--एक आवाज़ उठेगी तो सौ संग में जुड़ जाएँगी.........!
देश की राजधानी में एक लड़की की अस्मत दागदार ,तार तार हुई है .......ऐसे में कोई कैसे हंस सकता है ........सभी को अपनी शक्ति के अनुसार इस घटना का विरोध करना चाहिए और खासकर एक लेखक और कवी कवि को अपने शब्दों के माध्यम से अपना योगदान देना चाहिए ........
दिल पे अघात हुआ है अबला पे अत्याचार हुआ है
सियासतदारों की नाक के नीचे
रक्षा के लिए प्रतिबद्ध
संविधानी तौर पे कटिबद्ध
पुलिसकर्मियों की खुली आँखों के सामने
जन सुविधाओं के चालकों ने
देश की अस्मत पर कुठाराघात किया है
ऐसे में हम कैसे रहे शांत
कैसे न उठाये आवाज़
क़ानून को ललकारना होगा
घ्रणित ,विक्षिप्त मानसिकता को
जड़ से उखाड़ना होगा
एक आवाज़ उठेगी तो
सौ संग में जुड़ जाएँगी
शायद सरकार के कान पे
जूँ कोई रेंग जायेगी
एक आवाज़ उठेगी तो
सौ संग में जुड़ जाएँगी
शायद सरकार के कान पे
जूँ कोई रेंग जायेगी .................................पूनम
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