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Friday, October 28, 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया दुर्गम रास्तों का मंत्र

प्रविष्टि तिथि: 28 OCT 2022 6:33PM by PIB Delhi 

कठिनाइयों के हर पहलू का सुझाया बारीकी से समाधान 

राज्यों के गृह मंत्रियों के 'चिंतन शिविर' में वीडियो के ज़रिए प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ


नई दिल्ली
: 28 अक्टूबर 2022: (पी आई बी//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)

नमस्कार!

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री अमित शाह, अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रिगण, गृह मंत्री जी, राज्यों के पुलिस महानिदेशक, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, अन्य सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों ! आजकल देश में उत्सव का माहौल है। ओणम, ईद, दशहरा, दुर्गा पूजा, दीपावली सहित अनेक उत्सव शांति और सौहार्द के साथ देशवासियों ने मनाए हैं। अभी छठ पूजा समेत कई अन्य त्यौहार भी हैं। विभिन्न चुनौतियों के बीच, इन त्यौहारों में देश की एकता का सशक्त होना, आपकी तैयारियों का भी प्रतिबिंब हैं। संविधान में भले कानून और व्यवस्था राज्यों का दायित्व है, लेकिन ये देश की एकता-अखंडता के साथ भी उतने ही जुड़े हुए हैं। सूरजकुंड में हो रहा गृह मंत्रियों का ये चिंतन शिविर, कॉपरेटिव फेडरेलिज्म का भी एक उत्तम उदाहरण है। हर एक राज्य एक दूसरे से सीखे, एक दूसरे से प्रेरणा लें, देश की बेहतरी के लिए मिल-जुलकर के काम करे, ये संविधान की भी भावना है और देशवासियों के प्रति हमारा दायित्व भी है।

साथियों,

आज़ादी का अमृतकाल हमारे सामने है। आने वाले 25 साल देश में एक अमृत पीढ़ी के निर्माण के हैं। ये अमृत पीढ़ी, पंच प्रणों के संकल्पों को धारण करके निर्मित होगी। विकसित भारत का निर्माण, गुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता और सबसे प्रमुख बात नागरिक कर्तव्य, इन पंच प्रणों का महत्व आप सभी भली-भांति जानते हैं, समझते हैं। ये एक विराट संकल्प है, जिसको सिर्फ और सिर्फ सबका प्रयास से ही सिद्ध किया जा सकता है। तरीके अपने-अपने हो सकते हैं, रास्ते, priority अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन ये पंच प्रण देश के हर राज्य में हमारी गवर्नेंस की प्रेरणा होने चाहिए। जब ये सुशासन के मूल में होंगे, तो भारत के सामर्थ्य का विराट विस्तार होगा। जब देश का सामर्थ्य बढ़ेगा तो देश के हर नागरिक, हर परिवार का सामर्थ्य बढ़ेगा। यही तो सुशासन है, जिसका लाभ देश के हर राज्य को समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसमें आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

यहां आप में से अधिकतर या तो राज्य को नेतृत्व दे रहे हैं, या फिर सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कानून व्यवस्था का सीधा संबंध, राज्य के विकास से है। इसलिए राज्यों में विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में आप सभी के निर्णय और नीतियां और आपकी रीति ये बहुत अहम हैं।

साथियों,

कानून-व्यवस्था के पूरे तंत्र का विश्वसनीय होना, जनता के बीच उनका Perception क्या है, ये भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आपने देखा है कि जब भी कोई natural calamity  होती है, प्राकृतिक आपदा हाती है, तो इन दिनों NDRF की, SDRF की एक पहचान बनी हुई है। उनको यूनिफार्म, वो संकट के समय पहले पहुंच जाना और उसके कारण देशवासियों के मन में इनके प्रति एक विश्वास बना है कि भाई, ये आए हैं चलिए संभल जाएगा, ये जो कह रहे हैं मानना चाहिए। इनकी बातें अगर स्वीकार करेंगे तो हमारा नुकसान कम होगा। और आप देखिए NDRF में है कौन भाई? SDRF में है कौन? आप ही के सब साथी हैं। सुरक्षाबल के जवान ही हैं। लेकिन समाज में उनके प्रति बड़ी श्रद्धा बन गई है। आपदा के समय में जैसे ही NDRF-SDRF की टीम पहुंचती है, वैसे ही लोगों को संतोष होने लगता है कि अब एक्सपर्ट टीम पहुंच गई है, अब ये अपना काम कर लेंगे।

साथियों,

अपराध वाली किसी भी जगह पर जैसे ही पुलिस पहुंचती है, लोगों में ये भाव आता है कि सरकार पहुंच गई। कोरोना काल में भी हमने देखा है कि किस तरह पुलिस की साख बेहतर हुई थी। पुलिस के लोग जरूरतमंदों की मदद कर रहे थे, जरूरी संसाधान जुटा रहे थे, अपनी ही जिंदगी को दांव पर लगा रह थे। यानि कर्तव्य परायणता में कोई कमी नहीं है, जरूरत अच्छा Perception बनाए रखने की भी है, इसके लिए पुलिस बल को प्रेरित करना, उसके लिए प्लान करना, हर छोटी-मोटी चीजों पर लगातार मार्गदर्शन करते रहना, कुछ गलत होता है तो रोकना, ये हमारी एक जीवंत प्रक्रिया होनी चाहिए, ऊपर से नीचे तक हर पल होनी चाहिए।

साथियों,

हमें एक बात और समझनी होगी। अब कानून व्यवस्था किसी एक राज्य के दायरे में सिमटी रहने वाली व्यवस्था नहीं रह गई है। अब अपराध Inter-state और Inter-national हो रहे हैं। यानि टेक्नोलॉजी की मदद से एक राज्य में बैठे अपराधी, दूसरे राज्य में भयंकर अपराध करने की ताकत रखते हैं। देश की सीमा से बाहर बैठे अपराधी भी टेक्नोलॉजी का जमकर गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हर राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेल, केंद्र और राज्य की एजेंसियों का आपस में तालमेल ये बहुत जरूरी है। और इसीलिए आपको मालूम होगा मैंने डीजीपी कांफ्रेंस में कहा था कि दो adjoining state होते हैं उसके जो adjourning district होते हैं उन्होंने periodically बैठकर के दोनों राज्यों की दोनों जिलों की समस्याओं का संकलन करना चाहिए, साथ मिलकर काम करना चाहिए। उसी में से ताकत बनेगी। कई बार केंद्रीय एजेंसियों को कई राज्यों में एक साथ जांच करनी पड़ती है। दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। इसलिए हर राज्य का दायित्व है कि चाहे राज्य की एजेंसी हो, चाहे केंद्र की एजेंसी हो या संबंधित कहीं किसी और राज्य से संपर्क आता है। सभी एजेंसियों को एक दूसरे को पूरा सहयोग देना चाहिए। कोई बड़ा है, कोई छोटा है, किसका अधिकार है उसी में कभी-कभी तो हम देखते हैं एक आधी एफआईआर रजिस्टर नहीं हुई, क्यों नहीं हुई तो बोले ये तय नहीं हो रहा है कि वो जो जगह है वो इस थाने में पड़ती है कि उस थाने में पड़ती है। ये जो चीजें हैं वो सिर्फ पुलिस-थाने तक नहीं हैं। राज्यों के बीच भी हो जाती हैं। केंद्र और राज्यों के बीच में  हो जाती हैं। भारत और विदेश की व्यवस्थाओं के साथ हो जाती हैं। इसलिए हमारी efficiency के लिए, हमारे outcome के लिए सामान्य नागरिक को सुरक्षा देने के लिए हमारे बीच में तालमेल, संकलन, सहयोग बहुत अनिवार्य है। और इसके लिए जितना संकलन बढ़ेगा, आपके राज्य की भी ताकत बढ़ने वाली है।

साथियों,

साइबर क्राइम हो या फिर ड्रोन टेक्नॉलॉजी का हथियारों और ड्रग्स तस्करी में उपयोग, इनके लिए हमें नई टेक्नॉलॉजी पर काम करते रहना होगा। अब देखिए हम 5G के युग में घुस गए हैं, तेजी से 5G पहुंचने वाला है। अब 5G के जितने लाभ हैं, इतनी ही जागरुकता भी जरूरी रहेगी।  5G से facial recognition technology, automatic number-plate recognition technology, drones और CCTV जैसी टेक्नॉलॉजी की परफॉर्मेंस में कई गुणा सुधार होने वाला है। लेकिन हम जितनी तेजी से आगे बढ़ेंगे, जो क्राइम करने वाला वर्ल्ड है, उसका भी ग्लोबलाइजेशन हो चुका है। वो भी interested हो चुका है। वो भी टेक्नोलॉजी में forward हो चुके हैं। मतलब हमें उनसे दस कदम आगे जाना होगा। हमें हमारी कानून व्यवस्था को भी स्मार्ट बनाना इसके लिए बहुत ही आग्रह से काम करना पड़ेगा।

साथियों,

मेरा आग्रह ये भी है कि टेक्नोलॉजी को कृपा करके बजट के तराजू से ना तौलें। और मेरा सभी आदरणीय मुख्यमंत्रियों से, सभी आदरणीय गृहमंत्रियों से इस विषय में एक टीम बनाकर के दुनिया में criminal world की किस टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है, उपलब्ध टेक्नोलॉजी हमारे लोगों को कैसे सुरक्षा दे सकती है, इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए और इसमें जो बजट जाएगा वो बाकी सैकड़ों खर्चों को बचाने का कारण बन जाएगा। और इसलिए टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल पूरे पुलिस तंत्र को तो मजबूत करता ही करता है, सामान्य मानवी को सुरक्षा देना का एक विश्वास नीचे तक हम पहुंचा सकते हैं। टेक्नोलॉजी, Crime Prevention में भी मदद करती है और Crime  detection में भी, Crime Investigation में भी बहुत काम आती है। आज देखिए, कितने ही अपराधी, CCTV की वजह से पकड़े जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी अभियान के तहत शहरों में बनाए गए आधुनिक कमांड और कंट्रोल सिस्टम से भी बहुत मदद मिल रही है।

साथियों,

इस प्रकार की नई टेक्नॉलॉजी के विकास के लिए केंद्र सरकार ने पुलिस टेक्नॉलॉजी मिशन भी शुरु किया है। अनेक राज्य भी इसमें अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन ये अनुभव आ रहा है कि हमारे अलग-अलग प्रयोग होने के कारण हमारी टेक्नोलॉजी एक दूसरे के साथ बात नहीं करती है, और इसलिए हमारी एनर्जी waste होती है। वो जो भी मेटरियल है, वो उस राज्य तक सीमित रहता है।  हमें कॉमन प्लेटफार्म के विषय में बड़ा मन रखकर के सोचना ही पड़ेगा। किसी एक के पास बहुत उत्तम चीज है तो ये मानकर के न बैठें कि मेरे पास है, मैं तो किसी को दूंगा नहीं, मैं अपनी ताकत बनाए रखूँगा, एक समय आएगा कि इतनी उत्तम टेक्नोलॉजी होगी और लोगों के सहयोग में नहीं होगी तो stand alone निकम्मी हो जाएगी। और इसलिए टेक्नोलॉजी में भारत के संदर्भ में सोचना हमारी सभी best practices, best innovation कॉमन लिंक वाले ही होने चाहिए, Inter operable होने चाहिए, एक दूसरे के साथ लगातार सरलता से बात कर सके ये व्यवस्थाएं अनिवार्य है।

साथियों,

आज फॉरेंसिक साइंस का महात्मय बढ़ रहा है, और वो सिर्फ पुलिस महकमे तक सीमित नहीं है जी! Legal fraternity को फॉरेंसिक साइंस को समझना पड़ेगा, Judiciary को फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा, Even हॉस्पिटल को भी फॉरेंसिक साइंस समझना पड़ेगा। इन सबके प्रयत्न से ही फॉरेंसिक साइंस का उपयोग क्राइम और क्रिमिनल को सजा दिलाने में बहुत काम आ सकता है।  अकेले पुलिस के पास फॉरेंसिक साइंस की कुछ व्यवस्था हैं, ये enough नहीं होगा। और इसलिए हर राज्य में हमें संकलित और संतुलित व्यवस्था हर राज्य को गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की और उसकी क्षमता आज दुनिया के 60-70 देश फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का लाभ ले रहे हैं। हमारे राज्यों को भी बढ़-चढ़कर लाभ लेना चाहिए। ये पूरी तरह futuristic technology driven व्यवस्था है। Human Resource Development का भी वहां काम है, नए-नए टेक्नोलॉजी टूल बनाने का भी काम है। और बड़े कठिन केसेस को सुलझाने में भी वो लैब काम आ रही है। मैं समझता हूं कि इस व्यवस्था का उपयोग सभी राज्य सक्रियता से कैसे करें?

साथियों,

कानून व्यवस्था को बनाए रखना, एक 24x7 वाला काम है। लेकिन किसी भी काम में ये भी आवश्यक है कि हम निरंतर प्रकियाओं में सुधार करते चलें, उन्हें आधुनिक बनाते चलें। बीते वर्षों में भारत सरकार के स्तर पर कानून व्यवस्था से जुड़े जो Reforms हुए हैं, उन्होंने पूरे देश में शांति का वातावरण बनाने में मदद की है। आप भी जानते हैं कि भारत की विविधता, भारत की विशालता की वजह से हमारे law enforcement system पर कितना दबाव होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारा ये सिस्टम सही दिशा में ऊर्जा लगाए। वर्ना हमने देखा है कि कितने ही अनावश्यक केसों में, छोटी-छोटी गलतियों की जांच में ही पुलिस डिपार्टमेंट की ऊर्जा चली जाती है। इसलिए हमने व्यापार-कारोबार से जुड़े अनेकों प्रावधानों को अब decriminalize कर दिया है, उन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर निकाल दिया है। डेढ़ हजार से ज्यादा पुराने कानूनों को समाप्त करके भविष्य का बहुत बड़ा बोझ कम किया गया है। मैं तो राज्यों से भी आग्रह करता हूं आप भी अपने यहां कानूनों को evaluate कीजिए। आजादी के पहले के जितने कानून हैं, उनको वर्तमान तरीकों के साथ बदलिए। हर कानून में क्रिमिनल एंगल और निर्दोष नागरिकों को परेशानी वो वक्त चला गया है जी।

साथियों,

सरकार को अब जैसे स्वामित्व योजना, ये स्वामित्व योजना के तहत देश के गांवों में ड्रोन टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रॉपर्टी कार्ड वितरित कर रहे हैं, वो भी जमीन से जुड़े विवादों को कम करेंगे, झगड़े खत्म होंगे गांव के। वरना गांव की समस्या ज्यादातर एक फुट जमीन जिसने ले ली उसी में से बड़े-बड़े झगड़े हो जाते थे।

साथियों,

परोक्ष और अपरोक्ष रूप से किए गए ऐसे अनेक प्रयासों से law enforcement एजेंसियों को भी अपनी प्राथमिकता तय करने में बहुत मदद मिली है। लेकिन हम जब पूरे कैनवास पर चीजों को रखकर के अपनी स्ट्रेटजी में बदलाव नहीं करेंगे, 20-30-50 साल पुरानी पद्धतियों से चलेंगे तो शायद इन चीजों का फायदा नहीं मिलेगा। बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों ने भी कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है। आतंकवाद हो, हवाला नेटवर्क हो, भ्रष्टाचार हो, इस पर आज देश में अभूतपूर्व सख्ती दिखाई जा रही है। लोगों में विश्वास पनपने लगा है। UAPA जैसे कानूनों ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई में व्यवस्थाओं को ताकत दी है। यानि एक तरफ हम देश के law enforcement system का, उसकी क्षमता बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ उन पर अनावश्यक बोझ को भी हटा सकें।

साथियों,

एक और विषय हमारे देश की पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे आज देश में One Nation, One Ration Card की व्यवस्था बनी है, One Nation-One Mobility Card की व्यवस्था हो रही है, One Nation-One Grid बना है, One Nation-One Sign Language बनी है, वैसे ही पुलिस की वर्दी को भी लेकर भी ऐसी ही कोई अप्रोच अपनाई जा सकती है। क्या हमारे राज्य मिल बैठकर के, इससे बहुत लाभ होंगे, एक तो Quality material product होगा, क्योंकि mass scale पर होगा। कैप होगी तो करोड़ों कैपेज की जरूरत पड़ेगी। बेल्ट चाहिए तो करोड़ों में चाहिएगा। और देश को कोई भी नागरिक कहीं पर भी जाएगा देखते ही उसको पता चलेगा हां ये पुलिस वाला है। अब जैसे पोस्ट ऑफिस का डिब्बा। हिन्दुस्तान में कोई पढ़ा-लिखा, अनपढ़ आदमी को मालूम है ये पोस्ट का डिब्बा है। यानि कागज डाला वहां पहुंचता है। एक पहचान होती है। हमारे लिए भी आवश्यक है कि हमारे देश के पुलिस बेड़े में, हम सोंचे, साथ मिलकर के सोंचे, कोई किसी पर थोपने की जरूरत नहीं है, एक evolve करें। आप देखिए बहुत बड़ा लाभ होगा और एक दूसरे की ताकत में इजाफा होगा। One Nation- One Police Uniform, हां उस राज्य का एक टैग हो सकता है, उस राज्य का एक नंबर हो सकता है, लेकिन पहचान कॉमन बने, इस पर सोचें, मैं एक विचार के रूप में रख रहा हूं। ना मैं कोई आपसे आग्रह भी करता हूं। मैं सिर्फ एक विचार रखता हूं। और इस विचार पर चर्चा कीजिए। कभी ठीक लगे 5 साल 50 साल 100 साल के बाद भी उपयोगी लगेगा, तो जरूर देखिए। उसी प्रकार से अलग-अलग प्रकार की पुलिस के नए-नए विभाग शुरू हुए हैं। Expertise आई है।

अब हम देखिए दुनिया में दूरिज्म का बहुत बड़ा मार्केट है। भारत में टूरिज्म की संभावनाएं बहुत बढ़ रही हैं। विश्व से बहुत बड़ी मात्रा में टूरिस्टों का भारत में आने का प्रवाह बढ़ना ही बढ़ना है। आज दुनिया में कई देश जो टूरिज्म के क्षेत्र में बहुत आगे हैं। वहां टूरिज्म के लिए काम करने वाली पुलिस बनाई जाती है। उनकी ट्रेनिंग अलग होती है। उनको languages भी सिखाई जाती है।  उनके behaviour पूरी तरह चेंज होता है। और यात्रियों को भी विदेश के टूरिस्टों को भी पता होता है कि भाई ये मदद करने के लिए पुलिस की व्यवस्था है और वो पुलिस होने के कारण वो Police Enforcement  जो Institutes है उससे भी बड़ी आसानी से संकलन कर पाता है। कभी न कभी हमे हमारे देश में इस सुविधा की expertise को डेवलप करना ही पड़ेगा। ताकि भारत में टूरिज्म के लिए  विश्वभर से आने वाले आदमी और एक पूंजी निवेश के लिए आने वाले में बहुत फर्क है। टूरिस्ट तुरंत आपका एंबेसडर बन जाता है। अच्छी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगा, बुरी चीज भी वही दुनिया में ले जाएगा। पूंजी निवेश जो करता है उसको इस काम में काफी समय लग जाता है अगर गलत हो गया तो। लेकिन टूरिस्ट तो दो दिन में ही खबर पहुंचा देता है अरे यार भाई यहां तो ये हाल है।  और इसलिए आज भारत में भी मिडिल क्लास का  बल्क इतना बढ़ रहा है टूरिज्म को लेकर के बहुत बदलाव आ रहा है। अब टूरिज्म और ट्रैफिक नई समस्या आ रही है। अब हम एडवांस में नहीं सोचेंगे, alternate नहीं सोचेंगे तो वहीं टूरिज्म के हमारे सेंटर्स तो कोई बदलने वाले नहीं है। हम कहें कि भाई आप  शिमला नहीं वहाँ जाइये तो ये तो होने से शिमला जिसको जाना है शिमला ही जाएगा। नैनीताल जाना है वो नैनीताल ही जाएगा, श्रीनगर जाना है वो श्रीनगर ही जाएगा, गुलमर्ग जाना है वो गुलमर्ग ही जाएगा। हमें व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा।

साथियों,

हमने देखा है, कोरोना के समय में जब पुलिस के लोग अपने क्षेत्रों के लोगों को फोन करके पूछते थे और  खासकर के मैंने देखा है कुछ शहरों में senior citizen के लिए पुलिस में जो बड़ी आयु के लोग हैं, जिनसे अब ज्यादा मजदूरी करवाना उनके साथ भी अत्याचार है। उन्होंने स्वेच्छा से ऐसे काम लिए हैं। और वे Senior Citizens को लगातार पूछते हैं ठीक हो ना, कहीं बाहर तो जाने वाले नहीं हो ना, घर बंद करके जाने वाले नहीं हो ना, इसके कारण नागरिकों का जो confidence बढ़ता है। वो एक प्रकार से आपकी ताकत बन जाता है। इस चीज को हम जितना ज्यादा उपयोग कर सकते हैं, professional way में कर सकते हैं और पूरी तरह जीवंतता हो, संवेदनशीलता हो, आप देखिए समाज जीवन में ये फोन आपका सप्ताह में अगर  किसी सीनियर सिटिजन को जाता है वो महीने भर दुनिया को कहता रहता है कि भई पुलिस थाने से बिलकुल फोन आ जाता है, हर बुधवार को पूछ लेते हैं मेरी कोई दिक्कत है नहीं, इन चीजों बहुत बड़ी ताकत होती है। जो perception की लड़ाई है ना, ये आपके सारे perception बनाने वाले लोग हैं। हमें एक और काम की तरफ बहुत सजग होने की जरूरत है जी, Technological Intelligence इसकी अपनी ही एक ताकत है, उसका उपयोग है लेकिन हम Human Intelligence को नकार नहीं सकते हैं। उस विधा को पुलिस डिपार्टमेंट ने आज से सौ साल, कितनी ही टेक्नोलॉजी बदल जाए, 100 साल के बाद उसकी जरूरत पड़ने वाली है। उस institute को जितना ताकतवर बना सकते हैं बनाइये। उसमें जो सामर्थ है, उसकी जो नजरें हैं वो उसकी जो बातचीत में से जो पकड़ के ले आता है, ये आपकी बहुत बड़ी ताकत होती है। और अगर दोनों क्षेत्रों में ताकत है फिर तो आप चीजों को बहुत आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि भई ये संभावना है, दस दिन के बाद ये संभावना दिखती है, ये चल रहा है, चलो हम देखते हैं, यहां कुछ लोग आते हैं जाते हैं, कुछ हो रहा है, तुरंत पता चलेगा। और मैं समझता हूं, इसके कारण हमारी व्यवस्थाएं बहुत चुस्त हो जाएगी। जो 50 बार क्राइम करने वालो को सोचने के लिए मजबूर करेगी।

साथियों,

हमें एक और बात भी समझनी है। आज वैश्विक स्तर पर भारत जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से भारत की चुनौतियां भी बढ़ने वाली हैं। पहले वो उपेक्षा की वृत्ति होती है, फिर उसका जरा मजाक उड़ाने की वृत्ति बनती है, फिर भी आप आगे बढ़ते हैं। तो फिर थोड़ी competition का भाव आ जाता है, प्रतिस्पर्धा आ जाती है। फिर भी आगे बढ़ते हैं, तो दुश्मनी का रुप ले लेती है। विश्व की बहुत सारी ताकतें होंगी जो नहीं चाहेंगी की उनके देश के संदर्भ में भारत कुछ सामर्थ्यवान बने। फलाने विषय में उनकी expertise है उसमें भारत न घुसे। फलानी प्रोडक्ट उनकी बपौती है, अगर उसमें भारत प्रोडक्शन में चला गया तो मार्केट पर भारत कब्जा कर लेगा। भारत बहुत बड़ा बाजार है, भारत खुद बनाने लग जाएगा तो फिर तो हमारा माल कहां जाएगा। कई प्रकार की चुनौती आने वाली है और वो चुनौतियों दुश्मनी का रूप लेते देर नहीं करती। और इसलिए हमें हमारे इन सारे challenges को हमें समझना है और ये सहज है किसी को हमसे कोई हमारा बुरा करना नहीं है। मनुष्य का स्वभाव है आपके यहां भी दो अफसर होंगे तो लगता है कि हां यार आगे चलकर इसका प्रमोशन हो जाएगा, मैं तो रह जाऊंगा। तो उनका फिर 10 साल पहले ही तू-तू शुरू हो जाता है। वैसा हर जगह पर होता है भई। और इसलिए मैं कहता हूं कि हम थोड़ा दूर का सोचकर के हमारे सामर्थ्य को protected environment, proper massaging इसके लिए आवश्यक बारीकियों को जो पहले की Law & Order और आज की चुनौतियों में बहुत बड़ा फर्क आने वाला है। पहले का तो बरकरार रखना ही पड़ेगा, नए के लिए भी हमें अपने आप को तैयार करना पड़ेगा। हमें देश के विरोध में जो ताकतें खड़ी हो रही हैं। जिस प्रकार हर चीज का उपयोग किया जा रहा है। सामान्य नागरिकी सुरक्षा के लिए, Law abiding cities के अधिकारों के लिए ऐसी किसी भी नकारात्मक शक्तियों के खिलाफ कठोर से कठोर बर्ताव ही हमारी जिम्मेदारी है। कोई उदारता नहीं चल सकती है जी।  क्योंकि आखिरकार जो Law abiding citizen हैं, जो कानून को मानने वाला व्यक्ति है, वो कहां जाएगा भई। हमारा काम है और ऐसे 99 पर्सेंट सिटिजन वही होते हैं जी, 1 पर्सेंट का ही प्रोब्लम होता है। हमें उन 99 को विश्वास दिलाने के लिए उन 1 पर्सेंट के प्रति जरा भी उदारता बरतने की जरूरत नहीं है।

साथियों,

सोशल मीडिया की शक्ति को हमें कम करके नहीं आंकना चाहिए, इतने मात्र से उसको आंकना नहीं चाहिए। एक छोटी सी Fake News, पूरे देश में बड़ा बवाल खड़ा कर सकती है। हमें मालूम है एक आरक्षण की ऐसी अफवाह फैल गई, fake news चल गया, जिसके चलते क्या कुछ नुकसान झेलना पड़ा था देश को। 6-8 घंटे के बाद जब पता चला तो सब शांत हो गए, लेकिन तब तक तो नुकसान बहुत हो चुका था। और इसलिए लोगों को हमें एजुकेट करते रहना पड़ेगा कि कोई भी चीज आती है उसको फारवर्ड करने से पहले 10 बार सोचों भई। कोई भी चीज आती है उसको मानने से पहले जरा वेरिफाई करो और सारे प्लेटफार्म पर वेरिफिकेशन की व्यवस्था होती है। आप एक-दो-दस जगह पर आकर चक्कर लगाओगे तो कुछ न कुछ नया वर्जन मिल जाएगा। ये हमें लोगों को एजुकेट करना होगा। हमें ऐसी Fake World से Driven Society, उसी से डरी हुई सोसायटी, उसी से ड्राईव होने वाली सोसाइयटी इसके बीच में एक बहुत बड़ी शक्ति हमें खड़ी करनी होगी। टेक्नोलॉजिकल शक्ति खड़ी करनी होगी।     

साथियों,

सिविल डिफेंस की आवश्यकता और जैसे अभी अमित भाई बता रहे थे भई, कुछ चीज हैं जिस पर हमारा ध्यान अभी हट रहा है। अमित भाई ने सही चीजों को पकड़ा है। आप लोग भी ये जो अनेक दशकों से चली हुई चीजें हैं, इसका बहुत उपयोग है स्कूल कॉलेज में भी इसको हमने सिविल डिफेंस से विषय हो, प्राइमरी हेल्थ वाले विषय हो, जो चीजें होती हैं, पहले भी करते थे हम लोग। Fire fighting की व्यवस्था हम पहले भी करते थे। इसको हमने सहज स्वभाव बनाना चाहिए और मैंने तो कहा है हर नगर पालिका, महानगर पालिका में सप्ताह में एक दिन किसी स्कूल में जाकर के Fire Fighting के क्षेत्र के लोग और पुलिस ने जाकर के ड्रिल करनी चाहिए। तो स्कूल के बच्चे देखेंगे तो उनका भी एजुकेशन हो जाएगा, जो सिस्टम है वो भी उनकी ड्रीम और प्रेक्टिस होती जाएगी। अगले हफ्ते दूसरे स्कूल, फिर एक स्कूल का दस साल में एक बार बारी आएगी बड़े शहर में तो। लेकिन हर पीढ़ी को पता चलेगा वे सिविल डिफेंस के संबंध में, Fire Fighting के संबंध में ये सारी ड्रिल नागरिक को करनी होती है। आपको भी एक बहुत बड़ी ताकत मिलेगी जी। ये सहज रूप से करने वाला काम है।

साथियों,

बीते वर्षों में आतंक के ग्राउंड नेटवर्क को ध्वस्त करने में सभी सरकारों ने बहुत जिम्मेदारी के साथ उसकी गंभीरता को समझकर के कुछ न कुछ करने का प्रयास किया है। कहीं पर शायद सफलता पहले मिली हो, कहीं पर देर से मिली हो, लेकिन हर एक को इसकी गंभीरता को आज समझाना पड़े ऐसा नहीं है। अब हमें इसमें ताकत को जोड़कर के इसको handle करना है जी। इसी प्रकार नक्सलवाद  के हर फार्म को हमें पराजित करना पड़ेगा जी। बंदुक वाला भी है और कलम वाला भी नक्सलवाद है। हमें इन सबका काट निकालना पड़ेगा जी। हमारी युवा पीढ़ियों  को भ्रमित करने के लिए ऐसी बचकाना बातें कर करके चल पड़ते हैं लोग और इतना नुकसान देश को हो रहा है, और आने वाले दिनों में कोई संभाल नहीं पाएगा जी।  और इसलिए हमने जैसे नक्सल प्रभावित जिलों पर फोकस किया है, उसी प्रकार से उन्होंने अब अपना Intellectual दायरा उन जगह पर पहुंचाने का प्रयास किया है, जो आने वाली पीढ़ियों में विकृत मानसिकता पैदा कर सकते हैं। एक दूसरे के प्रति द्वेष पैदा कर सकते हैं। इमोशनल चीजों को out of proportion उछाल कर के समाज के अनेक टुकड़ों में खाई पैदा कर सकते हैं, बिखराव पैदा कर सकते हैं। देश की एकता और अखंडता सरदार वल्लभ भाई पटेल हमारी प्रेरणा हो, हमें ऐसी किसी चीजों को देश में चलने नहीं देना है जी। लेकिन बुद्धिपूर्वक करना पड़ेगा, समझदारी से करना पड़ेगा। हमारे Fight forces में भी ऐसी expertise तैयार करनी पड़ेगी। किसी राज्य में कोई घटना घटी है, तो हमारे टॉप एक्सपर्ट को वहां स्टडी के लिए भेजना चाहिए, कि  विश्वविद्यालय जाओ तीन दिन वहां रहकर आओ, वहां पर हुआ है तो उन्होंने कैसे हैन्डल किया था, मामला कैसे पनपा था, उससे हम सीखते हैं। सीखने के लिए हमें लगातार कोशिश करनी चाहिए। और जो इस प्रकार की दुनिया वाले लोग हैं, उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर से भी बहुत मदद मिल जाती है और वो इसमें चतुर होते हैं, और उनका चेहरा मोहरा इतना बड़ा सात्विक दिखता है। इतना बड़ा संविधान और कानून की भाषा में भी बोलते हैं प्रवृत्ति कुछ और करती है। इन सारी चीजों को दूध का दूध और पानी का पानी ये समझने की ताकत हमारे सिक्यूरिटी सामर्थ्य में होनी चाहिए जी। हमें स्थायी शांति के लिए तेजी से आगे बढ़ना बहुत जरूरी है।

साथियों,

जम्मू-कश्मीर हो या नॉर्थ ईस्ट हो आज हम विश्वास gain कर रहे हैं। Destructive ताकतों को भी मुख्य धारा में आने का मन करने लगा है। और जब हम विकास उनको नजर आता है, Infrastructure दिखता है, उनकी अपेक्षाएं पूरी हो रही हैं। तो वे भी अब शस्त्रों को छोड़कर के साथ चलने के लिए तैयार हो रहे हैं। उसी प्रकार से बॉर्डर और कोस्टल एरिया में हमें विकास की ओर देखना होगा। बजट में भी बाइब्रेंट विलेज की बात कही गई है। आपको इस पर सोचना चाहिए। आपके टॉप अफसर उनको बॉर्डर विलेज में नाइट स्टे करके आना चाहिए। आग्रह कीजिए मैं तो मंत्रियों से भी कहुंगा कि कम से कम एक साल में पांच या सात बॉर्डर विलेज में जाकर के दो-तीन घंटे बिताकर आइए। चाहे वो किसी स्टेट का बॉर्डर विलेज हो, चाहे इंटरनेशनल बॉर्डर विलेज हो, आपको बहुत कुछ बारीकियों को पता चलेगा।

साथियों,

हथियार ड्रग ये सारी जो तस्करी चल रही है। ड्रोन उसमें एक नया संकट घुसा हुआ है। हमें हमारे बॉर्डर और कोस्टल उनके लिए संकलन बहुत जरूरी है। हम कहेंगे भई नहीं ये करेगी, कोसटगार्ड ये करेगा इतने से बात बनेगी नहीं यहां, हमें ये संकलन बहुत अच्छे से बढ़ाना पड़ेगा। मुझे विश्वास है कि अगर हम मिलकर एक राष्ट्रीय परिपेक्ष के साथ आगे बढ़ेंगे तो हर चुनौती हमारे सामने बौनी सिद्ध हो जाएगी। और चीजों को हैंडल करने की हमारी ताकत भी बढ़ जाएगी। मुझे विश्वास है कि इस शिविर में जो चर्चा होगी, उसमें से कोई न कोई actionable point निकलेंगे। एक कलेक्टिव रोडमैप बनेगा, हर राज्य को साथ मिलकर के काम करना पड़ेगा। ये तेरा क्षेत्र है, ये मेरा क्षेत्र है, ये तेरा अधिकार है, ये मेरा अधिकार है, अगर हम उसमें उलझे रहेंगे तो उसका सबसे ज्यादा फायदा समाज विरोधी ताकतें जो कानून को मानते नहीं हैं वो इस अव्यवस्था का भरपूर फायदा उठा सकते हैं। इसलिए हमारे बीच समझदारी, संकलन, विश्वास और ये सब बड़ा प्रोफेशनल होना चाहिए जी। और ये जिम्मेदारी हमारे कैडर्स की है, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। और मुझे विश्वास है हम साथ मिलकर के करेंगे तो हम जो चाहते हैं वैसा परिणाम प्राप्त कर सकेंगे, और देश के लिए जो अवसर आया है, उस अवसर को पहली नजर में ताकत यूनिफार्म फोर्सेस से आती है जी। विश्वास का एक कारण यूनिफार्म फोर्सेस बन जाता है। हम उसको जितना ज्यादा ताकतवर बनाएंगे, जितना ज्यादा बहुत विजन के साथ काम करने वाला बनाएंगे, जितना ज्यादा नागरिकों के प्रति संवेदनशील बनाएंगे, बहुत लाभ होगा।

कुछ सुझाव मैंने डीजीपी कांफ्रेंस में कहें हैं। मैं सभी मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से आग्रह करुंगा कि डीजीपी कांफ्रेंस एक बहुत ही अच्छी Institutional के रूप में विकसित हुई है। खुलकर के चर्चा होती है और उसमें political element जीरो होता है। उसमें से जो बातें निकलती हैं,  मैं सभी गृहविभाग के मेरे सचिव जो रहते हैं वो आईएएस कैडर के होते हैं और हमारे जो political field के लोग जो चुनकर के आकर के सरकार चलाते हैं। डीजीपी कांफ्रेस में जो बातें हुई उनसे पूरा briefing लेना चाहिए। उसमें actionalble point को हमें अपने राज्य में तुरंत लागू करना चाहिए। तब जाकर के फायदा होगा। हमें डीजीपी कांफ्रेंस से तो एक मीटिंग हो गई थी हमारे साहब होकर के आ गए हैं ये नहीं है जी। ये एक देश की सिक्यूरिटी को लेकर के काम करने के लिए है। अब जैसे एक सुझाव आया था कि भई हमारी पुलिस के लिए रहने के घर। अब मैंने एक सुझाव दिया था कि खासकर के बड़े शहरों में जो पुलिस थाने हैं या पुलिस स्टेशन हैं। आप जरा सोचिये कि उसमें से कुछ multistorey बन सकता है क्या? नीचे थाना चला रहेगा, लेकिन अगर ऊपर-ऊपर 20 मंजिला मकान बना दिया और र्क्वाटर बना दिये रहने के लिए तो उस इलाके के जितने पुलिस वाले हैं, उनके लिए घर वहीं मिल जाएगा। ट्रांसफर हो जाएगा, तो वो खाली करके चला जाएगा तो जो आएगा उसको वो ही मकान मिल जाएगा। तो पुलिस को आज शहर के बाहर 25 मिलोमीटर दूर घर मिलता है। उसको आने-जाने में दो-दो घंटे लगते हैं। हम जमीन का भी ज्यादा उस राज्य से बात कर सकते हैं, उस कार्पोरेशन से बात कर सकते हैं, जरा उसको highrise के लिए बना सकते हैं, जिससे फायदा होगा और ऊपर भी हम सिक्योरिटी के लिए व्यवस्थाएं आर्गेनाइज कर सकते हैं। हम चीजों को देखने के लिए व्यवस्थाएं आर्गेनाइज कर सकते हैं। यानि stand alone एक छोटा पुलिस थाना है, उसके बजाय आधुनिक पुलिस थाना भी बन जाएगा और उसी के ऊपर 20-25 मंजिला मकान बनकर के रहने के लिए घरों की व्यवस्था हो जाएगी।

और मैं जरूर मानता हूं बड़े शहर में 25-50 थाने तो ऐसे जरूर मिल सकते हैं कि जहां इस प्रकार के डेवलपमेंट की संभावना है। क्योंकि बड़े शहरों में 20 किलोमीटर 25 किलोमीटर बाहर जाना पड़ रहा है पुलिस के र्क्वाटर बनाने के लिए, और उसमें देखा होगा अब जैसे अमित भाई बता रहे थे कि भई बजट जो देते हैं, वो उपयोग नहीं हो रहा है। जितनी मात्रा में खर्च होना चाहिए, नहीं हो रहा है। भारत सरकार में एक ऐसी स्थिति शुरू हुई है कि मुझे बार-बार आग्रह करना पड़ता है कि जिस काम के लिए तय किया है उस बजट को उस काम के लिए उपयोग करो और समय सीमा में करो, पैसे खर्च नहीं कर पा रहे हम लोग। हमारे देश में ये स्थिति हमें नहीं चाहिए, हमें अपनी ताकत बढ़ानी होगी जी, हमारा सामर्थ्य बढ़ाना होगा, निर्णय शक्ति को बढ़ाना पड़ेगा। तब जाकर के इस धन का सही उपयोग समय सीमा में कर पाएंगे और जब समय सीमा में धन का उपयोग होता है तो वेस्टेज तो बचता ही बचता है, हमें लाभ बहुत होता है।

मैं एक और विषय के प्रति आपका ध्यान चाहता हूँ सभी राज्य की पुलिस और भारत सरकार की पुलिस जो हम स्क्रेपिंग पॉलिसी लाए हैं, उसकी स्टडी कीजिए और आपके जितने पुराने व्हीकल हैं। एक बार उनको स्क्रेप करने की दिशा में आप आगे बढ़िये। पुलिस के पास व्हीकल पुराना नहीं होना चाहिए, क्योंकि उसकी efficiency से जुड़ा हुआ विषय है। उसके कारण दो फायदे होंगे। जो स्क्रेपिंग की बिजनेस में आने वाले लोग हैं, उनको assurance मिल जाएगा कि भई फलाने राज्य में 2 हजार व्हीकल्स स्क्रेपिंग के लिए already उन्होंने  identify  कर दिए। चलों मैं एक यूनिट लगा देता हूं। रिसाइकल का circular economy  का काम हो जाएगा और हम अगर 2 हजार व्हीकल वहां जो नई व्हीकल बनाने वाली कंपनियां भी आ जाएगी कि भई अगर आप 2 हजार व्हीकल हमारे साथ लेते हो तो हम रेट इतना कम करेंगे, हम क्वालिटी में आपको जो चाहिए करके देंगे, इतना बढ़िया पैकेज बन सकता है जी। सभी हमारे पुलिस के पास आधुनिक से आधुनिक व्हीकल आ सकते हैं। हम उस पर सोचें और मैं चाहता हूं कि मिनिस्टर खुद बुलाए ऐसे जो स्क्रेपिंग की दुनिया में अच्छा काम कर सकते हैं उनको। और कहें हम चलो जमीन देते हैं आपको, आप स्क्रेपिंग के लिए recycle  के unit लगा दीजिए।  हम पहले पुलिस वाले व्हीकल दे देंगे आपको। हम पुलिस के लिए नए व्हीकल लेंगे। ये बहुत जरूरी है जी। भारत सरकार के भिन्न-भिन्न यूनिट भी अपने पुराने सारे कूड़ा-कचरा निकाल देते हैं। और नए तो हमारी environment  efficiency सब पर फर्क आएगा। तो ऐसी छोटी-छोटी चीजों पर भी अगर आप कुछ निर्णय करके निकलेंगे और उसको समय सीमा में लागू करेंगे, आप देखिए आप लोगों को तो सुरक्षा देंगे, आप देश के विकास में भी बहुत बड़े भागीदार बन जाएंगे। और मुझे पूरा विश्वास है कि जिस गंभीरता से इस मीटिंग को आप लोगों ने लिया है और विशेषकर के इतनी बड़ी संख्या में मुख्यमंत्रियों का आकर के इस मीटिंग में बैठना सचमुच में तो जब मैंने आपको देखा तो मेरा मन करता है कि मुझे वहां आपके बीच में होना चाहिए था। लेकिन पहले से ही कुछ कार्यक्रमों का इतना प्रेशर रहा है कि मैं नहीं आ पाया। लेकिन जब इतने सारे माननीय मुख्यमंत्री जी आते हों तो एक प्रधानमंत्री का स्वाभाविक मन कर जाता है कि जरा आपके बीच बैठूं, मैं भी आपके साथ चाय पान करते करते काफी बातें करुं, लेकिन मैं नहीं कर पाया इस बार। गृहमंत्री जी आपके साथ बात कर रहे हैं वो जो भी विषय आपसे चर्चा करेंगे, मुझ तक जरूर पहुंचेगा और मेरे हिस्से में जो जिम्मेदारी होगी मैं सभी मुख्यमंत्रियों को, सभी गृहमंत्रियों को विश्वास दिलाता हूं कि आपकी आशा अपेक्षा पर खरा उतरने के लिए भारत सरकार भी उतना ही प्रयास करेगी। मेरा आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद, बहुत बहुत शुभकामनाएं।

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DS/ST/DK   (रिलीज़ आईडी: 1871637)


Tuesday, December 01, 2015

ENT: एनजीओ अपने लगा रहा है डबवाली में जांच शिविर


Tue, Dec 1, 2015 at 3:39 PM
आयोजन हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से 
डबवाली (सिरसा):1 दिसंबर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):


हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनजीओ अपने 10 दिसंबर 2015, दिन वीरवार को सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन करेगा। जिसमें ईएनटी विशेषज्ञ अमनदीप मित्तल नाक, कान तथा गला संबंधी रोगों की जांच करेंगे। एनजीओ की ओर से रोगियों को दवा भी मुफ्त बांटी जाएगी। 

एसएमओ एमके भादू तथा अपने के अध्यक्ष मथरा दास चलाना ने बताया कि डबवाली तथा आसपास के क्षेत्र में नाक, कान तथा गला संबंधी रोगियों की तादाद काफी ज्यादा है। लोग बेहतर इलाज के लिए पंजाब तथा राजस्थान के बड़े शहरों का रूख करते हैं। ऐसे में सिविल अस्पताल में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है। डॉ. अमनदीप मित्तल ने ईएनटी से संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए बताया कि अक्सर कान के पर्दे फटे होने तथा कान के भीतर फंगल इंफेक्शन होने के मरीज मिलते हैं। महज जागरूकता के चलते दोनों रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। कान का पर्दा बचपन में ही फट जाता है। चूंकि अक्सर माताएं अपने बच्चे को लेटकर दूध पिलाती हैं। जिससे दूध कान के पीछे च
ला जाता है। कान का पर्दा फट जाता है। जितनी भी इमरजेंसी हो, माताएं अपने बच्चे को दूध गोद में लिटाकर पिलाएं। उसका मुंह ऊंपर हो, पेट नीचे। ताकि दूध सीधा पेट में जाए। फंगल इंफेक्शन के संबंध में डॉ. मित्तल ने बताया कि कुछ लोगों को तीली से कान खुजाने की लत होती है। ऐसा होने से कान के भीतर घाव हो जाता है। धीरे-धीरे इंफेक्शन होने लगती है। जिससे सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। नाक संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए चिकित्सक ने बताया कि अक्सर जन्म के समय बच्चे की नाक टेढ़ी हो जाती है। ध्यान न देने के कारण यह बीमारी नासूर बन जाती है। बचपन में ही इसे मेडिसन से ठीक किया जा सकता है। वरना बालिग होने पर ऑपरेशन ही जरिया होता है। बार-बार जुकाम लगने से हृदय पर भी असर पड़ता है। इससे हृदय संबंधी बीमारी हो सकती है। ऐसे कई मामले सामने आते हैं। उन्होंने गले संबंधी बीमारियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में सूखी तथा रेशे वाली खांसी हो जाती है। मामूली जागरूकता से ही इससे बचा जा सकता है।

Friday, January 03, 2014

ये दोनों परियोजनाएं हमारे देश के लिए बहुत महत्व रखती हैं

03-जनवरी-2014 17:36 IST
प्रधानमंत्री ने हरियाणा में किया दो विशेष परियोजनायों का शुभारम्भ 
हरियाणा में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की आधार शिला रखे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज झज्जर, हरियाणा में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की आधार शिला रखे जाने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को सम्बोधित किया। उनके सम्बोधन का हिंदी पाठ नीचे दिया जा रहा है- 
प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह जब 3 जनवरी 2014 को हरियाणा के बहादुरगढ़ हवाई अडडे पर पहुंचे तो वहां उन्हें सुस्वागतम कहने ले लिए हरियाणा के राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया, केंद्रीय स्वास्थ्य व् परिवार भलाई मंत्री गुलाम नबी आज़ाद और हरियाणा के मुख्य मंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। (पत्र सूचना कार्यालय)
“आज हमने विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र की स्थापना के लिए पहला कदम उठाया है। इससे हरियाणा को एक ऐसी संस्था मिलने जा रही है जो महफूज़ और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी। इसके अलावा हमने राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना के लिए भी काम शुरू कर दिया है। यह संस्थान हरियाणा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के परिसर की स्थापना की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा होगा और देश में कैंसर की बीमारी से संबंधित खोज और उसके इलाज की सुविधाओं के लिए एक उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर काम करेगा। 

ये दोनों परियोजनाएं हमारे देश के लिए बहुत महत्व रखती हैं और मैं हरियाणा सरकार को, श्री भूपेन्दर सिंह हुड्डा और श्री दि‍पेन्‍दर सिंह हुड्डा को इन दोनों संस्थानों की स्थापना के लिए किए गए प्रयास और इस काम में भारत सरकार को दिए जा रहे सहयोग के लिए बधाई देना चाहता हूं। मैं हरियाणा सरकार और मुख्य मंत्री श्री भूपेन्दर सिंह हुड्डा जी को ख़ास तौर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के दूसरे परिसर के विकास के लिए 300 एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ। ये परियोजनाएं न सिर्फ हमारे देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होंगी। इनकी स्थापना में हमें हरियाणा की जनता का पूरा सहयोग मिला है, जिसके लिए हम सब आपके आभारी हैं। 

जैसे-जैसे हमारे देश की आबादी बढ़ेगी, हमारे देश में शहरीकरण बढ़ेगा और हमारी आमदनी भी बढ़ेगी, हमारे देश में बिजली की मांग भी बढ़ेगी। हमें अपने देश के आर्थिक विकास के लिए बिजली की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाना होगा। ऐसा करके ही हम अपने कारखानों, अपने किसानों के सिंचाई पम्पों और लोगों के घरों में रोशनी के लिए बिजली उपलब्ध करा सकेंगे। देश में उपलब्ध बिजली के सभी संसधानों यानी कोयला, पानी, गैस, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का इस्तेमाल करने के साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम प्रदूषण पर काबू पा लें जिससे हमारे वातावरण को कम से कम नुकसान पहुँचे। 

परमाणु ऊर्जा, बिजली बनाने का एक भरोसेमंद और साफ सुथरा ज़रिया है। भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है, जिन्होंने परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की प्रौद्योगिकी का विकास कर लिया है और परमाणु ईंधन बनाने की काबिलियत भी हासिल कर ली है। हमारा मकसद है कि आने वाले 10 सालों के अंदर हम 27000 मेगावाट से ज्यादा परमाणु ऊर्जा बनाने की क्षमता प्राप्त कर लें। 

परमाणु ऊर्जा बनाने की अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हमारे लिए यह भी जरूरी है कि वह सामग्री जिससे परमाणु ईंधन तैयार होता है, महफूज़ रहे और कभी-भी अपराधियों और आतंकवादियों जैसे गलत लोगों के हाथ न लग पाये। यह भी जरूरी है कि हमारे परमाणु ऊर्जा संयंत्र हिफाज़त के सबसे अच्छे तरीकों को अपनाएं। 

भारत में हमने परमाणु ऊर्जा संयंत्र और परमाणु सामग्री की हिफाज़त के लिए बेहतरीन तरीकों को अपनाया भी है। जापान में 2011 में फुकुशिमा के हादसे के बाद हमने अपने परमाणु संयंत्र के डिजाइन और प्रबंधन में सुरक्षा के कई नए उपाय किये हैं। आज हम यह बात पूरे इत्मीनान से कह सकते हैं कि हमारे सुरक्षा मानकों की तुलना दुनिया के सबसे अच्छे सुरक्षा मानकों से की जा सकती है। 

लेकिन हम परमाणु ऊर्जा संयंत्र और परमाणु सामग्री की सुरक्षा और भी मज़बूत करने की कोशिश करते रहेंगे। इससे अपनी ऊर्जा नीति पर हम आत्मविश्वास के साथ अमल करके आगे बढ़ पाएंगे। 

इस काम में विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता केन्द्र की एक महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। यह पूरी तरह चालू हो जाने पर, ऐसी परमाणु प्रणालियों की खोज और डिजाइन के लिए काम करेगा जो सुरक्षित और टिकाऊ हों और जिनका गलत लोगों के हाथों में पड़ने का कोई खतरा न हो। यह परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मानव संसाधनों के विकास के मकसद से भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों दोनों को शामिल करके कार्यशालाएं और संगोष्ठियां भी आयोजित करेगा। अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय वैज्ञानिकों को एक साथ लाकर यह केन्द्र उनके लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा और इस तरह से विश्व परमाणु ऊर्जा सहभागिता को बढ़ावा देगा। इन सब मकसदों को पूरा करने के लिए हम अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एंजेसी और रूस, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 

मुझे खुशी है कि इस इलाके में रहने वाले लोगों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। इसके लिए जिन लोगों की जमीनें ली गई हैं उन्हें मुआवजे के अलावा 33 साल तक वार्षिक भुगतान मिलता रहेगा। इस तरह एक लंबे वक्त के लिए उन्हें आमदनी का ज़रिया उपलब्ध होगा। स्थानीय लोगों के फायदे के लिए इस केन्द्र के आसपास के क्षेत्र में 10 करोड़ रूपये की लागत से कई परियोजनाएं लागू की जाएंगी। इनमें लड़कियों के लिए एक कॉलेज, विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए एक स्कूल, भिंडवास पक्षी विहार का विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं, खारे पानी को साफ करने की परियोजना और कंप्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था भी शामिल है। 

इसके अलावा स्थानीय नौजवानों के लिए एक विशेष कार्यक्रम भी चलाया जाएगा जिसके ज़रिए उन्हें पानी, ऊर्जा और वातावरण जैसे बुनियादी क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी मि‍ल सकेगी। 

परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस परियोजना को लागू करने के लिए कड़ी मेहनत की है जिसके लिए मैं उनकी तारीफ करना चाहूंगा। परियोजना की कामयाबी के लिए मैं अपनी शुभकामनाएं भी देना चाहूंगा। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के झज्जर परिसर में जो राष्ट्रीय कैंसर संस्थान बनाया जाएगा वह स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत सरकार की सबसे बड़ी अकेली परियोजना होगी। इसे साढ़े तीन सालों में करीब 2000 करोड़ रुपए की लागत से लागू किया जाएगा। देश में कैन्सर रोग से संबंधित अनुसंधान के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा और उत्तरी भारत में कैन्सर के इलाज में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में 710 बिस्तरों की सुविधा होगी और कुल मिलाकर 550 डॉक्टर और 2200 नर्स यहां काम कर पायेंगे। 

भारत में कैंसर, दिल की बीमारियां और मधुमेह जैसी बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर कैंसर रोग से संबंधित अनुसंधान और उसके इलाज के लिए एक संस्थान की ज़रूरत शायद इससे ज्यादा पहले कभी नहीं रही। मैं अपने साथी श्री गुलाम नबी आज़ाद साहब को इस परियोजना को असलियत के इतना करीब लाने के लिए बहुत-बहुत मुबारकबाद देता हूं। साथ में, मैं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को भी इस परियोजना पर मेहनत से काम करने के लिए बधाई देता हूं। 

श्री गुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की गई हैं। ये सब आम आदमी को सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के हमारी प्रतिबद्धता का सुबूत हैं। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन शुरू किया गया था, जिसने देश के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल को नई रफ्तार दी है। 

ये दोनों परियोजनाएं बुनियादी तौर पर हमारे देश और हमारी जनता के विकास से जुड़ी हुई हैं। मैं आज आपको यह भरोसा भी दिलाना चाहता हूं कि हमारी सरकार आप और आपके बच्चों का भविष्य बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करती रहेगी। 

इन्हीं शब्दों के साथ, मैं आप सबका शुक्रिया अदा करता हूं और राष्ट्रीय विकास के कामों में सफलता प्राप्त करने के लिए हरियाणा के लोगों को बधाई देता हूं। 

जय हिन्द!” 
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वि.कासोटिया/एकेपी/डीसी-31

Saturday, August 24, 2013

एसजीपीसी बनाएगी होंद चिल्लड़ में शहीदी स्मारक

जत्थेदार मक्कड़ ने किया ऐतिहासिक एलान
मनविन्द्र सिंह ग्यासपुरा ने भी ली सुख की साँस
अमृतसर: 23 अगस्त 2013 (किंग//पंजाब स्क्रीन) जिस अभियान को लुधियाना के ग्यासपुरा इलाके में रहने वाले एक इंजीनियर मनविन्द्र सिंह ने अकेले अपने दम पर शुरू किया था उसमें अब बहुत से लोग शामिल हैं और वह एक विशाल काफिला बन गया है। अब एसजीपीसी के अध्यक्ष जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा है कि 1984 में हरियाणा के होंद चिल्लड़ में हुए सिख कत्लेआम की याद में एक शहीदी स्मारक का निर्माण किया जाएगा और यह निर्माण एसजीपीसी करेगी। इसके साथ ही जत्थेदार मक्कड़ ने यह भी कहा की इस मामले को लेकर कड़ी जा रही कानूनी जंग का पूरा खर्च भी हम वहन करेंगे
इस का विवरण बताते हुए जत्थेदार मक्कड़ ने कहा कि होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी के प्रमुख सदस्यों व इस कांड के चश्मदीद गवाहों द्वारा यादगार निर्माण की मांग काफी लम्बे समय से की जा रही थी अब एसजीपीसी ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया है। यह स्मारक वास्तव में आध्यात्मिकता व शहादत का एक संयुक्त प्रदर्शन होगा। मानवता को वैर विरोध से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे व सरबत के भले का संदेश यह यादगार देगी। उन्होंने कहा कि नवंबर 1984 के दौरान दिल्ली की तरह गांव होंद चिल्लड़ में निर्दोष सिखों की हत्या की गई थी। पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी का गठन किया गया था। यह कमेटी अब कानूनी भी लड़ाई लड़ रही है। एसजीपीसी इस कमेटी को पूरा सहयोग दे रही है। इस अवसर पर होंद चिल्लड़ तालमेल कमेटी के सदस्य मनविंदर सिंह ग्यासपुरा, भाई दर्शन सिंह, सुखविंदर सिंह और कई अन्य भी मौजूद थे। गौरतलब है कि इस बर्बर हत्याकांड का पता लगाने वाले इंजीनियर मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को इस राह से हटाने के प्रयास भी बहुत किये गए, उनकी नौकरी छीन गयी, सबंधित दस्तावेज़ चुराने के लिए उनके घर में चोरियां की गयीं, उन्हें आर्थिक नुक्सान भी पहुंचाए गए और डराया धमकाया भी गया। इसके साथ ही उन्हें बहुत से लालच भी दिए गए और संसदीय टिकट की पेशकश भी की गयी लेकिन वह अपने धर्म से नहीं हटे। अब इस सारे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदार एसजीपीसी की और से उठा लिए जाने पर उन्हें बेहद प्रसन्नता भी हुई है और उन्होंने संतोष भी। उन्होंने अब कहीं जाकर सुख का साँस लिया है।  

Friday, February 03, 2012

सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा विकल्प

15 फरवरी तक चलेगा 26वां सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला
* अशोक कुमार
तस्वीर हरियाणा सरकार के पर्यटन विभाग से साभार  
        परंपरा, विरासत और संस्‍कृति के अद्भुत समन्‍वय के साथ-साथ माटी की महक सूरजकुंड हस्‍तशिल्‍प मेले की पहचान है। 26वां सूरजकुंड हस्‍तशिल्‍प मेला आज से शुरू हुआ है और 15 फरवरी तक चलेगा।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले में असम दूसरी बार थीम राज्य के रूप में भाग ले रहा है। पूर्वोत्‍तर  भारत के अन्य सहयोगी राज्यों के साथ मिलकर असम वर्ष 1998 में थीम राज्य के रूप में पहले भी भाग ले चुका है। असम की 13वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व की पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इसे 26वें सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले के थीम राज्य के लिये सर्वाधिक उपयुक्त बनाती है। असम के विविध रंगोंरीति-रिवाजों और रंग-सज्जा को प्रभावी ढंग से दर्शाने के लिये रंग घर की प्रतिकृति को  सुरूचिपूर्ण  ढंग से स्थापित किया गया है। थीम राज्य के मंडप के सामने बांसों से विशेष रूप से असम का अपना घर बनाया गया हैजिसमें असम का एक परिवार इसमें पूरे 15 दिन तक रहेगा ताकि मेला देखने आये दर्शक असम की रहन-सहन की शैली की झलक देख सकें। भारत की विरासत में असम राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है और यह संस्कृति और परपराओं को गहराई से आत्मसात किये हुये हैजिसे इस वर्ष मेले में प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जायेगा और दर्शक असम की हस्तशिल्प व  हथकरघा वस्तुओंसंस्कृति  और व्यंजनों के बारे में जान सकेंगे।
        भागीदार देश के नाते थाईलैंड की हिस्सेदारी इस मेले को अंतर्राष्ट्रीय रंग देगी और भारतीय तथा थाई विरासत के समन्‍वय से यह और समृद्ध होगा। भारत सरकार की ओर से फैसला किया गया है कि जिस देश का राष्ट्राध्यक्ष नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में मुय अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जायेगावही सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले का भागीदार देश होगा। इस मेले में पहली बार सार्क संगठन के सभी सदस्य देश एक मंच पर होगे। भागीदार देश थाईलैंड और सार्क के सदस्य देश-नेपालभूटानश्रीलंकापाकिस्तानबगांलदेशमालदीव व  अफगानिस्तान के अलावा यूरेशिया के देश - उज्जबेकिस्तानतजाकिस्तान किर्गिस्तान और दक्षिण अफ्रीकी  देश कांगो मेले में अपनी कलाओं और शिल्पों से समोहन का प्रभाव पैदा करेंगे। भारत तथा अन्य देशों के 700 से अधिक शिल्पीजिनमें अधिकतर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुस्कार विजेता है, 15दिन के इस मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज करायेंगे।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला एक ही स्थान पर भारतीय कलासंस्कृति और संगीत की  समृद्ध परंपरा भी प्रस्‍तुत करने में  अग्रणी रहा है। मेले का उद्देश्य भारत के परपरागत रीति-रिवाजों को कायम रखना है और यह दर्शकों की सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में सहायक है।  पूरा माहौल,प्रस्तुत संगीत और मेला मैदान में बिक रहे तरह-तरह के उत्पाद एक लघु भारत होने का एहसास कराते हैं।  दोनों चौपालों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम हर शाम नाट्यशाला की प्रस्तुतियां हमारी संस्कृति की मधुरता को प्रद्शित करती हैं। इस माहौल को खासतौर पर मेले की थीम के अनुरूप बनाया गया है। इसलिये मेले में आने वाले लोगो को आनंद का एहसास होता है। यह मेला न केवल दुनिया की हलचल से दूर एक आदर्श जगह हैबल्कि कलाकारोंफैशन डिजाइनरों और व्यंजन प्रेमियों के लिये एक स्वर्ग है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा विकल्प बन गया है। अपनी कला और शिल्प के राष्ट्रीय मंच के प्रदर्शन से अन्य रास्ते भी खुलते हैं। इसलिये वे अपनी कलाओं और शिल्पों के बेहतरीन नमूने लाते हैं और उन्हें मेले में प्रदर्शित करते हैं। मेले से नियार्तकों और खरीददारों को वार्षिक मिलन का भी अवसर मिलता है। यहां किसी विचौलिये के बिना शिल्पकार और निर्यातक आमने-सामने होते हैं। इससे शिल्पकारों को अपनी कला क्षेत्र का विस्तार करने और उसमें सुधार करने का सीधा मौका मिलता है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले ने पिछले 26 वर्षों में भारतीय पयर्टन के मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान दर्ज की है। मेले में मोहक संस्कृतिप्राचीन शिल्पों और परपराओं तथा विरासत की झलक मिलती हैजो अपनी क्षमता से इतिहास बन गई है। इस मेले की लोकप्रियता का अन्दाज इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्षों में अनेक जानी-मानी हस्तियों ने इसका उद्घाटन कियाजिनमें यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधीकेन्द्रीय मंत्री श्री प्रणब मुखर्जीभारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिलउपराष्ट्रपति श्री मोहमद हामिद अन्सारी और केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री सुबोध कांत सहाय शामिल हैंजिन्होंने ने क्रमश: वर्ष 2007, 2008, 2009, 2010 और 2011 में मेले का उद्घाटन किया।
        मुख्‍य रूप से केन्दीय पर्यटन मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित यह मेला वास्तव में विभिन्न एजेंसियों-हस्तशिल्प और हथकरघा के विकास आयुक्तों और संस्कृति तथा विदेश मंत्रालयों के सामूहिक और एकजुट प्रयासों का फल है। हरियाणा पर्यटन और थीम राज्य असम के पर्यटन विभाग नें  संयुक्त रूप से मेले का आयोजन किया  है और प्रबन्धों में सम्रवय रख रहे हैं। भारतीय कलासंस्कृति और परपराओं के 15 दिन के इस महोत्सव के लिये देश भर के सर्वश्रेष्ठ शिल्पी और लोक कलाकार अपने उत्पादों तथा कला-कौशल के साथ यहां आते हैं। यह मेला पर्यटन उद्योग के दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में वर्ष भर होने वाली गतिविधियों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण मेला है। पिछले वर्ष इस मेले को 8 लाख लोगों ने देखा और इस वर्ष यह संख्या और भी अधिक रहने की संभावना है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला वर्ष 1987 में शरू हुआ था लेकिन किसी एक राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश को थीम राज्य के रूप में शामिल करने का सिलसिला वर्ष 1989 में शुरू हुआ था। 1989 के बाद से एक राज्य को हर साल मेले के थीम राज्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। थीम राज्य को मेला मैदान में एक यादगार ढांचा / द्वार का निर्माण करना होता है। सभी थीम राज्यों की  प्रतिकृतियां सूरजकुण्ड मेले के मैदान में स्थापित की गई हैंजिनसे भारत की विविधता परिलक्षित होती है। इस बार मेले का भागीदार देश थाईलैंड है और वह अपनी अदभुत सज्जा से मेले में अपना रंग भर रहा  है। इस वर्ष तीस एकड़ भूमि में लगभग 600 कुटीर बनाये गये हैं। जिला प्रशासन की सहायता से सुरक्षाअग्नि शमन और यातायात के व्यापक प्रबन्ध किये गये हंै। एक स्थल पर फूड कोर्ट बनाया गया हैजहां तरह-तरह के व्यंजन और अल्प आहार उपलब्ध होंगे। अच्छे और बढिय़ा अल्प आहार प्रस्तुत करने के लिये फूड स्टाल फरीदाबादकुरूक्षेत्र और पानीपत के सरकारी होटल प्रबन्धन संस्थानों द्वारा स्थापित किये गये हैं। थीम राज्य असम और भागीदार राष्ट्र थाईलैंड भी फूड कोर्ट में अपने व्यंजन प्रस्तुत करेंगे।
        दर्शक दोनों चौपालों और नाट्यशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठा सकते हैं। सांस्कृतिक दलों का चयन सूरजकुण्ड मेला प्राधिकरणथीम राज्य असम और हरियाणा के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। इसके अतिरिक्त तजाकिस्तान,उज्बेकिस्तानकिर्गिस्तान और कांगो ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने की पुष्टि की हैजिनमें 500 से अधिक कलाकार न केवल दर्शकों का मनोरंजन करेंगे बल्कि मेले की रौनक बढ़ायेंगे।

मेला स्थल - सूरजकुण्ड
        सूरजकुण्ड का इतिहास बहुत पुराना है। इस स्थान की सुन्दरता से आकर्षित  होकर राजा सूरजपाल ने यहां अपना गढ़ बनाया और यहां पर एक सूर्य मंदिर तथा सूर्य सरोवर की स्थापना की। समय के साथ मंदिर अब नष्ट हो चुका हैलेकिन सूर्य सरोवर के अवशेष अभी भी नजर आते हैं। इसी सूर्य सरोवर के नाम से इस स्थान को सूरजकुण्ड नाम दिया गया। सूर्य सरोवर के स्थल को केन्द्र में रखकर चारों ओर कई पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। मंदिर के अवशेषों के पास होटल राजहंस बनाया गया है। सूर्य सरोवर और मेला मैदान के बीच नाट्यशाला है। सूरजकुण्ड दक्षिण दिल्ली से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और दिल्ली के मुय स्थलों से यहां पहुंचने के लिये वाहन उपलब्ध हैं ।

थीम राज्य असम
        पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य असम को बहा्रा के पुुत्र यानि बहा्रपुत्र का आवास माना जाता है। यहां की अपनी समृद्ध विरासत है। चाय यहां का सबसे बड़ा उद्योग है। असम को पट्रोलियम घाटी के रूप में भी जाना जाता है।
        असम की शिल्प कलाओं में असम की घंटे की धातु का महत्पूर्ण स्थान है। बेंत और बांस के शिल्प उत्पाद घर-घर में तैयार होते हैं। असम की नाट्य कला अनूठी है। असम को भारतीय वास्तुशिल्प की कला दीर्घा भी कहा जाता है। बड़ी संया में यहां की आदिवासी जातियों के लोग तरह-तरह के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद तैयार करते हैं, जिनमें उनकी संस्कृति की झलक मिलती है। असम के त्यौहारों में भोगाली बिहू रोंगाली बिहूजन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के त्यौहार प्रमुख हैं। रोंगाली बिहू प्रमुख बिहू त्यौहार हैजो अप्रैल के महीने में मनाया जाता है।
       मेले में दर्शकों के प्रवेश के लिये 50 रूपये का टिकट रखा गया है। विकलांगोंभूतपूर्व सैनिकोंकार्यरत सैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिये टिकट में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। स्वतंत्रता सेनानियों के लिये प्रवेश निशुल्क है। शनिवाररविवार और राजपत्रित अवकाश के दिनों को छोड़ कर मेले में  स्कूल के बच्चे यदि स्कूल के माध्यम से स्कूल यूनिफार्म में आते हैंतो उन्हें निशुल्क प्रवेश मिलेगा। टिकटें आन-लाईन और ऑफ लाईन ई-टिकटिंग के जरिये भी उपलब्ध हैं। (01-फरवरी-2012) {पत्र सूचना कार्यालय} 
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* लेखक हरियाणा भवन में सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्‍कृतिक मामलों के उपनिदेशक हैं।