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Monday, February 17, 2014

मुक्त कराये गए बंधुया मज़दूरों ने सुनाई अपनी दर्द भरी दास्तान

हम अपनी हालत को खुद ही बदलेंगे--सोनी सोरी          --Himanshu Kumar
पंजाब में से छुड़वाए गए बन्धुया मज़दूर कपूरथला के एक भठ्ठे में थे। हिमांशु कुमार बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के इन अस्सी दलित परिवारों को पंजाब के कपूरथला जिले में ईंट भट्टा मालिक ने बंधुआ बना कर रखा हुआ था। परिवार के एक सदस्य को ही एक बार में भट्टे से बाहर जाने की इजाजत थी। 
इन्हें नहीं पता कि इनके प्रदेश छत्तीसगढ़ में रोज़गार गारंटी नाम की कोई योजना भी चलती है।

इन दलित परिवारों को आज़ाद करा कर छत्तीसगढ़ वापिस भेजा जा रहा है।  जहाँ उम्मीद है इनका पुनर्वास नहीं किया जाएगा।

जैसे पहले वाले मजदूरों का नहीं किया गया।

आज सोनी सोरी ने इन मजदूर परिवारों से बात चीत करी।

सोनी ने इन से कहा कि आखिर आजादी के इतने सालों के बाद भी आदिवासी और दलितों की ये हालत क्यों है।

क्या आज़ादी हमारे लिए नहीं आयी थी ?

सोनी ने कहा मैं वापिस छत्तीसगढ़ लौट रही हूँ हम सब अब अपनी लड़ाई छत्तीसगढ़ में ही मिल कर लड़ेंगे और अपनी हालत को खुद ही बदलेंगे। 


Sunday, October 27, 2013

सोनी सोरी और लिंगा कोडोपी की ज़मानत का मामला

कल सुनवाई के लिए आएगा सर्वोच्च न्यायलय के सामने
फेसबुक: 27 अक्टूबर 2013:(Himanshu Kumar):सोनी सोरी और लिंगा कोडोपी की कहानी दरअसल भारतीय समाज की सडन की कहानी है। इन दोनों को सरकार ने पूरी योजना बना कर नकली मुकदमों में फंसा कर जेल में डाला। 
दोनों को जेल में खूब यातनाएं दी गयीं।सारी यातनाओं का विवरण बाहर भी भेज दिया गया। 

सोनी सोरी की कहानी सुनो

पुलिस के इन दोनों के खिलाफ बनाये हुए सारे मामले झूठे साबित हुए। 
अब आखिरी एक मामला बचा है जिस का बहाना बना कर इन दोनों साहसी आदिवासियों को जेल में डाल कर रखा हुआ है।                                        
आखिरी मामला इतना फर्जी और हास्यास्पद है उसमे कभी किसी को जेल हो ही नहीं सकती। 
लेकिन ये दोनों निर्दोष आदिवासी सारी दुनिया को जानकारी होने के बाद भी जेलों में सड़ाये जा रहे हैं। 
असल में इन दोनों आदिवासियों के मामले में हम अपनी क्रूर और जिद्दी सनक पर अड् गए हैं।  
क्योंकि अगर ये दोनों आदिवासी सही हैं तो क्या ये सरकार , सभ्यता हमारी लूट सच में गलत है ? 
बस इस जिद की वजह से इन दोनों को जेल में डाल कर रखा गया है।  
लेकिन इस पूरी लड़ाई में सोनी सोरी और लिंगा कोडोपी तो हारे ही नहीं। 
लड़ाई तो आपकी नकली सभ्यता और आपके ढोंग ने हारी है। 
बेपर्दा आप हुए हैं।  
आप क्या सोचते हैं आप किसी को मार कर या सता कर जीत जाते हैं ?
नहीं बल्कि मुझे आप ही हारे हुए और हाँफते हुए दीख रहे हैं। 
देश की जेलों मे बंद हज़ारों आदिवासियों की रिहाई , आदिवासियों के विरुद्ध सरकारी हमला , संसाधनों की लूट के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर कल दिल्ली मे साथी जमा हुए , आवाज़ बुलंद की , गीत गाये कल सोनी सोरी को जेल मे भेजने के लिये पोस्ट कार्ड भी लिखे गये चिराग रोशन किये ताकी ज़ुल्म का अँधेरा काम हो . जो साथी जमा हुए वो उनमे से हैं जिनके जैसे लोगों ने हर दौर मे ज़ुल्म का विरोध किया है . आशुतोष कुमार , अफलातून भाई , प्योली स्वतिजा , स्वामी अग्निवेश , वंदना शिवा , मीरा शिव , किरण शाहीन , विजय प्रताप ,कल्पना मेहता , कविता श्रीवास्तव , कविता कृष्णन , सलीमा आरिफ , शाइस्ता , मेथ्यु भाई , पाणिनि आंनद, अभिषेक श्रीवास्तव , मुकुल दुबे , कैलाश मीणा, अमीन , सौरभ, किशन ठाकर , डाक्टर हीरा , मुक्ति तिर्की और सैंकडों साथियों को एकजुटता के लिये सलाम (File photo)
ध्यान से देखिये भारत के करोड़ों आदिवासी, दलित अपसंख्यक आपकी इस सभ्यता पर सवाल उठा रहे है।इन्हें अनदेखा मत कीजिये . भारत सिर्फ आपका ही नहीं है बल्कि सबका है। 


सोनी सोरी की कहानी सुनो                        सोनी सोरी को दी जा रही हैं एक्सपायरी दवाएं



Friday, August 16, 2013

मैं इसे एक राष्ट्र कैसे मानूं ?

लगता है हमारा राष्ट्र दूसरा है और सोनी सोरी का दूसरा ! 
अब जब कल स्वतन्त्रता दिवस पर सरकारी डयूटी करके थके मांदे सरकारी मुलाजिम कल फिर ड्यूटी देने के  लिए आज कर रहे होंगें  तो गांधीवादी नेता हिमांशु कुमार अर्थात Himanshu Kumar ने फिर कुछ कड़वे सत्य सामने रख कर उनके दिलो-दिमाग को आंदोलित कर दिया है। हिमांशु लिखते हैं :सोनी को थाने में पीटते समय और बिजली के झटके देते समय एसपी अंकित गर्ग सोनी से यही तो जिद कर रहा था कि सोनी एक झूठा कबूलनामा लिख कर दे दे जिसमे वो यह लिखे कि अरुंधती राय , स्वामी अग्निवेश , कविता श्रीवास्तव , नंदिनी सुंदर , हिमांशु कुमार, मनीष कुंजाम और उसका वकील सब नक्सली हैं !
ताकि इन सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक झटके में जेल में डाला जा सके ! 
सरकार मानती है कि ये सामजिक कार्यकर्ता छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की ज़मीनों पर कंपनियों का कब्ज़ा नहीं होने दे रहे हैं ! इसलिये एक बार अगर इन सामजिक कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में जेल में डाल दिया जाए तो छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर सरकारी फौजों के हमलों पर आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं बचेगा ! फिर आराम से बस्तर की आदिवासियों की ज़मीने कंपनियों को बेच कर पैसा कमा सकेंगे !
67 वें स्वतन्त्रता दिवस पर एक दुसरे को थोक के भाव आज़ादी की बधाईयाँ दे रहे लोगों की इस में कड़वे सत्य को देख कर  हो रहे हिमांशु समाज के सभी वर्गों से---गुहार लगाते हुए कहते है---पुकारते हैं--झंक्झौरते हैं--:
कोई तो बचाओ इस लड़की को ! संसद , सुप्रीम कोर्ट , टीवी और अखबारों के दफ्तर हमारे सामने हैं ! और हमारे वख्त में ही एक जिंदा इंसान को तिल तिल कर हमें चिढा चिढा कर मारा जा रहा है ! और सारा देश लोकतन्त्र का जश्न मनाते हुए ये सब देख रहा है !
हिमांशु चेतावनी भी देते हैं--:शरीर के एक हिस्से की तकलीफ अगर दूसरे हिस्से को नहीं हो रही है तो ये शरीर के बीमार होने का लक्षण है !एक सभ्य समाज ऐसे थोड़े ही होते हैं ! मैं इसे एक राष्ट्र कैसे मानूं ? लगता है हमारा राष्ट्र दूसरा है और सोनी सोरी का दूसरा ! नक्सलियों से लड़ कर अपने स्कूल पर फहराए गये काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की को जेल में नंगा किया जा रहा है और उसे नंगा करने वाले पन्द्रह अगस्त को हमें लोकतन्त्र का उपदेश देंगे !

सोनी सोरी की कहानी सुनो

लोकतंत्र पर आए दिन जगह जगह पर दिए जाते खोखले उपदेशो से बुरी तरह आहत हुए हिमांशु कुमार की आवाज़ क्या अनसुनी रहेगी ? काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की की बेबसी किसी को नजर नहीं आएगी? क्या इस आदिवासी अध्यापिका को हर द्रोपदी की तरह नंगा किया जाता रहेगा ? क्या किसी कृष्ण तक नहीं पहुँच प् रही इस अबला की पुकार ? हम देवी के 9 रूपों की पूजा करने वाले एक धार्मिक देश में ही रहते हैं या कहीं और? क्या यह समाज पूरी तरह कौरव प्रधान हो गया है?--यहाँ सत्य की आवाज़ सुनने वाले अब नहीं रहे क्या? नक्सलियों से लड़ कर अपने स्कूल पर फहराए गये काले झंडे को उतार कर तिरंगा फहराने वाली उस आदिवासी लड़की का आखिर कसूर क्या है ? स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर आखिर कोई तो बताये !           ----रेक्टर कथूरिया 


सोनी सोरी की कहानी सुनो                        सोनी सोरी को दी जा रही हैं एक्सपायरी दवाएं