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Wednesday, April 29, 2020

पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा कर्फ्यू में दो हफ्ते की और वृद्धि का ऐलान

गैर सीमित जोनों में कल से मिलेगी थोड़ी राहत
*पंजाब में कर्फ्यू अब 17 मई तक जारी रहेगा 
*परन्तु साथ ही रहेगी सतर्क नज़र
*कल से हर सुबह 4 घंटे रोटेशन के साथ खुलेंगी दुकानें
*राज्य की अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए विशेष प्रयास 
*मजदूरों के फैक्ट्री के अंदर या पड़ोस में प्रबंधों के साथ उद्योग खोलने की अपील की
चंडीगढ़: 29 अपैल 2020: (पुष्पिन्दर कौर//पंजाब स्क्रीन)::
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को कर्फ्यू में वृद्धि का ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में 3 मई के बाद दो हफ्ते के लिए और कर्फ्यू लागू रहेगा परन्तु कल से लाॅकडाउन की थोड़ी बंदिशें जरूर हटाई जा रही हैं। यह थोड़ी छूटें भी कोविड-19 के एहतियातों का पालन करते हुए सिर्फ गैर सीमित और गैर रेड जोनों के लिए दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को कोविड की स्थिति में से बाहर निकालने के लिए बनाई गई माहिरों की समिति की रिपोर्ट और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों द्वारा प्राप्त हुई जानकारी के आधार पर यह जरूरी है कि लाॅकडाउन की बंदिशें अभी थोड़े समय और जारी रखी जाएँ।
पंजाब में कर्फ्यू / लाॅकडाउन अब 17 मई तक जारी रहेगा परन्तु इसके साथ ही कल से रोजमर्रा की प्रातःकाल 7 से 11 बजे तक थोड़ी छूटें जरूर मिलेंगीं। सीमित और रेड जोन वाले क्षेत्रों में पहले की तरह ही लाॅकडाउन की बंदिशें मुकम्मल तौर पर सख्ती के साथ लागू रहेंगी।
राज्य के लोगों के नाम जारी संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति की दो हफ्तों बाद समीक्षा की जायेगी और यदि महामारी कंट्रोल में रही तो बाद में और ढ़ील घोषित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री द्वारा थेड़ी राहतें देने के किये ऐलान के अंतर्गत कुछ दुकानों को सम्बन्धित क्षेत्रों में रोटेशन के साथ खोलने की आज्ञा होगी। यह दुकानें रोजमर्रा की प्रातःकाल 7 से 11 बजे तक 50 प्रतिशत स्टाफ की क्षमता के साथ खोली जा सकेंगी। डिप्टी कमीश्नरों को आदेश दे दिए गए हैं कि वह मुख्यमंत्री के निर्देशों के अंतर्गत दुकानों को खोलने के लिए रोटेशनल समय सारणी बना लें यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के लागू होने के चार दिन बाद किये गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाॅकडाउन / कर्फ्यू प्रातःकाल 11 बजे से पहले की तरह जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह सामाजिक दूरी का पालन करते हुए तय समय तक अपने घरों में लौट जाया करें। छूट वाले समय के दौरान बाहर निकलने वाले व्यक्ति को मास्क पहनना और दूसरे व्यक्ति से 2 मीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह राहत लोगों की सुविधा के लिए दी गई है। वह इस राहत के समय के दौरान दोस्तों या दूसरों को न मिलें। उन्होंने कहा कि अगर दो हफ्तों में स्थिति में सुधार हुआ तो हम और कदम उठा सकते हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित की गई सीमित ढील में कल से मल्टी ब्रांड और सिंगल ब्रांड माॅल्ज को छोड़कर सभी रजिस्टर्ड दुकानों को वर्करों की 50 प्रतिशत संख्या के साथ प्रातःकाल 7 बजे से प्रातःकाल 11 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई है। नयी हिदायतों के मुताबिक इस समय दौरान शहरी इलाकों में सभी अकेले दुकानों, नेबरहुड शाॅप्स और रिहायशी कम्पलैक्सों में दुकानों को खोलने की भी आज्ञा दी गई है। इन हिदायतों में स्पष्ट किया गया है कि सैलून, नाई की दुकानें आदि सेवाएं बंद रहेंगी। इसी तरह लाॅकडाउन के समय के दौरान ई-काॅमर्स कंपनियों को सिर्फ जरूरी वस्तुएँ मुहैया करवाने की इजाजत होगी।
उद्योग को खोलने के लिए अपनी सरकार की रूचि को प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने जो उद्योग कामगारों के रहने का बंदोबस्त कर सकते हों या फिर कामगार के साथ लगते इलाकों से आते हैं, को अपने यूनिट चलाने की अपील की जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बहाल किया जा सके।
लाॅकडाउन के समय के दौरान बाहर के राज्यों में बड़ी संख्या में फंसे पंजाबियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इनको वापस लाना उनकी सरकार की जिम्मेदारी बनती है परन्तु इनको 21 दिनों के लिए एकांतवास में रहना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि राज्य ने सभी जिलों में इनके एकांतवास के लिए बंदोबस्त किये हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में एन.आर.आईज की घर वापसी के दौरान पंजाब में समस्या गंभीर हुई थी और इसके बाद निजामूद्दीन के समागम में शामिल होने वालों की राज्य में वापसी होने पर यह समस्या और बढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि राज्य यह सहन नहीं कर सकता कि दूसरे राज्यों से आने वालों से हालात एक बार फिर बेकाबू हो जाएँ। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से अपने घर आने वालों को एकांतवास में रखना लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऐलान की गईं राहतों से पंजाब के लोगों को फायदा होगा जो पिछले 38 दिनों से कर्फ्यू की अलग-अलग बंदिशों में रह रहे हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने लोगों के लिए इसको कठिन समय बताया जिन्होंने अपने लिए, परिवारों और राज्य के लिए बड़ा त्याग किया है। उन्होंने कहा कि महामारी को काबू करना लाजिमी है जिससे राज्य में अब तक 330 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं।
कोरोनावायरस को लम्बी लड़ाई बताते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे विभिन्न माहिरों की इस बारे में अलग-अलग राय है परन्तु ऐसे संकेत मिलते हैं कि कोरोनावायरस का संकट जुलाई / अगस्त तक या यहाँ तक कि सितम्बर तक जारी रहेगा। कोरोनावायरस की मार से किसी भी मुल्क के न बचने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस रोग से विश्वभर में बड़े स्तर पर जानें गई हैं और अकेले अमरीका में लगभग 50000 मौतें हुई हैं और अब तक 10 लाख केस सामने आए हैं। उन्होंने इंग्लैंड, जर्मनी और कैनेडा का उदाहरण देते हुए लगातार चैकस रहने की जरूरत पर जोर दिया।

Friday, February 13, 2015

सच में लगातार घट रहा है प्रिंट मीडिया का कारोबार ?

इण्डिया टुडे ने किया अपने तीन एडीशन बंद करने का फैसला 
अब इसे इंटरनेट मीडिया का तेज़ी से बढ़ता हुआ रुझान कहें या प्रिंट मीडिया की कम हो रही लोकप्रियता कि वेबसाईटों और इंटरनेट संस्करणों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है पर प्रिंट एडीशन बंद होने की कगार पर आ रहे हैं। नया मामला सामने आया है इण्डिया टुडे का। समाचार 4 मीडिया.कॉम की एक खबर के मुताबिक इण्डिया टुडे जैसा सफल घराना भी अपने संस्करण बंद  करने को मजबूर है। खबर के मुताबिक भारत में मैगजीन बिजनेस के लिए अब कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई देती, यही वजह है कि देश में एक के बाद एक मैगजीन या तो बंद हो रही हैं या फिर बंद होने कगार पर हैं। देश में सबसे सफल मैगजीन ग्रुप में से एक लिविंग मीडिया ने भी अब इंडिया टुडे की तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषा की वीकली मैगजीन को बंद करने की घोषणा कर दी है।   
इंडिया टुडे समूह के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने एक इंटर्नल मेमो में लिखा, ‘हमें बीस सालों से नुकसान हो रहा है। हमने इसी उम्मीद में ही अपने घाटे को सहा कि एक दिन काया पलट  जाएगी, लेकिन हुआ नहीं। काफी विचार विमर्श के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि भविष्य में भी हमें इन मैगजीनों को लेकर बहुत उम्मीद नही है। इसलिए भारी मन से हमने ये फैसला लिया कि अब हम इन एडिशंस को बंद करेंगे। 

Saturday, February 04, 2012

एमसीए-21 प्रणाली - समग्र ई- प्रशासन परियोजना

तस्वीर:एसटीक्यूसी से साभार  
कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने हाल ही में ई- प्रशासन पहल के अधीन कई कदम उठाए हैं। इसका एक मात्र उद्देश्‍य हित धारकों की डाटाबेस तक पहुंच को सुविधा जनक बनाना है, जो उनके लिए अपना कारोबार और बढ़ाने के लिए अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण होगा। यह डाटाबेस खास कर हित धारकों द्वारा कारपोरेट जगत को स्‍वीकृत और जारी अग्रिम राशि के प्रति शुल्‍क के सृजन से संबंधित है। 
एमसीए और एमसीए-21 पोर्टल का पुनर्निर्माण
·  पुनर्निर्मित पोर्टल एमसीए-21 पहली बार खोलने वाले उपयोगकर्ता के लिए अधिक हितैषी और व्‍याख्‍यात्‍मक है।
·  पोर्टल एमसीए-21 का अत्‍यधिक प्रयोग में आने वाली कार्यात्मकताओं से सम्‍बन्धित अनुभागों को परिभाषित किया है और उपयोगकर्ता की सहायता के लिए विस्‍तृत उपाय-वार प्रक्रिया परिभाषित की गई है।
·  एमसीए-21 पोर्टल की कार्यात्‍मकताओं से सुपरिचित उपयोगकर्ताओं को सभी अनुभागों के अंदर त्‍वरित संपर्क प्रदान किया गया है।
·  निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए 'निवेशक सेवा' नामक एक विशेष व्‍यवस्‍था भी की गई है।
·  इस व्‍यवस्‍था में निवेश शिक्षा संरक्षण कोष (आईईपीएफ) जैसी सभी सम्‍बद्ध वेबसाइटों के साथ संपर्क है, जो निवेशकों के हितों की सुरक्षा में सहायता करता है।
समूचे भारत के लिए इलेक्‍ट्रोनिक स्‍टैम्पिंग का अधिदेश

·  एमसीए-21 प्रणाली के जरिये ई-स्‍टैम्पिंग की व्‍यवस्‍था सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए अधिदेश कर दी गई है।
प्रकिया द्वारा सीधे (एसटीपी) मोड के अधीन विशिष्‍ट ई-फॉर्मों को संसाधित करना।
यह कंपनी रजिस्‍ट्रार के उपयोगिता द्वारा संसाधित नहीं किया जाएगा

·  शेयरों के आबंटन की वापसी से संबंधित फॉर्म-2 और फॉर्म-3
·  किसी मौजूदा कंपनी द्वारा पंजीकृत कार्यालय में परिवर्तन के लिए फॉर्म-18
·  किसी मौजूदा कंपनी द्वारा निदेशक आदि में परिवर्तन संबंधी ब्‍योरे के लिए फॉर्म-32
·  शुल्‍क (देरी के लिए क्षमा को छोड़कर अन्‍य मामले) के संबंध में फॉर्म-8 और 17
·  किसी नयी कंपनी द्वारा नाम उपलब्‍ध कराने के लिए फॉर्म-1ए (इसमें नाम उपलब्‍ध कराने से सम्‍बन्धित दिशा-निर्देश भी शामिल हैं)
विशिष्‍ट कंपनियों को निष्क्रिय कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक  लगाना
·  जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और बेलेंसशीट लगातार तीन वर्ष तक जमा नहीं कराई उन कंपनियों को एक अलग वर्ग-डोरमेंट (निष्क्रिय) कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों को अपना ई-फाइलिंग जमा करने से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे फाइलिंग में दोष को दूर नहीं कर लेतीं।
विशिष्‍ट कंपनियों को दोषी कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक लगाना
·  जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और/या बेलेंस‍शीट एक वर्ष या अधिक अवधि के लिए जमा नहीं की उन्‍हें दोषी कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों और उनके निदेशकों को ई-फाइलिंग से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे रिटर्न फाइल करने में दोष को दूर नहीं कर लेते।
शिकायत पर नजर रखने की विस्‍तृत व्‍यवस्‍था का कार्यान्‍वयन
·  एमसीए-21 हित धारकों के लिए एमसीए-21 प्रणाली में शिकायत पर नजर रखने की एक विस्‍तृत प्रणाली लागू की गई है। उपयोगकर्ता उसी के जरिये शिकायतें, मामले, प्रश्‍न, सुझाव दे सकते हैं और उन्‍हें उसके लिए एक विशिष्‍ट संदर्भ टिकट दिया जाता है। वे संदर्भ टिकट का प्रयोग करके शिकायत की पूर्ति की स्थिति जान सकते हैं।
प्रणाली के अधीन प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर
·  पहले की व्‍यवस्‍था के अनुसार कंपनी रजिस्‍ट्रार के अधिकारी विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर हस्‍ताक्षर करके उसे कंपनी को डाक द्वारा भेजते थे। अब एमसीए-21 प्रणाली के अधीन विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें अब हाथ से कोई काम नहीं किया जाता और फिर डिजिटल तरीके से हस्‍ताक्षरित प्रमाण पत्रों को ई-मेल के जरिये कंपनी को भेजा जाता है और पुष्टि के लिए एमसीए-21 एफओ पोर्टल को भी उपलब्‍ध कराया जाता है।
डायरेक्‍टर आइडेंटिफिकेशन नम्‍बर (डीआईएन) के आबंटन की प्रक्रिया को कागज-मुक्‍त और ऑन-लाइन बनाया गया, और डीआईएन-डीपीआईएन को जोड़ा गया
·  एमसीए द्वारा डीआईएन के आबंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह कागज-मुक्‍त बना दिया गया है। यह स्‍थूल रूप में सबूत दाखिल करने की आवश्‍यकता को समाप्‍त करने के लिए किया गया है और इसके स्‍थान पर इसे स्‍वयं डीआईएन आवेदन को स्‍कैन किया जा सकता है। इसके अलावा सभी भारतीय निदेशकों के लिए आयकर पैन उपलब्‍ध करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही कार्यरत व्यवसायी के प्रमाण पत्र पर आधारित व्‍यवस्‍था द्वारा डीआईएन आवेदन-पत्र को संसाधित किया जाता है।
·  कंपनी अधिनियम के अधीन डीआईएन के आबंटन और एलएलपी अधिनियम के तहत डीपीआईएन के आबंटन के लिए एमसीए के पास अलग- अलग व्‍यवस्‍थाएं हैं। अब एमसीए ने दोनों व्‍यवस्‍थाओं को जोड़ कर डीआईएन के रूप में एक-समान पहचान बना दी है।
अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय - आयकर और ट्रेडमार्क
संयुक्त सेवाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया गया-

·   निदेशकों आदि के विवरणों का सत्यापन करने के लिए आयकर प्रणाली के साथ उनके अपने-अपने आयकर पैन ब्यौरे को जोड़ना।
·   आंतरिक (कंपनी रजिस्ट्रार के कार्यालय) और बाहरी हितधारकों (कंपनी, व्यावसायी) के टीएमआर डाटा बेस पर ढूंढने की सुविधा प्रदान करने के लिए ट्रेडमार्क प्रणाली के साथ जोड़ना।
कारपोरेट खाते खोलने के लिए बैंकों के साथ समन्वय
·  विभिन्न बैंकों के साथ समन्वय की प्रक्रिया में एमसीए ने कारपोरेटों के लिए एमसीए-21 प्रणाली के जरिये बैंक खाता खोलने के लिए एक सुविधा शुरू की है। कंपनी को एमसी प्रणाली पर इलैक्ट्रोनिक फार्म और कुछ ब्यौरे भरने होते हैं, कंपनी के बारे में दस्तावेज संबद्ध बैंक को एमसीए -21 प्रणाली के जरिये भेजें जाते हैं।
अदायगियां करने के लिए एनईएफटी विकल्प की शुरूआत
·  पहले एमसीए-21 अदायगियां क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और स्थूल चालान के जरिये करने की अनुमति थी। इंटरनेट बैंकिंग केवल पांच बैंकों तक सीमित है। अदायगी प्रक्रिया में होने वाली देरी से उत्पन्न असुविधा को समाप्त करने के लिए एमसीए ने एमसीए फीस की अदायगी एनईएफटी अर्थात राष्ट्रीय इलैक्ट्रोनिक कोष हस्तांतरण मोड के जरिये शुरू किया है। इस विकल्प के जरिये हितधारक एससीए-21 फीस की अदायगी किसी भी बैंक के जरिये, जो एनईएफटी की अनुमति देता हो, कर सकते हैं।
स्थूल चालान मोड के जरिये अदायगी पर रोक
·  स्कूल विकल्प (बैंक की खिड़की पर चालान के जरिये अदायगी) के जरिये एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं के लिए अदायगी की सुविधा पर, पचास हजार रुपये के समकक्ष अथवा उससे अधिक राशि के मामले में रोक लगा दी गई है।
विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करने के लिए एक्सबीआरएल लागू-
·  विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा एक्सटेंसीबल बिजनेस रिपोर्टिंग लैंग्वेज (एक्सबीआरएल) द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करना एमसीए-21प्रणाली में कार्यान्वित किया गया है। इस प्रणाली में वित्तीय विवरणों को एमसीए एक्सबीआरएल टेक्सोनोमी के साथ जोड़ना होता है। एमसीए-21 प्रणाली ने हितधारकों को एक्सबीआरएल दस्तावेज दाखिल करने से पहले सत्यापित करने के लिए एक सुविधा प्रदान की है। इसके अतिरिक्त एक्सबीआरएल दस्तावेजों को पढ़ने वाली मशीन एमसीए -21 प्रणाली के जरिये दस्तावेजों को मनुष्य द्वारा पढ़े जाने योग्य बना देती है।
त्वरित कार्यात्मकता का चिन्ह
·  पहले एमसीए प्रयोगकर्ता द्वारा किसी कार्य वस्तु को संसाधित करने में उस कार्य वस्तु को तात्कालिक चिन्हित करने की सुविधा थी और वह इसे एफआईएफओ प्रक्रिया द्वारा करता था। तथापि अधिक पारदर्शिता लाने के लिए यह कार्यात्मकता रोक दी गयी है। अब कार्य वस्तु उनके द्वारा भरे जाने के क्रम से संसाधित की जाएगी।

वापसी प्रक्रिया की शुरूआत
·  किसी हितधारक द्वारा एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने के लिए गलती से दी गई फीस की वापसी के लिए एमसीए-21 में पहले कोई व्यवस्था नहीं की। मंत्रालय ने अब विशिष्ट सेवाओं के लिए अदा की गई वैधानिक फीस को वापस करने का निर्णय लिया है। हितधारक द्वारा रिफंड के लिए नया ई-फार्म भरना होगा  और उनकी संसाधित होने पर रिफंड का अनुरोध स्वीकार या अस्वीकार किया जाएगा।
·  एमसीए -21 की फीस का रिफंड जिन मामलों में उपलब्ध है वे हैं : (क) बहुअदायगियां का फार्म एक और पांच (ख) गलत अदागियां और (ग) ज्यादा अदायगी।
·  रिफंड प्रक्रिया विशिष्ट सेवाओं/ई फार्म जैसे दस्तावेजों का सार्वजनिक निरीक्षण, सत्यापित प्रतियों का अनुरोध हस्तांतरण दस्तावेजों के लिए अदायगी, स्टाम्प ड्यूटी फीस (डी श्रंखला एसआरएन), आईईपीएफ अदायगी, एसटीपी फार्म, डीआईएन ई फार्म आदि पर लागू नहीं होती। (पी.आई.बी)
((02-फरवरी-2012)