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Tuesday, August 10, 2021

औद्योगिक ज़मीन की नीलामी में PSIEC की कोई भूमिका नहीं

 10th August 2021 at 10:00 PM

सरकार ने मोहाली स्थित 31 एकड़  ज़मीन के मामले में स्पष्ट किया

चंडीगढ़: 10 अगस्त 2021: (गुरजीत बिल्ला//पंजाब स्क्रीन):: 

मोहाली की 31 एकड़ इंडस्ट्रियल ज़मीन की नीलामी का मामला मीडिया में उठने से विवाद गहरा गया है। पंजाब सरकार ने इस संबंध में गहराई हुई धुंद को हटाते हुए स्पष्ट किया है कि इस नीलामी में पी.एस.आई.ई.सी. की ज़रा सी भी भूमिका नहीं थी। 

इस बात को दोहराते हुये कि फेज़-8, मोहाली में स्थित 31 एकड़ औद्योगिक ज़मीन के प्लाट की नीलामी एसैटस कंस्ट्रक्कशन कंपनी आफ इंडिया लिमटिड (आरसिल) के द्वारा की गई थी, जो कि एस.ए.आर.एफ.ए.ई.एस.आई. एक्ट, 2002 की धाराओं के अधीन भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से रजिस्टर्ड एक एजेंसी है। उद्योग विभाग के प्रवक्ता ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।

प्रवक्ता ने कहा कि पी.एस.आई.ई.सी. की उक्त नीलामी करवाने में कोई भूमिका नहीं थी और जे.सी.टी. इलेक्ट्रोनिक्स, प्लाट के अलाटी, को विभिन्न वित्तीय संस्थाओं / बैंकों के द्वारा दिए गए कर्जों की अदायगी करने में डिफालटर होने के कारण माननीय अदालतों द्वारा उसको दिवालिया घोषित किये जाने के बाद आरसिल द्वारा कानून के अनुसार ज़मीन का कब्ज़ा ले गया था।

आज मीडिया के एक हिस्से में छपी मीडिया रिपोर्टों के जवाब में प्रवक्ता ने आगे बताया कि बाद में आरसिल के द्वारा एस.ए.आर.एफ.ए.ई.एस.आई. एक्ट की धाराओं के अंतर्गत पारदर्शी ढंग से की गई आनलाइन सार्वजनिक नीलामी में प्लाट को फरवरी 2020 में 90.56 करोड़ रुपए की कीमत पर नीलाम किया गया था। इसके बाद पीएसआईईसी ने जेसीटी इलेक्ट्रोनिक्स के साथ किये गए 45.28 करोड़ यानि 50 फीसद बिक्री मूल्य की लीज़ डीड की शर्तों की पालना के अंतर्गत नाजायज वृद्धि का दावा पेश किया था। पी.एस.आई.ई.सी. ने आरसिल के पास दावा पेश करने से पहले इस मामले में सीनियर वकील की सलाह ली थी।

पीएसआईईसी, आरसिल और मैसर्ज जीआरजी डिवैलपरज़ एंड प्रमोटरज़ एलएलपी के बीच एक तीन-पक्षीय समझौता किया गया था, जिससे सरकार / पीऐसआईईसी के वित्तीय हितों की रक्षा की जा सके, जिसने नीलामी खरीददार को पीएसआईईईसी के बकाए को समय पर अदा करने के लिए निर्धारित किया था।

यह स्पष्ट किया गया कि पीएसआईईसी ने नीलामी खरीददार के पक्ष में संपत्ति के तबादले को दिखाने के लिए एनओसी भी जारी नहीं की है। दरअसल, अपने हितों की रक्षा के लिए पीएसआईईसी ने आरसिल और नीलामी खरीददार को स्पष्ट तौर पर बताया था कि वित्त विभाग, पंजाब सरकार के द्वारा मामले के फ़ैसले के बाद ही तबादले के लिए एनओसी प्रदान की जाऐगी। पी.एस.आई.ई.सी. ने न तो तबादले के लिए एन.ओ.सी. जारी किया है और न ही नीलामी खरीददार को संपत्ति का कब्ज़ा दिया गया है।

अब इस मामले में पंजाब के वित्त विभाग की उपरोक्त सलाह प्राप्त हुई है। इसकी पालना हेतु सरकार ने उद्योग और वाणिज्य मंत्री, पंजाब के स्तर पर उपरोक्त बताए गए तीन -पक्षीय समझौते को ख़त्म करने के आदेश दिए हैं। इसके आगे बताया गया कि यह मामला विचाराधीन है और 24.08.2021 को माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

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Saturday, February 27, 2021

पंजाब पुलिस द्वारा एक नई ज़ोरदार पहल

 सभी जिलों में स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र किये जाएंगे स्थापित 

चंडीगढ़: 26 फरवरी 2021: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

पुलिस कर्मियों का स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती सबसे पहली प्राथमिकता रही है जिसके चलते पंजाब पुलिस की तरफ से राज्य के सभी जिलों समेत तीन पुलिस कमिशनरेटज़ (सी.पीज़) में पुलिस के लिए स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र (एच.डबल्यू.सी.) स्थापित करने का फैसला किया गया है। यह केंद्र सभी हथियारबंद पुलिस और पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों में भी स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है।

इन एच.डबल्यू.सी. में इन्डोर जिम, आउटडोर जिम, ध्यान और योगा के लिए जगह, फिजीओथैरेपी सैंटर और काउंसलिंग के लिए रूम होंगे जिससे पुलिस कर्मियों को स्वास्थ्य सम्बन्धी काउंसलिंग और उपयुक्त परामर्श प्रदान किया जा सके। 

डायरैक्टर जनरल आफ पुलिस (डी.जी.पी.) दिनकर गुप्ता ने जानकारी देते हुये कहा कि पुलिस कर्मियों की तरफ से तनावपूर्ण स्थितियों में काम करने से उनको थकावट, तनाव की समस्याएँ हो जातीं हैं जो बाद में स्वास्थ्य सम्बन्धी गंभीर मुद्दों का कारण बन सकती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्र जहाँ पुलिस कर्मियों को अपनी शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती की तरफ ध्यान देने के प्रति उत्साहित करेंगे वहीं सेहतमंद जीवन के लिए उनको स्वास्थ्य सम्बन्धी उपयुक्त परामर्श प्रदान भी करेंगे।

पहले पड़ाव में एच.सी.डबल्यूज़ की स्थापना के लिए बजट में से 2.97 करोड़ रुपए की राशि पहले ही सी.पी. लुधियाना और सी.पी. अमृतसर समेत 15 जिलों को जारी कर दी गई है। डी.जी.पी. ने बताया कि अधिकतर केंद्र सी.पी. अमृतसर, जिला तरन तारन, मानसा और पठानकोट में बन कर तैयार हो गए हैं और मार्च के अर्ध तक कार्यशील होने की उम्मीद है जबकि बाकी केन्द्रों का निर्माण कार्य चल रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे सैंटर स्थापित करने के लिए दूसरे पड़ाव में बाकी जिले, आम्र्ड पुलिस और पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों में फंडों का वितरित किया जायेगा।

डीजीपी दिनकर गुप्ता ने आगे बताया कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती के प्रोग्रामों के आयोजन के लिए अगले वित्तीय साल से हर जिले के लिए 2 लाख रुपए सालाना राशि भी रखी गई है।

डीजीपी ने कहा कि स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केन्द्रों में पाँच से सात दिनों के हैल्थ एंड वैलनैस प्रोग्राम मनोरोग माहिरों समेत स्वास्थ्य पेशेवरों के द्वारा करवाए जाएंगे जो बेहतर स्वास्थ्य के लिए पुलिस कर्मियों को जीवन-शैली में बदलाव लाने के लिए शारीरिक व्यायाम, पौष्टिक खुराक और काउंसलिंग की सिफारिश करेंगे। उन्होंने कहा कि फिजीओथैरेपी सैंटर पुलिस को आयु से सम्बन्धी मामूली दर्द और घुटनों, जोड़ों, कमर आदि में दर्द से राहत सम्बन्धित सहूलतें प्रदान करेंगे।

एडीजीपी वैलफेयर वी. नीरजा ने कहा कि सभी पुलिस कमीशनरों (सी.पीज़) और सीनियर कप्तान पुलिस को स्वास्थ्य एवं वैलनैस प्रोग्राम की जरूरत वाले पुलिस कर्मियों की पहचान करने के लिए एस.पी. मुख्यालय और मैडीकल अधिकारियों के साथ कमेटी का गठन करने की हिदायत कर दी गई है। यह कमेटी मासिक स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती प्रोग्राम तैयार करेगी और इनका आयोजन करवाएगी। इसके इलावा यह कमेटी यह भी यकीनी बनाऐगी कि जिले में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को साल में कम से कम एक बार प्रोग्राम में शामिल होने का मौका मिल सके।

इस दौरान डीजीपी ने उम्मीद जाहिर की है कि एच.डबल्यू.सीज़ पुलिस कर्मियों के लिए सेहतमंद जीवन शैली अपनाने और उनको विभिन्न बीमारियों से बचा कर रखने के लिए सहायक साबित होंगे।

Sunday, September 27, 2020

धान की खऱीद 27 सितम्बर से शुरू करने के हुक्म-आशु

 खऱीद के दौरान कोविड-19 से बचाव के लिए किए गए व्यापक प्रबंध 

*पंजाब सरकार ने राज्य में 4,035 स्थानों को खऱीद केंद्र के तौर पर नोटीफाई किया

*खऱीद केंद्र में किसानों और मज़दूरों के लिए किए गए उचित प्रबंध

चंडीगढ़: 26 सितम्बर 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

राज्य की मंडियों में धान की फ़सल की अग्रिम आमद को देखते हुए आज पंजाब सरकार ने पहले से तय प्रोग्राम की जगह 27 सितम्बर, 2020 से खरीद प्रक्रिया शुरू करने के हुक्म जारी कर दिए हैं।

इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए पंजाब के खाद्य एवं सिविल सप्लाई मंत्री श्री भारत भूषण आशु ने कहा कि राज्य की मंडियों में धान की तैयार फ़सल आने संबंधी उनको सूचनाएँ मिल रही थीं, जिस पर उन्होंने अक्तूबर 2020 को शुरू की जाने वाली खरीद प्रक्रिया को 27 सितम्बर 2020 से पूरी गति से शुरू करने के आदेश जारी किए हैं।

श्री आशु ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों का दाना-दाना खऱीदने के लिए वचनबद्ध है।

उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा कोविड-19 के फैलाव को रोकने और किसानों, मज़दूरों, पल्लेदारों, आढ़तियों, ढुलाई में शामिल लोगों और खऱीद कार्य में लगे सरकारी मुलाजि़मों और अधिकारियों को बचाने के लिए राज्य भर में 4035 स्थानों को खऱीद केंद्र के तौर पर नोटीफाई किया है। इनमें से 1,871 सरकारी मंडियां हैं, जबकि 2,164 सार्वजनिक स्थान मिलों के हैं।

श्री आशु ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ए ग्रेड धान की एम.एस.पी. 1,888/- रुपए ऐलान की गई है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए किए गए प्रबंधों में गेहूँ की खऱीद के दौरान किए गए ज़्यादातर प्रबंधों को हू-ब-हू लागू किया गया है, जिससे सामाजिक दूरी सम्बन्धी जो आदेश राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए हैं उनको पूरी तरह से लागू किया जा सके।

खाद्य मंत्री ने कहा कि खऱीद प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों को सैनेटाईज़ेशन सम्बन्धी विशेष हिदायतें जारी की गई हैं और हाथों को सैनेटाईज़ करने के लिए साबुन, पानी और 70 प्रतिशत अल्कोहल वाले हैंड सैनेटाईजऱ का भी प्रबंध करने के लिए कहा गया है।

यह खऱीद प्रक्रिया 30 नवंबर, 2020 तक जारी रहेगी और खऱीद से 48 घंटों में फसल की लिफ्टिंग को यकीनी बनाने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।

इसके अलावा इस बार भी रबी सीजन की तरह ही पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा आढ़तियों के द्वारा किसानों को पास जारी किए जाएंगे, जिनका रंग हरेक दिन परिवर्तनीय होगा।

उन्होंने कहा कि खऱीद केन्द्रों में किसानों और मज़दूरों के लिए पीने वाले पानी, लाईट, छायादार बैठने वाली जगह और साफ़-सुथरे पखानों का भी प्रबंध करने के आदेश दिए गए हैं।


Friday, August 28, 2020

साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन गिरफ़्तार

 बहु-करोड़पति साईबर बैंक फ्रॉड का किया पर्दाफाश 
चंडीगढ़: 27 अगस्त 2020(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
पंजाब पुलिस स्टेट साईबर क्राइम सैल ने राज्य में आधुनिक सूचना तकनीक के द्वारा बहु-करोड़पति साईबर बैंक घोटाले का पर्दाफाश करके बड़ी सफलता हासिल की है और गिरोह के मुख्य सरगना अमित शर्मा उर्फ नितिन को काबू कर लिया है, जो पिछले करीब 7 महीनों से फऱार चल रहा था। इस सम्बन्ध में उस दोषी के खि़लाफ़ थाना स्टेट साईबर क्राइम, एसएएस नगर में आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471, 120 बी, आईटी कानून की धारा 66, 66-सी, 66-डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए ब्यूरो ऑफ इनवैस्टीगेशन के डायरैक्टर-कम-एडीजीपी श्री अर्पित शुक्ला ने बताया कि साईबर क्राइम सैल ने इस केस की जांच एचडीएफसी बैंक के लोकेशन मैनेजर विजय कुमार की शिकायत पर की है, जिसने दोष लगाया है कि एचडीएफसी बैंक खाते से लगभग 2 करोड़ रुपए की तकनीकी ढंग से धोखाधड़ी की गई है। पुलिस को पड़ताल के दौरान यह पता लगा कि साईबर धोखाधड़ी करने वाले ने नैट बैंकिंग के द्वारा खाते से पैसे निकाल कर 5 अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए। उन्होंने कहा कि यह बैंक खाते नकली पहचान पत्रों के द्वारा खोले गए थे और इसके बाद खातों से एटीएम और स्वै-चैक के द्वारा नकदी निकलवाई गई।
इस साईबर अपराध की कार्यप्रणाली संबंधी बताते हुए बीओआई के प्रमुख ने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों ने बहुत चालाकी के साथ पीडि़त के बैंक खाते के साथ रजिस्टर किए गए ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों को उसी जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में तबदील कर दिया, जिस कारण मुलजि़म अपने इन मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी के द्वारा उसके खातों का वर्चुअल कंट्रोलर बन गया।
इस केस में अमित शर्मा उर्फ नितिन ने अपने आप को अकाश अरुण भाटिया (केस का पीडि़त) के तौर पर अपनी पहचान बनाई और उसके (भाटिया) बैंक खातों की इन्टरनेट बैंकिंग पहुँच हासिल कर ली। इसके बाद मुलजि़म ने नकली दस्तावेज़ जमा करवा कर विक्रम सिंह के नाम पर खोले और पाँच अलग-अलग खातों में पैसे तबदील कर लिए।
उन्होंने आगे बताया कि जांच के दौरान सभी सरकारी पहचान प्रमाण, जिनमें चिप आधारित ड्राइविंग लायसेंस, पैन कार्ड, होलोग्राम वाला वोटर आईडी कार्ड आदि और बैंक खाता खोलने और मोबाइल नंबर प्राप्त करने के लिए मुहैया करवाए गए निजी पहचान दस्तावेज़ (केवाईसी) भी नकली पाए गए। इन धोखेबाज़ों ने एटीएम कार्डों और चैकों के द्वारा सारे पैसे निकलवा लिए, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सका। इसके अलावा, मोबाइल नंबर सिफऱ् अपराध करने के समय ही इस्तेमाल किए जाते थे और उसके बाद नॉट-रीचेबल हो जाते थे।
इसका और विवरण देते हुए श्री अर्पित शुक्ला ने कहा कि जांच के दौरान मोबाइल फ़ोन की लोकेशन से पता लगा कि लुटेरे लुधियाना से गिरोह चला रहे थे। पड़ताल के दौरान पुलिस जांच टीम को पुलिस के स्रोतों से गुप्त जानकारी मिली और इस खुलासे के साथ मुलजि़म की पहचान हो गई। इस ऑप्रेशन के दौरान उस क्षेत्र की परीक्षक टीम द्वारा ख़ुद जांच और घर-घर तस्दीक की गई जहाँ यह फ़ोन एक्टिव थे।
उन्होंने बताया कि शारीरिक बनावट और सामने आ रहे विवरणों के आधार पर इस मामले में 3 मुलजि़म नामज़द किए गए और इनमें से दो मुलजि़म राजीव कुमार पुत्र देव राज और दीपक कुमार गुप्ता पुत्र दर्शन लाल गुप्ता निवासी शिमलापुरी को शिमलापुरी, लुधियाना से 28-01-2020 को गिरफ़्तार कर लिया था, परन्तु यह मुख्य मुलजि़म उस समय पर फऱार होने में सफल हो गया।
उन्होंने कहा कि इस साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन पुत्र राम लाल निवासी दयोल एन्क्लेव, लुधियाना को पकडऩे के लिए एसएचओ साईबर क्राइम भगवंत सिंह की एक विशेष टीम बनाई गई। इस फऱार दोषी के विरुद्ध पंजाब और हरियाणा राज्य के अलग-अलग थानों में 6 एफआईआर दर्ज हैं और वह ऐसी करोड़ों की धोखाधड़ी में वांछित था।
जि़क्रयोग्य है कि मुलजि़म सूचना तकनीक के साथ विवरणों को बदल कर बैंक खातों को हैक करते थे। यह मुलजि़म 28-01-2020 को पुलिस पार्टी को चकमा देकर फऱार हो गया था, जब उसके सह मुलजि़मों को जांच टीम ने लुधियाना के एक जिम से गिरफ़्तार किया था, जहाँ उस दिन उसे काबू करने के लिए जाल बिछाया गया था। इन मुलजि़मों की गिरफ़्तारी के साथ, करोड़ों रुपए की साईबर धोखाधड़ी के साथ सम्बन्धित सभी केस हल हो गए। इस सम्बन्धी अगली जांच के दौरान और खुलासे होने की संभावना है।

Monday, May 18, 2020

नहीं होने देंगें शराब का अवैध कारोबार:डिप्टी कमिश्नर

Monday: 18th May 2020 at 6:12 PM 
सभी सबंधित विभागों की संयुक्त टीमें करेंगी छापेमारी
होशियारपुर: 18 मई 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

शराब के अवैध कारोबार को ले कर पंजाब के सभी ज़िलों में पूरी सख्ती के आदेश जारी हो गए हैं। शराब का अवैध कारोबार करने वाले लोग जहां सरकार की कमाई में सेंध लगाते हैं वहीँ लोगों तक मनमर्ज़ी की मिलावटी शराब पहुंचा कर उनके  खिलवाड़ भी करते हैं। लॉक डाउन के दौर में शराब  बंद रहना एक रेकार्ड रहा। अब जबकि ठेके खुल गए हैं तो सरकार की कोशिश यही है कि शराब खरीदने के इच्छुक यहीं से शराब खरीदें। इसलिए जो लोग अपने  तरीकों से शराब बेचने में लगे हैं उन सरकार की सतर्क निगाह है। अब उनकी खैर नहीं। इसलिए समझदार लोग अवैध शराब को खुद ही छोड़ दें तो फायदे में रहेंगे।  इस आशय के संकेत सभी ज़िलों में दे दिए गए हैं। 
डिप्टी कमिश्नर श्रीमती अपनीत रियात ने कहा है कि ज़िले में शराब का अवैध कारोबार नहीं होने दिया जाएगा व यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो नियमों मुताबिक सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि शराब की गैर-कानूनी बिक्री व स्टोरेज संबंधी सिविल, पुुलिस व एक्साइज की संयुक्त टीमों की ओर से विशेष चैकिंग की जाएगी।   
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि ज़िले में लाकडाउन के दौरान(23 मार्च से 16 मई तक) एक्साइज एक्ट संबंधी 76 पर्चे दर्ज किए गए हैं व 97 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि करीब लाखों रुपए की लागत वाली गैर कानूनी शराब की 8503 बोतलें, देसी शराब की 334 बोतलें व रॉ एल्कोहल की 1050 बोतलें पकड़ी गई हैं।
श्रीमती अपनीत रियात ने एक्साइज विभाग व जिला पुलिस को निर्देश देते हुए कहा कि शराब की गैर कानूनी बिक्री व स्टोरेज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, इस लिए लगातार छापेमारी करनी यकीनी बनाई जाए। उन्होंने कहा कि बंद पड़े कोल्ड स्टोरों, राइस शैलरों व मैरिज पैलेसों आदि की चैकिंग भी की जाए, क्योंकि शराब की गैर कानूनी स्टोरेज के लिए बंद पड़े स्टोरों आदि का प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दसूहा, टांडा व मुकेरियां के अंतर्गत आते मंड इलाके में भी छापेमारी करनी यकीनी बनाई जाए, ताकि शराब व लाहन के कारोबार पर नकेल कसी जा सके। उन्होंने जिला पुलिस व एक्साइज विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी तालमेल से लगातार छापेमारी करने के साथ-साथ गैर कानूनी शराब का कारोबार करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

Monday, June 24, 2019

नाभा जेल कत्लकांड मामले की जांच रिपोर्ट दो दिनों में

Jun 24, 2019, 3:19 PM
राज्य की तीनों जेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जल्द ही CRPF के हवाले
लुधियाना: 24 जून 2019 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

पंजाब सरकार के सहकारिता और जेल विभागों के कैबिनेट मंत्री स. सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने मास्टर तारा सिंह को पंथ की अजीम षख्सियत का दर्जा देते हुए बताया कि सिख इतिहास में मास्टर जी अकेले ऐसे सिख नेता थे जिन्होंने पंथ की चढ़दी कला के लिए, मैं मरुं पंथ जैसा नारा दिया। 
आज यहां पंजाबी भवन में पंजाब सरकार की तरफ से पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के सहयोग से मास्टर तारा सिंह के जन्म दिवस पर करवाए राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए स. रंधावा ने कहा कि मास्टर तारा सिंह ने अपना सारा जीवन पंथ की चढ़दी कला के लिए लगा दिया। मास्टर तारा सिंह एक ईमानदार और दरवेश राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने अपने सभी निजी स्वार्थों को तरफ रख कर सिख कौम खास कर आर्थिक पक्ष से पिछड़े वर्गों को उपर लाने के लिए बहुत प्रयत्न किये। 
स. रंधावा ने पंजाब सरकार का इस बात का धन्यवाद किया कि मास्टर तारा सिंह का जन्म दिवस मनाने के लिए शहर लुधियाना को चुना गया है क्योंकि मास्टर तारा सिंह के जीवन की कई अहम घटनाएँ इस शहर के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने सिख कौम से अपील की है कि वह मास्टर तारा सिंह के हर जन्म दिवस को घर -घर में मनाया जाये जिससे उनकी सोच को और आगे लेजाया जा सके। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलग आस्तित्व के लिए संघर्ष करने वालों के सपनों का राज्य बनाने के लिए आज हमें दूध और पुत्र को बचाने की जरूरत है। 
इस अवसर पर उन्होंने मास्टर तारा सिंह की रचनाओं को किताबी रूप देने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए जारी करने और मास्टर तारा सिंह की शानदार प्रतिमा गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी श्री अमृतसर साहब में स्थापित करने का ऐलान किया। उन्होंने नगर निगम लुधियाना के मेयर स. बलकार सिंह संधू को कहा कि वह जालंधर बाईपास (लुधियाना शहर) स्थित फ्लाईओवर का नाम मास्टर तारा सिंह के नाम पर रखने संबंधी कार्यवाही आरंभ करें। 
आयोजन के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए स. रंधावा ने बीते दिनों नाभा की नई जेल में डेरा सिरसा के पैरोकार के हुए कत्ल को साजिश होने या ना होने बारे कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट दो दिनों में मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को मिलकर इस घटना की बारीकी से जांच करवाने के लिए कहेंगे। 
उन्होंने कहा कि इस घटना में मारा गया महेन्दरपाल सिंह बिट्टू बेअदबी से सम्बन्धित घटनाओं का कथित तौर पर मुख्य दोषी था, उसके मारे जाने से विशेष जांच टीम (एस. आई. टी.) की तरफ से जा रही जांच भी प्रभावित हो सकती है। विभिन्न गैंगस्टर ग्रुपों की तरफ से बिट्टू की हत्या की जिम्मेदारी लेने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोग नाहक ही क्रेडिट वाॅर में लगे हुए हैं। ऐसे लोगों को यह नहीं पता कि हो सकता है कि इस कत्ल के साथ बेअदबी मामलों की तह तक पहुँचने के लिए जरूरी सबूत भी खत्म हो गए हों। 
स. रंधावा ने कहा कि राज्य की तीन जेलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जल्द ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी सी. आर. पी. एफ. को दी जा रही है, इस संबंधी केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से हरी झंडी मिल गई है। जेलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए पंजाब सरकार की तरफ से लगातार प्रयत्न किये जा रहे हैं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उनके विभाग को दो दिन पहले ही 24 करोड़ रुपए जारी किये हैं, जिससे जेलों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए नयी भर्ती की जायेगी। इसके अलावा जेल अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों के लिए नये हथियार भी खरीदे गए हैं। 
इससे पहले समागम दौरान विधायक स. कुलदीप सिंह वैद्य, गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व उप कुलपति डा. एस. पी. सिंह, जानेमाने इतिहासकार डा. पिृथीपाल सिंह कपूर, पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व प्रधान और शिरोमणी कवि प्रोफैसर गुरभजन सिंह गिल और मास्टर तारा सिंह के परिवारिक मैंबर बीबी जसप्रीत कौर ने मास्टर तारा सिंह के जीवन, साहित्यक देन और उनके साथ जुड़ी कई घटनाओं का विवरण उपस्थित लोगों के साथ सांझा किया। प्रो. गिल ने मास्टर तारा सिंह के जीवन बारे आने वाली पीढ़ीयों को अवगत करवाने के लिए जरूरी कई माँगें स. रंधावा के माध्यम से पंजाब सरकार के आगे रखी, जिन्हें स. रंधावा ने मौके पर पूरा करने का ऐलान किया। पंजाबी साहित्य अकादमी के प्रधान स. रवीन्द्र सिंह भट्ठल ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया। 
समागम दौरान विधायक श्री सुरिन्दर डाबर, स. लखबीर सिंह लक्खा (दोनों विधायक), नगर निगम के मेयर स. बलवान सिंह संधू, पूर्व मंत्री स. मलकीत सिंह दाखा, मिल्कफैड के एम. डी. स. कमलजीत सिंह संघा, डिप्टी कमिश्नर श्री प्रदीप कुमार अग्रवाल, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर श्रीमती नीरू कत्याल गुप्ता, एस. डी. एम. स. अमरिन्दर सिंह मल्ली, जिला कांग्रेस समिति प्रधान श्री अश्वनी शर्मा, श्री के. के. बावा, स. अमरजीत सिंह टीका, मुहम्मद गुलाब, स. हरकरन सिंह वैद्य (सीनियर कांग्रेसी नेता) और अन्य पतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह दौरान भाई रवीन्द्र सिंह दीवाना ने कवितायों की प्रस्तुति दी। 

Saturday, January 20, 2018

रक्षा मंत्रालय//आकस्मिकता निकासी: तिब्बा गुफा//

20th Jan 2018 at 4:12 PM by PIB Delhi
लद्वाख सेक्टर में एक साहसिक केसवाक मिशन का संचालन
लेह स्थित हेलिकॉप्टर यूनिट, ‘ द सियाचिन पायनियर्स‘ 19 जनवरी, 2018 को लेह के लद्वाख सेक्टर में केसवाक मिशन को अंजाम देती हुई।
कल लेह स्थित सियाचिन पायनियर्स: 114 ने लद्वाख सेक्टर में जंस्कार घाटी के दूर दराज के पहुंच वाले क्षेत्रों में एक साहसिक केसवाक मिशन का संचालन किया।
यह हताहत जम चुकी जंस्कार नदी के ऊपर आयोजित ‘चादर ट्रेक‘ का एक हिस्सा था। बेहद कम समय में प्राप्त सूचना के बावजूद,  क्रू संदेश मिलने के शीघ्र बाद हेलिकॉप्टर के जरिये वहां पहुंच गया। बेहद दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण इस मिशन के लिए दो हेलिकॉप्टर को बुलाया गया। इसका अर्थ यह है कि अगर एक हेलिकॉप्टर नीचे आया तो दूसरा सहायता के लिए वहां उपस्थित हो। चूंकि निम्न संचार व्यवस्था के कारण उस स्थान के लिए समन्वय उपलब्ध नहीं था, एयरक्रू को बर्फीले पहाड़ों एवं जंस्कार घाटी की दरारों में हताहत की खोज करने के बेहद दुष्कर कार्य से जूझना पड़ा। जैसे ही हताहत को खोज लिया गया-कैप्टन विंग सीडीआर खान ने महसूस किया कि एक बिना तैयार सतह पर तंग घाटी के भूभाग में लैंडिंग एक मुश्किल और खतरनाक कार्य हो सकता है।
इस कठिन परिस्थिति में बिना डिगे एवं यूनिट के इस ध्येय के अनुरूप कि ‘ हम कठिन कार्य तो रूटीन के तहत करते हैं और असंभव कार्य में बस थोड़ा अधिक समय लग सकता है‘ क्रू ने बेहद कम स्थान में वायुयान को उतरने के असाधारण  कौशल का प्रदर्शन किया और हेलिकॉप्टर को खड़े पहाड़ों के बीच में नदी के बगल में चट्टानी रास्ते पर उतार दिया। दूसरे हेलिकॉप्टर ने पहले हेलिकॉप्टर को वायु समर्थन दिया और इस कठिन कार्य कां अंजाम दे दिया गया। हताहत की सफलतापूर्वक निकासी कर दी गई और उसे लेह ले आया गया-इस प्रकार भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर द्वारा एक और बहुमूल्य जीवन बचा लिया गया।
(PIB)
वीके/एएम/एसकेजे/एमबी-6402
(रिलीज़ आईडी: 1517312)

Wednesday, October 26, 2016

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय 100 केवीके पर समेकित खेती आरंभ करेगा


25-अक्टूबर-2016 20:25 IST
देश भर में स्‍थापित केवीके कर रहे हैं ऐतिहासिक काम 


किसानों की आय को बढ़ाने तथा कृषि को बढ़ावा देने में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका
श्री राधा मोहन सिंह ने की वीडियो कांफ्रेंसिंग से सीधी बात 
केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि देश भर में स्‍थापित केवीके (कृषि विज्ञान केन्‍द्रों) की किसानों की आय को बढ़ाने तथा कृषि को बढ़ावा देने में बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका है। केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने केवीके तथा राज्‍य स्‍तरीय कृषि अधिकारियों से अपील कि की उन्‍हें किसानों के साथ बेहद आत्‍मीयतापूर्ण तरीके से काम करना चाहिए। केवीके तथा राज्‍य स्‍तरीय कृषि अधिकारियों से किसानों की आय बढ़ाने में सहयोग देने की अपील की गई। श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय बहुत जल्‍द 100 केवीके पर समेकित खेती आरंभ करेगा।

केन्‍द्रीय कृषि मंत्री ने आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से 12 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के वैज्ञानिकों, राज्‍य स्‍तरीय कृषि अधिकारियों, पशुधन, मात्स्यिकी एवं बागवानी अधिकारियों तथा लाभार्थी किसानों को संबोधित किया। ऐसा पहली बार हुआ कि केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्‍यम से केवीके अधिकारियों तथा लाभार्थी किसानों के साथ सीधी बातचीत की।

मंत्री महोदय ने आंध्र प्रदेश, दादर एवं नागर हवेली, दमन एवं दियू, गोवा, कर्नाटक, केरल, लक्ष्‍यद्वीप, महाराष्‍ट्र, ओडिशा, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु एवं तेलंगाना में स्थित किसान विज्ञान केन्‍द्र के विशेषज्ञों एवं राज्‍य तथा जिला स्‍तरीय कृषि विकास अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों को संबोधित किया।

श्री राधा मोहन सिंह ने केवीके अधिकारियों को कहा कि किसानों को उनकी फसलों की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों, पौध रोपण सामग्रियों एवं उर्वरकों की आवश्‍यकता होती है। इसलिए अधिकारियों को उन्‍हें हर हाल में आवश्‍यक मदद करनी चाहिए। कृषि मंत्री ने इस अवसर पर पशुओं की बीमारियों एवं उनके टीकाकरण का भी जिक्र किया। श्री सिंह ने कहा कि अधिकारियों को अनिवार्य रूप से पशुओं की बीमारियों की जांच करनी चाहिए। उन्‍होंने यह भी कहा कि पशुओं की बीमारियों पर नियंत्रण से किसानों की आय बढ़ेगी। केन्‍द्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को कृषि परियोजनाओं एवं कृषि कार्य नीतियों के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने किसानों से मछली पालन अपनाने की भी अपील की जिससे की उनकी आय दोगुनी हो सके। श्री राधा मोहन सिंह ने किसानों को बताया कि उनके कल्‍याण के लिए देश भर में 645 कृषि विज्ञान केन्द्रों का गठन किया गया है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग का आयोजन तीन चरणों में किया जाना है जिसमें से पहले चरण की वीडियो कांफ्रेंसिंग 19 अक्‍टूबर, 2016 को संपन्‍न हुई। कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने उत्तर भारत के 12 राज्‍यों के कृषि विज्ञान केन्‍द्रों के अधिकारियों एवं किसानों को संबोधित किया। वीडियो कांफ्रेंसिंग का तीसरा और अंतिम चरण 28 अक्‍टूबर को आयोजित किया जायेगा। जिसमें पहाडी राज्‍यों के केवीके अधिकारी एवं किसानों की केन्‍द्रीय कृषि मंत्री के साथ परस्‍पर बातचीत होगी।   (PIB)***

Tuesday, August 30, 2016

नेताजी संबंधी 25 गोपनीय फाइलों की 7वीं किस्त जारी


30-अगस्त-2016 17:09 IST
अब आम जनता भी देख सकेगी अतीत के गहन रहस्य 
फाइलें वेब पोर्टल www.netajipapers.gov.in पर उपलब्ध 
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से सम्बंधित 25 गोपनीय फाइलों की सातवीं किस्त को आज जारी कर दिया गया। ये फाइलें www.netajipapers.gov.in उपलब्ध करा दी गयी हैं। इन फाइलों को संस्कृति सचिव श्री एन.के. सिन्हा ने जारी किया। उक्त 25 फाइलें विदेश मंत्रालय (1951-2006) से सम्बंधित हैं।
याद रहे कि नेताजी से सम्बंधित 100 गोपनीय फाइलों की पहली खेप को शुरूआती संरक्षण उपचार और उनका डिजिटलीकरण करने के बाद 23 जनवरी, 2016 को नेताजी की 119वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनता के लिये जारी किया था। उसके बाद 50 फाइलों की दूसरी खेप, 25 फाइलों की तीसरी खेप, 25 फाइलों की चौथी खेप, 25 फाइलों की पांचवीं खेप और 25 फाइलों की छठवीं खेप को क्रमश: 29 मार्च, 2016, 29 अप्रैल, 2016, 27 मई, 2016, 29 जून 2016 और 29 जुलाई 2016 को जारी किया गया था। अब तक कुल 250 फाइलों को जनता के लिए खोल दिया गया है।
जिन 25 फाइलों को आज जारी किया गया है, वे नेताजी से संबंधित फाइलों को जानने के लिए जनता की आकांक्षा के अनुरूप हैं। इन फाइलों से अध्‍येयताओं को भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम के बारे में और अनुसंधान करने की सुविधा होगी। इन फाइलों की विशेष रूप से गठित समिति ने  जांच की है। समिति में अभिलेखों से संबंधित विशेषज्ञों को रखा गया है।
उल्‍लेखनीय है कि 1957 में राष्‍ट्रीय अभिलेखागार भारत को रक्षा मंत्रालय की ओर से आजाद हिन्‍द फौज के संबंध में 990 डी-क्‍लासिफाईड फाइलें प्राप्‍त हुई थीं। इसके बाद 2012 में खोसला आयोग से संबंधित 271 फाइलें/सामग्री तथा न्‍यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग की 759 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुई थीं। इस तरह गृह मंत्रालय से कुल 1030 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुईं। ये सभी फाइलें सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए खोल दी गई हैं। (PIB)

Monday, August 01, 2016

‘आधार’ में अपने मोबाइल नम्‍बर को दर्ज अथवा अद्यतन कराएं


01-अगस्त-2016 19:48 IST
सरकारी सेवाओं तक आसान ऑनलाइन पहुंच के लिए ज़रूरी
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने विभिन्‍न सरकारी सेवाओं तक आसान ऑनलाइन पहुंच सुनिश्चित करने के लिए देश के निवासियों को ‘आधार’ में अपने मोबाइल नम्‍बर को दर्ज अथवा अद्यतन कराने की सलाह दी है। 
यूआईडीएआई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अजय भूषण पांडेय ने कहा, ‘लोग अपने विशिष्‍ट एवं गैर-अस्‍वीकार्य पहचानकर्ता आधार का उपयोग करके विभिन्‍न सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन लाभ घर बैठे अथवा बगैर परेशानी के किसी भी जगह से हासिल कर सकते हैं। जिन्‍होंने आधार संबंधी नामांकन के दौरान अपने मोबाइल नम्‍बर का पंजीकरण नहीं कराया है, उन्‍हें आधार में अपने मोबाइल नम्‍बर को बाकायदा दर्ज अथवा अद्यतन करा लेना चाहिए, ताकि किसी प्रयास के बगैर ही उनकी पहुंच सरकारी सेवाओं तक सुनिश्चित हो सके। आधार पर आधारित ओटीपी पहचान निवासियों को बगैर किसी परेशानी के इन सेवाओं को हासिल करने की सुविधा प्रदान करती है।’ 
यूआईडीएआई ने सार्वजनिक उपयोग वाले विभिन्‍न उन अनुप्रयोगों जैसे कि डिजी-लॉकर, ईसाइन, र्इएनपीएस, ई-हॉस्पिटल, आयकर रिटर्न (आईटीआर) की ई-जांच इत्‍यादि को ध्‍यान में रखते हुए यह सलाह दी है, जिन्‍हें सरकारी विभागों द्वारा पहचानकर्ता के रूप में ‘आधार’ का उपयोग करते हुए शुरू किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, ‘डिजी-लॉकर’ की सुविधा के तहत निवासी अपने आधार का उपयोग करते हुए डिजिटल लॉकर हो सकते हैं और अपने मूल्‍यवान दस्‍तावेज उस लॉकर में रख सकते हैं। इसी तरह ‘आधार ईसाइन’ सुविधा के तहत निवासी नकद रहित, उपस्थिति रहित और कागज रहित तरीके से बगैर किसी परेशानी के अनेक सेवाओं को ऑनलाइन हासिल करने के लिए डिजिटल हस्‍ताक्षर का उपयोग कर सकते हैं। कोई भी व्‍यक्ति आधार पर आधारित ईसाइन सुविधा का उपयोग करके पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है अथवा अपने पैन कार्ड को ऑनलाइन अपडेट कर सकता है। ई-हॉस्पिटल सेवा के तहत कोई भी निवासी ‘आधार’ के जरिये लम्‍बी लाइन में खड़े हुए बिना ही एम्‍स अथवा किसी भी अस्‍पताल में डॉक्‍टर से दिखाने का समय ऑनलाइन ले सकता है। आयकर विभाग ने निवासियों को ‘आधार’ का उपयोग करके आयकर रिटर्न की ई-जांच की सुविधा प्रदान की है और ऐसे में भौतिक रूप से किसी भी कागज अथवा दस्‍तावेज को भेजने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन सभी सेवाओं में आधार पर आधारित ओटीपी पहचान का उपयोग किया जा रहा है, ताकि देश के निवासियों की पहचान बगैर किसी परेशानी के हो सके और इसके साथ ही उन्‍हें वि‍भिन्‍न सेवाएं सुविधाजनक ढंग से ऑनलाइन मिल सके। 

डॉ. पांडेय ने कहा, ‘इस तरह की ऐसी किसी भी सेवा को ऑनलाइन पाने के लिए देश के निवासियों को अवश्‍य ही अपने मोबाइल नम्‍बर को आधार में दर्ज करा लेना चाहिए जिनके लिए आधार पर आधारित ओटीपी पहचान का उपयोग किया जा रहा है।’ 

103.5 करोड़ से भी ज्‍यादा ‘आधार’ के सृजन के साथ ही यूआईडीएआई ने देश भर में 23000 से भी ज्‍यादा स्‍थायी नामांकन केंद्र (पीईसी) खोल रखे हैं। देश के निवासी अपने किसी भी निकटवर्ती पीईसी में जाकर अपने मोबाइल नम्‍बर को आधार में अपडेट करा सकते हैं। स्‍थायी नामांकन केंद्रों की सूची https://resident.uidai.net.in पर उपलब्‍ध है। 
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Saturday, May 28, 2016

वन बंधु कल्याण योजना/विशेष लेख/ *आकाश श्रीवास्तव


27-मई-2016 16:08 IST
आदिवासी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन अक्टूबर 1999 में भारतीय समाज के सबसे वंचित वर्ग अनुसूचित जनजाति (अजजा) के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के समन्वित और योजनाबद्ध उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था। जनजातीय कार्य मंत्रालय, अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए चलाई जा रही समग्र नीति, योजना औऱ समन्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है। केंद्र सरकार ने आदिवासी परिवारों के लिए बेहतर और सतत् रोजगार, ढांचागत खामियों को खत्‍म करने, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य की गुणवत्‍ता में सुधार और आदिवासी क्षेत्रों में जीवन में सुधार पर विशेष ध्‍यान देने का फैसला किया है।
15 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में से 75 समुदायों की आदिम जनजाति समूह के रूप में पहचान की गई है। इन समूहों में से कुछ समुदाय बहुत ही छोटे है, जो दूरदराज के स्थानों पर अपर्याप्त प्रशासन एंव पिछड़ी मूलभूत सुविधाओं के साथ विभिन्न रूपो में विकसित हुए हैं। इसलिए उन्हें संरक्षण एंव विकास हेतु प्राथमिकता दी जाने की आवश्यकता है। इन समूहों की परेशानियां एंव जरूरतें अन्य अनुसूचित जनजातियों से भिन्न होती है। आदिवासी समूहों के बीच आदिम जनजाति समूह सबसे कमजोर होने के कारण, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इन समूहों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु केंद्रीय क्षेत्र/केन्द्र प्रायोजित एंव राज्य योजना स्कीमों से अपेक्षित धनराशि के आवंटन हेतु केंद्र सरकार से अनुरोध किया।

अनुसूची 5 क्षेत्र में करीब 350 प्रखंड ऐसे हैं जहां कुल जनसंख्‍या की तुलना में जनजातीय लोगों की जनसंख्‍या 50 प्रतिशत या अधिक है। गत दिनों में कई प्रयास किए जाने के बावजूद मानव विकास संकेतक (एचडीआई) के अनुसार इन प्रखंडों में कई प्रकार की कमियां रह गयीं। इन प्रखंडों को अगले पांच वर्ष की अवधि में सतत विकास मिशन के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा सुविधा प्रदान कर मॉडल प्रखंड के रूप में विकसित किया जाना है। इन्हीं सबके मद्देनजर भारत सरकार के आदिवासी मामलों के मंत्रालय ने आदिवासियों के कल्याण के लिए वनबंधु कल्याण योजना (वीकेवाई) की शुरूआत 2014 में की थी।

आदिवासी समूहों और जनजातियों के सर्वांगीण विकास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विषेश ध्यान है। उल्लेखनीय है कि यह  योजना देश में सबसे पहले गुजरात में शुरू की गयी थी जब नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे। यह योजना वर्ष 2014 में आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के एक-एक विकासखंड में पायलट आधार पर शुरू की गई। योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में विभिन्न सुविधाओं का विकास करने के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की हुई। इन ब्लॉकों का चयन संबंधित राज्यों की सिफारिशों और कम साक्षरता दर के आधार पर किया गया। वन बंधु कल्याण योजना में केन्द्रीय मंत्रालयों, विभागों की विकास की विभिन्न योजनाओं के समन्वय और राज्य सरकार की परिणाम आधारित योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की परिकल्पना की गई है। प्रारंभ में ब्लॉक की कुल आबादी की तुलना में जनजातीय आबादी का कम से कम 33% को लक्षित करके योजना को मूर्तरूप दिया गया। वन बंधु कल्याण योजना का मोटे तौर पर आशय एक रणनीतिक प्रक्रिया से है जो यह सुनिश्चित करने की परिकल्पना करती है कि केंद्रीय और राज्य सरकारों के विभिन्न कार्यक्रमों/स्कीमों के तहत वस्तुओं और सेवाओं के लक्षित सभी लाभ समुचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से संसाधनों के तालमेल द्वारा वास्तव में उन तक पहुंचे।

वित्त वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये की लागत से केंद्रीय योजना के रूप में वन बंधु कल्याण योजना (वीकेवाई) शुरू की थी। जबकि सरकार ने 2015-2016 में पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी सारे राज्यों में वन-बंधु कल्याण योजना को लागू कर दिया गया। जिसके लिए दो सौ करोड़ रूपए आवंटित किए गए। सरकार जनजातीय परिवारों के लिए उत्तम एवं निरंतर रोजगार पर विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार तथा जनजातीय क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार पर ध्यान दिया गया है।

वन बंधु कल्याण योजना के माध्यम से अगले पाँच वर्ष की अवधि के दौरान गुणवत्ता एवं दृश्य आधारभूत सुविधाओं के साथ इन ब्लॉकों को आदर्श ब्लॉक के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सतत विकास के मिशन को आगे ले जाया जा सके। जनजातीय क्षेत्रों के आर्थि‍क वि‍कास को तेज करने, सभी के लि‍ए स्‍वास्‍थ्‍य, सभी के लि‍ए मकान, सभी को स्‍वच्‍छ पेयजल, क्षेत्र के उपयुक्‍त सिंचाई सुवि‍धाओं, आस-पास के कस्‍बों/शहरों को जोड़ने वाली सड़कें, बि‍जली की उपलब्‍धता, शहरी वि‍कास, वि‍कास के पहि‍ए को सतत प्रवाहमान रखने के लि‍ए सुदृढ़ संस्‍थागत तंत्र, जनजातीय सांस्‍कृति‍क वि‍रासत का संवर्द्धन एवं अनुरक्षण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल का वि‍कास करना है।

पूर्व में जनजातीय लोगों के वि‍कास की गति‍ शेष सामाजि‍क समूहों की अपेक्षा धीमी और कहीं ज्‍यादा चुनौतीपूर्ण थी। सरकार द्वारा चलाए जा रहे वि‍शेष कंपोनेन्‍ट प्‍लान एवं वि‍शि‍ष्‍ट कार्यक्रमों के बावजूद जनजातीय समूहों तथा अन्‍य सामाजि‍क समूहों के बीच वि‍कास में भारी अंतर वि‍द्यमान है। जनजातीय लोगों के लि‍ए शि‍क्षा की आवश्‍यकता पर विशेष ध्यान दिया गया है। जनजातीय बच्‍चों को शि‍क्षा प्रदान करना वि‍भि‍न्‍न सामाजि‍क, सांस्‍कृति‍क, आर्थि‍क, पर्यावरणीय एवं प्रशासनि‍क कारणों से सरकार के लि‍ए एक चुनौती पूर्ण कार्य रहा है। शि‍क्षा योजनाओं की पुनर्संरचना का उद्देश्‍य आवासीय स्‍कूल, जनजातीय भाषाओं को शि‍क्षा का माध्‍यम बनाना तथा जनजातीय बच्‍चों को छात्रवृत्‍ति‍ प्रदान करना जैसे उपायों से पर्याप्‍त शि‍क्षागत आधारभूत ढांचा उपलब्‍ध कराना है, जि‍ससे कि‍ राष्‍ट्रीय साक्षरता की तुलना में जनजातीय महि‍ला साक्षरता में वृद्धि‍ हो सके।

वन बंधु कल्याण योजना का उद्देश्य   उचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए संसाधनों का अधिकतम उपयोग और   एक समग्र दृष्टिकोण के जरिये भौतिक एवं वित्तीय उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करके आदिवासियों के व्यापक विकास है।   देशभर में जनजातीय आबादी को जल, कृषि एवं सिंचाई, बिजली, शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं उनके सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हाउसिंग, आजीविका, स्वास्थ्य, स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण  सेवाओं एवं वस्तुओं को मुहैया कराने के लिए यह योजना एक संस्थागत तंत्र के रूप में काम करेगी।

रणनीतिक तौर पर शुरू की गई वीकेवाई प्रक्रिया केंद्र की तरह ही राज्य सरकारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के साथ जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने इस योजना को कनवर्जेंस प्लान के रूप में शुरू किया है। वन बंधु कल्याण योजना 
आदिवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कराने की दिशा में सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है।

लेखक : स्‍वतंत्र पत्रकार हैं।

Monday, February 22, 2016

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में जन उपयोगी बुनियादी ढांचे के निर्माण

21-फरवरी-2016 19:29 IST
आम अनुमोदन को 31 दिसंबर 2018 तक बढ़ाया 
The Prime Minister, Shri Narendra Modi at the launch of Shyama Prasad Mukherji National Rurban Mission, at Kurubhat, Rajnandgaon, in Chhattisgarh on February 21, 2016. The Chief Minister of Chhattisgarh, Dr. Raman Singh and the Minister of State for Chemicals & Fertilizers, Shri Hansraj Gangaram Ahir are also seen.    (फोटो:PIB)
नई दिल्ली" 21 फ़रवरी 2016: (प.सू.का.):
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में जन उपयोगी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय ने आम मंजूरी दी 

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में विकास जन गतिविधियों के महत्व को समझते हुए पर्यावरण और वन मंत्रालय ने अपने 13 मई 2011 में उल्लेखित आम अनुमोदन को 31 दिसंबर 2018 तक बढ़ा दिया है। 

योजना आयोग द्वारा एकीकृत कार्य योजना कार्यान्‍वयन के लिए पहचान किए गए वामपंथी आतंकवाद से प्रभावित 60 जिलों में जन उपयोगी बुनियादी ढांचे के निर्माण को गति प्रदान करने के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय ने अपने 13 मई 2011 के पत्र द्वारा वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा 2 के तहत सरकारी विभागों द्वारा महत्‍वपूर्ण जन उपयोगी बुनियादी ढांचे के सृजन के लिए आम मंजूरी दी थी। लेकिन इसमें पांच एकड़ से अधिक वन भूमि को शामिल न करने के लिए कहा गया था। इस प्रावधान को 117 वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में आगे बढ़ाया गया था। यह अनुमोदन 31 दिसंबर 2015 तक वैध था। 

स्‍कूलों, डिस्‍पेंसरियों/ अस्‍पतालों, बिजली और दूरसंचार लाइनों, पेय जल परियोजनाओं, जल/ वर्षाजल के संचयन, लघु सिंचाई, नहरों, ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों, कौशल उन्‍नयन, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों, पावर सब स्‍टेशनों, ग्रामीण सड़कों, और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस स्‍टेशनों/ पुलिस चौकियों/ सीमा चौकियों जैसे जन उपयोगी बुनियादी ढांचे के निर्माण के महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए यह आम मंजूरी दी गई थी। 

हाल के वर्षों में सड़क को चौड़ा करने, सुधार परियोजनाएं, पुलिस बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, पेय जल,बिजली, ट्रांसमिशन परियोजनाओं जैसी अनेक परियोजनाओं के अलावा गिरिडीह, झारखंड में सरकारी पॉलिटेक्नि‍क, देवगढ़ में केंद्रीय विद्यालय का निर्माण, धमतरी छत्‍तीसगढ़ में मगरलोढ़ा बाल स्‍कूल परियोजना, कांकेर में आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र, कुरवा, गोंदिया महाराष्‍ट्र में सरकारी मेडिकल कॉलेज का निर्माण, चांदपुर महाराष्‍ट्र में व्‍यावसायिक बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्‍थापना और मेडक तेलंगाना में बागवानी स्‍कूल की स्‍थापना जैसे अनेक कार्यों से इस अनुमोदन के तहत जनता को लाभ पहुंचा है। 

Thursday, August 27, 2015

स्‍मार्ट शहर मिशन के अंतर्गत चयनित 98 शहरों की सूची

27-अगस्त-2015 18:35 IST
लुधियाना, जालंधर और अमृतसर भी शामिल 
नई दिल्लीः 27 अगस्त 2015: (PIB//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
जनता के सपनों को पूरा करने की तरफ एक और छलांग लगाते हुए केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की लिस्ट जारी कर दी है। इस सूची में उत्तर प्रदेश के सबसे ज्यादा 13 शहरों को जगह दी गई है। इस लिस्ट में 24 राजधानियों को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश के बाद तमिलनाडु के 12, महाराष्ट्र के 10, मध्य प्रदेश के 7, गुजरात और कनार्टक के 6-6, आंध्र प्रदेश तथा बिहार के तीन-तीन smart-city शहरों को इस सूची में जगह मिली है। पंजाब के तीन ज़िले लुधियाना, जालंधर और अमृतसर , हरियाणा के दो-करनाल और फरीदाबाद और हिमाचल का धर्मशाला भी शामिल है। चंडीगढ़ भी इस लिस्ट में शामिल है। 

इसके अलावा इस सूची में जिन राजधानियों को जगह मिली है, उनमें चेन्नई, अहमदाबाद, ग्रेटर मुंबई, ग्रेटर हैदराबाद, पटना, शिमला, बेंगलुरु, दमन, त्र‍िवेंद्रम, पुडुचेरी, गंगटोक और कोलकाता शामिल है। वहीं जम्मू कश्मीर सरकार ने अपने शहरों के नाम तय करने के लिए कुछ और समय मांगा है।

स्मार्ट सिटी का ऐलान करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए हमें लोगों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी को स्मार्ट लोगों की जरूरत है।

बता दें कि स्मार्ट सिटी के लिए चुने गए प्रत्येक शहर को पहले साल 200 और उसके बाद चार साल के लिए हर साल 100 करोड़ रुपये मिलेंगे। केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट पर अगले पांच साल में 48 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी और इतनी ही रकम राज्य मिलकर खर्च करेंगे।शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज स्‍मार्ट शहर मिशन के अंतर्गत चयनित शहरों और कस्‍बों की सूची की घोषणा की है।  राज्‍य/संघशासित प्रदेशवार सूची निम्‍नलिखित है:
क्रम सं.
राज्‍य/संघशासित प्रदेश के नाम
छांटे गए शहरों की संख्‍या
चयनित शहरों के नाम
शहरों की जनसंख्‍या
1.       
अंडमान और निकोबार द्वीप
1
1. पोर्ट ब्‍लेयर
1,40,572
2.       
आंध्र प्रदेश
3
1. विशाखापटनम
2. तिरु‍पति
3.काकीनाड़ा
18,78,980
3,74,260
3,50,986
3.       
अरूणाचल प्रदेश
1
1.  पासीघाट
24,656
4.       
असम
1
1. गुवाहाटी
9,62,334
5.       
बिहार
3
1. मुजफ्फरपुर
2. भागलपुर
3. बिहारशरीफ
3,93,724
4,10,210
2,96,889
6.       
चंड़ीगढ़
1
1. चंडीगढ़
10,55,450
7.       
छत्‍तीसगढ़
2
1. रायपुर
2. बिलासपुर
10,47,389
 3,65,579
8.       
दमन और दीव
1
1. दीव
   23,991
9.       
दादर और नगर हवेली
1
1. सिल्‍वासा
   98,032
10.   
दिल्‍ली
1
1. नई दिल्‍ली नगरपालिका परिषद
2,49,998
11.   
गोवा
1
1. पणजी
  1,00,000
12.   
गुजरात
6
1. गांधीनगर
2. अहमदाबाद
3. सूरत
4. वड़ोदरा
5. राजकोट
6. दाहोद
  2,92,797
55,77,940
44,67,797
17,52,371
13,23,363
  1,30,530
13.   
हरियाणा
2
1. करनाल
2. फरीदाबाद
  3,02,140
14,14,050
14.   
हिमाचल प्रदेश
1
1. धर्मशाला
   22,580
15.   
झारखंड
1
1. रांची
10,73,427
16.   
कर्नाटक
6
1. मंगलुरू
2. बेलागावी
3. शिवमोगा
4. हुबली-धारवाड़
5. तुमाकुरू
6. देवानगरे
  4,84,785
  4,88,292
  3,22,428
  9,43,857
  3,05,821
  4,35,128
17.   
केरल
1
1. कोच्‍ची
  6,01,574
18.   
लक्षद्वीप
1
1. कवाराती
     11,210
19.   
मध्‍य प्रदेश
7
1. भोपाल
2. इंदौर
3. जबलपुर
4. ग्‍वालियर
5.सागर
6. सतना
7. उज्‍जैन
19,22,130
21,95,274
12,16,445
11,59,032
  2,73,296
  2,80,222
  5,15,215
20.   
महाराष्‍ट्र
10
1.   नवी मुंबई
2.    नासिक
3.    थाणे
4.    ग्रेटर मुंबई
5.    अमरावती
6.    शोलापुर
7.    नागपुर
8.    कल्‍याण-डोम्‍बीवली
9.    औरंगाबाद
10. पुणे
11,19,000
14,86,000
18,41,000
 1,24,00,000
  7,45,000
  9,52,000
24,60,000
15,18,000
11,65,000
31,24,000
21.   
मणिपुर
1
1. इम्‍फाल
  2,68,243
22.   
मेघालय
1
1. शिलांग
3,54,325
23.   
मिजोरम
1
1. आइजोल
2,91,000
24.   
नगालैंड
1
1. कोहिमा
1,07,000
25.   
ओडिशा
2
1. भुवनेश्‍वर
2. राउरकेला
8,40,834
3,10,976
26.   
पुद्दुचेरी
1
1ऑलगरेट
3,00,104
27.   
पंजाब
3
1. लुधियाना
2. जालंधर
3. अमृतसर
16,18,879
8,68,181
11,55,664
28.   
राजस्‍थान
4
1. जयपुर
2. उदयपुर
3. कोटा
4.अजमेर
30,73,350
4,75,150
10,01,365
5,51,360
29.   
सिक्किम
1
1. नामची
12,190
30.   
तमिलनाडु
12
1. तिरुचिरापल्‍ली
2. तिरुनवैली
3. दिंडीगुल,
4.  तंजावुर,
5. त्रिरूपुर,
6. सलेम,
7. वेल्‍लौर,
8. कोयम्‍बटूर,
9. मदुरई,
10. इरोड,
11. थूथूकुड़ी
12. चेन्‍नई
9,16,674
4,74,838
2,07,327
2,22,943
8,77,778
8,31,038
5,04,079
16,01,438
15,61,129
4,98,129
3,70,896
67,27,000
31.   
तेलंगाना
2
1. ग्रेटर हैदराबाद
2. ग्रेटर वारंगल
67,31,790

8,19,406
32.   
त्रिपुरा
1
1. अगरतला
4,00,004
33.   
उत्‍तर प्रदेश **
12
1. मुरादाबाद
2. अलीगढ़
3. सहारनपुर
4. बरेली
5.झांसी
6. कानपुर
7. इलाहाबाद
8. लखनऊ
9. वाराणासी
10. गाजियाबाद
11. आगरा
12.रामपुर
8,87,871
8,74,408
7,05,478
9,03,668
5,05,693
27,65,348
11,12,544
28,17,105
11,98,491
16,48,643
15,85,704
3,25,313
34.   
उत्‍तराखंड
1
1. देहरादून
5,83,971
35.   
पश्चिम बंगाल
4
1.न्‍यू टाउन कोलकाता
2. बिधाननगर
3. दुर्गापुर
4. हल्दिया


*जम्‍मू और कश्‍मीर ने संभावित स्‍मार्ट शहर पर फैसला लेने के लिए और समय मांगा है।
**उत्‍तर प्रदेश को आवंटित 13 शहरों में से 12 शहरों को छांटा गया है। 
***
वीजी/एएम/एमके/वाईबी  4267  
  स्‍मार्ट शहर मिशन के अंतर्गत चयनित 98 शहरों की सूची