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Thursday, November 12, 2020

पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम सेल टीम की लुधियाना में दबिश

 मोहाली से आई विशेष टीम का ऑपरेशन करीब 9 घंटे तक चला 


मोहाली
//लुधियाना: 12 नवंबर 2020: (पुष्पिंदर कौर नीलम//पंजाब स्क्रीन)::

डिजिटल इंडिया  भी तेज़ी से साकार हो रहा है लेकिन साथ ही बढ़ रहे हैं बहुत से खतरे। साईबर क्राईम करने वाले भी अब पहले से ज़्यादा शातिर होने।  नया मामला सामने आया है लुधियाना में। पंजाब पुलिस के साइबर क्राइम सेल टीम ने मोहाली से फिरोजगांधी मार्केट स्थित एक कंपनी के दफ्तर में ज़बरदस्त दबिश दी। कंपनी के प्रमुख सदस्यों के आवासों पर छापे भी मारे। जांच अधिकारी भगवंत सिंह के नेतृत्व में कुल 13 पुलिस कर्मियों की दो टीमों ने यह छापेमारी की। आपरेशन के लिए डिजिटल फोरेंसिक वैन और नवीनतम फोरेंसिक उपकरण भी भेजे गए थे। आपरेशन सुबह शुरू हुआ और लगभग नौ घंटे तक चला। टीम ने वहां से पेन ड्राइव, डीवीडी और अन्य सामग्रियों के साथ लगभग 17 लैपटाप और पीसी जब्त किए।

गौरतलब है कि लुधियाना स्थित एडटेक कंपनी टीसीवाई लर्निंग साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने पुलिस को रमनदीप सिंह, जगजीत सिंह, रूपिंदर सिंह, राहुल नागपाल और उसकी पत्नी हरप्रीत कौर के खिलाफ डाटा चोरी, डाउनलोड करने और चुराने की शिकायत की थी। वकील अंकुर घई ने बताया कि उक्त आरोपित पहले टीसीवाई में काम कर रहे थे। जगजीत बरनाला में टीसीवाई की फ्रैंचाइजी भी चला रहे थे।

कार्यकाल के दौरान उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर कंप्यूटर नेटवर्क/सिस्टम आदि से क्लाइंट डाटा/कंप्यूटर डाटा बेस/सूचना/वायरफ्रेम/सोर्स कोड आदि डाउनलोड, कापी, निकाले और अवैध रूप से अपना काम शुरू कर दिया। उन्होंने टीसीवाई के कर्मचारियों को भी लालच दिया और अपनी कंपनी में ले गए। जो टीसीवाई सेवाओं के बारे में महत्वपूर्ण और गोपनीय जानकारी रखते थे। उन्होंने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए कापी किए गए साफ्टवेयर को टीसीवाई के ग्राहकों को रियायती दरों पर बेचना शुरू किया।

जांच से पता चला कि कंपनी एक्सओवेज वेब टेक्नोलाजीज प्राइवेट के नाम से गैरकानूनी रूप से टीसीवाई के पायरेटेड साफ्टवेयर उपयोग कर रहा था। सबूतों के आधार पर टीसीवाइ ने एक्सओवेज वेब टेक्नोलाजीज के अवैध कृत्यों के लिए मोहाली में पंजाब स्टेट साइबर क्राइम पुलिस के साथ एफआइआर दर्ज की। इसके आधार पर टीम ने लुधियाना में दबिश दी।

सबूतों के आधार पर, टीसीवाई ने 20.10.2020 को धारा 406/408/379/381/120-B / 34 IPC और धारा 43/66/66-B आईटी एक्ट के तहत एक्सओवेज़ वेब टेक्नोलॉजीज के अवैध कृत्यों के लिए मोहाली में पंजाब स्टेट साइबर क्राइम पुलिस के साथ एफआईआर नंबर 29 दर्ज की ।”

उन्होंने यह भी कहा कि हम आरोपियों के ग्राहकों सहित अन्य जुड़े हुए लोगों के खिलाफ जल्द ही जरुरी कदम लेंगे।

साइबर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई को देखते हुए, शिकायतकर्ताओं को उम्मीद है कि आरोपियों को जल्द ही सजा दी जाएगी।



Friday, August 28, 2020

साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन गिरफ़्तार

 बहु-करोड़पति साईबर बैंक फ्रॉड का किया पर्दाफाश 
चंडीगढ़: 27 अगस्त 2020(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
पंजाब पुलिस स्टेट साईबर क्राइम सैल ने राज्य में आधुनिक सूचना तकनीक के द्वारा बहु-करोड़पति साईबर बैंक घोटाले का पर्दाफाश करके बड़ी सफलता हासिल की है और गिरोह के मुख्य सरगना अमित शर्मा उर्फ नितिन को काबू कर लिया है, जो पिछले करीब 7 महीनों से फऱार चल रहा था। इस सम्बन्ध में उस दोषी के खि़लाफ़ थाना स्टेट साईबर क्राइम, एसएएस नगर में आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471, 120 बी, आईटी कानून की धारा 66, 66-सी, 66-डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए ब्यूरो ऑफ इनवैस्टीगेशन के डायरैक्टर-कम-एडीजीपी श्री अर्पित शुक्ला ने बताया कि साईबर क्राइम सैल ने इस केस की जांच एचडीएफसी बैंक के लोकेशन मैनेजर विजय कुमार की शिकायत पर की है, जिसने दोष लगाया है कि एचडीएफसी बैंक खाते से लगभग 2 करोड़ रुपए की तकनीकी ढंग से धोखाधड़ी की गई है। पुलिस को पड़ताल के दौरान यह पता लगा कि साईबर धोखाधड़ी करने वाले ने नैट बैंकिंग के द्वारा खाते से पैसे निकाल कर 5 अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए। उन्होंने कहा कि यह बैंक खाते नकली पहचान पत्रों के द्वारा खोले गए थे और इसके बाद खातों से एटीएम और स्वै-चैक के द्वारा नकदी निकलवाई गई।
इस साईबर अपराध की कार्यप्रणाली संबंधी बताते हुए बीओआई के प्रमुख ने कहा कि धोखाधड़ी करने वालों ने बहुत चालाकी के साथ पीडि़त के बैंक खाते के साथ रजिस्टर किए गए ईमेल आईडी और मोबाइल नंबरों को उसी जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में तबदील कर दिया, जिस कारण मुलजि़म अपने इन मोबाइल नंबरों और ईमेल आईडी के द्वारा उसके खातों का वर्चुअल कंट्रोलर बन गया।
इस केस में अमित शर्मा उर्फ नितिन ने अपने आप को अकाश अरुण भाटिया (केस का पीडि़त) के तौर पर अपनी पहचान बनाई और उसके (भाटिया) बैंक खातों की इन्टरनेट बैंकिंग पहुँच हासिल कर ली। इसके बाद मुलजि़म ने नकली दस्तावेज़ जमा करवा कर विक्रम सिंह के नाम पर खोले और पाँच अलग-अलग खातों में पैसे तबदील कर लिए।
उन्होंने आगे बताया कि जांच के दौरान सभी सरकारी पहचान प्रमाण, जिनमें चिप आधारित ड्राइविंग लायसेंस, पैन कार्ड, होलोग्राम वाला वोटर आईडी कार्ड आदि और बैंक खाता खोलने और मोबाइल नंबर प्राप्त करने के लिए मुहैया करवाए गए निजी पहचान दस्तावेज़ (केवाईसी) भी नकली पाए गए। इन धोखेबाज़ों ने एटीएम कार्डों और चैकों के द्वारा सारे पैसे निकलवा लिए, जिससे पुलिस को कोई सुराग न मिल सका। इसके अलावा, मोबाइल नंबर सिफऱ् अपराध करने के समय ही इस्तेमाल किए जाते थे और उसके बाद नॉट-रीचेबल हो जाते थे।
इसका और विवरण देते हुए श्री अर्पित शुक्ला ने कहा कि जांच के दौरान मोबाइल फ़ोन की लोकेशन से पता लगा कि लुटेरे लुधियाना से गिरोह चला रहे थे। पड़ताल के दौरान पुलिस जांच टीम को पुलिस के स्रोतों से गुप्त जानकारी मिली और इस खुलासे के साथ मुलजि़म की पहचान हो गई। इस ऑप्रेशन के दौरान उस क्षेत्र की परीक्षक टीम द्वारा ख़ुद जांच और घर-घर तस्दीक की गई जहाँ यह फ़ोन एक्टिव थे।
उन्होंने बताया कि शारीरिक बनावट और सामने आ रहे विवरणों के आधार पर इस मामले में 3 मुलजि़म नामज़द किए गए और इनमें से दो मुलजि़म राजीव कुमार पुत्र देव राज और दीपक कुमार गुप्ता पुत्र दर्शन लाल गुप्ता निवासी शिमलापुरी को शिमलापुरी, लुधियाना से 28-01-2020 को गिरफ़्तार कर लिया था, परन्तु यह मुख्य मुलजि़म उस समय पर फऱार होने में सफल हो गया।
उन्होंने कहा कि इस साईबर अपराधी अमित शर्मा उर्फ नितिन पुत्र राम लाल निवासी दयोल एन्क्लेव, लुधियाना को पकडऩे के लिए एसएचओ साईबर क्राइम भगवंत सिंह की एक विशेष टीम बनाई गई। इस फऱार दोषी के विरुद्ध पंजाब और हरियाणा राज्य के अलग-अलग थानों में 6 एफआईआर दर्ज हैं और वह ऐसी करोड़ों की धोखाधड़ी में वांछित था।
जि़क्रयोग्य है कि मुलजि़म सूचना तकनीक के साथ विवरणों को बदल कर बैंक खातों को हैक करते थे। यह मुलजि़म 28-01-2020 को पुलिस पार्टी को चकमा देकर फऱार हो गया था, जब उसके सह मुलजि़मों को जांच टीम ने लुधियाना के एक जिम से गिरफ़्तार किया था, जहाँ उस दिन उसे काबू करने के लिए जाल बिछाया गया था। इन मुलजि़मों की गिरफ़्तारी के साथ, करोड़ों रुपए की साईबर धोखाधड़ी के साथ सम्बन्धित सभी केस हल हो गए। इस सम्बन्धी अगली जांच के दौरान और खुलासे होने की संभावना है।

Sunday, March 01, 2020

कोरोना वायरस:ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों से सावधान रहें!

इस महामारी के फैलने का फ़ायदा अब अपराधी भी उठाने लगे!
साइबर क्राईम का खतरा ही बढ़ा//29 फ़रवरी 2020//स्वास्थ्य
दुनिया भर में कोरोनावायरस (COVID-19) के बढ़ते मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि इस महामारी के फैलने का फ़ायदा अब अपराधी भी उठाने की कोशिश कर रहे हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक आपराधिक तत्व ख़ुद को विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधियों के रूप में पेश करते हुए अनजान लोगों के धन और संवेदनशील जानकारी चुराने में जुटे हैं।
यूएन एजेंसी ने सचेत किया है कि अगर किसी भी व्यक्ति के सामने ऐसा मामला सामने आता है तो जल्दबाज़ी करने के बजाए सबसे पहले शिनाख़्त के लिए क़दम उठाने चाहिए।
ऑनलाइन माध्यमों पर ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें लोगों से लॉग-इन संबंधी जानकारी पूछी जा रही है, बिना पूछे ईमेल-अटैचमेंट भेजे जा रहे हैं, लोगों को स्वास्थ्य संगठन के बजाए अन्य वेबसाइटों पर क्लिक करने के लिए कहा जा रहा है और फ़ंडिंग अपील व आपात राहत प्रयासों के लिए धनराशि दान करने की अपील की जा रही है।
यूएन एजेंसी ने मज़बूती से स्पष्ट किया है कि उसकी ओर से ऐसी कोई अपील या प्रयास नहीं हो रहे हैं इसलिए धोखाधड़ी के इन मामलों में ईमेल, वेबसाइट, फ़ोन कॉल्स, टेक्सट या फ़ैक्स संदेशों से सावधान रहने की ज़रूरत है।
इस तरह की ईमेलों को ‘फ़िशिंग’ (phishing) कहा जाता है। पहली बार देखने पर ऐसा प्रतीत हो सकता है कि इन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भेजा गया है। इनमें निजी जानकारी मांगी जाती है जिनमें यूज़र नेम, पासवर्ड शामिल है, फिर संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। अगर लोग ऐसा करते हैं तो अपराधी लोगों के कंप्यूटर पर ऐसे सॉफ़्टवेयर इंस्टाल करने में सफल हो जाते हैं जिनसे संवेदशनशील जानकारी को चुराया जा सकता है।
सतर्क रहने के उपाय:
कोविड-19 संबंधी संदेश भेजने वाले के ईमेल पते की पुष्टि करें
लिंक पर क्लिक करने से पहले उसे जांच लें
निजी जानकारी साझा करते समय सतर्क रहें
जल्दबाज़ी में या स्वयं पर दबाव महसूस ना करें 
संवेदनशील जानकारी अगर दे दी हो तो घबराएं नहीं 
धोखाधड़ी महसूस होने पर उसकी तुरंत रिपोर्ट करें
जानकारी के सभी स्रोत भरोसेमंद नहीं
कोविड-19 से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया के कई अकाउंट से साझा की जा रही है. संगठन के प्रमुख ने लोगों से अपील की है कि आधिकारिक स्रोतों (जैसे WHO वेबसाइट) से ही जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए कि लोग अपना, परिजनों व स्थानीय समुदायों का बचाव किस तरह कर सकते हैं।
इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर निरंतर विशेषज्ञों द्वारा तैयार व्यापक सामग्री को साझा किया जा रहा है।
विश्व शनिवार को अपने एक ट्वीट में यूएन एजेंसी के महानिदेशख ने माना कि कोविड-19 व्यापक रूप से फैलने के कारण लोगों में बेचैनी व्याप्त है। इसी वजह से उन्होंने कार्यस्थलों, स्कूलों और उपासना स्थलों पर सुरक्षा व बचाव के लिए पुख़्ता तैयारियों पर ज़ोर दिया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शनिवार को बताया कि दो नए सदस्य देशों, मेक्सिको और सेन मेरिनो ने कोविड-19 के मामलों की पुष्टि की है जिसके बाद इस वायरस से प्रभावित देशों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है।
संगठन के मुताबिक चीन में पिछले 24 घंटों में 435 मामलों की पुष्टि हुई है जबकि अन्य देशों में एक हज़ार 318 नए मामले सामने आए हैं. चीन में कुल मामलों की संख्या 79 हज़ार 394 है जबकि अन्य 52 देशों में छह हज़ार से ज़्यादा संक्रमणों का पता चल चुका है।
चीन में इस महामारी से दो हज़ार 838 लोगों की मौत हुई है और बाक़ी देशों में 86 लोगों की जान जा चुकी है।

Tuesday, June 19, 2018

साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क पर कार्यशाला-2018

प्रविष्टि तिथि: 19 JUN 2018 6:56PM by PIB Delhi

उद्घाटन किया केंद्रीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने
नई दिल्ली: 19 जून 2018: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन)::
जहाँ इंटरनेट की सुविधा से हम सभी को बहुत से फायदे हुए हैं वहीँ साइबर क्राईम के खतरे भी तेज़ी से बढ़े हैं। इस चुनौती को गंभीरता से लिया है रक्षा मंत्रालय ने। डीडीपी, रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा विभाग के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने किया।


    अपने संबोधन में श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र पर साइबर खतरों की अधिक आशंका है और संभावित हमलों से बचने के लिए साइबर स्पेस की सुरक्षा करना हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। रक्षा मंत्री ने डीडीपी के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेम को तैयार करने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग को बधाई दी और कहा कि साइबर सुरक्षा संबंधी मुद्दों का निवारण करने के लिए विभिन्न स्तरों पर साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ सेल स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर स्पेस में एक प्रमुख शक्ति बनने के लिए देश के लक्ष्य के तहत सभी प्रतिष्ठानों में कार्यबल स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
    इससे पहले प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सचिव (रक्षा उत्पादन) डॉ.अजय कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सभी रक्षा पीएसयू और आयुध कारखाने सूचना प्रौद्योगिकी पर निर्भर हैं। हालांकि, रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सूचना और साइबर सुरक्षा में किसी भी प्रकार के समझौते से हमारे रक्षा बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, प्राथमिकता के आधार पर एक मजबूत, सख्त और लचीले साइबर सुरक्षा आधारभूत संरचना की स्थापना करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
     डीडीपी के संयुक्त सचिव और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी डॉ. अमित सहाय ने कार्यशाला में आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन साइबर सुरक्षा के लिए समन्वित दृष्टिकोण बनाने के लिए किया है, ताकि 2018 में रक्षा उत्पादन विभाग एक ढांचागत दस्तावेज जारी कर सके। फ्रेमवर्क राष्ट्रीय नीतियों और दिशानिर्देशों के अनुरूप है और यह सभी संगठनों के लिए अपने मौजूदा साइबर सुरक्षा की दिशा और साइबर सुरक्षा के लिए लक्षित क्षेत्र को वर्णित करने, उनमें सुधार करने तथा निरंतर अवसरों को प्राथमिकता देने के लिए एक सामान्य तंत्र प्रदान करता है। कार्यशाला में गुणता आश्‍वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए), एयरोनॉटिकल गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीएचक्यूए), मानकीकरण महानिदेशालय, रक्षा पीएसयू और आयुध कारखानों के 100 से अधिक मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया। 

Saturday, September 07, 2013

लुधियाना पुलिस ने नाकाम किया फिरौती का प्रयास

कर्ज़ के बोझ से घबरा कर अपनाया जुर्म का रास्ता 
लुधियाना: 6 सितम्बर 2013: (विशाल//पंजाब स्क्रीन): किसी फ़िल्मी कहानी की तरह कर्ज में डूबे एक व्यक्ति ने किडनी न बिकने पर दो डाक्टरों को एमएमएस भेज 50 लाख रुपये की फिरौती मांग ली। एसएमएस में उसने फिरौती न देने पर जान से मारने की धमकी भी दे दी। आरोपी ने बॉस के नाम पर दोनों डाक्टरों से फिरौती मांगी थी। इन दोनों डाक्टरों ने इसकी शिकायत थाना सराभा नगर पुलिस से कर दी। इस पर सीआइए स्टाफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल बरामद कर लिया है। वहीं पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ करनी शुरू कर दी है। फ़िल्मी सी लगने वाली यह कहानी वास्तव में जिंदगी की  हकीकत से भी रूब्र्रो कराती है की अगर कर्ज़ का बोझ बढ़ जाये तो कीर्तन करता हुआ एक इंसान कीर्तन और धर्म कर्म को छोड़ कर जुर्म की राह पर भी कदम रख सकता है। 
इसका विवरण देते हुए पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह गिल ने बताया कि विशाल नगर निवासी डॉ. विकास गुप्ता और उसकी पत्नी एक किडनी अस्पताल में काम करते हैं। चार अगस्त को उन्हें एसएमएस आया कि आरोपी को किसी बॉस ने उनकी हत्या करने की 25 लाख रुपये की फिरौती दी है। इसलिए वह उसे रात साढ़े तीन बजे तक 50 लाख रुपये की फिरौती दे दें अन्यथा अपनी जान से हाथ धोने के लिए तैयार रहे। इसी प्रकार का एक एसएमएस फील्डगंज निवासी डाक्टर गगनदीप सिंह को भी भेज दिया गया। गिल ने बताया कि शिकायत मिलते ही सीआइए पुलिस ने जांच कर संगरूर स्थित लोंगोवाल निवासी जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जो बातें सामने आई उनसे सभी दंग रह गए। 

पुलिस को पूछताछ के दौरान जसविंदर ने बताया कि वह एमए पास है और कंप्यूटर का भी मास्टर है। इसके अतिरिक्त जसविंदर सिंह एक गुरुद्वारा में कीर्तन भी करता है और गुरबानी का  भी है। गिल ने बताया कि संकट के किसी समय पर जसविंदर सिंह ने अपने ससुरालियों से दो फीसद पर 20 लाख रुपये ब्याज पर लिया है। ससुरालियों को पैसे वापस न होने के कारण जसविंदर सिंह ने अपनी एक किडनी बेचने का फैसला किया। इसके लिए वह डॉ. विकास के पास भी गया। मगर डॉ. विकास ने उसकी किडनी लेने से मना कर दिया। इसके बाद जसविंदर दो सप्ताह तक पैसे इक्ट्ठे करने की योजना बनाता रहा और उसके बाद उसने फिरौती लेने की योजना बना ली। पुलिस ने आरोपी जसविंदर सिंह से मोबाइल फोन बरामद कर पूछताछ करनी शुरू कर दी है।

जाली सिम लेकर किया था फिरौती का एसएमएस
पढा लिखा होने के कारण वह इतना शातिर भी निकला कि डाक्टर से फिरौती मांगने के लिए आरोपी जसविंदर ने सबसे पहले जाली प्रूफ लगा एक सिम लिया। उसके बाद आरोपी ने अपने पुराने मोबाइल में सिम डालकर दोनों डाक्टरों को फिरौती का एसएमएस कर दिया। एसएमएस करने के बाद आरोपी जसविंदर ने सिम को नहर में फैंक दिया।  होशियारियों के बावजूद उसने गलती की और  अपने इसी मोबाईल में अपना पुराना सिम डाल लिया। बस उसकी यही चूक उसे ले डूबी और पुलिस का शिकंजा उस तक पहुँच गया। 

मोबाइल ने ही पहुंचाया आरोपी तक
अपराधी कितना ही शातिर क्यूँ न हो पर वह कोई न कोई गलती तो कर ही लेता है। आरोपी जसविंदर ने मोबाइल से फिरौती भरा एसएमएस करने के बाद नए सिम को तो नहर में फैंक दिया लेकिन उसके बाद उसी मोबाइल में अपना पुराना सिम डाल लिया, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके। कहते हैं की कानून के हाथ लम्बे होते हैं और पुलिस मोबाइल फोन के जरिए ही आरोपी तक पहुंच गई और उसको गिरफ्तार कर लिया। 

Wednesday, August 14, 2013

अब स्लेबस में शामिल होगी साईबर और सूचना सुरक्षा

14-अगस्त-2013 16:44 IST
स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर शामि‍ल किया जायेगा यह विषय
                                                                                                  दोनों तस्वीरें इंदोर पुलिस से साभार 
आखिरकार साईबर सुरक्षा का मामला कालेज के सिलेबस तक पहुँच ही गया। इस क्षेत्र में बार बार लग  दिन हो रही हैकिंग से यह सब सुनिशिचित सा ही था पत्र सूचना कार्यालय के मुताबिक वि‍श्‍ववि‍द्यालय अनुदान आयोग तथा अखि‍ल भारतीय तकनीकी शि‍क्षा परि‍षद्(एआईसीटीई) ने वि‍श्‍ववि‍द्यालयों और तकनीकी संस्‍थानों से कहा है कि‍ वे साइबर सुरक्षा तथा सूचना सुरक्षा को वि‍षय के रूप में स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर लागू करें।
डॉ. शशि‍थरूर ने लोकसभा में कहा कि‍ सुरक्षा पर कैबि‍नेट कमेटी के नि‍र्देश पर राष्‍ट्रीय सुरक्षा प्रणाली पर बने कार्यबल की सि‍फारि‍शों के आधार पर वि‍श्‍ववि‍द्यालय अनुदान आयोग ने सभी वि‍श्‍ववि‍द्यालयों के कुलपति‍यों से आग्रह कि‍या है कि‍वे वि‍श्‍ववि‍द्यालयों तथा तकनीकी संस्‍थानों में स्‍नातक तथा स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर साइबर सुरक्षा/सूचना सुरक्षा को वि‍षय के रूप में लागू करें। एआईसीटीई ने कहा है कि‍कार्यबल की सि‍फारि‍शों के बाद एप्रूवल हैंडबुक में यह प्रावधान है कि‍स्‍नातकोत्‍तर तथा पोस्‍ट डि‍प्‍लोमा स्‍तर पर दो आवंटि‍त प्रभागों में से एक में कंप्‍यूटर/इंजीनि‍यरिंग की आईटी शाखा/टैक्‍नोलॉजी में साइबर सुरक्षा तथा साइबर सुरक्षा से संबंधि‍त पाठ्यक्रम होगा। 

इस महत्‍वपूर्ण क्षेत्र के पाठ्यक्रम 15 राज्‍यों तथा एक केन्‍द्र शासि‍त क्षेत्र में 34 संस्‍थानों में शुरू कि‍ए गए हैं। 

यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लि‍खि‍त उत्‍तर में मानव संसाधन वि‍कास राज्यमंत्री डॉ. शशि‍थरूर ने दी।    
वि.कासोटिया/इ.अहमद/गांधी/मनीषा—5624

Monday, January 14, 2013

माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश?

साइबर युद्ध का ख़तरा-अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से
वर्ष 2013 में दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या में बड़ी तेज़गति से वृद्धि होगी। कुछ ख़ास ठिकानों पर ऐसे हमले किए जाएंगे और सरकारी एजेंसियों पर विशाल पैमाने के हमले भी होंगे। यह निष्कर्ष एंटीवायरस निगम "कैसपेर्स्की लैब" के विशेषज्ञों ने निकाला है। अमरीकी खुफिया सेवाओं ने भविष्यवाणी की है कि आनेवाले 20 वर्षों में वैश्विक साइबर युद्ध शुरू हो जाएगा।

"कैसपेर्स्की लैब" के विश्लेषकों के मुताबिक, अगले साल कई सरकारी संस्थानों और व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों की निजी कंपनियों की गोपनीय जानकारी की चोरी बड़े पैमाने पर होने लगेगी। सामाजिक सेवाओं और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना है।

गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी नेटवर्क कंपनियों के पास भारी मात्रा में ऑनलाइन जानकारी हासल करने की क्षमता होगी। इसके अलावा, संचार प्रौद्योगिकी के विकास की तेज़गति की बदौलत देशों की सरकारों का अपने नागरिकों पर असीम नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन इन देशों के नागरिकों के पास भी अपनी सरकारों को चुनौतियाँ देने के कई अवसर मौजूद होंगे।

वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी हमारे समाज के सूचना क्षेत्र के विकास के संदर्भ में एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। इस संबंध में रूस के सूचना सुरक्षा संघ के अध्यक्ष गेन्नादी येमेलियानोव ने रेडियो रूस को बताया –

ऐसा ख़तरा इसलिए बढ़ता जाएगा क्योंकि इस ख़तरे का एक टाइमबम फिट कर दिया जा चुका है। यदि हम समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपाये नहीं करेंगे तो यह बम ज़रूर फटेगा और बड़े विनाश का कारण बनेगा। जब हम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के इतने ज्यादा आदी हो जाएंगे कि इसके बिना जीवन ही असंभव हो जाएगा तब पूरी दुनिया के लिए बहुत-सी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज़रा सोचिए, इस सूचना प्रौद्योगिकी ने अचानक ही काम करना बंद कर दिया है। अब आप क्या करेंगे? पूरा जीवन ठप्प। आप ज़रा कल्पना कीजिए कि सभी स्थानों पर बिजली गुल हो गई है। सारा काम ठप्प। वित्तीय और आर्थिक कारणों से भी ऐसा ख़तरा पैदा हो सकता है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाले एक बहुत अच्छे दिमाग़ की ही ज़रूरत होगी।

अमरीकी खुफिया सेवाओं ने अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें अमरीका के लिए मौजूदा साइबर हमलों के ख़तरों की समीक्षा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से ही पैदा होगा। लॉस एंजिल्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस, फ्रांस, इज़राइल और दुनिया के कुछ अन्य देश भी साइबर जासूसी करते हैं लेकिन वे उतना विश्वासघात नहीं करेंगे जितना कि चीन कर सकता है। कम से कम रूस ऐसा नहीं कर रहा है। वह अपने व्यापारियों के लाभ के लिए अमरीकी कंपनियों की जानकारियां चुराने की कोशिशें नहीं कर रहा है।

इस बीच, दिसंबर माह की शुरूआत में साइबर रक्षा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मंच साइबर सुरक्षा एशिया- 2012 के भागीदार इस बात पर सहमत हुए थे कि सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया की मुख्य समस्या यह है कि दुनिया की सरकारें अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैः साइबर-आतंकवाद क्या चीज़ है? कुछ देशों की सरकारें साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास कर रही हैं। लेकिन कोई भी सरकार यह गारंटी नहीं दे सकती हैं कि ये मालवेयर और वायरस आतंकवादियों के लिए भी उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो आतंकवादी गिरोह इन मालवेयरों और वायरसों का खूब इस्तेमाल करेंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि आज भी दुनिया के कई देशों के लिए अपने ही साइबर संजाल में फंसने का बड़ा भारी ख़तरा बना हुआ है। माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश हो सकता है। (
रेडियो रूस से साभार)
13.12.2012, 16:32         
साइबर युद्ध का ख़तरा

Sunday, April 29, 2012

इंटरनेट से बढ़ रहे साइबर अपराध भी//तबस्सुम खान

सावधान: खेल खेल में लिया गया पंगा भी दिला सकता है सज़ा
वास्तव में आज इंटरनेट के तमाम पहलू हैं। जीवन की हर आवश्यकता और कामकाज में इसका पर्याप्त दखल हो चुका है। इसके जरिए मानव जीवन में काफी फुर्ती नज़र आने लगी है। जो काम महीनों की मेहनत और लाखों परेशानियों के बावजूद असंभव लगते थे, अब पलक झपकते ही होने लगे हैं।मर्स इंटरनेट के जरिए अपने ग्राहकों की सही पहचान, उत्पादों का पूर्ण विवरण, दामों की समुचित जानकारी तथा उत्पादों की डिजाइन तथा सेवाएं बड़ी आसानी से हासिल करा रहा है। अपने देश में पिछले पांच-छ: सालों के दौरान ही इंटरनेट जैसी तकनीकी का इस्तेमाल सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र का विस्तार कर रही है। आज देश में इंटरनेट का दायरा बड़े महानगरों तक ही सिमटा नहीं रहा है बल्कि आज छोटे शहरों और कस्बों में भी साइबर कैफे की मौजूदगी है। भारत में बढ़ते कम्प्यूटर की तकनीकी के विस्तार की ओर इशारा कर रही है।
सूचना क्रांति के इस नायाब तोहफे को युवाओं ने अपने जीवन में कितना सही रूप में उतारा है, ये कह पाना संभव नहीं लगता।
मनोरंजन के तमाम अन्य साधनों से ऊब रहा युवा वर्ग  घंटों इंटरनेट के जरिए अपना समय व्यतीत करने में व्यस्त है आमतौर पर युवाओं में नेट सर्फिंग का नशा सा छा रहा है। जहां ये युवा नेट सर्फिंग के दौरान नेट फ्रेंड्स में मशगूल रहते हैं। मात्र शब्दों की बुनियाद पर रिश्तों की इमारत खड़ी करने के प्रयास में युवा अकसर धोखा ही खाते हैं। इन युवाओं को मीडिया को माध्यम बनाकर खेल खेलना बेहद आसान तरीका लगता है, जो इंटरनेट के घातक परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। यह तो सच है इंटरनेट ने युवाओं में काफी गहरी पैठ बना ली है। स्वस्थ मनोरंजन का ज्ञान का सागर का साधन आज साइबर क्राइम का जरिया भी बन रहा है।
साइबर क्राइम के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए सन् 2000 में इंफारमेशन टेक्रालॉजी एक्ट बनाया गया, जिसके तहत इंटरनेट पर अवैध वस्तुओं का क्रय-विक्रय, ई-बैंकिंग से जालसाजी, अश्लील मैसेज भेजना, हैकिंग, पासवर्ड की चोरी, ई-मेल बाम्बिंग जैसे मामलों की सजा भी नियुक्त की गई।
कम्प्यूटर कोड में छेड़छाड़-सजा तीन वर्ष।
हैकिंग-सजा कैद या फिर दो लाख का जुर्माना या फिर दोनों संभव हैं। पोर्नोग्राफी (ऐसी कोई भी फोटो या लेख जिसे सामाजिक मानकों के लिहाज से अश्लील करार दिया जाए)-सजा पांच वर्ष (एक लाख जुर्माना)। सरकारी कम्प्यूटर से छेड़छाड-सजा दस वर्ष।
किसी का डिजिटल हस्ताक्षकर बनाना-सजा दो वर्ष।
गलत सूचना देना जिससे कम्प्यूटर को नुकसान हो-सजा दो वर्ष।
अधिकृत रूप में साइट में प्रवेश— सजा दो वर्ष।
किसी भी किस्म के जाली दस्तावेजों का इंटरनेट पर आदान-प्रदान-सजा  दो वर्ष।

इस सबके बावजूद आज साइबर क्राइम पर कंट्रोल करना मुश्किल हो गया है जबकि इंटरनेट के जरिए इस तरह के क्राइम बदस्तूर जारी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों की संख्या में 45 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी उसमें दुनिया भर के कम्प्यूटरों से जुड़े लोगों की केन्द्रीय भूमिका है। आई.टी. जहां रोजगार, विकास एवं जीवन के तमाम समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया है वहीं अपनी विश्वस्तरीय शृंखलाबद्धता के कारण कई बुराइयां की जड़ बन गया है। बढ़ता साइबर अपराध, कम्प्यूटर वायरसों से होने वाले हमले इसका प्रमाण हैं।(दैनिक ट्रिब्यून से साभार)