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Wednesday, December 07, 2022

देश में सभी सड़कों पर कुल 7,36,129 मौतें

Wednesday7th December 2022 at 4:58 PM

 पिछले पांच कैलेंडर वर्ष 2021 से 2017 के दौरान 21,24,481 घायल हुए

गडकरी ने सांसद संजीव अरोड़ा द्वारा उठाए गए एनएचएआई के मुद्दों पर संसद में दिया जवाब

लुधियाना: 7 दिसंबर 2022: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

सड़कों पर होते सड़क हादसों ने अब तक अनगिनत घरों के चिराग बुझा दिए हैं। अनगिनत घरों को बेसहारा कर दिया। अनगिनत लोगों से उनके परिजन छीन लिए। सभी सड़क हादसे तो रिपोर्ट भी नहीं होते लेकिन सरकार जिनका हिसाब रख पाई वो आंकड़े भी भयावह हैं। पिछले पांच कैलेंडर वर्ष 2021 से 2017 के दौरान देश में सभी सड़कों पर कुल 7,36,129 मौतें और 21,24,481 घायल हुए हैं। यह जानकारी संसद में दी गई। राज्य सभा सदस्य संजीव अरोड़ा ने उठाया था मुद्दा और इस सवाल का जवाब दिया था मंत्री नितिन गडकरी ने। जवाब में मिले आंकड़ों से ज़ाहिर है कि स्थिति कितनी भयानक है। सड़कों पर चलना आज के युग में भी  खौफनाक बन गया है। घर से निकला इंसान घर लौटेगा या  कुछ  सकता। सड़कों ने बहुत सा लहू पी लिया है लेकिन अभी भी इनकी प्यास बुझी नहीं लगती। कब मिलेगी बढ़ते हुए सड़क हादसों से मुक्ति? बहुत सी जानीमानी शख्सियतें इन्हीं हादसों ने निगल लीं। कब रुकेंगे सड़क हादसे?  

आज राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में सांसद (राज्य सभा) संजीव अरोड़ा द्वारा पंजाब में  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) परियोजनाओं के लिए आवंटित राशि के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में, केंद्रीय सड़क
परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर दिया कि एनएचएआई को ऐसा कोई राज्य-विशिष्ट आवंटन नहीं किया गया है।

मंत्री ने कहा है कि स्वीकृत परियोजना लागतों के भीतर, परियोजना की आवश्यकताओं के अनुसार, बजट को परियोजनावार आवंटित किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 (अब तक) तक पंजाब राज्य के लिए एनएचएआई में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर कुल 13749.42 करोड़ रुपये खर्च किये गए है। इसमें से अधिकांश खर्च पिछले 2 वर्षों में किया गया है। खर्च के रुझान को ध्यान में रखते हुए संभावना है कि 2022-23 में खर्च 6000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाएगा।

अरोड़ा ने आज सदन में रोड सेफ्टी इनिशिएटिव से जुड़ा एक और सवाल भी पूछा। जवाब में, गडकरी ने सदन को सूचित किया कि मंत्रालय ने शिक्षा, इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों), प्रवर्तन और आपातकालीन देखभाल के आधार पर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को हल करने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा कि तदनुसार, मंत्रालय द्वारा विभिन्न पहलें की गई हैं।

अरोड़ा ने कहा कि गडकरी ने सदन को सूचित किया कि सड़क सुरक्षा के बारे में प्रभावी जन जागरूकता पैदा करने के लिए मंत्रालय सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से सड़क सुरक्षा पर विभिन्न प्रचार उपाय और जागरूकता अभियान चलाता है। इसके अलावा, मंत्रालय सड़क सुरक्षा समर्थन के प्रबंधन के लिए विभिन्न एजेंसियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना लागू करता है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि योजना स्तर पर सड़क सुरक्षा को सड़क डिजाइन का एक अभिन्न अंग बना दिया गया है। सभी राजमार्ग परियोजनाओं का सड़क सुरक्षा ऑडिट सभी चरणों यानी डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव पर अनिवार्य कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित स्थलों) की पहचान और सुधार को उच्च प्राथमिकता दी गई है। विकलांग व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए दिशा-निर्देश भी सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किए गए हैं।

मंत्री ने सदन को आगे बताया कि मंत्रालय ने वाहन की अगली सीट पर ड्राइवर के बगल में बैठे यात्रियों के लिए एक एयरबैग के अनिवार्य प्रावधान के बारे में अधिसूचित किया है। इस मंत्रालय ने दिनांक 15 फरवरी, 2022 की अधिसूचना द्वारा चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों, मोटर साइकिल की सवारी करने या ले जाने के लिए सुरक्षा उपायों से संबंधित मानदंड निर्धारित किए हैं। इसके अलावा, यह एक सुरक्षा हार्नेस, क्रैश हेलमेट के उपयोग को निर्दिष्ट करता है और गति को 40 किमी प्रति घंटे तक सीमित करता है।

गडकरी ने सदन को यह भी बताया कि मंत्रालय द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियों पर कुल 147.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच कैलेंडर वर्ष 2021 से 2017 के दौरान देश में सभी सड़कों पर कुल 7,36,129 मौतें और 21,24,481 घायल हुए हैं।


Thursday, January 31, 2019

क़ानूनी लफड़ों के डर से किसी घायल को सड़क पर न छोड़ें

लुधियाना लीगल सर्विसिस अथॉरिटी ने चलाया इस आश्य का अभियान 
लुधियाना: 31 जनवरी 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
सड़क हादसों ने जितनी मानवीय जानें ली हैं उतनी शायद न किसी हिंसा ने ली हैं और न ही किसी बिमारी ने। हर रोज़ कहीं न कहीं कोई न कोई सड़क हादसा किसी न किसी की जान लील जाता है। इनमें से कई लोग बच भी सकते थे लेकिन वे नहीं बच पाते क्यूंकि कोई भी उन्हें वक़्त रहते अस्पताल में नहीं पहुंचाता। ज़रा अनुमान लगाइये क्या अनुभव किया होगा उन घायल लोगों ने जिन को लोग देखते हैं, वीडियो बनाते हैं और हँसते हुए पास से निकल जाते हैं। कोई उन्हें अस्पताल नहीं पहुंचाता। सड़क पर तड़प रहे इन घायल लोगों में से कोई आपका अपना भी हो सकता है। कोई रिश्तेदार या कोई बहुत ही प्यारा सा मित्र। उसकी मौत केवल इस लिए हो जाये क्यूंकि उन्हें समय रहते डाक्टरी सहायता नहीं मिल सकी। पता लगने पर आपके दिल पर क्या गुज़रेगी? रहमदिल लोग तो पशु पंक्षियों को भी डाक्टरी सहायता दे कर उनकी जान बचा लेते हैं क्या आप और हम मानव हो कर किसी मानव को भी नहीं बचाएंगे?
मानवीय जीवन के अनमोल होने का अहसास करते हुए खुद आगे बढ़ कर आई हैं डाक्टर गुरप्रीत कौर जो कि यहाँ लुधियाना लीगल सर्विसिस अथॉरिटी में सी जे एम कम सचिव के पद पर नियुक्त हैं। उनकी इच्छा है कि जो संवेदना उनके दिल में जाएगी है वही संवेदना अन्य सभी के दिल में भी उठे। हर रोज़ सड़क हादसों में उजड़ रहे घरों को बचाने के लिए हमें खुद ही आगे आना होगा।  इस मानवीय भावना को एक मिशन बना कर डाक्टर गुरप्रीत कौर कभी जगराओं में मार्च आयोजित करवाती हैं और कभी शहर के डाक्टरों से बात करती हैं। 
हाल ही में हुए एक सेमिनार में मैडम गुरप्रीत कौर ने कहा कि डाक्टरों को भी इस  कर्तव्य पहचान कर अपना योगदान देना होगा। 
इस मुद्दे पर नीतिगत जानकारी देते हुए सीजेएम मैडम ने सेमिनार में बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी घायल को लेकर अस्पताल  तो उसे कसी भी मुद्दे पर ज़रा सा भी परेशान न किया जाये। न तो उससे कोई खर्चा माँगा जाये और न ही उसे इस सड़क हादसे का गवाह बनने के लिए दबाव डाला जाए। अस्पताल सरकारी हो या प्राईवेट।  घायल की जान बचाना ही प्रथम कार्य होना चाहिए। जो व्यक्ति उस घाल का सहायक बन कर उसे ले कर अस्पताल आया उसका धन्यवाद भी किया जाना चाहिए। डाक्टर गुरप्रीत कौर ने स्पष्ट किया कि इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करना आवश्यक बनाया जाये। इस सेमिनार में सरकारी डाक्टरों के साथ साथ प्राइवेट डाक्टर भी थे।  
सेमिनार में एक एक पहलु पर विस्तृत चर्चा हुई। इस संबंध में एक एक मुद्दे पर विचार किया गया। घायलों को अस्पताल पहुँचाया तो कोई क़ानूनी लफड़ा खड़ा हो जायेगा-इस धारणा को समाप्त करने के लिए गंभीरता से विचार हुआ। डाक्टर गुरप्रीत कौर ने शवसन दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। हाँ अगर आप किसी घायल को अस्पताल पहुंचाते हैं तो आपको महसूस होगा कि आज आप ने सच्ची पूजा की है।