Thursday, April 05, 2012

मामला मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक विकास का

सच्‍चर समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन की स्थिति 
पृष्‍ठभूमि                 
     केन्‍द्र सरकार ने विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों से संबंधित सच्‍चर समिति (मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक विकास पर प्रधानमंत्री की उच्‍च स्‍तरीय समिति) की सिफारिशों पर निर्णय लिए है। सच्‍चर समिति के सिफारिशों के आलोक में केन्‍द्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों के कार्यान्‍वयन की स्थिति इस प्रकार है।
1. वित्‍तीय सेवाएं विभाग
क.     सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अल्‍पसंख्‍यक बहुल जि़लों में अधिक से अधिक शाखाएं खोलने के निर्देश दिये गए हैं। वर्ष 2007-08 में ऐसे जि़लों में 523 शाखाएं खोली गईं, जबकि 2008-09 में 537 नई शाखाएं खोली गईं । वर्ष 2009-10 में 743 नई शाखाएं एवं 2010-11 में 814 नई शाखाएं खोली गईं। 2011-12 की अवधि में 31 दिसम्‍बर, 2011 तक 619 बैंक शाखाएं खोली गई हैं। इस प्रकार वर्ष 2007-08 से कुल 3,236 शाखाएं खोली गईं।
ख.     भारतीय रिजर्व बैंक -आरबीआई ने अल्‍पसंख्‍यक समुदायों को ऋण उपलब्‍धता में और सुधार के लिए प्राथमिक क्षेत्र उधार (पीएसएल) पर 1 जुलाई, 2011 को अपने मुख्‍य परिपत्र को संशोधित किया । 31 दिसम्‍बर, 2011 तक अल्‍पसंख्‍यक समुदायों को 1,54,789.90 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है, जो कुल पीएसएल का 14.83 प्रतिशत है।  
ग.      महिलाओं में सूक्ष्‍म वित्‍तीयन को बढ़ावा देने के लिए अल्‍पसंख्‍यक महिलाओं के 6,03,087 खाते खोले गए हैं तथा वर्ष 2011-12 के सितम्‍बर, 2011 तक 6611.87 करोड़ रुपये का सूक्ष्‍म ऋण दिया गया है।
घ.      सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों द्वारा अल्‍पसंख्‍यक बहुल प्रखंडों/जि़लों/शहरों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2011-12 में सितम्‍बर, 2011 तक 1658 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
ङ.      सितम्‍बर 2011 तक प्रमुख बैंकों द्वारा अल्‍पसंख्‍यक बहुल प्रखंडों/जि़लों/शहरों में प्रमुख बैंकों द्वारा 618 उद्यमिता  विकास कार्यक्रम आयोजित किये गए।
2. मानव संसाधन विकास मंत्रालय
     सच्‍चर समिति द्वारा ध्‍यान में लाए गए मुस्लिम समुदाय के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए एक बहुस्‍तरीय रणनीति तैयार की गई है, जो निम्‍नलिखित है: -
क.     कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) योजना के तहत शैक्षिक रूप से पिछड़े प्रखंडों के मानदंड में 1 अप्रैल, 2008 से बदलाव किया गया है, जिसके तहत 30 प्रतिशत से कम ग्रामीण महिला साक्षरता वाले प्रखंडों एवं राष्‍ट्रीय औसत महिला साक्षरता से कम साक्षरता वाले शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इस योजना के तहत अब तक अल्‍पसंख्‍यक बहुल जि़लों में 450 केजीबीवी चलाए जा रहे हैं। 2011-12 में लक्षित 107 केजीबीवी की तुलना में दिसम्‍बर, 2011 तक अल्‍पसंख्‍यक बहुल जि़लों में 70 केजीबीवी चलाए गए हैं।
ख.     माध्‍यमिक स्‍तर पर गुणात्‍मक शिक्षा सभी के लिए उपलब्‍ध कराने हेतु राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान की स्‍वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत अल्‍पसंख्‍यक बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्‍कूलों के खोले जाने की प्राथमिकता है। राज्‍य सरकारों को यह सलाह दी गई है कि वे इस योजना के तहत प्राप्‍त स्‍वीकृतियों को मंजूरी देने के दौरान अल्‍पसंख्‍यक बहुल क्षेत्रों में नये उन्‍नयन स्‍कूलों की स्‍थापना को प्राथमिकता दें। वर्ष 2011-12 के अक्‍तूबर, 2011 तक 158 नये माध्‍यमिक स्‍कूलों की स्‍वीकृति दी गई है।
ग.      देश के 374 शैक्षिक पिछड़ेपन वाले जि़लों (ईबीडी) में एक मॉडल महाविद्यालय स्‍थापित किया जाएगा। कुल 374 ईबीडी में 67 चिन्हित अल्‍पसंख्‍यक बहुल जि़ले हैं। 2011-12 के दौरान अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिलों में 5 मॉडल महाविद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। जिसके लिए 30 सितम्‍बर, 2011 तक 2.67 करोड़ रुपये की राशि निर्गत की गई है।
घ.      पॉलिटेक्निक के उप-मिशन के तहत पॉलिटेक्निक रहित तथा न्‍यून पॉलि‍टेक्निक वाले जिलों में पॉलिटेक्निकों की स्‍थापना के लिए राज्‍यों /संघ शासित प्रदेशों को वित्‍तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत 90 अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिलों में से 57 जिले विचार के लिए पात्र पाये गए हैं। अब तक 46 अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिलों का चयन पॉलिटेक्निकों की स्‍थापना के लिए किया गया है तथा 30 सितम्‍बर, 2011 तक 222.66 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
ङ.      विशेषकर मुस्लिम बहुल अल्‍पसंख्‍यक क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में महिला छात्रावास के प्रावधान पर विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्राथमिकता दी जाती है। यूजीसी ने 284 महिला छात्रावासों की स्‍वीकृति दी है और अल्‍पसंख्‍यक बहुल जिलों /क्षेत्रों के 11वीं योजना के तहत 30 सितम्‍बर, 2011 तक 201.55 करोड़ रुपये की राशि निर्गत की गई है।
च.      सघन क्षेत्र एवं मदरसा आधुनिकीकरण योजना को संशोधित कर दो योजनाओं में विभाजित किया गया है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में 325 करोड़ रुपये की लागत से मदरसों में गुणात्‍मक शिक्षा उपलब्‍ध कराए जाने संबंधी योजना (एसपीक्‍यूईएम) की शुरूआत की गई है। इसके तहत शिक्षकों के बेहतर वेतन, किताबों, शैक्षणिक सहायता एवं कम्‍प्‍यूटर के लिए सहायता राशि में वृद्धि के साथ-साथ व्‍यावसायिक विषयों को लागू करने का भी प्रावधान है।
छ.     बजट प्रावधानों के 150 करोड़ रुपये की तुलना में 31 दिसम्‍बर, 2011 तक 92.77 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं। गैर सहायता प्राप्‍त तथा निजी क्षेत्रों द्वारा सहायता प्राप्‍त अल्‍पसंख्‍यक संस्‍थानों के संरचनात्‍मक विकास के लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 125 करोड़ रुपये की लागत वाली एक अन्‍य योजना की शुरूआत की गयी। इसके अंतर्गत 2011-12 में 50 करोड़ रुपये की बजटीय आवंटन तुलना में 31 दिसम्‍बर, 2011 तक 21.88 करोड़ रुपये जारी किये जा चुके हैं।
ज.     उच्‍चस्‍तरीय शिक्षा तक पहुंच के लिए राज्‍य मदरसा बोर्डों द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों और योग्‍यताओं को संबंधित राज्‍य शिक्षा बोर्डों, केन्द्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड़ सीबीएसई तथा भारतीय स्‍कूल शिक्षा बोर्ड परिषद सीओबीएसई द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों के समकक्ष मान्‍यता की स्‍वी‍‍कृति दी गई।
झ.     उर्दू माध्‍यम के शिक्षकों में व्‍यवसायिक विकास के लिए तीन के‍न्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों, अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय, दिल्‍ली के जामिया मिलिया इस्‍लामिया विश्‍वविद्यालय और हैदराबाद के मौलाना आज़ाद राष्‍ट्रीय उर्दू विश्‍वविद्यालय में अकादमी की स्‍थापना की गई है। वर्ष 2011-12 के दौरान 4718 उर्दू शिक्षकों को अंशकालिक पाठ़यक्रमों और कार्यशालाओं के तहत प्रशिक्षित किया गया।
ञ.      संशोधित योजना के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में 25 प्रतिशत से अधिक की आबादी उर्दू बोलने वाले समुदाय भी है। वहां के सरकारी स्‍कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। आर्थिक सहायता राज्‍य सरकारों द्वारा स्‍कूलों में नियुक्‍त किये जाने वाले उर्दू शिक्षकों के वर्तमान वेतन ढांचे पर आधारित होगी। अंशकालिक उर्दू शिक्षकों के लिए भी मानदेय का प्रावधान है।  
ट.      राज्‍यों एवं संघशासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि जहां व्‍यापक मुसलिम आबादी है वहां समुदाय आधारित अभियान चलाए जाएं। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार जहां वयस्‍क महिला साक्षरता 50 प्रतिशत से कम है, ऐसे 410 जि़लों में से 372 जिलों में साक्षर भारत योजना क्रियान्वित की जा चुकी है। 88 मुस्लिम बहुल जि़लों में से 61 जि़लों में साक्षर भारत योजना लागू की गई है।
ठ.      संशोधित योजनाओं में जन शिक्षण संस्‍थानों, जेएसएस को शामिल किया गया है। वर्तमान में देश के 88 मुस्लिम बहुल जिलों में से 33 जिलों में जेएसएस व्‍यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।
ड.       2008-09 से मध्‍यान्‍ह भोजन योजना को देश के सभी भागों में लागू कर दिया गया है। इसके अन्‍तर्गत उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों को भी लाया गया है। मुस्लिम बहुल प्रखंडों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है।
ढ.      सभी राज्‍य सरकारों और संघशासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे मौजूदा स्‍‍कूल भवनों और सामुदायिक भवनों का इस्‍तेमाल स्‍कूली बच्‍चों के शिक्षा केन्‍द्रों के तौर पर करें।
ण.     राष्‍ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, एनसीईआरटी ने सभी कक्षाओं के लिए राष्‍ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा 2005 (एनसीएफ) के आलोक में पाठ्यपुस्तकें तैयार की हैं। एनसीएफ 2005 के अनुसार 14 राज्‍यों ने अपने पाठ़यक्रम को संशोधित कर लिया है जबकि 9 राज्‍य इसे अपनाने की प्रक्रिया में हैं। 10 राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेश या तो पड़ोसी राज्‍यों की पाठ्यपुस्तकों का इस्‍तेमाल कर रहे अथवा एनसीईआरटी  पाठ्यपुस्‍तकों का ।
त.     अल्‍पसंख्‍यक, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए 35 विश्वविद्यालयों द्वारा सामाजिक परित्यक्तता तथा सम्मिलित नीति से संबंधित केन्‍द्र चलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त वर्ष 2009-10 में 51 विश्वविद्यालयों में समान अवसर आयोग ईओसी के 1280 केन्‍द्र स्‍थापित किये गए तथा 1345 और 1367 ऐसे केन्‍द्रों की स्‍थापना का प्रस्‍ताव क्रमश: 2010-11 और 2011-12 में रखा गया।  
3.   अल्‍पसंख्‍यक मामले मंत्रालय
क.     समान अवसर आयोग (ईओसी) की संरचना और उसकी कार्य प्रणाली के अध्‍ययन और सिफारिशों के लिए गठित विशेषज्ञ समूह ने अपना प्रतिवेदन 13 मार्च, 2008 को सौंप‍दिया। विविधता सूची की परिकल्‍पना को ईओसी में शामिल कर‍लिया गया है। ईओसी का प्रारूप विधेयक संबंधित विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों से बातचीत की प्रक्रिया में है।
ख.     संशोधित वक्‍फ विधेयक लोकसभा द्वारा पास कर दिया गया है और विचार के लिए राज्‍यसभा की चयन समिति को 31 अगस्‍त, 2010 में भेज दिया गया। चयन समिति ने 12 दिसम्‍बर, 2011 को अपनी 22वीं बैठक आयोजित की। राज्‍यसभा की चयन समिति की रिपोर्ट और उसके सामने प्रस्‍तुत किये गए साक्ष्यों को राज्‍यसभा में 16 दिसम्‍बर, 2011 को पटल पर रखा गया।
ग.      सरकार ने राष्‍ट्रीय अल्‍पसंख्‍यक विकास एवं वित्‍त निगम एनएमडीएफसी में पुनर्गठन को सैद्धांतिक  तौर पर स्‍वीकृति दे दी है। एनएमडीएफसी में इस पुनर्गठन के तौर तरीकों के लिए एक परामर्श संस्‍था नियुक्‍त की गई है। संस्‍था ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंप दी है, जिसकी जांच मंत्रालय द्वारा की गई है। परामर्श निगरानी समिति की रिपोर्ट और उसके सुझाव विचाराधीन है।
घ.           घनी अल्‍पसंख्‍यक आबादी वाले चिह्नित 338 कस्‍बों के विकास के लिए कार्य योजना और उपयुक्‍त कार्यनीति तैयार करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी कार्यबल का गठन किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट 8 नवम्‍बर, 2007 को सौंप दी। संबद्ध मंत्रालयों/ विभागों से आग्रह किया गया है कि वे इन 338 शहरों मे्ं इन योजनाओं को कार्यान्वित करने में प्राथमिकता दें।
ङ.      अल्पसंख्यक समुदायों के लिए तीन छात्रवृत्ति योजनाओं यथा कक्षा प्रथम से दसवीं तक के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, कक्षा 11 से पीएचडी स्तर तक के छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति और स्नातक पूर्व तथा स्नातकोत्तर स्तर के तकनीकी और व्यावसायिक स्तर के छात्रों के लिए योग्यता एवं साधन छात्रवृत्ति शुरू की गई हैं। इन योजनाओं के अधीन वर्ष 2011-12 में 31 दिसंबर, 2011 तक अल्पसंख्यक समुदायों के 33.90 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए 649.21 करोड़ रूपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा एम-फिल और पीएचडी विद्वानों के लिए मौलाना आजाद राष्ट्रीय फैलोशिप योजना नामक एक फैलोशिप योजना पर भी अमल किया जा रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 756 फैलोशिप और 3778 नवीनीकरण स्वीकृत किए गए हैं और उनके लिए 31 दिसंबर, 2011 तक के लिए 51.98 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता जारी की गई है।
च.      मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन (एमएईएफ) की राशि, जो 100 करोड़ रूपये थी, उसे दिसंबर, 2006 में दोगुना करके 200 करोड़ रूपये कर दिया गया था। इस राशि को 11वीं योजना अवधि के दौरान बढ़ाकर 700 करोड़ रूपये कर दिया गया। एमएईएफ की इस योजना के अधीन 2007-08 से 419 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को शिक्षा संस्थानों के संरचना विकास के लिए सहायता अनुदान और 11वीं तथा 12वीं कक्षाओं की योग्य छात्राओं को 48471 छात्रवृत्तियां दी गईं।
छ.     वर्ष 2006-07 में एक संशोधित कोचिंग एवं संबद्ध योजना शुरू की गई। वर्ष 2011-12 में 6000 छात्रों का लक्ष्य रखा गया था जबकि अल्पसंख्यक समुदायों के 90 छात्रों को वित्तीय सहायता दी गई है। 16 करोड़ रूपये के बजट प्रावधान में से 4 करोड़ रूपये 31 दिसंबर, 2011 तक जारी किये गए।
ज.     वर्ष 2008-09 में अल्पसंख्यक समुदायों की बहुलता वाले चिन्हित 90 जिलों में एक बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) शुरू किया गया। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, बिहार, मेघालय, झारखंड, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, ओडीशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, उत्तराखंड, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मध्य प्रदेश, सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय की बहुलता वाले 90 जिलों की योजनाओं को मंजूरी दी गई है और कार्यक्रम शुरू किए जाने के समय से 31 दिसंबर, 2011 तक राज्य सरकारों और संघ शासित प्रशासनों को 2588.34 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं।
4.    सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
     सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में सामाजिक-धार्मिक समुदायों के लिए विभिन्न सामाजिक-आर्थिक और बुनियादी सुविधा मानदंडों के आंकड़े संकलित करने के लिए एक राष्ट्रीय आंकड़ा (डेटा) बैंक बनाया गया है।
5.    योजना आयोग
क.     योजना आयोग में एक स्वायतशासी आकलन एवं अनुश्रवण प्राधिकरण (एएमए) गठित किया गया है जो उचित और सुधारक नीतिपरक निर्णय लेने के लिए संग्रहित आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। एएमए की अवधि 15 जनवरी, 2011 को समाप्त हो गई। इसके बाद योजना आयोग ने एएमए का पुनर्गठन किया है और नवगठित एएमए ने अपनी कुछ बैठकें आयोजित की हैं।
ख.     अल्पसंख्यक समुदायों सहित देश की कौशल विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए योजना आयोग में एक व्यापक संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है जो कौशल विकास को बढ़ावा देगा। इसमें कौशल विकास संबंधी राष्ट्रीय परिषद, राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय बोर्ड और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम शामिल हैं।
6.    कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
क.     कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने सरकारी अधिकारियों को सुग्राही बनाने के लिए प्रशिक्षण माड्यूल तैयार किए हैं। ये माड्यूल केन्द्रीय/ राज्य प्रशिक्षण संस्थाओं को प्रशिक्षण के लिए भेज दिए गए हैं।
ख.     कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने राज्य सरकारों और संघ शासित प्रशासनों को कहा है कि मुसलमानों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों में पुलिस स्टेशनों पर मुस्लिम पुलिसकर्मियों को और मुस्लिम स्वास्थ्य कर्मियों तथा अध्यापकों को तैनात किया जाए। गृह मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस प्रकार के कार्यों के लिए दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
7.    गृह मंत्रालय
क.     परिसीमन अधिनियम की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने परिसीमन योजनाओं के अधीन आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में असंगतियों के बारे में सच्चर समिति की रिपोर्ट में व्यक्त चिंताओं पर विचार किया है और अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है।
ख.     राष्ट्रीय परामर्शदात्री परिषद (एनएसी) के एक कार्यकारी दल ने एक विधेयक का प्रारूप तैयार किया जिसका शीर्ष है- साम्प्रदायिक और लक्षित हिंसा की रोकथाम (न्याय और मुआवजे तक पहुंच) विधेयक-2011 । एऩएसी ने यह विधेयक गृह मंत्रालय को 25 जुलाई, 2011 को भेजा। गृह मंत्रालय इस प्रारूप विधेयक पर विचार कर रहा है।
8.    शहरी विकास मंत्रालय और आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय
     अल्पसंख्यक समुदायों की अधिक संख्या वाले शहरों और कस्बों में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएऩएनयूआरएम), लघु और मझौले शहरों के लिए शहरी संरचना विकास योजना (यूआईडीएसएसएमटी), समन्वित आवास एवं मलिन बस्ती विकास कार्यक्रम (आईएचएसडीपी) और शहरी गरीबों के लिए बुनियादी सेवाएं (बीएसयूपी) के अधीन अल्पसंख्यक समुदायों के लिए पर्याप्त धन सुनिश्चित करने के लिए विस्‍तृत रिपोर्ट बनाने हेतु आवश्‍यक कदम उठाए गए हैं।
क.     यूआईडीएसएसएमटी के अधीन अल्पसंख्यक समुदायों की अधिक आबादी वाले 88 कस्बों के लिए 2672.34 करोड़ रूपये मंजूर किए गए हैं।
ख.     आईएचएसडीपी के अधीन अल्पसंख्यक समुदायों की अधिक आबादी वाले 101 कस्बों के लिए 1897.69 करोड़ रूपये वाली परियोजनाएं स्वीकार की गई हैं।
ग.      बीएसयूपी के अधीन 17 कस्बों के लिए 7086.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए हैं।
घ.      उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, लक्षद्वीप, पांडिचेरी और केरल की सरकारों ने वक्फ बोर्ड की परिसंपत्तियों को किराया नियंत्रण अधिनियम से छूट दे दी है जबकि अरूणाचल प्रदेश और नगालैंड ने सूचित किया है कि उनके राज्यों में कोई वक्फ परिसंपत्ति नहीं है।
9.    श्रम और रोजगार मंत्रालय
     असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए संसद ने एक अधिनियम पारित किया है। इन श्रमिकों में घरों में काम करने वाले नौकर भी शामिल हैं।
10.   संस्कृति मंत्रालय
     भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन वक्फ परिसंपत्तियों की सूची की समीक्षा करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सर्कलों ने राज्य वक्फ बोर्डों के साथ बैठकें की हैं।
11.    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
     अल्पसंख्यक समुदायों की बहुतायत वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण योजनाओं के बारे में सूचनाओं के प्रसार का काम क्षेत्रीय भाषाओं में अपनाया जा रहा है।
12.   पंचायती राज मंत्रालय
     पंचायती राज मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे स्थानीय निकायों में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़ाएं।
     पंचायती राज मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत सूचना के अनुसार उत्तराखंड़, केरल, पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों ने सूचना दी है कि जिला और पंचायती राज स्तर पर अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के प्रावधान हैं।
     शहरी विकास मंत्रालय ने सूचित किया है कि केरल, पश्चिम बंगाल और हरियाणा की राज्य सरकारें इन दिशा निर्देशों को कार्यान्वित कर रही हैं।
13.   सूचना और प्रसारण मंत्रालय
क.     सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बताया है कि उनका मंत्रालय अल्पसंख्यकों के कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर विशेष लेख नियमित रूप से जारी किए जा रहे हैं जिनमें सच्चर समिति की रिपोर्ट में उल्लेखित विषय और छात्रवृत्ति की योजनाएं शामिल हैं। (पीआईबी)  04-अप्रैल-2012 15:49 IST

Wednesday, April 04, 2012

कचरे से ऊर्जा

विशेष लेख                                        एमएनआरई
शहरीकरण और औद्योगिकीकरण सभी विकासशील देशों के विकास का आधार बन रहें हैं और साथ ही भारत के विकास में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं  । हालांकि इन दोनों पहलुओं की विकास में काफी महत्‍वपूर्ण भूमिका है लेकिन इसके कारण कचरे की समस्‍या भी पैदा हो रही है। वास्‍तव में यह समस्‍या बहुत ही बड़ा रूप ले रही है क्‍योंकि यह कचरा प्रदूषण का स्रोत बन रहे हैं। ज्‍़यादातर कचरा जो पैदा होता है वह भूमि को समतल बनाने (लैंडफिल) तथा जल निकायों में चले जाते हैं। अत: इनका सही तरीके से निपटान नहीं होता है तथा यह मिथेन और कार्बन डायओक्‍साइड जैसी ग्रीन हाउस गैसों के स्रोत बनते हैं। कचरे का निपटान करने से पहले उनको सही ढंग से संसाधित करने तथा उनका ऊर्जा के उत्‍पादन में इस्‍तेमाल करने से इस समस्‍या में सुधार हो सकता है। इसमें दो स्‍तरीय दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है जिसमें न केवल अपशिष्‍ट का निपटान पर्यावरण के अनुकूल हो सकेगा बल्कि साथ ही साथ प्रदूषण कम करने और विकास की ज़रूरतों के लिए आवश्‍यक ऊर्जा का उत्‍पादन भी हो सकेगा। ऐसी कई पद्धतियां हैं जिससे कचरे के जरिए ऊर्जा का उत्‍पादन हो सकता है। 
बायोमिथेनेशन
सबसे पहला है अवायवीय (ऐनरोबिक) बायजेशन या बायोमिथनेशन। इस पक्रिया में जैविक कचरे को अलग किया जाता है तथा उसे बायो गैस डायजेस्‍टर में डाला जाता है। मिथेन से संपन्‍न बायोगैस का उत्‍पादन करने के लिए अवायवीय स्थितियों में इस कचरे का अपशिष्‍ट बायोडिग्रेडेशन होता है। इस तरह से पैदा हुर्इ बॉयोगैस का इस्‍तेमाल खाना पकाने, बिजली पैदा करने आदि में हो सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान बने चिपचिपे पदार्थ का इस्‍तेमाल खाद के रूप में किया जा सकता है।
 कम्‍बशन/ इन्सिनेरेशन
अगली प्रक्रिया कम्‍बशन/इन्सिनेरेश है। इस पद्धति में उच्‍च तापमान पर ( लगभग 800 सी) कचरे को औक्‍सीजन की प्राचुर्य मात्रा में सीधे रूप से जलाया जाता है। इससे जैविक पदार्थ के ऊष्‍म तत्‍व 65-80 प्रतिशत तक गरम हवा, भाप तथा गरम पानी में तब्‍दील होते हैं। इसक जरिए पैदा हुई भाप का इस्‍तेमाल स्‍टीम टर्बाइन में बिजली पैदा करने के लिए हो सकता है।
पायरॉलिसिस/ गैसिफिकेश::पायरॉलिसिस/गैसिफिकेशन एक अन्‍य प्रक्रिया है जिसमें जैविक पदार्थों का ऊष्‍म के जरिए रायासनिक अपघटन होता है। जैविक पदार्थ को हवा की अनुपस्थिति या हवा की सीमित मात्रा में तब तक गरम किया जाता हे जब तक कि उनका गैस के छोटे मॉलिक्‍यूल में अपघटन न हो जाएं ( जिसे सम्मिलित रूप से सिनगैस कहते हैं )। उत्‍पादित गैस को प्रोड़यूसर गैस कहते हैं जिसमें कार्बन मानोक्‍साइड (25 प्रतिशत), हाइड्रोजन तथा हाइड्रोकार्बन(15 प्रतिशत), कार्बन डायोक्‍साइड और नाइट्रोजन (15 प्रतिशत) गैस सम्मिलित होती हैं। बिजली पैदा करने के लिए प्रोड्यूसर गैस को इंटरनल कम्‍बशन जेनरेटर सेट या टर्बाइन में जलाया जाता है।
लैण्‍डफील गैस रिकवरी   लैण्‍डफील गैस रिकवरी कचरे से गैस प्राप्‍त करने का एक अन्‍य उपाय है, जिसमें लैण्‍डफील गैस तैयार करने के लिए कचरा धीरे-धीरे सड़ता रहता है। इस गैस में मिथेन की अत्यधिक मात्रा (लगभग 50 प्रतिशत) होती है और इससे काफी गर्मी निकलती है, जो लगभग 4500 किलो कैलरी/प्रतिघन मीटर होती है। इसलिए इसका इस्तेमाल रसोई के लिए और बिजली तैयार करने में किया जा सकता है।
प्लाजमा आर्क      विशेषकर खतरनाक और रेडियोसक्रियता वाले कचरे को निपटाने के लिए प्लाजा आर्क अपेक्षाकृत एक नई प्रौद्योगिकी है। चूंकि ऊर्जा का उत्पादन करते समय इस प्रक्रिया में कचरा लगभग पूरी तरह से नष्ट हो जाता है, इसलिए यह एक कम प्रदूषण वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में नाइट्रोजन और सल्फा के ऑक्साईड नहीं बनते हैं और केवल जहरीला राख बच जाता है जिसे हटाना आसान होता है। हालाकि यह प्रौद्योगिकी महंगी है और भारत में इसके लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
ऊर्जा के लिए कचरे के इस्तेमाल के लाभ    ऊर्जा के लिए कचरे के इस्तेमाल एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे उन महानगरो में लैंडफील के लिए मांग में कमी होती है, जहां भूमि की कमी है। इससे कचरे के परिवहन पर आने वाली लागत में भी कमी होती है। कुछ मामलों में इससे एक सह-उत्पाद के रूप में उर्वरक का उत्पादन भी हो सकता है। किन्तु फिलहाल ये प्रौद्योगिकियां महंगी हैं। इसके बावजूद भी इनका आयात किया जा रहा है। विभिन्न प्रौद्योगिकियों के आधार पर कचरे से ऊर्जा तैयार करने की परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावाट लागत अधिक होती है। बायोमिथेन तैयार करने के लिए 6 से 9 करोड़ रुपये के बीच में लागत आती है जबकि गैस तैयार करने और दहन के लिए इसपर से 10 करोड़ रुपये की लागत आती है। हालांकि इस परियोजना के लिए 20 लाख रुपये से लेकर3 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता दी जाती है।
      एक अनुमान के अनुसार देश में शहरी, पालिका संबंधी और ओद्योगिकी कचरों से 3600 मेगावाट बिजली तैयार करने की संभावना है और वर्ष 2017 तक यह बढ़कर 5200 मेगावाट हो सकती है। शहरी स्थानीय निकायों और सरकार के द्वारा यह परियोजनाएं स्थापित की जा सकती हैं और इसमें निजी क्षेत्र के डेवलपरों की भागेदारी भी हो सकती है। फरवरी 2012 के अंत तक कचरे से कुल मिलाकर शहरी क्षेत्र में 36.20 मेगावाट बिजली और औद्योगिक क्षेत्र में 53.46 मेगावाट ग्रीड आधारित बिजली का उत्पादन किया गया था। दूसरी और ग्रीड से भिन्न मामलों में कचरे से कुल मिलाकर नगरीय क्षेत्र के लिए 3.50 मेगावाट के समतुल्य बिजली का उत्पादन हुआ और औद्योगिक क्षेत्र के लिए 90.15 मेगावाट के समतुल्य बिजली का उत्पादन हुआ। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दे रहा है ताकि कचरे से ऊर्जा प्राप्त करके ठोस विकास का एक युग हमारे सामने हो। [पीआईबी] (पसूका विशेष लेख)  02-अप्रैल-2012 19:32 IST   
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Tuesday, April 03, 2012

समुचित कार्रवाई की जाएगी

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के बारे में केन्द्रीय मंत्री का वक्‍तव्‍य
इंडियन एक्‍सप्रेस में 03 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित समाचार के बारे में केंद्रीय सड़क परिहवन और राजमार्ग मंत्री डॉक्‍टर सीपी जोशी द्वारा दिए गए वक्‍तव्‍य का मूलपाठ निम्‍नानुसार है - 
‘’इंडियन एक्‍सप्रेस में 03 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित समाचार की ओर मेरा ध्‍यान दिलाया गया है। इस संबंध में मैंने तथ्‍यों का पता लगाया है। 

विश्‍व बैंक द्वारा जुटाए गए तथ्‍यों को संलग्‍न करते हुए आर्थिक कार्य विभाग से एक पत्र सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में पिछले कुछ दिनों पहले प्राप्‍त किया गया था, जो लखनऊ-मुज्‍फ्फरपुर राष्‍ट्रीय राजमार्ग परियोजना के दो ठेकेदारों – मेसर्स प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (पीसीएल) और मेसर्स प्रोग्रेसिव कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (पीसीएल) – मेसर्स एमवीआर जेवी के संबंध में है। यह रिपोर्ट 2005-08 की अवधि से संबंधित है। इस मामले से संबंधित तथ्यों का पता लगाने के लिए इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास भेजा गया है। इसके बाद समुचित कार्रवाई की जाएगी। 

विश्व बैंक सख्त तौर पर गोपनीयता का पालन करता है। जितनी जल्दी तथ्यों का पता चलता है, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथ्यों के बारे में एक रिपोर्ट के साथ-साथ आर्थिक कार्य विभाग की ओर से की गयी कार्रवाई का विवरण भी भेजेगा।“ 

03-अप्रैल-2012 20:12 IST
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सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठान - निष्‍पादन समीक्षा

  विशेष लेख               भारी उद्योग
सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठान उच्‍चतर आर्थिक विकासवस्‍तु और सेवाओं के उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भरताअदायगी संतुलन में दीर्घकालिक समानता और निम्‍न एवं स्‍थायीमूल्‍यों के बृहत आर्थिक लक्ष्‍यों को पूरा करने के लिए गठित किये गये है। जहां पहली पंचवर्षीय योजना के समय कुल 29 करोड़ रुपये की पूंजी निवेश के साथ मात्र पाँच केंद्रीय सार्वजनिकप्रतिष्‍ठान (सीपीएसईथेवहां 31 मार्च, 2011 को कुल 6,66,848 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 248 सीपीएसई हो गए। इनमें सात बीमा कम्‍पनियां शामिल नहीं है।     पंचवर्षीय योजनाओं केदौरान की गई पहल के परिणामस्‍वरूप हरित क्षेत्र परियोजनाओं के रूप में बड़ी संख्‍या में सीपीएसई गठित की गई है। जहां एक और राष्‍ट्रीय कपड़ा निगमकोल इंडिया लिमिटेड (और उसकीसहायक कम्‍पनियांजैसी सीपीएसई के राष्‍ट्रीकरण के परिणामस्‍वरूप निजी क्षेत्र से सरकारी अधिकार में ले ली गई हैवहां इंडियन पेट्रोकेमिकल्‍स कार्पोरेशन लिमिटेडमॉडर्न फूड इंडस्‍ट्रीज लिमिटेडहिंदुस्तान जिंक लिमिटेडभारत एल्ूमिनियम कम्‍पनी और मारुति उद्योग लिमिटेडजो पहले सीपीएसई थीने निजी करण के बाद सीपीएसई के रूप में काम करना बंद दिया।
       सार्वजनिक क्षेत्र की अन्‍य प्रमुख कम्‍पनियों जैसे बैंकिंग क्षेत्र में भारतीय स्‍टेट बैंकबीमा क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम और परिवहन क्षेत्र में भारतीय रेल केसा-साथ्सीपीएसई भारत की अग्रणी कम्‍पनियां है। इनका अनेक क्षेत्रों जैसे पेट्रोलियम (उदाहरण के तौर पर कोल इंडिया लिमिटेड और एनएमडीसी), विद्युत उत्‍पादन (एनटीपीसी औरएनएचपीसीविद्युत ट्रांसमिशन (पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड), भारी इंजीनियरी (भेल), विमानन उद्योग (हिंदुस्‍तान  एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड और एयर इंडिया लिमिटेड),भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (भारतीय खाद्य निगम और केंद्रीय भंडार निगम), जहाजरानी और व्‍यापार (भारतीय जहाजरानी निगम लिमिटेड और राज्‍य व्‍यापार निगमलिमिटेडऔर दूरसंचार (बीएसएनएल और एमटीएनएलमें उल्‍लेखनीय बाजार शेयर है।
       1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद ऐसे क्षेत्र जो पहले सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठानों के ही अधिकार क्षेत्र में थे, वे निजी क्षेत्र के लिए खोल दिए गए। इस प्रकार सीपीएसई को निजी क्षेत्र की घरेलू कम्‍पनियों (इनमें से ने कुछ बहुत तेजी से विकास किया) और बहुराष्‍ट्रीय बड़े निगमों (एमएनसी) से प्रतिस्‍पर्धा का सामना करना पडा। सीपीएसई जैसे भारतीय कपास निगम, आईटी आई लिमि‍टेड, मझगांव बंदरगाह लिमिटेड, एमएसटीसी लिमिटेड, एसटीसी लिमिटेड, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड और भारत संचार निगम लिमिटेड के कारोबार में 2010-11 के दौरान अत्‍यधिक गिरावट आई। सीपीएसई जैसे एयर इंडिया लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड, हिंदुस्‍तान फोटो फिल्‍मस एण्‍ड मेन्‍यूफेक्‍चरिंग कम्‍पनी लिमिटेड और ड्रग एण्‍ड फॉमेस्‍यूटिक्‍लस लिमिटेड को 2010-11 के दौरान घाटा उठाना पडा। 
भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था (2010-11) और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठान (सीपीएसई)
      सीपीएसई भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते है। वे अर्थव्‍यवस्‍था  में विकास को प्रभावित करते है और अर्थव्‍यवस्‍था में कुल विकास से प्रभावित होते है। 2010-11 में (वर्तमान बाजार मूल्‍य पर) 18.80 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्‍पाद की मामूली वृद्धि की तुलना में (पुन:प्राप्तियों को छोड़कर) सभी सीपीएसई का सकल मूल्‍यवर्धन में आलोच्‍य वर्ष के दौरान 10.03 प्रतिशत की वृद्धि हुई। (तथापि, यदि पुन:प्राप्तियों को जोड़ दिया जाए तो आलोच्‍य वर्ष के दौरान सभी सीपीएसई के सकल मूल्‍यवर्धन 13.40 प्रतिशत बढ़ जायेगा)। वर्ष के दौरान पेट्रोलियम (शोधन एवं विपणन), सेवाएं (कारोबार और विपणन), विद्युत (उत्‍पादन), भारी इंजीनियरी, खनिज एवं धातु और कोयला एवं लिग्‍नाइट के कारोबार में उल्‍लेखनीय वृद्धि का पता चलता है। यह जरूरी नहीं कि विभिन्‍न सीपीएसई के लाभ/घाटे कारोबार में वृद्धि अथवा कमी के हिसाब से बढ़े। इसमें विभिन्‍न कारकों का भी जैसे उच्‍चतर निवेश लागत, कम लागत, वेतन और मजदू‍री में वृद्धि, ब्‍याज का भारी बोझ और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ता है।
       सीपीएसई के सभी कार्यरत 220 कम्‍पनियों का कारोबार पिछले वर्ष के 12,44,805 करोड़ रुपये की तुलना में इस वर्ष 14,73,319 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2010-11 के दौरान सीपीएसई ने पिछले वर्ष के 84,224 करोड़ रुपये की तुलना में 97,004 करोड़ रुपये के समकक्ष विदेशी मुद्रा अर्जित की। इसके विपरीत आयात और रॉयल्‍टी, जानकारी, परामर्शदात्री सेवाओं और अन्‍य व्‍यय पर विदेशी मुद्रा का निर्गम जहां वर्ष 2009-10 में 4,24,207 करोड़ रुपये था वहां 2010-11 में बढ़कर 5,22,577 करोड़ रुपये हो गया। इससे इस मद में 23.19 प्रतिशत की वृद्धि का पता चलता है।
       सीपीएसई में कर्मचारियों की कुल संख्‍या (आकस्मिक श्रमिकों को छोड़कर) 2010-11 में 14.44 लाख रह गई जबकि 2009-10 में यह 14.90 लाख थी। सीपीएसई कर्मचारियों की कुल संख्‍या में 45,981 व्‍यक्तियों की कमी आई। इसका कारण कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति आदि था। सभी सीपीएसई में वेतन और मजदूरी की अदायगी जहां 2009-10 में 87,792 करोड़ रुपये की हुई थी, वहां 2010-11 में 96,210 करोड़ रुपये की अदायगी करनी पड़ी, इस प्रकार इस मद में 9.58 प्रतिशत की वृद्धि का पता चलता है। 
सीपीएसई में कारोबार
       सीपीएसई की सकल बिक्री/कारोबार में 2010-11 के दौरान उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई। सीपीएसई के कारोबार में 2009-10 की तुलना में 2010-11 में (योगफल स्‍तर पर) 18.36 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2008-09 की तुलना में 2009-10 में 2.10 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
       कृषि क्षेत्र में 2010-11 के दौरान कारोबार में सर्वाधिक वृद्धि (23.03 प्रतिशत) दर्ज की। इसके बाद उत्‍पादन क्षेत्र में 20.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2009-10 में नकारात्‍मक वृद्धि (-7.76 प्रतिशत) हुई थी। खनन क्षेत्र के कारोबार में आलोच्‍य वर्ष के दौरान 15.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2009-10 में 0.68 प्रतिशत की नकारात्‍मक वृद्धि हुई थी। विद्युत और सेवा क्षेत्र के कारोबार में 2010-11 में क्रमश: 17.96 प्रतिशत और 12.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जिससे पिछले वर्ष की तुलना में मामूली सुधार का पता चलता है।
       तथापि, विभिन्‍न उद्योगों के कारोबार में काफी अंतर रहा। विभिन्‍न उद्योगों जैसे मझौले और हल्‍की इंजीनियरी, परिवहन उपकरण और दूरसंचार सेवाओं से संबंधित सीपीएसई के कारोबार में उल्‍लेखनीय गिरावट आई। 
सीपीएसई के लाभ और हानि (योगफल)      सीपीएसई के मुनाफा कमाने वाली कम्‍पनियों का लाभ 2009-10 के 1,08,434 करोड़ रुपये की तुलना में 2010-11 में 1,13,770 करोड़ रुपये रहा। जबकि सीपीएसई की घाटे में चलने वाली कम्‍पनियों का घाटा 2009-10 के 16,231 करोड़ रुपये की तुलना में 2010-11 में 21,693 करोड़ रुपये रहा। योगफल स्‍तर पर सभी सीपीएसई का शुद्ध लाभ (योगफल शुद्ध  लाभ-योगफल शुद्ध हानि) 2009-10 के 92,203 करोड़ रुपये की तुलना में 2010-11 में 92,077 करोड़ रुपये रहा।
       सजातीय (कोगनेट) समूह-वार सर्वोत्‍तम परिणाम खनन क्षेत्र द्वारा प्राप्‍त किये गये। उसके लाभ में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 22.32 प्रतिशत की वृद्धि रही। इसके बाद विद्युत क्षेत्र के लाभ्‍में 12.97 प्रतिशत की वृद्धि रही। सेवा क्षेत्र ने 2010-11 के दौरान 7,639 करोड़ रुपये का घाटा उठाया जो 2009-10 के 3,279 करोड़ रुपये के घाटे से कहीं अधिक है। इसका मुख्‍य कारण इन दोनों वर्षों एयर इंडिया लिमिटेड द्वारा दिखाया गया घाटा रहा है। उद्योग के अन्‍य समूहों में, परिवहन सेवाओं, दूरसंचार सेवाओं और उपभोक्‍ता  वस्‍तुओं से संबंधित सीपीएसई के उद्योग 2010-11 के दौरान बराबर बोझ में दबे रहे और उनके घाटों में वृद्धि हुई। उत्‍पादन क्षेत्र के अधीन इस्‍पात, पेट्रोलियम और वस्‍त्र उद्योग के लाभ में गिरावट का पता चला। मझौले और लाइट इंजीनियरी के सीपीएसई के उद्योगों ने भी आलोच्‍य वर्ष के दौरान घाटे दिखाए जबकि पिछले वर्ष में वे लाभ में रहे थे। इसके मुकाबले रसायन और भेषज क्षेत्रों के सीपीएसई उद्योगों के घाटे में 2010-11 के दौरान कमी आई।
सीपीएसई के मुनाफा कमाने वाली 10 शीर्ष सीपीएसई
       केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्‍ठान की मुनाफा कमाने वाली 10 शीर्ष कम्‍पनियों में तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी), एनटीपीसी लिमिटेड और भारतीय तेल निगम लिमिटेड क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्‍थान की कम्‍पनियां रही है।

       इनके बाद एनएमडीसी लिमिटेड, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (एसएआईएल), कोल इंडिया लिमिटेड, जीएआईएल (इंडिया) लिमिटेड़, ऑयल इंडिया लिमिटेड एवं पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड। लाभ कमाने वाली सभी शीर्ष 10 कंपनियों में पावर ग्रिड कार्पोरेशन को छोड़कर अन्य कंपनियों की स्थिति 2009-10 (स्थान में थोड़ा बहुत परिवर्तन) की तुलना में वर्ष 2010-11 में लगभग समान रही और पावर ग्रिड कार्पोरेशन का स्थान पावर फाईनांस कार्पोरेशन ने ले लिया। 
घाटे में रहने वाली शीर्ष 10 सीपीएसई (केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र प्रतिष्ठान)
घाटे में रहने वाली कंपनियों में वर्ष 2010-11 के दौरान एयर इंडिया लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड एवं महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड में घाटा दिखाने वाली शीर्ष तीन उपक्रम थीं। इनके बाद हिन्दुस्तान फोटो फिल्मस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड, इंडियन ड्रग्स एवं फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, हिन्दुस्तान केबल्स लिमिटेड़, फर्टिलाइजर कार्पोरेशन इंडिया लिमिटेड, एयर इंडिया चार्टर्स लिमिटेड, हिन्दुस्तान फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लिमिटेड तथा आईटीआई लिमिटेड शामिल हैं। दिए गए अवधि के दौरान घाटा दिखाने वाली सभी 62 सीपीएसई में शीर्ष 10 कंपनियों के घाटे का हिस्सा 92.55 प्रतिशत है। वर्ष    2010-11 में शीर्ष तीन सीपीएसई में अकेले एयर इंडिया लिमिटेड, बीएसएनएल तथा एमटीएनएल का घाटा सभी सीपीएसई के घाटे के 74 प्रतिशत के बराबर है। कीमतों की लड़ाई और नये कंपनियों के आने से बढ़ती प्रतिस्पर्धाएं, वेतन एवं पारिश्रमिक में वृद्धि तथा संचालन लागत वृद्धि के साथ-साथ ब्याज लागत में हुई वृद्धि इस अवधि के दौरान घाटे के कारण रहे। वर्ष 2009-10 की तुलना में वर्ष 2010-11 के दौरान जहां एयर इंडिया एवं एमटीएनएल का घाटा बढ़कर क्रमश: 24 प्रतिशत एवं 54 प्रतिशत रहा, वहीं बीएसएनएल का घाटा बढ़कर 145 प्रतिशत हो गया।

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान
सीपीएसई का सकल मूल्यवर्धन
       सकल घरेलू उत्पाद (मौजूदा बाजार मूल्य पर) में सीपीएसई का सकल मूल्यवर्धन (निवल मूल्यवर्धन + अवमूल्यन) हिस्सेदारी वर्ष 2009-10 के 6.44 प्रतिशत की तुलना में 2010-11 के दौरान 5.96 प्रतिशत रहा। हालांकि तेल विपणन कंपनियों का घाटा          (जिसमें 2010-11 का घाटा 37,190 करोड़ रूपया तथा 2009-10 में 29,951 करोड़ रुपये का घाटा शामिल है) को जोड़ते हुए जीडीपी में सभी सीपीएसई की हिस्सेदारी वर्ष 2009-10 के 6.75 प्रतिशत की तुलना में यह 6.45 प्रतिशत रहा।

निवल मूल्यवर्धन घटक
       वर्ष 2010-11 में सीपीएसई द्वारा अर्जित निवल मूल्यवर्धन (अवमूल्यन को छोड़कर लाभ का हिस्सा (पीबीटीईपी) सबसे ज्यादा 31.75 प्रतिशत रहा जबकि अप्रत्यक्ष कर एवं शुल्क 30.84 प्रतिशत, वेतन एवं पारिश्रमिक 23.20 प्रतिशत तथा ब्याज भुगतान 9.41 प्रतिशत रहा। वर्ष 2009-10 तथा 2010-11 की अवधि के दौरान इन घटकों में प्रत्येक की हिस्सेदारी में बहुत मामूली परिवर्तन देखे गए।
 केन्द्रीय राजकोष में योगदान
       सीपीएसई लाभांश अदायगी, सरकारी ऋण पर ब्याज और कर तथा शुल्क की अदायगी के जरिए केन्द्रीय राजस्व में अपना योगदान देते हैं। हालांकि 2010-11 की अवधि के दौरान केन्द्रीय राजस्व में सीपीएसई के कुल योगदान में अच्छी वृद्धि देखी गई। इस दौरान सीपीएसई का कुल योगदान 2009-10 के 1,39,918 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2010-11 में 1,56,124 करोड़ रुपये रहा। यह वृद्धि मुख्य रूप से कस्टम शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में दिए गए योगदान में हुई वृद्धि के कारण देखी गई, जो वर्ष2009-10 में क्रमश: 6,896 करोड़ रुपये तथा 52,627 करोड़ रुपये से बढ़कर क्रमश: 2010-11 में 14,151 करोड़ रुपये तथा 62,713 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कार्पोरेट टैक्स के योगदान में भी अच्छी वृद्धि देखी गई जो 2009-10 के 38,134 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2010-11 में 43,369 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि दिए गए अवधि के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में अन्य शुल्क एवं कर तथा बिक्री कर एवं लाभांश कर में गिरावट आई। (पसूका विशेष लेख  (पीआईबी)  03-अप्रैल-2012 14:43 IST     )*** 
*साभार  भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय

Monday, April 02, 2012

संशोधित रेल किराए 01 अप्रैल से लागू

रेल में महंगी यात्रा हुई और महंगी
ट्रेन की एसी-प्रथम श्रेणी, एसी-2टियर, एक्‍जीक्‍यूटिव क्‍लास और प्रथम श्रेणी में यात्रा के लिए के संशोधित किराए 01 अप्रैल, 2012 से लागू हो गए हैं। अन्‍य श्रेणियों में यात्रा किराए में कोई संशोधन नहीं किया गया है। ऊपर दी गई श्रेणियों में संशोधित किराया भारतीय रेलवे की सभी प्रकार की ट्रेनों पर लागू होगा। 
संशोधित किराया उन टिकटों पर भी लागू होगा जो 01 अप्रैल, 2012 के बाद यात्रा करने के लिए पहले ही जारी किए जा चुके हैं। यदि टिकट किराए में संशोधन से पहले वाली दरों पर जारी किया गया है तो इसके अंतर को यात्रियों से ट्रेन में टीटीई या बुकिंग आफिस यात्रा से पहले वसूलेगा। जनता की सूचना के लिए टिकट की संशोधित दरें स्‍टेशन पर लगा दी गयी हैं और रेलवे कर्मचारियों को उपलब्‍ध कराई गई हैं। यात्री किराए की संशोधित दरों की समय सारणी रेल मंत्रालय की वेबसाइट Indianrailways.gov.in पर भी देखी जा सकती है। (पीआईबी) 02-अप्रैल-2012 12:17 IST

Sunday, April 01, 2012

मां गंगा को बचाने के लिए छापामार युद्ध की भी तैयारी

अमर शहीद निगमानन्द के गुरभाई स्वामी आनंद स्वरूप की घोषणा 
मां गंगा की सेवा भावना का उमड़ता सैलाब आज लुधियाना में भी दिखा. धुरी लाईन के नजदीक ही हुए एक छोटे से आयोजन में पहुंचे लोग गंगा मां के लिए सब कुछ न्योछावर करने को तैयार नजर आये. गंगा सेवा मिशन के अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप  ने अपने विशेष पंजाब दौरे के दौरान गंगा मां के खिलाफ हो रही साजिशों का भी भंडाफोड़ किया और साथ ही अपना संघर्ष तेज़ करने का संकल्प भी दोहराया. गौरतलब है कि स्वामी अनद स्वरूप उसी अमर शहीद स्वामी निगमानन्द के गुर भाई हैं जो गंगा मिशन के लिए अपनी जान की आहूति दे गए. 
         वर्ष 1998 में शुरू हुआ गंगा सेवा मिशन इस समय देश के 18 राज्यों में सक्रिय है. विदेश में भी इस दिशा में बहुत काम हो रहा है. रामनवमी के पावन अवसर पर पंजाब में भी इस की शुरूयात कर दी गयी. इस घोषणा से पूर्व स्वामी आनंद स्वरूप लगातार साधना और समाधी में लीं रहे. इस ऐतिहासिक उद्घोषणा के अवसर पर मिशन के कई वरिष्ठ सदस्य भी मौजूद थे और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े बहुत से अन्य लोग भी.  इस मिशन की पंजाब शाखा शुरू करने का ऐलान होते ही एक नए उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा माहौल मां गंगा की जय के नारों से गूँज उठा. पंजाब शाखा को शुरू करने औपचारिक घोषणा के लिए सूरज छाबड़ा को अध्यक्ष और आरती ठाकुर को महामंत्री नियुक्त किया गया. पार्षद सरबजीत सिंह काका और कई अन्य लोगों ने इस कार्य की सफलता के लिए हर संभव सहयोग का वचन दिया.
       बैठक के पश्चात मीडिया से बात करते हुए स्वामी आनंद स्वरूप ने सनसनी खेज़ खुलासा किया कि मां गंगा को बाँध में बाँधने की कम से कम 17 परियोजनाएं केवल इस लोयर रुकी हुयी हैं क्यूंकि गंगा सेवा मिशन से जुड़े लोग गंगा को बचाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं.उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मकसद के लिए छापामार युद्ध की पूरी तैयारी की जा चुकी है. गंगा सेवा मिशन की अलख जगाते हुए स्वामी आनंद स्वरूप ने पंजाबियों को झंक्झौरा और एक बार फिर याद दिलाया कि जैसे उन्होंने कभी मां भारती को दासता के बन्धनों से मुक्त कराया था उसी तरह अब मां गंगा को भी बांधों के जाल से मुक्त कराने के लिए आगे आयें. उन्होंने श्री गुरू गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों का भी उल्लेख क्या. साम्प्रदायिक झगड़ों पर पूछी गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा की सिख भी हमारे भाई हैं और मुसलमान भी. केवल सत्ता में बैठे लोग ही हमें लडवाने की चालें चलते हैं.
स्वामी आनंद स्वरूप ने बताया की उन पर फिदायीन हमला भी हो चूका है पर भगवान् ने उन्हें बचा लिया. -कल्याणी सिंह और रेक्टर कथूरिया सहयोग: आरती ठाकुर