Sunday, September 27, 2015

फसल को ऊपर से कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं होती

ब्रह्मकुमारियों ने बताये PAU में योगिक कृषि के आध्यात्मिक रहस्य 
लुधियाना: 27 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
विज्ञानं के विकास का सच अपनी जगह पर होगा लेकिन लगता है कि परा विज्ञानं या फिर आध्यात्मिक विज्ञान आज भी आगे है। बात किसी धर्म स्थल की होती तो शायद अलग बात थी लेकिन कृषि विज्ञानं के जाने माने संस्थान पीएयू में लगा एक ऐसा स्टाल जिसने इस विज्ञानं के लिए बहुत सी नयी बातें व्यक्त की। आयोजन था किसान मेले का और स्टाल था ब्रह्मकुमारीज़ का। गौरतलब है कि  ब्रह्मकुमारीज़ विश्वविद्यालय दुनिया भर में प्रसिद्ध है।   
इस स्टाल पर बताया गया कि रसायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग ने न केवल धरती मान की शक्ति को क्षीण किया है बल्कि भूमि से पैदा होनव वाले अन्न की शक्ति को भी घटा दिया है।  अब इस अन्न को खा कर कैंसर, डायवटीज़ और रक्तचाप जैसी बीमारियां भी गंभीर रूप धारण कर चुकी हैं। लगातार बढ़ रहे अस्पतालों और डाक्टरों के बावजूद आज का मानव सुरक्षित नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों के हवाले से बताया गया है कि फसल को जो जो संसाधन या तत्व चाहिएं वे फसल की जड़ों के आसपास ही होते हैं। फसल भूमि से तो केवल 1.5  से 2 ही लेती है बाकी 98 से लेकर 98.5 फीसदी वह बाहर हवा और पानी से ही लेती है। फसल को ऊपर से कुछ भी देने की आवश्यकता नहीं क्यूंकि भूमि खुद ही अन्नपूर्णा है। किसान मेले के दौरान PAU के वैज्ञानिकों ने इस सरे प्रचार पर कोई किन्तु परन्तु नहीं किया।  ज़ाहिर है कि PAU का विज्ञानं इस आश्य को स्वीकार करता है कि फसल को ऊपर से कुछ भी देने की ज़रूरत नहीं है। अब सही कौन है इसका फैसला तो  हाथ पर लेकिन आप ब्रह्मकुमारीज़ का पूरा आलेख यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं। आप इस सारे मामले पर क्या सोचते हैं इस पर आपकी राये की इंतज़ार बनी रहेगी। कृपया अपने विचार भेजना न भूलें। 

हेल्पिंग हैंडज़ क्लब ने बताये छात्रों को स्ट्रेस फ्री रहने के गुर

Sat, Sep 26, 2015 at 9:01 PM
NSS से विकसित होती है समाज सेवा की भावना–रमण गोयल
लुधियाना: 25 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आज एन.एस.एस. दिवस के अवसर पर पी.ऐ.यू. स्थित पाल ऑडीटारीयम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में PAU के कालेजों के 500 के करीब एन.एस.एस. वालंटियर्स ने भाग लिया।  इस कार्य्रम की शुरुआत एन.एस.एस. के प्रोफसरों  द्वारा की गयी, जिन्होंने पहले एन.एस.एस. दिवस के बारे में विस्तृत जानकारी दी, और वालंटियर्स को हमेशा समाज सेवा के कार्यों में आगे बढ़ते रहने की प्रेरना दी। उसके बाद हेल्पिंग हेंड्स क्लब के अध्यक्ष रमण गोयल ने वालंटियर्स को पहले एन.जी.ओ के कार्यों के बारे में बताया और उसके पश्चात उन्होंने बच्चों को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर उसको प्राप्त करने के बारे में जागरूक किया। इसके साथ ही बताया कि आज के युग में बच्चों के अन्दर सहनशक्ति का अभाव है जो किसी भी समस्या का सामना करने की बजाय उनसे भाग कर आत्महत्या जैसे कायरता भरे कार्यों को चुनते हैं जिस प्रकार अकादमी में कम अंक आने पर कई आत्म हत्याए हो रहीं हैं। इसलिए इस मानसिक दबाव को कैसे नियंत्रित किया जाये उसके बारे में भी बताया। उसके पश्चात एन.एस.एस. के प्रोग्राम कार्डीनेटर डॉ. हरमीत सिंह ने बताया कि संस्था के कार्य सरहनीय हैं और हेल्पिंग हेंड्स क्लब एन.जी.ओ. द्वारा विधार्थियों को दिए गये स्ट्रेस फ्री रहने के टिप्स से बच्चों में उत्साह बढेगा जिससे वो अपनी शिक्षा और लक्षय पर ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे | इस अवसर पर पी.ऐ.यु. के प्रोफेसर डॉ. हरपिंदर कौर, डॉ. रेणुका अग्रवाल, डॉ. अंजलि सिधु , डॉ. रमन देवी, डॉ. मंदीप सिंह गिल, आसीष कुमार,  संस्था के गगन अरोड़ा, वरुण जैन, अमन मल्होत्रा, कमल कुमार आदि कई गणमान्य उपस्थित थे। 

Friday, September 25, 2015

बीजेपी ने आसान बैंक क़र्ज़ की घोषणा से दी अच्छे दिनों की दस्तक

पत्रकार भी ले सकेंगे आवश्यकता के अंसार लोन 
लुधियाना: 25 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
आखिर तीखे विरोध और आलोचनायों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अच्छे दिनों की दस्तक देनी शुरू कर दी है। अपंजा हाथ जगन्नाथ की कहावत का महत्व समझते हुए आम कामगार तबके के लोगों की आर्थिक रीढ़ मज़बूत करने की ठानी है। अब उन्हें राष्ट्रिय बैंकों से अपना काम काज चलाने के लिए बिना किसी झंझट के आसान क़र्ज़ मिल सकेगा। 

भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए 2 अक्तूबर तक ‘लोन मेला’ सप्ताह मनाएगी। इस दौरान भाजपा के कार्यकत्र्ता गरीब व जरूरतमंद लोगों से मिलकर उन्हें बैंकों से लोन दिलाने का काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना के पंजाब सह-प्रभारी व जिला प्रधान प्रवीण बांसल ने उक्त जानकारी यहां सर्कट हाऊस में पत्रकार सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन प्रकार के लोन देने का प्रावधान है, जिनमें शिशु लोन 50 हजार रुपए, किशोर लोन, 5 लाख तथा तरुण लोन की सीमा 10 लाख रुपए है, जोकि गरीब, मध्यम व वर्ग के लोगों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि इस लोन के लिए आवेदनकत्र्ता को किसी प्रकार की गारंटी या जमानत नहीं देनी पड़ेगी केवल सरकार द्वारा जारी फार्म, अपना रिहायशी, आई.डी. प्रूफ व दो फोटो बैंक में देनी होगी और आपका लोन मंजूर हो जाएगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि कोई बैंक अधिकारी लोन देने में आनाकानी करता है तो उसकी जानकारी भाजपा के इस योजना से जुड़े कार्यकत्र्ताओं को दी जाए ताकि उस अधिकारी के विरुद्ध सीनियर अधिकारियों को बताकर कार्रवाई की जा सके। इस अवसर पर योजना के जिला प्रभारी इंद्र अग्रवाल, प्रदेश सचिव जीवन गुप्ता, सुनील मोदगिल व मीडिया प्रभारी संजीव मल्होत्र भी मौजूद थे।

Thursday, September 24, 2015

आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए-मोदी

23-सितम्बर-2015 22:02 IST
डबलिन में भारतीय समुदाय स्वागत समारोह में प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
आज पूरे विश्‍व में भारत के विकास की चर्चा हो रही है
आयरलैंड में बसे सभी भारतीयों को नमस्‍कार,  
मुझे सबसे पहले तो आप सबकी क्षमा मांगनी है, क्षमा इसलिए मांगनी है कि मुझे आपको ज्‍यादा time देना चाहिए था। बहुत लोगों की शिकायत है कि हमें आने के लिए admission नहीं मिला, प्रवेश नहीं मिला। अच्‍छा होता मैं जरा ज्‍यादा समय लेकर आया होता, तो यहां बसे हुए भारतीयों को बहुत बड़ी संख्‍या में मिल पाता। लेकिन मैं इतना कहूंगा कि यह शुभ शुरूआत है। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, शायद बहुत कम ऐसे होंगे, जिनको यह याद होगा कि कभी भारत के प्रधानमंत्री यहां आएं थे। क्‍योंकि मुझे बताया गया कि करीब 60 साल के बाद भारत के कोई प्रधानमंत्री यहां आए हैं। वैसे दिल्‍ली से न्‍यूयॉर्क तो हर बार जाना पड़ता है और आकाश में तो यहीं से गुजरते हैं। तो आप लोगों के प्‍यार ने मुझे खींच लिया, तो ऊपर से मैं नीचे आ गया। 
आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए
आज मेरी यहां के प्रधानमंत्री के साथ बड़ी विस्‍तार से बातें हुई है। अब बहुत समय कम था, लेकिन meeting बहुत बढि़या रही, इतने विषयों पर चर्चा हुई है। कितनी बातों पर सहमति का माहौल है। मैं समझता हूं कि आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए। अनेक विषयों के साथ जुड़े हुए होने चाहिए। और 2016 में आयरलैंड अपनी आजादी की शताब्‍दी मना रहा है, आजादी के संघर्ष की शताब्‍दी मना रहा है। भारत भी उसी समय आजादी का संघर्ष कर रहा था और एक प्रकार से भारत भी आजादी की लड़ाई लड़ता था, आयरलैंड भी आजादी की लड़ाई लड़ता था और सच में यह हमारी सांझी विरासत है। हम सोच रहे है कि यह 2016 का, आयरलैंड का आजादी का जो संग्राम है, इस शताब्‍दी में भारत भी भागीदार बने, भारत भी आयरलैंड हो। 
मानवता से जुड़ी हुई इन बातों में अपनी एक ताकत है
आयरलैंड और भारत की जो विशेषताएं हैं कुछ मूल्‍य बहुत किसी न किसी कारण से, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जैसे भारत में सत्‍य के लिए जीना-मरना। यह सदियों से हम सुनते आए हैं। एक आदर्श के लिए, विचार के लिए बलि चढ़ जाना। खुद को कष्‍ट देते हुए जीवन को समाप्‍त कर देना। यह हम सदियों से सुनते आए हैं, लेकिन कहते हैं 1920 में आयरलैंड में Hunger Strike हुआ और यहां के नागरिक ने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। यानि values हमारे कितने मिलते-जुलते होंगे, इसका अंदाजा लगा सकते हो आप। मानवता से जुड़ी हुई इन बातों में अपनी एक ताकत है। और हमारी कोशिश यही है उन्‍हीं चीजों को हम बल दे। 
....Secularism पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता
अब Irish बच्‍चे संस्‍कृत में मंत्रोच्‍चार कर रहे हैं, स्‍वागत गान गा रहे हैं। और वे रटे-रटाए शब्‍द बोल रहे थे, ऐसा मुझे नहीं लगा। किस शब्‍द में उनका क्‍या भाव था, वो भी अभिव्‍यक्‍त हो रहा था, मतलब उन्होंने इस बात को internalise कर लिया था। उनके जो भी शिक्षक इस काम को करते होंगे, मैं उनको बधाई देता हूं। लेकिन ये खुशी की बात है आयरलैंड में तो हम ये कर सकते हैं, लेकिन हिंदुस्तान में कुछ ऐसा करते तो पता नहीं, secularism पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता। 
भारत की मूल बातें विश्‍व स्‍वीकार करने लगा है
लेकिन इन दिनों बदलाव आ रहा है। आप देखिए योग, दुनिया उसको योगा कहती है। सारी दुनिया नाक पकड़ने लग गई है। विश्व के सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस मनाया। भारत के ये हजारों साल पुराना विज्ञान, आज holistic health care के लिए, preventive health care के लिए, एक बहुत बड़ी स्वीकार्य, स्वीकृत पद्धति के रूप में पूरे विश्व में फैल चुका है। और पहले हमारे यहां कल्पना क्या थी, अगर illness नहीं है, तो आप स्वस्थ हैं, अब ये विचार भारतीय चिंतन का नहीं है। illness नहीं, मतलब स्‍वस्‍थ! ये हमारी सोच नहीं है। हम उससे दो कदम आगे wellness की चर्चा करते हैं। हमारी कल्‍पना wellness थी और यही योगा उस wellness से जुड़ा हुआ है। सिर्फ रोग से मुक्‍त है, इसलिए आप स्‍वस्‍थ है ऐसा नहीं है। तो भारत की मूल बातें विश्‍व स्‍वीकार करने लगा है, लेकिन दुनिया तब स्‍वीकारती है जब भारत में दम हो। अगर भारत में दम नहीं हो, तो दुनिया क्‍यों पूछेगी भाई। 
‘एशिया की सदी’यार हो सकता है हिंदुस्‍तान की हो जाए
आज पूरे विश्‍व में भारत के विकास की चर्चा हो रही है। 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, यह सारी दुनिया ने मान लिया है। लेकिन 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, फिर धीरे-धीरे देखते हैं, तो उनको लगता है यार हो सकता है हिंदुस्‍तान की हो जाए। यह दुनिया मानने लगी। 
भारत दुनिया के बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy
एक BRICS concept आया 1980s में Brazil, Russia, India, South Africa, China, BRICS शब्‍द popular होगा। लेकिन कुछ वर्ष पहले कि B, R,C, S इनकी तो गाड़ी पटरी पर है। आई (I) जो है वो लुढ़क गया है। ऐसी चर्चा थी और लोग यहां तक कहते थे, शायद I (आई) इंडिया की जगह, I (आई) इंडोनेशिया ले लेगा। यह चर्चा थी। आज World Bank हो IMF हो Credit Rating Agencies हों, सब कह रहे हैं कि BRICS में अगर कोई ताकत वाला है, तो I (आई) है। सारी दुनिया की rating agencies कह रही है कि भारत दुनिया के बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है, सबसे तेज, पूरी दुनिया में। 
30 साल में हिंदुस्‍तान में गरीबी का नामो-निशान नहीं रहेगा
अगर यह सिलसिला और आगे बढ़ा और ज्‍यादा नहीं 30 साल, 30 साल अगर हम इस ऊँचाई पर चलते रहे, तो हिंदुस्‍तान में गरीबी का नामो-निशान नहीं रहेगा। नौजवान को रोजगार मिलेगा, लेकिन 30 साल तक इस गति को बनाए रखना यह बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन यह चुनौती हम पार कर पाएंगे, क्‍योंकि हम एक ऐसी ताकत के कालखंड में हैं, जिसकी हमने कभी कल्‍पना तक नहीं की है। और वो है 65 प्रतिशत जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की, 35 साल से कम उम्र की है। भारत नौजवान है, भारत नौजवानों का है और भारत नौजवानों की ताकत पर बनने वाला है। यह जो सामर्थ्य मिला है, यह next 30 years का सपना पूरा कर सकता है। 
अब किसी भारतीय को सर झुकाने के दिन नहीं हैं
देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है। सभी क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ाने के लिए सफल बनाने के प्रयास हो रहे हैं। और विश्‍वभर में फैले हुए भारतीय जन भी आज सीना तान करके, आँख में आँख मिला करके दुनिया के साथ भारत की बात करने लगे हैं। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है। अब किसी भारतीय को सर झुकाने के दिन नहीं हैं, सीना तानकर के खड़े रहने का दिन है। और यही बड़ी ताकत होती है, यही बड़ी ताकत होती है। 
भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में अब 60 साल नहीं लगेंगे
मैं आप सबको मुझे मिलने का मुझे अवसर मिला, मैं आपका बहुत ही, और इस समय में भी क्योंकि मेरा कार्यक्रम बहुत कम समय में बना। इतनी बड़ी संख्या में आप लोग आए और मुझे आपके Ambassador कह रहे थे कि, इतनी मारामारी चल रही है कि हम किस को रोके, किसको लाएं, ज्यादा समय मिला होता तो अच्छा होता, लेकिन फिर भी मैंने पहले कहा है ऐसे कि ये एक शुभ शुरुआत है, ये रिश्ता और...और नाता जुड़ता रहेगा और भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में अब 60 साल नहीं लगेंगे, ये मैं विश्वास दिलाता हूं आपको। 
बहुत-बहुत धन्यवाद। 

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अतुल कुमार तिवारी/अमित कुमार/मुस्तकीम खान/तारा

Monday, September 21, 2015

समाज की सोच में बदलाव महिला सुरक्षा के लिए महत्‍वपूर्ण--किरेन रिजिजू

21-सितम्बर-2015 19:17 IST

महिलाओं के विरूद्ध अपराध की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि
गृह राज्‍य मंत्री ने दक्षिण एशियाई महिला शांति और सुरक्षा सम्‍मेलन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली: 21 सितम्बर 2015: (पीआईबी):
केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा में सुधार लाने के लिए समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। दक्षिण एशियाई महिला शांति और सुरक्षा सम्‍मेलन में आज यहां भारत, बांग्‍लादेश, नेपाल, फिलीपिन्‍स और म्‍यामार से आये प्रतिनिधियों को सम्‍बोधित करते हुए श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस त्रासदी को दूर करने में केवल सरकार, न्‍यायपालिका और पुलिस के प्रयास ही काफी नहीं होंगे। देश में महिला-पुरूष आधारित भेदभाव और असमानता काफी गंभीर समस्‍या है। उन्‍होंने कहा कि मैं कल्‍पना भी नहीं कर सकता कि 21वीं सदी में भी महिलाओं को ऐसी यातनायें दी जा रही हैं। 

हाल के वर्षों में महिलाओं के विरूद्ध अपराध की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि होने के बारे में चर्चा करते हुए श्री रिजिजू ने कहा कि कानूनी प्रावधानों को सख्‍त बनाये जाने के कारण ऐसी घटनायें अधिक संख्‍या में दर्ज की जा रही हैं और केवल ऐसे अपराधों का पंजीकरण अनिवार्य कर देना ही मददगार नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि मुख्‍य बात यह है कि ऐसी घटनायें हो रही है और धरातल पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के विरूद्ध अपराध होना गहरी सामाजिक समस्‍या का परिणाम है और ऐसा देश प्रगति का दावा नहीं कर सकता, जहां समाज में महिलायें सुरक्षित न हों। यह कोई पुरूष अथवा महिला का प्रश्‍न नहीं है, बल्कि यह एक मानवता का विषय है। उन्‍होंने कहा कि इस समस्‍या के समाधान के लिए समुदाय, परिवार के सदस्‍यों को संवेदनशील बनाने की आवश्‍यकता है और इस समस्‍या का समाधान हम में से प्रत्‍येक के भीतर है। 

इस बात की चर्चा करते हुए कि भारत महिलाओं की समानता पर आधारित विभिन्‍न क्षेत्रीय और वैश्विक संधियों का हस्‍ताक्षरकर्ता है, श्री रिजिजू ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और समानता के मुद्दे पर भारत के पास जिस प्रकार के अस्‍पष्‍ट और सशक्‍त वैधानिक प्रावधान हैं, उतना अन्‍य किसी देश के पास नहीं हैं। भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई वैधानिक प्रावधान तो हैं, किन्‍तु समाज की सोच में यह समस्‍या ग्रसित है। उन्‍होंने कहा कि हमें एक साथ आकर सामूहिक तौर पर इस समस्‍या का समाधान ढूंढ़ना है। 

अपने भाषण के अंत में श्री रिजिजू ने कहा कि इन मुद्दों पर एकजुटता दर्शाने के लिए मैं यहां आया हूं। कृपया मुझे अपने आंदोलन का हिस्‍सा मानें। इन देशों में महिलाओं के लिए महिलाओं के लिए शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए। 

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एसकेएस/जीआरएस-4628

Saturday, September 19, 2015

ये कार्यक्रम पूरे हिंदुस्तान के लिए हो रहा है--प्रधानमंत्री

18-सितम्बर-2015 23:45 IST
वाराणसी में विभिन्न विकास योजनायों के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
विशाल संख्‍या में पधारे मेरे बनारस के प्‍यारे भाइयों और बहनों, 
ये कार्यक्रम तो बनारस की धरती पर हो रहा है लेकिन ये कार्यक्रम पूरे हिंदुस्तान के लिए हो रहा है। ये बनारस की धरती है, जिसने सदियों से मानव जाति को ज्ञान का प्रकाश दिया और ज्ञान का प्रकाश देने वाली ये नगरी ऊर्जा वाला प्रकाश भी देने का नेतृत्‍व करने जा रही है और इसलिए मैं देशवासियों को बधाई देता हूं, बनारस वासियों को विशेष बधाई देता हूं। 

वैसे तो ये समारोह एक है लेकिन इस एक समारोह में सात कार्यक्रम लगे हैं, सात। एक तो आपने अभी-अभी video देखा कि बिजली के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए पूरे देश में हम क्‍या करने जा रहे हैं। दूसरा, वाराणसी में एक कठिनाई लम्‍बे अर्से से चली है, वाराणसी वासियों की एक मांग अनेक वर्षों से रही है और वो है वाराणसी के रिंग रोड की मांग। आज इस मंच से उस रिंग रोड के कार्यक्रम का भी शिलान्‍यास हो रहा है। काशी तीर्थयात्रियों का धाम है, विश्‍व के टूरिस्‍टों का भी आकर्षण है, लेकिन एयरपोर्ट से काशी पहुंचने तक आने वाले यात्री के मन में से विश्‍वास उठा जाता है के मैं सही जगह पर जा रहा हूं कहीं और जा रहा हूं और उसका मूल कारण काशी से बाबतपुर हवाई अड्डे तक का जो मार्ग है उसकी दुर्दशा। आज यहां से उस काम का भी शिलान्‍यास हो रहा है कि जिसमें उस रास्‍ते को चौड़ा किया जाएगा, आधुनिक बनाया जाएगा, सौंदर्यीकरण किया जाएगा ताकि काशी पहुंचने वाला विश्‍व का या देश का कोई भी यात्री आते ही अनुमान करेगा कि मैं किस भव्‍य और पुरातन नगरी में प्रवेश कर रहा हूं उसका उसको अनुमान हो जाएगा। 

आज ये जो देशभर के लिए IPDS योजना का प्रारंभ हुआ उस IPDS योजना को लागू करने के लिए बनारस में दो नए Substation…Chowk Substation का शिलान्‍यास भी आज इस मंच से हो रहा है और योजना को लागू करने का काम आज आरंभ हो रहा है। एक Chowk Substation, दूसरा Kazzakpura Substation, ये दो Substations का भी शिलान्‍यास आज इसी मंच से हो रहा है। बनारस में आरोग्य की सुविधा में एक नया नजराना...कुछ समय से जो Trauma Centre चालू हुआ है, यहां के नागरिकों को उसकी सेवाएं उपलब्‍ध हैं, आज उसका लोकार्पण भी यहां हो रहा है। उसी प्रकार से गंगा घाट पर ही बसा हुआ हमारा रामनगर, धीरे-धीरे उसकी आबादी बढ़ रही है, उस तरफ के नागरिकों के लिए सुविधा की आवश्‍यकता रहती थी कि रेलवे रिजर्वेशन के लिए उनको यहां तक आना पड़ता था अगर उसकी व्‍यवस्‍था वहां हो जाए तो आज रामनगर कस्‍बे में VSAT के माध्‍यम से रेलवे रिजर्वेशन सुविधा का भी आरंभ करने का यहां पर एक समारोह हो रहा है। एक प्रकार से इस एक मंच पर से देश के लिए एक योजना और काशीवासियों के लिए उस योजना के समेत कुल सात योजनाओं का लोकार्पण करते हुए मुझे गर्व हो रहा है। 

मैं काशी बहुत बार आता था। पार्टी कार्यकर्ता के नाते संगठन का काम करने के लिए आता था, इस धरती का एक आकर्षण था उसके लिए भी आता था, लेकिन हर बार ऊपर की तरफ नजर करता था तो मैं चौंक जाता था। जहां भी देखो तार ही तार लगे रहते थे। इतने पुरातन शहर की शोभा उन तार के झुंड को देखते ही खराब हो जाती थी। तो जब मैं सांसद चुना गया और एक नागरिक अभिवादन था उसमें मैंने कहा था भाई इसको तो हटाना है। और आज मुझे खुशी है कि 572 करोड़ रुपया पूरे काशी में एक नई ऊर्जा भर देगा। कभी-कभी बिजली बंद हो जाना, तार पुराने हो जाना, Transmission लाइनें खराब हो जाना, बाबा आदम के जमाने की चीजें लटकी पड़ी हुई हैं किसी को ठीक करने के लिए फुरसत नहीं है, गाड़ी चलती रहती है, ये खराब हुआ चलिए ठीक कर लो, उधर खराब हुआ, ठीक कर लो, pachwork का काम चलता रहा है। और ये मुसीबत सिर्फ बनारस की नहीं है। हिंदुस्‍तान के कई शहर हैं और जिसके कारण बिजली का line loss भी बहुत होता है, नागरिकों को परेशानी भी बहुत होती है, और इसलिए बिजली को पहुंचाने वाला जो पूरा Infrastructure है उसको आधुनिक बनाने की आवश्‍यकता है, Smart बनाने की आवश्‍यकता है। और एक प्रकार से बनारस को जो Smart City बनाने की कल्‍पना है उसकी पहली शुरूआत ये बिजली के माध्‍यम से हो रही है। और ये बनारस, आज जो पसंद किया गया है, पूरे देश की योजना को लागू करने के लिए, लोगों को लगता होगा कि प्रधानमंत्री यहां से MP है इसलिए हो रहा है। मैं रहस्‍य बता देता हूं। ये कारण तो बाद में आता है। पहला कारण ये है कि हमारे जो ऊर्जा मंत्री हैं पीयूष गोयल जी, उनके पिताजी बनारस में इंजीनियर हुए, BHU में। वो यहीं पढ़ते थे और यहीं से इंजीनियर बने थे और यहीं से समाज सेवा के लिए भी निकले थे, तो स्‍वाभाविक रीत है पीयूष जी को लगा होगा कि जो आपके पिताजी की शिक्षा-दीक्षा भूमि रही है वहीं से इस कार्यक्रम को आरंभ किया जाए, ताकि पिताजी को भी संतोष होगा और इसलिए आज बनारस से पूरे देश को ये नजराना मिल रहा है। पूरे देश में इस योजना के पीछे 45 हजार करोड़ रुपया लगने वाला है और उसके कारण ऊर्जा के क्षेत्र में जो धांधलियां चल रही हैं, जो परेशानियां चल रही हैं उनसे शहरी क्षेत्र को बहुत बड़ी मुक्‍ति मिलने वाली है। काम बड़ा है, काम कठिन है, लेकिन इसको किए बिना कोई चारा भी नहीं है और इसलिए क्‍योंकि हमारा एक सपना है कि 2022, जब देश आजादी के 75 साल मनाएगा। जब आजादी के 75 साल हम मनाएंगे तब जिन्‍होंने हमें आजादी दी, जो आजादी के लिए फांसी के तख्‍त पर चढ़ गए, जिन्‍होंने आजादी के लिए जवानी जेलों में खपा दी, जिन्‍होंने आजादी के लिए अपने शरीर पर ब्रिटिश सल्‍तनत के कोड़े झेले उनको हम जवाब क्‍या देंगे। यही देंगे कि आपने हमें आजादी दी, हमने मौज की। लेकिन जो सपना आपने देखा था वो तो हमने पूरा नहीं किया, ये बात तो हमें मंजूर नहीं हो सकती। क्‍या किसी हिन्‍दुस्‍तानी को ये बात मंजूर हो सकती है? क्‍या आजादी देने वाले को उनके सपनों के अनुकूल देश बनाके देना चाहिए कि नहीं देना चाहिए। आजादी के 75 साल जब मनाए, तब देशवासियों का योगदान होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? देश में बदलाव होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? एक अच्‍छा हिन्‍दुस्‍तान, देशभक्‍तों के सपनों का हिन्‍दुस्‍तान पूरा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? उसमें एक महत्‍वपूर्ण काम है 24 घंटे, 365 दिन बिजली। आज बिजली चार घंटे, छ घंटे, आठ घंटे मिलती है। हमारा सपना है गांव हो, जंगलों का इलाका हो, दूर-सुदूर एक झोपड़ी हो, 2022 जब आजादी के 75 साल हो तब गरीब से गरीब के घर में भी 24 घंटे बिजली मिलती हो, ऐसी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और इसके लिए एक महत्‍वपूर्ण काम उसके infrastructure का जिसमें आज 45 हजार करोड़ रुपया और अकेले काशी के लिए 572 करोड़ रुपया लगाकर के ये बदलाव का आज प्रारंभ हो रहा है। 

मुझे आप सब के आशीर्वाद चाहिए। बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद चाहिए ताकि, ताकि देश में ये ऊर्जा पहुंचाने का काम, देश को ऊर्जावान बनाने के लिए एक बहुत बड़ी नींव का पत्‍थर बना रहे, उस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं। बनारस बढ़ता चला गया। अगल-बगल के जिलों से जो भी यातायात है, शहर के बीच से गुजरना पड़ता है। शहर के ट्रेफिक के मामले भी बड़े गंभीर है। परेशानियों का तो हिसाब लगाओ तो बढ़ती ही जाती है। उससे मुक्‍ति दिलाने के लिए एक महत्‍वपूर्ण काम था यहां रिंग रोड बनना चाहिए ताकि बाहर से जिसको गुजरना है शहर को disturb किए बिना वो काम चलता रहे। बहुत बड़ा काम है, करीब 600 करोड़ रुपयों का काम है। आज उसका भी शिलान्‍यास हुआ है और इस इलाके में काशी के साथ अगल-बगल के जितने जिले हैं उन जिलों को जोड़ने वाले रास्‍ते भी बनाने हैं ताकि उन सभी गांवों का लाभ हो। करीब-करीब 11 हजार करोड़ रुपया उसके लिए आबंटित करने का निर्णय किया गया है। आने वाले दिनों में अड़ोस-पड़ोस के जितने जिले हैं, काशी के साथ जुड़े हुए और तब जाकर के पूरा इलाका एक आर्थिक विकास का growth centre बन सकता है। एक बहुत बड़ा केन्‍द्र बन सकता है और इसलिए बिजली, पानी, सड़क ये तीन क्षेत्रों में हम इस प्रकार का यहां पर जाल बिछाएं ताकि जो पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के विकास के सामने सवालिया निशान होते हैं उससे हम मुक्‍ति दिला सके। उन बातों को बनारस की धरती से भले शुरू होते हो, लेकिन पूरे उत्‍तर प्रदेश में, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में खास इस जाल को फैलाने की दिशा में हमने काम को आरंभ किया है और आने वाले दिनों में देखते ही देखते उसके नतीजे दिखेंगे। 

अभी आपने देखा, आप लोग भी घाट पर जाते हैं और LED की रोशनी आने के बाद तो मुझे बताया गया कि बहुत लोग जाते हैं, देखने के लिए जाते हैं। आपने देखा होगा कितना बड़ा बदलाव आया है। हम चाहते हैं हर परिवार में, मेरे काशी के हर परिवार में बिजली का बिल कम होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। आप चाहते हैं कि बिजली का बिल कम हो? आप चाहते हैं आपके पैसे बचे? सचमुच में चाहते हो? तो मेरी एक बात मानोगे, पक्‍का मानोगे? वादा करो, भोले बाबा को याद करके वादा करो। आप अपने घर में जितने बल्‍ब है, ट्यूब लाइट है, LED लगा दीजिए। आप देखिए, आपका बिजली का बिल एकदम से कम हो जाएगा, आपके पैसे बच जाएंगे और रोशनी बढ़ जाएगी। ये double मुनाफा वाले काम है और पूरे भारत में मुझे आंदोलन खड़ा करना है कि पुराने जो बिजली के बल्‍ब है उससे मुक्‍ति लीजिए। ये नई technology है, जो हमारी आंखों के लिए अच्‍छी है, रोशनी के लिए अच्‍छी है और जेब के लिए भी अच्‍छी है। हम काशी में एक आंदोलन चलाए। सब लोग उस बात को आगे बढ़ाए तो काशी के अंदर भी हम इसका लाभ ले सकते हैं और मैंने देखा है street light. काशी की जो Street light है उन Street light को भी LED में convert करना है उसके कारण काशी महानगर पालिका का जो बिजली का बिल है वो भी बहुत कम हो जाएगा और वो जो पैसे बचेंगे वो काशी को अगर स्‍वच्‍छता के लिए लगा दिए गए तो मेरा काशी चमकता रहेगा। शाम को रोशनी से चमकेगा और दिन में सफाई से चमकेगा और दुनिया के लोग आएंगे तो एक नई काशी को देखकर के जाएंगे। 

मैं काशीवासियों का आज हृदय से एक बात के लिए अभिनंदन करना चाहता हूं, आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं। मैं जब चुनाव जीतकर के यहां आया था और गंगा आरती में बैठा था। मां गंगा के आशीर्वाद लेकर के मैं यहां से गया था, बाद में प्रधानमंत्री पद के शपथ लिए थे। पहले मैं आज इस धरती को नमन करने आया था और उस दिन मैंने कहा था, उस दिन मैंने कहा था कि बनारस के नागरिकों ने बनारस की सफाई की जिम्‍मेवारी लेनी चाहिए। बनारस के नागरिकों ने बनारस को साफ-सुथरा रखना चाहिए। ये बात मैंने कही थी। आज देश में इस प्रकार की बात करना सरल नहीं होता है। लेकिन मैंने देखा कि बनारस के लोगों ने मेरी इस बात को सर आंखों पर लिया और बनारस के नागरिकों के अनेक संगठन तैयार हुए, अनेक नौजवान तैयार हुए। महिलाएं, लड़कियां, कॉलेज की लड़कियां, इन लोगों ने बनारस को साफ बनाने का, स्‍वच्‍छ रखने का एक बड़ा अभियान उठाया है और उस अभियान के तहत बनारस को आगे सुंदर बनाने का काम चल रहा है। 

मैं देख रहा हूं, मैं देख रहा हूं कि आज बनारस विकास की नई ऊंचाइयों पर जाने का एक केन्‍द्र बिन्‍दु बना है। चाहे road का infrastructure हो, चाहे रेल का infrastructure हो, चाहे बिजली की व्‍यवस्‍था हो, चाहे skill development का काम हो, चाहे हमारे बुनकरों के कल्‍याण का काम हो, इन सभी विषयों पर आज बनारस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा अभियान आज हमने प्रारंभ किया है और इसी काम के लिए आज मुझे यहां आने का अवसर मिला। 

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के द्वारा इस देश के गरीबों को बैंक account के द्वारा आने वाले दिनों में एक आर्थिक व्‍यवस्‍था के मूल केन्‍द्र में लाने में है। एक बड़ा सफल प्रयास हुआ है। मुझे विश्‍वास है कि इसके कारण आने वाले दिनों में परिवर्तन आएगा। 

पिछले कुछ दिनों से उत्‍तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों को लेकर के एक परिस्‍थिति पैदा हुई है। मैंने उत्‍तर प्रदेश सरकार से पूछा कि मामला क्‍या है, उन्‍होंने मुझे बताया कि अभी तक हमारे पास कोर्ट का ऑर्डर आया नहीं है। कोर्ट ने मौखिक सूचना दी है, लेकिन लिखित ऑर्डर नहीं आया है। आज मैंने शिक्षा मित्रों के कुछ नेताओं को बुलाया था। उनकी समस्‍या समझने का मैंने प्रयास किया और मैंने उनको कहा कि आप जरा मुझे बताइए तो उनकी भी तकलीफ थी कि उनके पास कोर्ट का ऑर्डर नहीं था। कोर्ट क्‍या कहना चाहती थी वो भी जानकारियां नहीं थी। मैंने उनसे कहा है कि कोर्ट का ऑर्डर आते ही मेरे पास भेजिए। भारत सरकार भी इसका अध्‍ययन करेगी और उत्‍तर प्रदेश सरकार को जो हमें सुझाव देने होंगे वो भी हम सुझाव देंगे। लेकिन मैं शिक्षक मित्रों से आज एक अनुरोध करना चाहता हूं। मैंने सुना था कि हमारे उत्‍तर प्रदेश के एक शिक्षा मित्र ने आत्‍महत्‍या की। मैं आज, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं। अभी कोर्ट का ऑर्डर नहीं आया है और हम अपने जीवन को संकट में डाले तो समस्‍या का समाधान नहीं होता है। शिक्षक मित्र, आत्‍महत्‍या करके वो तो चला जाएगा, लेकिन बाद में उस परिवार का क्‍या होगा, उन बच्‍चों का क्‍या होगा और इसलिए मेरी मेरे शिक्षक मित्रों से अनुरोध है कि जीवन में कभी लड़ाई हारनी नहीं चाहिए, हौसला खोना नहीं चाहिए। आत्‍महत्‍या का मार्ग हमारा नहीं हो सकता। एक बार कोर्ट का ऑर्डर आने दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार क्‍या कहना चाहती है, उसको देखकर के ज़रा सुने। मैं भी समझने का प्रयास करूंगा और उत्‍तर प्रदेश सरकार से मुझे जो भी बात करनी होगी उसको मैं करने की जिम्‍मेवारी लेता हूं और मैं आपकी बात उत्‍तर प्रदेश सरकार को आपके MP के नाते मैं अवश्‍य पहुंचाऊंगा और मुझे विश्‍वास है कि मेरे शिक्षक मित्र जो विद्यार्थियों के जीवन को तैयार करते हैं, जो विद्यार्थियों का हौसला बुलंद करते हैं। जो विद्यार्थियों को जीने की प्रेरणा देते हैं उनके जीवन में आत्‍महत्‍या का मार्ग कभी उचित नहीं हो सकता है। उत्‍तर प्रदेश की सरकार भी इन संवेदनशील मामलों को पूरी तरह गंभीरता से लेती है, ऐसा मुझे विश्‍वास है और इसलिए कोर्ट का ऑर्डर आने दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार को समय दीजिए। उत्‍तर प्रदेश सरकार मैं नहीं मानता हूं कि आपके साथ अन्‍याय करना चाहेगी और मैं भी उत्‍तर प्रदेश सरकार से बात करूंगा। समाधानकारी रास्‍ते क्‍या हो सकते हैं, इसका मार्ग खोजा जाएगा। भारत माता की। 

भाइयों-बहनों आज काशी में tourism को बढ़ावा देना बहुत आवश्‍यक है। आज प्रात: मैंने tourism को बल मिले उस प्रकार की रिक्‍शाओं का भी लोकार्पण किया है। वो अपने आप में भविष्‍य में tourist सेंटरों के लिए एक मॉडल बनने वाला है। हम यहां के छोटे-छोटे लोगों को भी उस काम में जोड़ना चाहते हैं। आपने जब मैं बनारस आया तो बनारस के कुछ लोगों ने मुझे कहा था कि 7 अगस्‍त को Handloom Day घोषित करना चाहिए। बनारस के बुनकरों की मांग थी। आज मुझे गर्व से कहना है कि आज उसने हमें हैंडलूम दिवस घोषित कर दिया। चेन्‍नई के अंदर उसका बड़ा समारोह किया और मेरे काशी के बुनकर चेन्‍नई आए थे और उनका भी मान-सम्‍मान बढ़ाने का मुझे अवसर मिला था। 

काशी की जो शक्‍ति है वो उसकी कलाकारी की विधि है। काशी की जो संस्‍कृति है वो उसकी कला विधि में है। काशी की जो शक्‍ति है वो उसकी संगीत की विरासत में है। काशी को आगे तो बढ़ना है, काशी को आधुनिक भी बनना है। लेकिन साथ-साथ काशी को अपनी इस विरासत को भी अपने साथ बचाए रखना है। इसको भी बचाए रखना है और उसको लेकर के हम काशी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अनेक क्षेत्रों में आपने देखा होगा हमारे केन्‍द्र के ढेर सारे मंत्री बारी-बारी से आए हैं। अनेक नई योजनाओं को उन्‍होंने बल दिया है। उन्‍होंने अनेक नई योजनाओं का एक cumulative effect होने वाला है कि काशी एक नई ऊंचाइयों को प्राप्‍त करेगा। 

और मैं काशीवासियों को विश्‍वास दिलाता हूं कि आपने मुझे MP बनाया है और आप ही के लोग हो, जिनके कारण आज मुझे प्रधानमंत्री पद पर बैठने का और देश की सेवा करने का सौभाग्‍य मिला है। देश चहुं और विकास कैसे करे, देश में नौजवानों को रोजगार कैसे मिले और हो सके तो अपने ही इलाके में रोजगार कैसे मिले, उसको लेकर के skill development का एक बहुत बड़ा अभियान जिसके कारण देश के कोटि-कोटि नौजवान, जिसके हाथ में डिग्री का कागज तो होता है, लेकिन हाथों में हुनर नहीं होता है और सिर्फ कागज से गाड़ी चलती नहीं है। उसके हाथ में हुनर होना चाहिए, कौशल्‍य होना चाहिए। दुनिया में हम सबसे युवा है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 साल से कम उम्र की है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 साल से कम उम्र की है उन भुजाओं में अगर कौशल्‍य हो, तो पूरी दुनिया को महारत करने की ताकत हिन्‍दुस्‍तान के नौजवान में आ जाती है और इसी बात को लेकर के skill development के द्वारा पूरे देश में एक विकास की नई ऊंचाई बनाने के लिए हमने प्रयास किया है। 

आपने देखा होगा मैंने 15 अगस्‍त को लाल किले पर से एक घोषणा की थी और मैंने कहा था ये जो interview नाम की चीज है। driver चाहिए तो भी interview, peon चाहिए तो भी interview, छोटा clerk चाहिए तो भी interview और उसके कारण लाखों नौजवान रोजगार के लिए किसी न किसी की सिफारिश ढूंढते हैं। कोई न कोई बिचौलिया उनके हाथ लग जाता है और नौकरी मिले या न मिले उसका जेब तो काट ही लेते हैं। और छोटी जगह पर बहुत बड़ी मात्रा में interview होते हैं। बहुत बड़ी मात्रा में लोग भर्ती करने पड़ते हैं। अगर एक-एक व्‍यक्‍ति से 5-5, 10-10 हजार रुपया भी लूटना शुरू करे तो गरीब आदमी के 10 हजार रुपया, वो जीवन भर का कर्जदार बन जाता है और इसलिए मेरी सरकार ने एक मैंने 15 अगस्‍त को सुझाव दिया था कि interview नाम की चीज बंद होनी चाहिए। और आज मैं नौजवानों को कहता हूं कि मेरी सरकार उस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। कुछ department ने already काम चालू कर दिया है। अभी दो दिन पहले मुझे रेलवे वालों ने बता दिया कि उनकी एक level के नीचे की जो भर्ती है, बोले बिना interview लिए हम online exam लेकर के पूरा कर लेंगे। हमारे नौजवान को रोजगार के लिए इस प्रकार से परेशानियां भुगतनी पड़े और आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भी जो बुराईयां घुस गई हैं उसकी सफाई होके रहेगी ये मैं नौजवानों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। 

हम सबने मिल करके जन-भागीदारी से देश को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है। आज पूरा दिन मैंने जो बिताया है, एक एक मिनट सिर्फ और सिर्फ विकास की बातों पर ही मैंने लगाया है। जब से मैं यहां Land किया हूं हर विषय जिनसे मिला जिनसे बातें कीं और आज मैं बनारस के सभी जीवन के क्षेत्र के लोगों से मुझे मिलने का सौभाग्‍य मिल गया है। बहुत बातें उनसे की मैंने। पूरे दिन भर उनकी बातें सुनता रहा। उनसे विषयों को समझता रहा और केंद्र बिंदु सिर्फ विकास था। और मेरा ये विश्‍वास है कि हमारी सारी समस्‍याओं का समाधान भी सिर्फ एक ही बात से होने वाला है, उस बात का नाम है विकास। अगर विकास होगा तो रोजगार मिलेंगे, रोजगार मिलेंगे तो गरीबी से लड़ाई लड़ पाएंगे, रोजगार मिलेंगे तो बच्‍चों को शिक्षा दे पाएंगे। रोजगार मिलेंगे विकास की नई ऊंचाईयां होंगी, व्‍यवस्‍थाएं विकसित होंगी और इसलिए सरकार व्‍यवस्‍थाओं को भी विकसित करना चाहती है और नागरिकों को सामर्थ्‍यवान भी बनाना चाहती है। आर्थिक सामर्थ्‍य देना चाहती है, शैक्षणिक सामर्थ्‍य देना चाहती है, आरोग्‍य की दृष्टि से अच्‍छे दिन आएं उसके जीवन में, उसके लिए लगातार प्रयास कर रही है। 

आज पूरे विश्‍व ने भारत की जय-जयकार करना शुरू किया है ये पहले नहीं था। पूरी दुनिया भारत के प्रति देखने को तैयार नहीं थी। अभी हमने जून महीने में अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस- इसका हमने विश्‍व के समाने प्रस्‍ताव रखा। हर हिंदुस्‍तानी को खुशी होगी और बनारस वालों को ज्‍यादा खुशी होगी क्‍योंकि वो चीजें हैं जो बनारस की धरती से पनपी हैं। अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस किया और अंतर्राष्‍ट्रीय योगा दिवस को दुनिया के hundred and ninety three countries, 193 देशों ने उसको समर्थन किया और विश्‍व के सभी देशों ने योगा दिवस को मनाया। ये सिर्फ योगा दिवस को मनाना मतलब हाथ-पैर हिलाने वाला मसला नहीं है भारत के साथ जुड़ने का मसला है। ये योग विश्‍व को भारत के साथ योग करता है जुड़वाता है। ये वो योग है जो हमें जोड़ रहा है, एक ही बात कितना बड़ा बदलाव ला सकती है इसके उदाहरण हैं। आज पूरा विश्‍व भारत के प्रति‍ आशा की नजर से, गर्व की नजर से देख रहा है। और इसी बातों से देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने में एक अवसर पैदा होता है और उस अवसर की पूर्ति के लिए हम दिन-रात कोशिश कर रहे हैं। मां गंगा की सफाई का अभियान पांचों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को साथ ले करके जहां से गंगा गुजरती है, सभी पांचों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों को साथ ले करके उस योजनाओं को लागू कर रहा हो और मैंने एक ही आग्रह किया है कि बाकी कुछ आप कर पाओ के न कर पाओ कम से कम गंगा में अब गंदगी नहीं चाहिए, गंदगी जानी नहीं चाहिए, कोई भी शहर अपना गट्टर का पानी गंगा में जाने न दे इतना प्रबंध राज्‍य सरकारों ने करना चाहिए। उसके लिए दंड देना पड़ेगा दें, दंड देने के लिए तैयार है। अभी माता अमृतानंदमयी केरल में है, आश्रम केरल में है लेकिन मां गंगा के लिए 100 करोड़ रुपयों का दान दे दिया। सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में मां गंगा के प्रति‍ इतना भक्ति है, सब देशवासी गंगा के लिए कुछ न कुछ करने के लिए तैयार हैं लेकिन शुरूआत हमें करनी पड़ेगी। जिम्‍मेवारी हमें लेनी पड़ेगी। राज्‍यों के पास जो दायित्‍व हैं उसको राज्‍यों को पूरा करना पड़ेगा। और भारत सरकार कंधे से कंधा मिला करके राज्‍यों के साथ काम करेगी और मां गंगा की सफाई का काम हमें समय-सीमा में पूरा करना है। 

मैं जानता हूं ये काम कठिन है ।1984 से nineteen eighty four से ये विषय चल पड़ा है। हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और इसलिए योजना की सफलता के प्रति आशंकाओं का कारण भी है। उसके बावजूद भी हमने अपने प्रयास छोड़ने नहीं चाहिए। हमने इतने बड़े देश ने इस एक काम को करके दिखाना चाहिए। और गंगा शुद्ध हो, गंगा साफ हो, गंगा गंदगी से मुक्‍त हो इस गंगा के बेटे के नाते हम सबका दायित्‍व बन जाता है और उस दायित्‍व को हम सबने निभाना चाहिए। 

और मुझे विश्‍वास है भाइयो एक जागरूकता आई है। स्‍वच्‍छता का अभियान देख लीजिए, एक जागरूकता आई है, एक बदलाव आया है। घर में बच्‍चे भी कूड़ा-कचरा फेंकने वालों को टोकते हैं ये पहले कभी नहीं होता था। स्‍वच्‍छता एक दिन में आने वाली ऐसा कोई सोचता नहीं था। पहले भी कोई सोचता नहीं था। लेकिन पहली बार मैं नहीं मानता हिंदुस्‍तान की संसद ने स्‍वच्‍छता के ऊपर कभी debate की हो। लेकिन जबसे मैंने स्‍वच्‍छता अभियान चलाया है आज संसद भी स्‍वच्‍छता के विषय पर चर्चा करती है, विपक्ष में बैठे हुए हमारी आलोचना भी करते हैं, लेकिन कम से कम भारत की संसद को स्‍वच्‍छता के लिए बात करने के लिए फुरसत तो मिली। ये छोटी बात नहीं है और संसद, संसद स्‍वच्‍छता के लिए इतनी जागरूक हो जाए तो बात नीचे पहुंचेगी ये मेरा पूरा विश्‍वास है भाइयो। 

हमारे देश में विकास के लिए दो शब्‍द हम हमेशा देखें हैं आर्थिक विकास औद्योगिक विकास। एक शब्‍द प्रयोग चलता है private sector, दूसरा शब्‍द प्रयोग चलता है public sector. यानी government के जो PSUs हैं वो हैं, या तो कॉरपोरेट हाउस हैं बड़े-बड़े उद्योग कार हैं। ये हमने आर्थिक जो विकास की पटरी है वो इन दो पटरी पर आर्थिक गाड़ी चलाने का प्रयास किया है। मैं मानता हूं ये दो पटरी पर जितनी गाड़ी तेज जानी चाहिए जा नहीं सकती है। Public Sector, Private Sector इन्‍हीं दो पिलर पर अगर हम हिंदुस्‍तान को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उतनी ताकत नहीं मिलेगी। और इसलिए मैं तीसरे सेक्‍टर पर बल दे रहा हूं। एक तरफ है Public Sector, Private Sector और मैं एक विचार ले करके चल रहा हूं, Personal Sector, एक individual भी देश की बहुत बड़ी अमानत है। ये Personal Sector कैसे आगे बढ़े? Private Sector, Public Sector की बराबरी में Personal Sector दो कदम आगे कैसे चले उस योजना को ले करके मैं काम कर रहा हूं। 

और उस Personal Sector में आता है एक योजना हमने बनाई है मुद्रा बैंक की। हमारे देश में करीब 6-7 करोड़ लोग है जो छोटे और निम्‍न स्‍तर के व्‍यापारी है। छोटा-मोटा उद्योग चलाते हैं। एकाध-दो एकाध लोगों को रोजगार देते हैं। छोटा कारोबार चलाते हैं, लेकिन किसी के पास हाथ फैलाते नहीं, अपने बलबूते पर खड़े रहते हैं। इन लोगों की ताकत इतनी है कि करीब-करीब 15 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, ये छोटे-छोटे लोग। दूध बेचने वाला भी एकाध बच्‍चे को इनको रोजगार देता है। अगर ये personal sector है। ये personal sector को अगर ताकत दी जाए। जो आज 15 करोड़ को नौकरी देता है वो कल 30 करोड़ को नौकरी दे सकता है, इतनी ताकत उसमें है। और इसलिए बाल काटने वाला हो, धोबी हो, चाय बेचने वाला हो, पकौड़े बेचने वाला हो, रिक्‍शा चलाने वाला हो, सब्‍जी बेचने वाला हो, फ्रूट बेचने वाला हो, छोटे-मोटे दुकान पर readymade कपड़े बेचता हो, प्रसाद बेचता हो छोटे-छोटे लोग। इस personal sector को ताकतवर बनाना है मुझे। उसको आर्थिक मदद करनी है और मुद्रा बैंक से किसी भी प्रकार की गारंटी के बिना 10 हजार से 50 हजार रुपए तक देना उस नागरिक को देना ताकि उसको साहूकार की ब्‍याज की चुंगल से बाहर निकले और वो अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, उस दिशा में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने वाले हैं। ये personal sector भारत के लिए बहुत बड़ी आर्थिक moment बन सकता है। हमने 50 साल तक private sector, public sector की बात की है, अब वक्‍त है हम personal sector पर बल दे और personal sector के द्वारा एक-एक व्‍यक्‍ति की उद्यमशीलता। उसको पैसे चाहिए पैसे दे, technology चाहिए technology दे, skill development करना है तो skill development दे, उसको नौजवान की जरूरत है, नौजवान दे, उसको उद्योग जगाने के लिए जगह चाहिए तो जगह दे, व्‍यापार करने के लिए अवसर चाहिए तो अवसर दे। पूरा खुला पल्ला दें, आप देखिए हिन्‍दुस्‍तान का ये सामान्‍य व्‍यक्‍ति, हिन्‍दुस्‍तान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। 

और इसलिए आज मैं काशी की धरती पर पहली बार ये personal sector के विषय को मैं प्रकट कर रहा हूं और आने वाले दिनों में इस personal sector काशी की धरती से आशीर्वाद लेकर के सवा सौ करोड़ देशवासी, 65 प्रतिशत लोग, 35 से कम आयु के लोग वो personal sector है जिसको एक ताकत देकर के मुझे देश को आगे बढ़ाना है। आप मुझे आशीर्वाद दीजिए, मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बधुत-बहुत धन्‍यवाद। 
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अतुल कुमार तिवारी/ अमित कुमार / निर्मल शर्मा / मनीषा

नोटा विकल्प के लिए विशेष चिह्न

18-सितम्बर-2015 20:00 IST
NID अहमदाबाद ने डिजाइन किया है नोटा विकल्प चिह्न
नई दिल्ली: 18 सितम्बर 2015: (पीआईबी):
भारत निर्वाचन आयोग ने उच्चतम न्यायालय के 27 सितम्बर, 2013 के आदेश का अनुसरण करते हुए 11 अक्तूबर, 2013 से इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों पर दिखाए गए बैलेट पेपरों में तथा अन्य बैलेट पेपरों में नोटा- उपरोक्त में से कोई नहीं- विकल्प को लागू किया था।

भारत निर्वाचन आयोग ने अब अन्य चुनाव चिन्हों की तरह नोटा विकल्प के लिए विशेष चिह्न लागू किया है। इसे नीचे दिखाया गया है और इसका उद्देश्य मतदाताओं द्वारा नोटा विकल्प चुनने में मदद देना है। अब से आगे होने वाले सभी चुनावों में ईवीएम के अंतिम पैनल तथा अन्य बैलेट पेपरों पर नोटा विकल्प के समक्ष यह विशेष चिह्न दिखेगा। इस संबंध में सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गये हैं।

नोटा विकल्प का मुख्य उद्देश्य ऐसे मतदाताओं की सहायता करना है जो किसी भी उम्मीदवार को वोट देना नहीं चाहते और ऐसे मतदाताओं को अपने निर्णय की गोपनीयता का उल्लंघन किए बिना किसी भी उम्मीदवार को वोट न देने के अधिकार के उपयोग में सहायता देना है।

नोटा विकल्प चिह्न को भारतीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) अहमदाबाद ने डिजाइन किया है।

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एजी/डीसी-4614

Friday, September 18, 2015

ईद: शिक्षक संस्थान धार्मिक भेदभाव न करें - शाही इमाम पंजाब

ईद के दिन पंजाब के स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी न होना अफसोसनाक
लुधियाना: 18 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
25 सितम्बर को मनाई जाने वाली ईद-उल-जुहा (बकरीद) के दिन पंजाब के स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी न करना अफसोसनाक है। यह बात आज यहां लुधियाना जामा मस्जिद में पत्रकार सम्मेलन के दौरान शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कही। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि अकसर स्कूलों और कॉलेजों की मैनेजमैंट ने ईद-उल-जुहा की छुट्टी तो क्या करनी थी 25 तारीख को पेपर भी रखे हुए है, जिसकी वजह से मुस्लिम विद्यार्थी चाहकर भी नमाज-ए-ईद अदा नहीं कर सकेगें। उन्होंने कहा कि पंजाब जो कि धार्मिक सदभावना में देश के लिए एक मिसाल रहा है। पिछले दो तीन वर्षों से पंजाब में स्कूलों और कॉलेजों की मनमानी की वजह से भेदभाव का माहौल पैदा कर रहा है। 
शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि इस दौरान ज्यादा निराशाजनक स्थिति प्रशासन की बनी हुई है जो कि सब कुछ जानते हुए भी मुकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में जामा मस्जिद कमेटी की ओर से कई बार डिप्टी कमिश्नर लुधियाना श्री रजत अग्रवाल जी से सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से समय नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में एक ज्ञापन मुख्यमंत्री पंजाब जनाब प्रकाश सिंह बादल के नाम कल दिनांक 17.09.2015 को मैडम डॉ. कन्नू शिकायत अफसर लुधियाना डी.सी. दफ्तर को भी सौंपा गया। 
शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों की ओर से ईद पर छुट्टी न करना निन्दनीय नहीं बल्कि निराशाजनक है क्योंकि शिक्षक संस्थान ही भारत की एकता और अखंडता की नींव को मजबूत करते है। अगर यहां से ही ऐसे फैसले होंगे तो बच्चों पर इसका क्या असर पड़ेगा। एक प्रश्न के उत्तर में शाही इमाम पंजाब ने कहा कि अगर स्कूलों और कॉलेजों की ओर से ईद के दिन छुट्टी नहीं की जाती तो वह मुस्लिम समुदाय से आहवान करेंगे कि ईद के दिन काली पट्टियां बांधकर नमाज अदा करे। इस मौके पर शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम, बाबुल खान विशेष रूप से उपस्थित थे।



Monday, September 14, 2015

नेपाल नहीं बनेगा फिर से हिन्दु राष्ट्र-हिन्दू संगठन निकले सड़कों पर

दो तिहाई से अधिक सदस्यों ने किया धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का समर्थन 
काठमांडू: 14 सितंबर 2015 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
नेपाल से राजशाही के खिलाफ और धर्मनिरपेक्षता के समर्थन में खुल कर आवाज़ बुलंद हुई है। नेपाल की संविधान सभा ने देश को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव सोमवार को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि संविधान सभा के दो तिहाई से अधिक सदस्यों ने देश को फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने के खिलाफ मतदान किया।  नेपाल में सरगर्म हिन्दु संगठनों ने इसका तीखा विरोध भी किया जिसे दबाने  पुलिस को लाठीचार्ज और पानी की तेज़ बौछारें भी इस्तेमाल कीं। संविधान के मसौदे पर रविवार से मतदान शुरू हुआ था जो कल भी जारी रहेगा। नेपाल के सांसदों ने संविधान सभा (सीए) में साफ किया कि नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष देश बना रहेगा। सात साल पहले नेपाल को धर्मनिरपेक्ष देश घोषित किया गया था। हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, 601 सदस्यीय सीए ने देश के नए संविधान के एक-एक अनुच्छेद पर एक-एक कर मत दिया है और देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बनाए रखने पर सहमति जताई है। इसे विश्व की धर्मनिरपेलश शक्तियां एक स्वागतयोग्य घटनक्रम के रूप में देख रही हैं। 
उल्लेखनीय है कि दुनिया के एकमात्र हिंदू राष्ट्र नेपाल को मई 2008 में एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया था। राजशाही समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी-नेपाल के कमल थापा और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अमृत बोहोरा ने मांग की थी कि संविधान से धर्मनिरपेक्षता को हटाकर नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। सीए के अध्यक्ष सुबास चंद्र नेमबांग ने दोनों पार्टियों के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। इसके बाद कमल थापा ने अपने प्रस्ताव पर मतदान की मांग की। थापा के प्रस्ताव पर वोटिंग हो या नहीं, पहले यह जानने के लिए मत लिए गए। इस  विस्तृत था जिसमें सभी पहलू कवर हुए। 
हिन्दू संगठन विरोध जताते हुए  (साभार चित्र)
हिन्दू राष्ट्र बनाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए सदन के दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी, जिसे हासिल नहीं किया जा सका। संविधान सभा में नए संविधान के अनुच्छेदों को लेकर हुए मतदान के दौरान दो-तिहाई सदस्यों ने नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने के प्रस्ताव वाले संशोधन को ठुकरा दिया तथा नेपाल के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बने रहने पर जोर दिया। हिंदू समर्थक समूह राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी नेपाल की ओर से यह प्रस्ताव पेश किया गया था। इस पार्टी ने मांग की थी कि संविधान के अनुच्छेद चार से धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाया जाए और इसके स्थान पर हिंदू राष्ट्र शामिल किया जाए। यह मांग बुरी तरह रद्द हुई। 
जब मतदान के बाद संविधान सभा के अध्यक्ष सुभाष चंद्र ने प्रस्ताव के ठुकराए जाने का ऐलान किया तो राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी के कमल थापा ने मत विभाजन की मांग की। थापा के प्रस्ताव के पक्ष में 601 सदस्यीय संविधान सभा में सिर्फ 21 मत मिले, जबकि मत विभाजन के लिए 61 सदस्यों के समर्थन की जरुरत होती है। उल्लेखनीय है कि हिंदू राष्ट्र रहे नेपाल को साल 2006 के जन आंदोलन की सफलता के बाद साल 2007 में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया था।

Thursday, September 10, 2015

फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी

सेंसर बोर्ड या थाली का बैंगन?
चंडीगढ़: 9 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
जानीमानी कलाकारा सुनीता धीर 
फिल्म की घोषणा से ले कर उसके टाइटल रजिस्टर्ड होने, फिर शूटिंग होने और फिर अन्य कई पेचीदा किस्म की प्रक्रियायों से गुज़र कर उसके रलीज होने तक बहुत कुछ ऐसा होता है जो जग ज़ाहिर होता है। न  के लिए उसके पता लगाना मुश्किल होता है और न ही फिल्म निर्माण से जुडी संस्थाओं के लिए। इस सबके साथ एक एक ऐसा वर्ग होता है जो फिल्म निर्माण को संतान की तरह देखता है। यह वर्ग होता है कलाकारों का, लेखकों का, गीतकारों का, और दर्शकों का भी। कलाकार के लिए फिल उसके कैरियर और रोज़ी रोटी से जुडी होती है। जब तक फिल्म निर्माण चलता है उसका सारा ध्यान फिल्म पर केंद्रित होता है और जब फिल्म बन जाती है तो सारा ध्यान उसकी रिलीज़ पर केंद्रित हो जाता है। जब आखिरी दम तक मिली किसी मंजूरी को दरकिनार कर अचानक ही पाबंदी की घोषणा होती है तो सबसे अधिक निराशा होती है इस कलाकार वर्ग को। उसे ऐसा लगता है जैसे किसी ने भ्रूण हत्या कर दी हो। ऐसा महसूस होता है जैसे काटने को तैयार फसल को अचानक किसी ने आग के हवाले कर दिया हो। 
कुछ ऐसा ही हुआ है आगामी 11 सितंबर को रिलीज होने वाली पंजाबी फिल्म ‘मास्टर माइंड जिंदा सुक्खा’ कर मामले में। इस फिल्म पर रोक लगा दी गई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पहले मंजूरी दे दी थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इस पर पाबंदी लगा दी गई। मंत्रालय का कहना है कि इस फिल्म के रिलीज होने से पंजाब और आसपास के राज्यों मे हालात बिगड़ सकते हैं। फिल्म की टीम ने रोक लगने की पुष्टि की है। 
पाबंदी का एलान और इसकी वजह इतनी मासूमियत  से बयान की जाती है जैसे बेचारे सेंसर बोर्ड को कुछ पता ही न हो कि फिल्म किस मुद्दे पर थी, उसके हक़ और विरोध में कौन कौन थे, उसका क्या क्या असर हो सकता था। बहुत देर से सेंसर बोर्ड इस तरह की हरकतें कर रहा है कि फिल में एतराज़ की बात उसे बस सरकार के कहने पर ही पता चली हो। क्या फिल्म को पारित करते वक़्त इस बोर्ड ने कुछ नहीं देखा होता? 
फिल्म पर पाबंदी लगाने का कुछ संगठनों ने समर्थन किया है और कुछ ने विरोध। दल खालसा ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार को सिख विरोधी बताया है। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म पूर्व सेना प्रमुख जनरल अरुण वैद्य के हत्यारों हरजिंदर सिंह जिंदा और सुखदेव सिंह सुक्खा के जीवन पर आधारित है। फिल्म बनाने वालों और फिल्म के समर्थकों ने इसे अपने नायकों पर बनी ऐतिहासिक फिल्म भी कहा है। अब देखना है कि फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों और औनकी कला व कॅरियर के साथ खिलवाड़ कब तक जारी रहता है। 
फिल्म जिन्दा सुक्खा: पहले मंजूरी अब पाबंदी
सेंसर की भेंट:
1973 में फिल्म गर्म हवा का प्रदर्शन रोक गया 
1975 में  आंधी का प्रदर्शन रोक गया 
1977 में किस्सा कुर्सी का फिल्म पर पाबंदी सेंसर बोर्ड के कार्यालय से सारी रील उठवा कर जला दी 
1971 में सिक्किम फिल्म पर पाबंदी जिसे सितम्बर 2010 में हटा दी दिया गया।
1987 में फिल्म पति परमेश्वर की रेटिंग से इंकार किया गया 
1994 में फिल्म बैंडिट क्वीन पर पाबंदी 
1996 में फिल्म फायर पर पाबंदी 
2003 में फिल्म हवाएं पर पाबंदी जो नवंबर-१९८४ की घटनाओं से सबंधित थी। 
2005 में वर्ष 2004 की फिल्म ब्लैक फ्राईडे पर पाबंदी 
2005 में सिख व्विरोधी हिंसा पर पर बनी फिल्म अमु को कुछ आडियो कटस के बाद एडल्ट रेटिंग दी 
2005 में ही फिल्म वाटर हिन्दू संगठनों के ऐतराज़ पर रुकी और फिर मार्च 2007 में रिलीज़ हुई।
2014 में फिल्म कौम दे हीरे पर पाबंदी लगी  

Wednesday, September 09, 2015

ABVP बनी लुधियाना रेप के खिलाफ जनआवाज़

ABVP ने पठानकोट में किया ज़ोरदार प्रदर्शन 
पठानकोट: 8 सितम्बर 2015: (विजय शर्मा//पंजाब स्क्रीन):
लुधियाना में नावालिग से हुए रेप और हत्या के विरोध की आग पंजाब के अन्य  भागों तक भी फैलने लगी है।  अखिल भारती विद्यार्थी परिषद ने इस इस मुद्दे को लेकर पठानकोट में ज़ोरदार प्रदर्शन  और पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। 
पठानकोट में आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से लुधियाना में नावालिग के साथ हुए रेप और हत्या को ले कर ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियो ने पठानकोट डलहोजी रोड पर दोषियों के पुतले फूंके और जम कर नारेवाजी की। इस मोके पर परिषद के सभी सदस्य दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था की इस तरह की हरकत कोई इंसान नही राक्षक ही कर सकता है। उन्होंने पंजाब सरकार से मांग की अगर इस काड के दोषियों को कड़ी सजा दी जाती है तो यह दूसरे लोगो के लिए भी एक मिसाल बनेगी और लोग इस तरह के घिनोने काम करने से पहले 100 बार सोचेगे। 
पठानकोट में आज  लुधियाना में हुए नावालिग के साथ रेप ओर हत्या के विरोध में विद्यार्थियो की तरफ से दोषियों के पुतले फूंक कर अपना विरोध जताया गया। इस तरह की घटना से सारी मानवता का सिर शर्म से झुक जाता है। छात्र-छात्राओं ने जम कर नारेवाजी कर अपने मन की भड़ास निकाली। विद्यार्थियो ने इस कांड के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग भी की।

छात्र नेता शिल्पा   एतराज़ उठाया कि मृतका के माता पिता को पांच लाख रुपय  खामोश रहने के लिए मनाया रहा है।  पूछा  सब क्यों करें?
इसी तरह एक अन्य छात्र नेता वरिंदर ने भी इस घटना की सख्त निंदा करते हुए दोषियों सज़ा देने की मांग की।

अकाली दल अमृतसर ने किया जिन्दा सुक्खा फिल्म का खुल कर समर्थन

जत्थेदार चीमा ने किया विरोधियों को उचित जवाब देने का ऐलान  
लुधियाना: 8 सितम्बर 2015: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
सियासत की जिन चालों के चलते पंजाब लहू-लुहान हुआ वे चालें अब फिर से तेज़ होती महसूस हो रही हैं। ब्ल्यू स्टार आपरेशन के बाद 1992 तक पंजाब में गोली का राज रहा।  खून खराबे का एक लम्बा दशक जब सांस  लेने के लिए भी सोचना पड़ता था। पंजाब के जनमानस में एक रेखा सी खिंच गयी थी। इंसान की पहचान हिन्दू सिख  बन गयी थी। सन 1990 के बाद जन्मी पीढ़ी ने उन काले दिनों को अपनी आँखों से नहीं देखा लेकिन उसकी कहानियां ज़रूर सुनी होंगीं। अब खतरा है कि वे कहानियां कहीं साकार होकर फिर सामने न आने लगें।  
पंजाब का माहौल फिर गर्मा रहा है। हिन्दु और सिख संगठन दुसरे के सामने आने को तैयार खड़े लगते हैं। इसका कारण बन रही है 11 सितम्बर को रलीज होने जा रही फिल्म जिन्दा सुक्खा। उसी दिन गैंगस्टर लाइफ़ स्टाईल को दर्शाने वाली फिल्म रुपिंदर गांधी भी रलीज होने वाली है। 
हिन्दू संगठनों ने जहाँ  इसका विरोध करने की चेतावनी दी है वहीँ वहीँ सिख संगठनों ने कहा है जिन्दा सुक्खा हमारे नायक हैं और इसी तरह की फिल्में सतवंत सिंह बेअंत सिंह जैसे अन्य नायकों पर भी बननी चाहिएं। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि विरोध करने वाले पर हमारी बाज़ आँख लगी हुई है और वक़्त आने पर उन्हें उचित जवाब भी दिया जायेगा और मान सम्मान भी। 
दूसरी तरफ हिन्दु संगठन इस फिल्म के विरोध पर एकजुट होते नज़र आ रहे हैं। हिन्दु नेताओं का कहना है कि इस तरह की फिल्मों का बनना और रलीज होना यही बता रहा है कि हालात फिर से खराब करने की साज़िशें तेज़ी से शुरू हो चुकी हैं। हिन्दु नेताओं नेजनरल ए के वैद्या को अपना नायक बताते हुए कहा कि अमृतसर की पावन भूमि को आतंकियों से मुक्त करवाने वाले उस बहादुर जरनैल के हत्यारे किसी भी तरह शूरवीर नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि इस संबंध में हमारी हिन्दु पंचायत सही समय पर जो भी प्रोग्राम देगी हम वही करेंगे।   ,टंडन और रोहित साहनी ने  फिल्म बनाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस तरह की फिल्मों में लगा पैसा कहाँ से आया? उन्होंने विदेशों में बैठे हुए अमीर सिखों को निशाना बनाते हुए कहा कि इस तरह की फिल्में बना कर पंजाब के हालात दोबारा बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। 
गौरतलब है कि इस पंजाबी फिल्म का निर्माण जिन्दा-सुक्खा द्वारा लिखित चिट्ठियों पर आधारित किया गया है। उन्होंने बताया कि फिल्म में मुख्य किरदार पंजाबी सिनेमा के कलाकार नव बाजवा, सोनप्रीत जवन्दा, गुगु गिल्ल, सुनीता धीर, अमृतपाल सिंह बिल्ला निभा रहें है। उन्होने बताया कि फिल्म पूरी दुनिया में 11 सितम्बर को वर्ल्ड वाईड रिलीज हो रही है। यह पत्र उनकी फांसी से पहले ही मीडिया के ज़रिये जन जन तक पहुँच गए थे।  बाद में इनको पुस्तिका के रूप में भी छपवा कर बांटा गया।  

Monday, September 07, 2015

इस्लामिक संगठन दे रहा है बच्चों को खतरनाक दवा

इस दवा के बाद नहीं रहता किसी भाव या संवेदना का अहसास 
लुधियाना: 7 सितम्बर 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):  
आपको हैरानी हो सकती है और होनी भी चाहिए। आपने कलम के सिपाही भी देखे सुने होंगें और सशत्र सैनिक भी। कभी ऐसा देखा कि कलम का सिपाही सीमा की चिंता कर रहा हो। केवल चिंता ही नहीं बल्कि उसकी रक्षा के उपायों पर भी गंभीर हो। आज हम आपको मिलवा रहे हैं एक ऐसे पत्रकार से जिसने अपनी मीडिया फ़ोर्स और ख़ुफ़िया नेटवर्क से एक ऐसी खतरनाक दवाई का पता लगाया है जो आजकल आतंक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। इस दवा का ही परिणाम है कि इस्लामिक स्टेट के बच्चे एक इशारा होते ही किसी को भी गोली मार देते हैं और किसी को भी छुरा घोंप देते हैं। इस तरह के जघन्य कुरटयों के समय उनके चेहरे पर न डर होता है न ही झिझक और न ही कोई अन्य भाव। किसी रिमोट कंट्रोल्ड यंत्र की तरह ये नन्हे आतंकी बड़ी बड़ी वारदातें कर रहे हैं। विश्व के सभी प्रमुख आतंकी संगठनों में यह दवा धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही है। इस दवा को लेते ही न कोई जज़बात रहता है न कोई संवेदना न ही कोई भाव। बस एक ही ध्यान कि इशारा होते ही अपने शिकार को मौत के घाट उतार देना है। बचपन में ही मौत के खिलाडी बने ये बच्चे बड़े हो कर कितने खतरनाक होंगें इसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता। आज तेज़ी से तैयार हो रही बाल आतंकियों की ये फ़ौज जब दुनिया में आतंक की आंधी ला देगी तो उससे बचने का कोई रास्ता भी नज़र नहीं आने वाला। दवा खा कर बेरहम होने वाले बच्चे अपने आकाओं के इशारे पर बेगुनाह लोगों पर ज़ुल्मो सितम ढाया करेंगे। क्यूंकि यह कैमिकली जनरेटड आतंक होगा इस लिए इसका तोड़ ढूंढ़ना भी मुश्किल होगा। छुरा, बंदूक, रिवाल्वर और अन्य हथियारों को खिलोने की तरह इस्तेमाल करने वाले ये बच्चे न अपनी जान की परवाह करेंगे न ही दुसरे की। बेरहमी के ये  पहाड़ दुनिया पर टूटने के लिए तेज़ी से तैयार हो रहे हैं। दुनिया इन बच्चों से डरेगी पर कुछ कर नहीं सकेगी। अगर इन बच्चों के हाथों में एटमी हथियार आ गए तो फिर दुनिया की खैर नहीं। तबाही का खतरा हमारे सरों पर मंडरा रहा है। बेरहमी भरी मौत दुनिया के दरवाज़े पर दस्तक दे रही है। 
क्राईम फ्री इंडिया ब्यूरो (CFIB) पंजाब के अध्यक्ष और नेशनल सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस फ़ोर्स के सलाहकार डाक्टर भारत ने इस खतरनाक दवा का पता लगते ही इसकी सूचना उच्च अधिकारीयों को दी। राष्ट्रपति, गृह मंत्रालय, पंजाब पुलिस के महांनिर्देशक को इस संबंध में विस्तृत पत्र भेजे गए। इनका असर भी हुआ। संगठन का दावा है कि पंजाब प्रशासन के उच्च अधिकारी 27 अगस्त को लुधियाना में डाक्टर भारत से मिलने आये थे। दवा का नाम राष्ट्र हित में गोपनीय रखा गया है। अब देखना है क़ि इसकी रोकथाम के लिए क्या उपाय किये जाते हैं। अगर आज भी हम नहीं चेते तो फिर शायद हमें कभी वक़्त न मिले। वक़्त रहते सम्भल जाओ।

Saturday, September 05, 2015

गुरु बिना ज्ञान न होत है//जसप्रीत कौर " फ़लक "

 हमारे आचार्य, गुरु, अध्यापक दीपक की तरह जल कर हमारा जीवन रौशन और उज्ज्वल कर देते हैं।
जसप्रीत कौर फलक बहुत ही अच्छी शायरा हैं। उर्दू, हिंदी और पंजाबी के रंगों का सुमेल करके जब वह अपने अलग से अंदाज़ में आशयर कहती हैं तो हाल उनकी शायरी में मग्न हो जाता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर उन्होंने अपने उस गुरु, उस अध्यापक को याद किया है जिस ने उन्हें बनाने में अपनी ज़िंदगी लगा दी।  आज के कारोबारी युग में लोगों को वही शिक्षक याद आ पाते हैं जिन्होंने शिक्षा को कभी व्यापार कभी नहीं समझा था। प्रस्तुत हैं फलक जी की कुछ पंक्तियाँ। 
           -रेक्टर कथूरिया 
जसप्रीत कौर फलक कहती हैं:-
हे गुरु, अध्यापक,शिक्षक,आचार्य आपको प्रणाम। 

आज पाँच सितम्बर हैं यानि शिक्षक दिवस। 

आज हम सभी ऊन अध्यापकों, गुरुओं और शिक्षकों को बधाईयां देते हैं।  

याद करते हैं जिन्होने हमारे जीवन दर्शन में कहीँ न कहीँ हमें गहरी तरह प्रभावित किया है। 

गुरु को ईशवर से अधिक महत्व प्राप्त है। 

आज शिक्षक दिवस के मौके पर अपने बचपन से लेकर आज तक के सफ़र पर नज़र डालूं तो उस पावन नाते को मैं किसी न किसी रूप में स्वीकार कर लेती हूँ। जहाँ कभी माता-पिता ,भाई-बहन,अध्यापक, दोस्त,कभी पति तो कभी बच्चे गुरु बनकर मेरे सम्मुख खड़े होते है और कॊई न कॊई सीख मुझे उनसे प्राप्त हो जाती है।  हमारे आचार्य, गुरु, अध्यापक दीपक की तरह जल कर हमारा जीवन रौशन और उज्ज्वल कर देते हैं। किसी ने ठीक कहा है - गुरु बिना ज्ञान न होत है। 

         जसप्रीत कौर " फ़लक " 
                        लुधियाना.


Thursday, September 03, 2015

अब मिली एक और लड़की की लाश-दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका

लगातार बढ़ रही है असुरक्षा की भावना 
लुधियाना: 3 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
लगातार बढ़ रहे सुरक्षा बलों और क़ानूनी सख्तियों के बावजूद मुजरिमों के होंसले बुलंद हो रहे हैं और आम नागरिक इन समाज विरोधी तत्वों का निशाना बनने के लिए बेबस है। लुधियाना की जवद्दी पुली  से एक स्कूल पढ़ती लड़की की लाश मिली है। इस लाश के के  बार फिर लगता है कि हमने दामिनी उर्फ़ निर्भया को गंवा कर भी कोई सबक नहीं सीखा। अगर सीखा होता तो हम कोई ठोस कदम अवश्य उठाते और इस तरह के सभी दरिंदों का जीना हराम कर देते। ताज़ा विवरण के मुताबिक आशंका है कि स्थानीय जनता नगर में ग्यारवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्र का अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गयी। 
 इस लड़की का पिता उसे सुबह स्कूल छोड़ कर वापिस आया लेकिन लड़की शाम तक घर नहीं लौटी।  देर शाम के बाद पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस ने इस समंध में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।  इसी बीच आज सुबह कुछ लोगों को उसकी लाश जवद्दी की नहर में से मिली। 
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सही स्थिति का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही लग सकेगा। एक बार फिर मोमबत्तियां जलायी जाएंगी। लड़कियों के सम्मान और सुरक्षा की ढेरों बातें होंगीं। एक बार फिर प्रदर्शन होंगें। नेतागीरी के चाहवान अपनी फोटो खिंचवाएंगे। अख़बारों में चर्चा होगी। कुछ दिन बाद यह लड़की भी भूल जाएगी क्यूंकि तब तक हो चुकी होगी कोई नयी वारदात किसी और लड़की के साथ। पता नहीं हमारा समाज और प्रशासन कब बनेगा ऐसे दरिंदों के लिए खौफ? आयो इस तरह के वहशियों के लिए कदम कदम पर ज़मीन तन कर दें।  इन्हें कदम रखने का न मौका मिले न ही हिम्मत। 

"वेंडर" बन कर घुसे "लुटेरों" ने की एसी कोच में लूट

राष्ट्रपति अवार्ड लेने दिल्ली आ रही प्रिंसिपल से ट्रेन में लूट
लुधियाना: 3 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)
न सुरक्षा बलों की संख्या कम है और न ही सुरक्षा प्रबंधों के लिए बने तंत्र की। इसके बावजूद आम नागरिक असुरक्षित है। नई वारदात हुई है एक ट्रेन के ए सी कोच म इन एक महिला प्रिंसिपल के साथ जो राष्ट्रपति एवार्ड लेने के लिए दिल्ली जा रही थी। मीडिया दृष्टि ने यह सारा मामला रखा है सोशल मीडिया पर। 
शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रपति पुरस्कार लेने दिल्ली जा रही एक स्कूल की प्रिंसिपल की जान पर बन आई। प्रिंसिपल ट्रेन के एसी कोच में यात्रा कर रही थी. रास्ते में बदमाशों ने ट्रेन में धावा बोलकर उन्हें लूट लिया।  घटना से पहले बदमाशों ने नशीला स्प्रे इस्तेमाल किया था। 

ग्वालियर के केंद्रीय विद्यालय न.2 में रेखा सक्सेना प्रिंसिपल के तौर पर तैनात हैं। उनका चयन राष्ट्रपति मैडल के लिए हुआ है। उसी मैडल को लेने के लिए रेखा समता एक्सप्रेस ट्रेन से दिल्ली जा रही थी। वह ट्रेन के एसी-1 कोच में यात्रा कर रही थी। दिल्ली से पहले ही अज्ञात बदमाश वेंडर बनकर ट्रेन के कोच में आ गए और कोच में नशीला स्प्रे कर दिया। उसके बाद उन्होंने रेखा सक्सेना समेत अन्य यात्रियों से लूटपाट की। प्रिंसिपल रेखा से बदमाशों ने 50 हजार रूपए और पर्स में रखा सामान लूट लिया।
नशीले स्प्रे की वजह से रेखा सक्सेना की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के मूलचंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जीआरपी ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभी तक बदमाशों का कोई सुराग नहीं लग पाया है।

Wednesday, September 02, 2015

लुधियाना के बैंकिंग क्षेत्र में भी हुयी ज़बरदस्त हड़ताल

Wed, Sep 2, 2015 at 1:59 PM
श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ फिर बुलंद हुयी देश की आवाज़ 
लुधियाना: 2 सितम्बर 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
स्थान था लुधियाना का भारतनगर चौंक में स्थित केनरा बैंक जहाँ गूँज रहा था आकाश जन विरोधी नीतियों के खिलाफ। 
मकसद था* कामगार विरोधी श्रम सुधारों का विरोध

                  * जनविरोधी बैंकिंग सुधारों का विरोध  

प्रमुख मांगें हैं:

* कामगार विरोधी श्रम सुधार रोके जायें
* जनविरोधी बैंकिंग सुधार रोके जायें
* कार्पोरेट ऋण चूककरर्ताओं द्वारा जनता के धन की लूट रोकी जाए
* बैंक ऋणों को जानबूझकर अदा न करना फौजदारी अपराध घोषित किया जाए
* बैंक कार्यों की आउटसोर्सिंग रोकी जाए
आल इंण्डिया बैंक इम्पलाईज़ एसोसिएशन (एआईबीईए), एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीओसी, एनओबीड्बल्यु, आईएनबीईएफ एवं एनओबीओ ने आज 2 सितंबर 2015 को केन्द्रीय सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरुद्ध हड़्ताल की । देश भर के 100 मिलीयन से अधिक मजदूर/कामगार आज राष्ट्रव्यापी हड़्ताल पर हैं । यह वर्तमान एन.डी.ए. सरकार की कामगार विरोधी नीतियों के विरोध में सबसे ताकतवर लड़ाई है । 
पंजाब बैंक इम्पलाईज़ फैडेरेशन (लुधियाना इकाई) ने आज एक दिवसीय हड़ताल की और केनरा बैंक, भारत नगर चौंक, लुधियाना के सामने जबरद्स्त प्रदर्शन किया । कामरेड पी.आर.मेहता, प्रधान, कामरेड नरेश गौड़, सचिव, कामरेड हरविन्द्र सिंह, सीनियर उप-प्रधान, कामरेड पवन ठाकुर, प्रधान, पंजाब बैंक इम्पलाईज़ फैडेरेशन (लुधियाना इकाई), कामरेड गुरमीत सिंह, कामरेड चिरंजीव जोशी, आल इंण्डिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन से एवं कामरेड डी.पी.मौड़, महा सचिव, ज्वाईंट काऊंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स ने बैंक कर्मचारियों को संबोधित  किया।
बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए फैडेरेशन के नेताओं ने कहा कि हम सभी को ज्ञात है कि कामगारों पर हमले बढ़ रहे हैं और श्रम संगठन अधिकारों पर और सुविधाओं पर हमले बढ़ रहे हैं तथा हमारे देश में मालिकों को सुविधाएं प्रोत्साहन और छूट बढाई जा रही है । विभिन्न श्रम कानूनों को मालिकों के पक्ष में संशोधित करने तथा मज़दूरों के विरुद्द करने के खुले प्रयास चल रहे हैं । नव उदार आर्थिक नीतियों न केवल कामगारों वरन जन सामान्य की समस्याएं भी बढा  रही हैं । सरकार के कुछ प्रस्तावों और नीतियों का प्रारुप इस प्रकार है - श्रम कानूनों को संशोधित कर मालिकों को ऐसी शक्तियां देना जिससे उन्हें "रखो और निकालो" का अधिकार मिल जाए, कामगारों और श्रम संगठनों को उनके अधिकारों से वंचित करना, रणनीतिक क्षेत्रों जैसे रेलवे, सुरक्षा और वित्तीय क्षेत्रों में निर्वात सीधा विदेशी निवेश, वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून में व्यापक परिवर्तन, कृषकों की भूमि व कृषि कामगारों के जीवन यापन के अधिकारों को व्यापक रुप से कुचलना और कटौती करने के प्रयास, ईपीएफ और ईएसआई योजनाएं एच्छिक बनाने का प्रस्ताव, मौलिक सामान्य सुरक्षा ढांचा, जो संगठित क्षेत्र को  उपलब्ध हैं, को तहस नहस करने का प्रयास इत्यादी ।      
बैंकिंग उद्दोग कोई अपवाद नहीं है । बैंकिंग उद्दोग में हमें पहले ही पता है कि सरकार अपने कथित सुधारों के निरंतर प्रयास आगे बढ़ा रही है, जिसकी कार्य सूची में प्राथमिकता के आधार पर बैंकों का निजीकरण सुदृढ़ीकरण और विलय आदि है । अधिक से अधिक निजी पूंजी और सीधे विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया  जा रहा है । क्षेत्रिय ग्रामीण बैंकों के निजीकरण का प्रयस चल रहा है और इस संदर्भ में हमारी यूनियनों के विरोध के बावजूद संसद में इस संदर्भ में विधेयक पारित कर दिया गया है । प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में (पीएसी) समेटे जाने के खतरे में है । शहरी साहकारी बैंक लाईसेंस समाप्त किये जाने के खतरे में हैं । निजी क्षेत्र के कार्यकारियों को सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में थोपा जा रहा है । बिना किसी ढांचागत सुविधा और कर्मचारियों के बढाए सरकारी नीतियों को सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों पर थोपा जा रहा है । बैंक अधिकारियों को काम के नियमित घंटों से वंचित किया जा रहा है । स्थाई और नियमित कार्यों को ठेका आधार पर आउट्सोर्स किया जा रहा है और ठेका कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है । सरकार अपनी कार्य सूची पर आगे बढ़ रही है और श्रम संगठनों से बिना समुचित विचार विमर्श किये बिना श्रम कानूनों को संशोधित करेगी । इस लिए यह आवशयक तथा अनिवार्य है कि सार्वभौम श्रम संगठन आंदोलन से जुड़ा जाए और सरकार की इन श्रम विरोधी नीतियों के विरुद्द अपना विरोध दर्ज किया जाए ।