Friday, September 25, 2015

बीजेपी ने आसान बैंक क़र्ज़ की घोषणा से दी अच्छे दिनों की दस्तक

पत्रकार भी ले सकेंगे आवश्यकता के अंसार लोन 
लुधियाना: 25 सितम्बर 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
आखिर तीखे विरोध और आलोचनायों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अच्छे दिनों की दस्तक देनी शुरू कर दी है। अपंजा हाथ जगन्नाथ की कहावत का महत्व समझते हुए आम कामगार तबके के लोगों की आर्थिक रीढ़ मज़बूत करने की ठानी है। अब उन्हें राष्ट्रिय बैंकों से अपना काम काज चलाने के लिए बिना किसी झंझट के आसान क़र्ज़ मिल सकेगा। 

भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए 2 अक्तूबर तक ‘लोन मेला’ सप्ताह मनाएगी। इस दौरान भाजपा के कार्यकत्र्ता गरीब व जरूरतमंद लोगों से मिलकर उन्हें बैंकों से लोन दिलाने का काम करेंगे।

प्रधानमंत्री मुद्रा बैंक योजना के पंजाब सह-प्रभारी व जिला प्रधान प्रवीण बांसल ने उक्त जानकारी यहां सर्कट हाऊस में पत्रकार सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत तीन प्रकार के लोन देने का प्रावधान है, जिनमें शिशु लोन 50 हजार रुपए, किशोर लोन, 5 लाख तथा तरुण लोन की सीमा 10 लाख रुपए है, जोकि गरीब, मध्यम व वर्ग के लोगों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि इस लोन के लिए आवेदनकत्र्ता को किसी प्रकार की गारंटी या जमानत नहीं देनी पड़ेगी केवल सरकार द्वारा जारी फार्म, अपना रिहायशी, आई.डी. प्रूफ व दो फोटो बैंक में देनी होगी और आपका लोन मंजूर हो जाएगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि यदि कोई बैंक अधिकारी लोन देने में आनाकानी करता है तो उसकी जानकारी भाजपा के इस योजना से जुड़े कार्यकत्र्ताओं को दी जाए ताकि उस अधिकारी के विरुद्ध सीनियर अधिकारियों को बताकर कार्रवाई की जा सके। इस अवसर पर योजना के जिला प्रभारी इंद्र अग्रवाल, प्रदेश सचिव जीवन गुप्ता, सुनील मोदगिल व मीडिया प्रभारी संजीव मल्होत्र भी मौजूद थे।

Thursday, September 24, 2015

आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए-मोदी

23-सितम्बर-2015 22:02 IST
डबलिन में भारतीय समुदाय स्वागत समारोह में प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ
आज पूरे विश्‍व में भारत के विकास की चर्चा हो रही है
आयरलैंड में बसे सभी भारतीयों को नमस्‍कार,  
मुझे सबसे पहले तो आप सबकी क्षमा मांगनी है, क्षमा इसलिए मांगनी है कि मुझे आपको ज्‍यादा time देना चाहिए था। बहुत लोगों की शिकायत है कि हमें आने के लिए admission नहीं मिला, प्रवेश नहीं मिला। अच्‍छा होता मैं जरा ज्‍यादा समय लेकर आया होता, तो यहां बसे हुए भारतीयों को बहुत बड़ी संख्‍या में मिल पाता। लेकिन मैं इतना कहूंगा कि यह शुभ शुरूआत है। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, शायद बहुत कम ऐसे होंगे, जिनको यह याद होगा कि कभी भारत के प्रधानमंत्री यहां आएं थे। क्‍योंकि मुझे बताया गया कि करीब 60 साल के बाद भारत के कोई प्रधानमंत्री यहां आए हैं। वैसे दिल्‍ली से न्‍यूयॉर्क तो हर बार जाना पड़ता है और आकाश में तो यहीं से गुजरते हैं। तो आप लोगों के प्‍यार ने मुझे खींच लिया, तो ऊपर से मैं नीचे आ गया। 
आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए
आज मेरी यहां के प्रधानमंत्री के साथ बड़ी विस्‍तार से बातें हुई है। अब बहुत समय कम था, लेकिन meeting बहुत बढि़या रही, इतने विषयों पर चर्चा हुई है। कितनी बातों पर सहमति का माहौल है। मैं समझता हूं कि आयरलैंड के साथ भारत के संबंध और अधिक गहरे होने चाहिए। अनेक विषयों के साथ जुड़े हुए होने चाहिए। और 2016 में आयरलैंड अपनी आजादी की शताब्‍दी मना रहा है, आजादी के संघर्ष की शताब्‍दी मना रहा है। भारत भी उसी समय आजादी का संघर्ष कर रहा था और एक प्रकार से भारत भी आजादी की लड़ाई लड़ता था, आयरलैंड भी आजादी की लड़ाई लड़ता था और सच में यह हमारी सांझी विरासत है। हम सोच रहे है कि यह 2016 का, आयरलैंड का आजादी का जो संग्राम है, इस शताब्‍दी में भारत भी भागीदार बने, भारत भी आयरलैंड हो। 
मानवता से जुड़ी हुई इन बातों में अपनी एक ताकत है
आयरलैंड और भारत की जो विशेषताएं हैं कुछ मूल्‍य बहुत किसी न किसी कारण से, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जैसे भारत में सत्‍य के लिए जीना-मरना। यह सदियों से हम सुनते आए हैं। एक आदर्श के लिए, विचार के लिए बलि चढ़ जाना। खुद को कष्‍ट देते हुए जीवन को समाप्‍त कर देना। यह हम सदियों से सुनते आए हैं, लेकिन कहते हैं 1920 में आयरलैंड में Hunger Strike हुआ और यहां के नागरिक ने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। यानि values हमारे कितने मिलते-जुलते होंगे, इसका अंदाजा लगा सकते हो आप। मानवता से जुड़ी हुई इन बातों में अपनी एक ताकत है। और हमारी कोशिश यही है उन्‍हीं चीजों को हम बल दे। 
....Secularism पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता
अब Irish बच्‍चे संस्‍कृत में मंत्रोच्‍चार कर रहे हैं, स्‍वागत गान गा रहे हैं। और वे रटे-रटाए शब्‍द बोल रहे थे, ऐसा मुझे नहीं लगा। किस शब्‍द में उनका क्‍या भाव था, वो भी अभिव्‍यक्‍त हो रहा था, मतलब उन्होंने इस बात को internalise कर लिया था। उनके जो भी शिक्षक इस काम को करते होंगे, मैं उनको बधाई देता हूं। लेकिन ये खुशी की बात है आयरलैंड में तो हम ये कर सकते हैं, लेकिन हिंदुस्तान में कुछ ऐसा करते तो पता नहीं, secularism पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता। 
भारत की मूल बातें विश्‍व स्‍वीकार करने लगा है
लेकिन इन दिनों बदलाव आ रहा है। आप देखिए योग, दुनिया उसको योगा कहती है। सारी दुनिया नाक पकड़ने लग गई है। विश्व के सभी देशों ने अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस मनाया। भारत के ये हजारों साल पुराना विज्ञान, आज holistic health care के लिए, preventive health care के लिए, एक बहुत बड़ी स्वीकार्य, स्वीकृत पद्धति के रूप में पूरे विश्व में फैल चुका है। और पहले हमारे यहां कल्पना क्या थी, अगर illness नहीं है, तो आप स्वस्थ हैं, अब ये विचार भारतीय चिंतन का नहीं है। illness नहीं, मतलब स्‍वस्‍थ! ये हमारी सोच नहीं है। हम उससे दो कदम आगे wellness की चर्चा करते हैं। हमारी कल्‍पना wellness थी और यही योगा उस wellness से जुड़ा हुआ है। सिर्फ रोग से मुक्‍त है, इसलिए आप स्‍वस्‍थ है ऐसा नहीं है। तो भारत की मूल बातें विश्‍व स्‍वीकार करने लगा है, लेकिन दुनिया तब स्‍वीकारती है जब भारत में दम हो। अगर भारत में दम नहीं हो, तो दुनिया क्‍यों पूछेगी भाई। 
‘एशिया की सदी’यार हो सकता है हिंदुस्‍तान की हो जाए
आज पूरे विश्‍व में भारत के विकास की चर्चा हो रही है। 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, यह सारी दुनिया ने मान लिया है। लेकिन 21वीं सदी ‘एशिया की सदी’, फिर धीरे-धीरे देखते हैं, तो उनको लगता है यार हो सकता है हिंदुस्‍तान की हो जाए। यह दुनिया मानने लगी। 
भारत दुनिया के बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy
एक BRICS concept आया 1980s में Brazil, Russia, India, South Africa, China, BRICS शब्‍द popular होगा। लेकिन कुछ वर्ष पहले कि B, R,C, S इनकी तो गाड़ी पटरी पर है। आई (I) जो है वो लुढ़क गया है। ऐसी चर्चा थी और लोग यहां तक कहते थे, शायद I (आई) इंडिया की जगह, I (आई) इंडोनेशिया ले लेगा। यह चर्चा थी। आज World Bank हो IMF हो Credit Rating Agencies हों, सब कह रहे हैं कि BRICS में अगर कोई ताकत वाला है, तो I (आई) है। सारी दुनिया की rating agencies कह रही है कि भारत दुनिया के बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली economy है, सबसे तेज, पूरी दुनिया में। 
30 साल में हिंदुस्‍तान में गरीबी का नामो-निशान नहीं रहेगा
अगर यह सिलसिला और आगे बढ़ा और ज्‍यादा नहीं 30 साल, 30 साल अगर हम इस ऊँचाई पर चलते रहे, तो हिंदुस्‍तान में गरीबी का नामो-निशान नहीं रहेगा। नौजवान को रोजगार मिलेगा, लेकिन 30 साल तक इस गति को बनाए रखना यह बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन यह चुनौती हम पार कर पाएंगे, क्‍योंकि हम एक ऐसी ताकत के कालखंड में हैं, जिसकी हमने कभी कल्‍पना तक नहीं की है। और वो है 65 प्रतिशत जनसंख्‍या हिंदुस्‍तान की, 35 साल से कम उम्र की है। भारत नौजवान है, भारत नौजवानों का है और भारत नौजवानों की ताकत पर बनने वाला है। यह जो सामर्थ्य मिला है, यह next 30 years का सपना पूरा कर सकता है। 
अब किसी भारतीय को सर झुकाने के दिन नहीं हैं
देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार कर रहा है। सभी क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ाने के लिए सफल बनाने के प्रयास हो रहे हैं। और विश्‍वभर में फैले हुए भारतीय जन भी आज सीना तान करके, आँख में आँख मिला करके दुनिया के साथ भारत की बात करने लगे हैं। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है। अब किसी भारतीय को सर झुकाने के दिन नहीं हैं, सीना तानकर के खड़े रहने का दिन है। और यही बड़ी ताकत होती है, यही बड़ी ताकत होती है। 
भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में अब 60 साल नहीं लगेंगे
मैं आप सबको मुझे मिलने का मुझे अवसर मिला, मैं आपका बहुत ही, और इस समय में भी क्योंकि मेरा कार्यक्रम बहुत कम समय में बना। इतनी बड़ी संख्या में आप लोग आए और मुझे आपके Ambassador कह रहे थे कि, इतनी मारामारी चल रही है कि हम किस को रोके, किसको लाएं, ज्यादा समय मिला होता तो अच्छा होता, लेकिन फिर भी मैंने पहले कहा है ऐसे कि ये एक शुभ शुरुआत है, ये रिश्ता और...और नाता जुड़ता रहेगा और भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में अब 60 साल नहीं लगेंगे, ये मैं विश्वास दिलाता हूं आपको। 
बहुत-बहुत धन्यवाद। 

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अतुल कुमार तिवारी/अमित कुमार/मुस्तकीम खान/तारा

Monday, September 21, 2015

समाज की सोच में बदलाव महिला सुरक्षा के लिए महत्‍वपूर्ण--किरेन रिजिजू

21-सितम्बर-2015 19:17 IST

महिलाओं के विरूद्ध अपराध की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि
गृह राज्‍य मंत्री ने दक्षिण एशियाई महिला शांति और सुरक्षा सम्‍मेलन का उद्घाटन किया

नई दिल्ली: 21 सितम्बर 2015: (पीआईबी):
केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा में सुधार लाने के लिए समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना चाहिए। दक्षिण एशियाई महिला शांति और सुरक्षा सम्‍मेलन में आज यहां भारत, बांग्‍लादेश, नेपाल, फिलीपिन्‍स और म्‍यामार से आये प्रतिनिधियों को सम्‍बोधित करते हुए श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस त्रासदी को दूर करने में केवल सरकार, न्‍यायपालिका और पुलिस के प्रयास ही काफी नहीं होंगे। देश में महिला-पुरूष आधारित भेदभाव और असमानता काफी गंभीर समस्‍या है। उन्‍होंने कहा कि मैं कल्‍पना भी नहीं कर सकता कि 21वीं सदी में भी महिलाओं को ऐसी यातनायें दी जा रही हैं। 

हाल के वर्षों में महिलाओं के विरूद्ध अपराध की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि होने के बारे में चर्चा करते हुए श्री रिजिजू ने कहा कि कानूनी प्रावधानों को सख्‍त बनाये जाने के कारण ऐसी घटनायें अधिक संख्‍या में दर्ज की जा रही हैं और केवल ऐसे अपराधों का पंजीकरण अनिवार्य कर देना ही मददगार नहीं होगा। उन्‍होंने कहा कि मुख्‍य बात यह है कि ऐसी घटनायें हो रही है और धरातल पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के विरूद्ध अपराध होना गहरी सामाजिक समस्‍या का परिणाम है और ऐसा देश प्रगति का दावा नहीं कर सकता, जहां समाज में महिलायें सुरक्षित न हों। यह कोई पुरूष अथवा महिला का प्रश्‍न नहीं है, बल्कि यह एक मानवता का विषय है। उन्‍होंने कहा कि इस समस्‍या के समाधान के लिए समुदाय, परिवार के सदस्‍यों को संवेदनशील बनाने की आवश्‍यकता है और इस समस्‍या का समाधान हम में से प्रत्‍येक के भीतर है। 

इस बात की चर्चा करते हुए कि भारत महिलाओं की समानता पर आधारित विभिन्‍न क्षेत्रीय और वैश्विक संधियों का हस्‍ताक्षरकर्ता है, श्री रिजिजू ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और समानता के मुद्दे पर भारत के पास जिस प्रकार के अस्‍पष्‍ट और सशक्‍त वैधानिक प्रावधान हैं, उतना अन्‍य किसी देश के पास नहीं हैं। भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई वैधानिक प्रावधान तो हैं, किन्‍तु समाज की सोच में यह समस्‍या ग्रसित है। उन्‍होंने कहा कि हमें एक साथ आकर सामूहिक तौर पर इस समस्‍या का समाधान ढूंढ़ना है। 

अपने भाषण के अंत में श्री रिजिजू ने कहा कि इन मुद्दों पर एकजुटता दर्शाने के लिए मैं यहां आया हूं। कृपया मुझे अपने आंदोलन का हिस्‍सा मानें। इन देशों में महिलाओं के लिए महिलाओं के लिए शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए। 

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एसकेएस/जीआरएस-4628