Saturday, December 17, 2011

सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में नमस्तक हुए गायक मलकीत सिंह

 धार्मिक गीतों की कामयाबी के लिए की अरदास 
  गजिंदर सिंह किंग//अमृतसर// 16 दिसम्बर,2011//
पंजाबी गीतो के मशहूर तूतक तूतिया वाले गायक मलकीत सिंह आज सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में नमस्तक हुए, उन्होंने आपनी आने वाली नई धार्मिक गीतों की एलबम की कामयाबी के लिए सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में नमस्तक हो कर माथा टेक गुरु घर का आशीर्वाद लेकर नई धार्मिक गीतों की एलबम की गीतों की कामयाबी की अरदास की.  
      आज सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में पंजाबी गीतो के मशहूर तूतक तूतिया वाले गायक मलकीत सिंह ने आपनी आने वाली नई धार्मिक गीतों की एलबम की कामयाबी के लिए सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब में नमस्तक हो कर माथा टेक गुरु घर का आशीर्वाद लिया और नई धार्मिक गीतों की एलबम की गीतों की कामयाबी के लिए गुरु घर में अरदास की, इस दौरान मीडिया से बात करते हुए गायक मलकीत सिंह ने आपनी नई धार्मिक गीतों की एलबम के गीतों बारे जानकारी देते हुए बताया, कि पहली बार हमने नई धार्मिक गीतों की एलबम के अभी दो गीत गाए है, और पहले भी धार्मिक गीत गाए है, लेकिन उस समय गीतों की वीडियो शूट नहीं होती थी और इस बार नई दो धार्मिक गीतों की वीडियो शूट सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब और नादेड साहिब होगी और पुराने धार्मिक गीतों की वीडियो शूट करे गे, उन्होंने एक धार्मिक गीत आपनी नई धार्मिक गीतों की एलबम से कुछ लाइने गा कर सुनाई और कहा, कि अलग-अलग गुरु साहिबान और धार्मिक इतिहास बारे अलग-अलग ढंग से धार्मिक गीत गा-कर लोगो को समझाया गया है, कि किस तरह सब धर्मो के गुरु साहिबान का इतिहास है, उन्होंने आपनी एक और नई कल्चर और भांगड़े वाली गीतों की कैसेट बारे बताया, कि वह कैसेट लन्दन में रिकाडिंग होने वाली है, जो कि वैसाखी में रिलीज होगी, उन्होंने माँ के गीतों बारे हस कर कहा, कि माँ के ऊपर हमने बहुत से गीत गाए है, लेकिन इस बार मैने डैडी के ऊपर भी गीत गाया है और वह गीत भी लोग माँ के गीतों जैसे डैडी का गीत भी पसंद करेगे    

Thursday, December 15, 2011

अब बहुत से और लोग भी जान पायेंगे सिख इतिहास

कैबनेट मंत्री गाबड़िया ने की  पांच सरोवर यात्रा योजना की शुरूयात 
गजिंदर सिंह किंग//अमृतसर//14 दिसम्बर//
पंजाब हैरीटेज टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड द्वारा शुरू की गई पांच सरोवर यात्रा के तहत देश-विदेश से आए श्रद्धालु सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन के साथ-साथ इन पांच सरोवर के इतिहास, सिख धर्म और विरसे पर जानकारी देने के लिए नए कदम उठाए गए है, जिनका उदघाटन पंजाब के जेल, सैर सपाटा, सभ्याचार मामले, और छपाई-लिखित समाग्री मंत्री सरदार हीरा सिंह गाबड़ीया ने अपने शुभ कर कमलो द्वारा किया और पांच सरोवरों की यात्रा की.
        अमृतसर सिखों का एक तीर्थ स्थान है और यहा पर हर धर्म, हर जाति के लोग सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब और इस पवित्र शहर के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से आते है, इस शहर में एक दर्जन से ज्यादा गुरूद्वारे है, इन गुरुद्वारों में से पांच सरोवर और गुरुद्वारे ख़ास महत्व रखते है, यात्रा विभाग पंजाब द्वारा पांच सरोवार यात्रा के तहत देश-विदेश से आए श्रद्धालु सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब के दर्शन के साथ-साथ इस पवित्र यात्रा के द्वारा देश-विदेश के श्रद्धालुओ को इन पांच सरोवर के इतिहास की जानकारी और सिख धर्म और विरसे पर जानकारी देने के लिए एक नया कदम उठाया है, यह पवित्र यात्रा श्री गुरुद्वारा संतोखसर साहिब जी के सरोवर से शुरू हो कर गुरुद्वारा सारागडी साहिब जी और जलिया वाला बाग़ से होती हुई श्री गुरुद्वारा बिबेकसर जी सरोवर, श्री गुरुद्वारा राम सर सरोवर, श्री गुरुद्वारा माता कोलसर साहिब जी सरोवर के दर्शन कर यह यात्रा सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब जी के लंगर घर और रामगाड़ीया बुगे से होती हुई सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब जी के अमृत सरोवर तक सम्पन होगी,  आज इसका उदघाट्न टाउन हाल से पंजाब के जेल, सैर सपाटा, सभ्याचार मामले, और छपाई-लिखित समाग्री मंत्री सरदार हीरा सिंह गाबड़ीया ने अपने शुभ कमलो द्वारा कर पांच सरोवार यात्रा की शुरुआत श्री गुरुद्वारा संतोखसर साहिब जी के सरोवर से शुरू कर श्री गुरुद्वारा संतोखसर साहिब में नमस्तक होकर माथा टेक गुरु घर का आशीर्वाद लिया और यहा से यात्रा शुरू कर सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब जी के अमृत सरोवर तक कर सच्च्खंड श्री हरि मंदिर साहिब जी की परिक्रमा कर गुरु घर में नमस्तक होकर माथा टेक गुरु घर का आशीर्वाद लेकर सम्पन की, इस दौरान उन्होंने पांच सरोवर यात्रा बारे जानकारी देते हुए बताया, कि पंजाब की धरती बहुत महान है, क्योंकि पंजाब की धरती ने तीन इतिहास लिखे है, पहला गुरु इतिहास दूसरा सिख इतिहास और तीसरा देश की आजादी का इतिहास है, उन्होंने कहा, कि देश-विदेश से लोग सच्च्खंड श्री हरिमंदिर साहिब जी के दर्शन कर चले जाते थे, लेकिन इस पांच सरोवर बारे उन्हें मालूम नहीं था, जिस कारण यह पांच सरोवर यात्रा पंजाब हैरीटेज टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड ने शुरू की है, जिसे पांच सरोवर के इतिहास, सिख धर्म और विरसे बारे उन्हें जानकारी मिलेगी और सिख इतिहास के साथ जुड़ेगे.

Monday, December 12, 2011

धोखों के बाद भी इरादे बुलंद हैं..//...राजीव गुप्ता

इंटरनेट की दुनिया को नियंत्रण करने की नाकाम कोशिश
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को ही छीनने का  कुकृत्य
Photo courtesy UN Multimedia
जब आप सच्चे दिल से किसी चीज को पाने का दृढ निश्चय कर लेते हैं तथा उसे पाने के लिए अपना कदम आगे बढ़ा देते हैं तो सबसे पहले आपकी दृढ़ता को ईश्वर द्वारा अनेकों कसौटियों पर परखा जाता हैं और अगर आप उन कसौटियों पर खरे उतर जाते है तो पूरी कायनात आपके साथ कदम से कदम मिलाकर एक ऐसे अभेद्य कारवां का निर्माण कर देती है जिसे भेदने की कोशिश कर रहे विरोधी मुंह की खा जाते हैं या यूँ कहे कि उनका हर तीखा वार मीठा बन कर उन पर ही उल्टा पड़ जाता है ! वर्तमान समय में जन लोकपाल की लड़ाई लड़ रहे श्री अन्ना हजारे-टीम ने इस बात को सिद्ध कर दिया हैं !
सरकार द्वारा बार- बार उन पर आक्रमण होता है, उनके पर कतरने की नाकाम कोशिश सरकार द्वारा होती रहती है! रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के ऊपर पुलिसिया कार्यवाही के बाद  १६ अगस्त, 2011 को किस प्रकार सरकार के वकील मंत्रियों के दमन-चक्र द्वारा आन्दोलन को कुचलने का दुस्साहस किया गया जनता अभी इसे ठीक से भूली भी नहीं थी कि दूर-संचार मंत्री श्री कपिल सिब्बल ने एस.एम्.एस भेजने की सीमा तय कर और  इंटरनेट की दुनिया को नियंत्रण करने की नाकाम कोशिश कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को ही छीनने का जो कुकृत्य किया गया तथा स्थाई समिति की रिपोर्ट के माध्यम से सरकार द्वारा जनता को धोखा देकर जो वादा-खिलाफी की गयी उन सब बातों का जबाब देने के लिए  ११ दिसंबर , २०११ को जंतर-मंतर पर उमड़ा जन सैलाब सरकार की चूलें हिलाने के लिए काफी था  ! 

इस बार अन्ना - टीम ने अपनी रणनीति में थोडा बदल कर राजनैतिक पार्टियों को भी संवाद के लिए अपने मंच पर बुलाकर एक स्वस्थ लोकतंत्र की मर्यादा को बरकरार रखा जो कि स्वागत योग्य है ! कुछ मुद्दों को छोड़कर लगभग वहां पर उपस्थित सभी राजनैतिक दलों ने अन्ना-टीम की हाँ में हाँ मिलाते हुए  एक सशक्त लोकपाल लाने का आश्वासन दिया जो कि अन्ना-टीम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ! जनता दल यूनाइटेड को छोड़कर बीजेपी समेत लगभग सभी राजनीतक दलों ने एक सुर में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की बात कही , वही ग्रुप सी के कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाने पर लगभग सहमति दिखी परन्तु सिटीजन चार्टर , सीबीआई और न्यायपालिका को लोकपाल के अंतर्गत लाने पर थोडा मतभेद भी था जो कि बाद में ख़त्म हो सकता है !  

टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल के अनुसार 'स्टैंडिंग कमिटी में 30 सदस्य हैं !  2 सदस्यों ने कभी इसमें हिस्सा नहीं लिया !  16 सदस्य इससे असहमत हैं, इसलिए इस रिपोर्ट को सिर्फ 12 सदस्यों की सहमति हासिल है !  7 कांग्रेस के हैं, इसके अलावा लालू प्रसाद यादव, अमर सिंह और मायावती की बीएसपी के सदस्य हैं ! ' उन्होंने कहा, 'इस रिपोर्ट की यही विश्वसनीयता है !' परन्तु यहाँ मुद्दा विश्वसनीयता का नहीं अपितु सरकार की नियति का है क्योंकि परेशानी तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब सरकार  अपने किये हुए वादे से मुकर जाय क्योंकि मामला यहाँ जन - भावना का है ! इतिहास साक्षी है कि जब सत्ता के मद में चूर सरकार अपनी हठधर्मिता से  जन - भावनाओं को अनसुना कर उसे बार - बार आहत करती है तो निश्चित रूप से वो अपनी कब्र खोद लेती है ! आपातकालीन के समय श्री जय प्रकाश ने रामलीला मैदान से सरकार को ललकार कहा था कि " सिंहासन खाली करो कि जनता आती है " क्योंकि उस समय सत्ता के मद में अंधी सरकार को संसद और सड़क के शोर में फर्क नहीं दिखाई पड़ रहा था ! सरकार को यही एहसास दिलाने के लिए जनता - जनार्दन ने जंतर - मंतर से एक बार फिर आगे के आन्दोलन के लिए हुंकार भरी ! 

लोकतंत्र की बुनियादी आदर्श के मुताबिक कोई भी सरकार स्वयं  सत्ता का स्रोत न होकर जनता के निर्णय को असली जामा पहनाने वाली अर्थात  कानून बनाने  वाली एक अधिकृत संस्था मात्र है इससे ज्यादा कुछ नहीं ! यह कहना सत्य है कि राज्य नागरिक समाज से ही बनता है ! इसलिए मूल तो नागरिक समाज ही है और राज्य नागरिक - समाज को चलाने  की व्यवस्था मात्र ! परन्तु सत्ता में बैठे उन लोगों को यह बात नहीं समझ आती !  मै सत्ता में बैठे लोगों से यह पूछना चाहता हूँ कि जब  हर दफ्तर लूट का अड्डा बन गया हो  , हर सरकारी काम बिना घूस  ( अभी हाल में ही मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर निगम के एक चपरासी के निवास से बरामद लगभग चार करोड़ की संपत्ति इसका ताजा उदहारण है ) के न हो सकता हो , बड़ी रिश्वत, बड़ा कमीशन, और बड़ा हिस्सा टैक्स चोरी  का अगर देश की सीमा से बाहर जाता हो  या देश के काले तहखानों में छुपा कर  रख दिया जाता हो  तो क्या देश के नागरिकों को यह अधिकार नहीं कि वो जनता के प्रतिनिधियों से यह सवाल करे या भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाये तथा देश के बाहर गए काले धन को  वापस लाने एवं उसे राष्ट्र सम्पति घोषित करने की मांग करे  ? क्या यह सच नहीं है आज नगर पंचायत से लेकर संसद तक लोकतंत्र नहीं लूटतंत्र बन गया है ? 

यह बात खुद कई राजनेता भी मान चुके है योजनाओं का पूरा पैसा कभी भी जनता के पास नहीं पहुंचता और तो और संसद में नोट के बदले वोट और यहाँ तक कि पैसे लेकर बदले में  संसद में प्रश्न  तक पूछा जाता है ! भ्रष्टाचार का सरकार को और क्या प्रमाण चाहिए ? मुझे लगता है सरकार नीतियों में नहीं अपनी नीयत  पर ज्यादा  ध्यान दे !    जब - जब लोकतंत्र की नैतिक शक्ति का चीर-हरण होगा तब तब जनता अपनी आवाज उठाती रहेगी, चाहे प्रतिनिधि कोई भी हो ! मुझे किसी की कही हुई पंक्तियाँ याद आती हैं  कि -
"सुविधाओं में बिके हुए लोग, कोहनियों पर टिके हुए लोग !
     बरगद की बात करते है
गमलों में उगे हुए लोग !!"
राजीव गुप्ता (लेखक)
 9811558925 
भारत का यह दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद बहुत से दूरदर्शी राजनेताओं की उपस्थिति के बावजूद सत्ताधारी वो बने जिनका आम जनता से दूर - दूर तक कोई सरोकार नहीं था ! परिणामतः आज तक हम उनकी अदूरदर्शिता के द्वारा लिए गए भारत - विकास के निर्णय से हो रहे असंतुलित विकास को भुगत रहे हैं जिससे आज भारत दो भागों  अर्थात ग्रामीण और शहरी भारत में बंट गया है ! जिसे श्री अन्ना हजारे  ने जंतर-मंतर के अपने सांकेतिक धरने के माध्यम से सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात कर अर्थात ग्राम-संसद की बात की जिसकी वकालत गांधी जी ने बहुत पहले ही की थी जो कि स्वागत योग्य है ! इसके साथ - साथ चुनाव सुधार की तरफ उनके  आन्दोलन का अगला कदम होगा ! इन सब उठापटक के  बीच सरकार अब अपनी हठधर्मिता छोड़कर देश के भले के बारे में सोचे और जनता से किये हुए अपनों वादों को पूरा करने की हिम्मत दिखाए तो शायद देश जापान से भी कई गुना ज्यादा तरक्की कर सकता हैं और जनता भी उनके वादा-खिलाफी को भूल जायेगी !


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