Saturday, September 07, 2013

मदरसे आतंक की फेक्ट्री और अपने आश्रम संस्कृति के जनक?

एक छोटी सी पोस्ट से सोचने को मजबूर करते कामरेड मिश्रा 
Comrade Aman Mishra Dyfi ने सात सितम्बर की शाम को करीब पांच बजे फेसबुक पर बहुत ही स्पष्ट शब्दों में एक संक्षिप्त सी रिपोर्ट पोस्ट की है जो बहुत कुछ कहती है। हो सकता है आप इससे सहमत न हो लेकिन इसमें जो मुद्दे उठाये गए हैं वे आप सबका ध्यान मांगते हैं….वे हम सब को झंक्झौरते हैं---वे हम सब से सवाल पूछते हैं.……आखिर कहाँ जा रहे हैं हम ? जालंधर में कई बरस पूर्व एक वरिष्ठ पत्रकार भरपूर सिंह बलबीर एक शेयर अक्सर सुनाया करते---
झुक का सलाम करने में क्या हर्ज है मगर; 
सर इतना मत झुकाओ कि दस्तार गिर पड़े !
सरकार की और से लगातार लग रहे कर, लगातार बढ़ रही महंगाई, लगातार बढ़ रही बेरोज़गारी ने हमें बस दो वक्त की रोटी के चक्कर में घूमने वाला कोहलू का बैल बना दिया है। आँखें हमारी बंद हो गई हैं और अक्ल के नाम पर भेजे में कुछ बचने ही नहीं दिया गया। हम संघर्षों की राह छोड़ कर उन लोगों को भगवान बना बैठे हैं जिनके कारनामे कहते सुनते भी श्रम आती है। कामरेड मिश्रा ने इनकी चर्चा बहुत ही सभ्यक शब्दों में की है। इस पोस्ट पर आपके विचारों की इंतज़ार रहेगी। पोस्ट का शीर्षक है:: ‘बाबा सरणम गच्छामी
आसाराम समझ गया कि देश और हिन्दू मूर्ख है सो करो मनमानी
बीजेपी ने भी अपना जनाधार बनाने के लिए ‘बाबा सरणम गच्छामी” की माला जपना शुरू किया । राजनीतिक लोग और मीडिया भी आश्रमो को कवर करने लगे । धार्मिक टीवी चेनलों ने बाबावों को बुलंदियों पे छड़ा दिया । धीरे धीरे इन बाबावों को अभिमान होने लगा कि इनके अंधे अनुयाई कुछ भी करने को तयार है तो बाबा लोग भी सेक्स का लुफ्त लेने लगे । बाबा कि मंच पे जय जय कार होने लगी। बाबा मंच से कुछ भी बोले ,जय जैकार होना तय था। मंच से कथा कहानिया ,चुट्कुले , संगीत नाच, आयुर्वेदिक दवा , भूत प्रेत भगाना, राजनीतिक भाषण ,औरतों से आँख मटक्का , होली के रसिया ,रंग गुलाल सब चलने लगा। आश्रम अब ‘धार्मिक मनोरंजन’ मे तब्दील हो गए। वीकेंड मे पिकनिक पे ना जाकर लोग आश्रमों कि और दोड़ने लगे। एक धार्मिक सम्मोहन हो गया । जो लोग आश्रमों मे नहीं गए उनको उकसाया जाता कि आश्रम मे चलो। हम लोग मुसलमानो के मदरसों को आतंक की फेक्ट्री बताने लगे पर अपने आश्रमो को संस्कृति के जनक समझने लगे । आश्रमो मे धीरे धीरे सेक्स की माया काम देव आ गए। कुछ लोग बाबा बन कर सेक्स रेकेट ही चलाने लगे। साई मंदिर, राम मंदिर के तहख़ानो मे ही सेक्स की दुकान सजने लगी। आसाराम और नाराइन साई भी मोका ताड़ कर बदलते चले गए। मंच पे मेकअप कराकर आने लगे। अलग अलग पौशाके पहन कर लोगो मे एक सम्मोहन पैदा करने लगे। आचार्य रजनीश टाइप की टोपी पहने लगे । पब्लिक, आसाराम और नारायण साई के पीछे पागलों की तरह दोड्ने लगी। अनुयाई किसी चमत्कार के उम्मीद मे पगला गए। पहले गॉडमेन माना फिर गॉड ही मान लिया। भक्ति मे बावले हो गए और आशु सिंधी को भगवान ही मान लिया । आसाराम समझ गया कि देश और हिन्दू मूर्ख है सो करो मनमानी। 16 साल लड़किया कि डिमांड करने लगा और वो कच्चा गोस्त (कमसिन लड़कियां ) का शौकीन हो गया । उसके प्यादे लड़की सप्लाइ करने लगे और अनुयाई समझे बाबा लीला कर रहे है । अब उस फर्जी और फरेबी आसाराम की पोल खुल गयी।


आईए गणेश चतुर्थी पर कला और मेहनत को सलाम करना सीखें

Sat, Sep 7, 2013 at 3:15 PM                              इस कला और त्यौहार से सबंधित वीडियो देखने के लिए क्लिक करें 
गणेश चतुर्थी को लेकर हर और उत्साह व हर्षोउल्लास 
गणेश चतुर्थी के लिए गणेश की मूर्तियों को रंग दे रहे कारीगर
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): पूरे देश में इस समय गणेश चतुर्थी की धूम मची हुई है। हर और जोश है, ख़ुशी है, उत्साह है। गणपति बप्पा को हर कोई अपने घर में ले जाना चाहता है। हो सकता है कि आपके लिए गणेश जी की मूर्ति केवल मूर्ति मात्र ही हो और विसर्जन के बाद घर लौटते लौटते आप इसे में ही भूल जायें लेकिन जो कलाकार इन मूर्तियों को बना कर अपने रंगों की कला से  इन्हें सजीव बनाते हैं उनके लिए ये मूर्तियाँ भगवान से कम नहीं होती। वे पूरा बरस इस दिन की इंतज़ार करते हैं। न जाने अपने खंडन और बिरादरी की कितनी पुश्तों से रंगों की इस साधना और श्रद्धा से गणेश जी की मूर्तियों में रंग भर रहे यह कारीगर बहुत ही श्रद्धा और प्रेम से इस काम को कर रहे हैं। इन सभी के परिवारों को एक नई ज़िन्दगी मिलती है इस पावन पर्व पर। गणेश चतुर्थी के लिए इन मूर्तियों को रंग से भर रहे इन कारीगरों का कहना है कि उनके घर का चूल्हाचौका इन मूर्तियों के बिकने पर ही निर्भर करता है। कई पीढ़ियों से इस काम में जुटे कारीगरों का कहना है कि वे दीवाली, गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा आदि पर्वों के आने से पहले ही इन मूर्तियों का निर्माण करना शुरू कर देते हैं, ताकि समय आने पर लोग इन मूर्तियों को खरीद कर अपने घरों में स्थापित कर सकें। उनके मुताबिक उनकी ओर से तैयार की गई मूर्तियों की कीमत डेढ़ हजार से लेकर ढाई हजार रुपये तक होती है और ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से खरीद कर ले जाते हैं। गणेश जी अपने इस मूर्ती रूप में आकर भी अपने इन ईमानदार मेहनती भक्तों का आर्थिक उद्धार भी करते हैं और मेहनत का फल देकर उनके दिल और दिमाग में भी एक अलौकिक सी ख़ुशी भर देते हैं जो केवल श्रद्धा से मेहनत करने पर ही मिल सकती है। अपने धन दौलत और पद के अहंकार से भरे लोग मन्दिर में आकर भी इस ख़ुशी को हासिल नहीं कर पाते। वे सच्ची कृपा से वंचित रह जाते हैं। गणेश जी अपने इन मेहनती भक्तों की मेहनत और कला के सामने सारी दुनिया को झुका लेते हैं साबित करते हैं की जे तू मेरा हो रहे तो सब जग तेरा होए ! इस लिए आयें भगवान् के इस भव्य संकेत को समझें-इस बार गणेश चतुर्थी पर इन श्रमिकों का सम्मान करना सीखें। मेहनत को सलाम करना सीखें। यही नहीं खुद भी केवल मेहनत की रोटी कमाना सीखें।   
--------------------------------

लोकसभा ने पारित किया स्‍ट्रीट वेंडर्स विधेयक 2012

06-सितम्बर-2013 19:13 IST
 इसमें है जीविका सुरक्षा तथा स्‍ट्रीट वेंडिंग विनियम का प्रावधान 
नई दिल्ली: 6 सितम्बर 2013: (पीआईबी): लोकसभा ने आज लोकसभा ने स्‍ट्रीट वेंडर्स (जीविका सुरक्षा तथा स्‍ट्रीट वेंडिंग विनियम) विधेयक 2012 पारित कर दिया। विधेयक में स्‍ट्रीट वेंडरों के जीविका अधिकार, उनकी सामाजिक सुरक्षा, देश में शहरी स्‍ट्रीट वेंडिंग का विनियमन तथा इनसे जुड़े मामलों का प्रावधान है।
     आवास तथा शहरी उपशमन मंत्री डॉक्‍टर गिरिजा व्‍यास ने सदन के विचार के लिए विधेयक प्रस्‍तुत करते हुए कहा कि स्‍ट्रीट वेंडर्स शहरी अर्थव्‍यवस्‍था के प्रमुख अंग होते हैं। यह न केवल स्‍व-रोजगार का साधन है बल्कि शहरी आबादी को विशेषकर आम आदमी को वहन करने योग्‍य लागत तथा सुविधा के साथ सेवा देना भी है। स्‍ट्रीट वेंडर्स वो लोग होते हैं जो औपचारिक क्षेत्र में नियमित काम नहीं पा सकते क्‍योंकि उनका शिक्षा और कौशल का स्‍तर बहुत ही कम होता है। वे अपनी जीविका की समस्‍या मामूली वित्‍तीय संसाधन और परिश्रम से दूर करते हैं।
     शहरीकरण और शहरी क्षेत्र में हुए विकास के कारण स्‍ट्रीट वेंडरों की आबादी बढ़ सकती है। डॉक्‍टर व्‍यास ने कहा कि यह महत्‍वपूर्ण है कि वेंडरों को जीवनयापन के लिए अच्‍छा और प्रताड़ना रहित माहौल उपलब्‍ध कराया जाए। 11वीं और 12वी पंचवर्षीय योजना में समावेशी विकास रणनीति के तहत स्‍ट्रीट वेंडरों के आर्थिक विकास की परिकल्‍पना की गयी है।
     स्‍ट्रीट वेंडर्स (जीविका सुरक्षा तथा स्‍ट्रीट वेंडिंग विनियम) विधेयक 2012 की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं -
     विधेयक के प्रावधानों का उद्देश्‍य स्‍ट्रीट वेंडरों को उचित और पारदर्शी माहौल में बिना किसी भय प्रताड़ना के कारोबार करने का माहौल तैयार करना है।
1. विधेयक में प्रत्‍येक स्‍थानीय क्षेत्र में शहरी वेंडिंग प्राधिकार के गठन का प्रावधान है। यह बिल के प्रावधानों को लागू करने की धुरी है।
2. स्‍ट्रीट वेंडिंग से जुड़ी गतिविधियों जैसे बाजार का निर्धारण, वेंडिंग क्षेत्र की पहचान, स्‍ट्रीट वेंडिंग योजना की तैयारी तथा स्‍ट्रीट वेंडरों के सर्वेक्षण में भागीदारी पूर्वक निर्णय लेने के लिए टाउन वेंर्डिंग कमेटी (टीवीसी) में अधिकारियों, गैर-अधिकारियों, महिला वेंडर सहित वेंडरों के प्रतिनिधित्‍व की आवश्‍यकता है, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्ग तथा अशक्‍त लोगों का प्रतिनिधित्‍व हो। विधेयक में यह व्‍यवस्‍था है कि टीवीसी के 40 प्रतिशत सदस्‍य चुनाव के जरिए स्‍ट्रीट वेंडरों में से ही होंगे। इनमें से एक तिहाई महिलाएं हों।

3. बिल में सभी वर्तमान स्‍ट्रीट वेंडरों के सर्वेक्षण और प्रत्‍येक पांच वर्ष में पुनर्सर्वेक्षण की व्‍यवस्‍था है, जिसमें सर्वे में चिह्नित स्‍ट्रीट वेंडरों को प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्‍य पिछड़े वर्ग तथा अशक्‍त लोगों की प्राथमिकता की बात भी है।

4. सर्वे में चिह्नित सभी वर्तमान स्‍ट्रीट वेंडरों को वेंडिंग क्षेत्र में शामिल किए जाएंगे, शर्त यह है कि वार्ड या क्षेत्र या शहर की आबादी का 2.5  प्रतिशत वेंडिंग जोन हो।

5. वेंडिंग जोन की क्षमता से अधिक जहां चिह्नित स्‍ट्रीट वेंडर्स हैं वहां टीवीसी लॉटरी निकालकर उस वेंडिंग जोन के लिए प्रमाणपत्र जारी करेगी। शेष बचे लोगों को पड़ोस के वेंडिंग जोन में समायोजित किया जाएगा।

6. इस कानून के प्रभाव में आने के पहले जिन्‍हें वेंडिंग सर्टिफिकेट/लाइसेंस जारी किए गए हैं वे सर्टिफिकेट में दर्ज अवधि तक उस श्रेणी के स्‍ट्रीट वेंडर माने जाएंगे।

7. बिल में यह व्‍यवस्‍था है कि सर्वे पूरा होने तथा स्‍ट्रीट वेंडरों को सर्टिफिकेट जारी होने तक किसी भी स्‍ट्रीट वेंडर को उस स्‍थान से हटाया नहीं जाएगा।

8. यदि किसी रेहड़ी पटरी और खोमचे वाले को प्रमाणपत्र जारी किया गया है और उसका निधन हो जाता है या वह बीमार है या वह स्‍थाई रूप से अशक्‍त हो जाता है तो उसके परिवार के सदस्‍य यानी उसकी पत्‍नी या निर्भर बच्‍चे को रेहड़ी पटरी और खोमचे चलाने का अधिकार होगा। यह अधिकार तब तक होगा जब तक प्रमाणपत्र की वैधता है।

9. इस तरह विधेयक में रेहड़ी पटरी और खोमचे वालों को परेशानी से सुरक्षित रखने तथा उसकी जीविका को बढ़ावा देने का उपाय कर सबको शामिल किया गया है।

10. विधेयक में स्‍थान बदलने, स्‍थान से हटाने और सामान की जब्‍ती को निर्दिष्‍ट किया गया है और यह रेहड़ी पटरी और खोमचे वालों के लिए सुलभ है। स्‍थानीय अधिकारियों द्वारा रेहड़ी पटरी और खोमचे वाले को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर भेजने के मामले में टीवीसी की सिफारिश का प्रावधान है।

11. रेहडी-पटरी वालों का स्‍थान में परिवर्तन अंतिम उपाय के रूप में होगा। इसी तरह रेहडी-पटरी वालों को एक स्‍थान से हटाकर दूसरे स्‍थान पर ले जाने के मामले में विधेयक की दूसरी अनुसूची में व्‍यवस्‍था है। इस व्‍यवस्‍था के तहत कहा गया है कि विस्‍थापन जहां तक संभव हो टाला जाना चाहिए, विस्‍थापन के काम को लागू करने में रेहडी-पटरी वालो तथा उनके प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए, उनका विस्‍थापन इस तरह किया जाना चाहिए ताकि वे अपनी आजीविका और जीवन स्‍तर को सुधार सकें और पहली जगह के बराबर वास्‍तव में काम-काज कर सकें। जिस बाजार में रेहडी-पटरी वाले 50 वर्ष से ऊपर अपना कारोबार कर रहे हैं उस बाजार को विरासत बाजार घोषित किया जाना चाहिए और इन बाजारों के रेहडी-पटरी विस्‍थापित नहीं किया जाना चाहिए।


12) जरूरत है कि टीवीसी की सिफारिश पर शहरी स्ट्रीट वेंडरों के लिए पर्याप्त जगह और अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय अधिकारी 5 सालों में एक बार योजना बनाएं ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें. यह खास तौर से इस बात का प्रावधान करता है कि नो-वेंडर क्षेत्र की घोषणा खास नियमों के आधार पर की जाए, जैसे - सर्वेक्षण के तहत चिन्हित् कोई मौजूदा प्राकृतिक बाजार, या मौजूदा सामान्य बाजार को नो-वेंडिग जोन घोषित नहीं किया जाएगाः नो वेंडिगं जोन इस तरह से बनाया जाएगा जिससे कम से कम संख्या में स्ट्रीट वेंडरों को विस्थापित किया जाए- नो वेंडिंग जोन की घोषणा तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि सर्वेक्षण नहीं किया जाए. इस प्रकार, हम देख सकते हैं कि यह विधेयक स्ट्रीट वेंडरों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा करता है.


13)विधेयक का जोर ‘प्राकृतिक बाजार’ पर है जिसे विधेयक के भीतर परिभाषित किया गया है. विधेयक में प्रावधान है कि पूरी योजना इस बात को सुनिश्चित करे कि स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह या क्षेत्र की व्यवस्था उचित हो और प्राकृतिक बाजार के स्वभाव के अनुरुप हो. इस तरह, प्राकृतिक स्थान, जहां खरीददार और दूकानदार का निरंतर मिलना होता है, उसे विधेयक में संरक्षित किया गया है.

14)   विधेयक में स्ट्रीट वेंडर की शिकायतों को दूर करने के दिशा में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सेवानिवृत न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विवाद निवारण तंत्र की स्थापना का प्रावधान है.

15)  यह विधेयक जब्त की गई विनाशशील और गैरविनाशशील वस्तुओं को छुड़ाने के लिए निश्चित समय अवधि प्रदान करती है. विनाशशील वस्तुओं के मामले में, स्थानीय अधिकारी को दो कामकाजी दिनों में माल को छोड़ना होगा और नष्ट होने वाली वस्तुओं के मामले में उसी दिन उस माल को छोड़ना होगा, जिस दिन दावा किया गया है.

16) इस विधेयक में स्ट्रीट वेंडरों के लिए सरकार द्वारा किए जाने वासे रहे प्रोत्साहन उपायों, कर्जे की उपलब्धता, बीमा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अन्य कल्याणकारी योजनाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रावधान किया गया है.

17) विधेयक की धारा 29 स्ट्रीट वेंडरों के पुलिस और अन्य अधिकारियों के उत्पीड़न से संरक्षण प्रदान करती है और यह अधिभावी धारा का प्रावधान करती है जो सुनिश्चित करता है कि वे किसी अन्य कानून के तहत भी बिना किसी उत्पीड़न के भय से अपना काम करें.

18) यह विधेयक विशेष तौर से इस बात का प्रावधान करता है कि विधेयक के तहत नियमों को इसके प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर अधिसूचित किया जाना जरूरी होगा. और योजना के कार्यान्वयन में देरी को रोकने के लिए इसके प्रारंभ होने के छह महीने के भीतर अधिसूचित करना होगा.
विधेयक का उद्देश्य स्ट्रीट वेंडरों के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है ताकि वे अपना काम गरिमा के साथ कर सके. यह विधेयक लगभग एक करोड़ परिवारों को आजीविका की सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया है.


पृष्ठभूमि

ग्रामीण समाज में रेहड़ी-पटरी वालों के महत्वपूर्ण योगदान के मद्देनजर तथा उन्हें जनता को कोई बाधा पहुंचाए बिना तथा कानून के समक्ष नागरिकों को बराबरी एवं कोई भी कारोबार करने के अधिकार के बारे में भारत के संविधान की भावना के अनुसार सम्मानित कार्य के लिए माहौल बनाने के जरिए सम्मानित आजीविका कमाने में समर्थ बनाने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेता नीति, 2004 संशोधित की है तथा राष्ट्रीय शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेता नीति, 2009 बनाई है।

     23 फरवरी, 2009 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद कार्यान्वयन के लिए संशोधित नीति सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्रसारित की गई। संशोधित नीति में बिना किसी शोषण के ईमानदारी से जीवन जीने में रेहड़ी-पटरी वालों को समर्थ बनाने के लिए कानूनी ढांचे की जरूरत रेखांकित की गई थी। तदनुसार भारत सरकार ने मॉडल रेहड़ी-पटरी विक्रेता (आजीविका का संरक्षण रेहड़ी-पटरी विक्रय का नियमन) विधेयक, 2009 तैयार किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23 फरवरी, 2009 को इस मॉडल विधेयक को मंजूरी दी और इस विषय पर विचार जानने के लिए सभी राज्यों को प्रसारित किया गया।

    आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय को केंद्रीय कानून बनाने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और उनके संगठनों से निरंतर अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो। इसलिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के योगदान को राष्ट्रीय मान्यता देने के लिए तथा सभी राज्यों में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए कानूनी ढांचे में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रय के लिए केंद्रीय कानून बनाने की आवश्कता समझी गई।

     रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए राष्ट्रीय नीति और कानून बनाने की जरूरत पर 4 से 5 मार्च, 2011 को पटना में क्षेत्रीय विचार-विमर्श का अयोजन किया गया। इसी सिलसिले में 24 सितंबर, 2011 को मुंबई में और 18 नवंबर, 2011 को दिल्ली में विचार-विमर्श किया गया। इनमें राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, स्वयं सेवी संगठनों, सिविल  सोसायटी, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की एसोसिएशन के सदस्य शामिल हुए।

     23 दिसंबर, 2011 को दिल्ली में राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया ताकि विभिन्न हितधारकों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के संगठनों के प्रतिनिधियों के विचार और दृष्टिकोण एवं सुझावों की जानकारी हो सके।

     तदनुसार नया कानून बनाने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेता (आजीविका का संरक्षण तथा रेहड़ी-पटरी विक्रय का नियमन) विधेयक, 2012 तैयार किया गया। यह विधेयक देश में आजीविका अधिकारों की सुरक्षा, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की सामाजिक सुरक्षा, शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के नियमन और उनसे संबंधित मामलों के बारे में सुरक्षा उपलब्ध कराता है।

     विधेयक का मसौदा 29.02.2012 को टिप्पणियों के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रसारित किया गया। 28 अप्रैल, 2012 को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आवास/ग्रामीण विकास मंत्रालयों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी इस पर विचार-विमर्श किया गया और इसे व्यापक समर्थन मिला।

      रेहड़ी-पटरी विक्रेता (आजीविका का संरक्षण तथा रेहड़ी-पटरी विक्रय का नियमन) विधेयक, 2012 को 17 अगस्त, 2012 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी तथा 6 सितंबर, 2012 को इसे लोकसभा में पेश किया गया।

     यह विधेयक 10 सितंबर, 2012 को ग्रामीण विकास संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया। समिति ने यह विधेयक अपनी 23वीं रिपोर्ट के साथ लोक सभा को भेज दिया। 13 मार्च, 2013 को इसे राज्य सभा में पटल पर रखा गया। 

     स्थायी समिति ने इस विधेयक में 26 सिफारिशें की। मंत्रालय ने उन सिफारिशों पर विचार किया और 17 सिफारिशें पूरी तरह स्वीकार कर ली, 3 सिफारिशें आंशिक रूप से या संशोधन के साथ स्वीकार की गईं तथा 6 सिफारिशें स्वीकार नहीं करने का प्रस्ताव है। (PIB)

***
वि. कासोटिया/गांधी/दयाशंकर - 6050

लुधियाना पुलिस ने नाकाम किया फिरौती का प्रयास

कर्ज़ के बोझ से घबरा कर अपनाया जुर्म का रास्ता 
लुधियाना: 6 सितम्बर 2013: (विशाल//पंजाब स्क्रीन): किसी फ़िल्मी कहानी की तरह कर्ज में डूबे एक व्यक्ति ने किडनी न बिकने पर दो डाक्टरों को एमएमएस भेज 50 लाख रुपये की फिरौती मांग ली। एसएमएस में उसने फिरौती न देने पर जान से मारने की धमकी भी दे दी। आरोपी ने बॉस के नाम पर दोनों डाक्टरों से फिरौती मांगी थी। इन दोनों डाक्टरों ने इसकी शिकायत थाना सराभा नगर पुलिस से कर दी। इस पर सीआइए स्टाफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल बरामद कर लिया है। वहीं पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ करनी शुरू कर दी है। फ़िल्मी सी लगने वाली यह कहानी वास्तव में जिंदगी की  हकीकत से भी रूब्र्रो कराती है की अगर कर्ज़ का बोझ बढ़ जाये तो कीर्तन करता हुआ एक इंसान कीर्तन और धर्म कर्म को छोड़ कर जुर्म की राह पर भी कदम रख सकता है। 
इसका विवरण देते हुए पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह गिल ने बताया कि विशाल नगर निवासी डॉ. विकास गुप्ता और उसकी पत्नी एक किडनी अस्पताल में काम करते हैं। चार अगस्त को उन्हें एसएमएस आया कि आरोपी को किसी बॉस ने उनकी हत्या करने की 25 लाख रुपये की फिरौती दी है। इसलिए वह उसे रात साढ़े तीन बजे तक 50 लाख रुपये की फिरौती दे दें अन्यथा अपनी जान से हाथ धोने के लिए तैयार रहे। इसी प्रकार का एक एसएमएस फील्डगंज निवासी डाक्टर गगनदीप सिंह को भी भेज दिया गया। गिल ने बताया कि शिकायत मिलते ही सीआइए पुलिस ने जांच कर संगरूर स्थित लोंगोवाल निवासी जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जो बातें सामने आई उनसे सभी दंग रह गए। 

पुलिस को पूछताछ के दौरान जसविंदर ने बताया कि वह एमए पास है और कंप्यूटर का भी मास्टर है। इसके अतिरिक्त जसविंदर सिंह एक गुरुद्वारा में कीर्तन भी करता है और गुरबानी का  भी है। गिल ने बताया कि संकट के किसी समय पर जसविंदर सिंह ने अपने ससुरालियों से दो फीसद पर 20 लाख रुपये ब्याज पर लिया है। ससुरालियों को पैसे वापस न होने के कारण जसविंदर सिंह ने अपनी एक किडनी बेचने का फैसला किया। इसके लिए वह डॉ. विकास के पास भी गया। मगर डॉ. विकास ने उसकी किडनी लेने से मना कर दिया। इसके बाद जसविंदर दो सप्ताह तक पैसे इक्ट्ठे करने की योजना बनाता रहा और उसके बाद उसने फिरौती लेने की योजना बना ली। पुलिस ने आरोपी जसविंदर सिंह से मोबाइल फोन बरामद कर पूछताछ करनी शुरू कर दी है।

जाली सिम लेकर किया था फिरौती का एसएमएस
पढा लिखा होने के कारण वह इतना शातिर भी निकला कि डाक्टर से फिरौती मांगने के लिए आरोपी जसविंदर ने सबसे पहले जाली प्रूफ लगा एक सिम लिया। उसके बाद आरोपी ने अपने पुराने मोबाइल में सिम डालकर दोनों डाक्टरों को फिरौती का एसएमएस कर दिया। एसएमएस करने के बाद आरोपी जसविंदर ने सिम को नहर में फैंक दिया।  होशियारियों के बावजूद उसने गलती की और  अपने इसी मोबाईल में अपना पुराना सिम डाल लिया। बस उसकी यही चूक उसे ले डूबी और पुलिस का शिकंजा उस तक पहुँच गया। 

मोबाइल ने ही पहुंचाया आरोपी तक
अपराधी कितना ही शातिर क्यूँ न हो पर वह कोई न कोई गलती तो कर ही लेता है। आरोपी जसविंदर ने मोबाइल से फिरौती भरा एसएमएस करने के बाद नए सिम को तो नहर में फैंक दिया लेकिन उसके बाद उसी मोबाइल में अपना पुराना सिम डाल लिया, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके। कहते हैं की कानून के हाथ लम्बे होते हैं और पुलिस मोबाइल फोन के जरिए ही आरोपी तक पहुंच गई और उसको गिरफ्तार कर लिया। 

Friday, September 06, 2013

राष्‍ट्रपति ने 336 शिक्षकों को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया

05-सितम्बर-2013 19:02 IST
शिक्षकों से कहा भारत को अगले स्‍वर्ण युग में ले जाने के लिए दृढ़ रहें
इस ऐतिहासिक सम्मान को प्राप्त करती चंडीगढ़ की सुश्री उपदेश कौर    (फोट:पीआईबी )
नई दिल्ली: 5 सितम्बर 2013: (पीआईबी): राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने 336 शिक्षकों को उनके उल्‍लेखनीय योगदान के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया। आज नई दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक समारोह में उन्‍होंने शिक्षकों से कहा कि वे भारत को अगले स्‍वर्ण युग में ले जाने के लिए दृढ़ रहें। राष्‍ट्र निर्माण में शि‍क्षकों की भूमिका स्‍व‍ीकार करते हुए उन्‍होंने ऐसी शिक्षा व्‍यवस्‍था की जरूरत पर जोर दिया जिसमें बच्‍चे पूछताछ की भावना, सहिष्‍णुता और स्‍व‍स्‍थ वाद-विवाद की क्षमता विकसित कर सकें। उन्‍होंने कहा कि ठोस शिक्षा प्रणाली विकास का अधिकार है। ज्ञान के क्षेत्र में देश के गौरवपूर्ण अतीत याद दिलाते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत की ऐसी स्थिति इसलिए थी क्‍योंकि समाज में शिक्षकों को आदर दिया जाता था। राष्‍ट्रपति ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि लड़कियों को शिक्षा देने से मना करना सबसे दुखद पहलू है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारा लक्ष्‍य 'सबके लिए ज्ञान और ज्ञान के लिए सभी' होना चाहिए। 

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री डॉक्‍टर एमएम पल्‍लम राजू कहा कि योग्‍यता सम्‍पन्‍न शिक्षकों की भर्ती, शिक्षा क्षेत्र में प्रतिभा सम्‍पन्‍न लोगों को लाने तथा स्‍कूलों और कॉलेजों में शिक्षा के स्‍तर को सुधारने के मकसद से शिक्षकों तथा शिक्षण पर राष्‍ट्रीय मिशन की शुरूआत शीघ्र की जाएगी। राष्‍ट्रीय मिशन में शिक्षकों का पेशेवर कैडर बनाया जाएगा, उनके प्रदर्शन का मानक तैयार होगा तथा उनके पेशेवर विकास के लिए श्रेष्‍ठ संस्‍थागत सुविधाएं दी जाएगी। 

मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री श्री जितीन प्रसाद ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान की सफलता से माध्‍यमिक शिक्षा की मांग बढ़ी है। शिक्षा को सर्वाधिक मूल्‍यवान प्राकृतिक संसाधन मानते हुए उन्‍होंने कहा कि सरकार सभी बच्‍चों को शिक्षा देने के लिए कृत संकल्‍प है। मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ शशि थरूर ने याद दिलाया की वर्तमान राष्‍ट्रपति ने पहले मंत्री रहते हुए शिक्षा क्षेत्र को भरपूर समर्थन दिया था। समारोह में 177 प्राइमरी शिक्षकों तथा 140 माध्‍यमिक शिक्षकों को सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर संस्‍कृत के 6 शि‍क्षकों तथा 4 मदरसा शिक्षकों को भी सम्‍मानित किया गया। 

देश के दूसरे राष्‍ट्रपति डॉ एस राधाकृष्‍णन का जन्‍म दिवस 5 सितम्‍बर देश भर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉ एस राधाकृष्‍णन महान विद्वान और दार्शनिक थे। शिक्षकों को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित करने का प्रचलन 1958 से शुरू हुआ और इसका उद्देश्‍य शिक्षकों के सम्‍मान को बढ़ाना था। प्रत्‍येक पुरस्‍कार के तहत एक प्रमाण-पत्र, एक रजत पदक तथा 25 हजार रूपये नकद दिये जाते है। (PIB)

-***-

यह भारत देश है मेरा?

जहाँ हर इक गली के मोड़ पर खुलता दारू वाला ठेका 
लुधियाना,5 सितंबर 2013: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): यह समझना मुश्किल है कि बार बार नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाली सरकारें शराब के मामले मैं आकर आँखें क्यूं मूँद लेती हैं? कभी किसी स्कूल की दीवार में जगह तलाश कर शराब का ठेका खुल जाता है, कभी किसी मन्दिर के पास और कभी किसी गुरूद्वारे के पास। रिहायशी इलाके न्यू कुंदनपुरी में भी  कुछ ऐसा ही हुआ। मंदिर के ऐन निकट शराब का ठेका खोल दिया गया। ठेका खुला तो लोगों ने विरोध भी किया और जब विरोध बढ़ा तो ठेके बंद लेकिन कुछ ही दिनों के बाद ठेका फिर शुरू। लोग फिर संघर्ष की राह पर और शराब का ठेका खोले जाने का विरोध लगातार जारी है। बुधवार को ठेका बंद करवाने की मांग को लेकर इलाका निवासियों ने ठेके के बाहर प्रदर्शन किया था और अधिकारियों के साथ फोन पर संपर्क करना चाहा पर सफलता नहीं मिली। राज नहीं सेवा का नारा लगाने वाली सर्कार के अफसर फोन सुनने से भी कतराने लगे। जब इलाका निवासियों की सुनवाई नहीं हुई, तो लोगों ने देर रात डिस्ट्रिक्ट एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर (डी.ई.टी.सी.) ऋषिपाल की कोठी का घेराव कर दिया। शायद लोगों के पास कोई और चारा भी नहीं था। पुलिस के आलाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे वरुण मेहता के मुताबिक कृष्णा मंदिर के निकट करीब पांच दिन पहले गलत ढंग तरीके से ठेका खोल दिया गया। लोगों ने पांच दिन पहले विरोध कर ठेका बंद ही करवा दिया था पर समस्या हल नहीं हुई। गुरूवार की शाम को ठेका फिर खोल दिया गया। इलाका निवासियों ने ठेका बंद कराने के लिए यहां प्रदर्शन कर विभागीय अधिकारियों के साथ फोन पर संपर्क भी करना चाहा। किंतु अधिकारियों ने उनका फोन रिसीव नहीं किया। इसलिए उन्हें मजबूरन देर रात अपनी आवाज अफसरों तक पहुंचाने के लिए डी.ई.टी.सी. की कोठी का घेराव कर प्रदर्शन करना पड़ा। बस डी.ई.टी.सी. की कोठी के बाहर प्रदर्शन होने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन फानन में तीन थानों के एस.एच.ओ. और आलाधिकारियों ने मौके पर पहुंच प्रदर्शनकारियों को शांत किया। फिलहाल अफसरों ने ठेका बंद करवा दिया है। किंतु इस समस्या का स्थायी हल निकालने के लिए अधिकारियों ने जांच कराने का समय मांगा है। इस रोष प्रदर्शन में मुस्लिम वैल्फेयर के प्रधान अब्बदुल शाकुर, मौजूदा पार्षद जय प्रकाश, पूर्व पार्षद अवतार कृष्ण तारी और कई अन्य भी लोग भी मौजूद थे।लोग जानना चाहते हैं कि अपनी कमाई की खातिर सरकार जगह जगह शराब के ठेके क्यूँ खोले जा रही है? धन और तरीकों से भी कमाया जा सकता है इसके लिए अपने ही देश की जनता को नशे किम लत लगाना आवश्यक क्यूं? 
यह भारत देश है मेरा? जहाँ हर इक गली के मोड़ पर खुलता दारू वाला ठेका 
न्यू कुंदनपुरी लुधियाना में शराब का ठेका विवाद 

Thursday, September 05, 2013

शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार

05-सितम्बर-2013 17:02 ISTराष्‍ट्रपति ने किया पुरस्कार से सम्‍मानित किया 
माननीय राष्ट्रपति के हाथों इस गौरवशाली पुरस्कार को प्राप्त करती  हुई चंडीगढ़  सुश्री उपदेश कौर  (PIB)
नई दिल्ली: 5 सितंबर 2013: (पीआईबी): राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में देशभर के चयनित शिक्षकों को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया। 
इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि ठोस शिक्षा प्रणाली प्रबुद्ध समाज की रीढ़ है। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा वह आधार है, जिस पर प्रगति‍शील और लोकतांत्रिक समाज खड़ा होता है और जहां कानून का शासन चलता है और समाज के लोग एक दूसरे के अधिकारों को सम्‍मान देते हैं। 

श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विकास का अर्थ लोगों से है, लोगों के मूल्‍यों से तथा सांस्‍कृतिक विरासत के प्रति आस्‍था से है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि मूल्‍यों को आकार देने के लिए शिक्षा की भूमिका महत्‍वपूर्ण होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि नैतिक क्षितिज बढ़ाने के लिए शिक्षकों की भूमिका अति महत्‍वपूर्ण है। राष्‍ट्रपति ने कहा कि युवाओं में सभ्‍यता से उपजे मूल्‍य भरना शिक्षकों का दायित्‍व है। 

राष्‍ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्‍ता की लगातार समीक्षा के लिए हमें एक प्रणाली विकसित करनी होगी। हमारे शैक्षणिक संस्‍थानों में ऐसे शिक्षक हैं, जो युवाओं के विचारों को नया रूप से दे सकते हैं। शब्‍दों और कर्मों के जरिए ऐसे शिक्षक विद्यार्थियों को प्रेरित करने के साथ-साथ उन्‍हें कार्य कुशलता और सोच के नये स्‍तर पर ले जा सकते हैं। 

इस अवसर पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एम एम पल्‍लम राजू, मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री श्री जितीन प्रसाद और मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ. शशि थरूर भी उपस्थित थे।(PIB)

वि.कासोटिया/गांधी/तारा – 6033

अमृतसर से किया जा रहा है सौतेला व्यवहार- नवजोत सिंह सिद्धू

Thu, Sep 5, 2013 at 4:47 PM
सारे पंजाब में हुआ विकास पर अमृतसर में नहीं-सिद्धू की सीधी बात 
*वही प्रोजेक्ट अमृतसर के बजाए कहीं अन्य जिलों में तो चालू कर दिए गए, लेकिन अमृतसर में वे प्रोजेक्ट आज भी ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं* अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पैसों से कहीं और विकास कार्य करवाए जा रहे हैं*नगर निगम अमृतसर के पास भी फंड की कमी 
मीडिया के सम्मुख नवजोत सिंह सिद्धू के अलग अलग अंदाज़: सभी तस्वीरें: गजिंद्र सिंह किंग //पंजाब स्क्रीन 
अमृतसर: 5 सितंबर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): करीब डेढ़ वर्ष तक अमृतसर से दूर रहे नवजोत सिंह सिद्धू को गुरु नगरी वापस लौटते ही अमृतसर के समूचे विकास की याद आ गई है। आज अपने निवास स्थान पर की गई प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने गुरु नगरी के विभिन्न विकास कार्यों के न होने और राज्य सरकार की ओर से अमृतसर के लिए फंड न मुहैया कराए जाने को लेकर जहां केंद्र सरकार पर निशाना लगाया, वहीं उन्होंने पंजाब सरकार पर सवालिया निशान खड़े किए। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, कि उन्होंने राजनीति सिर्फ मिशन के लिए शुरू की थी और उनके मन में हमेशा यही था कि अमृतसर जहां रोजाना करीब सवा लाख श्रद्धालु नतमस्तक होने के लिए आते हैं, उसे दुनिया के नक्शे में चमकाया जाए ताकि लोग न सिर्फ अमृतसर बल्कि इससे पूरे पंजाब की एक अलग छवि बना कर दूसरों के सामने पेश करें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, कि कई तरह के प्रोजेक्ट जो गुरु नगरी अमृतसर के लिए शुरू हुए थे, पर वही प्रोजेक्ट अमृतसर के बजाए कहीं अन्य जिलों में तो चालू कर दिए गए, लेकिन अमृतसर में वे प्रोजेक्ट आज भी ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं।
              सांसद सिद्धू ने कहा, कि अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को गुरु नगरी अमृतसर में विकास कार्य करने चाहिए। लेकिन अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पैसों से कहीं और विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने अप्रत्यक्ष रूप से पंजाब सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि अमृतसर के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। नगर निगम अमृतसर के पास जरूरी मशीनरी और अन्य साजो-सामान खरीदने के लिए फंड की कमी है, लेकिन उन्हें फंड मुहैया नहीं कराए जा रहे। उनके मुताबिक उनके कई प्रोजेक्ट जैसे सिटी बस सर्विस, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट आदि अधर में पड़े हुए हैं। सिद्धू ने स्पष्ट किया, कि उन्होंने राजनीति मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से सीखी है। चरित्र और नैतिकता के आधार पर उन्होंने केस में सजा होने के बाद इस्तीफा दे दिया था। लेकिन आज उन्हें दुख इस बात का है कि वह अमृतसर के लिए कुछ नहीं कर पाए हैं। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को भी घेरे में लेते हुए कहा, कि प्रधानमंत्री का संबंध चाहे अमृतसर के साथ हैं, लेकिन अमृतसर के विकास के लिए जब भी उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा, तो उन्हें समय नहीं दिया गया।
             चुनाव से पूर्व होने वाले विकास कार्यों पर सवालिया निशान खड़े करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, कि जब पंजाब में विधानसभा चुनाव होने थे, तो चुनाव से ठीक पहले विकास कार्यों की झड़ी लगा दी गई थी। उस समय फंड की कोई कमी नहीं थी। लेकिन अब जबकि लोकसभा चुनाव सिर पर हैं, तो फंड की कमी बता कर विकास कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। एमपी लैड फंड के पैसे जो उन्होंने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को विकास के लिए दिए थे, उन्हें भी रीलिज नहीं किया जा रहा।

यदि गठबंधन मेरी बलि मांगती है, तो मैं तैयार हूं-नवजोत सिंह सिद्धू

खोखली विकास दर का भारत सरकार खूब प्रचार कर रही थी

Wed, Sep 4, 2013 at 12:12 PM                       
INDIA: रूपए के इस संकट की जड़ों पर भी जाईये!
नदियों से पानी व रेत लूटी गयी:पहाड़ों को डुबोया व खोखला किया गया
An Article by the Asian Human Rights Commission                            By---सचिन कुमार जैन
*2 करोड़ एकड़ कृषि और कृषि योग्य भूमि का उपयोग बदल दिया गया
 *10 लाख हेक्टेयर जंगल कम हो गया
*3 बड़ी कम्पनियाँ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 80000 हेक्टेयर जमीन पर खुद खेती कर रही हैं
*दूसरी तरफ 2.90 लाख किसान आत्महत्या कर चुके 
*देश की हर नदी प्रदूषित कर दी गयी
हम सब अखबार में पढ़ रहे हैं कि शेयर बाज़ार गिर रहा है, रूपया गिर रहा है, निर्यात घट रहा है, विदेशी मुद्रा का भण्डार खाली हो रहा है; मैं थोडा नासमझ हूँ. मेरा सवाल यह है कि पिछले 22 सालों में हमने जो विकास किया, अपने जो संसाधन विकास के नाम पर लुटाए, कारपोरेटों को राजस्व में छूट दी; वह सब कहाँ गया? घाटे की अर्थव्यावस्था को अभिव्यक्त कई बिन्दुओं से समझा जा सकता है. भारत की मौजूदा स्थिति में यह दिखा रहा है कि विदेशी निवेशक अब देश से अपना निवेश निकाल रहे हैं. उनका कहना है कि भारत में निवेश के लिए सकारात्मक माहौल नहीं है. कुडनकुलम से लेकर नियमागिरी से संघर्षों से यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि हम एक सुसुप्त लोकतंत्र में नहीं रहते हैं. 12 ग्राम सभाओं ने बता दिया है कि उनकी और भारत की सरकारों की प्राथमिकताएं अलग हैं. इससे उन निवेशकों को पता चल रहा है कि यहाँ संसाधनों पर कब्ज़ा करना अब आसान नहीं रह गया है. बहरहाल तेलंगाना, जम्मू और आसाम में जो हालात बने हुए हैं, उनसे यह संकेत भी गया है कि देश में अभी अशांति का माहौल है; जबकि निवेश के लिए शान्ति होना जरूरी है. इन परिस्थितियों में पिछले कुछ दिनों में 50 हज़ार करोड़ रूपए की बिकवाली विदेशी निवेशकों ने की है.

घाटे की स्थिति को हम आयात-निर्यात संतुलन से भी जांचते हैं. आयात बहुत संकट पैदा नहीं करता यदि हमने अपने देश के भीतर की अर्थव्यवस्था को सम्मान दिया होता. अपने लघु वनउपज, अपना हस्तशिल्प, अपनी देशी कपडा संस्कृति, अपना पर्यावरण, अपनी नदियाँ...इस्बसे ज्यादा पाने खेत और किसान. किसी भी अर्थ व्यवस्था की ताकत उसकी भीतरी अर्थव्यवस्था होता है. हमने उस ताकत को तोड़ दिया है. यही कारण है कि हम आज अपना कुछ निर्यात कर पाने में सक्षम नहीं रह गए हैं. इतना ही नहीं हमने अपनी ताकत, यानी आपनी प्राकृतिक सम्पदा को बेंचना शुरू कर दिया. अपनी जमीन के भीतर दबी सम्पदा को बेतरतीब ढंग से लूट गया. नदियों से पानी और रेट लूटी गयी, पहाड़ों को डुबोया और खोखला किया गया, कोयला तो इतना निकला की अब अच्छी गुणवत्ता का कोयला बचा ही नहीं है. देश के लोगों, किसानों की जमीने और आदिवासियों से जंगल छीने और बड़ी कंपनियों और अमेरिका-यूरोपीय देशों को बेंचा. आज 3 बड़ी कम्पनियाँ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 80000 हेक्टेयर जमीन पर खुद खेती कर रही हैं. दूसरी तरफ 2.90 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं. इससे सरकार और बाज़ार को जो पैसा मिला उसे वे अपने विकास के मानक के रूप में पेश करते हैं.

आज जब हम यह कहते हैं की भुगतान संतुलन की स्थिति गड़बड़ा रही है, तो इसका मतलब ही यही होता है कि आयात ज्यादा हो रहा है और निर्यात कम. यह अंतर जितना बढ़ता जाएगा, अब संकट भी उतना ही बढेगा. आपको यह भी जान लेना चाहिए कि 1951 में भारत का आयात 608 करोड़ रूपए का था और निर्यात भी 608 करोड़ का. शायद तब हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया में उतनी विश्वसनीय नहीं थी कि हम अपने विदेशी मुद्रा भंडार को पूरा दाँव पर लगा कर जरूरतों को पूरा करते; पर वहीँ एक मौका भी था कि हम. एक देश के रूप में पेट्रोलियम, बिजली, विलसित की वस्तुओं की वास्तविक जरूरतों का भी आंकलन करते और उन्हें सीमित रखते हुए विकास की नीतिगत परिभाषा बनाते. पर हमने तय किया कि हम अपनी जरूरतों को असीमित सीमा तक बढ़ाएंगे और उन्हे पूरा करने के लिए प्राकृतिक संसाधनों से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था तक सबकी बलि लेते जायेंगे.

इस दौर में 2 करोड़ एकड़ कृषि और कृषि योग्य भूमि का उपयोग बदल दिया गया. 10 लाख हेक्टेयर जंगल कम हो गया और देश की हर नदी प्रदूषित कर दी गयी. इसके बाद भी हम वही आर्थिक विकास चाहते हैं जो हमें गुलामी से निकलने नहीं देता. सिर्फ एक उदाहरण देखिये. वर्ष 2010 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आये थे, तब मीडिया तो यह कह रहा था कि भारत एक महाशक्ति बन गया है इसलिए ओबामा आये हैं. पर यह सच नहीं था. वे तो अपनी अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी के संकट से उबारने के लिए भारत से संसाधन लूटने आये थे. उस यात्रा के दौरान ही खुदरा बाज़ार में 100 फीसदी विदेशी निवेश की नीति लागू करने का भारत पर दबाव बढ़ा. उन्होने तीन दिन में अमेरिकी बैंकों से भारत की 10 बड़ी कंपनियों को 30 बिलियन डालर रूपए का क़र्ज़ दिलवाया ताकि उनके बैंकों को बाज़ार मिले. रूपए के मुकाबले डालर की कीमत के बढने के कारण यह क़र्ज़ बढ़ कर 35 बिलियन डालर हो गया है. इस क़र्ज़ को देने के बाद उन्होने भारतीय कंपनियों से कहा कि वे अमेरिकी कम्पनिओं से ही खरीदी करें. इससे बोईंग, जनरल इलेक्ट्रिक, डूपों को 20 हज़ार करोड़ रूपए का कारोबार मिला. ओबामा उस यात्रा में अमेरिका के लिए 50 हज़ार रोज़गार और 70 अरब रूपए का निवेश लेकर गए थे. वर्ष 2012-13 में अमेरिका सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था में 700 बिलियन डालर डाले हैं. वह क़र्ज़ सस्ते कर रहा है ताकि देश की भीतर निवेश बढे. भारत सरकार ने 2005 से 2012 तक बाज़ार को 29 लाख करोड़ की राजस्व छूट दी, पर किसानों को अब केवल क़र्ज़ मिलता है. पिछले 5 सालों में कृषि के लिए 12 लाख करोड़ का क़र्ज़ दिया गया है. सब्सिडी मिलती है – कारों के लिए, किसानों के लिए नहीं.

अमेरिका की अर्थनीतियों के कारण भारत में निवेश बढ़ा, जब 2008 में अमेरिका में मंदी आने लगी तब वहां ब्याज दरें बढ़ने लगीं। विदेशी निवेशकों ने भारत के बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। इससे बैंकों में भी धन कम होने लगा। यह एक बनावटी वृद्धि थी। इस खोखली विकास दर का भारत सरकार खूब प्रचार कर रही थी। कर्ज देना तो आसान था, पर कर्ज चुकाना कई कारकों पर निर्भर करता है। जिनमें से एक है, अच्छा और सुनिश्चित रोजगार। कंपनियों ने अपनी उत्पादन लागत कम करने के लिए कामगारों की छटनी की, जिससे रोजगार में असुरक्षा बढ़ी। ऐसी स्थिति में जिन लोगों ने कर्ज लिया था, उन्हें कर्ज चुकाना भारी पड़ने लगा, जिससे अनुत्पादक सम्पत्तियां यानी एनपीए बढ़ा। भारत में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रूपए का कर्ज वापस नहीं आया है। यह याद रखिए कि कर्ज वापस नहीं लौटाने वालों में बड़े उद्योगपति और पूंजीपति सबसे केंद्रीय भूमिका में हैं।

आखिर में थोड़ी आंकड़ों में बात करते हैं. 1951 में हम 5.08 करोड़ टन खाद्यान उत्पादन करते थे. यह अब 5 गुना बढ़ कर 25.74 करोड़ टन हो गया है. परन्तु 1951 में स्टील उत्पादन केवल 10 लाख टन होता था, जो अब 82 गुना बढ़कर 8.28 करोड़ टन हो गया है. सीमेंट 27 लाख टन बनती थी. इसमे 85 गुना बढौतरी हुई. अब 23.5 करोड़ टन सीमेंट बनती है. 1951 में 5 करोड़ किलोवाट बिजली की खपत होती थी; इसमे 175 गुना बढौतरी हुई है. अब हमारा देश 877 करोड़ किलोवाट बिजली की खपत करता है, यही रौशनी हमें दिखाई देती है. 1951 में हमारा विदेशी मुद्रा भण्डार 1.914 अरब डालर का था. इसमे 136 गुना की बढ़ोतरी हुई है. आज यह लगभग 280 अरब डालर का है. पर इसे नंगी आंखों से मत देखिये. इस अवधि में डालर के मुकाबले रूपया 13 गुना कमज़ोर हुआ है. 1950 में एक डालर 4.79 रूपए का था, आज यह 64.50 रूपए का है. सीधी से बात यह है कि यदि भारत ने अपनी अंदरूनी और स्वाभाविक अर्थव्यवस्था को बचा कर रखा होता तो आज के विदेशी मुद्रा भण्डार का मूल्य 13 गुना ज्यादा होता. एक बात फिर भी साफ़ है कि देश उस स्थिति में नहीं है, जिस स्थिति में 1991 में था, लेकिन ये संकेत जरूर हैं, जिन्हे समझना होगा. आज हम केवल अपनी विकास की परिभाषा और उसके आधार पर अपनी नीतियों को बदल कर ही आने वाले समय को सुरक्षित बना सकते हैं. वर्ष 2004 से 2009 के बीच में 1.57 करोड़ लोग किसानी से बाहर कर दिए गए. निर्माण यानी कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में 2.6 करोड़ लोग आ गए यानी मजदूर बढ़ रहे हैं. हमें पेट्रोल और सोना तो ठीक खाने के लिए दाल और प्याज भी आयात करना पड़ती है. ऐसे में क्या यह समझना मुश्किल है कि क्यों कम इस आर्थिक संकट के शिकार बन रहे हैं? क्या यह संकट हमारी नीतियों की पैदाईश नहीं है?
                                                           --------------------------------
About the Author: Mr. Sachin Kumar Jain is a development journalist, researcher associated with the Right to Food Campaign in India and works with Vikas Samvad, AHRC's partner organisation in Bhopal, Madhya Pradesh. The author could be contacted at sachin.vikassamvad@gmail.comTelephone: 00 91 9977704847
# # #
About AHRC: The Asian Human Rights Commission is a regional non-governmental organisation that monitors human rights in Asia, documents violations and advocates for justice and institutional reform to ensure the protection and promotion of these rights. The Hong Kong-based group was founded in 1984.

फंड की कमी के चलते मिड दे मील बंद होने का सिलसिला शुरू?

100 सरकारी स्कूलों में यह स्कीम पहली सितम्बर से बंद?
Courtesy Photo 
कपूरथला 04 अगस्त 2013:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): फंड  की कमी के चलते मीडिया में काफी दिनों से व्यक्त हो रही आशका के चलते पंजाब में मिड-दे-मील को बंद किये जाने की शुरुआत गई है। इस दुखद शुरुआत की पहली खबर सुनने में आई है कपूरतला जिले से जहाँ मिड डे मिल स्कीम के तहत स्कूली बच्चों को मिलने वाले भोजन को बंद क्र दिया गया है। चर्चा के मुताबिक इस योजना को पंजाब सरकार ने फंड नहीं मिलने के कारण एक सितंबर से बंद कर दिया है। इसे बंद करने से हजारों बच्चों से दोपहर का भोजन छिन गया है। यह भोजन उनके जीवन की ऊर्जा थी। 
गौरतलब है कि इस जिले में 50 हजार से भी अधिक बच्चों को मिड-डे मिल स्कीम के तहत भोजन दिया जाता था। इस सारी योजना पर प्रतिमाह 40 लाख रुपये का खर्च भी आ रहा था। प्रथम कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के बच्चों को इस योजना से फायदा मिल रहा था। भोजन और शिक्षा मिलने से राज्य के बच्चे एक सुनहरी भविष्य का निर्माण कर रहे थे पर यह सपना अब अधूरा रह गया लगता है। 
इस योजना को बंद किये जाने की पुष्टि करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी एलीमेंट्री कार्यालय स्थित मिड डे मिल स्कीम के मैनेजर सोमनाथ होशियारपुरी ने कहा कि जिले में कुल 566 सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड डे मिल स्कीम के तहत भोजन दिया जाता है पर अब इनमें से लगभग 100 सरकारी स्कूलों में बीते एक सितंबर से मिड डे मिल स्कीम बंद कर दी गई है। 
इस तरह अब इस समय केवल 466 सरकारी स्कूलों में ही यह स्कीम चल रही है। उन्होंने कहा कि जुलाई महीने से पंजाब सरकार ने मिड डे मिल के लिए फंड भेजना बंद कर दिया। सुल्तानपुर लोधी के ब्लाक वन व टू में तो बिल्कुल मिड डे मील बंद हो गया है। किसी भी स्कूल में बच्चों को दोपहर को खाना नहीं मिल रहा है। 
इसी सम्बन्ध में यह पूछने पर कि अगर जुलाई महीने से सरकार ने फंड ही बंद कर दिया है तो फिर इन स्कूलों में खाना कैसे बनता रहा तो जवाब में सोमनाथ ने गंभीरता से बताया कि जिन दुकानों से भोजन का सामान आता है, उन लोगों को बता दिया गया है कि पंजाब सरकार के पास नए बजट के लिए लिख कर भेज दिया गया है। बजट आते है, उन लोगों की बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इस समय करीब 30 लाख रुपये का बकाया मिड-डे मिल स्कीम के तहत विभाग पर पेंडिंग है।
दूसरी तरफ जिलाधीश दलजीत सिंह मांगट ने इससे इनकार करते हुए मिड डे मील बंद होने संबंधी कोई जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि पता करने के बाद ही कुछ कहा सकूंगा। इस मामले में अन्य सबंधित अधिकारीयों से सम्पर्क के प्रयास नाकाम रहे। अब देखना यह है की सरकार इसे बंद ही रखती है या फिर इसे दोबारा शुरू करने का कोई रास्ता निकलती है। 

यदि गठबंधन मेरी बलि मांगती है, तो मैं तैयार हूं-नवजोत सिंह सिद्धू

Wed, Sep 4, 2013 at 9:10 PM
कहा-पार्टी तय करेगी चुनाव लड़ूंगा कि नहीं 
सेलीब्रिटी के चुनाव पर नवजोत सिंह सिद्धु ने बताये जीत के रहस्य 
पहली बार गलैमर, दूसरी बार काम, तीसरी बार लोगों का विश्वास और चौथी बार किरदार जीतता है
अमृतसर (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): करीब डेढ़ वर्षों तक अमृतसर की जनता से दूरी बनाये रखने वाले सांसद नवजोत सिंह सिद्धू आज गुरु की नगरी अमृतसर पहुंचे। अमृतसर स्थित गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उनका भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर मीडिया से रू-ब-रू होते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि वह अमृतसर के सिपाही हैं और वह यहां के लोगों के साथ हमेशां खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक सेलीब्रिटी पहली बार अपने ग्लैमर से, दूसरी बार अपने काम से, तीसरी बार जनता के विश्वास से और चौथी बार अपने किरदार से जीतता है। उन्होंने कहा कि गुरु-नगरी की जनता ने उन्हें काफी प्यार दिया है। उनके मुताबिक अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ना है या नहीं, इसका फैसला पार्टी करेगी। पार्टी यदि कहेगी, तो वह यहां चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक अकाली-भाजपा का गठबंधन काफी मजबूत है और यदि गठबंधन सिद्धू की बलि मांगेगा, तो वह इसके लिए भी तैयार हैं।   
        सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, कि पार्टी ने उन्हें काफी सम्मान दिया है। पार्टी की ओर से उन्हें उच्च पद दिया और दिल्ली में सह प्रभारी हैं। उन्होंने कहा, कि सियासत सिद्धू के लिए एक मिशन है और वह अपने मिशन के लिए हर कुर्बानी करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, कि वह एक सेलीब्रिटी हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ही काम कर रहे हैं।  

अमृतसर से किया जा रहा है सौतेला व्यवहार- नवजोत सिंह सिद्धू 

टीचर्स डे के उपलक्ष्य में एक कलाकार की श्रद्धा

Wed, Sep 4, 2013 at 9:18 PM
मीनिएचर आर्टिस्ट ने अपने ही अंदाज में पेश की श्रद्धा
अमृतसर: 4 सितम्बर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): अध्यापक दिवस आज भी श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है। स्वार्थ और शुद्ध कारोबारी नजरिये के इस दौर में भी अभी बहुत से लोग हैं जो अपने शिष्य को प्राचीन काल के गुरु की तरह ही पढ़ते हैं। बहुत से शिष्य भी हैं जो अपने अध्यापक को केवल एक टीचर नहीं बल्कि गुरु की तरह ही सम्मान देते हैं। इसकी ताज़ा मिसाल मिली अमृतसर में जहाँ हमारी मुलाक़ात हुई हरविन्द्र सिंह से। हरविन्द्र सिंह ने टीचर्स डे के मौके पर हर छात्र की तरह अपने गुरु को अपने ही अंदाज में श्रद्धा सुमन अर्पित किये हैं। अमृतसर के मीनिएचर आर्टिस्ट डा. हरविंदर सिंह ने अपने अपने ही विलक्ष्ण अंदाज में अपने गुरुओं को नमन किया। गुरु और चेले का समाज में अपना अलग स्थान है। आज टीचर्स डे के मौके पर हर छात्र अपने गुरु को अपने ही अंदाज में श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं। इस बीच अमृतसर के मीनिएचर आर्टिस्ट डा. हरविंदर सिंह ने भी अपने ही अंदाज में अपने गुरुओं को नमन किया है। उन्होंने बताया, कि अध्यापक दिवस पर वह अपने अध्यापक को श्रद्धा सुमन अर्पित करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने करीब सौ पेंसिलों पर अपनी श्रद्धा को उकेर दिया। इन पेंसिलों की सहायता और संयोजन से उन्होंने बहुत ही आकर्षक कलाकृतियां बने हैं जिनकी एक झलक हम यहाँ भी प्र्स्त्गुत कर रहे हैं। 

Tuesday, September 03, 2013

सुखबीर बादल दूसरी बार बने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान

जीत के बाद दिए नई मंजिलों और नए निशानों के इशारे 
*कहा-हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में शिरोमणि अकाली दल लड़ेगी विधानसभा चुनाव
*केंद्र सरकार पर लगाया पंजाब के साथ मतभेद करने और खाद्य आपूर्ति बिल पर नकल करने का आरोप
*कांग्रेस के पंजाब प्रधान प्रताप सिंह बाजवा को कहा, कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी बड़ा गप्पी
सभी तस्वीरें गजिन्द्र सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन 
अमृतसर: 3 सितम्बर 2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): पंजाब के उप -मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को आज एसजीपीसी परिसर स्थित तेजा सिंह समुद्री हाल में हुए डेलीगेट इजलास में पार्टी का दूसरी बार प्रधान चुना लिया गया। इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री और पार्टी के सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल के अलावा कई केबिनेट मंत्री और सीनियर लीडरशिप भी मौजूद थी। पार्टी का प्रधान चुने जाने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में सुखबीर सिंह बादल ने कहा, कि पार्टी हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ मतभेद करने और खाद्य आपूर्ति बिल पर पंजाब की नकल करने का आरोप लगाया। दूसरी बार पार्टी की कमान संभालने के बाद कांग्रेस के पंजाब प्रधान पर हमला बोलते हुए सुखबीर बादल ने उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी बड़ा गप्पी करार दिया।
          पंजाब के उप -मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को आज एसजीपीसी परिसर स्थित तेजा सिंह समुद्री हाल में सर्वसम्मति से दूसरी बार पार्टी का प्रधान चुन लिया गया। इस मौके पर जहां पंजाब के कई केबिनेट मंत्री और पार्टी की सीनियर लीडरशिप मौजूद थी, वहीं पार्टी के सरपरस्त और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी इसमें शामिल हुए। पार्टी प्रधान का ओदहा संभालने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी की आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा, कि पार्टी जल्द ही हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने बताया, कि हरियाणा में शिअद इनेलो के साथ, तो दिल्ली में भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी। जबकि उत्तर प्रदेश में किस पार्टी के साथ उनका गठबंधन होगा, इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया।  
            उप मुख्यमंत्री ने शिअद के प्रधान का दूसरी बार ताज पहनने के बाद केंद्र सरकार पर सीधा निशाना लगाया और कहा, कि केंद्र सरकार ने पंजाब के साथ मतभेद करते हुए पंजाब को दिए जाने वाले फंड में कटौती कर दी है। उन्होंने कहा, कि इसके अलावा केंद्र सरकार जो खाद्य आपूर्ति बिल ला रही है, वह शिअद की नकल कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में फाइनेनशियल इमरजेंसी की बातें की जा रही है। जबकि यह इमरजेंसी तो केंद्र में है और उन्हें डर है, कि केंद्र सरकार इसके अपने साथ पूरे देश को न ले डूबे। पंजाब कांग्रेस के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, कि जब प्रताप सिंह बाजवा को पार्टी ने पंजाब प्रधान का ओहदा दिया था, तो उन्होंने सोचा था, कि शायद बाजवा कुछ अच्छी राजनीति करेंगे। लेकिन वह गप मारने में कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी आगे निकल गए।
              इस मौके पर पार्टी प्रधान सुखबीर बादल ने बताया, कि आगामी कुछ समय के अंदर-अदर हर जिले में शिरोमणि अकाली दल का अपना कार्यालय होगा और वहां हर महीने पार्टी कार्यकर्ताओं की वर्कशाप लगाई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने कहा, कि पंजाब सरकार आगामी दो महीनों के अंदर अमृतसर में करीब चार सौ करोड़  अगले डेढ़ वर्षों में करीब 15 सौ करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाएगी।

लुधियाना: गणपति उत्सव 9 सितम्बर से

श्री एकदंत गणेश महोत्सव सोसायटी की ओर से पूरी तैयारी 
बड़ा करने के लिए क्लिक करें 
लुधियाना, 3 सितम्बर (विशाल//पंजाब स्क्रीन): श्री एकदंत गणेश महोत्सव सोसायटी किचलू नगर की ओर से 9 सितम्बर से मुख्य मार्किट किचलू नगर में गणपति महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में आयोजित बैठक में जानकारी देते हुए सोसायटी के चेयरमैन वरिंद्र भक्कू ने बताया कि प्रति रात्रि 8 से 10 बजे तक भजन संध्या का आयोजन होगा। जबकि प्रति दिन शंकराचार्य स्वामी माधवराज भजन गुणगान करेंगे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए विशाल पंडाल का निर्माणकिया जायेगा, जिसमें एक हजार से अधिक कुर्सियां लगाई जायेंगी। इस कार्यक्रम के संबंध में महानगर के विभिन्न वर्गों के लोगों को निमंत्रण पत्र भेजा गया है। 19 सितम्बर को भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जायेगा, जो आयोजन स्थल से शुरू होकर दोराहा नहर पर मूर्ति विसर्जन के साथ सम्पन्न होगी। इस शोभायात्रा का शुभारंभ वित्त मंत्री पंजाब परमिंदर सिंह ढींडसा, विधायक भारत भूषण आशू, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सुरिंद्र डाबर, राकेश पांडे, विधायक बलविंदर सिंह बैंस व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष जगमोहन शर्मा करेंगे। शोभायात्रा मार्ग को रंग-बिरंगी लडिय़ों से सजाया जायेगा और घरों के ऊपर से गणपति बप्पा पर फूल वर्षा होगी। बैठक में अन्यों के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष वरिंद्र महिंद्रू, महासचिव राकेश धीर, उपाध्यक्ष राजिंद्र सोई, सचिव एस.एस. प्रकाश और एम.आर. गोयल विशेष रूप से उपस्थित थे।

धूमधाम से मनाया गया बाबा जीवन सिंह का प्रकाश पर्व

बहुत ही श्रद्धा और सम्मान से निकला आलौकिक नगर कीर्तन
सभी तस्वीरें:गजिंद्र सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन 
अमृतसर:3 सितम्बर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): सिख इतिहास में बहुत ही गौरवशाली अध्याए जोड़ने वाले रंगरेटे गुरु के बेटे बाबा जीवन सिंह के 352वें प्रकाश पर्व के मौके पर  ही फ्द्ख्र के साथ याद किया गया। उन्हें याद करते हुए उनके सम्मान व् स्मृति में श्री अकाल तख्त साहिब से एक आलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। यह नगर कीर्तन शहर के विभिन्न इलाकों से होता हुआ तख्त श्री दमदमा साहिब के लिए रवाना हो गया, तरनतारन, मक्खू, जीरा आदि से होते हुए श्री मुक्तसर साहिब में रात को रुकेगा और सुबह तख्त श्री दमदमा साहिब चेयरमैके लिए रवाना होगा, इस मौके पर सोसाइटी के जसवंत सिंह ने सभी को प्रकाश पर्व की बधाई देते हुए बताया कि सोसाइटी का मुख्य उदेश्य है, कि नौजवानों को नशे से दूर रखना और भ्रूण हत्या को रोकना है और गुरु जी के बताए हुए मार्ग पर चल कर गुरु जी की पावन वाणी के साथ जोड़ना है। 

18 सितम्बर को होगा गणपति की विशाल शोभायात्रा का आयोजन

चौथे गणपति महोत्सव  की तैयारियां जोरों पर 
युवा जागृति मंच की ओर से दरेसी मैदान गूंजेगा गणपति बप्पा मोरिया के उद्घोषों से
                                                                              Courtesy Photo
लुधियाना, 3 सितम्बर 2013: (विशाल//पंजाब स्क्रीन): युवा जागृति मंच की ओर से आयोजित होने वाले चौथे गणपति महोत्सव  की तैयारियां जोरों पर हैं। इस संबंध में एक विशेष बैठक शिवरात्रि महोत्सव कमेटी के चेयरमैन चरणजीत भार्गव और अध्यक्ष सुनील मेहरा  की अध्यक्षता में हुई।
मंदिर गऊघाट में आयोजित इस बैठक में भारी संख्या में विभिन्न एसोसिएशनों और समाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सोमवार 9 से 17 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए अध्यक्ष महेश दत्त शर्मा और संदीप थापर गोरा ने बताया कि 9 सितम्बर को इस कार्यक्रम के तहत दरेसी मैदान में संत त्रिलोचन दास जी महाराज की अध्यक्षता में विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद आगामी 10 दिन तक विभिन्न भजन पार्टियां गणपति बप्पा का गुणगान करेंगी। 18 सितम्बर को गणपति की विशाल शोभायात्रा का आयोजन होगा, जो प्रात: 10 बजे दरेसी मैदान से शुरू होगी और विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई सतलुज दरिया तक विसर्जन के साथ समाप्त होगी।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के संबंध में निमंत्रण पत्र देने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस अवसर पर विशेष रूप से पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक पराशर पप्पी ने कहा कि इस समारोह के संबंध में उनकी तरफ से पूर्ण सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में एकता और सद्भावना की मिसाल पैदा करते हैं। श्री थापर ने बताया कि मंच की आगामी बैठक रविवार को सुनील मेहरा के आवास पर सिविल लाईन्ज में आयोजित की जायेगी और इस अवसर पर आम लोगों के लिए एक नि:शुल्क दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जायेगा।
इस बैठक में अन्यों के अलावा चेयरमैन सतीश नागर, डिप्टी मेयर आर.डी. शर्मा, पंकज भनोट, नवीन भनोट, ईशू भनोट, हिमांशू वालिया, गिरीश चोपड़ा, लक्की कपूर, हरीश शर्मा, अश्विनी महाजन, अश्विनी खरबंदा, नवीन अवस्थी, लोकेश जैन, मनोज भाटिया, संगीत सागर, प्रीति शर्मा, गौरव शर्मा, शैली शर्मा, कमल सिक्का और मुकेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित थे।

नोट: यदि आप भी ऐसा ही कोई आयोजन कर रहे हैं तो उसका विवरण और तस्वीरें अवश्य भेजें तक उसे भी यहाँ उचित स्थान दिया जा सके। अगर समय पर सूचना मिलती है तो उसकी कवरेज के लिए पर्याप्त प्रबंध भी किये जायेंगे।   --रेक्टर कथूरिया 

यह खबर पंजाब स्क्रीन पंजाबी में भी देखें                      लुधियाना: गणपति उत्सव 9 सितम्बर से         

फिर हुआ इश्मीत सिंह की मौजूदगी का अहसास

गीत-संगीत और आवाज़ के जादू से लौट आया गुज़रा हुआ समय 
                                                                                                             Courtesy photo
लुधियाना, 3 सितंबर 2013:(पंजाब स्क्रीन): मौत ने तो इश्मीत को छीन ही लिया था पर उसकी आवाज़ अब भी उसे हमारे दरम्यान रखे हुए है।एक बकार फिर यह अहसास हुआ वॉयस ऑफ इंडिया के विनर रहे स्वर्गीय इशमीत सिंह के 25वें जन्मदिवस के मौके पर जब राजगुरु नगर स्थित इशमीत सिंह म्युजिक इंस्टीच्यूट में म्यूजिकल शो का आयोजन किया गया। इश्मीत सिंह की स्मृति में ये शाम इशमीत के नाम थी। इस संगीतमय शाम के अंतर्गत हुए इस कार्यक्रम का आगाज इशमीत के गायकी के सफर के बारे में दी गई प्रैजैंटेशन से शुरू हुआ जिसका अंदाज़ दिल को छू लेने वाला था। 
इसके बाद इशमीत सिंह के चाचा व इंस्टीच्यूट के डायरैक्टर डा. चरण कमल सिंह ने इशमीत की याद में गाकर कमाल कर दिया। जब उन्होंने जान कढ़ लई वेईमानां वे तू, जान वाली गल करके गीत गाया तो पूरा हाल इश्मीत की स्मृति में ही। सुरीली शाम में कई  लोग मौजूद थे। टी.वी. शो में भाग ले चुके फाइनलिस्टों ने जहां अपने सुरीले और हसीन नगमों से अपनी आवाज का जादू बिखेरा वहीं इश्मीत की संगीतक स्मृतियों को भी एक बार फिर पुनर्जीवित किया। यूं लगता था जैसे गुज़रा हुआ समय एक बार फिर लौट आया हो। आवाज़ और सुरों के इन साधकों को सम्मानित भी किया गया जिसमें आवाज पंजाब दी की विनर सुरमंगल अरोड़ा, भारत की शान की फाइनलिस्ट रुपाली छावड़ा, गुरलीन कौर, वॉयस ऑफ पंजाब की फाइनलिस्ट हरगुण कौर ने बॉलीवुड तराने भी गाए। बतौर मुख्यातिथि पहुंचे जत्थेदार रखविंदर सिंह गाबड़िया, प्रो. सुखवंत सिंह, रणजोध सिंह आदि को भी बुके देकर सम्मानित किया गया। इश्मीत की याद में बहेगी हुई आँखें और रुंधे हुए कंठ बिना बोले ही कह रहे थे की वे इश्मीत को कभी नहीं भूल सकते। इस मौके पर इशमीत सिंह के पिता व एडवाइजरी बोर्ड ऑफ इंस्टीच्यूट के चेयरमैन गुरपिंदर सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने और अशिम नागपाल ने मिलकर इशमीत को श्रद्धांजलि अर्पित की जो सबके दिलो दिमाग को छू रही थी और  में उतर रही थी। अंत में इंस्टीच्यूट की डीन प्रीति बहल ने ए ट्रिब्यूट टू इशमीत सिंह के टाइटल के अंतर्गत इशमीत के जिंदगी के पहुलओं के सबके सामने जागरूक किया। इश्मीत की गैर मौजूदगी में भी इश्मीत की आवाज़ और उसे चाहने वालों की मौजूदगी उसकी ही मौजूदगी का अहसास करा रही थी।