Thursday, November 10, 2016

लुधियाना:लोग पैसे के लिए रहे रात तक परेशान

बैंकों के आगे लगी रही भीड़-स्टाफ भी परेशान रहा-बाजार रहे सुनसान 
लुधियाना: 10 नवम्बर 2016: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन)
हफरातफरी के बाद लोग कुछ शांत थे। न उन्हें सिमी के पुलिस मुकाबला की कोई याद थी, न ही पाकिस्तान के हमलों में शहीद हो रहे सेना के जवानों की और न ही जल्द जेब में आने वाले 15-15 लाख रूपये के काले धन की और न ही बढ़ती हुई महंगाई की। बस सभी को एक ही चिंता थी--पैसे की चिंता। जमा करने में फायदा होगा या चेंज करवाने में? इस सवाल को बार बार एक दुसरे से पूछा जा रहा था। 
लोग पैसे की चिंता में थे। जेब खाली थी। बाजार सुनसान से थे। सब को सब जगहों से उधारी नहीं मिल रही थी। छोटे छोटे खर्चे पहाड़ नज़र आ रहे थे। कहीं पर लोग खुद से उलझ रहे थे तो कहीं पर बैंक के स्टाफ और सुरक्षा गार्डों से। जब यह तस्वीर क्लिक की गईं उस समय अँधेरा छा रहा था। सन्ध्या के वक़्त भी लोग बैंक के गेट पर थे। न किसी को पूजा पाठ याद था न ही कोई और ख्याल। किसी ने स्कूल में बच्चों की फीस देनी थी। किसी ने बीमार मरीज़ के लिए फ्रूट या सूप लेना था। ये लोग मध्य वर्गीय थे। इन्होंने सिर्फ बड़े से बड़ा करेंसी नोट यही देखा था और उसे हर आफत का इलाज समझ कर बैंक में सम्भाल दिया था। बैन के एलान ने उनकी नींद उड़ा दी। जिनके पास काला धन था उनकी चिंता कुछ और तरीके से बाहर आई। किसी ने बोरिया भर कर नोट जला दिए और किसी ने सड़क किनारे कूड़े में फेंक दिए। धर्म कर्म की बातों में अग्रणी रहने वाले इस समाज में आफत आने पर भी नहीं सोचा गया कि चलो कुछ फ़ालतू के नोट फेंकने या जलाने की बजाये किसी ज़रूरतमन्द को दान दे दिए जाएँ। इस सारे घटनाक्रम ने साबित कर दिया कि हमारे समाज में बस यही सत्य है----बाप बड़ा न भईया--सबसे बड़ा रुपईया। ऊपर दी गयी तस्वीरों में से एक तस्वीर है सेंटर बैंक आफ इण्डिया के गेट पर मौजूद लोगों की, दूसरी है पंजाब एंड सिंध बैंक की और तीसरी है पंजाब नेशनल बैंक की। यह तीनों शाखाएं लुधियाना के सिविल लाईन एरिया की हैं।  क्या अब भी यह समाज समझेगा कि असली धन यह करेंसी नहीं होती। असली धन उन सच्चे वायदों में छुपा होता है जो चुनावी जुमले नहीं होते। फिलहाल तो यही सच है कि एक बार फिर यही साबित हुआ--बाप बड़ा न भईया--सबसे बड़ा रुपईया। 

भारत को स्वच्छ भारत बनाने के लिए काले धन पर जबरदस्त प्रहार

09-नवंबर-2016 19:44 IST

काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्थिति पर लगाम लगेगी
भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का कदम विश्व में अर्थव्यवस्था को स्वच्छ बनाने का पहला बड़ा कदम
                                                                                                               
*प्रकाश चावला
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को राष्ट्र को संबोधित किए जाने के दौरान की गई घोषणा के अनुसार 8 नवंबर की मध्य रात्रि से 500 रुपये और 1000 रुपये के करेंसी नोट के प्रचलन की समाप्ति को काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। काला धन और भ्रष्टाचार अनेक दशकों से देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खा रहे थे। सरकार के शीर्ष स्तर पर अनेक महीनों के सोच-विचार के बाद इन करेंसी नोटो को अमान्य करने की अचानक घोषणा से अंतरिम रूप से कुछ मुश्किलें आएंगी, लेकिन प्रधानमंत्री ने लोगों से ठीक ही कहा है कि भ्रष्टाचार और काले धन के दानव को परास्त करने के साथ-साथ जाली नोट के प्रचलन को रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक को मूल्य चुकानी होगी। भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोट तथा आतंकवाद को वित्तीय सहायता समस्या की जड़ है।
श्री मोदी ने कहा, ‘देश के विकास के इतिहास में ऐसा समय आता है जब दृढ़ और निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता होती है। गलत तरीके से एकत्रित धन की जमाखोरी के विरुद्ध मोदी के कदम से काले धन को जमा करने वालों पर जबरदस्त प्रहार हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।’
एक ओर गलियों तथा सड़कों को स्वच्छ बनाने और शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत का कार्यक्रम चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए दुनिया के किसी भी भाग में शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है। काले धन और भ्रष्टाचार से ग्रसित प्रणाली की साफ-सफाई के आकार की कल्पना कीजिए। अनुमान के अनुसार 500 रुपये तथा 1000 रुपये मूल्य के 14 लाख करोड़ करेंसी नोट सर्कुलेशन में हैं यह नोट 31 दिसंबर, 2016 और अधिक से अधिक 31 मार्च, 2017 तक वापस ले लिए जाएंगे।
कुछ बैंकर्स महसूस करते हैं कि इस राशि का एक तिहाई हिस्सा बैंक में जमा नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इतनी अधिक मात्रा में धनराशि जमा कराने से कुछ लोग दिक्कत में आ सकते हैं इसका अर्थ यह है कि देश को 4.33 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यह भारतीय रिजर्व बैंक की घटी देनदारी के संदर्भ में देश को एक तरह की प्राप्ति है।
इस विशाल स्वच्छा अभियान से केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और मुद्रा स्फीति के मोर्चे पर सकारात्मक लाभ मिलेगा। यह सामान्य जानकारी की बात है कि मुद्रा स्फीति को काला धन ईंधन प्रदान करता है। वास्तव में रियल स्टेट बाजार नकदी हिस्से पर फलता-फूलता है और इस पर रोक लगेगी। रियलिटी क्षेत्र को झटका लगेगा, लेकिन यह क्षेत्र नई वास्तविकता के अनुसार को अपने को समायोजित कर लेगा। इसलिए विश्लेषक यह सही कह रहे हैं कि काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्फीति पर लागाम लगेगा और अंततः सामान्य लोगों को मदद मिलेगी। उन्हें कुछ परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। ऊंचे मूल्य के नोटों लोगों को अमान्य घोषित करने से लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार पर प्रीमियम में भारी गिरावट आएगी। राष्ट्र को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने पिछले दो वर्षों में काले धन पर लगाम लगाने के लिए अनेक कदम उठाए। इन कदमों में विदेशी काला धन घोषित करने के लिए कानून, बैंकिंग सूचना साझा करने के लिए अनेक देशों के साथ समझौता, बेनामी कारोबार को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून और जुर्माना अदा करने के बाद काले धन की घोषणा के लिए योजना शामिल हैं। इन प्रयासों से 1.25 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए है। इसमें बैंकिंग प्रणाली में वापस नहीं आने वाली 4.33 लाख करोड़ रुपये को जोड़ा जाए तो कुल रकम 5.50 लाख करोड़ रुपए होती है। यह लाभ मध्यम से दीर्घ अवधि में देश को मिलेगा।
अंतरिम  व्यवस्था में सरकार के लिए एकमात्र चुनौती यह है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सामान्य आदमी को काठनाई न हो और बैंकिंग प्रणाली लोगों में यह विश्वास भरे कि सामान्य घरों का धन पूरी तरह सुरक्षित है।
निर्णायक रूप से प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ईमानदार नागरिक चाहते हैं कि भ्रष्टाचार, कालाधन, बेनामी संपत्ति, आतंकवाद और जाली नोटों के प्रचलन के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहे। सरकारी अधिकारियों द्वारा बिस्तर के नीचे करोड़ों रुपये के करेंसी नोट रखने और बोरियों में रकम भरने की खबरों से देश के किस ईमानदार नागरिक को तकलीफ नहीं होगी?’
प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा कि विश्व में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था होन के बावजूद भ्रष्टाचार के सूचकांक में भारत का स्थान ऊंचा है। अनेक कदम उठाने के बावजूद भारत अभी भी भ्रष्टाचार के सूचकांक में 76वें पायदान पर है।
शेयर बाजारों से शुरूआती प्रतिक्रिया प्रतिकूल आई है। ऐसी अपेक्षा थी बाजार में नरमी ट्रम्प की विजय से भी जुड़ी है।
मोदी का यह जबरदस्त कदम भारत के स्वच्छ भारत बनाने में एक छलांग साबित होगा।
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*प्रकाश चावला दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार है और अधिकतर राजनीतिक-आर्थिक विषयों पर लिखते हैं।
लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं।

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एजी/डीके-49

स्वराज इंडिया ने किया नोट परिवर्तन का समर्थन

काला धन तो नहीं लेकिन जाली नोट तो जरूर रुकेंगे
*500 और 1000 के नोट को बदलना एक आवश्यक, उचित और कठिन फैसला-सब समर्थन करें
    *काले धन की पूर्णतः समाप्ति के सरकारी दावे भ्रामक और काल्पनिक
    *नोट परिवर्तन में आम जनता को कष्ट न हो यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व
सरकार द्वारा 500 और 1000 रूपये के नोट बदलने के फैसले का स्वराज इंडिया समर्थन करती है। पिछले काफी समय से जाली नोटों की समस्या विकराल रूप धारण कर रही थी इसलिए 500 और 1000 के प्रचलित नोटों को रद्द कर उसकी जगह नए नोट जारी करना जरुरी हो गया था। सरकार ने इस जरुरी लेकिन कठिन फैसले को समय रहते लिया और इसे जिस स्फूर्ति से लागू किया यह स्वागत योग्य है। 
इस घोषणा से जाली नोटों पर नियंत्रण तो लगेगा, लेकिन काले धन को पूर्णतः समाप्त करने के सरकारी दावे बेबुनयादी हैं। अधिकांश काला धन कैश नहीं है बल्कि बेनामी सम्पति, शेयर और हवाला या पी नोट के जरिये विदेशी पुंजी की शक्ल में पड़ा है उन पर इस घोषणा से कोई असर नहीं पड़ेगा। बड़े नोट बंद करने से काले धन के उस छोटे से अंश पर ही असर पड़ेगा जो नोटों की गड्डियों में रखा हुआ है। इस काले धन को भी अगले 50 दिन में अनेक चोर दरवाज़ों से सफ़ेद बना दिया जा सकता है, इसलिए फ़िलहाल तो प्रधानमंत्री और बीजेपी के "काले धन पर ऐतिहासिक हमले" जैसी घोषणा काल्पनिक जान पड़ते हैं। 
जब भी नोटों में परिवर्तन होता है उससे जनता को परेशानी और घबराहट होना स्वाभाविक है। सरकार की जिम्मेवारी है कि वह इस परिवर्तन के दौर में आम जनता को नुकसान होने से बचाए। हमारे देश में आज भी अधिकांश लेन देन कैश में होता है और बहुत लोग अपने जीवन भर की कमाई बैंक में नहीं कैश में रखते हैं। यूँ भी आजकल फसल बेचने और फिर शादी का अवसर है जब कैश का व्यवहार सामान्य से भी ज़्यादा होता है। ऐसे में अचानक 500 और 1000 रूपये के नोट का प्रचलन रोकने से शहरी गरीबों और देहात के लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है। अगर ऐसे में सरकार ने ठीक इंतजाम नहीं किये तो ये पूरी योजना खटाई में पड़ सकती है। लेकिन केवल इस असुविधा के आधार पर नोट परिवर्तन का विरोध करना देश हित में नहीं है। हम विपक्षी दलों से अपील करते हैं कि वे इस घोषणा का विरोध करने के बजाए सरकार को यह कठिन कदम उठाने में सहयोग करें।

Tuesday, November 08, 2016

मध्य रात्रि 12 बजे से 500 रुपये और 1,000 रुपये के करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे

08-नवंबर-2016 22:15 IST
प्रधानमंत्री ने किया देश के नाम सन्देश में बड़ा ऐलान 
प्रधानमंत्री का 8 नवम्बर को राष्ट्र के नाम सन्देशमेरे प्यारे देशवासियों, 
दिवाली के पावन पर्व की समाप्ति नई आशाएं और नई खुशियों के साथ हुई होंगी। आज आप सभी से कुछ विशेष निवेदन करना चाहता हूँ। 

इस वार्ता में कुछ गंभीर विषय, कुछ महत्वपूर्ण निर्णय आप से साझा करूंगा। आपको ध्यान होगा की जब आपने 2014 मई में हमें जिम्मेदारी सौंपी थी, तब विश्व की अर्थव्यवस्था में BRICS के सन्दर्भ में यह आम चर्चा थी की BRICS में जो “आई” अक्षर, जो India से जुड़ा हुआ है, लोग कहते थे BRICS में जो “आई” है, वह लुढ़क रहा है। लगातार 2 साल के देशव्यापी अकाल के बावजूद भी, पिछले ढाई वर्षों में सवा सौ करोड़ देशवासियों के सहयोग से आज भारत ने ग्लोबल इकॉनमी में एक “ब्राइट स्पॉट” अर्थात चमकता सितारा के रूप में अपनी उपस्तिथि दर्ज कराई है। ऐसा नहीं है की यह दावा हम कर रहे हैं, बल्कि यह आवाज इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड (IMF) और वर्ल्ड बैंक से गूंज रही है। 

बहनों भाइयों, 
विकास की इस दौड़ में हमारा मूल मंत्र रहा है “सबका साथ, सबका विकास”। यह सरकार गरीबों को समर्पित है और समर्पित रहेगी। गरीबी के खिलाफ हमारी लड़ाई का मुख्य शस्त्र रहा है – गरीबों का देश की अर्थव्यवस्था एवं सम्पन्नता में सक्रिय 

भागीदारी यानी गरीबों का सशक्तिकरण, गरीबों का एम्पावरमेंट। इस प्रयास की झलक आप लोगों को 

प्रधान मंत्री जन धन योजना, 

जन धन से जन सुरक्षा योजना, 

आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रधान मंत्री मुद्रा ऋण योजना, 

दलित, आदिवासी और महिला उद्यमियों के लिए स्टैंड अप इंडिया, 

गरीबों के घर गैस का चूल्हा पहूँचाने के लिए प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना, 

किसानों की आमदनी सुरक्षित करने के लिए प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना और प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना, 

उनको अपने खेतों से सही उपज पाने के लिए Soil हेल्थ कार्ड योजना और 


सही उपज का सही दाम पाने के लिए e-NAM अर्थात राष्ट्रीय कृषि बाज़ार योजना – इन सब में ये साफ़ नजर आता है ये सरकार गाँव, गरीब और किसान को समर्पित है। 

मेरे प्यारे देशवासियों 
पिछले दशकों में हम यह अनुभव कर रहे है की देश में भ्रष्टाचार और कला धन जैसी बीमारियों ने अपनी जड़े जमा लीं हैं और देश से गरीबी हटाने में ये भ्रष्टाचार, ये कला धन, ये गोरख धंधे सबसे बड़ी बाधा है। 

एक तरफ तो विश्व में हम आर्थिक गति में तेजी से बढ़ने वाले देशों में सबसे आगे हैं। दूसरी तरफ भ्रष्टाचार की ग्लोबल रैंकिंग में दो साल पहले भारत करीब-करीब सौवें नंबर पर था। ढेर सारे कदम उठाने के बावजूद हम छेहत्तरवें नंबर पर पहुँच पाए हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि भ्रष्टाचार और काले धन का जाल कितने व्यापक रूप से देश में बिछा है। 

भ्रष्टाचार की बीमारी को कुछ वर्ग विशेष के लोगों ने अपने स्वार्थ के कारण फैला रखा है। गरीबों के हक को नज़रंदाज़ कर ये खुद फलते-फूलते रहे हैं। कुछ लोगों ने पद का दुरुपयोग करते हुए इसका भरपूर फायदा उठाया। दूसरी तरफ, इमानदार लोगों ने इसके खिलाफ लड़ाई भी लड़ी है। देश के करोड़ों नागरिकों ने ईमानदारी को जी कर के दिखाया है। 

हम प्रायः यह सुनते हैं की गरीब ऑटो ड्राईवर अपनी गाडी में छूट गई सोने के आभूषण वाले बैग को उसके असली मालिक को कैसे ढूँढ कर लौटाता है, कई बार हम सुनते हैं कोई टैक्सी ड्राईवर यात्रियों का कोई सामान अगर छूट जाता है, मोबाइल फ़ोन रह जाता है तो अपने खर्चे से उनको ढूढने जाता है, और पहुंचा देता है, अरे सब्जी बेचने वाला भी, सामान्य दूकान वाला भी अगर ग्राहक से गलती से ज्यादा पैसे ले लिए तो तो उसको बुलाकर लौटा देता है। 

प्यारे देशवासियों, 
इस बात का ये सबूत है कि हिंदुस्तान का सामान्य से सामान्य नागरिक ईमानदार है, लेकिन प्यारे देशवासियों, हर देश के विकास के इतिहास में ऐसे क्षण आये हैं जब एक शक्तिशाली और निर्णायक कदम की आवश्यकता महसूस की गई। इस देश ने यह वर्षों से महसूस किया है कि भ्रष्टाचार, काला धन, जाली नोट और आतंकवाद - ऐसे नासूर हैं जो देश को विकास की दौड़ में पीछे धकेलती हैं। देश को, समाज को अन्दर ही अन्दर खोखला कर देती है। 

मेरे प्यारे देशवासियों, 
आतंकवाद की भयानकता को कौन नहीं जानता है? कितने निर्दोष लोगों को के मौत के घाट उतार दिया जाता है। लेकिन क्या आपने सोंचा है की इन आतंकियों को पैसा कहाँ कहाँ से मुहैया होता है? सीमा पार के हमारे शत्रु जाली नोटों के जरिये, नकली नोटों के जरिये अपना धंधा भारत में चलाते हैं और यह सालों से चल रहा है। अनेक बार 500 और हज़ार रुपये के जाली नोट का कारोबार करने वाले पकडे भी गए हैं और ये नोटें जब्त भी की गई हैं। 

बहनों भाइयों, 
एक तरफ आतंकवाद और जाली नोटों का जाल देश को तबाह कर रहा है। दूसरी ओर भ्रष्टाचार और काले धन की चुनौती देश के सामने बनी हुई है। हमने कार्य सँभालने के तुरंत बाद भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत करते हुए अनेक प्रभावी कदम उठायें, जैसे: 

• काले धन की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में SIT का गठन किया।

• विदेशों में जमा काले धन के लिए 2015 में मज़बूत कानून बनाने का हमने काम किया 

• काले धन को विदेश से लाने के लिए विभिन्न देशों के साथ टैक्स समझौतों में हमने परिवर्तन किया, नए समझौते किये 

• अमेरिका सहित विभिन्न देशों के साथ सूचना के आदान प्रदान, information exchange का प्रावधान किया

• भ्रष्टाचारियों की बेनामी संपत्ति को रोकने के लिए अगस्त 2016 में एक और मज़बूत कानून

• इस कानून से एक बहुत बड़े चोर दरवाजे को बंद कर दिया गया।

• देश में अघोषित आय को पेनाल्टी के साथ घोषित करने की योजना में काफी बड़ी मात्रा में अघोषित आय उजागर हुई। 

मेरे प्यारे देशवासियों, इन सारे प्रयासों से, पिछले ढाई सालों में भ्रष्टाचारियों से करीब करीब सवा लाख करोड़ रुपये का काला धन बाहर आया है। ऐसे करोड़ों भारतवासी जिनके रग रग में ईमानदारी दौड़ती है उनका मानना है कि भ्रष्टाचार, काले धन, बेनामी संपत्ति, जाली नोट और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक होनी चाहिए। कौन ईमानदार नागिरक ऐसा होगा जिसे अफसरों के घर बिस्तर के नीचे से, या जगह जगह बोरियों में करोड़ों रुपये पाए जाने की खबर पीड़ा न होती हो? 

आज देश की मुद्राव्यवस्था का हाल यह है की देश में कुल सिक्कों और नोटों की मूल्य में 500 और 1,000 रुपये वाले नोटों का हिस्सा लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक पहुँच गया है। 

देश में कैश का अत्यधिक सर्कुलेशन का एक सीधा सम्बन्ध भ्रष्टाचार से है। भ्रष्टाचार से अर्जित कैश का कारोबार महँगाई पर बड़ा असर पैदा करता है। इसकी मार गरीबों को झेलनी पड़ती है। इस का सीधा प्रभाव गरीब और मध्यम वर्ग की खरीदने की शक्ति पर पड़ता है। आपका स्वयं का अनुभव होगा, जब मकान या जमीन खरीदते वक़्त आप से कुछ धन चेक में लेंगे और ज्यादातर धनराशी कैश में मांगी जाती होगी। ईमानदार व्यक्ति के लिए कुछ भी खरीदना, एक माध्यम वर्ग के व्यक्ति के लिए घर खरीदना हो, उसके पास कला धन नहीं है तो मुसीबत हो जाती है। कैश के इस धंधे के कारण मकान, जमीन, उच्च शिक्षा और चिकित्सा जैसी अनेक सेवाओं और वस्तुओं के मूल्य में बहुत ज्यादा कृत्रिम वृद्धि होती है, artificial increase होता है।

भ्रष्टाचार से जमा किया गया धन हो या काला धन हो, ये दोनों बेनामी हवाला कारोबार को बल देते हैं। और हम जानते हैं कि हवाला का उपयोग आतंकियों ने हथियार की खरीद फरोख्त में भी किया है। चुनावों में काले धन के प्रभाव की चर्चा तो वर्षों से हो रही है। 

बहनों भाइयों, 
देश को भ्रष्टाचार और काले धन रूपी दीमक से मुक्त कराने के लिए एक और सख्त कदम उठाना ज़रूरी हो गया है। 

आज मध्य रात्रि यानि 8 नवम्बर 2016 की रात्रि 12 बजे से वर्तमान में जारी 500 रुपये और 1,000 रुपये के करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे यानि ये मुद्राएँ कानूनन अमान्य होंगी। 

500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों के जरिये लेन देन की व्यवस्था आज मध्य रात्रि से उपलब्ध नहीं होगी। 


भ्रष्टाचार, काले धन और जाली नोट के कारोबार में लिप्त देश विरोधी और समाज विरोधी तत्वों के पास मौजूद 500 एवं 1,000 रुपये के पुराने नोट अब केवल कागज़ के एक टुकड़े के समान रह जायेंगे। ऐसे नागरिक जो संपत्ति, मेहनत और इमानदारी से कमा रहें हैं, उनके हितों की और उनके हक़ की पूरी रक्षा की जायेगी। ध्यान रहे की 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये, 10 रुपये, 5 रुपये, 2 रुपये और 1 रूपया का नोट और सभी सिक्के नियमित हैं और लेन देन के लिए उपयोग हो सकते हैं। उस पर कोई रोक नहीं है। 

हमारा यह कदम देश में भ्रष्टाचार, काला धन एवं जाली नोट के खिलाफ हम जो लड़ाई लड़ रहे हैं, सामान्य नागरिक जो लड़ाई लड़ रहा है, उसको इससे ताकत मिलने वाली है। इन दिनों में देशवाशियों को कम से कम तकलीफ का सामना करना पड़े, इसके लिए हमने कुछ व्यवस्था की है: 

1. 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट, 10 नवम्बर से लेकर 30 दिसम्बर 2016 तक अपने बैंक या डाक घर (पोस्ट ऑफिस) के खाते में बिना किसी सीमा के जमा करवा सकते हैं।

2. आपके पास लगभग 50 दिनों का समय है। अतः नोट जमा करने के लिए आपको अफरा तफरी करने की आवश्यकता नहीं है।

3. आपकी धनराशि आपकी ही रहेगी, आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।

4. 500 रुपये या 1,000 रुपये के पुराने नोटों को खाते में डाल कर आप अपनी जरूरत के अनुसार फिर से निकाल सकते हैं।

5. केवल शुरू के दिनों में खाते से धनराशि निकालने पर प्रति दिन दस हज़ार रुपये और प्रति सप्ताह बीस हज़ार रुपये की सीमा तय की गई है। ऐसा नए नोटों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इस सीमा में आने वाले दिनों में वृद्धि कर दी जायेगी।

6. खाते में जमा करने की सुविधा के साथ साथ एक दूसरी सुविधा भी दी जा रही है।

7. तत्काल आवश्यकता के लिए 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को नए एवं मान्य नोट के साथ 10 नवम्बर से 30 दिसम्बर तक आप किसी भी बैंक या प्रमुख और उप डाकघर (हेड पोस्ट ऑफिस और सब-पोस्ट पोस्ट ऑफिस) के काउंटर से अपना पहचान पत्र जैसे की आधार कार्ड, मतदाता यानी वोटर कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड इत्यादि सबूत के रूप में पेश करके आप नोट बदल सकते हैं।

8. प्रारम्भ में 10 नवम्बर से 24 नवम्बर तक चार हज़ार रुपये तक के पुराने 500 एवं 1,000 रुपये के नोट बदले जा सकते हैं। 15 दिनों के बाद यानी 25 नवम्बर से चार हज़ार रुपये की सीमा में वृद्धि कर दी जाएगी। 

9. ऐसे लोग जो इस समय सीमा के अन्दर अर्थात 30 दिसम्बर 2016 तक पुराने नोट किसी कारणवस जमा नहीं कर पाए, उनको 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट बदलने का एक आखिरी अवसर दिया जाएगा।

10. ऐसे लोग रिज़र्व बैंक के निर्धारित ऑफिस में अपनी राशि एक घोषणा पत्र यानी declaration फॉर्म के साथ 31 मार्च 2017 तक जमा करवा सकते हैं।

11. 9 नवम्बर और कुछ स्थानों में 10 नवम्बर को भी ATM काम नहीं करेंगे। प्रारम्भ में ATM से प्रति कार्ड प्रति दिन निकाली जा सकने वाली राशि की सीमा दो हज़ार रुपये रहेगी।

12. फिर उसे कुछ अवधि के बाद बढ़ा कर चार हज़ार रुपये कर दिया जाएगा।

13. वैसे तो 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट आज रात्रि 12 बजे से कानूनी तौर पर ख़त्म हो जायेंगे, परन्तु सामान्य जन-जीवन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से हमने इस प्रक्रिया में शुरू के 72 घंटों में यानी 11 नवम्बर की रात्रि 12 बजे तक नागरिकों के लिए कुछ विशेष व्यवस्था की है।

14. 11 नवम्बर की रात्रि 12 बजे तक सभी सरकारी अस्पतालों में भुगतान के लिए पुराने 500 या 1,000 रुपये के नोट स्वीकार किये जायेंगे।

15. इस से वैसे परिवार जिनमे कोई बीमार है उन्हें उपचार में कोई बाधा न आये।

16. ऐसे सरकारी अस्पतालों में यदि दवा के दुकान की व्यवस्था है तो डॉक्टर के दिए गए पर्चे पर 500 और हज़ार के पुराने नोटों से दवा खरीदने की सुविधा भी 72 घंटे तक उपलब्ध रहेगी।

17. ऐसे ही 11 नवम्बर की रात्रि 12 बजे तक, रेलवे के टिकट बुकिंग काउंटर, सरकारी बसों के टिकट बुकिंग काउंटर और हवाई अड्डों पर एयरलाइन्स के टिकट बुकिंग काउंटर पर केवल टिकट खरीदने के लिए पुराने नोट अर्थात 500 और 1,000 रुपये के नोट स्वीकार करने की छूट होगी। ऐसा हमने उन परिवारों की जरूरतों को देखते हुए किया है जो इस समय यात्रा कर रहे होंगे। 

18. केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा प्रमाणित कोआपरेटिव की दिनचर्या की वस्तुओं की दूकान (जैसे केंद्रीय भंडार, सफल) और दुग्ध विक्रय केन्द्रों (मिल्क पार्लर) में भी 11 नवम्बर की रात 12 बजे तक पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट स्वीकार करने की छूट होगी। इस दौरान इन संस्थानों को प्रतिदिन अपने स्टॉक और बिक्री की सुचना रजिस्टर में रखनी होगी।

19. सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक सेक्टर) के पेट्रोल और CNG गैस स्टेशन (रिटेल आउटलेट्स) पर पेट्रोल, डीजल और CNG गैस की बिक्री के लिए भी 11 नवम्बर की रात 12 बजे तक पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट स्वीकार करने की छूट होगी। इस दौरान प्रतिदिन अपने स्टॉक और बिक्री की सुचना रजिस्टर में रखनी होगी।

20. शवदाह गृह/ क्रेमाटोरियम जैसी जगहों पर भी 11 नवम्बर की रात 12 बजे तक पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट स्वीकार करने की छूट होगी।

21. अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेश से आ रहे या विदेश को जा रहे लोगों को अगर उनके पास पुराने 500 और 1,000 के नोट हैं तो ऐसे नोटों की 5,000 रुपये तक की राशि को नई एवं मान्य करेंसी नोटों से बदलने की सुविधा दी जायेगी।

22. अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा या 5,000 रुपये तक के पुराने नोटों को नई एवं मान्य करेंसी नोटों से बदलने की सुविधा दी जायेगी।

23. इन सारी सुविधाओं के अलावा मैं यह स्पष्ट करना चाहूँगा की इस पूरी प्रक्रिया में नॉन-कैश लेन देन में यानी चेक से पेमेंट, डिमांड ड्राफ्ट से पेमेंट, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट अथवा इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रान्सफर में कोई रुकावट नहीं आएगी। ये कारोबार जैसा पहले चलता था वैसा ही चलता रहेगा। 


इन सारे इंतज़ाम के बावजूद हमारे ईमानदार देशवासियों को अगर तकलीफ का सामना करना पड़ा तो अनुभव यह बताता है कि इस देश का सामान्य नागरिक देश की भलाई के लिए त्याग करने और कठिनाई सहने के लिए कभी भी पीछे नहीं रहता है। जब मैं सुनता हूँ की कोई गरीब विधवा LPG सब्सिडी छोड़ने में आगे आती है, यह त्याग एक रिटायर्ड स्कूल टीचर में भी पाया जाता है जब वो पेंशन से स्वच्छ भारत कोष में योगदान देने कोप आगे आता है, जब हम ये सुनते हैं कि गरीब आदिवासी माँ का बकरी बेचकर शौचालय बनाने के लिए पैसे लगा देती है, एक फौजी का अपने गाँव को स्वच्छ गाँव बनाने के लिए सत्तावन हज़ार रुपये का दान देने के लिए आगे आता है। मैंने तो यह देखा है की देश के सामान्य नागरिक की एक ही तमन्ना है कि वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है – बस देश का कल्याण हो। 

अतः भ्रष्टाचार, काला धन, जाली नोट और आतंकवाद के खिलाफ जंग में हम लोग थोड़ी सी कठिनाई वह भी कुछ दिनों के लिए तो झेल ही सकते हैं। मेरा पूरा विश्वास है की देश का प्रत्येक नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ शुचिता के इस महायज्ञ में मिल कर खड़ा होगा। 

मेरे प्यारे देशवासियों, 
दिवाली के पर्व के बाद, अब ईमानदारी के इस उत्सव में, प्रमाणिकता के इस पर्व में आप बढ़ चढ़ कर हाथ बटायें। मेरा पूरा विश्वास है कि देश के सभी राजनीतिक दल, राजनैतिक कार्यकर्ता, सामजिक और शैक्षणिक संस्थाएं, मीडिया सहित समाज के सभी वर्ग से इस महान कार्य में सरकार से भी ज्यादा बढ़ चढ़ कर भाग लेंगे, सकारात्मक भूमिका अदा करेंगे और इस कार्य को सफल बना कर ही रहेंगे। 

म्रेरे प्यारे देशवासियों, 
ये बातें जब मैं आपके समक्ष रख रहा हूँ, इसी समय सरकार के अलग-अलग विभागों को भी जानकारी हो रही है, बैंक हो, पोस्ट ऑफिस हो, रेलवे हो, अस्पताल हो, उनके अधिकारीयों को भी इस विषय की इससे पहले कोई जानकारी नहीं मिली है। क्योंकि इस काम में गोपनीयता बहुत ही आवश्यक थी। ऐसी स्थिति में रिज़र्व बैंक, सभी बैंक्स और पोस्ट ऑफिस को कम समय में बहुत सारी व्यवस्था करनी है। इस व्यवस्था में कुछ समय तो जाएगा। इसलिए रिज़र्व बैंक ने यह फैसला लिया है की 9 नवम्बर को सभी बैंक पब्लिक कार्य के लिए बंद रहेंगे। नागरिकों को असुविधा होगी। मेरा पूरा भरोसा है की बैंक और पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले सभी साथी देश हित में इस पवित्र कार्य को सफलतापूर्वक परिपूर्ण करेंगे। भूतकाल में उन्होंने ये करके दिखाया है। मेरा जनता-जनार्दन से इतना ही आग्रह है कि सभी नागरिक धैर्य रखते हुए सभी बैंक्स और पोस्ट ऑफिस अधिकारीयों के साथ सहयोग करें, यही मेरी उनसे आग्रह और बिनती है। 

बहनों और भाइयों, 
समय समय पर मुद्रव्यवस्था को ध्यान में रख कर रिज़र्व बैंक, केंद्र सरकार की सहमति से नए अधिक मूल्य के नोट को सर्कुलेशन में लाता रहा है। 2014 में रिज़र्व बैंक ने 5,000 और 10,000 रुपये के करेंसी नोट का प्रस्ताव सरकार को भेजा था जिसे हमारी सरकार ने विचार-विमर्श के बाद अस्वीकार कर दिया था। अब इस पूरी प्रक्रिया में रिज़र्व बैंक द्वारा 2,000 रुपये के नए नोट के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया है। पूरी तरह से नए तौर पर डिजाईन किये गए 500 रुपये और 2,000 रुपये के नए करेंसी नोट अब सर्कुलेशन में लाया जाएगा। रिज़र्व बैंक अपने पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए, करेंसी सर्कुलेशन में अधिक मूल्य के नोटों का हिस्सा अब एक सीमा के अन्दर ही रहे इसके लिए रिज़र्व बैंक आवश्यक प्रबंध करेगा। 

अंत में मेरे प्यारे देशवाशियों 
मैं यह दोहराना चाहता हूँ की किसी देश के इतिहास में ऐसे क्षण आते हैं जब हर व्यक्ति यह महसूस करता है की उसे भी उस क्षण का हिस्सा बनना है। उसे भी राष्ट्र हित में, राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना है। परन्तु ऐसे क्षण हर किसी की जिंदगी में गिने चुने ही आते हैं। आज समय हमें फिर से एक अवसर दे रहा है। हर सामान्य नागरिक भ्रष्टाचार, काला धन, जाली नोट के खिलाफ इस महायज्ञ में , इस लड़ाई में अपना योगदान दे सकता है। 

बहनों और भाइयों आपसे इस प्रक्रिया में जितना सहयोग मिलेगा, शुद्धिकरण उतना ही सफल होगा। देश के लिए यह चिंता का कारण था कि भ्रष्टाचार और काले धन को जीवन का एक सहज हिस्सा मान लिया गया था। यह सोच आज हमारे राजनैतिक, सामाजिक, और प्रशासनिक जीवन को दीमक की तरह खाए जा रहा है। शासन व्यवस्था का कोई भी अंग इस दीमक से अछूता नहीं है। 

समय समय पर हमने देखा है की भारत के सामान्य जन मानस को अगर भ्रष्टाचार और कुछ दिनों की असुविधा में से एक को चुनना हो, तो वह बेहिचक, मैं कहता हूँ बेहिचक मेरे देश का ईमानदार नागरिक असुविधा को तो चुनेगा लेकिन भ्रष्टाचार को कदापि नहीं चुनेगा। 

आपसे मैं फिर एक बार आह्वान करता हूँ की आइये जैसे आपने दिवाली के पर्व में अपने घर और आस पड़ोस की सफाई की, वैसे ही सफाई के काम को आगे बढाते हुए, हम इस महायज्ञ में अपनी पूर्णाहुति डाल कर इसे सफल बनाइये। इतने बड़े देश में, इतनी बड़ी सफाई के महापर्व में असुविधा को ध्यान में न रखते हुए आइये सभी शुचिता की दिवाली मनाएं, पुरे विश्व को भारत की इस ईमानदारी का उत्सव दिखाएँ, पूरे देश में प्रमाणिकता का पर्व मनाएं जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके, काले धन पर नकेल कस सके, जाली नोटों का खेल खेलने वालों को नेस्तनाबूद कर सके, जिस से की देश का धन गरीबों के काम आ सके, हर ईमानदार नागरिक को देश की सम्पन्नता में उसकी उचित हिस्सेदारी मिल सके, आने वाली पीढ़ी गर्व से अपना जीवन जी सके। मैं आप सब के सहयोग के लिए पूरे विशवास के साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों कि मदद से भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को और आगे ले जाना चाहता हूँ। मुझे विश्वास है आपका साथ, आपका सहयोग आने वाली पीढीयों के लिए प्रेरक बनेगा। मैं फिर एक बार आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। भारत माता की जय। 
***
AKT/AK  

Monday, November 07, 2016

लुधियाना के डी डी जैन महिला कालेज को मिला "ए' ग्रेड

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने दिया सम्मान
लुधियाना: 7 नवम्बर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
डी डी जैन महिला कालेज को "ए" ग्रेड प्राप्त हुआ है जो इस कालेज  प्रबन्धकों की लम्बी साधना का फल है। इसकी घोषणा आज कालेज में एक पत्रकार सम्मेलन में की गयी। लुधियाना के पुराने और प्रतिष्टित शिक्षा संस्थानों में से एक--देवकी देवी जैन मेमोरियल कालेज फार वीमेन को--"ए" ग्रेड मिलने से सभी जैन शिक्षा संस्थानों में प्रसन्नता की लहर है। यह ग्रेड "नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिशन कॉउंसिल" ने प्रदान किया है। इस खुशी को आज मीडिया के ज़रिये पूरी दुनिया से बांटते हुए कालेज के प्रबन्धकों ने बताया कि इस कॉउंसिल की टीम ने 26 से 28 सितम्बर तक कालेज का दौरा  किया था और इस कालेज से छात्रायों को मिलती सुविधायों का बारीकी से अध्यन भी किया था। उस गहन जांच के बाद अब 5 नवम्बर को इस कॉउंसिल ने अपनी स्टैंडिंग कमेटी की 18वीं बैठक में डी डी जैन महिला कालेज को "ए" ग्रेड देने की घोषणा की।  इस पत्रकार सम्मेलन में कालेज की प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष नन्द कुमार जैन, प्रिंसीपल-डॉक्टर सरिता बहल, कोआर्डिनेटर-सुश्री सरिता माटा और को-कोआर्डिनेटर-डॉक्टर अंतर ज्योति घई सहित मैनेजिंग कमेटी के कई प्रमुख सदस्य भी मौजूद थे।
जब वर्ष 1971 में देवकी देवी जैन मैमोरियल कालेज की स्थापना हुई उस समय हालात आज से बिलकुल अलग थे। समाज में आज की तरह चमक दमक नहीं थी। आज की तरह दिखावा भी नहीं था। आज की तरह पैसे का बोलबाला भी नहीं था। उस समय केवल उच्च शिक्षा और ऊंचे नैतिक मूल्यों को ही समाज में स्वीकार किया जाता था और जिनके पास ये सब होता उनका सम्मान भी होता था। 
लेकिन इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रतियोगिता का दौर भी शुरू हो चुका था। अंग्रेजी स्कूलों का चलन बढ़ने। अंग्रेजी को लोग बहुत ज़्यादा महत्व देते थे।  अंग्रेजी के साथ साथ विदेशी मूल्यों की जानकारी और साथ ही साथ स्वदेशी संस्कारों का ज्ञान, प्रतियोगी समाज के साथ रहते हुए विजय संकल्प को बलवान बनाना और ज़िन्दगी को भारतीय सरंचना में एक मिसाल बना कर दिखाना आसान नहीं था लेकिन डी डी जैन कालेज ने यह सब करके दिखाया। निरन्तर साधना का ही परिणाम है कि यह कालेज लगातार उन्नति की शिखरों को छू रहा है। कालेज से शिक्षा प्राप्त करके बहुत सी छात्रायों ने नाम भी कमाया और अपने परिवार के साथ साथ देश का नाम भी रौशन किया। आकाशवाणी और दूरदर्शन में कार्यक्रमों की रेकार्डिंग के दौरान अक्सर ऐसी बहुत सी प्रतिभायों से मुलाकात होती जिन्होंने इस कालेज से शिक्षा ग्रहण की होती और फिर इसी कालेज में शिक्षा देने की ज़िम्मेदारी भी सम्भाली होती। गर्व की बता है कि यह सिलसिला आज भी जारी है। दुनिया के बहुत से हिस्सों में फ़ैल चुकी हैं इस कालेज की प्रतिभाएं।
मीडिया मीट के दौरान कालेज की प्रबन्धन समिति ने इस सारी उपलब्धि का श्रेय कालेज के मेहनती स्टाफ और कालेज की उस विचारधारा को दिया जिसके अंतर्गत छात्रायों को वित्तीय लाभ से ऊंचा उठ कर शिक्षा दी जाती है तां कि गरीब से गरीब बच्चियां भी पढ़ाई से वंचित न रहे। गौरतलब है कि महंगाई और कारोबार के इस व्यापारिक युग में इस कालेज से सबंधित ऐसी बहुत सी बच्चियां हैं जिनका पढ़ने का सपना इस कालेज ने ही साकार किया। पैसा कमाने की धुन से अलग रहते हुए शिक्षा को ही सबसे पहला मकसद रखा।  इस लिए "ए" ग्रेड का मिलना उस साधना का सम्मान है, उस मेहनत का सम्मान है, उस लग्न संकल्प  जिस की शकरि ने कालेज को प्रगति पथ पर लगातार अग्रसर रखा हुआ है।  

Sunday, November 06, 2016

सवालों से किसे नफ़रत हो सकती है? !!

Sunday:6 November 2016 at 10:04 PM
क्या जवाब देने वालों के पास कोई जवाब नहीं है?
सवाल करने की संस्कृति से किसे नफरत हो सकती है? क्या जवाब देने वालों के पास कोई जवाब नहीं है? जिसके पास जवाब नहीं होता, वही सवाल से चिढ़ता है। वहीं हिंसा और मारपीट पर उतर आता है। अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि अथारिटी से सवाल नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ एक बात नहीं है बल्कि ये आम जनता को चेतावनी है। उसकी हैसियत बताने का प्रयास है कि हम अथारिटी हैं और आप कुछ नहीं हैं। हम जो कहेंगे आप वही मानेंगे। सरकार के जो मंत्री ये बात कहते हैं, वो भूल जाते हैं कि सवाल पूछ पूछ कर ही उन्होंने सत्ता हासिल की है। अगर तब की सरकारें भी यही कहती तो इस देश में कभी सत्ता परिवर्तन ही नहीं होता। जिससे बेख़ौफ़ होकर कुर्सी पर गुंडे अपराधी बैठ जाते।अक्सर सत्ता से जुड़े लोग ही क्यों कहते हैं कि कुछ भी पूछने की आज़ादी हो गई है। तो क्या सरकार से पूछकर पूछना होगा? आप कभी भी देख लीजिए, बहुत आज़ादी हो गई टाइप की धमकी वही देते हैं जिनकी निष्ठा उस वक्त के सरकार के प्रति होती है। ऐसे लोग सत्ता के प्रतिनिधि गुंडे होते हैं।
सवाल पूछने से ही लोकतंत्र गतिशील रहता है। अब तो यह कहा जाने लगा है कि लगातार असंतोष और सवाल व्यक्त करने से विकास बाधित होता है। इसका मतलब है, हुक्मरानों ने इशारा कर दिया है कि वे अब किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। हम जवाब नहीं देंगे। ऐसी बातें सुनकर किसी को भी डरना चाहिए। अगर विकास पर सवाल नहीं होगा तो क्या होगा? क्या इस बात की गारंटी आप किसी नेता या सरकार की ले सकते हैं कि वो जो करेगी, कभी ग़लत नहीं करेगी। अगर दस हज़ार करोड़ के ठेके में दलाली हो गई तब तो सवाल पूछने पर सरकार जेल में डाल देगी कि आप विकास के विरोधी हैं। विकास सवालों से पर नहीं है। इसलिए भी नहीं है कि दुनिया में विकास का कोई भी मॉडल ऐसा नहीं है जिसमें हज़ार कमियाँ नहीं है।
क्या आपने सरकार और विकास का कोई ऐसा मॉडल देखा है, सुना है, पढ़ा है जिसमें सवाल पूछना मना होता है क्योंकि वह सरकार कोई ग़लती करती ही नहीं है। उसके विकास के मॉडल में कोई ग़रीब नहीं होता है। उसके विकास के मॉडल में कोई किसान आत्महत्या नहीं करता है। उसके मॉडल में सबका सस्ता इलाज होता है। मेरी जानकारी में दुनिया में ऐसा कोई मॉडल नहीं है। ऐसी कोई सरकार नहीं है।
सवालों को लेकर असहनशीलता बढ़ती जा रही है। इसके कारण बहुत साफ है। दुनिया के तमाम मॉडल फ़ेल हो चुके हैं। एक या दो फीसदी लोगों के पास पूरी दुनिया की आधी से ज़्यादा संपत्ति आ गई है। भारत में भी चंद लोगों के पास आधी से अधिक आबादी के बराबर संपत्ति आ गई है। सरकारों के नुमाइंदे इन्हीं चंद लोगों के संपर्क में रहते हैं। बल्कि इनकी मदद के बग़ैर अब राजनीति मुमकिन नहीं है। आप देखते ही होंगे कि चुनाव आते ही प्रचार में कितना बेशुमार पैसा खर्च होता है। राजनीति को ईंवेंट मैनेजमेंट बना दिया जाता है। प्रेस भी इस प्रक्रिया का साथी हो गया है।
इसके बावजूद पत्रकारों का बड़ा हिस्सा इनसे अलग बचा हुआ है। वो नए नए संसाधनों से सवाल पूछने का विकल्प बनाने का प्रयास कर रहा है। प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर पूरी दुनिया में बहस हो रही है। कारपोरेट और सरकार देनों मिलकर प्रेस का गला दबा रहे हैं। यह इसलिए हो रहा है कि जनता अब पूछने वाली है कि सिर्फ दो प्रतिशत आबादी के पास सत्तर फीसदी आबादी का पैसा कहाँ से आ गया है। क्यों वे भूखे मरने लगे हैं। ज़ाहिर है सवाल पूछने की गुज़ाइश ही एकमात्र ख़तरा है। इसलिए उसे दबाने का प्रयास चल रहा है। ताकि आम लोग भूख, रोटी और रोज़गार से जुड़े सवाल न कर सके। हाल ही में पंजाब के एक किसान ने पांच साल के अपने बेटे को सीने से लगाकर नहर में छलाँग लगा दी। उस पर दस लाख का क़र्ज़ा था। वो क्यों नहर में कूद गया क्योंकि कोई उसके लिए सवाल उठाने वाला नहीं था ? कोई उसकी बात सुनने वाला नहीं था।
इसलिए प्रेस की आज़ादी की रक्षा करना पत्रकार से ज़्यादा नागरिक का सवाल है। आप हमारे रक्षक हैं। सरकारों को लगता है कि ख़ूब प्रचार कर जनता को अपना गुलाम बना लिया है। यह जनता वही सुनेगी जो वे कहेगी। पूरी दुनिया में नेता इसी तरह की भाषा बोल रहे हैं। उन्हें लगता है कि जनता प्रेस के ख़िलाफ़ है। प्रेस में कई कमियाँ हो सकती हैं लेकिन जनता की तरफ से सवाल पूछने का अधिकार कोई नहीं छिन सकता है। जनता ही पूछ बैठेगी कि हुजूर क्या बात है कि आपको सवाल पसंद नहीं है।
पत्रकार डरेगा, नहीं लिखेगा तो नुक़सान नागरिक का ही होगा। सरकारों को दमन बढ़ जायेगा। गुलाम प्रेस नागरिकों का दम घोंट देगा। इसलिए सवाल पूछने के माहौल का समर्थन कीजिये। जो भी इसके ख़िलाफ़ है उसे लोकतंत्र के दुश्मन के रूप में समझिये। एक देशभक्ति यह भी है कि हम जनता की रक्षा के लिए सवाल करें। सवाल करने से ही राष्ट्रीय सुरक्षा मज़बूत होती है। जवाब मिलने से ही लोग सुरक्षित महसूस करते हैं। अगर जवाब नहीं मिलेगा तो जनता असुरक्षित महसूस करेगी। जनता असुरक्षित रहेगी तो राष्ट्र सुरक्षित नहीं हो सकता है। सीमा पर जवान हमारी रक्षा करते हैं ताकि सीमा के भीतर पत्रकार सरकारों से सवाल कर नागरिकों की रक्षा करते हैं। इसलिए पत्रकार को क़लम का सिपाही कहा गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जनता का सेवक कहा जाता है। हम सवाल पूछने वाले सिपाही हैं ताकि सेवक जनता से बेवफ़ाई न करे।

लगातार बढ़ रहा है एनडीटीव इंडिया पर बैन का विरोध

शब्दों पर पाबन्दी के इस मुद्दे पर एकजुट हुए अधिकतर संगठन
एनडीटीवी इंडिया पर एक दिवसीय बैन के खिलाफ विरोध जारी है। आपातकाल और सेंसरशिप को कोसने वालों ने खुद इंदिरागांधी के कदम को जायज़ थर दिया है। अनुमान लगाइये अगर आपातकाल लगा तो पाबन्दियाँ कैसी होंगीं। 

युवा पत्रकार महासंघ की तरफ से उबैद कुरैशी ने अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा हम इसके खिलाफ हैं। *प्रेस क्लब ऑफ इंडिया,महिला प्रेस क्लब ,एडिटर्स ब्रॉडकास्टर्स एसोसियेशन,एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया* अरुणाचल से लेकर मुम्बई तक

विरोध। *दिल्ली प्रेस क्लब से लेकर नेशनल मीडिया कान्फेडरशन* के हर सदस्य का विरोध *आल इन्डिया स्माल नयूज़ पेपर रिपोर्टर* से लेकर *अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा मुहिम पीएमजे* का एनडीटिवी के समर्थन मे विरोध फ्रीडम फार फ्री प्रेस कि आजादी के लिये *अखिल भारतीय विरोध वुमन जर्नलिस्ट एसोसियेशन* का विरोध
*कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विरोध*
अगर ये आपातकाल नही है और राष्ट्रवाद है फिर *इंदिरा गांधी* द्वारा लगाया आपातकाल का विरोध क्यों?
उनकी और उनके समर्थकों के नज़र में भी राष्ट्रवाद ही था।
अपनी बोलने लिखने सवाल करने कि अभिव्यक्ती कि आजादी के लिये अपने संगठनो का नाम लिख कर विरोध जताना सीखिये !!

एनडीटीवी पर पाबंदी के खिलाफ भोपाल के पत्रकार आगे आये हैं। पत्रकारों ने एक सुर में इस बैन को ग़लत बताया और इसे लिखने बोलने लिखने सवाल करने कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ माना। क़रीब डेढ सौ से ज्यादा पत्रकारों ने बैठक की और तय किया कि सरकार के इस क़दम के खिलाफ नौ नवंबर तक काली पट्टी बाँधकर काम करेंगे।

*अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति* ने भी कहा कि वह इस आदेश का पुरजोर विरोध करती है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया,महिला प्रेस क्लब ,एडिटर्स ब्रॉडकास्टर्स एसोसियेशन,एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया अरुणाचल से लेकर मुम्बई तक विरोध।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विरोध की बात इसलिए नहीं कि क्योंकि राष्ट्रवादियों को आपत्ति हो जाती।
अगर ये आपातकाल नही है और राष्ट्रवाद है फिर इंदिरा गांधी द्वारा लगाया आपातकाल का विरोध क्यों?

उनकी और उनके समर्थकों के नज़र में भी राष्ट्रवाद ही था।

*अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति* इस आदेश का पुरजोर विरोध करती है।
*श्री सैयद महमूद अली चिश्ती* 
राष्ट्रीय संरक्षक ABPSS
*श्री जिग्नेश कालावाड़िया*
राष्ट्रीय अध्यक्ष ABPSS
*श्री नितिन सिन्हा*
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ABPSS
*श्री महफूज़ खान*
राष्ट्रीय महासचिव ABPSS
*श्री राकेश प्रताप सिंह परिहार* 
राष्ट्रीय सचिव ABPSS
*श्री अमित गौतम* 
प्रदेश संयोजक छत्तीसगढ़ ABPSS
*श्री गोविन्द शर्मा (गौर)*
प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ ABPSS

बाज का गीत//देबाजीत घोष

हम एक बार फिर गाएंगे
Debajit Ghosh
बाज का गीत हम 
एकबार फिर गाएंगे
लहूलुहान कर
खुद को
खुद के बीच से 
फिर उग आएंगे
गिरेंगे हारेंगे 

पर हार क्यों मानेंगे?
सौ वर्ष पहले
हम जीते थे
पर हार कब माने थे हम ?
बाज हैं हम
तोड़कर अपनी चोचे
नोचकर अपनी पंखे
फिर नया उगा लेंगे
उड़ेगे फिर आकाश में
लहरों को
फिर ललकारेंगे
बाज का गीत हम
एकबार फिर गाएंगे.