Saturday, September 14, 2013

गृह मंत्रालय द्वारा हिंदी दिवस समारोह का आयोजन

14-सितम्बर-2013 16:20 IST
राष्‍ट्रपति‍ ने की हि‍न्‍दी में शोध को बढ़ावा देने की अपील 
राष्‍ट्रपति‍ श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि शिक्षा संस्थानों को हिंदी में साहित्य एवं शोध को बढ़ावा देना होगा। आज नई दि‍ल्‍ली में हि‍न्‍दी दि‍वस के अवसर पर आयोजि‍त एक समारोह को संबोधि‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि‍ हिंदी आम आदमी की भाषा के रूप में देश की एकता का सूत्र है। उन्‍होंने कहा कि‍ हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए |
श्री मुखर्जी ने कहा कि भाषा का विकास उसके साहित्य पर निर्भर करता है| उन्‍होंने कहा कि‍ आज के तकनीकी के युग में इंटरनेट के माध्यम से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्‍थापि‍त कि‍ए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए और वि‍ज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी हिंदी में काम को बढ़ावा देना चाहिए| राष्‍ट्रपति‍ने कहा ''हम सबका यह प्रयास होना चाहिए कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की मान्य भाषा का दर्जा जल्द से जल्द प्राप्त हो |''

इससे पहले केन्‍द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री रतनजीत प्रताप नारायण सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जन संपर्क की इस भाषा को सरकारी तंत्र में स्थापित होने में कुछ समय अवश्य लग रहा है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब हिंदी अपने उस इच्छित मुकाम पर पहुंच कर अपना परचम लहराएगी । उन्‍होंने कहा कि‍ राजभाषा नीति‍के क्रि‍यान्‍वयन से सरकार के वि‍भि‍न्‍न मंत्रालयों एवं वि‍भागों द्वारा संचालि‍त जन कल्‍याण की वि‍भि‍न्‍न योजनाओं की जानकारी आम नागरि‍कों को हिन्‍दी में मि‍लने से गरीब, पि‍छड़े और कमजोर वर्ग के लोग भी लाभान्‍वि‍त होते हुए देश की मुख्‍यधारा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हमें भारी भरकम शब्दों का मोह त्याग कर आम बोल-चाल के सहज, सरल शब्दों को अपनाना होगा, जिससे हिंदीतर भाषा-भाषी भी अपनी झिझक छोड़ आसानी से हिंदी का प्रयोग कर सकें ।

     इस अवसर पर राष्‍ट्रपति‍ने राजभाषा हिंदी के प्रयोग में सर्वश्रेष्ठ प्रगति हासिल करने वाले मंत्रलयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बोर्डों/स्वायत्त निकायों, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों को पुरस्कार स्वरुप राजभाषा शील्ड देकर सम्मानित किया ।

इन्दिरा गांधी मौलिक पुस्तक लेखन श्रेणी में श्री वीरेंद्र कुमार तिवारी की पुस्तक ‘प्राचीन भारतीय स्मारकों का संरक्षण तकनीक एवं प्रविधियाँ’  तथा राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन वर्ग में डा निलय खरे एवं श्री श्यामसुंदर शर्मा की पुस्तक ‘आर्कटिक मध्य रात्रि के सूर्य का क्षेत्र’ को प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए। विभाग द्वारा चलाई गई नई योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट लेखों में डा ओम विकास के लेख ‘सूचना प्रौद्योगिकी में नागरी’ हिंदी भाषियों की श्रेणी में तथा श्री हेम कपिल, लक्ष्मी विनोद, महेश एम राव एवं शोभा एस प्रभु को संयुक्त रूप से हिंदीतर भाषियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्रदान किए गए |

गृह पत्रिकाओं में भाषाई क्षेत्र ‘क’, ‘ख’ तथा ‘ग’ के अंतर्गत ‘स्पंदन’, ‘प्रयास’, ‘वाणी’ को प्रथम तथा ‘इक्षु’, ‘यूनियन धारा’, ‘सुगंध’ को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किए गए |

केन्‍द्रीय गृह राज्‍य मंत्री श्री मुल्‍लापल्‍ली रामचन्‍द्रन और श्री अरुण कुमार जैन, सचिव, राजभाषा विभाग भी इस अवसर पर उपस्‍थि‍त थे।

समीर/राजीव

नरिंदर मोदी के नाम की घोषणा के बाद हर्षोल्लास

Fri, Sep 13, 2013 at 9:03 PM
अमृतसर में आतिशबाजी भी और लड्डू भी बंटे  पार्टी प्रत्याशी के हक में भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर लड़ेंगे चुनाव
अमृतसर: 13 सितम्बर 2013 (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): भाजपा की ओर से नरिंदर मोदी को एनडीए के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी चुने जाने पर पूरे देश में भाजपा की ओर से खुशी मनाई जा रही है। यहाँ तक कि अमृतसर में भी पंजाब भाजपा के महासचिव तरुण चुघ के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशी में भांगड़ा डाला, लड्डू बांटे और आतिशबाजी चलाई। यूं लगता था जैसे नरिंदर मोदी सचमुच प्रधानमन्त्री बन गए हों।  इस मौके पर तरुण चुघ ने कहा, कि नरिंदर मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद ही भाजपा लोकसभा 2014 के चुनाव जीत सकती है। उन्होंने कहा, कि इससे पहले ही शिव सेना की ओर से भाजपा को अपना समर्थन दिया जा चुका है और आज नरिंदर मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा और एनडीए की जीत यकीनी बन गई है। भाजपा के स्टार प्रचारक और अमृतसर से सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की नाराजगी के बारे में उन्होंने कहा, कि नरिंदर मोदी के प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने के बाद सभी भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में खुशी की लहर पाई जा रही है। उन्होंने कहा, कि नवजोत सिंह सिद्धू पार्टी के वरिष्ठ नेता है और वह भी नरिंदर मोदी के उम्मीदवार बनने पर खुश है। उन्होंने कहा, कि यदि नवजोत सिंह सिद्धू फिर से अमृतसर से भाजपा की टिकट पर चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो पार्टी कार्यकर्ता उन्हें जरूर विजयी बनाएंगे।  
गौरतलब है कि चंडीगढ़ में भी इस घोषणा के तुरंत बाद जश्न रहा जहां पंजाब के सहायक मीडिया सलाहकार विनीत जोशी की देखरेख और दिशा निर्देशों में आतिशबाजी चलाई गई और भांगड़ा डाला गया। इन खुशियों में महिला वर्ग भी बढ़ चढ़ कर शामिल हुआ। 

ਨਰਿੰਦਰ ਮੋਦੀ ਦਾ ਨਾਮ ਐਲਾਨੇ ਜਾਣ ਤੇ ਖੁਸ਼ੀਆਂ 

Friday, September 13, 2013

मामला दिल्ली सामूहिक बलात्कार का आरोपियों का

Fri, Sep 13, 2013 at 9:09 PM 
फांसी की सजा मिलने पर जताई महिलाओं और एनजीओ ने खुशी
अमृतसर: 13 सितम्बर2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों को कोर्ट की ओर से फांसी की सजा सुनाए जाने का पूरे देश में स्वागत किया जा रहा है। इस सजा को बलात्कारियों के लिए खतरे की घंटी और महिलाओं और युवतियों के लिए उनके हथियार के रूप में देखा जा रहा है। आज इस फैसले के बाद अखिल भारतीय ह्यूमन राइट्स आग्रेनाइजेशन (अभरो) की ओर से लड्डू बांट और ढोल बजा कर अपनी खुशी का इजहार किया गया। इस मौके पर अभरो की महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कहा, कि इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार और अदालतें किस हद कर फिक्रमंद हैं। उन्होंने कहा, कि इस फैसले ने बलात्कार करने की सोचने वालों के लिए भी एक माइल स्टोन तय कर दिया है, कि यदि उन्होंने ऐसा कुछ किया, तो उनका हाल भी इन आरोपियों जैसा ही होगा।

Thursday, September 12, 2013

उपराष्‍ट्रपति द्धारा पुस्‍तक ‘हिस्‍ट्री एज़ ए साइट ऑफ स्‍ट्रगल’ का विमोचन

11-सितम्बर-2013 16:33 IST
तिरूअनंतपुरम में हुआ प्रो. के.एन.पानिकर की पुस्तक का विमोचन
भारत के उपराष्‍ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने आज केरल के तिरूअनंतपुरम में आायेजित एक समारोह में प्रो. के.एन. पानिकर की पुस्‍तक ‘हिस्‍ट्री एज़ ए साइट ऑफ स्‍ट्रगल’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि प्रो. पानिकर का झुकाव बौद्धिक इतिहास की तरफ रहा है, जिसे उन्‍होंने सामाजिक तथा सांस्‍कृतिक इतिहास के साथ जोड़ने का प्रयास किया है। श्री अंसारी ने कहा कि उन्‍होंने चेतना के रूपांतरण में संस्‍कृति के महत्‍व पर विशेष ध्‍यान दिया है। 

श्री अंसारी ने कहा कि इस पुस्‍तक को लिखने में प्रो. पानिकर को अनेक वर्ष लगे हैं। उन्‍होंने कहा कि 650 से अधिक पृष्‍ठों की इस पुस्‍तक को एक बार में नहीं पढ़ा जाना चाहिए बल्कि इस पुस्‍तक के एक-एक पन्‍ने को और उसके हर एक भाग को ध्‍यानपूर्वक समझा भी जाना चाहिए। (PIB)
वि.कासोटिया/ प्रि.अ./य- 6125

जापान-भारत निवेश संवर्द्धन पर संयुक्‍त बयान

11-सितम्बर-2013 18:04 IST
केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और जापान के उद्योग मंत्री तोशिमित्‍सु मोतेगी का बयान 
• केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा और जापान के अर्थव्‍यवस्‍था, व्‍यापार एवं उद्योग मंत्री तोशिमित्‍सु मोतेगी ने भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय निवेश एवं व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत की राष्‍ट्रीय विनिर्माण नीति के तहत केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय तथा जापान के अर्थव्‍यवस्‍था व्‍यापार एवं उद्योग मंत्रालय के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने की उम्‍मीदें एक बार फिर दोहराई, जिससे दोनों देशों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। दोनों मंत्रियों ने यह भी उम्‍मीद जताई कि भारत और जापान कारोबारी माहौल को बेहतर एवं पारदर्शी बनाने के लिए एकजुट होकर काम करेंगे जैसा कि 29 मई, 2013 को आयोजित जापान-भारत सम्‍मेलन में जारी संयुक्‍त बयान में कहा गया था। 

• 17 मई, 2013 को जारी संयुक्‍त बयान के अनुसार व्‍यापारिक साझेदारी मजबूत करने के लिए योजनागत पहलेां और परियोजनाओं के समर्थन में मंत्रियों ने दोनों देशों के आपसी फायदे के लिए निवेश सवंर्द्धन को बढ़ावा देने की महत्‍ता दोहराई तथा निवेश को प्रोत्साहन देने के उपायों पर अपनी सहमति जताई। उन्‍होंने राज्‍य सरकारों के साथ साझेदारी में कारोबारी माहौल बेहतर बनाने और निवेश प्रोत्‍साहन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी रजामंदी दी। 

• दोनों पक्षों ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए विनिर्माण उद्योग प्रोत्‍सा‍हन बोर्ड जैसा विशेष ढाँचा बनाने का स्‍वागत किया। श्री शर्मा इस बोर्ड के अध्‍यक्ष है। दोनों मंत्रियों ने फरवरी, 2013 में मंत्री स्‍तरीय संवाद के बाद इलेक्‍ट्रा‍निक्‍स क्षेत्र में हुई प्रगति का स्वागत किया। भारत के इलेक्‍ट्रानिक्‍स क्षेत्र में जापानी कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने के लिए इलेक्‍ट्रानिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में जापान हेल्‍प डेस्‍क की स्‍थापना की गई है और सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्‍ट्रानिक्‍स क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संयुक्‍त कार्य समूह के गठन हेतु कदम उठाए गए हैं। दोनों पक्षों ने भारत में जापान की सहायता से विश्‍वस्‍तरीय बुनियादी ढांचा वाले जापानी इलेक्‍ट्रानिक्‍स मैन्‍युफैक्‍चरिंग टाऊनशिप की स्‍थापना पर जोर दिया और संयुक्‍त कार्य समूह की अगली बैठक में यह मसला उठाने पर सहमति जताई। 

• दोनों पक्षों ने कहा कि भारत में जापान की ओर से प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक आधारभूत ढांचा बेहद महत्‍वपूर्ण है। दोनों देशों ने दिसम्‍बर, 2006 में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की टोक्‍यो यात्रा के दौरान उनकी जापानी प्रधानमंत्री श्री शिन्‍जो आबे के साथ मुलाकात में भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी के प्रतीक दिल्‍ली-मुम्‍बई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) परियोजना में हुई प्रगति का स्‍वागत किया। दोनों पक्षों ने वर्ष 2011 में शुरू हुई चेन्‍नई-बेंगुलुरू औद्योगिक गलियारा (सीबीआईसी) परियोजना में हुई प्रगति का भी स्‍वागत किया।

• जापान विदेश व्‍यापार संगठन की रिपोर्ट ''निवेश के जरिए निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत-जापान निवेश संवर्द्धन की चुनौतियां'' का हवाला देते हुए दोनों मंत्रियों ने डीएमआईसी और सीबीआईसी परियोजनाओं के लिए की जा रही पहल के अलावा अन्‍य निवेशों को बढ़ावा देने के लिए विस्‍तृत पहल के महत्‍व पर बल दिया। 

• दोनों पक्ष भारत और जापान के बीच दोतरफा निवेश को प्रोत्‍साहन देने के लिए कार्य योजना की रूपरेखा तैयार करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। यह कार्य योजना तीन स्‍तंभों पर आधारित है: (1) भारत-जापान व्‍यापार साझेदारी (2) निवेश संवर्द्धन पर केंद्र और राज्‍य सरकारों के बीच सहयोग और (3) कारोबारी वातावरण को बेहतर बनाना। 

• दोनों पक्ष कार्य योजना की प्रगति की वार्षिक समीक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। (PIB)
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वीके/वाईएस/एलडी-6126

लाइबेरिया की राष्‍ट्रपति की भारत में राजकीय यात्रा

11-सितम्बर-2013 19:03 IST
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री का मीडिया वक्‍तव्‍य 
लाइबेरिया की राष्‍ट्रपति की भारत में राजकीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन‍ सिंह का मीडिया वक्‍तव्‍य : 
''भारत में अपने पहले दौरे पर आईं लाइबेरिया की राष्‍ट्रपति सरलीफ का स्‍वागत करना हमारे लिए गर्व की बात है। उनके विचारों को अफ्रीका समेत समूचे विश्‍व में बड़े सम्‍मान के साथ सुना जाता है। उनके नजरिए और नेतृत्‍व ने लाइबेरिया में राजनैतिक पुर्नजागरण, आर्थिक पुनरूद्धार और विकास में अहम यागदान दिया है, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बल मिला है। हमारे लिए यह सम्‍मान की बात है कि उन्‍होंने शांति, निशस्‍त्रीकरण तथा विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2012 का इंदिरा गांधी पुरस्‍कार लेना स्‍वीकार कर लिया है। हमारे राष्‍ट्रपति द्वारा उन्‍हें कल सम्‍मानित किया जाएगा। 

भारत और लाइबेरिया के बीच मधुर एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। हमारी शासकीय वार्ताएं, व्‍यापार, निवेश सम्‍पर्क तथा नागरिकों के साथ विचारों का परस्‍पर आदान-प्रदान बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। राष्‍ट्रपति सरलीफ और मैंने आपसी संबंधों की समीक्षा की है और हम अपनी साझेदारी की पूरी संभावनाओं को सच्‍चाई में बदलने के वास्‍ते साथ मिलकर काम करने के लिए वचनबद्ध हैं। 

हमने कृषि अनुसंधान, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, लघु एवं मध्‍यम उद्यम, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और कौशल विकास सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का फैसला लिया है। इस संबंध में एक नया संयुक्‍त आयोग हमारा मार्गदर्शन करेगा और हमारे द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति की समीक्षा करेगा। तेल और गैस के क्षेत्र में सहयोग के लिए आज समझौता पत्र पर हस्‍ताक्षर हुए, जिससे इस दिशा में संरचनात्‍मक सहयोग का रास्‍ता साफ होगा और इसमें भारत का अनुभव लाइबेरिया के लिए प्रासंगिक सिद्ध होगा। 

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत बनाने की विपुल संभावनाएं हैं। लाइबेरिया में भारत का निवेश, विशेषकर खनन में निरन्‍तर बढ़ रहा है। मैंने राष्‍ट्रपति सरलीफ से अनुरोध किया है कि वे लाइबेरिया के राष्‍ट्रीय विकास के लक्ष्‍यों और नीतियों के अनुरूप कृषि, आधारभूत संरचना, हाइड्रोकार्बन, खनन और विनिर्माण के क्षेत्र में भारतीय निवेश का मार्ग प्रशस्‍त करें। 

हाल के वर्षों में भारत ने मानव संसाधन और क्षमता निर्माण के माध्‍यम से लाइबेरिया के विकास में सहयोग किया है। लाइबेरिया में विद्युत पारेषण एवं वितरण परियोजना के वित्‍तपोषण में 144 मिलियन अमरीकी डॉलर के ऋण की श्रृंखला पर हस्‍ताक्षर के आज के फैसले से हमारी परस्‍पर सहभागिता में और वृद्धि होगी। हम लाइबेरिया के लिए भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण स्‍लॉट में भी वृद्धि करेंगे। भारत, लाइबेरिया में एक सूचना प्रौद्योगिकी केन्‍द्र, एक व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केन्‍द्र, एक कृषि विज्ञान केन्‍द्र और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महिलाओं के लिए एक प्रशिक्षण केन्‍द्र की स्‍थापना करेगा। 

हमने भारत-अफ्रीकी साझेदारी को पुख्‍ता तथा समसामयिक बनाने के अपने परस्‍पर लक्ष्‍यों के अनुरूप भारत-अफ्रीका शिखर मंच के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया है। 

हम विश्‍वभर में खासकर अफ्रीकी उपमहाद्वीप में शांति और स्‍थायित्‍व को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। हमारे बीच विकासशील देशों की उम्‍मीदों पर खरा उतरने के लिए वैश्विक प्रबंधन को भी सुदृढ़ करने पर सहमति बनी है। हमने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की तत्‍काल आवश्‍यकता सहित अनेक वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया है। पुनर्गठित एवं विस्‍तारित सुरक्षा परिषद में भारत की स्‍थायी सदस्‍यता के लिए हमारी उम्‍मीदवारी पर लाइबेरिया के समर्थन की भारत सराहना करता है। 

राष्‍ट्रपति सरलीफ की यात्रा से हमारे द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ बनाने की हमारी संयुक्‍त कोशिशों को एक नया बल मिला है। हमारी आज की वार्ता ने आने वाले समय में दोनों देशों के बीच राजनैतिक सूझबूझ और हमारे आर्थिक रिश्‍तों की नींव को और मजबूत किया है। (PIB)
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वि.कासोटिया/सुरेन्‍द्र/अनिल/राजेश-6132

BSNL:बोगस बिलिंग के खिलाफ 19 सितंबर से संघर्ष

मामूली से कामों के लिए बनते हैं लाखों के बिल
लुधियाना:11 सितम्बर 2013: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): सरकारी विभागों के कर्मचारी घोटालों को दबाने के प्रयास करते तो सुने हैं लेकिन इस बार नया मामला सामने आया है। बीएसएनएल इम्पलाईज़ यूनियन ने विभाग में हो रहे विभाग में हो रहे कुछ कथित घोटालों का विवरण सामने लाकर सनसनी सी पैदा करदी है। गौरतलब है कि बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन इस विभाग के दो लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है। कर्मचारियों की समस्याओं को प्रबंधन के पास उठाना व इनका समाधान करवाना यूनियन की जिम्मेवारी है। मगर अब बीएसएनएल की कार्यप्रणाली ठेकेदारों के हाथ की कठपुतली बनी हुई है, जोकि गलत है। यह बात उपरोक्त यूनियन के जिला सचिव बलविंदर सिंह ने प्रेस वार्ता में कही है।

बुधवार ११ सितम्बर  को बुलाये गए एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार जाली बिल बनाकर विभाग को लूट रहे हैं। ठेकेदार पौधों को पानी देने, कुर्सियां, मेज, अलमारी, झाड़ू लगाने आदि का बिल बनाते समय मनमर्जी करते हैं। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की इस धांधली के बारे में यूनियन विभाग को सूचित कर चुकी है, परंतु अभी तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि यूनियन से घबराकर ठेकेदारों ने यूनियन के नेताओं के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवानी शुरू कर दी हैं, जोकि गलत हैं। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह आंकड़े केवल लुधियाना जिले से सबंधित एक्सचेंजों के हैं। 
इसके साथ ही उन्होंने बीएसएनएल लुधियाना प्रबंधन से मांग की है कि ठेकेदारों के प्रबंधन, धमकियों व ब्लैकमेलिंग को तुरंत बंद करवाया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जाली बिलों की जांच करवाई जाए। इसकी पड़ताल विभागीय विजलेंस से करवाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन ने ठेकेदारों के खिलाफ जल्द कारवाई न की, तो यूनियन 19 सितंबर से संघर्ष शुरू करेगी।  

इस मौके पर बलविंदर सिंह, ओमप्रकाश, शिव कुमार, गुरजोत, गुरदीप, जसंवत, अतुल सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।

Wednesday, September 11, 2013

सिद्ध चिकित्सा पद्धति:पर्यावरण हितैषी और रोगी हितैषी

09-सितम्बर-2013 15:16 IST
विशेष लेख:क्षेत्रीय गतिविधियां                                          --डॉ. के. परमेश्वरन*
पुदुचेरी में कराईकल में हाल में संपन्न हुए भारत निर्माण जन सूचना अभियान में चेन्नई में केन्द्रीय सिद्ध अनुसंधान संस्थान द्वारा स्थापित स्टॉल सबसे अधिक लोकप्रिय स्टॉलों में से एक था। स्टॉलों पर नियुक्त अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान हर रोज लगभग औसतन 150 रोगियों ने स्टॉल पर आकर जानकारी हासिल की।
     संस्थान के निदेशक डॉ. जगत जोती पांडयन ने बताया कि सिद्ध चिकित्सा प्रणाली के प्रति नये उत्साह का कारण इसका वैज्ञानिक आधार है। डॉ. पांडयन ने कहा कि सिद्ध चिकित्सा का विज्ञान रोजमर्रा की साधारण जिंदगी के विज्ञान से मेल खाता है।
     उदाहरण के लिए श्री पांडयन ने बताया कि दक्षिण भारत में परम्परागत भोज की समाप्ति पर रसम दी जाती है, जो वास्तव में एक प्रकार का सूप होता है। रसम में कई तत्व होते हैं, जो प्रोटीन को बारीक बनाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। इससे भोजन को पचाने में मदद मिलती है और खाने वालों के मन में भी संतोष पैदा होता है।

सिद्ध चिकित्सा का विज्ञान
     सिद्ध चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार का लम्बा और विविध इतिहास है। परम्परा के अनुसार यह द्रविड़ संस्कृति द्वारा विकसित सबसे पुरानी परम्परागत उपचार विधि है। ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियों में बताया गया है कि भगवान शिव ने सबसे पहले अपनी पत्नी पार्वती को इसके बारे में बताया था। पार्वती ने यह ज्ञान अपने पुत्र मुरुग को दिया। उसने यह सारा ज्ञान अपने प्रमुख शिष्य अगस्त्य को दिया। अगस्त्य ऋषि ने 18 सिद्धों को इसके बारे में बताया और उन्होंने इस ज्ञान का लोगों में प्रचार किया।
     सिद्ध शब्द हिन्दी के शब्द सिद्धि से बना है, जिसका मोटे तौर पर अर्थ है- विशेष योग्यता की प्राप्ति। सिद्धि को उन 8 अलौकिक शक्तियों की प्राप्ति के साथ भी जोड़ा जाता है, जो मानवीय प्रयासों के अंतिम लक्ष्य का एक हिस्सा हैं।
     जिन लोगों ने उपरोक्त शक्तियों को प्राप्त किया, उन्हें सिद्ध कहा जाता है। प्राचीन काल में 18 महत्वपूर्ण सिद्ध थे, जिन्होंने सिद्ध चिकित्सा पद्धति को विकसित किया।
     ऐतिहासिक रूप से माना जाता है कि प्रमुख सिद्ध 18 थे। अगस्त्य ऋषि को सिद्ध चिकित्सा का जनक माना जाता है। सिद्धों का सिद्धांत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का विकास हो सकता है। इसलिए उन्होंने ऐसी विधियां और औषधियां विकसित कीं, जिनसे शरीर पुष्ट होता है और आत्मा को पुष्टि मिलती है।
     सिद्ध पद्धति की पांडुलिपियों से पता चलता है कि 18 सिद्धों की शिक्षाओं से एक संयुक्त चिकित्सा पद्धति का विकास हुआ। आज सरकारी विश्वविद्यालयों के अंतर्गत मान्यता प्राप्त सिद्ध मेडिकल कॉलेज हैं, जहां सिद्ध चिकित्सा के बारे में पढ़ाया जाता है।

मूल सिद्धांत
     सिद्ध चिकित्सा की औषधि का मतलब है परिपूर्ण औषधि। सिद्ध चिकित्सा शरीर के रोगी अवयवों को फिर से जीवंत और सक्रिय करने में कुशलता का दावा करती है। यह चिकित्सा मानव स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तीन महत्वपूर्ण अंशों- वात, पित्त और कफ़ के अनुपात में भी उचित संतुलन बनाने का दावा करती है।
     आमतौर पर सिद्ध चिकित्सा के मूल सिद्धांत अन्य भारतीय स्वास्थ्य विज्ञान - आयुर्वेद जैसे हैं। केवल मात्र अंतर यही है कि सिद्ध चिकित्सा, बाल अवस्था, प्रौढ़ अवस्था और वृद्ध अवस्था में क्रमश: वात, पित्त और कफ़ की प्रमुखता को मान्यता देती है, जबकि आयुर्वेद में यह इसके पूरी तरह उलट है, यानी आयुर्वेद में बाल अवस्था में कफ़, वृद्ध अवस्था में वात और प्रौढ़ अवस्था में पित्त की प्रमुखता को माना जाता है।

राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान
     राष्ट्रीय सिद्ध संस्थान, सिद्ध चिकित्सा का प्रमुख संस्थान है, जो चेन्नई में तम्बरम में स्थित है। इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य सिद्ध चिकित्सा प्रणाली के लिए अनुसंधान और उच्च अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराना तथा इस प्रणाली के लिए वैश्विक मान्यता प्राप्त करने में सहायता करना है। यह संस्थान उन सात शीर्ष राष्ट्र स्तरीय शिक्षा संस्थाओं में से एक है, जो भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देती हैं। सिद्ध चिकित्सा में अनुसंधान की एकमात्र संस्था - केन्द्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) का राष्ट्रीय मुख्यालय भी यहां पर स्थित है।
     2010 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस संस्थान को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप वहां स्थित मौजूदा भवनों की मरम्मत या नवीकरण पर राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने प्रतिबंध लगा दिया।
     केन्द्रीय आयुर्वेद और सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), नई दिल्ली के अंतर्गत 1978 में स्थापित सिद्धावास अनुसंधान परिषद, 2010 तक रही। मार्च, 2010 में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आयुष विभाग ने सिद्ध चिकित्सा में अनुसंधान के लिए केन्द्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (सीसीआरएस) की स्थापना की, जिसके लिए तमिलनाडु और अन्य स्थानों के सिद्ध समुदाय ने काफी समय से दबाव डाल रहे थे। नई परिषद का मुख्यालय चेन्नई में बना और परिषद का अधिकृत रूप से गठन सितंबर, 2010 में हुआ।

विश्व सिद्ध दिवस
     पहला विश्व सिद्ध दिवस 14 अप्रैल, 2009 को मनाया गया। इसका उद्घाटन तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल श्री सुरजीत सिंह बरनाला ने किया। आज के समय में सिद्ध चिकित्सा के महत्व और इसकी पर्यावरण हितैषी विशिष्टताओं को देखते हुए इस दिवस को हर साल बहुत ही उपयुक्त तरीके से मनाया जाता है। तीसरा सिद्ध दिवस केरल में त्रिवेंद्रम में मनाया गया, जबकि 2012 में विश्व सिद्ध दिवस को चेन्नई में ही मनाया गया।(PIB)
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*सहायक निदेशक, पत्र सूचना कार्यालय, मदुरै

वी.के./आर.जी./एल.डी. /एम.एस.-184

सुखबीर बादल ने साधा सिद्धू पर निशाना

नो कमेंट कह कर गिनाए विकास कार्य
कहा-35 करोड़ के विकास कार्यों का आज किया है उद्घाटन 
डेढ़ महीने में होगा चार सौ करोड़ का विकास 
तीन वर्षों में 15 सौ करोड़ के विकास कार्य होंगे अमृतसर में         
अमृतसर: 10 सितम्बर2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से पंजाब सरकार पर अमृतसर के साथ सौतेला व्यवहार करने के लगाए गए आरोपों का जवाब अपने ही अंदाज में देते हुए उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने आज गुरु की नगरी अमृतसर में करीब 35 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू के लगाए जा रहे आरोपों और बयानों पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, कि वह बयानों से नहीं बल्कि अपने कार्यों को अंजाम देकर जनता की कचहरी में जाते हैं। उन्होंने बताया, कि आज वह अमृतसर में करीब 35 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, कि अगले एक महीने के अंदर-अंदर अमृतसर में करीब चार सौ करोड़ रुपये और तीन वर्षों में करीब 15 सौ करोड़ रुपये के विकास कार्य कराएंगे।
           उप मुख्यमंत्री ने कहा, कि वह पंजाब के सर्वांगीण विकास के लिए वचनबद्ध है। इसके अलावा उन्होंने अमृतसर की लोकसभा सीट का तबादला किए जाने की चर्चाओं के बारे में कहा कि फिलहाल भाजपा की ओर से इस संबंध में उनके साथ कोई संपर्क नहीं किया गया है। लेकिन यदि इस तरह का कोई प्रस्ताव उनके पास आता है, तो उस पर विचार करने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा, कि शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन काफी मजबूत है और भाजपा का कोई नेता कोई बयानबाजी करता है, तो वह उस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। मुज्जफरपुर में हुई हिंसक घटनाओं की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, कि वह देशभर में इस तरह की किसी भी घटना की निंदा करते हैं। इसके अलावा नरेंदर मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बारे में उन्होंने कहा, कि शिअद भाजपा का समर्थन करती है और वह जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी, वह उसके साथ है। फिर चाहे वह नरिंदर मोदी हों या नवजोत सिंह सिद्धू।

Tuesday, September 10, 2013

आकाशवाणी निःशुल्‍क एसएमएस सेवा शुरु

09-सितम्बर-2013 20:01 IST
सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने दिखाया एक और कमाल 
भारत निर्माण वेब पोर्टल का भी किया शुभारम्भ 
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री मनीष तिवारी ने आज भारत निर्माण अभियान की ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की। इस ऑनलाइन पोर्टल द्वारा भारत निर्माण अभियान की विभिन्‍न परियोजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी डिजिटल प्‍लेटफॉर्म पर उपलब्‍ध होगी। यह डिजिटल प्‍लेटफॉर्म अंग्रेजी, हिन्‍दी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रदान की जाएगी। इस सुविधा के शुरू हो जाने से उपयोगकर्ता को सभी जानकारियां एक ही स्‍थान पर उपलब्‍ध होंगी। इसके जरिये फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब को भी जोड़ गया है। इसके अलावा मोबाइल फोनों और टैब्‍लेट के लिये भी पोर्टल से संबंधित एप्‍लीकेशन्‍स दिये गए हैं।

     समग्र मल्‍टी मीडिया अभियान 2013 के दूसरे चरण की शुरुआत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 14 अगस्‍त, 2013 को की थी। इस मल्‍टी मीडिया अभियान को आठ जन सूचना अभियानों के जरिये मजबूत मीडिया तंत्र का समर्थन प्राप्‍त है। ग्रामीण इलाकों में यह काम पत्र सूचना कार्यालय कर रहा है, जिसे डीएवीपी, डीएफपी और गीत एवं नाटक डीविजन का समर्थन प्राप्‍त है। अब तक चार जन सूचना अभियानों को ‘जमुनिया’ ध्‍वनि एवं प्रकाश शो का समर्थन प्राप्‍त है।

     मंत्री महोदय ने आज ही आकाशवाणी का ‘आकाशवाणी समाचार निःशुल्‍क एसएमएस सेवा’ की भी शुरुआत की। उपभोक्‍ताओं को मोबाइल टेलीफोन पर आकाशवाणी समाचार निशुल्‍क एसएमएस द्वारा प्रदान की जाएगी। जो लोग इस सेवा को प्राप्‍त करना चाहते हैं, वे 08082080820 पर ‘AIRNEWS their name’ एसएमएस कर सकते हैं। वे चाहें तो इसी नंबर पर मिस-कॉल भी दे सकते हैं। अब तक दो लाख लोग इस सेवा से जुड़ चुके हैं।

भारत निर्माण अभियान के तथ्‍य एवं आंकड़े
मीडिया
श्रेणी
प्रथम चरण
द्वितीय चरण(अद्यतन)


(विज्ञापन/स्‍पॉट की संख्‍या)
टेलीविजन
केबल व उपग्रह चैनल
31,042
34,789

दूरदर्शन
1570
2090

योग
32,612
36,879
रेडियो
आकाशवाणी

12,600 (92 स्‍टेशनों पर)

निजी एफएम

94,932 ( 216 स्‍टेशनों पर)

योग

1,07,532 (1.07 लाख)
सामुदायिक रेडियो


6,048स्‍पॉट(36स्‍टेशनों पर)
डिजिटल सिनेमा
स्‍क्रीन
11,200 प्रतिदिन,2.24 लाख पूर्ण अवधि के दौरान(1400 अनुबंधि‍त स्‍क्रीनों पर)
27,324प्रतिदिन,6.46 लाखपूर्ण अवधि के दौरान (6,831अनुबंधि‍त स्‍क्रीनों पर)
प्रिंट
एडवर्टोरियल्‍स
5 X 750 = 3750


स्‍ट्रीप विज्ञापन
12 X 750 = 9000


योग
12,750 (लगभग750 समाचार पत्रों में)
15,120 (लगभग 700समाचार पत्रों में)
बाहरी प्रसार
प्रदर्शित स्‍थलों की संख्‍या
3,550
4,225
अगस्‍त और सितंबर, 2013 में किए गये जन सूचना अभियानों का ब्‍योरा इस प्रकार है:-

·        झाबुआ, मध्‍यप्रदेश (11-13 अगस्‍त, 2013)
·        मारवाड़, पाली, राजस्‍थान (17-19 अगस्‍त, 2013)
·        साहिया, मिजोरम (21-23 अगस्‍त, 2013)
·        धारियाबाद, प्रतापगढ़, राजस्‍‍थान (24-26 अगस्‍त, 2013) (जमुनिया 24 अगस्‍त से 27 अगस्‍त, 2013 तक)
·        बैतूल, मध्‍यप्रदेश (25-27 अगस्‍त, 2013) (जमुनिया 24 अगस्‍त से 28 अगस्‍त, 2013 तक)
·        छिंदवाड़ा, मध्‍यप्रदेश (पांच से सात सितंबर, 2013) (जमुनिया आठ सितंबर से 11 सितंबर, 2013 तक)
·        गरियाबंद, छत्‍तीसगढ़ (छह-आठ सितंबर, 2013)
·        बाओली, सवाई माधोपुर, राजस्‍थान (सात-नौ सितंबर, 2013) (जमुनिया तीन सितंबर से सात सितंबर, 2013 तक)

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वि कासोटिया/अरुण/अंबुज-6086

Monday, September 09, 2013

प्रधानमंत्री द्वारा लाला जगत नारायण पर डाक टिकट जारी

09-सितम्बर-2013 14:51 IST
एक बहादुर स्‍वतंत्रता सेनानी, निडर पत्रकार और कुशल सांसद थे लाला जगत नारायण- प्रधानमंत्री 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज नई दिल्‍ली में लाला जगत नारायण की स्‍मृति में एक डाक टिकट जारी किया। इस अवसर पर दिए गए उनके भाषण का विवरण इस प्रकार है:-                 See video also
''आज हम सब लाला जगत नारायण जी का सम्‍मान करने के लिए यहाँ इकट्ठा हुए हैं। लाला जगत नारायण जी हमारे देश के एक महान सपूत थे। वह एक बहादुर स्‍वतंत्रता सेनानी, एक निडर पत्रकार और कुशल सांसद थे, उनकी राष्‍ट्रभक्ति हमें हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है कि हम आज उन्‍हें श्रद्धांजलि देते हुए उनकी याद में एक डाक टिकट जारी कर रहे हैं। 

21 साल की उम्र में लाल जगत नारायण जी ने पढ़ाई छोड़कर महात्‍मा गांधी की अपील पर असहयोग आंदोलन में हिस्‍सा लिया। उनको ढाई साल की सज़ा हुई, लेकिन लाला लाजपत राय के सचिव के रूप में उन्‍होंने जेल में भी आजादी की लड़ाई में योगदान देने का काम जारी रखा। जेल से रिहाई के बाद वह देश के स्‍वतंत्र होने तक बराबर आजादी की लड़ाई में सरगर्मी से हिस्‍सा लेते रहे। भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्‍सा लेने के लिए उन्‍हें 3 साल की सज़ा हुई और आजादी की जंग के सिलसिले में वह कुल 9 साल जेल में रहे। 

आजादी के बाद वह लाहौर से जालंधर आ गए। उन्‍होंने देश सेवा का अपना काम जारी रखा। वह पंजाब विधान सभा के सदस्‍य और पंजाब सरकार में शिक्षा, परिवहन और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री रहे। 1964 से 1970 तक वह राज्‍य सभा के सदस्‍य रहे। इन सभी पदों पर उन्‍होंने अपनी कार्यकुशलता की एक अलग छाप छोड़ी। 

पत्रकारिता से लाला जगत नारायण जी का संबंध 1924 में बना, जब वह भाई परमानंद की पत्रिका आकाशबानी के संपादक बने। वह श्री पुरूषोत्‍तम दास टंडन जी की साप्‍ताहिक पत्रिका पंजाब केसरी के संपादक भी रहे। आजादी के बाद उन्‍होंने उर्दू अख़बार ''हिंद समाचार'' की शुरुआत की और आगे चलकर हिंदी अख़बार ''पंजाब केसरी'' और पंजाबी अख़बार ''जगबानी'' भी स्‍था‍पित किए। आज इन तीनों अखबारों को 33 लाख से भी ज्‍यादा लोग रोज पढ़ते हैं। 

लाला जगत नारायण जी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में जिन आदर्शों और मूल्‍यों का हमेशा पालन किया, वह आज भी हमारे देश के पत्रकारों का मार्गदर्शन करते हैं। उन्‍होंने मीडिया पर काबू रखने की कोशिश का जोरदार विरोध किया। उनकी निडरता हमारे लिए एक मिसाल है। उन्‍होंने आतंकवादी ताकतों की पुरजोर मुखालफत की, जिसकी वजह से उन्‍हें अपनी जान भी कुर्बान करनी पड़ी। उनके जीवन से हमें यह शिक्षा भी मिलती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, हमें अपने उसूलों से कभी भी कोई समझौता नहीं करना चाहिए। 

मेरा मानना है कि पत्रकारों के लिए लाला जगत नारायण जी का संदेश खास अहमियत रखता है। मीडिया को किस प्रकार की भूमिका अदा करनी चाहिए और किस तरह से मुश्किल हालात में भी एक पत्रकार को ईमानदार, निडर और निष्‍पक्ष रहना चाहिए, उनका जीवन हमें यह खास सीख देता है। 

अपनी बात खत्‍म करने से पहले मैं एक बार फिर लाला जगत नारायण जी को श्रद्धांजलि देता हूं।'' 
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The PM released the commemorative postage stamp

प्रधानमंत्री द्वारा लाला जगत नारायण पर डाक टिकट जारी 



विजयलक्ष्‍मी कासौटिया/रा.गो./य/-6071

ओलम्पिक्स-2020 में कुश्ती शामिल

09-सितम्बर-2013 12:50 IST
अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के फैसले का स्वागत
Courtesy Photo
केंद्रीय खेल और युवा कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जितेन्द्र सिंह ने 2020 के ओलम्पिक खेलों में कुश्ती को शामिल करने के अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (आईओसी) के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। 8 सितंबर 2013 को ब्यूनस आयरस, अर्जेंटीना में समिति के 125वें अधिवेशन में ओलम्पिक्स-2020 में अन्य 25 प्रमुख खेलों के साथ कुश्ती को शामिल करने का फैसला लिया गया। कुश्ती, स्कवॉश और बेसबॉल/सॉफ्टबॉल को ओलम्पिक्स-2020 में अतिरिक्त खेल के रूप में शामिल करने के बारे में विवाद बना हुआ था। कुश्ती को शामिल करने का फैसला मतदान के जरिए हुआ। 

12 फरवरी, 2013 को आईओसी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक ने सिफारिश की थी कि कुश्ती को 2020 के ओलम्पिक्स में प्रमुख खेलों की सूची में शामिल न किया जाए। इसका संचालन कुश्ती एसोसिएशनों की अंतर्राष्ट्रीय फेडरेशन द्वारा किया जाता है। 20 मई, 2013 को रूस में सेंट पीटर्सबर्ग में हुई बोर्ड की बैठक में सिफारिश की गई कि कुश्ती, स्कवॉश और बेसबॉल/सॉफ्टबॉल को ओलम्पिक्स-2020 में अतिरिक्त खेल के रूप में शामिल करने के बारे में आईओसी के 125वें अधिवेशन में विचार किया जाए। 

12 फरवरी, 2013 को आईओसी के कार्यकारी बोर्ड द्वारा कुश्ती को प्रमुख खेलों की सूची से बाहर रखने के फैसले से धक्का लगा था। युवा कार्य और खेल मंत्रालय ने आईओसी और उन देशों के साथ, जहां कुश्ती लोकप्रिय है, इस मामले को उठाया, ताकि कुश्ती को ओलम्पिक खेलों में शामिल रखा जा सके। 

श्री जितेन्द्र सिंह ने आईओसी के अध्यक्ष श्री जैक्स रॉग को पत्र लिखकर उनसे बोर्ड के फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया। श्री जितेन्द्र सिंह ने अन्य देशों के खेल मंत्रियों को भी पत्र लिखा, जहां कुश्ती लोकप्रिय है और उनके पहलवानों ने लंदन ओलम्पिक्स-2012 में भाग लिया था। खेल सचिव ने भी विदेश सचिव को लिखा था कि विदेश मंत्रालय 70 देशों में हमारे राजदूतों और उच्चायुक्तों से कहे कि वे उन देशों के खेल मंत्रियों से इस मामले को आईओसी के सामने उठाऩे को कहें। 2 सितंबर, 2013 को मंत्रालय ने आईओसी के सभी सदस्यों से अनुरोध किया था कि वे कुश्ती को ओलम्पिक खेलों की प्रमुख सूची में शामिल रखने के बारे में फैसला लें। 

इन सब प्रयासों का सुखद परिणाम निकला। कुश्ती 1886 में एथेंस में शुरू हुए आधुनिक ओलम्पिक खेलों में शामिल थी और उसके बाद भी रही है। प्राचीन ओलम्पिक्स में भी कुश्ती खेलों का हिस्सा थी। आज के समय में भी कुश्ती लोकप्रिय है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लंदन ओलम्पिक्स-2012 में 71 देशों ने कुश्ती स्पर्धाओं में भाग लिया था। (PIB)
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वि. कासोटिया/राजगोपाल/शदीद-6070                
ओलम्पिक्स-2020 में कुश्ती शामिल