Tuesday, August 30, 2016

नेताजी संबंधी 25 गोपनीय फाइलों की 7वीं किस्त जारी


30-अगस्त-2016 17:09 IST
अब आम जनता भी देख सकेगी अतीत के गहन रहस्य 
फाइलें वेब पोर्टल www.netajipapers.gov.in पर उपलब्ध 
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से सम्बंधित 25 गोपनीय फाइलों की सातवीं किस्त को आज जारी कर दिया गया। ये फाइलें www.netajipapers.gov.in उपलब्ध करा दी गयी हैं। इन फाइलों को संस्कृति सचिव श्री एन.के. सिन्हा ने जारी किया। उक्त 25 फाइलें विदेश मंत्रालय (1951-2006) से सम्बंधित हैं।
याद रहे कि नेताजी से सम्बंधित 100 गोपनीय फाइलों की पहली खेप को शुरूआती संरक्षण उपचार और उनका डिजिटलीकरण करने के बाद 23 जनवरी, 2016 को नेताजी की 119वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनता के लिये जारी किया था। उसके बाद 50 फाइलों की दूसरी खेप, 25 फाइलों की तीसरी खेप, 25 फाइलों की चौथी खेप, 25 फाइलों की पांचवीं खेप और 25 फाइलों की छठवीं खेप को क्रमश: 29 मार्च, 2016, 29 अप्रैल, 2016, 27 मई, 2016, 29 जून 2016 और 29 जुलाई 2016 को जारी किया गया था। अब तक कुल 250 फाइलों को जनता के लिए खोल दिया गया है।
जिन 25 फाइलों को आज जारी किया गया है, वे नेताजी से संबंधित फाइलों को जानने के लिए जनता की आकांक्षा के अनुरूप हैं। इन फाइलों से अध्‍येयताओं को भारत के स्‍वतंत्रता संग्राम के बारे में और अनुसंधान करने की सुविधा होगी। इन फाइलों की विशेष रूप से गठित समिति ने  जांच की है। समिति में अभिलेखों से संबंधित विशेषज्ञों को रखा गया है।
उल्‍लेखनीय है कि 1957 में राष्‍ट्रीय अभिलेखागार भारत को रक्षा मंत्रालय की ओर से आजाद हिन्‍द फौज के संबंध में 990 डी-क्‍लासिफाईड फाइलें प्राप्‍त हुई थीं। इसके बाद 2012 में खोसला आयोग से संबंधित 271 फाइलें/सामग्री तथा न्‍यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग की 759 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुई थीं। इस तरह गृह मंत्रालय से कुल 1030 फाइलें/ सामग्री प्राप्‍त हुईं। ये सभी फाइलें सार्वजनिक रिकॉर्ड नियम, 1997 के तहत जनता के लिए खोल दी गई हैं। (PIB)

Sunday, August 28, 2016

राष्ट्रपति ने कहा विश्वविद्यालय स्वतंत्र संवाद और अभिव्यक्ति का स्थल होने चाहिए

27-अगस्त-2016 19:37 IST
प्राचीन नालंदा एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान था....
राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने आज (27 अगस्त, 2016) को नालंदा के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और इसके नए परिसर की आधारशिला रखी। 
राजगीर (बिहार): 27 अगस्त 2016: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
इस अवसर पर, अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय में वह इस आशा के साथ उपस्थित हैं कि यह विश्वविद्यालय सही मायने में प्राचीन समय के नालंदा विश्वविद्यालय की स्थिति को हासिल करेगा। प्राचीन नालंदा में अपनायी जाने वाली कई पद्धतियां नवीन नालंदा में अनुकरण के योग्य है। प्राचीन नालंदा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान था जहां विशेष रूप से अंतर-एशियाई संबंधों का विस्तार हुआ था। चीनी भिक्षु ह्वेन त्सांग, यिझिंग और हुईशाओ एवं अन्य आगन्तुकों ने नालंदा में निवास, अध्ययन और पढ़ाया भी। एक अवधि के बाद तिब्बत के विद्वान भी बौद्ध धर्म और ज्ञान के अन्य स्वरूपों का अध्ययन करने के लिए नालंदा आएं। इसके अलावा श्रीलंका के साथ-साथ अन्य देशों के भिक्षु भी संस्थान पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभावों की विविधता का अध्ययन करने के लिए नालंदा आए। राष्ट्रपति ने कहा कि यह सिर्फ एक दिशा में नहीं था नालंदा के भिक्षुओं ने अपने इस ज्ञान का प्रसार संपूर्ण विश्व में किया और भारत में ह्वेन त्सांग की यात्रा से पूर्व यह चीन पहुंच गया था। 

राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा को उच्च स्तर की बौद्धिक परिचर्चा और विचार-विमर्श के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक भौगोलिक अभिव्यक्ति ही नहीं अपितु एक विचार और एक संस्कृति को परिलक्षित करता है। नालंदा ने मित्रता, सहयोग, विचार-विमर्श और तर्क का संदेश दिया। चर्चा और बहस हमारे लोकाचार और जीवन का हिस्सा है। 

राष्ट्रपति ने कहा हालांकि अध्ययन के मुख्य विषय बौद्धग्रंथ थे लेकिन वेदों और अन्य क्षेत्रों के अध्ययन को भी यहां पर महत्वपूर्ण रूप से महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक नालंदा के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह इस महान परंपरा को अपने परिसर में नए जीवन और शक्ति के साथ आगे बढ़ाता रहे। विश्वविद्यालयों को स्वतंत्र संवाद और अभिव्यक्ति का स्थल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालों में असहिष्णुता, पूर्वाग्रह और घृणा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और इसे विभिन्न विचारों, दर्शनों का ध्वजवाहक होना चाहिए। 

राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा सभ्यताओं और आधुनिक भारत का एक मिलन स्थल रहा है और इसे निरंतर बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी ज्ञान झरोखों को बंद नहीं करना चाहिए और हमें बाहर से आने वाली झोकों से इन्हें बुझना नहीं चाहिए। हमें समूची दुनिया से स्वतंत्र प्रवाह के रूप में ज्ञान को अंदर आने देना चाहिए और इससे स्वयं को समृद्ध बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर स्वतंत्र विचारों और सकारात्मक परिचर्चा को अपनाना चाहिए। 

Saturday, August 27, 2016

स्टेट बैंक आफ पटियाला इम्पलाईज़ यूनियन की विशेष बैठक


Sat, Aug 27, 2016 at 4:39 PM
बैठक का मुख्य उद्देशय सैनेट 2016 के चुनाव रहा 
लुधियाना: 27 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):


श्री संजय शर्मा, डिप्टी महा सचिव, एसबीआई आफिसर्स एसोसिएशन, श्री संदीप भारद्वाज़, सचिव, एबीओए (लुधियाना), प्रोफेसर तरुण घई, श्री गुरबचन सिंह, उप प्रधान आल इण्डिया ओबीसी आफिसर्स एसोसिएशन, श्री राजेश वर्मा, उप प्रधान, पंजाब बैंक इम्पलाईज़ फैडेरेशन, श्री देवेन्द्र शर्मा, श्री पवन कुमर, सचिव, गवर्न्मैंट एडिड स्कूलज़, श्री नवल छिब्बड़, भूतपूर्व प्रधान बार कांउसिल, लुधियाना, कामरेड रमेश रत्न ने बैठ्क को संबोधित किया । कामरेड प्रवीण मोदगिल, सीनीयर उप प्रधान, एसबीओपी इम्पलाईज़ यूनीयन भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं। 

बैठक में बताया गया कि श्री नरेश गौड़ ने वर्ष 2012 में पंजाब विश्वविद्दालय, चंडीगढ़ के सैनेट सदस्य के लिए चुनाव लड़ा था और वह 2012 में चुनाव जीत कर पंजाब विश्वविद्दालय, चंडीगढ़ के सैनेट सदस्य बने । वह निर्विरोध सिंडीकेट चुने गये एंव वह 1 जनवरी 2015 से 31 दिंसबर 2015 बतौर सिंडीकेट रहे । 2012 से वह सिंडीकेट एंव सैनेट सदस्य के तौर पर लगातार विभिन्न स्तर पर कालेज़ प्रंबधकों द्वारा शिक्षकों पर अन्याय, उनके शोषण के विरुध एंव विद्दार्थियों के लिए लड़ रहे हैं ।  इस समय के दौरान बहुत बार उन्होंने विभिन्न परिक्षाओं में पेपरों में कमियों के लिए अपनी आवाज़ उठाई । समय समय पर वह विद्दार्थियों के भलाई के लिए सिंडीकेट एंव सैनेट में अपनी बात रख रहे हैं । सहबद्ध कालेजों की फीस कमेटी के सद्स्य होने के नाते उन्हीं के कड़े विरोध के कारण फीस की बढोतरी बहुत कम हो पाई जोकि पंजाब विश्वविद्दालय, चंडीगढ़ के फैसले के रहते बहुत अधिक होनी तय थी। 

इस साल श्री नरेश गौड़ द्वारा चुनाव लड़ रहे हैं । हम आप सभी से अपील करते हैं कि अपना समर्थन दीजिए, वोट कीजिए एंव श्री गौड़ को सैनेट सदस्य चुनिए ताकि वह एक बार फिर सैनेट सदस्य रह्ते हुए विभिन्न स्तर पर कालेज़ प्रंबधकों द्वारा शिक्षकों पर अन्याय, उनके शोषण के विरुद्ध एंव विद्दार्थियों के लिए अपनी आवाज उठा सकें एंव हर स्तर पर अपनी भविष्य की पीढ़ी की भलाई के लिए लड़ सकें । हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि सैनेट सदस्य के तौर पर उनकी प्राथमिकता शिक्षकों, विद्दार्थियों एंव जिस समाज में हम सब रहते हैं, इन सभी की भलाई एंव सुधारों जैसे मुद्दों की रहेगी । 

सभी का धन्याबाद करते हुए कामरेड नरेश गौड़ ने अपने पिछ्ले कई तरह के अनुभव सांझा किए । उन्होंने बताया कि अपने पिछले कार्याकाल में सभी मुद्दों पर उन्होंने न केवल विद्दार्थियों की एवं शिक्षकों की विभिन्न प्रकार की समस्याओं का समाधान किया अपितु उनके आने वाले कल को भी सुरक्षित एंव सुनिशित किया । उन्होंने सभी से अपील की कि आने वाली पीढियों के बारे में सोचना हमारा कर्तव्य है । हम शिक्षा के क्षेत्र में होने बाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठायें और इससे बेहतर प्लेट्फार्म हमें नहीं मिल सकता इन सब के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने का । आईये एक बार फिर से मुझे समर्थन दें, वोट करें ताकि मैं अपने दवारा आपकी आवाज़ आगे तक पहुँचा सकूं ।            

बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि आईये हम सब श्री नरेश गौड़ को समर्थन दें, वोट दें एंव उन्हें चुन कर अपने शिक्षा प्रणाली के स्तर को सुधारने, इसे पारदर्शक बनाने एंव सैनेट में श्री नरेश गौड़ के द्वारा अपनी सभी की आवाज़ बुलंद करें। 

Thursday, August 25, 2016

निगम मुलाज़िमों ने की लुधियाना में राज्य स्तरीय बैठक

अब अधिकारों की जंग होगी और तेज़ 
लुधियाना: 25 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
सीवरेज के बिना ज़िन्दगी की कल्पना मुश्किल है। गटर---सीवरेज--बहुत ही आम सा नाम लेकिन इसे उसी वक़्त गम्भीरता से लिया जाता है जब यह जाम हो जाये। उस वक़्त सीवरेज को खोलने वाला साधारण सा मुलाज़िम बहुत महत्वपूर्ण लगने लगता है। गन्दगी और गैस से भरे  गटर में जब वह उतरता है तो उसके साथ कुछ भी हो सकता है। फेक्ट्री और घरों से कई बार गन्दगी और गर्म पानी उसके सर पर आ कर गिरता है। गैस उसकी सांस के साथ उसके दिमाग को चढ़ती है। कई बार उसकी वहीँ पे मौत हो जाती है और कई बार अस्पताल में पहुँच कर। अगर वह बच भी जाये तो उसके स्वास्थ्य में इतनी गड़बड़ियां पैदा हो जाती हैं जिनकी वजह से कभी भी कोई गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। इस तरह की ख़बरों को आये दिन अख़बारों में पढ़ कर भी समाज ने कभी उनके लिए गम्भीरता से नहीं सोचा। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस तरह के सभी मुद्दों को लेकर राज्य स्तरीय बैठक बुलाई कुछ यूनियन नेतायों ने मिल कर।  तकरीबन सभी ज़िलों से प्रमुख और सक्रिय लोग इस बैठक में शामिल हुए।  इन मुलाज़िमों की ज़िन्दगी की कीमत का अहसास सरकार  और समाज को कैसे हो इस पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। देखिये इस बैठक की एक संक्षिप्त कैमरा रिपोर्ट। 
इस बैठक में लुधियाना से कामरेड विजय कुमार, मोगा से सतपाल अनजान, मोहाली से विनोद कुमार चुघ, लुधियाना के अन्य जोनों से महिपाल, दरोगी, शामलाल और अन्य बहुत से सरगर्म कार्यकर्ता शामिल हुए। 

भारत प्रथम ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव की मेजबानी करेगा

24-अगस्त-2016 20:36 IST

मलयालम फिल्‍म ‘वीरम’ से होगा इस महोत्‍सव का शुभारंभ होगा 
ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव सिनेमा, संस्‍कृति एवं व्‍यंजनों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशेगा: वेंकैया नायडू 
The Union Minister for Urban Development, Housing & Urban Poverty Alleviation and Information & Broadcasting, Shri M. Venkaiah Naidu addressing the Press Conference on the BRICS Film Festival, in New Delhi on August 24, 2016. The Minister of State for Information & Broadcasting, Col. Rajyavardhan Singh Rathore and the Director General (M&C), Press Information Bureau, Shri A.P. Frank Noronha are also seen
नई  दिल्ली: 24 अगस्त 2016: (पसूका
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के आयोजन का विचार सबसे पहले पिछले ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन में उभर कर सामने आया था, जिसमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव और फिल्‍म पुरस्‍कारों का प्रस्‍ताव किया था। जल्‍द ही आयोजित किया जाने वाला यह फिल्‍म महोत्‍सव सदस्‍य देशों के फिल्‍म उद्योग से जुड़े लोगों के लिए एक ऐसा मंच होगा, जिसमें ‘सिनेमा, संस्‍कृति और व्‍यंजनों’ के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा सकेंगी। इस महोत्‍सव के दौरान फिल्‍म निर्माताओं, अभिनेताओं और निर्देशकों को पुरस्‍कृत कर सिनेमा की उत्‍कृष्‍टता का जश्‍न मनाया जाएगा। मंत्री महोदय ने आज यहां नेशनल मीडिया सेंटर में ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के पूर्वालोकन के संबंध में आयोजित संवाददाता सम्‍मेलन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन 
श्री नायडू ने इस बात का उल्‍लेख किया कि भारत की ब्रिक्‍स अध्‍यक्षता, जिसका शुभारंभ गोवा में 15-16 अक्‍टूबर को होगा, के तहत शिखर सम्‍मेलन की थीम को ध्‍यान में रखते हुए पांच आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। यह थीम ‘उत्तरदायी, समावेशी और सामूहिक समाधान का निर्माण’ है। पांच आयामी दृष्टिकोण में निम्‍नलिखित शामिल हैं –

*       ब्रिक्‍स संबंधी सहयोग को और गहरा करने, टिकाऊ बनाने एवं संस्‍थागत रूप देने के लिए संस्‍थान का निर्माण करना।



*         पिछले शिखर सम्‍मेलनों में लिए गए निर्णयों पर अमल।

*        वर्तमान सहयोग व्‍यवस्‍थाओं को एकीकृत करना।

*         नवाचार अर्थात नवीन सहयोगात्‍मक व्‍यवस्‍थाएं।

*       निरंतरता अर्थात आपसी सहमति वाली मौजूदा ब्रिक्‍स सहयोगात्‍मक व्‍यवस्‍थाओं को जारी रखना।

इस बारे में विस्‍तृत जानकारी देते हुए श्री नायडू ने कहा कि ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव एक बॉयोस्कोप होगा, जिसमें सहभागिता करने वाले देशों की विशिष्‍ट संस्‍कृतियों, व्‍यंजनों और कलाओं को दर्शाया जाएगा। ब्रिक्‍स देशों के बीच सहभागिता बढ़ाने एवं सदभाव पैदा करने के उद्देश्‍य से यह महोत्‍सव आयोजित किया जा रहा है, जो सदस्‍य देशों के लोगों विशेषकर युवाओं के बीच और ज्‍यादा संपर्क सुनिश्चित करेगा। इस संदर्भ में मंत्री महोदय ने कहा कि भारत ने इस महोत्‍सव के दौरान अनेक आयोजनों की योजना बनाई है, जिनमें 17 साल से कम आयु के खिलाडि़यों के लिए फुटबॉल टूर्नामेंट, युवा शिखर सम्‍मेलन, युवा राजनयिकों का फोरम और कुछ ब्रिक्‍स देशों के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई फिल्‍मों की विशेष स्क्रीनिंग शामिल हैं। श्री नायडू ने ब्रिक्‍स फिल्‍म महोत्‍सव के लिए एक पोस्‍टर का भी अनावरण किया।

ब्रिक्स फिल्म महोत्सव नई दिल्ली के सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में 2 सितंबर, 2016 से 6 सितंबर, 2016 तक आयोजित होगा। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिस्पर्धा वर्ग में 20 फिल्में दिखाई जाएंगी। सभी देशों से चार फिल्में होंगी। ब्रिक्स के सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सांस्कृतिक मेल, फिल्म, गीत एवं नृत्य और खान-पान की झलक इन फिल्मों में देखी जा सकेगी। सभी ब्रिक्स राष्ट्रों का मुख्य व्यंजन फूड कोर्ट में उपलब्ध रहेगा। इसका प्रबंधन महोत्सव स्थल पर विशेष रूप से किया गया है। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम परिसर में शिल्प मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें सभी सदस्य देश अपने-अपने यहां के विशिष्ट सामान बेचने के लिए स्टॉल लगाएंगे।
फिल्मों से अलग चेंगदू परफॉर्मिंग आर्ट थिएटर (चीन), थिएटर लेनिनग्राड सेंटर ड्रीम्स ऑफ रशिया और एमबीजेड म्यूजिक प्रोडक्शन (दक्षिण अफ्रीका) के कलाकार भी महोत्सव के दौरान मंच कला का प्रदर्शन करेंगे।
ब्रिक्स फिल्म महोत्सव नई दिल्ली के सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में 2 सितंबर, 2016 से 6 सितंबर, 2016 तक आयोजित होगा। पांच दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिस्पर्धा वर्ग में 20 फिल्में दिखाई जाएंगी। सभी देशों से चार फिल्में होंगी। ब्रिक्स के सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सांस्कृतिक मेल, फिल्म, गीत एवं नृत्य और खान-पान की झलक इन फिल्मों में देखी जा सकेगी। सभी ब्रिक्स राष्ट्रों का मुख्य व्यंजन फूड कोर्ट में उपलब्ध रहेगा। इसका प्रबंधन महोत्सव स्थल पर विशेष रूप से किया गया है। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम परिसर में शिल्प मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें सभी सदस्य देश अपने-अपने यहां के विशिष्ट सामान बेचने के लिए स्टॉल लगाएंगे।
फिल्मों से अलग चेंगदू परफॉर्मिंग आर्ट थिएटर (चीन), थिएटर लेनिनग्राड सेंटर ड्रीम्स ऑफ रशिया और एमबीजेड म्यूजिक प्रोडक्शन (दक्षिण अफ्रीका) के कलाकार भी महोत्सव के दौरान मंच कला का प्रदर्शन करेंगे।
भाग ले रहे सभी पांच देशों की प्रतिस्पर्धा वर्ग में दिखाई जाने वाली फिल्में इस तरह हैं:


ब्राजील
रूस
भारत
चीन
दक्षिण अफ्रीका
बिटवीन वैलीज
निर्देशकः फिलीप बारसिंकी
14+
निर्देशकः आंद्रे ज़ेटसीव
बाहुबली -द बिगनिंग
निर्देशकः एस.एस. राजामौली
बुक ऑफ लव
निर्देशकः जीयलो जू
 फ्री स्टेट
निर्देशकः सालास दी जेगर
रोड 47
निर्देशकः विंसेंट फैराज
अबाउट लव
निर्देशकः एना मेलीकिया
बाजीराव मस्तानी
निर्देशकः संजय लीला भंसाली
गो अवे मिस्टर ट्यूमर
निर्देशकः हान यान
कलूशी
निर्देशकः मंडला दूबे
द हिस्ट्री ऑफ एटरनिटी
निर्देशकः केमिलो केवलकेंटे
द बैटल ऑफ सिवास्तोपोल
निर्देशकः सर्गी मोक्ट्जिकाई
सिनेमावाला
निर्देशकः कौशिक गांगुली
सांग्स ऑफ द फोनिक्स
निर्देशकः त्यां मिंग वू
मिसेज राइट गाय
निर्देशकः एडजी उगा
दे विल कम बैक
निर्देशकः मारसेलो लोर्डएलो
वेरी बेस्ट डे
निर्देशकः जोहरा क्रिजोवनीका
तिथि
निर्देशकः राम रेड्डी
जुआन जैंग
निर्देशकः जियांक़ हू
टेस
निर्देशकः मेग रिकर्ड्स
 PIB 

Wednesday, August 24, 2016

शाही इमाम को सदमा, पाकिस्तान में मामा का देहांत

Wed, Aug 24, 2016 at 3:21 PM
जनाज़े में भारत से नहीं जा सका कोई पारिवारिक सदस्य
लुधियाना: 24 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
सत्तर के दशक बात है कामरेड तेजा सिंह स्वतन्त्र अपने एक भाषण में कह रहे थे-आज़ादी आने के बाद भी हम आम नागरिकों के मुकाबले अभी तक तो इन पंक्षियों की हालत अच्छी है जो जहाँ चाहे अपना बसेरा तो बना लेते हैं। वह दिल्ली की निरंकारी कलोनी के पास बनी इंदिरा विकास कलोनी में मई दिवस के अवसर पर बोल रहे थे। यह आयोजन एक ऐसी कलोनी के लोगों की तरफ सिकराय जा रहा था जिन्हें वहां से अवैध कह कर उजाड़ने के लिए आये दिन सबंधित अधिकारी भरी फ़ोर्स लेकर पहुँचते लेकिन मारने मारने पर तैयार लोगों को देख कर लौट जाते। इस कार्यक्रम के आयोजकों में कामरेड परताप सिंह मुसाफिर, डॉक्टर तरलोचन सिंह, उस समय के निडर पंजाबी पत्रकार ज्ञानी अजब सिंह दलेर (विश्व एकता) और ट्रांसपोर्टर निशान सिंह भी उस समय मौजूद थे। आज इस कार्यक्रम की याद आयी है पाकिस्तान से आयी एक दुखद खबर के कारण। मामा की मौत लेकिन जनाज़े में शामिल होना नामुंमकिन क्योंकि वीज़ा में ही काम से काम  लगेगा। आपसी सम्बन्धों में यह कैसा विकास हुआ है कि सुख तो दूर दुःख बांटना भी अब सम्भव नहीं रहा। यह सब कुछ हुआ है शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी के साथ। 
उनके मामा मौलाना अहमद सईद लुधियानवी (75) का लाहौर में निधन हो गया। उनका जन्म 27 दिसंबर 1941 को लुधियाना में हुआ था। पाकिस्तान की सियासत में मौलाना अहमद सईद लुधियानवी का नाम हमेशा ही बुलंद रहा है। उनको बब्बर शेर के नाम से जाना जाता था। उन्होनें हमेशा ही सरकार और पार्टी में गरीबों की मदद करते हुए विपक्ष की भूमिका निभाई। मौलाना के देहांत पर शाही इमाम पंजाब ने गहरा दु:ख प्रकट करते हुए आज जामा मस्जिद लुधियाना में उनकी मगफिरत के लिए विशेष तौर पर दुआ करवाई। हिन्द-पाक सरकारों के खराब संबधों की वजह से भारत से परिवार का कोई भी सदस्य लाहौर जनाजे में शामिल होने के लिए नहीं जा सका, क्योंकि वीजा प्रक्रिया के लिए एक महीने का समय रखा गया है। शाही इमाम ने कहा कि भारत और पाकिस्तान में लाखों ऐसे परिवार है जो कि खुशी तो दूर  की बात गम के मौके पर भी एक दूसरे के पास नहीं पहुंच सकते। क्या बीतती होगी इन लाखों परिवारों पर जो अंतिम यात्रा में भी  से वंचित रह जाते हैं। क्या आतंक की सज़ा इन बेक़सूर परिवारों को भुगतनी होगी। 

जानिए क्यों मना रहे हैं नामधारी बड़े पैमाने पर जन्माष्टमी का मेला

क्या यह जंग का ऐलान है माता चंद कौर के हत्यारों के खिलाफ?
लुधियाना: 23 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ उस समय मां देवकी और पिता वासुदेव कारागार में था। भगवान कृष्ण का जन्म उस भविष्वाणी के सच होने का ज़बरदस्त संकेत था जिसके अंतर्गत कहा जाता है--जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। हालात का दुखद संयोग देखिये। मां देवकी को अगर कारागार में डाला गया था तो इधर नामधारी सम्प्रदाय की माता चंद कौर को दिन दिहाड़े भैणी साहिब जैसी किलेबन्द सुरक्षा में गोलियों से भून दिया गया। अभी तक हत्यारों का पता नहीं चला। रोष प्रदर्शन हुए, धरने दिए गए, ज्ञापन दिए गए लेकिन जांच आगे नहीं सरकी। इस हालात में नामधारी सम्प्रदाय के एक प्रभावशाली गुट की तरफ से जन्माष्टमीका मेला बहुत गहरे संकेत दे रहा है। क्या किसी कंस के वध का ऐलान तो नहीं होने वाला?
नामधारी संगत भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी के प्रकाश पर्व के संबंध में हिंदू सिक्ख एकता को समर्पित विशाल कार्यक्रम 28 अगस्त को न्यू दाना मंडी नजदीक बाईपास में करवा रही है। यह सारा आयोजन सतगुरु ठाकुर दिलीप सिंह जी की हजूरी में होगा। ठाकुर दलीप सिंह की तरफ से कुम्भ के मेले में बिना किसी सुरक्षा के आम श्रद्धालु की तरह जाना, गोविन्द गौधाम में जा कर नतमस्तक होना, समाज के सभी वर्गों को एकजुट होने का सन्देश देना और उन लोगों के गले लगाना जिनको समाज अछूत, गरीब और पिछड़ा हुआ मानता है--वास्तव में एक क्रांति के आरम्भ की घोषणा महसूस होती है। 
गद्दी और जायदाद छोड़ कर हर पल संगत के साथ हरिचर्चा में बिताना उनके त्याग को भी दर्शा रहा है और भविष्य की रणनीति को भी। गौरतलब है कि ठाकुर दलीप सिंह जी के समर्थकों के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि सतिगुरु जगजीत सिंह जी ने गद्दी वास्तव में किसको सौंपी थी। जिस व्यक्ति को सतिगुरु जगजीत सिंह जी ने अपना शरीर छोड़ने  नारियल और अन्य आवश्यक सन्देश दिया था वह व्यक्ति अभी मौजूद है। अगर संगत ने ज़ोर दिया तो उसे भी सभी के सामने लाया जा सकता है। नामधारी सम्प्रदाय को गुरु नानक के झंडे तले लाना भी उनकी दूरअन्देशी को बताता है। उनका नारा बहुत अर्थपूर्ण है--
गुरु नानक दे सिख हां;
असीं सारे इक हाँ। 
इसके साथ एक और नारा है--
पन्थ पाड़ना पाप है;
एकता विच प्रताप है। 
इसी बीच प्रमुख सिख नेतायों के साथ उनकी मुलाकातें भी बहुत गहरा इशारा दे रही हैं। इन नारों के बाद अब जन्माष्टमी मनाने का ऐलान इस एकता को सिर्फ सिखों तक नहीं बल्कि समाज के सभी वर्गों तक लेकर जाने का संकेत भी है। इस कार्यक्रम में नामधारियों के साथ साथ बहुत से गैर नामधारी समर्थक भी बढ़ चढ़ कर शामिल हो सकते हैं क्योंकि समाज को जोड़ने के इस अभियान को बहुत से संगठनों ने सहयोग और समर्थन दिया है। 
समागम की जानकारी देते हुए नामधारी दरबार के सेक्रेटरी संत नवतेज सिंह नामधारी ने बताया कि श्री ठाकुर दिलीप सिंह जी की अध्यक्षता में करवाये जा रहे समागम नामधारी संप्रदाय के लिए पहल है। उन्होंनें बताया कि इस तरह के समागम करवाने से आपसी प्यार बढ़ता है। वही नामधारी संगत लुधियाना के प्रधान हरभजन सिंह ने बताया कि इस समागम को लेकर संगतों में काफी उत्साह है। समागम में नामधारी पंथ के उच्च कोटि के विद्यवान जत्थेदार शामिल होंगे। इस मौके पर दर्शन सिंह, हरविंदर सिंह नामधारी, बलविंदर सिंह दुगरी, डॉ सुखदेव सिंह, गुरमेल बराड़, जसविंदर सिंह बग्गा, गुरदीप सिंह, जसवंत सिंह, जसवंत सोनू, निर्मल सिंह, राजवंत सिंह, मिल्खा, सिंह, जसपाल सिंह, सुरजीत सिंह, अरविदंर लाडी मौजूद रहे। अब देखना है कि इस कार्यक्रम के बाद नामधारी सम्प्रदाय की अगली रणनीति क्या होगी क्योंकि अभी तो त्योहारी सीज़न की शुरुआत ही हुई है।  

Tuesday, August 23, 2016

LIC ने किया मेघावी छात्रों को सम्मानित

लुधियाना के टैगोर पब्लिक स्कूल में हुआ विशेष आयोजन 
लुधियाना: 23 अगस्त 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):
जनाब कृष्ण बिहारी नूर कहते हैं--
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं;
और क्या जुर्म है पता ही नहीं। 
पढ़ लिख कर बेरोज़गारी की तरफ बढ़ते युवा,  नौकरी नहीं मिलने पर खुदकुशियां करते युवा, पैसे के लिए जुर्म की दुनिया में जाते युवा---सिथति बहुत भयानक है। कोई न देखना चाहे तो बात अलग। इस हालत को बदलने के लिए आगे आया है एल आई सी अर्थात भारतीय जीवन बीमा निगम। सुरक्षित भविष्य और साफ सुथरे रोज़गार के अवसर ले कर। त्योहारों के मौसम की शुरुआत एल आई सी ने लुधियाना के अगर नगर में स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल से की। हर क्लास में टॉपर रहने वाले दस दस बच्चों को टॉफी दे कर सम्मानित किया। वास्तव में यह ट्राफी एक आश्वासन थी, एक वायदा था, एक संकल्प कि हम आपका भविष्य सुंदर और सुरक्षित बनाएंगे। समाज के साथ दोस्ती निभाने का यह अंदाज़ शायद एल आई सी को ही आता है। यह कार्यक्रम याद दिला रहा था कि जब तक स्कूल, कालेज और यूनिवर्सिटी की शिक्षा पूरी होती है तब तक ज़िन्दगी के सवाल बदल जाते हैं, चुनौतियाँ बदल जाती हैं, इम्तिहान बदल जाते हैं-यहाँ तक कि पूरे हालात ही बदल जाते हैं। उस वक़्त अगर संकट की घड़ी आ जाये तो  उस कहावत की हकीकत समझ आने लगती है कि बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया। ज़िन्दगी में कभी भी ऐसी घड़ी न आये जब रुपये को ही सब कुछ समझना पड़े इसके लिए आज भारतीय जीवन बीमा निगम ने भविष्य की सुरक्षा का सन्देश इस स्कूल में आकर भी दिया। इस अवसर पर एल आई सी ने हर कक्षा में टॉपर रहने वाले छात्र-छात्रायों को ट्राफियां भी दीं तांकि उनमें सुरक्षित भविष्य के निर्माण का  विश्वास  हमेशा बना रहे। इस मौके पर एल आई सी के एस के बांसल, सुनील कुमार, एम के कौशिक सहित  अधिकारी और सक्रिय सदस्य भी मौजूद रहे। 
कार्यक्रम के अंत में स्कूल की प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष सुनील गोयल और प्रिंसिपल सुश्री डी. नारंग ने इस आयोजन की तारीफ़ करते हुए एल आई सी का आभार  व्यक्त किया  और एल आई सी की टीम को धन्यवाद भी दिया। 
अब देखना है कि और कितने  सामाजिक और वित्तीय संगठन छात्र-छात्रायों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने और सुरक्षित वित्तीय भविष्य के लिए आगे आते हैं ! नौकरियों की चाह में तेज़ होती भागदौड़ और असफल होने पर मिलती निराश के अँधेरे को चीरते हुए अपने पैरों पर खड़ा होने की  रौशनी दिखता एल आई सी तेज़ी से समाज के नव निर्माण में आगे बढ़ रहा है। 

Chandigarh: नरेश अरोड़ा ने शुरू किया महासंपर्क अभियान

2016-08-22 17:23 GMT+05:30
मकसद केंद्रीय योजनायों की जानकारी को जन जन तक पहुंचाना 
चंडीगढ़: 22 अगस्त 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):
जिस बात को  कांग्रेस पार्टी, अकाली दल और "आप" की लीडरशिप अक्सर नज़रअंदाज़ करती रही है और अब भी कर रही है उसे भारतीय जनता पार्टी ने गम्भीरता से महत्व देना शुरू किया है। भाजपा की विचारधारा और नीतियों से जुड़े पुराने सहयोगीयों को एक बार फिर और निकट लाने का सिलसिला शुरू किया गया है।  भाजपा समर्थक पुराने सहयोगियों के साथ सम्बन्ध और अंतरंग बनाने का यह ज़ोरदार प्रयास निकट भविष्य में रंग भी लाएगा।

आज चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश अरोड़ा ने 4 नंबर कॉलोनी फेज-1 से महासंपर्क अभियान शुरू किया। जिसके अंतर्गत वह कॉलोनी में अपने पुराने सहयोगियों के साथ अनेक परिवारों से मिले।
नरेश अरोड़ा ने बताया की इस महासंपर्क अभियान का उदेश्य केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा चलायी जा रही सारी योजनाओ की जानकारी जन जन तक पहुंचाना है ताकि हर जरूरतमंद इन योजनाओं का लाभ उठा सके। यह कार्यक्रम अब निरंतर जारी रहेगा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ता घर घर जा कर और नुक्कड़ बैठकों के माध्यम से लोगो को सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। 
गौरतलब है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस पंजाब यह कदम उठेने में नाकाम रही और आम जनता को  चल पाया था कि उन तक फायदा केंद्र की मनमोहन सरकार  या पंजाब की बादल सरकार। भाजपा इस मामले में सतर्क है और आम लोगों तक मोदी सरकार की नीतियों और फायदों को पहुँचाने में सरगर्म है। इनमें पहल  दी जा रही है उन लोगों को जो माध्यम वर्गीय हैं, मेहनत मज़दूरी करके दो वक़्त की रोटी हैं और बढ़ती हुई महंगाई से बुरी तरह आहत हैं। निश्चय ही यह कदम भाजपा को अकाली दल एक नया मज़बूत आधार देगा  क्योंकि अकाली दल के नेतायों का सम्पर्क अब अक्सर अमीर अकालियों से ही  होता है।


Saturday, August 20, 2016

लिवर के लिए शराब जितना ही खतरनाक है मोटापा और शूगर

Sat, Aug 20, 2016 at 1:34 PM
पंजाब में तेज़ी से बढ़ रहा है हेपाटाइटिस सी का विकराल रूप 
लुधियाना: 20 अगस्त 2016; (पंजाब स्क्रीन टीम):
एसपीएस हॉस्पिटल की टीम ने लिवर ट्रांसप्लांट की पहली सफल सर्जरी करने का इतिहास रच दिया है। विश्व भर में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए विख्यात दिल्ली के सीएलबीएस हॉस्पिटल लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के मुखी डॉ. सुभाष गुप्ता के सानिध्य में हुई इस सर्जरी को करने वाली टीम की अगवाई लिवर ट्रांसपप्लांट व जीआई सर्जरी विभाग के मुखी डॉ. अरिंदम घोष और गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के मुखी डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही ने की। इस सर्जरी के सफल होते ही अंतिम स्टेज पर मौत से लड़ रहे हेपाटाइटिस सी के मरीज को नई जिंदगी मिल गई है।
लिवर ट्रांसप्लांट के लिए विश्व भर में विख्यात और डॉ. बीसी राय अवार्ड से सम्मानित डॉ. सुभाष गुप्ता ने कहा कि हमारी कोशिश है कि बचपन से लेकर बुढ़ापे तक लिवर का बीमरियों से ख्याल रखा जाए। हम लुधियाना में बेहतर क्वालिटी का लिवर ट्रांसप्लांट प्रोग्राम स्थापित कर रहे हैं, ताकि इस क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लोगों की सेवा कर सकें।
इस संबंध में हुई प्रेस कांफ्रेंस के दौरान डॉ. अरिंदम घोष ने कहा कि लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की सफलता इस बात का सबूत है कि हमारे पास हेल्थकेयर की क्वालिटी, सेफ्टी व विश्वनीयता है और मरीज अपने बजट में इन सुविधाओं को हासिल कर सकता है। लुधियाना में शुरू हुई इस विश्वस्तरीय सुविधा का लाभ केवल पंजाबियों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कशमीर व राजस्थान इत्यादि पड़ोसी राज्यों के लोग भी इस सुविधा को ले सकेंगे।
लगातार बढ़ रही लिवर डैमेज की बीमारी पर चिंता जताते हुए डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही ने कहा कि पंजाब में हैपाटाइटिस सी, शराब और मोटापा इसका मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि बीमारी की जल्दी पहचान और समय पर इलाज करने के लिए जागरूकता जरूरी है। क्योंकि देरी से बीमारी और बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट में आशा की किरण नजर आती है। डॉ. घोष के मुताबिक इसकी अंतिम स्टेज पर लिवर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसकी काम करने की क्षमता दिन प्रतिदिन घटती जाती है।  डॉ. घोष ने बताया कि सर्जरी की नई तकनीकों के कारण मरीज और लिवर दान करने वाले की सुरक्षा यकीनी बन गई है। इसके रिजल्ट हमेशा पॉजीटिव रहे हैं। उन्होंने कहा कि लिवर  दान करना पूरी तरह सुरक्षित है। दान किया गया लिवर कुछ हफ्तों बाद खुद ही पूरा हो जाता है। इससे दान देने वाले और लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाला मरीज, दोनों ही सुरक्षित रह कर नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं।
हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेडेंट डॉ. उबेद हामिद ने कहा कि हमने मरीज की हाई सेफ्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ लिवर की सफल सर्जरी करके राज्य में इतिहास रचा है। जिस महिला मरीज का यह लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है, वह हैपाटाइटिस सी वायरस से ग्रस्त थी। उसे विभिन्न इंफेक्शनों के साथ कई बार दाखिल होना पड़ा था। लिवर पर बढ़ी इंफेक्शन और दूसरी काम्पिलीकेशंस के कारण उसकी जिंदगी तीन महीने ही बताई जा रही थी। काउंसलिंग के बाद उसकी बेटी ने उसे अपना आधा लिवर दान करके अपनी मां की जान बचा ली। सर्जरी के बाद मां और बेटी दोनों सुरक्षित हैं। एसपीएस हॉस्पिटल ने अपना लिवर क्लीनिक शुरू कर लिया है, जहां गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट की टीम मरीजों का चेकअप करेगी।

Friday, August 19, 2016

रिटायर्ड ब्रिगेडियर गगनेजा पर हमला करने वालों को जल्द पकड़ो

चंडीगढ़ में आरएसएस के शिष्टमंडल ने की राज्यपाल से भेंट 
मोहाली:18 अगस्त 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन): 
आरएसएस के वरिष्ठ नेता रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा पर जालंधर में हुए हमले का मामला अभी तखल न होने के कारण संघ और भाजपा केडर में लगातार रोष बना हुआ है। इस हमले की तकरीबन सभी दलों ने सख्त शब्दों में निंदा की थी। इसी बीच चंडीगढ़ के संघ संचालक त्रिलोकी नाथ गोयल ने पंजाब के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को सौंपे ज्ञापन में अारएसएस पंजाब के सह प्रांत संघचालक ब्रिगेडियर (रिटा.) जगदीश गगनेजा पर 6 अगस्त को कातिलाना हमला करने वालों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। गोयल ने कहा है कि गगनेजा पर किया गया हमला पंजाब व देश के सामाजिक सौहार्द तथा भाई-चारे को तोड़ने की साजिश है। उल्लेखनीय है जगदीश गगनेजा पर जालंधर के ज्योति चौंक के भीड़भाड़ भरे सघन इलाके में 6 अगस्त की शाम को हमलावरों ने उस समय गोली चलाई थी जब वे अपने परिवार के साथ ज्योति चौक के नजदीक खरीददारी कर रहे थे। वे लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पंजाब के हालात पर नज़र रखने वाले समाजिक और सियासी लोगों ने इसे आतंकवाद की दस्तक के तौर पर लिया और सरकार को सतर्क होने की सलाह भी दी। हमलावरों को पकड़ने में हो रही देरी के कारण आम लोगों में निराश का आलम है और उन्हें एक बार फिर असुरक्षा का अहसास होने लगा है।
गौरतलब है कि जिस दिन श्री गगनेजा पर गोली चलाई गई उस दिन उन्होंने एक अहम मीटिंग बुला रखी थी। आरएसएस के प्रदेश सह संघ चालक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा ने रविवार को जालंधर में संघ की एक बड़ी बैठक बुलाई हुई थी। डेवियट में होने वाले इस विभाग मिलन कार्यक्रम में संघ के पंजाब में कार्यक्रत सभी विंग बुलाए हुए थे। बैठक का मुख्य एजेंडा पंजाब में संघ के प्रचार-प्रसार व आम लोगों को संघ से अवगत करवाने का था। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में आरएसएस का विस्तार करना व वहां नई शाखाएं खोलने की भी चर्चा इसी कार्यक्रम में होनी थी। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भी कई मुद्दों पर चर्चा की जानी थी। 
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की पंजाब इकाई के सचिव कामरेड हरदेव अर्शी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए चेताया था कि सरकार को अब तो नींद से जाग जाना चाहिए। 
Com Hardev Arshi on law and Order situation in Punjab

Wednesday, August 17, 2016

कांग्रेस ने संत लौगोंवाल की पीठ में छुरा घोंपा

2016-08-17 17:56 GMT+05:30
मुख्यमंत्री की तरफ से खन्ना विधान सभा क्षेत्र में संगत दर्शन
चुनावों में अकाली-भाजपा गठजोड़ की एक तरफा जीत होगी-बादल
पंजाब विरोधी कांग्रेस व आम आदमी पार्टी को लोग सबक सिखाएंगे
हरिओ (खन्ना): 17 अगस्त 2016:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
आगामी विधान सभा चुनावों में अकाली-भाजपा गठजोड़ की बिना मुकाबला जीत होने का दावा करते पंजाब के मु यमंत्री स.प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि इन चुनावों में राज्य के लोग कांग्रेस और नई पैदा हुई आम आदमी पार्टी को धूल चटा देंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की पंजाब  विरोधी पहुंच का लोगों को पहले ही अनुभव हो चुका है और अब दरियाई पानियों के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी द्वारा पंजाब विरूद्ध भुगतने से इस पार्टी का वास्तविक चेहरा भी बेनकाब हो गया है।
आज खन्ना विधान सभा क्षेत्र में संगत दर्शनों के दूसरे दिन पत्रकारों द्वारा आगामी चुनावों में शिरोमणि अकाली दल व भारतीय जनता पार्टी के गठजोड़ का मुख्य मुकाबला किस पार्टी से होने संबंधी पूछे एक प्रश्र के उत्तर में स.बादल ने कहा कि  उनकी गठजोड़ का किसी भी पार्टी से कोई मुकाबला नहीं है और इसे एक तरफा ही जीत हासिल होगी क्योंकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी द्वारा पंजाब के हितों के साथ धोखा करके पहले ही सबके सामने आ चुके हैं और लोगों ने इनसे पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।
आगामी चुनावों में नवयुवकों को टिकटें देने संबंधी पूछे गए प्रश्र के उत्तर में स.बादल ने कहा कि उनकी पार्टी ने अनेकों ही नवयुवकों को आगे  लाया है और आने वाले चुनावों में भी उ मीदवारों की जीत की संभावना के मद्देनज़र ही उ मीदवारों का चयन किया जाएगा।
कांग्रेस पार्टी द्वारा सत्ता में आने के बाद किसानों के कजऱ्े माफ करने संबंधी किए गए एलान बारे पूछे गए प्रश्र के संबंध में स.बादल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने 50 वर्ष से अधिक के कार्यकाल दौरान तो किसानों के लिए कुछ भी नहीं किया जिस कारण अब उनके मुंह से ऐसी बातें शोभा नहीं देती। कांग्रेस के वादों को झूठ का पुलंदा बताते हुए स. बादल ने कहा कि उनकी अगुवाई वाली पिछली सरकार द्वारा किसानों को ट्यूबवैलों के लिए दी गई नि:शुल्क बिजली तो कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने सत्ता में आते ही छीन ली थी और ट्यूबवैलों के बिल पुन: लगा दिए थे। किसानों के हितों के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा इस समय किसानों के ट्यूबवैलों के लिए वार्षिक 5000 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। अब सरकार ने किसानेां के लिए बिना ब्याज से 50,000/- रूपए के कर्ज़ मुहैया करवाने के अलावा 50,000/रूपए तक के मुफत उपचार की व्यवस्था की गई है। परिवार के मुखिया की हादसे में मौत हो जाने या पूरी तरह नकारा हो जाने के लिए भी पांच लाख के बीमे की व्यवस्था की है।
इससे पूर्व विभिन्न गांवों में लोगों को स बोधन करते हुए स.बादल ने लोगों को सियासी फैसला सोच-समझ कर लेने की अपील की। मुश्किल समय में अज़माई हुई पार्टी का ही चुनावों दौरान साथ देने की अपील करते हुए स.बादल ने कहा कि सियासी तौर पर लिया गया गलत फैसला सब कुछ ही तहस-नहस कर देता है।
मु यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने धार्मिक, सियासी व आर्थिक तौर पर राज्य की भारी नुकसान किया है। पहले इसने श्री हरिमंदिर साहिब पर फौजी हमला करके इसने सिखों की मानसिकता को झंझोड़ा व फिर दिल्ली में हज़ारों ही बेगुनाह सिखों के कत्ल करवाए। इसने तो अकाली दल के श्रेष्ठ नेता संत हरचंद सिंह की पीठ में छुरा मारा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पहले राजीव-लोैगोंवाल समझौता करवाया और फिर इसकी एक भी मद को लागू नहीं किया। अब तक कांग्रेस चंडीगढ़ और पंजाबी बोलते क्षेत्र पंजाब को देने से टाल-मटोल करती आ रही है। आम आदमी पार्टी पर तीखे हमले करते हुए स.बादल ने कहा कि इस द्वारा समाज में दरार डालने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है पर राज्य के लोग इनके झांसे में नहीं आएंगे। उन्होंने अकाली-भाजपा सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में की गई प्राप्तियों को भी गिनवाया।
संगत दर्शन की महत्ता का जिक्र करते हुए स.बादल ने कहा कि उनका उद्धेश्य समय व ऊर्जा की बचत करने के अलावा विकास कार्यों में लोगों की भागीदारी को यकीनी बनाना भी है। उन्होंने कहा कि देश में संगत दर्शन करने की प्रक्रिया केवल पंजाब में ही है और यह भी केवल तभी होते हैं जब राज्य के लोगों द्वारा उन्हें सेवा का मौका दिया जाता है। उन्होंने कहा कि एक लोकतंत्र देश में लोगों के विकास कार्यों में भागीदारी को यकीनी बनाने के लिए इससे बढिय़ा ओर कोई ढंग नहीं हो सकता क्योंकि संगत दर्शन दौरान लोगों की आवश्यकताओं अनुसार ही समस्याओं के निपटारे उनकी प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाता है और इसके अलावा अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाता है।
मुख्यमंत्री ने आज अलीपुर, रोह, हरिओ कालां, खटड़ा व माजरी में संगत दर्शन करके दो दर्जन से अधिक पंचायतों की समस्याएं सुनीं तथा उन्हें विकास कार्यों के लिए चैक दिए गए। इस अवसर पर अन्य के अलावा मु यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिच डा.एस करूणा राजू, क्षेत्र के सीनियर अकाली नेता स.रणजीत सिंह तलवंडी, डी आई जी श्री एस के कालीया, लुधियाना के उपायुक्त्त श्री रवि भगत, खन्ना के एस एस पी स. सतिन्द्र सिंह, सीनियर अकाली नेता स. इकबाल सिंह चन्नी, स.इन्द्रपाल सिंह उपस्थित थे।
---------

शहर की गणमान्य शख़्सियतों नें बंधवाई बहमाकुमारीज़ बहनों से राखी

Wed, Aug 17, 2016 at 4:12 PM
बहमाकुमारी राज दीदी ने बताया राखी का रहस्य 
लुधियाना: 17 अगस्त 2016: (मीनू गिल्होत्रा//पंजाब स्क्रीन):
भाई बहन के आपसी प्यार तथा पवित्रता का प्रतीक त्योहार रक्षाबंधन पजापिता  बहमाकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय लुधियाना ईकाई द्वारा बहमाकुमारी बहन राज दीदी की प्रधानगी में विश्व शांति सदन गाँव झाड़े में बड़ी धूमधाम से मनाया गया जिस में शहर के प्रमुख गणमान्य हस्तियों ने बहमाकुमारीज़ बहनों से राखी बँधवा कर भगवान का वरदान प्राप्त किया। इस मौक़े पर मेयर लुधियाना हरचरण सिंह गौलवड़िया ,भूतपूर्व मंत्री सतपाल गौसाई , विधायक  दशन सिंह शिवालिक , विधायक बलविदंर सिंह बैस, भाजपा ज़िला प्रधान रविंद्र अरोड़ा ,अकाली सीनियर नेता जगदीश गरचा , भाजपा सीनियर नेता कमल चेतली , डिप्टी मेयर आर ़ ड़ी शमॉ  , प्रमुख उधयोगपति कुलजीत कुलार ,पदीप वधावन सहित शहर की प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की।
       इस मौक़े पर बहमाकुमारी राज दीदी ने राखी का महत्व बताते हुए कहा कि राखी बाधने का रहस्य यही है कि आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को जान उस में स्थित हो। आत्मा का सवधम ही है पवित्रता , सुख , शान्ति , आनन्द , प्रेम। आज ये सब दिव्यगुण न होने के कारण आत्मा दुखी और परेशान हो गई है। इस लिए अब हमें दिव्य गुणों की राखी बाँधनी है। उन्होंने बताया कि राखी कोई सिफ धागा नहीं बल्कि शुभ भावना , शुभ कामना का प्रतीक भी है। इस में तिलक लगाने का मतलब अपने आत्मा स्वरूप में टिकना है । मुख मीठा कराने का मतलब कभी भी मुख से कड़वे शब्द का प्रयोग ना करना है। दीदी जी ने बताया कि परमपिता परमात्मा की तरफ़ से सब बच्चों को से पवित्र राखी बाँधी जाती है जिस में भगवान सभी बच्चों की रक्षा करते है बदले में खर्ची के रूप में अपनी कोई ना कोई बुराई भगवान को अर्पित करनी होती है।भगवान अपने सभी बच्चों को वरदान से भरपूर करते है।
  इस पावन अवसर पर शहर के सभी गणमान्य जनों को बहमाकुमारी राज दीदी, सरस दीदी , सुषमा दीदी ने परमात्मा प्यार की राखी बाँध उन्हे भगवान का वरदान दिया। 
  इस शुभ अवसर पर मेयर लुधियाना, गौसाई जी , रविंद्र अरोड़ा जी , बलविदंर बैसं जी ने बहमाकुमारीज़ बहनों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हे हर बार यहाँ आना बहुत ही अच्छा लगता है। यहाँ की पवित्रता , सादगी तथा शान्ति उन्हे बहुत प्रभावित करती है। यहाँ का अलौकिक वातावरण उन के मन को मोह लेता है तथा उन्हे बहुत सुखद अहसास होता है।

Saturday, August 13, 2016

देश भक्ति के गीतों पर स्कूली छात्रों संग झूमें राज्य मंत्री मदन लाल बग्गा

Sat, Aug 13, 2016 at 4:21 PM
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य आयोजित हुई फैंसी ड्रैस प्रतियोगिता
लुधियाना: 13 अगस्त 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
एवरशाइन पब्लिक हाई स्कूल अशोक नगर में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में फैंसी ड्रैस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। देश भक्ति पर आधारित गीतों की धुनों पर राष्ट्र भक्ति के रंग में रंगे विद्यार्थीयों ने महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह, झांसी की रानी, जवाहर लाल नेहरु, सुभाष चंद्र बोस, अब्दुल कलाम, लाला लाजपत राय जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की वेशभूषा धारण कर स्वंतत्रता संग्राम पर आधारित घटनाओं का मंचन कर तिंरगे को सलाम किया। राष्ट्रगान के साथ आरम्भ हुआ कार्यक्रम जैसे जैसे आगे बढ़ता गया वैसे वैसे बच्चों की तरफ से तिंरगे हाथों में लेकर प्रस्तुत गीतों मेरे देश की धरती उगले-उगले हीरे मोती..., वतन कर चले तुम्हारे हवाले साथियो..., मेरा रंग दे बंसती चोला माए मेरा रंग दे चोला... के स्वरों पर मस्त हुए समारोह के मुख्य मेहमान अकाली दल अध्यक्ष व राज्य मंत्री मदन लाल बगगा भी दर्शक दीर्घा में अध्यक्षीय भाषण में बचपन की यादों को ताजा करते हुए कहा कि मंच पर बच्चों को देश भक्ति के रंग में सरोकार देख उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ गए। जब वह स्कूल में तिंरगे के साथ झूमते हुए इसी तरह कार्यक्रम में भाग लेते थे। इस दौरान बगगा ने प्रतियोगिता में अच्छा प्रर्दशन करने वाले विद्यार्थीयों को पुरस्कार भेंट कर प्रोस्ताहित कर बच्चों में देश भक्ति के जज्बें की भावना उजागर करने के लिए स्कूल प्रिंसीपल भरत दुआ सहित समूह स्टाफ की प्रंशसा करते हुए कहा कि बचपन में ही अगर बच्चों में देश भक्ति का जज्बा कायम हो जाए तो वह जिंदगी भर बरकरार रहता है। स्कूल प्रिंसीपल भरत दुआ और एवरशाइन ग्रुप आफ स्कूल के महासचिव मीनाक्षी आहुजा ने स्कूल के मेधावी छात्रों से मुख्यतिथि मदन लाल बगगा का परिचय करवा कर स्कूल की उपलब्धियों की जानकारी दी। एवरशाइन ग्रुप के आफ स्कूल के अध्यक्ष जे.पी.आहुजा, महासचिव मीनाक्षी आहुजा प्रिंंसीपल भरत दुआ, बिजली बोर्ड एक्सियन राम पाल, मोहित भूटानी, विवेक मनोचा, ललित, अशोक भूटानी, पंकज कौशल, रमेश लाल, स्कूल की प्रौजैक्ट डायरैक्टर सुखपाल कौर, सुरेश कुमारी, गीता, अचला शर्मा ने विद्यार्थीयों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी।

Friday, August 12, 2016

जारी है पत्रकारों के साथ गुंडागर्दी का सिलसिला

Thu, Aug 11, 2016 at 7:47 PM 
नई वारदात हुई भदौड़ में-डीसी व डीएसपी ने कहा होगी कड़ी कार्रवाई
भदौड़ 07 अगस्त 2016(विजय जिंदल//पंजाब स्क्रीन):
गत दिनों डिप्टी कमीशनर बरनाला भुपिंदर सिंह राय ने एक बैठक के दौरान स्थानीय नगर कौसिल के अधिकारियों को नगर कौंसिल की हदूद के बाजारों व सड़कों में दिन व दिन हो रहे नाजायज कबजों को हटाने के लिए कड़े आदेश जारी किए थे। 

बरनाला के डीसी साहिब के आदेश का पालन करते हुए एसडीएम तपा राजपाल सिंह व स्थानीय नगर कौसिल के कार्यकारी अधिकारी राकेश कुमार ने कार्रवाई करते हुए वार्ड नं 11 की सरकारी खाई वाली जगह पर चल रही उसारी को अवैध बताते हुए रुकवाने की कोशिश की थी परंतु वार्ड के मौजूदा पार्षद परमजीत सिंह सेखों ने उक्त आधिकारियों को कहा कि हमारे पास नई उसारी करने के लिए अदालती आर्डर हैं जब एसडीएम तपा ने उनसे उक्त आर्डर की कापियां दिखाने के लिए कहा तो पार्षद प्रमजीत सिंह ने शाम को उपरोक्त अदालती आर्डर दिखाना का वादा कर लिया। इसके बाद सभी अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए वापस लौट गए। उपरोक्त सारे मामले की भदौड़ के पत्रकारों व्दारा की कवरेज अगले दिन जब समाचार पत्रों में छपी खबरों से ख़फ़ा एक पूर्व एमसी जो अब आम आदमी पार्टी का नेता है और विस क्षेत्र भदौड़ से एसएलए के टिक्ट के लिए अपनी दावेदारी भी जता रहा है ने अपने 25-30 के करीब व्यक्तियों को साथ लेकर पत्रकारों के घरों व दफ्तरों में जाकर विभिंन्न प्रकार की धमकीयां देना शुरू कर दिया।इसी सिलसिले में एक पंजाबी अख़बार के पत्रकार सुखविंद्र सिंह पलाहा पुत्र हरभजन सिंह के घर पहुँचे और उसकी खबर को गलत करार देते हुए गाली गलौच शुरू कर दिया जब सामने पत्रकार ने विरोध किया तो वे सभी मारपीट पर उतर आए पत्रकार सुखविंद्र सिंह इस मारपीट में गंभीर घायल हो गया और इधर उधर भाग कर अपनी जान बचाई। और हमलावरों के जाने के बाद पत्रकार को सिविल अस्पताल भदौड़ में भर्ती कराया गया और जांच के बाद गंभीर अवस्था को देखते हुए सिविल अस्पताल के डाक्टरों ने सुखविंद्र को आगे रफर कर दिया।
इकठ्ठा हुआ पत्रकार भाईचारा
पत्रकार पर हुए कातिलाना हमले का पता चलते ही समूचा पत्रकार भाईचारा इकठ्ठे होकर पुलिस थाना भदौड़ के प्रभारी अजायब सिंह व डीएसपी तपा राज कपूर से इंसाफ के लिए मिला तो पुलिस प्रसाशन ने भरोसा तदिया है कि पत्रकार पर हमला करने वाले आरोपीयों को जल्द से जल्द काबू कर लिया जाएगा। 
चार नामजद व्यक्तियों के नाम
सिविल अस्पताल में ईलाज के लिए भर्ती पत्रकार सुखविंद्र सिंह पलाहा ने पुलिस थाना भदौड़ के एएसआई परमजीत सिंह को दिए गए ब्यान में आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता व पूर्व पार्षद के अलावा बीस अन्य अज्ञात व्यक्तियों के नाम लिखवाए हैं।
आप पार्टी दिखा सकती है बाहर का रासता  
आम आदमी पार्टी के सर्कल भदौड़ के अध्यक्ष व राज्य सत्रीय लीगल सेल टीम के सदस्य कीर्त सिंगला से जब उनकी पार्टी के स्थानीय नेता व्दारा पत्रकार से की गई मारपीट के बारे में जब बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मैं दो तीन दिनों से भदौड़ से बाहर था अभी ही भदौड़ आया हूं। और सारे मामले की पड़ताल कर पार्टी के उच्च नेताओं को रिर्पोट देकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Tuesday, August 09, 2016

बेलन ब्रिगेड के साथ अब ई रिक्शा "ब्रिगेड"

Tue, Aug 9, 2016 at 12:30 PM
पहली महिला ई रिक्शा ड्राइवर यूनियन का गठन 
लुधियाना: 9 अगस्त 2016 :: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
जब लुधियाना सहित पूरा देश आज 9 अगस्त को भारत छोडो आंदोलन दिवस की याद में जगह जगह आयोजन आकर रहा था उस समय जानीमानी आर्किटेक्ट अनीता शर्मा समाज को एक नए स्वरूप में ढालने के मकसद से बनाये अपने ही नक्शों को पूरा करने के प्रयासों में जुटी थी। गौरतलब है कि 9 अगस्त देश की जनता की उस इच्छा की अभिव्यक्ति थी जिसमें उसने यह ठान लिया था कि हमें आजादी चाहिए और हम आजादी ले कर रहेंगे। इस भावना को आज के हालात से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया बेलन ब्रिगेड ने। इस अवसर पर नैरा दिया गया---हमें आज़ादी चाहिए महिला सशक्तिकरण के खिलाफ साज़िशें रचने वालों से, हमें आज़ादी चाहिए इन नारो को खोखला बनाने वाले धोखेबाजों से, हमें आजादी चाहिए महिलायों का शोषण करने वालों से।   
उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहर में शुरू की गई ई रिक्शा जो महिलाओ के द्वारा चलाई जा रही है और इन ई रिक्शा में महिला सवारियां ही बैठती है शुरू होते ही साज़िश का शिकार होने लगी। दो वर्ष पहले सामाजिक संस्था बेलन ब्रिगेड ने एक निजी ऑटो कम्पनी के साथ मिलकर लुधियाना के लिए यह योजना तैयार की थी और  फिर अगस्त महीने में लुधियाना प्रशासन के सहयोग से महिलाओ ने शहर में ई रिक्शा चलानी शरू की। इसका विधिवत उद्धघाटन 2 अगस्त की सुबह सर्कट हाऊस से हुआ था। 
इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बेलन ब्रिगेड की अध्यक्ष अनीता शर्मा जो खुद आर्किटेक्ट व इंजीनियर है ने बताया कि महिलाओ का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्होंने खुद पहले ऑटो रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग ली ताकि अन्य महिलाये भी लोक लाज त्याग कर इस पुरुष प्रधान काम में आगे आये और जिससे  समाज में महिलाओ के प्रति बढ़ती असमाजिक सुरक्षा को दूर किया जा सके। 
महिलाओं की शक्ति व एकता को बढ़ाने की  लिए आज लुधियाना में बेलन ब्रिगेड  ई रिक्शा यूनियन का गठन किया गया  जिसमे अनीता शर्मा प्रधान, सीनियर प्रधान संजना सिंह, उपप्रधान नेहा किरण, सचिव कैशियर शशी सिंह, प्रोपोगंडा सेक्रेटरी माया,  कांता चंपा रीटा मीना व परवीन को कार्यकारी कमेटी में लिया गया। 
इस अवसर पर यूनियन की प्रधान अनीता शर्मा ने कहा उनका सपना था कि महिलाएं पुरुष प्रधान समाज में हर काम में पुरुषों के बराबर हिस्सा ले तभी नारी सशक्तिकरण होगा उन्होंने कहा कि नारी जब तक अपने पैरो पर खुद स्टैंड नहीं करेगी तब तक समाज में नारी का रुतबा नहीं बढ़ेगा।  महिलाओ के कार्य में पुरुषो की दखलअंदाज़ी नहीं होनी चाहिए और महिलाए अपने कार्य का खुद निर्णय करे क्या सही है क्या गलत है  इसलिए ई रिक्शा में पुरुषो की दखलअंदाज़ी रोकने, महिलाओ को ई रिक्शा चलाने में आने वाली परेशानियो को रोकने के लिए महिला ई रिक्शा यूनियन का गठन किया गया है। बेलन ब्रिगेड ई रिक्शा यूनियन महिलाओ को ई रिक्शा चलाने के लिए लुधियाना में फ्री ट्रेनिंग देंगी जो महिलाये ई रिक्शा सीखना चाहती है वे इस हेल्प लाइन नंबर 9814370369 पर फ़ोन करे। 
अनीता शर्मा, उनकी सहयोगी संजना और अन्य महिलायों ने स्पष्ट किया है कि हम अपने काम में पुरुषों  की साज़िशें और दख़लन्दाज़ी सहन नहीं करेंगी। उन्हने कहा कि स्वयम्भू पुरुष नेतायों से हमारा हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है कि महिला सशक्तिकरण के सपने को साकार होने दें। इस ऐतिहासिक परियोजना की पीठ में छुरा न घोंपे। यदि उन्हें हमारा यह विनम्र निवेदन समझ नहीं आया तो हम बेलन उठाने से गुरेज़ नहीं करेंगी। मां दुर्गा की पूजा हमें अपने अधिकारों की जंग के लिए लगातार शक्ति देती है। 

Monday, August 08, 2016

विशेष लेख//गज़लो-गीतों ने दिलाई आजादी//*अनिल चमड़िया


08-अगस्त-2016 13:50 IST
ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आंदोलनों के लिए न मालूम कितने गीत लिखें गए
दुनिया में जब भी ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आंदोलनों के लिए न मालूम कितने गीत लिखें गएकिसी ऐसे आंदोलन को याद करते हैं जिन आंदोलनों में मनुष्य अपने ऊपर थोपे गए कई बंधनों से मुक्ति के लिए एकजूट होता है तो उस आंदोलन का कोई न कोई गीत याद आने लगता है। यही वास्तविकता है कि कोई भी आंदोलन गीतों के बिना पूरा नहीं होता है। काव्य धारा के कई रूप हैं और वे कविता, नज्म़, गज़ल, गीत आदि के रूप में जाने जाते हैं। बल्कि यूं भी कहा जाए कि नारे भी अपनी काव्यत्मकता से ही यादगार बन पाते हैं। ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आंदोलनों के लिए न मालूम कितने गीत लिखें गए। इस विषय पर कई शोध हुए हैं लेकिन तमाम तरह के शोधों के बावजूद ये लगता है कि वे उस दौरान लिखे गए सभी गीतों को समेट नहीं पाए।
लेखक-अनिल चमड़िया 
आमतौर पर दो चार गीतों को हम दोहराते हैं। उनमें उर्दू के प्रसिद्ध शायर इक़बाल का वह गीत जिसमें वे कहते हैं कि सारे जहां से अच्छा , हिन्दोस्तां हमारा। हम बुलबुले है इसकी , ये गुलसितां हमारा। इसी हिन्दोस्तां को हिन्दुस्तान के रूप में प्रचारित किया गया है। इक़बाल 1938 में ऐसे ही जोश खरोश से भरे गीत लिखकर दुनियां से विदा हो गए। दरअसल ब्रिटिश सत्ता के विरोध में आजादी के संग्राम के गीतों की ये विशेषताएं थी कि उनमें सात समंदर पार के शासकों की ज्यादतियों का एहसास कराया जाए। लेकिन इसके साथ ये भी जरूरी था कि अपने भीतर की अच्छाई और सुदंरता के विभिन्न पहलूओं की तस्वीर लोगों के सामने खींची जाए। इक़बाल हिन्दोस्तां हमारा गीत में ही लिखते हैं कि गोदी में खेलती है उसकी हजारों नदियां, गुलशन है जिनके दम से रश्के –जिनां हमारा।

गुलामी का एहसास कराना, स्वतंत्रता की चाहत पैदा करना, स्वतंत्रता के लिए सामूहिकता की भावना पैदा करना, उस सामूहिकता की ताकत का एहसास कराना और सबसे महत्वपूर्ण कि आपस की दूरियों को दूर करना और उन दूरियों को विविधता के रूप में पहचान कराकर उन्हें अपनी ताकत बताना, ये सब एक साथ जब कोई रचनाकार करता है तो उसकी राष्ट्रीय़ गीतकार के रूप में स्वीकार्यता हो जाती है। केवल इकबाल अपनी रचनाओं में ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ संघर्ष और अपने लोगों के बीच एकता विकसित करने की चुनौती से नहीं जूझ रहे थे बल्कि हर वह रचनाकार ऐसी चुनौती से जुझ रहा था जो कि भारत को एक लेकिन सभी भारतवासियों के राष्ट्र के रूप में निखारने के सपने देख रहा था। वंशीधर शुक्ल लिखते हैं कि

बिस्मिल , रोशन , लहरी, मौं.अशपाक अली से वीर

आजादी लेने निकले थे, फांसी चढ़े अखीर

शक्ति अनतोली निकली। सिर बांधे कफनवा।

कैप्टन राम सिंह लिखते है- कदम कदम बढाए जा

खुशी के गीत गाए जा

यह जिंदगी है कौम की

तू कौम पर लुटाए जा, बढ़ाए जा।

भारतीय समाज जातियों, धर्मों और दूसरे तरह के आपसी विभाजनों से जूझता रहा है। इन विभाजनों को दूर करने की लड़ाई सदियों से होती रही है। भक्तिकालीन साहित्य में भी यह चुनौती देखने को मिलती है। ब्रिटिश सत्ता विरोधी आंदोलनों के लिए लोगों को घरों से निकालना था और उन्हें यह एहसास कराना था कि इंसानी जिदंगी समाज को जीवंत बनाए रखने की शर्त के साथ जुड़ी है। इसीलिए उस आंदोलन में शामिल होने वाला सैनानी फांसी पर चढ़ते हुए भी लोगों के भीतर मौत का भय नहीं पैदा करता था बल्कि लड़ने के लिए प्रेरित करता था। इस तरह की प्रेरणा केवल और केवल साहित्य ही कर सकता है। कल्पना करें कि स्वंतत्रता की लड़ाई की अगुवाई करने वालों के साथ इन गीतों का साथ नहीं होता तो लोगों को नींद से जगाना और सक्रिय करना लगभग असंभव होता।

वंशीधर शुक्ल खूनी पर्या गीत में कहते हैं कि-

तुम्हीं हिंद में सौदागर आए थे टुकड़े खाने, मेरी दौलत देख देख के, लगे दिलों में ललचाने, लगा फूट का पेड़ हिंद में अग्नी ईष्या बरसाने, राजाओं के मंत्री फोड़े , लगे फौज को भड़काने. तेरी काली करतूतों का भंडा फोड़ कराऊंगा, जब तक तुझको ......

स्वतंत्रता संग्राम की खास बात यह देखी जाती है कि इसने घर-घर में गीत-सैन्य तैयार किए। यानी हर घर में गीत लिखने वाले सैनिक तैय़ार किए। इसीलिए बहुत सारे गीत ऐसे मिलते हैं जिनके रचनाकार के बारे में शोधकर्ताओं को जानकारी नहीं मिलती। दरअसल यहां सैनिक के रूप गीतकार का अर्थ इसी रूप में लेना चाहिए कि जैसे सैकड़ों सैनिक हथियारों से लड़ते-लड़ते शहीद हो जाते हैं और उनके नाम सबकी जुबां तक नहीं पहुंच पाते हैं। दरअसल यही भावना होती है जो कि समाज में परिवर्तन की लड़ाई को अंजाम देने और उनमें सफलता की भावना को सुनिश्चित करती है। एक अज्ञात रचना में गीतकार कहता है कि उठो नौजवानों न रहने कसर दो , विदेशी का अब तो बहिष्कार कर दो, मुअस्सर जहां नहीं पेटभर है दाना . गुलामी में मुश्किल हुआ सर उठाना । रंग दे बसंती चोला , मायी नी रंग दे बसंती चोला वाला जो गीत अक्सर जन भागीदारी वाले कार्यक्रमों में सुनाई देता है उस गीत के भी रचनाकार के बारे में शायद ही कोई जानता हो। वास्तव में उस रचना का रचनाकार अज्ञात है।

दरअसल स्वतंत्रता आंदोलन के कुछ गीत लोगों के बीच लोकप्रिय है लेकिन बहुत बड़ी संख्य़ा में गीत हैं जिन्हें आमतौर पर सुना व पढ़ा नहीं जाता है। आंदोलन के गीतों की खासियत यह भी होती है कि एक गीत कोई लोकप्रिय होता है तो उसकी तर्ज पर कई-कई गीतों की रचना आम लोग करने लगते हैं। मसलन जन गण मन गीत की तरह ही एक अज्ञात रचनाकार लिखते हैं कि शुभ सुख चैन की वर्षा बरसे , भारत भाग है जागा , पंजाब, सिंध , गुजरात, मराठा,द्रविड़,उत्कल-बंग/चंचल सागर , विंध्य हिमालय नीला यमुना गंगा.....। इसी तरह वंदे मातरम शीर्षक वाले अज्ञात गीतकार लिखते हैं कि सरचढ़ो के सिर में चक्कर उस समय आता जरूर, काम में पहुंची जहां झनकार वंदे मातरम। एक ही गीत से कई-कई गीत निकलते रहे हैं। इन गीतों में एक और विशेषता यह देखी जाती है कि हर तरह के काम धंधे करने वाले लोगों के अनुकूल गीत तैयार करने की कोशिश की जाती थी। चकोर लिखते है कि दुखिया किसान हम है, भारत के रहने वाले. बेदम हुए, न दम है , बेमौत मरने वाले । आखिर पंक्ति में लिखते है – ए मौज करने वालो, कर देंगे हश्र बरपा, उभरे चकोर जब भी, हम आह भरने वाले।

गीतों को ब्रिटिश सत्ता अपना सबसे बड़ा शत्रु मानती थी। वह लड़ने वालों के खिलाफ जेल,लाठी गोली का तो इस्तेमाल करती ही थी वह गीतों को भी सलाखों में डालने का इंतजाम करती थी। गीत यानी कलात्मक तरीके से जमीनी हकीकत को बयां करने और उसे लड़ने के लिए प्रेरित करने वाली अभिव्यक्ति  से घबराकर ही सरकार ने एक कानून बनाया था जो कि आज भी बरकरार है, जिसके तहत गीतकारों, नाटककारों और दूसरे तरह की साहित्यिक गतिविधियों में शामिल होने वाले वाले रचनाकारों को जेल के अंदर डाला जाता था और गीतों को जब्त कर लिया जाता था। ब्रिटिश सत्ता ने जिस अनुपात में लोगों को जेलों के भीतर डाला उसी अनुपात में गीत भी जब्त किए। इनमें एक गीत राम सिंह का है- मेरे पुत्रों को यह पैगाम दे देना ज़रा बेटा, मर मिटो देश की खातिर, मेरे लख़्ते-जिगर बेटा। दूसरा गीत कुंवर प्रतापचन्द्र आजाद का है -बांध ले बिस्तर , फिरंगी, राज अब जाने को है, ज़ुल्म काफ़ी कर चुके, पब्लिक बिगड़ जाने को है।  

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं एवं वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के जन संचार विभाग में प्रोफेसर व भारतीय जन संचार संस्थान में हिन्दी पत्रकारिता के प्रशिक्षक रहे हैं।)

***