Saturday, May 28, 2016

वन बंधु कल्याण योजना/विशेष लेख/ *आकाश श्रीवास्तव


27-मई-2016 16:08 IST
आदिवासी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन अक्टूबर 1999 में भारतीय समाज के सबसे वंचित वर्ग अनुसूचित जनजाति (अजजा) के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के समन्वित और योजनाबद्ध उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था। जनजातीय कार्य मंत्रालय, अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए चलाई जा रही समग्र नीति, योजना औऱ समन्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है। केंद्र सरकार ने आदिवासी परिवारों के लिए बेहतर और सतत् रोजगार, ढांचागत खामियों को खत्‍म करने, शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य की गुणवत्‍ता में सुधार और आदिवासी क्षेत्रों में जीवन में सुधार पर विशेष ध्‍यान देने का फैसला किया है।
15 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में से 75 समुदायों की आदिम जनजाति समूह के रूप में पहचान की गई है। इन समूहों में से कुछ समुदाय बहुत ही छोटे है, जो दूरदराज के स्थानों पर अपर्याप्त प्रशासन एंव पिछड़ी मूलभूत सुविधाओं के साथ विभिन्न रूपो में विकसित हुए हैं। इसलिए उन्हें संरक्षण एंव विकास हेतु प्राथमिकता दी जाने की आवश्यकता है। इन समूहों की परेशानियां एंव जरूरतें अन्य अनुसूचित जनजातियों से भिन्न होती है। आदिवासी समूहों के बीच आदिम जनजाति समूह सबसे कमजोर होने के कारण, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इन समूहों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु केंद्रीय क्षेत्र/केन्द्र प्रायोजित एंव राज्य योजना स्कीमों से अपेक्षित धनराशि के आवंटन हेतु केंद्र सरकार से अनुरोध किया।

अनुसूची 5 क्षेत्र में करीब 350 प्रखंड ऐसे हैं जहां कुल जनसंख्‍या की तुलना में जनजातीय लोगों की जनसंख्‍या 50 प्रतिशत या अधिक है। गत दिनों में कई प्रयास किए जाने के बावजूद मानव विकास संकेतक (एचडीआई) के अनुसार इन प्रखंडों में कई प्रकार की कमियां रह गयीं। इन प्रखंडों को अगले पांच वर्ष की अवधि में सतत विकास मिशन के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा सुविधा प्रदान कर मॉडल प्रखंड के रूप में विकसित किया जाना है। इन्हीं सबके मद्देनजर भारत सरकार के आदिवासी मामलों के मंत्रालय ने आदिवासियों के कल्याण के लिए वनबंधु कल्याण योजना (वीकेवाई) की शुरूआत 2014 में की थी।

आदिवासी समूहों और जनजातियों के सर्वांगीण विकास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विषेश ध्यान है। उल्लेखनीय है कि यह  योजना देश में सबसे पहले गुजरात में शुरू की गयी थी जब नरेंद्र मोदी वहां के मुख्यमंत्री थे। यह योजना वर्ष 2014 में आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के एक-एक विकासखंड में पायलट आधार पर शुरू की गई। योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में विभिन्न सुविधाओं का विकास करने के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की हुई। इन ब्लॉकों का चयन संबंधित राज्यों की सिफारिशों और कम साक्षरता दर के आधार पर किया गया। वन बंधु कल्याण योजना में केन्द्रीय मंत्रालयों, विभागों की विकास की विभिन्न योजनाओं के समन्वय और राज्य सरकार की परिणाम आधारित योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की परिकल्पना की गई है। प्रारंभ में ब्लॉक की कुल आबादी की तुलना में जनजातीय आबादी का कम से कम 33% को लक्षित करके योजना को मूर्तरूप दिया गया। वन बंधु कल्याण योजना का मोटे तौर पर आशय एक रणनीतिक प्रक्रिया से है जो यह सुनिश्चित करने की परिकल्पना करती है कि केंद्रीय और राज्य सरकारों के विभिन्न कार्यक्रमों/स्कीमों के तहत वस्तुओं और सेवाओं के लक्षित सभी लाभ समुचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से संसाधनों के तालमेल द्वारा वास्तव में उन तक पहुंचे।

वित्त वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये की लागत से केंद्रीय योजना के रूप में वन बंधु कल्याण योजना (वीकेवाई) शुरू की थी। जबकि सरकार ने 2015-2016 में पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी सारे राज्यों में वन-बंधु कल्याण योजना को लागू कर दिया गया। जिसके लिए दो सौ करोड़ रूपए आवंटित किए गए। सरकार जनजातीय परिवारों के लिए उत्तम एवं निरंतर रोजगार पर विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षा एवं स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार तथा जनजातीय क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार पर ध्यान दिया गया है।

वन बंधु कल्याण योजना के माध्यम से अगले पाँच वर्ष की अवधि के दौरान गुणवत्ता एवं दृश्य आधारभूत सुविधाओं के साथ इन ब्लॉकों को आदर्श ब्लॉक के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सतत विकास के मिशन को आगे ले जाया जा सके। जनजातीय क्षेत्रों के आर्थि‍क वि‍कास को तेज करने, सभी के लि‍ए स्‍वास्‍थ्‍य, सभी के लि‍ए मकान, सभी को स्‍वच्‍छ पेयजल, क्षेत्र के उपयुक्‍त सिंचाई सुवि‍धाओं, आस-पास के कस्‍बों/शहरों को जोड़ने वाली सड़कें, बि‍जली की उपलब्‍धता, शहरी वि‍कास, वि‍कास के पहि‍ए को सतत प्रवाहमान रखने के लि‍ए सुदृढ़ संस्‍थागत तंत्र, जनजातीय सांस्‍कृति‍क वि‍रासत का संवर्द्धन एवं अनुरक्षण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल का वि‍कास करना है।

पूर्व में जनजातीय लोगों के वि‍कास की गति‍ शेष सामाजि‍क समूहों की अपेक्षा धीमी और कहीं ज्‍यादा चुनौतीपूर्ण थी। सरकार द्वारा चलाए जा रहे वि‍शेष कंपोनेन्‍ट प्‍लान एवं वि‍शि‍ष्‍ट कार्यक्रमों के बावजूद जनजातीय समूहों तथा अन्‍य सामाजि‍क समूहों के बीच वि‍कास में भारी अंतर वि‍द्यमान है। जनजातीय लोगों के लि‍ए शि‍क्षा की आवश्‍यकता पर विशेष ध्यान दिया गया है। जनजातीय बच्‍चों को शि‍क्षा प्रदान करना वि‍भि‍न्‍न सामाजि‍क, सांस्‍कृति‍क, आर्थि‍क, पर्यावरणीय एवं प्रशासनि‍क कारणों से सरकार के लि‍ए एक चुनौती पूर्ण कार्य रहा है। शि‍क्षा योजनाओं की पुनर्संरचना का उद्देश्‍य आवासीय स्‍कूल, जनजातीय भाषाओं को शि‍क्षा का माध्‍यम बनाना तथा जनजातीय बच्‍चों को छात्रवृत्‍ति‍ प्रदान करना जैसे उपायों से पर्याप्‍त शि‍क्षागत आधारभूत ढांचा उपलब्‍ध कराना है, जि‍ससे कि‍ राष्‍ट्रीय साक्षरता की तुलना में जनजातीय महि‍ला साक्षरता में वृद्धि‍ हो सके।

वन बंधु कल्याण योजना का उद्देश्य   उचित संस्थागत तंत्र के माध्यम से वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए संसाधनों का अधिकतम उपयोग और   एक समग्र दृष्टिकोण के जरिये भौतिक एवं वित्तीय उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करके आदिवासियों के व्यापक विकास है।   देशभर में जनजातीय आबादी को जल, कृषि एवं सिंचाई, बिजली, शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं उनके सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हाउसिंग, आजीविका, स्वास्थ्य, स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण  सेवाओं एवं वस्तुओं को मुहैया कराने के लिए यह योजना एक संस्थागत तंत्र के रूप में काम करेगी।

रणनीतिक तौर पर शुरू की गई वीकेवाई प्रक्रिया केंद्र की तरह ही राज्य सरकारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के साथ जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने इस योजना को कनवर्जेंस प्लान के रूप में शुरू किया है। वन बंधु कल्याण योजना 
आदिवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित कराने की दिशा में सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है।

लेखक : स्‍वतंत्र पत्रकार हैं।

Friday, May 27, 2016

नेताजी से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी अब और आसानी से

27-मई-2016 18:10 IST
25 सार्वजनिक फाइलों का चौथा बैच वेबपोर्टल पर ऑन लाइन जारी 
नई  दिल्ली: 27 मई 2016: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन):
संस्‍कृति सचिव श्री एन के सिन्‍हा ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 25 सार्वजनिक फाइलों के चौथे बैच को वेबपोर्टल  www.netajipapers.gov.in पर ऑन लाइन जारी किया। 25 फाइलों के इस बैच में 1968 से 2008 की अ‍वधि की प्रधानमंत्री कार्यालय की 5 फाइलें, गृह मंत्रालय की 4 फाइलें और विदेश मंत्रालय की 16 फाइलें शामिल हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 23 जनवरी 2016 को नेताजी की 119वीं जयंती के अवसर पर नेताजी से जुड़ी 100 फाइलों के पहले बैच को उनके संरक्षण और डिजटीकरण के बाद सार्वजनिक किया गया था। 50 फाइलों का दूसरा बैच और 25 फाइलों का तीसरा बैच क्रमश: 29 मार्च 2016 तथा 29 अप्रैल 2016 को संस्‍कृति और पर्यटन (स्‍वतंत्र प्रभार) तथा नागर विमानन राज्‍य मंत्री डॉ. महेश शर्मा द्वारा जारी किया गया था। आज 25 फाइलें जारी किए जाने से इन फाइलों को देखने की लोगों की मांग पूरी होगी और महान स्‍वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस पर विद्वानों को आगे शोध करने में मदद मिलेगी। इन फाइलों की अभिलेखागार विशेषज्ञों की बनी विशेष समिति द्वारा निम्‍नलिखित पहलुओं पर जांच की गई :
1. फाइलों की स्थिति का पता करना और संरक्षण इकाई के माध्‍यम से फाइलों को ठीक करना और संरक्षित करना।
2. डिजिटीकरण की गुणवत्‍ता की पुष्टि करना ताकि डिजिटीकृत रिपोर्ट वेबपोर्टल www.netajipapers.gov.in पर अपलोड किया जा सके।
3. इस बात की जांच करना कि शोधकर्ताओं और जनसाधारण के इस्‍तेमाल के लिए इंटरनेट पर जारी की जा रही फाइलें दोहराई तो नहीं जा रहीं।
1997 में भारत के राष्‍ट्रीय अभिलेखागार को इंडियन नेशनल आर्मी (आजाद हिंद फौज) से जुड़ी 990 सार्वजनिक फाइलें रक्षा मंत्रालय से प्राप्‍त हुई थीं। वर्ष 2012 में खोसला आयोग से संबंधित 271 फाइलें/सामग्री तथा न्‍यायमूर्ति मुखर्जी जांच आयोग से जुड़ी 759 फाइलें/सामग्री जारी की गई यानी कुल 1030 फाइलें/सामग्री गृह मंत्रालय से प्राप्‍त हुई थीं। सार्वजनिक रिकार्ड 1997 के अंतर्गत ये सभी फाइलें लोगों के लिए सार्वजनिक कर दी गई हैं। (PIB)
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Monday, May 23, 2016

जारी है मीडिया के खिलाफ दमन और गुंडागर्दी

दबंग ने किया बिहार में एक पत्रकार का अपहरण 
विश्व भर में पत्रकारों पर लगातार हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बेहद वृद्ध-82 वर्षीय लेखक हुयांग जिरोंग करीब एक सप्ताह से लापता है।लेखन में उसका कलम का नाम ताई लियु है।  की नीतियों का अक्सर विरोध करने वाले इस लेखक कई बार प्रताड़ना का शिकार होना पीडीए है। इसी मई महीने के अंत में उनकी आयु पूरे 83 वर्ष  की हो जाएगी लेकिन इस उम्र में भी उन पर उकसाहट पूर्ण सरगर्मियों का आरोप है। 
इधर बिहार में स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।  पत्रकार राजदेव रंजन की ऐन सड़क पर हत्या और नालंदा के राजेश सिंह को जान से मारने की धमकी के बाद अररिया के एक पत्रकार का अपहरण कर लिया गया है। अपहरण का मामला अब मीडिया के ज़रिये सभी के सामने आया है। मनमाफिक खबर न लिखने से भड़के एक दबंग ने एक स्‍थानीय दैनिक के लिए काम करने वाले पत्रकार हेमंत ठाकुर का घर से अपहरण कर लिया। कई घंटों की मेहनत मशक्कत के बाद पत्रकार जैसे तैसे छूटकर घर पहुंचा। मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। लेकिन इस तरह के हालात हर तरफ बने हुए हैं। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार पत्रकार हेमंत ठाकुर एक स्‍थानीय अखबार के‌ लिए रिपोर्टिंग करते हैं। आरोप है कि ठेकेदारी करने वाला दबंग हाजी लड्डन रविवार को उनके घर आया और एक खबर के बारे में बात करने के लिए उन्हें साथ ले जाने लगा। हेमंत ने मना किया तो धमकी देकर जबरन उसे अपनी बाइक पर बैठा लिया और एक सरकारी अस्पताल में ले गया।वहां ले जाकर फ़िल्मी स्टाईल से गुंडागर्दी हुयी जिससे हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था भी शक के दायरे में आती है। 
वहां जो कुछ हुआ उसके बारे में हेमंत ने बताया कि वहां उसे एक कमरे में बंद करने के बाद लड्डन ने एक मरीज के हाथ में चाकू देते हुए कहा कि अगर यह बाहर निकलने का प्रयास करे तो इसे मार देना। इसके बाद लड्डन ने बाहर से कमरा बंद कर दिया और चला गया। उसके जाने के बाद हेमंत ने शोर मचाया तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे जैसे तैसे बाहर निकाला। इसके बाद हेमंत अपने घर पहुंचा और मामले की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब देखना है कि कदम कब और कितनी जल्द उठता है?