Thursday, October 16, 2014

अग्रिम जमानत मिल गयी-यह अंत नहीं है-लडाई तो अब शुरू हुई है

Thu, Oct 16, 2014 at 6:05 PM
फारवर्ड प्रेस में कोई भी सामग्री आधारहीन नहीं 
नई दिल्‍ली: 16 अक्‍टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
अंतत: आज कोर्ट से मुझे भी अग्रिम जमानत मिल गयी। ख्‍याल नारीवादी लेखक अरविंद जैन इस मामले में मेरे वकील हैं। उन्‍होंने बताया कि पुलिस के पक्ष ने जमानत का घनघोर विरोध किया।
अरविंद जैन जी कोर्ट में फारवर्ड प्रेस का पक्ष तो रखा ही साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A (जिसके तहत मुकदमा दर्ज किया गया है) की वैधता पर भी सवाल उठाए। यही वह धारा है, जो अभिव्‍यक्ति की आजादी पर पुलिस का पहरा बिठाती है।
हालांकि यह अंत नहीं है। लडाई तो अब शुरू हुई है। यह लडाई न सिर्फ मेरी है, न सिर्फ श्री आयवन कोस्‍का की, न ही सिर्फ फारवर्ड प्रेस की। यह अभिव्‍यक्ति, विमर्श और तर्क करने की आजादी की लडाई है। हम सभी को इसे इसी रूप में लडाना चाहिए। एक संघर्ष वस्‍तुत: आधुनिक समाज के निर्माण के लिए है।
उन सभी का हार्दिक शुक्रिया जो विभिन्‍न मतांतरों के बावजूद विमर्श और अभिव्‍यक्ति की आजादी की लडाई में बराबर के भागीदार हैं।

फारवर्ड प्रेस के मुख्‍य संपादक आयवन कोस्‍का और सलाहकार संपादक प्रमोद रंजन को नई दिल्‍ली के पटियाला हाऊस कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी। आदालत में संपादकों का पक्ष रखते हुए ख्‍यात नारीवादी लेखक व अधिवक्‍ता अरविंद जैन, साइमन बैंजामिन तथा अमरेश आनंद ने कहा कि फारवर्ड प्रेस पर  पुलिस की कार्रवाई अभिव्‍यक्ति की आजादी पर हमला है। यहां तक कि संपादकों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (अ) , 295 (अ) आज की तारीख में निरर्थक हो गये हैं तथा इसका उपयोग राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है। 

जमानत के बाद  सलाहकार संपादक प्रमोद रंजन ने उत्‍तर प्रदेश के महोबा जिले में मौजूद महिषासुर, जिन्‍हें भैसासुर के नाम से भी जानाा जाता है की तस्‍वीरें जारी करते  हुए कहा कि फारवर्ड प्रेस में कोई भी सामग्री सामग्री आधारहीन नहीं है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्‍व विभाग द्वारा संरक्षित भी है। ऐसे सैकडों भौतिक साक्ष्‍य उपलब्‍ध हैं, जो यह साबित करते हैं कि 'दुर्गा-महिषासुर' का बहुजन पाठ अलग रहा है। उन्‍होंने कहा कि पत्रिका का इन पाठों को प्रकाशित करने का मकसद अकादमिक रहा है इसके अलावा इस पाठों के माध्‍यम से हम चाहते हैं कि विभिन्‍न समुदाय एक दूसरें की भावनाओं, परंपराओं को समझें तथा एक-दूसरे करीब आएं। फारवर्ड प्रेस का कोई इरादा किसी समुदाय की भावना को आहत करने का नहीं रहा है।

गौरतलब है कि इसके पूर्व उदय प्रकाशअरुन्धति रायशमशुल इस्लाम,शरण कुमार लिंबाले, गिरिराज किशोरआनंद तेल्तुम्बडेकँवल भारतीमंगलेश डबरालअनिल चमडियाअपूर्वानंदवीरभारत तलवारराम पुनियानी, एस.आनंद समेत 300 से हिंदी, मराठी व अंग्रेजी लेखकाें ने फारवर्ड प्रेस पर कार्रवाई की निंदा की थी। 
लेखक समुदाय ने एक संयुक्‍त बयान जारी कर कहा था कि -  यह देश विचारमत और आस्थाओं के साथ अनेक बहुलताओं का देश है और यही इसकी मूल ताकत है. लोकतंत्र ने भारत की बहुलताओं को और भी मजबूत किया है।  आजादी के बाद स्वतंत्र राज्य के रूप में भारत ने अपने संविधान के माध्यम से इस बहुलता का आदर किया और उसे मजबूत करने की दिशा में प्रावधान सुनिश्चित किये.
इस देश के अलगअलग भागों में शास्त्रीय मिथों के अपने अपने पाठ लोकमिथों के रूप में मौजूद हैं. देश के कई हिस्सों में रावण’ की पूजा होती हैपूजा करने वालों में सारस्वत ब्राह्मण भी शामिल हैं. महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर राजा बलि की पूजा की जाती हैजो वैष्णवों के मत के अनुकूल नहीं है. आज भी इस देश में असुर जनजाति के लोग रहते हैंजो महिषासुर व अन्य असुरों को अपना पूर्वज मानते हैं। हर साल मनाये जाने वाले अनेक पर्वों में धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप निर्मित छवि वाले असुरों के खिलाफ जश्न मनाया जाता हैजो एक समूह के अस्तित्व पर प्रहार करने के जाने अनजाने आयोजन हैं। 
दिल्ली से प्रकाशित फॉरवर्ड प्रेस पत्रिका अक्टूबर के अपने बहुजन श्रमण परंपरा विशेषांक’ में में इस तरह की अनेक परंपराओंसांस्कृतिक आयोजनोंविचारों को सामने लायी हैजिसमें दुर्गा मिथ’ या दुर्गा की मान्यता के पुनर्पाठ भी शामिल हैं.
2011 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक छात्र समूह ने महिषासुर शहादत’ दिवस मनाने की परम्परा की शुरुआत कीजिसके बाद पिछले चार सालों में देश के सैकड़ो शहरों में यह आयोजन आयोजित होने लगा है. इस व्यापक स्वीकृति का आधार इस देश के बहुजन श्रमण परम्परा और चेतना में मौजूद है.
पिछले ९ अक्टूबर को इस कारण फॉरवर्ड प्रेस के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा अतिवादी लोगों के एक समूह के द्वारा किये गए एफ आई आर और उसके बाद पुलिस की कार्यवाई की हम निंदा करते हैं पत्रिका के ताजा अंक की प्रतियां जब्त कर ली गयी हैं तथा संपादकों के घरों पर पुलिस का छापा,  उनके दफ्तर और घरों पर निगरानी पत्रिका के कामकाज पर असर डालने के इरादे से की जा रही है. यह अभिव्यक्ति की आजादी और देश में बौद्धिक विचार परम्परा के खिलाफ हमला है. वैचारिक विरोधों को पुलिसिया दमन या कोर्ट-कचहरी में नहीं निपटाया जा सकता। अगर पत्रिका में प्रकाशित विचारों से किसी को असहमति है तो उसे उसका उत्तर शब्दों के माध्यम से ही देना चाहिए।
हम भारतीय जनता पार्टी सरकार से आग्रह करते हैं कि इस एफ आई आर को तत्काल रद्द करने का निर्देश जारी करे और पुलिस को निर्देशित करे कि इसके संपादकों के खिलाफ अपनी कार्यवाई को अविलम्ब रोका जाए.

भोपाल में सैकड़ो विस्थापितों-भूमि स्वामियो ने दी मुख्यमंत्री को चेतावनी

Thu, Oct 16, 2014 at 5:11 PM
गैर कानूनी डूब या विनाश अब और नहीं
नए भू अर्जन कानून के तहत अधिगृहित ज़मीन  का मालिकाना हक स्वीकार करे सरकार
सरदार सरोवर, नर्मदा नहरे, जोबट, बर्गी और पेंच, अडानी परियोजनाओं के खिलाफ की आवाज़ बुलंद  
भोपाल: 16 अक्टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज नर्मदा घाटी के बडवानी, खर्गोन,धार जिले के गाँव-गाँव के किसान मजदूर, मछुआरे, कुम्हार सरदार सरोवर बाँध को आगे बढाने की खिलाफत करते हुए अपने जीने के अधिकार के तीस सालों के संगर्ष के चलते हुए पधारे है,  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी से पूछने, क्या आप हमारी बात सुनेंगे? क्या आप कानून के दायरे में हमारे अधिकारों और मध्य प्रदेश के हित में भूमिका लेंगे ?
आज नर्मदा घाटी के गाँव-गाँव से सैकड़ो प्रभावित  भोपाल में मुख्यमंत्री से सवाल एवं चर्चा करने गांधी मैदान के सामने इखट्टे होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे जन सैलाब को अपेक्षा अनुसार पुलिस ने रोक लिया, सभी महिला, पुरुष, साथ में युवाओं ने जमकर नारेबाजी की।
सरदार सरोवर विस्थापितों के साथ इंदिरा सागर व ओम्कारेश्वर नहरो और जोबट बाँध प्रभावित भी पहुंचे है।   साथ ही मध्य प्रदेश के जबलपुर, छिंदवाडा, सीधी, रीवा, देवास, जैसे  जिले जिले से  पेंच परियोजना, अडानी पॉवर प्लांट, बर्गी बाँध, आदि परियोजनाओ के वर्षो से विस्थापित हो चुके, किसान, आदिवासी पधार है अपने मुद्दे, मांगे व सवालो को लेकर । सभी का अहम् मुद्दा है, 'खेती , आजीविका और विस्थापन' ! पीड़ियो पुराने आजीविका का एक मात्र साधन  रहे प्राकृतिक संसाधन, ज़मीन, जल, जंगल 'विकास' के नाम पर शासन छीनती जा रही है,  इससे कोई बेघर या कोई बेरोजगार होकर आक्रोशित है । कार्यक्रम में शामिल मुलताई से पूर्व विधायक व किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ सुनीलम ने कहा की विकास योजना तय करने में कोई सहभाग न लेते हुए, हमारे ऊपर थोपी जा रही परियोजनाए हमे विकास के लाभ नहीं, विस्थापन से बर्बादी मात्र दे रही है।
पुनर्वास की नीतियाँ कागज़ तक और आश्वासन चुनाव तक ही सीमित रहे है । वैकल्पिक ज़मीन या आजीविका सुनिश्चित करने के लिए 'साधन उपलब्ध नहीं' सुनने की हमारी तैयारी नहीं है । हम जानते है कि अभी अभी इंदौर में हुई अंतर्राष्ट्रीय पूंजी निवेशको की बैठक  के (Investor Meet) पहले मुख्यमंत्री जी ने जाहिर किया था कि उद्योगपतियों के लिए 25000 हे. ज़मीन मध्य प्रदेश में उपलब्ध है । सबसे पहले आज तक उजड़ चुके विस्थापितों के लिए 'खेती लायक ज़मीन और रोज़ी रोटी का कोई विकल्प नहीं ' यह जवाब हमे मंज़ूर नहीं इसलिए राज्य तथा केन्द्रीय शासन अब सचेत हो रहे है और अपने साधानो के लूट के बावजूद हम विस्थापितों को भ्रमित करके ही कुछ योजनाये आगे बढ़ा रहे है।
नर्मदा बचाओ आन्दोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने कहा की अँगरेज़ शासन के 1894 का कानून के खिलाफ नर्मदा से नंदीग्राम, पेंच से पोलावरम तथा खदाने, उर्जा योजना, शहर विकास को देसी वेदेशी पूँजी और बाजारी विकास को चुनौती देते आये जन संघर्षो का ही परिणाम है - पुराना कानून निरस्त होना । तमाम जन संघर्ष कई दशको से अपने सवाल खादेब्कारते आयेे, अपने अधिकार और प्रकृतिक धरोहर को बचते हुए इस लड़ाई के दौरान पूर्व की यूपीए केन्द्रीय शासन ने नया भू-अर्जन कानून लाया । इस कानून में खामियों के बावजूद जो जन-वादी प्रव्धान है, उन्हें ख़त्म करने की पूरी तैयारी, भाजपा की सरकार, नितिन गडकरी, ग्रामीण विकास मंत्री तथा नरेन्द्र मोदी जी, प्रधानमंत्री ने मिलकर की है । हम उन्हें और उनकी यह किसान-मजदूर विरोधी चाल को चुनौती देते है, देते रहेंगे ! SEZ, DMIC, Megacity, Smart city, उर्जा राजधानी जैसे नाम पर मेहनतकशो को अपने धरातल, संस्कृति से, पैसा, संसाधनों से परे करना अनन्य है ।
इसलिए नए भू- अर्जन कानून, 2013 की धारा  24 के तहत, 5 साल से अधिक पुराने भू- अर्जन - अवार्ड घोषित होते हुए आजतक हमारा ही भौतिक कब्ज़ा, हमारी ज़मीन, मकान, संपत्ति पर रखने वाले ; मुआवजा न लेने वाले हम सब किसान- मजदूर -मछुआरे-कारीगर व्यापारी  यह घोषित कर चुके है कि 1 जनवरी, 2014 से हम फिर मालिक बन चुके है । भू अर्जन रद्द हो चूका है ।  धरने पर बेठे लोगो चेताया की 'मुख्यमंत्री जी, आप या मोदी जी भी , अडानी, अम्बानी जैसी कोई ताकत, विदेशी पूँजी या कंपनी ; या कोई बड़ा बाँध या योजना हमे नहीं उजाड़ सकते, हमारी संपत्ति  बर्बाद नहीं कर सकते । हमे डूबा नहीं सकते आप को चेतावनी तथा यह जानकारी देने आये है हम। जिसे आप कानूनी हक मानकर हमारी संपत्ति पर हमारा नाम याने अधिकार दर्ज करे"।
 यह आवाज़ और आत्मविश्वास से अधिकार के साथ पुकार रही है, नर्मदा, पेंच, बरगी, जैसे नदी घाटियों से और अन्य परियोजनाओ से आये लोगो की । नर्मदा घाटी से गाँव- गाँव के लोगो से साथ छिन्द्वारा से आराधना भार्गव जी, डा. सुनीलम, अध्यक्ष किसान संघर्ष समिति,  जबलपुर -मंडला से राजेश तिवारी, तथा योगेश दीवान, जन पहल से   से आये प्रमुख कार्यकर्ता एवं विस्थापितों ने अपनी बात घोषित करते हुए, मुख्यमंत्री जी से सुनवाई का आग्रह किया है ।
 जारी है नए कानून की इस धारा की स्पष्टता और परिभाषा सर्वोच्च अदालत ने भी मान ली है, जैसे कि 1.1.2014 के बाद आये फैसलों से स्पष्ट है । अब चुनौती है शासन के सामने !!
राहुल यादवबिलाल खानकमला यादवलालू भाईमीरा
रणवीर तोमर
संपर्क: +91 7049391073

मिठाई में मिलावट अब नियंत्रण में-स्वास्थ्य मंत्री ज्याणी

यदि किसी को पता चले तो तुरंत उन्हें सूचित करे 
लुधियाना: 15 अक्टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया है कि मिठाईयों में मिलावटकी बुराई अब नियंत्रण में है। अगर किसी को इसका पता चले तो वह सीधा उन्हें सम्पर्क करे। उन्होंने मीडिया और अन्य लोगों को खुला निमंत्रण दिया कि ऐसा कुछ भी पता चले तो तुरंत सूचित करें।अन्य हरियाणा विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलना तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली के मद्देनजर हरियाणा की जनता भाजपा की सरकार बनाने को उत्साहित है। इन चुनावों में 45 से ज्यादा सीटें भाजपा को मिलने जा रही हैं। यह दावा स्वास्थ्य मंत्री  जीत कुमार ज्याणी ने किया है। वह बुधवार को अपोलो अस्पताल में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। पत्रकारवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार के पूर्ण बहुमत आने के बाद देश के सभी राज्यों में उम्मीद की किरण जगी है। जनता अपने-अपने राज्यों में भाजपा को ही सत्ता में लाना चाहती है। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ने का आह्वान भी किया। इसी बीच पूर्व भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली दल के बीच जारी वाकयुद्ध के मुद्दे पर पूछे सवाल को ज्याणी ने टाल दिया और बस यही कहा कि मेरे लेवल का मसला नहीं है, ये डिप्टी सीएम और नवजोत सिद्धू के बीच का मामला है। इस टालमटोल के दरम्यान ही उन्होंने रुखसत ली। 
इस अवसर पर नामधारी सुरिंदर सिंह, सिवल सृजन डा. सुभाष बत्ता, पंजाब मेडिकल कौंसिलके अध्यक्ष डा. डी एस ग्रेवाल और कई अन्य प्रमुख व्यक्ति भी मौजूद थे। 


Wednesday, October 15, 2014

'पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम'


15-अक्टूबर-2014 19:15 IST
प्रधानमंत्री कल करेंगे कार्यक्रम का शुभारंभ 

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय 16 अक्टूबर, 2014 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राज्य सरकारों के श्रम एवं रोजगार मंत्रियों, स्वास्थ्य मंत्रियों तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण मंत्रियों के एक दिवसीय सम्मेलन के दौरान 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कार्यक्रम' का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम का आगाज करेंगे। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार, इस्पात व खान मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर और श्रम एवं रोजगार, इस्पात तथा खान राज्य मंत्री श्री विष्णु देव साई भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे। 


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सूक्ष्म, लघु व मझौले उपक्रम मंत्री श्री कलराज मिश्र, वाणिज्य व उद्योग, वित्त तथा कॉरपोरेट मामलों की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती निर्मला सीतारमण और कौशल विकास, उद्यमिता, युवा मामले तथा खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सर्बानन्द सोनोवाल 'मेक इन इंडिया' विजन से तालमेल बिठाते हुए केंद्रीय श्रम मंत्रालय की पहल को आगे बढ़ाने के लिए इस मौके पर उपस्थित रहेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों के सचिव भी इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। 

यह सम्मेलन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निम्नलिखित पांच विषयों पर केंद्रित रहेगा: 

• एकीकृत श्रम पोर्टल (जिसे श्रम सुविधा नाम दिया गया है) और केंद्र सरकार के चार संगठनों ईएसआईसी, ईपीएफओ, डीजीएम और सीएलसी के लिए अनुपालन को आसान बनाने के लिए पारदर्शी एवं उत्तरदायी श्रम निरीक्षण योजना (http://efilelabourreturn.gov.in) 

• कर्मचारी भविष्य निधि के लिए सार्वभौमिक खाता संख्या (यूएएन) के जरिये पोर्टेबिलिटी 

• मांग आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण 

• प्रशिक्षु प्रोत्साहन योजना 

• असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पुनर्गठित राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) का क्रियान्वयन 

तकरीबन 35 राज्य सरकार श्रम, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण मंत्रियों और इन विभागों के 60 राज्य सरकार सचिवों के भी इस सम्मेलन में भाग लेने की संभावना है। 

उनके अलावा विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के 64 सीईओ तथा 20 बीमा कम्पनी प्रमुख भी इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। 

इस कार्यक्रम का दूरदर्शन के डीडी नेशनल और डीडी न्यूज चैनलों पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। श्रम मंत्रालय एवं डीडी न्यूज की वेबसाइटों, डीडी/यूट्यूब चैनल इत्यादि पर इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण करने का भी इंतजाम किया गया है। देशभर में फैले सभी आईटीआईऔर ईएसआईसी/ईपीएफओ/सीएलसी/वीवीजीएनएलआई/सीबीडब्ल्यूई/डीजीएमएस/डीजीईएण्डटी इत्यादि के कार्यालयों में इस कार्यक्रम को दिखाने की भी व्यवस्था की गई है। यह अनुमान लगाया गया है कि देशभर में 10 करोड़ से भी ज्यादा लोग टेलीविजन पर इस कार्यक्रम को देखेंगे। 

इस कार्यक्रम के साथ-साथ देशभर में बड़े पैमाने पर एसएमएस भेजे जाएंगे। सार्वभौमिक खाता संख्या के जरिये पोर्टेबिलिटी के बारे में तकरीबन एक करोड़ ईपीएफओ सदस्यों को एसएमएस मिलेंगे। तकरीबन 6.5 लाख प्रतिष्ठानों और 1800 निरीक्षण अधिकारियों को एकीकृत श्रम पोर्टल के बारे में एसएमएस मिलेंगे जिससे पारदर्शी और उत्तरदायी श्रम निरीक्षण योजना में मदद मिलेगी। इसी तरह ऐसे ब्रांड अम्बेसडरों के बारे में आईटीआई प्रशिक्षुओं को तकरीबन 4 लाख एसएमएस भेजे जाएंगे जो आईटीआई से काफी पहले ही पास होकर निकल चुके हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में काफी सफल हैं। इतनी ही संख्या में ई-मेल भी इस दौरान भेजे जाएंगे। (PIB)
विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/एएम/आरआरएस/एलएन/- 4451

पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि जल्द मुहैया करवाई जाये

 Wed, Oct 15, 2014 at 6:55 PM
डाक्टर राजकुमार वेरका ने दिए वेलफेयर अधिकारी को आदेश 
लुधियाना: 15 अक्टूबर 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
जमालपुर की आहलूवालिया कॉलोनी में फर्जी एनकाउंटर के मामले में आज राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर राजकुमार वेरका के समक्ष लुधियाना पुलिस के डी एस पी लखबीर सिंह पेश हुए और उन्होंने बताया कि इस केस में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिए गया है। 
शिकायतकर्ता मृतक लड़कों के पिता सतपाल सिंह ने आयोग के समक्ष गुहार लगाई कि उनकी जान को खतरा है। इस पर डी एस पी ने कहा कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार की सुरक्षा को यकीनी बनाया जायेगा। डॉक्टर वेरका ने कहा कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया करवा दी जाये। पीड़ित सतनाम सिंह ने गुहार लगाई कि अभी तक पी ओ ए एक्ट के अधीन मिलने वाला मुआवजा राशि उनको नहीं मिली है जिसपर डॉक्टर वेरका ने जिला सोशल वेलफेयर अधिकारी लुधियाना को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द सारी कानूनी प्रक्रिया पूरी करके पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि मुहैया करवाई जाये।  

आ बता दें कि तुम्हे कैसे जिया जाता है

किस तरह ज़िंदा हैं लोग----                                    -Raj Kumar Sahu
रूखी सूखी जो मिले पेट भरने के लिए 
काफी दो गज़ है ज़मीं जीने मरने के लिए 
जगह कम और आबादी ज़्यादा-समस्या विकराल है पर ज़िन्दगी भी तो काटनी है। जीने के लिए---रहने के लिए बहुत सी कठिनाइयां लेकिन लोग फिर भी जी रहे हैं। हमने हर हाल में जीने की किस्म कसम खाई है--यह बात कहने सुनने में काफी आसान सी लगती है---पर वास्तव में होती है बहुत कठिन।इस के बावजूद ज़िन्दगी की कठिन राहों पर  मुस्करा कर चलने के मामले में एक बिलकुल ही नई मिसाल बन चुके हैं ये मकान। झाँसी के सीपरी इलाके में यह ज़मीन शायद सरकारी है और लोगों को जीवन जीने का अधिकार उस परमसत्ता भगवान ने दिया है। ज़िंदगी के इस आशियाने की नयी तकनीक ज़िंदगी की ज़रूरतों ने तलाश कर ली। मकान देखें तो खतरा ही खतरा लगता है---अभी गिरा-अभी गिरा---पर लोग यहाँ इस खतरे में जी रहे हैं। सुना है यहाँ पूरी की पूरी गली ही ऐसी है इसी तरह के मकानों से बानी हुई। इन्हें अगर खतरा मकान कह लिया जाये तो शायद कदापि गलत नहीं होगा लेकिन लोग खतरे में रहने को भी तैयार। सरकार से सर छुपाने को छत नहीं मिली तो हिम्मत करके खुद बना ली।
जैसे ज़मीन पर पेड़ थोड़ी सी जगह घेरता है और बाकी का आकार कुछ ऊंचा उठकर आसमान में ही लेता है। बस यहाँ लोग भी पेड़ों की तरह हो गए हैं। जब तक जिएंगे समाज को कुछ फायदा देंगें बिलकुल पेड़ों की तरह-जब पेड़ों की तरह गिरा दिए जाएंगे तो गुमनामी की मौत मर जाएंगे या फिर कहीं ओर जाकर ज़िंदगी के उजड़ चुके घर को फिर से बसाने का प्रयास करेंगे। सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़े के आरोप में बदनाम किये जाते ये लोग शायद नहीं जानते कि यहाँ इस देश के नेताओं ने देश विदेश में कितने कितने एकड़ ज़मीन अपने नाम करवा रखी है। किस किस नेता का किस किस जगह होटल है-कहाँ बंगला है--कहाँ कृषि भूमि है---इसका सही आंकड़ा शायद कभी सामने न आये क्यूंकि इस हमाम में सभी नंगे हैं।  गाज गिरती है तो गरीबों पर। इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करके कि बहुत से गरीब और दलित लोग मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी दो गज़ ज़मीन नहीं जुटा पाते। हर पल खतरों में रह कर जी रहे लोगों के इन अजीबो-गरीब मकानों की यह तस्वीर साहिर लुधियानवी साहिब की पंक्तियाँ फिर याद दिल रही है----
माटी का भी है कुछ मौल मगर--
इंसानों की कीमत कुछ भी नहीं 
आखिर कब सच होगा मेरा भारत महान का नारा? हर रोज़ महंगी होती ज़मीन और लगातार कम हो रही इंसान की कीमत हमें किस तरफ ले जा रहे हैं? क्या यही थी वह आज़ादी जिसके लिए अनगिनत शहीदों ने अपनी क़ुरबानी दी। क्या यही है उनके सपनों का भारत?
खतरों में जी रहे इन मजबूर और बेबस लोगों पर ऊँगली उठाने वाले कभी भू-माफिया का नाम भी लेंगें जो देश के बहुत से भागों में सक्रिय है?
ऐसे बहुत से सवाल हैं जो इस तस्वीर को देख कर उठ रहे हैं---आखिर कब मिलेगा उनका जवाब?
इस तस्वीर को फेसबुक पर पोस्ट किया है एक जागरूक नागरिक Raj Kumar Sahu ने अपने प्रोफाइल पर मंगलवार 14 अक्टूबर 2014 को सांय 4:45 पर।
इस पर कमेन्ट भी काफी दिलचस्प हैं। देखिये कुछेक की एक झलक।
  • Ganesh Prasad खतरा ही खतरा !!
    11 hrs · Unlike · 2
  • Arvind Sharma Guddu jara hat ke jara bach ke ye jhansi hai meri jaan...
    9 hrs · Unlike · 3
  • Rai Niranjan Great nice teqnic
    7 hrs · Unlike · 2
  • Prabhakar Dwivedi jo jamin sarkaari hai wah jamin hamari hai yehi niyam hai uttam pradesh mei jai ho
  • नोट:आपको यह तस्वीर कैसी लगी अवश्य लिखें। आपके पास भी कोई ऐसी तस्वीर हो तो अवश्य भेजें तांकि दुसरे लोग भी उसके बारे में सकें। हम आपका नाम भी उस तस्वीर के साथ प्रकशित करेंगे। 

Tuesday, October 14, 2014

इस बार फिर नासा हैरान है

हुदहुद की तबाही को मौसम विभाग ने हैरानीजनक हद तक कम किया
हुदहुद की तबाही को हमारे मौसम विभाग ने हैरानीजनक हद तक कम कर दिया। इस बार फिर नासा हैरान है और साथ ही पूरा विश्व भी। इस करिश्मे को कर दिखाया हमारे वैज्ञानिकों और अन्य सबंधित कर्मचारियों ने लेकिन इस चमत्कार का श्रेय 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी जाता है जिन्होंने समय रहते इस मुद्दे पर विशेष बैठक बुलाई और विभाग की पीठ थपथपाने के साथ साथ उन्हें उत्साह भी दिया और कार्य की खुली छूट भी। जब हुदहुद की सुनामी आई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद 14 अक्टूबर 2014 को आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तूफान प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के लिए निकले। पीआईबी के कैमरामैनों ने इन पलों को झट से अपने कैमरे में संजो लिया।  (फोटो पसूका-हिंदी इकाई)

तूफान प्रभावित वाइजाग में राहत अभियान की समीक्षा


14-अक्टूबर-2014 17:57 IST
आवश्यक सभी मदद भारत सरकार करेगी
समीक्षा बैठक के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी का वक्तव्य
परसों जो भयंकर cyclone आया, और उसके कारण आंध्र को और कुछ भाग में उड़ीसा को जो संकट झेलना पड़ा, अनेक लोगों को अपने प्राण खोने पड़े, इस कठिनाइयों से गुजरे हुए सभी नागरिक भाइयों-बहनों के प्रति मैं अपनी सहानुभूति प्रकट करता हूं। इस संकट के समय पूरा देश, भारत सरकार, आंध्र के साथ Vizag के लोगों के साथ पूरी ताकत से खडे हैं। आवश्यक सभी मदद भारत सरकार करेगी। 

इस Cyclone में Technology का बहुत ही Perfect उपयोग हुआ, पहले दिन से ही। इस Cyclone में मौसम विभाग ने Technology का बखूबी उपयोग किया और 6 तारीख से ही ये संकेत दे दिए गए थे। जो अनुमान थे, उतनी ही Velocity रही। जो दिशा थी अनुमानित, वही दिशा रही। जो अनुमानित Time था, वही Time रहा। और एक प्रकार से इस संकट से बचने में ये Technology का उपयोग भी काफी काम आया। 

दूसरी सबसे महत्‍वपूर्ण बात हुई, जब केंद्र और राज्‍य, दोनों, कंधे-से-कंधा मिला करके काम करते हैं, सही दिशा में काम करते हैं, तो कितने बड़े संकट क्‍यों न हो, उन संकटों से उभरा जा सकता है। आंध्र Government और भारत सरकार ने 5 दिन लगातार minute-to-minute Perfect Co-ordination के साथ काम किया। Local Body ने भी उसको पूरी तरह Follow किया। मैं Vizag के नागरिकों का भी अभिनंदन करना चाहता हूं कि संकट के समय उन्‍होंने सरकार की सूचनाओं का पालन किया। पूरी तरह से discipline को माना, और उसके कारण लोगों की जिंदगी बचाने में हम सफल हुए। इन संकटों के बावजूद भी, यह एक भयंकर Cyclone था। आपने तो इसको खुद ही अनुभव किया है। 

आपने जो धैर्य रखा.... और आज भी मैं बहुत दूर गया। मैंने हवाई निरीक्षण करके ओडि़शा का इलाका भी देखा आज। मैंने पहले कहा, उस प्रकार से भारत सरकार इस संकट के समय पूरी तरह आंध्र सरकार के साथ रहेगी। भारत सरकार के जो कई establishments हैं, उनका भी भारी नुकसान हुआ है। Coast guard हो, Navy हो, Railways, Airlines, National Highways, उन सबके लिए भी भारत सरकार की तरफ से लोग आएंगे, survey करेंगे और उसकी चिंता भी हम करेंगे। 

अभी जितनी जानकारी मुझे मिली है, detailed survey भी हम करेंगे, भारत सरकार की भी team आएगी। किसानों का भी यह फसल का आखिरी समय था। इसलिए बहुत नुकसान उसके कारण किसानों का भी हुआ था। तो Agriculture survey, Property का जो नुकसान हुआ है, उसके लिए, मैं Insurance कंपनियों को भी सूचना करूंगा, वो तत्‍काल अपने लोग लगाएं। और Private Insurance वाले जो लोग हैं, उनके साथ बैठ करके सहानुभूतिपूर्वक उनकी सारी Claims को तुरंत workout करे, उनकी मदद करें। मैं Insurance Companies को भी आग्रहपूर्वक ये विषय बता दूंगा। 

तत्‍काल जो अवस्था हैं, उसमें इतना बड़ा काम है। आंध्र प्रदेश एक तो नया-नया राज्‍य बना है। उसको अभी कई चीजें करनी बांकी है। ऐसे में इतना बड़ा संकट आया है। दूसरी तरफ, अभी 15 दिन पहले तो मैं इतना उत्‍साह और उमंग से उछल रहा था। Vizag को Smart City बनाने का सपना ले कर के। अचानक ये कसौटी आ गई है, लेकिन मुझे विश्‍वास है कि हम इस कसौटी से बाहर निकलेंगे। और बहुत ही जल्‍द सारी व्‍यवस्‍थाएं Normal हो जाएंगी और जो नुकसान हुआ, उसको भी ठीक करने में हम सफल हो जाएंगे। बिजली, पानी, Communication, इन चीजों को हमने प्राथमिकता दी है और कुछ ही घंटों में बहुत ही जल्‍द इन चीजों में सुधार आ जाएगा। 

भारत सरकार के प्रतिनिधियों को मैंने Special इस काम के लिए depute किया है। आंध्र सरकार पूरी तरह लगी हुई है। तो जनसुविधा की जो प्राथमिक आवश्‍यकताएं हैं, वो भी तुरंत चालू कर दी जाएँगीं। अभी पूरा सर्वे होना बांकी है। लेकिन तत्‍काल इतने बड़े संकट को पहुंचने के लिए भारत सरकार की तरफ से एक Interim Assistance के रूप में 1,000 करोड़ रुपए भारत सरकार की तरफ से देने की मैं घोषणा करता हूं। 

तुरंत Survey होने के बाद आगे भी भारत सरकार आंध्र के साथ, Vizag के साथ पूरी तरह साथ रहकर के इन समस्‍याओं से निकलने के लिए जो भी आवश्‍यकता होगी, उसको पूरा करेंगे। जिन लोगों ने अपना जीवन खो दिया है, जिनकी मृत्‍यु हुई है, उन (के निकटतम रिश्‍तेदारों) को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपए और जिनको injury हुई है, उनको 50,000 रुपए भी भारत सरकार के प्रधानमंत्री राहतकोष से हम देंगें। 
धन्‍यवाद। 
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महिमा वशिष्ट / शिशिर चौरसिया, तारा