Saturday, October 11, 2014

प्रधानमंत्री द्वारा ''विराट पुरुष नानाजी'' ग्रंथावली का विमोचन

11-अक्टूबर-2014 21:02 IST
ग्रंथ दीनदयाल अनुसंधान संस्‍थान द्वारा छह अंकों में संकलित
नई दिल्ली: 11 अक्टूबर 2014: (पीआईबी):
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज यहां विराट पुरूष नाना जी देशमुख नामक ग्रंथावली का विमोचन किया यह ग्रंथ दीनदयाल अनुसंधान संस्‍थान द्वारा छह अंकों में संकलित किया गया है, जो नानजी देशमुख की रचनाओं का संकलन है।  

इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने नानाजी देशमुख की शक्ति, अभियान और राष्‍ट्र-निर्माण एवं सामाजिक कल्‍याण के प्रति उनकी वचनबद्धता की सराहना की. उन्‍होंने कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही ''शिशु मंदिर'', जिसकी शुरूआत गोरखपुर में की गई थी, देशभर में शिक्षा का एक विख्‍यात संस्‍थान बना।  उन्‍होंने राजनीतिक सहमति विकसित करने की नानाजी की क्षमता की भी सराहना की।  

प्रधानमंत्री ने श्री देशमुख ने 60 वर्ष की आयु में राजनीति से संन्‍यास लेते हुए अपना समूचा जीवन ग्रामीण विकास के प्रति समर्पित कर दिया था। श्री मोदी ने यह भी याद दिलाया कि देशमुख से प्रेरित होकर अनेक युवाओं ने सामाजिक उत्‍थान के प्रति अपने को समर्पित कर दिया था।  

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि नानाजी ने अनेक प्रसिद्ध उद्योगपतियों को भी समाज के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया था। उन्‍होंने कहा कि नानाजी का विचार था कि ''विज्ञान सार्वभौमिक हो सकता है लेकिन प्रौद्योगिकी अनिवार्य रूप से स्‍थानीय होनी चाहिए। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि ''विराट पुरूष नानाजी'' नामक ग्रंथ भारत की भावी पीढि़यों को राष्‍ट्र निर्माण में योगदान के लिए प्रेरित करेगा।  
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वि. कासोटिया/डीके/एएम-4085

चक्रवाती तूफान 'हुदहुद' : सेना ने निपटने का इंतजाम किया

11-अक्टूबर-2014 19:04 IST
आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट पर भूस्‍खलन होने की आशंका
The Prime Minister, Shri Narendra Modi chairing a emergency high-level meeting to review the preparedness for Cyclone HudHud, in New Delhi on October 11, 2014. (PIB)
नई दिल्ली: 10 अक्टूबर 2014: (पीआईबी/ब्यूरो रिपोर्ट):
यह तस्वीर देशबन्धु से साभार 
संभावित चक्रवाती तूफान 'हुदहुद' के चलते आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट पर भूस्‍खलन होने की आशंका है। इसे ध्यान में रखते हुए सेना ने अपनी कुछ टीमों को निम्‍नलिखित जगहों पर तैनात किया है:- 
() आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और श्री काकुलम में आठ बचाव टीमें और इंजीनियरों के चार कार्यदल 
() गोपालपुर में आठ बचाव टीमें (सड़कों का रास्‍ता साफ करने वाली टीम भी शामिल) 
प्रभावित इलाकों में बहु पक्षीय तयारी कर ली गयी है। इस मकसद के लिए मानवीय सहायता, आपदा राहत, लोगों को बाहर निकालने और चिकित्सकीय सहायता के लिए नौसेना के चार जहाज पूरी तरह से तैयार हैं। इन जहाजों में अतिरिक्त गोताखोर, चिकित्सक, फैलने वाली रबर की नौकाएं, हेलीकॉप्टर और राहत सामग्री जैसे भोजन, टेंट, कपड़े, दवाएं और जैकेट मौजूद हैं। कुल मिलाकर हर ज़रूरत की सामग्री इन राहत दलों के पास है। 
अतिरिक्‍त संसाधनों को आपातकालीन उपयोग के लिए अलग से रखा गया है और जैसे भी हालात पैदा होंगे, उसी के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। हालात पर लगातार करीबी नजर रखी जा रही है। 
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विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/एएम/आरआरएस/आर-4184

प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि दी ''सांसद आदर्श ग्राम योजना'' का शुभारम्भ करके


11-अक्टूबर-2014 10:43 IST
प्रधानमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धांजलि दी 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नई दिल्ली में 11 अक्टूबर, 2014 को ''सांसद आदर्श ग्राम योजना'' के शुभारंभ के मौके पर संबोधित करते हुए।  
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the launch of the “Saansad Adarsh Gram Yojana”, in New Delhi on October 11, 2014.           (फोटो PIB)
नई दिल्ली: 11 अक्टूबर 2014: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण तथा समाज सुधारक नानाजी देशमुख की जयंती पर उन्हें सम्मान पूर्वक याद किया और अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। उन्होंने इस शुभ अवसर पर ''सांसद आदर्श ग्राम योजना'' का शुभारम्भ भी किया। 

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा ‘’लोकनायक जयप्रकाश नारायण एक ऐसे सच्‍चे राष्‍ट्रवादी थे जिन्‍होंने अपना जीवन सेवा और राष्‍ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। जेपी ने ‘सम्‍पूर्ण क्रांति के लिए आह्वान किया जिसने पूरे राष्‍ट्र में उत्‍साह भर दिया और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बनाए रखने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई। स्मरण रहे कि जयप्रकाश नारायण का जन्म 11अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था। जेपी के नाम से सुविख्यात हुए जयप्रकाश नारायण उस समय पूरे देश में क्रांति का रूप बन कर उभरे थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध उन्होंने एक जनमत खड़ा किया। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने गुजरात राज्य का चुनाव जीता। सं 1975 में इंदिरा गांधी ने आपात्काल की घोषणा की जिसके अंतर्गत जेपी सहित कम से कम 600 से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई।  माहौल में उन्हें जनता की ओर से लोकनायक का सम्मान मिला। वह लोकनायक के नाम से जाने जाने लगे। उन्हीं दिनों जेपी लुधियाना भी आये थे जहाँ उन्होंने एक विशाल  सम्बोधित किया। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। जब 1977 में चुनाव  वह एक तरह से जेपी लहर की जीत थे।जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया। एक वृद्ध  दिया था कि इरादे मज़बूत हों तो कमज़ोर तन से भी लड़ाई जीती जा सकती है। 
जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और मधुमेह के कारण हुआ। उनके सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री चरण सिंह ने 7 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी, उनके सम्मान में कई हजार लोग उनकी शोक यात्रा में शामिल हुए। जिन्होंने उन्हें देखा है वे उन्हें आज तक भुला नहीं पाये। 
प्रधानमंत्री ने नानाजी देशमुख की जयंती पर उन्‍हें श्रद्धांजलि दी 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अपने विचारों से पूरी तरह समर्पित रहने वाले नानाजी देशमुख को उनकी भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उनका पूरा नाम था चंडिकादास अमृतराव देशमुख। नानाजी का जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में ब्राह्मण परिवार में 11 अक्टूबर 1976 को हुआ था। नानाजी का लंबा और घटनापूर्ण जीवन बहुत से अभावों और संघर्षों में ही गुज़रा पर इन अभावों से उन्होंने शक्ति ली। उन्होंने छोटी उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया। यह उन पर पहाड़ टूटने जैसा ही था। मामा ने उनका लालन-पालन किया। अभावों का हाल यह था कि उनके पास शुल्क देने और पुस्तकें खरीदने तक के लिये पैसे नहीं थे किन्तु दूसरी तरफ उनके अन्दर शिक्षा और ज्ञान-प्राप्ति की तीव्र अभिलाषा थी। इसी इच्छा को एक जनूँ बनाकर वह आगे बढ़े। अत: इस कार्य के लिये उन्होने सब्जी बेचकर पैसे जुटाये। वे मन्दिरों में रहे और पिलानी के बिरला इंस्टीट्यूट से उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्नीस सौ तीस के दशक में वे आरएसएस में शामिल हो गये। भले ही उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र राजस्थान और उत्तरप्रदेश ही रहा। उनकी श्रद्धा देखकर आर.एस.एस. सरसंघचालक श्री गुरू जी ने उन्हें प्रचारक के रूप में गोरखपुर भेजा। इस क्षेत्र में भी उन्होंने नाम कमाया।  सिद्धांत के मामले में कभी समझौता नहीं किया। सन 1977  में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें मोरारजी-मन्त्रिमण्डल में शामिल किया गया परन्तु उन्होंने यह कहकर कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग सरकार से बाहर रहकर समाज सेवा का कार्य करें, मन्त्री-पद ठुकरा दिया। 

प्रधानमंत्री ने कहा ‘’नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। अपने कौशल और प्रयासों से समाज की सेवा करने वाला उनका संगठन हमारे लिए प्रेरणा का एक स्रोत है। 
***विजयलक्ष्मी कासोटिया/एएम/डीएस/आरके-4170

Thursday, October 09, 2014

इस बार आखिरी मार मारेगा चाईना का बना पटाखा

दशहरा के बाद दीपावली सर पर--लेकिन अभी तक नहीं हो सुरक्षा के मुक़्क़मल इंतज़ाम
लुधियाना:9 अक्टूबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
लुधियाना की पटाखा मार्कीट में अभी तक तेज़ी नहीं आ पायी। इस मार्किट के बहुत से व्यापारी लोग अभी तक आवश्यक प्रबंधों में जुटे हैं। साफ़ दिखाई देता है कि टैक्सों, खर्चों और शर्तों के जंजाल में बंधे ये लोग दिल के उत्साह से काम नहीं कर पा रहे। कहीं पर सुरक्षा के लिए रखी बाल्टियां खाली थीं  और कहीं पर रेत नहीं थी। हमने  इन सभी मुद्दों को लेकर बाज़ार के कुछ पुराने और प्रमुख व्यापारियों से बात भी की। 
जानेमाने पुराने व्यापारी अशोक थापर ने बताया कि टैक्स हर बार बढ़ जाते हैं लेकिन आमदनी हर बार कम होती जा रही है। बताया इस बार मार्कीट 50 फ़ीसदी डाऊन है। इस  बार 76 दुकानें अलाट हुई हैं। टैक्स इस बार भी बढ़ गया है क्यूंकि कुछ प्रमुख कंपनियां हर वर्ष दस प्रतिशत टैक्स बढ़ाती हैं। इंक्रोचमेंट के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि  सब कुछ नियमों के अंतर्गत ही हो रहा है।  सो फुट का फासला रखना नियम है वह हम रख ही  रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जो टैक्स हम सिवाकासी में माल की खरीद के समय ही अदा कर देते हैं वही टैक्स हमसे फिर यहाँ आकर लिया है। उन्होंने मांग की कि यहाँ के नियमित व्यापारियों को स्थाई दुकानें ही दे दी जानी चाहिएं। इसी तरह एक अन्य व्यापारी संजय सिंगला ने कहा कि यहाँ चाईना का कोई पटाखा बिक रहा। कहीं और बिकता हो तो मालूम नहीं। उन्होंने कहा कि चाईना का  पटाखा सस्ता  भले  हो है पर  प्रदूषण  हुआ। स्वास्थ्य लिए बेहद खतरनाक। यह पूछे जाने पर कि  जाने पर जनता को कितना नुकसान होगा--वह बोले  कोई नुक्सान नहीं होगा बल्कि फायदा ही होगा--डेंगू बिलकुल समाप्त हो जायेगा। एक और सवाल के जवाब में उन्होंने  कहा कि असल में मंदी का प्रभाव चाईना के कारण नहीं लगातार बढ़ रही महंगाई कारण है।
इस बार मार्किट में अभी तक किसी भी नेता या अभिनेता की तस्वीर का कोई पटाखा नहीं आया। इसी तरह कोई नयी किस्म की आइटम भी बाज़ार में नहीं दिखी। कोक, जम्बो और सुप्रीम जैसी पुरानी कम्पनियों का माल ही ज़्यादा दिखा।  

Wednesday, October 08, 2014

एक बार इस राह पे मारना सौ जन्मों के सामान है

देख के वीरों की क़ुरबानी अपना दिल भी डोला-मेरा रंग दे बसंती चोला-
आज ही के दिन दिनांक 7 अक्टूबर 1930 को लाहौर कांड का फैसला सुनाया गया था ।
शहीद - ए - आजम भगत सिंह जी,
शहीद सुखदेव जी,
शहीद राजगुरु जी, 
को सांङर्स की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी ।

और 8 साथियों को
1 - बटुकेश्वर दत्त जी
2 - शिव वर्मा जी
3 - जय देव कपूर जी
4 - विजय कुमार सिन्हा जी
5 - शहीद महावीर सिंह जी
6 - गयाप्रसाद जी
7 - किशोरी लाल जी
8 - कवलनाथ तिवारी जी

को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

कुंदनलाल जी को 7 साल का कारावास की सजा
सुनाई गई थी ।

और...

प्रेम दत्त जी को 5 साल का कारावास की सजा सुनाई गई थी ।

बाकी तीन साथियों को सरकारी गवाह बनने पर सजा से मुक्त कर दिया गया था ।

जितेंद्रनाथ सान्याल
अजय घोष
देश राज
 — 

  • Kranti Kumar Katiyar J.n.sanyal,ajoy ghosh,deshraj ko koi sabut na milne par riha kiya gaya.ye teeno sarkari gawah nahi the. Please correct it......@ i am son of dr.gaya prasad ( transporation for life) . Thanks.
    10 hrs · Edited · Like · 4
  • Jagmohan Singh Here are the young revolutionaries who challanged the British imperialism and shaked it to its roots. They were sentenced for waging war against british king.
    10 hrs · Unlike · 4
  • Arpan Sanyal Yes i too agreed with Kranti Kumar Katiyar ji.. plz update the information Admin

स्वतंत्रता संग्राम: असीम शौर्य का परिचय देने वाली वीरांगना दुर्गा भाभी

पति की शहादत के सदमे को भी अदम्य धैर्य एवं हौसले से झेला
भारत देश की महान वीर क्रांतिकारी दुर्गा भाभी जी को उनके 107 वे जन्म दिवस पर कोटि कोटि नमन
जन्म :- 7 अक्टूबर 1907                     
अपने जीवन को समिधा की भांति होम करके स्वाधीनता यज्ञ की पावन अग्नि को सदा प्रज्वलित करने वाली क्रान्तिमूर्ति दुर्गा भाभी जी वास्तव में देश की आज़ादी की नींव के चन्द पत्थरों में से एक है । 
वह आज़ादी के लिए क्रांति के पथ पर चलने वाली प्रथम भारतीय नारी थी ।
उन्होंने शौर्य और जीवटता के साथ क्रान्तिकारी आन्दोलन मे सक्रिय योगदान दिया था ।
धन्य है,... उत्तरप्रदेश के कौशाम्बी जिला के सिराथू तहसील के गाँव शहजादपुर की धरती... जिसने इस महान वीरांगना को जन्म दिया ।
शहीद भगत सिंह जी, शहीद सुखदेव जी, शहीद चन्द्र शेखर आजाद जी आदि प्रखर क्रांतिकारियों की अनन्य साथी दुर्गा देवी बोहरा जी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 को शाहज़ादपुर में हुआ था ।
उनके पिता बांके बिहारी भट्ट जी इलाहाबाद कलेक्ट्रेट में नाज़िर थे ।
जब वह केवल 10 माह की थी... तभी उनकी माता यमुना की मृत्यु हो गयी थी... पिता ने दूसरा विवाह कर लिया था... सौतेली माँ ने प्रताड़ित करके कर तीसरी कक्षा में ही उनकी पढ़ाई छुड़ा दी थी... पिता को भी वैराग्य की धुन लग गयी थी ।
बुआ जी की सख्त संरक्षकता में शहजादपुर और गंगा नदी के किनारे करेहटी की कुटी में उनका बचपन बीता था ।
महज 11 वर्ष की अल्पायु में ही सन 1917-18 में शहीद भगवती शरण बोहरा जी से उनका विवाह हो गया था ।
वह प्रखर देशभक्त थे, उनके साथ ने दुर्गा देवी जी के मन में भी राष्ट्रप्रेम और देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करने की अलख जगा दी थी... हालाँकि उनके ससुर अंग्रेज परस्त थे... जब उन्हें ब्रिटिश हूकुमत रायबहादुर का ख़िताब से विभूषित करने जा रही थी... तब इसके विरोध में शहीद भगवती चरण जी और दुर्गा देवी जी ने उनका घर त्याग दिया... फिर दुर्गा देवी जी ने पति की प्रेरणा से अपनी अधूरी पढाई पूरी की और नेशनल कॉलेज लाहौर से प्रभाकर की उपाधि ली थी ।
ससुर की मौत के बाद अंग्रेज सरकार द्वारा प्रताड़ित करने पर दुर्गा देवी जी अपने पति सहित 17 अगस्त 1920 को शहजादपुर आ गयी थी ।
2 माह तक वह दोनों यहाँ चोरी छिपे क्रांतिकारियों की मदद करते रहे ।
अपार धन दौलत, ऐश्वर्य और सुखों को त्याग कर क्रांति के कंटक से भरे मार्ग पर चलना कठिन तपस्या की भांति था ।
दुर्गा देवी जी को ससुर जी से 40 हज़ार रूपये मिले थे... हालाँकि पिता उनकी क्रांति पथ के पघधर नहीं थे... फिर भी उन्होंने दुर्गा के लिए 5 हज़ार रूपये श्री बटुक नाथ अग्रवाल जी के पास रखवा दिए थे... बाद में यह सम्पूर्ण राशि क्रान्तिकारी गतिविधियों के संचालन में काफी काम आयी थी ।
दुर्गा भाभी जी ने अपने पति शहीद भगवती चरण बोहरा जी के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ सशस्त्र क्रान्तिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया।
उन्होंने शहीद भगत सिंह जी , शहीद सुखदेव जी, शहीद राजगुरु जी, शहीद चंद्रशेखर आजाद जी और यशपाल जी के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी ।
सभी क्रान्तिकारी साथी उन्हें आदर से ''भाभी'' कहते थे ।
उनके पति शहीद भगवती चरण जी ने शहीद भगत सिंह जी के साथ मिलकर क्रान्तिकारी दल हिन्दुस्तानी रिपब्लिक आर्मी का गठन किया था।  
लाहौर में रावी के तट के किनारे बम विस्फोट में पति भगवती चरण बोहरा जी की शहादत के सदमे को भी उन्होंने अदम्य धैर्य एवं हौसले से झेला था और अपने वैधव्य के दर्द को भुला कर अपना जीवन दल और देश के लिए समर्पित कर दिया था । 
क्रान्तिकारी दल द्वारा अंग्रेज पुलिस कप्तान सांडर्स के वध उपरांत शहीद भगत सिंह जी और उनके साथियों को पुलिस लाहौर के चप्पे चप्पे में शिकारी कुत्तों की तरह तलाश कर रही थी... तब दुर्गा भाभी ने अफसर के वेशधारी शहीद भगत सिंह जी की पत्नी बनकर मेम साहब के रूप धारण कर के अपने छोटे से बच्चे शची का जीवन भी खतरे में डालकर उन्हें ट्रेन से लाहौर से कलकत्ता पहुँचाने में असीम शौर्य का परिचय दिया था ।
उनका दूसरा खास काम लैमिग्टन रोड गोलीकांड को अंजाम देना था ।
9 अक्टूबर 1930 को उन्होंने बम्बई के गवर्नर हैली को मौत के घाट उतरने के लिए उसी बंगले में धुसकर गोलिया चलायी थी... पर दुर्भाग्य से हैली तो बच गया... परन्तु एक अग्रेज अफसर और महिला को गोली लगी थी ।
सन 1931 में भगत सिंह जी, राजगुरु जी और सुखदेव जी फांसी पर चढकर शहीद हो गए । चंद्रशेखर आजाद जी सहित सभी प्रमुख क्रान्तिकारी शहीद हो गए थे अथवा पकड़ जा चुके थे ।
क्रान्तिकारी दल छिन्नं भिन्न हो गया था ।
गहन हताशा का दौर था... फिर भी दुर्गा भाभी क्रान्तिकारी बुलंद हौसले के साथ आन्दोलन को आगे बढ़ने में जुटी रही ।
अंततः वह भी पकड़ी गयी और जेल गयी ।
जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक दिल्ली में कांग्रेस के साथ काम किया... फिर उन्होंने सन 1939 में लखनऊ के पुराना किला इलाके में एक मांटेसरी स्कूल की स्थापना की और इसके बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन बच्चो की शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया... बाद में उन्होंने यही पर क्रान्तिकारी शिव वर्मा जी के साथ मिलकर शहीद स्मारक और स्वतंत्रता संग्राम शोध संस्थान की स्थापना की थी और बाद में अपनी पूरी सम्पति संस्थान को समर्पित करके उनके इकलौते बेटे शची के पास गाज़ियाबाद चली गयी थी ।
वही पर 14 अक्टूबर 1999 को दुर्गा भाभी जी ने दुनिया को अलविदा कर दिया था ।
दुर्गा भाभी जी का शादी के बाद शहजादपुर आना जाना लगा रहता था ।
वह सन 1942 में पिता की मृत्यु के बाद यहाँ आई थी... फिर उनका शहजादपुर आना संभव न हो सका ।
इस लेख को लिखने वाले लेखक ने बताया है की "मेरे आदरणीय बुजुर्ग शुभ चिंतक श्री हेतसिंह जी के भीतर 80 वर्ष की आयु में आज भी राष्ट्रप्रेम का वही अनूठा जज्बा है... जो स्वाधीनता के पूर्व युवावस्था में था ।"
देशभक्तों और क्रांतिकारियों की उपेक्षा से उनका मन बहुत व्यथित रहता है ।
वह स्वयं गत 1 अप्रैल 2014 को शहजादपुर गए थे और दुर्गा भाभी के चचेरे भतीजे श्री उदय शंकर भट्ट से मिले थे ।
उदय जी ने उन्हें यह बताया कि उनके पूर्वज करीब 350 वर्ष पूर्व गुजरात से यहाँ आकर बस गए थे ।
कालांतर में यहाँ उनके पूर्वजो की जमींदारी कायम हो गयी थी ।
दुर्गा भाभी जी और भगवती चरण जी के क्रान्तिकारी हो जाने से अंग्रेजो ने उनके परिवार की सारी संपत्ति कुर्क कर हडप ली थी... पर उन्हें अपने परिवार के इस महान वीरांगना पर गर्व है ।
स्वाधीनता उपरांत महान क्रान्तिकारी दुर्गा भाभी जी ने देश के लिए अपनी महान सेवाओं के लिए कोई प्रतिफल नहीं चाहा था ।
उनसे कम उपलब्धि हासिल करने वाली एक महिला क्रान्तिकारी सरकार ने भारत रत्न से नवाजा... जबकि दुर्गा भाभी जी पूर्णता गुमनामी के अँधेरे में खोयी रही ।
यह विडम्बना है कि अपनी ही सरजमीं पर भी दुर्गा भाभी जी आज तक यथोचित सम्मान से वंचित है ।
राजनेताओं द्वारा अनेक बार घोषणायें करने के बावजूद शाहजादपुर में दुर्गा भाभी का आज तक कोई राष्ट्रीय स्मारक नहीं बन सका है ।
शहजादपुर में जिस ऐतिहासिक घर में दुर्गा भाभी का जन्म हुआ था... उसकी पावंन भूमि हर देश भक्त के लिए एक तीर्थ की भांति नमन किये जाने योग्य पवित्र स्थल है... पर आज भी वह मकान जीर्णशीर्ण हालत में पड़ा हुआ है ।
दुर्गा भाभी जी के नाम का सहारा लेकर राजनीति की वैतरणी पार करने वाले नेताओ द्वारा उनकी कोई सुध न लिया बेहद शर्मनाक है ।
आज यह स्थिति शहजादपुर की ही नहीं वरन पूरे देश की है ।
क्रांतिकारियों और स्वाधीनता संग्राम सेनानियों से जुड़े अधिकांश ऐतिहासिक स्थल उपेक्षा के शिकार हो रहे है... उनका अस्तित्व ही मिटने की कगार पर है ।
आगामी पीढ़ियों के लिए देश की आज़ादी के इतिहास की इस बेशकीमती विरासत को संजोने की किसी को कोई फिक्र नहीं है ।
निसंदेह स्वाधीनता के उपरांत हम आर्थिक और भौतिक रूप से विकास की बुलंदियों तक पहुँच रहे है... पर यह भी कटुसत्य है कि... स्वाधीन भारत के वाशिंदों ने अपनी नीवं के उन पत्थरों को भुला दिया है... जिन पर तरक्की की यह बुलंद इमारते खड़ी है ।
" जिनकी लाशो पर चलकर यह आज़ादी आई है उनकी याद बहुत ही गहरी लोगो ने दफनाई है । ''
लेखक:अनिल वर्मा जी             Shared from  
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Tuesday, October 07, 2014

बेगम अख्‍तर के जन्‍म सदी समारोह शुरू

07-अक्टूबर-2014 14:52 IST
जानी-मानी शास्‍त्रीय गायि‍का की स्मृति में स्‍मारक सि‍क्‍के जारी


नई दिल्ली: 7 अक्टूबर 2014: (पीआईबी):

आज से बेगम अख्‍तर के जन्‍म सदी समारोह शुरू हो गए हैं। नई दि‍ल्‍ली में आयोजि‍त एक शानदार समारोह में केन्‍द्रीय संस्‍कृति‍ मंत्री श्रीयुत श्रीपद नाइक ने 100 रुपए और 5 रुपए के स्‍मारक सि‍क्‍के जारी कि‍ए। इस मौके पर दादरा गायि‍का डॉ. रीता गांगुली और ठुमरी गायक श्री शशांक शेखर तथा गज़ल गायि‍का श्रीमती प्रभाती मुखर्जी ने प्रभावशाली कार्यक्रम पेश कि‍ए। 
अख्‍तर बाई फैजाबादी को आम तौर पर बेगम अख्‍तर नाम से जाना जाता है। (अक्‍तूबर 07, 1914 – अक्‍तूबर 30, 1974) वह गज़ल, दादरा और ठुमरी गायि‍का थीं। उन्‍हें गायि‍का के रूप में संगीत नाटक अकादमी पुरस्‍कार प्रदान कि‍ए गए और मरणोपरांत भारत सरकार ने उन्‍हें पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्‍मानि‍त कि‍या। उन्‍हें मल्‍लि‍का-ए-गज़ल का खि‍ताब भी प्रदान कि‍या गया। इस प्रति‍भाशाली गायि‍का के 100 वर्ष की होने पर भारत सरकार ने इस मौके को यादगार बनाने का फैसला कि‍या। इस उद्देश्‍य से एक राष्‍ट्रीय समि‍ति‍ गठि‍त की गई है जि‍सके अध्‍यक्ष केन्‍द्रीय संस्‍कृति‍ मंत्री हैं। यह समि‍ति‍ वर्ष भर मनाए जाने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करेगी। 
बेगम अख्‍तर के सम्‍मान में दि‍ल्‍ली, लखनऊ, हैदराबाद, भोपाल और कोलकाता में कार्यक्रम आयोजि‍त कि‍ए जाएंगे। उनकी कृति‍यों के वेब-पोर्टल, डीज़ि‍टाइज़ेशन/ डॉक्‍यूमेंटेशन इत्‍यादि‍ तैयार कि‍ए जाएंगे और प्रदर्शनि‍यां, प्रकाशन, वि‍चार गोष्‍ठि‍यों का आयोजन कि‍या जाएगा तथा युवा कलाकारों को छात्रवृत्‍त‍ियां‍ दी जाएंगी। (PIB)

विजयलक्ष्‍मी कासोटिया/ एएम/आरएसएस/एम- 4085

BEGUM AKHTAR (the complete documentary)