Saturday, May 04, 2013

स्‍पीक मैके-

01-मई-2013 20:55 IST
पारंपरि‍क भारतीय शास्‍त्रीय संगीत और संस्‍कृति के उत्‍थान का महत्‍वपूर्ण अंतरराष्‍ट्रीय मंच
विशेष लेख                                                               किरण सेठ*
                                                                                                                 Courtesy Photo
‘’ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी), खड़गपुर में अध्‍ययन के बाद मैं पीएचडी करने के लिए न्‍यूयार्क के कोलम्बिया विश्‍वविद्यालय गया था। उन्‍हीं दिनों, ब्रुकलिन अकादमी ऑफ म्‍युजिक, न्‍यूयार्क में मुझे ध्रुपद गायन सुनने का मौका मिला। उस गायन ने जैसे मेरे मन के तारों को झंकृत कर दिया। गायक कलाकार थे - उस्‍ताद नसीर अमीयुद्दीन डागर और उस्‍ताद फरीदूद्दीन डागर। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी संस्‍कृति से कितना दूर हूं’’ यह कथन है किरण सेठ का जो हमारे देश के अधिकतर युवाओं की भी कहानी है। प्रतिस्‍पर्धा के इस युग में हमारा युवा वर्ग कई मायनों में वंचित रह जाता है।
‘’वर्ष 1976 में देश लौटकर मैंने दिल्‍ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान (आईआईटी) में अध्‍यापन शुरू किया। युवाओं को अपनी संस्‍कृति से जोड़ने के लिए मैं दिलो-जान से जुट गया। अगले ही साल मैंने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया।‘’
पिछले 35 वर्षों के दौरान कई लोग साथ जुड़ते चले गए और आज स्पिक मैके भारत के 400 शहरों और 50 विदेशी शहरों में कार्यक्रमों का आयोजन कर चुका है। पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से भारतीय प्रबंधन संस्‍थान कोलकाता में आगामी 20 मई -26 मई, 2013 के बीच पहले अंतरराष्‍ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसका उदघाटन राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी करेंगे।
इस सम्मेलन के दौरान श्रीमती गिरिजा देवी, प्रोफेसर टी.एन. कृष्‍णन, पंडित बिरजू महाराज, विद्वान टी.वी.शंकरनारायणन, पंडित शिव कुमार शर्मा, श्रीमती अंजलि इला मेनन, पांडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के साथ कई और जाने माने कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यही नहीं इस सम्‍मेलन के दौरान देश भर से आए स्‍कूलों और कॉलेजों के 1500 विद्यार्थी भारत की प्राचीन आश्रम प्रथा से रूबरू होंगे।
नादभेद नामक कार्यक्रम के माध्‍यम से अखिल भारतीय स्‍तर पर एक शास्‍त्रीय संगीत प्रतिस्‍पर्धा का आयोजन किये जाने की भी योजना है। यह आयोजन स्पिक मैके और दूरदर्शन के संयुक्त तत्वाधान में होगा। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित एक गौरवशाली रियलिटी शो होगा जिसमें कर्नाटक संगीत और हिन्दुस्तानी शैली के गायन और वाद्य यंत्रों की सुंदर प्रस्तुति होगी। इसका एकमात्र उद्देश्य युवाओं में हमारी समृद्ध संगीत परंपरा का प्रचार-प्रसार करना है।
इस कार्यक्रम के दौरान 6 श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। पंडित भीमसेन जोशी युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी संगीत), पंडित रविशंकर युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी वाद्य), उस्‍ताद अल्‍ला रक्‍खा युवा पुरस्‍कार (हिंदुस्‍तानी उपवादक), श्रीमती एम एस सुब्‍बुलक्ष्‍मी युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक गायन), विदवान शेख चिन्‍ना मौलाना युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक वाद्य), विदवान पालघाट मणिअय्यर युवा पुरस्‍कार (कर्नाटिक उपवादक)। प्रत्‍येक श्रेणी के अंतर्गत्‍विजेता को 5 लाख रूपये का नकद पुरस्‍कार प्रदान किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर फाइनल में आने वाले कलाकारों के अलावा प्रोत्‍साहन के तौर पर 10 हजार रूपये का पुरस्‍कार भी प्रदान किया जाएगा।
भारतीय संगीत कला और संस्‍कृति की धारा हमारे देश के साथ-साथ पूरे विश्‍व को समृद्ध कर रही है। हमारे युवा वर्ग को भी स्पिक मैके के बदौलत अपनी संस्‍कृति के साथ परिचित होने का एक बेहतरीन मंच मिला है।

*लेखक को कला क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा ‘पदम श्री’ पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया है।
वि.कासोटिया/संजीव/रत्‍नावली/रीता/चित्रदेव/मलिक/श्‍याम - 88

Thursday, May 02, 2013

सरबजीत सिंह के सम्‍मान में रात्रिभोज रद्द

02-मई-2013 15:12 IST
 सूचना और प्रसारण मंत्री ने रद्द किया राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार विजेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज  
श्री सरबजीत सिंह की दुखद और दर्दनाक मृत्‍यु पर पूरे राष्‍ट्र के दुख को देखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री श्री मनीष तिवारी ने उस दिवंगत आत्‍मा को सम्‍मान देने हेतु राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार विजेताओं के लिए आज आयोजित रात्रिभोज को रद्द करने का निर्णय लिया है। 
उन्‍होंने कहा कि 'पाकिस्‍तान की हिरासत में श्री सरबजीत सिंह की दुर्भाग्‍यपूर्ण मौत ने सभी भारतीयों की भावनाओं को आहत किया है। देश, दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ है।' (PIB)मीणा/प्रियंका -2159

पूरा देश सरबजीत सिंह के परिवार के साथ

02-मई-2013 11:57 IST
सरबजीत सिंह के निधन पर प्रधानमंत्री ने किया दु:ख प्रकट 
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सरबजीत सिंह के निधन पर गहरा दुःख व्‍यक्‍त किया है। अपने बयान में उन्‍होंने कहा है कि सरबजीत सिंह भारत का एक बहादुर बेटा था, जिसने बड़ी बहादुरी और हिम्‍मत के साथ कष्‍टों को सहा। जिन अपराधियों ने उस पर क्रूरतापूर्ण और कातिलाना हमला किया है, उन्‍हें सज़ा दी जानी चाहिए। यह बात विशेष रूप से खेद-जनक है कि पाकिस्‍तान की सरकार ने भारत सरकार, सरबजीत सिंह के परिवार और भारत तथा पाकिस्‍तान के सभ्‍य समाज के लोगों की इस बारे में किसी दलील पर ध्‍यान नहीं दिया कि सरबजीत के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। अपने बयान में डॉ. सिंह ने कहा है कि परमात्‍मा उसकी आत्‍मा को शांति प्रदान करे, जो उसे जीवन भर नहीं मिल सकी। सरकार सरबजीत सिंह के पार्थिव शरीर को भारत लाने का प्रबंध करेगी और उसके परिवार के साथ सलाह-मशविरे के बाद उसके अंतिम संस्‍कार की व्‍यवस्‍था की जाएगी। इस दुःख की घड़ी में पूरा देश सरबजीत सिंह के परिवार के साथ है। (PIB)
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मीणा/राजगोपाल/लक्ष्‍मी-2149            
पूरा देश सरबजीत सिंह के परिवार के साथ

Tuesday, April 30, 2013

अन्तरराष्ट्रीय मकादूर दिवस

क्रान्तिकारी विरासत से सबक लेकर आगे का रास्ता गढऩा ही मई दिवस मनाने का एक सही तरीका
लुधियाना के पुडा मैदान में मई दिवस सम्मेलन 
सभी मकादूरों-मेहनतकशों-नौजवानों से सम्मेलन में शामिल होने के लिए पुरजोर अपील
लुधियाना।30 अप्रेल 2013: दुनियाभर के मकादूरों-मेहनतकशों को हर तरह के शोषण के खिलाफ एकजुट लड़ाई छेडऩे का आह्वान करने वाला अन्तरराष्ट्रीय मकादूर दिवस कल पूरे विश्व में मनाया जाएगा।  128वें अन्तरराष्ट्रीय मकादूर दिवस के अवसर, कल सुबह 10 बजे कारखाना मकादूर यूनियन, पंजाब व टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब द्वारा लुधियाना के चण्डीगढ़ सडक़ पर पुडा (गलाडा) मैदान में मई दिवस सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। टेक्सटाइल हौजरी कामगर यूनियन के अध्यक्ष साथी राजविन्दर ने बताया कि मई दिवस सम्मेलन में बड़ी संख्या में मकादूर-मेहनतकश-नौजवान शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि मई दिवस सम्मेलन का आयोजन कोई अनुष्ठान को तौर पर नहीं किया जा रहा बल्कि इसके पीछे उनका एक अहम मकसद है। आज मेहनत करने वाले लोगों का चारों ओर से भयंकर रूप से शोषण-उत्पीडऩ हो रहा है। इसके खिलाफ जनता का कोई बड़ा इमानदार आन्दोलन नहीं है। ऐसे समय में अपनी क्रान्तिकारी विरासत को याद करना, उससे पे्ररणा व सबक लेकर मौजूदा हालातों को बदलने के लिए आगे का रास्ता गढऩा ही मई दिवस मनाने का एक सही तरीका हो सकता है। उन्होंने कहा कि मई दिवस सम्मेलन इसी रूप में मनाया जाएगा।
मई दिवस सम्मेलन में मकादूर संगठनों के नेतृत्वकारी साथी मई दिवस आन्दोलन के इतिहास और इस आन्दोलन की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर बात रखेंगे। सम्मेलन में देश व विश्व के आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक हालातों पर बात की जाएगी। आज जब सारी व्यवस्था सिर से पैर तक सड़ चुकी है उस समय शोषितों-उत्पीडि़तों को आज कौन सा रास्ता चुनना होगा इस पर वक्ता अपनी बात रखेंगे।
साथी राजविन्दर ने बताया कि मई दिवस पर वोट-बटोरू पार्टियों से जुड़े बहुत से संगठन लड़कियाँ नचवा कर तथा फूहड़ किस्म के गायकों के जरिए भीड़ जुटा कर मई दिवस ''मनाने का ढोंग रचते हैं तथा मई दिवस की गरिमा को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि मई दिवस सम्मेलन इसका विरोध करते  हुए मई दिवस की क्रान्तिकारी परम्पराओं को आगे बढ़ाएगा। सम्मेलन में क्रान्तिकारी-प्रगतिशील नाटकों-गीतों का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में जनता को परोसी जा रही गन्दी, भौंडी, उपभोक्तावादी संस्कृति का विकल्प पेश किया जाना बेहद जरूरी है।
कारखाना मकादूर यूनियन व टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन ने सभी परिवर्तनकामी मकादूरों-मेहनतककशों-नौजवानों को मई दिवस सम्मेलन में बढ़-चढक़र शामिल होने की अपील की है।
लखविन्दर,
अध्यक्ष, कारखाना मकादूर यूनियन, पंजाब।
फोन नं.- 9646150249


Monday, April 29, 2013

अक्षय ऊर्जा शॉप का गठन

29-अप्रैल-2013 20:04 IST
सभी जिलों में अक्षय ऊर्जा शॉप्‍स के गठन की योजना 
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री डॉ. फारूक अब्‍दुल्‍ला ने आज राज्‍य सभा में बताया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एम एन आर र्इ) देश के सभी जिलों में अक्षय ऊर्जा शॉप्‍स के गठन की योजना पर कार्य कर रहा है। अब तक 341 अक्षय ऊर्जा शॉप्‍स के लिए सहायता दी गई है।नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय शॉप्‍स चलाने के लिए दो वर्षों की अवधि के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करता है जो अनुदान और प्रोत्‍साहन के तौर पर दी जाती है। 
वित्‍तीय सहायता की कुल राशि प्रति शॉप 2.40 लाख तक सीमित की गई है। (PIB)

वि.कासोटिया/यादराम/पवन-2097

मेरा भगवान रथ पर नहीं

टूटी हुई साइकिल पर सवार है 
Himanshu Kumar हिमांशु कुमार लगातार आम जनमानस की बात करने में लगे हिमांशु कुमार की एक नई कविता सामने आई है फेसबुक पर। इस रचना  ज्यों का त्यों दिया जा रहा है। इस रचना को पढने के बाद आपके मन में में जो भी आए आप अवश्य लिखें। आपके विचारीं की इंतज़ार बनी रहेगी। -रेक्टर कथूरिया
Courtesy Photo
मेरा भगवान जूतों से पीटा जाता हैं
और उसकी पत्नी जो देवी है
उसे टट्टी खिलाई जाती है
और गाँव के बाहर पेड़ से बाँध कर उसके बाल काटते हैं बड़ी जाति के पुरुष
क्योंकि वो मानते हैं कि वो असल में एक डायन है

एक दूसरी देवी की बेटी की योनी में पत्थर भरता है तुम्हारा एक देवता

मेरे भगवान की पैंट फटी हुई है
मेरे भगवान के पाँव गंदे हैं
मेरे भगवान से पसीने की तेज गंध आती है
मेरा भगवान रथ पर नहीं
टूटी हुई साइकिल पर सवार है

मेरे भगवान के पिछवाड़े में
ईंट भट्टे का मालिक डंडा घुसेड़ देता है
क्योंकि मेरा भगवान पूरी मजदूरी
मांग रहा था

मेरी देवी के साथ
पूरा थाना
महीना भर
बलात्कार करता है
अब मेरी यह देवी
अपना पेट पालने के लिये चाय की दूकान पर बर्तन मांजती है

आप मुझे नास्तिक समझ रहे थे ?

नहीं जनाब
मेरा भगवान बस आपके
सोने के जेवरों से सजे हुए
लेट कर अपनी पत्नी से पैर दबवाते हुए
भगवान से अलग तरह का है

आपको मेरी इस भाषा से बेचैनी क्यों हो रही है
बस मेरी भाषा थोड़ी वास्तविक सी ही तो है .

मई महीने के रंगीन त्यौहार

फूलों, रंगों और संगीत के कई त्यौहार
                                                                 फ़ोटोः रिया नोवस्ती
मई महीने के पहले दशक में रूसी शहरों में रंगों और संगीत के कई त्यौहार मनाए जाएँगे। आजकल रूस के निवासी रंगों के भारतीय त्यौहार, होली को भी बड़े उत्साह से मनाते हैं। रूस के विभिन्न नगरों में होली के त्यौहार को मनाने का सिलसिला मार्च माह के अंत में ही शुरू हो गया था जो अप्रैल माह से गुज़रता हुआ मई माह में पहुँच जाएगा। आम तौर पर रूस में मई महीने का पहला दशक फूलों, रंगों और संगीत के कई त्यौहारों के रूप में मनाया जाता है। एक मई को श्रम दिवस और नौ मई को विजय दिवस मनाया जाएगा। इसके अलावा साबुन के बुलबुलों का त्यौहार और अंतर्राष्ट्रीय संगीत त्यौहार भी मनाए जाएंगे और रूसी हस्तशिल्प कला के एक प्रदर्शनी-मेले का आयोजन भी किया जाएगा। इस प्रकार, मई महीने के पहले दशक के दौरान रूस के नगरों, कस्बों और गाँवों का माहौल रंगों, फूलों और संगीत से भरपूर रहेगा।

इस साल, 5 मई को मास्को में रंगों का भारतीय त्यौहार, होली फिरसे मनाया जाएगा। हज़ारों की संख्या में लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल डालेंगे। दुनिया का सबसे रंगीन त्यौहार है यह! मास्को में यह उत्सव पूरा दिन जारी रहेगा।

रूस की राजधानी में ही एक अन्य उज्ज्वल और ख़ुशियों-भरा त्यौहार मनाया जाएगा। देश भर से रूसी कारीगरों की हस्तशिल्प कला की एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी-मेले में विचित्र खिलौनों से लेकर घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक, कई प्रकार की अद्भुत शिल्प कला-कृतियाँ न केवल देखी जा सकेंगी बल्कि, अगर कोई चाहे तो इन्हें ख़रीद भी सकेगा। इसके अलावा, आप "कारीगरों की नगरी" में जाकर कुछ ही घंटों में इन कला-कृतियों को बनाने के गुर सीख सकेंगे। इस प्रदर्शनी-मेले के दौरान संगीत कार्यक्रमों, राष्ट्रीय वेशभूषा की प्रदर्शनियों और लोक-नृत्यों के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, आगुन्तकों को रूसी व्यंजनों का ज़ायका लेने का भी अवसर मिलेगा।

इन सभी त्यौहारों के दौरान आकाश में रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़े जाने की परंपरा है। यह एक बहुत ही सुन्दर नज़ारा होता है। गुब्बारे आसमान में उड़ते-उड़ते पता नहीं कहाँ अलोप हो जाते हैं। इस वर्ष रूस के दूसरे सबसे बड़े नगर सेंट-पीटर्सबर्ग में साबुन के बुलबुले आकाश में छोड़ने का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन रूस की उत्तरी राजधानी "साबुन के बुलबुलों की नगरी" में बदल जाएगी। इस के केंद्रीय पार्क में इस त्यौहार का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस त्यौहार में हिस्सा लेने की सभी लोगों को अनुमति दी जाएगी। सिर्फ़ एक ही अनिवार्य शर्त होगीः इसके भागीदारों को उज्ज्वल कपड़े या यहाँ तक कि कार्निवाल की पोशाकें पहननी होंगी और उनके हाथों में साबुन के पानी से भरा एक मर्तबान होना चाहिए। इस समारोह का प्रत्येक प्रतिभागी अपने सपने बुन सकता है। उसके मन में कोई उदासी सेंध नहीं लगा सकेगी और उसकी सभी समस्याएँ ऐसे ही ग़ायब हो जाएंगी जैसे साबुन के पानी का बुलबुला फट जाता है।

पूरे रूस में चटख-चमकीले रंगों का माहौल है। चारों तरफ़ रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। वातावरण फूलों की सुगंधियों से तरो-ताज़ा है। और ऐसे माहौल में संगीत, मधुर संगीत के बिना मानो किसी रंग की कमी महसूस की जा रही है। संगीत के कार्यक्रमों की कमी। संगीत के बिना कोई त्यौहार कैसे मनाया जा सकता है? तो लीजिए, यह कमी भी पूरी हो गई! रूस के एक सबसे पुराने नगर यरोस्लावल में पाँचवीं बार अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस शहर और इसके आसपास के नगरों में कुछ दिनों तक विभिन्न देशों से आए आर्केस्ट्राओं और संगीत-मंडलियों द्वारा शास्त्रीय संगीत लगातार पेश किया जाएगा। यदि मनुष्य के जीवन में चटख-चमकीले रंगों, फूलों की खुशबू और मधुर संगीत का बोलबाला हो तो उसके लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है?  (
रेडिओ  रूस)

कब आएंगे परग्रहवासी?

रूसी समाजविज्ञानियों ने पता लगाने के लिए किया एक जनमत अध्ययन 
क्या मानव ब्रहमांड में अकेला है ?
                                                                                    © फ़ोटो: SXC.hu
विश्लेषण से मालूम हुआ कि लगभग एक चौथाई रूसी लोगों को यह उम्मीद है कि परग्रहवासी हमारी पृथ्वी पर आएंगे|
आधे से अधिक रूसियों को परग्रहवासी जैसी बातों में कोई विश्वास नहीं है| किंतु लगभग 40% लोगों का यह मानना है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताएं अस्तित्वमान हैं| आश्चर्य की बात यह है कि ऐसा मानने वालों में उच्च शिक्षा प्राप्त और अच्छी आमदनी वाले पुरुष ही अधिक हैं|
लगभग एक चौथाई रूसियों को विश्वास है कि अगले पचास वर्ष के अंदर-अंदर पृथ्वीवासियों का पृथ्वी-इतर सभ्यताओं से संपर्क स्थापित हो जाएगा| इसके साथ ही वे यह भी मानते हैं कि इस भेंट का स्थान पृथ्वी भी हो सकती है यानी ये इतर-सभ्यताओं वाले पृथ्वी पर अवतरित हो सकते हैं| या फिर ऐसा भी हो सकता है कि अंतरिक्ष का अध्ययन कर रहे पृथ्वी के अंतरिक्षनाविकों की अंतरिक्ष में उनसे कहीं भेंट हो जाए|
रूसी लोगों को सबसे अधिक विश्वास इस बात पर है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताओं से भेंट धरतीवासियों के लिए हितकर होगी| अनेक लोगों ने यह मत व्यक्त किया कि दूसरे ग्रहों के निवासी हमसे अधिक बुद्धिमान, उदार और ईमानदार हैं और वे पृथ्वीवासियों को अपने ये सद्-गुण प्रदान करेंगे| लेकिन साथ ही कुछ लोगों को यह आशंका भी है कि पृथ्वी-इतर सभ्यताएं हमें भारी क्षति पहुंचा सकती हैं| उन्हें डर है कि ये सभ्यताएं मानव पर प्रयोग करेंगी या फिर पृथ्वी पर कब्ज़ा ही कर लेंगी|
लगभग एक चौथाई लोग यह मानते हैं कि परग्रहवासी पृथ्वी पर आए थे और उन्होंने पृथ्वीवासियों से संपर्क भी स्थापित कर लिए थे| इनमें से अधिकाँश लोगों का यही मानना है कि यह संपर्क पृथ्वीवासियों के लिए हितकर रहा|
एक और दिलचस्प बात यह है कि आधे से अधिक लोग यह मानते हैं कि देश के नेताओं को पृथ्वी-इतर सभ्यताओं के बारे में कहीं अधिक जानकारी है किंतु वे किन्हीं कारणों से आम लोगों तक यह जानकारी नहीं पहुँचने दे रहे| (रेडिओ रूस)