Thursday, June 09, 2011

नहीं रहे कैनवस और रंगों के जादूगर एम एफ हुसैन

उन सभी लोगों  के लिए एक बुरी खबर है जो खूबसूरती के दीवाने तो होते ही हैं पर साथ ही इसकी की प्रशंसा खुल कर करने का अलीका भी जानते हैं।दुनिया के जानेमाने चित्रकार एम एफ हुसैन अर्थात  मकबूल फिदा हुसैन का लंदन में देहांत हो गया है। वो पिछले एक महीने से बीमार चल रहे थे। उन्हें तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मीडिया को उनके देहांत की खबर उनके परिवार वालों ने दी है। इन ख़बरों के मुताबिक हुसैन ने लंदन के अस्पताल में गुरूवार को तड़के ढाई बजे आखिरी सांस ली। वह 95 साल के थे लेकिन इस उम्र में भी जोशीली जवानी के रंगीन जज़्बात उनकी बातों से कुछ और रंगीन हो जाते उनकी मृत्यु पर बॉलीवुड में  गहरे दुःख और शोक की एक लहर दौड़ गयी है। देवी मां की कुछ विवादित तस्वीरें बना कर वह सखत रोष का निशाना भी बने और आखिरकार साल 2006 में वे भारत से चले गए थे गौरतलब है कि इन्हीं विवादित तस्वीरों को लेकर उन्हें कुछ हिंदुवादी संगठनों की ओर से धमकीयां भी मिली थी। उन पर भारत कि कई अदालतों में मुकदमे भी दर्ज हैं। उन्हें डर था कि अगर वो भारत में रहे तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। आपको याद होगा कि हुसैन बहुत ही रंगीन मिजाज़ भी थे उनका जन्म 17 सितंबर 1915 में महाराष्ट्र के पंढरपुर में हुआ था। बचपन से ही कैनवस और रंगों के शौक़ीन  एम एफ हुसैन को सबसे पहले ख्याति मिली थी सन 1940 में। उनकी पहली प्रदर्शनी 1952 में ज़्युरिक में हुई। इसके बाद उनकी कलाकृतियों की अनेक प्रदर्शनियां यूरोप और अमेरिका में हुईं। पिछले दिनों उनकी बनायी पेंटिग 2.30 करोड़ में बिकी थी। 
सन 1973 में भारत सरकार ने उन्हे पद्मश्री से सम्मानित भी किया था। उन्होने अपनी पहली फ़िल्म थ्रू द आइज़ आफ अ पेन्टर  बनायी थी। यह फ़िल्म बर्लिन उत्सव में दिखायी गयी और उसे गोल्डेन बियर से पुरस्कृत भी किया गया। हुसैन ने मुंबई के जे जे स्कूल ओफ़ आर्ट्स से शिक्षा ग्रहण की थी। एम एफ हुसैन का नाम कई आलोचनाओं से भी जुड़ा रहा। उन पर हिंदू-देवी देवताओं के अश्लील चित्र बनाने का भी आरोप लगा था। फ़ोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें भारत का पिकासो की पदवी दी थी। उन्होंने कुछ समय पहले कतर की नागरिकता भी हासिल कर ली थी। बुढापे कि आखिरी उम्र होने के बावजूद जवानी के जोश से सराबोर हुसैन ने कई अभिनेत्रियों के लिए फिल्म बनायी थी । जिसमें सबसे चर्चित नाम माधुरी दीक्षित का था। कहा जाता है कि माधुरी की "हम आपको है कौन" को उन्होंने करीब सौ बार देखा था। हुसैन ने माधुरी के लेकर गजगामिनी और तब्बू को लेकर मीनाक्षी, ए टेल ऑफ़ थ्री सिटीज़ फिल्में बनायी थी। उनकी हसरत अभिनेत्री अमृता रॉव और अनुष्का को लेकर भी फिल्म बनाने की थी।



I still  remember M F Hussain---Dr. H S Bedi



Tuesday, June 07, 2011

सब जानते प्रभु तो है प्रार्थना ये कैसी?

किस्मत की बात सच तो नित साधना ये कैसी? //श्यामल सुमन 


मगर आँख में नीर है

कंचन चमक शरीर है
मगर आँख में नीर है

जिसकी चाहत वही दूर में
कैसी यह तकदीर है

मिल न पाते मिलकर के भी
किया लाख तदबीर है

लोक लाज की मजबूती से
हाथों में जंजीर है

दिल की बातें कहना मुश्किल
परम्परा शमसीर है

प्रेम परस्पर न हो दिल में
व्यर्थ सभी तकरीर है

पी कर दर्द खुशी चेहरे पर
यही सुमन तस्वीर है



सम्वेदना ये कैसी?

सब जानते प्रभु तो है प्रार्थना ये कैसी?
किस्मत की बात सच तो नित साधना ये कैसी?

जितनी भी प्रार्थनाएं इक माँग-पत्र जैसा
यदि फर्ज को निभाते फिर वन्दना ये कैसी?

हम हैं तभी तो तुम हो रौनक तुम्हारे दर पे
चढ़ते हैं क्यों चढ़ावा नित कामना ये कैसी?

होती जहाँ पे पूजा हैं मैकदे भी रौशन
दोनों में इक सही तो अवमानना ये कैसी?

मरते हैं भूखे कितने कोई खा के मर रहा है
सब कुछ तुम्हारे वश में सम्वेदना ये कैसी?

बाजार और प्रभु का दरबार एक जैसा
बस खेल मुनाफे का दुर्भावना ये कैसी?

जहाँ प्रेम हो परस्पर क्यों डर से होती पूजा
संवाद सुमन उनसे सम्भावना ये कैसी? 


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