Saturday, May 23, 2015

लुधियाना में तेज़ हुयी मीडिया के अधिकारों की जंग

पत्रकारों के कई संगठन एलायंस बनाने पर हुए सहमत 
लुधियाना: 23 मई 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
पत्रकारों ने अपने अधिकारों की जंग और तेज़ कर दी है। आज गुरुनानक भवन में हुआ विशेष आयोजन कम से कम इस बात का जीता जागता सबूत था। बहुत ही कम समय के नोटिस पर बुलाये गए इस कार्यक्रम में पत्रकार जिस जोशो खरोश से पहुंचे उसे देख कर लगता था कि अबकि बार लड़ाई आर पार की होगी। 
आरम्भ कुछ नाज़ुक था। डीपीआरओ का विरोध, प्रेस क्लब बनाने के लिए पिछले कुछ दिनों से सरगर्म टीम का विरोध और कुछ अन्य मुद्दे माहौल को शुरू में गर्माने लगे थे पर इस आयोजन के लिए सक्रिय भूमिका अदा कर रहे गौतम जालंधरी ने बात को संभालते हुए स्पष्ट किया कि हम न तो किसी के विरोध में हैं और न ही प्रेस क्लब बनाने के खिलाफ हैं।  उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर प्रेस क्लब बनता है तो सबसे अधिक ख़ुशी उन्हें होगी। गौरतलब है कि गौतम जालंधरी यहाँ लुधियाना प्रेस क्लब (रजिस्टर्ड) की प्रतिनिध्ता भी कर रहे थे। 
दुसरे संगठन प्रेस लायन्ज़ क्लब के प्रमुख बल्ली बराड़ ने गौतम जालंधरी के विचारों का समर्थन करते हुए इस भड़कती आग को बुझाने में सक्रिय योगदान दिया। 
एक अन्य पत्रकार संगठन के प्रमुख एस पी सिंह ने आगाह किया कि यहाँ बैठे लोग यह न समझें कि वे किसी बंद हाल में बैठे हैं।  यहाँ की हर जानकारी आहर जा रही है और जानी भी चाहिए। इससे से व्यक्तिगत छींटाकशी का ज़ोर कुछ कम होने लगा। एडवोकेट राजेश मेहरा और गौरव अरोड़ा ने सभी के लिए सामान कानून की संविधानिक परिभाषा की व्याख्या की और सवाल किया कि डीपीआरओ कौन होता है इन अधिकारों को छीनने वाला। उन्होंने कहा की अगर उन्हें कहा गया तो वे इस मामले को कोर्ट में लेजायेंगे और जीत कर भी दिखाएंगे। गौरतलब है की सुनील कामरेड पहले ही कह चुके थे कि न तो वह डीपीआरओ ऑफिस में जाते हैं और न ही उन्हें इसकी ज़रूरत है।
इसी बीच बहुत से उतराव चढ़ाव देखने वाले पत्रकार सुनील जैन ने विवाद को सुलझाने का प्रयास करते हुए कहा कि प्रेस क्लब बनाने के लिए और इसका सदस्य बनने के लिए रखी गयी शर्तों में गलत कुछ भी नहीं।  अगर अख़बार या चैनल ही अपने पत्रकार को मान्यता नहीं देगा तो उसे क्लब का सदस्य कैसे स्वीकार किया जा सकता है? उन्होंने स्टाफर और स्ट्रिंगर के अंतर को भी सहजता से समझाया। सुनील जैन ने याद दिलाया कि प्रेस क्लब बनने के प्रयास अतीत में कई बार हो चुके हैं लेकिन एकजुट न होने के कारण वे सिरे नहीं चढ़ सके। उन्होंने नाम लेकर ज़िक्र किया कि मंत्री हरनाम दास जौहर ने दो लाख रुपयों का चैक दिखाकर मीडिया को दो वर्ष चक्र में डेल रखा गया लेकिन प्रेस क्लब नहीं बन सका। इस लिए अब अगर यह बन रहा है तो इसे बनने दिया जाये। जैन  ने मीडिया के समक्ष कुछ बाद्लील प्रश्न भी रखे। 
आजकल बहुत सरगर्म पत्रकार राकेश मौदगिल ने बहुत ही जोशीले अंदाज़ में कहा कि हम अपने अधिकार छीनने वालों को जाने ही कहाँ देंगें, यहीं गिरा लेंगें।  सड़क भी पार नहीं करने देंगें। 
आज के आयोजन का मुख्य आकर्षण बने रहे पंकज शारदा ने अपने अनुभवी अंदाज़ के साथ बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि मीडिया में कोई छोटा बड़ा नहीं होता। खबरों की कवरेज में खतरे की बात करते हुए शारदा ने कहा कि जितना खतरा डेस्क पर बैठे पत्रकार को होता है उतना ही खतरा गली मौहल्ले में काम करने वाले संवाद सूत्र को भी होता है। किसी को भी तथाकथित पत्रकार लिखे जाने पर एतराज़ करते हुए शारदा ने फटकारते हुए कहा कि अपने ही भाईचारे में किसी को तथाकथित लिखनेवाला खुद क्या है? उन्होंने संस्कारों की चर्चा करते हुए कहा कि अगर किसी से कोई गलती हुयी भी हो तो उसे आपस में समझना होगा। हमें अपने भाईचारे का साथ देना होगा चाहे वह गलत ही क्यों न हो। 
प्रितपाल सिंह पाली, जसमीत कौर, बलवीर सिंह सिद्धु, राजेश मेहरा, सुशील मल्होत्रा और कई अन्य पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे। सभी पत्रकारों को एक समान मताधिकार का प्रस्ताव भी सर्वसम्मत राय से पारित हुआ। 
देर शाम प्राप्त एक प्रेस नोट के मुताबिक महानगर में संयुक्त प्रेस क्लब के गठन के उदेश्य से सभी पत्रकारों की मीटिंग गुरुनानक भवन में हुई। जिसमें सर्वसम्मति से 200 से अधिक पत्रकारों ने एकजुटता से हाथ खड़े करके सभी पत्रकारों को एक समान बताते हुए सभी को वोटिंग का अधिकार की मांग की गयी। मीटिंग में साँझा प्रेस क्लब के गठन पर सहमति जताई गयी व फॉर्म भी वितरित किये गए। साथ ही सर्वसमति से 21 सदस्यी कमेटी घोषित की गयी। मीटिंग में गौतम जालंधरी ने कहा कि इस मीटिंग के बाद समुचा पत्रकार भाईचारा संयुक्त प्रेस क्लब बनाने की दिशा में एक कदम और बढा है। पंकज शारदा ने कहा कि कोई पत्रकार बडा छोटा नहीं है। सुनील राय कामरेड ने कहा कि भारतीय संविधान ने वोट के अधिकार में कोइ भेदभाव नही किया। बल्ली बरार ने कहा कि यह सभी के लिए ख़ुशी की बात है कि सभी प्रेस संगठन एक मंच आए और भविष्य में 21 मेम्बरी कमेटी के जरिये एकजुटता बनाये रखने की बात कही। राजेश मेहरा एडवोकेट, गौरव अरोड़ा ने कहा कि कानून सभी के लिए एक समान है। एसपी सिंह व् अशोक थापर ने सहमति दी। योगेश कपूर, राकेश मौदगिल, प्रितपाल सिंह पाली, नीलकमल शर्मा, सुशील मल्होत्रा, जसमीत लूथरा, मेहमि जी, रॉकी जी, चरणजीत सलुजा, राजेश मेहरा, संजीव मोहिनी, सिद्धू जी, सुनील जैन ने प्रेस क्लब के चुनाव को फार्म जमा करवाने की अपील की। अब देखना है कि यह कंग कहीं भीतरघात करने वालों और हर वक़्त अपनी "मैं" का बखान करने वालों का शिकार न बन जाये। 

लुधियाना के पत्रकारों की एक आवश्यक संयुक्त बैठक 23 मई को 

पूर्व अफगान राष्ट्रपति ने की प्रधानमंत्री मोदी से भेंट

कई मुद्दों पर हुई चर्चा 
नई दिल्ली: 23 मई 2015: (पीआईबी):
भारत और अफगानिस्तान के दरम्यान अटूट संबंध हैं।  इन्हीं प्रेमपूर्ण संबंधों के चलते आज अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भेंट की। आज हुयी इस मुलाकात में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। 

Friday, May 22, 2015

रक्षा मंत्री का सियाचिन दौरा

22-मई-2015 19:51 IST
कल जम्मू क्षेत्र में भी जाएंगे 
रक्षा मंत्री श्री मनोहर पार्रिकर ने आज सियाचिन ग्लेशियर का दौरा किया। सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह भी उनके साथ थे। सियाचिन ग्लेशियर बेस कैम्प में उत्तरी कमान के सेना कमांडर और जनरल आफिसर कमांडिंग फायर एवं फ्यूरी कोर ने उनकी अगवानी की।  रक्षा मंत्री ने सियाचिन ग्लेशियर का हवाई सर्वेक्षण किया और सियाचिन बेस कैम्प पहुंचने पर सियाचिन युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करके शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुए देश की बर्फीली सीमा की सुरक्षा के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों और कर्तव्य परायणता की तारीफ की।
रक्षा मंत्री इसके बाद लेह पहुंचे और रिनचेन सभागार में सैनिकों से बातचीत की। उन्हें लद्दाख सीमा की मौजूदा सैनिक स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। रक्षा मंत्री कल जम्मू क्षेत्र में जाने से पहले आज रात चिनार कोर का भी दौरा करेंगे।

लुधियाना के पत्रकारों की एक आवश्यक संयुक्त बैठक 23 मई को

Update: Friday 22 May 2015 8:00 PM 
गुरु नानक भवन में होगी मीडिया मुद्दों पर गंभीर चर्चा
लुधियाना: 22 मई 2015: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
पूरे समाजं की मुश्किलों को सबके सामने लाने वाले मीडिया कर्मी खुद कितने असुरक्षित हैं इसका सही अंदाजा शायद किसी को नहीं। दिन-रात 24 घंटे कलम के ये सिपाही अपनी डियूटी पर डटे रहते हैं। जब मुसीबत आ जाये तो क्या हाल होता है इसका पता सबको रंजीत शर्मा उर्फ़ विक्की के दुखद देहांत से लग ही चूका है। लोकतंत्र का यह चौथा स्तम्भ अब खुद बहुत बुरी हालत में है। इन सब बातों को देखते हुए प्रेस क्लब लुधियाना और प्रेस लायनज़ क्लब लुधियाना की तरफ से गौतम जालंधरी और बल्ली बराड़ ने एक संयुक्त बैठक कल गुरुनानक भवन लुधियाना में बुलाई है। इस बैठक के आयोजन की सरगर्मियां आज भी दिन भर जारी रही। मीडिया को सरकार और अन्य राजनैतिक दलों के ठप्पे से बचाने के प्रयास में आज भी कई वरिष्ठ मीडिया कर्मी सरगर्म रहे। वास्तव में यह एक ऐसी लड़ाई पत्रकारों के गले आ पड़ी है जिसे लड़ना अब आवश्यक है। इस अवसर पर गीता ज्ञान के बिना कोई और ज्ञान काम नहीं आने वाला। पत्रकारों के अधिकारों के लिए एक लम्बी लड़ाई काफी अरसे से जारी है। पहले इस संघर्ष की धार पंजाब में चलती बंदूकों के कारण कुंद हो गयी थी। उस समय पत्रकारों को और उनके परिवारों की जान बचना आवश्यक था। इस नाज़ुक माहौल में कुछ प्रमुख अख़बारों ने पहचान पत्र जारी करने की परम्परा ही बंद कर दी क्यूंकि कुछ पहचान पत्र कुछ मिलिटेन्टों की जेब से मिले थे। इस लिए दलील में वज़न था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पहचान पत्र न देने की नीति को एक तरह से स्वीकार ही कर लिया गया। उस नाज़ुक समय में शुरू हुआ यह सिलसिला तकरीबन आज भी जारी है।
पहचान पत्र के बिना पत्रकार को कई तरह की परेशानियां होती हैं। इस बात को भांपते हुए कई शातिर किस्म के लोगों ने बाकायदा पहचान पत्र "बेचने" के अंदाज़ में "जारी" करने शुरू कर दिए। चुंगी बचाने के मकसद से कई कारोबारियों ने भी इस तरह के आई कार्ड खरीदे। इस तरह मीडिया की साख और पहचान धुंधली होती चली गयी। जो वास्तव में पत्रकार थे उनके पास आई कार्ड नहीं थे।  जो कारोबारी और व्यापारी थे उनके पास पत्रकारिता के कार्ड आ गए। मीडिया में यह "प्रदूषण" काफी समय से जारी है। अब इस प्रदूषित धारा को शुद्ध करने की बजाये इस पर मोहर लगा कर इसे सर्व-स्वीकृत बनाने की साज़िशें होने लगीं हैं। 
अगर कुछ गैर पत्रकार किस्म के लोगों ने बाकायदा RNI से स्वीकृति लेकर अपने पेपर निकले और उनके नाम से अपने कार्ड बेचे तो बड़ी और असली अखबारों ने भी कम मुनाफा नहीं कमाया। वे कार्ड के बदले सप्लीमेंट निकलवाने लगे। हाल ही में सेंटर यूनिवर्सिटी धर्मशाळा के उप कुलपति डाक्टर कुलदीप अग्निहोत्री लुधियाना एक आयोजन में भाग लेने आये तो उन्होंने विस्तार से बताया कि किस तरह उनके ज़माने में विज्ञापन उस स्थिति में छपा करते जब ख़बरों के बाद एक चौथाई या कुछ ज़्यादा जगह बच जाया करती थी तो ऊपर से आदेश आता था कि चलो यहाँ अब विज्ञापन छाप दो। जो बच जाते उन्हें अगले दिन प्रकाशित किया जाता। लेकिन अब विज्ञापन पहले छपते हैं और खबरें तब छपती हैं अगर जगह बच जाये। इस कारोबारी तब्दीली ने वास्तविक पत्रकारिता का गला घोंट डाला है। मीडिया मैनेजमेंट की तरफ से आज सप्लीमेंट मुख्य मांग बन गयी है। सवाल उठता है कि पत्रकार से अख़बार की मांग अच्छी खबरें हों या विज्ञापन? इस सब के खिलाफ काफी लड़ाई पहले भी लड़ी गयी है और काफी अभी लड़ी जानी है। अतीत में इस जंग में वो पत्रकार लोग भी शामिल थे जिन्होंने पंजाब के कठिन समय में कई लड़ाईयां लड़ीं। उन दिनों पुलिस और मिलिटेंट दोनों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करना आसान नहीं था। उस दौर में बहुत से पत्रकार शहीद भी कर दिए गए। अब जबकि वह दौर खत्म हो चूका है लेकिन बहुत सी मुसीबतें अपना रंग रूप बदल कर सामने आ रही हैं। सबसे दुखद बात यह कि छोटी छोटी बातों को लेकर मीडिया कई गुटों में बंट गया है। चौधर की इस जंग में वास्तविक मुद्दे गुम हो रहे हैं। इस नाज़ुक स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कुछ प्रमुख संगठनों और पत्रकारों ने कुर्सी की इस जंग से ऊपर उठते हुए फ़िलहाल केवल एकता पर ज़ोर दिया है। इस तरह के सभी मामलों पर चर्चा होगी कल 23 मई 2015 शनिवार को गुरुनानक भवन में सुबह 11:30 बजे।  
मीडिया से जुड़े सभी लोगों से निवेदन है कि लोकतंत्र के इस चौथे स्तम्भ को बचाने के लिए आगे आएं तांकि उन लोगों की साज़िशों को नाकाम किया जा सके जो इसे पांचवां टायर बनाने पर तुले हैं। अपने सुझाव, अपनी समस्या सब कुछ वहां विस्तार से रखें। दबाव रहित और शकितिशाली मीडिया मंच की स्थापना में सहयोग करें। मीडिया मज़बूत तो समाज मज़बूत। खुद भी आए अपने साथियों को भी लाएं। खुले दिल से सुनें खुल कर कहें। अब देखना है दूसरों के अधिकारों की जंग लड़ने वाले खुद अपनी जंग कितनी बहादुरी से लड़ पाते हैं? आपके पास  कार्ड है या नहीं? आपके पाश अथार्टी है या नहीं? इन सभी सवालों को एक तरफ रख कर केवल एक सवाल अपने आप से पूछें क्या आप पत्रकार हैं या नहीं? अगर हैं तो वहां अवश्य पहुँचिये। एक सवाल मीडिया मैनेजमेंट से भी करना बनता है, समाज से भी और सरकार से भी कि क्या पत्रकारिता करने वाला पत्रकार है या पत्रकारिता को साईड बिज़नेस बना कर लाभ उठाने वाला?

लुधियाना में तेज़ हुयी मीडिया के अधिकारों की जंग 

Thursday, May 21, 2015

आखिर कब रुकेंगे पत्रकारों पर हमले ?

 [5/20/2015, 22:05] Anil Vij:
अब जगराओं के पत्रकार पर हुआ जानलेवा हमला
कब्जे की कवरेज कर रहा था पत्रकार जसवंत
पंजाब स्क्रीन ग्रुप में अनिल विज की ओर  से प्रेषित  
लुधिआना:  पत्रकारों पर हो रहे हमले बंद होने का नाम नहीं ले रहे| आए दिन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर हमलों की खबरे मिलती रहती है पर पुलिस प्रशासन इस मे कोई ठोस खदम उठता महसूस नहीं होता।  जगराओ मे भी एक ऐसी घटना हुई जिसमें इंग्लिश ट्रिब्यून के रिपोर्टर जसवंत अपने बेटे को ले  कर घर जा रहे थे के उनकी नजर एक़ दुकान पर पड़ी जहा कुछ लोक कब्ज़ा कर रहे थे।  जसवंत ने जब इसकी कवरेज करनी चाही तो कब्ज़ा कर रहे युबको ने जसवंत का कैमरा छीन लिया और उसपर हमला कर दिया।  हमले मे जसवंत गंभीर रूप से जख्मी हो गया जिसे सिविल हॉस्पिटल जगराओ मे भर्ती करवाया गया है। इस हमले मे जसवंत की बीवी को भी चोटें आई है। सिविल हॉस्पिटल मे मौजूद जसवंत के मित्र और दैनिक सवेरा के ब्यूरो सुढोरा ने बताया कि जसवंत की हालत अब खतरे से बाहर है। पंजाब प्लस मे बातचीत के दौरान जगराओ के एस एस पी रवचरण सिंह बराड़ ने कहा  की मीडिया पर हमले के दोषी बखसे नहीं जायेगे।
इसी बीच अनिल विज की ही एक और सूचना के मुताबिक जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (रजि) जगराओ के इंग्लिश ट्रिब्यून के पत्रकार जसवंत पर हुए हमले की कड़ी निंदा करती है। पत्रकारों पर हमले दिन प्रतिदिन बढ़ रहे है और हमारी सरकार और पुलिस इसके लिए एक़ परसेंट वी सीरियस नहीं है। हमारी मांग है कि (हर जिले मे पुलिस पत्रकार समिति बनाना) पर इस पर भी सरकार ने चुप्पी साध रखी है।  थोड़ा दुखी होकर यह वी कह सकता हु की इसकी एक़ वजह हमारा आपस का  विवाद वी है। अब समय आ गया है की हम सब एक़ हो कर छोटे वड़े पत्रकार का तमगा उतार कर एकजुट हो कर सरकार से हमारी इस मांग पर अड़े। हर जिले मे पत्रकार पुलिस समिति बनाई जाये जो सिर्फ पत्रकारों के मामलो को सुने।
आये मिल कर संघर्ष करे। ------------गौरव कुमार 'आरोड़ा' (9814175786 )

Wednesday, May 20, 2015

1 जून, 2015 से सेवा कर की दर में बढ़ोतरी

20-मई-2015 16:43 IST
12 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी हो जाएगी सेवा कर की दर
नई दिल्ली: 20 मई 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
केंद्रीय बजट, 2015 में सेवा कर की दर को 12 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी करने का प्रस्‍ताव किया गया था। बजट में यह जिक्र भी किया गया था कि सेवा कर की दर में वृद्धि जिस तारीख से प्रभावी होगी, उसे अधिसूचित किया जाएगा। वित्‍त विधेयक, 2015 अब कानून की शक्‍ल ले चुका है और केंद्र सरकार ने 14 फीसदी सेवा कर के प्रभावी होने की तिथि के रूप में 1 जून, 2015 को अधिसूचित किया है। शिक्षा उपकर और माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा उपकर को लागू करने वाले प्रावधान भी उसी तिथि यानी 1 जून, 2015 से समाप्‍त हो जाएंगे, क्‍योंकि ये उपकर 14 फीसदी सेवा कर में समाहित हो जाएंगे। कुछ खास अन्‍य बदलावों के बारे में भी यह अधिसूचित किया गया है कि वे 1 जून, 2015 से प्रभावी हो जाएंगे। हालांकि, सभी या किसी भी कर योग्‍य सेवा पर 'स्‍वच्‍छ भारत उपकर' लगाने से संबंधित प्रावधान के लागू होने की तिथि के बारे में यथासमय निर्णय लिया जाएगा। 
वि. कासोटिया/एएम/आरआरएस/एसकेपी-2624

सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम अधिनियम, 1984

20-मई-2015 18:09 IST
केंद्र सरकार ने प्रस्‍तावित संशोधन के लिए सुझाव आमंत्रित किए 
नई दिल्ली: 20 मई 2015: (पीआईबी):
गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम (पीडीपीपी) अधिनियम, 1984 में प्रस्‍तावित संशोधनों के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। प्रस्‍तावित संशोधनों के पीछे मुख्‍य उद्देश्‍य आंदोलन एवं अन्‍य तरह के विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक/निजी संपत्‍ति को नष्‍ट करने से संभावित उल्‍लंघन करने वालों को रोकना है। प्रस्‍तावित संशोधन इन संगठनों के पदाधिकारियों पर भी लगाम लगाएंगे। 

उच्‍चतम न्‍यायालय ने न्‍यायमूर्ति के.टी. थॉमस की अध्‍यक्षता में एक समिति गठित की थी। उच्‍चतम न्‍यायालय के पूर्व न्‍यायाधीश के.टी. थॉमस की अध्‍यक्षता वाली इस समिति को उन तौर-तरीकों पर गौर करने का जिम्‍मा सौंपा गया था जिन्‍हें अपनाकर सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम (पीडीपीपी) अधिनियम, 1984 को और ज्‍यादा कारगर बनाया जा सकता है। इस समिति को कुछ उपयुक्‍त बदलाव सुझाने का भी जिम्‍मा सौंपा गया था, जिससे कि इस अधिनियम को और ज्‍यादा सार्थक बनाया जा सके। 

समिति ने अपने निष्‍कर्ष में कहा था कि वर्तमान कानून सार्वजनिक संपत्‍ति को होने वाली क्षति के बढ़ते मामलों से निपटने के लिहाज से अपर्याप्‍त एवं अप्रभावी है। समिति ने सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम (पीडीपीपी) अधिनियम, 1984 में संशोधन के लिए कुछ सिफारिशें की थीं। गृह मंत्रालय ने न्‍यायमूर्ति के.टी. थॉमस की अध्‍यक्षता वाली समिति की सिफारिशें स्‍वीकार करने का फैसला किया था। 

सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम (पीडीपीपी) अधिनियम, 1984 के वर्तमान प्रावधान के साथ-साथ प्रस्‍तावित सार्वजनिक संपत्ति को क्षति की रोकथाम (पीडीपीपी) अधिनियम का मसौदा भी गृह मंत्रालय की वेबसाइट www.mha.nic.in. पर उपलब्‍ध है। 

पीडीपीपी अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2015 के प्रस्‍तावित मसौदे पर आम जनता और अन्‍य हितधारकों की ओर से 20 जुलाई, 2015 को अथवा उससे पहले सुझाव आमंत्रित हैं। ये सुझाव गृह मंत्रालय के सीएस प्रभाग, 5वीं मंजिल, एनडीसीसी बिल्‍डिंग, जय सिंह रोड, नई दिल्‍ली-110001 को भेजे जा सकते हैं। ये सुझाव ईमेल dircs1-mha@mha.gov.in पर भी भेजे जा सकते हैं। 

वि. कासोटिया/एएम/आरआरएस/एसकेपी-2630

गुरदासपुर में लगी सेना की भव्य प्रदर्शनी

सेना की प्रदर्शनी ने आकर्षित किया युवा वर्ग को  
गुरदासपुए: 20 मई 2015: (विजय शर्मा//पंजाब स्क्रीन): 
गुरदासपुर मैं डेरा बाबा नानक ब्रिगेड और पैंथर डवीजन की तरफ से आर्मी जानो प्रदर्षनी लगाई जिस मैं भारतीय फौज ने आपने हथियारों और अन्य साज़ो सामन की एक यादगारी प्रदर्शनी लगाई। इस प्रदर्शनी में तकरीबन हर वो वो चीज छात्रों को बताई गयी जो फौज मै काम आती  है इस मोके पर सेवा मुक्त लेफ्टीनल जर्नल कमलजीत सिंह ने परदर्शनी का उद्गाटन कीया और आज की युवा पीढ़ी को फौज मैं भर्ती होने के लिये प्रेरित भी किया।
 फौज को जानो परदर्शनी लगाने का एक विशेष मकसद यह है किआज का युवा वर्ग सेना के बारे में जानकार देश की रक्षा के लिए बढ़ चढ़ कर आगे आ सके। हमारा देश पहले  ही सदियों गुलाम रहा है।  आब हमारे नोजवानो को आगे आना चाहिय और देश की सेवा करनी चाहिए आज यहां फौज की हर चीज की परदर्शनी लगाई गयी है new पुराने हत्यार की  जानकारी बी दी जा रही है बच्चे  जो चाहें जानकारी ले सकते  हैं और अगर बच्चे आज की प्रदर्शनी से प्रेरित हो कर आर्मी में भर्ती होते हे तो उनकी आने वाली जिंदगी तो बेहतर होगी ही  साथ में रिटायर होने के बाद उनके परिवार और उनकी अपनी जिंदगी भी बेहतर होगी।  इसी के साथ देश के भविष्ये में भी सुधार होगा।
इस अवसर पर सेवा मुक्त  लेफ्टीनल जर्नल कमलजीत सिंह और सेवा मुक्त कर्नल  डा. ए  एन कौशल ने  मीडिया से भी बात की।
छात्रों ने भी कहा--आज हम यहां फौज की परदर्शनी देखने पहुंचे हैं यहां हमें बहुत कुछ सीखने को मिला कि फौज मैं कैसे रहा जाता है और फौज के हथियारों की भी जानकारी मिली।  अब हम भी हम भी देश की सेवा करेंगे और आर्मी मैं भर्ती होंगे
गौर तलब है कि लड़कीओ को भी आर्मी में ऐनी का मौका मिलेगा। छात्र-छात्राओं ने भी  में अपने विचार व्यक्त किये।