Saturday, April 10, 2010

आइये आप भी सुनिये सफ़दर की बुलंद आवाज़

सफ़दर हाश्मी को मिटाने वालों ने तो शायद यही सोच होगा कि बस एक खून...और सफ़दर भी खत्म और उसकी आवाज़ भी. पर हुआ एन इसके उल्ट. सफ़दर का लहू जब बहा तो उसने रक्त बीज कि कहानी को भी कहीं पीछे छोड़ दिया.उसने साबित किया कि लोगों के नायक सिर्फ कहानी नहीं होते वे सचमुच रक्तबीज बन के भी दिखा सकते है. आज भी उसकी आवाज़ गूँज रही है. उन लोगों के कानों में भी जिनके लिए वह शहीद हुआ और उनके कानों में भी जिन्होंने उसे शहीद करके सब कुछ खत्म कर देने का वहम पालने की नाकाम कोशिश की.  उसी अमर सफ़दर का जन्म दिन 12 अप्रैल 2010 को है जिसे पूरे जोशो खरोश से मनाया जा रहा है राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस के तौर पर.  उस महान लोक नायक को याद करने और उसके संकल्प को पूरा करने के लिए एक विशेष आयोजन हो रहा है 11 अप्रैल 2010 को. सांस्कृतिक संध्या के रूप में आयोजित होने वाले इस यादगारी कार्यक्रम की शुरूयात   42,अशोका रोड नयी दिल्ली में शाम को ठीक चार बजे हो जाएगी.  इसका निमन्त्रण देते हुए जन नाटय मंच के अध्यक्ष अशोक तिवारी और सफ़दर की जीवन संगिनी रही मलयश्री हाशमी ने कहा है कि  आप आयें. कुछ पुरानी बातें करें और कुछ आगे के बारे में सोचें. गीत संगीत और नुक्कड़ नाटकों के साथ साथ होने वाली इस चर्चा में जलपान का आयोजन भी किया गया है. क्यूं आप आ रहे हैं न. कुछ कच्चा पक्का है तो बिलकुल पक्का कर लीजिये और एक बार फिर मुलाकात कीजिये उन विचारों से जिन्हें मिटाने के लिए उन लोगों ने सफ़दर को शहीद कर दिया था.एक बार फिर महसूस कीजिये उन जोशीले जज्बातों को जिन्हें खत्म कर देने का वहम पाला था कुछ लोक दुश्मनों ने.वही बुलंदी, वही अंदाज़ और वही पक्के इरादों की झलक मिलेगी इस यादगारी प्रोग्राम में.--रैक्टर कथूरिया  
  

Wednesday, April 07, 2010

आग पर कड़ाही....क्या पक रहा होगा....?

जब मैंने आग पर रखी इस कड़ाही को देखा तो भूख तेज़ होने लगी. मुझे लगा कोई बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजन पकाया जा रहा. पर जब पता लगा तो मामला बिलकुल ही कुछ और निकला. वास्तव में जब कहीं पर भी जंग चलती है तो उसमें गोले बारूद और हथियारों के इलावा बहुत सी लिखा पढ़ी भी होती है, बहुत से संदेशों का आदान प्रदान भी होता है, बहुत से नक़्शे भी बनाये जाते हैं और बहुत से आदेश भी जारी होते हैं और बहुत से हिसाब किताब भी रखे जाते हैं. .....यह सभी कुछ अत्यंत गोपनीय होता है. हालांकि यह सब कुछ गुप्त संकेतों के अंतर्गत ही किया जाता है पर ज़रा सोचो अगर कहीं इस तरह का कोई गुप्त आदेश या संदेश का कागज़ किसी दुश्मन के हाथ लग जाये तो सारी की सारी बाज़ी ही उल्ट सकती है. इस लिए सुरक्षा को सामने रखते हुए.काम हो जाने के बाद एक निश्चित समय पर इस तरह के संवेदनशील कागजों को जल्द से जल्द जला कर नष्ट कर दिया जाता है. जो तस्वीर आप देख रहे हैं, उसमें भी इस तरह के कागजों को जलाने का ही एक दृश्य है. बायें खड़े नज़र आ रहे William Northcutt और उनके साथ खड़े हैं अमेरिकी सेना के Army Sgt. 1st Class James Hines. दोनों ही अधिकारी इस अत्यंत गोपनीय और संवेदनशील जिम्मेदारी को निभा रहे हैं. गज़नी अफगानिस्तान के अग्रिम मोर्चे के इन पलों को अमेरिकी वायु सेना के लिए कैमरे में कैद किया Army Sgt. 1st Class James Hines ने 4 अप्रैल 2010 को.   --रैक्टर कथूरिया 

Tuesday, April 06, 2010

सरताज की ओर से गीत चोरी करने और गाने का विवाद हुआ और तीखा....शायर ने दी 15 दिनों की मोहलत



बात फ़िल्मी कहानी की हो, संगीत की हो या फिर साहित्य की....चोरी और सीना जोरी के कई मामले सामने आते रहे हैं. अब नया मामला सामने आया है पंजाबी के तेज़ी से उभर रहे गायक सतिंदर सरताज का। बुलंद आवाज़, श्रोतायों को बांध  लेने वाला जादू, प्रार्थना की घंटियों को सुनवाती आवाज़, कानों में मिश्री घोल देने वाली सुरें, हर किसी से विनम्रता से बात करने वाला यादगारी अंदाज़...बहुत सी खूबियां हैं सरताज में. मुझे उनके चाहने वाले एक युवा पत्रकार ने उनकी इबादत अपने मोबाईल फ़ोन पर सुनाई तो मैं खुद सब कुछ भूल गया. अपने गाये हुए गीतों को खुद ही लिखने का दावा कई बार दोहरा चुके गायक सरताज  के इन दावों पर सवाल उठाया है जिला फिरोजपुर के एक जानेमाने शायर तरलोक सिंह जज ने। दूसरी ओर सरताज की तरफ से इकबाल माहल ने स्पष्ट किया है कि वास्तव में यह सब कुछ रेकार्डिंग कम्पनी के कारण हुआ क्यूंकि विवादित गीतों वाली सीडी संबंधित रेकार्डिंग कम्पनी की मर्ज़ी के बिना जारी हुयी है।  उन्होंने यह भी कहा कि शायर तरलोक सिंह जज धमकियों में बात न करें. इस आरोप से विवाद और तीखा हो गया क्यूंकि शायर ने कभी भी धमकी की भाषा का प्रयोग ही नहीं किया. 
पंजाबी के तेज़ी से उभर रहे गायक सतिंदर सरताज की आवाज़ में किस किस गीतकार  की रचना शामिल है इसका पता शायद कभी न चलता अगर पंजाब और पंजाबियों में भी इंटरनेट  और सोशल  साईटों का प्रचलन लोकप्रिय  न हुआ होता। क्यूंकि सरताज ने कई बार कहा है कि वह जो भी गाते हैं अपना ही लिखा गाते हैं।  पर कहते हैं कि सचाई सो पर्दे फाड़ कर भी बाहर आ जाती है। इस मामले में भी बिलकुल ऐसा ही हुया । फ़िरोज़पुर में रहने वाले एक जानेमाने शायर तरलोक सिंह जज ने अपनी किसी पुरानी ग़ज़ल के कुछ अशिआर एक प्रमुख सोशल साईट पर पोस्ट किये तो कुछ ही पलों बाद पता चला कि इन्हें तो बुलंदियां छू रहे गायक सतिंदर सरताज भी गा चुके हैं. बस थोड़ी सी तलाश के बाद ही गाया गया गीत ढून्ढ लिया गया। गाया गया गीत तो मिल गया पर उसमें शायर का नाम कहीं भी नहीं था. पेशे से कानूनदान ठहरे तरलोक सिंह जज ने सारा मामला शायर दोस्तों के सामने रखा। बात चिंगारी की तरह  निकली तो  जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी। इस सारे मुद्दे पर शायर तरलोक सिंह जज से बात की गयी तो उन्हों ने कहा कि 29 मार्च 2010 की रात को  अचानक सरताज ने उनसे फोन पर सम्पर्क किया था पर उसके कुछ घंटों के बाद पंजाबी पोर्टल पर कुछ ऐसी सामग्री प्रकाशित हुयी जिससे वह सहमत नहीं थे। अब इकबाल माहल की ओर से जानेमाने छायाकार और कलमकार जनमेजा सिंह जोहल को एक पत्र भेजा। इसी बीच इकबाल माहल के बारे में भी एक पत्र छपा जिसमें श्री माहल के बारे में काफी कुछ कहा गया। कुल मिला कर इस मामले को हल करने के कई प्रयास जारी हैं। कुछ सब के सामने और कुछ परदे के पीछे लेकिन देखना यह है खुद गायक सरताज इस मुद्दे पर खुद अपने मूंह से क्या कहते हैं ??? वह खुलकर सच स्वीकार तो करें, यहां सब उनके दोस्त हैं.....सब उन्हें गले से लगा लेंगें..मामला केवल देरी और कम्युनिकेशन गैप से ही बिगड़ रहा है....!!!    --रैक्टर कथूरिया 

Sunday, April 04, 2010

....और वे मौत के मूंह से भी लौट आये.....!


समुंदर में सोमालिया के किनारे से बहुत ही दूर. एक छोटी सी कश्ती या फिर डोंगा सा कह लो सागर की लहरों से संघर्ष कर रही थी. उसमें बच्चों और महिलाओं सहित कुल 30 लोग थे. जंग जिंदगी और मौत की थी. जब उन्होंने किनारा छोड़ा तब सब कुछ सही था. किनारा दूर छूट जाने के बाद जब वे सागर की लहरों में पहुंचे तो उन्हें लगा कि शैड कुछ तकनीकी खराबी पेश आ रही है. इस तरह कि बातें सागर के जीवन में एक आम सी बात है सो वे विचलित नहीं हुये. पर कुछ देर बाद यही खराबी और गंभीर हो गयी तो इस तरफ पूरा ध्यान दिया गया. जांच होने पर [पता चला कि उस छोटी सी कश्ती के दोनों इंजन फेल हो चुके है. अब ना तो आगे बढ़ा जा सकता था और न ही पीछे लौटा जा सकता था. इस खराबी के बाद एक और मुसीबत सामने आई.कश्ती में रखा भोजन समाप्त होने को था. पीनेवाला पानी बभी केवल चार दिन और चल सकता था.अब उन्हें अहसास हुआ के वे सागर में फंस चुके है. चारो तरफ शोर मचाता खारा खारा समुंदरी पानी जिसमें शार्क भी हो सकती थी और मगरमच्छ भी. अब दुआ के अलावा और कोई चारा भी उनके सामने नहीं था...और उनकी दुआ सुन ली गयी थी. वे अपनी आंखों से अपने बचने का करिश्मा देखने वाले थे. उस समय अदन की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना का का एक बहुत बड़ा जहाज़ अपनी रूटीन गश्त पर था.  समुंदरी लूटेरों और डाकुयों के मुकाबले के लिए दिन रात समुन्द्र रक्षा के लिए नियुक्त इस जहाज़ के अधिकारयों ने देखा कि सागर में दूर कहीं काले से धब्बे जैसा कुछ हिल जुल रहा है. और ध्यान से देखा तो पता चला कि यह कोई छोटी सी कश्ती थी. रक्षकों को सतर्क किया गया क्यूंकि इस कश्ती में समुंदरी डाकूयों के होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता था. सतर्कतापूर्ण जांच के बाद जब असल बात सामने आयी तो जहाज़ से आये नौसेना अधिकारीयों ने देखा ये सब तो मुसीबत के मारे लोग थे. न उनके पास भोजन बचा था, न ही दवा दारू और न ही पीने वाला पानी.  बुरी तरह खराब हो चुके दोनों इंजनों वाली यह कश्ती किसी भी समय जलमग्न हो सकती थी. इन्हें तुरंत आवश्यक दवा-दारू और भोजन दिया गया. कंबल दे कर इन्हें कुछ देर आराम करने के लिए जहाज़ में ही जगह दी गयी. यह सब कुछ 25 मार्च 2010 को हुया. ढाई दिन के सफ़र के बाद 27 मार्च 2010 को इन लोगों को किनारे पर ला कर उनके गांव सीलाया में पहुंचाया गया. मौत को एन नज़दीक से देख कर लौटे इन सौभाग्यशालियों के एक नेता अब्दुल रहमान अली ने कहा कि हम तो जीवत बचने की उम्मीद ही छोड़ चुके थे. इस तरह यह सारा मामला बचायो के इतिहास में एक नया अध्याय बन के जुड़ गया. मुझे सारा विवरण भेजा Combined Maritime Forces के लिए अपनी डियूटी निभा रहे अमेरिका के Navy Ensign Colleen M. Flynn ने और अमेरिकी जल सेना के लिए इन पलों को कैमरे में कैद किया है Petty Officer 3rd Class Cory Phelps ने.आपको इसका हिंदी कथा रूप कैसा लगा अवश्य बताएं.           --रेक्टर कथूरिया