Thursday, June 21, 2018

पी.ए.पी.ग्राउंड जालंधर में भी मनाया गया जिला स्तरीय योग दिवस

Jun 21, 2018, 1:56 PM
मानसिक तनाव को केवल योग और सात्विक आहार ही दूर कर सकता है
जालंधर: 21 जून (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
पी.एच.सी.रंधावा मसंदा के ए.एम.ओ.डॉक्टर हेमन्त मल्होत्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि डायरेक्टर आयुर्वेद पंजाब डॉ.राकेश शर्मा के निर्देशानुसार पी.ए.पी ग्राउंड जालंधर में जिला आयुर्वेदिक अफसर डॉ.सम्राट विक्रम सहगल की अगुवाई में जिला स्तरीय योग दिवस मनाया गया । मुख्य मेहमान आई.पी.एस कमांडेंट पी.ए.पी श्री पवन कुमार उप्पल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की । सम्बोधित करते हुए श्री उप्पल ने सभी को निरोग रहने के लिए योग अपनाने को कहा । इस मौके डॉ.सम्राट ने अपने सम्बोधन में कहा कि आजकल बढ़ते हुए मानसिक तनाव को केवल योग और सात्विक आहार ही दूर कर सकता है। डॉ.अविनाश, डॉ.हेमंत मल्होत्रा, डॉ.रुपाली कोहली, डॉ.सुखदेव, डॉ.योगेश, डॉ.मनु हल्लन, डॉ.रितिका, डॉ.नीरज बाला और उपवैध मदन लाल द्वारा 1200 के लगभग उपस्थित पी.ए.पी और जिला आयुर्वेदिक विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के इलावा आम जन को योगा प्रोटोकॉल के अनुसार योग अभ्यास करवाया गया । कमांडेंट श्री पवन उप्पल और जिला आयुर्वेदिक अफसर डॉ.सम्राट ने पी.ए.पी में 4 जून से योग सीखा रही जिला आयुर्वेदिक विभाग की टीम डॉ.अविनाश, डॉ.हेमंत मल्होत्रा, डॉ.रुपाली कोहली, डॉ.सुखदेव, डॉ.योगेश, डॉ.मनु हल्लन, डॉ.रितिका और डॉ.नीरज बाला को उनके अतुलनीय कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी देकर सन्मानित भी किया । इस मौके गणमान्य व्यक्तियों में सीनियर फिजिशियन डॉ.सुरिंदर कल्याण, डॉ.चेतन मेहता, डॉ.अमित सिधू, डी.एस.पी सुखविंदर सिंह, इंस्पेक्टर बाज सिंह, एस.आई गुरपाल सिंह, एस.आई रशपाल, एस.आई राजेश, एस.आई वेद प्रकाश, एस.आई कुलविंदर सिंह, ए.एस.आई रविंदर, ए.एस.आई कंवलजीत हाजिर थे।

आज हर तरफ योग ही योग, योग ही योग है

प्रविष्टि तिथि: 21 JUN 2018 9:58AM by PIB Delhi

योग दिवस पर देहरादून में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ
देहरादून: 21 जून 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो//पीआईबी)::
मंच पर उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव और इस विशाल, सुंदर मैदान में उपस्थित मेरे सभी साथियों। मैं देवभूमि उत्तराखंड की इस पावन धरती से दुनियाभर के योग प्रेमियों को चौथे अंतराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देता हूं।

मां गंगा की इस भूमि पर, जहां चारधाम स्थित हैं, जहां आदि शंकराचार्य आए, जहां स्वामी विवेकानंद कई बार आए, वहां योग दिवस पर हम सभी का इस तरह एकत्रित होना, किसी सौभाग्य से कम नहीं।

उत्तराखंड तो वैसे भी अनेक दशकों से योग का मुख्य केंद्र रहा है। यहां के ये पर्वत स्वत: ही योग और आयुर्वेद के लिए प्रेरित करते हैं।

सामान्य से सामान्य नागरिक भी जब इस धरती पर आता है, तो उसे एक अलग तरह की, एक दिव्य अनुभूति होती है। इस पावन धरा में अद्भुत स्फूर्ति है, स्पंदन है, सम्मोहन है।

साथियों,

ये हम सभी भारतीयों के लिए गौरव की बात है कि आज जहां-जहां उगते सूर्य के साथ जैस-जैसे सूरज अपनी यात्रा करेगा,  सूरज की किरण पहुंच रही है, प्रकाश का विस्तार हो रहा है, वहाँ - वहाँ लोग योग से सूर्य का स्वागत कर रहे हैं।

देहरादून से लेकर डबलिन तक, शंघाई से लेकर शिकागो तक, जकार्ता से लेकर जोहानिसबर्ग तक, योग ही योग , योग ही योग है।

हिमालय के हजारों फीट ऊंचे पर्वत हों या फिर धूप से तपता रेगिस्तान, योग हर परिस्थिति में, हर जीवन को समृद्ध कर रहा है।

जब तोड़ने वाली ताकतें हावी होती है तो बिखराव आता है।  व्‍यक्तियों के बीच समाज के बीच  देशों के बीच बिखराव आता है। समाज में दीवारें खड़ी होती है, परिवार में कलह बढ़ता है और यहाँ तक कि व्यक्ति अंदर से टूटता है और जीवन में तनाव बढ़ता जाता है।

इस बिखराव के बीच योग जोड़ता है। जोड़ने का काम करता है

आज की आपाधापी और तेज़ भागती ज़िंदगी में योग मन, शरीर और बुद्धि आत्‍मा को जोड़कर व्यक्ति के जीवन में शांति लाता है।

व्यक्ति को परिवार से जोड़कर परिवार में ख़ुशहाली लाता है।

परिवारों को समाज के प्रति संवेदनशील बना कर समाज में सद्भावना लाता है।

समाज राष्ट्र की एकता के सूत्र बनते है।

और ऐसे राष्ट्र विश्व में शांति और सौहार्द लाते है। मानवता, बंधुभाव से पल्लवित और पोषित होती है।

यानी योग व्यक्ति-परिवार-समाज-देश-विश्व और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ता है।

जब यूनाइटेड नेशन्‍स में योग के लिए प्रस्‍ताव रखा और ये यूनाइटेड नेशन्‍स का रिकॉर्ड है, ये पहला ऐसा प्रस्‍ताव था जिसको दुनिया के सर्वाधिक देशों ने कॉस्‍पान्‍सर किया। ये पहला ऐसा प्रस्‍ताव था जो UN के इतिहास में सबसे कम समय में स्‍वीकृति हुआ और ये योग आज विश्‍व का हर नागरिक, विश्‍व का हर देश योग को अपना मानने लगा है और अब हिन्‍दुस्‍तान के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है कि हम उस महान विरासत के धनी है, हम उन महान परम्‍परा की विरासत को संजोय हुए है।

अगर हम अपनी विरासत पर गर्व करना शुरू करें जो कालबाह्यी है उसे छोड़ दें और वो टिकता भी नहीं है। लेकिन जो समय के अनुकूल है, जो भविष्‍य के निर्माण में उपकारक है ऐसी हमारी महान विरासत को अगर हम गर्व करेंगे तो दुनिया गर्व करने में कभी भी हिचकिचाहट नहीं अनुभव करेगे। लेकिन अगर हमें, हमारी शक्ति, सामर्थ्‍य के प्रति भरोसा नहीं होगा, तो कोई स्‍वीकार नहीं करेगा। अगर परिवार में परिवार ही बच्‍चे को हमेशा नकारता रहे और अपेक्षा कि मोहल्‍ले वाले बच्‍चे को सम्‍मान करे, तो वह संभव नहीं है। जब मां, बाप, परिवार, भाई, बहन बच्‍चे को जैसा भी हो स्‍वीकार करते है तब जा करके मोहल्‍ले के लोग भी स्‍वीकार करना शुरू कर देते है।

आज योग ने सिद्ध कर दिया है कि जैसे हिन्‍दुस्‍तान ने फिर से एक बार योग के सामर्थ्‍य के साथ अपने साथ जोड़ दिया दुनिया अपने आप जुड़ने लग गई।  

योग आज दुनिया की सबसे Powerful Unifying Forces में से एक बन गया है।

मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यदि आज पूरी दुनिया में योग करने वालों के आंकड़े जुटाए जाएं तो अद्भुत तथ्य विश्‍व के सामने आएंगे।

अलग-अलग देशों में, पार्कों में, खुले मैदानों में, सड़कों के किनारे, दफ्तरों में, घरों में, अस्पतालों में, स्कूलों में, कॉलेजों में, ऐतिहासिक विरासतों के सानिध्य में, योग के लिए जुटते सामान्य लोग, आप जैसे लोग, विश्व बंधुत्व के भाव और  Global Friendship को और ऊर्जा दे रहे हैं।

Tuesday, June 19, 2018

साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क पर कार्यशाला-2018

प्रविष्टि तिथि: 19 JUN 2018 6:56PM by PIB Delhi

उद्घाटन किया केंद्रीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने
नई दिल्ली: 19 जून 2018: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन)::
जहाँ इंटरनेट की सुविधा से हम सभी को बहुत से फायदे हुए हैं वहीँ साइबर क्राईम के खतरे भी तेज़ी से बढ़े हैं। इस चुनौती को गंभीरता से लिया है रक्षा मंत्रालय ने। डीडीपी, रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा विभाग के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने किया।


    अपने संबोधन में श्रीमती सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र पर साइबर खतरों की अधिक आशंका है और संभावित हमलों से बचने के लिए साइबर स्पेस की सुरक्षा करना हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। रक्षा मंत्री ने डीडीपी के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेम को तैयार करने के लिए रक्षा उत्पादन विभाग को बधाई दी और कहा कि साइबर सुरक्षा संबंधी मुद्दों का निवारण करने के लिए विभिन्न स्तरों पर साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ सेल स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने साइबर स्पेस में एक प्रमुख शक्ति बनने के लिए देश के लक्ष्य के तहत सभी प्रतिष्ठानों में कार्यबल स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
    इससे पहले प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए सचिव (रक्षा उत्पादन) डॉ.अजय कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सभी रक्षा पीएसयू और आयुध कारखाने सूचना प्रौद्योगिकी पर निर्भर हैं। हालांकि, रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सूचना और साइबर सुरक्षा में किसी भी प्रकार के समझौते से हमारे रक्षा बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, प्राथमिकता के आधार पर एक मजबूत, सख्त और लचीले साइबर सुरक्षा आधारभूत संरचना की स्थापना करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
     डीडीपी के संयुक्त सचिव और मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी डॉ. अमित सहाय ने कार्यशाला में आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन साइबर सुरक्षा के लिए समन्वित दृष्टिकोण बनाने के लिए किया है, ताकि 2018 में रक्षा उत्पादन विभाग एक ढांचागत दस्तावेज जारी कर सके। फ्रेमवर्क राष्ट्रीय नीतियों और दिशानिर्देशों के अनुरूप है और यह सभी संगठनों के लिए अपने मौजूदा साइबर सुरक्षा की दिशा और साइबर सुरक्षा के लिए लक्षित क्षेत्र को वर्णित करने, उनमें सुधार करने तथा निरंतर अवसरों को प्राथमिकता देने के लिए एक सामान्य तंत्र प्रदान करता है। कार्यशाला में गुणता आश्‍वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए), एयरोनॉटिकल गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीएचक्यूए), मानकीकरण महानिदेशालय, रक्षा पीएसयू और आयुध कारखानों के 100 से अधिक मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों ने भाग लिया। 

सरकार बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए गूगल के साथ मिलकर काम करेगी

प्रविष्टि तिथि: 18 JUN 2018 8:12PM by PIB Delhi
गूगल के साथ किया गया एक विशेष सहयोग समझौता
नई दिल्ली: 18 जून 2018: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन):: 
इमेल के जरिये आपके संचार को अत्यधिक आधुनिक बनाने और बहुत सी अन्य खूबियों की सहायता से आज के जनजीवन को बहुत ही असं बनाने वाले गूगल का फायदा अब बाढ़ के पूर्वानुमान में भी मिल सकेगा। 
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई है कि गूगल के साथ गठबंधन से भारत में बाढ़ का कारगर या प्रभावकारी प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। जल संसाधन के क्षेत्र में भारत के शीर्ष प्रौद्योगिकी संगठन केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने गूगल के साथ एक सहयोग समझौता किया है। सीडब्ल्यूसी जल संसाधनों के कारगर प्रबंधन विशेषकर बाढ़ का पूर्वानुमान लगाने एवं बाढ़ संबंधी सूचनाएं आम जनता को सुलभ कराने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस), मशीन लर्निंग एवं भू-स्थानिक मानचित्रण के क्षेत्र में गूगल द्वारा की गई अत्याधुनिक प्रगति का उपयोग करेगा। इस पहल से संकट प्रबंधन एजेंसियों को जल विज्ञान (हाइड्रोलॉजिकल) संबंधी समस्याओं से बेहतर ढंग से निपटने में मदद मिलने की आशा है।
इस समझौते के तहत सीडब्ल्यूसी और गूगल इन कार्यों में आपसी सहयोग के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस), मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक मानचित्रण और जल विज्ञान से जुड़े अवलोकन डेटा के विश्लेषण में तकनीकी विशेषज्ञता को साझा करेंगी (i) बाढ़ पूर्वानुमान प्रणालियों को बेहतर करना, जिससे स्थान-लक्षित आवश्यक कार्रवाई योग्य बाढ़ चेतावनी जारी करने में मदद मिलेगी (ii) बाढ़ प्रबंधन की परिकल्पना करने एवं इसमें बेहतरी के लिए गूगल अर्थ इंजन का उपयोग करने से जुड़ी उच्च प्राथमिकता वाली अनुसंधान परियोजना और (iii) भारत की नदियों पर ऑनलाइन प्रदर्शनियां तैयार करने से जुड़ी एक सांस्कृतिक परियोजना।
मंत्रालय ने इससे पहले वर्ष 2016-17 के दौरान एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एनएचपी)’ का शुभारंभ किया था। एनएचपी विश्व बैंक से सहायता प्राप्त केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसमें पूरे देश को कवर किया गया है। राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना का उद्देश्य जल संसाधन सूचनाओं, बाढ़ से जुड़ी निर्णय सहायता प्रणाली एवं बेसिन स्तरीय संसाधन आकलन/नियोजन के विस्तार, गुणवत्ता एवं पहुंच को बेहतर करना और लक्षित जल संसाधन प्रोफेशनलों एवं भारत के प्रबंधन संस्थानों की क्षमता को मजबूत करना है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग लंबे समय से बाढ़ आने से पहले समय रहते सटीक चेतावनी दिए जाने की मांग करे रहे थे। इस पहल से उनकी यह मांग पूरी होगी। केन्द्रीय जल आयोग 2016 तक अधिकतम एक दिन पहले बाढ़ के स्तर के बारे में जानकारी दे रहा था। 2017 में बाढ़ के दौरान सीडब्ल्यूसी ने बारिश आधारित मॉडल के सहारे परीक्षण के आधार पर तीन दिन पहले बाढ़ के चेतावनी जारी की। गूगल उच्च स्तरीय डिजिटल, तकनीक जिसमें वो अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विशेषज्ञता के सहारे सीडब्ल्यूसी द्वारा प्रदत्त जानकारी के सहयोग से बाढ़ की सटीक जानकारी देगा। अब संभवतः बाढ़ आने के तीन दिन पहले ही लोगों को जानकारी मिल सकेगी। इस समझौते के बाद सरकार को करोड़ों रुपये की बचत होगी। इससे सरकार और आपदा प्रबंधन संगठनों को बाढ़ प्रभावित स्थानों और जनसंख्या की बेहतर जानकारी प्राप्त होगी। यह पहल बेहतर बाढ़ प्रबंधन और बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने में मील का पत्थर साबित होगी।
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वीके/एएम/आरआरएस/बीपी/एसकेपी/डीए – 9074

Sunday, June 17, 2018

नीति आयोग की चौथी बैठक में प्रधानमंत्री की उद्घाटन टिपण्णियां

शासी परिषद एक ऐसा मंच है जो ‘ऐतिहासिक बदलाव‘ ला सकता है
प्रविष्टि तिथि: 17 JUN 2018 3:03PM by PIB Delhi
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की शासी परिषद की चौथी बैठक में उद्घाटन टिपण्णियां कीं।

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों एवं अन्य शिष्टमंडलों का स्वागत करते हुए दुहराया कि शासी परिषद एक ऐसा मंच है जो ‘ऐतिहासिक बदलाव‘ ला सकता है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करेगी जो वर्तमान में देश के विभिन्न भागों को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शासी परिषद ने सहकारिता, प्रतिस्पर्धी संघवाद की भावना के साथ ‘टीम इंडिया‘ के रूप में अभिशासन के जटिल मुद्वों का समाधान किया है। उन्होंने जीएसटी के सुगम आरंभ एवं क्रियान्वयन को इसका एक प्रमुख उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल लेनदेन एवं कौशल विकास जैसे मुद्वों पर उप-समूहों एवं समितियों के जरिये नीति निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इन उप-समूहों की सिफारिशों को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा सम्मिलित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2017-18 की चौथी तिमाही में 7.7 प्रतिशत की स्वस्थ दर से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती इस विकास दर को दो अंकों में ले जाने की है जिसके लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने होंगे। उन्होंने कहा कि 2022 तक नए भारत का विजन अब हमारे देश के लोगों का एक संकल्प है। इस परिप्रेक्ष्य में, उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने, आकांक्षापूर्ण जिलों का विकास, आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, पोषण मिशन एवं महात्मा गांधी की 150 जयंती के समारोहों सहित आज की कार्यसूची के मुद्वों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के अंतर्गत 1.5 लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण कंेद्रों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 10 करोड़ परिवारों को प्रत्येक वर्ष लगभग 5 लाख रुपये के बराबर का हेल्थ ऐश्योरंस उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना, जन धन योजना एवं स्टैंड अप इंडिया जैसी योजनाएं बेहतर वित्तीय समावेश में सहायता कर रही हैं। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक असंतुलनों से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मानव विकास के सभी पहलुओं एवं मानकों पर ध्यान दिए जाने एवं 115 आकांक्षापूर्ण जिलों में बेहतरी लाई जाने की आवश्यकता है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ग्राम स्वराज अभियान योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए एक नए मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। उन्होंने कहा कि अभी तक आकांक्षापूर्ण जिलों के 45,000 गांवों में इसे विस्तारित किया गया है। उन्होंने कहा कि सात महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं: उज्जवला, सौभाग्या, उजाला, जन धन, जीवन ज्योति योजना, सुरक्षा बीमा योजना एवं मिशन इंद्रधनुष में सार्वभौमिक कवरेज का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य लगभग 17,000 गांवों में अभी हाल में हासिल किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में क्षमताओं, सामर्थ्यों एवं संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि चालू वित वर्ष के दौरान, राज्यों को केंद्र से 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हो रहे हैं, जो पिछली सरकार के अंतिम वर्ष की तुलना में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी प्रदर्शित करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां एकत्रित समूह भारत के लोगों की उम्मीदों एवं आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि यहां एकत्रित लोगों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे उनकी उम्मीदों को पूरी करने का हरसंभव प्रयास करें।

इससे पूर्व, नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव कुमार द्वारा मुख्यमंत्रियों एवं अन्य शिष्टमंडलों का स्वागत किया गया। विचार विमर्शों का सभापतित्व गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा किया गया।

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वीके/एएम/एसजकेजे/एनके–9055