Friday, October 11, 2013

BSNL मुलाज़िमों को धमकियों का मामला गरमाया

Fri, Oct 11, 2013 at 5:26 PM
FIR की मांग को लेकर मुलाजिम संगठनों ने किया विशाल प्रदर्शन 
लुधियाना:11 अक्टूबर 2013:(*कामरेड हरजिंदर सिंह//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):बी एस एन एल की राजपत्रित एवं अराजपत्रित युनियनों-ऐसोसिऐशनों जिसमें बी एस एन एल ई यु, संचार निगम एगजीक्यूंटिव ऐसोसिऐशन, ऐ आई जी ई टी ओ ए, नैशनल इम्पबलाईज ऑफ टेलीकाम इम्परलाईज एवं एस सी-एस टी वेलफेयर ऐसोसिऐशन ने बी एस एन एल के एक ठेकेदार की धमकियों के विरोध में महाप्रबंधक दूरसंचार भारत नगर चौंक लुधियाना के सामने विशाल धरना लगाया।  लुधियाना  के सभी बी एस एन एल कर्मी महाप्रबंधक दूरसंचार के कार्यालय  भारत नगर चौंक  में एकत्रित हुए । भारत नगर चौंक में एक घंटा ट्रैफ्कि जाम किया और ठेकेदार का पुतला भी जलाया गया।
उसके बाद सभी बी एस एन एल कर्मी रैली की शकल में  डिप्टी कमीशनर कार्यालय के बाहर ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गए। कॉमरेड बलबीर सिंह सर्किल सचिव बी एस एन एल ई यु, का. हरजिंद्र सिंह जिला सचिव SNEA(I) लुधियाना ने इस रैली को संबोधित किया और ठेकेदार के खिलाफ तुरंत एफ आई आर दर्ज करने के लिए ज्ञापन दिया। उन्होने कहा कि ठेकेदार हाउस किपीँग के नाम पर बी एस एन एल के  लाखों रूपये लूट रहा है| युनियनें/ऐसोसिऐशनें इन गलत कार्य के  खिलाफ संघर्ष कर रही हैं। नेतायों ने आरोप कि ठेकेदार मुलाजिम यूनियन  के नेताओं को फोन पर धमकियां दे रहा है। दिनांक 9-10-2013 को कॉ. हरजिंद्र सिंह जिला सचिव SNEA(I) लुधियाना को ठेकेदार ने धमकी दी क्योंकि वे अपने सहयोगियों को ठेकेदार के जाली बिलों पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दे रहे थे| इस विषय को उन्होंने वरि. महाप्रबंधक को बताया परंतु महाप्रबंधक ने ठेकेदार के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की।
इसी तरह कमीशनर पुलिस लुधियाना के पास भी बी एस एन एल कर्मी बडी संख्या। में पहुँचे और ठेकेदार के विरुध तुरंत एफ आई आर दर्ज करने के लिए ज्ञापन दिया। पुलिस कमिश्न।र ने नेतायों को विश्वाेस दिलाया कि ठेकेदार के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।        
कामरेड परमजीत सिंह जिला प्रधान बी एस एन एल ई यु लुधियाना, कामरेड कमलजीत सिंह शंकर जिला प्रधान SNEA(I),  कामरेड प्रीतम चंद जिला सचिव NFT BSNL Employees, कामरेड विजेन्द्र सिंह जिला सचिव AIGETOA , कामरेड सुरजीत सिंह जिला सचिव NFTE BSNL, कॉ अमरीक सिंह जिला प्रधान बी एस एन एल ई यु एवं अवतार सिंह झांडे सहायक जिला सचिव बी एस एन एल ई यु लुधियाना ने भी एकत्रित कर्मियों को संबोधन किया ।   

*कामरेड हरजिंदर सिंह फोरम ऑफ बी एस एन एल युनियन/एसोसिएशन, लुधियाना के चेयरमैन हैं और उनका मोबाईल सम्पर्क नम्बर है : 94170 00806 इस फोरम में बी एस एन एल  की बी एस एन एल ई यु, ऐ आई जी ई टी ओ ए, नैशनल फेडरेशन ऑफ्‍ टेलीकाम इम्प लाईज, एस सी / एस टी वेलफेयर ऐसोसिऐशन एवं नैशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम इम्पलाईज लुधियाना शामिल हैं।

 इसी दौरान रोहित सभरवाल ने स्पष्ट कहा है कि वास्तव में उन्होंने इस विभाग के कई घोटाले बेनकाब  किये थे इसलिए यूनियन के लोग उनसे खफा है।  इसके साथ ही श्री सभरवाल सवाल भी करते हैं कि बिलों पर हस्ताक्षर विभाग के अधिकारी ही करते हैं। अगर इन बिलों में उन्हें कोई घोटाला नजर आता है तो उन्हें अपने विभाग के अधिकारीयों से जाकर पूछना चाहिए कि ये बिल पास क्यूं हुए? इन पर हस्ताक्षर किसने किये? अब देखना है कि अंतिम सत्य कब सामने आता है? 

नीपको : पूर्वोत्‍तर का प्रमुख बिजली उत्‍पादक

11-अक्टूबर-2013 15:43 IST
विशेष लेख//विद्युत                                                            *विशाल दास
     नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (नीपको) की स्‍थापना 02 अप्रैल, 1976 को भारत सरकार के पूर्णत: स्‍वामित्‍व में वि‍द्युत मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। इसकी स्‍थापना देश के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में विद्युत उत्‍पादन की सम्‍भावनाओं के विकास के लिए योजना,  प्रोत्‍साहन, अन्वेषण,  सर्वेक्षण, अभिकल्प, निर्माण, उत्पादन, प्रचालन एवं विद्युत केद्रों के रखरखाव के वास्‍ते की गई थी। नीपको की प्राधिकृत शेयर पूंजी रु. 5000 करोड़ है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में विद्युत उत्‍पादन में इस कॉर्पोरेशन का योगदान 56 प्रतिशत है।

     नीपको भारत सरकार का शेड्यूल 'ए', मिनी रत्‍न श्रेणी-1 उद्यम है। वर्तमान में यह भारत के पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में पांच जलविद्युत और दो तापविद्युत बिजली घरों का संचालन करता है। इनकी अधिष्‍ठापित क्षमता 1130 मेगावॉट है, जिसमें पनबिजली क्षेत्र में 755 मेगावॉट और तापविद्युत (गैस आधारित) में  375 मेगावॉट बिजली का उत्‍पादन होता है। इसके अलावा नीपको 12वीं येाजना में 922 मेगावाट की अतिरिक्‍त अधिष्‍ठापित क्षमता जुटाने की प्रक्रिया में हैं। इस प्रकार इसकी कुल अधिष्‍ठापित क्षमता बढ़कर 2052 मेगावाट हो जायेगी। नीपको ने आने वाले वर्षों में कई जल विद्युत परियोजनाओं को जोड़ने की योजना बनाई है जिनमें अरुणाचल प्रदेश में महत्‍वकांक्षी 3750 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर स्‍टेज -2 एचईपी शामिल है। दो अन्‍य परियोजनाएं यथा सियांग अपर स्‍टेज – 1 (6000 मेगावाट) और कुरूंग एईपी (330 मेगावाट) की योजना है। इसके अलावा 7 बिजलीघरों (1130 मेगावाट) का संचालन किया जा रहा है। नीपको इस समय पांच परियेाजनाओं (922 मेगावाट) का निर्माण कर रहा है। 10 अतिरिक्‍त परियोजनाएं (6110 मेगावाट) निर्माण पूर्व की स्थिति में हैं।

     नीपको वर्तमान में अपनी जल विद्युत परियोजनाओं से करीब 755 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन कर रहा है इनमें  असम की कोपिली जल  विद्युत परियोजना (150 मेगावाट), असम में  कोपिली बिजलीघर, स्‍टेज 1 विस्‍तार (100 मेगावाट), असम में  कोपिली बिजलीघर, स्‍टेज 2 विस्‍तार (25 मेगावाट), नागालैंड में दोयांड जल विद्युत संयंत्र (75 मेगावाट) और अरूणाचल प्रदेश में रंगानदी जल विद्युत संयंत्र (405 मेगावाट) शामिल हैं।

           ताप बिजली क्षेत्र में नीपको 375 मेगावाट बिजली असम में मिलने वाली गैस से तैयार कर रहा है, असम (201 मेगावाट) और अगरतला गैस टर्बाइन प्‍लांट त्रिपुरा (84 मेगावाट), बिजली इसमें शामिल है। औसत प्‍लांट अवेलिबिटी (पीएएफ) 77 प्रतिशत रहा है जबकि ताप बिजली घरों का औसत पीएएफ वर्ष 2012-13 में 76 प्रतिशत रहा।
     नीपको ने कुछ ऐसी परियोजनाएं भी शुरू की हैं, जिनका निर्माण कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं में कामेंग पनबिजली परियोजना, अरुणाचल प्रदेश (600 मेगावाट), पारे पनबिजली परियोजना, अरुणाचल प्रदेश (110 मेगावाट) और तिउरियाल पनबिजली परियोजना, मिजोरम (60 मेगावाट) शामिल हैं। त्रिपुरा में प्राप्‍त गैस से चलने वाली ताप बिजली परियोजना, त्रिपुरा (101 मेगावाट) और अगरतला गैस टर्बाइन कम्‍बाइंड साइकिल एक्‍सटेंशन प्रोजेक्‍ट त्रिपुरा (51 मेगावाट) क्रमश: मई 2014 और दिसम्‍बर 2014 की बिजली की वाणिज्‍यक जरूरतें पूरी करने का लक्ष्‍य रखा है।
     नीपको ने परियोजनाओं को जल्‍दी पूरा करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। इसके लिए एक माडर्न प्रोजेक्‍ट मैनेजमेंट साफ्टवेयर प्राइमावेरा का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। यह परियोजनाओं के नियोजन, अनुसूचीकरण और मॉनिटरिंग में इस्‍तेमाल हो रहा है। नीपको समय-समय पर सलाह और सुझाव देने के लिए रिटेनर कंसलटेंट एवं पैनल आफ एक्‍सपर्ट भी नियुक्‍त करता है जो विभिन्‍न तकनीकी पहलुओं पर समय से काम पूरा करने के लिए सलाह देता है। यह कार्पोरेशन समझौते के अनुसार देर करने वाले ठेकेदारों को नोटिस भी जारी करता है।
     हाल के वर्षों में नीपको ने अपनी गतिविधियों में विविधता लाने के लिए उपाय किए हैं। वह पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करता है। इस मामले में प्रस्‍ताव आमंत्रित करते हुए एजेंसियों की सूची तैयार करने के लिए रुचि की अभिव्‍यक्ति के टेंडर मंगाए जाते हैं और इस प्रकार से सूचीबद्ध एजेंसियों को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं (सौर एवं पवन) की परियोजनाएं लागू करने के लिए प्रस्‍ताव आमंत्रित किए जाते हैं। 15.05.2013 तक कम से कम 10 मेगावाट क्षमता के संयुक्‍त उद्यमों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इस प्रक्रिया में 7 पार्टियों ने भाग लिया और बोलियां 28 जून, 2013 को खोली गयीं। इनका मूल्‍यांकन प्रगति पर है। नीपको ने असम में कोपिली पनबिजली परियोजना के आसपास के लिए एक पवन ऊर्जा का इस्‍तेमाल करने की विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है, इस पवन फार्म की स्‍थापित क्षमता 2 मेगावाट होगी। केन्‍द्र और पवन ऊर्जा टेक्‍नालॉजी, चेन्‍नई को वर्कऑर्डर दिए जा चुके हैं। इस परियोजना के लिए स्‍थल का चुनाव कर लिया गया है और छानबीन का काम चल रहा है। जहां तक सौर ऊर्जा परियोजनाओं का सवाल है, नीपको ने त्रिपुरा में टीजीबीपी स्‍थल पर सौर ऊर्जा के ग्रिड इंटरएक्टिव संयंत्र की विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह परियोजना ठेका देने के 12 महीनों के अंदर पूरी कर लिए जाने का कार्यक्रम है।
     नीपको ने पनबिजली और ताप बिजली की परियोजनाएं लागू करने और उनकी योजना बनाने में विशेषज्ञता हासिल कर ली है। डिजाइन और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उसके पास बहुत तजुर्बेकार और योग्‍यता प्राप्‍त व्‍यावसायिक हैं, जिनकी मदद से नीपको जनता तथा निजी बिजलीघरों को पनबिजली और तापबिजली परियोजनाओं में परामर्श सेवाएं देने की स्थिति में आ गया है। नीपको ने 18 पनबिजली घरों की पीएफआर तैयार की है और अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में प्रधान मंत्री के 50 हजार मेगावाट पनबिजली क्षमता तैयार करने के उपायों के अंतर्गत ये परियोजनाएं तैयार की गयी हैं। नीपको ने मेघालय सरकार को पनबिजली परियोजनाओं की पीएफआर तैयार करने में परामर्श देने की इच्‍छा भी जाहिर की है।
     अपनी सीएसआर प्रतिबद्धताएं पूरी करने की दिशा में नीपको ने सीएसआर गतिविधियों पर भारत सरकार के लोक उद्यम विभाग की तर्ज पर स्‍कीमें बनाई हैं और उसका खास जोर ग्रामीण भारत तथा पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के पहाड़ी राज्‍यों के पिछड़े जिलों पर है। उसने 3 आईटीआई को गोद ले लिया है, इनमें से दो अरुणाचल प्रदेश में और एक असम में है। नीपको पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों को चिकित्‍सा उपकरण भी उपलब्‍ध कराता है। उसने कई चिकित्‍सा शिविर निशुल्‍क आयोजित किए हैं और परियोजना क्षेत्रों के आसपास के पिछड़े छात्रों को छात्रवृत्ति भी देता है।
     नीपको ने 12वीं योजना अवधि के दौरान 922 मेगावाट बिजली क्षमता जोड़ने की योजनाएं बनाई हैं, जिससे इस क्षेत्र में स्‍थापित क्षमता 1130 मेगावाट बढ़कर 2052 मेगावाट हो जाएगी। जहां तक एटी एंड सी क्षतियों का संबंध है, नीपको पूरे पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में इन क्षतियों में कमी लाने के उद्देश्‍य से प्रेषण तंत्र मजबूत कर रहा है। वर्ष 2010-11 में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र और पूर्वी क्षेत्र में एटी एंड सी क्षतियां क्रमश: 37.33 प्रतिशत और 38.24 प्रतिशत थीं। जबकि पूरे उत्‍तर क्षेत्र में, दक्षिण क्षेत्र में और पश्चिमी क्षेत्र में ये क्षतियां क्रमश: 28.91 प्रतिशत, 19.26 प्रतिशत और 24.44 प्रतिशत थीं। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में अधिक बिजली पैदा करने और कोयले और गैस आधारित परियोजनाओं पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जा रहा है। नीपको कोयले और गैस का इस्‍तेमाल कर रहा है जो इस क्षेत्र में खूब मिलता है। हाल ही में सरकार ने इन राज्‍यों को अपफ्रन्‍ट प्रीमियम देने की अनुमति दी है जिससे नीपको द्वारा परियोजनाएं प्राप्‍त करने का काम आसान हो गया है।
     इस क्षेत्र में बिजली की मांग बराबर बढ़ रही है, जिसे देखते हुए नीपको अपने तापबिजली घरों में ज्‍यादा बिजली पैदा करने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए वह ओपन साइकिल से कम्‍बाइंड साइकिल पर आ रहा है। इससे प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा नष्‍ट होने से बचेगी।
     इन परियोजनाओं के पर्यावरण प्रभाव मूल्‍यांकन एवं प्रबंधन योजना रिपोर्टों के एक भाग के रूप में पुनर्वास परियोजनाएं होती हैं। इसका मूल्‍यांकन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय करता है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की योजनाएं राज्‍य सरकारों द्वारा कार्यान्वित की जाती हैं। परियोजना क्षेत्र के प्रभावित परिवारों तथा क्षेत्र के अन्‍य हितधारकों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होते हैं। इस प्रक्रिया में नीपको की कोशिश यह होती है कि कम से कम लोग विस्‍थापित हों और ज्‍यादा प्रभावित न हों। इसीलिए आर एंड आर योजनाएं बनाने से पहले परियोजना प्रभावित परिवारों से सलाह की जाती है ताकि स्‍थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों के आर्थिक सामाजिक और सामाजिक सांस्‍कृतिक स्थिति का मूल्‍यांकन किया जा सके।
     वर्तमान में इस कंपनी का शुद्ध लाभ रुपये 250 करोड़ है और अगले तीन वर्षों में यह बढ़कर रुपये 800 करोड़ हो सकता है। नीपको कोयला और गैस का इस्‍तेमाल कर रहा है जो इस इलाके में बिजली तैयार करने के लिए बहुतायत से उपलब्‍ध है। साथ ही, यह कार्पोरेशन सिक्किम में भी बिजली परियोजनाएं शुरू करेगा। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र का रणनीतिक महत्‍व है अत: नीपको इस क्षेत्र में लोगों को बिजली देने के काम में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
     सरकार ने मंत्रियों का एक सशक्‍तीकरण समूह गठित किया है। यह समूह परियोजनाओं की समीक्षा करेगा और उन पर अमल जल्‍दी कराने के लिए काम करेगा। इसी तरह के अन्‍य मुद्दे भी पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में शुरू किए जाएंगे। यह निगम बेसिनवाइज मास्‍टर प्‍लान भी तैयार करेगा, जिसका उद्देश्‍य होगा यहां तैयार बिजली अन्‍य क्षेत्रों में भेजना। नीपको वन लगाने पर भी जोर दे रहा है जो पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की परियोजनाओं का एक भाग होता है। अपने संचालन का विस्‍तार करने की प्रक्रिया में नीपको अपनी कार्य योजना में सिक्किम को भी शामिल कर रहा है। स्‍थानीय लोगों के विरोध के कारण कई अदालतों ने स्‍टेआर्डर जारी कर दिए हैं, जिससे असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा स्थित सुबनसिरी पनबिजली परियोजना का काम रुक गया है।
     नीपको का कार्य क्षेत्र बहुत विशाल है, इसके कार्य क्षेत्र में नेपाल, भूटान और बांग्‍लादेश भी आते हैं, जहां 24 बीगावाट बिजली तैयार करने की संभावित क्षमता है। इस क्षेत्र में उपलब्‍ध कोयले और गैस से बिजली तैयार करने के लिए नीपको ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि यहां का माहौल और जलवायु विपरीत है। परियोजना स्‍थल दूर-दूर हैं और भौगोलिक स्थितियां दुर्गम हैं, नीपको पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में उपलब्‍ध संसाधनों से बिजली तैयार करने के प्रयास तेज कर रहा है।(पीआईबी फीचर्स)
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*मीडिया एवं संचार अधिकारी, पीआईबी, नई दिल्‍ली
वि.कासोटिया/अर्चना/शुक्‍ल/दयाशंकर- 222
पूरी सूची- 11-10-2013

दुनिया भर में मनाया गया विश्‍व अण्‍डा दिवस

देश भर में किया गया जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
अण्‍डा संवर्द्धन से मिलेगी कुपोषण से लड़ने में मदद
नई दिल्ली:11 अक्टूबर 2013:: इस वर्ष विश्‍व अण्‍डा दिवस 11 अक्‍टूबर, 2013 को मनाया जाएगा। अण्‍डों के सेवन से होने वाले पोषण लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अण्‍डा आयोग ने अक्‍टूबर के दूसरे शुक्रवार को विश्‍व अण्‍डा दिवस के तौर पर घोषित किया है। 
हालाकि अण्‍डों के उत्‍पादन के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है, लेकिन राष्‍ट्रीय पोषण संस्‍थान की प्रतिवर्ष 180 अण्‍डों की सिफारिश की तुलना में भारत में इसकी उपलब्‍धता प्रति व्‍यक्ति करीब 55 अण्‍डे प्रतिवर्ष है। 

अण्‍डों के सेवन के मामले में यह एक बेहद पोषक खाद्य सामग्री है। इसमें प्रतिदिन 12 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ अन्‍य आवश्‍यक पोषक तत्‍वों जैसे विटामीन, अमीनो एसिड और खनिज बहुतायत मात्रा में होते हैं। अण्‍डे के अन्‍दर ल्‍यूटेन और जियाजेनथिन नामक दो पोषक तत्‍व पाए जाते हैं। जिसके कारण अण्‍डे को काफी स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक माना जाता है। हाल के अध्‍ययनों से पता चला है कि इन दोनों तत्‍वों के उपभोग से आयु से संबन्धित रोगों जिसमें खासतौर पर 65 वर्ष की उम्र से ज्‍यादा के लोगों में आंखों की रोशनी में कमी आने जैसे रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि हो जाती है जिसके अलावा अण्‍डे के सेवन से मोतियाबिन्‍द जैसी बीमारियों में भी कमी आती है। 

खाद्य और कृषि संगठन के द्वारा हाल ही में प्रकाशित आकंड़ों के अनुसार दुनिया भर में एक अरब लोग कुपोषण के शिकार हैं और यह संख्‍या 2050 तक 9.1 अरब तक पहुंच सकती हैं। दुनिया भर के स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का यह मानना है कि कुपोषण की समस्‍या से अण्‍डों में मौजूद उच्‍च स्‍तर के प्रोटीन के माध्‍यम से निपटा जा सकता है। 

कृषि मंत्रालय का पशुधन, डेयरी और मत्‍स्‍य विभाग अण्‍डों की पोषक क्षमता के बारे में जानकारी और ज्ञान फैलाने के लिए राष्‍ट्रीय अण्‍डा समन्‍वय समिति और भारतीय पोल्‍ट्री संघों जैसे हितधारकों के साथ मिलकर विश्‍व अण्‍डा दिवस का आयोजन कर रहा है। ये दिवस देश के हर क्षेत्र में मनाया जा रहा है। उत्‍तर में नई दिल्‍ली, पश्चिम में पुणे, पूर्व में रायपुर और दक्षिण में बैंगलौर में इसका आयोजन किया जा रहा है।
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वि.कासोटिया/संजीव/पी.एस.-6579

Thursday, October 10, 2013

पंजाबी फिल्म में पहली बार एक ठगनी का रोल अदा कर रही है नीरू बाजवा

फिल्म की प्रमोशन का शुभारम्भ करने टीम पहुंची गुरु की नगरी में
अमृतसर: 9 अक्टूबर 2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो) - आज तक कई फिल्मों में हीरो को अपनी उंगली पर नचाने वाली नीरू बाजवा अपनी नई फिल्म में नए दूल्हों को अपने पीछे भागने पर मजबूर कर देगी। जी हां, नीरू बाजवा की 11 अक्तूबर को रीलिज होने जा रही फिल्म आरएसवीपी में वह एक ऐसे ठग का किरदार निभा रही है, जो अपने साथियों के साथ नौजवानों का न सिर्फ कीमती सामान लेकर फरार हो जाती है, बल्कि उनकी भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती है। अपनी फिल्म आरएसवीपी की प्रमोशन की शुरूआत करने के लिए नीरू बाजवा आज फिल्म के सह अभिनेता गुग्गू गिल के साथ गुरु नगरी अमृतसर पहुंची। इस मौके पर उन्होंने बताया, कि फिल्म में वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही है, जो शादी के नाम पर नौजवानों के साथ ठगी करती है। उन्होंने बताया, कि इस फिल्म की कहानी आजकल हो रही घटनाओं पर आधारित है। इसलिए इस फिल्म में कामेटी, एक्शन और वह सब-कुछ है, जिसे दर्शक देखना पसंद करेंगे। वहीं, फिल्म के सह अभिनेता गुग्गू गिल ने बताया, कि फिल्म में वह नीरू बाजवा के शिकार लड़के के पिता का रोल अदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया, कि उनका रोल इस फिल्म में काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब नीरू बाजवा उनके बेटे के साथ ठगी मारने के लिए उनके परिवार में आती है, तो उसे पता चलता है कि इस बार उनसे काफी गल्ती हो गई है।

Wednesday, October 09, 2013

अभी चुनावों में पैसे की शक्ति को कम करना बाकी है

संक्षिप्त रह कर भी "जनता का पैसा में" विस्तृत जानकारी दे रहे हैं //कन्हैया झा    -Wed, Oct 9, 2013 at 11:17 AM
कन्हैया झा
(शोध छात्र)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश
+919958806745, (Delhi) +918962166336 (Bhopal)
 भारत सरकार पर जनता के पैसे को खर्च करने की जिम्मेवारी  होती है, जिसे वह अनेक प्रकार के टैक्स के रूप में जनता से वसूल करती है. केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर एक साल में लगभग 15 से 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करती हैं, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र द्वारा तथा 40 प्रतिशत राज्यों द्वारा खर्च होता है. इस पैसे का लेखा-जोखा (audit) रखने की जिम्मेवारी Comptroller and Auditor General (CAG, कैग) पर होती है. संविधान द्वारा स्थापित चुनाव आयोग (EC), केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तथा कैग- इन तीन संस्थाओं पर शासन की गुणवत्ता निश्चित करने की जिम्मेवारी होती है. इनकी प्राथमिकी पर ही केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) गहराई से छान-बीन कर मामले को अदालत तक पहुंचाता है. आज़ादी के तुरंत बाद डाक्टर अम्बेडकर ने कहा कि कैग द्वारा पैसे का सही हिसाब-किताब रखना उच्चतम न्यायालय के काम से ज्यादा महत्वपूर्ण है. भ्रष्टाचार के विकराल रूप लेने में इन संस्थाओं की निष्क्रियता एक मुख्य कारण बनती है.
1990 के दशक में टी.एन.शेशन ने चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र एवं सक्रिय रूप दिया, जिसके कारण चुनावों के दौरान अपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण आया. अभी चुनावों में पैसे की शक्ति को कम करना बाकि है. 90 के ही दशक में बिहार राज्य का 37 करोड़ 70 लाख रुपये का चारा घोटाला लगातार सुर्ख़ियों में रहा, जिसमें 17 वर्ष बाद इस वर्ष दोषियों को सज़ा हुई है. बिहार राज्य का एक छोटा सा विभाग कई वर्षों तक खजाने से सीधे पैसा निकालता रहा और शीर्ष संस्था कैग को इंडियन एक्सप्रेस (मार्च 25, 1996) की एक विस्तृत रिपोर्ट से इसका पता चला. पिछले पांच वर्षों में कैग संस्था की अचानक बढी सक्रियता से सरकार हतप्रभ हुई. कैग विनोद राय सुर्खिओं में आये जब उन्होनें २ जी, कोलगेट, कामनवेल्थ गेम्स आदि अनेक घोटालों को उजागर किया. इन घोटालों को जनता के समक्ष लाने में टीवी मीडिया ने भी सक्रिय भूमिका निभाई. इन सभी मामलों में सीबीआई ने गहराई से छान-बीन की और अदालत से दोषियों को सजा भी दिलवाई.
कैग के अनुमान के अनुसार कोयला घोटाले में 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ. केंद्र सरकार ने कैग पर कार्यपालिका की नीतिओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया. परंतू सन 2004 में कोयला मंत्रालय के सचिव ने पुरानी स्क्रीनिंग कमेटी की खामिओं के बारे में सरकार को आगाह किया था परन्तु कोयला मंत्रालय ने अपने सचिव के नोट की अनदेखी की. कैग ने अपनी कोई नीति न बनाते हुए सरकार की नीतिओं के आधार पर ही नुक्सान की गणना की. सन 1971 में पारित कैग (डीपीसी) एक्ट के अनुसार कैग को सरकार की वित्तीय जांच के अतिरिक्त उसके प्रदर्शन की जांच का भी अधिकार है. सरकार ने जनता के पैसे का कुशलता से उपयोग किया या नहीं - यह कैग के अधिकार क्षेत्र मैं आता है.
यहाँ पर मंत्री तथा मंत्रालय के सचिव के अधिकारों की विवेचना करना जरूरी है. हालांकि पोलिसी बनाने में सचिव अपनी राय देता है, परंतू पालिसी की जिम्मेवारी मंत्री की होती है. भारत सरकार द्वारा सन 2005 में जारी किये वित्तीय नियमों के अनुसार सचिव मंत्रालय का मुख्य लेखा-जोखा अधिकारी है. उसके ऊपर पालिसी के तहत प्रोग्राम को अंजाम तक ले जाने की भी जिम्मेवारी है. इसके अलावा किसी भी पालिसी पर पार्लियामेंट की जन लेखा कमिटी (PAC) के समक्ष जबाबदेही भी उसी की है. फिर मंत्रालय के काम की समीक्षा के लिए कैग भी है. यदि कैग मंत्रालय के कामकाज पर कोई अनुचित टिप्पणी करता है तो धारा 311 के तहत मंत्री अपने अधिकार से सचिव को दण्डित भी कर सकता है.

कैग को अपनी कार्यशैली की भी समीक्षा करनी चाहिए. भारत ही ऐसा एक देश है जहाँ ऑडिट कोड, मैनुअल्स आदि गुप्त रखे जाते हैं, जबकि यहाँ भी कुछ दशक पहले ये आसानी से बुकस्टोर्स पर उपलब्ध होते थे. उसी प्रकार भारत कुछ विरले देशों में आता है जहाँ पर कैग केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों का ऑडिट खुद ही करता है. राज्य स्तर पर लेखा अधिकारी को कोई अधिकार नहीं हैं. सन 1992 में जब कैग पर सुस्त होने के आरोप लगे तो उसने शकधर कमेटी का गठन किया. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया की राज्य विधान सभा की वित्त कमेटीयां लेखा रिपोर्ट्स पर बहस को वर्षों तक टाले रखती हैं. इस सन्दर्भ में राजीव गांधी में राज्यों के कार्यक्षेत्र में आने वाले ग्रामीण विकास कार्यक्रम पर की गयी टिप्पणी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा था कि इन योजनाओं पर सरकारी बजट का केवल 15 प्रतिशत पैसा ही गाँवों तक पहुँचता है.    

Tuesday, October 08, 2013

दामोदरन समिति की रिपोर्ट

08-अक्टूबर-2013 20:21 IST
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने मांगी जनता से प्रतिक्रिया
नई दिल्ली: 8 अक्टूबर 2013: (पीआईबी) भारत में व्‍यापार करने से जुड़े नियामक माहौल में सुधार लाने से संबंधी दामोदरन समिति की रिपोर्ट पर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने आम जनता से प्रतिक्रिया मांगी हैं। इस रिपोर्ट की कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्‍ध हैं और किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या सुझाव 31 अक्‍टूबर तक दिये जा सकते हैं। यह सुझाव या प्रतिक्रिया मंत्रालय की सहायक निदेशक श्रीमती कामना शर्मा को उनके ई-मेल kamna.sharma@mca.gov.in पर भेजे जा सकते हैं। 

देश में व्‍यापार करने संबंधी नियामक माहौल में सुधार लाने के लिए कॉपोरेट मामलों के मंत्रालय ने पिछले वर्ष अगस्‍त में श्री एम दामोदरन की अध्‍यक्षता में इस समिति का गठन किया था। इस समिति को गठित किये जाने का मकसद यह पता लगाना था कि आखिरकार विश्‍व बैंक ने विश्‍व के देशों में व्‍यापार करने से संबंधी कई मानकों के मामले में भारत को सबसे निचला स्‍थान क्‍यों दिया था। इस समिति ने पिछले माह अपनी रिपोर्ट सौंपी है और कई सुझाव भी दिये हैं। जिन्‍हें : कानूनी सुधारों, नियामक ढ़ांचा, नियामक प्रक्रियाओं की क्षमताओं में बढ़ोत्‍तरी करना, सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्ममों को बढ़ावा देना तथा राज्‍य स्‍तरीय मुद्दों पर ध्‍यान देने जैसे विषयों में बांटा गया था।

इस समिति की सिफारिशों और उन्हें क्रियान्वित किये जाने की स‍मय सीमा का मुद्दा मंत्रालय के विचाराधीन है।(PIB)
***वि.कासोटिया/कुमार/पवन-6540

पारदर्शिता सहित बेहतर मुआवजे से ली जायेगी जमीन

07-अक्टूबर-2013 18:47 IST
आने वाले 20 सालों में देश की आधी आबादी शहरों पर रहने लगेगी
विशेष लेख                                                                       *मनोहर पुरी
हम भारतवासियों अपनी धरती को मां मानते है। भारत की तीन चौथाई आबादी सीधे तौर पर खेती पर निर्भर है। किसी भी देश का विकास इस बात से जुड़ा होता है कि उसने अपनी भू सम्पदा का उपयोग किस प्रकार किया है। आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। देश में बढ़ती आबादी के लिए सरकार द्वारा अधिक रोजगार मुहैया करवाये जा रहे हैं। उनके रहने के लिए अधिक मकान उपलब्ध करवाये जा रहे हैं। उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए तरह तरह के उद्योग धन्धे लगाये गये हैं। देश की तरक्की के लिए बड़े बड़े उद्योग विकसित किये जा रहे हैं।

     बढ़ती आबादी और लगातार लगने वाले छोटे बड़े कारखानों के कारण गांवों में खेती के लिए जमीन कम होने लगी है। लोग रोजी रोटी की तलाश में शहरों की ओर आ रहे हैं। इससे शहरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। यह अंदाजा लगाया गया है कि आने वाले 20 सालों में देश की आधी आबादी शहरों पर रहने लगेगी। इन सब कामों के लिए सरकार को भूमि का अधिग्रहण करना पड़ता है। आवास बनाने वाली कम्पनियां और बड़े बड़े कारखाने लगाने वालों को भी जमीन की जरूरत होती है। वे अपनी जरूरत के लिए किसानों से सीधे जमीन खरीद लेते हैं। कुछ लोगों ने किसानों की गरीबी, अशिक्षा और भोले पन का लाभ उठाते हुए उन्हें ठगना शुरू कर दिया था। ऐसी स्थिति में किसानों के हितों की हिफाजत के लिए सरकार ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पारित करवाया है। इसे उचित मुआवजा तथा भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, पुनर्वास और पुनर्स्थापन विधेयक 2012 नाम दिया गया है। यह अधिनियम भूमि अधिग्रहण अधिनियम,1894 के स्थान पर लाया गया है। स्पष्ट है कि पहला कानून बहुत अधिक पुराना हो चुका था। समय समय पर उसमें कोई बदलाव किये गये थे फिर भी वह आज कल के हालात के अनुरूप नहीं था।

     इस विधेयक के अधिनियम बनते ही किसानों को उचित मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो जायेगा। इस अधिनियम से सरकार ने ऐसा प्रबंध किया है कि देश के विकास में कोई रूकावट न आये। किसानों को अपनी धरती का उचित मुआवजा भी मिले। एक समय था जब विकास के कामों के लिए राज्य सरकारें बिना उचित मुआवजे के किसानों की जमीन ले लेती थी। इस कारण कई जगहों पर समय समय पर आन्दोलन होते थे। इस अधिनियम द्वारा सरकार ने यह तय कर दिया है कि जिन की जमीन ली जाये उनको पूरा पूरा और ठीक मुआवजा मिले।

     इस अधिनियम के अनुसार अब मुआवजे की राशि के बारे में जमीन के मालिकों को फ्रिक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नये कानून के अनुसार उनकी जमीन की बाजार में कीमत से चार गुना मुआवजा उन्हें मिलेगा। शहरी इलाकों की जमीन के लिए यह मुआवजा बाजार मूल्य से दो गुना तय किया गया है। ऐसे मामलों में जिन लोगों को मकान खाली करने पड़ेंगेे उनके लिए आवास का प्रबंध भी किया जायेगा। इसके लिए जरूरी है कि ऐसे लोग पुराने मकान में तीन से पांच साल की अवधि तक रह रहे हो। यदि कोई व्यक्ति सरकार द्वारा दिये जा रहे आवास को न लेना चाहे तो उसे मकान बनाने के लिए एक मुश्त सहायता दी जायेगी। यह रकम कम से कम डेढ़ लाख रुपये होगी।

     इतना ही नहीं जमीन मालिकों को ठीक से बसाने और उनकी रोजी रोटी का इन्तजाम भी किया जाये। इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि यदि जमीन पर कब्जा लेने के बाद कब्जा लेने वाले उसे किसी तीसरे पक्ष को ऊंचे दामों पर बेचेंगे तो उसे बढ़ी हुई कीमत का 40 फीसदी हिस्सा जमीन के मालिक के साथ बांटना पड़ेगा। इन सब बातों के पीछे सरकार की मंशा यही रही है कि यदि किसी की जमीन पर बड़े प्रोजेक्ट लगाये जाते हैं तो उनसे होने वाले फायदे में उनकी भी हिस्सेदारी हो जिन्होंने अपनी जमीन दी है। 

     इस अधिनियम में अनुसूचित जातियों और जन जातियों के हितों की रक्षा के लिए खास ख्याल रखा गया है। यह कोशिश की  जायेगी कि अधिसूचित इलाकों की जमीन को न लिया जाये। जमीन का अधिग्रहण तभी होगा, जब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। विविध फसलों वाली सिंचित जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सकेगा। अनुसूचित जनजाति परिवारों को अधिसूचित इलाके के ही किसी एक स्थान पर बसाने का काम किया जायेगा ताकि वे लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाये रखें। कानून में इस बात का ध्यान रखा गया है कि जिन अनुसूचित जाति और जनजाति और वनवासी लोगों को प्रभावित इलाकों की नदियों, तालाबों और बांधों में मछली पकड़ने का हक मिला हुआ था उन्हें सिंचाई और पन बिजली परियोजना के जलाशय वाले इलाके में मछली पकड़ने का हक दिया जायेगा।

     किसी भी परियोजना के लिए जिस जमीन के अधिग्रहण की बात हो वहां पर रहने वालों पर उसका क्या असर होगा इस बात की जांच पड़ताल पहले से ही की जायेगी। इसके लिए उन लोगों से बातचीत करना भी जरूरी बनाया गया है। ग्राम सभा,पंचायत,नगर पालिका अथवा नगर निगम के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वहां के लोगों को इस बारे में पहले से ही पूरी जानकारी दी जाये। यह भी पक्का किया जाये कि जिन लोगों की जमीन ली जाने वाली है उनमें से 80 फीसदी लोग इसके लिए रजामंद हों। निजी कम्पनियों के मामले में यह संख्या 70 प्रतिशत तय की गई है। यदि किसी मामले में राज्य सरकार अथवा निजी कम्पनियां सही जानकारी लोगों को नहीं देती तो उन्हें सजा दी जा सकेगी।

     जिन परिवारों के रोजगार पर असर होगा उन्हें भत्ता अथवा रोजगार का मौका मिलेगा। रोजगार न मिलने पर हर प्रभावित परिवार को 5 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। चाहें तो ऐसे परिवार 20 साल तक हर माह दो हजार रुपये प्राप्त कर सकते हैं। महंगाई बढ़ने पर इस रकम में भी बढ़ोतरी होती जायेगी। एक साल तक अपनी जगह से हटाये गये परिवारों को हर महीने तीन हजार रुपये मिलेंगे। अधिसूचित इलाकों से हटाये जाने वाले अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को 50 हजार रुपये के बराबर अतिरिक्त राशि मिलेगी। इतना ही नहीं हर प्रभावित कुनबे को 50 हजार रुपये परिवहन भत्ता और 50 हजार रुपये का अतिरिक्त पुनर्वास भत्ता भी मिलेगा। कारीगरों और छोटे छोटे काम धन्धे करने वाले की मदद राज्य सरकारें करेंगी। मुआवजे का भुगतान तीन महीने के भीतर ही कर दिया जायेगा। ऐसे ही दूसरी सब बातों के लिए भी समय सीमा निश्चित कर दी गई है। प्रभावित लोगों के हकों का पूरा फैसला होने के बाद ही जमीन का अधिग्रहण किया जा सकेगा। यह अधिग्रहण भी उस इलाके का कलेक्टर ही कर सकेगा। आदिवासी इलाकों में ग्राम सभा की सहमति के बिना अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए  अलग अलग योजनाओं के अनुसार हटाये जाने वाले लोगों को और भी अनेक सुविधायें देने का प्रावधान उनके कानूनी हक के तौर पर किया गया है।

     कानून में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मुआवजा रकम पर किसी प्रकार का आयकर और स्टैम्प शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। इस अधिनियम के द्वारा सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। (PIB)

*लेखक एक स्‍वतंत्र पत्रकार हैं।
वि.कासोटिया/सुधीर/एसएस-218

Monday, October 07, 2013

लुधियाना के टेक्सटाइल मजदूरों की हड़ताल अभी भी जारी

Mon, Oct 7, 2013 at 5:30 PM
श्रम विभाग पर रोषपूर्ण प्रदर्शन:चौथे दिन भी नहीं हुआ कोई फैसला
लुधियाना:07 अक्टूबर 2013: (*विश्वनाथ//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): बहुत ही गहरी साजिशों के अंतर्गत केवल साम्प्रदायिक नारों की पहचान बना दी गई पंजाब की धरती पर आज फिर रोज़ी रोटी के अधिकार की जंग छिड़ी थी। अधिकारों की जंग--मेहनत करके उसका मोल लेने की जंग--लुप्त होते जा बोल फिर जहन में गूँज रहे थे--- 
हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे; 
इक बाग़ नहीं इक खेत नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे।    
आज हड़ताली टेक्सटाइल मजदरों ने श्रम विभाग र्यालय पर रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। शायद इनके पास इसके सिवा कोई चारा भी नहीं बचा था। श्रम विभाग ने मजदूरों और मालिकों को आज की तारीख पर श्रम कार्यालय बुलाया था। लेकिन नये रिवाज के अंतर्गत वहाँ न मालिक मिले न श्रम अधिकारी। लगता है उन्हें इस तरह की आदत पड़ चुकी है।  टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर ने बताया कि मालिकों के साथ साथ श्रम अधिकारियों द्वारा अपनाए जा रहे यह मजदूर विरोधी रवैया मजदूरों को कतई झुका नहीं पाएगा बल्कि इससे मजदूरों में रोष को और भी बढ़ गया है। मजदूर अपने अधिकार हासिल करके ही काम पर लौंटेंगे भले ही उन्हें कितनी भी लम्बी हड़ताल क्यों न लडऩी पड़े।
इस समय 36 कारखानों के मजदूर टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन के नेतृत्व में हड़ताल पर हैं। 40 कारखानों में पहले ही 15 प्रतिशत वेतन/पीस रेट वृद्धि और 8.33 प्रतिशत सालाना बोनस की माँग पर समझौता हो चुका है। लेकिन 36 कारखानों के मालिक मजदूरों को उनके कानूनी अधिकार देने को तैयार नहीं हैं। 
श्रम विभाग कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में कई अन्य संगठनों के नेताओं ने समर्थन जाहिर किया। प्रर्दशन को टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर, कारखाना मजदूर यूनियन के संयोजक लखविन्दर, मोल्डर एण्ड स्टील वर्कज यूनियन के हरजिन्दर सिंह, इंटक के उपाअध्यक्ष सबरजीत सिंह सरहाली व टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के समिति सदस्यों विश्वनाथ, प्रेमनाथ, गोपाल आदि ने सम्बोधित किया। सभी मजदूरों ने जोशीले नारों के साथ यह ऐलान किया कि उनकी लड़ाई हक हासिल होने तक जारी रहेगी।

*विश्वनाथ टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब (रजि.) के सचिव हैं  
लुधियाना के टेक्सटाइल मजदूरों की हड़ताल अभी भी जारी

मामला 3 लाख गायों के सरंक्षण व हिंदू ऐतिहासिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण का

Sun, Oct 6, 2013 at 5:52 PM
शिवसेना ने माँगा राज्य सरकार से 500 करोड़ का पैकेज
विधायक ढिल्लों के घर का किया घेराव:विधायक ने की आवभगत 
लुधियाना, 6 अक्तूबर 2013: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): शिव सेना पंजाब व गऊ सेवा दल की ओर से पंजाब की सडक़ों पर घूम रही 3 लाख गायों के सरंक्षण व हिंदू ऐतिहासिक मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए मांगे जा रहे पैकेज के संबंध में आज विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों के निवास स्थान के समक्ष गायों को साथ लेकर सेना के चेयरमैन राजीव टंडन, पंजाब अध्यक्ष संजीव घनौली, जिला प्रधान जिप्पी शर्मा, शहरी प्रधान अश्विनी चोपड़ा, यूथ प्रधान भानू प्रताप राज पुरोहित, लेवर सैल के अध्यक्ष अजय वर्मा की अध्यक्षता में रोष प्रदर्शन किया गया और मुख्यमंत्री पंजाब के नाम एक मांग पत्र भी सौंपा गया।
इस दौरान अपने संबोधन में टंडन व घनौली ने समस्त पंजाब में तीन लाख से अधिक गायें सडक़ों पर लावारिस घूम रही हैं, जिनकी देखरेख के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं है। गायों के सरंक्षण के लिए पंजाब सरकार गौ सेवा दल को 5 सौ करोड़ रुपये का पैकेज दे, जिससे गायों के लिए आधुनिक गऊशालाएं बनवाकर उनकी देखभाल की जा सके। इसके अतिरिक्त गायों को चराने के स्थान पर किये गये अवैध कब्जों को मुक्त करवाकर दल को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय की प्राचीन समय से ही हिंदू धर्म में पूजा की जाती रही है। इस पूजनीय गायों की तस्करी पर भी प्रतिबंध लगाने के कानून बनाकर तुरन्त प्रभाव से लागू किये जाएं।
गऊ सेवा दल के प्रांतीय अध्यक्ष भूपिंद्र शर्मा, राजेश पल्टा व भारती आंगरा ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि गायों की देखभाल करना, जहां हर भारतीय नागरिक का कत्र्तव्य है, वही सरकारों को भी इसके प्रति गंभीर होना चाहिए। कई गायें सडक़ों पर दुर्घटना का शिकार हो कर अपने प्राण त्याग देती हैं, तो कई जख्मी होकर उपचार से भी वंचित रह जाती हैं। उन्होंने जनता से भी आग्रह किया कि वह गाय की सेवा नि:स्वार्थ करें तो उन्हें जीवन में हर सुख प्राप्त होगा।
जिप्पी शर्मा, अश्विनी चोपड़ा ने कहा कि सरकारें हिंदुओं के प्रति उदासीनता का रवैया त्याग कर हिंदू हितों में भी कार्य करें और उनकी मांगों का प्राथमिकता के आधार पर ध्यान में रखते हुए गऊ सरंक्षण के लिए पैकेज जारी करें। श्री टंडन व घनौली ने कहा कि हिंदुओं के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों का उचित रख-रखाव न होने के कारण खंडरों का रूप धारण कर गये हैं, जिनके सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ का पैकेज अविलम्ब जारी किया जाना चाहिए व भाजपा अपने हिंदुत्व को निष्ठापूर्वक निभाने का कार्य करे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवादियों के हाथों शहीद हुए हिंदुओं व सैनिकों की याद में रोपड़ व लुधियाना में स्मारक बनाने हेतु 10 करोड़ का पैकेज भी दे, जिस प्रकार सिक्खों के शहीदों की याद में बनाये गये स्मारक पर धन व्यय किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सरकार गंभीर नहीं हुई तो संघर्ष को और तेज कर दिया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। जब शिव सैनिक व गऊ सेवा दल के कार्यकत्र्ता बाहरी संख्या में जलूस के रूप में विधायक ढिल्लों के निवास पर पहुँचे तो वहाँ बड़ी गिनती में पुलिस दल तैनात था.। शिव सैनिकों व गौ सेवा दल ने जम कर प्रदर्शन किया।कुछ समय के बाद विधायक ने घर से नहर निकल कर गाय को अपने हाथों से चारा खिलाया व माँग पात्र ले कर प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिया कि वह उनकी माँग को मुख्यमंत्री पंजाब तक शीघ्र पहुँचा कर गायों के संरक्षण के लिए गुहार लगाएँगे।इसके पश्चात आगुओं व कार्यकर्ताओं को विधायक ने अपने निवास पर चाय -पानी भी पिलाया जब शिव सैनिक व गऊ सेवा दल के कार्यकत्र्ता भारी संख्या में मार्च करते हुए  विधायक ढिल्लों के निवास पर पहुँचे तो वहाँ बड़ी गिनती में पुलिस दल तैनात था। शिव सैनिकों व गऊ सेवा दल ने जम कर प्रदर्शन किया।कुछ समय के बाद विधायक ने घर से बाहर निकल कर गाय को अपने हाथों से चारा खिलाया व माँग पत्र ले कर प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि वह उनकी माँग को मुख्यमंत्री पंजाब तक शीघ्र पहुँचा कर गायों के संरक्षण के लिए गुहार लगाएँगे।इसके पश्चात नेताओं व कार्यकर्ताओं को विधायक ने अपने निवास पर चाय -पानी भी पिलाया।श्री टंडन ने कहा कि ऐसा शिव सैनिकों के साथ पहली बार हुआ है जब शिव सेना किसी विधायक /मंत्री का घेराव करने जाएँ और वह उन्हें चाय पानी पिलाकर सम्मान दे। अक्सर शिव सैनिकों से माँग पत्र लेकर उनसे दूरी ही बनाई जाती है।  इस मौके राकेश अरोड़ा, हितेश मेहता उपाध्यक्ष पंजाब गऊ सेवा दल, रवि शर्मा जिला प्रधान पठानकोट, अश्वनी शर्मा जिला प्रधान रोपड़, विपन शर्मा फगवाड़ा, पंकज जुनेजा, शक्ति ढाबी, अरविन्द शर्मा, नरेन्द्र राजपूत, संजीव घई, बंसी डाबी, जय राम चावला, मनोज गुप्ता, दिनांश सिंगला, हनी मेहता, शमा मल्होत्रा, रछपाल सिंह, संजय, डाक्टर राकेश, जतिंद्र दीपू , विक्की आदि शामिल थे।
 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें 988840259

Sunday, October 06, 2013

लुधियाना: मालिकों का अडिय़ल रवैया कायम और मजदूर हड़ताल जारी

Sun, Oct 6, 2013 at 6:37 PM
मजदूरों का रोष गरमाया माँगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का प्रण
लुधियाना06 अक्टूबर, 2013:(*विश्वनाथ) लुधियाना के टेक्सटाइल मजदूरों की आज तीसरे दिन भी जारी रही। इस समय 36 कारखानों के मजदूर वेतन/पीस रेट में 30 प्रतिशत बढ़ौतरी, बोनस तथा श्रम कानूनों को लागू करवाने की माँगों को लेकर हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल टेक्सटाइल हौजरी कामगार यूनियन, पंजाब (रजि.) के नेतृत्व में हुई है। मजदूरों का धरना रोजाना पुडा मैदान में जारी है। 
यूनियन के अध्यक्ष राजविन्दर ने बताया कि महँगाई दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, मालिकों के मुनाफे भी बढ़ रहे हैं लेकिन मजदूरों की आमदन नहीं बढ़ाई जाती। कारखानों में कोई श्रम कानून लागू नहीं होता है। मजदूरों को संवैधानिक अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखा जा रहा। उनकी लड़ाई इस अन्याय कि खिलाफ है। मालिकों को बहुत पहले माँग पत्र दे दिए गए थे। 38 कारखानों में समझौता हो गया है और मजदूरों को 15 से 20 प्रतिशत की वेतन/पीस रेट बढ़ौतरी हासिल हुई है। बाकी कारखानों के मजदूरों को माँगें न मानें जाने के चलते मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ा है। 4 अक्टूबर को 32 कारखानों में हड़ताल शुरु हुई थी। आज 36 कारखानों के मजदूर हड़ताल पर थे। 
राजविन्दर ने बताया कि श्रम विभाग और लुधियाना प्रशासन पूरी तरह से मालिकों का साथ दे रहा है। श्रम विभाग के अधिकारों मालिकों पर कार्रावाई करने और उनपर दबाव बनाकर मजदूरों के हक दिलवाने की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरों के संघर्ष के आगे इस शोषक गठबन्धन को झुकना ही पड़ेगा। कल श्रम कार्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा।

*विश्वनाथ टेक्सटाइल-हौजरी कामगार यूनियन के सचिव हैं और मोबाईल नंबर है  98886-55663 

झूठे वादे कर लोगों को धोखा दिया अकाली-भाजपा ने: दीवान, पप्पी

Sun, Oct 6, 2013 at 3:40  PM
लोगों को पहले से ही मिल रही सुविधाओं पर भी जड़ दिया ताला 
लुधियाना, 6 अक्तूबर 2013:: (पंजाब सक्रीन ब्यूरो)जिला कांग्रेस कमेटी शहरी के प्रधान पवन दीवान व विधानसभा हलका दक्षिणी के इंचार्ज अशोक पराशर पप्पी ने सत्ताधारी अकाली-भाजपा गठबंधन पर झूठे वादों के जरिए पंजाब के लोगों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। जिसने सत्ता हासिल करने के बाद जनहित में कार्य करने के उलट पहले से लोगों को मिल रही सुविधाओं पर भी ताला जड़ दिया और भारी टैक्सों के बोझ तले आम आदमी को दबा दिया गया है।
साऊथ ब्लाक-1 के प्रधान राकेश शर्मा द्वारा वार्ड नं. 16, शेरपुर खुर्द में आयोजित कार्यकर्ता बैठक को संबोधित करते हुए दीवान व पप्पी ने कहा कि 2012 विधानसभा चुनावों से पहले राशन डिपुओं में मिट्टी का तेल मिला करता था, अकाली-भाजपा गठबंधन ने दोबारा सत्ता में आते ही केन्द्र से इस सुविधा बंद करने को लिख दिया और कहा कि यहां पर सभी के पास गैस कनैक्शन है। जबकि सरकार के इस फैसले ने दूसरे राज्यों से यहां आकर रहने वाले प्रवासियों को खुले बाजार से करीब 54 रुपए प्रति मिट्टी का तेल खरीदने पर मजबूर कर दिया है। पंजाब में पैट्रोल व डीजल पर पड़ौसी राज्यों से 8 प्रतिशत ज्यादा वैट वसूला जाता है। जिससे अकाली-भाजपा सरकार का गरीब विरोधी चेहरा सामने आता है।
विकास कार्यों को लेकर गठबंधन के दावों की पोल खोलते हुए उन्होंने कहा कि जिस सरकार के पास अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने को पैसे नहीं है और रोजमर्रा का खर्चा भी केन्द्र से आनी ग्रांटों व उधारी के पैसे से चलता, उसके लिए करोड़ों रुपए के विकास कार्यों की बात करना बेमानी है। उप मुख्यमंत्री सुखबीर ङ्क्षसह बादल द्वारा विधानसभा चुनावों से पहले लुधियाना में मैट्रो चलाने संबंधी किया दावा, अब हवा हो चुका है। इसी तरह, प्रापर्टी टैक्स व अनाधिकृत कालोनियों के निवासियों से वसूले जा रहे भारी रेटों ने लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है, मगर शहरियों की हमदर्द होने का दावा करने वाली भाजपा इसके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है।
इस अवसर पर उन्होंने पार्टी वर्करों को यूपीए सरकार की उपलब्धियों से अवगत करवाया और उन्हें इन उपलब्धियों का लोगों में प्रचार करने को कहा। ब्लाक प्रधान शर्मा ने भरोसा दिया कि पार्टी की नीतियों के प्रति लोगों को अवगत करवाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि लोग यूपीए सरकार की जनहितैषी नीतियों से बहुत खुश हैं। बैठक में अन्यों के अलावा वार्ड प्रधान मोहम्मद असगर गोरा, केदार नाथ, तारिक, सर्बजीत सरहाली, रोहित पाहवा, गुरसिमरन ङ्क्षसह मंड, मोहम्मद सगीर कालिया, परमजीत गुज्जर, राजेश दत्ता, एम.एस. रंधावा, गुरप्रीत ङ्क्षसह, अख्तर, सुरजीत ङ्क्षसह, जसङ्क्षवदर मान, बचित्तर ङ्क्षसह, रवि भूषण, बाबू राम, मोहम्मद अब्बास, राम आसरा, हरि ङ्क्षसह भी मौजूद रहे।
फोटो: कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी शहरी के प्रधान पवन दीवान व विधानसभा हलका दक्षिणी के इंचार्ज अशोक पराशर पप्पी और उपस्थिति का दृश्य।