Saturday, August 22, 2015

लक्ष्मी कांता चावला के अभियान को मिला नया बल

दैनिक जागरण ने दिया भारत रक्षा पर्व को व्यापक आधार 
लुधियाना: 21 अगस्त 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
जब पंजाब में गीत-संगीत, गिद्दा-भांगड़ा और नाच गाना अतीत की बात हो गयी थी और आती थी केवल गोलियों की आवाज़। कभी किसी गांव में चिता जलती और कभी किसी गांव में। इन्सान गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे। सियासत अपनी चालें चलती चलती अपने ही जाल में फंस चुकी थी। उस खतरनाक समय में भारतीय जनता पार्टी की बेबाक नेता लक्ष्मी कांता चावला ने शुरू की सेना के जवानों को राखी बाँधने की एक नयी परम्परा। इसका बहुत विरोध भी हुआ लेकिन सुश्री चावला अपने रास्ते पर अडोल चलती रही। पंजाब का जन मानस दो भागों में बंट गया था-सेना के समर्थकों में और विरोधियों में। खालिस्तान का नारा एक वर्ग विशेष के लिए आज़ादी का प्रतीक बन कर उभरा तो इसके जवाब में वाम दलों की ओर से नारा उठा-
न हिन्दु राज न खालिस्तान
जुग जुग जीवे हिन्दोस्तान 
उस नाज़ुक दौर में सेना को राखी बाँधने का रिवाज सुश्री लक्ष्मी कांता चावला ने अपनी जान हथेली पर रख कर शुरू किया। फिर वक़्त गुज़रा।  अकाली दल ने चुनावों का बायकाट किया तो मतदान बहुत ही कम हुआ। पंजाब में बनी कांग्रेस हकूमत। मुख्यमंत्री थे बेअंत सिंह। उनके दौर में हुयी बेतहाशा सख्ती के परिणाम स्वरूप पंजाब के मिलिटेंट आंदोलन पर काबू पा लिया गया। सन 1992 के समय सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ता ही चला गया। धीरे धीरे आतंकवाद अतीत की बात होती चली गयी। इसके साथ ही लोग भूलते चले गए सुश्री चावला का राखी अभियान। 
अब जब दीनानगर में आतंकी हमला हुआ तो पंजाब के पुराने लोगों को वो सिहरन भरे दिन फिर याद आने लगे। डीके बार तो यह हमला उस दौर की दोबारा शुरुआत का एलान करता महसूस हुआ क्यूंकि थाने पर कब्ज़ा उस भयानक दौर में भी कभी नहीं हुआ था। इसके साथ ही याद आई सेना और सेना के जवानों से जुड़ा रक्षा बंधन का त्यौहार जिसे नए सिरे से शुरू किया था सुश्री चावला ने। 
दैनिक जागरण परिवार ने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए इसे एक व्यापक आधार देते हुए इसे नए सिरे शुरू किया। सीमा की रक्षा में तैनात सेना के जवानों की कलाइयों पर राखी के पावन पर्व पर पंजाब की प्यार की राखियां भी सजें इसका पूरा प्रबंध किया गया। दैनिक जागरण के भारत रक्षा पर्व रथ को यहां भारी संख्या में स्कूली बच्चों,व महिलाओं ने सैनिकों के लिए राखियां व मंगल संदेश लिखे कार्ड भेंट किए। प्यार व सम्मान की प्रतीक ये राखियां दैनिक जागरण का भारत रक्षा पर्व रथ वीर जवानों तक पहुंचाएगा। गौरतलब है की इसे तीन अगस्त से शुरू किया गया था। इसके शुभारम्भ से ही इसे बहुत ही उत्साहजनक स्वागत मिला। यह एक ऐसा आयोजन था जिसकी ज़रूरत हर वो इंसान महसूस कर रहा था जो नहीं चाहता था कि इस पावन भूमि पर फिर से लहू बहे। 
जगह जगह स्वागत हुए जगह जगह कार्यक्रम हुए। भारत रक्षा पर्व रथ का लुधियाना के मुल्लापुर पहुंचने का भव्य स्वागत किया गया। विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, मार्केट कमेटी के चेयरमैन अमरजीत सिंह सहित कई नामी हस्तियों ने रथ का स्वागत किया। इसके बाद चौकीमान पहुंचने पर तेजस पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया व फौजी भाइयों के लिए खुद तैयार की राखियां भेंट कीं।
भारत रक्षा पर्व रथ के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में युवतियों ने नृत्य भी प्रस्तुत किये और राखी से जुड़े गीत भी। देश भक्ति के गीतों से सारा पर्यावरण गूँज उठा। 
विभिन्न रास्तों से होता हुआ भारत रक्षा रथ इसके बाद बीआरएस नगर के इंडिया रिजर्व बटालियन में पहुंचा। वहां सरकारी हाई स्कूल सराभा नगर के बच्चों ने यादगारी कार्यक्रम पेश किए। थर्ड आईआरबी कमांडेंट नवीन सिंगला ने भारत रक्षा पर्व रथ यात्रा की तारीफ करते कहा कि सरहद पार जो जवान हमारी रक्षा कर रहे हैैं, उन्हें ये राखियां व शुभकामना कार्ड अपनेपन, प्यार व सम्मान की अनुभूति कराते हैं। स्कूली बच्चों ने यहां मौजूद जवानों को राखियां भी बांधीं। हर चेहरे पर एक अलग सा जोश और उत्साह था। फोटो खिंचवाने की बारी नहीं आ रही थी। यहाँ वे बच्चे थे जिन्होंने पंजाब के काले दौर को नहीं देखा। उन्होंने केवल अकबरों या इंटरनेट पर पढ़ा या सुना लेकिन इससे उन्हें समझ आ गयी कि अगर वो दौर दोबारा आया तो बहुत बुरा होगा। इन बच्चों को भी लगता कि शायद इस संभावित दोहराव को केवल सेना ही रोक सकती है। 
अलग अलग स्थानों पर देश भक्ति की अलख जगाता भारत रक्षा पर्व का रथ किचलू नगर के भारतीय विद्या मंदिर स्कूल पहुंचा, जहां बच्चों की ओर से तैयार की गई राखियां जवानों के लिए भेजी गई। इसके बाद माडल टाउन के गुरू नानक इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों ने भी राखियां दीं। जहाँ जहाँ से भी यह गुज़रा देश भक्ति का संदेश देता चला गया। 
आखिर लुधियाना शहर में दाखिल होने पर यूथ सेवा सोसायटी के सदस्यों ने रथ का स्वागत किया और मोटरसाइकिल के काफिले के साथ भारत माता की जयकार करते हुए रथ को रखबाग तक पहुंचाया। इनके हाथों में तिरंगा लहरा रहा था आैर मोटरसाइकिल पर भी तिरंगे सजे हुए थे। रख बाग पहुंचने पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बद्दोवाल आईटीबीपी के जवान वहां मौजूद रहे। पूरा बाग़ एक अलग फ़िज़ा से सराबोर था। हर हां में तिरगा की छोटी झंडी।  हर हाथ में राखी या मिठाई का डिब्बा। हवा में गूंजती देश भक्ति के गीतों की धुनें। एक अलग सा अहसास था। कार्यक्रम के दौरान बहुत से संगठनों की कार्यकर्ताओं और स्कूली बच्चों के साथ साथ संगिनी क्लब सदस्याओं व समाज सेवी संस्थाओं की सदस्याें ने फौजी जवानों को राखियां बांधी व उनका मुंह मीठा कराया। संगिनी क्लब सदस्याओं की ओर से रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई। कला निखार की ओर से बच्चों ने भी कार्यक्रम पेश किया। वहां मौजूद जवानों ने भी भांगड़ा किया। रखबाग में ऐसा नज़ारा बहुत देर बाद दिखा। हर तरफ बच्चे बहुत ही उत्साह से इधर उधर आ जा रहे थे। 
इस अवसर पर प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय से पहुंची दीदी सुषमा ने कहा कि दैनिक जागरण के कार्यक्रम के जरिए आईटीबीपी के जवानों को राखी बांधने व भेजने का मौका मिला। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव अमित गोसांई ने कहा कि भारत रक्षा पर्व के जरिए फौजी भाईयों का मनोबल बढ़ेगा। कार्यक्रम में बीजेपी से सबंधित लोग ज़्यादा नज़र आये। अगर अन्य दलों के लोग भी होते तो शायद और अधिक अच्छा संदेश जाता। 
बेलन ब्रिगेड की अनीता शर्मा, शोभा, कृतिका, दिलजोत के साथ साथ संजना और अन्य महिलाओं ने भी सक्रिय शिरकत की। साक्षी जुल्का, संगीता भंडारी, जानीमानी अध्यापिका सुरिंदर कौर, पत्रकार मीनू गिल्होत्रा, और खेलों की दुनिया से जुड़े पत्रकार जगरूप जरखड़ भी वहां मौजूद रहे। कुल मिला कर यह एक सफल कार्यक्रम था। सुश्री लक्ष्मी कांता चावला और उनके समर्थकों के लिए यह एक ख़ुशी की बात होगी कि उनका विचार आज इतने सालों के बाद बहुत बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच रहा है। विचार ज़िंदा रहते हैं और लगातार अपना प्रभाव दिखाते हैं यह सारा आयोजन इसकी एक ज़िंदा मिसाल कही जा सकती है। यह वीडियो भी देखिये उस रक्षा पर्व के ख़ास आयोजन की 



Tuesday, August 18, 2015

मनिकरण में पहाड़ टूटा--कम से कम 10 की मौत


निर्माण के लिए अवैध खुदाई और तेज़ धुप से रुष्ट हुआ पर्वत 
मणिकरण, 18 अगस्त 2015: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
हिंदुयों और सिखों के प्रमुख तीर्थस्थल मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारे की सराय पर मंगलवार दोपहर पहाड़ से एक चट्टान गिरने के कारण हुए हादसे में कम से कम 10 लोग मारे गये, जबकि 10 अन्य घायल हो गये। इसी बीच वाटसअप पे मुर्तकों की संख्या 35 तक भी बताई गयी। घायलों को कुल्लू के जिला अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है, जहां 2 की हालत गंभीर बनी हुई है। कुछ गंभीर घायलों को पीजीआई चंडीगढ़ भी रैफर किया गया। हादसे का शिकार हुए 15 लोग पंजाब के संगरूर जिले के रोगला तलवा मंडी गांव के हैं। कई घायलों की पहचान अभी नहीं हो पायी है। हादसा इतना भयावह था कि सब लोग बदहवास हो गए। हादसा दोपहर करीब 2 बजे हुआ। गुरुद्वारे से सटे पहाड़ से करीब 10 वर्गफुट की चट्टान 500 मीटर की ऊंचाई से सराय पर गिरी तो इसने भवन के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया। ये चट्टानें सभी छतों को तोड़ती हुयी नीचे जा कर नदी में भ गयीं। पूरी इमारत इस हादसे के बाद दो भागों में बटी नज़र आ रही थी। 

8 मंजिला सराय की 6 मंजिलों को नुकसान पहुंचा है। हादसे का शिकार हुए लोगों में से ज्यादातर ऊपर वाली मंजिलों में थे। यह भी कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती है। मलबे में दबे लोगों को निकालने में एनडीआरएफ की टीम के साथ-साथ एसएसबी, होमगार्ड और पुलिस के जवानों के अलावा स्थानीय लोगों ने भी हाथ बंटाया। एसएसबी के कमांडेंट संजीव यादव के मुताबिक अभी यह कहना मुश्किल है कि यहां और शव हो सकते हैं या नहीं। वहीं, गुरुद्वारा प्रबंधकों का कहना है कि सराय भवन के 14 कमरों में 30 लोग ठहरे हुए थे।  इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने घटनास्थल का दौरा किया और घायलों का हाल जाना। हादसे में निक्का राम, तरसेम चंद, मिट्ठू सिंह, अवतार उर्फ कालू, लोकराज, पपिंद्र जीत सिंह, हंसराज और गुरविंदर घायल हुए हैं।
तेज़ धुप से टूट गयीं चट्टानें: बारिश के बाद निकली तेज़ धुप अक्सर खतरनाक होती है। इस क्षेत्र में 2 दिनों की बारिश के बाद मंगलवार को धूप निकली थी। माना जा रहा है कि बारिश के बाद तेज धूप की वजह से पहाड़ के एक हिस्से में दरार आ गयी और चट्टान नीचे आ गिरी। वहीं, कुल्लू के जिला उपायुक्त राकेश कंवर का कहना है कि प्रबंधक पहाड़ काटकर लगातार गुरुद्वारे का विस्तार कर रहे हैं। संभव है कि पहाड़ खिसकने की आज की घटना का कारण अवैज्ञानिक ढंग से की गयी खुदाई हो।
ठंडे और खौलते पानी के कुंड हैं यहां: कुल्लू से करीब 45 किलोमीटर दूर पार्वती नदी के किनारे बना यह गुरुद्वारा गर्म पानी के कुंडों के लिए जाना जाता है। कड़ाके की ठंड में भी इनमें पानी खौलता है। सिख इतिहास के मुताबिक श्री गुरु नानक देव जी यहां भाई मरदाना के साथ आये थे। मरदाना के लिए लंगर पकाने के लिए उन्होंने एक पत्थर हटवाया, तो गर्म पानी का कुंड निकला। उसी पानी में लंगर पकाया गया था। मरने वालों में ज़्यादातर लोग संगरूर ज़िले के रोगले गाँव के हैं। मुर्तकों की पहचान यादविंदर सिंह, लाडी, सोनी राम, गुरदीप सिंह, गोपाल, रघुवीर और काका सिंह के रूप में हुयी है।  अन्यों की पहचान के प्रयास जारी हैं।