Thursday, August 16, 2018

लोकप्रिय भाजपा नेता अटलबिहारी वाजपेयी नहीं रहे

जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित-पीएम मोदी 
नयी दिल्ली: 16 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
जिसे अफवाह बताया जा रहा था पांच बजे के बाद वो सच निकली। लोकप्रिय भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। औपचारिक घोषणा के मुताबिक पांच बज कर पांच मिंट पर आखिरी सांस लिया। हालांकि सोशल मीडिया पर बाद दोपहर दो बजे से ही श्रधांजलिओं का सिलसिला शुरू हो गया था। उनके घर में शोक मालाओं का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बावजूद मीडिया यही कहता रहा कि अभी हालत नाज़ुक है। यह भी कि थोड़ी देर में ही एम्स अस्पताल से बुलेटिन आयेगा। 
इन ख़बरों में बार बार यही बताया जाता रहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत आज लगातार दूसरे दिन भी बेहद नाजुक बनी हुई है और देशभर से तमाम नेता उनका कुशलक्षेम जानने के लिए एम्स पहुंच रहे हैं।
देहांत की खबर आने के बाद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने गहरी सम्वेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा,“मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है।
लेकिन वो हमें कहकर गए हैं- “मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं?”

अटल जी आज हमारे बीच में नहीं रहे, लेकिन उनकी प्रेरणा, उनका मार्गदर्शन, हर भारतीय को, हर भाजपा कार्यकर्ता को हमेशा मिलता रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके हर स्नेही को ये दुःख सहन करने की शक्ति दे। ओम शांति !
इस सारे समय के दौरान वाजपेयी को फिलहाल जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। यह जीवन रक्षक सिस्टम भी उन्हें बचाया न जा सका। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्रियों सुषमा स्वराज और राजनाथ सिंह के एम्स पहुंचने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय नेता के स्वास्थ्य को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं। इस तरह अन्य नेता भी पहुँचते रहे। स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर बीजेपी कार्यालय की सजावट के लिए लगाया गया सामान भी दोपहर को उतार लिया गया। मौत की औपचारिक घिश्ना से पहले ही राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों की सरकारों ने अपने कार्यक्रम रद्द कर दिये थे।
आज सुबह एम्स की ओर से आज जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार कि पूर्व प्रधानमंत्री की हालत वैसी ही बनी हुई है। उनकी हालत नाजुक है और वह जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं।अस्पताल ने कल रात भी एक बयान में कहा था कि दुर्भाग्यवश, उनकी हालत बिगड़ गई है। उनकी हालत गंभीर है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है। यही सिस्टम आज शाम तक भी बताया जाता रहा। कुछ सूत्रों ने कहा था कि निमोनिया के कारण उनके दोनों फेफड़े सही से काम नहीं कर रहे हैं और दोनों किडनी भी कमजोर हो गयी हैं। उनकी हालत नाजुक है। यह नाज़ुक हालत काफी देर तक बनी रही। भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय दिग्गज नेता को गुर्दे में संक्रमण, मूत्र नली में संक्रमण, पेशाब की मात्रा कम होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था। उसके बाद उनकी रिकवरी नहीं हो पाई। आज एम्स पहुंचने वालों में केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान, राधा मोहन सिंह और जगत प्रकाश नड्डा भी शामिल हैं। इनके अलावा नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी एम्स पहुंचे। उल्लेखनीय है कि 1990 के दशक में वाजपेयी सरकार के दौरान उनका बखूबी साथ देने वाले साथ लाल कृष्ण आडवाणी भी अस्पताल पहुंचे।
अब्दुल्ला ने कहा कि हम सभी को उनके स्वस्थ होने की दुआ करनी चाहिए। उनका हालत नाजुक है... हमें नहीं भूलना चाहिए कि यह वही नेता है, जो देश को मजबूत बनाना चाहते थे। वह ना सिर्फ हमारे देश में बल्कि पूरी दुनिया में शांति चाहते थे।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अन्य मुख्यमंत्रियों के भी दिल्ली पहुंचने की संभावना है।
आजीवन अविवाहित रहे वाजपेयी के कुछ रिश्तेदार भी ग्वालियर से दिल्ली पहुंच चुके थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल शाम वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्स गये थे। मोदी करीब सवा सात बजे अस्पताल पहुंचे थे और वह करीब 50 मिनट तक वहां रूके। वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में ताजी जानकारी प्राप्त करने के लिए अस्पताल के बाहर भारी संख्या में मीडियाकर्मी और अन्य लोग मौजूद हैं जिसके कारण सड़क पर यातायात प्रभावित हो रही है।
अस्पताल के बाहर भीड़ और यातायात प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम करती है। वर्ष 2009 में उन्हें आघात आया था, जिसके बाद उन्हें लोगों को पहचानने की दिक्कत होने लगी थी। बाद में उन्हें डिमेंशिया हो गया।

Azadi song....Kanhaiya Kumar - Azadi - Lal Salaam Song @ JNU Campus S...

Wednesday, August 15, 2018

नशा:सरकारों से उम्मीद छोड़ कर हमें खुद ही कुछ करना होगा

FIB के आयोजन में छलका बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा का दर्द 
लुधियाना: 15  अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अनगिनत आयोजन हुए।  इन्हीं में से एक यादगारी आयोजन था जो FIB अर्थात फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो और अन्य सहयोगी संगठनों ने न्यू कुंदन पूरी में कराया। इसका आयोजन तिरंगे के जानेमाने प्रेमी डाक्टर भारत हर वर्ष करते हैं। इस बार उनके साथ बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा,  पंचमुखी हनुमान मंदिर के संजय गुप्ता, पत्रकार प्रेम ग्रोवर, समाज सेवी बलविंदर कुमार वर्मा, ब्लॉग मीडिया की तरफ से रेक्टर कथूरिया और प्रदीप शर्मा, आर टी आई एक्टिविस्ट श्रीपाल शर्मा सहित कई लोग सक्रिय रूप में शामिल हुए। 
तिरंगे को सलामी देने के बाद जहाँ इन लोगों ने स्वतंत्रता दिवस की बधाईयां दे वहीँ यह भी याद दिलाया कि  हिन्दोस्तान और पाकिस्तान दोनों तरफ के पंजाब ने बंटवारे के इस दुखद मौके पर अपनों की हत्याएं देखी हैं, घरों के उजाड़े देखे हैं, बहु बेटियों की इज़त लुटती देखी है--इस लिए उनके आंसुओं और उनकी दुखद यादों को याद रखना भी आवश्यक है। हम नहीं भूल सकते कि किस तरह बहुत से लोग आबादियों के तबादले में शव बना दिए गए। उनके शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो सका। खून से लिथड़े हुए उन दिनों और रातों को भी याद रखना होगा तांकि विभाजन करने की साज़िशों का दोहराव दोबारा होने से रोका जा सके। गौरतलब है कि अब फिर से इसी तरह के साज़िशी तत्व सिर उठा रहे हैं। उनको नाकाम करना ही तिरंगे को सच्ची सलामी होगी। 
बेलन ब्रिगेड की प्रमुख और  FIB की उपाध्यक्ष अनीता शर्मा ने नशे का मुद्दा भी उठाया और इस पर दुःख ज़ाहिर किया कि कोई भी सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस रणनीति बनाने को तैयार नज़र नहीं आती। तरह तरह की चालाकी भरी बातों और बहानों से ही असली मुद्दे को इधर से उधर सरका कर गुम कर दिया जाता है। इसलिए हमें खुद ही उठना होगा। सरकारों से कोई भी उम्मीद छोड़ कर खुद ही आगे आना होगा। नशे को अपनी व्यक्तिगत पारिवारिक समस्या समझना होगा। तभी इसे दूर करने की संभावना बन सकती है। 
इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए समाज सेवी बलविंदर कुमार वर्मा ने कहा कि कोई भी सरकार इस पर कुछ नहीं करेगी क्यूंकि सरकार को शराब से आमदनी होती है। इसके साथ ही उन्होंने सलाह दी कि अफीम-भुक्की इत्यादि खोल दी जानी चाहिए तांकि "चिट्टे" जैसे हत्यारे नशे को रोका जा सके। उन्होंने अफीम से होने वाले औषधीय फायदे भी गिनवाए। 
FIB प्रमुख डाक्टर भारत ने नशे के नेटवर्क और चक्रव्यूह की जानकारी बहुत ही सादगी भरे शब्दों में दी और बताया कि समस्या अंतर्राष्ट्रीय है। नशा और नशे का व्यापार वास्तव में देशी-विदेशी आतंकी संगठनों का  मुख्य हथियार भी है और उनकी आर्थिकता की रीढ़ की हडडी भी। इसलिए इसे समाप्त करना किसी एक सरकार के बस में ही नहीं।   विश्व को इसके खिलाफ एकजुट होना ही होगा। डाक्टर भारत ने कहा कि FIB संगठन इस मकसद के लिए अब पहले से ज़्यादा सक्रिय है और बहुत कुछ कर भी रहा है लेकिन हम इसका खुलासा यहाँ सब के सामने नहीं कर सकते क्यूंकि यह देश और समाज की सुरक्षा से जुड़े मामले हैं। 
पत्रकार और ट्रॉफ़ीमेकर प्रेम ग्रोवर ने सभी को स्वतंत्रता दिवस के प्रतीक चिन्ह और मालाएं भी  भेंट की। उन्होंने कहा कि समाज को नशा मुक्त और अपराध मुक्त करने के लिए जो प्रयास डाक्टर भारत कर रहे हैं हम सभी इस काम में अब उनके साथ हैं।  कोई उनको अकेला न समझे। 
आनेवाले दिनों में FIB का एक नया रंगरूप सभी के सामने आएगा जिस पर संगठनात्मक कार्य ज़ोरशोर से जारी है। अब कोई भी अपराधी FIB की बाज़ निगाहों से बच नहीं पायेगा। हम इस तरह के तत्वों की गुप्त जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को देकर राष्ट्र और समाज को सावधान करते रहेंगे। आवश्यक होने पर इसकी संक्षिप्त सूचना मीडिया के ज़रिये भी दी जाएगी। 
इस आयोजन में देश भक्ति के रस में डूबे गीतों ने आसपास के सारे माहौल को गहरी संवेदना से भर दिया और उन सभी की यादों में आँखें नम हो गयीं जो देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर तो गए लेकिन लौट के घर न आये। कार्यक्रम में उन शहीदों को याद करते हुए नमन किया गया। 


Monday, August 13, 2018

संसद भवन के पास छात्र नेता उम्र खालिद पर हमला-सकुशल बचे

प्रगतिशील क्षेत्रों में गम और रोष की लहर 
नयी दिल्ली: 13 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
जानेमाने लोकप्रिय छात्र नेता उम्र खालिद पर गोली चलने की खबर से सभी प्रगतिशील क्षेत्रों में गम और गुस्से की लहर है। गौरतलब है कि कुछ अज्ञात लोगों ने आज यहां संसद भवन के पास स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब के ठीक बाहर जेएयनू के छात्र नेता उमर खालिद पर हमला किया और गोलियां चलायी लेकिन वह सकुशल बच गए। उनके सकुशल बचने की खबर से संतोष भी पाया जा रहा है लेकिन इससे इस हमले से पैदा हुई चिंता कम नहीं हो रही। यह सब तब हुआ जब स्वतन्त्रता दिवस को केवल एक दिन बाकी है। आज कई जगहों पर स्वतन्त्रता दिवस के आयोजनों की रिहर्सल भी हो चुकी होगी। लेकिन यह गोलियां चलाने वाले इस राष्ट्रीय त्यौहार से एक-दो दिन पूर्व छात्र नेता पर गोलियां चला कर क्या संदेश देना चाहते हैं? 
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि जब खालिद क्लब के गेट पर थे तब दो गोलियां चलायी गयीं। निश्चय ही दिन दिहाड़े इस तरह संसद भवन के पास गोलियां चलाने वाले आम मुजरिम न रहे होंगें। शायद उनके पीछे कोई बड़ा हाथ हो। उल्लेखनीय है कि खालिद ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ संगठन के ‘खौफ से आजादी’ नामक एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने यहाँ पहुंचे थे।
खालिद के साथ कांस्टीट्यूशन क्लब गए एक व्यक्ति  खालिद सैफी ने कहा कि जब हम चाय पीने गए थे जब तीन लोग हमारी तरफ आए। उनमें से एक ने खालिद को जकड़ लिया जिसका विरोध करते हुए खालिद ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की और इसमें सफल भी रहे।  
खालिद सैफी ने कहा कि गोली चलने की आवाज आने से सैर माहौल में अफरातफरी मच गयी। 
समझा जाता है कि इसी हडबडाहट में शायद हमलावर अपना निशाना चूक गए। उन के इस सुनियोजित हमले के बावजूद खालिद अपनी सतर्कता के चलते घायल नहीं हुए। इस पर बोखलाए हुए आरोपियों ने भागते समय एक और गोली चलायी। इससे आसपास के माहौल में एक सनसनी सी फ़ैल गयी।  
इस घटना के कुछ देर बाद उम्र खालिद ने इसका गंभीर नोटिस लिया। इस घटनाक्रम पर खालिद ने कहा कि देश में खौफ का माहौल है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति को डराया-धमकाया जा रहा है। आज की घटना इस हकीकत की एक ताज़ा मूंह बोलती तस्वीर भी है। 
इसी बीच इस सरे मामले की जांच का काम जारी है। पुलिस घटनास्थल पर है और मामले की जांच कर रही है। उसने वह हथियार भी जब्त कर लिया है जो आरोपियों के भागते समय उनके हाथों से गिर गया था। अब देखना है पुलिस कितनी देर में हमलावरों की पहचान करके उन्हें पकड़ पाती है।