Saturday, December 21, 2013

फोर्टिस लुधियाना ने आयोजित किया टेक्नो नी कोर्स पर सीएमई

Sat, Dec 21, 2013 at 3:21 PM
पीमाकोन के साथ मिलकर हुआ विशेष आयोजन 
लुधियाना: 21 दिसंबर 2013: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
आथ्र्रोप्लास्टी और आथ्र्रोस्कोपी (नी रिप्लेसमेंट सर्जरी और पिन होल सर्जरी) के बारे में बात करने के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल, लुधियाना ने पीमाकोन के साथ मिलकर 'टेक्नो नी कोर्सÓ पर कंटीन्यूड मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) आयोजित किया। पूरे पंजाब और चंडीगढ़ से आए जाने-माने सर्जन इस वर्कशॉप में आए। डिपार्टमेंट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के डायरेक्टर डॉ. संजीव महाजन और उनकी टीम के डॉ. एस.के. कोहली (एसोसिएट कंसल्टेंट) और डॉ. राहुल गुप्ता (सीनियर रेजिडंट डॉक्टर) ने जॉइंट रिप्लेसमेंट क्षेत्र के नए ट्रेंड पर बात की।
जानी-मानी नेशनल फैकल्टी डॉ. विवेक मित्तल (कंसल्टेंट, फॉर्टिस हॉस्पिटल-शालीमार बाग, नई दिल्ली), डॉ. रमणीक महाजन (ऑर्थोपेडिक्स कंसल्टेंट, जॉइंट रिप्लेसमेंट एंड आथ्र्रोस्कोपिक सर्जरी, फॉर्टिस हॉस्पिटल-वसंत कुंज और ऑर्थोनोवा हॉस्पिटल), डॉ. प्रतीक गुप्ता और डॉ. आशीष आचार्य (दोनों सीनियर कंसल्टेंट, श्री गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली) ने कम उम्र के मरीजों में टोटल नी रिप्लेसमेंट पर बात की जो घुटनों के जोड़ों के रूमटॉइड आर्थराइटिस (संधिवात गठिया) और पोस्ट ट्रॉमेटिक आर्थराइटिस (अभिघातज गठिया) से पीडि़त हैं।
इस सत्र में इंप्लांट्स की उम्र, नए और बेहतर इंप्लांट मटीरियल, इंप्लांट डिजाइंस और मरीज के रख-रखाव की बेहतरी के लिए सर्जिकल तकनीकों पर बात हुई। फैकल्टी ने स्पोट्र्स इंजरी मैनेजमेंट में भी आर्थोस्कोपिक सर्जरी पर बात की और खासतौर पर एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट इंजरी पर जोर डाला। उन्होंने घावों की आथ्र्रोस्कोपिक मैनेजमेंट पर भी बात की और बाद में आथ्र्रोस्कोपी और आथ्र्रोप्लास्टी पर प्रायोगिक वर्कशॉप भी दी जिसे पंजाब और चंडीगढ़ के ऑर्थोपेडिक सर्जन ने अटेंड किया।
डॉ. संजीव महाजन के नेतृत्व में फोर्टिस हॉस्पिटल लुधियाना के ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट ने पिछले सिर्फ डेढ़ महीने में कई आथ्र्रोस्कोपिक विधियों के साथ-साथ नी रिप्लेस्मेंट के कई पेचीदा केस सुलझाए हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल लुधियाना ऑर्थोपेडिक और जॉइंट रिप्लेसमेंट की सबसे बेहतर सुविधाएं देता है। इसमें एक स्पोट्र्स इंजरी प्रिवेंशन एंड ट्रीटमेंट प्रोग्राम भी शामिल है जो इस रीजन का इकलौता ऐसा प्रोग्राम है।
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड के बारे में:
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड भारत का प्रधान इंटिग्रेटेड हेल्थकेयर डिलिवरी सर्विस देने वाली कंपनी है। कंपनी के हेल्थकेयर पोर्टफोलियो में अस्पताल, नैदानिक और डे-केयर स्पेशेलिटी शामिल हैं। वर्तमान में कंपनी अपनी हेल्थकेयर डिलीवरी सर्विसेज को इंडिया, सिंगापुर, दुबई, मॉरिशियस और श्रीलंका में चला रही है। इस सर्विस में 65 हेलथकेयर फैसिलिटी, 10,000 से भी ज्यादा बेड्स, 240 से ज्यादा नैदानिक सेंटर्स और 17,000 से भी ज्यादा लोगों की टीम शामिल है।

Thursday, December 19, 2013

भारत के समस्त शासनाध्यक्षों से विनम्र अनुरोध//मनीराम शर्मा

Thu, Dec 19, 2013 at 9:09 PM
भारत में मात्र 25% पुलिस बल ही थानों में जनता की सेवा के लिए
मान्यवर,
पुलिस बल की तैनाती–कानून-व्यवस्था तथा अनुसन्धान एवं दोषसिद्धि
आप इस तथ्य से अवागत होंगे कि अमेरिका में प्रति लाख जनसंख्या 256 और भारत में 130 पुलिस है जबकि अमेरिका में भारत की तुलना में प्रति लाख जनसंख्या 4 गुणे मामले दर्ज होते हैं| फिर भी भारत में प्रति लाख जनसंख्या 56 केन्द्रीय पुलिस बल इसके अतिरिक्त हैं| अमेरिका में प्रति लाख जनसंख्या 5806 मुकदमे दायर होते हैं जबकि भारत में यह दर मात्र 1520 है| तदनुसार भारत में प्रति लाख जनसंख्या 68 मात्र पुलिस होना पर्याप्त है| किन्तु भारत में मात्र 25% पुलिस बल ही थानों में जनता की सेवा के लिए तैनात है और शेष बल लाइन आदि में तैनात है जिसमें से एक बड़ा भाग अंग्रेजी शासनकाल से ही विशिष्ट लोगों को वैध और अवैध सुरक्षा देने, उनके घर बेगार करने, वसूली करने आदि में लग जाता है|


भारत में अंग्रेज, जनता पर अत्याचार कर उनका शोषण करने और ब्रिटेन के राज कोष को धन से भरने के लिए आये थे अत: उनकी सुरक्षा को खतरे का अनुमान तो लगाया जा सकता है| किन्तु जनतन्त्र में शासन की बागडोर जनप्रिय, सेवाभावी और साफ़ छवि वाले लोगों के हाथों में होती है अत: अपवादों को छोड़ते हुए उनकी सुरक्षा को कोई ख़तरा नहीं हो सकता| फिर भी इन राजपुरुषों की सुरक्षा को लोकतंत्र में भी कोई ख़तरा होता है तो उसके लिए उनका आचरण ही अधिक जिम्मेदार है|   

पुलिस अपनी बची खुची ऊर्जा व समय  का उपयोग अनावश्यक गिरफ्तारियों में करती है| वर्ष भर में देश में लगभग एक करोड़ गिरफ्तारियां होती हैं व देश के पुलिस आयोग के अनुसार 60% गिरफ्तारियां अनावश्यक हो रही हैं| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार भी देश में गत तीन वर्षों में कम से कम 3,668 अवैध गिरफ्तारियां हुई हैं| यह आंकडा तो मात्र रिपोर्ट किये गए मामले ही बताता है जो वास्तविकता का मात्र 5% ही है| इसमें राज्य आयोगों और बिना रिपोर्ट हुए/दबाये गए आंकड़े जोड़ दिए जाएं तो स्थिति भयावह नजर आती है|     

दुखद तथ्य है कि अपनी सुरक्षा के लिए, जिस पुलिस पर देश की जनता पूरा खर्च कर रही उसका उसे मात्र 25% प्रतिफल ही मिल रहा है और न केवल आम नागरिक की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है बल्कि अनुसंधान में देरी का लाभ दोषियों को मिल रहा है| आपराधिक मामलों में 10-15 वर्ष मात्र अनुसंधान में आम तौर पर लगना इस दोषपूर्ण तैनाती नीति की ही परिणति है| अत: अब नीति बनायी जाए की कुल पुलिस बल का कम से कम आधा भाग जनता की सेवा में पुलिस थानों में तैनात किया जाए ताकि जनता कि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके, अपराधियों को शीघ्र दंड मिल सके और उन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके|

यदाकदा किसी संवेदनशील मामले में न्यायालय द्वारा वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अनुसंधान का आदेश दिया जाता है तो भी बयान हैड कांस्टेबल ही लेता और वही रिपोर्ट बनाता है| वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तो वातानुकूलित कार्यालयों में बैठकर मात्र हस्ताक्षर ही करते हैं और बयान लेने कहीं बाहर नहीं जाते हैं| मात्र हस्ताक्षर करने के लिए देश की गरीब जनता की जेब से इतना भारी वेतन और सुविधाएं देना किस प्रकार न्यायोचित है|   

पुलिस तो जनता की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में कार्य करने वाला बल है जिसका कार्यालयों में कोई कार्य नहीं है| सभी स्तर के पुलिस अधिकारियों को कार्यक्षेत्र में भेजा जाना चाहिए और उन्हें, अपवादों को छोड़कर, हमेशा ही चलायमान ड्यूटी पर रखा जाना चाहिए| आज संचार के उन्नत साधन हैं अत: आवश्यकता होने पर किसी भी पुलिस अधिकारी से कभी भी संपर्क किया जा सकता है और पुलिस चलायमान ड्यूटी पर होते हुए भी कार्यालय का कामकाज देख सकती है| पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश हो को वे पुलिस थानों के कार्यालय की बजाय जनता से संपर्क कर निरीक्षण रिपोर्ट बनाएं|

सादर ,   
भवनिष्ठ                                                                            
मनीराम शर्मा                                                        दिनांक 19 .12 .13 
एडवोकेट
नकुल निवास, रोडवेज डिपो के पीछे
सरदारशहर-331403
जिला-चुरू(राज)

Wednesday, December 18, 2013

सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब: कोहरे पर आस्था भारी

 Wed, Dec 18, 2013 at 10:25 PM
घने कोहरे के बावजूद लाखों श्रद्धालु हो रहे नतमस्तक
अमृतसर: 18 दिसंबर 2013: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
कोहरे की चादर ने स्वर्ण मंदिर को अपनी चादर में लपेट रखा है और दूर से देखने पर स्वर्ण मंदिर दिखाई नहीं दे रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का यहां पहुंच कर नतमस्तक होना इसी बात का सबूत है. कि चाहे कोहरा हो या आंधी आए, श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा में कोई कमी नहीं आती। इसे आस्था ही कहेंगे, कि इतने घने कोहरे के बावजूद जब सड़कों पर वाहन चालकों को अपनी-अपनी गाड़ियां चलाने में इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई लोग तो घरों से बाहर ही नहीं निकल रहे, वहीं अमृतसर स्थित सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब में शीश निवाने वाले श्रद्धालुओं की आमद में कोई कमी नहीं आई है। श्रद्धालु उसी तरह से यहां पहुंच रहे हैं, जैसे जून-जुलाई के महीने में आते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है, कि यह तो मौसम ही ऐसा है और इस मौसम में भी श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। यहां पर इंदौर, चंडीगढ़ और दूसरे राज्यों और शहरों के अलावा स्थानीय निवासी भी पहुंच कर अपनी आस्था और श्रद्धा को प्रकट कर रहे हैं।

Tuesday, December 17, 2013

लुधियाना में छाया रहा घना कोहरा

सुबह से शाम रहा धुंध का ही राज
लुधियाना: 17 दिसंबर 2013: (रवि नंदा//पंजाब स्क्रीन):
मंगलवार 17 दिसंबर का दिन लुधियाना में सर्दी की ज़ोरदार दस्तक लेकर आया। जो लोग कह रहे थे अभी तो गर्मी लगती है उन्होंने भी सर्दी  के सामने हार मान ली। सुबह होने के बावजूद भी कोहरा छटने का नाम नहीं ले रहा था। लोग सूर्य  भगवान के दर्शनों को तरस गए। अगर धुप निकली भी तो बहुत ही मद्धम सी और वह भी बस कुछ कुछ पलों के लिए। मौसम में आई इस तबदीली को अलग अलह वक़त और अलग अलग स्थानों पर अपने कैमरे में कैद किया रवि नंदा ने। आपको यह तस्वीरें कैसी लगीं अवश्य बताएं।
इस कोहरे ने अपना कहर कहाँ कहाँ ढाया होगा, कहाँ कहाँ सड़क हादसे हुए होंगें--कहाँ कहां लोग शीत लहर का शिकार हुए होंगें इसका विवरण आपको पंजाब स्क्रीन की अलग अलग पोस्टों में दिया जाता रहेगा।
यदि आपके आसपास कोहरे के कारण कुछ बुरा घटित हुआ हो तो उसका विवरण भेजने में देर न करें।  आपके नाम के साथ प्रकाशित करेंगे। सम्भव हो तो उसकी तस्वीर भी भेजें। 

Monday, December 16, 2013

दिल जोड़ो, नफरत छोड़ो यात्रा

A journey for love and harmony by khudai khidmatgars
In 50 recent Muzffar Nagar Roit affected places
बू अली शाह क़लन्दर, पानीपत से परमार्थ आश्रम, ऋषिकेश, वाया "हरि कि पौढ़ी, हरिद्वार
20 दिसंबर से 23 दिसम्बर 2013 
दोस्तों,
पिछले कुछ दिनों में मुज़फ्फर नगर और उसके आसपास के इलाकों में जिस तरह लोगों के आपसी रिश्ते टूटे हैं  और समाज का आपसी ताना बाना बिगड़ा है वो बेहद दुखद और चिंता जनक है।
कुछ लोगो की शरारत और उससे फ़ैली ग़लत फ़हमियों ने सदियों से बने हुए रिश्तों की मर्यादा भंग  कर दी, बहुत सी जानें गयी और बहुत से लोगों को वो जगह छोड़नी पड़ी जहाँ वो पैदा हुए और पले बढे, उन्हीं लोगों के बीच डर ने जन्म लिया जो  एक साथ खेले और खाये थे। 
गुस्सा और आवेश हम सब की कमज़ोरी है, और यही कमज़ोरी इंसान से अच्छे बुरे का भेद भुला देती है।  लेकिन गुस्से और आवेश में   ये याद रहे कि  ज़ुल्म का बदला उससे लिया जाये जिसने ज़ुल्म किया है। उसकी जाति, धर्म या बिरादरी वालों से बदला लेना  है। समुदाय के सभी लोग एक जैसी सोच के नहीं होते और गर्म मिजाज़, तिकड़मी व ताकत का ज़ोर दिखने वाले लोगों कि  तो और भी कम होती है। तनाव के वक़्त ऐसे लोग आगे आजाते हैं और सच्चाई और शांति कि आवाज़ कहीं दब जाती है।
आप सब  अंदर कि सच्चाई को टटोलें और एक दुसरे का दुःख बांटें, उत्तेजना उअर अफवाहों को काबू कर निर्दोषों के साथ खड़े हों। पुरे देश के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश  से प्रेरणा स्रोत रहा है। लोग कहते हैं कि यहाँ कि मिटटी ही उपजाऊ नहीं है यहाँ के लोगों के दिलों में मुहब्बत भी पैदा होती है। यहाँ के मज़दूरों और किसानों ने हमेशा दिखाया है कि एकता का किया महत्त्व है। 
आपको याद नहीं कि आप किसानों ने कितनी बार अपनी समस्याओं के लिए एकजुट होकर सरकारों को हिला दिया है। क्या तब आपने कभी एक दुसरे की धर्म और जाति पर ध्यान दिया था? आप सब हमेशा एक होकर अन्याय के लिए खड़े हुए हैं, आज आपके बीच फूट डालकर उसी एकता को तोड़ने कि कोशिश कि जारही है। याद रखिये कि हम सब केवल तब तक सुरक्षित हैं जब तक के एकजुट हैं। 
इसी एक जुटता का प्रदर्शन करने के लिए हम "दिल जोड़ो, नफ़रत छोडो" का नारा लेकर निकले हैं। पानीपत में "बू अली शाह क़लन्दर" की दरगाह जो हमारी साझा विरासत का प्रतीक है से हम मुज़फ्फर नगर और शामली के उन गाँवो, जहाँ आपसी गलफहमी ने घर और दिल दोनों तोड़े थे, होते हुए "हर की पौढ़ी, हरिद्वार" जायेंगे जहाँ से यात्रा स्वामी श्री चेतानन्द जी के परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषीकेश जायेगी।
इस यात्रा का केवल एक ही मक़सद है कि जो प्यार नफ़रत की आंधी में कहीं खो गया है उसे वापस उसकी असली जगह यानि इंसान के दिल में पंहुचा दें। जिस दिन इंसान के दिल में प्यार वापस पहुँच गया वो लोग भी अपने घर पहुँच जायेंगे जिन्होंने इस आंधी में अपने घर-बार खो  दिए।

आप सब भाई, बहनों से ये विनय है कि इस शांति यात्रा में सम्मिलित हों। प्यार और शांति के लिए की जाने वाली यह कोशिश अगर एक दिल भी जोड़ने में कामियाब हुई तो ये हम सब के लिए गर्व की  बात होगी।

यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार है:
20 दिसंबर
दरगाह बू अली शाह क़लन्दर, पानीपत  -  सनौली - कैराना - मन्नीमाजरा - कंडेला - शामली (रात्रि विश्राम)

21  दिसंबर
संभालना - लिसाढ़, लाख बावड़ी - फुगाना - लोई - बुढ़ाना - बसी - कुटबा - कुटबी - खामपुर (रात्रि विश्राम)

22  दिसंबर
मुज़फ्फरनगर, लारबाड - दधेदु -चरथावल - कसियारा  - रोहना - रामपुर तिराहा - बरला - धापर - पुरकाजी - मंगलूर - रुड़की - कलियर (रात्रि विश्राम)

22  दिसंबर
 "हरि कि पौढ़ी, हरिद्वार, परमार्थ आश्रम, ऋषिकेश,

ऑर्गनाइज़र: खुदाई  खिदमतगार, हाली पानीपती ट्रस्ट, जागृति सेवा संसथान, अफ़कार इंडिया फाउंडेशन
Contact : 09911292235,09871700595,09313106745

जनवादी शायर कुलवंत नीलों को याद किया जनप्रेमियों ने

समराला में हुई नीलों को समर्पित पंजाबी साहित्य सभा की बैठक
समराला, 17 दिसबर 2013 ::(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):आखिरी साँस तक आम लोगों को समर्पित रहने वाले जनवादी शायर कुलवंत नीलों को जनप्रेमी साहियकारों ने बहुत ही स्नेह और सम्मान से याद किया। इस मकसद के लिए पंजाबी साहित्य सभा समराला की विशेष एकत्रिता सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल में सवर्गीय शायर कुलवंत नीलों को समर्पित की गई। इस विशेष बैठक की अध्यक्षता बिहारी लाल सद्दी ने की। बैठक में कुलवंत नीलों संबंधी सभा द्धारा तैयार की गई एक पुस्तिका भी जारी की गई। कुलवंत नीलों संबंधी बातचीत आरंभ करते हुए कहानीकार गुरपाल लिट ने कहा कि वह मेरे बड़े भाई व साहित्यक गुरु थे। प्रो. बलदीप ने भी अपनी यादें कुलवंत नीलों के साथ व्यकत की। कुलवंत तर्क ने भी इस मौके पर अपने उस महान अध्यापक को याद किया। इस बैठक में अतीत को ताज़ा करते हुए कहानीकार सुखजीत, गुरनाम सिंह, जोगिंदर जोश ने भी कुलवंत नीलों के साथ यादें व्यक्त की। इस मौके ‘निकीयां करूं बलां’ मासिक अंक जारी किया गया। इस समय सभा द्धारा कुलवंत नीलों के पुत्रों रामपाल सिंह व कमलजीत नीलांे को सम्मान चिन्ह देकर सनमानित किया गया। रचना के दौर में मनदीप माणकी ने कविता, करम चंदपूर्व मैनेजर व करमजीत बासी ने व्यंग, जोगिंदश जोश ने कविता, जसवीर समराला ने कविता, बलवरी सिंह ने गजल, संतोख सिंह कोटाला ने कहानी, गुरनाम बिजली ने कुछ शेयर व्यक्त किए। जगदीश नीलों की गज़ल पर भी विचार चर्चा की गई। इस बैठक में अन्य के अलावा इंदरजीत सिंह कंग, दर्शन सिंह कंग, दीप दिलबर, तसविंदर सिंह बडैच, लील दयालुपरी, संदीप तिवाड़ी, सूर्यकांत वर्मा, मनिंदरजीत सिंह नीलों, सिमरनजीत सिंह कंग, प्रेम सागर शर्मा तथा अन्य भी शामिल थे।

लुधियाना की ताजपुर रोड पर हुआ भयानक सड़क हादसा

कार चला रहा राजकुमार भगवत कृपा से बाल बाल बचा
लुधियाना: 16 दिसंबर 2013:  (रवि नंदा//पंजाब स्क्रीन):
सड़कों पर हो रहे हादसे लगातार लोगों की ज़िंदगी से खेल रहे हैं लेकिन इनकी रोकथाम के लिए कोई कारगर उपाय नहीं किया जा रहा हालांकि विज्ञान के इस दौर में इस तरह की रोकथाम के बहुत से तकनीकी उपाय किये जा सकते हैं पर लगता है समाज और सरकार दोनों को ही इंसानी ज़िंदगियाँ अब सस्ती लगने लगी हैं। जो तस्वीर आप देख रहे हैं यह आज सुबह लुधियाना की ताजपुर रोड पर हुए एक भयानक सड़क हादसे की है।
हादसा बहुत ही भयानक था लेकिन कहते हैं न जिसको राखे साईयां मार सके न कोय.… बस उसी कहावत के अनुसार कार चला रहा राजकुमार बाल बाल बच गया।  है न करिश्मा कुदरत का!
आसपास के लोग जहाँ इस हादसे से निराश और भयभीत हैं वहीँ इस बात से खुश भी हैं कि राजकुमार की जान बच गयी और परिवार उजड़ने से बच गया। इस हादसे का और विवरण मिलते ही तुरंत आप तक पहुँचाया जायेगा।

अपने पैतृक गाव पहुंच भावुक हुए शहबाज शरीफ

Mon, Dec 16, 2013 at 12:44 PM
जाति उरमां गांव के निवासियों को पाकिस्तान आने का दिया न्योता
नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ के पिता के नाम पर बनेगा गांव में लड़कियों का अत्याधुनिक स्कूल 
मुख्यमंत्री बादल ने की ऐतिहासिक घोषणा
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):
भारत भ्रमण पर पहुंचे पाकिस्तान पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ अपने पैतृक गांव जाति उमरां पहुंच कर भावुक हो गए। अपने पड़दादा की मजार पर चादर चढ़ाने और गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने के बाद शहबाज शरीफ ने कहा, कि आज दोनों मुल्कों को आजाद हुए कई वर्ष बीत चुके हैं और इस दौरान दोनों मुल्कों ने कई जंगे लड़ी है, लेकिन हासिल कुछ भी नहीं हुआ है। लेकिन अब वक्त आ गया है, कि दोनों मुल्क एक हों, ताकि इस क्षेत्र में अमन और शांति बहाल हो सकें। उधर, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल ने आज शहबाज शरीफ के पिता के नाम पर गांव में लड़कियों के एक स्कूल का निर्माण करने की घोषणा की।
     आजादी के बाद से ही दोनों देशों ने कई जंगें लड़ी हैं और कई तरह की लड़ाइयों में हिस्सा लिया है। लेकिन आवाम जंग नहीं, दोस्ती चाहती है। यह कहना है, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाई और पाकिस्तानी पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ का। वह आज अपने पैतृक गांव जाति उमरां में अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ पहुंचे और अपने पड़दादा की मजार पर चादर चढ़ाने के बाद जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरानवह कई बार भावुक हुए और अपने भारत भ्रमण के अलावा अपने पिता की ओर से जाति उमरा गांव के लोगों और उनके जाति उमरां गांव में बिताए गए किस्सों के बारे में जानकारी देते रहे। इस दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाइयों का जिक्र करते हुए कहा, कि इन लड़ाइयों से दोनों मुल्कों को सिवाए बेरोजगारी और गरीबी की कुछ हासिल नहीं हुआ। लेकिन आज समय बदल चुका है और दोनों मुल्कों के लोग न सिर्फ एक होना चाहते हैं, बल्कि बेरोजगारी और गरीबी को दूर करना चाहते हैं।
उधर, इस मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जहां शहबाज शरीफ का स्वागत किया, वहीं जाति उमरां गांव में शरीफ परिवार के पिता के नाम पर लड़कियों का एक अत्याधुनिक स्कूल के निर्माण के अलावा अन्य कई प्रोजेक्टों की घोषणा की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, कि वह चाहते हैं कि जल्द ही दोनों मुल्कों के बीच खींची लकीर को मिटा दिया जाए। वहीं, उप मुख्यमंत्री ने शहबाज शरीफ से आग्रह किया, कि उनके परिवार का कोई न कोई सदस्य हर वर्ष भारतीय पंजाब का दौरा करें। 
     वहीं, गांव के लोगों के मुताबिक शहबाज शरीफ काफी लंबे समय के बाद भारत आए हैं और उन्होंने उनके स्वागत में पलकें बिछा रखी है। उनके मुताबिक गांव के लोग पिछले लंबे समय से उनका इंतजार कर रहे थे और आज उनका इंतजार खत्म हुआ है।