Friday, October 25, 2013

आओ एक इतिहास रचाएं…//डॉ अ कीर्तिवर्धन

        (मानव कल्याण हेतु शुभकामना सन्देश)              Fri, Oct 25, 2013 at 8:53 PM

अमावस्या की गहन रात्रि में , आशाओं के दीप जलाकर ,
इस धरती पर स्वर्ग बनाएं , आओ एक इतिहास रचाएं ।

एक बालक को शिक्षित करके ,शिक्षा का एक दीप जलाकर ,
शिक्षित भारत देश बनाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

इस धरती पर वृक्ष लगाकर , इस माँ को गहने पहनाकर ,
प्रदुषण को दूर भगाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

युद्ध उन्मादी लोगों को भी , शान्ति का हम पाठ पढ़ाकर ,
विश्व विजय अभियान चलायें , आओ एक इतिहास रचाएं।

निस्वार्थ भाव से मानव सेवा , मानवता आधार बनाकर ,

दीन दुखी का दर्द मिटायें , आओ एक इतिहास रचाएं।

संस्कृति का सार जानकर , आयुर्वेद की बात मानकर ,
रोग मुक्त समाज बनाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

अब दमा दम का रोग नहीं है , पूर्व जन्मों का भोग नहीं है ,
दमा रोग को जड़ से मिटायें , आओ एक इतिहास रचाएं।

माँस -मदिरा ,क्रोध त्यागकर , तमस भाव को दूर भगाकर ,
दमा एलर्जी दूर भगाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

पथरी भी कोई रोग नहीं है , कुदरत का संयोग नहीं है ,
खान पान से इसे भगाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

मानव सेवा धर्म बनाएं , सात्विकता जीवन में लायें ,
जात पात का भेद मिटाकर , आओ एक इतिहास बनाएं।

दीपावली के पावन अवसर पर , धरती को रोशन करने को ,
नन्हे नन्हे दीप जलाएं , आओ एक इतिहास रचाएं।

शुभकामनाओं के आदान प्रदान में , उपहारों का बोझ घटाएं ,
मितव्यता का सन्देश फैलाकर ,आओ एक इतिहास रचाएं।


डॉ अ कीर्तिवर्धन (08265821800)
विद्या लक्ष्मी निकेतन
53 -महालक्ष्मी एन्क्लेव ,मुज़फ्फरनगर -251001

बीएसएफ ने कराया सैमीनार

Fri, Oct 25, 2013 at 9:10 PM
मकसद लोगों को नशे के खिलाफ एकजुट करना
पंजाब सरकार भी कर रही है सख्त कार्रवाई-गुलजार सिंह रणिके
*सीमावर्ती गांवों में नशे की रोकथाम बना अब मुख्य निशाना 
*अगस्त महीने से शुरू हुआ  यह विशेष अभियान 
*विशेष अभियान से तस्करी पर लगा अंकुश
*लोगों के सहयोग से तस्करी का धंधा होगा नेस्तनाबूद 
*आईजी बीएसएफ ने खुद सम्भाली कमान 
अमृतसर: 25 अक्टूबर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): पंजाब में नशे की तस्करी और नशे के सौदागरों के खिलाफ बीएसएफ की ओर से जंग का ऐलान कर दिया गया है। अपनी इस योजना के तहत बीएसएफ की ओर से कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। जिनमें से जहां  सीमा पर मुस्तैदी बढ़ाई गई है, वहीं सीमा के इस ओर तस्करों को काबू करने और उनके नेटवर्क को तोड़ने के इरादे से सीमावर्ती गांवों को लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस संबंध में शुक्रवार को सीमावर्ती कस्बा अटारी में एक सैमीनार का आयोजन किया गया है। जिसमें पंजाब फ्रंटियर बीएसएफ के आईजी अजय कुमार तोमर और केबिनेट मंत्री गुलजार सिंह रणिके विशेष रूप से शामिल हुए। इस मौके पर बीएसएफ के आईजी अजय कुमार तोमर ने कहा, कि अगस्त महीने में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के सार्थक नतीजे आने शुरू हो गए हैं। अगस्त महीने से लेकर आज तक पंजाब फ्रंटियर में करीब एक सौ किलोग्राम हेरोइन बरामद हो चुकी है। उन्होंने कहा, कि इस मुहिम में आम लोगों को शामिल कर उन्हें नशे के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे नशे के कुप्रभावों के बारे में अपने आसपास के लोगों और खास तौर पर युवा पीढ़ी को भी बताएं और उन्हें नशे से दूर होने में उनकी मदद करें।
      बीएसएफ के आईजी अजय कुमार तोमर ने कहा, कि जम्मू-कश्मीर में हो रही गोलीबारी के बावजूद पंजाब सीमा पर इस तरह का कोई भी खतरा नहीं है। इसके अलावा आगामी सीजन में घने कोहरे के कारण भी सीमा पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए बीएसएफ की ओर से विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। जिस कारण इस सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई भी खतरा खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।
     इस मौके पर पहुंचे केबिनेट मंत्री गुलजार सिंह रणिके ने कहा, कि पंजाब सरकार नशे के सौदागरों और नशीले पदार्थों के खिलाफ एक अभियान छेड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीएसएफ की ओर से इस मुहिम में शामिल होने से यह अभियान जरूर सफल होगा। इसके अलावा उन्होंने कहा, कि पंजाब सरकार या शिरोमणि अकाली दल का कोई भी नेता नशे बेचने वालों की सिफारिश नहीं करते, बल्कि इनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के लिए पुलिस को निर्देश जारी किए जा रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से नशे के सौदागरों के खिलाफ बड़ी मात्रा में केस दर्ज हो रहे हैं।
     उधर, इस मौके पर पहुंचे लोगों ने भी बीएसएफ की ओर से चलाए जा रहे अभियान की प्रशंसा की। इनके मुताबिक बीएसएफ के प्रयासों के चलते ही लोग अब जागरूक हो रहे हैं और यही कारण है, कि पिछले कुछ दिनों के दौरान न सिर्फ भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की गई है, बल्कि तस्करों के खिलाफ केस भी दर्ज हुए हैं। नशे की गर्त में फंसे युवकों को सुधारने के लिए सभी ने गांवों में डी एडिक्शन सेंटर खोलने की मांग की है। उनके मुताबिक नशा करने वाले को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ केस दर्ज करने से नशे की इस लत से छुटकारा नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें सही उपचार देने से नशे जैसी बीमारी से मुक्ति मिल सकती है।

बाबा फरीद के उर्स के मौके पर श्रद्धा से होगा सजदा

Thu, Oct 24, 2013 at 10:17 PM
पाकिस्तान रवाना हुए अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हाजी सईद 
अमृतसर:24 अक्टूबर 2013(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हाजी सईद सलमान चिश्ती पाकिस्तान स्थित बाबा फरीद की दरगाह पर उर्स के मौके पर सजदा करने के लिए आज अटारी सड़क सीमा के रास्ते रवाना हुए। इससे पूर्व पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, कि वह मोहब्बत और दोस्ती का पैगाम हर समय देते रहते हैं और पाकिस्तान में जाकर भी दुआ करेंगे, कि दोनों मुल्कों के बीच दोस्ताना माहौल कायम हो।
     अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हाजी सईद सलमान चिश्ती पाकिस्तान स्थित बाबा फरीद के उर्स के मौके पर सजदा करने के लिए आज अटारी सड़क सीमा के रास्ते पाकिस्तान रवाना हुए। वह आठ दिनों तक पाकिस्तान में रहेंगे और कई दरगाहों पर जाकर सजदा करेंगे। अपनी रवानगी से पूर्व पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, कि अजमेर शरीफ से हमेशा ही वह दोस्ती और मोहब्बत का पैगाम देते आए हैं और पाकिस्तान में भी दोनों मुल्कों की दोस्ती के लिए दुआ करेंगे।

Wednesday, October 23, 2013

सैर-ए-वतन के तहत विशेष अभियान

 Wed, Oct 23, 2013 at 7:21 PM
जम्मू-कश्मीर के सरपंच और पंच रू-ब-रू हुए गुरू नगरी से
आपरेशन सद्भावना:लंबे समय से जारी जेएंडके के लोगों को अन्य संस्कृतियों से रू-ब-रू कराना 
अमृतसर: 23 अक्टूबर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): भारतीय सेना की ओर से पिछले लंबे समय से आपरेशन सद्भावना के तहत जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों के बच्चों और लोगों को पंजाब और अन्य राज्यों की सैर कराई जाती है और उन्हें वहां की सभ्यता, संस्कृति और कारोबार आदि से रू-ब-रू कराया जाता है। इसी आपरेशन के तहत भारतीय सेना की ओर से जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले से संबंधित सरपंचों और पंचों को पंजाब और राजस्थान की सैर के लिए लाया गया है। ये सरपंच और पंच पिछले कुछ दिनों से गुरु नगरी अमृतसर और आस-पास के इलाकों में गए हैं। जहां उन्होंने यहां के पंचायती राज के दौरान सरपंचों और पंचों की ओर से किए जाने वाले कार्यों का जायजा लिया। इतना ही नहीं, इस दौरान ये सभी विभिन्न प्रोजेक्टों के बारे में भी जानकारी हासिल करने गए, ताकि जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे ही प्रोजेक्ट लगाए जाएं। इन पंचों और सरपंचों के मुताबिक अधिकतरह आतंकी घटनाएं जम्मू क्षेत्र में हो रही है और वहां जब गोलीबारी होती है, तो लोग वहां से पलायन करते हैं। पंचों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के लोग हमेशा शांति से रहना चाहते हैं। लेकिन पाकिस्तान ऐसा नहीं चाहता, जिस कारण वह अक्सर आतंकी घटनाओं को अंजाम देने से नहीं चूकता। वहीं इस मौके पर पेंथर डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल आरएस यादव ने बताया, कि भारतीय सेना की ओर से शुरू किए गए आपरेशन सद्भावना के अब तक कई सार्थक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया, कि जम्मू-कश्मीर के कई लोग और सरपंच-पंच ऐसे हैं, जो कभी भी उस रीजन से बाहर नहीं आए थे। लेकिन आपरेशन सद्भावना के चलते वे जब यहां आए, तो उन्हें काफी अच्छा तजुर्बा हासिल हुआ। जिस कारण वे लोग फिर से यहां आने के लिए लालायित है।

इंदौर में दहाड़े बाबा रामदेव

लुधियाना में दिखाई दिए हिन्दु संतों के हक में पोस्टर 
लुधियाना:23 अक्टूबर 2013:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): उधर इंदौर डेटलाईन से प्रकाशित खबरों के मुताबिक योगगुरु बाबा रामदेव ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस उन्हें हत्या, ड्रग और सेक्स रैकेट जैसे मामले में फंसाना चाहती है। इधर लुधियाना में कुछ पोस्टर देखे गए जिन पर कोई नाम पता नहीं है लेकिन इनमें संत बाबाओं के हक में आवाज़ उठाई गयी है। 
बाबा रामदेव ने इंदौर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की महापराजय निश्चित है। इसी डर से कांग्रेस मेरी छवि को खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने खुलकर कई तरह  की आशंकाएं जतायीं। उन्होंने साफ साफ कहा कि 'मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर कांग्रेस सरकार मुझे सेक्स रैकेट चलाने के किसी मामले में फंसा दे। मैं उनकी आदतों को पूरी तरह समझ चुका हूं। यह नहीं कर पाए तो नशे की सामग्री या अनैतिक कार्यो में लिप्त लोगों को आश्रम में भेजकर खुद ही पुलिस से पकड़वा सकती है। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि मैं उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर बिगुल बजा चुका हूं।' मेरा यह सत्य स्वर उनसे शं नहीं हो रहा। इसके साथ ही योगगुरु ने कहा कि सत्ता के नशे में एक खानदान ने पूरे हिंदुस्तान को बंधक बना लिया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके विरुद्ध सबको आगे आना चाहिए। 
 इधर लुधियाना में  दिखाई दिए कुछ पोस्टरों में संतों के खिलाफ करवाई को एक गहन साजिश बताया गया है। पोस्टर कहते हैं की कभी भी किसी संत के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ लेकिन इसके बावजूद बरी बरी से कई संतों को निशाना बनाया गया। पोस्टर में सवाल भी किया गया है की अब अगला निशाना कौन सा संत?
इसी बीच जानीमानी शायरा डाक्टर कविता किरन की कुछ पंक्तियाँ भी दिखीं :
उन संतों के लिए..जिनमें संतत्व नहीं.
.काहे के सन्यासी है
सारे सत्यानाशी हैं
सुविधाओं को भोग रहे,
कहते हैं वनवासी हैं
ऐसे पण्डत मुल्लों से, 

लज्जित काबा काशी हैं
मुक्ती क्या देंगे वा जो,
खुद भोगें चैरासी हैं
नश्वर नहीं नियंत्रण में,
कहां छिपे अविनाशी हैं-                 
कविताकिरण

Tuesday, October 22, 2013

कभी व्रत नहीं रखा लेकिन 18 वर्षों से कर रही है पति के साथ साधना

हिमांशु कुमार की पत्नी वीणा की गौरवगाथा     --करवाचौथ पर विशेष 
फेसबुक: 22 अक्टूबर 2013: (रेक्टर कथूरिया): इस बार भी करवा चौथ के अवसर पर  सब कुछ पहले की तरह ही था। बाज़ारों में रौनक---मन्दिरों में अधिक भीड़---और मठाई की ज़ोरदार बिक्री। करवा चौथ का दिन और फिर शाम---इस बार भी ज़्यादातर सामग्री पूरी तरह 
से पारम्परिक थी--- इस बार विरोध के स्वर पहले से अधिक थे पर एक स्वर बिलकुल अलग सा था---और वह स्वर है निडरता से सच को सच कहने वाले हिमांशु कुमार का। आम जनता के जाने माने स्नेही मित्र Himanshu Kumar  लिखते हैं---मेरी पत्नी वीणा ने कभी करवा चौथ का व्रत नहीं रखा, कभी मांग नहीं भरी..…शादी के बाद अपना सरनेम नहीं बदला. लेकिन वीणा बस्तर में अट्ठारह साल तक सरकारी हिंसा के शिकार आदिवासियों की सेवा चुपचाप करती रही. बलात्कार पीड़ित लड़कियों के लिए आश्रम में सुरक्षित आवास की व्यवस्था करना, पुलिस द्वारा जिन आदिवासियों के घर जला दिए जाते थे , उन महिलाओं , बुजुर्गों और बच्चों के लिए कपडे, कम्बल, बिस्तर, अनाज खरीद कर उनके घर तक पहुँचाना. सुरक्षा बलों की हमारे आश्रम में बार बार रेड होने पर उनको दहाड़ कर आश्रम से बाहर भगाने का काम करना. आश्रम में रोज़ ही सैंकडों लोगों का भोजन बनता था. जिनमे प्रशिक्षण के लिए आये आदिवासी, पीड़ित लोग , कार्यकर्त्ता , बाहर से आये अतिथी शामिल होते थे. इस सब की कुशलता से व्यवस्था करना. बड़ी बड़ी रैलियों में परदे के पीछे से सारी तैयारियां, आसपास किसी भी आदिवासी को बीमार होने पर या प्रसव के लिए महिलाओं को अस्पताल भेजने के लिए आश्रम की मिनी बस को को तुरंत तैयार कर अस्पताल पहुँचाने का काम वीणा करती रही. उसने मुझे इन सब कामों से मुक्त रखा . और वीणा के दम पर मैं घर के बाहर नेतागिरी करता रहा. आज भी कर रहा हूँ.
करवा चौथ का व्रत तो असल में वीणा के लिए मुझे रखना चाहिए

Monday, October 21, 2013

सत्ता का विकेंद्रीकरण

 Kanhaiya Jha                                                                                          Sun, Oct 20, 2013 at 11:05 AM
(शोध छात्र)
Makhanlal Chaturvedi National Journalism and Communication University, Bhopal, Madhya Pradesh
+919958806745, (Delhi) +918962166336 (Bhopal)
Email : kanhaiya@journalist.com
            Facebook : https://www.facebook.com/kanhaiya.jha.5076 

किसी भी विकास का आधार ग्राम इकाई होती है. राज्य सरकारें बड़े आकार के बावजूद ग्राम स्तर पर जन सेवाएँ जैसे बिजली, पानी, अच्छी सड़क - यहाँ तक की आवारा मवेशियों को हटाना, आदि समस्याओं को सुलझाने में भी अक्षम नज़र आती हैं. यह इसलिए क्योंकि ग्राम स्तर पर धन, स्टाफ आदि की व्यवस्था तथा प्रबंध सही नहीं है.
भारत में सदिओं से पंचायतों ने ही स्वायत्त ग्राम इकाईयों द्वारा पूरे देश का शासन चलाया था. गाँव के प्रमुख लोग स्वयं आपस में बैठकर बिना किसी चुनाव के पंचायत का निर्माण कर लेते थे. गांधीजी ने केंद्रीकृत (Centralized) ब्रिटिश संसद प्रणाली को एक "बिना आत्मा की मशीन" कहा था. आज़ादी के पहले की कांग्रेस सरकारों के अनुभव से उनका यह निश्चित मत बना था की सत्ता के केन्द्रीकरण से भ्रष्टाचार बढेगा. इसलिए उन्होंने स्वायत्त ग्राम इकाईयों के आधार पर विकेंद्रीकृत (Decentralized) शासन तंत्र स्थापित करने की बात कही थी. प्रजातंत्र में प्रजा को शासन का अधिकार देकर सशक्त करना चाहिए. पिछले 66 वर्षों  के अनुभव से यह कहा जा सकता है की केवल वोट के अधिकार से प्रजा सशक्त नहीं होती जिससे वह सत्ता की मनमानी को रोक सके.
परंतु संविधान के पार्ट  IV में पंचायतों की भूमिका गांधीजी के "ग्राम स्वराज" से भिन्न रखी गयी. डाक्टर अम्बेडकर के अनुसार गाँवों के जाति-पांति आदि आधारों पर बंटे होने के कारण पंचायतें स्वराज के लिए सक्षम नहीं थी. नेहरूजी ने भी ग्राम पंचायतों की जगह सांसदों एवं विधायकों को ही प्राथमिकता दी.
सन 1958 में राष्ट्रीय विकास परिषद् ने बलवंत राय मेहता कमेटी की सिफारिशों को मानकर त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्था के गठन को स्वीक्रति दी. शासन के इस तीसरे स्तर पर सबसे नीचे गाँवों में ग्राम-पंचायत तथा नगरों में नगरपालिकाएं एवं वार्ड्स रखे गए. मध्य स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र के लिए ग्राम-समितियां तथा शहरों में नगर निगम अथवा नगर पंचायत को बनाना था. पंचायती राज्य संस्था के शीर्ष पर जिला परिषद् बनाने का प्रावधान था. यह पूरी पंचायती राज संस्था (PRI) राज्य सरकार के नियंत्रण में रखी गयी. सन 1950 के दशक में सभी राज्य सरकारों ने इस व्यवस्था को मान लिया था और पंचायतों को स्थापित करने के लिए क़ानून भी बनाये थे, किन्तु सत्ता का कोई विकेंद्रीकरण नहीं हो सका.
सन 1993 में 73 तथा 74 वें संविधान संशोधन से चुनाव द्वारा पंचायतों के गठन को अनिवार्य किया गया. इस क़ानून में उन्हें विकास तथा सामजिक न्याय के लिए सत्ता एवं जिम्मेवारी देने का प्रावधान था. इसके अलावा संविधान के 11 वें शिडयूल में दिए गए 29 विषयों के क्रियान्वन की जिम्मेवारी भी उन्हीं दी गयी. ब्लाक स्तर पर क्षेत्र के सांसद तथा विधायकों को भी समिति में रखा गया तथा ब्लाक विकास अधिकारी को समिति का प्रशासक बनाया गया. जिला स्तर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के किसी अफसर को पूरी व्यवस्था का प्रशासक बनाया गया.  क़ानून में पंचायत को भी टैक्स आदि लगाने का अधिकार दिया गया.
परंतू पंचायतों के अधिकारों का मामला राज्य सरकारों पर ही छोड़ दिया गया. देश के 15 राज्यों में किये गए एक अध्ययन (EPW: July 5,2003) के अनुसार राज्यों द्वारा पंचायतों को जिम्मेवारियां तो दी गयीं परन्तु सत्ता का उचित हस्तांतरण नहीं किया गया. गोवा में राज्य स्तर पर 50000 प्रशासनिक अधिकारिओं का वेतनमान 250 करोड़ रूपये है. परंतू राज्य की 67 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के शासन के लिए निर्वाचित 188 ग्राम पंचायतों के लिए कर्मचारी बहुत ही कम हैं. यहाँ पर तीन पंचायतों के बीच एक सचिव तैनात किया गया है. इस कारण से टैक्स वसूली, जो की उनका मुख्य कार्य है, वह भी नहीं हो पाता. इस प्रकार संविधान की अवहेलना हो रही है.  
केन्द्रीकरण की जो प्रक्रिया राज्य स्तर पर है वही केंद्र स्तर पर भी आज़ादी के समय से ही चल रही है. सन 1991 में नव-उदारवाद अपनाने के बाद तो इसमें और गति आयी. केंद्र से राज्यों को उनके बजट में सहयोग एक फार्मूले के तहत मिलता है. इस राशि में केंद्र की अपनी महत्वपूर्ण (Flagship) योजनाओं का भी पैसा होता है. 11 वीं पंचवर्षीय योजना में यह राशि बढ़ते-बढ़ते कुल बजट सहयोग के 42  प्रतिशत तक पहुँच गयी थी. केन्द्रीकरण राष्ट्रीय विकास परिषद् में भी केंद्र एवं राज्यों के बीच टकराव का विषय बना रहा है. फिर सरकार द्वारा गठित अनेक कमीशनों ने भी इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की है.

शासन यदि संविधान के अनुसार चले तभी सुशासन कहलायेगा. जब संविधान में पंचायती राज्य संस्थाएँ बनाने के बारे में लिखा है तो केंद्र का यह कर्तव्य बनता है की उन संस्थाओं को एक निश्चित सीमा में बनवाया जाए. यदि कोई राज्य सरकार जान बूझ कर कोताही करती है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाए. अच्छा तो यह हो की जो विषय केवल केंद्र की लिस्ट में आते हैं उनकी योजनायें भी नीचे के स्तर के सहयोग से बनाई जायें.  

Sunday, October 20, 2013

रूस और चीन की यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री का वक्तव्य

20-अक्टूबर-2013 18:40 IST 
रूस और चीन की यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए वक्तव्य का पाठ इस प्रकार है:- 
प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सिंह जब रूस की राजधानी मास्को के वनुकोवो-2 हवाई अडडे पर पहुंचे तो मीडिया वाले उन्हीके इंतजार में थे 
‘‘मैं आज राष्ट्रपति वलादिमिर पुतिन के निमंत्रण पर 14वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मास्को के लिए रवाना हो रहा हूं। उसके बाद मैं प्रधानमंत्री ली खुछियांग के निमंत्रण पर चीन की सरकारी यात्रा पर पेइचिंग के लिए रवाना हूंगा।

रूस के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन वर्ष 2000 से निरंतर किया जा रहा है। यह सम्मेलन हमारी विशेष और गौरवान्वित कार्यनीतिक भागीदारी का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। रूस के साथ हमारे संबंध बेजोड़, व्यापक और सुदृढ़ रहे हैं। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, हाइड्रोकार्बन, व्यापार एवं निवेश जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच नागरिकों के स्तर पर आदान-प्रदान में भी वृद्धि हुई है। मैं राष्ट्रपति पुतिन को इस बात से अवगत कराऊंगा कि हम रूस के साथ संबंधों को कितना महत्त्व देते हैं। मैं इस यात्रा का इस्तेमाल आपसी भागीदारी को हर संभव तरीके से और मजबूत करने के लिए करूंगा।

वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के बारे में भारत और रूस के विचारों में समाभिरूपता रही है और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में आपसी हित के मुद्दों पर भारत हमेशा रूस के नजरिए को महत्त्वपूर्ण मानता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और अशांति, विशेषकर हमारे पड़ोस में अफगानिस्तान में जारी लड़ाई सहित, मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ विविध अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं पर व्यापक चर्चा करने का इच्छुक हूं। मैं राष्ट्रपति पुतिन को इस बात से अवगत कराऊंगा कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के बारे में हम रूस के साथ सलाह-मशविरा और समन्वय बढ़ाने के इच्छुक हैं। 

मास्को स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस ने मुझे इस यात्रा के दौरान डाक्टरेट की मानद उपाधि देने का निर्णय किया है। मैं इस सद्भावना से सम्मानित महसूस कर रहा हूं, जो हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों का प्रमाण भी है।

मेरा अगला लक्ष्य पेइचिंग होगा, जिससे मुझे चीन के नए नेताओं के साथ बातचीत जारी रखने का मौका मिलेगा, जिन्होंने इस वर्ष के प्रारंभ में सत्ता की बागढ़ोर संभाली थी। चीन की मेरी यात्रा प्रधानमंत्री ली खुछियांग की मई में हुई भारत यात्रा के जवाब में हो रही है, जो प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा थी। चीन हमारा सबसे बड़ा पड़ोसी है और हमारे प्रमुख व्यापार भागीदारों में से एक है। प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले 9 वर्ष के कार्यकाल में मैंने चीन के नेताओं के साथ मिल कर काम किया है ताकि एक कार्यनीतिक और सहयोगात्मक भागीदारी कायम की जा सके और दोनों देशों के बीच सहयोग एवं वार्तालाप तथा द्विपक्षीय मुद्दों के समाधान के लिए एक व्यापक व्यवस्था कायम की जा सके। सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम रखने के बारे में हमारे बीच एक महत्त्वपूर्ण सहमति हुई है और भारत-चीन सीमा विवाद के समाधान की दिशा में प्रारंभिक प्रगति भी हुई है।

दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले और सबसे बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले राष्ट्रों के नाते भारत और चीन के बीच क्षेत्रीय, वैश्विक और आर्थिक हितों के बारे में समनुरूपता निरंतर बढ़ रही है, जिसे विकास की हमारी आकांक्षाओं से गति मिली है और उभरते हुए कार्यनीतिक वातावरण से आकार मिला है। भारत और चीन के बीच शांतिपूर्ण, मित्रतापूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों ने दोनों देशों और बृहतर क्षेत्र के लिए स्थिरता का आधार प्रदान किया है। चीन की मेरी यात्रा के दौरान मैं चीनी वार्ताकारों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करूंगा कि समान कार्यनीतिक हितों को एकजुट बनाने के तौर-तरीके क्या हो सकते हैं।

हमारे आपसी सहयोग के क्षेत्रों की सूची व्यापक और प्रभावशाली है - व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, सीमा पार नदियां, ऊर्जा, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, युवा मामले और लोगों के स्तर पर संबंध तथा ऐसे ही अन्य विषय इस सूची में शामिल हैं। अपने सहयोग को गतिशीलता प्रदान करने के लिए हम उप-क्षेत्रीय सम्पर्क जैसे नए रास्तों की निरंतर खोज कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरी यात्रा के दौरान इनमें से कई क्षेत्रों में संबंधों का और विस्तार होगा। 

भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक मुद्दे हैं और कुछ चिंताजनक क्षेत्र भी हैं। दोनों सरकारें ईमानदारी और परिपक्वता के साथ उनका समाधान करने के उपाय कर रहीं हैं। इन उपायों में यह ध्यान रखा जा रहा है कि मैत्री और सहयोग के समग्र वातावरण पर असर न पड़े। मैं इनमें से कुछ मुद्दों पर कार्यनीतिक वार्तालाप के हिस्से के रूप में विचार-विमर्श करूंगा और ऐसा करते समय मेरा नज़रिया प्रगतिशील और समस्या-समाधान करने वाला होगा।

मैं पेइचिंग में सेंट्रल पार्टी स्कूल में एक व्याखान में चीन के भावी नेताओं के साथ भारत-चीन गतिशीलता के नए युग के बारे में अपने विचार भी व्यक्त करूंगा। 

मुझे पूरा यकीन है कि मेरी यात्रा से हमारे दो सबसे महत्त्वपूर्ण भागीदारों के साथ संबंध और सुदृढ़ होंगे और एक स्थिर बाहरी वातावरण में भारत की वृद्धि, खुशहाली और विकास के नए कार्यनीतिक अवसर पैदा होंगे।’’ (PIB)
***
वि. कासोटिया/डीके/पीके/एसएस/एसएस-6692

पुलिस स्‍मृति दिवस

19-अक्टूबर-2013 16:41 IST
हर वर्ष 21 अक्‍टूबर को मनाया जाता है पुलिस स्‍मृति दिवस 
नई दिल्ली: 20 अक्टूबर 2013: (PIB) पुलिस स्‍मृति दिवस 21 अक्‍टूबर, 2013 को नई दिल्‍ली में चाणक्‍यपुरी स्थित पुलिस स्‍मारक के निकट मनाया जाएगा। केन्‍द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे इस अवसर पर शहीद पुलिस कार्मिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस अवसर पर कैबिनेट सचिव, गृह सचिव और वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे। 
पुलिस स्‍मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्‍टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस 1959 में लद्दाख में मारे गये पुलिस कर्मियों की शहादत की याद में तथा वर्ष के दौरान ड्यूटी पर अपने प्राण न्‍यौछावर करने वाले पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। 
1961 के बाद से 31 हजार 895 पुलिसकर्मी राष्‍ट्र की सुरक्षा और समाज की सेवा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। वर्ष के दौरान (01 सितम्‍बर, 2012 से 31 अगस्‍त, 2013 तक) देशभर में अपनी ड्यूटी का पालन करते हुए 579 पुलिस कर्मियों ने अपने जीवन का बलिदान किया। 

वि. कासोटिया/डीके/एस/एसएस/आरके-6683

आरिफ लौहार की जुगनी ने लूट लिया अमृतसर वासियों का दिल

Sun, Oct 20, 2013 at 2:40 PM
अमृत दे सुर सूफी कार्यक्रम में लौहार ने मचाया धमाल
मोहब्बत की लौ जलाने आए हैं गुरु नगरी अमृतसर-आरिफ लौहार
अमृतसर:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन):म्युजिक इंडिया की ओर से अमृतसर में आयोजित कार्यक्रम अमृत दे सुर का दूसरा और आखिरी दिन आरिफ लौहार के नाम रहा। हालांकि आखिरी दिन कुछ और कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। लेकिन आडिटोरियम में आया प्रत्येक श्रोता और दर्शक सिर्फ आरिफ लौहार का ही इंतजार कर रहा था। जैसे ही आरिफ लौहार स्टेज पर पहुंचे, सभी ने तालियों और सीटियों से उनका स्वागत किया। आरिफ लौहार ने इस दौरान कई गीत पेश किए और अपने ठेठ पंजाबी अंदाज में सभी का मनोरंजन भी किया। एक व्यक्ति के जीवन से लेकर मृत्यु तक के सभी गीत पेश किया। इतना ही नहीं, इस दौरान उन्होंने अपनी सहयोगी गायिका फोजिया के साथ मियां-बीवी की खरीददारी पर होने वाली तकरार का भी मंचन किया और दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इससे पहले उन्होंने बालीवुड की एक अनाम हिंदी फिल्म में गाए गया गीत भी पेश किया। इससे पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरिफ लौहार ने कहा कि गुरु नगरी अमृतसर में वह दूसरी बार आए हैं और यहां आकर जहां उनके दिल को सकून मिलता है, वहीं उन्हें यहां की मिट्टी की खूशबू बहुत पसंद है। सूफी गायकी में पाप और राक म्युजिक की जुगलबंदी के बारे में उन्होंने कहा, कि वह अपनी मां बोली पंजाबी की सेवा करते हैं और चाहते हैं, कि इसे हर कोई सुने। उन्होंने कहा, कि यदि आज की पीढ़ी सूफी संगीत को पाप और राक म्युजिक में सुनना पसंद करती है, तो इसमें बुराई ही क्या है। इसके अलावा उन्होंने बताया, कि इससे पहले उनका एक गीत राक स्टार फिल्म में उनकी ही आवाज में आना था, परंतु आखिरी समय में वह किसी और की आवाज में पेश किया गया। लेकिन अब उनकी कुछ हिंदी फिल्म निर्माताओं के साथ बात हुई है और उन्होंने करीब दस गाने रिकार्ड कर मुंबई भेजे हैं, जो जल्द ही हिंदी फिल्मों के माध्यम से लोग सुन सकेंगे।
      इस मौके पर आरिफ लौहार के साथ आई पाकिस्तानी गायिका फौजिया ने कहा कि अमृतसर आने पर उन्हें कभी भी एहसास नहीं होता कि वह लाहौर में है या अमृतसर में। उन्होंने कहा, कि यहां की बोली, रहन-सहन सब कुछ पाकिस्तान की ही तरह है। इसके अलावा वह जब भी भारत आती हैं और यहां परफामेंस करती हैं, तो उन्हें पाकिस्तान की आवाम से भी अधिक प्यार और मोहब्बत मिलती है। फौजिया के मुताबिक दोनों मुल्कों की आवाम एक होना चाहती है, लेकिन कुछ दिक्कतों के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है। वीजक प्रणाली के बारे में उन्होंने कहा, कि वीजा प्रणाली को और सरल करना चाहिए, ताकि दोनों मुल्कों के बाशिंदे एक-दूसरे के देश में आकर प्यार और मोहब्बत को बढ़ाएं। 
      वहीं इस मौके पर म्युजिक इंडिया की सीईओ माला सेखड़ी ने कहा, कि सूफी गायिकी को और बुलंदी पर पहुंचाने का उनकी कंपनी का यह एक छोटा सा प्रयास है। उन्होंने कहा, कि उनकी कंपनी की ओर से किए गए इस कार्यक्रम को लोगों का काफी प्यार मिला है और इस कार्यक्रम से मिले रिस्पांस के बाद वह पंजाब के अन्य शहरों में भी इसी तरह के कार्यक्रमों का आयोजन निकट भविष्य में ही करेंगी।  

मामला राजस्थान में खुद को गुरु बताने वाले का

Sat, Oct 19, 2013 at 7:09 PM
गुरु बताने वाले के खिलाफ होगा पांच सिंह साहिबान की बैठक में फैसला
जत्थेदार के खिलाफ कोर्ट में केस दायर करने के मामले में यदि किसी का भी नाम आया  तो होगी कारवाई 
अमृतसर:19 अक्टूबर 2013: (गजिंदर सिंह किंग// पंजाब स्क्रीन):राजस्थान में खुद को गुरु बताने वाले लक्खा सिंह के मामले में आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी की ओर से अपनी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को पेश की गई। उक्त रिपोर्ट हासिल करने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने बताया कि लक्खा सिंह के खिलाफ चाहे पुलिस की ओर से केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ धार्मिक सजा सुनाने के लिए पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया, कि इसके लिए एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ को भी आदेश दिया गया है।
    इस मौके पर जत्थेदार अकाल तख्त ने कहा, कि दिल्ली की अदालत में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के खिलाफ जतिंदर सिंह सियाली की ओर से जो केस दर्ज किया गया है, उस मामले में भी आगे की कार्रवाई की जानी है और इस मुद्दे पर पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा। इस मामले में दिल्ली कमेटी के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह सरना का नाम आने के बारे में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने कहा, कि अभी फिलहाल ऐसी चर्चाएं छिड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा, कि यदि परमजीत सिंह सरना की इस मामले में शमूलियत साबित हो जाती है, तो उनके खिलाफ भी पांच सिंह साहिबानों की बैठक में फैसला लिया जाएगा।

फिल्म इश्क गरारी की टीम हरिमंदिर साहिब में

Sat, Oct 19, 2013 at 7:06 PM
पंजाबी फिल्मों में नए आयाम बनाएगी इश्क गरारी-टीम का दावा 
अमृतसर: 19 अक्टूबर 2013:(गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन): 25 अक्तूबर को रीलिज होने जा रही पंजाबी फिल्म इश्क गरारी की स्टार कास्ट आज गुरु नगरी अमृतसर पहुंची और सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में नतमस्तक हो कर गुरु घर का आशीर्वाद ले कर फिल्म की सफलता के लिए अरदास कर  फिल्म की प्रमोशन शुरू करने से पहले स्टार कास्ट ने एक प्रेस कांफ्रेंस की। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान फिल्म की स्टार कास्ट ने दावा किया, कि इस समय पंजाबी फिल्मों में सिर्फ कामेडी ही दिखाई जा रही है, जिसे दर्शक पसंद कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह फिल्म कामेडी के साथ-साथ कुछ नया भी दर्शकों के लिए लेकर आई है और उन्हें उम्मीद है, कि फिल्म नया आयाम तय करेगी। फिल्म के हीरो शैरी मान ने कहा, कि फिल्म का संगीत इस समय काफी हिट हो चुके हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि फिल्म काफी हिट जाएगी।