Saturday, February 04, 2012

देश के 60 नक्‍सल प्रभावि‍त जिलों में होगी एक नई पहल

सरकार ने की नक्‍सल प्रभावि‍त क्षेत्रों में छह वन आधारि‍त परि‍योजनाओं की घोषणा 
सरकार ने देश के 60 नक्‍सल प्रभावि‍त जिलों में वन आधारि‍त छह परि‍योजनाओं के सृजन की घोषणा की है। इन परि‍योजनाओं को सार्वजनि‍क नि‍जी भागीदारी के माध्‍यम से छह महीनों के भीतर कार्यान्‍वि‍त कि‍या जाएगा और झारखंड, छत्‍तीसगढ़, ओडि‍शा, मध्‍य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र जैसे राज्‍यों को इसमें शामि‍ल कि‍या गया है। वन आधारि‍त उत्‍पादों पर आधारि‍त एक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन को आज यहां संबोधि‍त करते हुए केन्‍द्रीय ग्रामीण वि‍कास मंत्री श्री जयराम रमेश ने कहा कि‍लाह, गोंद, औषधीय पौधे, तसर, बांस और नीम तथा महुआ जैसे गैर-खाद्य ति‍लहनों से जुड़ी परि‍योजनाएं इन वनोत्‍पादों के संग्रह के काम में लगी जनजाति‍यों की आय को बढ़ाएंगी। 
मंत्री महोदय ने कहा कि‍वनोत्‍पादों के बाजार का नि‍रंतर वि‍स्‍तार करना और उन्‍हें पुनर्जीवन प्रदान करना इस क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी चुनौति‍यां हैं। उन्‍होंने कहा कि‍यह परि‍योजनाएं राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीवि‍का मि‍शन का हि‍स्‍सा होंगी और ये नक्‍सल प्रभावि‍त क्षेत्रों में वनोत्‍पादों के क्षेत्र में आजीवि‍का सृजन और मूल्‍यसंवर्धन पर मुख्‍य रूप से जोर देंगी। मंत्री महोदय ने इस उद्देश्‍य को पूरा करने के लि‍ए वन वि‍भागों और स्‍थानीय स्‍व-सहायता समूहों तथा ऐसे अन्‍य संगठनों के बीच सहयोग कायम करने पर जोर दि‍या। {पत्र सूचना कार्यालय} 03-फरवरी-2012 19:45 IST 

अब रेल आरक्षण हुआ और आसान

आईआरसीटीसी द्वारा भेजे गए एसएमएस को समझा जाएगा 
इलैक्‍ट्रोनिक आरक्षण पर्ची के समान 
रेल टिकट आरक्षण प्रणाली को यात्रियों के लिए और अनुकूल बनाने के वास्‍ते रेल मंत्रालय ने शार्ट मेसेजिंग सेवा (एसएमएस) को अनुमति देने का निर्णय लिया है। यह एसएमएस रेल मंत्रालय के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग तथा टूरिज़म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) द्वारा भेजा जाएगा जो कि इलैक्‍ट्रोनिक आरक्षण पर्ची के समान होगा। यह सेवा 1 फरवरी, 2012 से प्रभावी हो गई है। 
अधिकृत एसएमएस की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार है: 
क) एसएमएस, आईआरसीटीसी/रेलवे द्वारा भेजा जाएगा। ख) एसएमएस में पीएनआर, ट्रेन नंबर, यात्रा की तिथि, श्रेणी, नाम और यात्रियों की संख्‍या, कोच तथा सीट नंबर तथा किराए के भुगतान संबंधी महत्‍वपूर्ण जानकारी होगी। ग) यदि मुमकिन हो तो ,एसएमएस में ई-टिकट के जरिए आरक्षित सभी यात्रियों के नाम होंगे अन्‍यथा अधिकतम यात्रियों के नाम होंगे।

इससे पहले वैध पहचान-पत्र (मेल) के साथ लेपटॉप/पॉमटॉप/मोबाईफोन के जरिए दिखाई गई ई-टिकट को वर्च्‍युल मेसेज (वीआरएम) तथा मोबाइल फोन पर आरक्षित टिकटों को मोबाईल रिजर्वेशन मेसेज (एमआरएम) के रूप में इलैक्‍ट्रोनिक आरक्षण पर्ची (ईआरएस) के समान समझने का निर्णय लिया गया था। आईआरटीसी वेबसाईट के जरिए आरक्षित टिकटों के लिए भी ऐसा ही था । अब आईआरसीटीसी द्वारा भेजे गए एसएमएस को भी स्‍वीकार किया जाएगा।

ऊपर दी गई सभी जानकारी सहित अधिकृत एसएमएस को जब लैपटॉप/पॉमटॉप मोबाईफोन तथा पहचान पत्र (मूल) के साथ दिखाया जाएगा तो उसे इलैक्‍ट्रोनिक आरक्षण पर्ची के समान समझा जाएगा। {पी.आई.बी
03-फरवरी-2012 20:13 IST

अपने सुझाव ट्राई को भेजें


ट्राई ने नीलामी द्वारा 2-जी स्‍पेक्‍ट्रम के आवंटन पर पूर्व परामर्श पत्र जारी किया
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) में आज हितधारकों से सुझाव प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से नीलामी द्वारा 22 सेवा क्षेत्रों में 2-जी बैंड स्‍पेक्‍ट्रम के आवंटन पर पूर्व-परामर्श पत्र जारी किया।
      माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने याचिका संख्‍या 423/2010 और 10/2010 में अपने 02 फरवरी, 2012 के आदेश में ट्राई को निर्देश दिया है कि वह नीलामी द्वारा 22 सेवा क्षेत्रों में 2-जी बैंड स्‍पेक्‍ट्रम के लाइसेंस और आवंटन के लिए ताजा सुझाव प्राप्‍त करें।
      इस मुद्दे पर हितधारकों से उनके सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। हितधारक अपने लिखित सुझाव 15 फरवरी, 2012 तक भेज सकते हैं। ध्‍यान रहे कि इसकी समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। अपने सुझाव ट्राई के प्रधान सलाहकार (एमएस) श्री सुधीर गुप्‍ता के पास प्राथमिकता पूर्वक इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भेजे। जिनके साथ टेलिफोन नंबर +91-11-23220018, फेक्‍स नं: +91-11-23212014 अथवा ईमेलpradvmn@trai.gov.in  पर संपर्क कर सकते हैं। {पत्र सूचना कार्यालय} (03-फरवरी-2012 20:14 IST)

सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिकी और........


रसायनिकी के सूत्रों की तरह अकवितामय
Sarojini Sahoo   ###  अमृत-प्रतीक्षा ###;

सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिकी और
रसायनिकी के सूत्रों की तरह अकवितामय
पूछो, प्रसव-पीडा से छटपटाती उस प्रसूता को,
पूछो, दूरबीन से झाँक रहे खगोलशास्त्र के उन वैज्ञानिकों को,
पूछो, एपीस्टीमोलॉजी, ब्रीच, कन्ट्रेक्शन, सर्विक्स
प्लेसेन्टा को लेकर व्यस्त डॉक्टरों से उस कविता का पता।
इतना होने के बावजूद
गर्भमुक्त प्रसूता की आँखों के किसी कोने में आँसू

और होठों पर थिरकती संतृप्ति भरी हँसी।
कविता पैदा होती है रात के आकाश में
कविता उपजती है पहले सृजन
नवजात शिशु के हँसने और रोने में।
कविता क्या होती है ?
पूछो, रसायन प्रयोगशाला में काम कर रहे
अनभिज्ञ नवागत छात्रों को
पूछो, गर्भस्थ शिशु का पेट में पहले प्रहार
से भयभीत और उल्लासित माँ को
पूछो, प्लेनेटोरियम में टिकट बेचते
लड़कों से,
उस कविता का पता।
प्रज्ञा-चेतना से बाहर निकल कर
देखो, सृजन-प्रक्रिया पूर्णतया यांत्रिक
मगर सृष्टि कवितामय।
{8:53am Feb 4, 2012
( An excerpt from my short story ‘Amrit Pratiksha’, included in my short stories collection “ Rape Tatha Anya Kahaniyan”, ISBN : 978 81 7028 921 0, published by Rajpal & Sons, Delhi.) 

एमसीए-21 प्रणाली - समग्र ई- प्रशासन परियोजना

तस्वीर:एसटीक्यूसी से साभार  
कारपोरेट कार्य मंत्रालय ने हाल ही में ई- प्रशासन पहल के अधीन कई कदम उठाए हैं। इसका एक मात्र उद्देश्‍य हित धारकों की डाटाबेस तक पहुंच को सुविधा जनक बनाना है, जो उनके लिए अपना कारोबार और बढ़ाने के लिए अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण होगा। यह डाटाबेस खास कर हित धारकों द्वारा कारपोरेट जगत को स्‍वीकृत और जारी अग्रिम राशि के प्रति शुल्‍क के सृजन से संबंधित है। 
एमसीए और एमसीए-21 पोर्टल का पुनर्निर्माण
·  पुनर्निर्मित पोर्टल एमसीए-21 पहली बार खोलने वाले उपयोगकर्ता के लिए अधिक हितैषी और व्‍याख्‍यात्‍मक है।
·  पोर्टल एमसीए-21 का अत्‍यधिक प्रयोग में आने वाली कार्यात्मकताओं से सम्‍बन्धित अनुभागों को परिभाषित किया है और उपयोगकर्ता की सहायता के लिए विस्‍तृत उपाय-वार प्रक्रिया परिभाषित की गई है।
·  एमसीए-21 पोर्टल की कार्यात्‍मकताओं से सुपरिचित उपयोगकर्ताओं को सभी अनुभागों के अंदर त्‍वरित संपर्क प्रदान किया गया है।
·  निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए 'निवेशक सेवा' नामक एक विशेष व्‍यवस्‍था भी की गई है।
·  इस व्‍यवस्‍था में निवेश शिक्षा संरक्षण कोष (आईईपीएफ) जैसी सभी सम्‍बद्ध वेबसाइटों के साथ संपर्क है, जो निवेशकों के हितों की सुरक्षा में सहायता करता है।
समूचे भारत के लिए इलेक्‍ट्रोनिक स्‍टैम्पिंग का अधिदेश

·  एमसीए-21 प्रणाली के जरिये ई-स्‍टैम्पिंग की व्‍यवस्‍था सभी राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के लिए अधिदेश कर दी गई है।
प्रकिया द्वारा सीधे (एसटीपी) मोड के अधीन विशिष्‍ट ई-फॉर्मों को संसाधित करना।
यह कंपनी रजिस्‍ट्रार के उपयोगिता द्वारा संसाधित नहीं किया जाएगा

·  शेयरों के आबंटन की वापसी से संबंधित फॉर्म-2 और फॉर्म-3
·  किसी मौजूदा कंपनी द्वारा पंजीकृत कार्यालय में परिवर्तन के लिए फॉर्म-18
·  किसी मौजूदा कंपनी द्वारा निदेशक आदि में परिवर्तन संबंधी ब्‍योरे के लिए फॉर्म-32
·  शुल्‍क (देरी के लिए क्षमा को छोड़कर अन्‍य मामले) के संबंध में फॉर्म-8 और 17
·  किसी नयी कंपनी द्वारा नाम उपलब्‍ध कराने के लिए फॉर्म-1ए (इसमें नाम उपलब्‍ध कराने से सम्‍बन्धित दिशा-निर्देश भी शामिल हैं)
विशिष्‍ट कंपनियों को निष्क्रिय कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक  लगाना
·  जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और बेलेंसशीट लगातार तीन वर्ष तक जमा नहीं कराई उन कंपनियों को एक अलग वर्ग-डोरमेंट (निष्क्रिय) कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों को अपना ई-फाइलिंग जमा करने से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे फाइलिंग में दोष को दूर नहीं कर लेतीं।
विशिष्‍ट कंपनियों को दोषी कंपनियां अंकित करना और उनके ई-फाइलिंग पर रोक लगाना
·  जिन कंपनियों ने अपनी वार्षिक रिटर्न और/या बेलेंस‍शीट एक वर्ष या अधिक अवधि के लिए जमा नहीं की उन्‍हें दोषी कंपनियां अंकित किया गया है। इस प्रकार की कंपनियों और उनके निदेशकों को ई-फाइलिंग से रोक दिया जाता है, जब तक कि वे रिटर्न फाइल करने में दोष को दूर नहीं कर लेते।
शिकायत पर नजर रखने की विस्‍तृत व्‍यवस्‍था का कार्यान्‍वयन
·  एमसीए-21 हित धारकों के लिए एमसीए-21 प्रणाली में शिकायत पर नजर रखने की एक विस्‍तृत प्रणाली लागू की गई है। उपयोगकर्ता उसी के जरिये शिकायतें, मामले, प्रश्‍न, सुझाव दे सकते हैं और उन्‍हें उसके लिए एक विशिष्‍ट संदर्भ टिकट दिया जाता है। वे संदर्भ टिकट का प्रयोग करके शिकायत की पूर्ति की स्थिति जान सकते हैं।
प्रणाली के अधीन प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर
·  पहले की व्‍यवस्‍था के अनुसार कंपनी रजिस्‍ट्रार के अधिकारी विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर हस्‍ताक्षर करके उसे कंपनी को डाक द्वारा भेजते थे। अब एमसीए-21 प्रणाली के अधीन विभिन्‍न प्रमाण पत्रों पर डिजिटल हस्‍ताक्षर की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें अब हाथ से कोई काम नहीं किया जाता और फिर डिजिटल तरीके से हस्‍ताक्षरित प्रमाण पत्रों को ई-मेल के जरिये कंपनी को भेजा जाता है और पुष्टि के लिए एमसीए-21 एफओ पोर्टल को भी उपलब्‍ध कराया जाता है।
डायरेक्‍टर आइडेंटिफिकेशन नम्‍बर (डीआईएन) के आबंटन की प्रक्रिया को कागज-मुक्‍त और ऑन-लाइन बनाया गया, और डीआईएन-डीपीआईएन को जोड़ा गया
·  एमसीए द्वारा डीआईएन के आबंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह कागज-मुक्‍त बना दिया गया है। यह स्‍थूल रूप में सबूत दाखिल करने की आवश्‍यकता को समाप्‍त करने के लिए किया गया है और इसके स्‍थान पर इसे स्‍वयं डीआईएन आवेदन को स्‍कैन किया जा सकता है। इसके अलावा सभी भारतीय निदेशकों के लिए आयकर पैन उपलब्‍ध करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही कार्यरत व्यवसायी के प्रमाण पत्र पर आधारित व्‍यवस्‍था द्वारा डीआईएन आवेदन-पत्र को संसाधित किया जाता है।
·  कंपनी अधिनियम के अधीन डीआईएन के आबंटन और एलएलपी अधिनियम के तहत डीपीआईएन के आबंटन के लिए एमसीए के पास अलग- अलग व्‍यवस्‍थाएं हैं। अब एमसीए ने दोनों व्‍यवस्‍थाओं को जोड़ कर डीआईएन के रूप में एक-समान पहचान बना दी है।
अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय - आयकर और ट्रेडमार्क
संयुक्त सेवाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया गया-

·   निदेशकों आदि के विवरणों का सत्यापन करने के लिए आयकर प्रणाली के साथ उनके अपने-अपने आयकर पैन ब्यौरे को जोड़ना।
·   आंतरिक (कंपनी रजिस्ट्रार के कार्यालय) और बाहरी हितधारकों (कंपनी, व्यावसायी) के टीएमआर डाटा बेस पर ढूंढने की सुविधा प्रदान करने के लिए ट्रेडमार्क प्रणाली के साथ जोड़ना।
कारपोरेट खाते खोलने के लिए बैंकों के साथ समन्वय
·  विभिन्न बैंकों के साथ समन्वय की प्रक्रिया में एमसीए ने कारपोरेटों के लिए एमसीए-21 प्रणाली के जरिये बैंक खाता खोलने के लिए एक सुविधा शुरू की है। कंपनी को एमसी प्रणाली पर इलैक्ट्रोनिक फार्म और कुछ ब्यौरे भरने होते हैं, कंपनी के बारे में दस्तावेज संबद्ध बैंक को एमसीए -21 प्रणाली के जरिये भेजें जाते हैं।
अदायगियां करने के लिए एनईएफटी विकल्प की शुरूआत
·  पहले एमसीए-21 अदायगियां क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और स्थूल चालान के जरिये करने की अनुमति थी। इंटरनेट बैंकिंग केवल पांच बैंकों तक सीमित है। अदायगी प्रक्रिया में होने वाली देरी से उत्पन्न असुविधा को समाप्त करने के लिए एमसीए ने एमसीए फीस की अदायगी एनईएफटी अर्थात राष्ट्रीय इलैक्ट्रोनिक कोष हस्तांतरण मोड के जरिये शुरू किया है। इस विकल्प के जरिये हितधारक एससीए-21 फीस की अदायगी किसी भी बैंक के जरिये, जो एनईएफटी की अनुमति देता हो, कर सकते हैं।
स्थूल चालान मोड के जरिये अदायगी पर रोक
·  स्कूल विकल्प (बैंक की खिड़की पर चालान के जरिये अदायगी) के जरिये एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं के लिए अदायगी की सुविधा पर, पचास हजार रुपये के समकक्ष अथवा उससे अधिक राशि के मामले में रोक लगा दी गई है।
विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करने के लिए एक्सबीआरएल लागू-
·  विशिष्ठ वर्ग की कंपनियों द्वारा एक्सटेंसीबल बिजनेस रिपोर्टिंग लैंग्वेज (एक्सबीआरएल) द्वारा वित्तीय विवरण दाखिल करना एमसीए-21प्रणाली में कार्यान्वित किया गया है। इस प्रणाली में वित्तीय विवरणों को एमसीए एक्सबीआरएल टेक्सोनोमी के साथ जोड़ना होता है। एमसीए-21 प्रणाली ने हितधारकों को एक्सबीआरएल दस्तावेज दाखिल करने से पहले सत्यापित करने के लिए एक सुविधा प्रदान की है। इसके अतिरिक्त एक्सबीआरएल दस्तावेजों को पढ़ने वाली मशीन एमसीए -21 प्रणाली के जरिये दस्तावेजों को मनुष्य द्वारा पढ़े जाने योग्य बना देती है।
त्वरित कार्यात्मकता का चिन्ह
·  पहले एमसीए प्रयोगकर्ता द्वारा किसी कार्य वस्तु को संसाधित करने में उस कार्य वस्तु को तात्कालिक चिन्हित करने की सुविधा थी और वह इसे एफआईएफओ प्रक्रिया द्वारा करता था। तथापि अधिक पारदर्शिता लाने के लिए यह कार्यात्मकता रोक दी गयी है। अब कार्य वस्तु उनके द्वारा भरे जाने के क्रम से संसाधित की जाएगी।

वापसी प्रक्रिया की शुरूआत
·  किसी हितधारक द्वारा एमसीए-21 की विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने के लिए गलती से दी गई फीस की वापसी के लिए एमसीए-21 में पहले कोई व्यवस्था नहीं की। मंत्रालय ने अब विशिष्ट सेवाओं के लिए अदा की गई वैधानिक फीस को वापस करने का निर्णय लिया है। हितधारक द्वारा रिफंड के लिए नया ई-फार्म भरना होगा  और उनकी संसाधित होने पर रिफंड का अनुरोध स्वीकार या अस्वीकार किया जाएगा।
·  एमसीए -21 की फीस का रिफंड जिन मामलों में उपलब्ध है वे हैं : (क) बहुअदायगियां का फार्म एक और पांच (ख) गलत अदागियां और (ग) ज्यादा अदायगी।
·  रिफंड प्रक्रिया विशिष्ट सेवाओं/ई फार्म जैसे दस्तावेजों का सार्वजनिक निरीक्षण, सत्यापित प्रतियों का अनुरोध हस्तांतरण दस्तावेजों के लिए अदायगी, स्टाम्प ड्यूटी फीस (डी श्रंखला एसआरएन), आईईपीएफ अदायगी, एसटीपी फार्म, डीआईएन ई फार्म आदि पर लागू नहीं होती। (पी.आई.बी)
((02-फरवरी-2012)

Friday, February 03, 2012

तंबाकू सेवन के खिलाफ मास मी‍डिया अभियान शुरू

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने किया एक नई पहल का शुभारम्भ 
जिंदगी को मौत से भी बदतर बना देने वाले तम्बाकू के खिलाफ अब सरकार ने एक और विशेष अभियान शुरू किया है.इसका शुभारम्भ करते हुए स्वस्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव केशव देसिराजू और साथ में नजर आ रहे हैं विश्व स्वस्थ्य संगठन के प्रतिनिधि दक्त्य्र मेनाब्दे  और अन्य वशिष्ठ  लोग  (पी आई बी फोटो)
स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय के तंबाकू नियंत्रण अभियान के अंतर्गत गायक शान की आवाज में 'लाइफ से पंगा मत ले यार' म्‍यूजिक वीडियो बनाया गया है। मई 2011 में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने शान को भारत में तंबाकू नियंत्रण एम्‍बेसेडर नियुक्‍त किया था।

'लाइफ से पंगा मत ले यार' का प्रसारण देश भर में रेडियो मिर्ची, रेडियो सिटी, बिग एफएम और रैड एफएम पर 28 जनवरी 2012 से किया जा रहा है। एमटीवी, सब टीवी, यूटीवी बिंदास और 9एक्‍सएम जैसे लोकप्रिय राष्‍ट्रीय टेलीविजन चैनलों पर म्‍यूजिक वीडियो एक फरवरी 2012 से शुरू किया गया। 2.3 मिनट की इस रील की धुन शान ने तैयार की है। गाने के बोल रेखा निगम ने लिखे हैं और म्‍यूजिक वीडियो का निर्देशन क्रोम पिक्‍चर्स की आलिया सेन शर्मा ने किया है। वीडियो सलाम बॉम्‍बे फाउंडेशन की मदद से बनाया गया है।

म्‍यूजिक वीडियो को काला चौकी बस्‍ती, परेल, मुंबई में फिल्‍माया गया। इसके बोल जोशीले और मन को लुभा देने वाले हैं। इस म्‍यूजिक वीडियो में शान को बच्‍चों के साथ नाचते हुए और उन्‍हें इस बात के लिए प्रोत्‍साहित करते हुए दिखाया गया है कि वे तंबाकू का सेवन करके अपनी जिंदगी को नरक न बनाएं। यानि तंबाकू का सेवन एक 'पंगा' है और इसके बिना भी जिंदगी को जिया जा सकता है। पूरा वीडियो युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को केन्द्रित करके बनाया गया है। इसमें देशभर के युवाओं और किशोरों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है कि तंबाकू के बिना जिंदगी जीने का नाम है।

तंबाकू नियंत्रण कानूनों को लागू करने और तंबाकू के सेवन के खतरनाक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार ने 2007-08 में राष्‍ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की शुरूआत की। राष्‍ट्रीय स्‍तर के मास मीडिया जन जागरूकता अभियान इस कार्यक्रम के महत्‍वपूर्ण घटक हैं और 'वैश्विक तंबाकू महामारी 2011 के बारे में डब्‍ल्‍यूएचओ की रिपोर्ट' के अनुसार भारत उन कुछ देशों में से एक है, जिनका तंबाकू नियंत्रण मास मीडिया अभियान के लिए एक समर्पित बजट है। अनुमानों के अनुसार भारत में तंबाकू के सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण हर साल करीब एक मिलियन लोग मर जाते हैं। अगर वर्तमान प्रवृति जारी रही तो 2020 तक भारत में सभी मौतों में से 13 प्रतिशत मौतें तंबाकू के सेवन के कारण होंगी। भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के अनुसार पुरूषों में होने वाले कैंसर का करीब 50 प्रतिशत, महिलाओं में 25 प्रतिशत और करीब 80-90 प्रतिशत मुंह के कैंसरों का संबंध तंबाकू के सेवन से है। उपलब्‍ध प्रमाणों से पता चलता है कि तपेदिक से होने वाली 40 प्रतिशत मौतें तंबाकू के सेवन के कारण होती हैं। अधिकतर दिल की और फेफड़ों की बीमारियों का सीधा संबंध तंबाकू के सेवन से है। गैर-संचारी रोगों के लिए भी तंबाकू एक खतरा है और छह में से एक मौत इसके कारण होती है।

भारत में तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों में कराए गए वैश्विक वयस्‍क तंबाकू सर्वेक्षण (जीएटीएस-2010) के अनुसार भारत में आबादी का 35 प्रतिशत लोग किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें 47 प्रतिशत पुरूष और 20.8 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। भारत में तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्‍या 275 मिलियन है। यानि चीन के बाद भारत दूसरे स्‍थान पर है। चीन में तीन सौ मिलियन लोग इसका सेवन करते हैं, जिनमें अधिकतर पुरूष हैं।

वैश्विक युवा तंबाकू सर्वेक्षण (जीवाईटीएस 2009) के अनुसार 13-15 वर्ष की उम्र के 14.6 प्रतिशत किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। अध्‍ययनों से पता चला है कि भारत में रोजाना 5500 युवा तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं। सभी आयु वर्ग के लोगों में तंबाकू का बढ़ता इस्‍तेमाल जन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

दुनिया में आज तंबाकू से होने वाली मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता है। दुनिया भर में हर साल करीब छह मिलियन लोग तंबाकू से सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण मर जाते हैं। अगर तत्‍काल कदम नहीं उठाए गए, तो इनकी संख्‍या वर्ष 2030 तक आठ मिलियन से ज्‍यादा तक पहुंच सकती है। दुनिया भर में रोजाना करीब एक मिलियन लोग निकोटिन की लत के कारण धूम्रपान करते हैं या तंबाकू खाते हैं और करीब 15 हजार लोग तंबाकू से होने वाली बीमारी से मर जाते हैं। (पत्र सूचना कार्यालय)  {
02-फरवरी-2012 19:59 IST}


02-February-2012

सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा विकल्प

15 फरवरी तक चलेगा 26वां सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला
* अशोक कुमार
तस्वीर हरियाणा सरकार के पर्यटन विभाग से साभार  
        परंपरा, विरासत और संस्‍कृति के अद्भुत समन्‍वय के साथ-साथ माटी की महक सूरजकुंड हस्‍तशिल्‍प मेले की पहचान है। 26वां सूरजकुंड हस्‍तशिल्‍प मेला आज से शुरू हुआ है और 15 फरवरी तक चलेगा।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले में असम दूसरी बार थीम राज्य के रूप में भाग ले रहा है। पूर्वोत्‍तर  भारत के अन्य सहयोगी राज्यों के साथ मिलकर असम वर्ष 1998 में थीम राज्य के रूप में पहले भी भाग ले चुका है। असम की 13वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व की पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इसे 26वें सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले के थीम राज्य के लिये सर्वाधिक उपयुक्त बनाती है। असम के विविध रंगोंरीति-रिवाजों और रंग-सज्जा को प्रभावी ढंग से दर्शाने के लिये रंग घर की प्रतिकृति को  सुरूचिपूर्ण  ढंग से स्थापित किया गया है। थीम राज्य के मंडप के सामने बांसों से विशेष रूप से असम का अपना घर बनाया गया हैजिसमें असम का एक परिवार इसमें पूरे 15 दिन तक रहेगा ताकि मेला देखने आये दर्शक असम की रहन-सहन की शैली की झलक देख सकें। भारत की विरासत में असम राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है और यह संस्कृति और परपराओं को गहराई से आत्मसात किये हुये हैजिसे इस वर्ष मेले में प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जायेगा और दर्शक असम की हस्तशिल्प व  हथकरघा वस्तुओंसंस्कृति  और व्यंजनों के बारे में जान सकेंगे।
        भागीदार देश के नाते थाईलैंड की हिस्सेदारी इस मेले को अंतर्राष्ट्रीय रंग देगी और भारतीय तथा थाई विरासत के समन्‍वय से यह और समृद्ध होगा। भारत सरकार की ओर से फैसला किया गया है कि जिस देश का राष्ट्राध्यक्ष नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह में मुय अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जायेगावही सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले का भागीदार देश होगा। इस मेले में पहली बार सार्क संगठन के सभी सदस्य देश एक मंच पर होगे। भागीदार देश थाईलैंड और सार्क के सदस्य देश-नेपालभूटानश्रीलंकापाकिस्तानबगांलदेशमालदीव व  अफगानिस्तान के अलावा यूरेशिया के देश - उज्जबेकिस्तानतजाकिस्तान किर्गिस्तान और दक्षिण अफ्रीकी  देश कांगो मेले में अपनी कलाओं और शिल्पों से समोहन का प्रभाव पैदा करेंगे। भारत तथा अन्य देशों के 700 से अधिक शिल्पीजिनमें अधिकतर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुस्कार विजेता है, 15दिन के इस मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज करायेंगे।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला एक ही स्थान पर भारतीय कलासंस्कृति और संगीत की  समृद्ध परंपरा भी प्रस्‍तुत करने में  अग्रणी रहा है। मेले का उद्देश्य भारत के परपरागत रीति-रिवाजों को कायम रखना है और यह दर्शकों की सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में सहायक है।  पूरा माहौल,प्रस्तुत संगीत और मेला मैदान में बिक रहे तरह-तरह के उत्पाद एक लघु भारत होने का एहसास कराते हैं।  दोनों चौपालों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम हर शाम नाट्यशाला की प्रस्तुतियां हमारी संस्कृति की मधुरता को प्रद्शित करती हैं। इस माहौल को खासतौर पर मेले की थीम के अनुरूप बनाया गया है। इसलिये मेले में आने वाले लोगो को आनंद का एहसास होता है। यह मेला न केवल दुनिया की हलचल से दूर एक आदर्श जगह हैबल्कि कलाकारोंफैशन डिजाइनरों और व्यंजन प्रेमियों के लिये एक स्वर्ग है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला सैंकड़ों शिल्पियों के लिये रोजी-रोटी कमाने का एक अच्छा विकल्प बन गया है। अपनी कला और शिल्प के राष्ट्रीय मंच के प्रदर्शन से अन्य रास्ते भी खुलते हैं। इसलिये वे अपनी कलाओं और शिल्पों के बेहतरीन नमूने लाते हैं और उन्हें मेले में प्रदर्शित करते हैं। मेले से नियार्तकों और खरीददारों को वार्षिक मिलन का भी अवसर मिलता है। यहां किसी विचौलिये के बिना शिल्पकार और निर्यातक आमने-सामने होते हैं। इससे शिल्पकारों को अपनी कला क्षेत्र का विस्तार करने और उसमें सुधार करने का सीधा मौका मिलता है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेले ने पिछले 26 वर्षों में भारतीय पयर्टन के मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान दर्ज की है। मेले में मोहक संस्कृतिप्राचीन शिल्पों और परपराओं तथा विरासत की झलक मिलती हैजो अपनी क्षमता से इतिहास बन गई है। इस मेले की लोकप्रियता का अन्दाज इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्षों में अनेक जानी-मानी हस्तियों ने इसका उद्घाटन कियाजिनमें यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधीकेन्द्रीय मंत्री श्री प्रणब मुखर्जीभारत की राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिलउपराष्ट्रपति श्री मोहमद हामिद अन्सारी और केन्द्रीय पर्यटन मंत्री श्री सुबोध कांत सहाय शामिल हैंजिन्होंने ने क्रमश: वर्ष 2007, 2008, 2009, 2010 और 2011 में मेले का उद्घाटन किया।
        मुख्‍य रूप से केन्दीय पर्यटन मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित यह मेला वास्तव में विभिन्न एजेंसियों-हस्तशिल्प और हथकरघा के विकास आयुक्तों और संस्कृति तथा विदेश मंत्रालयों के सामूहिक और एकजुट प्रयासों का फल है। हरियाणा पर्यटन और थीम राज्य असम के पर्यटन विभाग नें  संयुक्त रूप से मेले का आयोजन किया  है और प्रबन्धों में सम्रवय रख रहे हैं। भारतीय कलासंस्कृति और परपराओं के 15 दिन के इस महोत्सव के लिये देश भर के सर्वश्रेष्ठ शिल्पी और लोक कलाकार अपने उत्पादों तथा कला-कौशल के साथ यहां आते हैं। यह मेला पर्यटन उद्योग के दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में वर्ष भर होने वाली गतिविधियों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण मेला है। पिछले वर्ष इस मेले को 8 लाख लोगों ने देखा और इस वर्ष यह संख्या और भी अधिक रहने की संभावना है।
        सूरजकुण्ड हस्तशिल्प मेला वर्ष 1987 में शरू हुआ था लेकिन किसी एक राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश को थीम राज्य के रूप में शामिल करने का सिलसिला वर्ष 1989 में शुरू हुआ था। 1989 के बाद से एक राज्य को हर साल मेले के थीम राज्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। थीम राज्य को मेला मैदान में एक यादगार ढांचा / द्वार का निर्माण करना होता है। सभी थीम राज्यों की  प्रतिकृतियां सूरजकुण्ड मेले के मैदान में स्थापित की गई हैंजिनसे भारत की विविधता परिलक्षित होती है। इस बार मेले का भागीदार देश थाईलैंड है और वह अपनी अदभुत सज्जा से मेले में अपना रंग भर रहा  है। इस वर्ष तीस एकड़ भूमि में लगभग 600 कुटीर बनाये गये हैं। जिला प्रशासन की सहायता से सुरक्षाअग्नि शमन और यातायात के व्यापक प्रबन्ध किये गये हंै। एक स्थल पर फूड कोर्ट बनाया गया हैजहां तरह-तरह के व्यंजन और अल्प आहार उपलब्ध होंगे। अच्छे और बढिय़ा अल्प आहार प्रस्तुत करने के लिये फूड स्टाल फरीदाबादकुरूक्षेत्र और पानीपत के सरकारी होटल प्रबन्धन संस्थानों द्वारा स्थापित किये गये हैं। थीम राज्य असम और भागीदार राष्ट्र थाईलैंड भी फूड कोर्ट में अपने व्यंजन प्रस्तुत करेंगे।
        दर्शक दोनों चौपालों और नाट्यशाला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठा सकते हैं। सांस्कृतिक दलों का चयन सूरजकुण्ड मेला प्राधिकरणथीम राज्य असम और हरियाणा के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। इसके अतिरिक्त तजाकिस्तान,उज्बेकिस्तानकिर्गिस्तान और कांगो ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने की पुष्टि की हैजिनमें 500 से अधिक कलाकार न केवल दर्शकों का मनोरंजन करेंगे बल्कि मेले की रौनक बढ़ायेंगे।

मेला स्थल - सूरजकुण्ड
        सूरजकुण्ड का इतिहास बहुत पुराना है। इस स्थान की सुन्दरता से आकर्षित  होकर राजा सूरजपाल ने यहां अपना गढ़ बनाया और यहां पर एक सूर्य मंदिर तथा सूर्य सरोवर की स्थापना की। समय के साथ मंदिर अब नष्ट हो चुका हैलेकिन सूर्य सरोवर के अवशेष अभी भी नजर आते हैं। इसी सूर्य सरोवर के नाम से इस स्थान को सूरजकुण्ड नाम दिया गया। सूर्य सरोवर के स्थल को केन्द्र में रखकर चारों ओर कई पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। मंदिर के अवशेषों के पास होटल राजहंस बनाया गया है। सूर्य सरोवर और मेला मैदान के बीच नाट्यशाला है। सूरजकुण्ड दक्षिण दिल्ली से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और दिल्ली के मुय स्थलों से यहां पहुंचने के लिये वाहन उपलब्ध हैं ।

थीम राज्य असम
        पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य असम को बहा्रा के पुुत्र यानि बहा्रपुत्र का आवास माना जाता है। यहां की अपनी समृद्ध विरासत है। चाय यहां का सबसे बड़ा उद्योग है। असम को पट्रोलियम घाटी के रूप में भी जाना जाता है।
        असम की शिल्प कलाओं में असम की घंटे की धातु का महत्पूर्ण स्थान है। बेंत और बांस के शिल्प उत्पाद घर-घर में तैयार होते हैं। असम की नाट्य कला अनूठी है। असम को भारतीय वास्तुशिल्प की कला दीर्घा भी कहा जाता है। बड़ी संया में यहां की आदिवासी जातियों के लोग तरह-तरह के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद तैयार करते हैं, जिनमें उनकी संस्कृति की झलक मिलती है। असम के त्यौहारों में भोगाली बिहू रोंगाली बिहूजन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के त्यौहार प्रमुख हैं। रोंगाली बिहू प्रमुख बिहू त्यौहार हैजो अप्रैल के महीने में मनाया जाता है।
       मेले में दर्शकों के प्रवेश के लिये 50 रूपये का टिकट रखा गया है। विकलांगोंभूतपूर्व सैनिकोंकार्यरत सैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिये टिकट में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है। स्वतंत्रता सेनानियों के लिये प्रवेश निशुल्क है। शनिवाररविवार और राजपत्रित अवकाश के दिनों को छोड़ कर मेले में  स्कूल के बच्चे यदि स्कूल के माध्यम से स्कूल यूनिफार्म में आते हैंतो उन्हें निशुल्क प्रवेश मिलेगा। टिकटें आन-लाईन और ऑफ लाईन ई-टिकटिंग के जरिये भी उपलब्ध हैं। (01-फरवरी-2012) {पत्र सूचना कार्यालय} 
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* लेखक हरियाणा भवन में सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्‍कृतिक मामलों के उपनिदेशक हैं।

Thursday, February 02, 2012

रेल नीर-सस्‍ती कीमत पर सुरक्षित पेय जल

प्रति दिन संचयी उत्‍पादन क्षमता 3.80 लाख बोतल
रेल नीर पर विशेष लेख 
सवारी-सेवाओं के इसके प्रमुख व्‍यवसाय के अलावा रेलवे परिसरों पर फूड प्‍लाजा, रेल दौरा पैकेज एवं इंटरनैट टिकटिंग, दि इंडियन रेलवे केटरिंग एण्ड टूरिज्‍म कॉरपोरेशन लि0 (आई आर सी टी सी) रेलवे की सवारियों को स्‍वच्‍छ, सुरक्षित तथा स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक जल मुहैया करा रही है। आई आर सी टी सी, रेलवे मंत्रालय के अन्‍तर्गत सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है और यह नांगलोई(दिल्‍ली), दानापुर (बिहार) तथा पलूर (चेन्‍नई के नजदीक) उक्‍त स्‍थानों पर रेल नीर ब्रॉड से पैकेज किये गये पेय जल का निर्माण कर रहा है। इसकी प्रति दिन संचयी उत्‍पादन क्षमता 3.80 लाख बोतल (1 लीटर क्षमता) है। आई आर सी टी सी, का उदेश्‍य न्‍यूनतम संसाधनों का उपयोग करते हुए सुरक्षित पेयजल सस्‍ती कीमत पर दिया जाना है। इससे पर्यावरण का भी संरक्षण होगा।
       दिल्‍ली के नांगलोई में सर्वप्रथम नीर संयत्र का उदघाटन 6 मई 2003 को भारतीय रेलवे की सवारियों को पैकेज किया गया सुरक्षित पेय जल मुहैया कराने के लिए किया गया। शुरू में क्षमता प्रति दिन 66,000 बोतलें उत्‍पादित करने की थी जिसे अप्रैल 2009 में बढ़ाकर 1,02,000 बोतलें प्रति दिन कर लिया गया। यह संयंत्र जल स्‍वच्‍छता एवं पैकेजिंग की स्‍टेट –ऑफ-दि आर्ट प्रौद्योगिकी पर आधारित है। यह पूरी तरह से स्‍वचालित संयंत्र है। अभी तक संयत्र में 20,14,39,896 बोतलों का उत्‍पादन किया जा चुका है।                                

रेल नीर का उत्‍पादन बी आई एस मानकों के अनुसार है बल्कि रेल नीर के मानक बी आई एस मानक में निर्धारित किए गए मानकों से बेहतर हैं। संयत्र में 24x7 मॉडल इन-हाउस लैबोरेट्री बी आई एस मानकों के अनुरूप है तथा प्रत्‍येक बैच से जल का नमूना 6 माह तक सुरक्षित रखा जाता है।  जहां तक बाहरी लैब में जांच का सवाल है, मासिक, छमाही , तथा वार्षिक एवं द्विवार्षिक नमूने कीटों, रसायन, सूक्ष्‍म जीवों तथा रेडियोएक्टिव जांच के लिए उच्‍च प्रतिष्ठित लैब में भेजे जाते हैं।  रेल नीर का कोई भी नमूना बाहरी जांच में असफल नहीं पाया गया।सभी रेलवे स्‍टेशनों एवं ट्रेनों में रेल नीर की एक बोतल 12/- रू. में (एक लीटर की प्रति बोतल) बेची जाती है।

     दानापुर (बिहार) एवं नांगलोई दोनों की उत्‍पादन क्षमता प्रति दिन एक समान अर्थात 1.02 लाख बोतले हैं। संयत्र में 2004 से कार्य चल रहा है। इनमें नवीनतम संयत्र पलूर(चेन्‍नई) जुलाई 2011 से कार्यरत है। इस संयत्र की क्षमता प्रति दिन 1.8 लाख बोतलों की है और वह बोतल ब्‍लोईंग मशीनों के नवीनतम मॉडल पर आधारित है। पहली बार आई आर सी टी सी द्वारा स्‍वचालित हॉट फल्‍यू लेबलिंग मशीन तथा बोतलों की संकुचित पैकिंग शुरू की गई  है। ये दो मशीनें उच्‍च उत्‍पादकता तथा बे‍हतर गुणवत्‍ता वाली है।

आई आर सी टी सी का अम्‍बरनाथ (मुम्‍बई) में चतुर्थ संयत्र के निर्माण का कार्य जोर-शोर से किया जाएगा। इस संयत्र की रूपरेखा पलूर की भांति ही है तथा इसमें उसी प्रकार की मशीनरी तथा उपकरण लगाए जाएंगे। इस संयत्र में प्रति दिन दो लाख बोतलें या प्रति दिन 17,000 कारटोन की स्‍था‍पित क्षमता होगी। इसे 2013-14 में शुरू किए जाने की आशा है। यह संयत्र देश के पश्चिमी भाग की आवश्‍यकता की पूर्ति करेगा। आई आर सी टी सी रेल नीर का विस्‍तार कार्य जारी रखेगा क्‍योंकि औसत रेल यात्री अन्‍य स्‍थापित ब्रांड की अपेक्षा रेल नीर को अधिक पसन्‍द करता है। रेल नीर की मांग निरन्‍तर बढ़ती जा रही है और इसकी मांग के मुकाबले इसकी वर्तमान उत्‍पादन क्षमता में काफी अन्‍तर है। इस कमी को पूरा करने के लिए देश में और संयत्र स्‍थापित किए जाने की आवश्‍यकता है जिससे कि रेल नीर की आपूर्ति सभी रेलवे अंचलों, रेलवे स्‍टेशनों, तथा ट्रेनों में की जा सके। 

आई आर सी टी सी दो नए संयत्र हैदराबाद तथा नागपुर में लगाएगी जिसे सार्वजनिक ,निजी सहभागिता मॉडल के अन्‍तर्गत संयुक्‍त उपक्रम कम्‍पनी खोलकर लगाया जाएगा। दिल्‍ली क्षेत्र की मांग की पूर्ति के लिए दिल्‍ली राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक और संयत्र लगाने की योजना बनाई जा रही है। इस संयत्र में 250/500 मि. ली. बोतल एवं 20 लीटर जारों में विभिन्‍न पैक जैसे आकार होंगे।            *****

उप-निदेशक (मि एवं सं) रेलवे मंत्रालय

मामला चुनावी जंग की कबरेज का

जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 126 में संदर्भित अवधि के दौरान चुनाव अभियान की कवरेज
      जनप्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 126 निर्वाचन क्षेत्र में मतदान समाप्‍त होने के लिए निर्धारित समय से 48 घंटे की अवधि के दौरान टेलिविजन या ऐसे ही किसी अन्‍य माध्‍यम से चुनाव के किसी मामले को दिखाने से रोकती है। उक्‍त धारा 126 के संबंधित प्रावधानों को फिर से इस प्रकार प्रस्‍तुत किया गया है  126-मतदान के निष्‍कर्ष के लिए निर्धारित समय समाप्‍त होने के बाद 48 घंटों की अवधि के दौरान सार्वजनिक सभाओं पर रोक 
1.      कोई व्‍यक्ति 
क.     ------
ख.     सिनेमेटोग्राफ, टेलिविजन या ऐसे ही अन्‍य माध्‍यमों से चुनाव के किसी मामले को जनता को दिखाना,
ग.      ---------
मतदान के क्षेत्र में किसी चुनाव के लिए मतदान के निष्‍कर्ष के लिए निर्धारित समय समाप्‍त होने के बाद 48 घंटे की अवधि के दौरान किसी मतदान क्षेत्र में
2.      उपधारा (1) के प्रावधानों के उल्‍ंघन करने वाले व्‍यक्ति को कैद के साथ दंडित किया जाएगा, जो दो वर्ष या जुर्माने के साथ या दोनों हो सकती है।
3.      इस धारा में चुनाव से संबंधित मामलों का मतलब किसी ऐसे मामले से हैं, जो चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने से संबंधित हो। 
***

Wednesday, February 01, 2012

भारत का विदेश व्‍यापार : दिसम्‍बर-2011


निर्यात (दोबारा -निर्यात सहित)                              विशेष लेख  
दिसम्‍बर 2011 के दौरान भारत का निर्यात 25015.89 मिलियन अमरीकी डॉलर (131775.95 करोड़ रुपये) था, जो दिसम्‍बर 2010 की तुलना में 6.71 प्रतिशत अधिक था। दिसम्‍बर 2010 में भारत का निर्यात 23442.07 मिलियन अमरीकी डॉलर (105856.90 रुपये) था। अप्रैल-दिसम्‍बर 2011-12 की अवधि में निर्यात का संचयी मूल्‍य 172964.94 मिलियन अमरीकी डॉलर (789068.93 करोड़ रुपये) के मुकाबले 217663.66 मिलियन अमरीकी डॉलर (1024706.95 करोड़ रुपये) हो गया और इसमें पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में डॉलर में 25.84 प्रतिशत और रुपये में 29.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
आयात
     दिसम्‍बर 2011 के दौरान भारत का आयात 37753.36 मिलियन अमरीकी डॉलर (198873.00 करोड़ रुपये) था, जबकि दिसम्‍बर 2010 में आयात 31511.08 मिलियन अमरीकी डॉलर (142293.94 करोड़ रुपये) के स्‍तर पर था। डॉलर में आयात में 19.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-दिसम्‍बर 2011-12 की अवधि में आयात का संचयी मूल्‍य 269175.16 मिलियन अमरीकी डॉलर (1228074.48 करोड़ रुपये) के मुकाबले 350935.69 मिलियन अमरीकी डॉलर (1651239.75 करोड़ रुपये) हो गया और इसमें पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में डॉलर में 30.37 प्रतिशत और रुपये में 34.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
 कच्‍चा तेल और गैर-तेल आयात दिसम्‍बर 2011 के दौरान 10279.3 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य का तेल का आयात किया गया जो पिछले वर्ष इसी अवधि में किये गए 9243.6 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य के तेल आयात की तुलना में 11.20 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-दिसम्‍बर 2011-12 के दौरान तेल का 105588.7 मिलियन अमरीकी डॉलर तेल आयात किया गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में किये गए 75211.4 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य के तेल आयात की तुलना में 40.39 प्रतिशत अधिक है।
      दिसम्‍बर 2011 के दौरान 27474.1 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य का गैर-तेल आयात किया गया, जो दिसम्‍बर 2010 में 22267.5 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य के गैर-तेल आयात से 23.38 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल-दिसम्‍बर 2011-12 के दौरान गैर-तेल आयात 245347.0 मिलियन था, जो अप्रैल -दिसम्‍बर 2010-11 में 193963.8 मिलियन अमरीकी डॉलर मूल्‍य के आयात के स्‍तर से 26.49 प्रतिशत अधिक है।
व्‍यापार संतुलन
      अप्रैल-दिसम्‍बर 2011-12 के लिए 133272.03 मिलियन अमरीकी डॉलर के व्‍यापार घाटे का अनुमान लगाया गया, जो अप्रैल-दिसम्‍बर 2010-11 के दौरान हुए 96210.22 मिलियन अमरीकी डॉलर के घाटे से अधिक है।
निर्यात और आयात : (अमरीकी डॉलर मिलियन)(अनंतिम)

दिसम्‍बर
अप्रैल-दिसम्‍बर
निर्यात (दोबारा निर्यात सहित)


2010-11
23442.07
172964.94
2011-12
25015.89
217663.66
% वृद्धि 2011-12/ 2010-2011
6.71
25.84
आयात


2010-11
31511.08
269175.16
2011-12
37753.36
350935.69
% वृद्धि  2011-12/ 2010-2011
19.81
30.37
व्‍यापार संतुलन


2010-11
-8069.01
-96210.22
2011-12
-12737.47
-133272.03



निर्यात और आयात (करोड़ रुपये)



(अनंतिम)
दिसम्‍बर
अप्रैल-दिसम्‍बर



निर्यात (दोबारा निर्यात सहित)


2010-11
105856.90
789068.93
2011-12
131775.95
1024706.95
% वृद्धि  2011-12/ 2010-2011
24.48
29.86
आयात


2010-11
142293.94
1228074.48
2011-12
198873.00
1651239.75
% वृद्धि  2011-12/ 2010-2011
39.76
34.46
व्‍यापार संतुलन


2010-11
-36437.04
-439005.55
2011-12
-67097.05
-626532.80
                                                         
                                                                                               पत्र सूचना कार्यालय