Wednesday, October 01, 2008

पंजाब और पंजाब

पंजाब............पाँच दरियाओं की धरती ! जहाँ दरिया झनां  ने किताबे-इश्क में कई नए अफ़साने जोड़ कर एक नया इतिहास लिखा.............. सोहनी महीवाल का, हीर-राँझा का और बहुत कुछ जो दर्द से सराबोर है पर फ़िर bhi शाह हुसैन को अगर ज़्यादा मकबूलियत मिली तो उस किस्से से जिस में वोह लिखता है :
जंग हिंद पंजाब दा होण लगा , दोवें पातशाही फौजां भारीयाँ ने , अज होवे सरकार ता मुळ पावे , जेहडिआं खालसे तेगां मारियाँ ने ! पर इसी पंजाब को पंजाब ke ही एक और शायर प्रोफ़ेसर मोहन सिंह ने लिखा है : भारत है वांग मुंदरी! विच नग् पंजाब दा .................. इन दो महान शायरों का ये ख्याल किस हालात में कविता बन कर निकला होगा इसका अनुमान लगाया जा सकता है..........!

4 comments:

rakhshanda said...

achaa likha hai...likhte rahen..

Rector Kathuria said...

Aap jaise achhe logon ke margdarshan se hi kuchh seekha ja sakta hai.........waqt nikalte rahein please

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

सही कहा आपने, पंजाब दा जवाब नहीं।
एक अनुरोध, कृपया कमेंट बॉक्स से वर्ड वेरीफिकेशन हटा दें, इससे सुविधा होगी।

लवली / Lovely kumari said...

जाकिर जी की अनुशंसा करती हूँ ..पंजाब अब कहाँ पंजाब रहा नदियाँ तो बाँट गई विभाजन मे ..खैर यह दर्द जिसने झेला वो ही बता सकता है ..
बाहरहाल उत्साहवर्धन का धन्यवाद.स्नेह बनाये रखें.