Monday, March 24, 2014

INDIA: टीबी पर राजनीतिक दलों को चुप्पी तोड़ने की जरुरत

Mon, Mar 24, 2014 at 1:21 PM
An Article by the Asian Human Rights Commission  विश्व तपेदिक दिवस – 24 मार्च पर विशेष
                                                                                                                                   --प्रशांत कुमार दुबे
[भारत में हर दो मिनटों में तीन मौत, रोजाना 1000 लोगों की मौत और सालाना 3 लाख से ज्यादा मौतों के कारक टीबी रोग को गरीबों की बीमारी कहा जाता है| इस चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों की पैनी निगाहों से आखिर क्यों यह मुद्दा छूट रहा है, यह समझ से परे है| इसी गंभीर मसले पर यह आलेख .......]
इस समय भारत में चुनावी चर्चा जोरों पर है| लोकतंत्र के इस पांच सालाना उत्सव के लिए हर कोई अपने-अपने हिस्से का चन्दन घिसने में लगा है| हर चौक-चौराहे पर आम आदमी से लेकर ख़ास आदमी के मुद्दों पर चर्चा है| यहाँ तक की अब आम आदमी की चाय की चुस्कियां भी अब राजनीति की सुगंध से प्रेरित हैं| टिकट वितरण की मारामारी के बाद राजनीतिक दल अब व्यंग्य बाण छोड़ने और आंकड़ों की बाजीगरी में लगे हैं| रोजाना नये-नए विज्ञापन सामने आ रहे हैं| यानी कुल मिलाकर चुनावी बाजार सज चुका है, हर तरफ मुद्दों की बोली है, लेकिन इस मुद्दों की मंडी से कुछ ऐसे मुद्दे छूटते जा रहे हैं जो कि बहुत जरुरी हैं| इसी तरह के एक बहुत ही जरुरी मुद्दे का नाम है टीबी यानी तपेदिक या यक्षमा|
टीबी कितना खतरनाक रोग है, यह इस बात से ही पता लगता है कि भारत में रोज लगभग 4 हजार लोग टीबी की चपेट में आते हैं और 1000 मरीजों की इस बीमारी की चपेट में आने से मौत हो जाती है| यानी हर दो मिनटों में तीन लोग टीबी (तपेदिक/यक्षमा) से मरते हैं | सालाना यह आंकड़ा 3 लाख के पार जाता है और मरने वालों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी होते हैं| विश्वभर में लगभग बच्चों की टीबी के सालाना 10 लाख प्रकरण सामने आते हैं, जो कि कुल टीबी के प्रकरणों का 10 से 15 फीसदी है। इस बीमारी का पांचवा हिस्सा भारत से आता है,भारत में विश्व के लगभग 21 फीसदी टीबी के मरीज हैं| यह इतना खतरनाक है कि हम सभी जानते हैं कि टीबी का सक्रिय जीवाणु साथ में लेकर चलने वाला व्यक्ति एक साल में 10-15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है| टी.बी. के कारण पारिवारिक आमदनी में हर साल औसतन 20 प्रतिशत तक का नुकसान होता है। और इसकी देश पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष वार्षिक लागत 23.7 अरब डॉलर आती है। यह सब भी तब है जबकि टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज और रोकथाम संभव है|
भारत जैसे देश में यह आंकड़ा इसलिये भी ज्यादा है क्योंकि भारत में कुपोषण बहुत है| सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा 2012 में जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग आधे बच्चे (48 फीसदी) कुपोषित हैं। वर्ष 2012 में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री ने हंगामा रिपोर्ट जारी करते हुए इसे राष्ट्रीय शर्म माना था| यह बच्चों की मौतों के 10 उच्च संभावना वाले कारणों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस साल 90 लाख टीबी रोगी मे से 10% से 15% टीबी रोगी 14 वर्ष व उससे कम उम्र के बच्चे हैं जिनको इलाज की ज़रूरत होगी। यह आंकड़ा दिन प्रति दिन बढ़ता रहेगा| यदि हम बच्चो में टीबी संक्रमण को रोकने में विफल रहे। चूंकि बच्चो में टीबी संक्रमण का एक प्रमुख कारण बड़ों की टीबी है, अतः बच्चों में टीबी संक्रमण को रोकने के लिए परिवार के सदस्यों व अभिभावकों की टीबी के बारे में साक्षरता बहुत ज़रूरी है।
मध्यप्रदेश में इन दिनों हर त्रैमासिकी में लगभग 4000 ऐसे नये बच्चे सामने आ रहे हैं जिनमें टीबी के प्राथमिक लक्षण मिलते हैं यानी हर साल ऐसे 16,000 बच्चे सामने आ रहे हैं| मध्यप्रदेश बच्चों में होने वाली टीबी के लिए इसलिए भी संवेदनशील है क्यूंकि मध्यप्रदेश में कुपोषण चरम पर है| प्रदेश का हर दूसरा बच्चा कुपोषित है| प्रदेश में लगभग 52 लाख बच्चे कुपोषित हैं और इनमें से 8.8 लाख बच्चे ऐसे हैं जो कि गंभीर रूप से कुपोषित हैं| प्रदेश शिशु मृत्यु दर में भी अव्वल है और हर साल यहाँ लगभग 1,20,000 बच्चे दम तोड़ते हैं और उनमें से एक बड़ा हिस्सा टीबी से ग्रसित बच्चों का भी है| मध्यप्रदेश की ताजा सच्चाई यह है कि 6 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को जहां हर रोज 1200 से 1700 कैलोरी ऊर्जा का भोजन मिलना चाहिये वहां आज उन्हें 758 कैलोरी ऊर्जा का भोजन ही मिल पा रहा है। एक मायने में उन्हें हर रोज केवल एक समय का भोजन मिल रहा है।
आखिर इतने विकराल और खतरनाक रोग के बावजूद भी यह रोग उतनी चर्चा में क्यों नहीं है? आखिर क्यों राजनीतिक दल इसे प्राथमिकता से क्यों नहीं देखते हैं और क्यों नहीं यह राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में स्थान पाता है| राजनीतिक दलों के साथ-साथ सरकार ने भी इसे नजरअंदाज किया है| टीबी पर काम कर रहे संगठनों की लाख कोशिशों के बावजूद भी प्रधानमन्त्री ने अभी तक इस गंभीर बीमारी को लेकर अपना कोई भी सन्देश जारी नहीं किया है| विगत वर्ष 24 मार्च को राष्ट्रपति महोदय ने सन्देश जारी कर इस रोग के होने वाले खतरों और इसकी विभीषिका से आगाह किया था| लेकिन हम सभी जानते हैं कि केवल संदेशों से ही रोग खतम नहीं किये जा सकते हैं, उसके लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है| ज्ञात हो कि हमने हाल ही में पोलियो पर विजय पाई है जो कि हम टीबी जैसे रोगों को कम करने और उससे निजात दिलाने में भी पा सकते हैं|
टीबी को गरीबों की बीमारी कहा जाता है शायद इसलिये भी यह मुद्दा सरकारों और राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में नहीं है| यह मुद्दा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा है| टीबी के बढ़ते मामलों और लगातार गंभीर होती इस बीमारी के लिए देश भर की 170 संस्थाओं के समूह, पार्टनरशिप फॉर टीबी केयर ऐंड कंट्रोल इंन इंडिया (पीटीसीसी) ने अब राजनीतिक दलों से उनके घोषणा-पत्र में टीबी को स्वास्थ्य के एक अहम मुद्दे के रूप में शामिल करने की वकालत की है। पीटीसीसी के चेयरमैन, डॉ़ एस एन मिश्रा कहते हैं कि अगर हमें टीबी की जंग को जीतना है तो हमें सार्वजनिक रूप में टीबी की जांच के लिए हाई क्वालिटी के उपकरण और ट्रीटमेंट की जरूरत है, जिसके लिए राजनीतिक दलों के एक्टिव सपोर्ट की बहुत जरूरत है। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए समाज में अस्वीकार्यता है और लोग खुल कर बीमारी के बारे में बात या इलाज नहीं करते।
आज टीबी को लेकर देश मैं माहौल बनाने की, बेहतर सुविधायें मुहैया कराने की, अन्तर्विभागीय समन्वय की, पोषण के साथ जोड़कर देखने की, इससे लड़ने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता है| यह तभी संभव है जबकि राजनीतिक दल इस पर ध्यान दें और अपनी प्रतिबद्दता दोहरायें| ध्यान रहे कि इससे पहले भी यह कवायद कई बार की जा चुकी है पर टीबी के मामले में राजनीतिक दलों की और से निराशा ही हाथ लगी है| पिछले लोकसभा चुनाव में भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों(कांग्रेस और भाजपा) ने इस मसले पर चुप्पी साध ली थी| इसके विपरीत मध्यप्रदेश के हालिया संपन्न विधानसभा चुनावों ने निश्चित रूप से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणा पत्रों में इस बीमारी से जुड़े पहलुओं पर स्पष्ट रूप से बात की थी| अब यही उम्मीद है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर ही इस बार सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे की तरजीह देंगे और इसके समूल नाश हेतु अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराएंगे|
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About the Author: Mr. Prashant Kumar Dubey is a Rights Activist working with Vikas Samvad, AHRC's partner organisation in Bhopal, Madhya Pradesh. He can be contacted at prashantd1977@gmail.com
About AHRC: The Asian Human Rights Commission is a regional non-governmental organisation that monitors human rights in Asia, documents violations and advocates for justice and institutional reform to ensure the protection and promotion of these rights. The Hong Kong-based group was founded in 1984.

दल-रहित घोषणा पत्र--- *सी. एल. गुलाटी

Sat, Mar 22, 2014 at 5:08 PM
गरीबी, बीमारी और अस्थिरता के चलते कभी भी पूरी तरह शान्ति नहीं हो सकती 
विश्व के सभी देशों में लगभग एक समान स्थिति है कि आम चुनावों की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल हरकत में आ जाते हैं और सत्ता हथियाने के लिए जोड़-तोड़, गठबंधन और समीकरण बनाने में जुट जाते हैं। सभी दल लुभावने वादे करते हैं, जनता को सुनहरे ख़्वाब दिखाते हैं और घोषणा करते हैं कि यदि वे सत्ता में आये तो उनकी क्या-क्या नीतियाँ और कार्यक्रम होंगें। सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में बयान देते हैं कि वे सत्ता में आने पर पवित्रता, पारदर्शिता, शान्ति और प्रगति लायेंगे और सभी लोगों के लिए धन-धान्य, समृद्धि और खुशी सुनिश्चित करेंगे। अब अगर हम उनकी इस घोषणा पर विचार करें तो पायेंगे कि धन, समृद्धि और प्रसन्नता सभी आपस में जुड़े विषय हैं और सही अर्थों में इनका आनन्द तब तक नहीं लिया जा सकता जब तक कि ये सभी मनुष्यों के पास बहुतायत में न हों।  यदि कुछ मनुष्यों के पास धन, समृद्धि और प्रसन्नता है और कुछ के पास नहीं, तो जीवन का वास्तविक आनन्द कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि देश के किसी भी भाग में गरीबी, बीमारी और अस्थिरता है तो पूरे देश में कभी भी पूरी तरह शान्ति नहीं रह सकती।

राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी घोषणा पत्रों में दिखाई गई लुभावनी तस्वीर तब तक मात्र कपोल कल्पना है जब तक कि मानवीय चरित्र में आध्यात्मिक और दिव्य गुण गहराई तक समाँ न जायें, इसलिए इस घुन लगे खोखले और वास्तविक गुणों से विहीन समाज को बदलने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति दिव्य गुणों का साकार रूप बने और दिव्य सत्ता की स्थापना हो परन्तु हम पाते हैं कि कोई भी राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में इन्सान को आध्यात्मिकता, दिव्यता और समाज को दिव्य आध्यात्मिक सत्ता के अनुरूप परिवर्तित करने की चर्चा नहीं करता। इसके विपरीत राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए समाज में घृणा और हिंसा को फैलाते हैं, और जातिवाद और साम्प्रदायिकता के आधार पर मानव को मानव से अलग करते हैं।

धर्म, जिसका उद्देश्य इन्सान को इन्सान से जोड़ना था आज सही अर्थों में अपना आकर्षण खो चुका है। धर्म आज एक विघटनकारी ताकत के रूप में काम कर रहा है और समाज की एकता और शान्ति को भंग कर रहा है। धर्म के नाम पर हो रही सामूहिक हिंसा और हत्याओं के प्रति समाज की असंवेदनशीलता गंभीर चिन्ता का विषय है। वैसे तो सभी प्रकार का आतंकवाद घातक है परन्तु धार्मिक कट्टरता से भड़कने वाला आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा शत्रु है। साम्प्रदायिकता के आधार पर मानवता का विभाजन परमाणु बम के विभाजन से भी अधिक खतरनाक है। यह सब हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या कभी समाज में प्यार और अपनेपन का एहसास पनप पाएगा?

इस अवस्था में सहज ही ध्यान इस ओर जाता है कि राजनीतिक दल जिस रामराज्य को स्थापित करने की बात करते हैं, वह तब तक स्थापित नहीं हो सकता जब तक कि इन्सान की प्रवृत्ति न बदली जाए। साथ ही यह भी एक तथ्य है कि इन्सानी प्रवृत्ति को बदलने के लिए राजनीतिक दल सक्षम नहीं हैं। इन दलों के पास वह जादू की छड़ी नहीं है जिससे मानवीय चरित्र और भावनाओं को मानवीय, आध्यात्मिक व दिव्य बनाया जा सके।

राजनीतिक दलों के पास ऐसी समझ, सूझ-बूझ और अनुभव नहीं है जिससे कि वे इस दिव्य कार्य को पूर्ण कर सकें। वास्तव में यह कार्य सद्गुरु (परमात्मा के साकार रूप) का है जो कि मानवता के लिए सक्षम दल-रहित घोषणापत्र लाता है, जिससे ब्रह्मज्ञान के आधार पर पवित्रता, शान्ति और समृद्धि लाई जा सकती है।

चरित्र निर्माण आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। भौतिक दृष्टिकोण ने सामाजिक संरचना को इस सीमा तक कमजोर बना दिया है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में स्वार्थ निहित हो गया है। इस समस्या का हल तभी सम्भव है जब आत्मज्ञान द्वारा प्राप्त मानवीय मूल्यों को एक बार फिर से अपनाया जाए। अहिंसक सामाजिक परिवर्तन के लिए आध्यात्मिक और नैतिक विकास अत्यन्त आवश्यक है।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय हम विदेशी शासकों की “फूट डालो और शासन करो” की नीति की आलोचना करते थे परन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के कई दशकों के बाद आज भी यह नीति समाप्त नहीं हुई और लगातार काम कर रही है।

1947 में प्रथम स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर प्रसिद्ध शायर फैज़ अहमद फेज़ ने इसे “सुबहे-आजादी” कहा परन्तु उसके बाद भड़के साम्प्रदायिक दंगों को देखने के बाद इसी शायर ने कहा, “यह वो सहर तो नहीं”। वे यह कहने पर मजबूर हो गये कि यह वो ‘सुबह’ तो नहीं जिसकी प्रतीक्षा हम सबने की थी। यह कितने आश्चर्य की बात है कि आज भी कुछ धर्मान्ध और अवसरवादी लोग साम्प्रदायिक आग भड़काकर हमारी आशाओं को धराशायी कर रहे हैं और हम यह कहने पर विवश हो जाते हैं कि - “यह वो धर्म तो नहीं”। आज विभाजित और विवश लोग कट्टरपंथियों को दोष देते हुए यही कहते हैं -
आग को होती नहीं, अपने-पराये की खबर, बात ये भूल गये, आग लगाने वाले।
परन्तु इस समस्या का हल धर्म को सच्चे अर्थों में अपनाकर ही सम्भव है। धर्म रूपी श्वेत प्रकाश जब मनुष्य रूपी प्रिज़्म से टकराता है तो विविध रंगों की किरणों में परिवर्तित हो जाता है। जैसे कि वेद और उपनिषद् कहते हैं - “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सारा विश्व एक परिवार है) पैग़म्बर मोहम्मद साहिब भी इसी बात पर बल देते हैं “अल-खलगु अयालुल्लाह” (अर्थात् सारी खलकत अल्लाह का परिवार है) सभी प्रमाणित धार्मिक ग्रन्थों में भी इसी पवित्र संदेश की गवाही दी गई है। वास्तव में यदि हम अपने झूठे अभिमान और शक्तियों की मृगतृष्णा को तज कर सोचें तो पाते हैं कि सभी धर्म एकता की भावना पर बल देते हैं और उनमें आपस में कोई मतभेद नहीं हैं।

सभी धर्मों का आधार एक परमात्मा है। निरंकारी बाबा जी के शब्दों में- “एक परमपिता परमात्मा की जानकारी ही सभी मतभेदों को मिटा सकती है।” बाबा जी का कथन है- “सारा संसार एक परिवार”। वह कहते हैं कि धरती पर स्थित सभी स्थानों की दूरियों को आप यातायात के किसी न किसी साधन से तय करते हो परन्तु इन्सानों के दिलों की दूरी को आप केवल ब्रह्मज्ञान रूपी सेतु द्वारा ही समाप्त कर सकते हो और इससे ही आपसी भाईचारा स्थापित होगा।

बाबा जी फरमाते हैं- “परमात्मा की जानकारी से ही होती है शान्ति की प्राप्ति” क्यों कि जब आत्मा में प्रकाश होगा तो इन्सानों में सुन्दरता होगी, जब इन्सानों में सुन्दरता होगी तो घरों में एकता होगी, जब घरों में एकता होगी तो देश में सुव्यवस्था होगी, जब देश में सुव्यवस्था होगी तो विश्व में शान्ति होगी।

इसी दल-रहित घोषणापत्र को ध्यान में रखते हुए विलियम बर्क ने कहा कि सच्चा धर्म ही समाज की नींव होता है जिस पर सभ्य सरकारों की इमारतें टिकी होती हैं, जहाँ से सत्ता अपना अधिकार, कानून, अपनी योग्यता और ये दोनों अपनी शक्ति प्राप्त करते हैं। यदि परस्पर घृणा से यह ढाँचा हिल जाए तो समाज व देश कभी भी स्थिर और टिकाऊ नहीं हो सकते।

संयुक्त राष्ट्र की यह मान्यता है कि मानव सभ्यता और प्रकृति में टकराव निरन्तर बढ़ता जा रहा है। विश्व के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों का भी अभिमत है कि समाज में बदलाव आवश्यक है अभी जो भी कुछ हम कर रहे हैं वह समाज को भारी गिरावट की ओर ले जा रहा है। इससे बचाव हेतु मानव के पास बहुत कम समय शेष है। अध्यात्म ही है जो इस भयावह परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। अतः इस मानवीय समस्या को आध्यात्मिक समस्या के रूप में स्वीकार करना होगा, अपने स्वभाव और जागरूकता में परिवर्तन लाना होगा तभी धरती पर विश्व समाज का स्वरूप सुन्दर बन सकेगा।
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*सी. एल. गुलाटी सन्त निरंकारी मण्डल दिल्ली के सचिव हैं। 


'लोक पहलकदमी' “EMBEDDED JOURNALISM” किताब पर करवाएगी चर्चा

जब पत्रकारिता सरकारी प्रचार मात्र बन कर रह गयी
"लोक पहलकदमी' तन्ज़ीम 6 अप्रैल (रविवार) को जाने पहचाने पत्रकारों जसपाल सिंह सिद्धु और  ਅਨਿਲ ਚਮੜੀਆ की ओर से सम्पादित किताब 'एम्बेडड जर्नलिज़म,पंजाब' (नियोजित पत्रकारिता, पंजाब) पर चर्चा करवाएगी। यह विचार चर्चा चंडीगढ़ के किसान भवन के प्रताप सिंह कैरों कांफ्रेंस हाल (सेकटर-34) में 11 बजे से 2 बजे तक चलेगी। चर्चा के मुख्य वक्ता होंगें-जगतार सिंह (लेखक 'खालिस्तान स्ट्रगल: ਏ ए नान मूवमेंट' व पूर्व पत्रकार-इंडियन एक्सप्रेस) और ਹਮੀਰ हमीर सिंह (सीनियर पत्रकार-पंजाबी ट्रिब्यूनेतृत्व न) होंगें। यह पुस्तक जन मीडिया प्रकाशन दिल्ली की ओर से प्रकाशित की गयी है। 
इस पुस्तक में एक लेख पत्रकार जसपाल सिद्धु की तरफ से लोखा गया है।  इसके इलावा अन्य लेखकों में प्रोफेसर प्रीतम सिंह (प्रोफेसर-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी) ਪ੍ਰੋ.ਪ੍ਰੀਤਮ ਸਿੰਘ (ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ,ਔਕਸਫੋਰਡ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ), राम नारायण कुमार  (मानवाधिकार कार्यकर्ता), पतवंत सिंह-(सिक्ख बुद्धिजीवी), त्रिलोक सिंह दीप (तत्काली सीनियर पत्रकार-दिनमान), प्रेस कौंसिल आफ इंडिया की रिपोर्ट शामिल है। गौरतलब है कि 1990-91 में केंद्र सरकार की तरफ से पत्रकार बी जी वर्गीज़ के नेतृत्व में  कश्मीर और पंजाब की पत्रकारिता के हालात का जायज़ा लेने के लिए प्रेस काउन्सिल की एक टीम भेजी गयी थी। इस  रिपोर्ट को किताब के ज़रिये पहली बार प्रकशित किया जा रहा है।  "एम्बेड जर्नलिज़म" (नियोजित पत्रकारिता) का कन्सेप्ट 2004 में अमेरिका की तरफ से इराक़ पर किये गए हमलों के दौरान उस समय सामने आया था जब अमेरिकी सेना अपने साथ 600 पत्रकारों की टीम ले गयी थी। जिन पत्रकारों को जंग के मैदान में लेजाया गया वे केवल सेना की  पर ही खबरें लिखते थे। इस तरह पत्रकारिता सरकारी प्रचार मर बन के रह गयी।  उस मौके पर पूरी दुनिया में "नियोजित पत्रकारिता" की काफी तीखी आलोचना हुई थी। 
इसी शब्द को मुख्य रख कर जसपाल सिद्धु और अनिल चमड़िया ਨੇ 'ऑपरेशन ब्लू स्टार" ਓਪਰੇਸ਼ਨ ਬਲਿਊ ਸਟਾਰ' 'में मीडिया के एकतरफा रवैये को परत दर परत टटोलने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक वास्तविक मांगों और समस्यायों को दबा कर स्टेट पत्रकारिता के ज़रिये "पापुलर स्पोर्ट" कैसे प्राप्त करती है। इसकी कई मिसालें इस पुस्तक में दर्ज हैं। प्रोफेसर प्रीतम सिंह का लेख कहता है कि  
'ब्लू स्टार' की मीडिया ने एकतरफा रिपोर्टिंग की और चीज़ों को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत किया। 
'लोक पहलकदमी" की तरफ ने का प्रयास करते हैं और करते रहेंगे। सभी मित्रों को इस विचार चर्चा में शामिल होने का खुला निमंत्रण है। हर व्यक्तिगत और  का स्वागत है। 
टीम "लोक पहलकदमी" 
नयनइंद्र सिंह,  (98761-10958) जसदीप सिंह (99886-38850) गंगवीर राठौड़-(99889-54521) कपिल देव (98725-96106) इमरान खान (98882-650070) हरप्रीत सिंह काहलों (94641-41678)          {गुलाम कलम से साभार}
'ਲੋਕ ਪਹਿਲਕਦਮੀ' “EMBEDDED JOURNALISM” ਕਿਤਾਬ 'ਤੇ ਕਰਵਾਏਗੀ ਚਰਚਾ


23 मार्च-बड़े पैमाने पर हुआ शहीदों को नमन

कई स्थानों पर हुए कार्यक्रम  --Updated on March 24 2014 at 14:30 
लुधियाना: 23 मार्च 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): वर्ष में 364 दिन शहीदों को भुलाये रखने वाले लोग दिन विशेष आने पर बहुत ही जोशो खरोश से अपनी श्रद्धा के फूल अर्पित करते हैं। इस रस्म को निभाने के बाद जल्द से जल्द वहाँ से खिसक लेते हैं। यही कुछ आज भी हुआ। बहुत से लोग आये--फूल मालाएं पहनायीं और चलते बने। फोटो खिंचवाने और फिर जल्द से जल्द किसी और जगह भाग लेने की होड़। कुछ तो ऐसे थे जो बार बार किसी वरिष्ठ नेता के आ जाने से उसके साथ खड़े हो जाते थे तांकि उनकी फोटो भी दोबारा तिबारा उनके साथ आ सके। अगर आज अधिक फोटो खिंचवाने का कोई मुकाबला होता तो शायद बहुत से लोगों को इनाम मिलते। शहीदों के सपनों की बात करने की हिम्मत बहुत ही कम लोगों ने बहुत ही कम कार्यक्रमों में दिखायी पर इन कम लोगों ने ही वास्तव में शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी ।
माकपा नेता वृंदा करात अपने घोषित समय से कुछ देरी से पहुंची। इसी बीच अकाली दल और अन्य सियासी व समाजिक संगठनों ने जगराओं पुल पर पहुँच कर शहीदों को नमन किया।  अकाली नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों, मनप्रीत सिंह अयाली, मेयर हरचरण सिंह गोलवड़िया, हरभजन सिंह डंग, गुरिंदरपाल सिंह पप्पू और कई अन्य नेतायों ने शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
हैल्पिंग हैंडस कल्ब के  सदस्य भी शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए जगराओं पुल पर स्थित शहीदों की प्रतिमा पर पहुंचे। शायद यह पहला ऐसा संगठन था जो जूते उतर कर सीडियां चढ़ा। इस संगठन के राष्ट्रिय अध्यक्ष-रमन गोयल, मुख्य सलाहकार अवनीश मित्तल, नीरज वर्मा, ज्योति डंग, गगन अरोड़ा, दीपक जैन, वरुन जैन, निखिल गोयल, राजीव अरोड़ा, रशिम कालड़ा, अमित सैणी, शशि, तरुण गोयल, राकेश सिंगला और कई अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने शहीदों की कम उम्र और ऊंचे निशानों की चर्चा की।  
आज़ाद क्रन्तिकारी सेवा दल ने भी इस दिन को श्रद्धा से मनाया और शहीदों की याद को ताज़ा किया।  संगठन के प्रधान गुरजीत सिंह राणा ने लुधियाना में एक अजायबघर बनाने की मांग भी की। इस मौके पर वरिंदर सिंह वीरू, सिमरनजीत सिंह सोनी,अमित, गगन, रानी, रिंकी, सचिन और कई अन्य सदस्य भी मौजूद थे। 
इन लोगों ने जगराओं पुल का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने और नशे की रोकथाम के लिए ड्रग्स माफिया पर नकेल कसने की मांग भी की। 
इस ऐतिहासिक दिन के मौके पर किदवई नगर इलाके में स्थित मिनी रोज़ गार्डन में एक यादगारी कार्यक्रम हुआ। रमेश बांगड़ और उनकी टीम के प्रयासों से हुए इस कार्यरम में कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। स्कूली बच्चों ने अपनी रंगारंग आइटमों के ज़रिये जहां दर्शकों का मनोरंजन किया वहीँ समाज के नव निर्माण के लिए कई संदेश भी दिए। केसरिया रंग में रंगे सैंकड़ों नौजवान रंग  बसंती चोला की याद दिल रहे थे। 
एक्टिव एंटी क्रप्शन ग्रुप व बदर्स कल्ब की तरफ से किदवई नगर स्थित मिनी रोज गार्डन में रमेश बांगड़ और गुरदेव शर्मा देबी की अध्यक्षता में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी की याद को समर्पित निघी याद शहीदां दी नाटक का मंचन किया गया। भगत सिंह व साथीयों की तरफ स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हकूमत को जड़ों से उखाड़ फैकने के लिए अपनाए गए तौर तरीकों को देख कर उपस्थित जनसमूह दांतो तले उंगलिया दबा कर बोले वाह भगत सिंह तेरी कुर्बानी बेमिसाल। नाटक में भगत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में कूदने से लेकर फांसी की सजा तक फिलमाए दृश्यों की जम कर सराहना हुई। लोग लगातार इन्हें देखने के लिए वहाँ बैठे रहे। हर किसी की निगाह स्टेज की तरफ थी। स्टेज पर हो रहा मंचन देख कर कई लोगों की आँखों में आंसू तक आ गए। 
इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नेतायों में भी जैसे कोई होड़ लगी थी। बहुत से प्रमुख नेता यहाँ आये, बैठे और कार्यक्रम को देखा-सुना और कलाकारों की अफ़ज़ाई की। जगह काफी बड़ी होने के बावजूद प्रोग्राम के अंत तक भरी रही। स्टेज तक आना जाना काफी मुश्किल था। लोगों के इस जोश को देख कर लगता था कि शहीदों के एक नारे पर कितने लोग एकत्र हो सकते हैं। समारोह में बाबा कुलवंत भल्ला, शून्य प्रभु, पूर्व मंत्री सतपाल गोंसाई, अकाली भाजपा उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली,आजाद प्रत्याशी  सिमरजीत सिंह बैंस, समाज सेवक जगदीश बजाज, अमित गोंसाई, गुरदीप सिंह गोशा, पार्षद गुरप्रीत सिंह खुराना, दलजीत सिंह भोला, डोली गोंसाई, सब इंस्पैक्टर हरबंस सिंह, प्रितपाल सिंह भापा,बरजिन्द्र सिंह, अश्वनी कत्याल ने शहीदों को प्रणाम किया। रमेश बांगड़ और गुरदेव शर्मा देबी ने शहीदों को शत-शत प्रणाम करते हुए युवा पीढ़ी को अपने महान शहीदों के पदचिन्हों पर चलते हुए देश की एकता व अंखडता के लिए हर समय तैयार रहने का आहवान किया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करने का संकल्प दोहराया।  
इससे पूर्व दोनों संगठनो के सदस्यों व नौजवानों केसरी पगडिय़ां व शहीदो की तस्वीरों वाली शर्टे पहन कर भ्रष्टाचार से मुक्ति ,नशे रहित ,सामाजिक बुराइयों के खात्मे के लिए शपथ ली। वहीं जरूरतमंद परिवारों से संबंधित विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद व बेसहारा महिलाओं को घरेलू जरूरत का सामान उपलब्ध करवाया गया। इस अवसर पर एक्टिव एंटी क्रप्शन ग्रुप के अध्यक्ष रमेश बांगड़,बदर्स कल्ब  के अध्यक्ष हरपाल सिंह जगगी,कुणाल सचदेवा,तरणजीत सिंह लव्ली,चनप्रीत सिंह,मनोज बांसल,गुरप्रीत सिंह,हैप्पी,दीप मान,दपिन्द्र,मनप्रीत सिंह शिबू,जसमीत सिंह,गगनदीप,मनी बेदी,रवि बाहरी, दीप मान, जसप्रीत जस्सी, राजू बावा, करन बांगड़, प्रदीप पप्पू, सलीम खान, तिलक राज,प्रदीप कुमार,राहुल बिल्ला,गुरप्रीत ढींढसा, मनदीप मुंडी,चरणजीत सैनी और प्रदीप अप्पू सहित अन्य भी मौजूद थे।  
कार्यक्रमों की भीड़ में सबसे अलग था ऋषि नगर में पड़ती चाँद कलोनी में हुआ कार्यक्रम। "साथी तेजा सिंह स्वतंत्र मोहल्ला सुधर कमेटी" की ओर से कराये गए कार्यक्रम में मुख्य मेहमान थे शहीद भगत सिंह के सगे भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह जो लम्बे समय से  विचारों को  हैं। इस में रंगारंग कार्यक्रमों में मनोरंजन तो था लेकिन इस मनोरंजन में शहीदों का संदेश छुपा होता था और हर आइटम लोगों को सोचने के लिए मजबूर करती थी। कार्यक्रम एक घंटे के लिए घोषित था लेकिन चला कई घंटे तक। लोग अँधेरा होने तक वहाँ बैठे रहे। 
प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने शहीद भगत सिंह के बचपन की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने बच्चों से सीधे सीधे सम्बोधित होते हुए कहा कि वे तंदरुस्ती का ध्यान रखें---निराशा को पास भी न फटकने दें और अपनी मेहनत पर ही विश्वास रखें। उन्होंने साम्राजयवाद की चालों और कॉरपोरेट के सामने घुटने टेके जाने की सरकारी नीतियों को बहुत ही सहज शब्दों में बेनकाब किया। यूं लगता  था जैसे उन्होंने भगत सिंह के जीवन काल के वो गौरवशाली पन्नों का अतीत फिर से जीवंत कर दिया हो। उन्होंने गुरुबाणी और शायरी के संमिश्रण से एक ऐसा जादू जगाया कि शहीद भगत सिंह आस-पास बैठे प्रतीत होने लगे। 
साम्प्रदायिक साज़िशें:उन्होंने बताया कि कैसे जब शहीदों के बुत लुधियाना में लगने की बात आयी तो उस समय के एक वरिष्ठ नेता उनके घर आये और कहने लगे कि सुखदेव का बुत अलग जगह एक सब्ज़ी मंडी में लगेगा---भगत सिंह का अलग जगह और राजगुरु का राजगुरु नगर में। यह सब सुनकर मेरे नानी बोले मेरा बेटा अपने साथियों के साथ खड़ा ही अच्छा लगता है। इस तरह इन तीनों शहीदों को एक ही जगह पर सतहपित किया गया। जिनको न अँगरेज़ सरकार बाँट सकी और न ही मौत की सज़ा उन्हें ये साम्प्रदायिक लोग बाँटने चले थे।  इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा हम सबको मिलकर करना होगा। उनकी ज्ञान भरी बातों को सुनकर बहुत सी बच्चियां उनके आटोग्राफ लेने आयीं।  बहुत से बच्चों ने उनसे उनका फोन नंबर माँगा। इसी तरह कई अन्य स्थानों पर भी कार्यक्रम हुए। 
“आप“ ने भी दी शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को श्रद्धांजली
शहीदों के सपनों का भारत बनाएंगे–“फूल्का“
आम आदमी पार्टी के लुधियाना क्षेत्र से लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी एडवोकेट एच. एस. फूल्का और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आज जगराओं पुल पर शहीदों के स्मारक स्थल जाकर अपनी  श्रधा सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजली दी | इस अवसर पर एडवोकेट फूल्का ने जहाँ शहीदों को श्रद्धांजली दी वहीं इस बात पर गहरा दुख भी प्रकट किया कि, आजादी के 65 वर्षों के पश्चात् भी आम आदमी को सच्ची आजादी प्राप्त नही हो सकी है | आज भी सरकारी विभागों में आम आदमी को अपने छोटे से छोटे कार्य करवाने के लिए किसी न किसी नेता की सिफारिश या सिफारिश की पर्ची देनी पड़ती है जो की सही मायने में हमारे शहीदों की कुर्बानियों का अपमान है |

आगे फूल्का ने कहा की आम आदमी पार्टी शहीदों की क़ुरबानी को व्यर्थ नही जाने देगी इस अवसर पर जहाँ कार्यकर्ताओं के द्वारा “ इन्कलाब जिंदाबाद “ के नारे बुलंद किये गए वहीं इस बात का भी प्रण लिया गया “ भगत सिंह तेरी सोच ते – पहरा देयांगे ठोक के “ | एडवोकेट फूल्का और पार्टी के कार्यकर्ताओं की उपस्तिथि ने माहौल को जोशीला और देशभक्ति पूर्ण बना दिया |

शहीदी दिवस के इस अवसर पर एडवोकेट फूल्का ने लोगों से प्रण लेने के लिए कहा कि अब समय आ गया है हर सच्चे देशभक्त को आज यह प्रण लेना चाहिए कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए और बेईमान सियासतदानों को सत्ता से बाहर निकालने के अपना यथासंभव सहयोग प्रदान करेंगे | यही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली होगी |

शहीदों को श्रद्धांजली देने के पश्चात् एडवोकेट फूल्का और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शहर में पैदल मार्च निकला जो की मातारानी चौक, फव्वारा चोक, रानी झाँसी रोड, भारत नगर चौक, कोचर मार्किट, मॉडल ग्राम, राजगुरु नगर, होता हुवा सराभा नगर में संपन्न हुआ |

Sunday, March 23, 2014

लुधियाना में जागृति लहर की धमाकेदार शुरुआत

प्रमुख लोगों ने की शिरकत-अविनाश चोपडा ने भी दिया आशीर्वाद
लुधियाना/जालंधर: 23 मार्च 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): 
जागृति लहर की धमाकेदार शुरुआत मीडिया के साथ साथ आम जन मानस के लिए भी किसी खुशखबरी से कम नहीं। इसका संचालन गौतम जालंधरी जैसे मंझे हुए पत्रकार के हाथ में होना एक नए विश्वास को पैदा करता है। वह विश्वास जो खो चूका है। वह विश्वास जो पेड खबरों के बोझ में दब चूका है। वह विश्वास जो गुटबंदक और राजनीतिक रंजिशों के कारण दम तोड़ रहा है। इन सब बैटन की गवाही इसकी लांचिंग के शुभ अवसर पर पहुंचे प्रमुख लोगों ने भी दी। हीरा सिंह गाबड़िया और अमरजीत सिंह चावला जैसे वरिष्ठ नेतायों ने मीडिया में आयीं बुराईयों को खुल कर उठाया। उनका खुल कर बोलना और उन्हें खुल कर सुना जाना दोनों ही बातें संकेत हैं कि उह अख़बार मीडिया से जुड़े सिद्धांतों की रक्षा करेगा। इस लांचिंग पर प्रस्तुत किया गया यादगारी गीत संगीत भी एक तरह से ऐलान था कि अगर कारोबार और देश में से किसी एक के चुनाव की बात आयी तो हम देश को चुनेगे। 
इसके बाद पंजाब केसरी के निदेशक अविनाश चोपडा जी ने जालंधर में जागृति लहर न्यूजपेपर को रिलीज़ किया और समाचार पत्र के मुख्य संपादक गौतम जालंधरी को मुबारकबाद दी। इस समय प्रेस क्लब के चेयरमैन अशोक थापर, लीगल एडिटर राजेश मेहरा, चीफ एडवाइजर डॉ. सुनील लाखोत्रा, एडवाइजर तरुण गोयल को भी अविनाश चोपड़ा जी ने मुबारकबाद दी। इस प्यार और विश्वास के लिए जागृति लहर परिवार की ओर से अविनाश चोपड़ा जी का धन्यावाद भी किया। अविनाश चौपड़ा जी का आशीर्वाद लेना भी एक संकेत है कि कि गौतम जालंधरी और उनसे जुडी टीम वरिष्ठता के सम्मान को नहीं भूलेगी। 
 अब लुधियाना में नया अख़बार जागृति लहर कब और कितना कामयाब होता है इस सवाल का जवाब  वक़त पर छोड़ते हुए आशा एवं आकांक्षा व्यक्त करते हैं कि यह अख़बार और वेब चैनल लोगों को न्याय दिलाने में बनती ज़िम्मेदारी प्रभावशाली ढंग से निभाएगा।  

शहीदी दिवस पर किया आपसी एकता बढ़ाने का प्रयास

पब्लिक पुलिस कॉपरेशन ने दिए मिशनरी को उपहार
लुधियाना: 23 मार्च 2014: (रवि नंदा//पंजाब स्क्रीन): 
शहीद-ए आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहीदी दिवस पर पब्लिक पुलिस कॉपरेशन (रजि) का एक शिष्टमंडल क्रिश्चियन संस्थान में गया तांकि एकता की भावना को मज़बूत करके शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके। इस संस्थान की और से जालंधर बायपास लुधियाना स्थित मदर टरेसा मिशनरी को खाने पीने और रोजमर्रा की ज़िंदगी में जरुरत पड़ने वाली चीजे (चावल, चीनी, मैग्गी, दलिया, सर्फ़, साबुन, बर्तन, बाल्टिया, फरनायल आदि)  उपहार स्वरूप वितरित की  गयी।  इस मौके पर संस्था के पैट्रन व् यूथ अकाली दल नेता श्री गुरदीप सिंह गोशा और थाना सलेम टाबरी के इंचार्ज श्री केवल कृष्ण भी पहुंचे। श्री गोशा ने संस्था की ओर से किये गये इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने अपने कार्य की शुरुआत बहुत ही अच्छा काम करके की है। उन्होंने कामना की कि आगे भी संस्था इसी तरह के अच्छे कार्य करे। श्री केवल कृष्ण ने कहा की समाज में अगर इंसानियत बरकरार रखनी है तो इसी तरह से हर व्यक्ति को जरुरतमंदो की मदद करनी चाहिए। अपने राह से भटके हुए युवा वर्ग का सही मार्ग दर्शन कर उन्हें नशे और जुर्म के रास्ते से दूर हटने में मदद करे ताकि आने वाला समय नशा व् जुर्म मुक्त हो सके। 
            यह सब कार्य संस्था के प्रधान अमरदीप सिंह के नेतृत्व में किया गया जिसमे औरों के अलावा उप चेयरमैन चरणजीत सिंह, लुधियाना प्रधान सरवजीत सिंह, निर्देशक तजिंदर पाल सिंह, उप निर्देशक गुरमीत सिंह, उप प्रधान हरजीत सिंह, नवनीत विज, रवि नंदा, नरिंदरपाल सिंह, हरजीत सिंह ( रिंकू ), नरिंदर सिंह, गौरव खनेजा, विपन आदि भी शामिल रहे।  

शहीदों के लिए


Courtesy:नौजवान भारत सभा//YouTube
21-03-2014 पर प्रकाशित
शहीदों के लिए

जिन्दगी लड़ती रहेगी-गाती रहेगी
नदियाँ बहती रहेंगी
कारवाँ चलता रहेगा, चलता रहेगा, बढ़ता रहेगा
मुक्ति की राह पर
छोड़कर साथियो, तुमको धरती की गोद में।

खो गये तुम हवा बनकर वतन की हर साँस में
बिक चुकी इन वादियों में गन्ध बनकर घुल गये
भूख से लड़ते हुए बच्चों की घायल आस में
कर्ज में डूबी हुई फसलों की रंगत बन गये
ख़्वाबों के साथ तेरे चलता रहेगा---

हो गये कुर्बान जिस मिट्टी की खातिर साथियो
सो रहो अब आज उस ममतामयी की गोद में
मुक्ति के दिन तक फिजाँ में खो चुकेंगे नाम तेरे
देश के हर नाम में जिन्दा रहोगे साथियो
यादों के साथ तेरी चलता रहेगा---

जब कभी भी लौट कर इन राहों से गुज़रेंगे हम
जीत के सब गीत कई-कई बार हम फिर गायेंगे
खोज कैसे पायेंगे मिट्टी तुम्हारी साथियो
जर्रे-जर्रे को तुम्हारी ही समाधि पायेंगे
लेकर ये अरमाँ दिल में चलता रहेगा...
शशि प्रकाश