Saturday, December 13, 2014

लुधियाना में दो दिवसीय वैडिंग प्रदर्शनी शुरू

गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े iphone 6 ने लुधियानावासियों को लुभाया   
लुधियाना: 13 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
चंडीगढ़ में कई दिलों को लुभाने के बाद, ज़ायरा डायमंड्स अब अपने गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े Iphone 6 के साथ लुधियानावासियों के दिलों में समाने को तैयारहै। इस सिलसिले में ज़ायरा डायमन्डज़ ने लुधियाना में अपनी प्रदर्शनी की शुरूआत की है। आभूषणों के लिए विश्वसनीय माने जाने वाले ब्रांड ज़ायरा डायमन्डज़ की इसएक्स्क्लूसिव कलेक्शन की प्रदर्शनी का शुभांरभ किया जाने माने उद्योगपति बी सी नागपाल और पंजाबी फिल्मों के मशहूर अभिनेता हेक्टर संधू ने होटल पार्क प्लाज़ामें 13 दिसंबर से दो दिन की प्रीमियम वेडिंग और लाइफस्टाइल प्रदर्शनी में भी इन खास गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े आईफोन्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
ज़ायरा डायमंड के मनोज जैन के मुताबिक,लुधियाना अपने व्यवसायिक उत्साह के लिए जाना जाता है। साथ ही इस शहर के लोग महंगे गैजेट्स के लिए अपने शौकके लिए भी मशहूर हैं। लुधियानावासियों के इसी शौक के लिए हम यहां खास गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े आईफोन्स लेकर आए हैं। इन आईफोन्स की कीमत 90हज़ार से लेकर 6 लाख रुपए तक है। आईफोन्स की कीमतें उनमें जड़े डायमंड की गुणवत्ता और संख्या पर भी निर्भर करती है।"
ये आईफोन्स खरीददारों के लिए अपने महंगे शौक को पूरा करने लायक तो हैं ही साथ ही ये किसी निवेश से भी कम नहीं है. लुधियाना में ज़ायरा डायमंड्स की प्रदर्शनीमें एक ही छत के नीचे लाइफस्टाइल और लक्ज़री आईटम्स पेश किए जाएंगे. इस दौरान ज़ायरा गोल्ड प्लेटिड और डायमंड जड़े पेन, जिनकी कीमत 50,000 से 2 लाख रुपए तक होगी, डायमंड जड़ी स्विस घड़ियां, जिनकी कीमत 2 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक होगी, ऐसे कई आईटम्स ज़ायरा डायमंड्स की दो दिनों कीप्रदर्शनी में दिखाए जाएंगे।
ज़ायरा के आभूषण IGI मार्क और हॉलमार्क प्रमाणित होते हैं इसीलिए इसकी विश्वसनीयता सौ प्रतिशत खरी होती है. चंडीगढ़ में 2010 में अपने पहले आउटलेट केखुलने के बाद से अब तक ज़ायरा ने आभूषण जगत में काफी नाम कमाया है. वर्तमान में ज़ायरा के पूरे देश में 13 स्टोर हैं और अब कंपनी ने 2015 तक देश के बाकीशहरों में 40 स्टोर शुरु करने का लक्ष्य रखा है।
लुधियाना में आयोजित ज़ायरा डायमन्डज़ की इस प्रदर्शनी में शादी ब्याह के लिए महंगे और शानदार आईटम्स पेश किए गए। इस प्रदर्शनी में महिलाओं और पुरुषों के लिए इटैलियन डिजा़यन की अंगूठियां, और बैंड्स, रिंग कम पेन्डेन्ट्स, पेन्डेन्ट्स कम नेकलेस और कॉकटेल रिंग्स जैसे वो सभी महंगे आईटम्स हैं जिसे अपनी शादीयादगार बनाने के लिए हर महिला या पुरुष खरीदने की चाह रखता हैप्रदर्शनी में आकर यकीकन आप खुद को खरीददारी से रोक नहीं पाएंगे क्योंकि यहां जो आईटम्स हैं उन्हें आप अपने पास ज़रूर देखना चाहेंगे।

जादुई सुधार का चमत्कार दिखाएगी साइक्लिंग

लोगों  के स्वास्थ्य और आर्थिकता में होगा एक बार फिर नया करिश्मा 
लुधियाना: 13 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
कोई ज़माना था जब लोग साईकल चलाते थे और उम्र भर रिष्टपुष्ट रहते थे। न जवानी में सांस चढ़ता था और ही बुढ़ापे में घुटने दर्द करते थे। ऐसी बहुत सी खूबियों वाली साईक्लिंग में फिर से नया जोश जगाने का एक विशेष प्रयास हुआ पीएयू में। आइए आपको दिखाते हैं एक विशेष रिपोर्ट। 
आज लोगों ने जो देखा वे साईक्लिंग के चमत्कार हैं जो धीरे धीरे लुप्त हो चुके हैं। पहले इन चमत्कारों को पंजाब की सड़कों पर आम देखा जा सकता था। बच्चों से लेकर बज़ुर्गों तक हर कोई साइक्लि को अपनाये हुए था।  पंजाब में नशे ने अपना जोर बढ़ाया तो हैरोइन और स्मैक जैसे  नशे युवाओं के  गए।  स्मैक, मोबाईल  और मोटरसाईकल पंजाब के  युवाओं की पहली पसंद बन गए। इस तेज़ रफ्तारी और दिखावे के युग ने हमसे साईक्लि लिया और इसके साथ ही छिन  गया लोगों के उम्र भर स्वस्थ रहने का एक शानदार नुस्खा। रही सही कसर साईकल की कीमतों में हुए इज़ाफ़े पूरी कर दी। मोबाईल फोन और इस पर चलती गेमों ने साईकल को एक तरह से अवलुप्त ही कर दिया। अब साईकल बहुत कम दिखते हैं। इसके साथ ही युवाओं का वो जोश और स्वास्थ्य भी गायब हो गया जिसका लोहा साडी दुनिया मानती थी। वो गीत एक बार फिर सही साबित होने लगा---तंग पेंट पतली टांगें--लगती हैं सिगरेट जैसी। युवाओं की हालत बदतर से बदतर होती चली गयी। जिस उम्र में  चुनौतियों को ललकारना ज़माने को और बदलना होता है उस उम्र में युवा  अपना मुँह छुपाये नशे के दरिया में डूब गया।  उस इ नशे के इस नरक से  निकालने के प्रयासों में साईक्लिंग फिर एक उम्मीद बन कर सामने आई है। हमने इस संबंध में एक खिलाडी से भी बात की। 
इस संबंध में एक खिलाडी से बात की तो उसने साईक्लिंग की बहुत सी खूबियों के बारे में बताया। इन बातों का सार यही था कि साइक्लिंग अपनायो--नया स्वास्थ्य अपनायो। इसके साथ ही बचेगा रोज़ रोज़ छोटी छोटी दूरी के लिए होने वाला पैट्रोल//डीज़ल का खर्चा। जाने माने टीवी एंकर//फिल्म अदाकार और शिक्षा विशेषज्ञ कर्मदीप बिरदी हर रोज़ कई कई किलोमीटर साईक्लिंग करते हैं। स्कूटर/बाईक और कार होने के बावजूद वे साइक्लिंग करके हर रोज़ खुद की पसीने में डुबो देते हैं और यही है उनकी सदा बहार जवानी का राज़। दुनिया की परवाह किये बगैर वे अक्सर हर रोज़ खुलेआम साईक्लिंग करते हैं। 
साईक्लिंग के जादू को जगाने वाली इस पहल का उद्द्घाटन किया अकालीदल के वरिष्ठ नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों ने।   उनकी इस पहल ने बहुत सी नई आशाएं भी जगाई हैं।उन्हीने कहा कि इस संबंध में कई और कदम भी उठाये जाएंगे। 
इसी तरह जिला परिषद के चेयरमैन भाग सिंह मल्ला भी इस ऐतिहासिक अवसर पर मौजूद थे। उन्होंने भी आश्वासन दिया कि इस मामले में नई कोशिशें होंगीं और साईकल फिर अपना चमत्कार दिखाएगी। 
अब देखना है कि साईकिल इंडस्ट्री सस्ते भाव पर साईकिल उपलब्ध कराकर इस नए अवसर का फायदा उठा पाती है या नहीं?

बांगड़ ने एक बार फिर खोली नगरनिगम लुधियाना की पोल

मीडिया के सामने किया नगरनिगम के कथित घोटाले का नया खुलासा
लुधियाना: 13 दिसंबर 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
मीडिया से बात करते हुए रमेश बांगड़ 
भ्रष्टाचार के मामलों को अक्सर ही बेनकाब करने वाले रमेश बांगड़ ने एक बार फिर पोल खोली है एक नए मामले की। इस बार उन्होंने निशाना साधा है नगरनिगम पर। उन्होंने मीडिया की  टीम को अपने साथ ले जा कर चीमा चोक की तरफ बंद किये गए पुल का मौका भी दिखाया। मामला बेहद नाज़ुक निकला। अब सवाल उठता है कि घोटालों का पता लगाने की बजाये उन पर लीपापोती का सिलसिला कब तक जारी रहेगा?
जो मौका श्री बांगड़ ने दिखाया वह चीमा चोंक की तरफ बंद किये गए पुल का था। पुल के नीचे नज़र आ रहीं थी  ट्रैफिक जाम की लम्बी लम्बी कतारें। इनमें कोई स्कूल वैन भी हो सकती थी और कोई एम्बूलेंस भी। अगर इलाज में देरी के कारण किसी मरीज़ की मौत होती है तो हो जाये लगता है नगरनिगम को इससे कोई लेना देना नहीं है। नगरनिगम ने अपना तुगलकशाही फरमान सुनाते हुए इस पुल को आनन फानन में बंद कर दिया। जो काम एक या दो दिन में पूरा किया जा सकता 
दुसरे शहरों से आये मुसाफिर सड़कों पर  भटकते हुए 
था उसके लिए दस दिनों का समय भी घोषित कर दिया गया। इस सारे चक्र की कागज़ी करवाई पूरा करने में जो समय लगा वह है अलग। गौरतलब है कि इस पुल के 9 बीम हैं और इस काम के लिए कुछ मज़दूर एक साथ लगाये जाते तो यह काम दो दिन से अधिक का नहीं था। पर यहाँ लगाये गए केवल दो-चार मज़दूर। 
श्री बांगड़ ने इस पुल पर चल रहे काम का जायज़ा लेते हुए इसकी झलक मीडिया को भी दिखाई। उन्होंने पुल की दीवारों पर लगे सीमेंट का हाल दिखाते हुए यहाँ हुए भ्रष्टाचार की हकीकत भी दिखाई। उन्होंने सवाल भी किया कि अगर 50 वर्षों से चल रहे जगराओं पुल को कभी मुरम्मत की ज़रूरत नहीं ई तो केवल दस वर्ष पूर्व बने इस पुल के गिरने का अंदेशा कहाँ से पैदा हुआ?  ज़ाहिर है कि यदि ऐसा गंभीर खतरा पैदा हुआ है तो फिर यहाँ कोई बहुत बड़ा घपला दस वर्ष पूर्व इसके निर्माण के समय ही हुआ होगा। श्री बांगड़ ने बहुत ही आसानी से पुल पर लगे सीमेंट को उखाड़ कर भी दिखाया कि कैसे यह पलस्तर मिटटी की तरह उखड़ा जा रहा है। 
अब देखना है कि सरकार इसका तुरंत नोटिस लेकर इस घपले की जांच करवाती है या इसको भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?