Saturday, March 29, 2014

जारी है जुर्म की दहशत और वहशत

लूट-पाट, दुष्कर्म और छेड़छाड़ से छाया सहम 
लुधियाना: 28 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
समाज में लाखों सुधारों के दावों और पुलिस की अनगिनत कोशिशों के बावजूद जुर्म की वहशत लगातार जारी है। लूट-पाट, छीना-झपटी, छेड़-छाड़ और हत्या जैसी वारदातें अखबारी पन्नों का एक अभिन्न एंग बन गयी हैं। 
छेड़छाड़ के बाद मारपीट: पुलिस थाना डिवियन नंबर-4 के अंतर्गत दुर्गापुरी इलाके में स्थित मंदिर वाली गली में युवक द्वारा लड़की से छेड़छाड़ करने से रोकने पर युवक और उसकी मां ने लड़की व उसके पिता से मारपीट कर घायल कर दिया। गौरतलब है कि छेड़छाड़ करने और फिर पीड़िता के साथ ही मारपीट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस बार मारपीट के दौरान लड़की के सिर पर चोट आयी व उसके पिता की बांह टूट गई। घायलों की ओर से शोर मचाने और आसपास के लोगों को इकट्ठे होते देख आरोपी मां-बेटा मौके से फरार हो गए। परिजनों ने घायलों को एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। थाना डिवीजन नंबर 4 की पुलिस ने दुर्गापुरी के रहने वाले लड़की के पिता पवन कुमार की शिकायत पर पड़ोसी मोनू व उसकी मां के खिलाफ मामला दर्ज कर के कार्रवाई शुरु कर दी है। उम्मीद है जल्द ही आरोपी कानून के शिकंजे में होंगें। 
परेशान व्यक्ति की डूबने से मौत इसी तरह गांव खैहरा के एक व्यक्ति की नहर में डूबने से मौत हो गई। डूबने वाले की पहचान मनदीप सिंह के रूप में हुई है। मनदीप के परिजनों ने बताया कि वह तीन दिन पहले घर से गुरुद्वारा साहिब माथा टेकने निकला था, पर घर नहीं लौटा। वीरवार को उसका शव रामपुर गांव में नहर पुल के पास मिला। उसके परिजनों ने बताया कि मनदीप पुलिस में नौकरी करता था। लेकिन सड़क हादसे में उसकी बाजू टूट गई थी। इसी बात से मनदीप परेशान रहता था। इसी परेशानी के चलते उसकी जीवन लीला ही समाप्त हो गई। 
लूट की दो वारदातें: जगह जगह पर नाकाबंदी के बावजूद लूट-पाट की वारदातें जारी हैं और मोटर साईकल पर सवार लुटेरे तलवार की नोक पर वारदातें कर रहे हैं। लुधियाना के सघन क्षेत्र दरेसी ग्राऊंड के इलाके में नकाबपोश बदमाशों ने एक ही रात में लूट की दो वारदातों को अंजाम देकर दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इन बदमाशों ने दुकान बंद करके घर लौट रहे दो दुकानदारों को अपना निशाना बनाया। आरोपी उनसे हजारों रुपयों का कैश, सोने के जेवर और अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। थाना दरेसी की पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दिए बयान में सुंदर नगर निवासी हरीश कुमार ने बताया कि उनकी घुमार मंडी में दुकान है। दुकान बंद करने के बाद वह बुधवार रात को 12 बजे घर लौट रहे थे। जैसे ही वह बाजवा नगर पुली के पास पहुंचे, मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने जबरदस्ती उनका मोटरसाइकिल रोक लिया। पीछे बैठे बदमाश ने तलवार निकाल कर उनकी गर्दन से लगा दी। आरोपी उनकी जेब में रखे 16 हजार कैश, सोने की चेन, मोबाइल व पर्स लूट कर फरार हो गए। इस तरह लूट की इस वारदात से सहम का माहौल छाया हुआ है। 
बाजवा नगर में भी लूट: बाजवा नगर के सुनील कुमार ने बताया कि डीएमसी अस्पताल के पास रसोई वेज ढाबे में वह पार्टनर हैं। बुधवार रात को 11.30 बजे ढाबा बंद करने के बाद वह स्कूटर से घर लौटरहा था। वापसी पर ढाबे की दो दिन की सेल के 12 हजार रूपये भी उन्होंने काले रंग के बैग में डालकर स्कूटर में आगे रखे हए थे। बाजवा नगर के पास पहुंचते ही मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने जबरदस्ती उनका स्कूटर रुकवा लिया। पीछे बैठे आरोपी ने तलवार निकाल कर उनकी गर्दन पर लगा दी और स्कूटर पर रखा बैग उठा लिया। आरोपियों ने उस में रखा कैश निकाल कर बैग वहीं फेंक दिया और फरार हो गए।
आत्महत्या: जोधेवाल इलाके में स्थित बसंत विहार में वीरवार शाम को जेल से जमानत पर आए एक युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस बहु चर्चित मामले की थाना जोधेवाल की पुलिस पूरी गहनता से जांच कर रही है। एसएचओ हरविंदर सिंह के मुताबिक राहुल के पिता ने बताया कि एक साल पहले इलाके में ही रहने वाली एक युवती ने आत्महत्या कर ली थी। इसके लिए उसके परिजनों ने राहुल को जिम्मेदार ठहराते हुए मामला दर्ज करा दिया। पुलिस ने बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। राहुल 18 मार्च को जेल से जमानत पर आया तो लड़की के परिजनों ने उसे धमकियां देनी शुरू कर दी। इससे परेशान होकर उसने वीरवार को घर में पंखे से लटक जान दे दी। विवरण के मुताबिक नूरवाला रोड की बैंक कालोनी में वीरवार को 21 वर्षीय एक युवक राहुल बहल उर्फ बबलू देर शाम अपने घर में फंदे से लटकता मिला। पता चलने पर परिवार वाले उसे दयानंद अस्पताल लेकर पहुंचे। डाक्टरों ने कुछ समय बाद उसे मृत करार दे दिया। बबलू 9 दिन पहले ही एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जेल से जमानत पर छूटा था। उसके खिलाफ बस्ती जोधेवाल थाना में पिछले साल 6 नवम्बर को कोमल नामक एक युवती को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला भी दर्ज हुआ था। जिसमें पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब बबलू के परिजनों ने युवती के परिवार वालों पर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब इस युवक की आत्म हत्या के पीछे कोई पश्चाताप था, कोई उकसाहट थी, कोई मजबूरी थी या कुछ और कारण--इसका पता जांच के बाद ही लग सकेगा।
इस सर मामले के संबंध में मृतक युवक राहुल के पिता रविंदर बहल ने बताया कि वीरवार होने के कारण शाम को वह और उसकी पत्नी बस्ती चौक में धार्मिक स्थल पर प्रसाद चढ़ाने गए थे। तभी उसकी साली का फोन आया कि वह राहुल से मिलने के लिए आई, लेकिन वह अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोल रहा। इस पर वह घर पहुंचे। खिड़की से झांककर अंदर देखा तो उसका बेटा फंदे पर लटक रहा था। दरवाजा तोड़कर राहुल को फंदे से उतार कर वह उसे लेकर दयानंद अस्पताल पहुंचे लेकिन सब व्यर्थ गया। रविंदर ने बताया कि बबलू जमानत पर जब से घर आया था तो किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। कल जब बबलू घर के बाहर बैठा तो एक युवती के भाई ने उसे देख लेने की धमकी दी थी। आज उसकी मां ने आकर हंगामा किया। इससे दुखी होकर उसके बेटे ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, जबकि युवती के परिवार वालों ने उक्त आरोपों को नकार दिया है। बस्ती जोधेवाल पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
साढ़े 12 लाख की 25 ग्राम हैरोइन समेत गिरफ्तार: रातोरात अमीर बनने की ललक और नशे की लत व्यक्ति को कहा लेजाती है इसका एक नया मामला सामने आया है। थाना फोकल प्वाइंट की पुलिस ने हौजरी वर्कर से नशा तस्कर बने व्यक्ति को साढ़े 12 लाख की 25 ग्राम हैरोइन समेत गिरफ्तार किया है। थोडा सा माल और बदले में बड़ी सी रकम उसे एक ऐसी अँधेरी ज़िंदगी में ले गयी जिससे निकलने का शायद अब कोई मार्ग न रहा हो। ए.डी.सी.पी.-2 केहर सिंह ने बताया कि आरोपी डेविड खोसला उर्फ राजू जनता कालोनी राहों रोड का रहने वाला है। यह उस समय पुलिस की गिरफ्त में आ गया जब पुलिस स्टेशन फोकल प्वाइंट के प्रभारी गुरमीत सिंह की अगुवाई में ए.एस.आई. तरसेम सिंह ने कंटेनर यार्ड के नजदीक नाकाबंदी की हुई थी। इस दौरान उक्त आरोपी को हैरोइन सहित काबू किया गया। ए.डी.सी.पी.-2 केहर सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि जब वह हौजरी का काम करता था तो उस समय वह कर्जे में डूब गया। इस दौरान उसको बलजीत सिंह मिला जो उसको नशीले पदार्थों की डिलीवरी संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पैसे देने लगा। लालच में वह नशा सप्लाई करने लगा। उस वक़त उसने नहीं सोचा था कि एक दिन वह सलाखों के पीछे पहुँच जायेगा। 
नाबालिगा से दुष्कर्म: समाज में बेटी भी बराबरी की मांग और आंदोलन उस समय फलाप  हैं जब कोई न कोई समाज  किसी न किसी की बेटी को अपना निशाना बना लेता है। अब एक नाबालिगा से दुष्कर्म का नया मामला सामने आया है। जसवाल कालोनी की 10 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामले में नामजद आरोपी संजय कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ पीड़िता के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।  दूसरी तरफ बच्ची का वीरवार को चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद स्वैब जांच के लिए भेज दिया गया है। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी उसकी बच्ची को कैलाश नगर की डेयरी में ले गया था। जहां आरोपी ने उसको डरा-धमका कर उससे दुष्कर्म किया तथा बाद में उसे घर के पास छोड़ गया था। छोड़ते समय उसकी बेटी को धमकी देकर गया था कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे जान से मार देगा, जबकि आरोपी खुद को निर्दोष बता रहा है। अब देखना है कि यह समाज लड़कियों को सुरक्षित पर्यावरण कब दे पाता है? 

मास्टर तारा सिंह मेमोरियल महिला कालेज में होस्टल नाईट

नारी को हर मामले में विज्ञापन बनाने पर भी हुई चर्चा 
लुधियाना: 28 मार्च 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
ज़िंदगी में खुशियां भी आती हैं और गम भी। मिलन भी होता है और बिछड़ना भी। कभी अचानक कोई अच्छा मौका मिला जाता है और कभी हाथ में आया अच्छा मौका छूट भी जाता है। इन सब रंगों को मिला कर ही बनती है ज़िंदगी---कभी ख़ुशी कभी गम। ज़िंदगी के इन अलग अलग रंगों का सहजता से सामना करते हुए हर पल संतुलन में बताने के लिए होस्टल की ज़िंदगी कई अनुभव देती है। शिक्षा, अनुशासन, और परिवार से दूर पूरी छूट और अपने कमरों में अपनी खुद की ज़िम्मेदारी। इन सब अनुभवों पर आधारित था मास्टर तारा सिंह मेमोरियल महिला कालेज कालेज में हुआ होस्टल नाईट का आयोजन।
इस यादगारी संगीतमय शाम में डांस का जोश संगीत का जादू और सुंदरता का जलवा सब कुछ था। एक घंटे का कार्यक्रम दो घंटे से भी अधिक चला पर वक़त का किसी को कुछ पता ही नहीं चला। यादविंदर कौर को इस प्रोग्राम में मिस होस्टलर का खिताब मिला जबकि जसप्रीत कौर फस्ट रनरअप और स्वाति सेकंड रनरअप रहीं।
कालेज में हिंदी की लेक्चरर इंद्रमोहन कौर ने एक सवाल पूछ कर सारे माहौल को ही एक गंभीर दिशा में मोड़ दिया। उन्होंने  छात्राओं से पूछा कि क्या हर मामले में नारी को विज्ञापन बना कर दिखाना क्या उचित है? इस सवाल के जवाब में इस सोच और सिलसिले को बुरी तरह से रद किया गया। मैडम इंद्रमोहन कौर ने कार्यक्रम के बाद बताया कि उन्होंने यह सवाल लड़कियों के दिलो-दिमाग में एक चेतना लाने के लिए पूछा तांकि महिला वर्ग के अंदर इस बुराई के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक इनकार पैदा हो सके। इस चेतना के बाद ही नारी ऐसे विज्ञापनों का अंग बनने से ज़ोरदार इनकार कर सकेगी।
प्रिंसिपल मैडम डाकटर चावला ने मुख्य अतिथि का फ़र्ज़ भी निभाया और लड़कियों को जीवन में साकारत्मक सोच बनाने पर ज़ोर दिया क्यूंकि इस सोच के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा।    मास्टर तारा सिंह मेमोरियल महिला कालेज में होस्टल नाईट

Friday, March 28, 2014

अपनी किडनियों का ख्याल रखें- 2014

12-मार्च-2014 19:30 IST
विशेष-लेख                  विश्‍व किडनी दिवस                  --*माजिद मुश्‍ताक पंडित
बढ़ती उम्र तथा लंबी किडनी बिमारियां 
भारत में प्रत्‍येक 10 व्‍यक्तियों में से एक किडनी की बिमारियों से ग्रस्‍त है। दुर्भाग्‍य से आधे से अधिक मरीज अपनी बिमारी के बारे में तब जान पाते है जब उनकी किडनियां 60 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्‍त हो चुकी होती हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्‍सा संस्‍थान द्वारा किए गए अध्‍ययन के अनुसार लगभग 1.50 लाख नए किडनी मरीज़ों की संख्‍या हर वर्ष बढ़ जाती है जिनमें से बहुत थोड़े से लोगों को किसी प्रकार का इलाज मुहैया हो पाता है।

यह समस्‍या दिन ब दिन गंभीर होती जा रही है। आरंभिक चरण में बीमारी का पता न चल पाने, धन की कमी या फिर सही मिलान वाली किडनी के दानकर्ता के अभाव के कारण हर वर्ष अनेक मरीजों का किडनी ट्रांसप्‍लांट नहीं हो पाता और ये मरीज लाइलाज रह जाते हैं। भारत में हर साल लगभग पांच लाख किडनी ट्रांसप्‍लांट किए जाने की आवश्‍यकता होती है, लेकिन इस मंहगी प्रक्रिया के माध्‍यम से कुछ हज़ार मरीज ही नया जीवन प्राप्‍त कर पाते हैं।

इस वर्ष 13 मार्च को सारे विश्‍व में विश्‍व किडनी दिवस मनाया जाएगा। किडनी स्‍वास्‍थय की महत्‍ता तथा किडनी तथा इससे जुड़ी बीमारियों का खतरे से बचाव के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए वर्ष 2006 से प्रतिवर्ष इसे मनाया जाता है। प्रत्‍येक वर्ष इसके लिए विशेष विषय शीर्षक तय किया जाता है। इस वर्ष का विषय शीर्षक है ''बढ़ती उम्र तथा लंबी किडनी बीमारियां''।

हाइपर टेंशन तथा मधुमेह के बाद लंबी किडनी बीमारी तीसरी सबसे बड़ी गैर संक्रमणकारी बिमारी है। इतना ही नहीं ऊपर की दोनों बीमारियां भी किडनी को प्रभावित करती हैं और अक्‍सर लंबी किडनी बीमारी में परिणत हो जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार लंबी किडनी बीमारी के 60 प्रतिशत मरीज पूर्व में या तो मधुमेह के मरीज रहे हैं या फिर उच्‍च रक्‍त चाप के मरीज रहे हैं और अनेक मामलों में इन दोनों ही बीमारियों से पूर्व में ग्रस्‍त रहे हैं। किडनी की बिमारी का यदि आरंभिक चरण में ही पता चल सके तो उसका इलाज समय से किया जा सकता है और इसके साथ जुड़ी दूसरी जटिलताओं से बचा जा सकता है परिणामस्‍वरूप मूत्र संबंधी तथा कार्डियो-वैस्‍कूलर बीमारियों के कारण होने वाली मौतों की संख्‍या में भी काफी कमी आ सकती है।

किडनी की लंबी बीमारी से जुड़े खतरों को समझना ज़रूरी है। यह ध्‍यान में रखना आवश्‍यक है कि अपने शुरूआती चरण में बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते इसलिए शुरूआती चरण में इलाज भी संभव नहीं हो पाता। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को लंबी किडनी बीमारी के बढ़ते जा रहे मरीज़ों की बड़ी संख्‍या का सामना करना होगा।

विश्‍व किडनी दिवस लंबी किडनी बिमारी के खिलाफ कदम उठाए जाने की आवश्‍यकता याद दिलाता है ताकि शरीर के इस महत्‍वपूर्ण अंग के स्‍वास्‍थ्‍य का महत्‍व समझा जा सके और उस पर लगातार नज़र रखी जा सके। यह दिन हम सभी के लिए इस जटिल अंग को स्‍वस्‍थ्‍य रखने की जानकारी जुटाने के लिए एक अवसर है। किडनी से जुड़ी बीमारियों की समय से जानकारी मिलने से समय पर हस्‍तक्षेप और इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में निश्‍चय ही मदद मिलेगी।

विश्‍व किडनी दिवस मनाए जाने का उदे्दश्‍य हर व्‍यक्ति को इस विषय में जागरूक करना है कि मधुमेह तथा उच्‍च रक्‍तचाप किडनी के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरा हैं अत: मधुमेह और उच्‍च रक्‍तचाप के सभी मरीज़ों को किडनी की नियमित जांच करानी चाहिए। इस विषय में विशेषकर गंभीर खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाली जनसंख्‍या के बीच जागरूकता फैलाने में चिकित्‍सा बिरादरी की महत्‍वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

लंबी किडनी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए स्‍थानीय और राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों को महत्‍वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। इस दिवस के माध्‍यम से सभी सरकारी प्राधिकारियों को किडनी की जांच-सुविधाओं में निवेश करने और इस विषय में विभिन्‍न कदम उठाए जाने के लिए संदेश दिया जाता है।

किडनी फेल होने जैसी आपातकाल स्थिति में किडनी ट्रांसप्‍लांट ही सबसे बेहतर विकल्‍प है। अत: अंग दान को जीवनदायी कदम के रूप में प्रोत्‍साहित किये जाने की आवश्‍यकता है। भारत सरकार ने मानव अंग स्‍थानान्‍तरण (संशोधन) अधिनियम, 2011 लागू किया है, जिसमें किडनी दान तथा मृत्‍य व्‍यक्तियों की किडनी दान को प्रोत्‍साहित करने के लिए अनेक प्रावधान है। अभी तक सरकार ने लंबी किडनी बीमारियों के रोकथाम और इलाज के लिए अनेक कदम उठाएं हैं। सभी बड़े सरकारी अस्‍पतालों में डायलिसिस सुविधा उपलब्‍ध है।

भारत सरकार ने कैंसर, मधुमेह, कार्डियो-वेस्‍कूलर बीमारियों तथा स्‍ट्रोक (एनपीसीडीसीएस) के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम आरंभ किया है, जिससे गुर्दे संबंधी लंबी बीमारियों और गुर्दे फेल होने से बचाव संभव हो सका है।

जनता के बीच स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी और विशेषकर लंबी किडनी बीमारी सहित गैर-संक्रामक रोगों के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए भारत सरकार द्वारा दूरदर्शन तथा ऑल इंडिया रेडियो पर विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण किया जा रहा है।  

लंबी किडनी बीमारी के मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण उनका तथा उनके परिवार का पूरा जीवन दयनीय हो सकता है। ऐसे में यह आज के समय का आवश्‍यकता है कि हम सभी स्‍वस्‍थ्‍य जीवन शैली को अपनाएं। साथ ही बीमारी के खतरे से ग्रस्‍त व्‍यक्तियों को नियमित रूप से अपने स्‍वास्‍थ्‍य की जांच करवाने एवं निगरानी रखने की आवश्‍यकता है। इस महत्‍वपूर्ण दिवस पर आइये हम सभी इस महत्‍वपूर्ण अंग के विषय में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्‍त करने और सांझा करने का संकल्‍प लें।   (पसूका फीचर) *सूचना सहायक पसूका-जम्‍मू

Thursday, March 27, 2014

लुधियाना के हैबोवाल में गिरा मंदिर का गुंबद

एक मज़दूर की मौत और दो अन्य घायल
लुधियाना: 26 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
हैबोवाल के न्यू माया नगर इलाके के श्री सिद्धि विनायक मंदिर में आज दोपहर को 12 बजे के करीब भजन कीर्तन के दौरान उस समय भगदड़ मच गई जब एक जबरदस्त धमाके के साथ मंदिर का निर्माणाधीन गुबंद नीचे आ गिरा। इस हादसे में एक बदकिसमत मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। उन्हें डीएमसी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस गुंबद के गिरने से मंदिर के पीछे वाली गली के कुछ मकानों का भी नुकसान हुआ है। देर शाम तक गुंबद का मलवा नहीं हटाया जा सका था। गुंबद गिरने का कारण घटिया मैटेरियल का प्रयोग बताया जा रहा है। जहाँ इस हादसे के बाद लोगों में रोष है वहीँ इस गुंबद के  गिरने से किसी अपशकुन की आशंका सहम भी छाया हुआ है। 
इस हादसे के मामले की जानकारी रखने वाले कुछ लोगों के मुताबिक इस मंदिर की चौथी मंजिल के ऊपर गुबंद बनकर तैयार हो चुका था। उड़ीसा से आए कारीगर भारत व गणेश उस पर सीमेंट से डिजाइनिंग कर रहे थे। जबकि डाइबर (22) नीचे से सामान पकड़ा रहा था। अचानक एक तेज धमाके के साथ सीमेंट-ईट से बना मंदिर का गुबंद नीचे आ गिरा। नीचे खड़ा डाइबर मलवे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि ऊपर काम कर रहे भारत और गणेश को भी चोटें आई।
इतफ़ाक से उस समय यह सब देख रहे सामने के मकान में रहने वाले लोगों ने शोर मचाकर अपनी लेबर और आस-पास के लोगों को वहाँ बुलाया। इस घर में रहने वाले प्रिंस की पत्नी गीता अरोड़ा ने बताया कि ऐसा लगा जैसे भूकम्प आ गया हो। धरती बुरी तरह से हिल गई थी। हादसे के बाद भागते हुए सभी लोग मंदिर की चौथी मंजिल पर पहुंचे व बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राइवेट गाड़ियों में डाल कर अस्पताल ले जाया गया। जहां थोड़ी देर बाद डाइबर की मौत हो गई।
इस घटना का पता चलते ही फायर ब्रिगेड व पुलिस भी मौके पर पहुंची और अन्य लोग भी वहाँ पहुँचने शुरू हो गए। 
एडीसीपी-1 अमरीक सिंह पवार, एसएचओ डिवीजन नंबर 4 इंस्पेक्टर राम पाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड टीम भी मौके पर आ पहुंची। मगर संसाधनों की कमी के चलते वो बचाव कार्य नहीं कर सकी।
उड़ीसा से आए थे कारीगर
मंदिर प्रधान रवि नंदन ने बताया कि मंदिरों में गुंबद व सीमेंट की मूर्तियों का निर्माण कार्य स्पेशल डिजाइनिंग के ठेकेदार उड़ीसा निवासी रविदास को दिया गया है। वह 8 माह से मंदिर निर्माण का काम करवा रहा है। हर तरह के काम के लिए उसके पास अलग-अलग कारीगर हैं। इसलिए वह काम के अनुसार कारीगर बदल-बदल कर भेजता था। करीब 1 महीना पहले बन कर तैयार हो चुके 15 फुट ऊंचे गुबंद पर अब डिजाइनिंग का काम हो रहा था। हादसे का शिकार हुए कारीगर कुछ ही दिन पहले आए थे और मंदिर में ही रहते थे।
मामला तूल पकड़ते पकड़ते बचा
पीछे की गली में रहने वाले एक व्यक्ति महिंदर पाल ने कहा कि जिस जगह पर मंदिर बना है, कॉलोनी काटने वाले ने तो वास्तव में यह जगह पार्क के लिए निश्चित रखी थी। मगर बाद में धर्म के नाम पर वहां मंदिर बना दिया गया। वह अभी अपनी बात कर ही रहे थे कि वहां मौजूद विश्व हिंदू परिषद के रविंदर अरोड़ा व उनके साथी मंहिदर पर बिफर पड़े। एकाएक मामला इतना गरमा गया कि वहां मौजूद पुलिस को महिंदर पाल को वहां से अलग ले जाना पड़ा। अगर धर्म के नाम पर मामला बिगड़ जाता तो हालत और खराब हो सकती थी। 
पुलिस का कहना है कि ठेकेदार को जांच में शामिल किया जाएगा। मामले की जांच की जा रही है। इस जाँच में ठेकेदार को भी शामिल किया जाएगा। जांच के बाद बनती कार्रवाई भी की जाएगी। लेकिन फिलहाल इस संबंध में किसी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया है। इस हादसे का पता चलते ही वहाँ अकाली दल के लोक सभा प्रत्याशी मनप्रीत सिंह अयाली भी और कांग्रेस के एम ऐल ए भारत भूषण आशू भी। 

मिनी रोज़ गार्डन में गीत की शूटिंग

लुधियाना पर भी चढ़ा बालीवुड का फ़िल्मी रंग 
लुधियाना: 26 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):  
पंजाब स्क्रीन की टीम जब आज बाद दोपहर किदवई नगर से गुज़री तो वहाँ मिनी रोज़ गार्डन में शूटिंग चल रही थी।  देखने वालों की भीड़ और शूटिंग की चमक दमक। कुल मिला कर लग रहा था कि लुधियाना भी बालीवुड के मुम्बई की तरह बनता है। 

Wednesday, March 26, 2014

हर-हर मोदी का मतलब?//Comrade Aman Mishra Dyfi

वोट जनता का है, लाभ कॉरपोरेट का
कामरेड मिश्रा 
नरेंद्र मोदी 

संघ-बीजेपी कर रही है- 'हर-हर मोदी। क्या मतलब है - हर-हर मोदी का? क्या यह हिंदू-राष्ट्र का उद्घोष है? यदि हां, तो हर चुनाव के बाद हिंदू-राष्ट्र का उद्घोष क्यों बदलता है? क्या मतलब है - 'जय श्री राम के बाद 'हर-हर मोदी का? क्या इसका मतलबmodi1.jpg निकाला जाय? पहले इस प्रकार के नारे को इतना बुलंद किया जाए कि विवाद पैदा हो जाए। जब विवाद पैदा होने लगे, तो इसे रोकने का स्वांग रचा जाए। हो सकता है - यह नारा 'जय श्री राम की तरह बंद भी हो जाए। मगर जो निष्ठा से युक्त नारा गढ़ा गया, लगाया गया और संपूर्ण देश में फैलाया गया, उसके मतलब और मकसद तो समझ में देशवासियों को आना चाहिए। देश को 'जय श्री राम का नारा और निष्ठा का मतलब समझ में आ चुका है। अब इस नए नारे और नए नजारे को समझने की जरूरत है।
संघ का बीजेपीकरण और बीजेपी का मोदीकरण पूर्णत: हो चुका है। आडवाणी युग का सूरज डूब चुका है। जसवंत सिंह, हिरेन पाठक, लालजी टंडन, लालमुनि चौबे, जैसे आडवाणी कैंप के समर्थकों के टिकट काटे जा चुके हैं। सुषमा स्वराज दुखी हैं। मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र का तबादला किया गया। तबादला किया गया या यों कहें कि पुराने फर्नीचरों को इधर से उधर करके अजस्ट किया गया। अजस्टमेंट की इस सूची से जसवंत सिंह बाहर हो गए और मीडिया के सामने अपने आंसू रोक नहीं सके। आखिर इनलोगों के लिए क्यों आंसू भरी हो गर्इ बीजेपी की राहें ... ? किसी जमाने में कल्याण सिंह, उमा भारती आदि पिछड़े वर्ग के नेताओं के लिए आंसू भरी थी बीजेपी की राहें...। उस जमाने में फॉरवर्ड की पार्टी थी- बीजेपी। अब बीजेपी का मोदीकरण के साथ मंडलीकरण हो गया है। जाहिर है कि मंडल-कमंडल की राजनीति पर मंडल पहले भी भारी पड़ा था। मगर ऐसा किसी ने नहीं सोचा था कि कमंडल का ही मंडलीकरण हो जाएगा।

Raj Birda Choudhary  का कमेंट 
सत्ता के लिए देश की राजनीति का कमंडलीकरण हुआ। सत्ता के लिए ही देश की राजनीति का मंडलीकरण हुआ। सत्ता के लिए ही बहन मायावती बसपा का कमंडलीकरण करती हैं और अधिक से अधिक ब्राह्मण उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती हैं। मुलायम भी मंडल का कमंडलीकरण करते हैं और सत्ता सुख प्राप्त करते हैं। देश की राजनीति इन्हीं तंग गलियों में उलझ-पुलझ गर्इ है। कुल मिलाकर देखा जाए तो देश की राजनीति मुंबइया फिल्मी फॉर्म्युले पर ही हिट और सुपरहिट होती है। मारधाड़ से भरपूर। जात-धरम। हम लाख गाएं - 'ये जात-धरम के झगड़े इंसान की है नादानी। मजे की बात यह है कि इसी नादानी से देश की राजनीति चलती है। पता नहीं, देश की कौन-सी राजनीति पार्टी किसी अंबानी और अदानी की दुकान नहीं है ? वोट जनता का है, लाभ कॉरपोरेट का। देश की इस प्रकार की राजनीति का फायदा कौन उठाता है। बेचारी जनता तो लूजर है। गेनर लीडर, मिनिस्टर, अफसर और कॉरपोरेट घरानेवाले हैं। सत्ता में सभी दलों की किसी-न-किसी रूप में हिस्सेदारी होती है। मगर देश के किसान, मजदूर, नौजवान और आम आदमी को क्या मिलता है? न बुनियादी सुविधा, न सुरक्षा, न आजीविका, न सही शिक्षा, न न्याय। यह कैसा लोकतंत्र है? या यों कहें कि हमारे रहनुमाओं ने लोकतंत्र को कैसा बना डाला। मार डाला। क्या हम मरने के वास्ते वोट डालते हैं ? -Comrade Aman Mishra Dyfi

(posted on FB on Monday March 24, 2014 at 08:23 PM)

Tuesday, March 25, 2014

नायक कौन? जेबकतरे या सियासी लीडर?

किरण खेर ने की चंडीगढ़ को अलग राज्य बनाने की मांग 
किरण खेर 
डा. लोक राज 
कुछ लोग कहते हैं कि लक्ष्मी अपनी इच्छा से आती है---उसे दिमागी तरकीबों से नहीं पाया जा सकता---अगर ऐसा  होता तो बहुत से पढ़े लिखे बुद्धिमान लोग धन के आभाव में न होते…! अगर यह मेहनत से आती तो बहुत से लोग दिन रात मेहनत करते हैं पर यह उनके पास भी नहीं आती। मैंने उनसे पूछा यह लूट खसूट करने वालों और दूसरों का हक़ मारने वाले  शातिर लोगों के पास क्यूँ फटाफट भागी चली आती है---उनका जवाब इस मुद्दे पर भी कमाल का था---उसकी चर्चा किसी अलग पोस्ट में पर मैं इतना ज़रूर मान गया कि कुछ चीज़ें नसीब से मिलती हैं---कुछ इतफ़ाक से---यह सब बहुत अचानक होता है जिसकी न कल्पना की होती है न ही कोई योजना बनाई होती है---!
आज फेसबुक पर यह कविता भी कुछ  ऐसे ही मिली। मैं पढ़ रहा था डाकटर लोकराज की  एक पोस्ट जिसमें उन्होंने चंडीगढ़ से भाजपा की प्रत्याशी किरण खेर के उस बयान को आड़े हाथों लिया है जिसमें उन्होंने चंडीगढ़ को अलग राज्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। लूटखसूट और अन्याय के करूप चेहरे को शब्दों के खूबसूरत मेकअप में रंग कर प्रस्तुत करना किरण जैसे नेतायों को खूब आता है। एक तो अभिनेत्री दूसरा सियासत का रंग---एक करेला दूसरा नीम चढ़ा। इस बहाने से असली चेहरे का रंग भी दिखने लगा है। आप इसे डाकटर लोक राज की प्रोफाईल पर पढ़ सकते हैं। फिलहाल पढ़िए एक रचना जो मुझे इस पोस्ट के कमेंट बॉक्स में मिली। सीधा दिल को छूती है। आप इसे पढ़ कर ही अनुमान लगा सकते हैं कि आज के सियासतदान क्या करते हैं----किसी ने कहा था--
उनसे ज़रूर मिल लो,सलीके के लोग हैं !
वो क़त्ल भी करेंगे बड़े अहतराम से ! 
इस शेयर को पढ़ कर आप को सियासतदानों के बयानों में छिपी हकीकत नज़र आने लगेगी---कभी बुल्ले शाह ने कहा था---कुत्ते --तैथों उत्ते अब लाहौर पाकिस्तान के रहने वाले बाबर जालंधरी ने शायद कुछ यूं कहा है कि इन लीडरों से तो चोर और जेबकतरे ही अच्छे।
Babar Jalandhari Translate from: English
बाबर जालंधरी 
बस से उतर कर जेब में हाथ डाला।
मैं चौंक पड़ा 
जेब कट चुकी थी 
जेब में था भी क्या? 
कुल नौ रुपये और एक पत्र 
जो मैंने माँ को लिखा था:
मेरी नौकरी छूट गई है, 

अब पैसे नहीं भेज पाऊंगा''
तीन दिनों से वह पोस्टकार्ड जेब में पड़ा था 

पोस्ट न किया तबीयत ठीक नहीं रही थी
नौ रुपये जा चुके थे 
यूँ नौ रुपए कोई बड़ी रकम नहीं थी
लेकिन
जिसकी नौकरी छूट गई हो उस के
लिए नौ सौ से कम भी तो नहीं है। 
कुछ दिन बीते ... माँ का खत मिला 

पढ़ने से पहले मैं सहम गया 
जरूर पैसे
भेजने को लिखा होगा 

लेकिन पत्र पढ़कर
मैं हैरान रह गया ! 

माँ ने लिखा था :
''बेटा ! तेरा भेजा पचास रुपये का मिनी आदेश मिला 

तू कितना अच्छा है रे ... 
पैसे भेजने मैं जरा कोताही नहीं करता''
काफी दिनों तक उधेड़बुन में
रहा कि आखिर माँ को पैसे किसने भेजा ?
कुछ दिन बाद एक और पत्र मिला

आड़े तिरछे शब्दों की लिखावट 
बड़ी मुश्किल से पढ़ सका :
''भाई नौ रुपए तुम्हारे 
और इकतालीस रुपये अपने मिलाकर 
मैंने तुम्हारी माँ को 
मिनी आदेश भेज दिया है.. 

चिंता मत करना, 
माँ तो सब एक जैसी होती है ना ! 
वह क्यों भूखी रहे ? 
... तुम्हारा जेब कतरा
आपने रचना पढ़ी इसके लिए धन्यवाद--अब फैसला आपके दिल की आवाज़ पर कि नायक कौन वो जेब कतरा  या आये दिन नए नए टैक्स लगा कर जीना दूभर करने वाले वे सियासतदान जो कई बार बंट चुके पंजाब को फिर बांटने पे तुले हैं। -रेकटर कथूरिया 

अन्ना को मोदी की लहर 16 मई को पता चलेगी-जेटली

 Mon, Mar 24, 2014 at 8:35 PM
अमृतसर में किया मीडीया केंद्र का उद्धघाटन 
अमृतसर: (गजिंदर सिंह किंग//पंजाब स्क्रीन ):
अमृतसर से अकाली बीजे पी के उम्मीदवार अरुण जेटली ने मीडीया केंद्र का उद्धघाटन किया, यह केंद्र हर वोटर के साथ संपर्क, पूरे हल्के का डाटा, इलेटोनिक मीडीया और सोशल मीडीया के साथ तालमेल रखे गी,  इस दौरान मीडीया से बात करते हुए अकाली बीजे पी के उम्मीदवारअरुण जेटली ने  मीडीया बारे जानकारी देते हुए कहा, कि 
   केजरी वाल मीडिया की उपज है, पहले केजरी वाल भ्रष्टाचार पर बोलते थे, अब यह मोदी के खिलाफ हो गए है, और केजरी वाल दिल्ली में शासन चलाने में असमर्थ हुए है और उनका चेहरा देश के लोगो के सामने आ गया है 
     अभी कुछ दिनों पहले जो आतंकवाद गिरफ्तार हुए है, उससे खुलासा हुआ है, कि बी जे पी के नेताओ को निशाना बनाना था, देश के रक्षा मंत्री ने कहा था, कि बी जे पी नेताओ को कोई खतरा नही है लेकिन रक्षा मंत्री की यह बात गलत साबित हो गई है
  
     जम्मू कश्मीर के बारे में उन्होेंने कहा, कि  जम्मू कश्मीर में अलगावादी और स्थानीय लोगो के विचारधारा अलग अलग है,  दोनों के अलग अलग ढ़ग से उसके विचार सुनने चाहिए
   
     आपरेशन ब्लू स्टार यादगार बारे पूछे गए सवाल बारे उनहोंने कहा, कि  यह बात बिल्कुल गलत है, कि अकाली दल कभी भी आतंकवादीयो का समर्थन नही किया और आतंकवाद के बाद अकाली दल ने पंजाब में शांति कायम की है, यादगार के मुद्दे में उन्होंने कहा, कि बी जे पी आपने लिए हुए स्टैंड में अभी भी कायम है 
     अन्ना के दिए बयान, कि देश में मोदी की लहर नही है, उन्होंने ने मोदी की लहर बारे कहा, कि मोदी की लहर 16 मई को पता चल जाएगा  
  

Monday, March 24, 2014

आम आदमी का जीना तो दूर मरना भी दूभर हो जाएगा

फूल्का ने ली भगत सिंह के साथी 110 वर्षीय मेहर सिंह की सार
बनते हक़ दिलवाने का दिया भरोसा
लुधियाना: 24 मार्च 2014: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
23 मार्च को जहाँ सारी राजनीतिक पार्टियाँ केवल श्रद्धा  सुमन अर्पित करनें में व्यस्त रहीं वहीँ दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी “आप “ के लुधियाना लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी एडवोकेट फूल्का ने श्रद्धा सुमन अर्पित करेने के पश्चात शाम को आजादी की जंग के सरताज शहीद भगत सिंह के सहयोगी सरदार “ मेहर सिंह “ के गाँव रसूलपुर जाकर उनसे मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।सन 1904 में लायलपुर जिले (वर्तमान पाकिस्तान) के रुडके गाँव में जन्में स. मेहर सिंह से एडवोकेट फूल्का यह जानकर दुखी  हुए कि आजादी की लड़ाई के सरताज शहीद भगत सिंह के सहयोगी स. मेहर सिंह जहाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को मिलने वाली सहूलियतों से वंचित हैं अपितु उन्हें वृद्धावस्था पेंशन से भी वंचित रहना पड रहा है। आगे अपनी व्यथा सुनाते हुवे स. मेहर सिंह ने कहा कि आज तक किसी भी राजनितिक दल के सदस्य ने मेरी समस्याओं के बारे में संज्ञान नही लिया जिसका मुझे बहुत दुख है | आगे स. मेहर सिंह ने कहा मुझे सरकार के द्वारा मिलने वाली सुविधाओं का लालच नही है परन्तु मैं अपना बनता हक लेना चाहता हूँ। 
एडवोकेट फूल्का ने स. मेहर सिंह से उनके द्वारा की गई सारी शिकायतों के कागजात हासिल कर उन्हें भरोसा दिलवाया की वे उनके हक़ के लिए पूरी लड़ाई लड़ेंगे और उनको मिलने वाला हक़ जरूर दिलवाएँगे | आगे एडवोकेट फूल्का ने कहा अगर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों का भारत में अपमान हो रहा है तो आम आदमी का क्या हाल होगा, अगर अब भी समय की नजाकत को समझ हमने भ्रष्ट राजनीतिज्ञों को सदा के लिए गद्दी से नही उतारा तो आने वाले दिनों में आम आदमी का जीना तो दूर मरना भी दूभर हो जाएगा |

INDIA: टीबी पर राजनीतिक दलों को चुप्पी तोड़ने की जरुरत

Mon, Mar 24, 2014 at 1:21 PM
An Article by the Asian Human Rights Commission  विश्व तपेदिक दिवस – 24 मार्च पर विशेष
                                                                                                                                   --प्रशांत कुमार दुबे
[भारत में हर दो मिनटों में तीन मौत, रोजाना 1000 लोगों की मौत और सालाना 3 लाख से ज्यादा मौतों के कारक टीबी रोग को गरीबों की बीमारी कहा जाता है| इस चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों की पैनी निगाहों से आखिर क्यों यह मुद्दा छूट रहा है, यह समझ से परे है| इसी गंभीर मसले पर यह आलेख .......]
इस समय भारत में चुनावी चर्चा जोरों पर है| लोकतंत्र के इस पांच सालाना उत्सव के लिए हर कोई अपने-अपने हिस्से का चन्दन घिसने में लगा है| हर चौक-चौराहे पर आम आदमी से लेकर ख़ास आदमी के मुद्दों पर चर्चा है| यहाँ तक की अब आम आदमी की चाय की चुस्कियां भी अब राजनीति की सुगंध से प्रेरित हैं| टिकट वितरण की मारामारी के बाद राजनीतिक दल अब व्यंग्य बाण छोड़ने और आंकड़ों की बाजीगरी में लगे हैं| रोजाना नये-नए विज्ञापन सामने आ रहे हैं| यानी कुल मिलाकर चुनावी बाजार सज चुका है, हर तरफ मुद्दों की बोली है, लेकिन इस मुद्दों की मंडी से कुछ ऐसे मुद्दे छूटते जा रहे हैं जो कि बहुत जरुरी हैं| इसी तरह के एक बहुत ही जरुरी मुद्दे का नाम है टीबी यानी तपेदिक या यक्षमा|
टीबी कितना खतरनाक रोग है, यह इस बात से ही पता लगता है कि भारत में रोज लगभग 4 हजार लोग टीबी की चपेट में आते हैं और 1000 मरीजों की इस बीमारी की चपेट में आने से मौत हो जाती है| यानी हर दो मिनटों में तीन लोग टीबी (तपेदिक/यक्षमा) से मरते हैं | सालाना यह आंकड़ा 3 लाख के पार जाता है और मरने वालों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी होते हैं| विश्वभर में लगभग बच्चों की टीबी के सालाना 10 लाख प्रकरण सामने आते हैं, जो कि कुल टीबी के प्रकरणों का 10 से 15 फीसदी है। इस बीमारी का पांचवा हिस्सा भारत से आता है,भारत में विश्व के लगभग 21 फीसदी टीबी के मरीज हैं| यह इतना खतरनाक है कि हम सभी जानते हैं कि टीबी का सक्रिय जीवाणु साथ में लेकर चलने वाला व्यक्ति एक साल में 10-15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है| टी.बी. के कारण पारिवारिक आमदनी में हर साल औसतन 20 प्रतिशत तक का नुकसान होता है। और इसकी देश पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष वार्षिक लागत 23.7 अरब डॉलर आती है। यह सब भी तब है जबकि टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज और रोकथाम संभव है|
भारत जैसे देश में यह आंकड़ा इसलिये भी ज्यादा है क्योंकि भारत में कुपोषण बहुत है| सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा 2012 में जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग आधे बच्चे (48 फीसदी) कुपोषित हैं। वर्ष 2012 में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री ने हंगामा रिपोर्ट जारी करते हुए इसे राष्ट्रीय शर्म माना था| यह बच्चों की मौतों के 10 उच्च संभावना वाले कारणों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस साल 90 लाख टीबी रोगी मे से 10% से 15% टीबी रोगी 14 वर्ष व उससे कम उम्र के बच्चे हैं जिनको इलाज की ज़रूरत होगी। यह आंकड़ा दिन प्रति दिन बढ़ता रहेगा| यदि हम बच्चो में टीबी संक्रमण को रोकने में विफल रहे। चूंकि बच्चो में टीबी संक्रमण का एक प्रमुख कारण बड़ों की टीबी है, अतः बच्चों में टीबी संक्रमण को रोकने के लिए परिवार के सदस्यों व अभिभावकों की टीबी के बारे में साक्षरता बहुत ज़रूरी है।
मध्यप्रदेश में इन दिनों हर त्रैमासिकी में लगभग 4000 ऐसे नये बच्चे सामने आ रहे हैं जिनमें टीबी के प्राथमिक लक्षण मिलते हैं यानी हर साल ऐसे 16,000 बच्चे सामने आ रहे हैं| मध्यप्रदेश बच्चों में होने वाली टीबी के लिए इसलिए भी संवेदनशील है क्यूंकि मध्यप्रदेश में कुपोषण चरम पर है| प्रदेश का हर दूसरा बच्चा कुपोषित है| प्रदेश में लगभग 52 लाख बच्चे कुपोषित हैं और इनमें से 8.8 लाख बच्चे ऐसे हैं जो कि गंभीर रूप से कुपोषित हैं| प्रदेश शिशु मृत्यु दर में भी अव्वल है और हर साल यहाँ लगभग 1,20,000 बच्चे दम तोड़ते हैं और उनमें से एक बड़ा हिस्सा टीबी से ग्रसित बच्चों का भी है| मध्यप्रदेश की ताजा सच्चाई यह है कि 6 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को जहां हर रोज 1200 से 1700 कैलोरी ऊर्जा का भोजन मिलना चाहिये वहां आज उन्हें 758 कैलोरी ऊर्जा का भोजन ही मिल पा रहा है। एक मायने में उन्हें हर रोज केवल एक समय का भोजन मिल रहा है।
आखिर इतने विकराल और खतरनाक रोग के बावजूद भी यह रोग उतनी चर्चा में क्यों नहीं है? आखिर क्यों राजनीतिक दल इसे प्राथमिकता से क्यों नहीं देखते हैं और क्यों नहीं यह राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में स्थान पाता है| राजनीतिक दलों के साथ-साथ सरकार ने भी इसे नजरअंदाज किया है| टीबी पर काम कर रहे संगठनों की लाख कोशिशों के बावजूद भी प्रधानमन्त्री ने अभी तक इस गंभीर बीमारी को लेकर अपना कोई भी सन्देश जारी नहीं किया है| विगत वर्ष 24 मार्च को राष्ट्रपति महोदय ने सन्देश जारी कर इस रोग के होने वाले खतरों और इसकी विभीषिका से आगाह किया था| लेकिन हम सभी जानते हैं कि केवल संदेशों से ही रोग खतम नहीं किये जा सकते हैं, उसके लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है| ज्ञात हो कि हमने हाल ही में पोलियो पर विजय पाई है जो कि हम टीबी जैसे रोगों को कम करने और उससे निजात दिलाने में भी पा सकते हैं|
टीबी को गरीबों की बीमारी कहा जाता है शायद इसलिये भी यह मुद्दा सरकारों और राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में नहीं है| यह मुद्दा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा है| टीबी के बढ़ते मामलों और लगातार गंभीर होती इस बीमारी के लिए देश भर की 170 संस्थाओं के समूह, पार्टनरशिप फॉर टीबी केयर ऐंड कंट्रोल इंन इंडिया (पीटीसीसी) ने अब राजनीतिक दलों से उनके घोषणा-पत्र में टीबी को स्वास्थ्य के एक अहम मुद्दे के रूप में शामिल करने की वकालत की है। पीटीसीसी के चेयरमैन, डॉ़ एस एन मिश्रा कहते हैं कि अगर हमें टीबी की जंग को जीतना है तो हमें सार्वजनिक रूप में टीबी की जांच के लिए हाई क्वालिटी के उपकरण और ट्रीटमेंट की जरूरत है, जिसके लिए राजनीतिक दलों के एक्टिव सपोर्ट की बहुत जरूरत है। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए समाज में अस्वीकार्यता है और लोग खुल कर बीमारी के बारे में बात या इलाज नहीं करते।
आज टीबी को लेकर देश मैं माहौल बनाने की, बेहतर सुविधायें मुहैया कराने की, अन्तर्विभागीय समन्वय की, पोषण के साथ जोड़कर देखने की, इससे लड़ने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की तत्काल आवश्यकता है| यह तभी संभव है जबकि राजनीतिक दल इस पर ध्यान दें और अपनी प्रतिबद्दता दोहरायें| ध्यान रहे कि इससे पहले भी यह कवायद कई बार की जा चुकी है पर टीबी के मामले में राजनीतिक दलों की और से निराशा ही हाथ लगी है| पिछले लोकसभा चुनाव में भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों(कांग्रेस और भाजपा) ने इस मसले पर चुप्पी साध ली थी| इसके विपरीत मध्यप्रदेश के हालिया संपन्न विधानसभा चुनावों ने निश्चित रूप से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने चुनावी घोषणा पत्रों में इस बीमारी से जुड़े पहलुओं पर स्पष्ट रूप से बात की थी| अब यही उम्मीद है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर ही इस बार सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे की तरजीह देंगे और इसके समूल नाश हेतु अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराएंगे|
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About the Author: Mr. Prashant Kumar Dubey is a Rights Activist working with Vikas Samvad, AHRC's partner organisation in Bhopal, Madhya Pradesh. He can be contacted at prashantd1977@gmail.com
About AHRC: The Asian Human Rights Commission is a regional non-governmental organisation that monitors human rights in Asia, documents violations and advocates for justice and institutional reform to ensure the protection and promotion of these rights. The Hong Kong-based group was founded in 1984.

दल-रहित घोषणा पत्र--- *सी. एल. गुलाटी

Sat, Mar 22, 2014 at 5:08 PM
गरीबी, बीमारी और अस्थिरता के चलते कभी भी पूरी तरह शान्ति नहीं हो सकती 
विश्व के सभी देशों में लगभग एक समान स्थिति है कि आम चुनावों की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दल हरकत में आ जाते हैं और सत्ता हथियाने के लिए जोड़-तोड़, गठबंधन और समीकरण बनाने में जुट जाते हैं। सभी दल लुभावने वादे करते हैं, जनता को सुनहरे ख़्वाब दिखाते हैं और घोषणा करते हैं कि यदि वे सत्ता में आये तो उनकी क्या-क्या नीतियाँ और कार्यक्रम होंगें। सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्रों में बयान देते हैं कि वे सत्ता में आने पर पवित्रता, पारदर्शिता, शान्ति और प्रगति लायेंगे और सभी लोगों के लिए धन-धान्य, समृद्धि और खुशी सुनिश्चित करेंगे। अब अगर हम उनकी इस घोषणा पर विचार करें तो पायेंगे कि धन, समृद्धि और प्रसन्नता सभी आपस में जुड़े विषय हैं और सही अर्थों में इनका आनन्द तब तक नहीं लिया जा सकता जब तक कि ये सभी मनुष्यों के पास बहुतायत में न हों।  यदि कुछ मनुष्यों के पास धन, समृद्धि और प्रसन्नता है और कुछ के पास नहीं, तो जीवन का वास्तविक आनन्द कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि देश के किसी भी भाग में गरीबी, बीमारी और अस्थिरता है तो पूरे देश में कभी भी पूरी तरह शान्ति नहीं रह सकती।

राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी घोषणा पत्रों में दिखाई गई लुभावनी तस्वीर तब तक मात्र कपोल कल्पना है जब तक कि मानवीय चरित्र में आध्यात्मिक और दिव्य गुण गहराई तक समाँ न जायें, इसलिए इस घुन लगे खोखले और वास्तविक गुणों से विहीन समाज को बदलने के लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति दिव्य गुणों का साकार रूप बने और दिव्य सत्ता की स्थापना हो परन्तु हम पाते हैं कि कोई भी राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र में इन्सान को आध्यात्मिकता, दिव्यता और समाज को दिव्य आध्यात्मिक सत्ता के अनुरूप परिवर्तित करने की चर्चा नहीं करता। इसके विपरीत राजनीतिक दल अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए समाज में घृणा और हिंसा को फैलाते हैं, और जातिवाद और साम्प्रदायिकता के आधार पर मानव को मानव से अलग करते हैं।

धर्म, जिसका उद्देश्य इन्सान को इन्सान से जोड़ना था आज सही अर्थों में अपना आकर्षण खो चुका है। धर्म आज एक विघटनकारी ताकत के रूप में काम कर रहा है और समाज की एकता और शान्ति को भंग कर रहा है। धर्म के नाम पर हो रही सामूहिक हिंसा और हत्याओं के प्रति समाज की असंवेदनशीलता गंभीर चिन्ता का विषय है। वैसे तो सभी प्रकार का आतंकवाद घातक है परन्तु धार्मिक कट्टरता से भड़कने वाला आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा शत्रु है। साम्प्रदायिकता के आधार पर मानवता का विभाजन परमाणु बम के विभाजन से भी अधिक खतरनाक है। यह सब हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या कभी समाज में प्यार और अपनेपन का एहसास पनप पाएगा?

इस अवस्था में सहज ही ध्यान इस ओर जाता है कि राजनीतिक दल जिस रामराज्य को स्थापित करने की बात करते हैं, वह तब तक स्थापित नहीं हो सकता जब तक कि इन्सान की प्रवृत्ति न बदली जाए। साथ ही यह भी एक तथ्य है कि इन्सानी प्रवृत्ति को बदलने के लिए राजनीतिक दल सक्षम नहीं हैं। इन दलों के पास वह जादू की छड़ी नहीं है जिससे मानवीय चरित्र और भावनाओं को मानवीय, आध्यात्मिक व दिव्य बनाया जा सके।

राजनीतिक दलों के पास ऐसी समझ, सूझ-बूझ और अनुभव नहीं है जिससे कि वे इस दिव्य कार्य को पूर्ण कर सकें। वास्तव में यह कार्य सद्गुरु (परमात्मा के साकार रूप) का है जो कि मानवता के लिए सक्षम दल-रहित घोषणापत्र लाता है, जिससे ब्रह्मज्ञान के आधार पर पवित्रता, शान्ति और समृद्धि लाई जा सकती है।

चरित्र निर्माण आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। भौतिक दृष्टिकोण ने सामाजिक संरचना को इस सीमा तक कमजोर बना दिया है कि जीवन के सभी क्षेत्रों में स्वार्थ निहित हो गया है। इस समस्या का हल तभी सम्भव है जब आत्मज्ञान द्वारा प्राप्त मानवीय मूल्यों को एक बार फिर से अपनाया जाए। अहिंसक सामाजिक परिवर्तन के लिए आध्यात्मिक और नैतिक विकास अत्यन्त आवश्यक है।
स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय हम विदेशी शासकों की “फूट डालो और शासन करो” की नीति की आलोचना करते थे परन्तु स्वतन्त्रता प्राप्ति के कई दशकों के बाद आज भी यह नीति समाप्त नहीं हुई और लगातार काम कर रही है।

1947 में प्रथम स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर प्रसिद्ध शायर फैज़ अहमद फेज़ ने इसे “सुबहे-आजादी” कहा परन्तु उसके बाद भड़के साम्प्रदायिक दंगों को देखने के बाद इसी शायर ने कहा, “यह वो सहर तो नहीं”। वे यह कहने पर मजबूर हो गये कि यह वो ‘सुबह’ तो नहीं जिसकी प्रतीक्षा हम सबने की थी। यह कितने आश्चर्य की बात है कि आज भी कुछ धर्मान्ध और अवसरवादी लोग साम्प्रदायिक आग भड़काकर हमारी आशाओं को धराशायी कर रहे हैं और हम यह कहने पर विवश हो जाते हैं कि - “यह वो धर्म तो नहीं”। आज विभाजित और विवश लोग कट्टरपंथियों को दोष देते हुए यही कहते हैं -
आग को होती नहीं, अपने-पराये की खबर, बात ये भूल गये, आग लगाने वाले।
परन्तु इस समस्या का हल धर्म को सच्चे अर्थों में अपनाकर ही सम्भव है। धर्म रूपी श्वेत प्रकाश जब मनुष्य रूपी प्रिज़्म से टकराता है तो विविध रंगों की किरणों में परिवर्तित हो जाता है। जैसे कि वेद और उपनिषद् कहते हैं - “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सारा विश्व एक परिवार है) पैग़म्बर मोहम्मद साहिब भी इसी बात पर बल देते हैं “अल-खलगु अयालुल्लाह” (अर्थात् सारी खलकत अल्लाह का परिवार है) सभी प्रमाणित धार्मिक ग्रन्थों में भी इसी पवित्र संदेश की गवाही दी गई है। वास्तव में यदि हम अपने झूठे अभिमान और शक्तियों की मृगतृष्णा को तज कर सोचें तो पाते हैं कि सभी धर्म एकता की भावना पर बल देते हैं और उनमें आपस में कोई मतभेद नहीं हैं।

सभी धर्मों का आधार एक परमात्मा है। निरंकारी बाबा जी के शब्दों में- “एक परमपिता परमात्मा की जानकारी ही सभी मतभेदों को मिटा सकती है।” बाबा जी का कथन है- “सारा संसार एक परिवार”। वह कहते हैं कि धरती पर स्थित सभी स्थानों की दूरियों को आप यातायात के किसी न किसी साधन से तय करते हो परन्तु इन्सानों के दिलों की दूरी को आप केवल ब्रह्मज्ञान रूपी सेतु द्वारा ही समाप्त कर सकते हो और इससे ही आपसी भाईचारा स्थापित होगा।

बाबा जी फरमाते हैं- “परमात्मा की जानकारी से ही होती है शान्ति की प्राप्ति” क्यों कि जब आत्मा में प्रकाश होगा तो इन्सानों में सुन्दरता होगी, जब इन्सानों में सुन्दरता होगी तो घरों में एकता होगी, जब घरों में एकता होगी तो देश में सुव्यवस्था होगी, जब देश में सुव्यवस्था होगी तो विश्व में शान्ति होगी।

इसी दल-रहित घोषणापत्र को ध्यान में रखते हुए विलियम बर्क ने कहा कि सच्चा धर्म ही समाज की नींव होता है जिस पर सभ्य सरकारों की इमारतें टिकी होती हैं, जहाँ से सत्ता अपना अधिकार, कानून, अपनी योग्यता और ये दोनों अपनी शक्ति प्राप्त करते हैं। यदि परस्पर घृणा से यह ढाँचा हिल जाए तो समाज व देश कभी भी स्थिर और टिकाऊ नहीं हो सकते।

संयुक्त राष्ट्र की यह मान्यता है कि मानव सभ्यता और प्रकृति में टकराव निरन्तर बढ़ता जा रहा है। विश्व के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिकों का भी अभिमत है कि समाज में बदलाव आवश्यक है अभी जो भी कुछ हम कर रहे हैं वह समाज को भारी गिरावट की ओर ले जा रहा है। इससे बचाव हेतु मानव के पास बहुत कम समय शेष है। अध्यात्म ही है जो इस भयावह परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। अतः इस मानवीय समस्या को आध्यात्मिक समस्या के रूप में स्वीकार करना होगा, अपने स्वभाव और जागरूकता में परिवर्तन लाना होगा तभी धरती पर विश्व समाज का स्वरूप सुन्दर बन सकेगा।
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*सी. एल. गुलाटी सन्त निरंकारी मण्डल दिल्ली के सचिव हैं। 


'लोक पहलकदमी' “EMBEDDED JOURNALISM” किताब पर करवाएगी चर्चा

जब पत्रकारिता सरकारी प्रचार मात्र बन कर रह गयी
"लोक पहलकदमी' तन्ज़ीम 6 अप्रैल (रविवार) को जाने पहचाने पत्रकारों जसपाल सिंह सिद्धु और  ਅਨਿਲ ਚਮੜੀਆ की ओर से सम्पादित किताब 'एम्बेडड जर्नलिज़म,पंजाब' (नियोजित पत्रकारिता, पंजाब) पर चर्चा करवाएगी। यह विचार चर्चा चंडीगढ़ के किसान भवन के प्रताप सिंह कैरों कांफ्रेंस हाल (सेकटर-34) में 11 बजे से 2 बजे तक चलेगी। चर्चा के मुख्य वक्ता होंगें-जगतार सिंह (लेखक 'खालिस्तान स्ट्रगल: ਏ ए नान मूवमेंट' व पूर्व पत्रकार-इंडियन एक्सप्रेस) और ਹਮੀਰ हमीर सिंह (सीनियर पत्रकार-पंजाबी ट्रिब्यूनेतृत्व न) होंगें। यह पुस्तक जन मीडिया प्रकाशन दिल्ली की ओर से प्रकाशित की गयी है। 
इस पुस्तक में एक लेख पत्रकार जसपाल सिद्धु की तरफ से लोखा गया है।  इसके इलावा अन्य लेखकों में प्रोफेसर प्रीतम सिंह (प्रोफेसर-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी) ਪ੍ਰੋ.ਪ੍ਰੀਤਮ ਸਿੰਘ (ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ,ਔਕਸਫੋਰਡ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ), राम नारायण कुमार  (मानवाधिकार कार्यकर्ता), पतवंत सिंह-(सिक्ख बुद्धिजीवी), त्रिलोक सिंह दीप (तत्काली सीनियर पत्रकार-दिनमान)प्रेस कौंसिल आफ इंडिया की रिपोर्ट शामिल है। गौरतलब है कि 1990-91 में केंद्र सरकार की तरफ से पत्रकार बी जी वर्गीज़ के नेतृत्व में  कश्मीर और पंजाब की पत्रकारिता के हालात का जायज़ा लेने के लिए प्रेस काउन्सिल की एक टीम भेजी गयी थी। इस  रिपोर्ट को किताब के ज़रिये पहली बार प्रकशित किया जा रहा है।  "एम्बेड जर्नलिज़म" (नियोजित पत्रकारिता) का कन्सेप्ट 2004 में अमेरिका की तरफ से इराक़ पर किये गए हमलों के दौरान उस समय सामने आया था जब अमेरिकी सेना अपने साथ 600 पत्रकारों की टीम ले गयी थी। जिन पत्रकारों को जंग के मैदान में लेजाया गया वे केवल सेना की  पर ही खबरें लिखते थे। इस तरह पत्रकारिता सरकारी प्रचार मर बन के रह गयी।  उस मौके पर पूरी दुनिया में "नियोजित पत्रकारिता" की काफी तीखी आलोचना हुई थी। 
इसी शब्द को मुख्य रख कर जसपाल सिद्धु और अनिल चमड़िया ਨੇ 'ऑपरेशन ब्लू स्टार" ਓਪਰੇਸ਼ਨ ਬਲਿਊ ਸਟਾਰ' 'में मीडिया के एकतरफा रवैये को परत दर परत टटोलने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक वास्तविक मांगों और समस्यायों को दबा कर स्टेट पत्रकारिता के ज़रिये "पापुलर स्पोर्ट" कैसे प्राप्त करती है। इसकी कई मिसालें इस पुस्तक में दर्ज हैं। प्रोफेसर प्रीतम सिंह का लेख कहता है कि  
'ब्लू स्टार' की मीडिया ने एकतरफा रिपोर्टिंग की और चीज़ों को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत किया। 
'लोक पहलकदमी" की तरफ ने का प्रयास करते हैं और करते रहेंगे। सभी मित्रों को इस विचार चर्चा में शामिल होने का खुला निमंत्रण है। हर व्यक्तिगत और  का स्वागत है। 
टीम "लोक पहलकदमी" 
नयनइंद्र सिंह,  (98761-10958) जसदीप सिंह (99886-38850) गंगवीर राठौड़-(99889-54521) कपिल देव (98725-96106) इमरान खान (98882-650070) हरप्रीत सिंह काहलों (94641-41678)          {गुलाम कलम से साभार}
'ਲੋਕ ਪਹਿਲਕਦਮੀ' “EMBEDDED JOURNALISM” ਕਿਤਾਬ 'ਤੇ ਕਰਵਾਏਗੀ ਚਰਚਾ


23 मार्च-बड़े पैमाने पर हुआ शहीदों को नमन

कई स्थानों पर हुए कार्यक्रम  --Updated on March 24 2014 at 14:30 
लुधियाना: 23 मार्च 2014: (रेकटर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन): वर्ष में 364 दिन शहीदों को भुलाये रखने वाले लोग दिन विशेष आने पर बहुत ही जोशो खरोश से अपनी श्रद्धा के फूल अर्पित करते हैं। इस रस्म को निभाने के बाद जल्द से जल्द वहाँ से खिसक लेते हैं। यही कुछ आज भी हुआ। बहुत से लोग आये--फूल मालाएं पहनायीं और चलते बने। फोटो खिंचवाने और फिर जल्द से जल्द किसी और जगह भाग लेने की होड़। कुछ तो ऐसे थे जो बार बार किसी वरिष्ठ नेता के आ जाने से उसके साथ खड़े हो जाते थे तांकि उनकी फोटो भी दोबारा तिबारा उनके साथ आ सके। अगर आज अधिक फोटो खिंचवाने का कोई मुकाबला होता तो शायद बहुत से लोगों को इनाम मिलते। शहीदों के सपनों की बात करने की हिम्मत बहुत ही कम लोगों ने बहुत ही कम कार्यक्रमों में दिखायी पर इन कम लोगों ने ही वास्तव में शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी ।
माकपा नेता वृंदा करात अपने घोषित समय से कुछ देरी से पहुंची। इसी बीच अकाली दल और अन्य सियासी व समाजिक संगठनों ने जगराओं पुल पर पहुँच कर शहीदों को नमन किया।  अकाली नेता शरणजीत सिंह ढिल्लों, मनप्रीत सिंह अयाली, मेयर हरचरण सिंह गोलवड़िया, हरभजन सिंह डंग, गुरिंदरपाल सिंह पप्पू और कई अन्य नेतायों ने शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
हैल्पिंग हैंडस कल्ब के  सदस्य भी शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए जगराओं पुल पर स्थित शहीदों की प्रतिमा पर पहुंचे। शायद यह पहला ऐसा संगठन था जो जूते उतर कर सीडियां चढ़ा। इस संगठन के राष्ट्रिय अध्यक्ष-रमन गोयल, मुख्य सलाहकार अवनीश मित्तल, नीरज वर्मा, ज्योति डंग, गगन अरोड़ा, दीपक जैन, वरुन जैन, निखिल गोयल, राजीव अरोड़ा, रशिम कालड़ा, अमित सैणी, शशि, तरुण गोयल, राकेश सिंगला और कई अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने शहीदों की कम उम्र और ऊंचे निशानों की चर्चा की।  
आज़ाद क्रन्तिकारी सेवा दल ने भी इस दिन को श्रद्धा से मनाया और शहीदों की याद को ताज़ा किया।  संगठन के प्रधान गुरजीत सिंह राणा ने लुधियाना में एक अजायबघर बनाने की मांग भी की। इस मौके पर वरिंदर सिंह वीरू, सिमरनजीत सिंह सोनी,अमित, गगन, रानी, रिंकी, सचिन और कई अन्य सदस्य भी मौजूद थे। 
इन लोगों ने जगराओं पुल का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने और नशे की रोकथाम के लिए ड्रग्स माफिया पर नकेल कसने की मांग भी की। 
इस ऐतिहासिक दिन के मौके पर किदवई नगर इलाके में स्थित मिनी रोज़ गार्डन में एक यादगारी कार्यक्रम हुआ। रमेश बांगड़ और उनकी टीम के प्रयासों से हुए इस कार्यरम में कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। स्कूली बच्चों ने अपनी रंगारंग आइटमों के ज़रिये जहां दर्शकों का मनोरंजन किया वहीँ समाज के नव निर्माण के लिए कई संदेश भी दिए। केसरिया रंग में रंगे सैंकड़ों नौजवान रंग  बसंती चोला की याद दिल रहे थे। 
एक्टिव एंटी क्रप्शन ग्रुप व बदर्स कल्ब की तरफ से किदवई नगर स्थित मिनी रोज गार्डन में रमेश बांगड़ और गुरदेव शर्मा देबी की अध्यक्षता में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी की याद को समर्पित निघी याद शहीदां दी नाटक का मंचन किया गया। भगत सिंह व साथीयों की तरफ स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हकूमत को जड़ों से उखाड़ फैकने के लिए अपनाए गए तौर तरीकों को देख कर उपस्थित जनसमूह दांतो तले उंगलिया दबा कर बोले वाह भगत सिंह तेरी कुर्बानी बेमिसाल। नाटक में भगत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में कूदने से लेकर फांसी की सजा तक फिलमाए दृश्यों की जम कर सराहना हुई। लोग लगातार इन्हें देखने के लिए वहाँ बैठे रहे। हर किसी की निगाह स्टेज की तरफ थी। स्टेज पर हो रहा मंचन देख कर कई लोगों की आँखों में आंसू तक आ गए। 
इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नेतायों में भी जैसे कोई होड़ लगी थी। बहुत से प्रमुख नेता यहाँ आये, बैठे और कार्यक्रम को देखा-सुना और कलाकारों की अफ़ज़ाई की। जगह काफी बड़ी होने के बावजूद प्रोग्राम के अंत तक भरी रही। स्टेज तक आना जाना काफी मुश्किल था। लोगों के इस जोश को देख कर लगता था कि शहीदों के एक नारे पर कितने लोग एकत्र हो सकते हैं। समारोह में बाबा कुलवंत भल्ला, शून्य प्रभु, पूर्व मंत्री सतपाल गोंसाई, अकाली भाजपा उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली,आजाद प्रत्याशी  सिमरजीत सिंह बैंस, समाज सेवक जगदीश बजाज, अमित गोंसाई, गुरदीप सिंह गोशा, पार्षद गुरप्रीत सिंह खुराना, दलजीत सिंह भोला, डोली गोंसाई, सब इंस्पैक्टर हरबंस सिंह, प्रितपाल सिंह भापा,बरजिन्द्र सिंह, अश्वनी कत्याल ने शहीदों को प्रणाम किया। रमेश बांगड़ और गुरदेव शर्मा देबी ने शहीदों को शत-शत प्रणाम करते हुए युवा पीढ़ी को अपने महान शहीदों के पदचिन्हों पर चलते हुए देश की एकता व अंखडता के लिए हर समय तैयार रहने का आहवान किया। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करने का संकल्प दोहराया।  
इससे पूर्व दोनों संगठनो के सदस्यों व नौजवानों केसरी पगडिय़ां व शहीदो की तस्वीरों वाली शर्टे पहन कर भ्रष्टाचार से मुक्ति ,नशे रहित ,सामाजिक बुराइयों के खात्मे के लिए शपथ ली। वहीं जरूरतमंद परिवारों से संबंधित विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद व बेसहारा महिलाओं को घरेलू जरूरत का सामान उपलब्ध करवाया गया। इस अवसर पर एक्टिव एंटी क्रप्शन ग्रुप के अध्यक्ष रमेश बांगड़,बदर्स कल्ब  के अध्यक्ष हरपाल सिंह जगगी,कुणाल सचदेवा,तरणजीत सिंह लव्ली,चनप्रीत सिंह,मनोज बांसल,गुरप्रीत सिंह,हैप्पी,दीप मान,दपिन्द्र,मनप्रीत सिंह शिबू,जसमीत सिंह,गगनदीप,मनी बेदी,रवि बाहरी, दीप मान, जसप्रीत जस्सी, राजू बावा, करन बांगड़, प्रदीप पप्पू, सलीम खान, तिलक राज,प्रदीप कुमार,राहुल बिल्ला,गुरप्रीत ढींढसा, मनदीप मुंडी,चरणजीत सैनी और प्रदीप अप्पू सहित अन्य भी मौजूद थे।  
कार्यक्रमों की भीड़ में सबसे अलग था ऋषि नगर में पड़ती चाँद कलोनी में हुआ कार्यक्रम। "साथी तेजा सिंह स्वतंत्र मोहल्ला सुधर कमेटी" की ओर से कराये गए कार्यक्रम में मुख्य मेहमान थे शहीद भगत सिंह के सगे भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह जो लम्बे समय से  विचारों को  हैं। इस में रंगारंग कार्यक्रमों में मनोरंजन तो था लेकिन इस मनोरंजन में शहीदों का संदेश छुपा होता था और हर आइटम लोगों को सोचने के लिए मजबूर करती थी। कार्यक्रम एक घंटे के लिए घोषित था लेकिन चला कई घंटे तक। लोग अँधेरा होने तक वहाँ बैठे रहे। 
प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने शहीद भगत सिंह के बचपन की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने बच्चों से सीधे सीधे सम्बोधित होते हुए कहा कि वे तंदरुस्ती का ध्यान रखें---निराशा को पास भी न फटकने दें और अपनी मेहनत पर ही विश्वास रखें। उन्होंने साम्राजयवाद की चालों और कॉरपोरेट के सामने घुटने टेके जाने की सरकारी नीतियों को बहुत ही सहज शब्दों में बेनकाब किया। यूं लगता  था जैसे उन्होंने भगत सिंह के जीवन काल के वो गौरवशाली पन्नों का अतीत फिर से जीवंत कर दिया हो। उन्होंने गुरुबाणी और शायरी के संमिश्रण से एक ऐसा जादू जगाया कि शहीद भगत सिंह आस-पास बैठे प्रतीत होने लगे। 
साम्प्रदायिक साज़िशें:उन्होंने बताया कि कैसे जब शहीदों के बुत लुधियाना में लगने की बात आयी तो उस समय के एक वरिष्ठ नेता उनके घर आये और कहने लगे कि सुखदेव का बुत अलग जगह एक सब्ज़ी मंडी में लगेगा---भगत सिंह का अलग जगह और राजगुरु का राजगुरु नगर में। यह सब सुनकर मेरे नानी बोले मेरा बेटा अपने साथियों के साथ खड़ा ही अच्छा लगता है। इस तरह इन तीनों शहीदों को एक ही जगह पर सतहपित किया गया। जिनको न अँगरेज़ सरकार बाँट सकी और न ही मौत की सज़ा उन्हें ये साम्प्रदायिक लोग बाँटने चले थे।  इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए अभी बहुत कुछ करना होगा हम सबको मिलकर करना होगा। उनकी ज्ञान भरी बातों को सुनकर बहुत सी बच्चियां उनके आटोग्राफ लेने आयीं।  बहुत से बच्चों ने उनसे उनका फोन नंबर माँगा। इसी तरह कई अन्य स्थानों पर भी कार्यक्रम हुए। 
“आप“ ने भी दी शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को श्रद्धांजली
शहीदों के सपनों का भारत बनाएंगे–“फूल्का“
आम आदमी पार्टी के लुधियाना क्षेत्र से लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी एडवोकेट एच. एस. फूल्का और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने आज जगराओं पुल पर शहीदों के स्मारक स्थल जाकर अपनी  श्रधा सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजली दी | इस अवसर पर एडवोकेट फूल्का ने जहाँ शहीदों को श्रद्धांजली दी वहीं इस बात पर गहरा दुख भी प्रकट किया कि, आजादी के 65 वर्षों के पश्चात् भी आम आदमी को सच्ची आजादी प्राप्त नही हो सकी है | आज भी सरकारी विभागों में आम आदमी को अपने छोटे से छोटे कार्य करवाने के लिए किसी न किसी नेता की सिफारिश या सिफारिश की पर्ची देनी पड़ती है जो की सही मायने में हमारे शहीदों की कुर्बानियों का अपमान है |

आगे फूल्का ने कहा की आम आदमी पार्टी शहीदों की क़ुरबानी को व्यर्थ नही जाने देगी इस अवसर पर जहाँ कार्यकर्ताओं के द्वारा “ इन्कलाब जिंदाबाद “ के नारे बुलंद किये गए वहीं इस बात का भी प्रण लिया गया “ भगत सिंह तेरी सोच ते – पहरा देयांगे ठोक के “ | एडवोकेट फूल्का और पार्टी के कार्यकर्ताओं की उपस्तिथि ने माहौल को जोशीला और देशभक्ति पूर्ण बना दिया |

शहीदी दिवस के इस अवसर पर एडवोकेट फूल्का ने लोगों से प्रण लेने के लिए कहा कि अब समय आ गया है हर सच्चे देशभक्त को आज यह प्रण लेना चाहिए कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए और बेईमान सियासतदानों को सत्ता से बाहर निकालने के अपना यथासंभव सहयोग प्रदान करेंगे | यही हमारे शहीदों को सच्ची श्रद्धांजली होगी |

शहीदों को श्रद्धांजली देने के पश्चात् एडवोकेट फूल्का और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शहर में पैदल मार्च निकला जो की मातारानी चौक, फव्वारा चोक, रानी झाँसी रोड, भारत नगर चौक, कोचर मार्किट, मॉडल ग्राम, राजगुरु नगर, होता हुवा सराभा नगर में संपन्न हुआ |