Tuesday, April 06, 2010

सरताज की ओर से गीत चोरी करने और गाने का विवाद हुआ और तीखा....शायर ने दी 15 दिनों की मोहलत



बात फ़िल्मी कहानी की हो, संगीत की हो या फिर साहित्य की....चोरी और सीना जोरी के कई मामले सामने आते रहे हैं. अब नया मामला सामने आया है पंजाबी के तेज़ी से उभर रहे गायक सतिंदर सरताज का। बुलंद आवाज़, श्रोतायों को बांध  लेने वाला जादू, प्रार्थना की घंटियों को सुनवाती आवाज़, कानों में मिश्री घोल देने वाली सुरें, हर किसी से विनम्रता से बात करने वाला यादगारी अंदाज़...बहुत सी खूबियां हैं सरताज में. मुझे उनके चाहने वाले एक युवा पत्रकार ने उनकी इबादत अपने मोबाईल फ़ोन पर सुनाई तो मैं खुद सब कुछ भूल गया. अपने गाये हुए गीतों को खुद ही लिखने का दावा कई बार दोहरा चुके गायक सरताज  के इन दावों पर सवाल उठाया है जिला फिरोजपुर के एक जानेमाने शायर तरलोक सिंह जज ने। दूसरी ओर सरताज की तरफ से इकबाल माहल ने स्पष्ट किया है कि वास्तव में यह सब कुछ रेकार्डिंग कम्पनी के कारण हुआ क्यूंकि विवादित गीतों वाली सीडी संबंधित रेकार्डिंग कम्पनी की मर्ज़ी के बिना जारी हुयी है।  उन्होंने यह भी कहा कि शायर तरलोक सिंह जज धमकियों में बात न करें. इस आरोप से विवाद और तीखा हो गया क्यूंकि शायर ने कभी भी धमकी की भाषा का प्रयोग ही नहीं किया. 
पंजाबी के तेज़ी से उभर रहे गायक सतिंदर सरताज की आवाज़ में किस किस गीतकार  की रचना शामिल है इसका पता शायद कभी न चलता अगर पंजाब और पंजाबियों में भी इंटरनेट  और सोशल  साईटों का प्रचलन लोकप्रिय  न हुआ होता। क्यूंकि सरताज ने कई बार कहा है कि वह जो भी गाते हैं अपना ही लिखा गाते हैं।  पर कहते हैं कि सचाई सो पर्दे फाड़ कर भी बाहर आ जाती है। इस मामले में भी बिलकुल ऐसा ही हुया । फ़िरोज़पुर में रहने वाले एक जानेमाने शायर तरलोक सिंह जज ने अपनी किसी पुरानी ग़ज़ल के कुछ अशिआर एक प्रमुख सोशल साईट पर पोस्ट किये तो कुछ ही पलों बाद पता चला कि इन्हें तो बुलंदियां छू रहे गायक सतिंदर सरताज भी गा चुके हैं. बस थोड़ी सी तलाश के बाद ही गाया गया गीत ढून्ढ लिया गया। गाया गया गीत तो मिल गया पर उसमें शायर का नाम कहीं भी नहीं था. पेशे से कानूनदान ठहरे तरलोक सिंह जज ने सारा मामला शायर दोस्तों के सामने रखा। बात चिंगारी की तरह  निकली तो  जंगल की आग की तरह फ़ैल गयी। इस सारे मुद्दे पर शायर तरलोक सिंह जज से बात की गयी तो उन्हों ने कहा कि 29 मार्च 2010 की रात को  अचानक सरताज ने उनसे फोन पर सम्पर्क किया था पर उसके कुछ घंटों के बाद पंजाबी पोर्टल पर कुछ ऐसी सामग्री प्रकाशित हुयी जिससे वह सहमत नहीं थे। अब इकबाल माहल की ओर से जानेमाने छायाकार और कलमकार जनमेजा सिंह जोहल को एक पत्र भेजा। इसी बीच इकबाल माहल के बारे में भी एक पत्र छपा जिसमें श्री माहल के बारे में काफी कुछ कहा गया। कुल मिला कर इस मामले को हल करने के कई प्रयास जारी हैं। कुछ सब के सामने और कुछ परदे के पीछे लेकिन देखना यह है खुद गायक सरताज इस मुद्दे पर खुद अपने मूंह से क्या कहते हैं ??? वह खुलकर सच स्वीकार तो करें, यहां सब उनके दोस्त हैं.....सब उन्हें गले से लगा लेंगें..मामला केवल देरी और कम्युनिकेशन गैप से ही बिगड़ रहा है....!!!    --रैक्टर कथूरिया 

1 comment:

Tarlok said...

जहाँ तक इक़बाल माहल या दुसरे सरताज हमैती दोस्तों की बात है, वह यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि फलां कम्पनी को यह सी डी या वह निकालने का अधिकार नही था और यह साबत करने कि कोशिश कि जा रही है कि इसके पीछे सरताज ने कोई कमाइ नही कि लेकिन मैं उसकी कमाइ का हिसाब नहीं माँगा मैं तो यह कहना है कि क्या जो विवादित कलाम है उसने गया कि नहीं गाया और अगर गाया है तो अपराध तो हुआ है ओर इसके लिए वह कसूरवार तो है ही लेकिन यहाँ बात उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली हो रही है | जो बातें मैं ने कि ही नहीं वह मेरे मुह में डाली जा रही हैं ओर मसले को जान बुझ के बढ़ाया जा रहा है | फिर भी मुझे १५ दिन मैं कोई उमीद रखने की शायद शंका सी हो रही है | कोई बात नहीं देखते हैं |