Saturday, December 12, 2009

नए साल के साथ ही हो जाएगी कयामत की शुरुआत

           चक्रधर ने शोषण करने वाले धर्मगुरुओं को भी रखा निशाने पर
 महासम्भूती के अवतरण  का  दावा  करने   वाले चक्रधर ने फिर स्पष्ट किया है की 31 दिसम्बर की आधी रात को नया साल शुरू होते ही कयामत की भी शुरुआत हो जाएगी. इस चेतावनी में कहा गया है कि यह अवतरण असत्य और अधर्म का विनाश करके सत्य और धर्म की स्थापना करने के लिए ही हुआ है. साथ ही यह भी कहा गया है श्री श्री आनंदमूर्ति का जन्म वास्तव में उसका ही निराकार रूप था.
        दूसरी तरफ श्री श्री आनंदमूर्ती में अपनी अटूट  आस्था रखने वाले कुछ आनंदमार्गिओं ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि होगा तो वही जो बाबा चाहेंगे ..बाकी सब जो हो रहा है वह भी बाबा की ही लीला है. इस सारे मामले पर औपचारिक  तौर पर कुछ भी देखने में नहीं आया. गौरतलब है कि चक्रधर ने अपने दावों की शुरुआत करते ही कह दिया था कि उसने सभी को दो महीने का समय दे दिया है कि अगर वे बचना कहते हैं तो असत्य को छोड़ कर उसका  ही  ध्यान करें क्योंकि वही सत्य है.

          अब उस रूप और जन्म  का काम समाप्त हो गया है. इस चेतावनी में समाज का शोषण करने वाले धर्मगुरुओं को भी निशाने पर रखा गया है और कहा गया है कि वे विनाश से बचना चाहते हैं तो तुरंत सत्य के साथ आ जायें.

              अपनी बात को स्पष्ट करते हुए चक्रधर ने कहा है कि बहुत ही कम धर्मगुरु ऐसे हैं जो भगवान् और अध्यात्म के ज्ञान कि प्यास लेकर आये आम लोगों को यह ज्ञान देकर अपना कर्म कर रहे हैं, अन्यथा अधिकतर लोग तो अपनी जेबें भरने में ही लगे हैं. इस तरह के सभी लोगों से कहा गया है कि वे तो गुरु कहलाने के भी काबिल नहीं हैं.

                 इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है जगतगुरु का स्थान ही सबसे ऊँचा होता है और वास्तव में आनंदमूर्ति ही एक ऐसे जगतगुरु थे जिनकी किसी भी बात को अभी तक कोई भी चुनौती नहीं दे सका. परन्तु मेरा अर्थात चक्रधर का जन्म होते ही जगतगुरु का काम खत्म हो गया. चेतावनी में कहा गया है कि अब मैं चक्रधर ऐसे सभी धर्मगुरुओं और उनके संगठनों को समाप्त कर दूंगा जो कि असत्य कि राह पर हैं.

             चक्रधर ने यह भी कहा है कि मैं ही शिव था, मैं ही कृष्ण था और मैं ही अब चक्रधर हूँ  जिसने समाज के सभी चक्रों को पूरा करने के बाद अब सत्ययुग की स्थापना करनी है. चक्रधर ने कहा है वही परमात्मा है, वही महाकाल है और अब वही कल्की अवतार है. इस विस्तृत  पत्र में किये गए कई दावों के अंत में कहा गया है कि  मैं ही तुम्हारा ज्ञान हूँ,  मैं ही तुम्हारा ध्यान हूँ,  मैं ही तुम्हारा कर्म हूँ,  मैं ही तुम्हारा धर्म हूँ. मैं ही शिव हूँ,  मैं ही कृष्ण हूँ और मैं ही चक्रधर हूँ.

            इस तरह की बहुत सी बातें और भी हैं जो कही गयीं हैं. अब देखना यह है धर्मगुरु और समाज इस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया  देते  हैं  वो भी उस हालत में जब कहा  यह  भी गया है की इस सब का मकसद केवल एक मानव धर्म की स्थापना करना है तांकि हिन्दू, मुस्लिम और क्रिस्चिअनो में खंडित समाज को केवल एक मानव संगठन में स्थापित किया जा सके. यह  दावा  सचमुच ही नए साल के मौके पर कोई  प्रलय लेकर आता है या फिर यह भी समाज को विघटित करने कि कोई चाल है इसका पता तो वक़त आने पर ही चलेगा पर एक बात साफ़ है रोज़ी-रोटी  के लिए और शोषण के खिलाफ हर लडाई इस तरह के एलानों और बयानों से अगर समाप्त नहीं भी होती तो कमज़ोर ज़रूर हो जाती है.

आप सभी इस मुद्दे पर क्या सोचते हैं इस का इंतज़ार तो  मुझे रहेगा ही पर यहाँ याद आ रहा है जनाब साहिर लुधियानवी साहब का लिखा हुआ एक गीत...वोह सुबह कभी तो आएगी......लीजिये आप भी सुनिये......वही गीत, कुछ सोचने के लिए मजबूर करते वही बोल और अंतरात्मा तक उतर  जाने वाला संगीत..पर अंदाज़ फिर भी कुछ अलग सा... जिसने इस गीत के बोलों के तेवर कुछ और तेज़ कर दिए  हैं......तो बस कीजिये क्लिक...और सोचिए कि आज हमारी लडाई किस मुद्दे पर होनी चाहिए और किस के खिलाफ...?????

....वोह सुबह कभी तो आएगी....... .

इस सब के साथ ही;
आपका अपना ही,
--रैक्टर कथूरिया 

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