Thursday, November 28, 2019

जैन स्कूल में 'प्लास्टिक मुक्त भारत' दिवस मनाया गया

छात्रायों ने किया 'प्लास्टिक हटायो' नुक्कड़ नाटक का मंचन
लुधियाना: 28 अक्टूबर, 2019: (कार्तिका सिंह// पंजाब स्क्रीन):: 
मुक्त भारत-एक ऐसा लक्ष्य जो न सिर्फ भारत के लिए कई बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए ही एक चुनोती है। लेकिन इस चुनोती को पार करना इतना भी आसान नहीं। कई दुविधायो का सामना करना पड़ेगा। स्वच्छता का पैगाम हर घर तक पहुँचाने के बाद केन्द्र सरकार एक बार फिर सक्रिय है। प्लास्टिक मुक्त भारत के अभियान के साथ।  एकल उपयोग वाले  प्लास्टिक के पर्योग को हतौत्साहित करने के केन्द्र सरकार ने देश में एक योजना तैयार की है।  इस योजना के तहत 2 अक्टूबर 2019 से लेकर 2022 तक प्लास्टिक मुक्त भारत और एकल उपयोग प्लास्टिक को समाप्त करने के उदेश्य से यह कदम उठाया गया है।  इसी कदम के मद्देनज़र जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रूपा मिस्त्री स्ट्रीट, लुधियाना में भी 'से नो तो प्लास्टिक बैग्स ' नामक दिवस मनाया गया।  स्कूल की +1 A की छात्रायों द्वारा 'प्लास्टिक हटायो' नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।  उन्होंने समूह-गान,भाषण तथा कवितायों द्वारा प्लास्टिक के दुष्पर्भाव को पर्दर्शित किया।  
स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती मीना गुप्ता जी ने छात्रायों के इस पर्दर्शन की सराहना करते हुए उन्हें अपनी ज़िन्दगी में भी प्लास्टिक बैन को असल मायने में अपनाना चाहिए तभी स्वच्छता तथा निरोगता को प्राप्त हुआ जा सकता है।  
इस अवसर पर स्कूल की मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन श्री सुखदेव राज जी जैन, परधन श्री ननद कुमार जी जैन, सेक्रेटरी श्री राजीव जैन और मैनेजर श्री अर्विंग कुमार जैन उपस्तिथ थे।  यदि आप ने भी स्वस्थ समाज के निर्माण को लेकर कुछ किया है तो इसकी जानकारी हमें सबंधित तस्वीरों सहित मेल करें। 

Friday, November 22, 2019

जल संकट किसी एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है

प्रविष्टि तिथि: 22 NOV 2019 5:31PM by PIB Delhi
जल संकट पर गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कही बहुत ही महत्वपूर्ण बातें 
जलदूत संवर्ग विचाराधीन:श्री रत्तन लाल कटारिया
The Union Minister for Jal Shakti, Shri Gajendra Singh Shekhawat presenting a memento to the Education Minister of Australia, Mr. Dan Tehan, during the signing of an MoU between Central Ground Water Board and MARVI Partners of Australia, in New Delhi on November 22, 2019. The Minister of State for Jal Shakti and Social Justice & Empowerment, Shri Rattan Lal Kataria, the Australian High Commissioner to India, Ms. Iven Mackay and the Secretary, Department of Water Resources, River Development and Ganga Rejuvenation, Shri U.P. Singh are also seen.
भारत और ऑस्ट्रेलिया में भूजल की भरपाई में प्रशिक्षण, शिक्षा और अनुसंधान के लिए समझौता 

नई दिल्ली: 22 नवंबर 2019: (पीआईबी)::
 इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत  
केंद्रीय भूजल बोर्ड ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में ऑस्ट्रेलिया के ‘मारवी’ (मैनेजिंग एक्वीफर रीचार्ज एंड सस्टेनिंग ग्राउंडवॉटर यूज थ्रू विलेज-लेवल इंटरवेंशन) के साथ एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, जल शक्ति तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रत्तन लाल कटारिया, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के सचिव श्री यू. पी. सिंह, ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री श्री डैन टेहन और भारत में ऑस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त सुश्री इवेन मैके उपस्थित थीं।

श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल संकट किसी एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का मुद्दा है। उन्होंने कहा, ‘हमारी 65 प्रतिशत निर्भरता भूजल पर है और इसमें बढ़ोतरी होती जा रही है।’ उन्होंने कहा कि क्योंकि भावी पीढ़ियां इससे प्रभावित होंगी, इसलिए यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है।

अपने संबोधन में श्री कटारिया ने कहा कि सरकार ‘जलदूत’ संवर्ग बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, ‘भूजल का दोहन सबसे अधिक होता है, क्योंकि वह सस्ता और सुगम्य है।’
इस अवसर पर श्री यू. पी. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जल संकट पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मन की बात में इस मुद्दे को उठाया था और अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में भी इस मुद्दे को रेखांकित किया था।(PIB)
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आरकेमीणा/आरएनएम/एकेपी/सीएस-4351     (रिलीज़ आईडी: 1593185)

Wednesday, November 20, 2019

हम्बड़ां कत्ल व दमन कांड के खिलाफ़ रोष प्रदर्शन कल

नाबालिग लवकुश के हत्यारे की दफा 302 के तहत हो गिरफतारी
संघर्षशील संगठनों के नेताओं पर झूठे केस रद्द करके उन्हें रिहा करो 

लुधियाना20 नवंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
हम्बड़ां कत्ल व दमन काण्ड व लुधियाना पुलिस के खिलाफ़ लुधियाना के दर्जन से अधिक जनवादी जनसंगठनों द्वारा गठित संघर्ष कमेटी ने जोरदार संघर्ष छेड़ दिया है। संघर्ष कमेटी ने 21 नवम्बर को हम्बड़ां में जोरदार प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संघर्ष कमेटी का यह भी ऐलान है कि अगर इंसाफ न मिला तो संघर्ष और तीखा किया जाएगा। संघर्ष कमेटी की माँग है कि संघर्ष समिति की माँग है कि हम्बड़ां की मैंसर पलाईवुड फैक्ट्री में काम करने वाले 15 वर्षीय मज़दूर लवकुश की वहशी मारपीट करके कत्ल करन वाले ठेकेदार के विरुद्ध धारा 302 के अंतर्गत पर्चा दर्ज किया जाये, उसको तुरंत गिरफ़्तार किया जाये, पीडित परिवार को इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे जनवादी जनसंगठनों के नेताओं पर दर्ज किया झूठा पर्चा रद्द किया जाये और उन्हें जेल से रिहा किया जाये। संघर्ष समिति की माँग है कि हम्बड़ां कत्ल कांड के दोषी के साथ मिलीभुगत करने वाले पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्यवाही की जाये और लोगों का एकजुट रोष व्यक्त करने का हक बहाल किया जाये।

कुल 10 जन-नेताओं और कार्यकर्ताओं को झूठा पर्चा दर्ज करके जेल भेजा गया है। इन में पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) के नेता /कार्यकर्ता सुखदेव भून्दड़ी, मेजर भैनी, चिमल सिंह, भाकियू (एकता-डकोंदा) व पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) के नेता के सुखविन्दर हम्बड़ां, टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन के नेता /कार्यकर्ता राजविन्दर, गुरदीप, जगदीश, नौजवान भारत सभा के नेता /कार्यकर्ता गुरविन्दर, शलेंदर, कारख़ाना मज़दूर यूनियन के नेता जसमीत शामिल हैं।
गौरतलब है कि मैंसर पलाईवुड फैक्ट्री हम्बड़ां में झारखंड से आए लवकुश नाम के 15 साला बच्चे से ठेकेदार रघबीर उपरोक्त फैक्ट्री अंदर लेबर का काम कराता था। तारीख़ 7नवंबर को फैक्ट्री अंदर काम दौरान रघबीर ने बच्चे लवकुश की बुरी तरह मारपीट की और उसके सिर में डंडे मारे। उसकी पी.जी.आई. में मौत हो गई। इसके बावजूद भी पुलिस दोषी ठेकेदार के ख़िलाफ़ पर्चा दर्ज नहीं कर रही थी। पुलिस ने बाद में लोगों के दवाब के चलते पर्चा दर्ज भी किया परन्तु धारा 302 की जगह धारा 304 ही लगाई। दोषी की तुरंत गिरफ्तारी, धारा 302 के अंतर्गत पर्चा दर्ज करने और मुआवज़े की माँग को लेकर पीडित परिवार, ग्रामीण मज़दूर यूनियन (मशाल), टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन और ओर संगठनों ने 18 नवंबर को हम्बड़ां में रोष-प्रदर्शन किया। पुलिस ने इन्साफ के लिए कार्यवाही करने की जगह दमन का रास्ता चुना और संगठनों के नेताओं को गिरफतार कर धारा 186, 353, 341, 283, 149 के अंतर्गत पर्चा दर्ज करके आज जेल भेज दिया है। दूसरे तरफ़ पीडित परिवार और लवकुश की लाश का कुछ भी अता पता नहीं है।
हम्बड़ां कत्ल कांड दमन विरोधी संघर्ष समिति में टेक्स्टाईल हौज़री कामगार यूनियन, ग्रामीण मज़दूर यूनियन (मशाल), भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा), एटक, जमहूरी किसान सभा, सीटू, मोलडर एंड स्टील वर्करज़ यूनियन, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, कारख़ाना मज़दूर यूनियन, नौजवान भारत सभा, किरती किसान यूनियन, पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल), लाल झंडा भट्टा मज़दूर यूनियन, इंकलाबी केंद्र पंजाब, डी.टी.एफ., डी.एम.एफ., मोलडर एंड स्टील वर्कर्ज यूनियन, भारत निर्माण मज़दूर यूनियन आदि संगठन शामिल हैं।

Saturday, November 16, 2019

सराभा के शहीदी दिवस पर सीपीआई ने कराया विशेष आयोजन

आयोजन में व्यक्त की देश में बढ़ रही साप्रदायिक ज़हर पर गहरी चिंता
लुधियाना: 16  नवंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
करतार सिंह सराभा। आज़ादी के लिए शहादतों का मर्ग दिखने वाला महान योद्धा। छोटी सी उम्र लेकिन कामों का रेकार्ड बहुत बड़ा। रंगीन सपने देखने की उम्र थी। घर परिवार और बजुर्ग माता पिता को संभालने की उम्र थी। इन ज़मीनी हकीकतों के बावजूद करतार सिंह ने सपना भी देखा तो एक अलौकिक सा सपना। हर किसी के बस में नहीं होता घर के सुख आराम को त्याग कर कर देश और देश की जनता के सुख का सपना  देखना। लेकिन सराभा ने सपना देखा-देश को आज़ाद कराने का सपना। सिर्फ सपना ही नहीं देखा बल्कि इसे साकार करने के लिए देश भक्ति की इसी शमा पर हंसते हंसते अपनी जान न्योछावर कर दी। अपने अपने नाम के आगे गांव सराभा का नाम लगाने वाले सभी लोग काश इस भावना और त्याग को भी अपनी ज़िंदगी में उतार सकें। काश कोई तो हो जो उस रास्ते पर फिर चलने का साहस सके और बता सके कि अभी उन शहीदों के सपने अधूरे हैं। अभी बहुत काम बाकी हैं। अभी रात बाकी है। 
यूं तो आज भी सिंह सराभा का शहीदी दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। बहुत ज़ोर शोर से आयोजन होते हैं। ये आयोजन सरकारी भी होते हैं और गैर सरकारी भी। इन सभी आयोजनों में देश के ठेकेदार बन बैठे सियासतदानों से कोई नहीं पूछता कि आख़िर आप देश पर कुर्बान होने वाले शहीदों को शहीद का दर्जा क्यूं नहीं देते? क्यों बेचते हो उनका नाम और उनकी शहादत? क्यों करते हो उनके नाम पर आडम्बर? अफ़सोस कि वाम दलों ने शहीदों को शहीद का दर्जा दिलवाने के लिए उन दिनों में भी कुछ नहीं किया जब दिल्ली में वाम की तूती बोलती थी और कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत किंग मेकर गिने जाते थे। परिणाम यह हुआ कि शहीदों का नाम एक आडंबर बन कर रह गया। वे लावारिस से हो गए। कोई भी उनके नाम पर कुछ भी करने को स्वतंत्र  महसूस करने लगा। काश शहीदों के नाम का दुरपयोग रोकने के उनके वारिस आगे आएं। दुःख की बता है की ऐसा दुरपयोग हर बार देखने को मिलता है। 
बड़ी हैबोवाल लुधियाना के एक सरकारी स्कूल में तो हद ही हो गयी जब सराभा के नाम पर स्कूलों बच्चों से हुस्न इश्क के गीत संगीत प्रस्तुत कराए गए जिनका देश भक्ति से कोई लेना देना ही नहीं था।  व्यापारी और साम्प्रदायिक सियासतदान इन आयोजनों के मुख्य मेहमान बने होते हैं। इसका मुद्दा कामरेड एम एस भाटिया ने सीपीआई के उस सेमिनार में भी उठाया जो सराभा की याद में आयोजित हुआ।
सीपीआई के पार्टी कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम जहां करतार सिंह सराभा को याद किया गया वहीं देश में तेज़ी से बढ़ रहे साप्रदायिक ज़हर वाले माहौल पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला इकाई ने आज पार्टी आफिस में शहीद करतार सिंह सराभा का शहीदी दिवस मनाया। इस मौके पर जहां गदर लहर और अन्य शहीदों की चर्चा की गई वहीं अंग्रेज़ सरकार से कई कई बार क्षमा याचना करके रिहा होने वाले लोगों की भी चर्चा हुई। इस मौके पर वीर सावरकर और संघ परिवार को विशेष तौर पर निशाना बनाया गया। इस श्रद्धांजलि सभा में जिला सचिव डी पी मौड़ के साथ साथ डॉक्टर अरुण मित्रा, रणजीत सिंह, केवल सिंह बनवैत, गुरनाम सिंह सिद्धू, गुलज़ार गोरिया और कई अन्य स्थानीय नेता भी शामिल हुए।
                       --(पंजाब स्क्रीन टीम में  इस कवरेज पर थे-कार्तिका सिंह//एम एस भाटिया//रेक्टर कथूरिया)

Thursday, November 14, 2019

नोटबंदी,कश्मीर और गौरी लंकेश पर भी हुए कविता में इशारे

कविता पहुंची कालेजों तक:GCG  में हुआ विशेष आयोजन
लुधियाना: 14 नवंबर 2019: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
युग बदले तो वक़्त के साथ साथ बहुत कुछ बदल गया। रीति रिवाज तक बदलते देखे गए। लोगों ने अपने धर्म बदल लिए, मज़हब बदल लिए, ईमान बदल लिए। इस सब कुछ के बावजूद एक शायर ही बाकी बचा था वह भी बदल गया लेकिन फिर भी कुछ कलमकार थे जो नहीं बदले। उनकी कविता न खरीदी जा सकी और न ही किसी अंकुश से दबायी जा सकी।   
ऐसे में एक साज़िश हुई और ऐसी कविता को बंधक बना लिया गया। उनकी कविता को वर्ग विशेष से सबंधित लोगों ने अपने अपने गट से सबंधित विशेष हाल कमरों तक महदूद कर लिया। बस उनकी कविता वहीँ तक गूंजती। उसका लोगों से मिलना जुलना बंद हो गया। बंधक वर्ग से जाने अनजाने में जुड़े लोग आते, अपनी रचना सुनाते और जब दुसरे की बारी आती तो बाहर चले जाते या सो जाते। 
कविता दम तोड़ने लगी थी। किसी नई कविता का जन्म भी होता तो आम लोगों को इसका पता ही न चलता। ऐसे में आगे आए कुछ शिक्षण संस्थान।  सहयोग दिया पंजाब कला परिषद जैसे संस्थानों ने। कविता उन वर्ग विशेष के बड़े बड़े हाल कमरों से निकल कर कालेजों में आने लगी जहाँ उसे नयी पीढ़ी के लोग मिले। शायरी में ये लोग कच्चे हो सकते हैं लेकिन तिकड़मों से कोसों दूर थे। इन्होने ने भी जानेमाने शायरों को नज़दीक से देखा। नज़दीक से उनका कलाम सुना। उनके साथ चाय पी खाना खाया और उन्हें अपने नज़दीक महसूस किया।  
यह सब हमारी टीम ने देखा लुधियाना में लड़कियों के सरकारी कालेज में जिसे ज़्यादातर लोग जीसीजी के नाम से जानते हैं। इसी तरह के आयोजन सतीश चंद्र धवन राजकीय कालेज लुधियाना और जीजीएन खालसा कालेज लुधियाना जैसे संस्थानों में भी देखने को मिले। 
दिन था 14 नवंबर 2019 का। समय रहा होगा कोई सुबह 11 बजे। पंजाब कला परिषद के महासचिव डाक्टर लखविंदर जौहल किसी वजह से नहीं आ पाए। उनकी गैरमौजूदगी खटकती भी रही। हाल में औपचारिक सम्मान के बाद मंच पर सुशोभित हो चुके थे शिमला से आये जनाब कुमार कृष्ण जो हिंदी के बहुत अच्छे शायर हैं, लुधियाना से पंजाबी में बहुत गहरी बात करने वाले जनाब जसवंत सिंह ज़फ़र, चित्रों और शब्दों का जादू भरा सुमेल करने की  वाले जनाव स्वर्णजीत सवी, जनता और जनचेतना से जुड़े हुए हिंदी के शायर डा. राकेश कुमार और पंजाबी की शायरा मोहतरमा जसलीन कौर। 
कुमार कृष्ण साहिब ने जहाँ अपनी गुल्ल्क की लूट पर कविता पढ़ते हुए नोटबंदी पर अपना निशाना साधा वहीँ चींटियों और उनके सतत संघर्ष की चर्चा भी बहुत गहरे अर्थों में की। डाक्टर राकेश ने कश्मीर में फौजी वर्दी और बूटों के आतंक की चर्चा बहुत सादगी और खूबसूरती से की। जनाब जसवंत ज़फ़र साहिब ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कहा कि जो मां की गालियां देता है, जो बहन की गालियां देता है उसे कोख में होती हत्यायों पर कविता लिखने का कोई अधिकार नहीं। मंच संचालन कार्तिका सिंह ने बहुत खूबसूरती से निभाया। इसके साथ ही उसकी गौरी लंकेश पर पढ़ी कविता भी छायी रही। 
--(पंजाब स्क्रीन टीम में इस कवरेज पर थे-एम एस भाटिया//प्रदीप शर्मा //रेक्टर कथूरिया)

Sunday, October 27, 2019

ISIS प्रमुख अबू बक्र अल बगदादी शनिवार को मारा गया

दीपावली के मौके पर आई खबर:ट्रम्प ने किया ऐलान
वाशिंगटन: 27 अक्टूबर 2019: (पंजाब स्क्रीन//इंटरनेट):: 
फोटो:इंटरनेट से साभार 
उम्मीद थी कि वह लड़ता हुआ मौत को गले लगाएगा लेकिन उस ने आत्महत्या का रास्ता चुना। खुद को घिरा देख कर उसने खुद को उड़ा लिया।
इस्लामिक स्टेट का सरगना अबू बक्र अल बगदादी शनिवार को उत्तर-पश्चिमी सीरिया में अमेरिका के विशेष बलों के हमले में मारा गया। यह ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को किया। 

ट्रंप ने कहा कि "क्रूर" संगठन इस्लामिक स्टेट का सरगना और दुनिया का नंबर एक आतंकवादी बगदादी "कुत्ते और कायर की" मौत मारा गया। गौरतलब है कि जघन्य हत्यायों के मामले में इस क्रूर संगठन ने नए रेकार्ड बनाये थे। लड़कियों को बंदी बना कर उनकी योनि और गुदा में में गोलियां मारना जैसे हत्याकांडों की बाकायदा वीडियो भी जारी करता रहा यह संगठन। अनगिनत लोगों की बददुआएँ इस संगठन इस प्रमुख का पीछा कर रही थी। छोटे छोटे नाबालिग बच्चों के सर कलम कर देना, विरोधियों को बंदी बना कर उन्हें मुर्गे की तरह आग पर भूनना इस संगठन के लिए आम सी बात थी। बंदी को पिंजरे में दाल कर बाहर से आग लगाना भी ऊके हत्या के तरीकों में से एक था।  की खुद की मौत आई तो उसका हाल देखने लायक था। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन के दौरान बगदादी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि आईएस का सरगना अपने जीवन के अंतिम क्षणों में रोया, चीखा-चिल्लाया और फिर अपने तीन बच्चों की हत्या कर खुद को बम से उड़ा लिया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के विशेष अभियान बलों ने रात के समय "साहसिक और जोखिम भरे अभियान’’ को शानदार ढंग से अंजाम दिया। यह एक ऐसा अंजाम था जिसकी इंतज़ार दुनिया में बहुत से लोगों को बहुत लम्बे अर्से से थी। 
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने दुनिया के नंबर एक आतंकी सरगना को मार गिराया है। अबू बक्र अल बगदादी अब सचमुच  मर चुका है। उल्लेखनीय है कि उसकी मौत की खबरें पहले भी आती रही हैं। इस बार उसकी मौत की खबर आने पर बाकायदा डीएनए जांच हुई है। इसके बाद ही इसका ऐलान किया गया।  
बगदादी की मौत का हाल बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह आईएसआईएस का संस्थापक और वहशी नेता था जो दुनिया का सबसे क्रूर और हिंसक आतंकी संगठन है। अमेरिका कई वर्षों से बगदादी की तलाश कर रहा था। बगदादी को पकड़ना या मारना मेरे प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। दुनिया ने इसे दीवाली की सौगात की तरह लिया क्यूंकि जब ोग दीवाली मना रहे थे तभी बगदादी के मरने की खबर आई। 
ट्रंप ने कहा वह बुरी तरह से गया था। इस साडी स्थिति के बावजूद वह एक तरफ से बंद सुरंग में भागते हुए गया। इस दौरान वह पूरे समय रोता और चिल्लाता रहा। जिस ठग ने दूसरों के मन में डर पैदा किया, उसके जीवन के अंतिम क्षण अमेरिकी सेना के खौफ में बीते। जिस ने न जाने कितने लोगों को ख़ौफ़ज़दा मौत दी थी जब खुद उसका वक़्त आया तो वह बुरी तरह से सहम गया। 
उन्होंने कहा कि अभियान में एक भी अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ, लेकिन बगदादी के कई समर्थक मारे गए। उन्होंने कहा कि उसके पास से बेहद संवेदनशील सामग्री और जानकारी मिली है। वह सामग्री क्या है इसका खुलासा तो अमेरिकी सरकार वक़्त आने पर ही करेगी लेकिन यह अमेरिका की बहुत बड़ी कामयाबी है। 
ट्रंप ने कई बार दोहराया कि बगदादी कुत्ते की मौत मरा। वह कायर की मौत मारा गया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति माइक पेंस और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ व्हाइट हाउस से अभियान का सीधा प्रसारण देखा। इस सीधे प्रसारण के दौरान एक एक पल सनसनी से भरा हुआ था। लगता था किसी भी समय कुछ भी हो सकता है।   
यह सारा हाल बताते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी कमांडों ने परिसर की दीवार को धमाका कर उड़ा दिया। विस्फोट ने बगदादी के शरीर को विकृत कर दिया, लेकिन डीएनए जांच में उसकी पहचान की पुष्टि हो गई। इस जाँच के बाद ही उसकी मौत का ऐलान किया गया। गौरतलब है कि आईएस ने लोगों पर बहुत अत्याचार किये, जिसके चलते हजारों लोगों को जान गंवानी पड़ी। जो जो वीडीओ यह संगठन जारी करता रहा उन्हें देख कर रौंगटे खड़े हो जाते थे। पिछले पांच वर्षों में, बगदादी के ठिकाने के बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाई थीं। इस दौरान कई बार उसके मारे जाने की खबरें भी आईँ। बगदादी की मौत को राष्ट्रपति ट्रंप के लिये बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जो विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से महाभियोग की प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
ट्रंप ने अभियान में सहयोग देने के लिये रूस, तुर्की, सीरिया, और इराक को धन्यवाद दिया। उन्होंने अभियान में मददगार जानकारी उपलब्ध कराने के लिये सीरियाई कुर्दों को भी धन्यवाद कहा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुर्दों ने इस मामले में सैन्य भूमिका नहीं निभाई लेकिन उन्होंने हमें जानकारी ज़रूर उपलब्ध कराई। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी विशेष बलों ने तुर्की के किसी क्षेत्र से उड़ान भरी थी।
उन्होंने कहा कि हमने रूस से बात कर उसे बताया कि हम वहां आ रहे हैं...उन्होंने बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी। हमने रूस को यह नहीं बताया कि हमारा मिशन क्या है। 
ट्रंप ने कहा कि यह एक खुफिया अभियान था। वहां घुसते ही हल्की गोलीबारी हुई, जिसका तुरंत जवाब दिया गया। अभियान की प्रक्रिया शाम पांच बजे शुरू की गई।
उन्होंने कहा कि अभियान से पहले 11 बच्चों समेत कई लोगों को बचाया गया। डीएनए जांच में साबित हो गया है कि वह बगदादी था। हमले में उसकी दो पत्नियां भी मारी गईं।
दुनिया की सबसे अच्छी खुफिया एजेंसियों द्वारा खोजे जाने और अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उसके बारे में सूचना देने के लिये ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम रखने के बावजूद बगदादी हाथ नहीं आया।
बगदादी इराक में अल-कायदा में शामिल हो गया, जिसका बाद में इराक के इस्लामिक स्टेट और अन्य इस्लामी समूहों के साथ विलय हो गया। वह अमेरिकी सेना द्वारा अपने पूर्ववर्ती के मारे जाने के बाद 2010 में समूह का नेता बन गया। इसके बाद उसने 2013 में समूह का नाम बदलकर आईएसआईएल या आईएसआईएस किया और 2014 में खुद को उसका खलीफा घोषित कर लिया। फिर भी यह सवाल अभी कायम है कि आईएसआईएस की गतिविधियां अब बंद होंगीं या मंद पड़ेंगी? क्या इस जघन्य संगठन की जंग अब नियंत्रण में की जा सकेगी? दुनिया भर में फैलिन इनकी शाखाओं पर अब बगदादी की मौत का क्या असर पड़ेगा?  

Monday, October 21, 2019

सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. शकुंतला यादव का देहावसान

Monday:Oct 21, 2019, 9:38 PM
बाईपास सर्जरी के बाद अस्वस्थ थीं-साहित्य जगत में शोक की लहर 
लुधियाना: 21 अक्टूबर 2019: (*डा. राजेंद्र साहिल)::
एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज , लुधियाना में लंबे समय तक हिंदी साहित्य का अध्यापन करने वाली और हिंदी की समर्थ एवं सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. शकुंतला यादव आज अपनी जीवन-यात्रा संपूर्ण कर परम पिता परमात्मा के चरणों में जा बिराजीं। वे 73 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार केवीएम के निकट वाले श्मशान घाट में किया गया। इसी महीने अर्थात 1 अक्तूबर 1946 को जन्मीं डॉ. शकुंतला यादव ने लगभग तीस वर्ष तक लुधियाना के सरकारी कॉलेज में अध्यापन किया और हिंदी के अनेक विद्यार्थियों के जीवन का निर्माण किया। डॉ. शकुंतला यादव ने हिंदी साहित्य को 'सूरज की तलाश', 'शब्दों के नील पंछी' और 'गुब्बारा: रौशनी और छिपकली' जैसे काव्य-संग्रहों समेत कुल छह पुस्तकें प्रदान कीं। वर्ष 2004 में सेवा-मुक्त होने के बाद से ही वह पुष्प विहार कॉलोनी, बाड़ेवाल कैनाल रोड, लुधियाना में निवास कर रहीं थीं और पिछले कुछ वर्षों से हृदय की बाईपास सर्जरी के कारण अस्वस्थ रहतीं थीं। डॉ. यादव अपने पीछे एक पुत्र-पुत्रवधू, दो पौत्र और अनेक शिष्य रूपी संतानें छोड़ गईं हैं। 
*-डा. राजेंद्र साहिल स्वर्गीय डा. शकुंतला यादव के बहुत ही नज़दीकी जानकारों/मित्रों में रहे।