Sunday, December 09, 2018

राम मन्दिर कानून से नहीं-शक्ति से बनेगा-ठाकुर दलीप सिंह का संदेश

9 December 2018 को 19:28 बजे किया गया (WTM by RPK)
अब श्रीराम तंबू में न रहे-भव्य मंदिर शीघ्र बने:महन्त रामदास
जालन्धर: 9 दिसम्बर 2018: (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
अरविंदर सिंह द्धारा दिल्ली से प्राप्त तस्वीर संदेश 
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर के भव्य निर्माण के लिए कोई कानून बन सकता है तो ठीक नहीं तो बिना कानून ही बनवा दीजिए क्योंकि जब श्रीराम मन्दिर गिराया था तो किस कानून के अधीन गिराया था जो बिना कानून गिराया हो वह बिना कानून ही बनेगा। सरकार गिरे या बचे कोई भी हालात बनें लेकिन भव्य निर्माण श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए हमारी नामधारी संगत पूर्णरूप से आपके साथ है। क्योंकि कानून कमजोरों के लिये होता शक्तिशालियों के लिये कोई कानून नहीं होता उक्त संदेश नामधारी समाज से सत्गुरू दलीप सिंह जी महाराज द्वारा भेजा गया था जिसे संत पलविन्द्र सिंह ने आज शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मन्दिर परिसर में आयोजित विराट धर्म सम्मेलन के दौरान पढ़कर सुनाया। संत पलविन्द्र सिंह ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 625 रियासतों को जबरदस्ती भारत में शामिल किया था वह किस कानून के अधीन किया था। इस प्रकार के महान कार्य किसी कानून के अधीन नहीं होते सरकार जो करती है वही कानून होता है। अभी मथुरा में भगवान श्री राम जी का मन्दिर और काशी में विश्वानाथ मन्दिर भी बनाना है। यह कब बनेंगे इसका सीधा स्पष्ट उत्तर है कि यदि आप सोचते हैं कि मुस्लमानों को सहिमत करके मन्दिर बनाएंगे तो वह संभव नहीं। उन्होंने केन्द्र सरकार को आग्रह किया कि वह 31 दिसम्बर से पहले श्रीराम भव्य मन्दिर बनवा दें आपकी सरकार का जो हाल हो उसकी चिंता न करें वरना अगली सरकार बनानी मुश्किल हो जायेगी। 
संदेश में यह भी कहा गया कि हरिमन्दिर साहिब पर भारतीय फौज का आक्रमण किस कानून के अधीन हुआ था। कांग्रेस के समय में इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात किस कानून के अधीन सिखों का कत्लेआम हुआ था इसलिए स्पष्ट है कि कानून वहीं होता है जो सरकार देती है। 

उन्होंने कहा कि हम नामधारी राष्ट्रवादी है भारतीय संस्कृति को मानते हैं व उसके रक्षक हैं इसलिए भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये भव्य राममन्दिर श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए।
महामण्डलेश्वर रामेश्वरदास (हरिद्वार) ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमारी भारतीय संस्कृति की आस्था आस्मिता व गौरव हैं और भारत में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मन्दिर न बनना हमें लज्जा दिलाने वाला है आज जरूरत अपनी शक्ति, सामर्थ को पहचाने की है। हिन्दू समाज लम्बे समय से श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिये संघर्षरत हैं। वर्तमान आंदोलन भी 30 वर्षों से चलाया जा रहा है। हिन्दू समाज चाहता है कि अयोध्या में भव्य राम मन्दिर बनें इससे जुड़ी सभी बाधाएं दूर हो लेकिन यह प्रतिक्षा अब लंबी हो चुकी है। 2010 में उच्चन्यायलय ने जो फैसला दिया था वह 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और जब न्यायालय से पूछा गया कि अब इसकी सुनवाई कब होगी तो कहा गया कि हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं। कब सुनना है यह न्यायालय का अपना अधिकार है लेकिन न्यायालय के इस जवाब से हिन्दू समाज अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है और यह बात समस्त हिन्दू समाज के लिये आश्चर्यजनक व वेदनापूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय को पूर्णविचार करना चाहिए यहां समाज को न्यायालय का वहीं न्यायालय को सामान्य समाज की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। यदि न्यायालय की प्राथिमकताएं बाधा बनती हैं तो सरकार को इस संबंध में उचित अध्यादेश लाना चाहिए ताकि सपष्ट हो सके कि कौन है जो हिन्दू समाज की अवहेलना कर रहा है। फिर हिन्दू निर्णय करेगा कि उसे सत्ता किसके हाथों में देनी है। 
उत्तर क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख राकेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनीति चमकाने का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि हिन्दू अब जागृत हो रहा है। अब इनको अलग-अलग जाति साम्प्रदाएं में बांटने वाले बाज़ आएं अब भारत देश पर वहीं राज करेगा जो हिन्दू समाज का सम्मान करेगा। किसी धर्म विशेष को खुश करने की नीति रखने वाले या तो राजनीति करना छोड़ जाएं अन्यथा अब जागृत हिन्दू समाज अपने निर्णय अपनी संस्कृति व समथ्र्य के अनुरूप लेकर देश को सही ढंग से चलाने के लिये भी सक्षम है। श्री राकेश जी ने कहा कि 100 करोड़ हिन्दुओं की अवहेलना करके देश की सत्ता संभालने का दम भरने वाले सभी धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक दल अपनी कार्यविधि में समयानुकुल सुधार कर लें वरना अब हिन्दू समाज उन्हें माफ करने वाला नहीं है।
इस अवसर पर धार्मिक, संकीर्तिण व पवित्र मंत्रोच्चारण के साथ गणेश वंदना व श्रीराम स्तुति के पश्चात वहां उपस्थित सभी राम भक्तों ने अयोध्या में भव्य मन्दिर निर्माण का शंखनाध करते हुए अपना सक्रिय सहयोग करने का प्रण लिया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्वामी सच्चदानंद, महामण्डलेश्वर 1008 महंत गंगा दास, महन्त रामदास,  व पूज्य संत समाज, बुद्धिजीवियों ने श्रीराम मंदिर के इतिहासिक व पौराणिक महत्व व वर्तमान दौर में उसकी सार्थकता की जानकारी देते हुए सभी रामभक्तों को इस पुनित कार्य में अपनी सक्रिय अहूति देने के लिये प्रेरित किया। 
बरागी आश्रम श्री राम मंदिर के 108 महंत रामदास ने कहा कि अब श्रीराम तंबू में न रहे, श्रीराम का भव्य मंदिर शीघ्र बनें इसके लिये संयुक्त प्रयास होना चाहिए अब इस विषय पर कोई भी राजनीति स्वीकार्य नहीं है। 
इस अवसर पर असंख्य रामभक्तों ने रामल्ला हम आएँगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का। श्री राम हमारे प्राण हैं, मन्दिर में देरी अपमान है। मन्दिर बनने वाला है, इतिहास बदलने वाला है। हर घर भगवा छाएगा, श्रीराम राज फिर आएगा। एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम। रामल्ला के वास्ते, खाली करदो रास्ते। जन्मभूमि के काम न आए, वो बेकार जवानी है। लाठी गोली खाएंगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। जिस हिन्दू का खून खोले, वो खून नहीं पानी है के गगनचूंबी उद्घोष कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद पंजाब के अर्चकमण्डल के अध्यक्ष पंडित एस.के. शास्त्री, राज गुरू पंडित अशोक मोदगिल, महंत मथुरादास, महंत राज किशोर, महंत कमलेश, दिव्य ज्योति जागृत संस्थान (नूरमहल) से स्वामी सज्जनानंद, स्वामी हरिवल्लभानंद, स्वामी नरेशानंद, स्वामी तरुणेशानंद, राष्ट्रीय संत पंडित दीन दयाल शास्त्री (अध्यक्ष विश्व मानव कल्याण मिशन), महन्त बीलराम दास , महन्त राज किशोर, महन्त सिया शरण दास, महन्त कमलेश दास, महन्त केशव दास, महन्त पवन दास,  महन्त परमेश्वारदास, महन्त श्रवण दास, महन्त बलरामदास, स्वामी धर्म विवेक जी, महन्त अशोक कुमार, काठगढ़ नवांशहर से स्वामी दयाल दास, संत बिहारी दास, संत गोपाल दास, संत सत्य नारायण, बाबा पाल जी नागी, नामधारी संत दया सिंह , संत दर्शन सिंह , संत अमरीक सिंह, संत तेजिन्द्र सिंह, संत पलविन्द्र सिंह, संत गुरूमुख सिंह, संत दर्शन सिंह, संत रणवीर सिंह, संत गुरमीत सिंह, संत सेवा राम व अन्य तपस्वी, साधक व धर्म प्रेमी उपस्थित रहे। 
श्रीराम मंदिर न्यास समिति, जालन्धर इकाई से कोई सवाल हो तो सम्पर्क नंबर है:98140-71007

Wednesday, November 28, 2018

त्रिशूल और खण्डे को अन्याय के खिलाफ एकजुट करने का प्रयास

शिव मंदिर फिल्लौर में भी मनाया गया गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व 
28  नवंबर 2018 को प्राचीन शिव मंदिर नगर (फिलौर) से लौट कर पंजाब स्क्रीन टीम
बात केवल कोई पर्व मनाने की नहीं है। गुरुपर्व हो, रामनौमी हो, जन्माष्टमी हो, ईद हो या क्रिसमिस। इन त्योहारों को हम अपनी आस्था के मुताबिक घर में शायद ज़्यादा अच्छी तरह मना सकते हैं। शोर शराबे और भागदौड़ से कुछ समय के लिए दूर रह कर अपने गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और अवतारों से जुड़ कर, उनके उपदेशों का मर्म समझ कर। कुछ देर के लिए ही सही उनके संघर्षों भरे जीवन का मनन करके। भगवान और उनके दूत दिखावा नहीं केवल प्रेम चाहते हैं। 
मीरा को ज़हर दिया जाना और मीरा का ज़हर पीना आज भी यही बताता है कि आस्था से प्रेम आसान नहीं होता। सिर  को हथेली पर लेकर आना पढ़ता है प्रेम की गली में। सलीब केवल ईसा को मिली ऐसा मत सोच लेना। आस्था और विश्वास पर टिकोगे तो आज भी सलीब पर चढ़ना पड़ सकता है। माता चंद कौर की दिन दिहाड़े हत्या यही दिखा रही है कि आज भी माहौल उसी तरह का बन गया है। आज भी ज़हर का प्याला,  गोली या सलीब ही है धर्म के मार्ग पर चलने का परिणाम। जो मौत  में भी  जीवन देख सके वही इस रास्ते पर आये। भयभीत और स्वार्थ या लालच से भरे लोगों का इस रह पर आना सभव ही नहीं। 
गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और अवतारों की मानोगे तो सत्य की राह पर चलना पड़ेगा। सत्य की राह पर चलना हो तो अपने सिर को हथेली पर रखने को तैयार रहना। आसान नहीं होगा इस राह पर चलना। असत्य और अन्याय की तरफ धनवान और बाहुबली होंगें और सत्य की तरफ केवल संघर्ष और प्रेम होगा। चुनाव आप ने ही करना है लेकिन ध्यान से करना। कंस की तरफ खड़े होना है या कृष्ण की तरफ। बाबर की तरफ या नानक की तरफ। 
अपने अपने समय में सभी गुरुओं और अवतारों ने अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। गलत को गलत कहा। शोषण का विरोध किया। इसके साथ ही एकता का संदेश भी दिया लेकिन सिर को हथेली पर रख कर ही दिया। इस एकता ने ही बड़े बड़े तख्तनशीनों को उखाड़ फेंका। गुंडागर्दी उस समय भी थी। बाहुबलियों का दुरपयोग उस समय भी होता था। 
इस सारी जंग में उनकी कुर्बानियों को चमत्कारों का नाम दे कर छोटा मत करो। उनको मानना है तो उनके बताये मार्ग पर चलो। आज भी खतरे उसी तरह मौजूद हैं। फैसला आपके हाथ में है। सत्य की तरफ आना है या झूठ की तरफ जाना है। कोई मजबूरी भी नहीं है। अंतरात्मा की आवाज़ सुननी है या इसको अनसुना करना है। इसका फैसला आपके हाथ में है। 
आज यहाँ प्राचीन मदिर में जो लोग एकत्र हुए हैं वे अपनी मर्ज़ी से अपने कामकाज छोड़ कर आए हैं। इनको समझ में आ चुका है कि बाहुबलियों के शोषण को समाप्त करना है तो एकता करनी होगी। एकता में प्रताप है-पंथ तोड़ना पाप है। मंदिर में गूंज रहे गुरु नानक देव जी के जैकारे और शब्द गुरुनानक देव जी के जीवन का संघर्ष याद दिला रहे हैं। 
यहां ठाकुर दलीप सिंह जी की प्रेरणा से मंदिर कमेटी ने श्री गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने का आयोजन किया है। करीब एक हज़ार वर्ष पुराने इस मंदिर में भजन भी गाए जा रहे हैं और शब्द भी। मंदिर में लगा नामधारी प्रमुख ठाकुर दलीप सिंह का बैनर बता रहा है कि इस मंदिर में भी गुरु पर्व मनाने का संदेश लागू हो चुका है। मंदिर के एक सेवादार अमरजीत सिंह बताते हैं कि वैसे तो वह यहाँ हर  करने आते हैं लेकिन आज उनको यहाँ आ कर बहुत प्रसन्नता हुई है।  इसी तरह  मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहाँ इस तरह का आयोजन किसी चमत्कार से कम नहीं है। मंदिर की सेवा में आई मंदिर कमेटी महिलाओं में भी उत्साह है। 
यहाँ पर हिन्दुओं और सिखों का उत्साह बता रहा है कि अब वही पहले जैसी एकता फिर से हो कर रहेगी। एकता तोड़ने वाले तत्वों को फिर मुँह की खानी पड़ेगी। इस अवसर पर नामधारी संगत भी मौजूद थी और मंदिर में आने वाली हिन्दू संगत भी। सभी ने श्री गुरु नानक देव जी की तस्वीर के सामने बहुत ही श्रद्धा से माथा टेका और शब्द गायन में हिस्सा लिया। 
इस मंदिर में आई हुई संगत को देख कर लगता था जैसे मंदिरों में गुरु पर्व मनाने की बाढ़ सी आई हुई है। एकता की एक ऐसी आंधी जो फुट डालने अले तत्वों को अपने साथ ही उड़ा ले जाएगी। 

Wednesday, November 21, 2018

दुर्लभ सर्जरी से ठीक की NRI की इरेक्टिल डिसफंक्शन की समस्या

Nov 21, 2018, 3:06 PM
इस समस्या के कारण दूसरी शादी भी थी टूटने की कगार पर
लुधियाना:  21 नवंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
आधुनिक जीवन शैली और अन्य कारणों की वजह से इरेक्टिल डिसफंक्शन अर्थात नपु्ंसकता या शीघ्र पतन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन एक करोड़ से अधिक मामले तो अकेले भारत में ही सामने आ रहे हैं। नपुंसकता की यह समस्या किसी शारीरिक या मानसिक अवस्‍था का गहरा संकेत हो सकता है। इसका विश्लेषण करने से ही इस समस्या के सही कारणों का पता लगाया जा सकता है। निरंतर गंभीर हो रही इस कारण जहाँ तनाव बढ़ रहा है वहीँ रिश्तों में मनमुटाव की भी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। कुल मिला कर यह समस्या ज़िंदगी का एक ऐसा दुखद दर्द बन जाती है जिसे सभी के साथ बांटा भी नहीं जा सकता। यह समस्या केवल पंजाब या अन्य भारतीय राज्यों में ही नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे लोगों को भी है। लुधिया के एक प्रसिद्ध अस्पताल से जुड़े एक डाक्टर ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे ें आर आई का इलाज किया है जिसकी इस समस्या का निदान कैनेडा में भी नहीं हो सका था। 
कनाडा में रहने वाले एनआरआई सुरजीत (बदला हुआ नाम) को आ रही इरेक्टिल डिसफंक्शन (नपु्ंसकता/शीघ्र पतन) की समस्या के कारण उसकी दूसरी शादी भी टूटने के कगार पर पहुंच गई थी। क्योंकि वह सेक्सुअल तौर पर अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा था। जब किसी भी डॉक्टर का इलाज उसके काम नहीं आया तो उसने अंतिम स्पेट के तौर पर दीप हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. आनंद सहगल से संपर्क किया। उन्होंने पेनिल इंप्लांट सर्जरी के जरिए सिलीकॉन सिलेंडर इंप्लांट करके इस समस्या का स्थाई समाधान कर दिया।
बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दीप हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आनंद सहगल ने बताया कि 17 नवंबर को अस्पताल के एक्सट्रा मॉडर्न ऑपरेशन थिएटर में उसकी पेनिल इंप्लांट सर्जरी की गई। जिसके जरिए इंपोर्टेड इन्फ्लाटेबल सिलिकॉन सिलेंडर इंप्लांट किए गए। जिस कारण इरेक्टिल फंक्शन ठीक तरह से काम करने लगा। सर्जरी के दौरान इंप्लांट करते समय सावधानी बरतते हुए वैक्टीरिया फ्री माहौल की जरूरत होती है। ताकि रिजल्ट शत-प्रतिशत सही हो। इस सर्जरी में ढाई घंटे का समय लगा। इंप्लांट के लिए इस्तेमाल किया गया सामान अमेरिकन मेडिकल सिस्टम्स (एएमएस) कंपनी से मंगवाया गया था। प्रोसीजर के कुछ घंटों बाद से ही सुरजीत ने भोजन लेना शुरू कर दिया और दूसरे दिन ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. सहगल ने बताया कि यह इंप्लांट सर्जरी उन लोगों के लिए वरदान है, जो इस तरह की समस्या झेल रहे हैं और दवा से उनका इलाज नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि डाइबिटीज मेलिटस, एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण ब्लड सप्लाई में कमी और हार्मोनल असंतुलन समेत कई कारणों से यह समस्या आ सकती है। हाइपरलिपिमीडिया, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस, मोटापा, वजन ज्यादा होना व स्मोकिंग इस समस्या को जन्म देते हैं। एक्सरसाइज नहीं करना भी इसका कारण बनता है। लगातार एक्सरसाइज करके और शारीरिक व मानसिक तौर पर फिट रहकर इस समस्या से बचा जा सकता है।
दीप हॉस्पिटल के एमडी डॉ. बलदीप सिंह ने कहा कि उनके अस्पताल में यूरोलॉजी के फील्ड में विश्व स्तरीय रीकंस्ट्रक्टिव व आधुनिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस कारण लोगों को अब इस तरह की समस्याओं के लिए देश के दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दूसरी तरफ होम्योपैथी, आयुर्वेद और योग चिकत्सा में इस समस्या के सफल इलाज का दवा किया जाता है जिसकी चर्चा हम किसी अन्य पोस्ट में करेंगे। 

Saturday, November 03, 2018

जालंधर स्कूल के छात्र वर्ग ने कुंग-फु में दिखाए जौहर

मार्शल आर्ट को हर घर तक पहुंचने का संकल्प 
जालंधर:3 नवम्बर 2018:(राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
जालंधर विदियक सोसायटी की ओर से चल रहे जालंधर स्कूल गदाईपुर के छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण  विकास के लिए किए जा रहे प्रयास बच्चों की सफलता में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। यह प्रयास बच्चों को ज़िंदगी की बुलंदियां छूने की ओर अग्रसर करने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। एक छोटे से गांव में रहने वाले साधारण से परिवारों के बच्चे खास कर लड़कियाँ मार्शल आर्ट के सभी खेलो को करने में सक्षम हो गई हैं। अब इन छात्र छात्रों ने स्टेट लेवल प्रतियोगिता तक पहुँच कर भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। इन बच्चों ने  गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक भी हासिल किए हैं। इनको कोचिंग देने और अभ्यास कराने में प्रवीण जी और मोहम्मद हैदर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। इन कोच साहिबानों की मेहनत से जालंधर स्कूल गदाईपुर के दस बच्चों ने पदक और सर्टिफिकेट  हासिल किए हैं। इन परिणामों में लावण्या तीन फाइटों के मुकाबले के बाद प्रथम रही और स्वर्ण-पदक हासिल किया।  इसी तरह चुटुन ,हर्ष,नितेश ,चंदन और आदित्या ने सिल्वर पदक प्राप्त करके नाम रौशन किया। बरुन, भूमिका, आसिफ और अमन ने कांस्य पदक हासिल करके नई संभावनाओं का संकेत दिया। आज स्कूल में विजेता बच्चों को सारे स्टाफ की तरफ से बधाई दी गई और मुख्याध्यापिका राजपाल कौर ने बच्चों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ कर जीत हासिल करने की प्रेरणा दी। इस मौके पर मैडम मीनाक्षी, जसवीर कौर, संदीप कौर, सोनम, सेसा श्रेष्ठा, संगीता, मीना कुमारी, राधा, नीलम पाल और शिवानी हाजिर थी।   

Thursday, November 01, 2018

अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया! ---कार्तिका सिंह

पहली नवम्बर को पंजाब दिवस पर विशेष काव्य रचना
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया!
साज़िशों की बाढ़ में पंजाब सारा बह गया। 
कहीं है हिमाचल, कहीं हरियाणा रह गया;
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया। 

खेत मिट रहे हैं-खतरे में बाग़ है। 
मक्की की रोटी कहां सरसों का साग है?
भेलपूरी छा गयी है; बर्गर पीज़ा रह गया! 
अपना पंजाब अब पंजाब  कहां रह गया। 

ख़ुदकुशी की खबरें हैं, जुर्मों का राज है। 
ठेके हैं शराब के बस नशे का ही राज है!
कहीं लाल परी, कहीं चिट्टा पाउडर रह गया। 
अपना पंजाब अब पंजाब  कहां रह गया। 

कौन देखे आ के जो पंजाब बना आज है!
रोज़ आती खबरों में लापता सी लाज है!  
सत्ता का यह ताज भी मज़ाक बन के रह गया!
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया। 

लूट गया पंजाब बचा क्या जनाब रह गया?
पानी और खेतों का हिसाब कहाँ रह गया?
प्रेम की निशानी वो चनाब कहाँ रह गया!
अपना पंजाब अब पंजाब कहाँ रह गया?
                                   --कार्तिका सिंह 
(शुक्रवार 12अक्टूबर 2018 को रात्रि 11:27 बजे) 

Monday, October 22, 2018

अश्वनी सग्गी बने शिवराज सेना के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

समाजिक बदलाव के प्रयासों को देंगें विशेष पहल 
लुधियाना: 21  अक्टूबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
देश और समाज के हालात फिर नाज़ुक हो रहे हैं। देश विरोधी तत्व फिर सर उठा रहे हैं। ऐसे में देश और समाज की चिंता करने वाले लोग एक बार फिर सक्रिय हो कर सामने आ रहे हैं तांकि आम जनता को जागृत कर के समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एक नई चेतना पैदा की जा सके। इस तरह के संगठनों और व्यक्तियों में अश्वनी सग्गी और उनसे जुड़े संगठन भी शामिल हैं। अश्वनी सग्गी और उनके प्रयासों से समाज में नया बदलाव लाने की कोशिशें एक बार फिर तेज़ हुई हैं।  उल्लेखनीय है कि अश्वनी सग्गी लम्बे समय तक रेलवे में काम करने के बाद हाल ही में रिटायर हुए हैं। रेलवे से रिटायर होने के बाद उनकी प्राथमिकता समाज के लिए कुछ नया करने की रही है।  
उनके सहयोग से शिवराज सैना पजाब भी समाजिक उत्थान के लिए सक्रिय हो कर सामने आ  रही है। आज लुधियाना के सर्कट हाउस मे शिवराज सैना के एक विशेष बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता संगठन के चैयरमैन रवि, पजाब वाईस प्रधान अशवनी मलहोतरा और वरिष्ठ सियासी कार्यकर्ता राजु थापर ने संयुक्त रूप से की। गौरतलब है कि राजू थापर इस संगठन के राज्य सचिव भी हैं। इस बैठक में समाज और सियासत की मौजूदा स्थिति पर गहन विचार विमर्श किया गया।इस अवसर पर शिवराज सैना के राष्ट्रीय संचालक श्री रमेश भगत  भी विशेष तौर पर पहुंचे। इस बैठक में एक विशेष घोषणा करते हुए जानेमाने समाजसेवी अश्वनी सगी को अखिल भारतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुकत किया गिया। इसी बैठक में संगठन और कार्यालय का पोस्टर भी रिलीज किया गिया। शिवराज सैना की पूरी टीम इस मौके पर मौजूद रही। 

Saturday, October 20, 2018

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 का मुकाबला शुरू

Oct 20, 2018, 5:14 PM
तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आवश्यक है 
लुधियाना: 20 अक्टूबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
एक देश के लिए ख़ुद को महा-शक्ति कहलाने के लिए ज़रूरी होता है कि वह तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश करे-डा. परवीन कुमार खोसला, सहयोगी निर्देशक टीबआरऐल्ल
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 का मुकाबला हुआ शुरू
‘‘भारत जैसे किसी भी देश के लिए ख़ुद को महा-शक्ति कहलाने के लिए ज़रूरी होता है कि वह देश विज्ञान तथा तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक निवेश करे, जिससे भविष्य के उत्पादों एवं तक्नालोजी को स्वदेशी ढंग से विकसित किया जा सके तथा देश को तकनीक के तबादलो के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होने की ज़रूरत न पड़े।’’ इन शब्दों को व्यक्त किया टर्मिनल बलास्टिक रिर्सच लैबारटरी (टीबआरऐल्ल) के सहयोगी निर्देशक एवं डीआरडीओ विज्ञानी डा. परवीन कुमार खोसला ने किया जो कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में शुरू हुए नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 नामी मुकाबले के उद्घाटनी समारोह में पहुँचे थे।
इस दो दिना नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 में बहुत सारे सक्षम विज्ञानी एवं फ्रीलैंस एप डिवैलपर हिस्सा ले रहे हैं, जिस दौरान वह विद्यार्थियों के साथ टैकनॉलॉजी सैशनें के द्वारा बातचीत करेंगे, तथा उन्हें अंतरिक्ष के क्षेत्र में इस्तेमाल करीं जाने वाली तकनीकों, इन्टरनेट ऐपलीकेशनों तथा उनमें आ रहे बदलावों के बारे में आग्रह करवाया जायेगा। इस चैलेंज में 48 घंटे बिना रुकने वाला हैकेथौन शामिल है, जिस में विद्यार्थी आगे वाली पीढ़ी की त1नालोजी विकसित करने में हिस्सा लेंगे।
इस एप चैलेंज के दौरान 30 भारतीय यूनिवर्सिटियाँ एवं कालेजों के विद्यार्थी मुकाबले में हिस्सा लिया जा रहा हैं। जिन में पंजाब इंजीनियरिंग कालेज चंडीगढ़, चितकारा यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी आफ लखनऊ, ऐस्सआरऐम चेन्नई,अमृता यूनिवर्सिटी केरला इत्यादि शामिल हैं। हिस्सा लेने वाली टीमें मोबाइल ऐपस विकसित करेंगी जो स्पेस सायंटिस्टों के द्वारा ब्रह्मांड की रहस्यमयी दुनिया को समझने के लिए इस्तेमाल करी जा सकें।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं के ऐरोसपेस इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों के साथ बातचीत करते हुए डा. परवीन कुमार खोसला ने कहा कि भारतीय स्पेस प्रोगराम वर्तमान समय अमरीका, जापान, रूस, यूके तथा चीन सहित चोटी के 5 देशों में शामिल है। भारतीय स्पेस अनुसंधान एजेंसी इसरो द्वारा किये गए सफल अंतरिक्ष मिशनों के चलते भारतीय स्पेस विज्ञानियों की विश्व स्तर पर भारी माँग की जा रही है। उन्होंने आगे कहा, ‘‘नवयुवको द्वारा अपने कैरियर के बदल के तौर पर साइंस को चुनने का रुझान हर साल घटना एक गंभीर मुद्दा है। सरकारें इस बारे ज़िम्मेवाराना नोटिस लेते हुए ज़रुरी बदलाव करे । जैसे कि विज्ञान तथा तक्नालोजी के क्षेत्र में भविष्य बनाने के मौकों को प्रोत्साहन दिया जाये जिससे आज के नवयुवक इस क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए प्रेरित हो सकें।’’ 
फोटो कैप्शन: (1) चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में शुरू हुए नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 के हैकेथौन मुकाबले में भाग लेते अलग अलग यूनिवर्सिटियों के विद्यार्थी।
(2) नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 के दौरान विद्यार्थीयों के साथ अपने विचार सांझे करते हुए टीबआरऐल्ल के सहयोगी निर्देशक एवं डीआरडीओ विज्ञानी डा. परवीन कुमार खोसला।