Wednesday, April 01, 2020

कोरोना को लेकर बांग्ला देश में भी स्थिति गंभीर

कोरोना अपडेट:बांग्लादेश:31 मार्च 2020//स्वास्थ्य  
बड़े पैमाने पर बन रहे हैं धो कर दोबारा काम आने वाले विशेष मास्क 
संयुक्त राष्ट्र संघ: 31 मार्च 2020: (सं.रा.सं//पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
हमारे यहां तो लंगर के दान का दिखावा करने का ज़्यादा ट्रेंड चल रहा है उधर बांग्लादेश में मास्क तैयार करने पर भी पहल के आधार पर ज़ोर दिया जा रहा है। वहां बड़ी संख्या में मास्क तैयार किये जा रहे हैं। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी फैलने की आंच बांग्लादेश तक भी पहुंच रही है और कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों और स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य के लिए ख़तरा पैदा रहा है। 
इस बीमारी की रोकथाम के उपायों को इन समुदायों तक पहुंचाने के काम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे हैं। संक्रमण से उनकी सुरक्षा व बचाव के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य कपड़े के हज़ारों फ़ेस मास्क बना रहे हैं। इस तरफ तूफानी रफ्तार से काम किया जा रहा है। 
उल्लेखनीय है कि विश्व भर में इस बीमारी के तेज़ी से फैलने के कारण अब तक साढ़े सात लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हुए हैं और 37 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बांग्लादेश में कोरोनावायरस के 49 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ज़ाहिर है की स्थिति बेहद गंभीर है। 
कोरोना के कहर से बचाव के सभी कारगर उपाय तेज़ी से किये जा रहे हैं। ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र फ़ेस मास्क सहित अन्य निजी बचाव सामग्री की मांग में भारी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे वैश्विक स्तर पर इनकी किल्लत भी पैदा हो गई है। इसके बावजूद इनकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है। इन फ़ेस मास्क का इस्तेमाल स्वास्थ्यकर्मियों, मरीज़ों और बीमारों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। इसके उपयोग से काफी बचाव रहता है। 
इसकी मांग को पूरा करने के लिए व्यापक प्रबंध भी किये जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन ने कॉक्सेस बाज़ार में एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जिसके तहत छह हज़ार कपड़े के मास्क तैयार किए जा रहे हैं। इन मास्क को धोकर फिर से इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। धो कर दोबारा उपयोग करने से इन मास्कों की मांग भी तेज़ी से बढ़ी है। 
यहां यह याद दिलाना भी आवश्यक है कि बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में रोहिंज्या समुदाय के लिए शरणार्थी कैंप दुनिया के सबसे बड़े और भीड़-भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में शामिल हैं। 
इसके साथ ही ये मास्क चक्रवाती तूफ़ानों से निपटने की तैयारी में जुटे उन स्वयंसेवकों और अग्रिशमन व सिविल डिफ़ेंस कर्मियों के लिए बनाए जा रहे हैं जो यूएन माइग्रेशन के साथ मिलकर इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और संक्रमण से बचने के उपायों के बारे में जानकारी मुहैया कराने के प्रयासों में शामिल है। बड़े पैमाने पर हो रहे इनके उत्पादन से इनकी मांग को पूरा करने में काफी सहायता मिलेगी। 

Sunday, March 29, 2020

कोरोना संकट में भी सामने आई ठाकुर दलीप सिंह की नामधारी संगत

29th March 2020 at 5:08 PM
हर राज्य में पहुंचाए जा रहे हैं राशन और अन्य आवश्क्य चीज़ों के पैकेट  
लुधियाना: 29 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना वायरस ने सारी दुनिया को हिला कर रख दिया है लेकिन हकीकत यह भी है कि इसने सभी को एक भाईचारे का अहसास भी करवा दिया है। जहां पर्यावरण का मौसम शुद्ध हो गया है वहीँ लोगों के दिल और दिमाग का प्रदूषण भी अब तेज़ी से कम होता जा रहा है। लोग घर में बैठ कर चिंतन मनन करने लगे हैं। खुद से मुलाकात भी करने लगे हैं। लेकिन पैसे का संकट भी गहराया है। 
इस नाज़ुक हालात में जब आम लोग भूखमरी की कगार पर भी  पहुंच गए हैं। इस समय स्थिति बेहद नाज़ुक रूप ले रही है। लोगों के पास न तो नगद पैसा बचा है और न ही खाने का भोजन। ऐसे में जो लोग लंगर और राशन की सेवा ले कर आगे आये हैं उनमें से अधिकतर लोग या तो फोटो खिंचवा खिंचवा कर इन गरीबों के आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं या फिर इनके आधार कार्ड मांग कर इनको इनकी गरीबी और मजबूरी का अहसास कराते हैं। उनके अंदाज़ में कहीं भी दया भावना या दिव्यता नहीं होती। मध्य वर्गों से जुड़े बहुत से लोग ऐसी हालत में भूखे मरना तो मंज़ूर कर लेते हैं लेकिन लीडरी की ललक रखने वाले ऐसे लोगों की लिस्टों में अपना नाम कभी नहीं लिखाते। ऐसे लोगों की सहायता को पहुंचे हैं नामधारी समुदाय के संत स्वभाव लोग। किसी के भी आत्म सम्मान को ठेस पहुंचाए बिना उसको मदद देते हैं। बिना कोई शर्त रखे बिना कोई सबूत मांगे। हालांकि गलत लोग इस का फायदा भी उठाने का प्रेस करते हैं लेकिन इनकी अंतर्दृष्टि सब पहचान लेती है और उन बेईमानों को भी इमां के रास्ते पर ले आती है।  शब्दों की मिठास उसे इस संकट में जो राहत देती है उसका उल्लेख शब्दों में किया ही नहीं जा सकता।  
इन मजबूर लोगों की मजबूरी और आत्म सम्मान को समझते हुए नामधारी संगत इनको बिना किसी भेदभाव के राहत पहुंचा रही है। राहत में सूखा राशन भी है और नगदी भी। नामधारी संगत यह सारा काम अपने सद्गुरु ठाकुर दलीप सिंह के आदेशों पर कर रही है। राहत के इस काम को पंजाब के साथ साथ दिल्ली, यूपी, हरियाणा, हिमाचल  प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों तक भी लेजाया जा रहा है। अमृतसर, गुरदासपुर, चुन्नी, मोहाली, जालंधर और पटियाला की संगत इस काम के लिए बढ़चढ़ कर आगे आई है। नामधारी हरविंदर सिंह, नामधारी तेजिंदर सिंह, सेवक देव सिंह ने कहा कि जैसी जैसी ड्यूटी लगाई गयी है उसी के मुताबिक संगत अपना काम कर रही है। 
नामधारी नवतेज सिंह ने कहा कोरोना के इस गंभीर संकट को देखते हुए जिस तरह बहुत से समाज सेवी संगठन आगे बढ़ कर आये है उसे देखते हुए यह विश्वास और पक्का होता है कि हम प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना को जल्द ही हरा देंगें। ऐसे में बेरोज़गारी और राशन की कमी का जो संकट खड़ा हुआ है उसे भी हमें सभी लोगों को एकजुट हो कर ही हराना होगा। हंस सभी एक रहेंगे तो इस पर भी काबू पाया जा सकेगा। 
इस लिए जितने भी संगठन इस मकसद के लिए कार्य कर रहे हैं वे सभी हार्दिक बधायी के पात्र हैं। हम उन्हें सलाम करते हैं।  
उनके साथ ही सुश्री भूपिंदर कौर (अमृतसर) ने कहा कि ठाकुर दलीप सिंह जी उन लोगों को ज़बरदस्त सड़कों पर लंगर खिलाने के हक में नहीं जो पहले ही पेट भर कर खाये होते हैं। हमें यह सारा लंगर ज़रूरतमंद लोगों तक पहुंचना होगा। इस मकसद के लिए अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करना होगा। 
संकट का सामना करने के इस दिव्य अवसर पर सुश्री कुलदीप कौर (पटियाला), साहिब सिंह (अमृतसर), रत्न सिंह, हज़रा सिंह (चंडीगढ़), हरदीप सिंह (हिमाचल प्रदेश), जसपाल सिंह, मनमोहन सिंह (कानपुर), जसवीर सिंह (सिरसा), मोहन सिंह झब्बर (करीवाला), सरबजीत कौर दिल्ली और गुरमीत सिंह सग्गू भी मौजूद रहे।
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Saturday, March 28, 2020

कोरोना से पहले लोग भूख और गरीबी से मर जायेंगे

 28th March 2020 at 4:59 PM
9 जन संगठनों ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र 
इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है गब्बर सिंह ने 
लुधियाना: 28 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
एक तो कोरोना का कहर ऊपर से भूख और बेरोज़गारी की मुसीबत। आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। पंजाब के 9 जन संगठनों ने मौजूदा स्थिति को लेकर मुख्य मंत्री को पत्र भी लिखा है। इन्होने इस बात की कड़े शब्दों में निंदा की है कि आम गरीब वर्ग की ज़िंदगी के प्रबंधों को किये बिना कर्फ्यू का ऐलान ही क्यों किया गया? कर्फ्यू से फौरी पहले ज़रूरी प्रबंध क्यों नहीं किये गए। इन संगठनों ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि सरकारी दावों के बावजूद कोरोना पर नियंत्रण होता नज़र नहीं आ रहा। मुख्य मंत्री को लिखे अपने पत्र का विवरण देते हुए इन संगठनों ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि सरकारी बयानों से गरीबों का पेट नहीं भरने वाला। इन बयानों को लागू भी किया जाना चाहिए। कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है और इससे संक्रमित लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। संगठनों ने लोगों पर टूटे पुलिस के कहर की भी सख्त निंदा की। जब लोगों ने  इस सख्ती का विरोध किया तभी पुलिस कमिश्नर ने पुलिस के इस डंडे को रोकने की बात कही। 
इन संगठनों ने आरोप लगाया कि लोगों को राहत देने के नाम पर जो मोबाईल नंबर जारी किये गए हैं उनको कोई उठाता ही नहीं। गली मोहल्लों में जिन फेरी वालों को सामान पहुंचाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है वे हर चीज़ के भाव दो तीन गुना ज़्यादा वसूल कर रहे हैं। दूध में भी मिलावट निकल रही है। ऐसे में बेचारे लोग कहाँ जाएं।  क्या भूखे पेट रामायण देखी जाती है?
जो लोग हर रोज़ दिहाड़ी कर के पेट भरते थे उनकी मुसीबत सबसे ज़्यादा है? ऐसे में अगर सप्लाई की हालत सुधर भी जाये तो भी वे लोग ज़रूरत की ज़रूरी चीज़ें कहाँ से खरीदेंगे? उनको खाली जेब कौन देगा सामान?
बेशक रजिस्टर्ड मज़दूरों के लिए तीन तीन हज़ार रुपया देने की घोषणा तो की गयी है लेकिन यह भी अभी तक एलानों तक ही सीमित है। किसी के हाथ में अभी तक पैसा नहीं आया? इन गरीब लोगों को अगर तुरंत राहत न मिली तो वे लोग कोरोना से पहले भूख के कारण मर जायेंगे। ऐसी मौतें हुईं तो इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्य मंत्री ज़िम्मेदार होंगें। लोग जिस तरह दिल्ली से 400-700 किलोमीटर पैदल अपने गाँवों की तरफ पैदल ही निकल पड़े हैं उसे देख कर अनुमान लगाना कठिन नहीं कि सरकारों ने उनके लिए क्या किया है। मुंबई, पटियाला, दिल्ली हर तरफ बुरी हालत है। ऐसे में सरकारें सिर्फ ब्यान दे रही हैं। टीवी पर रामायण दिखाने की घोषणा कर रही हैं। 
जम्होरी अधिकार सभा पंजाब की तरफ से प्रोफेसर ए के मलेरी-प्रोफेसर जगमोहन सिंह, इंकलाबी केंद्र पंजाब और तर्कशील सोसायटी की तरफ से जसवंत जीरख-सचदेवा,  जमहूरी किसान सभा की तरफ से रघबीर सिंह बैनीपाल और प्रोफेसर जैपाल सिंह, इंकलाबी मज़दूर यूनियन की  सुरिंदर सिंह, मोलडर एंड स्टील वर्कर्ज़ यूनियन की तरफ से हरजिंदर सिंह, महा सभा लुधियाना की तरफ से रिटायर्ड कर्नल-जे एस बराड़, नौजवान सभा ककी तरफ से राकेश आज़ाद,  संगठन की तरफ से गलर चौहान ने मांग की है कि हर वर्ग के मज़दूरों को आने वाले तीन तीन महीनों के लिए नगदी, राशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध किया जाये। इस मकसद का पत्र डिप्टी कमिश्नर लुधियाना की तरफ से मुख्य मंत्री को भेजा गया है। समाज के समृद्ध लोगों को भी आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों की सहायता के लिए आगे आने को कहा गया है।
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राशन वितरण को लेकर जामा मस्जिद का ऐतिहासिक फैसला

28th March 2020 at 3:34 PM
सामग्री बांटते समय किसी जरूरतमंद की फोटो नहीं लेंगे:शाही इमाम 
लुधियाना जामा मस्जिद में गरीब परिवारों को राशन बांटने के दूसरे चरण की तैयारी करते हुए कार्यकर्ता
लुधियाना: 28 मार्च 2020:(कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 
शहर की दाना मंडी में केंद्र सरकार के खिलाफ 39 दिन तक शाहीन बाग आंदोलन चलाने वाले जामा मस्जिद के कार्यकर्ता अब सभी वैचारिक मतभेद भुला कर शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की अध्यक्षता में कोरोना वायरस संकट में इंसानियत को बचाने के लिए किए जा रहे संघर्ष में भी मोर्चा संभाल चुके हैं। 
नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने बताया कि बीते एक सप्ताह से जरुरतमंद परिवारों में राशन बांटने के बाद अब जामा मस्जिद से राशन बांटने का दूसरा चरण शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जामा मस्जिद का पहले चरण में 213 परिवारों तक एक महीने का राशन पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी यह कोशिश है कि रोज खाना बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाली सभी चीजें मजदूरों, रिक्शा चलाने वाले और बहुत ज्यादा मजबूर परिवारों को उपलब्ध करवाई जाऐ। नायब शाही इमाम ने बताया कि जामा मस्जिद के कार्यकर्ता अब दूसरे चरण में जहां सामान पैक कर रहे हैं वहीं पर संपर्क साधने वाले लोगों का पता लगाकर वहां पहुंचने की तैयारी भी कर रहे हैं। 
शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने ऐलान किया कि सामग्री बांटते समय किसी भी जरुरतमंद की फोटो नहीं ली जाएगी ताकि किसी के भी आत्म सम्मान को ठेस ना लगे। शाही इमाम ने कहा कि सर्वधर्मों के लोग मिलकर ही कोरोना वायरस संकट का मुकाबला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय है कि पूरे भारत वंश के लोग अपने राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों को भुलाकर इंसानियत को बचाने के लिए एकजुट हो जाएं। 
शाही इमाम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार व पंजाब की कैप्टन सरकार इस संकट के समय में जो भी काम कर रही है वो जनता के हित में है। उन्होंने कहा कि आज देश भर के धार्मिक स्थानों से गरीबों का पेट भरने के लिए जो प्रयास किए जा रहे है इसे भी इतिहास में याद रखा जाएगा। शाही इमाम ने पंजाब के सभी बड़े उद्योगपति घरानों से अपील की है कि वह अपने अपने संस्थानों द्वारा गरीबों के लिए दो वक्त की रोटी का लगातार प्रबंध करें। उन्होंने कहा की विश्व भर में आए हुए इस कोरोना संकट से सबसे पहले भारतीय मुक्त हो ऐसी हमारी दुआ है। शाही इमाम ने कहा कि इंसान लाचार है सबसे बड़ी ताकत खुदा की है इसलिए हम सब सभी प्रयासों के साथ-साथ यह ना भूले की इस विश्वव्यापी संकट से खुदा की मदद के बगैर नहीं निकला जा सकता। इस लिए हमें अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए भलाई के काम जारी रखने हैं। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने समाज सेवी संस्थाओं से यह भी अपील की कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के अलावा समाज में ऐसे परिवार भी होते हैं जो कि अपने आत्म सम्मान की वजह से किसी के सामने अपनी जरूरत का इजहार नहीं करते इस लिए सभी सामाजिक संस्थाऐ विशेष रूप से इस बात की तरफ ध्यान दें कि जो लोग अपनी प्रतिष्ठा की वजह से लाइन में लगकर या फोटो खिंचवा कर राशन लेने से कतरा रहे हैं उन्हें छुपकर खामोशी से राशन पहुंचाने का काम किया जाए।
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Friday, March 27, 2020

पुलिस डण्डे खड़काने छोड़कर विदेशो से आये लोगो को ढूंढे-अनीता शर्मा

27th March 2020 at 2:10 PM
विदेशी नागरिकों को ढूंढ कर अलग करने का काम तुरंत हो-बेलन ब्रिगेड 
लुधियाना: 27 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
हालांकि पुलिस ने ऊपर से आये आदेशों के बाद डंडे इस्तेमाल बहुत ही कम कर दिया है फिर भी बेकन ब्रिगेड को लगता है कि पुलिस सड़कों पर नाहक ही डंडे खड़का रही है। इसी बीच कोरोना को अभी तक मज़ाक समझने वाले लोगों ने सड़कों पर निकलने और सट कर खड़े होने की आदतें नहीं बदली। ऐसे लोगों का इलाज डंडे से ही सम्भव था लेकिन डंडे के प्रयोग से पुलिस की सख्त आलोचना भी हुई। 
बेलन ब्रिगेड की प्रमुख अनीता शर्मा ने कहा है कि कोरोना वायरस एक छूत की बिमारी है यह चाइना से सारी दुनिया में फैली है और जो लोग विदेशों से भारत आ रहे है वे लोग ही इस बिमारी को फैला रहे है।  पंजाब में हज़ारों लोग मार्च के महीने विदेशो से आये है और कितने लोगो को कोरोना है इसकी किसी को खबर नहीं है। इस समय यही जांच सर्वप्रथम होनी चाहिए। 
बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस कोई डेंगू नहीं है क्यूंकि  डेंगू तो  हमारे गली मुहल्लों में मच्छरों से खुद हमारे शरीर में पैदा होकर हमे रोगी बना देता है लेकिन कोरोना बिमारी विदेशों  से आ रही है। पिछले एक दो महीने में जितने भी विदेशी लोग भारत में आये है उन लोगो पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए ताकि इस महामारी को रोका जा सके। 
इस गंभीर हालत में भी पंजाब में इसके विपरीत हो रहा है।  कर्फ्यू की आलोचना करते हुए बेलन ब्रिगेड प्रमुख ने कहा कि सरकार ने कर्फ्यू लगा कर जनता को घरो में लॉक कर  दिया।  इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सड़कों चौराहो पर नाके लगा कर आम जनता को  डण्डे व वर्दी का रौब दिखाकर उनके मौलिक अधिकारों का बिना सोच समझ के हनन कर रही है। 
अनीता  शर्मा ने आगे कहा कि सरकार को चाहिए कि सारे सरकारी मुलाज़िमों व पुलिस जो सड़कों पर डण्डे खडका रही है इन सब को 48 घण्टे का समय दिया जाए कि वे हर गली मोहल्ले गाँव में  जा कर एक एक घर को चैक करे और जहां कही भी कोई विदेश से आया नागरिक उन्हें मिलता है तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।स्क्रीनिंग में आने वाले हर नागरिक का तुरन्त मेडिकल कराकर उसे अकेला रखा जाए। 
कोरोना वायरस पर काबू पाने का यही सबसे बड़ा हथियार होगा। इस काम में देरी होने से यह खतरा कई गुना बढ़ जायेगा।
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Corona:ओपीडी सेवाएं तुरंत बहाल की जाएं-डा. अरुण मित्रा

27th March 2020 at 11:32 AM 
मनमर्ज़ी की दवाओं और घरेलू टोटकों से हो सकता है नुकसान 
लुधियाना: 27 मार्च 2020: (एम एस भाटिया//कार्तिका सिंह)::
कोरोना संकट के चलते हालात बहुत नाज़ुक और विकराल बन गए हैं। लोग स्वास्थ्य  समस्यायों को ले कर बहुत अजीब सी उलझनों में हैं। ज़रा से छींक आ जाये या ज़रा सी खांसी तो उन्हें लगता है कि कहीं उन्हें कोरोना तो नहीं हो गया? इसी तरह  दर्द हो तो आशंका लगती है कि कहीं कोरोना का फ़्लू तो नहीं हुआ? ऐसे में बहुत से लोग डर के मारे डाक्टरों के पास भी नहीं जाते कि वहां से कहीं वहां से उन्हें आईसोलेशन हाऊस में भेज दिया जाये। आशंकाओं से घिरे हुए लोग या तो घरेलू टोटकों का सहारा लेते हैं या फिर मन मर्ज़ी की दवाओं का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इससे उनकी स्वास्थ्य मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में डाक्टर अरुण मित्रा ने बहुत पते की बात कही है। उन्होंने कहा है छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी सेवाएं तुरंत चालू करके ही लोगों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में राहत दी जा सकती है। गौरतलब है कि यह मांग उठाने वाले डा. अरुण मित्रा आईपीडी के वाईस प्रेजिडेंट भी हैं। आईपीडी अर्थात इंडियन डाकटरज़ फॉर पीस एंड डिवेलपमेंट लम्बे समय से  भेदभाव के मानवता के भले के लिए सक्रिय है। 
डा. अरुण मित्रा ने कहा कि कोरोना संकट के चलते आम लोग बहुत ही मुश्किलों में हैं। सरकारी और गैर सरकारी कोशिशों के बावजूद आम लोगों तक वह राहत नहीं पहुंच रही जैसा कि ज़रूरत है।  राशन के साथ साथ मुख्ख समस्या स्वास्थ्य सबंधी दिक्क्तों की भी हैं। कोरोना से डरे हुए लोग बेहद डर और दुविधा में हैं। गली मोहल्लों में उनके आसपास न कोई अस्पताल खुला है और न ही कोई क्लिनिक। ऐसे में लोग जो भी दवा अपने या पड़ोसी के घर में पड़ी मिलती है उसे ही लेने लगते हैं। कोई डाक्टर की पर्ची मिल भी जाये तो भी उन्हें बहुत दूर जाना पड़ता है। ऐसी हालत में यही उचित होगा कि गल्ली मोहल्लों के क्लिनिक भी तुरंत खोले जाएं और वहां ओपीडी जैसी  तुरंत शुरू की जाएं।    
डाक्टर मित्रा ने इस संबंध में एक प्रेस बयान जारी करते हुए सरकार से भी मांग की कि ओपीडी सेवाएं तुरंत शुरू करने की आज्ञा सभी सबंधित क्लीनिकों को दी जाये। छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों में ओपीडी सेवाएं शुरू करके लोगों को बहुत बड़ी राहत दी जा सकेगी।
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Monday, March 23, 2020

कर्फ्यू के दौरान छूट अब बुधवार 25 मार्च को ही मिलेगी

Monday: 23rd March 2020 at 9:38 PM 
मंगलवार 24 मार्च को रहेगा मुकम्मल कर्फ्यू 
लुधियाना: 23 मार्च 2020: (*पंजाब स्क्रीन टीम)::
नोवेल कोरोना वायरस अर्थात कोविड-19 का खतरा लगातार गंभीर बना हुआ है लेकिन हमारे लोग अभी तक भी इसे  रहे। मौत पूरी दुनिया के सिर पर मंडरा रही है।  राज्य सरकारों के साथ साथ केंद्र सरकारें भी गहरी चिंता में हैं। लोगों को बचने के लिए तरह तरह के प्रयास भी किये जा रहे हैं लेकिन लोग इस बेहद नाज़ुक मौके को भी पिकनिक की तरह ले रहे हैं। गलियों और सड़कों पर ही ही हू हू  करते हुए बाईक पर चक्कर लगा रहे हैं। अपने अपने दरवाज़े पर खड़े ऊंची ऊंची आवाज़ों में बातें कर रहे हैं। कई लोग तो ताश भी खेल रहे हैं। अब सरकार अकेली क्या करे? बहुत मुश्किल है इस देश को विकास के मार्ग पर ले जाना। कर्फ्यू की उलंघना करने  वाले ऐसे लोगों  के साथ अब पुलिस ने मजबूर हो कर  सख्ती भी शुरू। पहले प्यार से भी समझाया लेकिन आम जनता समझने का नाम हिनहिं ले रही।  सख्ती दिखते हुए इन्हें कान पकड़ाने भी शुरू किये और इनके गले में तख्तियां भी लटकायीं जिन पर लिखा था,"मैं समाज का दुश्मन हूं।  मैं घर पर नहीं रह सकता"। इस तरह की कुछ तस्वीरों को जानेमाने समाजसेवी और शायर गुरचरण नारंग साहिब ने वाटसआप पर भी शेयर किया है। 
इसी बीच कर्फ्यू के दौरान मंगलवार की ढील को संशोधित किया गया है। अब बुधवार 25 मार्च 2020   मिलेगी। ढील का समय सुबह 6 बजे से सुबह 9 बजे अर्थात तीन घंटे तक का होगा। यह फैसला चंडीगढ़ में भी कर्फ्यू लगाए जाने के कारण लिया गया है।  विश्व भर में फैली कोरोना वायरस को रोकने के लिए सरकार के आदेशों-निर्देशों पर ही काम किया जा रहा है। जिला मिजस्ट्रेट-कम-डिप्टी कमिश्नर प्रदीप कुमार अग्रवाल ने 23 मार्च 2020 कर्फ्यू लगा दिया था। इस कर्फ्यू में आम लोगों को ज़रूरत की चीज़ें खरीदने के लिए सुबह 6 बजे से सुबह 9 बजे तक  गयी थी लेकिन अब संशोधित फैसले के मुताबिक यह ढील बुधवार 25 मार्च की सुबह को ही मिल सकेगी। मंगलवार को मुकम्मल कर्फ्यू रहेगा। उलंघन करने वालों के साथ पूरी सख्ती होगी।  
इसकी जानकारी देते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि अब 24  मार्च की बजाये 25 मार्च की सुबह को ही ढील होगी।  इस दौरान लोगों के रवैये को बहुत बारीकी से नोट किया जायेगा।  मंगलवार 24  मार्च को पूरी सख्ती होगी। कोई भी अपने घर से बाहर न निकले। इस दौरान सभी को प्रशासन के आदेशों निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। उलंघन के मामलों को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। 
मुसीबत के इस समय में यह भी देखा गया कि लोगों का आपसी भाईचारा भी बढ़ा है। लोग अब मोबाइल पर एक दुसरे का हाल पूछने में लगे हैं। गली मोहल्ले में भी बहुत ही स्नेह और सम्मान से एक दुसरे से दुआ सलाम कर रहे हैं। लगता है स्वार्थी और निष्ठुर हो चुके समाज में कोरोना ने बहुत ही साकारत्मक तब्दीली भी दिखाई है।
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Curfew Relaxation Starts From 25th March Wednesday

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