Tuesday, February 19, 2019

मोदी जी सत्ता के मोह में आप सब भूल गए-वरुण मेहता

 Feb 19, 2019, 2:16 PM
श्री हिन्दू तख्त ने लिखा प्रधान मंत्री को सैनिकों की शहादत पर पत्र 
लुधियाना: 19 फरवरी 2019: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
श्री हिन्दू तख्त के प्रमुख प्रदेश प्रचारक वरुण मेहता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को पत्र लिख कर पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद होने वाले सैनिको की शहादत से सबक लेकर सुरक्षाबलों को आंतकवाद के खात्मे के लिए विशेष अधिकार देने की मांग की उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसी घटनाएं सामने आई कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों को सरेआम शरारती तत्वों द्वारा मारपीट कर उनका अपमान किया गया आंतकियो को मारने वाले सेना व अर्ध सैनिक बलो के खिलाफ केस दर्ज किए गए भाजपा ने सत्ता की लालसा में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के इशारों पर चलते हुए ऑटोमेटिक रायफल देने के बावजूद सुरक्षा बलों के हाथ बांध दिए जिसका खमियाज़ा हमे शहीदों के खून से देना पड़ रहा है।

मेहता ने उन्हें याद दिलाते हुए  कहा कि पिछले आम चुनावों के दौरान आपने आंतकवाद के खात्मे को लेकर बड़ी बड़ी बातें की लेकिन अफसोस सत्ता के मोह में आप सब भूल गए।
मोदी जी आपने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जन्मदिन पर पाकिस्तान जाकर उन्हें बधाई देकर व पंजाब के मंत्री नवजोत सिधु ने मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण में जाकर 125 करोड़ देशवासियों के सिर को झुका दिया है।
मेहता ने पत्र में आंतकवाद के खात्मे को लेकर सेना व अन्य सुरक्षा बलों के खिलाफ जम्मू कश्मीर/पंजाब/मणिपुर/असम में मानव अधिकारों के हनन के नाम पर दर्ज केसों को तत्काल खारिज कर उन्हें खुली छूट देने की मांग की मेहता ने कहा पंजाब में डेढ़ दशक तक आंतकवाद रहा लेकिन पंजाब पुलिस के बहादुर अधिकारियों व जवानों ने निडरता से उसे कुचल दिया लेकिन केंद्र सरकार के इशारों पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल दौरान पंजाब के अधिकारियों के विरुद्ध सीबीआई ने झूठे केस दर्ज कर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया जोह आज़तक चल रहा है उसी के नतीजे है कि पिछले कुछ समय से पंजाब में पूण अलगावादी ताकते सक्रिय हो रही है मेहता ने लिखा कि श्री हिन्दू तख्त वहाँ सेना व सुरक्षा बलों को खुले तौर पर अपने ढंग से आंतकवाद का खात्मा करने की वकालत करता है। 

Thursday, January 31, 2019

क़ानूनी लफड़ों के डर से किसी घायल को सड़क पर न छोड़ें

लुधियाना लीगल सर्विसिस अथॉरिटी ने चलाया इस आश्य का अभियान 
लुधियाना: 31 जनवरी 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
सड़क हादसों ने जितनी मानवीय जानें ली हैं उतनी शायद न किसी हिंसा ने ली हैं और न ही किसी बिमारी ने। हर रोज़ कहीं न कहीं कोई न कोई सड़क हादसा किसी न किसी की जान लील जाता है। इनमें से कई लोग बच भी सकते थे लेकिन वे नहीं बच पाते क्यूंकि कोई भी उन्हें वक़्त रहते अस्पताल में नहीं पहुंचाता। ज़रा अनुमान लगाइये क्या अनुभव किया होगा उन घायल लोगों ने जिन को लोग देखते हैं, वीडियो बनाते हैं और हँसते हुए पास से निकल जाते हैं। कोई उन्हें अस्पताल नहीं पहुंचाता। सड़क पर तड़प रहे इन घायल लोगों में से कोई आपका अपना भी हो सकता है। कोई रिश्तेदार या कोई बहुत ही प्यारा सा मित्र। उसकी मौत केवल इस लिए हो जाये क्यूंकि उन्हें समय रहते डाक्टरी सहायता नहीं मिल सकी। पता लगने पर आपके दिल पर क्या गुज़रेगी? रहमदिल लोग तो पशु पंक्षियों को भी डाक्टरी सहायता दे कर उनकी जान बचा लेते हैं क्या आप और हम मानव हो कर किसी मानव को भी नहीं बचाएंगे?
मानवीय जीवन के अनमोल होने का अहसास करते हुए खुद आगे बढ़ कर आई हैं डाक्टर गुरप्रीत कौर जो कि यहाँ लुधियाना लीगल सर्विसिस अथॉरिटी में सी जे एम कम सचिव के पद पर नियुक्त हैं। उनकी इच्छा है कि जो संवेदना उनके दिल में जाएगी है वही संवेदना अन्य सभी के दिल में भी उठे। हर रोज़ सड़क हादसों में उजड़ रहे घरों को बचाने के लिए हमें खुद ही आगे आना होगा।  इस मानवीय भावना को एक मिशन बना कर डाक्टर गुरप्रीत कौर कभी जगराओं में मार्च आयोजित करवाती हैं और कभी शहर के डाक्टरों से बात करती हैं। 
हाल ही में हुए एक सेमिनार में मैडम गुरप्रीत कौर ने कहा कि डाक्टरों को भी इस  कर्तव्य पहचान कर अपना योगदान देना होगा। 
इस मुद्दे पर नीतिगत जानकारी देते हुए सीजेएम मैडम ने सेमिनार में बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी घायल को लेकर अस्पताल  तो उसे कसी भी मुद्दे पर ज़रा सा भी परेशान न किया जाये। न तो उससे कोई खर्चा माँगा जाये और न ही उसे इस सड़क हादसे का गवाह बनने के लिए दबाव डाला जाए। अस्पताल सरकारी हो या प्राईवेट।  घायल की जान बचाना ही प्रथम कार्य होना चाहिए। जो व्यक्ति उस घाल का सहायक बन कर उसे ले कर अस्पताल आया उसका धन्यवाद भी किया जाना चाहिए। डाक्टर गुरप्रीत कौर ने स्पष्ट किया कि इस मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना सुनिश्चित करना आवश्यक बनाया जाये। इस सेमिनार में सरकारी डाक्टरों के साथ साथ प्राइवेट डाक्टर भी थे।  
सेमिनार में एक एक पहलु पर विस्तृत चर्चा हुई। इस संबंध में एक एक मुद्दे पर विचार किया गया। घायलों को अस्पताल पहुँचाया तो कोई क़ानूनी लफड़ा खड़ा हो जायेगा-इस धारणा को समाप्त करने के लिए गंभीरता से विचार हुआ। डाक्टर गुरप्रीत कौर ने शवसन दिया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। हाँ अगर आप किसी घायल को अस्पताल पहुंचाते हैं तो आपको महसूस होगा कि आज आप ने सच्ची पूजा की है। 

Wednesday, January 23, 2019

ज़िंदगी का इंद्रधनुष नज़र आया रवि की फोटो प्रदर्शनी में

पंजाब कला परिषद ने आयोजित की आर्य कालेज में यह प्रदर्शनी 
लुधियाना: 23  जनवरी 2019 (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन)::
बरसों पहले सन 1955 में एक फिल्म आई थी--बारांदरी। इस फिल्म का एक गीत था:  
तस्वीर बनाता हूं; तस्वीर नहीं बनती!
इक ख्वाब सा देखा है; ताबीर नहीं बनती!
दशकों तक यह गीत लोगों के दिलों हुए दिमागों पर छाया रहा। बरसों तक उन लोगों की मनोस्थिति को व्यक्त करता रहा जिनसे न तो अपने ख्यालों की तस्वीर बन  पा रही थी और न ही देखे हुए ख्वाबों को ताबीर समझ आ रही थी। इसी बीच बहुत सी अच्छी तस्वीरें भी सामने आईं और पेंटिंग्स भी जिन्हें देख कर लगा था कि शायद तस्वीर बन सकती है। शायद अपने किसी ख़्वाब की ताबीर भी समझ में आ सकती है। कैमरे और चित्रकारी के बहुत से फनकार भी सामने आते रहे। फिर शुरू हुआ शोर-शराबे और भागदौड़ का व्यवसायिक युग। पैसे का वह युग जिसमें एक पुरानी कहावत ज़ोरशोर से सत्य होने लगी कि बाप बड़ा न भईया-सबसे बड़ा रुपईया!
इस युग में जज़्बात भी लुप्त होने लगे और संवेदना भी। न किसी ख़्वाब का कोई मूल्य रहा न ही किसी ताबीर की ज़रूरत। तस्वीर तो बस ड्राईंग रूम में लटकाने की ही ज़रूरत रह गयी। महज़ एक डेकोरेशन पीस। इसके बावजूद कुछ संवेदनशील लोग हमारे दरम्यान मौजूद रहे। बहुत से कलाकार भी मुनाफे की अंधी चाहत से बचे रहे। यही वे कलाकार थे जो लोगों के ख्यालों की तस्वीर बनाते रहे वह भी बिना किसी मुनाफे की अपेक्षा के। यही वे लोग थे जो लोगों को उनके देखे ख्वाबों की ताबीर भी समझाते रहे।
इसका अहसास हुआ आर्य कालेज में लगी तस्वीरों की एक यादगारी प्रदर्शनी को देख कर। इस आयोजन में लोगों को लगा कि यह तो हमारी ही तस्वीर है।  हमारे घर की तस्वीर। हमारे गाँव की तस्वीर। हमारे बचपन की तस्वीर।  हमारे सपनों की तस्वीर।  हमारे ख्वाबों की ताबीर।
आम, साधारण, गरीब और गुमनाम से लोगों को इन यादगारी तस्वीरों में उतारा हमारे आज के युग के सक्रिय फोटोग्राफर रविन्द्र रवि ने। वही रवि जिसे आप पंजाबी भवन में पंक्षियों के पीछे भाग भाग कर तस्वीरें उतारते देख सकते हैं। फूलों की खूबसूरती को कैमरे में कैद करते हुए देख सकते हैं। फूलों के साथ तितलियों और भंवरों की वार्तालाप को कैमरे के ज़रिये सुनने का प्रयास करते हुए देख सकते हैं। 
उस समय रवि के चेहरे पर जो रंग होता है वह रंग किसी साधना में बैठे साधक के रंग की याद दिलाता है। किसी अलौकिक शक्ति से जुड़े समाधि में लीन किसी असली संत के चेहरे पर नज़र आते नूर की याद दिलाता है। काम में डूबना क्या होता   है इसे रवि का काम देख समझा जा सकता है। सभी अपनी बातों में या खाने पीने में मग्न होते हैं उस समय रवि अपने कैमरे से या तो प्राकृति से बात कर रहा होते है या फिर किसी  ख्वाबों की ताबीर को किसी कैमरे में उतार रहा होता है। 
इस प्रदर्शनी में रवि की फोटोग्राफी के सभी रंग थे। इन रंगों में जो रंग सब से अधिक उभर कर सामने आया वह रंग था बन्जारों की ज़िंदगी का रंग। गांव की ज़िंदगी का रंग। ममता का रंग। जागती आंखों से देखे जाने वाले रंग। उन सपनों के टूटने से पैदा होते दर्द का रंग। कुल मिला कर यह ज़िंदगी का इंद्र धनुष था। जिसमें दर्द का रंग भी नज़र ा रहा था और ख़ुशी का रंग भी। किस किस को किस किस तस्वीर का रंग अच्छ लगा इसकी चर्चा हम अलग पोस्ट में  कर रहे हैं।

Monday, January 21, 2019

नाटक “राजगति” 23 जनवरी,2019,बुधवार रात 8 बजे मुंबई में

शिवाजी नाट्य मंदिर में मंचित होगा मंजुल भारद्वाज का लिखा नाटक 
लुधियाना//मुम्बई: 21 जनवरी 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::
पहले सिनेमा--फिर फ़िल्में और उसके बाद केबल का प्रचलन। तकनीकी विकास के इस दौर ने सबसे बुरा असर डाला मंच की कला पर। नाटकों का का मंचन कम से कम होता चला गया। नाटक को आंदोलन का रूप देने वाले "इप्टा" जैसे संगठन गुमनामी के दायरे में सिमटते चले गए। उनका अस्तित्व केवल उनके राष्ट्रिय आयोजनों या उन पर होने वाले हमलों की खबरों से ही महसूस होता। तकरीबन तकरीबन यही हाल "जन नाटय मंच" का भी हुआ। सुबह से लेकर रात केवल दाल रोटी  उलझा दिए गए समाज में सबसे अधिक शिकार बने नाटकों की दुनिया के कलाकार, लेखक, निदेशक और अन्य तकनीकी स्टाफ के सदस्य। राजनैतिक दलों के शिकंजे ने भी नाटकों के अभियान को लुप्त जैसा ही कर दिया।  इक्का दुक्का कलाकारों ने नाटकों केमाभियाँ को जीवंत रखने की कोशिश भी की लेकिन उन्हें दर्शक नहीं मिले। ऐसे में उभर कर सामने आए मंजुल भारद्धाज। कुछ बातों का संकल्प- की तीखी आलोचना भी लेकिन साथ ही साथ रंगमंच को फिर से हर दिल तक ले जाने का प्रयास भी।  इसी प्रयास के अंतर्गत हो रहा है "राजगति" का मंचन।   
“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” अभ्यासक एवम् शुभचिन्तक आयोजित नाटक “राजगति” 23 जनवरी,2019,बुधवार  रात 8 बजे “शिवाजी नाट्य मंदिर” दादर(पश्चिम), मुंबई में मंचित होगा! सुप्रसिद्ध रंग चिन्तक मंजुल भारद्धाज लिखित और निर्देशित नाटक “राजगति” समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना जगाता है,जिससे आत्महीनता के भाव को ध्वस्त कर ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।“
मंचन का विवरण इस प्रकार है:
कब : 23 जनवरी,2019,बुधवार  रात 8 बजे
कहाँ : “शिवाजी नाट्य मंदिर”, दादर(पश्चिम), मुंबई
कलाकार:अश्विनी नांदेडकर, योगिनी चौक, सायली पावसकर, कोमल खामकर, तुषार म्हस्के,स्वाति वाघ,हृषिकेश पाटिल,प्रियंका काम्बले,प्रसाद खामकर और सचिन गाडेकर।
अवधि :120 मिनट
नाटक 'राजगति', : “नाटक राजगति ‘सत्ता, व्यवस्था, राजनैतिक चरित्र और राजनीति’ की गति है. राजनीति को पवित्र नीति मानता है.राजनीति गंदी नहीं है के भ्रम को तोड़कर राजनीति में जन सहभागिता की अपील करता है. ‘मेरा राजनीति से क्या लेना देना’ आम जन की इस अवधारणा को दिशा देता. आम जन लोकतन्त्र का प्रहरी है. प्रहरी है तो आम जन का सीधे सीधे राजनीति से सम्बन्ध है.समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना जगाता है,जिससे आत्महीनता के भाव को ध्वस्त कर ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।“
नाटक “राजगति” क्यों ?
हमारा जीवन हर पल ‘राजनीति’ से प्रभावित और संचालित होता है पर एक ‘सभ्य’ नागरिक होने के नाते हम केवल अपने ‘मत का दान’ कर अपनी राजनैतिक भूमिका से मुक्त हो जाते हैं और हर पल ‘राजनीति’ को कोसते हैं ...और अपना ‘मानस’ बना बैठे हैं की राजनीति ‘गंदी’ है ..कीचड़ है ...हम सभ्य हैं ‘राजनीति हमारा कार्य नहीं है ... जब जनता ईमानदार हो तो उस देश की लोकतान्त्रिक ‘राजनैतिक’ व्यवस्था कैसे भ्रष्ट हो सकती है ? .... आओ अब ज़रा सोचें की क्या बिना ‘राजनैतिक’ प्रकिया के विश्व का सबसे बड़ा ‘लोकतंत्र’ चल सकता है ... नहीं चल सकता ... और जब ‘सभ्य’ नागरिक उसे नहीं चलायेंगें तो ... बूरे लोग सत्ता पर काबिज़ हो जायेगें ...और वही हो रहा है ... आओ ‘एक पल विचार करें ... की क्या वाकई राजनीति ‘गंदी’ है ..या हम उसमें सहभाग नहीं लेकर उसे ‘गंदा’ बना रहे हैं हम सब अपेक्षा करते हैं की ‘गांधी , भगत सिंह , सावित्री और लक्ष्मी बाई’ इस देश में पैदा तो हों पर मेरे घर में नहीं ... आओ इस पर मनन करें और ‘राजनैतिक व्यवस्था’ को शुद्ध और सार्थक बनाएं ! समता,न्याय,मानवता और संवैधानिक व्यवस्था के निर्माण के लिए ‘राजनैतिक परिदृश्य’ को बदलने की चेतना को जगाएं ,ताकि आत्महीनता का भाव ध्वस्त हो और ‘आत्मबल’ से प्रेरित ‘राजनैतिक नेतृत्व’ का निर्माण हो।
पंजाब में नाटय को समर्पित कुछ विशेष लोग 
“थिएटर ऑफ़ रेलेवंस” नाट्य दर्शन विगत 26 वर्षों से फाशीवादी शक्तियों से जूझ रहा है। भूमंडलीकरण और फाशीवादी ताकतें ‘स्वराज और समता’ के विचार को ध्वस्त कर समाज में विकार पैदा करती हैं जिससे पूरा समाज ‘आत्महीनता’ से ग्रसित होकर हिंसा से लैस हो जाता है. हिंसा मानवता को नष्ट करती है और मनुष्य में ‘इंसानियत’ का भाव जगाती है कला. कला जो मनुष्य को मनुष्यता का बोध कराए...कला जो मनुष्य को इंसान बनाए! “थिएटर ऑफ़ रेलेवंस”... एक चौथाई सदी यानी 26 वर्षों से सतत सरकारी, गैर सरकारी, कॉर्पोरेटफंडिंग या किसी भी देशी विदेशी अनुदान से परे. सरकार के 300 से 1000 करोड़ के अनुमानित संस्कृति संवर्धन बजट के बरक्स ‘दर्शक’ सहभागिता पर खड़ा है हमारा रंग आन्दोलन.. मुंबई से मणिपुर तक!
लेखक –निर्देशक : रंग चिन्तक मंजुल भारद्वाज रंग दर्शन थिएटर ऑफ रेलेवेंस' के सर्जक व प्रयोगकर्त्ता हैं, जो राष्ट्रीय चुनौतियों को न सिर्फ स्वीकार करते हैं, बल्कि अपने नाट्य सिद्धांत "थिएटर आफ रेलेवेंस" के माध्यम से वह राष्ट्रीय एजेंडा भी तय करते हैं।  अब तक 28 से अधिक नाटकों का लेखन—निर्देशन तथा अभिनेता के रूप में 16000 से ज्यादा बार राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं!
दर्शक सहयोग और सहभागिता से आयोजित इस मंचन में आपके सक्रिय सहयोग और सहभागिता की अपेक्षा !
अच्छा हो यदि इस नाटक का मंचन देश के सभी भागों में हो सके। इस मकसद के लिए स्थानीय नाटय मंडलियों को एक प्रोफेशनल सोच सामने रखते हुए आगे आना हगा तांकि नाटय  मंडलियों के कलाकारों का आवश्यक खर्चा भी निकल सके। 
लुधियाना में डाक्टर अरुण मित्रा, पत्रकार एम एस भाटिया, मैडम सपनदीप कौर, त्रिलोचन सिंह और इप्टा से जुड़े पुराने कलाकार प्रदीप शर्मा भी सक्रिय  हैं।  चंडीगढ़-मोहाली में प्रगतिशील लेखक कंवर, अमन भोगल, संजीवन सिंह, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में इंद्रजीत रूपोवालिया, मोगा में विक्की माहेश्वरी सहित बहुत से लोग सक्रिय हैं। अच्छा हो एक ज़ोरदार हल्ला जन विरोधी साज़िशों पर बोला जा सके। शायद सआदत हसन मंटो और सफदर हाशमी की अंतरात्मा को इससे शांति मिल सके। 

Sunday, December 23, 2018

पास्टर सुलतान मसीह की याद में डा. रमेश मंसूरां का निशुल्क आई कैंप

जहां पास्टर की हत्या की गयी वहां पर फिर उमड़ा प्रेम का संदेश 
लुधियाना: 23 दिसंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
बेहद लोकप्रिय थे पास्टर सुल्तान मसीह। हर किसी को हमेशां अपने  लगते। उनकी आवभगत भी कमाल की थी। बातें करते हुए जब वह ताली या चुटकी बजाते तो उनके स्टाफ को मालूम हो जाता कि इस मेहमान को क्या पसंद है। चाय या काफी? मीठा या नमकीन? पकौड़े या समोसे? उनकी आवभगत का अंदाज़ बिलकुल निराला था। 
किसी की सहायता करते वक़्त भी वह किसी को कानोकान खबर न होने देते। जिसकी मदद करते उसको भी बस उसे भी मदद होने पर ही पता चलता और उसे भी कहते बस चुप रहना।  यह सब भगवान येशु ने किया। उसको कभी कमज़ोर या हल्का महसूस न होने देते। जब 15 जुलाई 2017 को उनकी बर्बर हत्या की गयी तो बहुत से लोगों को लगा कि उन के सिर से उनका सहारा उठ गया। जिस चर्च में कभी हर पल रौनक औऱ खुशियों  का माहौल बना रहता था उस पर पुलिस का पहरा लग गया। यह सब कुछ सुरक्षा के लिए ही हुआ था लेकिन अहसास में कुछ डर सा अवश्य महसूस होने लगा। उस माहौल को तोड़ने में पास्टर सुलतान मसीह के बेटे अली शा ने बहुत हिमत दिखाई। पिता से बिछड़ने का गम भूलना आसान नहीं था लेकिन चर्च की ज़िम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने खुद को सहज किया। 
आज उसी चर्च में जब आँखों की जाँच का निशुल्क कैम्प लगा तो ऐसे महसूस हुआ जैसे वह प्रेम भरा पुराना माहौल फिर लौट आया हो। डाक्टर रमेश मंसूरां की देख रेख में पुनर्जोत अभियान का स्टाफ इस मेडिकल शिविर में सक्रिय था। जहाँ कभी पास्टर सुल्तान मसीह गरीबों की ज़िंदगी में आये अंधेरों को दूर किया करते थे वहीँ आज डाक्टर रमेश का स्टाफ गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की आँखों का इलाज करके उनकी ज़िंदगी में छाये अंधेरों को दूर कर रहा था। इस मौके पर पुनर्जोत अभियान के सक्रिय स्टाफ मेंबर मंजीत कौर कई कई बार भावुक हुई। इसी तरह एक और सक्रिय सदस्य रछपाल ऋषि ने भी कई बार पास्टर सुलतान मसीह को याद किया। 
वास्तव में यह कैंप उन्हीं की याद में लगाया गया था। चर्च में लगे इस कैंप में डाक्टर रमेश के स्टाफ को पूरा सहयोग दिया चर्च के स्टाफ ने।  बहुत से लोग आये। बहुत से लोगों ने इस कैंप का फायदा उठाया। किसी के ऑपरेशन की समस्या हल हुई। किसी को आँखों के दर्द की दवा मिली। किसी ने चश्में एक नंबर बनवाया। किसी ने ऐनक निशुल्क ली। यहाँ दवाएं भी बिलकुल फ्री बांटी गयी। खानेपीने का प्रबंध चर्च की तरफ से था। कुल मिलाकर यह एक सफल कैंप था। लोगों की भीड़ को देख कर शहीद पास्टर सुलतान मसीह के बेटे और मौजूदा पास्टर अली शा ने भी संतोष व्यक्त किया। जिस जगह पर पास्टर सुलतान मसीह की हत्या की गयी थी उस जगह पर फिर से शांति और जनसेवा का संदेश इस कैंप के ज़रिये लोगों तक पहुंच रहा था। ऐसे लग रहा था जैसे पास्टर  खुद इसी कैंप में मौजूद हों और छुप कर सब कुछ देख रहे हों। 

Saturday, December 22, 2018

इस तरह हुआ था नामधारी गुरुतागद्दी के सम्बन्ध में रहस्यमय खुलासा

Dec 21, 2018, 2:07 PM
21 दिसंबर: जब श्री जीवन नगर में कायम हुई थी त्याग की मिसाल 
21 दिसंबर 2012 को त्याग का अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब श्री जीवन नगर, सिरसा में हजारों की संख्या में नामधारी संगत एकत्रित हुई पर माहौल शोकपूर्ण था क्योंकि मौका था सतगुरु जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने 13 दिसंबर 2012 को देह रूपी चोले को त्यागा था। 
श्रद्धा सुमन अर्पित करने का यह आयोजन ठाकुर दलीप सिंह जी और उनकी संगत की तरफ से किया गया था क्यूंकि श्री भैणी साहिब में रहने वाले ठाकुर उदय सिंह, जगतार सिंह आदि ने सतगुरु जगजीत सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात् भैणी साहिब पर कब्ज़ा करके पुलिस और प्राइवेट सेक्योरिटी लगवाकर पूरी तरह से प्रतिबंध लगवा दिया कि यहाँ संगत के आलावा चाहे कोई भी ऐरा-गैरा तो आ सकता है पर ठाकुर उदय सिंह के बड़े भ्राता ठाकुर दलीप और अपने सगे माता बेबे दलीप कौर को भैणी साहिब के अंदर आने की सख्त मनाही थी। यहाँ तक कि सतगुरु जी के अंतिम संस्कार के समय भी ठाकुर दलीप सिंह जी को अंदर आने की इजाजत नहीं मिली और अपनी मर्जी से अगले गुरु का चुनाव भी कर लिया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए श्री जीवन नगर की संगत और सतगुरु जगजीत सिंह जी के बड़े सपुत्र श्री ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ से श्री जीवन नगर इलाके में श्रद्धांजलि समागम करना पड़ा। इस समागम ने इस बात को साबित कर दिया कि जहाँ ठाकुर दलीप सिंह जी त्याग की मूरत हैं वहीं ठाकुर उदय सिंह प्रॉपर्टी और गद्दी के अभिलाषी हैं। 
                       इस समागम में एकत्रित संगत बहुत वैरागमयी अवस्था में थी क्योंकि संगत को सतगुरु जगजीत सिंह जी का बिछड़ना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इस श्रद्धांजलि समागम में बहुत बड़ा खुलासा हुआ। यह खुलासा किया डॉक्टर इक़बाल सिंह जी ने जो सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी डॉक्टर रहे। वह  आयुर्वैदिक, फिजियोथेरेपी, एक्यूपंचर  आदि तरीकों से सतगुरु जी की सेवा करते थे। 
                     इस ऐतिहासिक आयोजन को सम्बोधन करते हुए डॉक्टर इक़बाल सिंह ने गुरुता गद्दी को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2012 को जब वह सतगुरु जगजीत सिंह जी के पास अकेले बैठे उनकी सेवा का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे तो सतगुरु जी ने उनसे कहा कि मैंने तुम्हे एक बात बतानी है पर तुम मुझे वायदा करो कि यह बात किसी को पता न चले। तुमने अभी किसी से कुछ नहीं बताना। फिर किसी कपड़े में लपेटा हुआ समान मुझे थमाते हुए कहा कि जब मैं यह शरीर त्याग दूंगा तो यह अमानत बड़े बेटे दलीप सिंह जी को देनी है और सारी संगत  को यह बात बतानी है कि मेरे बाद दलीप सिंह जी को ही अपना गुरु मानें। डॉ साहिब ने वह अमानत संगत के सामने  खोल  के दिखाई।  इसमें कुछ वस्त्र के अलावा एक दस्तार, एक नारियल, पांच पैसे तांबे के व एक आसन था। डॉक्टर साहिब ने ठाकुर दलीप सिंह जी के चरणों में यह अमानत लेने की विनती की। उनके साथ सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी सेवक दीदार सिंह और पंथ के सिरमौर सूबा साहिबान भी खड़े थे। उन सभी ने भी विनती कि सतगुरु जी के हुक्म अनुसार अब आप जी ही पंथ की बागडोर सम्भालो और उन्हें दुविधा से बाहर निकालें। यह सारा दृश्य देख-सुन कर निराश हुई संगत को थोड़ी राहत मिली और सारा पंडाल जैकारों से गूंज उठा और कितनी देर गूंजता रहा। फिर एक आशा भरी नज़र से संगत ने जैसे ही ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ देखा तो सभी दंग रह गए। जब ठाकुर दलीप सिंह जी ने बड़ी ही शालीनता और विनम्रता से सतगुरु जी की भेजी हुई अमानत ले कर अपने मस्तक से लगाई फिर बहुत ही सम्मान से माता चंद कौर जी की तस्वीर के आगे रख दी। आप ने संगत को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक तरफ मेरे छोटे भाई गद्दी पर बैठे हैं दूसरी तरफ मैं गद्दी को अपना कर पंथ को विभाजित नहीं करना चाहता। मैंने पंथ को जोड़ना है। तोड़ना नहीं है। इसके आलावा इस समय माता जी पंथ की सर्वोच्च हस्ती हैं। मैंने उनके आगे यह अमानत रख दी है और मैं चाहता हूँ कि जब तक हमारी आपसी एकता नहीं हो जाती तब तक आप सभी लोग माता जी को गुरु रूप में स्वीकार करें क्योंकि माता जी सभी के लिए सम्मानीय हैं और सतगुरु जगजीत सिंह जी की धर्मपत्नी भी हैं। इस पर संगत को हौंसला नहीं हो रहा था। संगत तो इस तरह तड़प रही थी जैसे पानी के बिना मछली। पर ठाकुर दलीप सिंह जी अपने वचन पर अटल रहे और त्याग का वह महान सबूत दिया जो बेमिसाल था और वह त्याग था केवल पंथ की एकता के लिए। 
                 इसके आलावा आपके द्धारा आज भी जो प्रयत्न किए जा रहे हैं उन्हें देखकर यही प्रतीत होता है कि वे इस महान पंथक-एकता के साथ-साथ आपसी एकता व् सौहार्द्य को बढ़ावा देने के लिए निरंतर यत्नशील हैं।                                                 रिपोर्ट:: प्रितपाल सिंह खालसा--7814545781 प्रेषक:राजपाल कौर

Sunday, December 09, 2018

राम मन्दिर कानून से नहीं-शक्ति से बनेगा-ठाकुर दलीप सिंह का संदेश

9 December 2018 को 19:28 बजे किया गया (WTM by RPK)
अब श्रीराम तंबू में न रहे-भव्य मंदिर शीघ्र बने:महन्त रामदास
जालन्धर: 9 दिसम्बर 2018: (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
अरविंदर सिंह द्धारा दिल्ली से प्राप्त तस्वीर संदेश 
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर के भव्य निर्माण के लिए कोई कानून बन सकता है तो ठीक नहीं तो बिना कानून ही बनवा दीजिए क्योंकि जब श्रीराम मन्दिर गिराया था तो किस कानून के अधीन गिराया था जो बिना कानून गिराया हो वह बिना कानून ही बनेगा। सरकार गिरे या बचे कोई भी हालात बनें लेकिन भव्य निर्माण श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए हमारी नामधारी संगत पूर्णरूप से आपके साथ है। क्योंकि कानून कमजोरों के लिये होता शक्तिशालियों के लिये कोई कानून नहीं होता उक्त संदेश नामधारी समाज से सत्गुरू दलीप सिंह जी महाराज द्वारा भेजा गया था जिसे संत पलविन्द्र सिंह ने आज शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मन्दिर परिसर में आयोजित विराट धर्म सम्मेलन के दौरान पढ़कर सुनाया। संत पलविन्द्र सिंह ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 625 रियासतों को जबरदस्ती भारत में शामिल किया था वह किस कानून के अधीन किया था। इस प्रकार के महान कार्य किसी कानून के अधीन नहीं होते सरकार जो करती है वही कानून होता है। अभी मथुरा में भगवान श्री राम जी का मन्दिर और काशी में विश्वानाथ मन्दिर भी बनाना है। यह कब बनेंगे इसका सीधा स्पष्ट उत्तर है कि यदि आप सोचते हैं कि मुस्लमानों को सहिमत करके मन्दिर बनाएंगे तो वह संभव नहीं। उन्होंने केन्द्र सरकार को आग्रह किया कि वह 31 दिसम्बर से पहले श्रीराम भव्य मन्दिर बनवा दें आपकी सरकार का जो हाल हो उसकी चिंता न करें वरना अगली सरकार बनानी मुश्किल हो जायेगी। 
संदेश में यह भी कहा गया कि हरिमन्दिर साहिब पर भारतीय फौज का आक्रमण किस कानून के अधीन हुआ था। कांग्रेस के समय में इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात किस कानून के अधीन सिखों का कत्लेआम हुआ था इसलिए स्पष्ट है कि कानून वहीं होता है जो सरकार देती है। 

उन्होंने कहा कि हम नामधारी राष्ट्रवादी है भारतीय संस्कृति को मानते हैं व उसके रक्षक हैं इसलिए भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये भव्य राममन्दिर श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए।
महामण्डलेश्वर रामेश्वरदास (हरिद्वार) ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमारी भारतीय संस्कृति की आस्था आस्मिता व गौरव हैं और भारत में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मन्दिर न बनना हमें लज्जा दिलाने वाला है आज जरूरत अपनी शक्ति, सामर्थ को पहचाने की है। हिन्दू समाज लम्बे समय से श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिये संघर्षरत हैं। वर्तमान आंदोलन भी 30 वर्षों से चलाया जा रहा है। हिन्दू समाज चाहता है कि अयोध्या में भव्य राम मन्दिर बनें इससे जुड़ी सभी बाधाएं दूर हो लेकिन यह प्रतिक्षा अब लंबी हो चुकी है। 2010 में उच्चन्यायलय ने जो फैसला दिया था वह 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और जब न्यायालय से पूछा गया कि अब इसकी सुनवाई कब होगी तो कहा गया कि हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं। कब सुनना है यह न्यायालय का अपना अधिकार है लेकिन न्यायालय के इस जवाब से हिन्दू समाज अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है और यह बात समस्त हिन्दू समाज के लिये आश्चर्यजनक व वेदनापूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय को पूर्णविचार करना चाहिए यहां समाज को न्यायालय का वहीं न्यायालय को सामान्य समाज की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। यदि न्यायालय की प्राथिमकताएं बाधा बनती हैं तो सरकार को इस संबंध में उचित अध्यादेश लाना चाहिए ताकि सपष्ट हो सके कि कौन है जो हिन्दू समाज की अवहेलना कर रहा है। फिर हिन्दू निर्णय करेगा कि उसे सत्ता किसके हाथों में देनी है। 
उत्तर क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख राकेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनीति चमकाने का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि हिन्दू अब जागृत हो रहा है। अब इनको अलग-अलग जाति साम्प्रदाएं में बांटने वाले बाज़ आएं अब भारत देश पर वहीं राज करेगा जो हिन्दू समाज का सम्मान करेगा। किसी धर्म विशेष को खुश करने की नीति रखने वाले या तो राजनीति करना छोड़ जाएं अन्यथा अब जागृत हिन्दू समाज अपने निर्णय अपनी संस्कृति व समथ्र्य के अनुरूप लेकर देश को सही ढंग से चलाने के लिये भी सक्षम है। श्री राकेश जी ने कहा कि 100 करोड़ हिन्दुओं की अवहेलना करके देश की सत्ता संभालने का दम भरने वाले सभी धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक दल अपनी कार्यविधि में समयानुकुल सुधार कर लें वरना अब हिन्दू समाज उन्हें माफ करने वाला नहीं है।
इस अवसर पर धार्मिक, संकीर्तिण व पवित्र मंत्रोच्चारण के साथ गणेश वंदना व श्रीराम स्तुति के पश्चात वहां उपस्थित सभी राम भक्तों ने अयोध्या में भव्य मन्दिर निर्माण का शंखनाध करते हुए अपना सक्रिय सहयोग करने का प्रण लिया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्वामी सच्चदानंद, महामण्डलेश्वर 1008 महंत गंगा दास, महन्त रामदास,  व पूज्य संत समाज, बुद्धिजीवियों ने श्रीराम मंदिर के इतिहासिक व पौराणिक महत्व व वर्तमान दौर में उसकी सार्थकता की जानकारी देते हुए सभी रामभक्तों को इस पुनित कार्य में अपनी सक्रिय अहूति देने के लिये प्रेरित किया। 
बरागी आश्रम श्री राम मंदिर के 108 महंत रामदास ने कहा कि अब श्रीराम तंबू में न रहे, श्रीराम का भव्य मंदिर शीघ्र बनें इसके लिये संयुक्त प्रयास होना चाहिए अब इस विषय पर कोई भी राजनीति स्वीकार्य नहीं है। 
इस अवसर पर असंख्य रामभक्तों ने रामल्ला हम आएँगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का। श्री राम हमारे प्राण हैं, मन्दिर में देरी अपमान है। मन्दिर बनने वाला है, इतिहास बदलने वाला है। हर घर भगवा छाएगा, श्रीराम राज फिर आएगा। एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम। रामल्ला के वास्ते, खाली करदो रास्ते। जन्मभूमि के काम न आए, वो बेकार जवानी है। लाठी गोली खाएंगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। जिस हिन्दू का खून खोले, वो खून नहीं पानी है के गगनचूंबी उद्घोष कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद पंजाब के अर्चकमण्डल के अध्यक्ष पंडित एस.के. शास्त्री, राज गुरू पंडित अशोक मोदगिल, महंत मथुरादास, महंत राज किशोर, महंत कमलेश, दिव्य ज्योति जागृत संस्थान (नूरमहल) से स्वामी सज्जनानंद, स्वामी हरिवल्लभानंद, स्वामी नरेशानंद, स्वामी तरुणेशानंद, राष्ट्रीय संत पंडित दीन दयाल शास्त्री (अध्यक्ष विश्व मानव कल्याण मिशन), महन्त बीलराम दास , महन्त राज किशोर, महन्त सिया शरण दास, महन्त कमलेश दास, महन्त केशव दास, महन्त पवन दास,  महन्त परमेश्वारदास, महन्त श्रवण दास, महन्त बलरामदास, स्वामी धर्म विवेक जी, महन्त अशोक कुमार, काठगढ़ नवांशहर से स्वामी दयाल दास, संत बिहारी दास, संत गोपाल दास, संत सत्य नारायण, बाबा पाल जी नागी, नामधारी संत दया सिंह , संत दर्शन सिंह , संत अमरीक सिंह, संत तेजिन्द्र सिंह, संत पलविन्द्र सिंह, संत गुरूमुख सिंह, संत दर्शन सिंह, संत रणवीर सिंह, संत गुरमीत सिंह, संत सेवा राम व अन्य तपस्वी, साधक व धर्म प्रेमी उपस्थित रहे। 
श्रीराम मंदिर न्यास समिति, जालन्धर इकाई से कोई सवाल हो तो सम्पर्क नंबर है:98140-71007