Wednesday, July 19, 2017

'किसान मुक्ति यात्रा'-देश भर में चार और यात्राएँ

Wed, Jul 19, 2017 at 6:55 PM
AIKSCC के संयोजक वी एम सिंह ने की यात्रा के अगले चरण की घोषणा
नई दिल्ली: 19 जुलाई 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर किसान मुक्ति संसद आज दूसरे दिन भी जारी रहा। आत्महत्या कर चुके महाराष्ट्र के किसानों के बच्चों ने अपनी पीड़ा को एक नाटक के ज़रिए सबके सामने रखा। इस नाटक में उन लोगों ने दिखाया कि एक किसान की आत्महत्या के बाद उसके परिवार पर क्या गुज़रती है। बच्चों के इस प्रदर्शन ने दिल्ली के लोगों को झकझोर कर रख दिया।

उत्तरप्रदेश के आलू किसानों ने भी आलू के गिरते दाम के ख़िलाफ़ किसान मुक्ति संसद में अपना विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश से आलू किसानों के नेता आमिर ने कहा - "सरकार चाहती है कि हम अपनी फ़सल कोल्ड स्टॉरिज में रखें। लेकिन सच्चाई ये है कि हमारी फसल का जो दाम हमें मिल रहा है वो कोल्ड स्टॉरिज में रखने के ख़र्च से भी काफ़ी कम है। 

तमिलनाडु से आयी एक किसान की पत्नी रानी, जिसके पति को बैंक अधिकारियों ने इतना अपमानित किया कि उसने आत्महत्या कर ली, ने बताया - "बैंक के अधिकारियों ने मेरे पति से पूछा कि तुम बैंक का लोन नहीं चुका पा रहे हो तो अपनी पत्नी के कपड़े कैसे ख़रीद रहे हो। क्यूँ हमेशा ग़रीब को ही अपमानित होना पड़ता है? और, उन अमीर लोगों का क्या जो करोड़ों रुपये लेकर देश से भाग जाते हैं?"

किसान मुक्ति संसद को सम्बोधित करते हुए तमिलनाडु के किसानों के नेता ऐय्यकन्नु ने कहा - "तमिलनाडु के किसान सूखा जैसी स्थिति होने के कारण मर रहे हैं और हमारे विधायक किसानों के मुद्दों पर काम करने की बजाए अपनी सैलरी बढ़ाने की माँग लिए बैठे हैं।"

आज उन किसानों के बच्चे भी जंतर मंतर पर जमा हुए जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी, उन बच्चों ने अपनी वेदना एक लघु नाटक के माद्ध्यम से बयान की। एक बच्चा अशोक पाटिल ने अपनी व्यथा प्रकट करते हुए कहा कि बहुत सारे नेता हमारे घर हमसे मिलने आये और हमसे बहुत सारे वादे करके गए, लेकिन हमें मिला क्या? सिर्फ अगले दिन के अखबार में नेताओं के साथ छपा एक फोटो। वो हमें मदद करने आये थे या सेल्फी लेने आये थे?"

मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी किसान मुक्ति संसद में आये। वो भी किसानों की इन दो माँगों से सहमत थे कि किसानो को ऋणमुक्त किया जाए तथा उनकी आय को बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि यह समय अपनी पार्टी तथा राजनीति से ऊपर उठकर हमें किसानों के साथ न्याय के इस संघर्ष में साथ होना चाहिए।

महाराष्ट्र से आये विधायक हर्ष वर्धन सहाय ने भी किसानों के इस संघर्ष में साथ होने का दम भरा।
किसान नेता एवं सांसद राजू शेट्टी ने आज लोकसभा में किसानों के मुद्दे को उठाया तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल किया कि आपका स्वामीनाथन कमीशन के सुझाओं को लागू करने का वादा झूठा था क्या ? लोकसभा अध्यक्ष ने इनके माइक को बंद करवा दिया जिसके विरोध में राजू शेट्टी ने संसद से वाक आउट किया। राजू शेट्टी ने कहा - "मैं उस हाउस में मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता जहाँ किसानों की आवाज को दबाया जा रहा हो।"

AIKSCC के संयोजक V M सिंह ने किसान मुक्ति यात्रा के अगले चरण की घोषणा करते हुए कहा - "हमलोग यहीं नहीं रुकने वाले हैं, हमलोग पूरे देश के किसानो को संगठित करेंगे। हमलोग चार और यात्रा निकालेंगे जो कि हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा बिहार में होगी। यह यात्रा 2 अक्टूबर को फिर दिल्ली पहुंचेगी और सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमलोग पूरे देश में अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे।"

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष श्री योगेन्द्र यादव ने कहा - "यह आन्दोलन किसान आंदोलनों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस आँदोलन ने अलग अलग दल और विचारधारा के देश भर के किसान संगठनों के नेताओं को एक किया है। साथ ही, आज किसानों की युवा पीढ़ी भले ही किसानी छोड़ने पर मजबूर हो रही है, लेकिन वो किसानों की वेदना को भूली नहीं है। अब किसान निर्णायक संघर्ष करेगा।"

Sunday, July 16, 2017

पास्टर के कातिलों को फांसी दो: शाही इमाम पंजाब

Sun, Jul 16, 2017 at 3:56 PM
पंजाब में साम्प्रदायिक आतंक को सहन नहीं करेंगे अल्पसंख्यक

लुधियाना: 16 जुलाई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
बीती शाम सलेम टाबरी चर्च के पास्टर सुल्तान मसीह की सरेआम गोलियां मार कर की गई हत्या पर पंजाब के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना की ओर से गहरा दुख प्रगट करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने मांग की है कि हत्यारों को गिरफ्तार करके फांसी की सजा दी जाए। शाही इमाम ने कहा कि पास्टर सुल्तान की हत्या इस बात का संकेत है कि राज्य में साम्प्रदायिकता के नाम पर कुछ शरारती तत्व आतंक फैलाना चाहते है। उन्होंने कहा कि पंजाब में हिंदू, सिख, मुस्लिम, ईसाई भाईचारा बड़े ही प्यार से रह रहा है लेकिन कुछ साम्प्रदायिक ताकते इसे तोडऩा चाहती है, इस साजिश को किसी कीमत पर कामयाब नही होने दिया जाएगा। शाही इमाम ने कहा कि फिरकापरस्त शरारती तत्व अपने दिमाग से यह खामख्याली निकाल दें कि अल्पसंख्यक समुदाय उनकी गोलियों से डर जाएगा। शाही इमाम ने कहा कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह मांग करेंगे कि ईसाई समुदाय की सुरक्षा को यकीनी बनाया जाए और पास्टर सुल्तान मसीह के हत्या के पीछे साजिश करने वालो को भी बेनकाब किया जाए। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब ने दस सालों तक आतंकवाद का काला दौर देखा है अब जबकि पंजाब तरक्की की ओर जा रहा है तो फिरकापरस्त ताकतें अपना आतंक फैलाना चाहती है। शाही इमाम ने कहा कि पास्टर पर हमला और कातिलों का फरार पुलिस व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रशनचिन्ह है। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने पंजाब भर के समूह धर्मो के लोगों से अपील की कि इस दु:ख की घड़ी में सभी लोग अमन, शांति व कानून व्यवस्था को बनाए रखें। इस मौके पर गुलाम हसन कैसर, नायब शाही इमाम मौलाना उसमान रहमानी लुधियानवी, कारी इब्राहिम, बिलाल खान, अंजुम असगर, हिफजुर रहमान, शाकिर आलम, परवेज आलम, शाह नवाज अहमद, अकरम अली, बाबुल खान, आजाद अली, मोहम्मद जावेद, अशरफ अली, मुहम्मद रियाज, मुहम्मद असलम, व शाही इमाम पंजाब के मुख्य सचिव मुस्तकीम अहरारी व अन्य भी मौजूद थे।

Friday, July 14, 2017

श्री हिन्दू तख्त विशेष टास्क फोर्स का गठन करेगा

अलगावादी ताकतों के खिलाफ कठोर रुख अपनायो: वरुण मेहता
लुधियाना: 14 जुलाई 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
अमरनाथ यात्रियों पर सोमवार को हुए आंतकी हमले के विरोध में पंजाब के हिन्दू संगठनों द्वारा संयुक्त तौर पर दी गईं बंद की कॉल के दौरान श्री हिन्दू तख्त द्वारा प्रमुख प्रदेश प्रचारक वरुण मेहता के नेतृत्व में सदभावना मार्च का आयोजन किया गया जिसमें श्री हिन्दू तख्त व शिवसेना शेरे हिन्द के कार्यकर्ता स्थानीय घंटाघर से भोलेनाथ के जयकारे तथा पाकिस्तान व आंतकवाद मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए शांतमय तरीके से प्राचीन संगळा शिवाला की तरफ चल पड़े। इस दौरान घंटाघर चौड़ा बाजार व अकालगढ़ मार्किट के दुकानदारों द्वारा पूर्ण तौर सहयोग करते हुए अपने संस्थान बंद रखे। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था शिव भक्तों का जत्था मार्च करते हुए आगे बढ़ा तो थाना कोतवाली के बाहर एसीपी श्री धर्मपाल के नेतृत्व में पुलिस बल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वरुण मेहता द्वारा शांतमय तरीके से मार्च करने की बात करने पर पुलिस बल उनके साथ साथ चल पड़ा। अकालगढ़ मार्किट के दुकानदारों द्वारा समाज सेवक मनप्रीत बंटी के नेतृत्व में बंद के लिए सहयोग देने पर वरुण मेहता द्वारा उनका आभार व्यक्त किया गया सद्भावना मार्च के गिरजाघर चौक पहुचते ही पुलिस के अन्य उच्चाधिकारीयो ने तुरंत मार्च खत्म करने का दबाव बनाया लेकिन तख्त के प्रचारको द्वारा न मानने पर पुलिस अधिकारियों ने श्री हिन्दू तख्त के प्रमुख प्रदेश प्रचारक वरुण मेहता व प्रचारक बलजीत ढिल्लों को हिरासत में ले लिए और उन्हें थाना कोतवाली ले गए।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए वरुण मेहता ने कहा कि हमने हमेशा आंतकवाद व कटरपंथी संगठनो का विरोध किया है। हम किसी भी धर्म मज़हब के खिलाफ नही क्योकि किसी भी आंतकी का कोई धर्म नही होता। बेगुनाहो के खून से होली खेलने का संदेश कोई भी धर्म नही देता। लेकिन धर्म व मज़हब के नाम पर दुष्प्रचार कर साजिशन हिन्दू समाज को गोली का निशाना बनाये जाने का हम डट कर विरोध करते हैं। उंन्होंने कहा कि पंजाब के लोगो ने लंबे समय तक आंतकवाद का संताप झेला है। इस काले दौर के दौरान पंजाब को आर्थिक व मानवीय आधार पर भारी नुकसान झेलना पड़ा। इस के बावजूद पंजाब वासियो  ने हमेशा ही देश के किसी भी हिस्से के लोगो के सुख दुख में भागीदारी की है। इसी बीच श्रीनगर में अमरनाथ यात्रा करने गए शिव भक्तों पर हुए इस कातिलाना हमले ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है। इस आंतकी हमले के विरोध में आज पंजाब के सभी धर्मों के लोगो ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। मेहता ने कहा कि कश्मीरी पत्थरबाज़ों को सबक सिखाने के लिए श्री हिन्दू तख्त विशेष टास्क फोर्स का गठन करेगा। शिवसेना के प्रधान बलजीत ढिल्लों ने कहा कि कश्मीरी आंतकवाद के विरुद्ध श्री हिन्दू तख्त ठोस आवाज़ बुलंद करेगा व आज के बंद में हमने सभी दुकानदारों व व्यापारिक संस्थायों से पूर्ण सहयोग करने का आग्रह किया व सभी ने डट कर साथ दिया। आज के सदभावना मार्च तख्त के प्रदेश उप प्रचारक हरकीरत खुराना,  जिला प्रचारक रोहित शर्मा भुट्टो, हैल्पिंग हैंड NGO  से रमन गोयल, अवनीश मित्तल, राकेश गुप्ता, ऑल इंडिया ब्राह्मण सभा से जिला प्रधान नरिंदर दत्ता, चौड़ा बाजार शॉपकीपर से सोमनाथ ग्रोवर,   हरपाल सिंह पूर्व सरपंच, हरिंदर ढिल्लों, हैरी, अमन, दिनेश दिवाकर, राकेश सिंगला, संदीप गौतम, डॉ बलकार मसीह,  महाशिवरात्रि से नीरज वर्मा व अन्य भारी संख्या में उपस्थित थे। 

आतंकी हमले के बाद देश को मजबूती चाहिए ना कि संप्रदायिक दंगे

Fri, Jul 14, 2017 at 2:39 PM
आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देगा भारत: शाही इमाम पंजाब  
लुधियाना जामा मस्जिद के बाहर संप्रादयिक दंगे करवाने की कोशिश के खिलाफ भी प्रदर्शन
लुधियाना: 14 जुलाई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
कश्मीर में श्री अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के बाद जहां देशभर में सभी धर्मो और सियासी पार्टियों की ओर से निंदा का दौर जारी है वहीं देशवासियों में गम और गुस्से की लहर है। इसी बीच आज यहां पंजाब के मुसलमानों के दीनी मरकज जामा मस्जिद लुधियाना के बाहर भारी संख्या में इक्ट्ठे होकर आंतकवाद का पुतला फूंकते हुए अमरनाथ तीर्थ यात्रा में शामिल तीर्थयात्रियों पर हुए आंतकी हमले में मारे गए श्रद्धालुओं को श्रद्वाजंलि अर्पित की। जामा मस्जिद के बाहर हुए इस रोष प्रदर्शन में जहां कश्मीर के आतंकवादियों का पुतला जलाया गया वहीं हरियाणा के हिसार में एक मस्जिद के इमाम के साथ की गई बदसलूकी की कड़े शब्दो में निंदा भी की गई। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर हमला पूरी इंसानियत पर हमला है। ऐसी नापाक हरकतों को सहन नहीं किया जा सकता। उन्होनें कहा कि आतंकवादी अपने दिमाग से यह गलतफहमी निकाल दें। भारत आतंकवाद का मुंह तोड़ जवाब देगा। शाही इमाम मौलाना हबीब ने हरियाणा के हिसार में एक मस्जिद के इमाम के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से की गई बदसलूकी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि देश में आतंकी हमले के बाद रोष प्रदर्शन के नाम पर कुछ शरारती तत्व धार्मिक नफरत फैलाने की कोशिश करते है, जो कि निंदनीय है। उन्होनें कहा कि भारत में जो भी लोग अपनी सियासत चमकाने के लिए धर्म के नाम पर दंगे करवाते है, उनको समझ लेना चाहिए कि गुंडागर्दी किसी भी कीमत पर बर्दाशत नहीं की जाएगी। शाही इमाम ने कहा कि आतंकवादी हमले के बाद देश को मजबूती की जरूरत है ना कि संप्रदायिक दंगों की। उन्होनें कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह खामोश तमाशाई ना बने जिस तरह आंतकवादियों के विरुद्व कारवाई की जा रही है उसी तरह देश में घरेलू हिंसा भडक़ाने वालों के खिलाफ भी सख्त कारवाई की जाए। एक प्रश्न के उत्तर में शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि देश में हिन्दू, मुस्लिम, सिख-ईसाई भाईचारा कायम है, भारत समूह धर्मो का गुलदस्ता है, जिसे बिखरने नहीं दिया जाएगा। इस मौके पर गुलाम हसन कैसर, कारी इब्राहिम, अंजुम असगर, हिफजुर रहमान, शाकिर आलम, परवेज आलम, शाह नवाज अहमद, अकरम अली, बाबुल खान, आजाद अली, मोहम्मद जावेद, अशरफ अली, मोहम्मद रब्बानी, साबिर जमालपुरी, तनवीर आलम, बिलाल खान, मुहम्मद रियाज, मुहम्मद असलम, मुहम्मद इकबाल, मुहम्मद शरीफ व शाही इमाम पंजाब के मुख्य सचिव मुस्तकीम अहरारी सहित सैंकड़ों मुसलमान उपस्थित थे। 
फोटो कैप्शन : जामा मस्जिद के बाहर आतंकवाद का पुतला जलाते हुए सैंकड़ों मुसलमान।

Thursday, July 13, 2017

पंजाब बंद:अलगावादी ताकतों को सबक सिखाना जरूरी


Thu, Jul 13, 2017 at 7:51 PM
बंद की कॉल को सभी मिलकर सफल बनायें-महंत नारायण दास पुरी
लुधियाना: 13 जुलाई 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
अमरनाथ यात्रियों पर हुए आंतकी हमले के विरोध में सभी धर्मों व समुदायों को मिलकर 14 जुलाई के बंद को सफल बनाना चाहिए उपरोक्त आह्वन स्थानीय प्राचीन संगळा शिवाला में प्रमुख संगठनों की आयोजित एक विशेष बैठक में महंत नारायण दास पूरी जी ने सभी हिन्दू नेतायों की मौजूदगी में  संयुक्त तौर पर किया । महंत पूरी जी ने केंद्र व जम्मू कश्मीर सरकार से अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की मांग करते हुए भविष्य में पुनः ऐसी घटना को होने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की उंन्होंने कहा कि 14 जुलाई को सभी लोगो को मिलजुल कर मानवता की मिसाल कायम करते हुए बंद को सफल बनाना चाहिए।
इस बैठक में प्रमुख तौर पर श्री वरुण मेहता (हिन्दू तख्त के प्रमुख प्रदेश प्रचारक), श्री नीरज वर्मा (प्रमुख महाशिवरात्रि महोत्सव कमेटी), हरकीरत खुराना, बलजीत ढिल्लों (शिवसेना शेरे हिन्द) रमन गोयल (हैल्पिंग हेण्ड) दिनेश दिवाकर ( भारतीय युवा समाज संगठन), श्याम चोपड़ा (चौड़ा बाजार असोसिएशन), विजय कपूर (प्रमुख समाज सेवक), नरिंदर काकू  (सिद्धि विनायक क्लब) व अन्य ने भाग लिया।  एक रोष मार्च कर के अलगावादी नेतायों के विरुद्ध नारेबाजी भी की गई।
इस अवसर पर वरुण मेहता व नीरज वर्मा ने संयुक्त तौर पर कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए इस आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया है व सभी धर्मों व समुदायों में इस घटना को लेकर बेहद रोष है। उक्त नेतायों ने कहा कि पंजाब के लोगो ने हमेशा ही देश के किसी भी राज्य के सुख दुख को में साथ दिया व आंतकवाद के संताप को भी सहन किया है और कश्मीर के आंतकी माहौल से हो रहे मानवीय व आर्थिक नुकसान को भी हम समझते है लेकिन आंतकवाद का खात्मा तभी सम्भव है अगर पंजाब की भांति आर्मी व सुरक्षा एजेंसियों को आंतकियो को मारने की खुली छूट दी जाये। उन्होंने पंजाब के सभी व्यापारिक व अन्य संस्थाओं से 14 जुलाई को बुलाई बंद की कॉल के लिए सहयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि ज्यादातर मार्किट एसोसिएशनों ने हमे आंतकी हमले के रोष स्वरूप मानवता के नाते अपने व्यापारिक संस्थान बंद रखने का यकीन दिलाया है। मेहता व नीरज ने कहा कि सुबह 10 बजे घंटाघर चौक से एक सदभावना मार्च निकालकर शहीदो को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी व  सभी प्रदेश वासियो से शहीदो की याद में प्राथना सभा आयोजित करने का आग्रह किया।इस अवसर पर रोहित शर्मा भुटटो जिला प्रचारक श्री हिन्दू तख्त, राजेश सिंगल, संदीप गौतम, अवनीश मित्तल, गगन अरोड़ा, राजेंदर चौधरी, वरुण जैन, काला बंसल मजिशन मँगैम्बो, महा शिवरात्रि से अजय गुप्ता, राकेश चौधरी,लवली थापर, शिव शक्ति सेना से राजेंदर सैनी, शमपी धीमान,चौड़ा बाजार असोसिएशन शाम चोपड़ा,राजेश अग्रवाल,संजय अग्रवाल,शिवाला रोड से दिनेश कुमार शाम सुंदर गोयल व अन्य भारी संख्या में उपस्थित थे।

Tuesday, July 11, 2017

2050 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा


11-जुलाई-2017 18:34 IST
विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष 
*सविता वर्मा
दुनियाभर में करीब 7.5 बिलियन लोग रहते हैं। वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर करीब 9 बिलियन होने का अनुमान है। जनसंख्या के लिहाज से दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत की आबादी करीब 1.3 बिलियन है, और अनुमान है कि वर्ष 2050 तक भारत आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़कर शीर्ष पर पहुंच जाएगा। बढ़ती आबादी के मद्देनज़र, लोगों का पेट भरने और संसाधनों को बनाए रखने संबंधी चिंताएं सरकारों, विशेषज्ञों और योजनाकारों के लिए सर्वोपरि और प्राथमिक सूची में हैं।
जनसंख्या संबंधी इन्हीं समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस पहली बार 1989 में तब मनाया गया था, जब विश्व की आबादी 5 बिलियन पहुंच गई थी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की शासकीय परिषद् ने जनसंख्या संबंधी मुद्दों की आवश्यकता एवं महत्व पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने की अनुशंसा की थी। तभी से, जनसंख्या रुझान और बढ़ती जनसंख्या के कारण पैदा हुई प्रजननीय स्वास्थ्य, गर्भ निरोधक और अन्य चुनौतियों के बारे में विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रत्येक वर्ष विचार-विमर्श किया जाता है।
2017 विश्व जनसंख्या दिवस का मुख्य विषय ‘‘परिवार नियोजनः सशक्त लोग, विकसित राष्ट्र’’ है। इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर यह संयोग है कि परिवार नियोजन 2020 (एफपी 2020) पहल के तहत दूसरा परिवार नियोजन सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। इस परिवार नियोजन 2020 का उद्देश्य वर्ष 2020 तक 120 मिलियन अतिरिक्त महिलाओं तक स्वैच्छिक परिवार नियोजन को पहुंचाना और उसे सुगम बनाना है।
आंकड़े बताते हैं कि विकासशील देशों में करीब 214 मिलियन महिलाएं जोकि गर्भधारण नहीं करना चाहती हैं, वे परिवार नियोजन की सुरक्षित एवं प्रभावशाली विधियों को नहीं अपना रही हैं। ऐसे में इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस का विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है। गर्भनिरोधक की मांग करने वाली ज़्यादातर महिलाएं सबसे गरीब 69 देशों से आती हैं। पर्याप्त स्वास्थ्य नियोजन सेवाओं का अभाव महिलाओं के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है। समाज और परिवार से प्राप्त होने वाली सूचनाएं अथवा सेवाएं अथवा समर्थन तक पहुंच के अभाव की वजह से महिलाएं इन सेवाओं का फायदा लेने में सक्षम नहीं हैं।
आबादी को स्थिर करने में इसके महत्व को देखते हुए, सुरक्षित एवं स्वैच्छिक परिवार नियोजन विधियों तक पहुंच को मानव अधिकार और लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्रीय माना जाता है। इसे गरीबी कम करने के प्रमुख कारक के रूप में भी देखा जाता है। परिवार नियोजन उपलब्ध कराने की दिशा में निवेश आर्थिक वृद्धि को बल देने के साथ विकास को भी बढ़ावा देता है।
विशाल आबादी वाले भारत में भी परिवार नियोजन संबंधी तमाम ऐसी आवश्यक ज़रूरतें हैं, जिन्हें अभी तक पूरा नहीं किया है, मगर सरकार इससे निपटने की दिशा में कार्य कर रही है।
वर्ष 2001 से 2011 के मध्य भारत ने दुनिया की कुल जनसंख्या में 181 मिलियन का योगदान दिया है, जोकि ब्राज़ील देश की कुल आबादी से थोड़ा ही कम है। भारत में अधिकांश आबादी गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि रखने वाले लोगों के बीच बढ़ी है। भारत की विशाल जनसंख्या के बारे में एक तथ्य यह है कि सरकार के अनुमान के अनुसार वर्ष 2035 तक भारत की आबादी बढ़कर 1.55 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जोकि देश के लिए एक चुनौती एवं अवसर दोनों है। चूंकि इस जनसंख्या में से 60 फीसदी से भी अधिक लोग 40 वर्ष या उससे कम आयु के युवाओं की श्रेणी में होंगे, ऐसे में यदि इन युवाओं को कौशल विकास के क्षेत्र में शिक्षित एवं प्रशिक्षित किया जाता है तो यह देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान देंगे। मगर इस विशाल जनसंख्या को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना, ताकि वे स्वस्थ रहकर देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे सकें, यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2035 तक करीब 223 मिलियन तक पहुंचने वाली वृद्ध आबादी की देखभाल करना भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी, जिसके लिए निवारक, उपचारात्मक और वृद्धावस्था देखभाल की आवश्यकता होगी।
भारत के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। ईस्ट एशिया फोरम में आईएमटी नागपुर के रंजीत गोस्वामी द्वारा प्रस्तुत किए गए एक लेख के अनुसार, वर्ष 2050 में जल की मांग वर्ष 2000 की तुलना में करीब 50 गुना अधिक होने का अनुमान है, वहीं दूसरी और खाद्य पदार्थों की मांग भी दोगुना होने का अनुमान है। औसतन, एक टन अनाज का उत्पादन करने के लिए करीब एक हजार टन जल की ज़रूरत होती है। यही वजह है कि भारत के विभिन्न राज्यों में जल विवाद से मुद्दों को तेज़ी से दोहराया जा रहा है, जहां सर्वोच्च न्यायालय को अक्सर इस तरह के विवादों में हस्तक्षेप करने की ज़रूरत पड़ रही है।
अनुमानों को एक तरफ रखते हुए, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत की कुल प्रजनन दर वर्ष 2008 में 2.6 से घटकर 2.3 पर पहुंच गई है। भारत 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर तक पहुंचने से सिर्फ 0.2 अंक दूर है। वास्तव में, 24 राज्यों ने पहले ही प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता को हासिल कर लिया है और करीब 60 फीसदी आबादी पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब सहित प्रजनन क्षमता हासिल करने वाले या निकट भविष्य में हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे राज्यों में रहती हैं।
सरकार अब परिवार नियोजन उपायों को तेज़ कर रही है। सरकार ने 146 ऐसे ज़िलों को चिन्हित किया है, जहां कुल प्रजनन दर प्रति महिला तीन बच्चों से अधिक है, ताकि इन जगहों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। ये जिले उत्तर-प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम राज्यों में हैं और भारत की कुल आबादी में इनका करीब 28 फीसदी का योगदान है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय परिवार नियोजन सेवाओं की सुगमता, जागरूकता सृजन और परिवार नियोजन विकल्प की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए इन ज़िलों में “मिशन परिवार विकास” नामक कार्यक्रम की शुरुआत करने जा रही है।
इसके अलावा, सरकार पहले से ही लड़कियों के विवाह की उम्र को बढ़ाने और पहले बच्चे को पैदा करने में देरी करने और दूसरे बच्चे के बीच बड़ा अंतर रखने को बढ़ावा देने के लिए विशेष रणनीति पर कार्य कर रही है। इस रणनीति को अपनाने वाले जोड़ों को सुविधानुसार पुरस्कृत किया जाता है। संतुष्टि स्ट्रेटजी, जनसंख्या स्थिरता कोष नामक अन्य कार्यक्रमों के अंतर्गत सरकारी निजी भागीदारी के तहत नसबंदी करने के लिए निजी क्षेत्र के स्त्री रोग विशेषज्ञों एवं शल्य चिकित्सकों को आमंत्रित किया गया है। निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने वाले निजी अस्पतालों/नर्सिंग होम रणनीति अनुसार समय-समय पर पुरस्कृत भी किया जाता है।

*लेखिका 18 वर्ष से अधिक का अनुभव रखने वाली वरिष्ठ विज्ञान एवं स्वास्थ्य पत्रकार हैं। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार हैं। इससे पहले वह पीटीआई के अलावा कई अन्य प्रमुख समाचारपत्रों में सेवारत रही हैं। इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के स्वयं के हैं।
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Monday, July 10, 2017

मीडिया में अब की स्थिति इमरजेंसी से ज़्यादा खतरनाक?

आपातकाल, मीडिया और मौजूदा स्थिति के विषय पर हुयी विचार चर्चा 
लुधियाना: 10 जुलाई 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: More Pics on Facebook
आपातकाल का वो दौर बहुत से लोगों को आज भी याद है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के विरोधी आज भी उस दौर को काले दिनों का दौर कह कर याद करते हैं। मीडिया पर लगाई गई सेंसरशिप को लेकर आज भी बहुत कुछ कहा सुना जाता है। लेकिन अब तो कोई इमरजेंसी नहीं हैं। अब कोई सेंसरशिप भी नहीं है। इस खुले माहौल के बावजूद भी लोग बहुत सी खबरें अपने अपने इलाकों में घटित होती तो देखते हैं लेकिन वे कभी मीडिया में नहीं पहुंचती। जब सोशल मीडिया इस फैलता है तो इसे अफवाह बताने के प्रयास किये जाते हैं। कारपोरेट मीडिया के युग में यह कैसा श्राप है। क्या इमरजेंसी ज़्यादा खतरनाक थी या यह दौर? आखिर इस दौर को क्या नाम दिया जाये? 
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कारपोरेट युग के इस दौर में पैदा हुए हालात के दौरान जो स्थिति बनी है वह वास्तव में इमरजेंसी के दौर से भी ज़्यादा खतरनाक है। यह विचार "जन मीडिया मंच" (पीपुल्ज़ मीडिया लिंक) की तरह से आयोजित एक विचारगोष्ठी में खुल कर सामने आया। यह आयोजन मीडिया और आम लोगों के हालात से सबंधित शुरू किये गए सिलसिले के अंतर्गत कियागया था। इस अवसर पर शहीद भगत सिंह के भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह, प्रसिद्ध स्तम्भकार और ई एन टी स्पेशलिस्ट डाक्टर अरुण मित्रा, वाम नेता कमरेड रमेश रतन बेलन ब्रिगेड सुप्रीमो अनीता शर्मा प्रधानगी मंडल में सुसज्जित थे। 
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पत्रकार गुरप्रीत महदूदां (जी जी न्यूज़), अरुण कौशल (पब्लिक व्यूज़), एडवोकेट श्रीपाल शर्मा, सतीश सचदेवा व  गुरमल मैंडले (नवां ज़माना), इंद्रजीत सिंह (सत समुन्द्रों पार), कैनेडा से आये जानेमाने तर्कशील कार्यकर्ता-गुरमेल सिंह गिल और पंजाब में सक्रिय जसवंत जीरख, ओंकार सिंह पुरी (दिल्ली टाईम्ज़ न्यूज़), डाक्टर भारत (ऐफ आई बी मीडिया), रेक्टर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन) ने अपने अपने अनुभवों के आधार पर बताया कि  आज की स्थिति कितनी भयानक है। मीडिया के लिए ईमानदारी से काम करने वाले बहुत से पत्रकार आज भी ज़िंदगी की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मेहनत से तैयार की गयीं खबरों को कारपोरेट मीडिया में जगह नहीं मिलती। बहुत सी सच्ची खबरें न तो अब अख़बारों में आती हैं और न ही टीवी चैनलों में। आखिर उनको कौन सी अदृश्य शक्ति रोक देती है। इस विषय पर विस्तृत बहस की भी आवश्यकता है और इस रोहजान को रोकने के लिए समांनांतर जन मीडिया को मजबुत बनाना भी आवश्यक है। इस अवसर पर कई जन समर्थक मीडिया संगठनों की प्रशंसा भी की गयी।
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डाक्टर अरुण मित्रा ने कहा कि  मौजूदा स्थिति बहुत ही खतनाक है और इसके खिलाफ आवाज़ उठाना हमारा सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि  आज हाँ संख्या में कम हैं लेकिन इस तरह के कम लोगों से ज़्यादा बड़े काफिले बनते हैं। आपातकाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इंदिरा गाँधी ने इमरजेंसी लगाई तो उसने इसका ख़मयाज़ा भी भुगता और वह बुरी तरह से हार भी गयी लेकिन जो अघोषित आपातकाल आज चल रहा है वह ज़ुडा भयानक है। इसे भी लोग ज़्यादा देर तक चलने नहीं देंगें। इसके संचालकों भी इसका खामियाज़ा भुगतना ही पड़ेगा।  हां यह बात अलग है इस मकसद के लिए मीडिया साथ सिवल सोसायटी और सियासतदानों  मेहनत करनी पड़ेगी। मीडिया  अपनी कारगुज़ारी और बेहतर बनाने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे नहं डाक्टरों को हर पांच वर्ष बाद अपनी डिग्री रिन्यू करानी पड़ती है इसके लिए बाकायदा सी एम ई अटेंड करनी पड़ती हैं। इसी तरह पत्रकारों को भी अपनी कला और कलम की धार तेज़ रखने के लिए खुद फील्ड में जाने के प्रयास करते रहना चाहियें। इससे उनमें और  निखार आएगा। 
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प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि लोगों की तकलीफों की बात प्रशासन तक नहीं पहुंच रही इस लिए पीपुल्ज़ मीडिया लिंक बनाया गया है तांकि जन समर्थक लेखकों का एक सक्रिय ग्रुप बनाया जा सके। श्रोताओं को सम्बोधित हुए उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में लोगों की ज़ुबानबन्दी के साथ साथ सोच भी बंद कर दी गयी थी लेकिन अब की स्थिति ज़्यादा भयानक है। उन्होंने शहीद भगत सिंह के समय की पत्रकारिता कर कुर्बानियों की भी याद दिलाई।
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मैडम अनीता शर्मा ने जन समर्थक पत्रकारों की वित्तीय स्थिति और आत्महत्यायों का ज़िक्र करते हुए कि हमें ऐसे कीमती पत्रकारों को बचने के लिए को भलाई संगठन बनाना चाहिए जो इस तरफ निरतंर उचित ध्यान दे सके दे।    More Pics on Facebook 
कामरेड रमेश रतन ने कहा कि स्थापित संस्थागत मीडिया से टक्क्र लेना कोई व्यक्तिगत तौर पर न तो सम्भव है और न ही आसान। उन्होंने इस विषय पर और भी बहुत कुछ विस्तार से कहा। 
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मंच संचालन करते हुए प्रदीप शर्मा इप्टा ने ऐसी बहुत सी घटनाएं बतायीं जो आज के बेबस हालात पर रौशनी डालती थीं। अंत में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि हमें जन समर्थक मीडिया को मज़बूत बनाने के साथ साथ सोशल मीडिया के ज़रिये भी प्रामाणिक सच बाहर लाते रहना है तांकि वास्तविक और मत्वपूर्ण खबरें छुपाने या बिगाड़ने वाले पूंजीवादी मीडिया की साज़िशों का मुकाबिला किया जा सके। 
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