Wednesday, March 27, 2019

उपलब्धि: भारत भी चुनिंदा राष्ट्रों के समूह में शुमार

27 MAR 2019 2:41PM by PIB Delhi
पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित लाइव सैटेलाइट को मार गिराया
The Defence Research and Development Organisation (DRDO) successfully launched
the Ballistic Missile Defence (BMD) Interceptor missile, in an Anti-Satellite (A-SAT) missile test ‘Mission Shakti’ engaging an Indian orbiting target satellite in Low Earth Orbit (LEO) in a ‘Hit to Kill’ mode from the Dr. A.P.J. Abdul Kalam Island, in Odisha
on March 27, 2019.

नई दिल्ली: 27 मार्च 2019: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन)::
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज ओडिशा स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से सफलतापूर्वक ‘मिशन शक्ति’ नामक उपग्रह-रोधी (एंटी-सैटेलाइट यानी ए-सैट) मिसाइल परीक्षण किया। डीआरडीओ द्वारा विकसित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर मिसाइल ने ‘हिट टू किल’ मोड में पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में परिक्रमा कर रहे लक्षित भारतीय उपग्रह यानी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक मार गिराया। यह इंटरसेप्टर मिसाइल दो सॉलिड रॉकेट बुस्टरों से लैस तीन चरणों वाली मिसाइल थी। विभिन्न रेंज सेंसरों से प्राप्त आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह मिशन अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करने में कामयाब रहा है।

     इस परीक्षण से यह साबित हो गया है कि भारत बाह्य अंतरिक्ष में अपनी परिसंपत्तियों (एसेट्स) की रक्षा करने में सक्षम है। इससे इस बात की भी पुष्टि होती है कि  डीआरडीओ के विभिन्न कार्यक्रम अत्यंत कारगर एवं सुदृढ़ हैं।
     इस कामयाबी के साथ ही भारत भी अब उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास इस तरह की अनूठी क्षमता है। यही नहीं, इस परीक्षण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि स्वदेशी हथियार प्रणालियां अत्यंत सुदृढ़ हैं। 

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आर.के.मीणा/एएम/आरआरएस/एमएस-781
(रिलीज़ आईडी: 1569597) आगंतुक पटल : 126 

Monday, March 25, 2019

हर बार किसान मेले में छा जाती है गोहाना वाले ताऊ बलजीत की जलेबी

गैरकिसानों को भी वित्तीय तौर पर मज़बूत करते हैं किसान मेले 
लुधियाना:15 मार्च 2019:(फोटो और विवरण: रेक्टर कथूरिया):     और तस्वीरें FB देखें यहाँ क्लिक करके 
किसान मेला अब केवल किसानों का नहीं बल्कि पूरी कामगार जनता का मेला बन गया है जहाँ हर वर्ग के लोग बहुत उत्साह से पहुंचते हैं। इन लोगों ने बहुत ही छोटी स्तर पर छोटे छोटे कामधंधे शुरू किये थे लेकिन किसान मेलों से होने वाली आमदनी और यहाँ से मिले उत्साह ने इन्हें बहुत तेज़ी से वित्तीय तौर पर मजबूत बना दिया। इन लोगों में अलग अलग स्थानों से आने वाले अलग अलग लोग शामिल हैं। न कोई धर्म का भेद-न ही कोई साम्प्रदायिक सोच। बस एक ही वर्ग कि हम सब मेहनती हैं और हमें केवल अपनी मेहनत से खाना है। इसी सोच के बल पर इनका सिर हमेशां ऊंचा रहता है। आँख मिला के बात करते हैं। न गर्मी को चिंता न ही किसी और बात की बस अपने अपने काम में मग्न। इन्ही में से एक है गोहाना से आने वाला ताऊ बलजीत। किसान मेले से ताऊ बलजीत का सम्बन्ध बहुत पुराना है। कम से कम एक दश्क पुराना सम्बन्ध। 
पत्रकार एमएस भाटिया से बात करते हुए ताऊ बलजीत (गोहाना) 
पीएयू के किसान मेले में गोहाना की जलेबी का झंडा ताऊ बलजीत ने ही गाड़ा था।  उसके बाद गोहाना के नाम से भी बहुत से लोग आने लगे।  वे भी अपनी जगह अपना कमाल रखते होंगें लेकिन ताऊ बलजीत की जलेबियों का जादू कभी कम नहीं हुआ। यह कमाल भी रातो रात नहीं आया। पंजाब स्क्रीन के वीडियो सेक्शन से बात करते हुए ताऊ बलजीत ने बताया कि मैं बचपन से ही इस तरफ लग गया था। उस समय उम्र थी केवल आठ वर्ष। बचपन में शुरू हुई जलेबी बनाने की साधना और अब तो बाल सफेद हो चुके हैं। बालों को देख कर लगता है कि शायद बुढ़ापा आ गया लेकिन जिस्म में चुस्ती फुर्ती अब भी कायम है। ताऊ का मानना है कि यह सब जलेबी और कसरत का कमाल है। 
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गोहाना वाले ताऊ बलजीत की जलेबी इस बार भी किसान मेले में छाई रही..बड़ी बड़ी जलेबी--लोग इसे जलेब कहते हैं---ताऊ बताते हैं कि यह कई कई दिन खराब नहीं होती।  ताऊ का दावा है कि चाहे इसे बीस दिन रख लो तो भी इसके स्वाद में कोई फर्क नहीं आएगा। एक जलेबी खाओ--जो कम से कम 250 ग्राम की होती है--और कीमत है साठ रूपये। इसे खाने के बाद तुरंत ताकत की लहर सी महसूस होती है। आँखों के सामने छाया हुआ अँधेरा छंटने लगता है। ठंडक और ताजगी सी महसूस होने लगती है। थकावट दूर भाग जाती है। कुल मिला कर एक यादगारी स्वाद जिसे आप बार बार चखना चाहेंगे। ताऊ की जलेबियाँ खाए बिना किसान मेले का आप पूरा लुत्फ़ नहीं उठा पाएंगे। "पंजाब स्क्रीन" में आपको ताऊ और उसकी जलेबियों की चर्चा कैसे लगी अवश्य बताना। आप कुमेंट भी कर सकते हैं और इमेल भी .ईमेल का पता है: medialink32@gmail.com
मोबाईल नंबर है+919915322407 वाटसअप नम्बर है:+919888272045
अपना नाम पता और जगह का नाम लिखना न भूलें। 
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Thursday, March 07, 2019

मैं गौरी की बात करुँगी-कार्तिका सिंह

मैं हर छल की बात करूंगी
मंच संचालक कहते हैं कि 
यह बोलो 
पर यह न बोलो। 
देश संचालक भी कहते हैं 
यह बोलो और यह न बोलो। 
ठेकेदार समाजों के भी 
ठेकेदार रिवाजों के भी 
अक्सर मुझको यह समझाते 
यह बोलो और यह न बोलो। 
छोटी सी कोई ग़ज़ल सुना दो;
लेकिन दिल की बात न खोलो। 
तस्लीमा नसरीन से पूछा 
तुमने कैसे मन की कर ली?
तुमने कैसे मन की सुन ली?
तुमने कैसे मन की कह ली?
वह बोली हिम्मत थी मेरी 
वह बोली जुर्रत थी मेरी। 
सच देखा तो कहना चाहा। 
मन में एक तूफ़ान उठा था;
बाकी कुछ फिर टिक न पाया। 
जो सोचा वह कह ही डाला। 
लेकिन अभी भी भुगत रही हूँ। 
पल पल हर पल खौफ का साया। 
पल पल हर पल खौफ का साया;  
लगातार है पीछा करता। 
आगे बढ़ना भी मुश्किल था;
लेकिन पीछे मुड़ नहीं सकती। 
सच कहने में मज़ा बड़ा है;
झूठ से अब मैं जुड़ नहीं सकती। 
मेरी भी तक़दीर है गोली,
मेरी भी हत्या ही होगी!
लेकिन बर्बर मौत के डर से
सच का जीवन खो नहीं सकती। 
चैन का जो अहसास मिला है;
उस अहसास को खो नहीं सकती। 
फिर गौरी लंकेश से पूछा 
तुमने क्यों कर जान गंवायी!
वह बोली यह जान क्या है!
जीवन की औकात क्या है!
बस इक सांस का खेल है सारा;
इन सांसों की बात क्या है?
इन सांसों के चलते चलते 
सच को हम न देख सके तो!
सच को हम ने बोल सके तो 
फिर जीवन बेकार ही होगा!
इक बेजान सा तार ही होगा!
ऐसा जीवन क्या करना है?
इससे अच्छा तो मरना है!
मुझको तो रफ्तार पसंद थी 
सच की वह इक धार पसंद थी।
हाँ मुझको तलवार पसंद थी; 
लेकिन कलम ने यह समझाया!
शब्दों में भी जान बहुत है। 
जो तलवार भी कर नहीं सकती 
इन शब्दों में धार बहुत है। 
जिस दिन सच का परचम पकड़ा;
मेरी जान हथेली पर थी। 
मालूम था अंजाम यह मुझको!
लेकिन आँख हवेली पर थी। 

पूंजीवाद की वही हवेली 
जिस में कैद सहेली मेरी। 
वही सहेली-एक पहेली 
इस दुनिया का राज़ कहेगी। 
कदम कदम पर  जो साज़िश है-
उस का पर्दाफाश करेगी।  
इस दुनिया की हर इक औरत 
जिसपे अत्याचार हुआ है 
शब्दों से खिलवाड़ हुआ है 
वह औरत मुझसे कहती है-
तू  तो मेरा हाल बता दे। 
जो जो मेरे साथ हुआ है;
दुनिया को हर बात बता दे। 
कलम को पकड़ा है तुमने तो 
शब्दों से इक आग लगा दे। 
अब गौरी लंकेश की मानूं?
या मानूं तुम लोगों की मैं?
अब गौरी लंकेश है मुझमे 
अब मैं भी वह बात करूंगी। 
जिस जिस ने भी इस जनता को 
छलने का प्रयास किया है। 
मैं उस छल की बात करूंगी। 
मैं गौरी की बात करुँगी। 
मैं गौरी की बात करुँगी।   
                          -कार्तिका सिंह
29 जनवरी 2019 को सुबह सुबह 3:45 लिखी