Thursday, January 14, 2010

बंदूक भी अपनी, गोली भी अपनी और निशाना भी अपनी मर्ज़ी का...! सावधान...! बस प्यार से...!


 प्रसन्नता की बात है कि ब्लॉग जगत बहुत ही तेज़ी से विकसित हो रहा है.आम लोगों के साथ साथ बहुत से ख़ास लोग भी अब इस की अहमियत को पहचान रहे हैं.  अभिनय की दुनिया में नयी क्रांति लाने वाले अमिताभ बच्चन   की और से ब्लॉग पर आने के बाद ही इस दुनिया ने एक नयी करवट लेनी शुरू कर दी थी. उनका ब्लॉग 633 वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमर सिंह जैसे नेताओं का इस दुनिया में आना एक ऐसा साफ़ संकेत है अब ब्लॉग का मंच बहुत ही महत्वपूर्ण बनता जा रहा है. ब्लॉग के मंच से अमर सिंह जिस तरीके से अपने दिल की बात कह रहे हैं वह निश्चय ही  उन्हें आम लोगों के और नज़दीक लेकर जानेवाली है. इसके साथ
ही हमारे जाने माने ब्लॉगर और ब्लोगों की इस दुनिया के दिल की धड़कन समीर लाल जी ने भी कुछ ख़ास बातें की हैं जो ब्लॉग जगत से जुड़े लोगों को कम से कम एक बार अवश्य पढ़ लेनी चाहियें. रचनाकार के सम्पादक रवि रतिलामी जी का मार्गदर्शन भी नए लोगों को बहुत सी काम की बातें बताता है. बी एस पाबला जी के योगदान से सभी परिचित ही हैं पर नए लोगों से भी पाबला जी को मिलवाना मुझे ज़रूरी लग रहा है. तस्लीम से भी आप लोग परिचित हैं और ब्लागवाणी, जनोक्ति संवाद मंच, चिठ्ठाजगत और ब्लॉग प्रहरी सहित बहुत से उन ब्लोगों से भी जो ब्लॉग की दुनिया का भविष्य संवारने के लिए अपने अपने अंदाज़ से बहुत कुछ कर रहे हैं. अभी हाल ही में नयी दिल्ली की पत्रिका शुक्रवार ने अपनी कवर स्टोरी इसी मुद्दे पर दी है...ब्लॉग----बोलो--बेलाग..इस पत्रिका की इस कवर स्टोरी में यूं तो काफी कुछ है जिसे केवल पढ़ कर ही जाना जा सकता है पर साथ ही है ब्लॉग विस्फोट के प्रमोटर संजय तिवारी से एक भेंट वार्ता जिस में पते की बातें हैं और वे भी बहुत सी.
            ब्लॉग केवल मन का बोझ हल्का करने वालों का मंच ही नहीं रहा बल्कि उनलोगों की जंग का एक मैदान भी है जो बन्दूक की भाषा बोलते हैं. इस तरह के ब्लोगों में से एक ब्लॉग है मओवादिओं का. इन्टरनेट पर लड़ी जा रही इस जंग में मओवादिओं को जवाब भी इसी भाषा में मिल रहा..अर्थात  ब्लॉग के ज़रिए. आप ब्लॉग की दुनिया में जानी मानी पुलिस अधिकारी किरण बेदी की कलम का जादू भी देख सकते हैं. किरण बेदी से आप यहाँ भी मिल सकते हैं. आमिरखान भी ब्लॉग की इस दुनिया में मौजूद हैं. और शोभा डे  जैसे लोग भी जिनकी कलम के एक एक शब्द का  बेसब्री से इंतज़ार किया जाता है.. अब देखना यह होगा कि ब्लॉग जगत से जुड़े लोग इस अवसर का उपयोग और प्रयोग कैसे करते हैं. बंदूक भी अपनी, गोली भी अपनी और निशाना भी अपनी मर्ज़ी का...! सावधान...! बस प्यार से...केवल इतना सोच कर कि हम भी आने वाला इतिहास रच रहे हैं...!

3 comments:

Udan Tashtari said...

बस, पूरे संदेश के अन्त में यह बहुत जरुरी संदेश आपने दे दिया...कि...बस, प्यार से!!


बाकी तो इसकी ताकत सब पहचानने लगे हैं.

बढ़िया आलेख.

बी एस पाबला said...

ठीक कहा आपने कि
अब देखना यह होगा ब्लॉग जगत से जुड़े लोग इस अवसर का उपयोग और प्रयोग कैसे करते हैं

बी एस पाबला

अजय कुमार said...

ब्लाग की दुनियां तेजी से विकसित हो रही है , अच्छा संकेत है । प्यार से होगा तो अच्छा होगा ।