Friday, June 22, 2012

इस वर्ष हुई अनाज की खरीद सबसे अधिक

केंद्रीय अनाज भंडार में 823 लाख मीट्रिक टन से अधिक का भंडारअनाज के भंडारण के लिए और आवश्‍यकता वाले राज्‍यों को तेजी से अनाज पहुंचाने के लिए किये गये कई
   इस वर्ष अनाज की सबसे अधिक खरीद को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने अनाज के भंडारण के लिए और आवश्‍यकता वाले राज्‍यों को तेजी से अनाज पहुंचाने के लिए कई उपाय किये हैं। इन उपायों में मौजूदा भंडारण क्षमता का उपयोग, अतिरिक्‍त क्षमता का निर्माण, खराब हो रहे अनाज को हटाने की योजना के साथ-साथ दैनिक आधार पर अनाज को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक पहुंचाने की निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं। यह जानकारी केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रो.के.वी.थॉमस ने आज यहां एक संवादाता सम्‍मेलन में दी।

    उन्‍होंने कहा कि अनाज के रिकार्ड उत्‍पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्‍य में बढ़ोतरी के साथ अनाज की खरीद के लिए किये गये बेहतर उपायों से इस‍ वर्ष अनाज की सबसे अधिक खरीद हुई है। 1 जून, 2012 को केंद्रीय अनाज भंडार में 823.17 लाख मीट्रिक टन का भंडार था, जिसमें 501.69 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 321.48 लाख मीट्रिक टन चावल था।

    प्रो.थॉमस ने कहा कि केंद्रीय भंडार के लिये खरीदे गए अनाज का भंडारण भारतीय खाद्य निगम और राज्‍य सरकार तथा इनकी एजेंसियों द्वारा किया जाता है। पिछले पाँच वर्षों में भारतीय खाद्य निगम की भंडारण क्षमता 31 मार्च, 2008 को 238.94 लाख मीट्रिक टन थी, जो लगभग 40 प्रतिशत बढ़कर 31 मार्च, 2012 को 336.04 लाख मीट्रिक टन हो गई।

    भारतीय खाद्य निगम और राज्‍य सरकार तथा इनकी एजेंसियां अनाज का भंडारण ढके हुए स्‍थान पर करती है और अनाज रखने के लिए प्‍लेटफार्म (चौकी) बनायी जाती है। इसके लिए कैप (CAP-COVER AND PLINTH) और कच्‍चा कैप भंडारण का तरीका अपनाया जाता है। 1 जून, 2012 को 273.96 लाख मीट्रिक टन गेहूं का खुले में भंडारण किया गया था- वैज्ञानिक कैप में 207.79 लाख मीट्रिक टन और कच्‍चा कैप में 66.17 लाख मीट्रिक टन।

    केंद्रीय भंडार के गेहूं के कुल भंडार में से 87 प्रतिशत ढके हुए और कैप स्‍टोरेज में किया जाता है और इसे सुरक्षित भंडारण माना जाता है। बाकी का 13 प्रतिशत गेहूं कच्‍चे स्‍थानों पर किया जाता है, जिससे नुकसान का खतरा बना रहता है। कच्चे स्‍टोरेज में रखे गए अनाज में से 65.66 लाख मीट्रिक टन अनाज का भंडारण पंजाब, हरियाणा, मघ्‍यप्रदेश और राजस्‍थान में है।

    कच्‍चे स्‍टोरेज में रखे गए अनाज के संरक्षण के लिए सरकार सभी प्रयास कर रही है, क्‍योंकि वहां नुकसान का खतरा है। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों की क्षमता के उपयोग में महत्‍वपूर्ण वृद्धि हुई है। 30 अप्रैल, 2011 को इसकी क्षमता का उपयोग 77 प्रतिशत था, जो 31 मई, 2012 को बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया।

    अभूतपूर्व अनाज भंडार की स्थिति को देखते हुए विशेष उपाय के रूप में भारतीय खाद्य निगम ने 18 मई, 2012 को चावल के लिए ढेरी का आकार बढ़ाकर 162 मीट्रिक टन करने और गेहूं के लिए 181 मीट्रिक टन करने के आदेश जारी किये थे, ताकि क्षमता का अधिक से अधिक उपयोग हो सके। इस तरीके से भारतीय खाद्य निगम 5 से 10 लाख टन अधिक अनाज का भंडारण कर सका।

    निगम से कहा गया है कि वह राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर अतिरिक्‍त भंडारण की योजना बनाए और निजी भंडारण स्‍थलों तथा सहकारी चीनी मिलों   आदि के भंडारण स्‍थलों आदि की सूची तैयार करे।

    भंडारण क्षमता की कमी वाले क्षेत्रों के महाप्रबंधकों से कहा गया है कि वे वास्‍तविक उपयोग के आधार पर भंडारण क्षमता किराये पर भी ले सकते है। उन्‍हें केंद्रीय भंडारण निगम, राज्‍य भंडारण निगम, एजेंसियों और निजी लोगों से आवश्‍यकतानुसार अनाज के भंडारण स्‍थल किराये पर लेने के लिए अधिकार दिये गये है। इसकी रूपरेखा इस प्रकार है:-

अधिक प्राथमिकता- वे स्‍थल, जहां गेहूं को कच्‍चे मैदान में और निचाई वाले स्‍थानों पर रखा गया है।

मध्‍यम प्राथमिकता- वे स्‍थल, जहां गेहूं को रोलर फ्लोर मिलों, चावल फ्लोर मिलों, चीनी मिलों आदि में रखा गया है।

कम प्राथमिकता- वे स्‍थल जहां गेहूं को भारतीय खाद्य निगम/राज्‍य सरकार के गोदामों के अंदर सड़क के किनारे रखा गया है। ऐसे भंडारण को लम्‍बे समय तक सुरक्षित माना जाता है।

    गेहूं को एक स्‍थान से हटाकर दूसरी जगह ले जाने के लिए ग्रेडिंग के आधार पर फैसला लिया जाता है और भारतीय खाद्य निगम दैनिक आधार पर इसकी निगरानी करता है। सरकार ने 5 करोड़ 98 लाख टन चावल और गेहूं लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्‍य कल्याण‍ योजनाओं के अंतर्गत रखा है। इसमें से गरीबी की रेखा से ऊपर के परिवारों को 60 लाख टन अधिक अनाज तथा गरीबी की रेखा के नीचे के परिवारों को 50 लाख टन अतिरिक्‍त अनाज दिया जायेगा। इससे गरीबी की रेखा से नीचे के 1.8 करोड़ अधिक परिवारों को लाभ होगा।

     इसके अलावा सरकार 30 लाख टन गेहूं खुले बाजार में बिक्री के लिए जारी कर रही है। खादय मंत्रालय ने सभी राज्‍यों के खाद्य सचिवों से कहा है कि वे अनाज भंडारण की आवश्‍यकता के लिए सरकारी-निजी भागीदारी के अंतर्गत गोदाम बनाने की अपनी योजनाएं बनाएं।

     वर्ष 2011-12 में ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष के अंतर्गत गोदाम बनाने के लिए 2000 करोड़ रूपये रखे गए थे, जिसके उपयोग से कुछ राज्यों में लगभग 90 लाख टन अतिरिक्‍त क्षमता के गोदाम बनाए गए हैं। चालू वित्‍त वर्ष में इसके लिए 5 हजार करोड़ रूपये रखे गए हैं।

    राज्‍यों से ग्रामीण भंडारण योजना का भी लाभ उठाने को कहा गया है। इसके अंतर्गत 1 अप्रैल, 2001 से अब तक 310 लाख टन क्षमता के लिए 7 हजार से अधिक परियोजनाएं स्‍वीकृत की जा चुकी है।

    19 राज्यों में निजी उद्यमों और केंद्रीय तथा राज्‍य भंडारण निगमों के जरिए गोदाम विकसित करने के लिए शुरू की गई योजना के अंतर्गत 151.96 लाख टन की भंडारण क्षमता विकसित की जानी है। चालू वित्‍त वर्ष में उम्‍मीद है और 40 लाख टन की भंडारण क्षमता उपलब्‍ध हो जायेगी। (पीएआईबी)  
21-जून-2012 17:26 IST



              

Tuesday, June 19, 2012

न्‍यायालयों में लंबित मामलों से निपटना

विशेष लेख                                                                                                 के के पंत
न्‍यायालयों में बड़ी संख्‍या में बकाया और विचाराधीन मामले चिंता का विषय बने हुए हैं क्‍योंकि इससे अदालतों में मामले के निपटारे में देर लग रही है। 3 करोड़ लंबित मामलों में से 74 प्रतिशत 5 साल से कम पुराने हैं। भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने 5 साल से अधिक के 26 प्रतिशत पुराने मामलों को निपटाने के लिए न्‍यायिक व्‍यवस्‍था 5+ मुक्‍त करने की आवश्‍यकता बताई है। सरकार न्‍यायपालिका के साथ मिलकर लगातार देश में न्‍यायिक व्‍यवस्‍था में सुधार का प्रयास कर रही है। इस दिशा में सरकार ने वर्ष 2007 से न्‍यायालयों में कम्‍प्‍यूटरीकरण आरंभ किया है वर्ष 1993-94 से ही न्यायपालिका के बुनियादी ढ़ांचे में सुधार में निवेश किया जा रहा है।  हाल में भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन व्‍यवस्‍था की स्‍थापना के बारे में अधिसूचना जारी की गई है। इससे मामले के प्रबंधन, न्‍यायालय प्रबंधन, न्‍यायालयों के प्रदर्शन को मापने के लिए मानक स्‍थापित करने और देश में न्‍यायिक आकंड़ों की एक राष्‍ट्रीय प्रणाली जैसे मुद्दों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

आपराधिक न्‍याय व्‍यवस्‍था में निगोशिएबल इन्‍स्‍ट्रूमेंट्स एक्‍ट 1881 (पराक्रम्‍य लिखित अधिनियम) तथा मोटर वाहन अधिनियम 1988 के मामलों से न्‍यायिक व्‍यवस्‍धा अवरूद्ध हो रही है। इसे अवरोध मुक्‍त करने के लिए प्राथमिकता के तौर पर उन्‍हें विशेष अदालतों, लोक अदालतों और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र द्वारा निपटाने के गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्‍यों को भी निर्देश दिये गए हैं कि वे 13वें वित्‍त आयोग के तहत इस उद्देश्‍य तथा मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतें और सुबह और शाम के न्‍यायालयों की स्‍थापना के लिए दिए गए धन का उपयोग करें

न्‍यायालयों में मामलों में देरी और बकाया मामलों में कमी लाने की  सरकार की कोशिश निरंतर जारी है। संरचनात्‍मक परिवर्तन और मामलों के निपटारे में न्‍यायालयों के प्रदर्शन की निगरानी दोनों के लिए पहले भी कई कदम उठाए गए हैं। विशेष अभियानों से भी मामलों के निपटारे में तेजी आई है। इनमें से एक, 1 जुलाई 2011 से 31 दिसम्‍बर 2011 के बीच चलाया गया।

हाल में सरकार ने राष्‍ट्रीय न्‍याय प्रदानकर्ता और विधिक सुधार  मिशन स्‍थापित किया है जो न्‍यायिक व्‍यवस्‍था में देरी और लंबित मामलों में विलम्‍ब जैस मुद्दों से निपटेगा तथा सभी स्तरों पर विभिन्‍न्‍उपायों द्वारा बेहतर उत्‍तरदायित्‍व स्‍थापित करेगा। इन उपायों में प्रदर्शन मानक की स्‍थापना और इसकी निगरानी, और विभिन्‍न स्‍तरों पर प्रशिक्षण के ज़रिए क्षमतावर्धन शामिल हैं।

इसके अलावा सरकार राज्‍यों को कई प्रकार की सहायता प्रदान कर रही है।  13वें वित्‍त आयोग ने वर्ष 2010-15 के बीच 5 वर्षों के लिए 5  हजार करोड़ के अनुदान की मंजूरी दी है। यह धन राज्‍यों को अनुदान के रूप में कई तरह के पहल के लिए दिये जा रहे हैं। इनमें मौजूदा संसाधनों के उपयोग से न्‍यायालयों में सुबह/शाम/पाली अदालतें चलाकर  कार्य के घंटों को बढ़ाना, नियमित अदालतों के काम के दबाव को कम करने के लिए लोक अदालतों को सहायता पहुंचाना, राज्‍य के विधिक सेवा प्राधिकरणों को अधिरिक्‍त धन उपलब्‍ध कराना जिससे कि वे हाशिेये पर पहुंचे लोगों को कानूनी सहायता में वृद्धि कर उन्‍हें न्‍याय पाने में मदद कर सकें, वैकल्पिक विवाद समाधान व्‍यवस्‍था को बढ़ावा देना जिससे की अदालतों के बाहर भी मामले का कुछ निपटारा हो सके, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए न्‍यायिक अधिकारियों तथा जन और सरकारी वकीलों की क्षमता में वृद्धि और प्रत्‍येक न्‍यायिक जिले और उच्‍च न्‍यायालयों के भवनों में अदालत प्रबंधको के पद सृजित करना शामिल है। इस मद में राज्‍यों को 1353.62 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

     केन्‍द्रीय योजना के तहत देश में जिला और अधीनस्‍थ न्‍यायालयों के कम्‍प्‍युटरीकरण और सर्वोच्‍च न्‍यायालय तथा उच्‍च न्‍यायालयों में आर्इसीटी सुविधाओं के उन्‍नयन के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा 100 प्रतिशत धन मुहैया कराया जा रहा है। देश में 31 मार्च 2012 तक 14229 अदालतों में से 9697 न्‍यायालयों को कम्‍प्‍युटरिकृत किया जा चुका है। बा‍की के न्‍यायालयों में कम्‍प्‍युटरीकरण का काम 31 मार्च 2014 तक पूरा हो जाएगा।

नागरिकों को उनके घर तक न्‍याय हासिल कराने के लिए ग्राम न्‍यायालयों के गठन के वास्‍ते ग्राम अधिनियम 2008 बनाया गया है। केन्‍द्र सरकार ग्राम न्‍यायालयों के गठन में गैर आवर्ती खर्च के लिए राज्‍यों को सहायता प्रदान कर रही है जिसकी खर्च की सीमा प्रति ग्राम न्‍यायालय 18 लाख रूपये है। केन्‍द्र सरकार इन ग्राम न्‍यायालयों के परिचालन के लिए पहले तीन वर्षों में हर साल सहायता देगी, जिसकी प्रति ग्राम पंचायत सीमा 3.20 लाख होगी।  राज्‍य सरकार द्वारा दी गई सूचना के आधार पर 153 ग्राम न्‍यायालय पहले ही अधिसूचित किये जा चुके हैं। इनमें से 151 ग्राम न्‍यायालय कार्यरत हैं।

न्‍यायपालिका की बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना वर्ष 1993-94 से चलाई जा रही है जिसके तहत न्‍यायालय भवनों और न्‍यायिक अधिकारियों के आवासों के निर्माण के लिए केंद्रीय सहायता दी जा रही है ताकि राज्‍य सरकारों के संसाधन में बढ़ोत्‍तरी हो सके। इस योजना के तहत केन्‍द और राज्‍य सरकार 75 और 25 के आधार पर खर्च साझा करते हैं।  केवल पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में इसका अनुपात अलग है जहां केन्‍द्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च वहन करती है और वहां की राज्‍य सरकारें 10 प्रतिशत।  इस योजना के तहत 31 मार्च 2012 तक अब तक 1841 करोड़ रुपये दिये जा चुके हैं।

   सरकार न्‍यायालयों में मामलों के त्‍वरित निपटारे के लिए वकीलों और न्‍यायाधीशों सहित प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों को नियुक्‍त करने की आवश्यकता से भी अवगत है। 1977 में संविधान के अनुच्‍छेद 312 के तहत संशोधन कर एक अखिल भारतीय न्‍यायिक सेवा-एआईजेएस बनाया गया। बाद में विधि आयोग की रिपोर्टों, प्रथम राष्‍ट्रीय न्‍यायिक वेतन आयोग, केंद्र-राज्‍य सरकार के संबंधों के बारे में बनी समिति और वि‍भाग से संबद्ध संसदीय स्‍थायी समिति ने भी एआईजेएस को अपना व्‍यापक समर्थन दिया। हालांकि एआईजेएस के बारे में राज्‍य सरकारों और उच्‍च न्‍यायालयों के साथ हुए विचार विमर्श में आम सहमति संभव नहीं हो सकी है। पर सरकार का और अधिक  विश्‍वसनीय तथा मान्‍य निरूपण के जरिए इसे जारी रखने का प्रस्‍ताव है।

लेखक पत्र सूचना कार्यालय (दिल्‍ली) में उपनिदेशक हैं।                   
(13-जून-2012 20:26 IST}

Monday, June 18, 2012

कराची में बनेगी मेहदी हसन की मज़ार

2000 वर्ग गज की जमीन मजार के लिए स्वीकृत
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा)। शहंशाह-ए-गज़ल मेहदी हसन की मज़ार उत्तरी कराची में 2000 वर्ग गज के परिसर में बनाया जायेगा। यह मज़ार कराची की धरोहरों में से एक होगी।
लंबी बीमारी से जूझने के बाद मेहदी हसन का पिछले सप्ताह कराची के आगा खान अस्पताल में निधन हो गया। उनके बेटे आरिफ ने कराची से फोन पर बताया, ‘सिंध के गर्वनर डाक्टर इशरतुल इबाद ने 2000 वर्ग गज की जमीन अब्बा की मजार के लिए स्वीकृत की है। यह उत्तरी कराची इलाके स्थित शाह मोहम्मद कब्रिस्तान में है और वहीं उनकी मजार बनाई जाएगी।’
उन्होंने कहा, ‘इस जमीन के आसपास सीमारेखा बनाई जा रही है। मजार के लिए मंजूर इस 2000 वर्ग गज के परिसर को मेहदी हसन परिवार के नाम कर दिया गया है। परिवार के बाकी सदस्यों की कब्रें भी यहां बनाई जा सकती हैं। हमारे लिए इससे खुशी की बात क्या होगी कि मरने के बाद अब्बा की मजार के बगल में ही हम सबकी भी कब्रें होंगी।’
इसके अलावा कराची मेट्रोपोलिटन कारपोरेशन ने मेहदी हसन की याद में एक संग्रहालय और संगीत लाइब्रेरी भी शुरू करने का ऐलान किया है। इसमें उनकी बेहतरीन गज़लों और गीतों के अलावा निजी सामान भी नुमाइश के लिए रखा जायेगा।
आरिफ ने बताया कि गायिकी की मेहदी हसन की विरासत को उनके बेटे कामरान मेहदी संभालेंगे जो अमेरिका के शिकागो में रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘कामरान बहुत अच्छा गाते हैं और उसके कई एलबम आ चुके हैं। भारत में भी फिल्मों में गाने की बात चल रही है। वह अब्बा की गायिकी की विरासत को संभालने के लिए तैयार हो रहा है।  (दैनिक ट्रिब्यून से साभार)

Sunday, June 17, 2012

आत्म हत्या पर अशोक सहगल की विशेष परिचर्चा

लोग क्यूं करते हैं आत्महत्या? 
आत्म हत्या का कदम आसन नहीं होता पर फिर भी बहुत से लोग ये कदम उठाते हैं. आखिर वे कैसे ले लेते हैं अपनी ही जान अपने ही हाथों। इस पर एक विशेष परिचर्चा की है दैनिक पंजाब केसरी के सम्वाददाता अशोक सहगल ने। मेडिकल क्षेत्र की बीत में काफी लम्बर समय से सक्रिय श्री सहगल अपनी विनम्रता के कर्ण बहुत लोकप्रिय भी हैं पर खबर के मामले में किसी का लोहाज़ नहीं करते। उम्मीद है आपको उनकी यह परिचर्चा पसंद आएगी। हम इसे पंजाब केसरी से साभार प्रकाशित कर रहे हैं। 

आपको यह परिचर्चा कैसी लगी अवश्य बताएं। आपके विचारों की इंतज़ार हमेशां की तरह इस बार भी बनी रहेगी। --रेक्टर कथूरिया 

आषाढ़ी गुप्त नवरात्र का महात्मय

गुप्त नवरात्र 20 जून से                             --डॉ. नवरत्न कपूर 
संस्कृत के व्याकरण-आचार्य ऋषि पाणिनी ने ‘नवरात्र’ शब्द के बारे में कहा है : ”नवानां रात्रीणं समाहार नवरात्रम्” (अष्टïाध्यायी 2/4/29)। वस्तुत : ‘नवरात्र’ शब्द में दो शब्दों की संधि है; वे हैं ‘नव+रात्र।’ इनमें से ‘नव’ शब्द संख्या-वाचक है और ‘रात्र’ का अर्थ है रात्रि -समूह। हिन्दी -भाषी क्षेत्र में सामान्यत: लोगों ने ‘नवरात्र’ शब्द को ‘नौराते’ बना डाला है। पंजाबी भाषा में इसी का उच्चारण ‘नुराते’ बन गया है और मराठी में ‘नौरता।’
अधिकतर ज्योतिषीगण चार प्रकार के नवरात्रों का उल्लेख करते हैं और इन्हें क्रमश: इन चार महीनों में मनाने की परम्परा है, यथा : (1) चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक; (2) आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक; (3) आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक;  (4) माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक। ‘चैत्र मास’ के नवरात्रों को ‘वासंतिक नवरात्र’ और ‘आश्विन मास के नवरात्रों को ‘शारदीय नवरात्र’ भी पुकारा जाता है, जो तत्संबंधी ऋतुओं के बोधक होते हैं। ज्योतिषाचार्य ‘आषाढ़’ और ‘माघ’ माह के नवरात्रों को ‘गुप्त नवरात्र’ पुकारते हैं। इसमें हमें खड्ग त्रिशूलधारिणी महिषासुरमर्दिनी का ध्यान करते हुए सर्वशक्ति-संपन्न होने की कामना प्रतिदिन करनी चाहिए। इससे यही सिद्ध होता है कि माता दुर्गा के केवल इसी रूप की पूजा निरंतर नौ दिन करनी चाहिए।
गुजरात में सभी हिन्दू-त्योहार विक्रमी चांद्र वर्ष की तिथियों के अनुसार भारत के अन्य प्रदेशों की तरह मनाए जाते हैं और इस चांद्र वर्ष का आरंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माना जाता है। किंतु लोहाना वंश के गुजरातियों के कुची, हलारी तथा ठक्कर गोत्र के लोग अपना  नववर्ष ‘आषाढ़  बीज’ (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया) को मनाते हैं। ‘लोहाना-समाज’ अपना मूल स्थान ‘लाहौर’ (पाकिस्तान) के समीपस्थ ‘लोहाना’ नामक ग्राम बताते हैं। समूचे भारत में जहां नववर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ला प्रतिपदा से माना जाता है और उसी दिन से वासंतिक नवरात्र आरंभ हो जाते हैं; फिर भी ‘सिन्धी समाज’ नववर्ष के आरंभ का बोधक ‘चेटी चांद महोत्सव’ चैत्र शुक्ला द्वितीया को मनाता है। विचित्र संयोग की बात है कि लोहाना समाज का नववर्ष भी द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, भले ही महीना ‘चैत्र’ के स्थान पर ‘आषाढ़’ हो। वस्तुत: यह ‘आषाढ़ी गुप्त नवरात्र’ का दूसरा दिन होता है। संयोग की बात है कि उड़ीसा प्रांत में स्थित ‘जगन्नाथपुरी की यात्रा’ का उत्सव भी ‘आषाढ़ी  गुप्त नवरात्र की द्वितीया’ को मनाया जाता है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी या रास-लीला वाली सहेली राधिका जी के साथ नहीं बल्कि अपने बड़े भाई बलराम जी तथा बहन सुभद्रा जी के साथ मूर्तिमान रहते हैं। इन तीनों की चल मूर्तियों को आषाढ़-द्वितीया वाली शोभा-यात्रा में अलग-अलग रथों पर सजाया जाता है। इन रथों का निर्माण-कार्य प्रतिवर्ष  ‘अक्षय तृतीया’ (ज्येष्ठï शुक्ल तृतीया) के शुभ दिन से ही आरंभ होता है, जबकि उस दिन वृंदावन (जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश) वाले ‘बांके बिहारी मंदिर’ में स्थापित भगवान कृष्ण की मूर्ति को चंदन का लेप करके सजाया जाता है। उन दोनों भाइयों समेत सुभद्रा की पूजा वहीं पर होती है।
महाराष्ट्र के ‘वारकरी संप्रदाय’ के श्रद्धालुगण भगवान श्रीकृष्ण को ‘विट्ठल नाथ’ विठोबा’ अथवा प्रभु पुण्डरीक’ पुकारते हैं। महाराष्ट्र के जिला पुणे’, के पंढरपुर नामक स्थान पर विट्ठल नाथ का प्राचीनतम मंदिर है, जिसकी यात्रा आषाढ़ी एकादशी अर्थात् देवशयनी एकादशी से आरंभ हो जाती है। जनश्रुति है कि विट्ठलनाथ जी अपनी पटरानी रुक्मिणी जी को बताए बिना गुप्त रूप में पंढरपुर चले आए थे। वे उन्हें ढ़ूंढ़ती हुई पंढरपुर पहुंच गई थीं। अत: विट्ठलनाथ जी की मूर्ति के साथ मंदिर में रुक्मिणी जी भी विद्यमान रहती हैं।
बंगाल में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को ‘मनोरथ द्वितीया व्रत’ कहा जाता है। उस दिन स्त्रियां मां दुर्गा से अपनी मनोकामनाएं-पूर्ति हेतु व्रत रखती हैं। आषाढ़ शुक्ल षष्ठी को बंगाल में कर्दम षष्ठी, कुसुंभा षष्ठी तथा स्कंद षष्ठी भी कहा जाता है। उस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र ‘स्कंद’ और उनकी पत्नी षष्ठी देवी की पूजा की जाती है। आषाढ़ शुक्ल सप्तमी को भारत के पूर्वी भाग में सूर्य पूजा का उत्सव मनाया जाता है। आषाढ़ शुक्ल आष्टïमी को त्रिपुरा में खरसी-पूजा उत्सव मनाया जाता है। तत्संबंधी प्रसिद्ध मेला खवेरपुर नामक कस्बे में भरता है, जिसमें अधिकतर संन्यासी ही भाग लेते हैं। संन्यासधारिणी स्त्रियां तंबाकू से भरी हुई चिलम में कश लगाकर, धुआं छोड़कर लोगों को आश्चर्यचकित कर देती हैं।
तमिलनाडु में आषाढ़ मास की अष्टïïमी को मनाए जाने वाले महोत्सव को ‘अदि पुरम’ कहा जाता है। आषाढ़ मास को तमिल भाषा में ‘अदि’ और ‘पर्व’ को ‘पुरम’ कहा जाता है। उस दिन लोग अपने परिवार की सुख-शांति हेतु शक्ति-देवी की पूजा करते हैं।
आषाढ़ शुक्ल नवमी ‘गुप्त नवरात्र’ का अंतिम दिन होता है। उस दिन कश्मीर के शरी$फ भवानी मंदिर में विशाल मेला भरता है। उसी दिन ‘हरि जयंती’ के कारण वैष्णव भक्त व्रत भी रखते हैं और वैष्णव मंदिरों के दर्शनार्थ जाते हैं। उसी दिन ‘भडल्या नवमीं’ पर व्रतधारिणी स्त्रियां भी घर में अथवा देवी-मंदिर में पूजा करती हैं।
  (दैनिक ट्रिब्यून से साभार)

भाजपा का जेल भरो आंदोलन 22 जून को

 महंगाई के बहाने जनता के साथ दूरियां कम करने का प्रयास
आम लोगों से दूर होती जा रही भारतीय जनता पार्टी अब इस बढ़ रही दूरी पर कुछ चिंतित हुयी नजर आ रही है। महंगाई के मुद्दे को लेकर 22 जून से जेल भरो आन्दोलन का एलान इसी चिन्तन से पैदा हुआ लग रहा है। इस खबर को विस्तार से प्रकाशित किया है पंजाब के लोकप्रिय समाचार पत्र दैनिक पंजाब केसरी ने अवश्यक प्रमुखता के साथ।  
 पंजाब केसरी के सम्वाददाता प्रदीप गुप्ता ने इस खबर में भी बहुत ही कम शब्दों में गहरे पानी पैठ वाली बात का प्रयास किया है। अब आंदोलनों से महंगाई कम हो पायेगी या नहीं इसे लेकर बहुत बार बहुत कुछ कहा जा चूका है आप इस क्या सोचते हैं अवश्य बताएं। आपके विचारों की इंतज़ार बनी रहेगी।. --रेक्टर कथूरिया

तलाक की वजह फेसबुक!

तलाक के ऐसे मामलों में निरंतर वृद्धि 
एक 26 वर्षीय ‘कुंवारी’ पत्नी ने दिल्ली की अदालत में तलाक की अर्जी देते हुए कहा है कि उसे उसके ‘मानसिक नपुंसक’ पति से अलग किया जाये। ‘मानसिक क्रूरता’ के आधार पर इस लड़की के तलाक के कारण को समझा जा सकता है। लेकिन अगर तलाक की वजह यह हो कि जीवनसाथी ने फेसबुक पर स्टेटस अपडेट नहीं किया है या सही नहीं दिया है तो इसे क्या कहा जायेगा?
चौंकने की आवश्यकता नहीं है। तलाक के ऐसे मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है जिनकी पृष्ठभूमि में फेसबुक है। इंग्लैंड में कराये गये एक ताजे सर्वेक्षण के अनुसार,  एक-तिहाई तलाक फेसबुक के कारण हो रही हैं। यह टे्रंड केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं है। परिवार न्यायालयों से संबंधित वकीलों का कहना है कि भारत में भी फेसबुक के कारण टूटने के कगार पर पहुंचे विवाहों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।
बीती मई के आखिरी सप्ताह में एक युवा जोड़ा मुम्बई के परिवार न्यायालय के न्यायाधीश के सामने खड़ा था। दोनों का एक-दूसरे पर आरोप यह था कि दूसरा हमेशा फेसबुक से चिपका रहता है। न्यायाधीश ने दोनों को पहले तो डांटा और फिर उनकी काउंसलिंग की। आखिरकार दोनों ने स्वीकार किया कि वह अब भी एक दूसरे से प्रेम करते हैं, और ‘अनफे्रंड’ (दोस्ती तोडऩे के लिए इंटरनेट की यही अंगे्रजी है, भले ही गलत हो) करने की बजाए अपने विवाह को बचाए रखने के लिए एक और प्रयास करने के लिए तैयार हैं।
परिवार न्यायालय के हस्तक्षेप से कुछ विवाह अवश्य बच पा रहे हैं। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि फेसबुक के कारण वैवाहिक जीवन पर कुप्रभाव पड़ रहा है। फेसबुक एक ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट है जो बिछड़ों को मिलाने का दावा करती है,  लेकिन यह एक ऐसी लत है जिस पर मिनट कितनी जल्दी घंटे में तबदील होते हंै, मालूम ही नहीं पड़ता। चूंकि ज्यादा समय फेसबुक पर खर्च हो जाता है, इसलिए पति-पत्नी एक-दूसरे को ज्यादा समय नहीं दे पाते। यही कारण दोनों में मनमुटाव या अलगाव का रिश्ता बनता है और अकसर मामला अदालत तक पहुंच जाता है।
वैवाहिक जीवन में फेसबुक से आने वाली एक समस्या स्टेटस अपडेट की है। फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की हाल में शादी हुई है। लेकिन फेसबुक पर अभी तक उन्होंने अपना स्टेटस ‘विवाहित’ दर्ज नहीं किया है। इसके विपरीत उनकी पत्नी प्रेसिला चान ने स्टेटस ‘विवाहित’ घोषित किया है। इन दोनों की नई-नई शादी तो स्टेटस में विरोधाभास को फिलहाल बर्दाश्त कर रही है, लेकिन अगर यही बात मुम्बई के किसी जोड़े ने कर दी होती तो विवाद गहरा हो जाता। तमिलनाडु के एक छोटे से शहर से कुछ दिन पहले यह खबर आई कि पति ने फेसबुक पर अपनी ‘बुनियादी जानकारी’ सही/पूरी नहीं दी थी, इसलिए पत्नी ने इसे ‘मानसिक क्रूरता’ मानते हुए अदालत में तलाक के लिए दस्तक दी है।
सीधी-सी बात यह है कि अगर आप वैवाहिक या प्रेम-संबंधों में दरार पैदा नहीं करना चाहते हैं तो बेहतर यह है कि फेसबुक पर अपने बारे में सही व पूर्ण जानकारी दें और स्टेटस को नियमित अपडेट भी करते रहें। ऐसा करना आपके लिए इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि फेसबुक पोस्ट को अब अदालतें सबूतों के रूप में स्वीकार कर रही हैं।
आप एफबी विंडोज और फेसबुक पर जो समय गुजारते हैं उसे अदालतें ऐसे ही मान रही हैं जैसे आप ऑनलाइन पोर्न देख रहे हों। चूंकि ऑनलाइन पोर्न देखकर समय नष्ट करना अदालत की दृष्टि में मानसिक क्रूरता है, जो कि तलाक का एक आधार है, इसलिए फेसबुक पोस्ट व फोटो भी मानसिक कू्ररता के साक्ष्य बन सकते हैं।
पुणे में एक महिला ने देखा कि उसके पति को फेसबुक की ‘लत’ पड़ गई है और वह महिला दोस्तों को ‘एड’ कर रहा है। उसने परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दायर कर दी। सबूत के तौर पर उसने अपने पति के फेसबुक अकाउंट को पेश किया। तसवीरें व पोस्ट होते हैं, वह अपने आप में पर्याप्त सबूत हैं यह साबित करने के लिए कि आप बेवफाई कर रहे हैंैं।
बेवफाई व व्यभिचार के मामले पहले भी हाते थे। फेसबुक से बस माध्यम बदल गया है और यह भी कि पहले झूठ बोलने व मामले को छुपाने की गुंजाइश रहती थी, लेकिन अब फेसबुक से सब कुछ सबके सामने है। चूंकि अकाउंट आपका है, इसलिए आप यह भी नहीं कह सकते कि जो कुछ पोस्ट किया गया है वह आपके खिलाफ साजिश है। शायद यही कारण है कि अदालतें भी अब फेसबुक को ठोस सबूत के रूप में स्वीकार कर रही है। चेन्नई में एक महिला ने फेसबुक पर अपने पति को दूसरी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा। यह पोस्ट उस महिला की दोस्त के दोस्त के पेज पर था। फोटो को महिला ने अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया। वह इसी आधार पर तलाक मांग रही है।
हाल ही के एक मामले में एक व्यक्ति को जब अपनी पत्नी के बारे में उसके फेसबुक अकाउंट से ‘असलियत’ मालूम हुई तो वह तलाक के लिए अदालत में पहुंच गया। अजीब बात यह है कि लोग अदालत में कुछ कहते हैं और ऑनलाइन सच पोस्ट करते हैं। फेसबुक इनसान के असली चेहरे को सबके सामने लाकर खड़ा कर देती है।
फेसबुक के जरिए लोग धोखाधड़ी भी कर रहे हैं, इसलिए उसे अदालत में साक्ष्य के तौर पर देर सवेर पेश ही किया जाता। अगर अपने बारे में फेसबुक पर गलत जानकारी देकर आप किसी को ‘फंसा’ लेते हैं तो सच खुलने के बाद फेसबुक पर दी गई झूठी जानकारी आपके खिलाफ गवाह बन जायेगी। मुम्बई की एक 21 वर्षीय लड़की को फेसबुक पर एक युवक पसंद आया। दिल्ली के इस लड़के ने लड़की को फ्लाइट का टिकट भेजा ताकि वह उसके ‘पैरेंट्स’ से मुलाकात कर सके। लड़की जब दिल्ली आई तो लड़का उसे एक पंडित के पास वैदिक विवाह के लिए ले गया। तभी लड़की को मालूम हुआ कि वह लड़का तो महिलाओं की तस्करी करता है। उसने अपने पैरेंट्स को मुम्बई से बुला लिया। लड़की को उसके पैरेंट्स वापस मुम्बई ले गए, लेकिन अब तलाक का मामला अदालत में चल रहा है। लड़के ने फेसबुक पर जितनी भी गलत जानकारियां दी थीं, वह उसके खिलाफ दफा 420 का कारण बनेंगी।
जो लोग फेसबुक पर अफेयर या फ्लर्ट कर रहे हैं, वह सावधान हो जाएं क्योंकि उनकी यही नादानियंा उनके खिलाफ न सिर्फ सबूत बनेंगी बल्कि तलाक का कारण भी बन सकती हैं।
—वीना सुखीजा  (दैनिक ट्रिब्यून से साभार)

खादी के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध

खादी ग्रामोद्योग आयोग 
     लोगों में स्‍वाबलंबन उत्‍पन्‍न करने और मजबूत ग्रामीण सामुदायिक भावना पैदा करने के साथ ही खादी ग्रामोद्योग आयोग को ग्रामीण इलाकों में गैर कृषि रोजगार सृजन के सतत स्रोत के रूप में एक महत्‍वपूर्ण संगठन के तौर पर जाना जाता है। यह कौशल विकास, प्रौदयोगिकी हस्‍तांतरण, शोध और विकास, विपणन इत्‍यादि के क्षेत्र में सक्रिय रहता है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उत्‍पन्‍न करने / स्‍वयं के रोजगार अवसर जुटाने में सहायता करता है।  
खादी ग्रामउद्योग आयोग के मुख्‍य उद्देशय
·         इसका सामाजिक उद्देश्‍य ग्रामीण इलाकों में रोजगार मुहैया कराना है
·         इसका आर्थिक उद्देश्‍य बिक्री योग्‍य वस्‍तुओं का उत्‍पादन करना है
·         इसका व्‍यापक उद्देश्‍य लोगों में स्‍वाबलंबन तथा
एक मजबूत ग्रामीण सामुदायिक भावना का निर्माण करना
कार्य
     खादी ग्रामउद्योग  आयोग के कार्य, खादी ग्रामउद्योग  आयोग अधिनियम 1956 (1956 के 61) के तहत बनाए गये नियमों के अनुरूप है। इनमें निम्‍नलिखित बिन्‍दु शामिल हैं
·         खादी और ग्रामीण उदयोगों में रोजगार प्राप्‍त करने के इच्‍छुक या उनके काम कर रहे व्‍यक्तियों के प्रशिक्षण की योजना बनाना और उन्‍हें आयोजित करना
·         हाथ से सूत कातने या खादी के उत्‍पादन या ग्रामीण उदयोगों में लगे लोगों या उत्‍पादन कार्य में लगाए जाने वाले लोगों के लिए आयोग द्वारा तय दर पर प्रत्‍यक्ष या निर्दिष्‍ट एजेंसियों के माध्‍यम से कच्‍चा माल उपलब्‍ध कराना
·         कच्‍चे माल के प्रसंस्‍करण या अर्द्धनिर्मित वस्‍तुओं के लिए आम सुविधा मुहैया कराना तथा खादी और ग्राम उद्योग उत्‍पादों के उत्‍पादन तथा विपणन में सहायता प्रदान करना
·         खादी और ग्रामउद्योग उत्‍पाद या हथकरघा उत्‍पादों की बिक्री और विपणन को बढाने के लिए बाजार की एजेंसियों से आवश्‍यकता अनुसार संपर्क स्‍थापित करना
·         खादी और ग्रामउद्योग  उत्‍पादों के निर्माण के लिए गैर परम्‍परागत ऊर्जा तथा बिजली के इस्‍तेमाल से शोध और प्रौद्योगिकी को बढावा देना जिससे कि उत्‍पादन बढ सके और नीरसता  दूर हो, साथ ही इस तरह के शोध से उत्‍पादन की प्रतिस्‍पर्द्धात्‍मक क्षमता बढे
·         खादी और अन्‍य ग्रामीण उद्योगों की समस्‍याओं के बारे में प्रत्‍यक्ष या दूसरी एजेंसियों के माध्‍यम से अध्‍ययन करना
·         खादी और ग्रामीण उदयोगों के काम में लगे व्‍यक्तियों या संस्‍थानों को प्रत्‍यक्ष या विशेष एजेंसियों के माध्‍यम से सहायता उपलब्‍ध कराना तथा डिजाइन, प्रोटोटाइल और अन्‍य तकनीकी जानकारी देना
·         खादी और ग्रामीण उद्योगों के विकास के लिए आयोग के विचार में आवश्‍यक समझे जाने वाले प्रयोग या पायलट परियोजनाओं को प्रत्‍यक्ष रूप से या विशेष एजेंसियों के माध्‍यम से चलाना
·         उपरोक्‍त मामलों में से एक या सभी को पूरा करने के उद्देश्‍य से अलग संगठन स्‍थापित करना और उन्‍हें चलाना
·         खादी उत्‍पादन और ग्रामीणउद्योग में लगे उत्‍पादनकर्ताओं के बीच सहकारी प्रयासों को बढावा देना और प्रोत्‍साहित करना
·         खादी और ग्रामउद्योग के विशुद्ध उत्‍पाद सुनिश्चित करना तथा गुणवत्‍ता और मानक तय कर उत्‍पादों को उसी के अनुरूप निर्मित करना तथा संबंधित व्‍यक्तियों को प्रमाणपत्र या मान्‍यता पत्र प्रदान करना  
·         उपरोक्‍त कार्यों के अलावा अन्‍य आकस्मिक कार्य कलाप पूरा करना
केवीआईसी को लाभ अर्जित करने वाले संगठन नहीं बनाया गया है। इसकी गतिविधियों में इसका विकास, आय और रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा शिल्पियों का कल्‍याण करना है। खादी और ग्रामोद्योग उत्‍पादों के पिछले पाँच वर्ष के दौरान उत्‍पादन, उनकी बिक्री और रोजगार के आंकड़े नीचे सारणी में दिए गए हैं। इस क्षेत्र में हाल के समय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है।
वर्ष
उत्‍पादन
(करोड़ रुपये में)
बिक्री
(करोड़ रुपये में)
रोजगार
(लाख व्‍यक्ति )
खादी

ग्रामोद्योग*

   कुल
खादी

ग्रामोद्योग*

  कुल
खादी

ग्रामोद्योग*

  कुल
(1)
(2)
(3)
(4)
(5)
(6)
(7)
(8)
(9)
(10)
2005-06
468.30
11915.54
12383.84
628.69
14647.33
15276.02
8.68
15.02
18.76
2006-07
491.52
13537.19
14028.71
663.19
16899.21
17562.40
8.84
80.08
88.92
2007-08
543.39
16134.32
16677.71
724.39
20819.09
21543.48
9.16
90.11
99.27
2008-09
585.25
16753.62
17338.87
799.60
21948.59
22748.19
9.50
94.41
103.91
2009-10
608.66
17508.00
18136.98
867.01
23254.53
24121.54
9.81
98.72
108.53

      देश में खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सूक्ष्‍य लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय ने निम्‍नलिखित कुछ बड़े कदम उठाए हैं -
·         दस्‍तकारों को वित्‍तीय प्रोत्‍साहन देने के लिए प्रदान की गयी सहायता का 25 प्रतिशत अर्जित करने के अलावा खादी और पोलीवस्‍त्र के उत्‍पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए 01 अप्रैल, 2010 से खादी के उत्‍पादन पर बाजार विकास सहायता योजना शुरू की गयी है।
·         ब्‍याज सब्सिडी योग्‍यता प्रमाणपत्र (आईएसईसी) योजना के अंतर्गत खादी संस्‍थानों के लिए रियायती दरों पर कर्ज (4 प्रतिशत ब्‍याज दर पर) उपलब्‍ध कराना।
·खादी उद्योग और दस्‍तकारों की उत्‍पादकता और प्रतिर्स्‍धा को बढ़ाने के लिए योजना के अंतर्गत संस्‍थानों को वित्‍तीय सहायता प्रदान करना।
·         खादी दस्‍तकारों के लिए वर्कशेड योजना के तहत कातने वालों और खादी बुनकरों को काम करने का बेहतर माहौल उपलब्‍ध कराना।
·         पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए धन उपलब्‍ध कराने की योजना के तहत खादी, ग्राम उद्योगों और कॅयर उद्योगों के करीब 100 क्‍लस्‍टर्स विकसित करना।
·         वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने व्‍यापक खादी सुधार कार्यक्रम लागू करने के लिए एशियाई विकास बैंक से सहायता 15 करोड़ डॉलर की सहायता के लिए समझौता किया है।

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय प्रधानमंत्री का रोजगार स2जन कार्यक्रम भी लागू कर रहा है जो एक क्रेडिट लिंक सब्सिडी कार्यक्रम है और स्‍व- रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए केवीआईसी के लिए 2008-09 से चलाया जा रहा है। राज्‍य/केंद्र शासित क्षेत्रों के स्‍तर पर यह योजना बैंकों के सहयोग से केवीआईसी, राज्‍य/केंद्रीय क्षेत्रीय खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्ड और जिला उद्योग केंद्रों के जरिए चलाई जा रही है। प्रत्‍येक योजना के लिए निर्माण क्षेत्र में 25 लाख रुपये  और सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्‍ध कराया जा रहा है। (पीआईबी)
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 15-जून-2012 20:55 IST