Saturday, June 12, 2010

डूब जाना ही गर इश्क की तहजीब हैं तो या रब ! मुझे डूबने में लुत्फ़ की तौफिक फरमा दे....मधु

मधु गजाधर का नाम सामने आते ही दिल और दिमाग में एक साथ बहुत कुछ दिखाई देने लगता है बिलकुल उसी तरह जैसे अचानक अँधेरी रात में आसमान से बिजली कोंध उठे और पल भर के लिए एक साथ बहुत कुछ दिख जाए. उसके बाद फिर अन्धेरा. अन्धेरा मैंने इस लिए कहा की मधु के बारे कुछ कहना बहुत कठिन है. दिल बहुत से सुझाव भेजता है पर उन्हें देख कर दिमाग चकरा जाता है की आखिर कहां से शुरू करें? उसकी कविता से, उसके किसी लेख या आलेख से, या फिर उसके किसी रेडियो टी वी के कार्यक्रमों से जुडी किसी याद से. उसकी सफलतायों की सूची इतनी लम्बी है कि जल्दी में समाप्त नहीं होती पर अपने आप को छूपाये रखने और अपनी प्राप्तियों को तुच्छ समझने की उसकी आदत का अनुमान मुझे तब हुआ जब मैंने कहा मधु जी अपने बारे कुछ तो कहिये. बहुत बार कहने पर जो जवाब मिला उसे आप भी देखिये," अपने बारे में कुछ लिखना न जाने क्यों मुझे इतना भारी लगता है | कलम उठती हूँ रख देती हूँ ...फिर उठती हूँ फिर रख देती हूँ और ऐसे ही दिन हफ्ते महीने गुजर जाते है | इस का कारण शायद ये है कुछ ऐसी विशेषता नहीं है मेरे अन्दर जिस पर कुछ लिखा जाए ,अपने बारे में बहुत कुछ बताने को नहीं है...एक अति साधारण सी स्त्री ..जो अति साधारण शकल सूरत, स्वभाव की द्ठ निशचयी , मेहनती ,अद्भुद स्मरण शक्ति वाली और सदा कुछ नया तलाशती आँखों,और सोच के साथ जीने वाली मैं जो जीवन बहुत कुछ करना चाहती थी कर नहीं पायी बहुत कुछ सीखना चाहती थी सीख नहीं पायी बहुत कुछ कहना चाहती थी कह नहीं पायी...वक्त इतनी तेजी से गुजर गया |"
 थोडा और कुरेदा तो जवाब था, "मेरे जीवन में दो ही ऐसी बाते हुई जिन पर मैं गर्व कर सकती हूँ...प्रथम तो बेटी के रूप में जन्म लेना और दूसरा भारत में मेरा जन्म होना...और ये दो बातें ऐसी थी जिन का चयन करने का अधिकार मेरा नहीं था इस इश्वर की कृपा समझ कर गदगद हो जाती हूँ |और फिर जो कुछ जीवन में पाया वो सब इन्ही दो वरदानों से जुड़ा रहा |" मैंने जन्म और परिवार के बारे में जानना चाहा तो कहने लगीं: देहली के एक अति सज्जन, साहित्य प्रेमी ,देश प्रेमी परिवार में मेरा जन्म हुआ| पापा की पीड़ी में कोई बेटी नहीं जन्मी थी सो पुरातन पंथी परिवार होते हुए भी प्रथम संतान के रूप में जन्मने पर भी मेरे जन्म का स्वागत किया गया | बचपन प्रारंभ से ही अति साहित्यिक वातावरण में गुजरा |मुझे आज भी भली भांति याद है जब हमारे तिलक बाजार देहली ६ वाले घर में अक्सर शाम को साहित्यिक बैठके हुआ करती थी | गोपाल प्रसाद व्यास जी , नीरज, बाल मुकुंद मिश्र जी, काका हाथरसी जी बेकल उत्साही जी, ओम प्रकाश आदित्य जी जैसे महानुभावों  का आगमन होता था|
पारिवारिक माहौल और संस्कारों ने साहित्य और संगीत की तरफ भी बढ़ाया. मधु गजाधर ने बताया कि मेरा सौभाग्य ही था कि पति के रूप में मैंने न सिर्फ एक बहुत पढ़े लिखे विद्वान पुरुष को पाया वरन चरित्र और व्यवहार से एक अति दुर्लभ ऐसे मानव को पाया जिन के मन में नारी जाति के प्रति बहुत सम्मान की भावना थी| मेरे पतिदेव ही मेरे गुरु सिद्ध हुए और उन के सान्निध्य में मैंने फ्रेंच भाषा के साथ साथ अनेक विषयों पर गहन जानकारी प्राप्त की |मैं तीन संतान की माँ हूँ | एक बेटा और दो बेटिया| बच्चों ने विदेश में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त की | 
पारिवारिक जिम्मेदारियों और साहित्य  से लगाव दोनों के साथ तालमेल बैठाना कोई कम कठिन नहीं होता. पर मधु इस में भी पारंगत हैं. कहती हैं,"बच्चों के और घर परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मैंने मारीशस के नेशनल चेनल से रेडियो और टीवी के प्रोग्राम्स प्रस्तुत करने शुरू किये| मैं रेडियो पर दो लाइव प्रोग्राम्स सप्ताह में दो बार देती हूँ|"
मैं उत्सुक था यह जानने को कि ये प्रोग्राम कौन से हैं? पूछा तो जवाब मिला  



मेरा घर मेरा संसार के अंतर्गत घर संसार से सम्बंधित विषयों पर और आप की चिठ्ठी मिली प्रोग्राम के अंतर्गत पत्रों द्वारा भेजी गयी पारिवारिक ,सामाजिक, मानसिक समस्याओं पर चर्चा करती हूँ| मेरे रेडियो और टीवी के प्रोग्राम्स मारीशस भर में और मारीशस से बाहर बहुत पसंद किये जाते है| इन प्रोग्रामों  के माध्यम से मैंने हिंदी भाषा ,भारतीय संस्कृति , भारतीय भोजन, आयुर्वेद,भारत के तीज त्योहारों की बहुत जानकारी लोगों तक पहुचाई है | टीवी के लिए भी महीने में दो प्रोग्राम्स बनाती हूँ| स्वाद स्वास्थ्य सौन्दर्य और दूसरा है दीपांजली | क्या होता है आपके इस कार्यक्रम दीपांजली में तो पता चला कि यह तो एक नयी सामाजिक क्रान्ति कि शुरुआत है. मधु जी ने बताया,"दीपांजलि प्रोग्राम के अंतर्गत मैंने देश की समस्त महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है |इस प्रोग्राम्स के अंतर्गत मैं अनेक प्रकार के होम बिजनेस प्रारंभ करने के प्रयोगात्मक तरीके बताती हूँ.| दीपांजलि प्रोग्राम के माध्यम से बहुत सी महिलायें आज अपने पैरों पर खड़ी हैं|प्रोग्राम्स की दो सफलताएं रही प्रथम तो लोगों में हिंदी भाषा में बात करने का प्रचलन हुआ दूसरा इन प्रोग्राम्स के माध्यम से मैं हिन्दू और मुस्लिम्स दोनों को एक दूसरे के प्रति बहुत प्रेम और सम्मान की भावना लिए एक मंच पर लाने में सफल हो पायी हूँ जो अपने में एक उदहारण है | 
अब आगे क्या नया कर रहीं हैं आप. भविष्य के लिए भी मधु के पास ठोस योजनायें हैं,"मैंने बहुत देशों की यात्रायें की है और वो सब अनुभव एक पुस्तक के रूप में तयार करने की चेष्टा है |साथ ही आजकल तीन पुस्तकों को एक साथ लिखने में सलंगनहूँ|"
पर अगर आप मधु गजाधर कि कविता का रंग न देखें तो बात अधूरी रहेगी. 
....डूब जाना ही गर इश्क की तहजीब हैं तो या रब ! 

मुझे डूबने में लुत्फ़ की तौफिक फरमा दे.



सुबह की किरण का देवनहार अगर तू है ,
तो रात की स्याही का खुदा क्या कोई और है ?


...लिए मन्नतों का टोकरा मैं निकली थी अपने घर से ,
तेरे दर तक आते आते या खुदा ! न मन्नत रही न मैं.



....ख़्वाबों का क्या है बंद आँखों में उतर ही आते है ,
खुली आँखों से देखे ख्वाब की ताबीर गजब होती है.



ना उम्मीदी के अंधेरों से घबरा मत ऐ दिल,
उम्मीदों की हवाएं भी चिरागों को बुझा देती हैं 

मेरे ख्वाबों की ताबीर हो ये ख्वाब तो नहीं है मेरा,
मेरे ख्वाबों की दुनिया में मुझे बस रहने दे मालिक 
नक़्शे कदम पर चलने की हसरत तो है हमको ,
पर वक्त की ये हवाएं तो निशां ही मिटाए जाती है
मैं पूछती तो हूँ तुझ से पर जवाब के लिए नहीं,
क्यों बनायीं तूने दुनिया, अब क्यों मिटा रहा है 

बिखरना तो जिंदगी में लाजिम है एक दिन ,
बिखरे जो गुलाब की मानिंद तो खुशबुओं में सिमटे रहोगे.

कश्तियाँ किनारों से लग जाती हैं उन मेहरबानों की ,
जिन की कश्तियों में दूआओं का असबाब(सामान) भरा होता है |
गलियां कूचे,मंदिर मस्जिद घर आँगन की बात ही छोड़ो ,
दिल से निकली हर दुआ में जिन्दगी भर के लिए सबाब(पुन्य) होता है |
यूँ तो मैंने उस जहाँ के मालिक को कभी देखा नहीं है मगर,
हर माँ की आँखों में उस के होने का एहसास होता है |
जिन्दगी के पन्नो पर क्या लिखूं ,क्या मिटाऊं मेरे मालिक ,
कि तुझ से तुझी को मांगने का जज्बात जवां होता है |

तस्वीरों की बात: सब से ऊपर वाली तस्वीर में मधु गजाधर मरिशिअस के प्रधान मन्त्री डाक्टर नवीन रामगुलाम और उनकी पत्नी वीणा रामगुलाम के साथ नजर आ रही हैं.
उससे नीचे वाली तस्वीर में पंडित जसराज जी के साथ....आपको यह प्रस्तुतु कैसी लगी इसे अवश्य बताएं.आप उनसे फेसबुक पर भी मिल सकते हैं और उनके ब्लॉग पर भी. आप उनकी अन्य रचनायें भी पढ़ सकते हैं.  --रेक्टर कथूरिया 

Friday, June 11, 2010

हाथ में बंदूक मन में प्रेम

कौन कहता है कि सेना केवल बंदूक और तोप से बात करती है या बस जंग की भाषा ही बोलती है....तस्वीर में आप देख रहे हैं इस सेनिक को ? कितने प्यार से हाथ मिला रहा है किसी बुज़ुर्ग के साथ. अमेरिकी सेना का यह सेनिक है Staff Sgt. Michael Baldwin जो अफगानिस्तान के लोयघड क्षेत्र के इलाके मिर्सलेह में आते एक गांव में तेनात है. मिलिटरी पुलिस को सहयोग देने के लिए विशेष तौर पर नियुक्त इस सेनिक अधिकारी ने जब 6 जून 2010 को इस बुज़ुर्ग से हाथ मिलाया तो अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए Spc. De'Yonte Mosley ने झट से इन पलों की एक यादगारी तस्वीर अपने कैमरे से खींच ली.आपको यह तस्वीर कैसी लगी अवश्य बताईये.  
बन्दूकों और तोपों से खेलने वाले सेनिक कितने भावुक होते हैं इसका अनुमान आसानी से नहीं लगाया जा सकता. किसी की जान लेना या फिर किसी मिशन पर हंसते हंसते अपनी जान देना....कितना कठिन है इसे वही जानता है जिसने इन पलों को जी कर देखा हो. आप सैनिक ज़िन्दगी के ज़रा नज़दीक  जा कर देखें तो हैरान हो जायेंगे कि फौलादी एक्शन लेने वालों में एक मोम का दिल कैसे ? अपनी  इसी तरह जब अमेरिकी नौसेना के  Chief Logistics Specialist Jose Rodriguez को नयी डियूटी पर नियुक्त किया गया तो उसने जलपोत चलने से पूर्व बहुत ही भरे मन से अपनी बेटी से विदा ली.उस दिन 21 मई 2010 की तारीख थी. अलविदा के इन भावुक पलों को अमेरिकी रक्षा विभाग के जनसंचार विशेषज्ञ Rafael Martie  ने तुरंत अपने कैमरे में कैद कर लिया. यह तस्वीर आपको कैसी लगी.आपके विचारों का इंतज़ार तो हमें रहता ही है.
परिवार के साथ मोह और प्रेम ही एक सेनिक को सिखाता है कि उसे इस पूरे देश या फिर पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह कैसे मानना है....कैसे जानना है. प्रेम के इस बिंदु से ही उन्हें अहसास होता है विराट का. इसी बूँद से ही तो उन्हें ज्ञान होता है सागर का. इस बड़े परिवार की भलाई के लिए कब कहां शस्त्र उठाना है, कहां दुश्मन को सबक सिखाना है...कहां किसकी जान लेनी ज़रूरी है और कहां ज़रुरत पड़ने पर अपनी जान की कुर्बानी देनी है.ज़रा गौर से देखिये इस तस्वीर को कितना प्रेम और कितना पितृत्व झलक रहा है इस चेहरे से. अमेरिकी वायुसेना के Lt. Col. Jack Barnes जब पिट्सबर्ग में 4 जून 2010 को नयी डियूटी संभालने की तैयारी करके उठे तो अपने परिवार से भी गले मिले.भावुकता के इन पलों को कैमरे में कैद किया Master Sgt. Ann Young ने.आपको यह तस्वीर कैसी लगी.ज़रूर बताएं.                --रेक्टर कथूरिया     

सैनिक और बच्चे

सेना के बूटों की धमक और तोपों के गोलों की आवाज़ शायद अफगानिस्तान की तकदीर बन चुकी है.पर कुछ हिम्मतवर लोग आंधियों के सामने भी चिराग जलाने की परम्परा को मजबूत करने से कभी नहीं चूकते...चाहे जंग का मैदान ही क्यूं न हो. अमेरिकी सेना के Spc. Joshua Rojas ने जब अफगानिस्तान के परवान क्षेत्र के बगराम बजार में बच्चों को देखा तो शायद उसके मन में बचपन की यादें उअर बच्चों से प्रेम उमड़ आया. वह एकदम कैसे इन बच्चों से घुलमिल गया इसे आप देख सकते हैं इस तस्वीर में. प्रेम के चिराग जलाते हुए प्रेम की गंगा बहाते हुए इन बच्चों और इस सैनिक की इस छोटी सी भेंट को कैमरे में उतारा अमेरिकी सेना के ही Sgt. Corey Idleburg ने. आपको यह तस्वीर कैसी लगी...बताना न भूलें.  --रेक्टर कथूरिया 

Thursday, June 10, 2010

राम राज्य पार्टी की आवश्यक बैठक दिल्ली में 11-12 जून को


राम राज्य पार्टी के गठन की प्रक्रिया अब अन्तिव पड़ाव में है. इस पर चर्चा करने के लिए एक आवश्यक बैठक दिल्ली में बुलाई गयी है. 11 और 12 जून को हो रही इस बैठक में पार्टी के संस्थापक स्वामी आत्म योगी भी विशेष तौर पर पहुंच रहे हैं. गौरतलब है कि ग्लोबल राम राज्य के मुताबिक राम राज्य में न तो गरीबी होगी, न ही किसी से कोई अन्याय, न ही किसी का अपमान, न ही किसी का शोषण और न ही कोई अन्य दुःख रहेगा. राम राज्य पार्टी के गठन कि घोषणा हाल ही में कि गयी थी. इसकी चर्चा पहले भी होती रही है. उल्लेखनीय है कि स्वामी जी ने खुशहाली के राज़ भी लोगों को बताये और कई गहरी कवितायें भी लिखीं. जिन्हें आप यहां भी पढ़ सकते हैं बस यहां कलिक करके. आप इस संबंध में मोबाइल फोन नम्बर   09290778701 पर सम्पर्क कर के अधिक जानकारी भी ले सकते हैं और पार्टी में भाग लेने की प्रक्रिया भी जान सकते हैं और आवश्यक आज्ञा भी ले सकते .  --रेक्टर कथूरिया 

Tuesday, June 08, 2010

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठी में क्या है?

कुछ दशक पूर्व एक गीत बहुत ही हिट हुआ था.बच्चे मन के सच्चे..सारे जग की आँख के तारे, ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान को लगते प्यारे...इस तरह के और भी बहुत से गीत लोकप्रिय हुए क्यूंकि बच्चे तो बच्चे हैं जिन्हें भगवान का रूप माना जाता है. इनके लिए कुछ भी बनना पढ़े.....सब ख़ुशी से तैयार हो जाते हैं. जापान के Fujisawa City के मिसोनो अनाथायालय के एक कमियुनिटी प्रोजेक्ट के दौरान किसी बच्चे को खुश करने के लिए गाये बन कर रंभाते हुए अमेरिकी नौसेना के सेकंड क्लास कमियूनिकेशन इलेक्ट्रीशियन डिक्सन रिवेरा Ticonderoga-class guided-missile cruiser USS Cowpens (CG 63) में तेनात हैं. पिछले पांच वर्षों के दौरान इस काम के लिए निकाले गए अपने  समय और सेवायों से Cowpens के इन सदस्यों ने अनाथालय के बच्चों और स्टाफ के साथ अपने संबंधों को बहुत ही घनिष्ठ बना लिया है. इन नजदीकियों को आप इस तस्वीर में भी महसूस कर सकते हैं. इन जीवंत पलों को हमेशां के लिए सहेजने के मकसद से अपने कैमरे में उतारा अमेरिकी रक्षा विभाग के जन संचार विशेषज्ञ Mike R. Mulcare ने. आपको यह तस्वीर कैसी लगी..इसे बताना न भूलें.अंत में सुनिये बच्चों से संबंधित यह गीत जिसमें ये नन्हें मुन्ने कह रहे हैं हमने किस्मत को बस में किया है. --रेक्टर कथूरिया 

अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस


बाकू  आज़र्बयिजान में 7 जून 2010 को सेनायों के दस्तों का मुआयना करते हुए अमेरिका के रक्षा सचिव रोबर्ट एम गेटस और आज़रबाईजान के रक्षा मन्त्री Col. Gen. Safar Abiyev. अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए इन पलों को कैमरे में कैद किया Master Sgt. Jerry Morrison ने.