Saturday, July 27, 2019

जैन गर्ल्ज़ स्कूल की छात्राओं ने दिखाया कला में अपना कमाल

Jul 27, 2019, 1:48 PM
आर्टस एंड क्राफ्ट्स में नज़र आई आसमान छूती प्रतिभा की उड़ान 
लुधियाना: 27 जुलाई, 2019: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन):: 
किसी भी बच्चे का असली विकास सिर्फ किताबों को रटने से नहीं बल्कि खेल-कूद के साथ साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों से भी होता हैं परन्तु आज की भागदौड़ में वो बचपन जो कभी  पेड़ पर चढ़ने या लुका-छुपी खेलने में हुआ करता था वह कहीं खो गया है। आज के दौर के बच्चे पढ़ाई का ज्ञान हासिल करने के लिए नहीं बल्कि परीक्षा में अवल्ल आने के करते है। उनके कैरियर को इसी कसौटी पर परखा जाता है जो की पुर्णत्या गलत भी है।  उनकी प्रतिभा उनके परीक्षा के अंकों से आँकीं जाती हैं।  ऐसे में कुछ बच्चे जो परीक्षा के इलावा किसी और क्षेत्र में अवल्ल आ सकते हैं, हमेशा के लिए टूट जाते हैं। लेकिन कुछ संस्थाए बच्चों के चहुंओर विकास को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास करती हैं।  इन्ही में से एक है जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल। लड़कियों की शिक्षा में अग्रणीय इस स्कूल ने बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 'आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स' का आयोजन किया। इसमें प्रत्येक कक्षा के अलग-अलग बच्चो ने अपनी काबिलियत के अनुसार अलग अलग कला कृतियां बनाईं।  इनमे हार्ड क्ले, पेपर बैग, कटोरियाँ, पेन स्टैंड और फोटो-फ्रेम आदि बनाये गए।  इन चीज़ों को बनाते इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक  थी वह दिल  आई थी। मन का अंदर से आई थी। इसका किसी मेकअप से कोई लेनादेना नहीं था। भगवान ने दुनिया बनाई थी और उसी का अंश इन बच्चों में भी महसूस हुआ। इन बच्चों ने अपनी टी सी दुनिया-क्राफ्ट्स के क्षेत्र में बनाई। पुस्तकीय ज्ञान की परिधि से बाहर जा कर भी हमें देखना होगा कि किस बच्चे में क्या क्या छुपा है। उस प्रतिभा को पहचानने के ही प्रयास किया जैन स्कूल ने। 
इस अवसर पर स्कूल के मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन श्री सुखदेव राज जैन, प्रधान श्री नंद कुमार जैन, सेक्रेटरी श्री राजीव जैन व् मैनेजर श्री अरविंग कुमार जैन मौजूद थे। स्कूल के प्रिंसिपल श्रीमती मीना गुप्ता जी ने बच्चो को अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ने और इस तरह के कार्यकर्मो में भाग लेने के उत्साहित किया।  

Wednesday, July 24, 2019

मृगवन को बायोलॉजिकल पार्क के रूप में विकसित करो-जोशी

Wed, Jul 24, 2019, 14:13
सांसद सी.पी.जोशी ने संसद में रखी विशेष मांग 

नई दिल्ली/चित्तौडगढ़: 24 जुलाई 2019: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
लोकसभा में चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी.जोशी ने आज नियम 377 के तहत सदन की कार्यवाही में भाग लेते हुये चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित मृगवन को बायॉलोजिकल पार्क या स्मृति वन के रूप में विकसित करने का विषय रखा। 

सांसद जोशी ने सदन में नियम 377 के तहत बताया की ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चित्तौड़गढ़ में आने वाले देषी व विदेषी पर्यटकों को आकर्षित करने तथा यहां पर पाये जाने वाले हिरण प्रजाति के वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने हेतु मृगवन का निर्माण कराया जाकर वर्ष 1971 में इसे आरम्भ किया गया था। मृगवन क्षेत्र के पूर्व, पष्चिम व दक्षिण दिषा में लगभग 1300 वर्ष पुराना दुर्ग चित्तौड़गढ़ का परकोटा एवं उत्तरी दिषा में विभाग द्वारा दीवार निर्माण कर जाली लगवाई जाकर तत् समय से ही मृगवन (रीलोकषन सेंटर) का संचालन किया जा रहा था। 
मृगवन दुर्ग चित्तौड़गढ़ का केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण नई दिल्ली में पंजीयन नहीं होने से इसे वर्ष 2016 में पर्यटकों के लिये बन्द कर दिया गया। 
सांसद जोशी ने बताया की चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक महत्व के कारण कई देषी विदेषी पर्यटक यहां पर घूमने आते है। चित्तौड़गढ़ के आस-पास घने जंगल व विभिन्न प्रजाति के वन्यजीव पाये जाते है। उनको संरक्षण प्रदान करने व यहां पर आने वाले देषी-विदेषी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये पूर्ववर्ती मृगवन दुर्ग चित्तौड़गढ़ को बायोलोजिकल पार्क या स्मृति वन के रूप में यदि विकसित किया जाता है, तो यहां आने वाले पर्यटकों को यहाँ स्थित वन एवं वन्यजीवों से रूबरू कराया जाकर पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा। 
इन्ही कारणों से चित्तौड़गढ़ दूर्ग स्थित मृगवन को बॉयोलोजिकल पार्क के रूप में विकसित किया जाना चाहिये जिससे वन्य जीवों को भी संरक्षण प्राप्त होगा तथा प्रतिवर्ष दूर्ग आने वाले लाखों पर्यटक यहॉ दूर्ग के साथ साथ वन्य जीवों से भी रूबरू हो सकेंगे।  


Tuesday, July 23, 2019

लुधियाना की नाजुक श्याम पुरी बनी मिसेज वर्ल्ड 2019

Jul 23, 2019, 7:23 PM
इंडियन वूमेन ऑफ इनफ्लुएंस अवॉर्ड 2019 से विशेष सम्मान

लुधियाना: 23 जुलाई 2019: (विशाल//पंजाब स्क्रीन)::
लुधियाना की मिसेज वर्ल्ड 2019 का खिताब जीतने वाली नाजुक श्याम पुरी ने जीता और साथ इंडियन वूमेन ऑफ इनफ्लुएंस अवॉर्ड 2019  से नवाजा गया। उनको 25 जून को इंडियन वूमेन ऑफ इनफ्लुएंस अवॉर्ड 2019  से नवाजा और 29 जून को मिसेज वर्ल्ड 2019 का खिताब जीता। जो कि उन्हें यूके पार्लियामेंट से बैरोनेस वर्मा, एमपी वरिंदर शर्मा, एमपी कैरलाइन स्पेंसर ऒर डॉ गुनप्रीत काहलों की तरफ से जीता।
मिसेज इंडिया 2018 का खिताब अपने नाम कर चुकी नाजुक श्याम पुरी ने अब ब्रिटेन में भी इंडियन वूमेन ऑफ इन्फ्लुएंस अवार्ड भी जीता है इसके साथ ही उन्होंने ब्रिटिश पार्लिमेंट में कॉफी टेबल बुक पर एडिशन में स्मार्ट भारतीय महिला को शामिल किया गया है। जिसमें नाजुक श्यामपुरी भी शामिल है।ब्रिटेन के सांसदों की ओर से उनको सम्मानित किया गया है।नाजुक श्याम पुरी ने बताया कि उनको विशेष तौर पर सम्मानित किया गया है उन्होंने कहा कि समाज सेवा के साथ-साथ उनकी और से कई और भी कार्य किए जा रहे हैं। जिनमें मुफ्त पढ़ाई आदि शामिल है नाजुक ने बताया कि उनकी उपलब्धियां उनके पति श्याम पूरी और परिवार के सहयोग के साथ ही चलती हैं।इस दौरान उन्होंने औरतों को भी एक संदेश दिया कि जमीनी स्तर पर काम करना जरूरी है और जो आप करने की इच्छा हमें समाज भलाई के कार्य करने चाहिए।

Sunday, July 21, 2019

बैंकों के राष्ट्रीयकरण को याद किया सेमिनार में

Jul 21, 2019, 3:05 PM
मौजूदा चुनौतियों की भी विस्तृत चर्चा की गयी
लुधियाना: 21 जुलाई 2019: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
बॉक्स की पंक्तियाँ सत्याग्रह से साभार 
कहा जाता है कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण से पहले का ज़माना एक ऐसा वक़्त था जिसमें आम इंसान बैंक के अंदर झाँकने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था। बैंक में लेनदेन बड़े लोगों का ही हुआ करता था। बैंकों के राष्ट्रीयकरण ने आम इंसान को बैंकों की राह दिखाई। बाद में इस राह को भी धीरे धीरे मुश्किल बना दिया गया। न्यूनतम जमा राशि की रकम में वृद्धि जारी रही। निजीकरण की तरफ झुकाव सिलसिला तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरागाँधी की हत्या के बाद आई सरकारों के समय ही शुरू हो गया था जो अब चरम पर है। लेकिन इतिहास खंगाले तो ऐसी चर्चा भी सामने आती है कि सन 1969 से पहले भी बैंकों के राष्ट्रीयकरण की शुरुआत हो चुकी थी और 1980 में भी इसने अपना जलवा दिखाया।
पंजाब बैंक कर्मचारी संघ का राज्य स्तरीय सेमिनार आज 21 जुलाई 2019 को पंजाब ट्रेड सेंटर, लुधियाना में आयोजित किया गया। राज्य के सभी कोनों के 600  से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह संगोष्ठी बैंक राष्ट्रीयकरण की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी। डॉ आर एस घुम्मन, प्रोफेसर, सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (CRRID), चंडीगढ़, डॉ अनुपमा उप्पल, अर्थशास्त्र पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के प्रोफेसर प्रमुख वक्ता थे। कॉम पी आर मेहता, अध्यक्ष, पीबीईएफ और महासचिव, एआईपीएनबीएसएफ, कॉम एस के गौतम, महासचिव, पीबीईएफ और संयुक्त सचिव, एआईबीईए  और कॉम अमृत लाल, अध्यक्ष पीबीईएफ  और महासचिव जेसीसी, एआईबीओबीईसीसी  ने भी बैंक कर्मचारियों को संबोधित किया।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने सरकार के फैसले के मद्देनजर, पूरे सप्ताह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की रक्षा करने के लिये पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करके का निर्णय लिया। बैंकिंग सुधारों के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विनिवेश और निजीकरण की नीतियां, स्थिति का जायजा लेने के लिए और हमारे राष्ट्र के विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के योगदान का मूल्यांकन करने के लिए, यह सेमिनार राज्य स्तर पर आयोजित किया गया। 
कमरेड एस के गौतम, महासचिव, ने सेमिनार का एजेंडा रखते हुए बताया कि यह उच्च स्तर पर बैंकिंग उद्योग की प्रगति और देश के विकास का मूल्यांकन करने का समय है। बैंकों की शाखायें राष्ट्रीयकरण करने के समय केवल 8200 थी जो अब 90765 है। ग्रामीण और अर्ध शहरी शाखाएँ पहले से मौजूद नहीं थीं, लेकिन अब 54872 हैं, प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण नहीं दिए गए थे और अब 40% हैं। जमा केवल 5000 करोड़ रुपये थे और अब 127 लाख करोड़ रुपये हैं, ऋण केवल 3500 करोड़ रुपये थे, लेकिन अब 85 लाख करोड़ रुपये हैं। हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और इन्फ्रा संरचना का विकास केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का परिणाम था। दुर्भाग्य से, इन प्रशंसनीय उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत करने के बजाय, वर्तमान दिन के एजेंडे में बैंकों के निजीकरण और समामेलन जैसे बैंकिंग सुधारों को आगे बढ़ाना है।
कामरेड पी आर मेहता, अध्यक्ष ने अपने संबोधन में बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विनिवेश के माध्यम से बड़े कॉरपोरेट को सौंपने का लक्ष्य है, जो बैंकों में खराब ऋण और भारी घाटे के लिए खुद जिम्मेदार हैं। लाभ का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कॉर्पोरेट नीति है। बैंक बड़े कारोबारियों के चंगुल में आते जा रहे हैं। हमारे बैंक कॉरपोरेट डिफाल्टरों की वजह से हुए नुकसान और रिकॉर्ड नुकसान से बने हैं। बैंक राष्ट्र के होते हैं। पैसा लोगों का है। इसलिए हमारा नारा है: 'लोगों के कल्याण के लिए लोगों का पैसा और कॉर्पोरेट लूट के लिए नहीं।' बैंकिंग सुधारों के सभी प्रतिगामी प्रयासों का विरोध करने और हमारे बैंकों को मजबूत करने वाली नीतियों के लिए लड़ने के लिए हर तंत्रिका को तनाव देना हमारा देशभक्ति कर्तव्य है।
प्रख्यात प्रोफेसर डॉ आर एस घुम्मन ने अपने प्रमुख नोट संबोधन में बैंकों के राष्ट्रीयकरण को बैंकिंग स्वतंत्रता कहा, जिसने न केवल उत्पादक उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक धन को चैनलाइज किया, बल्कि लोगों को धन उधारदाताओं के चंगुल से बाहर आने के लिए सशक्त बनाया। भारी उद्योग, सड़क, बिजली, रेलवे, संचार आदि सहित इंफ्रा संरचना का विकास केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ ही संभव था। केवल  यूएस फाइनेंशियल क्राइसिस के प्रभाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रभाव नहीं पड़ा। इसलिए पीएसबी के सार्वजनिक चरित्र में कमजोर पड़ने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और समावेशी विकास और विकास के खिलाफ जाएगा।
डॉ अनुपमा उप्पल ने अपने संबोधन में पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ को संगोष्ठी आयोजित करने के लिए बधाई दी क्योंकि बैंकों के राष्ट्रीयकरण की रक्षा के लिए जन जागरूकता पैदा करने के लिए उच्च समय है। राष्ट्र के विकास में पीएसबी के योगदान का बचाव केवल सार्वजनिक समर्थन जुटाकर किया जा सकता है जो सर्वोत्तम ग्राहक सेवा के साथ संभव हो सकता है। निजी बैंक केवल चयनात्मक और लाभदायक व्यवसाय कर रहे हैं,   जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्राथमिकता क्षेत्र में अग्रिम और बड़े पैमाने पर बैंकिंग कर रहे हैं, इसलिए राष्ट्रीयकृत बैंकों को हमारे राष्ट्र के विकास के लिए होना चाहिए।
कामरेड अमृत लाल ने संबोधित करते हुए कहा कि विलय और समामेलन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बंद करने के लिए और कदम हैं, जबकि सरकार का कहना है कि विलय बड़े बैंकों का निर्माण करना है। एसोसिएट बैंक के विलय के बाद भारतीय स्टेट बैंक की 7000 शाखाएँ बंद हो गई हैं और हजारों कर्मचारियों को समेकन के नाम पर वीआरएस दिया गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, फिर बड़े बैंक कैसे बनाए जाएंगे? बैंकों का विलय निजीकरण की दिशा में एक और कदम है, इसलिए बैंकों के राष्ट्रीयकरण को परिभाषित करना आवश्यक है।
कामरेड आरके वालिया, सीनियर उपाध्यक्ष, कामरेड रूप लाल मेहरा, कामरेड रवि राजदान, कामरेड पवन जिंदल, उपाध्यक्ष, कामरेड दलीप पाठक, संयुक्त महासचिव, कामरेड नरेश गौड़, कामरेड राजेश वर्मा, कामरेड के सी सरीन, उप महासचिव, कामरेड नरेश वैद, कामरेड जगदीश राय, कामरेड हरविंदर सिंह, संयुक्त सचिव,  कामरेड संजीव पराशर, कोषाध्यक्ष, कामरेड लवलीन कुमार, कामरेड दिनेश कुमार, कामरेड राम लाल,  कामरेड आर के जौली, सहायक सचिव  और अन्य प्रमुख नेता पंजाब बैंक कर्मचारी महासंघ भी सेमिनार में उपस्थित थे।