Thursday, March 07, 2019

मैं गौरी की बात करुँगी-कार्तिका सिंह

मैं हर छल की बात करूंगी
मंच संचालक कहते हैं कि 
यह बोलो 
पर यह न बोलो। 
देश संचालक भी कहते हैं 
यह बोलो और यह न बोलो। 
ठेकेदार समाजों के भी 
ठेकेदार रिवाजों के भी 
अक्सर मुझको यह समझाते 
यह बोलो और यह न बोलो। 
छोटी सी कोई ग़ज़ल सुना दो;
लेकिन दिल की बात न खोलो। 
तस्लीमा नसरीन से पूछा 
तुमने कैसे मन की कर ली?
तुमने कैसे मन की सुन ली?
तुमने कैसे मन की कह ली?
वह बोली हिम्मत थी मेरी 
वह बोली जुर्रत थी मेरी। 
सच देखा तो कहना चाहा। 
मन में एक तूफ़ान उठा था;
बाकी कुछ फिर टिक न पाया। 
जो सोचा वह कह ही डाला। 
लेकिन अभी भी भुगत रही हूँ। 
पल पल हर पल खौफ का साया। 
पल पल हर पल खौफ का साया;  
लगातार है पीछा करता। 
आगे बढ़ना भी मुश्किल था;
लेकिन पीछे मुड़ नहीं सकती। 
सच कहने में मज़ा बड़ा है;
झूठ से अब मैं जुड़ नहीं सकती। 
मेरी भी तक़दीर है गोली,
मेरी भी हत्या ही होगी!
लेकिन बर्बर मौत के डर से
सच का जीवन खो नहीं सकती। 
चैन का जो अहसास मिला है;
उस अहसास को खो नहीं सकती। 
फिर गौरी लंकेश से पूछा 
तुमने क्यों कर जान गंवायी!
वह बोली यह जान क्या है!
जीवन की औकात क्या है!
बस इक सांस का खेल है सारा;
इन सांसों की बात क्या है?
इन सांसों के चलते चलते 
सच को हम न देख सके तो!
सच को हम ने बोल सके तो 
फिर जीवन बेकार ही होगा!
इक बेजान सा तार ही होगा!
ऐसा जीवन क्या करना है?
इससे अच्छा तो मरना है!
मुझको तो रफ्तार पसंद थी 
सच की वह इक धार पसंद थी।
हाँ मुझको तलवार पसंद थी; 
लेकिन कलम ने यह समझाया!
शब्दों में भी जान बहुत है। 
जो तलवार भी कर नहीं सकती 
इन शब्दों में धार बहुत है। 
जिस दिन सच का परचम पकड़ा;
मेरी जान हथेली पर थी। 
मालूम था अंजाम यह मुझको!
लेकिन आँख हवेली पर थी। 

पूंजीवाद की वही हवेली 
जिस में कैद सहेली मेरी। 
वही सहेली-एक पहेली 
इस दुनिया का राज़ कहेगी। 
कदम कदम पर  जो साज़िश है-
उस का पर्दाफाश करेगी।  
इस दुनिया की हर इक औरत 
जिसपे अत्याचार हुआ है 
शब्दों से खिलवाड़ हुआ है 
वह औरत मुझसे कहती है-
तू  तो मेरा हाल बता दे। 
जो जो मेरे साथ हुआ है;
दुनिया को हर बात बता दे। 
कलम को पकड़ा है तुमने तो 
शब्दों से इक आग लगा दे। 
अब गौरी लंकेश की मानूं?
या मानूं तुम लोगों की मैं?
अब गौरी लंकेश है मुझमे 
अब मैं भी वह बात करूंगी। 
जिस जिस ने भी इस जनता को 
छलने का प्रयास किया है। 
मैं उस छल की बात करूंगी। 
मैं गौरी की बात करुँगी। 
मैं गौरी की बात करुँगी।   
                          -कार्तिका सिंह
29 जनवरी 2019 को सुबह सुबह 3:45 लिखी 

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