Sunday, December 23, 2018

पास्टर सुलतान मसीह की याद में डा. रमेश मंसूरां का निशुल्क आई कैंप

जहां पास्टर की हत्या की गयी वहां पर फिर उमड़ा प्रेम का संदेश 
लुधियाना: 23 दिसंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
बेहद लोकप्रिय थे पास्टर सुल्तान मसीह। हर किसी को हमेशां अपने  लगते। उनकी आवभगत भी कमाल की थी। बातें करते हुए जब वह ताली या चुटकी बजाते तो उनके स्टाफ को मालूम हो जाता कि इस मेहमान को क्या पसंद है। चाय या काफी? मीठा या नमकीन? पकौड़े या समोसे? उनकी आवभगत का अंदाज़ बिलकुल निराला था। 
किसी की सहायता करते वक़्त भी वह किसी को कानोकान खबर न होने देते। जिसकी मदद करते उसको भी बस उसे भी मदद होने पर ही पता चलता और उसे भी कहते बस चुप रहना।  यह सब भगवान येशु ने किया। उसको कभी कमज़ोर या हल्का महसूस न होने देते। जब 15 जुलाई 2017 को उनकी बर्बर हत्या की गयी तो बहुत से लोगों को लगा कि उन के सिर से उनका सहारा उठ गया। जिस चर्च में कभी हर पल रौनक औऱ खुशियों  का माहौल बना रहता था उस पर पुलिस का पहरा लग गया। यह सब कुछ सुरक्षा के लिए ही हुआ था लेकिन अहसास में कुछ डर सा अवश्य महसूस होने लगा। उस माहौल को तोड़ने में पास्टर सुलतान मसीह के बेटे अली शा ने बहुत हिमत दिखाई। पिता से बिछड़ने का गम भूलना आसान नहीं था लेकिन चर्च की ज़िम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने खुद को सहज किया। 
आज उसी चर्च में जब आँखों की जाँच का निशुल्क कैम्प लगा तो ऐसे महसूस हुआ जैसे वह प्रेम भरा पुराना माहौल फिर लौट आया हो। डाक्टर रमेश मंसूरां की देख रेख में पुनर्जोत अभियान का स्टाफ इस मेडिकल शिविर में सक्रिय था। जहाँ कभी पास्टर सुल्तान मसीह गरीबों की ज़िंदगी में आये अंधेरों को दूर किया करते थे वहीँ आज डाक्टर रमेश का स्टाफ गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की आँखों का इलाज करके उनकी ज़िंदगी में छाये अंधेरों को दूर कर रहा था। इस मौके पर पुनर्जोत अभियान के सक्रिय स्टाफ मेंबर मंजीत कौर कई कई बार भावुक हुई। इसी तरह एक और सक्रिय सदस्य रछपाल ऋषि ने भी कई बार पास्टर सुलतान मसीह को याद किया। 
वास्तव में यह कैंप उन्हीं की याद में लगाया गया था। चर्च में लगे इस कैंप में डाक्टर रमेश के स्टाफ को पूरा सहयोग दिया चर्च के स्टाफ ने।  बहुत से लोग आये। बहुत से लोगों ने इस कैंप का फायदा उठाया। किसी के ऑपरेशन की समस्या हल हुई। किसी को आँखों के दर्द की दवा मिली। किसी ने चश्में एक नंबर बनवाया। किसी ने ऐनक निशुल्क ली। यहाँ दवाएं भी बिलकुल फ्री बांटी गयी। खानेपीने का प्रबंध चर्च की तरफ से था। कुल मिलाकर यह एक सफल कैंप था। लोगों की भीड़ को देख कर शहीद पास्टर सुलतान मसीह के बेटे और मौजूदा पास्टर अली शा ने भी संतोष व्यक्त किया। जिस जगह पर पास्टर सुलतान मसीह की हत्या की गयी थी उस जगह पर फिर से शांति और जनसेवा का संदेश इस कैंप के ज़रिये लोगों तक पहुंच रहा था। ऐसे लग रहा था जैसे पास्टर  खुद इसी कैंप में मौजूद हों और छुप कर सब कुछ देख रहे हों। 

Saturday, December 22, 2018

इस तरह हुआ था नामधारी गुरुतागद्दी के सम्बन्ध में रहस्यमय खुलासा

Dec 21, 2018, 2:07 PM
21 दिसंबर: जब श्री जीवन नगर में कायम हुई थी त्याग की मिसाल 
21 दिसंबर 2012 को त्याग का अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जब श्री जीवन नगर, सिरसा में हजारों की संख्या में नामधारी संगत एकत्रित हुई पर माहौल शोकपूर्ण था क्योंकि मौका था सतगुरु जगजीत सिंह जी को श्रद्धांजलि देने का, जिन्होंने 13 दिसंबर 2012 को देह रूपी चोले को त्यागा था। 
श्रद्धा सुमन अर्पित करने का यह आयोजन ठाकुर दलीप सिंह जी और उनकी संगत की तरफ से किया गया था क्यूंकि श्री भैणी साहिब में रहने वाले ठाकुर उदय सिंह, जगतार सिंह आदि ने सतगुरु जगजीत सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात् भैणी साहिब पर कब्ज़ा करके पुलिस और प्राइवेट सेक्योरिटी लगवाकर पूरी तरह से प्रतिबंध लगवा दिया कि यहाँ संगत के आलावा चाहे कोई भी ऐरा-गैरा तो आ सकता है पर ठाकुर उदय सिंह के बड़े भ्राता ठाकुर दलीप और अपने सगे माता बेबे दलीप कौर को भैणी साहिब के अंदर आने की सख्त मनाही थी। यहाँ तक कि सतगुरु जी के अंतिम संस्कार के समय भी ठाकुर दलीप सिंह जी को अंदर आने की इजाजत नहीं मिली और अपनी मर्जी से अगले गुरु का चुनाव भी कर लिया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए श्री जीवन नगर की संगत और सतगुरु जगजीत सिंह जी के बड़े सपुत्र श्री ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ से श्री जीवन नगर इलाके में श्रद्धांजलि समागम करना पड़ा। इस समागम ने इस बात को साबित कर दिया कि जहाँ ठाकुर दलीप सिंह जी त्याग की मूरत हैं वहीं ठाकुर उदय सिंह प्रॉपर्टी और गद्दी के अभिलाषी हैं। 
                       इस समागम में एकत्रित संगत बहुत वैरागमयी अवस्था में थी क्योंकि संगत को सतगुरु जगजीत सिंह जी का बिछड़ना बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इस श्रद्धांजलि समागम में बहुत बड़ा खुलासा हुआ। यह खुलासा किया डॉक्टर इक़बाल सिंह जी ने जो सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी डॉक्टर रहे। वह  आयुर्वैदिक, फिजियोथेरेपी, एक्यूपंचर  आदि तरीकों से सतगुरु जी की सेवा करते थे। 
                     इस ऐतिहासिक आयोजन को सम्बोधन करते हुए डॉक्टर इक़बाल सिंह ने गुरुता गद्दी को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2012 को जब वह सतगुरु जगजीत सिंह जी के पास अकेले बैठे उनकी सेवा का सौभाग्य प्राप्त कर रहे थे तो सतगुरु जी ने उनसे कहा कि मैंने तुम्हे एक बात बतानी है पर तुम मुझे वायदा करो कि यह बात किसी को पता न चले। तुमने अभी किसी से कुछ नहीं बताना। फिर किसी कपड़े में लपेटा हुआ समान मुझे थमाते हुए कहा कि जब मैं यह शरीर त्याग दूंगा तो यह अमानत बड़े बेटे दलीप सिंह जी को देनी है और सारी संगत  को यह बात बतानी है कि मेरे बाद दलीप सिंह जी को ही अपना गुरु मानें। डॉ साहिब ने वह अमानत संगत के सामने  खोल  के दिखाई।  इसमें कुछ वस्त्र के अलावा एक दस्तार, एक नारियल, पांच पैसे तांबे के व एक आसन था। डॉक्टर साहिब ने ठाकुर दलीप सिंह जी के चरणों में यह अमानत लेने की विनती की। उनके साथ सतगुरु जगजीत सिंह जी के निजी सेवक दीदार सिंह और पंथ के सिरमौर सूबा साहिबान भी खड़े थे। उन सभी ने भी विनती कि सतगुरु जी के हुक्म अनुसार अब आप जी ही पंथ की बागडोर सम्भालो और उन्हें दुविधा से बाहर निकालें। यह सारा दृश्य देख-सुन कर निराश हुई संगत को थोड़ी राहत मिली और सारा पंडाल जैकारों से गूंज उठा और कितनी देर गूंजता रहा। फिर एक आशा भरी नज़र से संगत ने जैसे ही ठाकुर दलीप सिंह जी की तरफ देखा तो सभी दंग रह गए। जब ठाकुर दलीप सिंह जी ने बड़ी ही शालीनता और विनम्रता से सतगुरु जी की भेजी हुई अमानत ले कर अपने मस्तक से लगाई फिर बहुत ही सम्मान से माता चंद कौर जी की तस्वीर के आगे रख दी। आप ने संगत को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक तरफ मेरे छोटे भाई गद्दी पर बैठे हैं दूसरी तरफ मैं गद्दी को अपना कर पंथ को विभाजित नहीं करना चाहता। मैंने पंथ को जोड़ना है। तोड़ना नहीं है। इसके आलावा इस समय माता जी पंथ की सर्वोच्च हस्ती हैं। मैंने उनके आगे यह अमानत रख दी है और मैं चाहता हूँ कि जब तक हमारी आपसी एकता नहीं हो जाती तब तक आप सभी लोग माता जी को गुरु रूप में स्वीकार करें क्योंकि माता जी सभी के लिए सम्मानीय हैं और सतगुरु जगजीत सिंह जी की धर्मपत्नी भी हैं। इस पर संगत को हौंसला नहीं हो रहा था। संगत तो इस तरह तड़प रही थी जैसे पानी के बिना मछली। पर ठाकुर दलीप सिंह जी अपने वचन पर अटल रहे और त्याग का वह महान सबूत दिया जो बेमिसाल था और वह त्याग था केवल पंथ की एकता के लिए। 
                 इसके आलावा आपके द्धारा आज भी जो प्रयत्न किए जा रहे हैं उन्हें देखकर यही प्रतीत होता है कि वे इस महान पंथक-एकता के साथ-साथ आपसी एकता व् सौहार्द्य को बढ़ावा देने के लिए निरंतर यत्नशील हैं।                                                 रिपोर्ट:: प्रितपाल सिंह खालसा--7814545781 प्रेषक:राजपाल कौर

Sunday, December 09, 2018

राम मन्दिर कानून से नहीं-शक्ति से बनेगा-ठाकुर दलीप सिंह का संदेश

9 December 2018 को 19:28 बजे किया गया (WTM by RPK)
अब श्रीराम तंबू में न रहे-भव्य मंदिर शीघ्र बने:महन्त रामदास
जालन्धर: 9 दिसम्बर 2018: (राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
अरविंदर सिंह द्धारा दिल्ली से प्राप्त तस्वीर संदेश 
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर के भव्य निर्माण के लिए कोई कानून बन सकता है तो ठीक नहीं तो बिना कानून ही बनवा दीजिए क्योंकि जब श्रीराम मन्दिर गिराया था तो किस कानून के अधीन गिराया था जो बिना कानून गिराया हो वह बिना कानून ही बनेगा। सरकार गिरे या बचे कोई भी हालात बनें लेकिन भव्य निर्माण श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए हमारी नामधारी संगत पूर्णरूप से आपके साथ है। क्योंकि कानून कमजोरों के लिये होता शक्तिशालियों के लिये कोई कानून नहीं होता उक्त संदेश नामधारी समाज से सत्गुरू दलीप सिंह जी महाराज द्वारा भेजा गया था जिसे संत पलविन्द्र सिंह ने आज शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मन्दिर परिसर में आयोजित विराट धर्म सम्मेलन के दौरान पढ़कर सुनाया। संत पलविन्द्र सिंह ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 625 रियासतों को जबरदस्ती भारत में शामिल किया था वह किस कानून के अधीन किया था। इस प्रकार के महान कार्य किसी कानून के अधीन नहीं होते सरकार जो करती है वही कानून होता है। अभी मथुरा में भगवान श्री राम जी का मन्दिर और काशी में विश्वानाथ मन्दिर भी बनाना है। यह कब बनेंगे इसका सीधा स्पष्ट उत्तर है कि यदि आप सोचते हैं कि मुस्लमानों को सहिमत करके मन्दिर बनाएंगे तो वह संभव नहीं। उन्होंने केन्द्र सरकार को आग्रह किया कि वह 31 दिसम्बर से पहले श्रीराम भव्य मन्दिर बनवा दें आपकी सरकार का जो हाल हो उसकी चिंता न करें वरना अगली सरकार बनानी मुश्किल हो जायेगी। 
संदेश में यह भी कहा गया कि हरिमन्दिर साहिब पर भारतीय फौज का आक्रमण किस कानून के अधीन हुआ था। कांग्रेस के समय में इंदिरा गांधी की हत्या के पश्चात किस कानून के अधीन सिखों का कत्लेआम हुआ था इसलिए स्पष्ट है कि कानून वहीं होता है जो सरकार देती है। 

उन्होंने कहा कि हम नामधारी राष्ट्रवादी है भारतीय संस्कृति को मानते हैं व उसके रक्षक हैं इसलिए भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिये भव्य राममन्दिर श्रीराम जन्मभूमि पर अवश्य बनना चाहिए।
महामण्डलेश्वर रामेश्वरदास (हरिद्वार) ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हमारी भारतीय संस्कृति की आस्था आस्मिता व गौरव हैं और भारत में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मन्दिर न बनना हमें लज्जा दिलाने वाला है आज जरूरत अपनी शक्ति, सामर्थ को पहचाने की है। हिन्दू समाज लम्बे समय से श्रीराम मन्दिर निर्माण के लिये संघर्षरत हैं। वर्तमान आंदोलन भी 30 वर्षों से चलाया जा रहा है। हिन्दू समाज चाहता है कि अयोध्या में भव्य राम मन्दिर बनें इससे जुड़ी सभी बाधाएं दूर हो लेकिन यह प्रतिक्षा अब लंबी हो चुकी है। 2010 में उच्चन्यायलय ने जो फैसला दिया था वह 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और जब न्यायालय से पूछा गया कि अब इसकी सुनवाई कब होगी तो कहा गया कि हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं। कब सुनना है यह न्यायालय का अपना अधिकार है लेकिन न्यायालय के इस जवाब से हिन्दू समाज अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है और यह बात समस्त हिन्दू समाज के लिये आश्चर्यजनक व वेदनापूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय को पूर्णविचार करना चाहिए यहां समाज को न्यायालय का वहीं न्यायालय को सामान्य समाज की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। यदि न्यायालय की प्राथिमकताएं बाधा बनती हैं तो सरकार को इस संबंध में उचित अध्यादेश लाना चाहिए ताकि सपष्ट हो सके कि कौन है जो हिन्दू समाज की अवहेलना कर रहा है। फिर हिन्दू निर्णय करेगा कि उसे सत्ता किसके हाथों में देनी है। 
उत्तर क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख राकेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में हिन्दुओं को बांटकर अपनी राजनीति चमकाने का कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि हिन्दू अब जागृत हो रहा है। अब इनको अलग-अलग जाति साम्प्रदाएं में बांटने वाले बाज़ आएं अब भारत देश पर वहीं राज करेगा जो हिन्दू समाज का सम्मान करेगा। किसी धर्म विशेष को खुश करने की नीति रखने वाले या तो राजनीति करना छोड़ जाएं अन्यथा अब जागृत हिन्दू समाज अपने निर्णय अपनी संस्कृति व समथ्र्य के अनुरूप लेकर देश को सही ढंग से चलाने के लिये भी सक्षम है। श्री राकेश जी ने कहा कि 100 करोड़ हिन्दुओं की अवहेलना करके देश की सत्ता संभालने का दम भरने वाले सभी धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक दल अपनी कार्यविधि में समयानुकुल सुधार कर लें वरना अब हिन्दू समाज उन्हें माफ करने वाला नहीं है।
इस अवसर पर धार्मिक, संकीर्तिण व पवित्र मंत्रोच्चारण के साथ गणेश वंदना व श्रीराम स्तुति के पश्चात वहां उपस्थित सभी राम भक्तों ने अयोध्या में भव्य मन्दिर निर्माण का शंखनाध करते हुए अपना सक्रिय सहयोग करने का प्रण लिया। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के स्वामी सच्चदानंद, महामण्डलेश्वर 1008 महंत गंगा दास, महन्त रामदास,  व पूज्य संत समाज, बुद्धिजीवियों ने श्रीराम मंदिर के इतिहासिक व पौराणिक महत्व व वर्तमान दौर में उसकी सार्थकता की जानकारी देते हुए सभी रामभक्तों को इस पुनित कार्य में अपनी सक्रिय अहूति देने के लिये प्रेरित किया। 
बरागी आश्रम श्री राम मंदिर के 108 महंत रामदास ने कहा कि अब श्रीराम तंबू में न रहे, श्रीराम का भव्य मंदिर शीघ्र बनें इसके लिये संयुक्त प्रयास होना चाहिए अब इस विषय पर कोई भी राजनीति स्वीकार्य नहीं है। 
इस अवसर पर असंख्य रामभक्तों ने रामल्ला हम आएँगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का। श्री राम हमारे प्राण हैं, मन्दिर में देरी अपमान है। मन्दिर बनने वाला है, इतिहास बदलने वाला है। हर घर भगवा छाएगा, श्रीराम राज फिर आएगा। एक ही नारा, एक ही नाम, जय श्री राम, जय श्री राम। रामल्ला के वास्ते, खाली करदो रास्ते। जन्मभूमि के काम न आए, वो बेकार जवानी है। लाठी गोली खाएंगे, मन्दिर भव्य बनाएंगे। जिस हिन्दू का खून खोले, वो खून नहीं पानी है के गगनचूंबी उद्घोष कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद पंजाब के अर्चकमण्डल के अध्यक्ष पंडित एस.के. शास्त्री, राज गुरू पंडित अशोक मोदगिल, महंत मथुरादास, महंत राज किशोर, महंत कमलेश, दिव्य ज्योति जागृत संस्थान (नूरमहल) से स्वामी सज्जनानंद, स्वामी हरिवल्लभानंद, स्वामी नरेशानंद, स्वामी तरुणेशानंद, राष्ट्रीय संत पंडित दीन दयाल शास्त्री (अध्यक्ष विश्व मानव कल्याण मिशन), महन्त बीलराम दास , महन्त राज किशोर, महन्त सिया शरण दास, महन्त कमलेश दास, महन्त केशव दास, महन्त पवन दास,  महन्त परमेश्वारदास, महन्त श्रवण दास, महन्त बलरामदास, स्वामी धर्म विवेक जी, महन्त अशोक कुमार, काठगढ़ नवांशहर से स्वामी दयाल दास, संत बिहारी दास, संत गोपाल दास, संत सत्य नारायण, बाबा पाल जी नागी, नामधारी संत दया सिंह , संत दर्शन सिंह , संत अमरीक सिंह, संत तेजिन्द्र सिंह, संत पलविन्द्र सिंह, संत गुरूमुख सिंह, संत दर्शन सिंह, संत रणवीर सिंह, संत गुरमीत सिंह, संत सेवा राम व अन्य तपस्वी, साधक व धर्म प्रेमी उपस्थित रहे। 
श्रीराम मंदिर न्यास समिति, जालन्धर इकाई से कोई सवाल हो तो सम्पर्क नंबर है:98140-71007

Wednesday, November 28, 2018

त्रिशूल और खण्डे को अन्याय के खिलाफ एकजुट करने का प्रयास

शिव मंदिर फिल्लौर में भी मनाया गया गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व 
28  नवंबर 2018 को प्राचीन शिव मंदिर नगर (फिलौर) से लौट कर पंजाब स्क्रीन टीम
बात केवल कोई पर्व मनाने की नहीं है। गुरुपर्व हो, रामनौमी हो, जन्माष्टमी हो, ईद हो या क्रिसमिस। इन त्योहारों को हम अपनी आस्था के मुताबिक घर में शायद ज़्यादा अच्छी तरह मना सकते हैं। शोर शराबे और भागदौड़ से कुछ समय के लिए दूर रह कर अपने गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और अवतारों से जुड़ कर, उनके उपदेशों का मर्म समझ कर। कुछ देर के लिए ही सही उनके संघर्षों भरे जीवन का मनन करके। भगवान और उनके दूत दिखावा नहीं केवल प्रेम चाहते हैं। 
मीरा को ज़हर दिया जाना और मीरा का ज़हर पीना आज भी यही बताता है कि आस्था से प्रेम आसान नहीं होता। सिर  को हथेली पर लेकर आना पढ़ता है प्रेम की गली में। सलीब केवल ईसा को मिली ऐसा मत सोच लेना। आस्था और विश्वास पर टिकोगे तो आज भी सलीब पर चढ़ना पड़ सकता है। माता चंद कौर की दिन दिहाड़े हत्या यही दिखा रही है कि आज भी माहौल उसी तरह का बन गया है। आज भी ज़हर का प्याला,  गोली या सलीब ही है धर्म के मार्ग पर चलने का परिणाम। जो मौत  में भी  जीवन देख सके वही इस रास्ते पर आये। भयभीत और स्वार्थ या लालच से भरे लोगों का इस रह पर आना सभव ही नहीं। 
गुरुओं, पीरों, पैगंबरों और अवतारों की मानोगे तो सत्य की राह पर चलना पड़ेगा। सत्य की राह पर चलना हो तो अपने सिर को हथेली पर रखने को तैयार रहना। आसान नहीं होगा इस राह पर चलना। असत्य और अन्याय की तरफ धनवान और बाहुबली होंगें और सत्य की तरफ केवल संघर्ष और प्रेम होगा। चुनाव आप ने ही करना है लेकिन ध्यान से करना। कंस की तरफ खड़े होना है या कृष्ण की तरफ। बाबर की तरफ या नानक की तरफ। 
अपने अपने समय में सभी गुरुओं और अवतारों ने अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। गलत को गलत कहा। शोषण का विरोध किया। इसके साथ ही एकता का संदेश भी दिया लेकिन सिर को हथेली पर रख कर ही दिया। इस एकता ने ही बड़े बड़े तख्तनशीनों को उखाड़ फेंका। गुंडागर्दी उस समय भी थी। बाहुबलियों का दुरपयोग उस समय भी होता था। 
इस सारी जंग में उनकी कुर्बानियों को चमत्कारों का नाम दे कर छोटा मत करो। उनको मानना है तो उनके बताये मार्ग पर चलो। आज भी खतरे उसी तरह मौजूद हैं। फैसला आपके हाथ में है। सत्य की तरफ आना है या झूठ की तरफ जाना है। कोई मजबूरी भी नहीं है। अंतरात्मा की आवाज़ सुननी है या इसको अनसुना करना है। इसका फैसला आपके हाथ में है। 
आज यहाँ प्राचीन मदिर में जो लोग एकत्र हुए हैं वे अपनी मर्ज़ी से अपने कामकाज छोड़ कर आए हैं। इनको समझ में आ चुका है कि बाहुबलियों के शोषण को समाप्त करना है तो एकता करनी होगी। एकता में प्रताप है-पंथ तोड़ना पाप है। मंदिर में गूंज रहे गुरु नानक देव जी के जैकारे और शब्द गुरुनानक देव जी के जीवन का संघर्ष याद दिला रहे हैं। 
यहां ठाकुर दलीप सिंह जी की प्रेरणा से मंदिर कमेटी ने श्री गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाने का आयोजन किया है। करीब एक हज़ार वर्ष पुराने इस मंदिर में भजन भी गाए जा रहे हैं और शब्द भी। मंदिर में लगा नामधारी प्रमुख ठाकुर दलीप सिंह का बैनर बता रहा है कि इस मंदिर में भी गुरु पर्व मनाने का संदेश लागू हो चुका है। मंदिर के एक सेवादार अमरजीत सिंह बताते हैं कि वैसे तो वह यहाँ हर  करने आते हैं लेकिन आज उनको यहाँ आ कर बहुत प्रसन्नता हुई है।  इसी तरह  मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहाँ इस तरह का आयोजन किसी चमत्कार से कम नहीं है। मंदिर की सेवा में आई मंदिर कमेटी महिलाओं में भी उत्साह है। 
यहाँ पर हिन्दुओं और सिखों का उत्साह बता रहा है कि अब वही पहले जैसी एकता फिर से हो कर रहेगी। एकता तोड़ने वाले तत्वों को फिर मुँह की खानी पड़ेगी। इस अवसर पर नामधारी संगत भी मौजूद थी और मंदिर में आने वाली हिन्दू संगत भी। सभी ने श्री गुरु नानक देव जी की तस्वीर के सामने बहुत ही श्रद्धा से माथा टेका और शब्द गायन में हिस्सा लिया। 
इस मंदिर में आई हुई संगत को देख कर लगता था जैसे मंदिरों में गुरु पर्व मनाने की बाढ़ सी आई हुई है। एकता की एक ऐसी आंधी जो फुट डालने अले तत्वों को अपने साथ ही उड़ा ले जाएगी। 

Wednesday, November 21, 2018

दुर्लभ सर्जरी से ठीक की NRI की इरेक्टिल डिसफंक्शन की समस्या

Nov 21, 2018, 3:06 PM
इस समस्या के कारण दूसरी शादी भी थी टूटने की कगार पर
लुधियाना:  21 नवंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
आधुनिक जीवन शैली और अन्य कारणों की वजह से इरेक्टिल डिसफंक्शन अर्थात नपु्ंसकता या शीघ्र पतन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन एक करोड़ से अधिक मामले तो अकेले भारत में ही सामने आ रहे हैं। नपुंसकता की यह समस्या किसी शारीरिक या मानसिक अवस्‍था का गहरा संकेत हो सकता है। इसका विश्लेषण करने से ही इस समस्या के सही कारणों का पता लगाया जा सकता है। निरंतर गंभीर हो रही इस कारण जहाँ तनाव बढ़ रहा है वहीँ रिश्तों में मनमुटाव की भी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। कुल मिला कर यह समस्या ज़िंदगी का एक ऐसा दुखद दर्द बन जाती है जिसे सभी के साथ बांटा भी नहीं जा सकता। यह समस्या केवल पंजाब या अन्य भारतीय राज्यों में ही नहीं बल्कि विदेशों में रह रहे लोगों को भी है। लुधिया के एक प्रसिद्ध अस्पताल से जुड़े एक डाक्टर ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसे ें आर आई का इलाज किया है जिसकी इस समस्या का निदान कैनेडा में भी नहीं हो सका था। 
कनाडा में रहने वाले एनआरआई सुरजीत (बदला हुआ नाम) को आ रही इरेक्टिल डिसफंक्शन (नपु्ंसकता/शीघ्र पतन) की समस्या के कारण उसकी दूसरी शादी भी टूटने के कगार पर पहुंच गई थी। क्योंकि वह सेक्सुअल तौर पर अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पा रहा था। जब किसी भी डॉक्टर का इलाज उसके काम नहीं आया तो उसने अंतिम स्पेट के तौर पर दीप हॉस्पिटल के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. आनंद सहगल से संपर्क किया। उन्होंने पेनिल इंप्लांट सर्जरी के जरिए सिलीकॉन सिलेंडर इंप्लांट करके इस समस्या का स्थाई समाधान कर दिया।
बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दीप हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. आनंद सहगल ने बताया कि 17 नवंबर को अस्पताल के एक्सट्रा मॉडर्न ऑपरेशन थिएटर में उसकी पेनिल इंप्लांट सर्जरी की गई। जिसके जरिए इंपोर्टेड इन्फ्लाटेबल सिलिकॉन सिलेंडर इंप्लांट किए गए। जिस कारण इरेक्टिल फंक्शन ठीक तरह से काम करने लगा। सर्जरी के दौरान इंप्लांट करते समय सावधानी बरतते हुए वैक्टीरिया फ्री माहौल की जरूरत होती है। ताकि रिजल्ट शत-प्रतिशत सही हो। इस सर्जरी में ढाई घंटे का समय लगा। इंप्लांट के लिए इस्तेमाल किया गया सामान अमेरिकन मेडिकल सिस्टम्स (एएमएस) कंपनी से मंगवाया गया था। प्रोसीजर के कुछ घंटों बाद से ही सुरजीत ने भोजन लेना शुरू कर दिया और दूसरे दिन ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ. सहगल ने बताया कि यह इंप्लांट सर्जरी उन लोगों के लिए वरदान है, जो इस तरह की समस्या झेल रहे हैं और दवा से उनका इलाज नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि डाइबिटीज मेलिटस, एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण ब्लड सप्लाई में कमी और हार्मोनल असंतुलन समेत कई कारणों से यह समस्या आ सकती है। हाइपरलिपिमीडिया, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस, मोटापा, वजन ज्यादा होना व स्मोकिंग इस समस्या को जन्म देते हैं। एक्सरसाइज नहीं करना भी इसका कारण बनता है। लगातार एक्सरसाइज करके और शारीरिक व मानसिक तौर पर फिट रहकर इस समस्या से बचा जा सकता है।
दीप हॉस्पिटल के एमडी डॉ. बलदीप सिंह ने कहा कि उनके अस्पताल में यूरोलॉजी के फील्ड में विश्व स्तरीय रीकंस्ट्रक्टिव व आधुनिक सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस कारण लोगों को अब इस तरह की समस्याओं के लिए देश के दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दूसरी तरफ होम्योपैथी, आयुर्वेद और योग चिकत्सा में इस समस्या के सफल इलाज का दवा किया जाता है जिसकी चर्चा हम किसी अन्य पोस्ट में करेंगे। 

Saturday, November 03, 2018

जालंधर स्कूल के छात्र वर्ग ने कुंग-फु में दिखाए जौहर

मार्शल आर्ट को हर घर तक पहुंचने का संकल्प 
जालंधर:3 नवम्बर 2018:(राजपाल कौर//पंजाब स्क्रीन)::
जालंधर विदियक सोसायटी की ओर से चल रहे जालंधर स्कूल गदाईपुर के छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण  विकास के लिए किए जा रहे प्रयास बच्चों की सफलता में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। यह प्रयास बच्चों को ज़िंदगी की बुलंदियां छूने की ओर अग्रसर करने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं। एक छोटे से गांव में रहने वाले साधारण से परिवारों के बच्चे खास कर लड़कियाँ मार्शल आर्ट के सभी खेलो को करने में सक्षम हो गई हैं। अब इन छात्र छात्रों ने स्टेट लेवल प्रतियोगिता तक पहुँच कर भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। इन बच्चों ने  गोल्ड, सिल्वर और कांस्य पदक भी हासिल किए हैं। इनको कोचिंग देने और अभ्यास कराने में प्रवीण जी और मोहम्मद हैदर ने सक्रिय भूमिका निभाई है। इन कोच साहिबानों की मेहनत से जालंधर स्कूल गदाईपुर के दस बच्चों ने पदक और सर्टिफिकेट  हासिल किए हैं। इन परिणामों में लावण्या तीन फाइटों के मुकाबले के बाद प्रथम रही और स्वर्ण-पदक हासिल किया।  इसी तरह चुटुन ,हर्ष,नितेश ,चंदन और आदित्या ने सिल्वर पदक प्राप्त करके नाम रौशन किया। बरुन, भूमिका, आसिफ और अमन ने कांस्य पदक हासिल करके नई संभावनाओं का संकेत दिया। आज स्कूल में विजेता बच्चों को सारे स्टाफ की तरफ से बधाई दी गई और मुख्याध्यापिका राजपाल कौर ने बच्चों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ कर जीत हासिल करने की प्रेरणा दी। इस मौके पर मैडम मीनाक्षी, जसवीर कौर, संदीप कौर, सोनम, सेसा श्रेष्ठा, संगीता, मीना कुमारी, राधा, नीलम पाल और शिवानी हाजिर थी।   

Thursday, November 01, 2018

अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया! ---कार्तिका सिंह

पहली नवम्बर को पंजाब दिवस पर विशेष काव्य रचना
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया!
साज़िशों की बाढ़ में पंजाब सारा बह गया। 
कहीं है हिमाचल, कहीं हरियाणा रह गया;
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया। 

खेत मिट रहे हैं-खतरे में बाग़ है। 
मक्की की रोटी कहां सरसों का साग है?
भेलपूरी छा गयी है; बर्गर पीज़ा रह गया! 
अपना पंजाब अब पंजाब  कहां रह गया। 

ख़ुदकुशी की खबरें हैं, जुर्मों का राज है। 
ठेके हैं शराब के बस नशे का ही राज है!
कहीं लाल परी, कहीं चिट्टा पाउडर रह गया। 
अपना पंजाब अब पंजाब  कहां रह गया। 

कौन देखे आ के जो पंजाब बना आज है!
रोज़ आती खबरों में लापता सी लाज है!  
सत्ता का यह ताज भी मज़ाक बन के रह गया!
अपना पंजाब अब पंजाब कहां रह गया। 

लूट गया पंजाब बचा क्या जनाब रह गया?
पानी और खेतों का हिसाब कहाँ रह गया?
प्रेम की निशानी वो चनाब कहाँ रह गया!
अपना पंजाब अब पंजाब कहाँ रह गया?
                                   --कार्तिका सिंह 
(शुक्रवार 12अक्टूबर 2018 को रात्रि 11:27 बजे) 

Monday, October 22, 2018

अश्वनी सग्गी बने शिवराज सेना के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

समाजिक बदलाव के प्रयासों को देंगें विशेष पहल 
लुधियाना: 21  अक्टूबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
देश और समाज के हालात फिर नाज़ुक हो रहे हैं। देश विरोधी तत्व फिर सर उठा रहे हैं। ऐसे में देश और समाज की चिंता करने वाले लोग एक बार फिर सक्रिय हो कर सामने आ रहे हैं तांकि आम जनता को जागृत कर के समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एक नई चेतना पैदा की जा सके। इस तरह के संगठनों और व्यक्तियों में अश्वनी सग्गी और उनसे जुड़े संगठन भी शामिल हैं। अश्वनी सग्गी और उनके प्रयासों से समाज में नया बदलाव लाने की कोशिशें एक बार फिर तेज़ हुई हैं।  उल्लेखनीय है कि अश्वनी सग्गी लम्बे समय तक रेलवे में काम करने के बाद हाल ही में रिटायर हुए हैं। रेलवे से रिटायर होने के बाद उनकी प्राथमिकता समाज के लिए कुछ नया करने की रही है।  
उनके सहयोग से शिवराज सैना पजाब भी समाजिक उत्थान के लिए सक्रिय हो कर सामने आ  रही है। आज लुधियाना के सर्कट हाउस मे शिवराज सैना के एक विशेष बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता संगठन के चैयरमैन रवि, पजाब वाईस प्रधान अशवनी मलहोतरा और वरिष्ठ सियासी कार्यकर्ता राजु थापर ने संयुक्त रूप से की। गौरतलब है कि राजू थापर इस संगठन के राज्य सचिव भी हैं। इस बैठक में समाज और सियासत की मौजूदा स्थिति पर गहन विचार विमर्श किया गया।इस अवसर पर शिवराज सैना के राष्ट्रीय संचालक श्री रमेश भगत  भी विशेष तौर पर पहुंचे। इस बैठक में एक विशेष घोषणा करते हुए जानेमाने समाजसेवी अश्वनी सगी को अखिल भारतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुकत किया गिया। इसी बैठक में संगठन और कार्यालय का पोस्टर भी रिलीज किया गिया। शिवराज सैना की पूरी टीम इस मौके पर मौजूद रही। 

Saturday, October 20, 2018

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 का मुकाबला शुरू

Oct 20, 2018, 5:14 PM
तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आवश्यक है 
लुधियाना: 20 अक्टूबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
एक देश के लिए ख़ुद को महा-शक्ति कहलाने के लिए ज़रूरी होता है कि वह तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश करे-डा. परवीन कुमार खोसला, सहयोगी निर्देशक टीबआरऐल्ल
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 का मुकाबला हुआ शुरू
‘‘भारत जैसे किसी भी देश के लिए ख़ुद को महा-शक्ति कहलाने के लिए ज़रूरी होता है कि वह देश विज्ञान तथा तक्नालोजी के क्षेत्र में अधिक निवेश करे, जिससे भविष्य के उत्पादों एवं तक्नालोजी को स्वदेशी ढंग से विकसित किया जा सके तथा देश को तकनीक के तबादलो के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होने की ज़रूरत न पड़े।’’ इन शब्दों को व्यक्त किया टर्मिनल बलास्टिक रिर्सच लैबारटरी (टीबआरऐल्ल) के सहयोगी निर्देशक एवं डीआरडीओ विज्ञानी डा. परवीन कुमार खोसला ने किया जो कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में शुरू हुए नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 नामी मुकाबले के उद्घाटनी समारोह में पहुँचे थे।
इस दो दिना नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 में बहुत सारे सक्षम विज्ञानी एवं फ्रीलैंस एप डिवैलपर हिस्सा ले रहे हैं, जिस दौरान वह विद्यार्थियों के साथ टैकनॉलॉजी सैशनें के द्वारा बातचीत करेंगे, तथा उन्हें अंतरिक्ष के क्षेत्र में इस्तेमाल करीं जाने वाली तकनीकों, इन्टरनेट ऐपलीकेशनों तथा उनमें आ रहे बदलावों के बारे में आग्रह करवाया जायेगा। इस चैलेंज में 48 घंटे बिना रुकने वाला हैकेथौन शामिल है, जिस में विद्यार्थी आगे वाली पीढ़ी की त1नालोजी विकसित करने में हिस्सा लेंगे।
इस एप चैलेंज के दौरान 30 भारतीय यूनिवर्सिटियाँ एवं कालेजों के विद्यार्थी मुकाबले में हिस्सा लिया जा रहा हैं। जिन में पंजाब इंजीनियरिंग कालेज चंडीगढ़, चितकारा यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी आफ लखनऊ, ऐस्सआरऐम चेन्नई,अमृता यूनिवर्सिटी केरला इत्यादि शामिल हैं। हिस्सा लेने वाली टीमें मोबाइल ऐपस विकसित करेंगी जो स्पेस सायंटिस्टों के द्वारा ब्रह्मांड की रहस्यमयी दुनिया को समझने के लिए इस्तेमाल करी जा सकें।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं के ऐरोसपेस इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों के साथ बातचीत करते हुए डा. परवीन कुमार खोसला ने कहा कि भारतीय स्पेस प्रोगराम वर्तमान समय अमरीका, जापान, रूस, यूके तथा चीन सहित चोटी के 5 देशों में शामिल है। भारतीय स्पेस अनुसंधान एजेंसी इसरो द्वारा किये गए सफल अंतरिक्ष मिशनों के चलते भारतीय स्पेस विज्ञानियों की विश्व स्तर पर भारी माँग की जा रही है। उन्होंने आगे कहा, ‘‘नवयुवको द्वारा अपने कैरियर के बदल के तौर पर साइंस को चुनने का रुझान हर साल घटना एक गंभीर मुद्दा है। सरकारें इस बारे ज़िम्मेवाराना नोटिस लेते हुए ज़रुरी बदलाव करे । जैसे कि विज्ञान तथा तक्नालोजी के क्षेत्र में भविष्य बनाने के मौकों को प्रोत्साहन दिया जाये जिससे आज के नवयुवक इस क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए प्रेरित हो सकें।’’ 
फोटो कैप्शन: (1) चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घड़ूंआं में शुरू हुए नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 के हैकेथौन मुकाबले में भाग लेते अलग अलग यूनिवर्सिटियों के विद्यार्थी।
(2) नासा स्पेस एप चैलेंज 2018 के दौरान विद्यार्थीयों के साथ अपने विचार सांझे करते हुए टीबआरऐल्ल के सहयोगी निर्देशक एवं डीआरडीओ विज्ञानी डा. परवीन कुमार खोसला।

Wednesday, October 10, 2018

गांव गिल्लां जालंधर में निशुल्क आयुर्वेदिक कैंप

Oct 9, 2018, 5:33 PM
जारी रहेगी कैंपों की श्रृंखला -डा सुरेंद्र कल्याण
जालंधर: 9 अक्टूबर 2018 (राजपाल कौर):: 
जालंधर में स्वस्थ्य सुरक्षा अभियान जारी है।  हर व्यक्ति रोग मुक्त रहे इसका प्रयास लगातार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लगाए जाते शिविरों के सिलसिले में एक विशेष कैम्प जालंधर के कैम्प गाँव गिल्लन में लगाया गया। इस कैम्प में 96 रोगियों का निरीक्षण किया गया। इस कैम्प में महंगे टेस्ट भी किये गए और दवाएं भी निशुल्क दी गयीं। इसी शिविर में 2 व्यक्तियों की निशुल्क ईसीजी भी की गयी। इसके साथ ही 
34 व्यक्तियों की शूगर जांच भी निशुल्क की गयी। 
निदेशक आयुर्वेद डा राकेश शर्मा के निर्देशानुसार व जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा.सुरेंद्र कल्याण की अगुवाई में पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ.चेतन महता ने गुरुद्वारा बाबा हुकमगिर जी गाँव गिल्लां जालंधर मे आज अमावस्या के मेले मे निशुल्क आयुर्वेदिक कैंप लगाकर 96 रोगियो का निरीक्षण कर दवाइयां वितरित की।कैप में डा. सवर्ण सिंह चुगावां,बी डी शर्मा का विशेष सहयोग रहा। जिला आयुर्वेद अधिकारी डा सुरेंद्र कल्याण ने विशेष बातचीत में डा.चेतन मेहता के प्रयासों की प्रशंसा करते हुये कहा कि उनके निस्वार्थ प्रयासों से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए व उनका अनुकरण करना चाहिए। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कैंप टीम को सम्मानित किया।इस अवसर पर मनजीत कौर, सोनिया, कामिनी, लवप्रीत कौर, अमनदीप कौर व मुनीश भी उपस्थित रहे। पूरे गाँव के साथ साथ आसपास इ इलाकों में भी इस कैम्प की प्रशंसा में चर्चा चल रही है। 

Wednesday, October 03, 2018

खतरे में अमन है.....//--कार्तिका सिंह

अमन की बातें लेकर देश भर में घूम रहे अमन के कारवां को समर्पित 
साभार चित्र
खतरे में अमन है 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
गफलत की नींद जो सोए हैं--
उनको भी जगाना ही होगा। 
खतरे में अमन है... 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
खतरे में अमन है........ 

हर गली गली में खतरा है।
हर कदम कदम पर खतरा है 
हर मोड़ पे कोई खतरा है!
हर कोने में कोई खतरा है-
आवाज़ लगाना ही होगा। 
खतरे में अमन है 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
खतरे में अमन है........ 

इंसान की कीमत कुछ भी नहीं। 
कीमत है व्यर्थ रिवाजों की। 
भगवान को सोना चढ़ता है 
कीमत बढ़ती है अनाजों की। 
इंसान की जान बचाने को 
अब इन्कलाब लाना होगा।  
खतरे में अमन है 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
खतरे में अमन है........ 
साभार चित्र 
यहाँ देवी पूजी जाती है 
पर कन्या मारी जाती है। 
न बच्ची यहाँ सुरक्षित है 
न बूढी यहाँ सुरक्षित है। 
हर मोड़ पे लुटती महिला को 
हम सब को बचाना ही होगा। 

खतरे में अमन है 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
खतरे में अमन है........ 

जब छिड़ी थी जंग आज़ादी की;
तब हमीं मैदान में आए थे। 
हम झूल रहे थे फांसी पर,
यह माफ़ी मांग के आए थे। 
इन रंग बदलते चेहरों का,
हर रंग दिखाना ही होगा। 
खतरे में अमन है 
हम सब को 

अब आगे आना ही होगा।
                --कार्तिका सिंह
 अमन का संदेश देता अमन का कारवां जम्मू में एक गीत गाता हुआ 

Tuesday, October 02, 2018

शाही इमाम के सचिव से लूटपाट करने वाले लुटेरे गिरफ्तार

Oct 2, 2018, 5:42 PM
लुधियाना पुलिस की सतर्कता काम आई: मुस्तकीम अहरारी
एडीसीपी-1 गुरप्रीत सिंह सिकंद, एडीसीपी सैंट्रल बरियाम सिंह का धन्यावाद करते नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान व मुस्तकीम अहरारी
लुधियाना: 2 अक्तूबर 2018 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
18 मार्च की रात को मन्ना सिंह कोठी के सामने जीटी रोड बूढ़ा नाला के पास शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान के सचिव मुहम्मद मुस्तकीम के साथ लूटपाट करने वाले लुटेरे आखिर लुधियाना पुलिस की मुस्तैदी से गिरफ्तार कर लिए गए। यह जानकारी आज यहां पुलिस कमिश्नर कार्यालय में बुलाई गई एडीसीपी-1 श्री गुरप्रीत सिंह सिकंद ने दी। इस अवसर पर एसीपी सैंट्रल बरियाम सिंह, नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी, मुहम्मद मुस्तकीम भी उपस्थित थे। इस मौके पर मुस्तकीम ने बताया कि 18 मार्च 2018 रात्रि को जब वह जामा मस्जिद से अपने निवास शिवपुरी जा रहे थे तो बूढ़ा नाला के पास दो लुटेरों ने रोक कर गर्दन पर दात रख कर 2 मोबाइल और 10 हजार के करीब नकदी लूट ली और इसी बीच जब एक कार आती नजऱ आई तो लुटेरे मुझे छोड़ भाग गए लेकिन जैसे ही सडक़ सुनसान हुई तो लुटेरे मेरी तरफ वापिस आने लगे तो मैंने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से हवाई फायर किया, जिसके बाद लुटेरे वहां से भाग निकले।  मुस्तकीम ने बताया कि पुलिस लगातार लुटेरों को ढूंढने मेें लगी हुई थी, लुधियाना पुलिस की तरफ से इस केस को हल करने के लिए आज जामा मस्जिद की तरफ से पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल व उनकी पूरी टीम का धन्यावाद भी किया। मुहम्मद मुस्तकीम ने पुलिस के आला अधिकारियों से मांग की है कि उनके साथ लूटपाट करने वाले तथा जानलेवा हमला करने वाले संबधित लुटेरों पर चोरी के साथ-साथ जानलेवा हमला करने की धारा 307 भी लगाई जाए।

Saturday, September 29, 2018

अवैध संबंधों की इजाजत देना खतरनाक: शाही इमाम पंजाब

Sep 29, 2018, 12:43 PM
भारतीय संस्कृति और धर्म हरगिज़ इसकी इजाज़त नहीं देते
जामा मस्जिद ने खुल कर कहा:पति-पत्नी एक दूसरे के सार्थी 
लुधियाना: 29 सितंबर 2018 (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
पति-पत्नी के संबंधों और उनकी पवित्रता की बचने के लिए जामा मस्जिद ने खुल कर स्टैंड ले लिए है। हाल ही में आये फैसले को आड़े हाथों लेते हए शाही इमाम ने भारतीय संस्कृति की याद भी दिलाई है। यहां एक विशेष मीडिया मीट में पत्रकारों से उन्होंने इस संबंध में विस्तार से चर्चा की। 
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 497 को असंवैधानिक बताते हुए पति पत्नी के रिश्ते की व्याख्या करते हुए जो कहा है कि महिला पति की सम्पत्ति नहीं, यह व्याख्या भारतीय संस्कृति से मेल नहीं खाती, यह बात आज यहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कही। शाही इमाम ने कहा की पति पत्नी एक दूसरे के सार्थी हैं दोनों का एक दूसरे पर विश्वास ही घर की शांति और पूंजी है जिससे यह दोनों हर मुश्किल का मुकाबला दृढ़ता से करते हैं। उन्होने कहा कि  भारतीय संस्कृति और धर्म हरगिज़ इसकी इजाज़त नहीं देते, इसलिए सर्वोच्य न्यालय को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए। उन्होंने ने कहा कि इस फैसले से देश में महिलाओं की पीड़ा और बढऩे वाली है, शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि अंग्रेजी सम्राजी सरकार की गुलामी से देश को स्वतंत्र कराने के लिए कुर्बानी इसलिए नहीं दी थी कि पश्चिम की सभ्यता को आदेश के जरिए थोपने की कोशिश की जाए। शाही इमाम ने सभी धर्मो के उच्च गुरुओं से भी अपील की है कि इस फैसले को बदलने के लिए सरकार को कहें। शाही इमाम ने कहा की देश में कानून बनाना संसद का काम है सर्वोच्य न्यालय को तीन तलाक के कानून की तरह इसको भी संसद में विचार के बाद कानून बनाने के लिए कहना चाहिए था, उन्होंने कहा कि ऐसी सभी धाराओं को बदलने से पहले राष्ट्रीय स्तर पर जनता की भी राय लेनी चाहिए। उन्होंने ने कहा कि हैरत है कि एक तरफ यह कहा जाता है कि तीन तलाक नहीं दी जा सकती और दूसरी ओर शादी शुदा जोड़ों को अवैध संबंध बनाने की इजाजत दी जा रही है। एक सवाल का जवाब देते हुए शाही इमाम ने कहा कि मस्जिद और नमाजियों का रिश्ता अटूट है इस पर बहस की कोई जरुरत नहीं। इस अवसर पर नायब शाही इमाम मौलाना उसमान रहमानी लुधियानवी, मुफ्ती जमालुदीन, कारी इब्राहिम, मौलाना महबूब आलम, शाह नवाज अहमद और शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम आदि मौजूद थे।

Thursday, September 27, 2018

अब यह कहने का वक्त आ गया है कि ‘पति महिला का स्वामी नहीं है

व्याभिचार आपराधिक कृत्य नहीं होना चाहिए
नयी दिल्ली: 27 सितंबर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
सम्बन्धों के मामले में स्वछंदता और स्वतन्त्रता चाहने वालों के लिए लिए शायद यह खबर खुशखबरी लेकर आई है। अब व्याभिचार शायद अधिकार बन गया है। जो स्वदेशी, संस्कृति और समाजिक बन्धनों से अभी भी प्रेम करते हैं उनके लिए शायद यह दुखद होगा। व्याभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को इससे संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया और कहा कि यह महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाता है और इस प्रावधान ने महिलाओं को ‘‘पतियों की संपत्ति’’ बना दिया था। इस सम्पति से याद आ रही है प्रोफेसर मोहन सिंह जी की एक कविता-"जायदाद"। कहा जाता है अपनी यह रचना उन्होंने जानीमानी लेखिका अमृता प्रीतम पर लिखी थी जिसे वह मन ही मन चाहते थे।चना की आरम्भिक पंक्तियों का उल्लेख यहाँ आवश्यक लग रहा है जिनका हिंदी अनुवाद है: 
दरवाज़े पर चुप खड़ी थी जायदाद
पास मालिक उसका
सामने आशिक उसका---
इस काव्य रचना में दरवाजे में खड़ी महिला का मालिक अर्थात पति उसके कंधे को पकड़ कर कहता है -
मेरी है यह सम्पति 
मैं हूँ मालिक इसका
मनु का कानून भी मेरी तरफ
वक्त की सरकार भी मेरी तरफ
पैसे की छनकार भी मेरी तरफ
धर्म लोकाचार भी मेरी तरफ
दिल नहीं तो न सही---------
लगता है प्रोफेसर मोहन सिंह की "तड़प" और उनके "दिल की आवाज़" सुन ली गई है। हालांकि उनकी काव्य रचना का मकसद व्याभिचार कभी न रहा होगा लेकिन समाज ने इसे व्याभिचार ही सोचा होगा। इस समस्या पर बहुत सी फ़िल्में बनी---बहुत सी रचनाएँ लिखी गयीं--तिकोने-चिकोने प्यार ने बहुत से घर बर्बाद कर दिए और बहुत सी जिंदगियां इसी तरह समाप्त हो गयीं जिनके सपनो में कोई और था लेकिन बाहों में कोई और। 
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया। फैसला ऐतिहासिक है। समाज के एक बड़े हिस्से में यह सब कुछ आम हो ही चूका था। बहुत सी हत्याएं-बहुत सी खुदकुशियां इसी मुद्दे को लेकर एक आम सी बात बन चकी थीं। अब व्याभिचार समानता का अधिकार बनने जा रहा है। 
शीर्ष अदालत ने इस धारा को स्पष्ट रूप से मनमाना, पुरातनकालीन और समानता के अधिकार तथा महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताया। 
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरिमन, न्यायमूर्ति ए. एम.खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने एकमत से कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 497 असंवैधानिक है।

मामला केवल एक छूट देता ही लकिन लग रहा है। लेकिन इसका दूर तक जाने वाला है। बहुत सी पेचीदगियां सामने आने वाली हैं। संविधान पीठ ने जोसेफ शाइन की याचिका पर यह फैसला सुनाया है। यह याचिका किसी विवाहित महिला से विवाहेत्तर यौन संबंध को अपराध मानने और सिर्फ पुरूष को ही दंडित करने के प्रावधान के खिलाफ दायर की गयी थी। "अन्याय और असमानता" के खिलाफ लगे गई गुहार "समानता" की इतनी बड़ी सौगात लेकर आयेगी इसकी तो कल्पना भी नहीं थी। 
सोचना होगा विवाह को सात जन्मों का बंधन और समाज के स्थायित्व का आधार मानने वाले वर्ग के मन कें क्या क्या चल रहा होगा?
व्यभिचार को प्राचीन अवशेष करार देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मानव जीवन के सम्मानजनक अस्तित्व के लिए स्वायत्ता स्वभाविक है और धारा 497 महिलाओं को अपनी पसंद से वंचित करती है।
याद करना होगा रामायण और महाभारत का युग जब स्वयम्बर के ज़रिये महिला को अपनी पसंद का वर चुनने का अधिकार होता था। अब यह "अधिकार" विवाह के बाद भी जारी रहेगा। शायद शादी के सात वचनों में आठवां वचन यह भी लिया जायेगा कि पतिदेव अब अपनी पत्नी को अपनी सम्पति समझने की भूल नहीं करेंगे। 
हालांकि प्रधान न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि व्याभिचार आपराधिक कृत्य नहीं होना चाहिए लेकिन इसे अभी भी नैतिक रूप से गलत माना जाएगा और इसे विवाह खत्म करने तथा तलाक लेने का आधार माना जाएगा। घरों को तोड़ने के लिये कोई सामाजिक लाइसेंस नहीं मिल सकता। इस  बात के बावजूद उन क्लबों की हकीकत नहीं बदल जाएगी जहाँ कारों की चाबियों के ज़रिये पत्नियों का तबादला बहुत पहले से होता आ रहा है। "शादी" भी बनी रहती है और "मौज मस्ती की स्वतन्त्रता" भी चलती रहती है। 
भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के अनुसार यदि कोई पुरूष यह जानते हुये भी कि महिला किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी है और उस व्यक्ति की सहमति या मिलीभगत के बगैर ही महिला के साथ यौनाचार करता है तो वह परस्त्रीगमन के अपराध का दोषी होगा। यह बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आयेगा। इस अपराध के लिये पुरूष को पांच साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों की सजा का प्रावधान था। 
इस सम्बन्ध में शाइन की ओर से दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि कानून तो लैंगिक दृष्टि से तटस्थ होता है लेकिन धारा 497 का प्रावधान पुरूषों के साथ भेदभाव करता है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 :समता के अधिकारः , 15 : धर्म, जाति, लिंग, भाषा अथवा जन्म स्थल के आधार पर विभेद नहींः और अनुच्छेद 21:दैहिक स्वतंत्रता का अधिकारः का उल्लंघन होता है। इस याचिका पर हुए फैसले ने एक नया इतिहास रचा है। 
न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपने फैसले में कहा है कि विवाह के खिलाफ अपराध से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 को हम असंवैधानिक घोषित करते हैं। अब अदालतों में लटक रहे ऐसे मामलों पर क्या असर पड़ेगा यह देखना अभी बाकी है। जो लोग सजा काट रहे हैं उनका पक्ष भी सामने आना है। 
न्यायमूर्ति नरिमन ने धारा 497 को पुरातनकालीन बताते हुए प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति खानविलकर के फैसले से सहमति जतायी। उन्होंने कहा कि दंडात्मक प्रावधान समानता का अधिकार और महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन है। वहीं न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि धारा 497 महिला के सम्मान को नष्ट करती है और महिलाओं को गरिमा से वंचित करती है।
गौरतलब है कि इस पीठ में शामिल एकमात्र महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने अपने फैसले में कहा कि धारा 497 संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और इस प्रावधान को बनाए रखने के पक्ष में कोई तर्क नहीं है। अपनी और न्यायमूर्ति खानविलकर की ओर से फैसला लिखने वाले प्रधान न्यायाधीश मिश्रा ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यभिचार महिला की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाती है और व्यभिचार चीन, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपराध नहीं है।
उन्होंने कहा कि संभव है कि व्यभिचार खराब शादी का कारण नहीं हो, बल्कि संभव है कि शादी में असंतोष होने का नतीजा हो। बात बहुत गहरी और वजनदार है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि महिला के साथ असमान व्यवहार संविधान के कोप को आमंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि समानता संविधान का शासकीय मानदंड है।
संविधान पीठ ने कहा कि संविधान की खूबसूरती यह है कि उसमें ‘‘मैं, मेरा और तुम’’ शामिल हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाओं के साथ असमानता पूर्ण व्यवहार करने वाला कोई भी प्रावधान संवैधानिक नहीं है और अब यह कहने का वक्त आ गया है कि ‘पति महिला का स्वामी नहीं है।’ शायद प्रोफेसर मोहन सिंह की काव्य रचना में उठी आवाज़ अब रंग लायी है। 
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि धारा 497 जिस प्रकार महिलाओं के साथ व्यवहार करता है, यह स्पष्ट रूप से मनमाना है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सामाजिक लाइसेंस नहीं हो सकता है जो घर को बर्बाद करे परंतु व्यभिचार आपराधिक कृत्य नहीं होना चाहिए।
न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने कहा कि धारा 497 को असंवैधानिक घोषित किया जाये क्योंकि व्यभिचार स्पष्ट रूप से मनमाना है। इस सम्बन्ध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यभिचार को विवाह विच्छेद के लिये दीवानी स्वरूप का गलत कृत्य माना जा सकता है। अब देखना है समाज इसे कैसे लेता है और समाज पर इसके क्या प्रभाव पड़ते हैं। 

Saturday, September 15, 2018

आस्था-प्रेम और दोस्ती की कहानी है मेला छपार

लाखों लोग आते हैं मेला छपार में मन्नत मानने 
छपार (लुधियाना): 14 सितम्बर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
मेला छपार की कहानी है आस्था की कहानी। सांप और इन्सान की दोस्ती की कहानी। एक मोहब्बत की कहानी जिस पर जल्दी किये विशवास नहीं होता। एक वायदे की कहानी--जो आज तक निभाया जा रहा है। मन्दिर के प्रबन्धक कहते हैं यह कहानी 150 वर्ष से मित्रता का संदेश दे रही है। कुछ लोग इसे 300 वर्ष पुरानी भी बताते हैं। यह कहानी अविश्वनीय लग सकती है लेकिन इसका संदेश आज के युग में बहुत बड़ी हकीकत है। आज जब मानव ही मानव का दुश्मन हो गया है। भाई ही भाई की हत्या कर रहा है उस समय सांप और मानव की दोस्ती बहुत बड़ी उम्मीदें जगाती हैं। 
बताया जाता है कि एक किसानी परिवार में एक सांप और एक  लडके का जन्म एक साथ हुआ।  दोनों का प्रेम भी बहुत था। एक दिन जब लडके की मां उसे बीमारी की हालत में लिटा कर कहीं बाहर गयी तो उसके चेहरे पर धुप पड़ने लगी। उसके दोस्त सांप ने उसे धुप से बचाने के लिए ज्यों ही अपना फन फैलाया तो किसी राहगीर ने समझा की सांप उस लडके को काटने लगा है। उसने तुरंत उस सांप को मार दिया। सांप के मरते ही वो लड़का भी मर गया। परिवार के साथ पूरे गाँव में मातम छा गया। वह सांप ही यहाँ गुग्गा पीर कहलाता है। 
बजुर्गों की सलाह पर इन दोनों के स्मृति स्थल के लिए एक जगह तलाश की गयी। आज इसे गुग्गा माड़ी या मैडी के नाम से जाना जाता है। हर वर्ष मेला लगता है और खूब भरता है। लाखों लोग आते हैं यहाँ मन्नतें मानने। और फिर उस मन्नत के पूरा होने पर शुकराना करने भी आते हैं। 
झूले वाले, बीन वाले, मिठाई वाले, ढोल वाले इत्यादि बहुत से लोग हैं जिन्हें यहाँ आ कर रोज़गार मिलता है। करीब कई महीनों की रोटी इन लोगों को यह मेला दे जाता है। इस मकसद के लिए यहाँ बहुत से लोग पंजाब ही नहीं अन्य राज्यों से भी आते हैं। 
मेला कमेटी यहाँ आने वालों के लिए पूरी आवभगत का प्रबंध करती है। लंगर के साथ साथ कई तरह के पकवान परोसे जाते हैं। पुलिस भी इस अवसर पर लोगों की सुरक्षा के लिए मुकम्मल बन्दोबस्त करती है। तकरीबन हर धर्म के लोग यहाँ आते हैं। हर उम्र के लोग यहाँ आते हैं। ये लोग कितनी आस्था से सात बार मिटटी निकालते हैं इस आस्था की को उनके चेहरे और भावों से महसूस किया जा सकता है। 

Friday, September 07, 2018

मज़दूरों के साथ धोखाधड़ी करके करोड़ों रूपए के घोटाले का आरोप

Sep 7, 2018, 5:26 PM
कम्पनी मालिक विनोद पोद्दार की गिरफतारी की माँग
लुधियाना: 07 सितम्बर 2018: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
गोबिन्द रबड़ लिमिटड के मज़दूरों का  संघर्ष और तेज़ 

आज गोबिन्द रबड़ लिमिटेड (जी.आर.एल.) के मज़दूरों के एक प्रतिनिधि मण्डल ने पुलिस कमिश्नर लुधियाना व डीसी कार्यालय पर सहायक कमिश्नर (जनरल) को से मुलाकात करके कम्पनी मालिक विनोद पोद्दार की गिरफतारी की माँग की। कम्पनी ने करीब 1500 मज़दूरों की चार-चार महीने के वेतन, ओवरटाईम का पैसा, अक्टूबर क2017 से ई.पी.एफ. का पैसा, ई.एस.आई., बोनस, छुट्टियाँ आदि का करोड़ों रुपए बिना दिए लुधियाना के जोगियाना में स्थित इसके तीन युनिट बन्द कर दिए हैं। विनोद पोद्दार द्वारा बार-बार वेतन आदि देने का वादा किया गया था लेकिन दिया नहीं गया। 24 अप्रैल को नोटिस जारी किया गया कि कच्चे माल की कमी के कारण एक सप्ताह के लिए बन्द किए जा रहे हैं। लेकिन दुबारा कारखाने चलाए ही नहीं गए बल्कि पक्के तौर पर बन्द कर दिए गए। यह मामला मज़दूरों के साथ धोखाधड़ी करके करोड़ों रूपए के घोटाले का है। इसलिए मज़दूरों के प्रतिनिधि मण्डल ने माँग की कि तुरन्त विनोद पोद्दार की गिरफतारी की जाए, उसे सख्त से सख्त सजा मिले व मज़दूरों को इंसाफ दिलाया जाए। प्रतिनिधि मण्डल ने सहायक क्षेत्रीय पी.एफ. आयुक्त गुरदयाल सिंह से भी मुलाकात की व माँग पत्र सौंपकर इंसाफ की माँग की।


मज़दूरों ने इंसाफ न मिलने की सूरत में संघर्ष तेज़ करने की माँग की है। प्रतिनिधि मण्डल में कारखाना मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष लखविन्दर, गोबिन्द रबड़ लिमिटेड मज़दूरों की संघर्ष कमेटी के सदस्य गुरमीत सिंह, कृष्ण कुमार,  पुश्कर सिंह, प्रेमचंद, जसवीर सिंह, रविन्दर, जसवीर सिंह, रमेश सिंह व अन्य अनेकों मज़दूर शमिल थे। 


Saturday, September 01, 2018

लोगों का पैसा लोगों के भलाई में लगाने में अहम भूमिका निभाई LIC ने

LIC ने पूर्ण किये राष्ट्र की सेवा में गौरवपूर्ण 62 वर्ष
लुधियाना: 1 सितम्बर 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: 

आज भारतीय जीवन बीमा निगम के दुगरी स्थित मंडल  कार्यालय में ऐतिहासिक रौनक थी। जिन जिन लोगों ने भी एल आई सी पालसिओं को घर घर पहुँचने में जोशो खरोश से काम किया था उन सभी के चेहरों पर एक चमक थी। सफलता की चमक। दिन रात एक करके की गयी मेहनत की चमक। राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान के गौरव की चमक। इस मेहनत और उपलब्धि के  बदले इन सभी को ध्वजारोहण के बाद सम्मानित भी किया गया।
लुधियाना मण्डल के वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक श्री एल.सी. पिपिल ने  बताया कि पिछले 18 वर्षो से जीवन बीमा के क्षेत्र मे प्राईवेट कंपनियों के आने के बावजूद भी भारतीय जीवन बीमा निगम ने मार्केट शेयर नई पॉलिसियाँ में 75.67% एवं कुल प्रीमियम आमदन में 69% रखते हुए अपना पहला स्थान कायम रखा हुया है । आज भारतीय जीवन बीमा निगम के पास 29 करोड़ से अधिक पॉलिसीधारक होने के साथ-साथ 25 लाख करोड़ से भी अधिक लाइफ फ़ंड एवं 28  लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्तियाँ भी हैं । उन्होने बताया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 266.08 लाख दावों का भुगतान करते हुए 1,11,860.41 करोड़ रुपये अदा किए हैं । जबकि 98.04% मृत्यु दावों का भुगतान किया गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु सूचना प्रोधौयोगिकी का अधिकतम उपयोग किया है। भारत में सब से बड़ा बीमा उद्योग होने के कारण भारतीय जीवन बीमा निगम ने हमेशा उच्च तकनीक को अपनाते हुए अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान कर रहा है । अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हुए वर्ष 2017-18 में निगम को 27 पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है

प्रैस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक ने बताया कि लुधियाना मण्डल ने 31.03.2018 के समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान 1,08,034 नई पॉलिसियाँ जारी करके 201.50 करोड़ रुपये की प्रथम प्रीमियम आय अर्जित करके नव-व्यवसाय में नया कीर्तिमान स्थापित किया है । लुधियाना मण्डल के दावा भुगतान के संबंध मे बोलते हुए श्री एल.सी. पिपिल ने बताया कि 31.03.2018 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में तक कुल 1,23,557 पॉलिसियों में परिपक्वता एवं विद्दमानता हितलाभ  के 574.32 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 3291 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 62.31 करोड़ रुपये का भुगतान करते हुए अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा की मिसाल लुधियाना मण्डल द्वारा पृस्तुत की जा चुकी है।
लुधियाना मण्डल की ओर से चालू वित्तीय (01.04.2018 to 31.07.2018) वर्ष में, अब तक कुल 28152 परिपक्वता एवं विद्दमानता हित लाभ दावों के रूप में 169.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी तरह से कुल 1034 मृत्यु दावों का भुगतान करते हुए कुल 18.83 करोड़ रुपये का भुगतान करके अपनी बेहतर सेवा का प्रदर्शन कर चुका है।
देश में अपने पॉलिसी धारकों को सेवा प्रदान करने के लिए एलआईसी के 8 क्षेत्रीय कार्यालय, 113 मण्डल कार्यालय, 2048 शाखा कार्यालय, 1430 सेटेलाईट कार्यालय, 1227, मिनी कार्यालय, 73 कस्टमर ज़ोन कार्यालय का प्रावधान किया गया है जिनके द्वारा अपने बहुमूल्य पॉलिसी धारकों को उन के घर तक सेवा प्रदान कर रहा है। एलआईसी ने अपने पॉलिसी धारकों के लिए एक पोर्टल भी बनाया हुया है जिस से कोई भी पॉलिसी धारक अपनी पॉलिसी को रजिस्टर करने के बाद, पॉलिसी से संबन्धित जानकारी ऑनलाइन ले सकता है ।
श्री पिपिल ने बताया कि लुधियाना मण्डल द्वारा 01.09.2018 से 07.09.2018 तक बीमा सप्ताह मनाया जा रहा है जिसमें निम्नलिखित प्रोग्राम किए जा रहे हैं :
1.   बीमा सप्ताह का शुभारंभ आज दिनांक 01.09.2018 को निगम के ध्वजारोहण के साथ मण्डल कार्यालय में किया गया । इस भव्य समारोह में एलआईसी से रिटायर हुए कर्मचारियों, पॉलिसीधारकों, उत्कृष्ट विकास अधिकारियों, सी.एल.आई.ए. एवं अभिकर्ताओं को सम्मानित किया गया ।
2.   02.02.2018 को बीमा जागरूकता दौड़ की जाएगी
3.   03.09.2018 को पौधारोपण, हेल्थ सेमिनार किया जाएगा  ।
4.   04.09.2018 को एलआईसी प्रांगण में खून दान कैंप तथा 05.09.2018 को अध्यापक दिवस मनाया जाएगा ।
5.   06.09.2018 को एक सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए चित्रकारी प्रतियोगिता, मेडिकल चैक उप कैंप, पॉलिसीधारक के साथ मीटिंग होगी ।
6.   बीमा सप्ताह का समापन समारोह दिनांक 07.09.2017 को एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के द्वारा किया जाएगा ।

Thursday, August 30, 2018

थैलेसीमिया का ईलाज: लवली जैन का जनून रंग लाया

अब लुधियाना में भी होगा बकरे के खून से थैलासीमिक बच्चों का ईलाज 
लुधियाना: 29 अगस्त 2018: (पंजाब स्क्रीन टीम):: 

पूंजीवाद  के दौर में मुनाफा सबसे पहले आता है। बाप बड़ा न भैया-सबसे बड़ा रूपया। वो रुपया किसी का खूबसूरत चेहरा दिखा कर आए या फिर उसके आंसू दिखा कर--उसे बहुत गर्वपूर्ण कमाई समझा जाता है। शिक्षा, वकालत, गीत-संगीत, अभिनय, लेखन, मीडिया और अन्य क्षेत्रों के साथ साथ मेडिकल क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं बचा। पहले पहल होम्योपैथी और आयुर्वेद को सस्ता इलाज समझा जाता था लेकिन अब बहुत से लोग इन क्षेत्रों में भी कमाई को पहल देने लगे हैं। इसके बावजूद आयुर्वेद में अभी भी आशाएं बाकी हैं।

इसका अहसास हुआ जब करीब तीन वर्ष पूर्ण अहमदाबाद (गुजरात)  के डाक्टर अतुल भवसार से बात करवाई लुधियाना के लवली जैन ने। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के बच्चों को बकरे का खून भी चढ़या जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में सफलता के बाद अब पंजाब में भी इस तजर्बे की तैयारी है। सुन कर यकीन नहीं हुआ। इस योजना का विरोध भी बड़े पैमाने पर हुआ। यह तो लवली जैन की हिम्मत कहो कि यह अभियान जारी रहा।
उन दिनों गुजरात से लुधियाना आए डॉ.अतुल भावसर ने बताया था कि थेलेसीमिया के मरीजों के लिए इंसान की वजाए बकरे का खून ज्यदा फयेदेमंद है। गुजरात के शहर अहमदाबाद स्थित अखंडानंद आयुर्वेद अस्पताल के पंचकर्मा डिपार्टमेंट के हेड डॉ. भावसर ने कहा के थेलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को हर 15-20 दिन बाद ब्लड चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी की वजह से ब्लड के आरबीसी (रेड ब्लड सेल) तेजी से टूटते है। जिस कारण मरीज में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। थेलेसीमिया के मरीजों के लिए उन्होंने एक नई खोज की है। जिसके तहत बकरे का खून चढ़ाने पर मरीज को 15 -20 दिन की बजाय दो महीने बाद ही ब्लड चढ़ाने की जरुरत पड़ती है। कई मरीजों को 5 महीने बाद ही खून चढ़ाने की जरुरत पडती है। इसका कारण यह है कि बकरे के खून के आरबीसी जल्दी नहीं टूटते। जिससे मरीज में ज्यादा समय तक हीमोग्लोबिन की मात्रा सही बनी रहती है। डॉ. भावसर ने दावा किया कि इस भयंकर बीमारी से निपटने की कैपेसिटी एलोपैथी के मुकाबले आयुर्वेद में ज्यादा है। थेलेसीमिया में बकरे के खून के इस्तेमाल की पद्धति को गुजरात सरकार ने मान्यता दे दी है। इस पद्धति में मरीज को खून वेन की बजाय एनिमिया के  जरिए बड़ी आंत तक पहुंचाया जाता है।  यह आंत जरुरत के मुताबिक खून को लेने के बाद बाकी बाहर निकाल देती है।  सोसायटी के प्रधान लवली जैन  जुटे रहे। थैलेसीमिया के लिए काम करने वाले उनके बहुत से मित्र भी उन्हें छोड़ गए लेकिन लवली जैन का मनोबल नहीं टूटा।
कभी किसी वीआईपी से--कभी किसी मंत्री से--कभी किसी मीडिया से--जब भी मिलते बस यही गुहार लगाते-इन बच्चों का कुछ करो। गौरतलब है कि लवली जैन खुद शरीरक तौर पर बहुत मुश्किल से उठ बैठ सकते हैं। इस अक्षमता के बावजूद वह हर पल डटे रहे। हर वक यही सोचते-इन बच्चों को बचाना है। सबके पास अंग्रेजी इलाज पर खर्चा आनेवाला पैसा नहीं है। इसलिए इन पर डाक्टर भवसार का सफल प्रयोग लागू करना होगा। जो फायदा गुजरात के लोगों  को मिला वही फायदा पंजाब-हरियाणा-हिमाचल-जम्मू कश्मीर और आसपास के लोगों को भी मिलना चाहिए। 
आखिर लवली जैन का जनून रंग लाया। लुधियाना में थैलसीमिक बच्चों को बकरी या बकरे के खून से ईलाज उपलब्ध करने वाला अस्पताल बन कर तैयार हो चुका है। बहुत ही मेहनती स्टाफ। इन बच्चों के लिए डेडिकेटिड स्टाफ। लगता है है अब उन परिवारों की भी सुनी गयी है जो हर दो सप्ताह बाद खून चढ़ाने का खर्चा वहन नहीं कर सकते।