Thursday, January 19, 2017

अमित शर्मा की हत्या के खिलाफ 24 जनवरी को हिन्दू संगठनों का रोष

आम आदमी पार्टी भी हिन्दू संगठनों के निशाने पर 
लुधियाना: 19 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
रोहित साहनी 
अमित शर्मा की जघन्य हत्या के बाद हिन्दू संगठनों ने आज देर शाम अपना आंदोलन तेज़ करने का एलान किया है। इस मकसद के अंतर्गत 24 जनवरी 2017 दिन मंगलवार को श्री दुर्गा माता मन्दिर के नज़दीक हत्या स्थल  पर रोष प्रदर्शन किया जायेगा। यह एलान आल इंडिया हिन्दू स्टूडेंटस फेडरेशन के उत्तर भारतीय शाखा के महासचिव और श्री हिन्दू तख्त के प्रचारक रोहित साहनी ने देर शाम किया। श्री साहनी ने स्पष्ट किया कि यह कदम परम आदरणीय अनंत विभूषित जगतगुरु पंचानंद गिरी जी महाराज धर्माधीश श्री हिन्दू तख़्त के दिशा निर्देशों व मार्गदर्शन में उठाया जा रहा है। रोष की इन सूचनाओं के दौरान फेसबुक पर नवदीप गुप्ता ने हिन्दू नेतायों के खिलाफ हुए हमलों और श्री हिन्दू तख्त के अस्तित्व पर सवाल भी उठाये हैं। उन्होंने कहा की हिन्दू धर्म वेदों पुराणों पर आधारित है। कोई विद्धान मुझे श्री हिन्दू तख्त शब्द किसी पुस्तक में से ढून्ढ कर दिखाए।
गौरतलब है कि अमित शर्मा कत्लकांड में कातिलों का सुराग न लग पाने के कारण हिंदू संगठनों में भारी रोष है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से कातिलों को गिरफ्तार करने की मांग भी की है। उन्होंने पहले से ही चेतावनी दे राखी थी कि अगर कातिल जल्द गिरफ्तार नहीं हुए तो मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा। कुछ दिन पूर्व 14 जनवरी को दुर्गा माता मंदिर के निकट श्री हिंदू तख्त के जिला प्रचारक अमित शर्मा की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले राज्य में 2 और बड़े हिंदू नेताओं की भी हत्याएं हो चुकी हैं जिनके कातिल अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। अमित के अंतिम संस्कार के मौके पर भी हिन्दू संगठन रोष में थे।
आतंकवाद के संताप में झोंकने की साजिशें-चन्द्रकान्त चड्ढा
श्री हिंदू न्याय पीठ के विधान परिषद सदस्य चन्द्रकान्त चड्ढा ने भी पंजाब में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर फेल साबित होते जा रहे सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठाते हुए कहा था कि आए दिन हिन्दू नेताओं पर सरेआम हमले करवाकर सनातन धर्म की आवाज को दबाया जा रहा है व पंजाब को फिर से आतंकवाद के संताप में झोंकने की साजिशें की जा रही हैं जिसे हिंदू संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। चड्ढा ने जिला पुलिस को अमित शर्मा के कातिलों व उक्त कत्ल के पीछे की साजिशों को जल्द से जल्द बेनकाब करने की मांग की है।
हत्यारों का सुराग देने वालों को पांच लाख रूपये
श्री हिन्दू तख्त के प्रमुख पंचानंद गिरि महाराज ने घोषणा की थी कि जो भी अमित शर्मा के हत्यारों की जानकारी देगा उसे श्री हिन्दू तख्त की ओर से 5 लाख रुपए का ईनाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ समय में एक के बाद एक पंजाब में खालिस्तानियों की तरफ से आई.एस.आई. के इशारे पर खालिस्तानी समर्थक एक बार फिर से पंजाब में 1980 से 1993 की तरह हिन्दुओं में डर पैदा करना चाहते हैं। मोगा में आतंकी सन्त भिंडरांवाले के खिलाफ आवाज उठाने वाले हिन्दू पर धार्मिक भावनाओं का केस दर्ज करने से पहले पंजाब सरकार को अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए कि वह पंजाब को खालिस्तान बनाने के हक में है या नहीं। अगर नहीं तो आतंकी के खिलाफ आवाज उठाने वाले के खिलाफ क्यों केस दर्ज किया गया। 
खालिस्तान समर्थकों और आतंकी सन्त भिंडरांवाले की सामग्री बांटने वालों के खिलाफ पंजाब सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न करने पर श्री हिन्दू तख्त केंद्र सरकार से कई बार मांग कर चुका है कि पंजाब में हस्ताक्षेप कर ऐसे समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
चुनावी माहौल में हत्या से सनसनी 
चुनावों के दौरान पंजाब का माहौल खराब करने और हिन्दुओं की आवाज को दबाने के लिए आतंकियों ने श्री हिन्दू तख्त के प्रचारक अमित शर्मा की हत्या की। अगर 7 दिनों के अंदर पुलिस विभाग की ओर से कातिलों को न पकड़ा गया तो समूह हिन्दू समाज सड़कों पर उतर आएगा जिसका जिम्मेवार प्रशासन खुद होगा। उपरोक्त शब्द श्री हिन्दू तख्त के प्रमुख जगतगुरु पंचानंद गिरि जी ने हिन्दू समाज के साथ रविवार को मीटिंग करने के बाद पत्रकारों से बातचीत दौरान कहे थे। उन्होंने कहा कि शर्म की बात है कि आतंकियों के टारगेट पर जो हिन्दू नेताओं के नाम है, उनका पता होने के बावजूद भी पंजाब पुलिस उन्हें बचा नहीं पा रही है। डी.जी.पी. पंजाब को विगत दिनों हिन्दू नेताओं के खतरे बारे केंद्र की ओर से इनपुट भी दी गई थी लेकिन उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई गई।
पूरी रैकी करने के बाद हुई हत्या 
अमित शर्मा की हत्या पूरी रैकी कर की गई है क्योंकि हमलावरों को पता था कि वह रोजाना कब मंदिर में माथा टेकने आता है। उन्होंने कहा कि अमित शर्मा के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। श्री हिन्दू तख्त की तरफ से परिवार की 5 लाख रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी। उसके परिजनों को सरकारी नौकरी भी दिलवाई जाएगी। पंजाब का माहौल खराब करने में आम आदमी पार्टी भी जिम्मेवार है, जो वोटों के लालच में पंजाब में खालिस्तानियों के हक में बोल रही है। 
साइलैंसर लगे रिवाल्वर का हुआ इस्तेमाल
अज्ञात हत्यारों ने अमित शर्मा की हत्या करने के लिए जिस रिवाल्वर का इस्तेमाल किया था, उस पर साइलैंसर लगा हुआ बताया जा रहा है। जिस कारण वारदात के समय किसी ने गोलियां चलने की आवाज नहीं सुनी। शनिवार को दुर्गा माता मंदिर के निकट जब अमित सड़क पार कर रहा था। तभी मोटरसाइकिल सवारों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मंदिर के बाहर व्हीलचेयर पर बैठे शिव नामक एक भिखारी ने अमित को सड़क पर गिरते देखा जोकि वारदात का चश्मदीद गवाह है।
पिता की मौत भी हुई थी छोटी उम्र में
घर की सारी जिम्मेदारी अमित शर्मा के कंधों पर थी। अमित जब 10 वर्ष का था तब 1990 में उसके पिता बाबू राम शर्मा की 42 वर्ष की उम्र में मौत हो गई थी। अमित शर्मा की हत्या के दौरान उसकी उम्र मात्र 36 वर्ष की थी जबकि अपने पीछे वह भरा पूरा परिवार छोड़कर चला गया है। अमित शर्मा के बेटे की उम्र मात्र 7 वर्ष है। पति की मौत के बाद छोटी उम्र में जवान बेटे की मौत ने अमित शर्मा की मां को ङ्क्षझझोड़ कर रख दिया है। वहीं पत्नी की हालत भी तरसयोग बनी हुई है। अमित 3 बहनों का इकलौता भाई था। 
हत्यारों के स्कैच होंगे जारी 
अमित शर्मा के हत्यारों को काबू करने के लिए पुलिस एड़ी-चोटी का जोर लगी रही है। सूत्रों के अनुसार पुलिस इलाके में लगे कई सी.सी.टी.वी. कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है। जिसमें उनके हाथ कई अहम सुराग लगे है। पुलिस जल्द ही हत्यारों को काबू करने के लिए स्कैच जारी करेगी। वहीं पुलिस घटना स्थल के चश्मदीद गवाह से भी हत्यारों की पहचान करने में जुटी हुई है।
जान को था खतरा 
प्रधान वरुण मेहता ने बताया कि अमित करीब 11 साल से श्री हिंदू तख्त के साथ जुड़ा हुआ है। करीब एक साल पहले श्री हिंदू तख्त के प्रचारक के रूप में उसने जिम्मेदारी संभाली थी। तब से ही अमित को धमकियां मिल रही थीं। जिस कारण अमित की जान को खतरा था। इस बात से वह पुलिस प्रशासन को अवगत करवा चुके थे। अमित की सुरक्षा की मंजूरी उन्हें मिल चुकी थी परंतु जब वह पुलिस कमिश्नर के पास सुरक्षा के लिए गए तो कमिश्नर ने कम फोर्स की बात कहकर सुरक्षा प्रदान करने से मना कर दिया। वहीं हिंदू समाज के प्रवीण डंग, रोहित साहनी, वरुण मेहता सहित कई बड़े नेताओं ने इस हत्याकांड के पीछे आतंकवादी संगठन का हाथ होने की आशंका जाहिर की है।
कई थ्यूरियों पर जांच जारी : डी.सी.पी. क्राइम 
डी.सी.पी. क्राइम भूपिन्द्र सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि अमित शर्मा की मौत के बाद पुलिस कई थ्यूरियों पर काम कर रही है। स्पैशल पुलिस टीम गठित की गई है जोकि हत्याकांड के हर एंगल की बारीकी से जांच कर रही है। जल्द ही हत्यारों को काबू कर लिया जाएगा।

Monday, January 16, 2017

पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगे

‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर विचार-चर्चा
लुधियाना: 15 जनवरी 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): For more Pics Please Clik Here
पूंजीवाद के लालच, स्वार्थ और संवेदनाविहीन सिस्टम में सताये लोगों के लिए शायद आखिरी उम्मीद बन कर उभरी थी रूस में आई अक्टूबर क्रांति। शायरों ने गीत लिखे-वो सुबह कभी तो आएगी।  फिल्मों के गीत हिट हुए-
हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे-
इक बाग़ नहीं -इक खेत नहीं हम सारी दुनिया मांगेंगे।  
इस वाम विचारधारा ने गम के मारे लोगों को शक्ति दी, नई ऊर्जा दी, आश्वासन दिया-
रात भर का है मेहमां अँधेरा--किसके रोके रुका है सवेरा..! 
विचारों में दम था और इस विचारधारा के लिए लोग अपने सभी सुख छोड़ कर पूरे जोश के साथ आगे आये। नावल मां ने इस अभियान में एक नया जोश भरा। इस वाम आंदोलन के लिए कुर्बानियां देने वालों की कमी नहीं रही। इस विचारधारा से प्रभावित हो कर बहुत से लोगों ने अपनी सारी सारी ज़िन्दगी लगा दी, अपना घरघाट परिवार सब कुछ दांव पर लगा दिया पर इस सब के बावजूद एक समय आया जब इनको लगने लगा शायद हम गलत हो गए। बहुत से मित्रों ने व्यक्तिगत मुलाकातों में रुयासे हो कर कहा शायद हमने सारी उम्र अँधेरा ढोया। इनको भी इन्कलाब दूर होता महसूस हुआ। पार्टी के लिए पूरी उम्र लगाने वालों ने भी कभी कभी अनौपचारिक भेंटवार्ता में यही कहा कि इंकलाब तो अब आने वाला नहीं। यह कहने पर कि फिर कौन सी पार्टी में जाना है तो उनके आंसू निकल आते-कहते-पार्टी तो मां होती है कामरेड --हम पार्टी नहीं छोड़ेंगे। स्पष्ट था कि उनका गिला शिकवा पार्टी से नहीं बल्कि पार्टी पर काबिज़ हुए या घुस आये स्वार्थी नेतायों से था। बहुत से वरिष्ठ कामरेड ऐसे हैं जिनकी अपनी सन्तान ने भी वाम सियासत में आना उचित नहीं समझ। आज वाम दलों के पास युवा केडर चिंतनीय हद तक कम हो रहा है और वृद्ध लोग बारी बारी अलविदा कह रहे हैं इसके बावजूद पदों का मोह छूट नहीं रहा। ऐसे हालात में जब वाम दलों का आम केडर ठगा ठगा सा महसूस कर रहा था और उसे लग रहा था कि बड़े बड़े वाम नेतायों की ज़िन्दगी और उनके परिवारों का इंकलाब आ चुका है और हमारा इंक़लाब कभी आने वाला नहीं।  इस बेहद नाज़ुक दौर में जिसके बारे में पूंजीवादी साम्प्रदायिक दलों के बड़े नेता अक्सर मज़ाक करते हैं कि कामरेड तो अब खत्म हो चुके तो उनका मज़ाक न खोखला लगता है न ही मज़ाक। एक कड़वा सत्य जिसका सामना आज बहुत से कामरेड कर रहे हैं लेकिन अपनी ज़िन्दगी में। इन विचारों से जुड़ा केडर निराश नज़र आ रहा था। जहाँ एक वाम ट्रेड यूनियन के आह्वान पर लाल झंडे वालों की भीड़ का सागर लहराता नज़र आता था वहां अब चार चार वाम दल मिलकर भी 50-100 से ज़्यादा वर्कर अपनी रैलियों में एक्टर नहीं कर पाते। 
और इसके चाहनेवालों के लिए पैदा हुई इस चिंतनीय स्थिति से भरे इस तरह के हालात में एक आयोजन वह था जब छात्र नेता कन्हैया के आने पर लुधियाना के पंजाबी भवन में इतनी भीड़ जुटी थी कि उसे सम्भालना मुश्किल था। उसके बाद एक मौका अब और देखने को मिला जब 15 जनवरी 2017 दिन रविवार को अक्टूबर क्रांति पर हुए सेमिनार में पंजाबी भवन का हाल पूरी तरह से भरा हुआ था। यहाँ तक कि इस सेमिनार को सुनने के लोग कड़क सर्दी के मौसम में भी नीचे फर्श पर बैठे थे और वो भी बर्फीली शीत लहर में। हाल में मौजूद श्रोता और कार्यकर्ता पूरी तरह से ध्यान मगन थे। न कोई शोर न कोई बेचैनी। मुख्य वक्ता शशि प्रकाश के प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने सभी मंत्रमुग्ध हुए एक एक बात को सांस रोक कर सुन रहे थे। For more Pics Please Clik Here

15 जनवरी 2017 को लुधियाना के पंजाबी भवन में मार्क्सवादी स्टडी सर्किल द्वारा ‘महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति व आज का समय’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। मार्क्सवादी लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता व अंग्रेजी मार्क्सवादी पत्रिका ‘द एनविल’ के सम्पादक शशि प्रकाश सेमिनार के मुख्य वक्ता थे। सेमिनार की शुरुआत क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच, दस्तक द्वारा पेश क्रान्तिकारी गीतों से हुई। मंच संचालन मार्क्सवादी स्टडी सर्किल की ओर से साथी सुखविन्दर ने किया। 

मुख्य वक्ता शशि प्रकाश ने विषय पर बात रखते हुए कहा कि रूस में 25 अक्टूबर 1917 को होने वाली मज़दूर क्रान्ति दुनिया की तब तक की सबसे महान घटना थी। यह पहला मौका था जब राज्यसत्ता किसी शोषक वर्ग के हाथों से निकलकर शोषित-उत्पीड़ित वर्ग के कब्ज़े में आ गयी। यह सचेतन तौर पर की जाने वाली दुनिया की सबसे पहले क्रान्ति थी जिसका मकसद था इन्सान के हाथों इन्सान की हर तरह की लूट का ख़ात्मा करना। इस क्रान्ति ने सम्पत्तिवान वर्गों का तख्ता पलट दिया। इस क्रान्ति ने दिखा दिया कि अगर समाज का नियन्त्रण मज़दूर वर्ग के हाथों में आ जाये तो मेहनतकश वर्गों की चेतना, संस्कृति, शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीकी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास किया जा सकता है। यह एक युगप्रवर्तक घटना थी जिसके बाद मज़दूर क्रान्तियों के युग की शुरुआत हुई। महान अक्टूबर क्रान्ति आज भी हमें प्रेरणा दे रही है और उसकी शिक्षाएँ हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। महान अक्टूबर समाजवादी क्रान्ति के सबकों को आत्मसात किए बिना क्रान्तिकारी आन्दोलन को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा विश्व पूँजीवादी व्यवस्था के अन्तरविरोध समाजवादी क्रान्तियों के नए संस्करणों का निर्माण करेंगी। अक्टूबर क्रान्ति की शिक्षाओं को व्यापक जनता तक पहुँचाना क्रान्तिकारी आन्दोलन का एक अहम कार्यभार है।For more Pics Please Clik Here

उनके अलावा प्रो. जगमोहन, डा. जगजीत चीमा, जरनैल सिंह, रवि कुमार, मास्टर दविन्दर, जगसीर जीदा, गुरप्रीत, वरूण आदि ने भी बात रखी। For more Pics Please Clik Here

इस सेमिनार से एक बात उभर कर सामने आई कि शोषित वर्ग आज भी शोषकों के खिलाफ संघर्ष के लिए मार्गदर्शन चाहता है और अगर इस तरह का कोई अवसर मिले तो वह चूकता नहीं। मार्क्सवाद के चाहनेवालों की प्यास अभी भी बरकरार है। अब आगे सोचना वाम नेतायों का काम है कि वे केवल एकता की बातें करते हैं या इस मकसद के लिए कोई ठोस कदम उठाने को भी तैयार हैं? 
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