Sunday, December 24, 2017

लगातार बुलंद हो रही है शहनाज़ के लिए इन्साफ की मांग

Sun, Dec 24, 2017 at 4:57 PM
श्रद्धांजली आयोजन ने समाज से पूछा-आखिर कब जागोगे आप लोग?
लुधियाना24 दिसम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन टीम)::
नवरात्र का उपवास रखने वाले देश में ही हुई थी शहनाज़ की हत्या। अनगिनत धार्मिक स्थलों से भरे देश में ही हुआ था उसके साथ दुष्कर्म। जब उसने आवाज़ उठाई तो किसी ने नहीं दिया उसे इन्साफ। दरिंदों की दरिंदगी इतनी बढ़ी कि न्याय की जंग लड़ने निकली शहनाज़ को जिंदा जला दिया गया। अफ़सोस कि न तो धरती डगमगाई न ही आसमान टूटा और न ही लोग जागे। बहुत से लोगों ने इसे भी भगवान की मर्जी कह कर आँखें बंद कर लीं और अपने काम धंधों में मस्त हो गए। वास्तव में इस तरह के लोग भी ज़िम्मेदार हैं समाजविरोधी गुण्डातत्वों की मनमानियां बढ़ाने में। इन पर लगाम कसना सभी का फ़र्ज़ होना चाहिए न कि सिर्फ किसी शहनाज़ के परिवार का। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शहनाज़ का दर्द किसी ने न सुना। More Pics on Facebook
इस दर्द की आवाज़ को सुना तो उन लाल झंडे वाले लोगों ने जिन्हें लोग नास्तिक कह कर मूंह फेर लेते हैं। यह लोग 2014 से लगातार शहनाज़ के लिए इन्साफ मांग रहे हैं। लोगों को इस मकसद के लिए जागरूक कर रहे हैं। आज भी ढंडारी के इलाके में इसी तरह का कार्यक्रम था। दिल को हिलाता हुआ। दिमाग में सवाल पैदा करता हुआ। सरे समाज से पूछता रहा था यह आयोजन कि आखिर कब जागोगे ? किस की इंतज़ार कर रहे हो? जब हर घर की कोई न कोई शहनाज़ इन दरिंदों का निशाना बनेगी? आयोजन में चेताया गया कि अगर अब आप आगे नहीं आये तो उस समय कोई आपकी मदद के लिए आने वाला नहीं बचेगा। इस चेतना को जगाने के लिए इंक़लाबी गीत संगीत का कार्यक्रम भी हुआ। दर्द के साथ संघर्ष और हौंसले की ताल मिलाई गयी।  बुलंद आवाज़ में कहा गया कि हम इन गुंडों से नहीं डरेंगे। नारे लगाए गए-गुंडागर्दी चक्क दियांगे-धौण ते गोदा रख दियांगे। इस आयोजन ने सहमे और डरे हुए लोगों में एक नयी जान फूंकी।
ढण्डारी अपहरण, बलात्कार व कत्ल काण्ड की पीडि़ता शहनाज़ की तीसरी बरसी पर आज ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी द्धारा ढण्डारी, लुधियाना में श्रद्धांजलि समागम किया गया। श्रद्धांजलि समागम में शामिल लोगों ने शहनाज़ को इंसाफ़ दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि बलात्कारी गुण्डा गिरोह के खिलाफ शहनाज़ के न्यायपूर्ण संघर्ष को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। श्रद्धांजलि समागम को विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों व शहनाज़ के माता-पिता ने सम्बोधित किया। क्रान्तिकारी सांस्कृतिक मंच ‘दस्तक’ की ओर से जुझारू गीत पेश किए गए। यह वो गीत थे जिनमें शोषण का शिकार हुयी जनता का दर्द था। इस दर्द को दूर करने वाली मरहम की बात थी। आम जनता के हक पर चील बन कर मंडरा रहे शोषकों की चुनौती स्वीकार करने का ऐलान था।  
कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब; टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब; स्त्री मज़दूर संगठन, पंजाब स्टूडेंटस यूनियन (ललकार); नौजवान भारत सभा व बिगुल मज़दूर दस्ता संगठनों द्धारा गठित ‘ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी’ की तरफ से आयोजित श्रद्धांजलि समागम में विभिन्न संगठनों के वक्ताओं ने कहा कि शहनाज़ दमन-उत्पीडन का शिकार सभी स्त्रियों और साधारण जनता के सामने संघर्ष का एक प्रतीक है। बलात्कार, अपहरण, छेड़छाड़ जैसे जुल्मों का शिकार अधिकतर महिलाएं व उनके परिवार इन घटनाओं को सामाजिक बदनामी, मारपीट, जान गंवाने, न्याय की नाउम्मीदी आदि कारणों के चलते छिपा जाते हैं। लेकिन बहादुर शहनाज़ और उसके परिवार ने ऐसा नहीं किया। 
शहनाज़ ने लड़ाई लड़ी और वह लड़ते-लड़ते मौत को गले लगा गई। वह जुल्म के सामने घुटने न टेकने की मिसाल कायम करके गई है। उसे हमेशा याद रखना होगा। वक्ताओं ने कहा कि स्त्रियों को भयानक जुल्मों का सामना करना पड़ रहा है। स्त्रियों को इसके खिलाफ़ एकजुट होना होगा। हर इंसाफपसंद व्यक्ति को इस संघर्ष में शामिल होना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को स्त्रियों सहित सभी आम लोगों की सुरक्षा, दमन-जुल्म से छुटकारे के लिए सरकारी व्यवस्था से कोई उम्मीद न करके एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को गुण्डा-पुलिस-राजनीतिक नापाक गठजोड़ के खिलाफ जुझारू जनान्दोलन सगंठित करना होगा।
संघर्ष कमेटी के संयोजक लखविन्दर ने बताया कि शहनाज़ को 4 दिसम्बर 2014 को एक गुण्डा गिरोह ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर जला डाला था। इससे पहले शहनाज़ को 25 अक्टूबर 2014 को अगवा करके दो दिन तक सामूहिक बलात्कार किया गया था। राजनीतिक सरपरस्ती में पलने वाले इस गुण्डा गिरोह के खिलाफ़ कार्रवाई करने में पुलिस ने बेहद ढिलाई बरती, पीडि़तों की ढंग से सुनवाई नहीं की गई, रिपोर्ट लिखने और मेडिकल करवाने में देरी की गई। बलात्कार व अगवा करने के दोषी 18 दिन बाद जमानत करवाने में कामयाब हो गए। गुण्डा गिरोह ने शहनाज़ और उसके परिवार को केस वापिस लेने के लिए डराया, जान से मारने की धमकियाँ दीं। 4 दिसम्बर को दिन-दिहाड़े सात गुण्डों ने उसे मिट्टी का तेल डाल कर जला दिया। 9 दिसम्बर को उसकी मौत हो गई। गुण्डा गिरोह के इस अपराध व गुण्डा-सियासी-पुलिस-प्रशासनिक नापाक गठजोड़ के खिलाफ़ हज़ारों लोगों द्वारा ‘संघर्ष कमेटी’ के नेतृत्व में विशाल जुझारू संघर्ष लड़ा गया था। जनदबाव के चलते दोषियों को सजा की उम्मीद बँधी हुई है। कत्ल काण्ड के सात दोषी जेल में बन्द हैं। अदालत में केस चल रहा है। पुलिस द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज करने में की गई गड़बड़ों के चले अगवा व बलात्कार का एक दोषी जमानत पर आज़ाद घूम रहा है। लखविन्दर ने कहा कि इन बलात्कारियों व कातिलों के फाँसी की सजा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
श्रद्धांजलि समागम को ‘संघर्ष कमेटी’ के संयोजक व कारखाना मज़दूर यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष लखविन्दर; टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, पंजाब के अध्यक्ष राजविन्दर; स्त्री मज़दूर संगठन की बलजीत; मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन के अध्यक्ष हरजिन्दर सिंह, नौजवान भारत सभा के सतपाल व कर्मजीत कोटकपुरा, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान के नेता सुरिन्दर सिंह, डेमोक्रटिक लॉयर्ज ऐसोसिएशन के नेता एडवोकेट हरप्रीत जीरख, शहनाज़ के पिता मुहम्मद इलियास, पीप्लज मीडिया लिंक के रेक्टर कथूरिया आदि ने सम्बोधित किया। 
इस अवसर पर जनचेतना द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। 
इस अभियान से जुड़ने के लिए आप सम्पर्क कर सकते हैं लखविन्दर से जो ढण्डारी बलात्कार व कत्ल काण्ड विरोधी संघर्ष कमेटी के संयोजक   हैं। उनका मोबाईल फोन नंबर है:9646150249

Wednesday, December 13, 2017

कांग्रेसी ट्रेड यूनियन इंटक ने बुलंद की मज़दूर हित की आवाज़

Wed, Dec 13, 2017 at 3:05 PM
अनीता शर्मा ने पूछा-सरकारी अफसर क्यों नहीं करते चैकिंग?
लुधियाना: 13 दिसंबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
राष्ट्रीय मजदूर ट्रेड युनियन (इंटक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा सुंदरियाल ने लुधियाना पहुंचते ही मानवाधिकार दिवस पर इंटक के सभी सदस्यों को श्रमिकों के अधिकारों के लिए कार्य करने का दिशा निर्देश जारी किया।  चूंकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है इसलिए कांग्रेसी ट्रेड यूनियन इंटक का इस तरह खुल कर मज़दूर हितों के लिए आगे आना बहुत गहरे संकेत दे रहा है। गौरतलब यह भी है कि इंटक के महिला विभाग की राज्य अध्यक्ष अनीता शर्मा सच बोलने के लिए पहले भी काफी जानी जाती हैं। सियासी क्षेत्रों में चर्चा है कि इंटक को मज़दूर संगठनों में नंबर वन बनाने के लिए इंटक प्रमुख दिनेश सुंदरियाल और पंजाब प्रमुख अनीता शर्मा को कांग्रेस की राष्ट्रिय है कमान का आशीर्वाद प्राप्त है। 
शराब के कारोबार को ले कर तकरीबन सभी दलों से टक्कर ले चुके संगठन बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पंजाब महिला इंटक प्रधान अनीता शर्मा ने कहा कि आज सरकार मजदूरों के अधिकारों को नज़रअंदाज कर रही है जिस कारण हजारों मज़दूर सरकारी नियम कानून और इंस्पेक्टरी राज खामियों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। मज़दूरों के जान माल की सुरक्षा करने में अफसरशाही पूरी तरह नाकाम हो चुकी है। होटलों, अस्पतालों,  फैक्ट्रियों की सरकारी अफसर कोई चेकिंग नहीं करते कि यहां पर फायर सिस्टम, सीवरेज सिस्टम, बिल्डिंग प्लानिंग व हाइजीनिक व्यवस्था का ठीक इंतजाम है या नही? सरकारी अफसर या तो इसकी चेकिंग ही नहीं करते या फिर रिश्वत लेकर चुप हो जाते है। चाहिए तो यह कि अगर किसी जगह सही व्यवस्था नहीं है तो सरकारी अफसर प्राइवेट अदारों को नोटिस भेजे और उसकी चेकिंग करे यदि नियम या कानून के मुताबिक काम नहीं हो रहा तो उन पर भारी जुर्माना लगाए।   
सरकारी अफसर मज़दूरों के कल्याण के लिए व उनकी जान माल की सुरक्षा के लिए कोई भी  कार्य ढंग से नहीं कर रहे है जिस कारण फैक्ट्रियों में हादसा  होने के बाद मजदूर तो अपनी जान गँवा देता है उसके साथ साथ फैक्ट्रियों के मालिक भी हादसे के दोषी बन जाते है। उन्हें मृतकों को हर्जाना भरना पड़ता है और फैक्ट्री में आग आदि लगने से लाखों का नुक्सान अलग से हो जाता है। इसलिए सभी सरकारी विभागों के अफसर फैक्ट्रियों, होटलों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों व मॉल आदि की समय समय पर जांच करें ताकि कोई अनहोनी घटना न घटे और मजदूर व मालिकों की जान माल की सुरक्षा हो सके। 
इंटक पंजाब लोकल बॉडीज के प्रधान नरेंदर सिंह ने कहा कि सीवरेज गैस चढ़ने के कारण कई लोग हर वर्ष मर जाते है। सरकारी कर्मचारी तो  सरकार से मुआवजा ले लेते है लेकिन यदि सीवरेज साफ़ करते वक्त यह हादसा किसी प्राइवेट  बिल्डिंग में हो जाए और किसी मजदूर की जान चली जाए तो आम आदमी लाखों रुपया हर्जाना मृतक के परिवार वालों को नहीं दे सकता। इसलिए सरकार को चाहिए की सीवरेज का काम करने वाले मजदूर को ट्रेनिंग दे कि वे कैसे सीवरेज मेनहोल में कार्य करें और उन्हें क्या सेफ्टी इंतजाम बरतने चाहिए पैसे की लालच में वे जोखिम भरा काम न करे ताकि किसी मजदूर की जान न जाए। प्राइवेट सीवरेज का काम कराने वाले मालिकों को भी किसी मजदूर की जान जाने पर मजबूरन हर्जाना न भरना पड़े।
इस अवसर पर राष्ट्रीय मजदूर ट्रेड युनियन (इंटक) के राष्ट्रीय सचिव ऋषि वर्मा, पंजाब इंटक के प्रधान हरकिशन सिंह विक्की व पंजाब  इंटक लोकल बॉडी के उपप्रधान  चन्द्र शेखर सहोता ने भी अपने अपने विचार रखे।

Tuesday, December 12, 2017

नारी शक्ति पे आधारित है ये फिल्म: “हार्ड कौर”

"नारीवाद महिलाओं को मज़बूत बनाना नहीं है...नारी तो पहले से ही मज़बूत है...बात सिर्फ नज़रिये की है के दुनिया किस नज़रिये से ये मज़बूती देखती है”...निर्देशक, अजित आर राजपाल 
लुधियाना:12 दिसंबर 2017:(पंजाब स्क्रीन टीम)::
आजकल हर जगह नारी शक्ति की बहुत चर्चा होती है कि किस तरह आजकल महिलायें हर क्षेत्र में आगे बड़ रही हैं।  वो चाहें अपने घरों में रह रही हों या बाहर काम कर रही हों, वे एक स्वतंत्र दृष्टिकोण का दावा करती हैं। वे अपने जीवन पर नियंत्रण प्राप्त कर रही हैं और अपने शिक्षा, कैरियर, पेशे और जीवनशैली के संबंध में अपना निर्णय खुद ले रही हैं। पंजाब सबसे बड़ा राज्य है, जिसने सबसे अधिक महिला योद्धाओं को जन्म दिया है, परन्तु आज हम अपनी मजबूत पकड़ को अपने साहसी दायरे से लुप्त होते देख रहे है। निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया के हमारी महिलाओं का जीवन बेहतर बनाने व उन के साहस को रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल करने की हमारी ये छोटी सी कोशिश है। इस पंजाबी फिल्म में पंजाब के पांच अलग-अलग शहरों की सिख लड़कियों हैं, जो पीड़ा से गुज़रती हैं, लेकिन सब एक जुट हो कर हर कठिनाई का डट के मुकाबला करती हैं। विजय उनके कदम चूमती है। 
निर्देशक अजित आर राजपाल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में हम दृष्टि ग्रेवाल, डियाना उप्पल, निर्मल ऋषि, नीत कौर, स्वाति बक्शी, चैतैन्य कन्हाई, तनविसर सिंह व शशि किरण को हम अहम किरदारों में देखेंगे।दिल्लीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के बैनर में बनी इस फिल्म के निर्माता हैं राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व् वसीम पाशा. अजित आर राजपाल ने लिखी है इस की कहानी और सोहेब सिद्दीक़ी हैं इस के छायाचित्र निर्देशक. फिल्म को वाइट हिल स्टूडियोज द्वारा डिस्ट्रीब्यूट किया जा रहा है। ये फिल्म 15 दिसम्बर 2017 को रिलीज़ हो रही है। 
मीडिया से बातचीत के दौरान निर्देशक अजित आर राजपाल ने बताया, "हार्ड कौर, पंजाबी सिनेमा का सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में पेश करेगी।" उन्होंने आगे फिल्म के सार के बारे में बताया, "ये कहानी एक कौर की है जो एक स्कूल टीचर है और जो रोज़ एक लोकल बस द्धारा पटियाला से दोंक्ला से राजपुरा बाईपास तक सफर करती है और इस दौरान उस की मुलाक़ात एक बहुत ही अमीर लड़के से होती है जो कि हरियाणा से है। यहीं पर किस तरह से उस की ज़िन्दगी एक मोड़ लेती है जब चलती बस में एक खून हो जाता है और किस तरह ये मासूम लड़की उस खून के मामले में फस जाती है। कहानी नाज़ुक मोड़ लेती है।  किस तरह बाकी की चार कौर एकजुट हो कर इस लड़की को न्याय दिलाती हैं।" महिका एकता और सशक्तिकरण की एक दिलचस्प कहानी है हार्ड कौर। 
निर्माता  राकेश चौधरी, सुरेश चौधरी व वसीम पाशा ने बताया, "डेलीवुड स्टुडिओज़ प्राइवेट लिमिटेड के लिए, एक शानदार फिल्म "हार्ड कौर" जैसी फिल्म का निर्माण करना एक गर्व की बात है। हम क्षेत्रीय सिनेमा को एक  उच्च स्तर देने में बहुत गर्व महसूस करते हैं".
लीड एक्टर, चैतन्य कन्हई, ने भी बताया, "मैं इस तरह के कांसेप्ट व कंटेंट वाली फिल्म कर बहुत ही खुश हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है के दर्शक इस फिल्म को ज़रूर पसंद करेंगे।"
इस फिल्म मे चार गाने है जिन्हें गाया है नछत्तर गिल, प्रभ गिल, नूरां सिस्टर्ज व अमन त्रिखा ने। इन  गीतों को लिखा है अनिल जींजर, राजवीर सिंह प्रजापति, सोनू ललका, कुंवर वड़ैच, ऐ एम तुराज व रवि बसनेट ने।  संगीत दिया है प्रतीक, अम्बिका, शिवा रामगड़िआ, एनकी व बबली हक़ ने। 

Saturday, December 02, 2017

नशे के चक्रव्यूह में फंसी अनीता शर्मा की जंग

सियासत और पूंजीवाद का मायाजाल-हर कदम पे धोखा 
लुधियाना: 30 नवम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन फीचर डेस्क)::
नशे की जंग चरमसीमा पर है। या तो नशा हार जायेगा या फिर यह दुनिया अपना भविष्य किसी अंधेरी सुरंग में ले जाएगी जिसका शायद अंत न हो।  जंग का ऐलान हो चुका है।  आरपार की रेखा खिंच चुकी है। इस तरफ कौन है और उस तरफ कौन यह भी अब सामने आने लगा है। सत्ता और सियासत कहां तक जा सकती है इसका पता अब आम इन्सान को भी लगने लगा है। धर्म के नाम पर क्या क्या हो सकता है यह भी अब खुल कर सामने आने लगा है। पूंजीवाद का करूप और घिनौना चेहरा एक बार फिर सामने आ रहा है। 
पूंजीवाद के इस दौर में फिर साफ़ हुआ है कि--बाप बड़ा न भैया--सबसे बढ़ा रुपैया 
हर हाल में पैसा चाहिए। खुद को भी और अपने ख़ास लोगों को साथ बनाये रखने के लिए भी। पैसे के लिए कुर्सी चाहिए और कुर्सी बचाने के लिए फिर और पैसा और इस पैसे के लिए नशे का कारोबार। दूसरा करेगा तो तस्करी और हम करेंगे तो आमदनी का स्रोत। नशे का कारोबार बचाना है और फैलाना भी है। इसके लिए गुंडे जरूरी हों या बदमाश सब करना होगा। नशे की यह लहर भी ज़ोरों पर है और इसके खिलाफ जंग भी ज़ोरों पर जारी है। 
नशे के खिलाफ जंग का जब भी ज़िक्र छिड़ेगा तो बहुत से नाम आएंगे जिन्होंने युवा वर्ग को नशे का गुलाम बनाने में कोई कसर न छोड़ी। 
जब इस हकीकत को पढ़ कर आने वाली पीढी को शर्म भी आयेगी और बेहद निराशा भी होगी तो एक नाम सकुन देगा--बेलन ब्रिगेड प्रमुख अनीता शर्मा का नाम। 
जन्मभूमि होशियारपुर और कर्मभूमि लुधियाना की एक सुविख्यात आर्किटेक्ट। आज सारा पंजाब और देश उस के लिए युद्धभूमि बन चूका है। देश को बचाना है-नशे को मार भगाना है-बस यही है जनून। लेकिन वायदे करने वाले लोग ज़्यादा और साथ देने वाले लोग कम। 
अनीता शर्मा चाहती तो हर रोज़ नक्शे बनाने की सलाह दे कर मोटी कमाई कर लेती लेकिन रास्ता चुना अंतर आत्मा की आवाज़ सुन कर। 
वह आवाज़ एक पुकार थी। उन परिवारों की पुकार जो नशे की लत ने उजाड़ दिए। नशे ने बहुत से घरों के चिराग बुझा दिए। बहुत सी माताओं से उनके लाल छीन लिए। बहुत सी बहनों के भाई खा लिए। बहुत से पिता बुढ़ापे में बेसहारा बना दिए। उनका दर्द पुकार रहा था कि कोई तो आये। कोई तो उनका दुःख सुने। कोई तो उठे। कोई तो इस नशे कारोबार को रोके। रास्ता मुश्किल था लेकिन पुकार लगातार आती रही। घर उजड़ते रहे। कारोबारी पैसा कमाते रहे। गांव गाँव से रुदन उठता रहा। रुदन  तेज़ होती रही। पर कौन सुनता! निमंत्रण तह था लेकिन अंगारों पर चलने वाली बात थी। 
--यह पुकार कहती रही---- 
इन्हीं पत्थरों पे चल कर गर हो सके तो आना,
मेरे घर के रास्ते में कोई कहकशां नहीं है....
...और अनीता  शर्मा चल पड़ी इस आवाज़ के पीछे--
बहुत से धोखे मिले। बहुत सी धमकियां मिलीं। बहुत से लालच और बहुत से दबाव। पति श्रीपाल ने लगातार साथ निभाया। सडक हादसे में बुरी तरह घायल हो कर भी अनीता शर्मा के मार्ग की चिंता की। 
मकसद नेक था लेकिन आसान नहीं थी। अनीता शर्मा भूल गई कि सियासत की दुनिया फरेब की दुनिया होती है। इस दुनिया में कोई किसी का नहीं होता। इस सियासत के माया जाल में जो होता है वो दिखता नहीं और जो दिखता है वो होता नहीं। समाज ने अनीता का कितना साथ दिया यह भी एक दिलचस्प कहानी लेकिन सियासत ने क्या क्या किया यह भी दर्दभरी रहसयमय दास्तान। 
अनीता शर्मा के साथ भी वही हुआ जो इस राह पर  चलने वालों के साथ अक्सर होता है।  विश्वासघात और धोखों की एक और दर्दनाक दास्तान जो आपके दिल को हिला कर रख देगी। 
अनीता शर्मा की जंग एक सम्वेदनशील मोड़ पर है। उस मोड़ पर जहां कुछ भी हो सकता है। हालात नाज़ूक हैं। क्या अनीता शर्मा जीत पायेगी यह जंग...? क्या आप उसे हारने देंगें? अगर वह हार गयी तो हार आपकी होगी ! क्या आप नशे के सौदागरों को जीतने देंगें?
फैसला आपके हाथ---नशे से बेहोश समाज या  नशा मुक्त दुनिया-----????

Thursday, November 09, 2017

चंडीगढ़ में अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन शुरू

गांव गांव में ज़रूरत है ऐसे आयोजनों की तांकि भाषा का सौहार्द बना रहे
चंडीगढ़//लुधियाना: 9 नवंबर 2017: (कार्तिका//पंजाब स्क्रीन)::
मेरा जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ। एक ऐसा परिवार जहां हर भाषा का सम्मान करना सिखाया जाता है। इसके बावजूद मेरे बोलचाल की मुख्य भाषा काफी देर तक पंजाबी ही रही।  धीरे धीरे कब यह हिंदी और पंजाबी का मिक्स अंदाज़ आ गया खुद भी याद नहीं आता। जब सितंबर-2017 में पीएयू ने एक प्रतियोगिता का आयोजन कराया तो उस समय भी मेरी पंजाबी काव्य रचना को ही प्रथम पुरुस्कार मिला। इस सब के बावजूद मेरा हिंदी प्रेम कभी कम नहीं हुआ। हिंदी में लिखना, हिंदी में पढ़ना मेरे स्वभाव में उसी तरह शामिल रहा जिस तरह मैं गांवों की ठेठ पंजाबी के शब्द समझने की कोशिश करती। मैंने मैक्सिम गोर्की की महान रचना-"मां" हिंदी में ही पढ़ी। ओशो की बहुचर्चित रचना "एक ओंकार सतनाम" भी हिंदी में ही पढ़ी। दुष्यंत कुमार के शेयर मुझे बिना प्रयासों के ज़ुबानी याद होने लगे। शायद यह सिलसला यूं ही चलता पर पत्रकारिता की पढ़ाई के कारण अख़बारों और टीवी की खबरों में भी दिलचस्पी बढ़ने लगी। कभी कभी हालात में कुछ गर्माहट आती तो अख़बारों की सुर्खियां भी भयभीत करने लगती। मैंने न तो 1947 का बटवारा देखा, न ही जून-1984 का ब्ल्यू स्टार आपरेशन और न ही नवंबर-1984 का अमानवीय नरसंहार। जब रूस के अक्टूबर इंकलाब की चर्चा सुनती तो बहुत अजीब  सा लगता कि इस अक्टूबर इन्कलाब का दिन नवंबर में क्यों आता है? इस तरह के कई सवालों का जवाब तलाश करने की इच्छा मुझे अक्सर इतिहास की किताबों के नज़दीक ले जाती। इसी बीच ज़ोर पकड़ा पंजाबी भाषा के सम्मान के अभियान ने। सैद्धांतिक तौर पर बात सही थी कि पंजाब में पंजाबी को प्रथम स्थान आखिर क्यों नहीं दिया जाता। दक्षिण भारत में जहाँ के लोग हिंदी के नाम से भी दूर भागते हैं वहां हिंदी को तीसरे स्थान पर लिखा जाता है।  यहां तक कि रेलवे स्टेशनों पर भी।  अन्य स्थानों पर तो हिंदी नज़र भी नहीं आती। इन सभी तथ्यों के बावजूद मुझे यह बहुत ही दुखद लगता कि पंजाब में जहां जहां हिंदी लिखी है वहां वहां कालख पोत दी जाये। पंजाबी का सम्मान बहाल हो यह तो मैं भी चाहती थी लेकिन इसके लिए हिंदी पर कालख पोतनी पड़े यह सही न लगता।  दुःख था। बेबसी थी। कुछ कुछ शर्मिंदगी का अहसास भी।  कुछ गुस्सा भी। सियासत की जंग में मुझे अपनी और आम लोगों की हालत बहुत ही कमज़ोर लगती।
खुद से सवाल करती कि क्या सचमुच सिख धर्म के संस्थापक गुरु साहिबान संस्कृत और फारसी का भी सम्मान करते थे? अगर यह सच है तो उन्हें मानने वाले हिंदी पर कालख क्यों पोतना कहते हैं? बहुत गुस्सा आता उन लोगों पर भी जिनको हिंदी नहीं आती थी लेकिन पंजाबी सूबा के समय  समय जिन्होंने पंजाबी में बोल बोल कर  कि लिखो हमारी मातृ भाषा हिंदी है। हिंदी पंजाबी और अन्य भाषाओं के दरम्यान जिस पुल की बात मैं सोच रही थी वह मुझे अपनी कल्पना ही लगता।  महसूस होता यह कभी साकार नहीं होगी। मुझे लगता कि बस शायद यहां सियासत ही जीत सकती है और न कोई सिद्धांत-न कोई धर्म और और न कोई विचार। 
इसी निराशा में एक दिन पता चला कि चंडीगढ़ में अखिल भारतीय महिला कवि सम्मेलन हो रहा है। जाने की इच्छा भी थी लेकिन कालेज के टेस्ट और कुछ अन्य समस्याएं आड़े आ रही हैं। जब विस्तार से जानकारी ली तो पता चला कि हर पंजाबी शायरा को अपनी पंजाबी रचना के साथ साथ हिंदी अनुवाद भी बोलना है। यह जान कर न जा पाने का दुःख भी हुआ। पता चला कि इस आयोजन में भाग लेने के लिए तकरीबन 300 महिला शायर भाग लेंगीं। यह जानकारी चंडीगढ़ में आल इंडिया पोइटिस कांफ्रेस के संस्थापक डा. लारी आज़ाद ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी। डा. लारी आज़ाद ने वास्तव में दुनिया देखी है। सियासत की भी और साहित्य की भी। मोहमद अकरम लारी ने सत्तर के दशक में भरतीय धर्मों और सियासत पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखीं हैं। वह बहुत सी वशिष्ठ पत्रिकाओं का सम्पादन भी करते हैं।  इसलिए भारत में धर्म-सियासत और भाषा की वास्तविक स्थिति को भी बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। इस संगठन के पास आठ हज़ार प्रमुख महिलाएं पंजीकृत है जिनमें से कोई शायरा है, कोई लेखिका, कोई कलाकार, कोई टीवी पर, कोई रेडियो  पर और कोई किसी अन्य में। इनमें कई प्रमुख लोगों से भेंट होती, उनसे मिलने का अवसर मिलता। अब भी कोशिश रहेगी। 
कुल मिला कर प्रसन्नता की बात है कि यह एक ऐसा मंच है जिसे आधार  बना कर पंजाबी के पुल हिंदी और अन्य भारतीय भाषायों से जोड़े जा सकते हैं। सलाम है ऐसे आयोजन को।  सलाम है इसके आयोजकों को। इस तरह के आयोजन होते रहें और विभिन्न भाषाओं के लेखक और कलाकार अलग अलग प्रदेशों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ने के सफल प्रयास करते रहें। समाज जुड़ा रहे इसकी उम्मीद अब कलमकारों से ही बची है। इस तरह के आयोजनों की आज सबसे अधिक ज़रूरत हैं। केवल राज्यों की राजधानियों में ही नहीं बल्कि गांव गांव में इनकी ज़रुरत है। आखिर में एक बार फिर सलाम। कवरेज के लिए एक बार अवश्य जाना होगा इस आयोजन में, बाकी की बातें फिर कभी सही। किसी अगली पोस्ट में।  -कार्तिका (लुधियाना)

Monday, October 23, 2017

हमें पंजाबी होने पर गर्व है : नायब शाही इमाम मौलाना उसमान रहमानी

Mon, Oct 23, 2017 at 5:30 PM

पंजाबी के लिए संघर्ष करने वालों के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द हो  
लुधियाना: 23 अक्तूबर 2017(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

आज यहां जामा मस्जिद लुधियाना से नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी ने अपनी पंजाबी मातृभाषा के हक में जोरदार आवाज उठाई। उन्होनें कहा कि पंजाब भर में दिशासूचक बोर्डो पर अकाली-भाजपा सरकार के समय पर मातृ भाषा पंजाबी के साथ किए गए भेद-भाव की जितनी निंदा की जाए कम है। पंजाब में बीते कुछ दिनों से पंजाबी मातृ भाषा के सम्मान के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मातृ भाषा के लिए संघर्ष कर रहे नौजवानों पर पुलिस द्वारा दर्ज किया मुकद्दमा निंदनीय है। मौलाना उसमान ने कहा कि पंजाबी हमारी मातृ भाषा है और हमें पंजाबी होने पर गर्व है। उन्होनें कहा कि देश के सभी राज्यों में वहां की भाषाओं को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि पंजाब जहां देश के सभी राज्यों के लोग तकरीबन व्यापार के लिए आते हैं में पंजाबी के साथ भेद-भाव किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि ये भी अफसोस की बात है कि कुछ लोग दिशासूचक बोर्डो पर पंजाबी भाषा को प्रथम स्थान दिलवाने के लिए उठाए गए कदम को हिंदी का अपमान बता कर पंजाबी मातृ भाषा के संघर्ष को रोकना चाहते है। उन्होनें कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है लेकिन सबसे पहले मातृ भाषा पंजाबी को ही लिखा जाएगा और हमें यह अधिकार संविधान ने दिया है। मौलाना उसमान लुधियानवी ने कहा कि पंजाबी मातृ भाषा के लिए जो भी लोग संघर्ष करेंगे हम उनके साथ है। उन्होनें कहा कि मातृ भाषा ही कौमों के वजूद को जिंदा रखती है। पंजाबी मातृ भाषा की रक्षा करना प्रत्येक पंजाबी पर फर्ज है। इस संघर्ष को किसी भी धर्म या जाति के साथ जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। उन्होनें कहा कि जिन्हें पंजाबी नहीं अच्छी लगती या वो चाहते है कि पंजाब में पंजाबी को पहला स्थान ना दिया जाए तो ऐसे लोगों को चाहिए कि वह पंजाब को छोड़ कर किसी ऐसे स्थान पर जाए जहां की भाषा उनकों अपनी मातृ भाषा लगती है।

Monday, October 09, 2017

मस्जिद वलीपुर में धार्मिक आयोजन संपन्न

Mon, Oct 9, 2017 at 5:20 PM
समाज में प्रत्येक जीव का सम्मान करें:नायब शाही इमाम
वलीपुर में नायब शाही इमाम मौलाना उसमान लुधियानवीं का सम्मान करते हुए मुहम्मद नबी जान व अन्य
लुधियाना: 9 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज यहां वलीपुर में स्थित मस्जिद मदरसा महमूदिया में हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम की जीवनी पर एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी शामिल हुए। नायब शाही इमाम ने संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह ताआला के प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम का फरमान है कि समाज में सभी व्यक्तियों को बराबर सम्मान देना चाहिए, किसी के साथ भी उसकी जाति व धर्म को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता। मौलाना उसमान लुधियानवी ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि नफरतें खत्म करके मोहब्बतें बांटी जाएं। उन्होनें कहा कि हकीकत में धार्मिक इंसान वही है जो कि अपने दिल में किसी के लिए बुराई नहीं रखता। इस अवसर पर मदरसे के प्रमुख मौलाना नबीजान, मुहम्मद सिराज खान, डा. हारुन बाली की ओर से नायब शाही इमाम मौलाना उसमान लुधियानवीं, सरपंच गुरमीत सिंह, हरमोहन सिंह, नंबरदार जगरूप सिंह, पटवारी जगीर सिंह, डा. अब्दुल रहमान, मौलाना सलीम कासमी, मौलान सऊद आलम, मौलाना फैजान, मास्टर महफूज व मुहम्मद हाबिल का सम्मान किया गया। वर्णनयोग है कि आज के इस समागम में पवित्र कुरआन शरीफ को याद करके हाफिज बनने वाले विद्यार्थी मुहम्मद चांद की दस्तारबंदी की गई। 

Monday, October 02, 2017

Ludhiana: जामा मस्जिद में खालसा ऐड के सदस्यों का सम्मान

लुधियाना के मुसलमानों ने दी 9 लाख से अधिक की सहायता

लुधियाना: 2 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

आज यहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद में मजलिस अहरार इस्लाम हिन्द द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी के नेतृत्व में लुधियाना के मुसलमानों ने सिखों की प्रसिद्ध संस्था खालसा ऐड को रोहंगिया पीडि़तों के लिए बांगलादेश में लगाए गए लंगर के लिए 9 लाख 32 हजार 20 रूपये की सहायता राशि दान दी, जिसमें 1 लाख रूपये की नकद राशी गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार प्रितपाल सिंह की तरफ से दी गई। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब द्वारा खालसा ऐड के सदस्यों का मानवता के लिए की जा रही कोशिशों को देखते हुए उनका सम्मान भी किया। इस अवसर पर शहर की विभिन्न मस्जिदों के सदस्य, इमाम व गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार सरदार प्रितपाल सिंह, खालसा ऐड के सदस्य परमपाल सिंह, दमन जीत सिंह,गुरसाहिब सिंह, जपनीत सिंह,,गगनदीप सिंह, कुंवर पुष्पिंदर सिंह, रमनदीप सिंह, हरसिमरन सिंह उपस्थित थे। इस अवसर पर संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि रोहंगिया मुसलमानों पर किया गया अत्याचार हकीकत में इंसानियत के खिलाफ एक नापाक कदम है, उन्होनें कहा कि इस्लाम धर्म ने मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया है, संसार में जो भी लोग पीडि़तों की सहायता करते है मुसलमान उनका साथ देते आये है। उन्होंने कहा कि पीडि़तों को जाति और धर्म के आधार पर नही देखा जा सकता। अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर जब आंतकी हमला हुआ तो लुधियाना के मुसलमानों ने पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया था और कारगिल की जंग के समय में भी प्रधानमंत्री राहत कोष में राशि देने वालों में मुसलमान शामिल रहे है। शाही इमाम ने कहा कि पीडि़तों के जख्म पर मरहम लगाना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। इस अवसर पर खालसा ऐड के टीम लीडर सरदार परमपाल सिंह ने कहा कि उनकी संस्था का उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान ने हमे यह शिक्षा दी है कि पीडि़त व्यक्ति किसी भी धर्म या समुदाय का हो उसकी सहायता करना हमारा फर्ज है, परमपाल ने कहा कि देश में जो लोग धर्म के नाम पर नफरत फैलाने चाहते है वह समझ ले कि धर्मी वही है जो सभी इंसानो से प्यार करता हो। उन्होंने कहा कि आज यहां लुधियाना के मुसलमानों ने खालसा ऐड के मानवता कार्यो को देखते हुए जो राशि हमें दी है वह भी इस बात का संकेत है कि हमारे मुस्लिम भाई मानवता कार्यो में धर्म को आधार बना कर नही देखते बल्कि इंसानियत के लिए काम करने वालो का हौंसला बढ़ा रहे है। इस अवसर पर खालसा ऐड के सभी सदस्यों को शाही इमाम पंजाब द्वारा सम्मानित किया गया।

पत्रकारों की हत्या और बढ़ रही असुरक्षा के विरोध में मौन व्रत

इस बार भी खुल कर सामने नहीं आया मीडिया 
लुधियाना: 2 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

देश में हो रही पत्रकारों की हत्याओं और पत्रकारों की मिल रही धमकियों के विरोध में रोष प्रकट करने के लिए प्रैस क्लब आॅफ इंडिया के आह्वान पर आज गांधी जयंती के मौके पर लुधियाना में मौन धारण कर पूरे देश के पत्रकारों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया गया। लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित चुनिंदा पत्रकारों, लेखकों, अध्यापकों एवं समाज सेवकों ने एकजुट हो कर इस सिलसिलो को बंद करवाने और देश में पत्रकारों की सुरक्षा पुख़्ता करने की मांग की गई।

प्रातः ठीक साढ़े ग्यारह बजे लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित शहीद करतार सिंह सराभा पार्क फिरोज़पुर गांधी मार्केट में मौन व्रत की शुरूआत हुई, जिस में वरिष्ठ पत्रकार सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह, राज जोशी, रैक्टर कथूरिया के साथ पत्रकार दीप जगदीप सिंह, जसप्रीत सिंह, स्कूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह, अध्यापक परमजीत कौर, दविंदर सिंह, कवियत्री सुकृति भारद्धाज, समाज सेवी एवं कला प्रेमी ललित सूद ने शिरक्त की। कुल दस मिनट के रोष प्रदर्शन में पहले पांच मिनट मौन व्रत रखा गया। उसके बाद पूरी दुनिया में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए ज़ोरदार टाइम्स डाॅट काॅम के संपादक, पत्रकार एवं लेखक दीप जगदीप सिंह ने बताया कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रही अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था रिपोर्टर्ज़ विदाऊट बाॅडर्ज़ के ताज़ा आंकड़ों की मुताबिक स्वतंत्र मीडिया के मामले में भारत 180 देशों में से पिछले साल के 133वें पायदान से खिसक कर 136वें पायदान पर चला गया है। इसके साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में भारत ईराक और सीरीया के बाद तीसरे स्थान पर है जबकि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान भी उस के बाद आते हैं। पत्रकारों के खि़लाफ़ गाली-गलौच और धमकाने के मामले में भारत 18वें पायदान पर है। ऐसे माहौल में देश के अंदर काम कर रहे पत्रकारों के लिए जंग जैसे माहौल में काम करने की स्थिति बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि सितंबर माह में ही देश में हुई विभिन्न घटनाओं में तीन पत्रकार गौर लंकेश (बंगलौर), शांतनु भौमिक (त्रिपुरा) और केजे सिंह (मोहाली) की हत्या हो चुकी है। यही नहीं पिछले दो सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर में 4 पत्रकारों ने वाॅटस ऐप पर धमकियां मिलने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। अफ़सोस की बात यह है कि करीब दो दशकों से पत्रकारों की हत्याओं और धमकाने का सिलसिला चल रहा है लेकिन आज तक किसी भी मामले में दोषियों को सज़ा नहीं मिल पाई है। दीप जगदीप सिंह ने इंटरनेशनल जर्नलिस्ट फ़ैडरेशन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब तक ऐसे मामलों में तेज़ी से कार्यावाही नहीं होती और दोषियों की सख़्त सज़ाएं नहीं दी जाती तब तक यह सिलसिला रुकने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि प्रैस क्लब आॅफ इंडिया ने आज राष्ट्रीय स्तर के शांतमई मूक प्रदर्शन के द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि पत्रकारों को मिल रही धमकियों और हत्याओं के मामलों में दोषियों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और उनके खि़लाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। राज्य सरकारों से मांग की गई है कि पत्रकारों को पेशेवर, सामाजिक और स्वास्थय सुरक्षा प्रदान करने के लिए पत्रकार भलाई फंड स्थापित किया जाए। सोशल मीडिया पर पत्रकारों को मिलने वाली धमकियों और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार को रोकने के लिए आवश्यक ढांचा विकसित किया जाए और दोषियों की पहचान कर तुरंत कानूनी कार्यवाही की जाए। इस मौके पर उपस्थित सभी ने इस बात का समर्थन किया कि अपनी सुरक्षा के बारे में पत्रकारों को ख़ुद सचेत होना होगा और अपने सभी मतभेद भुला कर एकजुट होना होगा। इस बारे में सुझाव देते हुए दीप जगदीप सिंह ने कहा कि चाहे लुधियाना में विभिन्न पत्रकार संगठन हैं जो अपने-अपने ढंग से बढ़िया काम कर रहे हैं, लेकिन सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर एक संयुक्त तालमेल कमेटी गठित करनी चाहिए ताकि पत्रकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एकजुटता का माहौल तैयार किया जा सके और आने वाले समय मे संयुक्त कार्यवाही का कार्यक्रम बनाया जा सके।
इस मौके पर अपने विचार देते हुए स्क्ूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह ने कहा कि देश में बोलने की आज़ादी पर दो तरह के ख़तरा मंडरा रहा है एक तरफ एक ख़ास विचारधारा के तहत लेखकों और पत्रकारों की योजनाबद्ध तरीके से हत्याएं की जा रही हैं और दूसरी तरफ़ विभिन्न विवादित मामलों की कवरेज के दौरान भड़की हुई भीड़ द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। यह दोनो तरह के चलन लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति के सिद्धांत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस लिए हर किस्म के अलोकतांत्रिक चलन का विरोध करना और उनके खि़लाफ़ एकजुट होकर संयुक्त रूप से आवाज़ बुलंद करना आवश्यक है। कवित्री सुकृति भारद्वाज ने कहा कि वह पत्रकारों और लेखकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इस कदम में उनके साथ हैं। वह इन मामलों पर अपनी कलम के ज़रिए लोगों में जागरुकता फैलाने का प्रयास करेंगी और मानव अधिकारों के लिए जो भी कार्य किए जाएंगे उन में भागीदारी निभाएंगी। अध्यापिका परमजीत कौर और अध्यापक दविंदर सिंह ने कहा कि स्कूल स्तर पर ही बच्चों को विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में जागरुक करना चाहिए ता कि आगे चल कर एक दूसरे के विचारों से असहमत होने पर भी एक दूसरे को अपनी बात कहने देने वाला स्वभाव विकसित किया जा सके।
वरिष्ठ पत्रकारों सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह और राज जोशी ने उपरोक्त विचारों की प्रोढ़ता करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में बढ़ रहे ख़तरों पर चिंता प्रकट की और हर तरह का सहयोग देने का वादा किया।

Sunday, October 01, 2017

यौमे आशूरा का दिन बड़ी ही बरकतों और रहमतों वाला है

Sun, Oct 1, 2017 at 2:49 PM
10 मुहर्रम यौमे आशूरा के दिन ही कयामत आयेगी
लुधियाना: 1 अक्तूबर 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज यहां पंजाब की इतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में 10 मुर्हरम यौमे आशूरा के मौके पर एक धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने की। समारोह की शुरूआत करते हुए कारी मोहतरम साहिब ने पवित्र कुरान शरीफ की तिलावत की और गुलाम हसन कैसर, हसन नसीरावादी ने अपना नातिया कलाम पेश किया। 
इस मौके पर पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने मुसलमानों को संबेाधित करते हुए कहा कि करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन शहीद ने इंसानियत को जालिमों के खिलाफ हक की आवाज बुलंद करने का वो सबक दिया है जिसे रहती दुनिया तक याद किया जाता रहेगा। 
शाही इमाम ने कहा कि आज आशूरा का दिन बड़ी ही बरकतों और रहमतों वाला दिन है। उन्होंने कहा कि आज के दिन रोजा रखना अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद साहिब (स.) की सुन्नत है। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें ज्यादा से ज्यादा इबादत में लगाना चाहिए। शाही इमाम ने कहा कि जो लोग यह समझते हैं कि सिर्फ दान देकर वह रब को राजी करना चाहते हैं तो वह गलत सोचते हैं। दान देने से पहले अपने कर्म अल्लाह के हुकम अनुसार करने होंगे। 
शाही इमाम पंजाब ने कहा कि यौमे आशूरा के दिन ही अल्लाह पाक ने जमीन, आसमान, हवा, पानी, इंसान और हर चीज को बनाया और 10 मुहर्रम यौमे आशूरा के दिन ही कयामत आयेगी। शाही इमाम ने कहा कि आज के दिन हमें अपने घरवालों पर दिल खोलकर खर्च करना चाहिए और इस दिन गरीबों की मदद भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी मुसलमान किसी यतीम को अच्छा खाना खिलाता है, अच्छे कपड़े पहनाता है और बाद में उसी यतीम के सिर पर प्यार से हाथ फेरता है तो जितने भी बाल उस हाथ के नीचे से निकलेंगे अल्लाह पाक उसको हर बाल के बदले में नेकियां देते हैं। 
उन्होंने कहा कि करबला के मैदान में जो कुछ भी हुआ, उससे नौजवान नस्ल को सबक लेना चाहिए। शाही इमाम ने कहा कि हमारे बच्चों को यह जानकारी होनी चाहिए कि इस्लाम धर्म के लिए हजरत इमाम हुसैन (रजि.) ने कैसी-कैसी कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा कि जो कौमे अपने शहीदों को भूल जाया करती हैं, उनका बजूद खत्म हो जाया करता है। शाही इमाम ने कहा कि मुसलमान इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि करबला के शहीदों की कुर्बानियों को कभी भी भूलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन (रजि.) का दर्जा बहुत बड़ा है इमाम हुसैन (रजि.) हजरत मुहम्मद साहिब (स.) के नवासे हैं और हजरत मुहम्मद साहिब (स.) को इनसे बहुत प्यार था। उन्होंने कहा कि शहीद सब के होते, वो कौम का सरमाया होते हैं, उन्हें बांटा नहीं जा सकता। शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन (रजि.) ने करबला के मैदान से जो शिक्षा हमें दी है, उस पर अमल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हक की आवाज बुलंद करने वाले, जालिमों के खिलाफ आवाज उठाने वाले ही इमाम हुसैन (रजि.) के सच्चे आशिक हैं। 
शाही इमाम ने कहा कि आज यौमे आशूरा का दिन जहां हमें हजरत इमाम हुसैन (रजि.) की कर्बुानियों से सबक देता है, वहीं अपने देश के प्रति भी कुर्बानी देने की प्रेरणा देता है। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब ने देश में आपसी भाईचारे और अमन शांति के लिए दुआ भी करवाई।
इस मौके कारी अलताफ-उर-रहमान लुधियानवी, कारी मुहम्मद मौहतरम सहारनपुरी, मौलाना अतीक-उर-रहमान फैजाबादी, नायब शाही इमाम पंजाब मौलाना उसमान रहमानी, मुफ्ती मुहम्मद जमालुद्दीन, मौलाना कारी मुहम्मद इब्राहिम, अंजुम असगर, तनवीर खान, शाकिर आलम, मुहम्मद खालिद, परवेज आलम व शाही इमाम के सचिव मुहम्मद मुस्तकीम आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

लुधियाना पुलिस ने ढूंढ निकाला दो दिन से लापता हुआ बच्चा

6 नम्बर डिवीज़न की पुलिस ने दिखाया कमाल 
लुधियाना: 30 सितंबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
बच्चा मानसिक तौर पर कमज़ोर हो, उस पर गूंगा बहरा भी हो तो अंदाज़ा लगयाइये कि उसके गुम हो जाने पर परिवार के मन पर क्या गुज़रती है। जब लुधियाना का गोलू गुम हुआ तो परिवार की हालत बेहद बिगड़ गई। दशहरे का त्यौहार बेरंग हो रहा था। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि गोलू की तलाश कहां करें। 
आखिर इसकी सूचना पुलिस को दी गयी और इस सूचना के बाद शुरू हुआ पुलिस का काम। पुलिस ने अपने तरीके से गोलू का सभी जगह पता लगाया लेकिन उसका कुछ पता न चला। परेशानी बढ़ रही थी लेकिन पुलिस की मेहनत रंग लायी। 
गोलू नाम का 10 साल का बच्चा पिछले दो दिनों से गुम था जिसका कोई पता नहीं च रहा था। इस बच्चे के परिवार वाले रो रो कर बेहाल थे। इसको 6 नंबर डिवीज़न की पुलिस ने ढूंढकर पिता के हवाले कर दिया।  गोलू के पिता सतिंदर राम ने बताया के उनका बच्चा मानसिक तौर पर कमजोर है और उसको ना तो सुनता है और ना वह बोल सकता है। वह दो दिन से शहीद भगत सिंह कॉलोनी से गुम  था और आज बच्चे के मिलने पर परिवार के लोग बहुत ही खुश हैं।  इस  के साथ ही साथ परिवार के लोगों ने पंजाब पुलिस का धन्यवाद भी किया।  यह 
जानकारी देते हुए मुंशी महिंदर पाल ने बताया के उनका परिवार पीछे से बिहार के रहने वाले हैं। की बरसों से लुधियाना में यहां शेरपुर में रहे हैं। इस बच्चे के लिए पूरे लुधियाना में पिछले दो दिन से वायरलेस की जा रही थी। इसी वायरलेस के जादू ने कमाल दिखाया और गोलू का पता चल गया। 
इसका और विवरण थाना 6 नंबर डिवीज़न के मुंशी महिंदर पाल से लिया जा सकता है। उनका मोबाइल नंबर है 7837018906

Wednesday, September 27, 2017

LIC ने किया लुधियाना में रंगला पंजाब का आयोजन

गुरु नानक भवन में बांधा रंगारंग आयोजन ने संगीतमय समय 
लुधियाना: 27 सितंबर 2017: (पंजाब स्क्रीन टीम):: More Pics on Facebook
जब सियासत और समाज में छुपे तमाशबीन लोगों ने देश और पंजाब की अर्थव्यवस्था को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी उस समय जीवन बीमा निगम आम लोगों के साथ मध्यवर्गीय लोगों के भविष्य की सुरक्षा में लगा था। इस को चिंता थी कि कहीं ऐसा न हो कि किसी बीमा धारक को बहुत सख्त ज़रूरत हो--हर तरफ से जवाब मिल चुका हो उस समय हम भी उसे भूल जाएँ। हर बार LIC उस समय काम आता रहा जब ज़रूरतमंद को हर तरफ अँधेरा महसूस होता। कुछ मामलों में गड़बड़ियां भी हुईं लेकिन ज़्यादातर मामलों में LIC ने अपनी कर्तव्य परायणता का सबूत दिया। आज उसी ख़ुशी का इज़हार किया गया लुधियाना के गुरु नानक भवन की स्टेज पर। रंगला पंजाब एक यादगारी आयोजन रहा। 
भारतीय जीवन बीमा निगम के हीरक जयंती वर्ष को उत्साह पूर्वक मनाते हुये लुधियाना मण्डल ने आज गुरु नानक भवन लुधियाना में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम रंगला पंजाब का आयोजन किया । इस भव्य प्रोग्राम का शुभारंभ लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर श्री प्रदीप अग्रवाल ने अपने कर कमलों से किया । इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुतकर्ताओं ने देश भक्ति के गीतों के साथ-साथ पंजाब के लोक नाच गिद्दा व भंगरा से दर्शकों का मन मोह लिया । मुख्य अतिथि श्री प्रदीप अग्रवाल जी ने भारतीय जीवन बीमा निगम की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका की सराहना करते हुए अच्छा प्रदर्शन करने वाले एजेन्टों व शाखा विक्रय वाहिनी के सदस्यों सम्मान भी किया। More Pics on Facebook

रंगा-रंग प्रोग्राम के शुभ-अवसर पर लुधियाना मण्डल के वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक श्री एल. सी. पिपिल ने बताया भारतीय जीवन बीमा निगम ने पॉलिसीधारकों व राष्ट्र की सेवा करते हुये 61 गौरवपूर्ण वर्ष पूर्ण कर लिया है । जीवन बीमा का संदेश देश के हर कोने में पहुचाने तथा लोगों का पैसा लोगों के भलाई में लगाने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रैस विज्ञप्ति जारी करते हुये उन्होने बताया कि पिछले 17 वर्षो से जीवन बीमा के क्षेत्र मे प्राईवेट कंपनियों के आने के बावजूद भी भारतीय जीवन बीमा निगम ने मार्केट शेयर नई पॉलिसियाँ में 76% एवं कुल प्रीमियम आमदन में 71% रखते हुए अपना पहला स्थान कायम रखा हुया है । आज भारतीय जीवन बीमा निगम के पास 29 करोड़ से अधिक पॉलिसीधारक होने के साथ-साथ 23 लाख करोड़ से भी अधिक लाइफ फ़ंड एवं 25 लाख करोड़ की परिसंपत्तियाँ भी हैं । उन्होने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में भारतीय जीवन बीमा निगम ने 1,12,700-41 करोड़ रुपये के 215.58 लाख दावों का भुगतान कर के एक इतिहास बनाया है। 99.63% मृत्यु दावों का भुगतान सूचना मिलने के 15 दिनों के अंदर किया गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु सूचना प्रोधौयोगिकी का अधिकतम उपयोग किया है। भारत में सब से बड़ा बीमा उद्योग होने के कारण भारतीय जीवन बीमा निगम ने हमेशा उच्च तकनीक को अपनाते हुए अपने पॉलिसी धारकों को बेहतर सेवा प्रदान कर रहा है।

Friday, September 15, 2017

एसपीएस हॉस्पिटल कराएगा 30 सितंबर को "दिल की दौड़"

Fri, Sep 15, 2017 at 1:57 PM
मकसद लोगों के दिल की सेहत का सुधार 
लुधियाना: 15 सितम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
सतगुरू प्रताप सिंह (एसपीएस) हॉस्पिटल की ओर से वल्र्ड हार्ट डे के उपलक्ष्य में 30 सितंबर को दिल की दौड़ नाम से मिनी मैराथन का आयोजन किया जाएगा। गुरू नानक देव स्टेडियम से शुरू होने वाली इस मिनी मैराथन के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू कर दी गई हैं।
शुक्रवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हॉस्पिटल के एमडी जुगदीप सिंह ने बताया कि लुधियाना और पंजाब के लोगों को हेल्दी लाइफ का संदेश देने के लिए एसपीएस हॉस्पिटल की ओर से 10 किलोमीटर लंबी चौड़ी दौड़ का आयोजन किया जा रहा है। हर साल वल्र्ड हार्ट डे के आसपास यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। ताकि लोगों को बचाव इलाज से बेहतर है का संदेश देकर सेहतमंद रहने को प्रेरित किया जा सके।
हॉस्पिटल के डायरेक्टर जय सिंह ने बताया कि मिनी मैराथन के साथ ही एथलीटों को 400 मीटर व 800 मीटर की जैवलिन और शॉटपुट थ्रो का आयोजन भी होगा। ताकि शहर व पंजाब के एथलीटों को एक अच्छा मौका दिया जा सके। सीओओ डॉ. अजय अंगरीश ने कहा कि सोसायटी व संगठनों के सहयोग से यह कार्यक्रम और भी ज्यादा बेहतर हो जाता है। पिछले तीन सालों से हमें लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इसी कारण हम लोग हर साल हेल्थ से संबंधित कार्यक्रम आयोजित कर पाते हैं।
सीनियर मार्केटिंग मैनेजर तेजदीप सिंह रंधावा ने बताया कि यह दौड़ 10 व 5 किलोमीटर के लिए होगी। दोनों दौड़ 30 सितंबर को सुबह 6 बजे गुरू नानक देव स्टेडियम से शुरू होगी। इसमें हिस्सा लेने के इच्छुक एथलीट एसपीएस हॉस्पिटल, शेरपुर चौक, एसपीएस डायलसिस सेंटर, मॉडल टाऊन व फव्वारा चौक के पास पैवेलियन माल के साथ-साथ 222.ह्यश्चह्य१०द्म.ष्शद्व पर भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इस मौके पर मार्केटिंग मैनेजर गुरदर्शन सिंह मांगट भी मौजूद रहे।

Tuesday, September 12, 2017

रोहंगिया मुसलमानों का कत्लेआम सहन नहीं किया जाएगा:शाही इमाम

Tue, Sep 12, 2017 at 2:45 PM
लुधियाना में एक लाख से अधिक मुसलमानों का रोष प्रदर्शन
लुधियाना: 12 सितंबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
बीते कई सप्ताह से म्यामार वर्मा में रोहंगिया मुसलमानों पर वहां की सरकार द्धारा किए जा रहे अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ आज यहां पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी के आहवान पर शहर के एक लाख से अधिक मुसलमानों ने फील्ड गंज चौक स्थित जामा मस्जिद से डिप्टी कमिश्नर दफ्तर तक रोष मार्च निकाला और भारत के राष्ट्रपति माननीय श्री राम नाथ कोविंद के नाम डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन दिया। गौरतलब है कि आज सुबह से ही लुधियाना के विभिन्न इलाकों से हजारों की संख्या में मुसलमान जामा मस्जिद पहुंचना शुरु हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ में ज्यादातर अंग्रेजी भाषा में लिखे पोस्टर उठा रखे थे जिन पर रोहंगिया मुसलमानों के नरसंहार को रोकने के साथ-साथ म्यामार की स्टेट कौंसलर व नोबल पुरस्कार प्राप्त आंग सांग सू ची के विरुद्ध नारे लिखे हुए थे।  इस मौके पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि विश्व के इतिहास में अब तक कोई ऐसा नरसंहार नहीं हुआ जैसा कि इन दिनों म्यामार की जालिम सरकार और वहां के दंगाई एक साथ मिलकर कर रहे हैं। उन्होनें कहा कि हैरत की बात है कि विश्व समुदाय जो कि एक छोटी सी आतंकी घटना होने के बाद आसमान सिर पर उठा लेता है वह भी हजारों मुसलमानों के कत्लेआम पर खामोश है। उन्होनें कहा कि भारत सरकार ने हमेशा ही म्यामार को एक अच्छा देश बनाने के लिए पड़ोसी होने के नाते रंगून की मदद की है, को चाहिए कि इस नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाए। शाही इमाम ने कहा कि बर्मा में हो रहे नरसंहार के बीच केंद्र सरकार की ओर से देश मे रह रहे चालीस हजार रोहंगिया रिफ्यूजियों को वापिस भेजे जाने की खबर ने सिसक रहे रोहंगियों के जख्म पर नमक का काम किया है। शाही इमाम ने कहा कि भारत का संविधान ही नहीं बल्कि इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि हमनें हमेशा ही मुसीबत में शरण मांगने वालों को मना नहीं किया। शाही इमाम मौलाना हबीब ने कहा कि धर्म के नाम पर अन्याय और सियासत दोनों ही गलत है। उन्होनें कहा कि रोहंगियों का कत्लेआम हरगिज सहन नहीं किया जाएगा ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय का नहीं बल्कि समूह इंसानियत को बचाने का विषय है। शाही इमाम ने कहा कि वहां जिस तरह बच्चों, औरतों और बूढ़ों का कत्ल किया जा रहा है वह सहन से बाहर है। वर्णनयोग है कि आज लुधियाना की जामा मस्जिद द्वारा एक फैक्स संदेश के जरिए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एनटोनियो जूटै्रस, ओ.आई.सी (मुस्लिम देशों का समूह) के महासचिव डा. यूसुफ अल ओथम, मुस्लिम वल्र्ड लीग मक्का के महासचिव अबू अब्दुल्ला को भी ज्ञापन भेजा गया है। 

Sunday, September 03, 2017

ईद के मौके पर शाही इमाम पंजाब की सिंह गर्जना

धार्मिक आजादी पर प्रहार न करें भाजपा सरकारें
देश के लिए क़ुर्बानी दी है आत्म सम्मान के लिए भी देंगे
लुधियाना: 2 सितम्बर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
अच्छे दिनों के झांसों और जुमलेबाज़ी जैसे तजरुबों से आम जनता के सब्र को आज़मा रही सियासत के इस दौर में ईद का त्योहार एक संकल्प की तरह आया। शाही इमाम पंजाब ने इस स्थिति को समझते हुए सिंह गर्जना की कि हम इस सबसे निपटना भी जानते हैं।
आज यहां पंजाब की इतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में हजारों मुस्लमानों में पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की इमामत में ईद की नमाज अदा की। इस मौके पर जामा मस्जिद में ईद मिलन का राज्य स्तरीय समारोह भी आयोजित किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि आज का दिन हमें अल्लाह तआला के नबी हजरत इब्राहिम की ओर से अपने रब का हुक्म मानते हुए दी गई कुर्बानी की याद दिलाता है। शाही इमाम ने कहा कि हम दुनिया को बताना चाहते है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय जालीम अंग्रेज सरकार के खिलाफ सारी कौमों के साथ-साथ मुस्लमानों की ओर से दी गई कुर्बानियां इसी जज्बे की प्रेरणा थी। उन्होंने कहा कि आज भी भारत का मुस्लमान देश की रक्षा के लिए कुर्बान होने को तैयार है। शाही इमाम ने कहा कि देश में धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले लोग इस बात को समझने की उनकी फिरकापरस्ती कभी कामयाब नहीं हो सकती क्योंकि भारत हमेशा ही धर्म निरपेक्ष देष रहा है। उत्तर प्रदेश व अन्य भाजपा शासित राज्यों में मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों पर की जा रही टिप्पणियों की विरोधता करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि धार्मिक आजादी पर प्रहार न करे भाजपा सरकारें, मुसलमानो ने देश के लिए कुर्बानियां दी है और किसी भी कीमत पर आत्म सम्मान पर आंच नहीं आने देंगे।  इस मौके पर मुस्लिम भाईचारे को संबोधित करते हुए सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि इस देश में ईद उल जुहा का त्यौहार सभी धर्मों के लोग मिल-जुल कर मनाते है। उन्होंने कहा कि पंजाब की इस धरती पर आज लाखों मुस्लमान खुदा के आगे सजदा कर रहे हैं यह हमारे लिए गर्व की बात है। 
समारोह को संबोधित करते हुए रवनीत बिट्टू ने कहा कि आज के दिन हमारे मुस्लमान भाई अल्लाह के नबी हजरत इब्राहिम की याद को ताजा करते हैं और अल्लाह के रास्ते में कुर्बानी करते है। उन्होंने कहा कि लुधियाना शहर की जामा मस्जिद वह ऐतिहासिक जगह है, जहां से स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ फतवा जारी किया गया था। लोक इंसाफ पार्टी के विपन सूद काका ने कहा कि पंजाब की धरती पीरों और पैगम्बरों की धरती है। यहां पर सभी धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते है और एक-दूसरे का त्यौहार आपसी भाईचारे के रूप में मनाते है। 
इस मौके पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह गाबडिय़ा ने अपने मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकवाद देते हुए कहा कि आज का दिन बड़ी ही बरकतों वाला दिन है। आज के दिन मुस्लमान अपने खुदा को राजी करने के लिए अल्लाह के रास्ते में कुर्बानी देते है। इस दौरान विधायक राकेश पांडे ने भी मुस्लिम भाईचारे को ईद की मुबारकवाद दी। इस मौके जिला कांग्रेस अध्यक्ष गुरप्रीत गोगी ने भी मुसलमानों को ईद की मुबारकवाद देते हुए कहा कि ईद का पवित्र त्यौहार हम सब कों अपने देश के प्रति कुर्बानी देने के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि मुस्लमान ईमान के जज्बे के साथ हर समय देश और कौम के लिए कुर्बानियां देते आ रहे हैं और यह सिलसिला चलता रहेगा। नायब शाही इमाम ने कहा कि मुस्लमान जिंदा कौम है और अपने वजूद से लेकर आज तक इस्लाम बढ़ता ही जा रहा है।
इस राज्य स्तरीय समारोह में अपने मुस्लिम भाईयों को ईद की मुबारकबाद देने के लिए विधायक भारत भूषण आशू, संजय तलवाड़, गुरूद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार प्रितपाल सिंह, पार्षद नरिन्द्र कुमार काला, अशोक पराशर पप्पी, पार्षद परमिंदर मेहता, पार्षद राकेश पराशर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता बनवारी लाल, यूथ कांग्रेस लुधियाना के अध्यक्ष राजीव राजा,  गुलाम हसन कैसर, बलजीत सिंह बिन्द्रा, अशोक गुप्ता, शरनजीत सिंह मिड्डा, कारी अलताफ उर रहमान व शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम ने कहा कि ईद उल जुहा का त्यौहार हम सब को आपसी भाईचारे और अपने देश के प्रति कुर्बानी देने के लिए प्रेरित करता है। वर्णनयोग्य है कि आज ईद उल जुहा के अवसर पर लुधियाना शहर में तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर नमाज अदा की गई और भारी संख्या में लोगों ने कुर्बानियां कीं, बच्चों में ईद को लेकर बहुत जोश पाया जा रहा था।

Monday, August 28, 2017

डेरा प्रबंधन ने क़ुरबानी दस्ता भी बनाया था

सुरक्षा बलों की सर्तकता से नाकाम बनाया गया खतरनाक प्लान 
चंडीगढ़//रोहतक: 28 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 
अगर सुरक्षा बलों ने वक़्त पर स्थिति नहीं संभाली होती या फिर जाने अनजाने 25 अगस्त को दी गयी ढील दोहराई जाती बहुत बढ़े स्तर पर जानी नुक्सान हो सकता था। डेरा प्रबंधन ने इस मकसद के लिए बाकायदा क़ुरबानी दस्ते तैयार किये थे। इस क़ुरबानी दस्ते के लोग मरने मारने पर उतारू थे। इनको एक विशेष सुसाइड ड्रेस दी गयी थी। इसे पहनने के बाद पुलिस की लाठी का भी कोई असर नहीं होता क्यूंकि इसमें फोम लगी होती है। 
इस विशेष सुसाइड ड्रेस की लंबाई लगभग साढ़े पांच फीट है। यह एक बैग की तरह होती है। इस बैग के अंदर फोम लगी हुई है, जिसे पहनकर पुलिस की लाठी का भी असर नहीं होता है। देखने में यह रेनकोट लगता है। यदि इस प्लास्टिक बैग में पेट्रोल की दो बोतलें उड़ेल दी जाए तो फोम शरीर के चिपक जाती है। इसके बाद आग लगने पर केवल पांच मिनट में व्यक्ति की मौत हो सकती है।
क़ुरबानी दस्ता का विशेष निशाना रोहतक एरिया ही था। मीडिया सूत्रों के अनुसार इन बैग को पहनकर कुर्बानी दस्ते के सदस्यों को शहर में निकलना था। अगर जरूरत पड़ती तो सुसाइड जैसा कदम भी उठा सकते हैं। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कई लोगों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। रोहतक में डेरा समर्थकों ने कुर्बानी दस्ता तैयार किया है, जिसके सदस्य मारने-मरने में भी पीछे नहीं हटेंगे। कुर्बानी दस्ते में शामिल सदस्यों के सुसाइड बैग तैयार किए जाने की भी सूचना है। ऐसे ही 60-70 प्लास्टिक बैग खुफिया विभाग ने रोहतक-पानीपत नेशनल हाईवे पर बोहर फ्लाईओवर के पास डेरे के नामचर्चा घर से कुछ दूरी पर सड़क किनारे से बरामद किए हैं।
इन सूत्रों के अनुसार रोहतक में एक स्थान पर हुई डेरा समर्थकों की मीटिंग में यह जत्था भी शामिल हुआ था। यहां पर फैसला लिया गया कि जिस समय गुरमीत राम रहीम को लेकर सीबीआइ अदालत द्वारा सजा पर फैसला सुनाया जाएगा तो उसी समय दर्जनों लोग सुसाइड करेंगे। मीटिंग में यह भी तय हुआ कि यदि आत्महत्याएं जेल के गेट पर या फिर जेल के नजदीक हो तो बेहतर होगा। इसकी सूचना मिलते ही विभाग ने छापेमारी कर उक्त बैग बरामद कर लिए। इस तरह इस कोशिश को नाकाम बना दिया गया। यदि यह जत्था अपने इस नापाक काम में सफल हो जाता तो मानवीय संवेदना को कितनी ठेस पहुंचती इसका अनुमान लगाना मुश्किल नहीं होना चाहिए। 
इस संबंध में रोहतक स्थित थाना अर्बन इस्टेट के थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह का कहना है कि रोहतक -पानीपत हाईवे पर बोहर गांव के समीप फ्लाइओवर के समीप प्लास्टिक बैग बरामद किए गए हैं। इन बैग को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल की जा रही है। जहां बैग बरामद किए गए हैं, उसके समीप ही डेरा सच्चा सौदा का नाम चर्चा घर भी है। अंदाज़ा लगाइये कहाँ तक सोच रखा था डेरा प्रबंधकों ने। 

MSG: दोनों मामलों की सज़ा मिलकर 20 वर्ष की जेल

इस सज़ा के ऐलान से न खत्म होने वाली मुश्किलों की शुरुआत 
चंडीगढ़//सिरसा//रोहतक: 28 अगस्त 2017 (पंजाब स्क्रीन टीम)::
जैसी कि संभावना थी डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सज़ा बढ़ कर अब 20 वर्ष हो गयी है। इससे पहले एक फैसले में केवल एक मामले की सजा सुनाई गयी थी। दोनों मामलों की सज़ा मिलकर अब 10+10=20 वर्ष हो गयी है। इसके साथ ही साध्वी यौनशोषण मामले में 30 लाख जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। इनमें से 14-14 लाख रूपये दोनों पीड़ित साध्वियों को दिए जायेंगे जबकि दो लाख रूपये अदालत के पास जमा होंगें। कैद-बामुश्कक्त की ये दोनों सज़ाएं गुरमीत राम रहीम को अलग-अलग काटनी होगी। डेरा प्रमुख के वकील एस के नरवाना ने भी इसकी पुष्टि की है। डेरा मुखी को धारा 376 और 506 के तहत सजा सुनाई गई है। उस पर तीन अलग-अलग धाराओं को लेकर 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस के बाद सियासी और समाजिक क्षेत्रों में यह मामला और गरमा गया है। अभी पत्रकार छत्रपति की हत्या का मामला भी बाकी है।  

गौरतलब है कि साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को 25 अगस्त को दोषी करार दिया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद राम रहीम का कैदी नंबर चेंज होगा। अभी तक वह कैदी नंबर 1997 था। उसे अब कैदियों वाले कपड़े पहनने होंगे। उसे जेल मैनुअल के हिसाब से काम भी करना होगा। अभी उसका मेडिकल किया जा रहा है। जेल में सफाई का काम पूरा करने  मिला करेगी रोटी। बेबस महिलाओं को लंगर से खाना न देने की धमकी देने वाले सिस्टम के मुखी गुरमीत राम रहीम को  कर्मों का हिसाब जेल की इस दुनिया में देना होगा।  भोलेभाले लोगों को अगले-पिछले जन्म के चक्क्रों में उलझा कर अपने शोषण का शिकार बनाने वाले बाबा का हिसाब अब इसी दुनिया में हो रहा है। 

डेरा मुखी राम रहीम के पास अब सजा के खिलाफ अपील करने के लिए हाईकोर्ट जाने का विकल्प है। आज समय कम होने के कारण वह एेसा नहीं कर पाएगा, लेकिन बहुत संभव है कल वह हाई कोर्ट में अपील दायर करे। इस बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंत्रियों, मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक की बैठक बुलाई है। इसमें कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा होगी। अब देखना है की हालात का ऊँट किस करवट बैठता है। 

डेरा विवाद के चलते हालात में कई बार आया उतराव चढ़ाव

Mon, Aug 28, 2017 at 5:59 PM

पटड़ी पर चढ़ती विवस्था फिर पटड़ी से उकरी, गिरे शटर
भदौड़: 28 अगस्त 2017: (विजय जिंदल//पंजाब स्क्रीन)::  
गत चार दिनों से कर्फयु का संताप भोग रहे क्षेत्र वासी व्यापारी व दुकानदारों जो कि पहले ही मंदी की मार झेल रहे हैं उनकी हालत लगातार कभी धूपकभी छाँव कि बनी हुई है। आज सोमवार को जब बाद दोपहर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम सिंह को सजा सुनाई जानी है वही कर्फयु के दौरान दी गई ढील के चलते सोमवार को शहर में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब सिविल प्रशासन व्दारा जिले में कर्फ्यू लागू किए जाने और दुकानें बद करने के आदेश सुनाई दिए। 
सूचना के बाद देखते ही देखते दुकानों के शटर गिर गए और एक बार फिर व्यवस्था की गाड़ी पटड़ी से उतरती दिखाई दी। इसके बाद कुछ समय बाद ही पुलिस प्रशासन द्वारा अनाउंसमेंट कर दुकानें खोलने की जानकारी दी गई परंतु लोगों में व्याप्त सहम के चलते बाजार बंद रहे और धारा 144 की धज्जीयां उड़ाते लोग झुंड बनाकर ताश आदि खेलते और बातें करते दिखाई दिए। व्यापारी राजेश जिंदल, संदीप कुमार, राजीव सिंगला हैपी गोयल, सुखविंद्र पाल, मुनीश कुमार आदि ने कहा कि एक तो पहले ही दहशत का माहौल बना हुआ है और उपर से सरकारी सूचना की अनाउंसमेंट होने से लोगों में फिर से सहम माहौल पाया जा रहा है। स्थिति ये है कि कर्फ्यू के दौरान बाजार खुलवाने और बंद करवाने को लेकर सिविल व पुलिस प्रशासन आमने-सामने हो गया लगता है।

डेरा हिंसा को रोकने भदौड़ में भी रही सख्त सुरक्षा

Mon, Aug 28, 2017 at 5:59 PM
पुलिस ने कहा: हर कीमत पर ला एण्ड आर्डर बहाल रहेगा
डेरा सलाबतपुरा में भारी सुरक्षा
भदौड़: 28 अगस्त 2017: (विजय जिंदल//पंजाब स्क्रीन)::
आज जैसे ही डेरा सच्चा सौदा सिरसा के प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को सीबीआई कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने का समय नजदीक आता जा रहा था वैसे-वैसे लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती दिखाई दे रही थी। भय, सहम  और आतंक के मिश्रित से भाव तकरीबन हर चेहरे पर थे। जैसे ही हरियाना के सिरसा जिले में दो जगह आगज़नी  समाचार प्राप्त हुआ तभी भदौड़ क्षेत्र में भी सुरक्षा का घेरा मजबूत होने लगा। इसी दौरान पुलिस जिला बरनाला के एसपी (एच) सुरिंद्रपाल सिंह व डीएसपी(एच) जगदीश विश्रनोई ने भदौड़ में आकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए सुरक्षा बल मुशतैदी से तैनात हैं और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी इसके अलावा उन्होंने कहा कि हर कीमत पर ला एण्ड आर्डर की स्थिति को बहाल रखा जाएगा। इस अवसर पर नायब तहसीलदार हरपाल सिंह, मार्कीट कमेटी के सचिव जसवंत सिंह, पुलिस थाना भदौड़ के प्रभारी प्रगट सिंह आदि उपस्थित थे। उनके इस दौरे से लोगो ने सुख की सांस ली।  

यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख राम रहीम को 10 साल की जेल

हिंसा की खबरों के बीच CBI कोर्ट ने सुनाया फैसला

चंडीगढ़//रोहतक//सिरसा: 28 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

न कोई चमत्कार हुआ और न ही हिंसा के दबाव ने काम किया। सज़ा का एलान होने से पहले ही सिरसा में दो गाड़ियों को आग लगा दी गयी लेकिन इस सब के बावजूद सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह ने मेसेंजर आफ गॉड गुरमीत राम रहीम को रोहतक में ही दस वर्ष कैद की सज़ा सुना दी। गौरतलब है की यह केवल ेल मामले की सजा है। अगर दुसरे में भी यही फैसला आया तो सजा दुगनी अर्थात 20 साल हो सकती है। इस सजा को डेरे ने हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसी बीच मुख्य मंत्री मनोहर लाल खटटर ने सारे घटनाक्रम पर विचार करने के लिए एक विशेष आपात बैठक बुलाई है। सिरसा में फ्लैग मार्च शुरू कर दिया गया है। अब कई और लोगों के भी डेरा प्रमुख के सामने आने की संभावना है। इसी बीच बाबा को ब्लड प्रेशर होने की खबर गलत बताई जा रही है और पीठ दर्दकी पड़ताल का परिणाम अभी आना है। इस सज़ा के दौरान बाबा को जेल नियमों के मुताबिक बाकायदा काम करना होगा। 
गौरतलब है कि यौन शोषण मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जो 10 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है उससे डेरा के पैरोकार गुस्से में हैं।  सिरसा में दो गाड़ियों का जलाया जाना साबित करता है कि अभी भी डेरा के हथियारबंद स्कुएड के लोग कहीं न कहीं छुपे होने और हमले की ताक में हो सकते हैं। 

उल्लेखनीय है कि सोमवार को सजा पर सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान राम रहीम ने हाथ जोड़े और माफ़ी की मांग भी की।  

उनके वकीलों ने भी सीबीआई की विशेष अदालत से सजा में नरमी की मांग की थी पर सज़ा हो कर ही रही।  
इस बार वक़्त रहते किये गए सुरक्षा प्रबंधों के चलते उस तरह की हिंसा नहीं हो सकी जिस तरह 28 अगस्त के बाद पंचकूला और कुछ अन्य स्थानों पर हुई थी। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी व्यापक हिंसा हुई थी। इन सभी स्थानों पर एक आतंक सा छाया रहा। जन जीवन ठप्प रहा। डेरा समर्थकों ने कई शहरों में उपद्रव और आगजनी शुरू कर दी। इस क्रम में 38 लोगों की मौत हो गई और 250 लोग घायल हो गए थे। इससे जो वित्तीय नुकसान हुआ वो अलग।   
दूसरों के परिवारों को ज़िंदा दफना देने की धमकियां देने वाले इस बाबा को जब खुद मुसीबत का अहसास हुआ तो सजा सुनाए जाने से पहले गुरमीत राम रहीम ने जज के आगे हाथ जोड़े और माफी की मांग की। हिंसा की आशंका के चलते आज प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। जेल के आसपास के इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। अर्ध सैनिक बलों की कंपनियां भी तैनात हैं रहीं। रोहतक आने वाली सभी गाड़ियों की सघन तलाशी भी ली गयी। हर आने-जाने वाले से उसकी पहचान पूछी गयी। शहर के अदंर और बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। यहां रोहतक और सिरसा में भी धारा 144 लगी हुई है। 

Friday, August 25, 2017

डेरा प्रेमियों के हिंसक उत्पात ने हिला दिया पूरा देश

 डेरे की सम्पति अटैच करने की तैयारियां शुरू 
नई दिल्ली//चंडीगढ़//पंचकूला//सिरसा//:: 25 अगस्त 2017: (पंजाब स्क्रीन मीडिया ब्यूरो):: कभी एक सीता माता का हरण हुआ था तो राम रावण युद्ध की कहानियां अब तक सुनी सुनाई जाती हैं। कभी एक द्रोपदी का चीयर हरण हुआ था तो महाभारत के भयनक युद्ध का परिणाम आज तक चर्चा का विषय रहा। इसके बाद भी ऐसा बहुत कुछ जारी रहा। आख़िरकार एक साध्वी की हिम्मत रंग लायी। उसने हाईकोर्ट के साथ साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी एक पत्र लिखा। पत्र गुमनाम था। अगर नाम लिखा होता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था। शायर मन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बहुत संवेदनशील भी थे। वह गुमनाम पत्र उनके मन को छू गया। इसके साथ ही शुरू हुई पत्र लिखनेवाली साध्वी की खोज और परिणाम आज सभी के सामने है। बाबा गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया गया है। आलीशान ज़िंदगी जीने वाले बाबा अब रोहतक जेल पहुंच चुके हैं। बाबा को जेल की बात सुनते ही अनुयायी क्रोधित हो गए।पंचकूला में एकत्र होने की तयारी बहुत पहले से थी।  
देखिये/सुनिए इस वीडियो में
जो लोग कह रहे थे कि खून की नदियां बहा देंगें वे अपनी धमकियों को सच कर दिखाने लगे। इसके बाद सरकारी दफ्तरों में आग, रेलों में आग, बसों में आग, मीडिया की ओ बी वैनों में आग, टेलीफोन एक्सचेंजों में आग और यहां तक कि अस्पतालों में आग। डेरा आतंक की यह आग सिरसा और पंचकूला से होते हुए पूरे पंजाब में पहुंची और फिर दिल्ली को भी अपनी लपेट में ले लिया। वोटबैंक के लालच में डेरों को लगातार शक्तिशाली बनाने वाली सरकारें और डेरों में जा कर माथे रगड़ने वाले सियासतदान भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। सम्पति सिर्फ डेरे की नहीं इन लोगों की भी अटैच होनी चाहिए। 
साध्वी यौन शोषण मामले में श्रम करने की बजाये, अपनी बहु बेटियों को वहां भेजने से परहेज़ करने की बजाये डेरा अनुयायियों ने तोड़फोड़ और आगज़नी को पहल दी। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार देने के बाद हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में डेरा अनुयाइयों ने जमकर हिंसा की। प्राप्त समाचारों के अनुसार पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ हुए संघर्ष में कई लोगों की मौत हो गयी है और बहुत से लोग घायल हो गए हैं। पंचकूला की केन्द्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने 15 वर्ष पुराने इस मामले में आज राम रहीम को दोषी ठहराया है। इस मामले में सजा का ऐलान 28 अगस्त को किया जाएगा। सोशलमीडिया पर कई लोग कह रहे थे कि यह काम भी आज ही हो जाता तो अच्छा था। फैसले को ४५ मिन्ट्स तक रोकने और बहुत सी अन्य सावधानियों के बावजूद जब राम रहीम को दोषी ठहराने की खबर जैसे ही अदालत के कमरे से बाहर आयी पंचकूला में एकत्रित बाबा के हजारों अनुयाइयों ने उपद्रव और तोड़फोड़ शुरू कर दी। डेरा में सिखाये जाते धर्म का असली चेहरा सामने आने लगा। स्पष्ट हो गया कि  कानून को तीच समझने की तैयारी बहुत पहले से ही थी। 

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को अपनी ही एक अनुयायी साध्वी के यौन शोषण मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने आज दोषी करार दिया। डेरा प्रेमियों ने कानून का जितना सम्मान किया वो सबके सामने हैं। उनके सभी वायदे झूठे साबित हुए हैं। 

पंचकूला स्थित ब्यूरो की विशेष अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने 15 वर्ष पुराने इस मामले में बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया। इसकी संभावना नज़र भी आ रही थी। फैसला सुनाते समय बाबा अपने वकीलों के साथ अदालत में मौजूद थे। मीडिया चैनलों ने बताया की अदलात में सज़ा सुन कर बाबा रो पड़े। इस तरह खबर आते ही शुरू हो गया बाबा के पैरोकारों का तांडव। राम रहीम को दोषी ठहराने के बाद उनके अनुुयाइयों ने जम कर उत्पात मचाया। पंचकूला कोर्ट पर भी हमला किया। गोलियां चलायीं , पैट्रोल बम इस्तेमाल किए और सर्कार को डराने की कोशिशें शुरू कीं। उपद्रव और तोड़फोड़ लगातार बढ़ती चली गयी। मीडिया कर्मियों को भी सोच समझ कर निशाना बनाया गया। सियासदानों के ज़रिये अदालत को प्रभावित करने की चालें नाकाम रहने पर इन डेरा प्रेमियों का गुस्सा आम लोगों पर भी फुट पड़ा। 

जरूरत पड़ने पर सुरक्षाबलों को हालात पर काबू पाने के लिये सख्ती बरतने के निर्देश दिये गए पर वे काफी लेट थे। बंधे हाथों वाली पुलिस आखिर करती भी तो क्या। दफा 144 के बावजूद लाखों किम संख्या में एकत्र होने देने का तमाशा देखने वाले अधिकारी और सियासतदान भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। 

न्यायाधीश एस.एस.सरों, सूर्यकांत और अवनीश की खंडपीठ ने पंचकूला में निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में डेरा समर्थकों के पहुंचने तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने के आशंका को लेकर दायर की गयी एक जनहित याचिका पर आज आगे सुनवाई करते हुये हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिये कि अगर कोई राजनेता और मंत्री अगर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हस्तक्षेप करता है तो उसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की सूचनाएं हैं कि अदालत का फैसला डेरा प्रमुख के खिलाफ आने की स्थिति में उनके समर्थक आत्मदाह कर सकते हैं जिससे स्थिति और बिगड़ेगी।

सज़ा सुनते ही डेरा प्रेमी भड़क गए। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में हालात बुरी तरह बिगड़ गए। डेराप्रेमी आगजनी, तोड़फोड़ पर उतारू हो गए। टीवी चैनलों की ओ बी वैनों को जला दिया गया या उल्टा दिया गया। मीडिया कर्मियों पर हमले किया गए। उपद्रव बढ़े तो सैंकड़ों ट्रेनें रद्द कर दी गयीं। 

पंचकूला में हिंसा के बाद कर्फ्यू लगा दिया है। मौतों की संख्या लगातार बढ़ती गयी। पंचकूला में कर्मचारी चयन आयोग और एलआईसी की इमारत में आग लगा दी गई। सैंकड़ों वाहनों को आग लगा दी गयी। अब तक हुई हिंसा में बहुत से लोगों के जख्मी होने की खबर है। अलग अलग अस्पतालों में उनका इलाज भी चल रहा है। घायलों में पुलिस वाले भी शामिल हैं। 
वाटर कैनन का प्रयोग कर डेराप्रेमियों को खदेड़ा जा रहा है। आंसू गैस के गोले छोड़े गए। हवाई फायरिंग भी की गयी और लाठीचार्ज भी लेकिन डेरा प्रेमी शांत नहीं हुए। भड़के डेरा प्रेमियों ने सेक्टर 3 में न्यूज चैनल की दो ओबी वैन में आग लगा दी है। एक इंडिका कार को तोड़ फोड़ दिया है। सेक्टर 5 में भी आंसू गैस के गोले छोड़े गए। सेक्टर 4 में गोलियां चल गई। सेक्टर 5 में लाठीचार्ज भी हुआ।



गौरतलब है कि डेरा के देशभर में 50 आश्रम हैं। इनका सबसे बड़ा आश्रम हरियाणा के सिरसा जिले में है जो तकरीबन 67 साल से चल रहा है। इसका रकबा बहुत बड़ा है। इसके अलावा डेरा के आश्रम अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक फैले हैं। दुनियाभर में डेरे के अनुयायियों की संख्या लाखों से करोड़ों में है जिसमें लाखों अनुयायी हरियाणा से हैं। इतनी बड़ी संख्या ही इस डेरे का शक्ति आधार है। ये अनुयायी पूरी तरह समर्पित हैं। कई बार तो सम्मोहित से भी लगते हैं। 

न्याय में लगातार देरी। आखिर 15 साल कम नहीं होते। एक आरोपी, तारीख-दर-तारीख 200 से ज्यादा सुनवाई और अब जाकर दोषी करार। लेकिन हालात इतने नासाज थे कि कभी भी कुछ भी हो जाए। डेरे का साम्राज्य और उसमें बाबा की दहशत। कितनी बार सोचा होगा उस साध्वी ने जिसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। बात साल 2002 की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के नाम एक गुमनाम चिट्ठी आई, जो तीन पेज की थी। ये चिट्ठी एक महिला की ओर से भेजी गई थी। इसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की शिकायत की गई। डेरामुखी पर यौन शोषण व दुष्कर्म का आरोप लगाया गया और लिखा गया कि बाबा साध्वियों का यौन शोषण करते हैं। यह पत्र कितनी बार सोच कर कितनी हिम्मत से लिखा होगा उसने। 
पत्र ने असर दिखाया। पीएमओ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सितम्बर 2002 में सीबीआई को इस मामले में जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने जांच में आरोप सही पाए और डेरामुखी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। फिर सीबीआई ने विशेष अदालत में 31 जुलाई, 2007 में आरोप पत्र दाखिल किया। हालांकि डेरामुखी को जमानत तो मिल गई, लेकिन साल 2012 से केस पंचकूला की अदालत में चला। 
अब देखना है उस साध्वी का क्या बना। क्या वह अभी तक ज़िंदा है? अगर ज़िंदा है तो क्या उसकी जान को खतरा तो नहीं?  
इस सारे घटनाक्रम पर खुद को महिला लीडर बनाने वाली महिलाये अभी तक कुछ नहीं बोलीं।  आखिर यह चुप्पी क्यों? क्या महिला संगठनों को साध्वी के यौन शोषण ने उद्धेलित नहीं किया? उनके मन में कोई दर्द नहीं उठा? साथ ही यह भी कि अब इस देश की सरकारें लगातार बढ़ रहे इन डेरों पर कोई शिकंजा कसेंगी या नहीं?