Saturday, November 05, 2016

मेडिकल कैंप: जिसमे हजारो मरीजो ने इलाज करवाया

टराएडेंट ग्रुप और सी.एम.सी हॉस्पिटल ने किया कैम्प का आयोजन 
लुधियाना: 4 नवम्बर 2016; (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):
क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज व् हॉस्पिटल, लुधियाना ने 3 दिन का मल्टी स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप आयओजित किया, टराएडेंट (Trident group) ग्रुप के साथ मिलके| यह कैंप अरुण मेमोरियल कम्युनिटी सेण्टर, बरनाला में 2-4 नवम्बर 2016 को हुआ। 

इस कैम्प का उद्धघाटन ट्रिडेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर राजिंदर गुप्ताने और सी.एम.सी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर अब्राहम जी थॉमस ने किया। इस उपलक्ष पे बरनाला से समुदाय के नेता, राजनीतिज्ञ, सरकारी अधिकारी, और करीब 60 गांवों के सरपंच भी मजूद थे।

मेडिकल टीम में करीब 35 डॉक्टर्स थे जो के सर्जरी, गायनी, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, साइकाइट्री, डर्मेटोलॉजी, मेडिसिन, इ.एन.टी, आँख, ओर्थोपेडिक्स, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, सी.टी.वि.एस, डेंटल, फार्मेसी और कम्युनिटी मेडिसिन के विभाग से थे।

कैंप के पहले दिन करीब 1,160 मरीजो की जांच हुई, दुसरे दिन 1,690 मरीजो ने कैंप का फायदा उठाया, और आज 4 नवम्बर को यह खबर भेजने तक करीब 1,500 मरीज कैंप में आज चुके थे|

डॉक्टर अब्राहम जी थॉमस, ने कहा के इस बड़े कैंप में 35 डॉक्टर्स की टीम आई हैं, जो मरीजो की जांच करेगी | कैंप में डिजिटल एक्स- रे मशीन भी हैं जिस से पलो में ही रिपोर्ट आ जाती हैं| इस टीम के लीडर डॉक्टर क्लारांस होंगे जो के ग्रामीण स्वास्थ्य आउटरीच कार्यक्रम (RHOP) विभाग के हेड हैं| इस टीम में 35 और लोग हैं, जिनमे तकनीशियन, नर्स, और अन्य स्टाफ हैं मदद के लिए, जो के 35 डॉक्टर्स के साथ मिलके इस कैंप में काम करेगी| छोटे आपरेशन  के लिए मेडिकल बस भी उपलब्ध हैं | 

इस मौके पे डॉक्टर क्लारांस ने कहा के, इसी प्रकार सी.एम.सी. बरनाला में लोगो की सहयता करता रहेगा कैंप के द्वारा और कैम्पस की अगली तारीख इस प्रकार हैं – 7-11 नवम्बर, फिर 16-18 नवम्बर, उसके बाद 30 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक, और 7 से 9 दिसम्बर तक लगेगा। 

Friday, November 04, 2016

विधवाओ को फ्री राशन बाँटना क्या यही महिला सशक्तिकरण है?

Fri, Nov 4, 2016 at 2:57 PM
बेलन ब्रिगेड ने उठाया बड़ा सवाल और दी क़ानूनी करवाई की चेतावनी 
विधवा महिलाओं के नाम पर राशन बाँटना बंद करे समाज 
लुधियाना: 4 नवम्बर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो); 
महिलायों को सहायता के नाम पर होते शोषण को रोकने/रुकवाने के लिए बेलन ब्रिगेड ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिगेड की प्रमुख ने पूछा है कि क्या उन्हें राशन दे दे कर अबला बना देना---क्या यही है आज का महिला सशक्तिकरण?  गौरतलब है कि विधवा महिलायों की सहायता के नाम पर बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिसे कोई कमज़ोर विधवा औरत किसी को बता भी नहीं पाती और सहन भी नहीं कर पाती। घुट घुट कर शर्मनाक ज़िन्दगी जीना उसकी तक़दीर बन जाती है। बेलन ब्रिगेड ने ऐसी बहुत सी औरतों के साथ हुई ज़्यादतियों का पता लगाया है लेकिन जानबूझ कर उन महिलायों के नाम उजागर नहीं किये।  मैडम अनीता शर्मा ने कहा कि हम दुखी औरतों को किस भी तरह के जाल में फंसाने की गया नहीं देंगें और अगर हमें मजबूर तो ऐसे मामलों के खलनायकों के नाम सबके सामने रखने से भी पीछे नहीं हटेंगे। 
बेलन ब्रिगेड ने राष्ट्रीय महिला आयोग व सरकार से मांग की है कि जो राजनैतिक, समाजिक और धार्मिक संस्थाएं विधवा महिलाओं के नाम पर राशन वितरण करते है उनके इस मीडिया प्रोपेगंडा पर शीघ्र रोक लगाई जाए। इसके साथ ही उनके हिसाब किताब और चालचलन पर भी नज़र रखी जाये। 
बेलन ब्रिगेड की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने कहा कि यदि दुर्भाग्यवश कोई महिला विधवा हो जाती है तो समाज को कोई अधिकार नहीं है कि इन विधवा महिलाओं को राशन की सहायता देते वक्त उनकी फोटो खींचकर अख़बारों में छपवाएं और फिर यही समाज के ठेकेदार व नेता विधवा राशन वितरण के नाम पर अपनी अखबारों में फोटो छपवाकर अपनी छवि चमकाएं। अगर उन्हें नशेत ही देनी है तो उनकी उजड़ी हुई ज़िन्दगी को फिर से बसाने का प्रयास  किया जाये। महिला व बाल विकास विभाग को इस काम के लिए आगे आ कर ऐसी महिलायों को सम्मानीय और पारदर्शी ढंग तरीके से आर्थिक सहायता देनी चाहिए जिससे वे महिलाएं समाज के नवनिर्माण में योगदान डाल सकें।
उन्होंने कहा कि क्या यही हमारे समाज का  महिला सशक्तिकरण है कि कोई विधवा औरत यदि मजबूरी गरीबी और मुसीबत की मारी अगर अपना और बच्चो का पेट भरने के लिए कहीं से मुफ्त राशन लेती है तो उसकी फोटो खींचकर अखबार में छाप दो। यह परंपरा पंजाब के एक अखबार ने  शुरू की थी कि विधवा महिलाओं को राशन बांटो और  विधवा फ्री राशन वितरण के नाम पर अखबार में अपनी  खबर व फोटो छपवाओ। 
अनीता शर्मा ने कहा कि यदि धार्मिक समाजिक राजनैतिक लोग विधवा महिलाओं की मदद करना चाहते है तो उनकी फोटो अख़बारों में न छापे और न ही विधवा महिला के नाम पर गरीब मजबूर दुखयारी औरतों का शोषण करें। यदि गरीब विधवा महिलाओं की मदद करनी है तो उनकी अख़बारों में खबर व फोटो छापना बंद करे। 
अनीता शर्मा ने कहा कि  यदि समाचार पत्रों ने विधवा महिला राशन के नाम पर समाचार पत्रो में  खबरे छापनी बंद नही की तो इसके खिलाफ बेलन ब्रिगेड कानून का सहारा लेगी और जन आंदोलन करेगी। 
इसके साथ ही मैडम अनीता शर्मा ने कहा कि हम उन सभी लोगों का स्वागत करेंगे जो इन महिलायों को नई ज़िन्दगी देने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए आगे आएंगे। इस मकसद के लिए बेलन ब्रिगेड और सहयोगी संगठनों के पास एक पूरी योजना है। हम महिला शक्ति को बेचारों जैसी हालत में से निकाल कर दम लेंगें। 
इस अभियान से जुड़ने के लिए अनीता शर्मा से सम्पर्क किया जा सकता है इस नम्बर पर-9417423238

Wednesday, November 02, 2016

एक ख़ास डॉक्टर ने दोहराया समाज सुधार का संकल्प

नाटकों के ज़रिये समाज का अँधेरा दूर करने का हिम्मतवर प्रयोग 
लुधियाना: 2 नवम्बर 2016: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
समाज और समाज की सोच को बदलने की भावना हर किसी के मन में पैदा ही नहीं होती।  इसके लिए भी प्रकृति चुनाव करती है किसी ख़ास व्यक्ति का जिसका आत्मबल बलवान हो और जीवनशैली जन भलाई से भरी हुई। इस बार प्रकृति ने चुनाव किया है हर व्यक्ति को आंखों के दीपक देने में जुटे डॉक्टर रमेश मेहता का। डॉक्टर रमेश का मानना है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा भी मानसिक तौर पर अँधा हो चुका है। बेटियों का अपमान, भ्रूण हत्या, नशाखोरी और रेप जैसे कुकृत्य कोई समझदार व्यक्ति कर ही नहीं सकता। राह जाती लड़कियों पर तेज़ाब फेंकना, उन्हें ज़िंदा जलाना, बहु को दहेज के लिए तंग करना किसी ऐसे अंधे व्यक्ति का ही काम हो सकता है जिसे अपने स्वार्थ के सिवा कुछ और नहीं दिखता।  जो पूरी तरह सम्वेदनहीन हो चुका है जैसे कि  कोई पत्थर हो। 
इस अंधे समाज को भी आंखें देने का संकल्प डॉक्टर रमेश ने किया हाल ही में। इस मकसद के लिए वह अपने चिकित्सा औज़ारों के साथ साथ अब कलम को भी हथियार बना रहे हैं। उन्होंने मीडिया से भी इस मकसद के लिए सहयोग माँगा है। उन्होंने एक ड्रामा लिखा "पुनरजोत का विवाह" जो कि बेहद लोकप्रिय हो रहा है। अब रविवार 6 नवम्बर 2016 को इसका मंचन होगा गाँव बद्दोवाल में जहाँ बाबा जसपाल सिंह की देखरेख में भाई घनईया चैरिटेबल अस्पताल की तरफ से बहुत सी ज़रूरतमन्द लड़कियों के सामूहिक विबाह एक साथ किये जाएंगे जिनकी संख्या 100 से ऊपर भी हो सकती है।   
यह जानकारी डॉक्टर रमेश ने आज पंजाबी भवन में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में दी। इस अवसर पर इस नाटक की सह निर्देशिका सपनदीप कौर  भी अपनी टीम के साथ मौजूद थीं। सपनदीप कौर ने कहा कि जनता को जगाना अधिक महत्वपूर्ण और आवश्यक कर्तव्य है। सपनदीप कौर ने पाश की एक प्रसिद्ध कविता के कुछ अंश भी पढ़े। भाई घनईया चैरिटेबल अस्पताल की तरफ से गुरप्रीत सिंह भी विशेष तौर पर पहुंचे। 
गौरतलब है कि डॉक्टर ऐस एन सेवक की सरपरस्ती में हो रहे इस नाटक के मंचन की मांग लगातार बढ़ रही है। नवांशहर से आने वाली जागो भी इस आयोजन का विशेष आकर्षण होगी। यह जागो भ्रूण हत्या की बुराई को कम करने के लिए निकाली जा रही है। 

Monday, October 31, 2016

जब भी निर्णय का दोराहा होगा प्रियदर्शनी इंदिरा बहुत याद आएंगी

याद और सम्मान समय और सियासत के मोहरे नही होते
                                                                                                --दमोह से नूतन पटेरिया 

आज का दिन भारत के लोकतन्त्र के इतिहास में दुख बेदना और शर्मिंदगी का दिन है ।इस दिन हमारे देश की प्रधानमन्त्री ही नही हमारे गौरव विश्वास और धर्मनिपेक्षता की भी हत्या हुई थी। राष्ट्र् हमेशा त्याग और बलिदान की नीव पर अवलम्बित होता है इस नीव में दफन है तीन गांधियो का बलिदान। इसी बलिदान परम्परा की कड़ी है इंदिरा जी। एक ही मेहनत, कड़ी मेहनत, दूर दृष्टि पक्का इरादा, अनुशासन को जीवन का मूल मन्त्र बनाने वाली इंदिरा जी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से सब परिचित है। इस साहसी  और दबंग व्यक्तित्व में भी भारी उतार चढ़ाव और दुःख की वेदना देखी पर राष्ट्र हित के आगे इंदिरा जी इन बाधाओ को भी नकार कर सदैव दृढ़ता का परिचय दिया। दुनिया के ग्लोब पर नए राष्ट्र की रचना करने वाली इंदिरा जी राष्ट की अखण्डता की रक्षा करते हुये बलिदान हो गई। अपनी म्रत्यु का पूर्वाभास करने वाली इस महान नारी ने अपने अंतिम भाषण में मौत को भी स्वागत भाषण बना दिया। 
आज राष्ट्र् सियासती दाव पेचो में उलझा है उस महान नारी के बलिदान को यथोचित सम्मान हासिल नही है अन्यथा आज सोशल मीडिया पर इंदिरा गांधी के सिवाय अन्य विषय न होता। लेकिन याद और सम्मान समय और सियासत के मोहरे नही होते इंदिरा भारत के दिलो में रहती है वो आज भी याद आती है जब निर्णय का दोराहा होता है। हम नत मस्तक है उस महान विभूति को जिसमे नारी जीवन की हर पीड़ा सही थी। असमय माँ की बीमारी और मौत, पति से विछोह, असमय बेटे की मौत और अंत में मौत भी उन हाथो से जिन्होंने सुरक्षा का बीड़ा उठाया जिन्हें अंग रक्षक कहा वही जीवन छीनने वाले बने पर उन्हें कभी अबला के रूप में याद नही किया जायेगा। हमारे पूर्व प्रधानमन्त्री ने तो उन्हें दुर्गा तक की उपाधि दे दी थी। 
ऊपर की तस्वीरों में एक तस्वीर है जिसमें इंदिरा गाँधी 1962 में भारत-चीन जंग के दौरान अपने सभी ज़ेवर राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में दान करती हुईं दिखाई दे रही हैं। उसके साथ की एक तस्वीर 1974 में इंदिरा गाँधी और शेख मुजीब-उर-रहमान के दरम्यान हुए उस ऐतिहासिक समझौते की है जो आज भी महत्वपूर्ण है। राष्ट्र राष्ट्र का शोर मचाना एक अलग बात है लेकिन उसके लिए सच में कुछ कर के दिखाना एक अलग बात है। इंदिरा जी की धारण थी कि राष्ट्र को स्वयं हर तरह से मज़बूत होना चाहिए। किसी पर निर्भर हो कर काम नहीं चलता।  यह केवल किताबी बात नहीं थी बल्कि उन्होंने अपने पिता के साथ रह कर हालात में जो उतार चढाव देखे उन्होंने इंदिरा गाँधी को यही सिखाया था।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने दी श्रीमती इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि

बहुत सी जगह पर हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन  
मतभेद किसी के किसी से भी हो सकते हैं लेकिन इसके बावजूद मान्यता मिलना यह सभी के नसीब  में नहीं होता। इंदिरा गाँधी जी के साथ भी बहुत से लोगों को बहुत से मतभेद थे लेकिन उनका व्यक्तित्व हमेशां असरदायिक रहा। एक चुम्बक की तरह सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता हुआ। मुस्कराता हुआ चेहरा और उस मुस्कान के पीछे एक दृढ़ संकल्प शक्ति। कहना कम और करके ज़्यादा। देश और कांग्रेस के पास अब नहीं है कोई वैसा व्यक्तित्व। आज 31 अक्टूबर है। 
प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्‍यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की 
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्‍यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री ने कहा, "श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्‍यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये। उन्होंने ट्विटर पर बहुत संक्षिप्त शब्दों में लिखा Today we remember the Supreme Sacrifice of Smt Indira Gandhi and her Strong Leadership to India.
देश भर से छोटे बड़े शहरों से उनकी याद में आयोजित स्मृति कार्यक्रमों की जानकारी आ रही है।

PM मोदी के अंदाज़ से दिवाली पर देखा गया नया जोश

देशभर में रहा आतिशबाज़ी और पटाखों का ज़ोर 
नयी दिल्ली: 30 अक्तूबर 2016:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो): 
दीपावली का उत्साह ज़ोरों पर रहा। हर जगह इसका इज़हार भी देखा गया। हर बाजार में चहल पहल देखी गयी।  बजट सजे हुए थे और कीमतें आम रेट से तीन चार गुना ज़्यादा थीं। इस बार मध्यवर्गीय इलाकों के बाज़ारों में सामान किलो की बजाये दो सो ढाई सो ग्राम के लिफाफों में पैक करके बेचा जा रहा था। 
प्रदूषण विरोधी संगठनों, आँख और ह्रदय डॉक्टरों के संगठनों और अन्य लोगों की अपीलों को ताक पर रखते हुएपटाखा प्रेमियों ने दिवाली पर जोर शोर से पटाखे चलाये। आँख का ऑपरेशन कराये लोगों और दिल के मरीजों को पूरी तरह नज़र अंदाज़ करते हुए बड़े बड़े बम फोड़े गए। युवा वर्ग से सबंधित लोग बाईक पर गलियों के चक्कर लगाते हुए हुल्लड़बाजी करते रहे। पीसीआर के दो चार चक्करों का उन पर कोई असर नहीं हुआ। रौशनी और खुशियों का त्यौहार बहुत से लोगों के लिए सज़ा साबित हुआ। 
रिपोर्टों के मुताबिक देश भर में आज प्रकाश का पर्व पूरे हर्षोउल्लास और परंपरा के साथ मनाया गया। मकान और इमारतें रोशनी में नहा उठी और आसमान में आतिशबाजी की गूंज बार बार सुनाई देती रही। लोगों ने मिठाइयों और दूसरे उपहारों के साथ एक दूसरे को शुभकमानाएं दीं। चीन की लड़ियों के खिलाफ चले अभियान का फायदा ज़रूर कुछ गरीब लोगों को हुआ क्योंकि उनके माटी के दिए इसी बहाने से बिक गए। कुछ लोगों ने इस अभियान के बावजूद चीन की लड़ियों से ही रौशनी की। 
दिवाली के मौके पर लोगों ने पारम्परिक चलन के मुताबिक जोरशोर से पटाखे चलाये और इसको लेकर बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखा गया। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाकर दिवाली की बधाई दी तथा बहुत सारे लोगों ने व्हाटसएप्प और ट्विटर सहित सोशल मीडिया के मंचों का उपयोग करके दिवाली की शुभकामनाएं दीं। बहुत से लोगों ने गिफ्ट का खर्च बचाते हुए मिठाईयां और अन्य गिफ्टस भी सोशल मीडिया पर खुले दिल से प्रेषित किये। 
रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान राम के वनवास से अयोध्या लौटने के उपलक्ष्य में दिवाली मनाई जाती है। इस मुद्दे पर बहुजन समाज ने रावण का गुणगान करते हुए भगवान राम और सीता माता के सम्बन्ध में सोशल मीडिया पर बहुत सी बातें भी कही। साथ ही इस बात पर दुःख भी व्यक्त किया कि विचारधारा को जल कर राख करते हुए बहुजन समाज के लोगों ने भी जम क्र दिवाली मनाई। 
इसी बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देशवासियों को दिवाली की शुभकमाना दी और आशा जताई कि यह प्रकाश का यह पर्व ‘उपेक्षा के अंधेरे को दूर करेगा तथा लोगों के जीवन में उम्मीद और समृद्धि लाएगा।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के लोगों को दिवाली की बधाई दी। उन्होंने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘दीपावली के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। हैप्पी दिवाली ।’’ 
दिवाली के मौके पर मोदी ने कहा कि एक रैंक एक पेंशन :ओआरओपी: के क्रियान्वयन के लिए 5,500 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व सैन्यकर्मियों से किये गये उस वादे को पूरा कर दिया है जो बीते 40 बरसों से लटका पड़ा था। उन्होंने पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच जवानों के साहस और बलिदान की प्रशंसा भी की।
प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी ने 2014 में अपनी पहली दिवाली सियाचिन में थलसेना के जवानों के साथ मनाई थी । उन्होंने पिछले साल की दिवाली पंजाब में पाकिस्तान सीमा से सटे इलाके में जवानों के साथ मनाई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में थलसेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस :आईटीबीपी: के जवानों के साथ दिवाली मनाई। प्रधानमंत्री मोदी के इस अंदाज़ से देश के आम लोगों में एक नया जोश मिला। मन की बात में भी श्री मोदी ने कई मुद्दे उठाये। 

Sunday, October 30, 2016

संकटों के बीच में भी, एकता के मंत्र को ले करके आगे बढ़ना है-PM मोदी


30-अक्टूबर-2016 12:09 IST
हमारा हर पर्व शिक्षादायक होता है
30 अक्तूबर 2016 को आकाशवाणी पर प्रधानमंत्री के 'मन की बात' संबोधन का मूल पाठ
मेरे प्यारे देशवासियो, आप सबको दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनायें। भारत के हर कोने में उत्साह और उमंग के साथ दीपावली का पर्व मनाया जाता है। भारत एक ऐसा देश है कि 365 दिन, देश के किसी-न-किसी कोने में, कोई-न-कोई उत्सव नज़र आता है। दूर से देखने वाले को तो कभी यही लगेगा कि जैसे भारतीय जन-जीवन, ये उत्सव का दूसरा नाम है, और ये स्वाभाविक भी है। वेद-काल से आज तक भारत में जो उत्सवों की परम्परा रही है, वे समयानुकूल परिवर्तन वाले उत्सव रहे हैं, कालबाह्य उत्सवों की परम्परा को समाप्त करने की हिम्मत हमने देखी है और समय और समाज की माँग के अनुसार उत्सवों में बदलाव भी सहज रूप से स्वीकार किया गया है। लेकिन इन सबमें एक बात हम भली-भाँति देख सकते हैं कि भारत के उत्सवों की ये पूरी यात्रा, उसका व्याप, उसकी गहराई, जन-जन में उसकी पैठ, एक मूल-मन्त्र से जुड़ी हुई है – स्व को समष्टि की ओर ले जाना। व्यक्ति और व्यक्तित्व का विस्तार हो, अपने सीमित सोच के दायरे को, समाज से ब्रह्माण्ड तक विस्तृत करने का प्रयास हो और ये उत्सवों के माध्यम से करना। भारत के उत्सव कभी खान-पान की महफ़िल जैसे दिखते हैं। लेकिन उसमें भी, मौसम कैसा है, किस मौसम में क्या खाना चाहिये। किसानों की कौन सी पैदावार है, उस पैदावार को उत्सव में कैसे पलटना। आरोग्य की दृष्टि से क्या संस्कार हों। ये सारी बातें, हमारे पूर्वजों ने बड़े वैज्ञानिक तरीक़े से, उत्सव में समेट ली हैं। आज पूरा विश्व environment की चर्चा करता है। प्रकृति-विनाश चिंता का विषय बना है। भारत की उत्सव परम्परा, प्रकृति-प्रेम को बलवान बनाने वाली, बालक से लेकर के हर व्यक्ति को संस्कारित करने वाली रही है। पेड़ हो, पौधे हों, नदी हो, पशु हो, पर्वत हो, पक्षी हो, हर एक के प्रति दायित्व भाव जगाने वाले उत्सव रहे हैं। आजकल तो हम लोग Sunday को छुट्टी मनाते हैं, लेकिन जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं, मज़दूरी करने वाला वर्ग हो, मछुआरे हों, आपने देखा होगा सदियों से हमारे यहाँ परम्परा थी – पूर्णिमा और अमावस्या को छुट्टी मनाने की। और विज्ञान ने इस बात को सिद्ध किया है कि पूर्णिमा और अमावस को, समुद्र के जल में किस प्रकार से परिवर्तन आता है, प्रकृति पर किन-किन चीज़ों का प्रभाव होता है। और वो मानव-मन पर भी प्रभाव होता है। यानि यहाँ तक हमारे यहाँ छुट्टी भी ब्रह्माण्ड और विज्ञान के साथ जोड़ करके मनाने की परम्परा विकसित हुई थी। आज जब हम दीपावली का पर्व मनाते हैं तब, जैसा मैंने कहा, हमारा हर पर्व एक शिक्षादायक होता है, शिक्षा का बोध लेकर के आता है। ये दीपावली का पर्व ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ - अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने का एक सन्देश देता है। और अन्धकार, वो प्रकाश के अभाव का ही अन्धकार वाला अन्धकार नहीं है, अंध-श्रद्धा का भी अन्धकार है, अशिक्षा का भी अन्धकार है, ग़रीबी का भी अन्धकार है, सामाजिक बुराइयों का भी अन्धकार है। दीपावली का दिया जला कर के, समाज दोष-रूपी जो अन्धकार छाया हुआ है, व्यक्ति दोष-रूपी जो अन्धकार छाया हुआ है, उससे भी मुक्ति और वही तो दिवाली का दिया जला कर के, प्रकाश पहुँचाने का पर्व बनता है। 

एक बात हम सब भली-भांति जानते हैं, हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में चले जाइए, अमीर-से-अमीर के घर में चले जाइए, ग़रीब-से-ग़रीब की झोपड़ी में चले जाइए, दिवाली के त्योहार में, हर परिवार में स्वच्छता का अभियान चलता दिखता है। घर के हर कोने की सफ़ाई होती है। ग़रीब अपने मिट्टी के बर्तन होंगे, तो मिट्टी के बर्तन भी ऐसे साफ़ करते हैं, जैसे बस ये दिवाली आयी है। दिवाली एक स्वच्छता का अभियान भी है। लेकिन, समय की माँग है कि सिर्फ़ घर में सफ़ाई नहीं, पूरे परिसर की सफ़ाई, पूरे मोहल्ले की सफ़ाई, पूरे गाँव की सफ़ाई, हमने हमारे इस स्वभाव और परम्परा को विस्तृत करना है, विस्तार देना है। दीपावली का पर्व अब भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है। विश्व के सभी देशों में किसी-न-किसी रूप में दीपावली के पर्व को याद किया जाता है, मनाया जाता है। दुनिया की कई सरकारें भी, वहाँ की संसद भी, वहाँ के शासक भी, दीपावली के पर्व के हिस्से बनते जा रहे हैं। चाहे देश पूर्व के हों या पश्चिम के, चाहे विकसित देश हों या विकासमान देश हों, चाहे Africa हो, चाहे Ireland हो, सब दूर दिवाली की धूम-धाम नज़र आती है। आप लोगों को पता होगा, America की US Postal Service, उन्होंने इस बार दीपावली का postage stamp जारी किया है। Canada के प्रधानमंत्री जी ने दीपावली के अवसर पर दिया जलाते हुए अपनी तस्वीर Twitter पर share की है।
 
Britain की प्रधानमंत्री ने London में दीपावली के निमित्त, सभी समाजों को जोड़ता हुआ एक Reception का कार्यक्रम आयोजित किया, स्वयं ने हिस्सा लिया और शायद U.K. में तो कोई ऐसा शहर नहीं होगा, कि जहाँ पर बड़े ताम-झाम के साथ दिवाली न मनाई जाती होI Singapore के प्रधानमंत्री जी ने Instagram पर तस्वीर रखी है और उस तस्वीर को उन्होंने दुनिया के साथ share किया है और बड़े गौरव के साथ किया है। और तस्वीर क्या है। Singapore Parliament की 16 महिला MPs भारतीय साड़ी पहन करके Parliament के बाहर खड़ी हैं और ये photo viral हुई है। और ये सब दिवाली के निमित्त किया गया हैI Singapore के तो हर गली-मोहल्ले में इन दिनों दिवाली का जश्न मनाया जा रहा हैI Australia के प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय को दीपावाली की शुभकामनायें और Australia के विभिन्न शहरों में दीपावली के पर्व में हर समाज को जुड़ने के लिए आह्वान किया है। अभी New Zealand के प्रधानमंत्री आए थे, उन्होंने मुझे कहा कि मुझे जल्दी इसलिए वापस जाना है कि मुझे वहाँ दिवाली के समारोह में शामिल होना है। कहने का मेरा तात्पर्य यह है कि दीपावली, ये प्रकाश का पर्व, विश्व समुदाय को भी अंधकार से प्रकाश की ओर लाए जाने का एक प्रेरणा उत्सव बन रहा है। 

दीपावली के पर्व पर अच्छे कपड़े, अच्छे खान-पान के साथ-साथ पटाखों की भी बड़ी धूम मची रहती है। और बालकों को, युवकों को बड़ा आनंद आता है । लेकिन कभी-कभी बच्चे दुस्साहस भी कर देते हैं। कई पटाखों को इकठ्ठा कर-कर के बड़ी आवाज़ करने की कोशिश में एक बहुत बड़े अकस्मात को निमंत्रण दे देते हैं। कभी ये भी ध्यान नहीं रहता है कि आसपास में क्या चीजें हैं, कहीं आग तो नहीं लग जाएगी। दीपावली के दिनों में अकस्मात की ख़बरें, आग की ख़बरें, अपमृत्यु की ख़बरें, बड़ी चिंता कराती हैं। और एक मुसीबत ये भी हो जाती है कि दिवाली के दिनों में डॉक्टर भी बड़ी संख्या में अपने परिवार के साथ दिवाली मनाने चले गए होते हैं, तो संकट में और एक संकट जुड़ जाता है। मेरा खास कर के माता-पिताओं को, parents को, guardians को खास आग्रह है कि बच्चे जब पटाखे चलाते हों, बड़ों को साथ खड़े रहना चाहिए, कोई ग़लती न हो जाए, उसकी चिंता करनी चाहिए और दुर्घटना से बचना चाहिए । हमारे देश में दीपावली का पर्व बहुत लम्बा चलता है। वो सिर्फ एक दिन का नहीं होता है। वो गोवर्धन पूजा कहो, भाई दूज कहो, लाभ पंचमी कहो, और कार्तिक पूर्णिमा के प्रकाश-पर्व तक ले जाइए, तो एक प्रकार से एक लंबे कालखंड चलता है। इसके साथ-साथ हम दीपावली का त्योहार भी मनाते हैं और छठ-पूजा की तैयारी भी करते हैं। भारत के पूर्वी इलाके में छठ-पूजा का त्योहार, एक बहुत बड़ा त्योहार होता है। एक प्रकार से महापर्व होता है, चार दिन तक चलता है, लेकिन इसकी एक विशेषता है-समाज को एक बड़ा गहरा संदेश देता है। भगवान सूर्य हमें जो देते हैं, उससे हमें सब कुछ प्राप्त होता है। प्रत्यक्ष और परोक्ष, भगवान सूर्य देवता से जो मिलता है, उसका हिसाब अभी लगाना ये हमारे लिये कठिन है, इतना कुछ मिलता है और छठ-पूजा, सूर्य की उपासना का भी पर्व है । लेकिन कहावत तो ये हो जाती है कि भई, दुनिया में लोग उगते सूरज की पूजा करते हैं। छठ-पूजा एक ऐसा उत्सव है, जिसमें ढलते सूरज की भी पूजा होती है। एक बहुत बड़ा सामाजिक संदेश है उसमें । 

मैं दीपावली के पर्व की बात कहूँ, छठ-पूजा की बात कहूँ-ये समय है आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनायें देने का, लेकिन साथ-साथ मेरे लिये समय और भी है, ख़ासकर के देशवासियों का धन्यवाद करना है, आभार व्यक्त करना है। पिछले कुछ महीनों से, जो घटनायें आकार ले रही हैं, हमारे सुख-चैन के लिये हमारे सेना के जवान अपना सब कुछ लुटा रहे हैं। मेरे भाव-विश्व पर सेना के जवानों की, सुरक्षा बलों के जवानों की, ये त्याग, तपस्या, परिश्रम, मेरे दिल-दिमाग पर छाया हुआ रहता है। और उसी में से एक बात मन में कर गई थी कि यह दिवाली सुरक्षा बलों के नाम पर समर्पित हो। मैंने देशवासियों को ‘Sandesh to Soldiers’ एक अभियान के लिए निमंत्रित किया। लेकिन मैं आज सिर झुका कर के कहना चाहता हूँ, हिंदुस्तान का कोई ऐसा इन्सान नहीं होगा, जिसके दिल में देश के जवानों के प्रति जो अप्रतिम प्यार है, सेना के प्रति गौरव है, सुरक्षा-बलों के प्रति गौरव है। जिस प्रकार से उसकी अभिव्यक्ति हुई है, ये हर देशवासी को ताक़त देने वाली है। सुरक्षा-बल के जवानों को तो हम कल्पना नहीं कर सकते, इतना हौसला बुलंद करने वाला, आपका एक संदेश ताक़त के रूप में प्रकट हुआ है। स्कूल हो, कॉलेज हो, छात्र हो, गाँव हो, ग़रीब हो, व्यापारी हो, दुकानदार हो, राजनेता हो, खिलाड़ी हो, सिने-जगत हो - शायद ही कोई बचा होगा, जिसने देश के जवानों के लिए दिया न जलाया हो, देश के जवानों के लिए संदेश न दिया हो। मीडिया ने भी इस दीपोत्सव को सेना के प्रति आभार व्यक्त करने के अवसर में पलट दिया और क्यों न करें, चाहे BSF हो, CRPF हो, Indo-Tibetan Police हो, Assam Rifles हो, जल-सेना हो, थल-सेना हो, नभ-सेना हो, Coast Guard हो, मैं सब के नाम बोल नहीं पाता हूँ, अनगिनत। ये हमारे जवान किस-किस प्रकार से कष्ट झेलते हैं - हम जब दिवाली मना रहे हैं, कोई रेगिस्तान में खड़ा है, कोई हिमालय की चोटियों पर, कोई उद्योग की रक्षा कर रहा है, तो कोई airport की रक्षा कर रहा है। कितनी-कितनी जिम्मेवारियाँ निभा रहे हैं। हम जब उत्सव के मूड में हों, उसी समय उसको याद करें, तो उस याद में भी एक नई ताक़त आ जाती है। एक संदेश में सामर्थ्य बढ़ जाता है और देश ने कर के दिखाया। मैं सचमुच में देशवासियों का आभार प्रकट करता हूँ। कइयों ने, जिसके पास कला थी, कला के माध्यम से किया। कुछ लोगों ने चित्र बनाए, रंगोली बनाई, cartoon बनाए, जो सरस्वती की जिन पर कृपा थी, उन्होंने कवितायें बनाईं। कइयों ने अच्छे नारे प्रकट किये। ऐसा मुझे लग रहा है, कि जैसे मेरा Narendra Modi App या मेरा My Gov, जैसे उसमें भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा है - शब्द के रूप में, पिंछी के रूप में, कलम के रूप में, रंग के रूप में, अनगिनत प्रकार की भावनायें, मैं कल्पना कर सकता हूँ, मेरे देश के जवानों के लिये कितना गर्व का एक पल है। ‘Sandesh to Soldiers’ इस Hashtag पर इतनी सारी चीज़ें-इतनी सारी चीज़ें आई हैं, प्रतीकात्मक रूप में। 

मैं श्रीमान अश्विनी कुमार चौहान ने एक कविता भेजी है, उसे पढ़ना पसंद करूँगाI 

अश्विनी जी ने लिखा है - 
“मैं त्योहार मनाता हूँ, ख़ुश होता हूँ, मुस्कुराता हूँ, 
मैं त्योहार मनाता हूँ, ख़ुश होता हूँ, मुस्कुराता हूँ, 
ये सब है, क्योंकि, तुम हो, ये तुमको आज बताता हूँ, 
मेरी आज़ादी का कारण तुम, ख़ुशियों की सौगात हो, 
मैं चैन से सोता हूँ, क्योंकि, 
मैं चैन से सोता हूँ, क्योंकि तुम सरहद पर तैनात हो, 
शीश झुकाएँ पर्वत अम्बर और भारत का चमन तुम्हें, शीश झुकाएँ पर्वत अम्बर और भारत का चमन तुम्हें, 
उसी तरह सेनानी मेरा भी है शत-शत नमन तुम्हें, उसी तरह सेनानी मेरा भी है शत-शत नमन तुम्हें ।। ” 

मेरे प्यारे देशवासियो, जिसका मायका भी सेना के जवानों से भरा हुआ है और जिसका ससुराल भी सेना के जवानों से भरा हुआ है, ऐसी एक बहन शिवानी ने मुझे एक टेलीफोन message दिया। आइए, हम सुनते हैं, फ़ौजी परिवार क्या कहता है: - 

“नमस्कार प्रधानमंत्री जी, मैं शिवानी मोहन बोल रही हूँ। इस दीपावली पर जो ‘Sandesh to Soldiers’ अभियान शुरू किया गया है, उससे हमारे फ़ौजी भाइयों को बहुत ही प्रोत्साहन मिल रहा है। मैं एक Army Family से हूँ। मेरे पति भी Army ऑफिसर हैं। मेरे Father और Father-in-law, दोनों Army Officers रह चुके हैं। तो हमारी तो पूरी family soldiers से भरी हुई है और सीमा पर हमारे कई ऐसे Officers हैं, जिनको इतने अच्छे संदेश मिल रहे हैं और बहुत प्रोत्साहन मिल रहा है Army Circle में सभी को। और मैं कहना चाहूँगी कि Army Officers और Soldiers के साथ उनके परिवार, उनकी पत्नियाँ भी काफ़ी sacrifices करती हैं। तो एक तरह से पूरी Army Community को बहुत अच्छा संदेश मिल रहा है और मैं आपको भी Happy Diwali कहना चाहूँगी। Thank You .” 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये बात सही है कि सेना के जवान सिर्फ़ सीमा पर नहीं, जीवन के हर मोर्चे पर खड़े हुए पाए जाते हैं। प्राकृतिक आपदा हो, कभी क़ानूनी व्यवस्था के संकट हों, कभी दुश्मनों से भिड़ना हो, कभी ग़लत राह पर चल पड़े नौजवानों को वापिस लाने के लिये साहस दिखाना हो-हमारे जवान ज़िंदगी के हर मोड़ पर राष्ट्र भावना से प्रेरित हो करके काम करते रहते हैं। 

एक घटना मेरे ध्यान में लाई गई - मैं भी आपको बताना चाहता हूँ। अब मैं इसलिए बताना चाहता हूँ कि सफलता के मूल में कैसी-कैसी बातें एक बहुत बड़ी ताक़त बन जाती हैं। आप ने सुना होगा, हिमाचल प्रदेश खुले में शौच से मुक्त हुआ, Open Defecation Free हुआ। पहले सिक्किम प्रान्त हुआ था, अब हिमाचल भी हुआ, 1 नवम्बर को केरल भी होने जा रहा है। लेकिन ये सफलता क्यों होती है ? कारण मैं बताता हूँ, देखिए, सुरक्षाबलों में हमारा एक ITBP का जवान, श्री विकास ठाकुर - वो मूलतः हिमाचल के सिरमौर ज़िले के एक छोटे से गाँव से हैं। उनके गाँव का नाम है बधाना। ये हिमाचल के सिरमौर ज़िले से हैं। अब ये हमारे ITBP के जवान अपनी ड्यूटी पर से छुट्टियों में गाँव गए थे। तो गाँव में वो उस समय शायद कहीं ग्राम-सभा होने वाली थी, तो वहाँ पहुँच गए और गाँव की सभा में चर्चा हो रही थी, शौचालय बनाने की और पाया गया कि कुछ परिवार पैसों के अभाव में शौचालय नहीं बना पा रहे हैं। ये विकास ठाकुर देशभक्ति से भरा हुआ एक हमारा ITBP का जवान, उसको लगा-नहीं-नहीं, ये कलंक मिटाना चाहिये। और उसकी देशभक्ति देखिए, सिर्फ़ दुश्मनों पर गोलियाँ चलाने के लिये वो देश की सेवा करता है, ऐसा नहीं है। उसने फटाक से अपनी Cheque Book से सत्तावन हज़ार रुपया निकाला और उसने गाँव के पंचायत प्रधान को दे दिया कि जिन 57 घरों में शौचालय नहीं बना है, मेरी तरफ से हर परिवार को एक-एक हज़ार रूपया दे दीजिए, 57 शौचालय बना दीजिए और अपने बधाना गाँव को Open Defecation Free बना दीजिए। विकास ठाकुर ने करके दिखाया। 57 परिवारों को एक-एक हज़ार रूपया अपनी जेब से दे करके स्वच्छता के अभियान को एक ताक़त दी। और तभी तो हिमाचल प्रदेश Open Defecation Free करने की ताक़त आई। वैसा ही केरल में, मैं सचमुच में, नौजवानों का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। मेरे ध्यान में आया, केरल के दूर-सुदूर जंगलों में, जहाँ कोई रास्ता भी नहीं है, पूरे दिन भर पैदल चलने के बाद मुश्किल से उस गाँव पहुँचा जा सकता है, ऐसी एक जनजातीय पंचायत इडमालाकुडी, पहुँचना भी बड़ा मुश्किल है। लोग कभी जाते नहीं। उसके नज़दीक में, शहरी इलाके में, Engineering के छात्रों के ध्यान में आया कि इस गाँव में शौचालय बनाने हैं। NCC के cadet, NSS के लोग, Engineering के छात्र, सबने मिलकर के तय किया कि हम शौचालय बनाएँगे। शौचालय बनाने के लिए जो सामान ले जाना था, ईंटें हो, सीमेंट हो, सारे सामान इन नौजवानों ने अपने कंधे पर उठा करके, पूरा दिन भर पैदल चल के उन जंगलों में गए। खुद ने परिश्रम करके उस गाँव में शौचालय बनाए और इन नौजवानों ने दूर-सुदूर जंगलों में एक छोटे से गाँव को Open Defecation Free किया। उसी का तो कारण है कि केरल Open Defecation Free हो रहा है। गुजरात ने भी, सभी नगरपालिका-महानगरपालिकायें, शायद 150 से ज़्यादा में, Open Defecation Free घोषित किया है। 10 ज़िले भी Open Defecation Free किए गए हैं। हरियाणा से भी ख़ुशख़बरी आई है, हरियाणा भी 1 नवम्बर को उनकी अपनी Golden Jubilee मनाने जा रहा है और उनका फ़ैसला है कि वो कुछ ही महीनों में पूरे राज्य को Open Defecation Free कर देंगे। अभी उन्होंने सात ज़िले पूरे कर दिए हैं। सभी राज्यों में बहुत तेज़ गति से काम चल रहा है। मैंने कुछ का उल्लेख किया है। मैं इन सभी राज्यों के नागरिकों को इस महान कार्य के अन्दर जुड़ने के लिये देश से गन्दगी रूपी अन्धकार मिटाने के काम में योगदान देने के लिये ह्रदय से बहुत-बहुत अभिनन्दन देता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, सरकार में योजनायें तो बहुत होती हैं। और पहली योजना के बाद, उसी के अनुरूप दूसरी अच्छी योजना आए, तो पहली योजना छोड़नी होती है। लेकिन आम तौर पर इन चीज़ों पर कोई ध्यान नहीं देता है। पुरानी वाली योजना भी चलती रहती है, नयी वाली भी योजना चलती रहती है और आने वाली योजना का इंतज़ार भी होता रहता है, ये चलता रहता है। हमारे देश में जिन घरों में गैस का चूल्हा हो, जिन घरों में बिजली हो, ऐसे घरों को Kerosene की ज़रुरत नहीं है। लेकिन सरकार में कौन पूछता है, Kerosene भी जा रहा है, गैस भी जा रहा है, बिजली भी जा रही है और फिर बिचौलियों को तो मलाई खाने का मौका मिल जाता है। मैं हरियाणा प्रदेश का अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि उन्होंने एक बीड़ा उठाया है। हरियाणा प्रदेश को Kerosene मुक्त करने का। जिन-जिन परिवारों में गैस का चूल्हा है, जिन-जिन परिवारों में बिजली है, ‘आधार’ नंबर से उन्होंने verify किया और अब तक मैंने सुना है कि सात या आठ ज़िले Kerosene free कर दिए, Kerosene मुक्त कर दिए। जिस प्रकार से उन्होंने इस काम को हाथ में लिया है, पूरा राज्य, मुझे विश्वास है कि बहुत ही जल्द Kerosene free हो जायेगा। कितना बड़ा बदलाव आयेगा, चोरी भी रुकेगी, पर्यावरण का भी लाभ होगा, हमारी foreign exchange की भी बचत होगी और लोगों की सुविधा भी बढ़ेगी। हाँ, तकलीफ़ होगी, तो बिचौलियों को होगी, बेईमानों को होगी। 

मेरे प्यारे देशवासियो, महात्मा गाँधी हम सब के लिए हमेशा-हमेशा मार्गदर्शक हैं। उनकी हर बात आज भी देश कहाँ जाना चाहिए, कैसे जाना चाहिए, इसके लिये मानक तय करती है। गाँधी जी कहते थे, आप जब भी कोई योजना बनाएँ, तो आप सबसे पहले उस ग़रीब और कमज़ोर का चेहरा याद कीजिए और फिर तय कीजिए कि आप जो करने जा रहे हैं, उससे उस ग़रीब को कोई लाभ होगा कि नहीं होगा। कहीं उसका नुकसान तो नहीं हो जाएगा। इस मानक के आधार पर आप फ़ैसले कीजिए। समय की माँग है कि हमें अब, देश के ग़रीबों का जो aspirations जगा है, उसको address करना ही पड़ेगा। मुसीबतों से मुक्ति मिले, उसके लिए हमें एक-के-बाद एक कदम उठाने ही पड़ेंगे। हमारी पुरानी सोच कुछ भी क्यों न हो, लेकिन समाज को बेटे-बेटी के भेद से मुक्त करना ही होगा। अब स्कूलों में बच्चियों के लिये भी toilet हैं, बच्चों के लिये भी toilet हैं। हमारी बेटियों के लिये भेदभाव-मुक्त भारत की अनुभूति का ये अवसर है। 

सरकार की तरफ़ से टीकाकरण तो होता ही है, लेकिन फिर भी लाखों बच्चे टीकाकरण से छूट जाते हैं। बीमारी के शिकार हो जाते हैं। ‘मिशन इन्द्रधनुष’ टीकाकरण का एक ऐसा अभियान, जो छूट गए हुए बच्चों को भी समेटने के लिए लगा है, जो बच्चों को गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए ताक़त देता है। 21वीं सदी हो और गाँव में अँधेरा हो, अब नहीं चल सकता और इसलिये गाँवों को अंधकार से मुक्त करने के लिये, गाँव बिजली पहुँचाने का बड़ा अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। समय सीमा में आगे बढ़ रहा है। आज़ादी के इतने सालों के बाद, गरीब माँ, लकड़ी के चूल्हे पर खाना पका करके दिन में 400 सिगरेट का धुआं अपने शरीर में ले जाए, उसके स्वास्थ्य का क्या होगा। कोशिश है 5 करोड़ परिवारों को धुयें से मुक्त ज़िंदगी देने के लिये। सफलता की ओर आगे बढ़ रहे हैं। 

छोटा व्यापारी, छोटा कारोबारी, सब्जी बेचनेवाला, दूध बेचनेवाला, नाई की दुकान चलानेवाला, साहूकारों के ब्याज के चक्कर में ऐसा फँसा रहता था - ऐसा फँसा रहता था। मुद्रा योजना, stand up योजना, जन-धन account, ये ब्याजखोरों से मुक्ति का एक सफल अभियान है। ‘आधार’ के द्वारा बैंकों में सीधे पैसे जमा कराना। हक़दार को, लाभार्थी को सीधे पैसे मिलें। सामान्य मानव के ज़िंदगी में ये बिचौलियों से मुक्ति का अवसर है। एक ऐसा अभियान चलाना है, जिसमें सिर्फ़ सुधार और परिवर्तन नहीं, समस्या से मुक्ति तक का मार्ग पक्का करना है और हो रहा है। 

मेरे प्यारे देशवासियो, कल 31 अक्टूबर, इस देश के महापुरुष - भारत की एकता को ही जिन्होंने अपने जीवन का मंत्र बनाया, जी के दिखाया - ऐसे सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म-जयंती का पर्व है। 31 अक्टूबर, एक तरफ़ सरदार साहब की जयंती का पर्व है, देश की एकता का जीता-जागता महापुरुष, तो दूसरी तरफ़, श्रीमती गाँधी की पुण्यतिथि भी है। महापुरुषों को पुण्य स्मरण तो हम करते ही हैं, करना भी चाहिए। लेकिन पंजाब के एक सज्जन का फ़ोन, उनकी पीड़ा, मुझे भी छू गई: - 

“प्रधानमंत्री जी, नमस्कार, सर, मैं जसदीप बोल रहा हूँ पंजाब से। सर, जैसा कि आप जानते हैं कि 31 तारीख़ को सरदार पटेल जी का जनमदिन है। सरदार पटेल ओ शख्सियत हैं, जिनाने अपनी सारी ज़िंदगी देश नु जोड़न दी बिता दित्ती and ओ उस मुहिम विच, I think, सफ़ल भी होये, he brought everybody together. और we call it irony or we call it, एक बुरी किस्मत कहें देश की कि उसी दिन इंदिरा गाँधी जी की हत्या भी हो गई। and जैसा हम सबको पता है कि उनकी हत्या के बाद देश में कैसे events हुए। सर, मैं ये कहना चाहता था कि हम ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण जो events होते हैं, जो घटनायें होती हैं, इनको कैसे रोक सकते हैं। ” 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये पीड़ा एक व्यक्ति की नहीं है। एक सरदार, सरदार वल्लभ भाई पटेल, इतिहास इस बात का गवाह है कि चाणक्य के बाद, देश को एक करने का भगीरथ काम, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। आज़ाद हिंदुस्तान को, एक झंडे के नीचे लाने का सफल प्रयास, इतना बड़ा भगीरथ काम जिस महापुरुष ने किया, उस महापुरुष को शत-शत नमन। लेकिन यह भी तो पीड़ा है कि सरदार साहब एकता के लिए जिए, एकता के लिए जूझते रहे; एकता की उनकी प्राथमिकता के कारण, कइयों की नाराज़गी के शिकार भी रहे, लेकिन एकता के मार्ग को कभी छोड़ा नहीं; लेकिन, उसी सरदार की जन्म-जयंती पर हज़ारों सरदारों को, हज़ारो सरदारों के परिवारों को श्रीमती गाँधी की हत्या के बाद मौत के घाट उतार दिया गया । एकता के लिये जीवन-भर जीने वाले उस महापुरुष के जन्मदिन पर ही और सरदार के ही जन्मदिन पर सरदारों के साथ ज़ुल्म, इतिहास का एक पन्ना, हम सब को पीड़ा देता है । 

लेकिन, इन संकटों के बीच में भी, एकता के मंत्र को ले करके आगे बढ़ना है। विविधता में एकता यही देश की ताक़त है। भाषायें अनेक हों, जातियाँ अनेक हों, पहनावे अनेक हों, खान-पान अनेक हों, लेकिन अनेकता में एकता, ये भारत की ताक़त है, भारत की विशेषता है। हर पीढ़ी का एक दायित्व है। हर सरकारों की ज़िम्मेवारी है कि हम देश के हर कोने में एकता के अवसर खोजें, एकता के तत्व को उभारें। बिखराव वाली सोच, बिखराव वाली प्रवृत्ति से हम भी बचें, देश को भी बचाएँ। सरदार साहब ने हमें एक भारत दिया, हम सब का दायित्व है श्रेष्ठ भारत बनाना। एकता का मूल-मंत्र ही श्रेष्ठ भारत की मज़बूत नींव बनाता है। 

सरदार साहब की जीवन यात्रा का प्रारम्भ किसानों के संघर्ष से हुआ था। किसान के बेटे थे। आज़ादी के आंदोलन को किसानों तक पहुँचाने में सरदार साहब की बहुत बड़ी अहम भूमिका रही। आज़ादी के आंदोलन को गाँव में ताक़त का रूप बनाना सरदार साहब का सफल प्रयास था। उनके संगठन शक्ति और कौशल्य का परिणाम था। लेकिन सरदार साहब सिर्फ संघर्ष के व्यक्ति थे, ऐसा नहीं, वह संरचना के भी व्यक्ति थे। आज कभी-कभी हम बहुत लोग ‘अमूल’ का नाम सुनते हैं। ‘अमूल’ के हर product से आज हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के बाहर भी लोग परिचित हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि सरदार साहब की दिव्यदृष्टि थी कि उन्होंने co-operative milk producers के union की कल्पना की थी। और खेड़ा district, उस समय केरा district बोला जाता था, और 1942 में इस विचार को उन्होंने बल दिया था, वो साकार रूप, आज का ‘अमूल’ किसानों के सुख-समृद्धि की संरचना सरदार साहब ने कैसे की थी, उसका एक जीता-जागता उदाहरण हमारे सामने है। मैं सरदार साहब को आदरपूर्वक अंजलि देता हूँ और इस एकता दिवस पर 31 अक्टूबर को हम जहाँ हों, सरदार साहब को स्मरण करें, एकता का संकल्प करें। 

मेरे प्यारे देशवासियो, इन दीवाली की श्रृंखला में कार्तिक पूर्णिमा-ये प्रकाश उत्सव का भी पर्व है। गुरु नानक देव, उनकी शिक्षा-दीक्षा पूरी मानव-जाति के लिये, न सिर्फ़ हिंदुस्तान के लिये, पूरी मानव-जाति के लिए, आज भी दिशादर्शक है। सेवा, सच्चाई और ‘सरबत दा भला’, यही तो गुरु नानक देव का संदेश था। शांति, एकता और सद्भावना यही तो मूल-मंत्र था। भेदभाव हो, अंधविश्वास हो, कुरीतियाँ हों, उससे समाज को मुक्ति दिलाने का वो अभियान ही तो था गुरु नानक देव की हर बात में। जब हमारे यहाँ स्पृश्य-अस्पृश्य, जाति-प्रथा, ऊँच-नीच, इसकी विकृति की चरम सीमा पर थी, तब गुरु नानक देव ने भाई लालो को अपना सहयोगी चुना। आइए, हम भी, गुरु नानक देव ने जो हमें ज्ञान का प्रकाश दिया है, जो हमें भेदभाव छोड़ने के लिए प्रेरणा देता है, भेदभाव के ख़िलाफ़ कुछ करने के लिए आदेश करता है, ‘सबका साथ सबका विकास’ इसी मंत्र को ले करके अगर आगे चलना है, तो गुरु नानक देव से बढ़िया हमारा मार्गदर्शक कौन हो सकता है। मैं गुरु नानक देव को भी, इस ‘प्रकाश-उत्सव’ आ रहा है, तब अन्तर्मन से प्रणाम करता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, फिर एक बार, देश के जवानों के नाम ये दिवाली, इस दिवाली पर आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनायें। आपके सपने, आपके संकल्प हर प्रकार से सफल हों। आपका जीवन सुख-चैन की ज़िंदगी वाला बने, यही आप सबको शुभकामनायें देता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद। 
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अतुल कुमार तिवारी/ अमित कुमार/ हिमांशु सिंह