Thursday, September 15, 2016

हिन्दी के विकास में गैर हिन्दी क्षेत्र के विद्वानों का बहुत बड़ा योगदान


हिन्दी को हमें आत्म सम्मान के साथ जोड़ना होगा-राधे श्याम शर्मा
कमला  लोहटिया कालेज लुधियाना में भी हिंदी दिवस 
पंचकूला/चंडीगढ़/पिंजौर/लुधियाना14 सितंबर 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):
विवाद करने वाले विवाद करते रहे लेकिन हिंदी के चाहने वाले लगातार बढ़ रहे हैं। हिंदी में बात करना और हिंदी में लिखना अब धीरे धीर गर्व की बात महसूस करने जैसा हो रहा है। हिंदी दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ और आसपास ले इलाकों में विशेष कार्यक्रम हुए। 

हिन्दी केवल अभिव्यक्ति की भाषा नहीं है। हिन्दी एक राष्ट्र, एक सभ्यता, एक संस्कृति है। यह विचार दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो.कुमुद शर्मा ने हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रकट किए। उनके विचारों को सभी ने बहुत प्रेम से सुना। 
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में इस वर्ष अकादमी द्वारा प्रदेश के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में हिन्दी दिवस पर विशेष आयोजनों की व्यवस्था की गई है। अकादमी के उपाध्यक्ष राधे श्याम शर्मा ने कहा कि हिन्दी भाषा के विकास में गैर हिन्दी क्षेत्र के विद्वानों का बहुत बड़ा योगदान है। हिन्दी के विकास को हमें आत्म सम्मान और अस्मिता के साथ जोड़ना होगा तब शायद हिन्दी दिवस मनाने की आवश्यकता ही न रहे। गोष्ठी में सतनाम सिंह, अरुण जौहर, गणेश दत्त, निखा खोलिया, सुनीता नैन, एसएल धवन, चन्द्र भार्गव, संगीता बैनीवाल, उर्मिल सखी, सुशील हसरत, नरेन्द्र आहुजा विवेक, राजेश पंकज, शशि प्रभा, मीरा गौतम, अमर जीत ‘अमर’ तथा सुभाष रस्तोगी ने कविता पाठ किया। मंच संचालन डॉ. विजेन्द्र कुमार ने किया जिसे बहुत पसन्द किया गया।
पिंजौर/कालका: इसी तरह बुधवार को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में पिंजौर, कालका के विभिन्न स्कूलों में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सीआरपी केन्द्र पिंजौर के केन्द्रीय विद्यालय में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। सेंट विवेकानंद स्कूल पिंजौर में वॉइस प्रिंसिपल पल्लवी भारद्वाज, बाल भारती स्कूल कालका की प्रिंसिपल पूनम गौतम ने बच्चों को हिंदी का महत्व बताया। इन  ही हिंदी का प्रभाव क्षेत्र बढ़ेगा। 
लुधियाना: अन्य स्थानों की तरह लुधियाना में भी बहुत से संस्थानों की ओर  से विशेष आयोजन हुए। गवर्नमेंट कॉलेज फॉर ब्वॉयज में पंजाब हिंदी परिषद नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा संयुक्त रुप से राष्ट्रीय हिंदी दिवस के मौके पर समारोह का आयोजन किया गया। इस शानदार कार्यक्रम में हायर एजुकेशन मिनिस्टर सुरजीत सिंह रखड़ा मुख्यातिथि के तौर पर शामिल हुए। वहीं, मेयर हरचरण सिंह गोहलवड़िया, राजेंद्र भंडारी, अजय सिंह, मदन बस्सी, अंगरुप सोनम, आर के मल्होत्रा ने विशेषातिथि के तौर पर शिरकत की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. धर्म सिंह संधू ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार भाषा आयोग के सदस्य हरमिंदर सिंह बेदी ने मुख्य प्रवक्ता के तौर पर हिस्सा लिया। यशपाल बांगिया ने पंजाब हिंदी परिषद के प्रयासों पर प्रकाश डाला। डॉ. बबीता जैन और डॉ. निरत्तोमा मोदगिल शर्मा ने पंजाब में हिंदी के उपयोग उत्थान पर जोर दिया। एससीडी गवर्नमेंट कॉलेज, मालवा सेंट्रल कॉलेज के स्टूडेंट्स ने कल्चरल कार्यक्रम पेश कर सभी का मनोरंजन किया। इस मौके पर किरन साहनी, रणधीर शर्मा ने भी खासतौर पर शिरकत की। पंजाब हिंदी परिषद के प्रधान नरेंद्र बांगिया ने समारोह के सफल आयोजन के लिए ओम प्रकाश शर्मा, यश पाल छाबड़ा, महेश शर्मा अन्य कार्यकारी सदस्यों का धन्यवाद किया। लुधियाना का यह आयोजन भी बेहद सफल रहा। 

Wednesday, September 14, 2016

रिलांयस जिओ ने कुछ बताया लेकिन बहुत कुछ छिपाया

महंगे और सस्ते/अच्छे और बुरे का फैसला उपभोक्ता खुद कर
कारोबारी दुनिया में अगर पारदर्शिता आ जाये तो सम्भव है बहुत से वो कारोबार बन्द हो जाएं जो लोगों को असली बात की जगह नकली तस्वीर दिखा कर लुभाते हैं और आखिर उनकी जेब काटने में सफल हो जाते हैं। कोई न कोई चीज़ बाजार में बहुत चलती है और बाद में कहा जाता है वो तो बहुत खतरनाक थी।  शोर बढ़ता है तो उस पर पाबन्दी लगा दी जाती है। पहले यह सब खान पान में चलता था, प्रापर्टी में चलता था और शायद कुछ और क्षेत्रों में भी।  

अब सोशल मीडिया पर चर्चा है रिलांयस जिओ के की। लम्बी लम्बी लाईनों  के बावजूद अभी किसी ने अपना पुराण नम्बर बन्द नहीं कराया औरन ही किसी अन्य ऑपरेटर ने रिलायंस जिओ की घोषणा से घबरा कर अपने टैरिफ बदले हैं।  इस तरह के आंकड़ों और इनकी हक़्क़ीक़त पर नज़र रखने वालों ने कुछ आशंकाएं अवश्य व्यक्त की हैं। 

चर्चा के मुताबिक रिलांयस जिओ का सिम खरीदने से पहले और अपना पुराना कनेक्शन बंद कराने से पहले मुकेश अंबानी जी का गणित समझ लीजिए। दरअसल रिलायंस जीओ की लांचिंग के दौरान अंबानी ने बड़े-बड़े दावे तो किए लेकिन असल बात छिपा गए। रिलांयस का दावा है कि एक जीबी डाटा 50 रुपये में मिलेगा, लेकिन अंबानी ने यह नहीं बताया कि 50 रुपये में एक जीबी डाटा पाने के लिए पहले आपको कम से कम 499 रुपये खर्चने होंगे। अलग-अलग वेबसाइटों पर मौजूद कंपनी के ट्रैरिफ प्लान को पढ़ने के बाद तो यही बात समझ आ रही है। अंबानी सब बता गए, लेकिन इस बात को छिपा गए। अहम बात यह है कि 50 रुपये में मिलने वाला एक जीबी डाटा मोबाइल डाटा नहीं, बल्कि वाईफाई डाटा है। इसका प्रयोग आप रिलायंस हॉटस्पाट आसपास होने पर ही कर पाएंगे। टैरिफ प्लान के अनुसार पूरे महीने डाटा यूज करने के लिए आपको कम से कम 499 रुपये खर्च करने होंगे। रिलांयस के प्लान उन लोगों के अच्छे हैं जो डाटा पर हर महीने 500 या इससे ज्यादा रुपये खर्च करते हैं। मुझे लगता है एक जीबी डाटा में पूरा महीना काट देने वाले लोगों की तादाद ज्यादा है। और 28 दिन की वैलिडिटी के साथ एक जीबी 3जी डाटा की कीमत फिलहाल 156 रुपये है।
यह है गणित
जिओ ने कुल 10 ट्रैरिफ प्लान लांच किए हैं। इनकी कीमत 19 से लेकर 4999 रुपये है। सभी प्लान्स में वायस काल्स और रोमिंग पूरी तरह मुफ्त है।
हालांकि, मुफ्त कालिंग के लिए सिम की वैलिडिटी के लिए कितना खर्च करना होगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।

19 रुपये- इसमें 1 दिन के लिए 100 एमबी डाटा मिलेगा। साथ में 200 एमबी वाईफाई डाटा मिलेगा। वाईफाई डाटा खत्म होने के बाद हर एक जीबी
डाटा के लिए 50 रुपये देने होंगे
129 रुपये- 750 एमबी डाटा सात दिन के लिए। 1.5 जीबी वाईफाई डाटा और इसके बाद हर एक जीबी वाईफाई डाटा के लिए 50 रुपये देने होंगे।
149 रुपये-300 एमबी डाटा 28 दिन की वैलिडिटी के साथ। इसमें आपको कोई वाईफाई डाटा नहीं मिलेगा। यानि 50 रुपये में एक जीबी डाटा का वादा इस प्लान में झूठा है।
299 रुपये- 21 दिन की वैलिडिटी के साथ 2 जीबी डाटा। 4 जीबी वाईफाई डाटा और इससे अधिक प्रयोग पर 50 रुपये में 1 जीबी डाटा।
499 रुपये- 28 दिन की वैलिडिटी के साथ 4 जीबी डाटा। 8 जीबी वाईफाई डाटा और इससे अधिक प्रयोग पर 50 रुपये में 1 जीबी डाटा। यानी 2दिन की वैलिडिटी के लिए आपको कम से कम 499 (टैक्स अलग) रुपये खर्चने होंगे। जिन लोगों का काम एक जीबी के चार्ज में चल जाता है उनके लिए यह महंगा पड़ेगा।
इसके अलावा 999, 1499, 2499, 3999, 4999 के प्लान्स भी हैं, जो सिर्फ हैवी यूजर्स के लिए ही फायदेमंद हो सकते हैं।

रिलांयस के बाजार में उतरने से उपभोक्ताओं का फायदा होगा, इसमें कोई शक नहीं है। मेरा कहना सिर्फ इतना है कि दावों में स्पष्टता होनी चाहिए और उपभोक्ताओं का भरोसा जीतने के लिए यही एक बात जरूरी है। बाकी महंगे और सस्ते/अच्छे और बुरे का फैसला उपभोक्ता खुद कर लेगा।

Tuesday, September 13, 2016

पंजाब एक ऐसी जगह है जहाँ के बच्चो में खूब टैलेन्ट है-दीपक रॉय

Date: 2016-09-13 19:07 GMT+05:30
फैशन शो सीजन-2 के ऑडिशन के करीब बच्चो ने ने भाग लिया
लुधियाना: 13 सितम्बर 2016: (पुष्पिंदर कौर//पंजाब स्क्रीन):
आज की व्यापारिक दुनिया में क्या सही है और क्या गलत इसका पता वक़्त के साथ ही चलता है लेकिन दुनिया इस सब के बावजूद चलती रहती है। अब एक न्य आयोजन चर्चा में है। गोल्डन क्राउन के प्रबन्धकों का कहना है कि यह एक ऐसा प्लेटफार्म जो आपके सपनोँ को हक़ीक़त में बदल सकता है। गोल्डन क्राउन फैशन शो सीजन -2 के ऑडिशन फ़्रंगी फैशन,सराभा नागर में आयोजित किए गए। इसी तरह इवेंट को आयोजित किया शो के ओनर दीपक रॉय और हैरी जस्सल ने। दीपक रॉय ने बताया कि पंजाब एक ऐसी जगह है जहाँ के बच्चो में खूब टैलेन्ट है। बराबरी के इस युग में वे हर एक लड़के और लड़कियों को कैरियर की इस फील्ड में मौका देना चाहते है। हैरी जस्सल ने बताया कि ऑडिशन में सौ के करीब बच्चो ने भाग लिया जिन में लड़के ,लड़किया और छोटे बच्चे शामिल थे। इस ऑडिशन को जजों ने जज किया जिसमें सना चंदोक,मीतू खोसला,दीपक रॉय और हैरी जस्सल शामिल थे।शो करवाने का मकसद ये है कि बच्चो के अंदर छुपे टैलेंट को आगे लेके आया जा सके और डिज़ाइनर और मॉडल्स के लिए अच्छा मौका है कि वो लुधियाना को अपने अंदर छिपा टैलेंट दिखा सके। इस मौके पर वनीत लाहर, करण जुनेजा,जपनीत चावला, र.डी. सिंह,जसलीन भल्ला आदि शामिल थे इन्होंने ऑडिशन को सफ़ल बनाने में मदद की। अब देखना है कि  इसका फायदा कितने बच्चों  तक पहुंचता है। 

Monday, September 12, 2016

सारे हिन्दोस्तान का पेट भरना हमारी डयूटी-वीसी डा. ढिल्लों

मेले में बताये गए किसानों को आर्थिकता सुधारने के गुर 
नाग कलां-जहांगीर  (अमृतसर) से लौट कर रेक्टर कथूरिया :
खुद दर्द सह कर भी दूसरों को मुस्कराहट देना यह हिम्मत और गौरव पंजाबियों के हिस्सा ही आया है। जब किसान खुदकुशियां कर रहा है उस कठिन समय भी पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी ने देश के प्रति लगाव और स्पिरिट में कमी नहीं आने दी। पीएयू के उपकुलपति डॉक्टर बलदेव सिंह ढिल्लों ने यहाँ आयोजित किसान मेले में याद दिलाया कि पूरे हिन्दोस्तान का पेट भरना हमारा कर्तव्य बनता है। यहाँ सितम्बर महीने में आयोजित किसान मेलों में से दूसरा मेला आज सोमवार 12 सितम्बर 2016 को आयोजित हुआ। 
पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र नाग कला में किसान मेला लगाया गया। मेले के समारोह में डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों वीसी पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल हुए। मेले के दौरान कृषि से संबंधित मुकाबले भी करवाए गए। इनमें घरेलू काम को कारोबार तक लेजाने के लिए घरेलू उत्पडन्न की प्रतियोगिता भी शामिल थी। सेवियां बनाने के मुकाबले में इलाके की 15 महिलायों ने भाग लिया। जिनमें चार को सम्मानित भी किया गया। महिला सशक्तिकरण का यह प्रयास बेहद कामयाब भी हो रहा है।  पीएयू के बनाये सेल्फ हैल्प ग्रुप बहुत ही कामयाबी से चल रहे हैं। इनका सामान तरोताज़ा, पौष्टिक और सस्ता भी होता है। कोई बड़ी कम्पनी खराब सामान बेच क्र भी कई बहाने लगा सकती है लेकिन इन कल्बों की सदस्य महिलाएं जानती हैं कि इनको यहां रहना है अपने लोगों के बीच इसलिए इनके साथ व्यवहार शुद्ध रखना आवश्यक है। इन महिलायों के चेहरे पर एक आत्म विश्वास और आंखों में सफलता की चमक होती है। अपने परिवार की आर्थिकता को मज़बूत बनाने में सक्रिय यह साधारण सी महिलाएं बहुत ही असाधारण कार्य कर रही है जिसकी अहमियत अभी तक पूरी तरह लोगों के सामने नहीं आई है। इन मेलों में इन महिलायों की सफलता आसानी से देखी जा सकती है। कर्ज़ लेकर काम शुरू करने वाली ये महिलाएं आज अछि खासी कमाई कर रही हैं वो भी बिना किसी नौकरी के। इस मेले में भी ऐसा एलोवेरा जूस बेचा जा रहा था और केवल एक दिन पूर्व ही पैक किया गया था। बाजार के ब्रांडेड जूस से कुछ महंगा होने के बावजूद हाथो हाथ बिक रहा था। शहद के साथ साथ आंवला का आचार और मुरब्बा भी ग्राहकों को लुभा रहा था। इन महिलायों और कुछ पुरुषों ने भी बताया कि अब अगर वे अपने पैरों पर खड़े हैं तो केवल पीएयू से मिली ट्रेनिंग और प्रोत्साहन की बदौलत। 
इस अवसर पर डॉ. आरके गुब्बर, डॉ. राजिंदर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, महिंद्र सिंह ग्रेवाल, डॉ. तरसेम सिंह, डा. हरवंत सिंह औलख डिप्टी डायरेक्टर कृषि विभाग तथा डॉ. रंजीत सिंह आदि मौजूद थे। इसके साथ ही आत्म हत्या कर रहे किसान की हालत सुधरने के लिए पीएयू ख़ामोशी से सक्रिय है। इस दुसरे किसान मेले में भी इस बात पर ज़ोर दिया गया कि किसान को पूरा वर्ष मेहनत करने और केवल दो दिन आमदन लेने की जगह अब खुद को बदलना होगा और हर रोज़ आमदन लेनी होगी। इस मकसद के लिए किसान को दूध के साथ साथ सब्ज़ियों की तरफ भी विशेष ध्यान देने को कहा जा रहा है। दूध और सब्ज़ियां ही ऐसी चीज़ हैं जो हर रोज़ बिक सकती हैं। 
मेला कोई सरकारी या अकादमिक आयोजन न होकर एक पारिवारिक मिलन की तरह लग रहा था जिसमें सभी अपना सुख दुःख साँझा कर रहे थे। मेले में तरह तरह जे स्टाल लगे थे और जितने लोग पंडाल में थे उससे कहीं अधिक इन स्टालों पर थे। फूल और शाखाएं काटने वाली कैंची से लेकर ट्रेक्टर तक बेचे जा रहे थे। सब्ज़ियों के बीजों की मांग यहाँ बहुत ज़्यादा थी। शायद ही कोई हो जिसने सब्ज़ी के बीजों की किट न खरीदी हो। केवल 100/- रूपये की इस किट में दस तरह की सब्ज़ियों के बीज थे जिन्हें घर में भी उगाया जा सकता है। 
वाइस चांसलर डॉक्टर ढिल्लों ने इन कृषि केंद्रों की स्थापना और मेलों के आयोजन का संक्षिप्त सा इतिहास बताते हुए कहा कि इनसे फायदा लेना अब हर किसान का फ़र्ज़ है। 

इस समय माता जी को ही निर्विवाद हो कर माथा टेका जा सकता है

उनको सद्गुरु रूप में स्वीकार कर पंथ को टूटने से बचा सकते हैं
नामधारी पंथ के पूजनीय श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी की धर्मपत्नी श्री माता चंद कौर जी का नाम उसी श्रेणी में आता है,जिन माताओं की देवियों के रूप में पूजा की जाती है तथा गुरबाणी में भी उन्हें धन्यता योग्य स्थान प्राप्त है जैसे 
धन्नु सु वंसु  धन्नु सु पिता धन्नु सु माता जिनि जन जणे।। (११३५ )  

धनु जननी जिनि जाइिआ धन्नु पिता परधानु।।  (३२ )  आदि। 
           श्री माता चंद कौर जी द्धारा पंथ व गरीबों और दुखियों की सेवा व सहायता की। श्री सतगुरु जी के पावन चरणों में रहते हुए देश की आज़ादी के बाद बेघर हुए लोगों के इलाकों में बसाने, आबाद करने तथा उन्हें उन्नति के शिखर तक पहुँचाने में आप जी ने सतगुरु जी के साथ मुख्य भूमिका निभाई। आप दिन रात पंथ की सेवा में लगे रहते। माता जी सर्वगुण सम्पन्न थीं।  

       आप जी की  महानता का परिचय श्री ठाकुर दलीप सिंह जी के बचनों तथा उन तस्वीरों से मिलता है जो स्वयं आप जी ने अपनी अलौकिक फोटोग्राफी से तैयार कर उन्हें सेवा के प्रत्यक्ष स्वरुपशांत मूरत तथा जगत माता आदि उपनामों से सम्बोधित कर सभी  नामधारी परिवारों में सप्रेम भेंट स्वरुप दी। इसके साथ ही ऐसे पूजनीक माता जी की निन्दा करने से भी वर्जित किया था। संभव है कि उस समय भी कुछ मनमुख लोग माता जी की निंदा करते होंगे।
   
            उसके बाद दिसंबर 2012 में नामधारी पंथ के मुखी  श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी के ब्रह्मलीन हो जाने के बाद नामधारी पंथ में कुछ दरारें आती देख पंथ को एकजुट करने के लिए श्री ठाकुर दलीप सिंह जी ने यह निर्णय लिया कि इस समय माता जी ही केवल पंथ की सर्वोच्च हस्ती हैं जहाँ बिना किसी विवाद के माथा टेका जा सकता है और पंथ इकट्ठा हो सकता है। हम उनको सद्गुरु रूप में स्वीकार कर पंथ को टूटने से बचा सकते हैं और केवल कहा ही नहीं बल्कि श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी के गुरुद्धारा साहिब श्री जीवन नगर में हो रहे श्रद्धांजली समारोह के दौरान श्री माता  चंद  कौर जी की तस्वीर को सतगुरु जगजीत सिंह जी की तस्वीर के साथ सुशोभित कर पहले आप नमस्कार की फिर सारी संगत को नमस्कार  करने तथा अरदास में उनका नाम शामिल कर के अरदास करने का हुक्म किया। ऐसे समय में श्री ठाकुर दलीप सिंह जी  ने सद्गुरु जगजीत सिंह जी की ओर से उनके सेवक डॉ. इक़बाल सिंह जी द्धारा भेजे गए गद्दी के उत्तराधिकारी होने के हक़ को त्याग कर दूर दृष्टि  से ये सोचा कि इस परिस्थिति में केवल माता जी के चरणों में सीस झुका कर ही सारा पंथ इक्कठा हो सकता है। और ऐसा ऐलान आप जी ने कोई निजी स्वार्थ के लिए नहीं अपितु  पंथ की भलाई के लिए किया।  

        संगत के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था क्योंकि माता जी तो पहले से ही महान हस्ती श्री सतगुरु जगजीत सिंह जी की धर्मपत्नी होने के नाते सभी की पूजनीय थीं। पर पता नहीं संगत क्यों दुविधा में पड़ गई और संगत ने उनके आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया। और कई लोग आप जी से वाद-विवाद करने लग गये क्योंकि कई मतलब परस्त तथा स्वार्थी लोगों को शायद यह खतरा पैदा हो गया कि यदि माता जी गुरुगद्दी पर बिराजमान हो गये तो वे गुरुघर की सम्पति पर कब्ज़ा कैसे करेंगे और भैणी साहिब में रहने वाले कुछ कब्जाधारी लोगों ने तो बहुत टीका टिप्पणी की। वे कहने लगे कि ये कौनसा नया काम है? एक स्त्री कैसे गुरु बन सकती है?जबकि गुरबाणी में सतगुरु के अनेक लक्षण लिखे हैं पर ऐसा कहीं नहीं लिखा कि एक स्त्री गुरु नहीं बन सकती। और इस तरह माता जी को गुरु रूप में स्वीकार नहीं किया। पर उनकी इस मनमत से पंथ का कई तरह से नुकसान हुआ। पंथ का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि पंजाब की धरती पर माता जी की हत्या का कलंक लग गया और हमने अपने पूज्य माता जी को खो दिया।
काश! समूह नामधारी संगत ने श्री ठाकुर दलीप सिंह जी का आदेश मान कर माता चंद कौर जी को गुरु रूप में स्वीकार कर लिया होता। यदि माता जी सतगुरु रूप में बिराजमान होते तो नामधारी पंथ को ऐसी संकट की घड़ी ना देखनी पड़ती। हम उनके पावन सानिध्य का आनंद ले रहे होते और समाज व देश के लिए महान मिसालें कायम करने वाला नामधारी पंथ आज इस कगार पर असमंजस में ना खड़ा होता।  
 पर इस समय दौरान ही सिक्ख पंथ के निरंकारी समुदाय में ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला जिसने पंथक हितैषी नामधारी समुदाय को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि नामधारियों ने माता जी को गुरु मानने का ऐलान कर शुरुआत तो की पर इसका लाभ नही उठा सके। इसका लाभ उनके निरंकारी भाइयों ने प्राप्त कर लिया। क्योंकि निरंकारी समुदाय ने  नामधारी पंथ के मुखी श्री ठाकुर दलीप सिंह जी द्वारा सर्वप्रथम शुरू की जाने वाली परंपरा को अपना कर इतिहास में एक नई मिशाल कायम की है। उन्होंने मई 2016 में अपने पंथ के मुखी बाबा हरदेव सिंह जी के ब्रह्मलीन हो जाने के पश्चात् ज्यादा दुविधा में न पड़ कर उनकी धर्मपत्नी माता सविंदर कौर जी को गुरु रूप में स्वीकार कर सराहनीय कार्य किया है। माता सविंदर कौर जी ने पंथ को उसी तरह सहेज लिया तथा सारा पंथ उनके समक्ष नतमस्तक है। इसके अलावा पंथ में किसी प्रकार का विवाद नहीं उठा और पंथ उन्नति की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी के समक्ष एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर दिया उन लोगों को भी प्रेरणा दी है जो कहते थे कि एक स्त्री कैसे गुरु बन सकती है ? अतः आज भी उन लोगों को नारी शक्ति के अस्तित्व को पहचानने की जरूरत है जिन्हें पूजनीय स्थान देने पर हमेशा लाभ ही होता है नुकसान नहीं। महर्षि मनु जी ने संस्कृत के एक श्लोक में ठीक ही कहा है......         "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्र फ़ला: क्रिया: ।।"   

अर्थात जहाँ स्त्रियों की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं। जहाँ ये नहीं पूजी जाती वहां सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं। 


    प्रिंसीपल राजपाल कौर , 90231-50008 , Email : rajpal16773@gmail.com